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    भाभी और माँ की चुदाई का मजा लिया (भाग तीन)

    मैंने कहा कि माँ आप भी आपका वो दिखाओ ना कैसा होता है? तो माँ ने मेरे लंड हाथ से छोड़ दिया और फिर मैंने माँ से कहा कि आपने भी मेरा देखा है ना.. आप भी दिखा दो ना। फिर माँ ने कहा कि नहीं में नहीं दिखा सकती हूँ और फिर मैंने कहा कि माँ प्लीज आपको मेरी कसम।

    माँ ने कहा कि इसमे कसम देने की क्या ज़रूरत थी? तो मैंने कहा कि माँ क्या आप मेरी कसम तोड़ोगी? तो माँ ने अपनी साड़ी को ऊपर करके मुझे दिखाने लगी.. उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और में नीचे बैठकर बड़े ध्यान से देखने लगा और मैंने कहा कि माँ साड़ी को ऊपर करके पकड़े रहो और दोनों पैर खोलकर दिखाओ ना और माँ ने अपने दोनों पैर खोल दिए और मुझे अपनी चूत दिखाने लगी।

    तो मैंने एकदम से माँ की चूत के दाने को मुहं से कसकर चूसा और माँ चिल्लाई उफफफफ्फ़ आईई क्या कर रहा है.. छीईई.. मुहं हटा वहाँ से वो गंदी चीज़ है बेटा। तो में कहने लगा कि नहीं माँ मुझे अच्छी लगती है और माँ उफफफ्फ़ अहह कर रही थी.. फिर मुझे जोश चड़ने लगा तो में और चूत पर मुहं से झटके लगाने लगा माँ उफफफफफ्फ़ अहह और मेरा सर चूत में दबाने लगी।

    फिर माँ ने कहा कि चल बस हो गया अब छोड़ दे। तो मैंने कहा कि अभी तो इसकी प्यास बुझाऊंगा माँ यह सुनते ही बोली कि तू समझदार है और सब जनता है.. फिर भी मुझे तड़पा रहा है। इतना प्यारा लंड है तेरा.. कितना मज़ा देगा यह आह उफ़फफफफ और फिर शरमाने लगी और वो पूरे जोश में थी.. फिर कहने लगी कि बेटा मेरी साड़ी खोल दो ना।

    मैंने माँ की साड़ी खोली और माँ का ब्लाउज, ब्रा और अब माँ के विशाल बूब्स मेरे मुहं थे और माँ ने सिसकियाँ भरना शुरू कर दिया और दूसरा बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया। तो मैंने माँ का नाड़ा खोल दिया और माँ का पेटिकोट खुल गया और नीचे गिर गया.. माँ पूरी नंगी थी।

    अब माँ क्या लग रही थी.. सर पर बिंदी बूब्स पर लटकता मंगलसूत्र और हाथों में चूड़ियां और पेरों में पायल और बिल्कुल नंगी.. दोस्तों आज मेरा सपना सच होने जा रहा था.. मैंने कहा कि माँ में आपकी चुदाई के पहले चूत में सिंदूर भरूँगा.. तुम्हे पहले अपना बनाऊँगा फिर चोदूंगा.. तो माँ कहने लगी कि तुझे जो करना है कर.. लेकिन मेरी प्यास बुझा दे.. में बहुत बहुत दिनों से भूखी हूँ.. तेरे पापा भी यहाँ पर नहीं रहते है।

    फिर मैंने सिंदूर का लाल तिलक झांटो के ऊपर लगा दिया और माँ की चूत के होंठो पर लिस्टिक लगाई और फिर उसे किस करने लगा माँ उफफफफफ्फ़ कितना अच्छा बेटा है तू.. थोड़ा लंड पर शहद लगा ले.. में भी तेरा लोलीपोप चूसूंगी.. तो माँ और में 69 पोज़िशन में एक दूसरे के लिंग और योनि को चूसने लगे उफफफफ्फ़ हफफफ्फ़ बेटा बहुत मज़ा आ रहा है। दोस्तों आप ये कहानी गुरु मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

    तुम्हारे लंड से शादी करके अच्छा लग रहा है और में माँ के ऊपर ही लेट गया तो मैंने माँ की चूत पर मेरा लंड लगाया। वो एकदम चिल्ला गई.. लेकिन चूत गीली होने के कारण माँ ज्यादा ज़ोर से नहीं चिल्लाई और कहने लगी कि उफफफ्फ़ कितना मोटा है.. मेरी चूत को इसे लेने के लिए पूरा मुहं खोलना पड़ रहा है। फिर मैंने धक्के और तेज़ कर दिए और माँ ने भी चूतड़ को उछालना शुरू कर दिया।

    फिर वो कहने लगी कि उफ़फ्फ़ अह्ह्ह बेटा और तेज़ करो.. माँ को चोद और चोद उउफफफफ्फ़.. बुझा दे इसकी प्यास.. तो में माँ के दोनों पैर अपने हाथ से पकड़कर चोदने लगा और चूमने चाटने लगा। तो माँ कहने लगी कि तू मुझसे कितना प्यार करता है?

    मैंने माँ को अपनी गोद में ले लिया और हम एक दूसरे से चिपक कर चूमने लगे.. माँ उफफफफफ्फ़ आहह बेटा बहुत मज़ा आ रहा और माँ ने कहा कि तू थक गया होगा और माँ मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लंड पर बैठ गयी और उचकने लगी और फिर लंड पर चूतड़ को गोल गोल घुमाने लगी.. माँ उफफफ्फ़ आह बेटा में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और माँ कहने लगी कि में झड़ने वाली हूँ.

    फिर मैंने माँ को गोद में ले लिया और माँ को लेकर खड़ा होकर चोदने लगा। माँ की चूत और चूतड़ को खड़े खड़े उछाल रहा था और माँ मेरे गले में हाथ डालकर किस कर रही थी और मेरे निप्पल चूस रही थी। फिर स्मूच करते ही माँ झड़ गयी और फिर मैंने भी झड़ गया और फिर में और माँ नंगे ही सो गये। फिर माँ और मैंने खाना खाया और हम दोनों पूरे दिन नंगे रहे और हमने 4 बार और चुदाई की और फिर हम सो गये।

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    भाभी और माँ की चुदाई का मजा लिया (भाग दो)

    फिर मैंने उनको नीचे लेटा दिया और लंड को एक ही धक्के के साथ चूत के अंदर डाल दिया तो वो बहुत ज़ोर से चिल्ला पड़ी अहह उईईई माँ मरी.. धीरे करो। तो मैंने कहा कि क्या हुआ? क्या ज्यादा दर्द हो रहा है? तो वो कहने लगी कि हाँ तुम्हारा लंड बड़ा है ना.. तुम एक काम करो थोड़ा मक्खन लगा लो.. तो मैंने अपने लंड पर मक्खन लगाया और लंड को एकदम ज़ोर से धक्का देकर अंदर डाल दिया।

    वो उफफफफ्फ़ अहह माँ मर गई और फिर उसने मेरी कमर में अपने दोनों पैर फसा िए और मुझे गंदे तरीके से चूमने लगी। फिर में नीचे से पूरा दम लगाकर धक्के मारता रहा और फिर वो भी अपने चूतड़ उछाल कर मरवाने लगी और कहने लगी कि अब तुम थक गए होंगे में तुम्हारे ऊपर आती हूँ और फिर वो मेरे ऊपर आकर चूतड़ो को घुमाने लगी और बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया।

    फिर मैंने उसे कुतिया बनाया.. वो कुतिया बनी हुई क्या लग रही थी? पेरों में पायल और हाथों में चूड़ियाँ और बूब्स पर लटकता हुआ मंगलसुत्र.. बस मैंने और तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए और फिर कहने लगी कि में झड़ गयी हूँ और फिर थोड़ी देर के बाद में भी झड़ने लगा तो उन्होंने मेरा सारा वीर्य अंदर ही गिरा दिया और कहने लगी कि तुमने आज मुझे बहुत खुश कर दिया और फिर मेक्सी को नीचे किया और फिर हम किस करने लगे।

    फिर हमने साथ में बैठकर खाना खाया और फिर हम एक हफ्ते तक लगातार ऐसे ही चुदाई करते रहे। फिर कुछ दिनों के बाद मुझे मम्मी ने घर बुला लिया.. तो मेरे जाते वक्त भाभी रोने लगी और में भी रोने लगा। तो मैंने कहा कि में तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा और अब में घर में अकेला क्या करूँगा.

    मुझे आपकी बहुत याद आएगी और कहा कि आपके पास तो आपके पति का लंड है और में किसकी चूत से मजे लूँगा और मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है.. पापा, मम्मी को चोदते है.. में उन्हें देख देख कर भी थक चुका हूँ और माँ के अलावा घर पर कोई औरत नहीं है में क्या करूं?

    कैसे अपने लंड को शांत करूं और मम्मी को नंगी देखकर तो मुझे आपकी और याद आएगी और में उन्हे रोज़ नंगी नहाते हुए देखता हूँ। फिर भाभी बोली कि तुम अपनी माँ को पटा लो और हर रोज़ तुम्हे मज़े आ जाएगे और तुम्हारा लंड भी शांत हो जाएगा।

    तो मैंने कहा कि माँ नहीं मानेगी और वो बोली कि तुम्हारा लंड देखकर तो हर औरत मान जाएगी और वो भी लंड की बहुत भूखी है और साड़ी के नीचे बिल्कुल नंगी रहती है.. वो साली तुम्हारे पापा से चुदने के अलावा और किसी से अभी तक नहीं चुदी है.. लेकिन में तुम्हारी मदद करूँगी और फिर वो मान जाएगी और फिर तुम माँ को बहुत खुश रखना।

    फिर भाभी ने कहा कि तुम बाथरूम से नहाकर बाहर निकलना और अपना तोलिया उसके सामने गिरा देना और उसे अपना लंड दिखा देना। फिर में घर आ गया और मैंने ऐसा ही किया.. नहाते हुए बिल्कुल नंगा हो कर नहाने लगा और जानबूझ कर तोलिया और अंडरवियर बाथरूम में नहीं लेकर आया. दोस्तों आप ये कहानी गुरु मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

    माँ को आवाज़ दी और मुहं पर साबुन लगा लिया और आंख बंद करके हाथ बाहर निकल कर तोलिया लेने लगा और दरवाजा ज्यादा खोल दिया और मेरी माँ तोलिया देते हुए और मेरे लंड को देखती रह गयी और चली गयी।

    मैंने भाभी को फोन पर सब कुछ बताया.. फिर उसने मुझे दूसरा प्लान बताया और वो कहने लगी अपनी चैन में अपना लंड फंसाना पड़ेगा और फिर चिल्लाना पड़ेगा। तो मैंने कहा कि भाभी में माँ के लिए कुछ भी करूंगा और मैंने ऐसा ही किया और हल्का सा पेंट की चैन में लंड फंसाकर चिल्लाया तो माँ मेरी आवाज सुनकर आ गई और बहुत डर गयी।

    फिर मेरे लंड की तरफ देखने लगी और हाथ लगाते हुए डरने लगी और एकदम से लंड पकड़कर चैन पर तेल डाला और लंड पेंट की चैन से निकल गया और मेरा लंड एकदम से माँ के मुहं की तरफ खड़ा हो गया। तो माँ उसके सुपाड़े की खाल उतारकर देखने लगी और कहने लगी कि अंडरवियर क्यों नहीं पहनते हो?

    मैंने कहा कि माँ तुम भी तो नहीं पहनती हो। तो वो कहने लगी कि हमारी बात कुछ और है.. तो मैंने कहा कि क्या बात है? वो कहने लगी कि हमारा इतना मोटा केले जैसा नहीं होता है तो मैंने कहा कि माँ फिर कैसा होता है? माँ ने कहा कि बस थोड़ा छोटा सा छेद होता है।

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    भाभी और माँ की चुदाई का मजा लिया

    हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम रमन है दोस्तों यह स्टोरी मेरी भाभी और मेरी माँ के साथ मेरे गलत सम्बन्ध के ऊपर आधारित है। मेरी माँ और भाभी के बूब्स बहुत मोटे है और गांड दोनों की एक जैसी ही है। मेरी माँ की उम्र 45 साल है और मेरी भाभी की उम्र 29 साल है और में 20 साल का हूँ।

    दोस्तों यह बात तब की है जब में एक बार माँ को नंगी देखकर पागल हो गया था.. माँ बिल्कुल नंगी होकर नहा रही थी और तब से में माँ के जैसे फिगर वाली औरतों में ज़्यादा रूचि लेने लगा और मेरी बहुत तमन्ना थी कि में भी चुदाई करूं.. माँ की नंगी चूत को चाटूं और माँ की गांड भी मारुँ और फिर लगता था कि सब यूँ ही रह जाएगा.. लेकिन फिर में बुआ के यहाँ गया और वहाँ पर मेरी भाभी भी थी.

    भाभी हमेशा साड़ी के अंदर कभी भी पेंटी नहीं पहनती थी और यह बात मैंने भाभी के मुहं से सुनी थी वो एक दन माँ से कह रही थी कि आप भी तो पेंटी नहीं पहनती और फिर मैंने भाभी को फंसाने की सोची और फिर एक दिन मेरी भाभी अपने बच्चे को दूध पिला रही थी और मैंने उसके मोटे मोटे बूब्स देखे और में उनको घूरकर देखने लगा.

    लेकिन भाभी ने मुझे इस तरह उनके बूब्स को देखने पर भी कुछ नहीं कहा और ब्लाउज को थोड़ा नीचे कर लिया। फिर में धीरे धीरे भाभी से बहुत मज़ाक करने लगा और खुलकर बातें करने लगा.. तो वो भी थोड़ा बहुत समझ जाती थी और फिर धीरे धीरे भाभी का भी मेरे साथ मन लग गया और उन्हें भी मेरे से बात करना अब बहुत अच्छा लगता था।

    फिर एक दिन हम बातें कर रहे थे और थोड़ी ही देर के बाद भाभी बोली कि में नहा लेती हूँ.. मुझे बहुत गरमी लगने लगी है। तो मैंने कहा कि हाँ नहा लो.. तो वो बहार बरामदे में दरवाजा बंद करके नहाने लगी। तो मैंने मजाक में कहा कि दरवाजा थोड़ा अच्छे से बंद करना वरना में तुम्हे नहाते हुए देख लूँगा। तो वो कहने लगी कि नहीं तुम अंदर ही रहना।

    फिर वो थोड़ी देर के बाद नहाकर आ गई और बोली कि में बिल्कुल नंगी होकर नहाती हूँ और पेटिकोट भी नहीं पहनती.. क्योंकि वो गीला होकर चिपक जाता है और नहाने में बहुत दिक्कत होती है इसलिए में हमेशा ऐसे ही नहाती हूँ और फिर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और चूमने लगा. तो वो कहने लगी कि चल दूर हट वरना कोई आ जाएगा।

    तो मैंने कहा कि कोई नहीं आएगा.. प्लीज एक बार करने दो ना और मैंने उनके होंठ को अपने होंठो से चूस लिया.. तो वो कह रही थी कि बस करो समझा करो कोई आ जाएगा। फिर मैंने भाभी को छोड़ दिया और उसके अगले दिन वो कपड़े बदल रही थी.. तो मैंने कहा कि आ जाऊं.. तो वो कहने लगी कि सब तुम्हारा ही तो है आ जाओ।

    फिर भाभी बिल्कुल नंगी हो गई और उसने अपने पेटिकोट का नाड़ा खोल दिया तो वो नीचे गिर गया और में भाभी से लिपट गया और मैंने कहा कि में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और उसे चूमने लगा और बूब्स चूसने लगा। तो वो कहने लगी कि उफफफफफ्फ़ आहह रमन आराम से पियो दूध और थोड़ा सा बचा देना बच्चे को भी पिलाना है।

    फिर मैंने एक बूब्स पिया और फिर थोड़ी देर के बाद दूसरे वाले से भी पिया.. फिर मैंने कहा कि में नीचे की जगह भी चूस लूँ.. लेकिन उसने कोई भी जवाब नहीं दिया.. बस सिसकियाँ लेती रही। तो मैंने देर ना करते हुए झट से अपना मुहं उसकी चूत पर लगा दिया और उसको बोला कि में दूध की जगह जूस तो सारा पी सकता हूँ ना।

    वो कहने लगी कि रमन इसमे से जितना जूस पिया जाये पी लो उफफफ्फ़ अहह माँ मर गयी उफफफफफ्फ़ और वो मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी और फिर कहने लगी और ज़ोर से चूस और कुछ देर के बाद कहने लगी कि मुझे अपना वो दिखाओ। दोस्तों आप ये कहानी गुरु मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

    मैंने कहा कि आपका ही है निकाल लो ना.. तो उसने मेरी पेंट को खोलकर लंड को बाहर निकाला और कहने लगी कि यह तो बहुत लम्बा है और मेरी उम्मीद से कहीं बड़ा है और मैंने इतना बड़ा लंड कभी भी नहीं देखा और यह कहकर लंड को मुहं में लिया और चूसने लगी।

    में कहने लगा कि हाँ भाभी और लो पूरा डालो मुहं में.. हाँ और आगे पीछे करो.. भाभी हाँ बहुत अच्छे.. हाँ ऐसे ही करो। तो बोली कि हाँ रमन में कर रही हूँ और फिर थोड़ी देर बाद कहने लगी कि अब रहा नहीं जा रहा.. तो वो कहने लगी कि एक मिनट रूको.. में मेक्सी पहन लूँ फिर नीचे से नंगी रहूंगी तो तुम आराम से कर लेना और कपड़े पहने में भी ज्यादा देर नहीं लगेगी और फिर उन्होंने मेक्सी पहनी और उन्होंने अपनी मेक्सी को चूत से ऊपर अपने बूब्स तक उठा लिया।

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    करते रहो प्यार और मजे लेते रहो यार

    हेलो दोस्तों, मेरा नाम महेश है, मेरी उम्र 38 साल है और मैं अपनी बीवी के साथ मुज्ज़फर नगर में रहता हूं, मैं फिर से आपके लिए एक मस्त कहानी लेकर पेश हुआ हूं. जरा गौर फरमाइएगा. दोस्तों यह कहानी मेरी और मेरी फ्रेंड शिल्पा के बीच की है जिसमें मैंने उसे चोद डाला. दोस्तों मैंने आपको पहले भी अपने बारे में बताया था कि मैं अपनी बीवी के साथ मुज्ज़फर नगर में रहता हूं और मेरी सेक्स की प्यास मेरी बीवी से बुज नहीं पाती इसलिए मैं अपने दोस्त साथ मिल कर कभी किसी लड़की को घर ले आ कर चोदते तो कभी बाहर कॉल गर्ल के साथ सेक्स करते, मुझे इस में बहुत मजा आता था, मेरा एक दोस्त चैतन्य जो की फॉरेन में सेल्समैन की ड्यूटी करता था, वह एक हफ्ते में अक्सर तीन चार दिन बाहर ही रहता था इसलिए मैं उसे बहुत कम मिल पाता था.

    तो मेरी जिंदगी में शिल्पा मेरे उसी दोस्त की वजह से आई थी जिसको मैंने चोद डाला जो कि आपको मेरी आगे की कहानी में पता चलेगा. शिल्पा मेरे दोस्त को बस में मिली थी. जो उसके साथ वाली सीट पर बैठी थी, शिल्पा दिखने में बहुत सुंदर थी और पतली दुबली थोड़े बड़े बड़े बूब वाली थी. लंबा सफर था और दोनों ने एक ही जगह जाना था इसलिए वह एक दूसरे के साथ बातें करते हुए आए. और अंधेरा होने की वजह से मेरे दोस्त ने उसे सही सलामत उस के घर तक पहुंचा दिया और फिर वह अपने घर आ गया.

    अगले दिन उसने मुझे बताया कि बस में मुझे एक लड़की मिली है जीसका नाम शिल्पा है और वो तेरी गर्लफ्रेंड जैसी लगती है.

    मैं उसकी यह बात सुनी तो उसको मिलने की इच्छा होने लगी और मैंने अपने दोस्त को शिल्पा से मिलवाने को कहा और जिद करने लग गया.चैतन्य ने उसका फोन नंबर भी ले लिया था इसलिए अब उसने शिल्पा को फोन मिलाया और उस से मिलने की बात की, शिल्पा ने अगले दिन शाम को मिलने का प्लान बनाया. उस रात मुझे एक पल भी नींद नहीं आई और मेरा सारा दिमाग उस के ख्यालों में खो रहा था. सुबह होते ही मैं और चैतन्य उसे मिलने ज्यूस केफे चले गए और शिल्पा के आने का इंतजार करने लगे.

    शिल्पा जैसी ही हमारे पास आई और हेलो की, तो मैंने हेंडशेक करते हुए उसे भी जवाब दिया और उसे देखता ही रह गया, क्योंकि वह इतनी सुंदर थी और उस की शक्ल बिल्कुल मेरी एक्स गर्लफ्रेंड से मिलती थी. हम दोनों बातें करने लगे और मस्ती मजाक करते हुए एक दूसरे के नंबर ले लिए और फिर हम वहां से निकल पड़े.

    मैंने उसी दिन घर आकर उसे फोन किया और फोन पर बातें मारने के बाद मूवी देखने का प्लान बनाया और उसने भी मेरे साथ चलने के लिए हां कह दिया. हमने मूवी देखी और बर्गर खाया. हम एक दूसरे के साथ बातें मार रहे थे. फिर मैंने उसे एक दिन उसे घर पर बुलाया.

    शिल्पा ने मुझे हां कहा और अगले दिन मेरे घर आ गई. शिल्पा ने घर के बाहर खड़े होकर बेल बजाई तो मैं दरवाजा खोलने गया. और दरवाजा खोला तो मैं शिल्पा को देखता ही रह गया.

    शिल्पा ने जींस और उपर सेक्सी टॉप डाली हुई थी, कानों में बड़े बड़े झुमके, पैरों में हाय पेंसिल हिल, होठों पर पिंक कलर की लिपस्टिक. ये सब देख कर मैं हैरान रह गया और मेरी आंखें मानो फटी की फटी रह गई. अब मैंने उसे अंदर आने को कहा और वह अंदर आकर सोफे पर बैठ गई. मैंने उसे आने के बारे में पूछा कि कोई तकलीफ तो नहीं हुई? तो वह बोली नहीं आराम से मिल गया आपका एड्रेस.

    अब मैंने उसे चाय कॉफी के लिए पूछा तो उसने पीने के लिए मना कर दिया. मैंने उसे अब बीयर पीने के लिए कहा तो उसने हां कर दिया. अब मैं रुम में जाकर बियर और स्नेक्स की अरेंजमेंट करने लग गया. ५ मिनट बाद मेने शिल्पा से पास जा कर उस को अंदर आने को कहा शिल्पा अंदर आई और बेड पर एक तरफ हो कर बैठ गई. मैंने बीयर खोल कर ड्रिंक गिलास में डाल दिया और ड्रिंक ऑफर की.

    ड्रिंक ऑफर करते ही उसने ग्लास अपने हाथ में ले लिया और मैंने शेक करते हुए उसे पीने के लिए इशारा किया पर तभी उसने मुझे कहा महेश मेरी जींस टाइट है, ठीक से बैठा तक नहीं जा रहा.

    मैंने उसे जींस उतारने को कहा पर उसने मना कर दिया, फिर मैंने थोड़ी जबरदस्ती के साथ उसकी जींस उतरवा दी और वह पिंक पेंटि में मेरे आगे बैठी थी, ड्रिंक की चुस्कियां लेने लगी. मैं उसकी चिकनी गोरी गोरी पतली टांगों को निहारता रहा और अपनि ड्रिंक भी पि गया. हम बातें करते करते एक बोतल पी गए और मैं अब दूसरी बोतल खोलने लगा तो मुझे शिल्पा ने रोक दिया, पर मैंने उसे कहा थोड़ा थोड़ा और हो जाए, तो वह मान गई.

    अब हमने ऐसे ही दूसरी बोतल भी खत्म कर दी और सब साइड में रख कर शिल्पा के पास बैठ कर उस के जिस्म पर हाथ फेरने लगा.

    शिल्पा ने कहा – यह क्या कर रहे हो?

    मैंने कहा – मौके का फायदा उठा रहा हूं

    यह कहते ी मैने उसके जिस्म पर हाथ फेरने लगा और धीरे धीरे कभी उसके मुंह पर उंगलियों से हाथ फेरता कभी गर्दन पर हाथ फेरता. फिर वह अपनी आंखें बंद कर के मेरी बाहों में गिर गई, मैं उस के टी शर्ट के ऊपर से उस के बूब्स को दबाने लगा.

    उस के बूब्स एकदम खड़े हुए थे और सॉफ्ट थे, मैं उसके बूब दबाता रहा और वह आंखें बंद कर के मजे लेती रही, मैंने धीरे से अपना हात टी शर्ट के अंदर डाल कर शिल्पा के बूब को उसकी पिंक ब्रा के ऊपर से दबाने लग गया, और उस के निपल को भी ऊपर से ही मसलने लग गया, जिससे शिल्पा लंबी लंबी सिसकियां भरने लगी थी.

    अब मैंने उसकी टी शर्ट को हाथ में लिया और उतारने लगा तभी शिल्पा बोली यह क्या कर रहे हो? मुझे डर लगता है.

    मेने कहा – इस में डरने वाली क्या बात है? कुछ नहीं होगा, मैं हूं तुम्हारे साथ.

    शिल्पा ने कहा – नहीं, इसे प्लीज मत उतारो.

    मैंने कहा – पागल कुछ नहीं होता. मैंने जबरदस्ती उसकी टी शर्ट उतार दी.

    उस को बेड पर लेटा कर बाहर का मेन दरवाजा लॉक कर आया और उस के सामने अपने कपड़े उतार कर सिर्फ जॉकी में उस के पास आ गया. मैं उस के चिकने गोरे गोरे बदन को निहारता रहा और अब उस के ऊपर थोड़ा बैठ कर उस को अपनी जीभ से चाटने लग गया.

    मैं अब उस के ऊपर आकर लेट गया और अपनी टांगो को उसकी टांगों में फंसा कर लोक कर दिया, और अपने उबलते हुए होठ को उसके गुलाबी नर्म नर्म होठों पर रख कर चूसने लग गया.

    शिल्पा मदहोशी की हालत में आवाज करने लगी और मुझे कस कर पकड़ लिया मैंने भी उसे कुस कर जकड लिया और अब अपना हाथ उसकी चूत के ऊपर ले जा कर उस की गरम गरम चूत को छेड़ने लग गया, मेरे छेड़ने से उसके अंदर मस्ती छा रही थी. फिर मैंने उस की पैंटी में हाथ डाल कर उसकी क्लीन शेव सॉफ्ट चूत पर अपनी उंगलियां रगड़ना शुरू कर दिया.

    अब मैंने धीरे से रगड़ते हुए उस की पैंटी को उतारने लगा.

    तभी शिल्पा बोली – यह क्या कर रहे हो? प्लीज़ यह मत उतारो.

    मैंने कहा – इस में डरने की क्या बात है, हम कुछ नहीं करेंगे, बस एक दूसरे को बाहों में लेकर प्यार करेंगे.

    शिल्पा ने कहा – नहीं, प्लीज मत उतारो.

    अब फिर से थोड़ी जबरदस्ती करी और उसकी पैंटी उतार दी, अब में उस के ऊपर आ कर लेट गया उस की ब्रा भी खोल कर रख दी.

    अब मेरे लंड से उसके जिस्म की गर्मी देख कर बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मेरा लंड  तन कर खड़ा हो गया था, और अब मैंने अपना लंड अपनी जोकि से निकाल कर उस की टांगों के बीच में रख दिया.

    मैंने शिल्पा को अपनी बाहों में कस लिया, जिस से वह मेरे साथ चिपक गई. अब लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और शिल्पा की चिकनी चूत के आस पास लग रहा था. अब मैंने अपने हाथ नीचे किया और शिल्पा की चिकनी टांगो को रगड़ते हुए उस की चिकनी चूत पर पहुंच गया और अब मस्ती में उस की चिकनी चूत को सहला रहा था और उस की चूत के दाने को भी रगड़ रहा था.

    मैंने अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और शिल्पा की चूत के दाने पर रगड़ने लग गया, अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत में डालने ही वाला था, इतने में शिल्पा ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और फिर से अपनी चूत के दाने पर रगड़ने लगी कुछ ही देर में उसकी चूत से चिकना पानी निकलने लग गया.

    शिल्पा को यह सब करना बहुत अच्छा लग रहा था. शिल्पा मेरे लंड को लगा तार अपनी चूत पर रगड़ रही थी, अब मुझे कंट्रोल नहीं हो रहा था. इसलिए मैंने उस का हाथ पकड़ लिया और बोला शिल्पा अब कुछ करें क्या यार मेरा बहुत मन कर रहा है?

    शिल्पा कुछ भी नहीं बोली.

    उसके मुंह से सिर्फ मस्ती से भरी सिसकियां आह्ह औऊ यस्स अह्ह्ह अय्य्य ई औउ ओऊ पज्ज ओई ईह्ह मम्म ई औउस यस निकल रही थी और वह बोली महेश प्लीज तुम ऐसे ही करते रहो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

    मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था, वह शिल्पा की चुत में घुसने को तैयार था, शिल्पा की चूत में से उसकी चूत का पानी निकल रहा था, अब मैंने अपना लंड अपने हाथ में पकड़ा और शिल्पा की चूत में अपना लंड डालने लगा.

    तभी शिल्पा ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली प्लीज महेशू कंडोम यूज कर लो, मुझे बहुत डर लगता है प्लीज.

    मैं उठा और कॉन्डोम निकाला और अपने लंड पर कंडोम लगाने लगा, यह सब शिल्पा बड़े ध्यान से देख रही थी. कंडोम लगा कर मैं फिर से शिल्पा के ऊपर आ गया और उस का नंगा जिसम मेरे जिस्म के नीचे दब गया.

    अब मैंने अपने तड़पते हुए होंठ शिल्पा के गुलाबी और नरम नरम होंठों पर रख दिए और उस को किस करने लगा, अब शिल्पा ने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया, मेरा लंड शिल्पा के पैरों के बीच में फंसा हुआ था.

    मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुह पर लगाया और एक जोर दार धक्का मार दिया मेरा लंड शिल्पा की चूत में उतर चुका था, शिल्पा के मुंह से आह औऊ ईई औऔउ इमा माआअ निकली और उस ने अपनी आंखें बंद कर दी.

    मैंने थोड़ा सा और जोर लगा कर धक्का मारा तो मेरा आधा लंड शिल्पा की चूत  में चला गया और शिल्पा के मुंह से तेज तेज और जोर जोर से सिसकियां निकलनी शुरू हो गई, अब मेने और एक ज़टका लगाया तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया. अब मैं उस के रसीले होंठों को लगातार चूसता जा रहा था, जिस से वह अपना दर्द भूल जाए.

    मेरा पूरा लंड उस की चूत के अंदर तक गया हुआ था, शिल्पा और मैं एक दूसरे से चिपके हुए थे. शिल्पा का नंगा जिसम मेरी जिस्म के नीचे दबा हुआ था. मैं उस को लगा तार किस कर रहा था. अब तो शिल्पा भी मेरा साथ देते हुए मुझे किस कर रही थी.

    कुछ देर तक हमारा चुम्मा चाटी का प्रोग्राम ऐसे ही चलता रहा, फिर मैंने अपना लंड  शिल्पा की चूत में से थोड़ा सा निकाला और धीरे से फिर से उसकी चूत में डाल दिया अब मैं धीरे धीरे उस की चूत में लंड को अंदर बाहर कर रहा था.

    कुछ ही देर में शिल्पा ने अपनी टांगे ऊपर कर ली और मेरे कमर पर लपेट ली, मुझे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था. अब मेरा पूरा लंड शिल्पा की चूत में जा रहा था.

    मैं और शिल्पा बियर के नशे में सेक्स कर रहे थे, इस वजह से सेक्स करने का मजा और भी ज्यादा आ रहा था. शिल्पा भी सेक्स के नशे में चूर हो रही थी और बुरी मस्त हो कर अपनी चूत की चुदाई करवा रही थी.

    अब मैंने बेड पर अपने हाथ रख लिए और थोड़ा सा झुक कर जम कर अपना लंड  शिल्पा की चूत में जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा, शिल्पा की चूत में से चिकना पानी निकल रहा था, इसलिए मेरा लंड बड़ी आसानी से उसकी चूत में जा रहा था.

    मैं शिल्पा के ऊपर कूद कूद कर उसकी चुदाई कर रहा था, अब मैं रुक गया और शिल्पा से पूछा – शिल्पा मेरी जान कैसा लग रहा है?

    शिल्पा ने कहा – महेश, प्लीज तुम रुको मत जोर जोर से करते रहो.

    उसकी यह बात सुनते ही मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और शिल्पा के दोनों चूतड़ अपने हाथ में पकड़ कर छोटे छोटे पर जबरदस्त धक्के मारने लग गया.

    शिल्पा के मुंह से मस्ती भरी आवाजे निकल रही थी, आह्ह औऊ ओह्ह हां हौऔ इओह हां एयस हाहाह उस अग्ग अम्म ओग्ग हहह यस स्गाग ओह्ह औउअ यस्स मेरे महेश और जोर से करो.

    अब मैं शिल्पा के ऊपर लेट गया और शिल्पा को अपनी बाहों में भर लिया और अपने तड़पते हुए होठ शिल्पा के गुलाबी और नरम नरम होंठों पर रख दिए और उस के गुलाबी होठों का रस पीने लगा, शिल्पा भी अब अपने होंठ मस्ती में चुसवा चुसवा  कर अपनी चुदाई के मजे ले रही थी.

    करीब ५ मिनट तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को चुसते रहे और चुदाई का मजा लेते रहे.

    तभी अचानक शिल्पा ने मुझे अपने बाहों में जकड़ लिया और अपने होंठ मेरे होंठों से निकालते हुए जोर जोर से सिसकियां भरने लगी और उस का सारा शरीर ढीला हो गया. मैं समझ गया कि शिल्पा का काम हो चुका है, अब मेरा भी लंड जवाब देने वाला था इसलिए मैंने स्पीड और तेज कर दी और पागलों की तरह शिल्पा की चुदाई करने लगा.

    शिल्पा का शरीर पूरा शरीर मेरे धक्कों से हील रहा था और शिल्पा अपनी आंखें बंद कर के मेरे लंड का पानी निकलने का इंतजार कर रही थी, करीब २ मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मेरे लंड ने जवाब दे दिया और सारा पानी कंडोम के अंदर ही निकाल दिया.

    अब कुछ देर में शिल्पा के नंगे जिस्म के ऊपर ही लेटा रहा और अपनी तेज चलती सांसो को कंट्रोल करने लग गया, वो अपनी दोनों आंखें बंद कर के मेरे नीचे लेटी रही. करीब ५ मिनट बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया.

    फिर उठ कर मैंने अपने लंड से कंडोम उतारा और डस्टबिन में फेंक दिया और फिर एक कपड़े से अपना लंड साफ कर के मैं शिल्पा के पास लेट गया, शिल्पा की आंखें अभी भी बंद थी और कमरे की धीमी रोशनी में शिल्पा का गोरा और नंगा बदन शीशे की तरह चमक रहा था.

    कुछ देर बाद शिल्पा ने मेरी तरफ करवट ली और अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख ली और मेरी आंखों में अपनी आंखें डाल कर बोली – बस हो गई महेश तुम्हारे मन की?

    मैंने कहा हां मेरी जान मुझे आज बहुत मजा आया.

    यह कह कर मैंने शिल्पा को अपनी बाहों में ले लिया और ऐसे ही कुछ देर हम ऐसे ही एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे और आपस में बातें करते रहे.

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    तांत्रिक के चंगुल में फसकर चुद गई (भाग दो)

    फ़िर उन्होंने कुछ मन्त्र बोलते हुए मेरी कुर्ती उतार दी। दो मिनट तो उन्होंने मेरी ब्रा से ढकी छाती पर हाथ फिराया और फिर ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे उठे हुये स्तन ब्रा की क़ैद से आज़ाद हो गये। शब्बीर शाह ने ब्रा को मेरे जिस्म से अलग कर दिया।

    उन्होंने फिर से मुझे अपन आगोश में लिया तो मेरी नंगी छाती गुदगुदा गई। उन्होंने मेरी चूचियाँ ज़ोर-ज़ोर से मसलना और दबाना शुरू कर दिया। मैं खुशी से बेहाल थी। उन्होंने मुझे लिटा कर अपना मुंह मेरी चूंची पर रख दिया। वे उसे चूस और चाट रहे थे और मेरी दूसरी चूंची को अपने हाथ से सहला रहे थे।

    मुझे जिन्नात उतारने का यह तरीका बहुत मज़ेदार लग रहा था। जब उन्होंने देखा कि मुझ पर मस्ती छा रही है तो खड़े हो कर वे खुद भी मादरजात नंगे हो गए।

    मैं पहली बार एक जवांमर्द का लंड देख रही थी। उनका लंड काफी लम्बा, मोटा और कड़ा दिख रहा था। मैंने सुन रखा था कि इस तरह का लण्ड लड़कियों को बहुत मज़ा देता है। मैं पनिया चुकी थी और मेरी मस्ताई हुई चूत उनके लंड का इंतजार कर रही थी। लेकिन शब्बीर शाह ने अपना टन्नाया हुआ लंड मेरे दोनो स्तनों के बीच दबा कर पेलना शुरू कर दिया।

    उनका लम्बा लोड़ा मेरे पुष्ट स्तनों के बीच से आगे निकल कर मेरे होंठों पर दस्तक देने लगा। जब वो मेरे मुँह से छूता तो मैं काम-विभोर हो कर उसका सुपाडा चूस लेती। कुछ देर चूंची-चोदन और मुख-चोदन करने के बाद वो नीचे खिसके और उन्होंने मेरी योनि को चूमना और चाटना शुरू कर दिया।

    वो मेरे भगोष्ठों के बाहरी मांसल भाग को भी चूस रहे थे। मैं उनके जिह्वा-चोदन से पूरी तरह मस्ता गई थी और मुझे तीव्र चुद-चुदी लग चुकी थी। अनुभवी शब्बीर शाह ने मेरी अवस्था को भांप लिया। उन्होंने मेरी चूत को अपने थूक से तर कर दिया और मेरी जांघें फैला कर उनके बीच बैठ गए।

    उनका बलिष्ठ लण्ड भी बिल्कुल ताड़ के पेड़ की तरह ऊपर उठ चोदने के लिए तत्पर हो चुका था। उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत से सटा दिया। मेरी मचलती हुई चूत लण्ड का स्वागत करने के लिए आतुर थी पर जैसे ही उन्होने एक ज़ोरदार धक्का मारा, मैं सील-भंग के दर्द से सिसक उठी। सील-भंग से मेरी हालत खस्ता देख कर शब्बीर शाह ने बड़ी नरमी से प्यार कर-कर के मुझे सम्भाला।

    जब मेरा दर्द कम हुआ तो शब्बीर शाह ने धीरे-धीरे धकियाते हुए अपना समूचा लण्ड मेी बेहद सँकुचित चूत के अन्दर घुसा दिया। फिर उन्होंने मुझे हलके-हलके धक्कों से चोदना शुरू कर दिया। ज़ल्द ही मुझे चूत में दर्द का एहसास कम और चुदाई का नशा कहीं ज़्यादा महसूस होना प्रारम्भ हो गया। दोस्तों आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

    मैं नीचे से अपनी चूत उछाल-उछाल कर उनके लण्ड को गपागप निगलने लगी। मेरी काम-चेष्टा से शब्बीर शाह जोश में आ गए और उन्होंने मुझे पूरी ताक़त से पेलना शुरू कर दिया। वे फचाफच्च धक्के मार रहे थे और मैं जन्मों से प्यासी मछली की तरह तड़पती हुई उनसे चुदवा रही थी। वे तन्मयता से एक पगलाये सांड की तरह अपना लण्ड धकेल-धकेल मेरी नव्-उद्घाटित चूत को चकनाचूर करने में लगे थे और मेरी कसी हुई चूत उनके धुरंधर लण्ड को चाव से ग्रहण कर रही थी।

    आश्चर्य था कि आधे घंटे बाद भी न तो हम दोनों का मन भर रहा था और न ही भोग-वासना में डूबे हमारे शरीर थक रहे थे। … चुदाई के चरम शिखर पर पहुँचने पर उनके लंड ने पिचकारी की तरह मेरी चूत में पानी की बरसात शुरू कर दी। गर्म वीर्य की बरसात से मेरी चूत गुदगुदा कर निहाल और निढाल हो गई। … उस दिन उन्होंने तीन बार मेरे जिन्नात उतारे …. इस दौरान उन्होंने मुझे वह आनन्द दिया कि मेरा रोम-रोम प्रफ़ुल्लित हो गया।

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    तांत्रिक के चंगुल में फसकर चुद गई

    मई सुधा राठी आसीन द्वारा भेजी गई कहानी को उसकी जुबानी आपके सामने रखती हु. मेरा नाम आसीन है। मेरे वालिद के एक दुर्घटना में मारे जाने पर मेरी मां को एक लाख का क्लेम मिला। साथ ही उन्हें वह नौकरी भी मिल गई जिस पर वालिद साहब काम कर रहे थे। हमारी माली हालत ठीक बनी रही। मेरी मां ने समय आने पर एक सम्पन्न परिवार के ऐसे लड़के से मेरा निकाह कर दिया जो एक फैक्ट्री में मैनेजर था। उसकी तनख्वाह अच्छी खासी थी।

    मैं ब्याह कर आयी तो मेरी काफी कद्र हुई। कद्र की वजह मेरा रूप और सौन्दर्य था। अच्छी कद-काठी, भरा-पूरा बदन, गोरा रंग, मखमली गाल, कटीली आंखें। मैं दिवंगत फिल्म अदाकारा सुरैय्या की तरह दिखती थी। इसलिए मेरी सखियां मुझे सुरैय्या कह कर पुकारती थी। मेरा शौहर सलीम मुझसे जरा हल्का पड़ता था – दुबला-पतला शरीर, झेंपू स्वभाव, देखने में कोई खास खूबसूरत नहीं।

    सुहागरात को वह मेरे पास जरा िझते-झिझकते आया। मैंने उसे खुश करने के लिए पत्नी-धर्म का निर्वाह किया। … जब वह एक मिनट में ही मेरे ऊपर से उतर गया तो मेरे लिए तो वही बात हुई कि ओस चाटने से कहीं प्यास बुझती है? सलीम खुद शर्मिंदा था।

    उसने मेरी खुशामद करते हुए कहा, ‘‘बेगम, मैं दवा कर रहा हूं … जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा … मैं अभी निकाह करने को तैयार नही था। चालीस दिन का कोर्स हकीम जी ने बताया था। अभी दस दिन का ही कोर्स हो पाया था कि घर वालों ने ब्याह कर दिया। हकीम जी ने बताया है कि चालीस दिन के कोर्स के बाद मैं अपनी खोई हुई मरदाना ताक़त पूरी तरह से वापस पा लूंगा।’’

    सलीम ने बताया कि गलत आदतों का शिकार होने की वजह से वह काफी हद तक नपुंसकता का शिकार हो गया था। इलाज करने वाले किसी हकीम ने उसके दिल में यह मनोवैज्ञानिक डर बिठा दिया था कि वह अभी औरत के लायक नही है। सलीम मुझे कुछ न बताता तो मैं नोटिस भी न लेती।

    मैं जानती थी कि पहली बार मदों के साथ ऐसा हो जाता है। यह मेरा पहला पुरूष-संसर्ग नही था। शादी से पूर्व भी मैं यौनसुख भोग चुकी थी। दरअसल कुंवारेपन में अच्छा खानदान व घर में कुछ काम न होने की वजह से मेरा दिन हमउम्र लडकियों से बातें करते बीतता था।

    उनकी कामकरीड़ा और यौन-आनंद की बातें मेरे जेहन में हर दम गूंजती रहती थी। साथ ही कुछ मासिक गडबड़ी तथा वालिद के इन्तकाल के कारण मैं दिमागी तौर पर अपसेट हो गई और मुझे दौरे पड़ने लगे।

    पास-पड़ोस की जाहिल औरतें कहने लगी कि मेरी खूबसूरती की वजह से मुझे पर जिन्नात का साया पड़ गया है। इधर-उधर के इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ तो एक तांत्रिक शब्बीर शाह को बुलाया गया। वे दस दिन तक मेरे घर रहे। झाड़-फूंक के बाद उन्होंने बताया कि मुझ पर पीपल वाले जिन्नात का साया है।

    जिन्नात काफी सख्त है और उनका असर धीरे-धीरे उतरेगा। वे न जाने क्या-क्या करते रहे। लोहबान, धूपबत्ती, फूल-माला, सिन्दूर, खोपड़ी रख कर अजीब-सा डरावना वातावरण पैदा करते। कभी चिमटा मार कर तो कभी मेरे सिर पर झाडू फिरा कर सुबह-शाम जिन्नात उतारते। दोस्तों आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

    इस तरह दो दिन गुजर गए। तीसरे दिन वे मुझे अकेले उस कमरे में ले गये जिस में उन्हें ठहराया गया था। उन्होंने कमरा बंद कर दिया। कुछ देर झाड़-फूंक करने के बाद वह मुझसे रौबदार आवाज में बोले, ‘‘नाड़ा खोलो।’’ वहां खुटियों पर उन्होंने कुछ नाड़े बांध रखे थे जो मैं नही देख पायी थी। लिहाजा मै अनजाने में झट से अपनी सलवार का नाड़ा खोल बैठी। वो समझे कि मैं उन्हें निमंत्रण दे रही हूं।

    उन्होंने आव देखा न ताव और मुझे जकड़ कर अपने वर्ज़िशी बदन के साथ ज़ोर से लिपटाया और भींच लिया। जिन्नात उतारने वाले मंत्रों के बीच वे कोई पन्द्रह मिनट तक मुझे चूमते, चाटते और चूसते रहे। मुझ पर एक नशा सा छाने लगा। उनके हाथ मेरे जिस्म पर यहां-वहां फिसल रहे थे और मेरी मस्ती को और बढ़ा रहे थे।

    podridito

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    हरदीप की माँ 

    दोस्तों ये मेरे पक्के दोस्त हरदीप की माँ जान्हवी कौर के साथ में हुयी घटना है. आप सभी से निवेन है की इस कहानी को पूरी पढ़ने के पश्चात ही आप सभी जान्हवी कौर के स्तनों, चूत और कूल्हों की कल्पना करके पानी निकालें | हरदीप मेरे गाँव का पुराना जिगरी दोस्त है, मैं काफी समय पहले शहर में शिफ्ट हो गया था |

    लेकिन अचानक मुझे किसी कारणवश गाँव में जाना पड़ा, गाँव में मेरे बड़े बड़े खेत हैं, दरअसल उन्ही खेतों के काम के लिए मुझे गाँव जाना पड़ा | जब मैं गाँव पंहुचा तो देखा एक पतला सा काला कलूटा लड़का, उम्र लगभग मेरे बराबर २६ साल, गाल अंदर धसे हुए, आँखों के नीचे काले गड्ढे पड़े हुए, दिन दोपहर की गर्मी में एक पेड़ के निचे छाँव में बैठकर चिलम पी रहा था, पहले मैंने उसे पहचान नहीं, मैंने सोचा कोई मजदुर होगा, लेकिन उसने मुझे तुरंत पहचान लिया |

    हरदीप- ओर अंकित भाई कैसा है? बहुत दिनों बाद आया गाँव.

    मैं- यार मैंने तुझे पहचाना नहीं ?

    हरदीप- तू भी भेनचोद, दोस्त को भूल गया, भोसडी के हरदीप हूँ, याद है बचपन में हम सरला बाइ के दूध देखकर अपना हिलाया करते थे ?

    मैं- ओह भोसड़ीचोद हरदीप, हरामी कैसा है तू? और ये क्या हालात बना दी अपनी तूने, चुतीया लग रहा है, भिखारी सा हो गया तू |

    हरदीप- तू मजाक बना ले भेन के लोडे, सुल्फा पी पी कर हालत ख़राब हो गयी यार सही में, पैसों का जुगाड़ नही हो पाता, माँ के गहने भी बेच दिए मैंने बहनचोद |

    मैं- ये गलत बात है यार, जान्हवी आंटी कैसी है ? तबियत ठीक है ?

    हरदीप- हाँ यार ठीक ही है, बाप तो शहर चला गया था अभी तक लौट कर नहीं आया, वहां दूसरी शादी कर दी चोद्दे ने, माँ को अकेला छोड़ दिया, चल भाई घर चल, हमारे घर रहियो |

    मैं- हाँ बिलकुल भाई चल, रात में बियर पिएंगे |

    (बियर का नाम सुनकर हरदीप के मुह में पानी आ गया, हम फिर हरदीप के घर जाते हैं, उस समय घर पर कोई नहीं था)

    मैं- आंटी कहाँ है बे ?

    हरदीप- खेत में गयी होगी झाड़ काटने. आती होगी अभी, तू आराम कर तब तक मैं बाजार जाता हूँ कुछ समान ले आऊं. और सुन लोडे, मुझे देर हो जायेगी क्योंकि बाजार काफी दूर है यहाँ से रात तक पहुँचूँगा, माँ आये तो बता देना |

    मैं- ठीक है भाई, जल्दी आईयो |

    (हरदीप फिर अपनी एटलस साइकिल में चला जाता है, कुछ देर बाद एक सांवली, मोटी सी सुडौल औरत, उम्र लगभग 50 साल, लाल साड़ी और काला ब्लाउज पहने, अपने सर पर लकड़ियाँ लादे हुए, बड़ी बड़ी गांड मटकाते हुए, पसीने से तर बदर, घर की और आती है, ये सेक्सी मोटी बड़ी उम्र की औरत और कोई नहीं बल्कि मेरे पक्के दोस्त हरदीप की कामुक मोटी ताज़ी माँ जान्हवी कौर है..

    आंटी ने मस्ती में खूब चुदवाया जिसे ब्लाउज का गला काफी खुला है, जिसमे से उसके स्तनों की काली घाटी का नज़ारा साफ़ साफ़ दख रहा है, यह दृश्य देखकर मेरा लण्ड जोर जोर से झटके मारने लगा, जान्हवी के माथे से पसीने की बूंदे उसके गालों से होते हुए, फिर गले से और अंततः स्तनों की घाटी में समा रही थी, बहुत ही मनमोहक और लण्डमोहक दृश्य था, अचानक जान्हवी की नज़र मुझ पर पड़ी)

    जान्हवी- अरे अंकित बेटा, तू कब आया, और हरदीप कहाँ है ?

    (मैंने श्रद्धा भाव से जान्हवी के पैर छुए और प्रणाम किया, जान्हवी ने मुझे आशीर्वाद दिया, और मुझे गले से लगा लिया जिसके फलस्वरूप उसका पसीना मुझे भी लग गया और जब मैं जान्हवी के गले लगा तो उसके पसीने की भीनी भीनी खुशबू कम गंध ने मुझे पागल कर दिया, उसके कड़क निप्पल उसके ब्लाउज से दिख रहे थे क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहना हुआ था, गाँव में अक्सर कोई भी औरत ब्रा नहीं पहनती थी)

    जान्हवी- कैसा है बेटा तू ? तू तो बड़ा हो गया रे, और तंदरुस्त भी, एक हरदीप को देख, गलत संगत में पड़ गया है, उसका शरीर कमजोर हो गया सुल्फा पी कर |

    मैं- हाँ आंटी, मैं जब आया वो सुल्फा पी रहा था, मैंने मना भी किया लेकिन नहीं माना |

    जान्हवी- तू तो हीरो हो गया शहर में रहकर, मुझे भी ले चल अपने साथ |

    (आंटी मजाक के मूड में थी, और मुझ से शरारत कर रही थी, मैंने भी मौके का फायदा उठाया)

    मैं- चल ले आंटी मैंने कहाँ मना किया, लेकिन मुझ से शादी करके चलियो |

    जान्हवी- चल हट बदमाश, शहर जाकर बदमाश हो गया तू |

    मैं- मैं तो मजाक कर रहा हूँ आंटी, गुस्सा न हो |

    जान्हवी- मैं तेरे लिए खाना बना दूँ, तू थक भी गया होगा, आराम कर लेना |

    मैं- हाँ बना दे खाना, फिर खाने के बाद आराम कर लूंगा, तू सुना आंटी कैसी है तू ? चाचा आता है घर ?

    जान्हवी(उदास होकर)- अरे वो कहाँ आता है कलमुहा, दूसरी शादी करके बैठा है सहर में, मेरी जिंदगी नरक बना दी उस आदमी ने तो |

    मैं- कोई बात नहीं आंटी, कभी कभी जीवन में ऐसी विकट परिस्थिति आती है, हमें बड़ी होश्यारी और सूझबूझ से उसका सामना करना चाहिये, मैं हूँ आंटी तेरे साथ तू चिंता मत कर |

    जान्हवी- वो तो मुझे पता है तू है मेरे साथ लेकिन जो तेरे चाचा मुझे दे सकते हैं वो तू नहीं दे सकता |

    मैं- मतलब ?

    जान्हवी- तू रहने दे अंकित बेटा, तेरे समझ नही आएगा, एक औरत की मजबूरी कोई नहीं समझ सकता, मैं तेरे लिए खाना बनाती हूँ |

    मैं- आंटी रुक तो, देख मैं तेरे लिए क्या लाया हूँ शहर से (मैं जान्हवी के लिए लिपस्टिक, चूड़ियाँ, बिंदी, कंगन, पजेब, जालीदार नाईटी लेकर आया था, जिसे देखकर जान्हवी खुश हो गयी लेकिन नाईटी देखकर वो सकपका गयी)

    जान्हवी (नाईटी दिखाते हुए) – ये क्या है ?? मैं ना पहनने वाली इसे, कैसा गन्दा है ये, इसमें शरीर दिखेगा पूरा |

    मैं- ओहो आंटी, अच्छा है ये, शहर में औरतें सब यही पहनती हैं घर पर, और वैसे भी यहाँ तेरे-मेरे अलावा कौन देख रहा है हमे |

    जान्हवी- नहीं रे, हरदीप आएगा देखेगा तो उसे अच्छा ना लगेगा |

    मैं- हरदीप को मैं समझा दूंगा आंटी, वो मेरी बात पक्का मानेगा देखना क्योंकि मैं उसके लिए भी कुछ लाया हूँ |

    जान्हवी- अच्छा और क्या क्या लाया है तू शहर से ?

    मैं- वो उसके और मेरे मतलब की चीज़ है. तू नाईटी पहन ले जा, और लिपस्टिक और चूड़ी भी पहन लियो |

    (दरअसल मैं बियर की बात कर रहा था, जान्हवी नाईटी पहनती है, उसके साथ साथ अपने बड़े फुले हुए होंठों पर लिपस्टिक लगाती है और लाल चूड़ियाँ भी पहनती है, जब वो मेरे सामने आती है तो

    मेरा लण्ड

    एक दम से बौखला जाता है, उसके निप्पल नाईटी में साफ़ दिख रहे थे, उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, और वो नाईटी जालीदार थी तो अंदर का बदन साफ़ साफ़ दिख रहा था |

    गाँव की औरत का गठीला बदन और सुडौल वक्ष उस नाईटी में बहुत ही कामुक और हिज़ड़े का लण्ड खड़े कर देने वाला लग रहा था, होंठों पर सुर्ख लाल लिपस्टिक, हाथों में चूड़ियाँ, पैरों में पजेब, माथे में बिंदिया, ऐसा लग रहा था जैसे कोई नई नवेली दुल्हन हो, लेकिन जान्हवी ऐसे दृश्य में इस दुनिया की सबसे बड़ी रांड लग रही थी, जिसे देखकर कोई भी उसका भाव पूछ सकता था)

    जान्हवी- कैसी है ये बेटा.

    मैं- उफ्फ्फ आंटी, तू छा गयी सही में, दीवाना बना दिया तूने मुझे.

    जान्हवी- चुप बदमाश कहीं का. मुझे ये अच्छी ना लगी, इसमें पूरा बदन दिख रहा है, हरदीप देखेगा नाराज़ होगा.

    मैं- रहने दे आंटी, हरदीप को तुझ से ज्यादा मैं जानता हूँ, कहीं हरदीप को तू पसंद न आ जाये, हा हा हा

    जान्हवी- बड़ा बदमाश हो गया तू शहर में रह कर. हरामी कहीं का.

    मैं- गाली मत दे आंटी, वरना देख ले.

    जान्हवी- वरना क्या करेगा तू ?

    (आंटी मेरे बहुत करीब आ जाती है, उसकी साँसे मेरी साँसों से टकराती है, उसके विशालकाय स्तन मेरी छाती में दब जाते हैं)

    जान्हवी- बता क्या करेगा, बोल, आंटी से जबान लडाता है

    मैं- मैं कर दूंगा फिर मत बोलना, देख ले आंटी

    (मैं आंटी के सुर्ख लाल होंठों को देखे जा रहा था)

    जान्हवी- हिम्मत है तो कर के दिखा ?

    मैं- एक बार और गाली दे, तेरी कसम कर दूंगा.

    जान्हवी- हरामी कहीं का अब कर के दिखा, दे दी गाली (तभी मैं आंटी के दोनों हाथ की बाहें पकडकर उसके होंठ पर अपने होंठ रख देता हूँ, और काट देता हूँ, करीब 5 मिनट तक मैं उसके होंठ चूसता हूँ, उसमे से खून भी निकल रहा था मैं वो भी पी लेता हूँ, वो छुटने का प्रयास करती है लेकिन असफल रहती है)

    जान्हवी- हाय राम, हरामी क्या कर दिया तूने, होंठ काट दिया मेरा, शहर में ये सब सीखा तूने, कुत्ते इसलिए आया तू गाँव, अब हरदीप मेरे होंठ देखेगा तो क्या कहेगा | आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट पर पढ़ रहे है |

    मैं- आंटी, मैं प्यार करता हूँ तुझ से, तू बहुत सेक्सी है, शादी कर ले मेरे साथ, हरदीप को बेटा बना दे मेरा.

    जान्हवी- क्या बोलता है रे, ऐसा अनाप शनाप ना बोल, तू बेटे जैसा है मेरा, हरदीप के भाई जैसा है तू.

    (फिर में आंटी को पकड़ लेता हूँ और अपने सीने से जकड लेता हूँ, और उसके गालों, गले और कन्धों पर चूमने लगता हूँ और उसके गले में जोर से काटता हु जिससे उसके गले में निशान छूट जाता है)

    जान्हवी- अह्ह्ह्ह्ह.. हाये मार ाला काट दिया रे हरामी ने छोड़ मुझे हरामी, बदमाश, मादरचोद

    मैं- आंटी आज जी भर के प्यार कर लेने दे इस आशिक़ को, तू बहुत ही झबराहट लग रही है मेरी जान.

    जान्हवी- मत कर बेटा कुछ मेरे साथ, छोड़ दे मुझे भगवान के लिए. अह्ह्ह्ह्ह.. ओह्ह्ह्ह्ह.. ह्हह्हहररारामी!!!

    (फिर मैं जान्हवी की नाईटी जबरदस्ती फाड़ देता हूँ और उसके विशालकाय वक्ष को आज़ाद कर देता हूँ, उसके बूब्स झूलने लगते हैं, 50 साल की

    औरत के लटके हुए बूब्स बहुत मस्त लगते हैं और मैं उसके निप्प्ल को चूसने लगता हूँ, और दूध को निचोड़ने लगता हूँ)

    जान्हवी- अह्ह्ह्हह्ह्.. उफ्फ्फ्फ्फ.. अंकित बेटा, क्या करता है रेरेह्ह्ह्ह्ह.. ओहोहोहिहो ऐसे ही चूस ले बेटा, चूस और चूस जोर जोर से चूस

    (अब जान्हवी मेरा साथ देने लगती है, उसकी सिसकारियाँ ऐसे लग रही थी जैसे पुरे गाँव में गूंज रही हो, एक 50 साल की औरत बहुत सालों से चुदाई से वंचित थी उसके अंदर बहुत ही कामुक वासनाएं भरी थी, वो करहा रही थी, गिडगिड़ा रही थी, चोदने के लिए भीख मांग रही थी)

    जान्हवी- अंकित, हाईईईईए.. मेरे बेटेटेटेटे.. अह्ह्ह्ह्ह.. और ना तड़पा, डाल दे अंदर अपना हथौड़ा बेटा

    मैं- रुक जा जान आज तुझे संतुष्ट कर दूंगा, बस तेरा आशीर्वाद चाहिए.

    जान्हवी- मेरा आशीर्वाद तेरे अह्ह्ह्ह्ह.. साथ हिहिहिहि है उफ्फ्फ्फ्फ.. बेटा मत तड़पा अह्ह्ह्ह्ह..

    मैं- तुझे और तड़पाउंगा मेरी रानी, जब तक तू मुझ से भीख न मांगे तब तक नहीं चोदुंगा जान

    जान्हवी- हाये रेरेरेरेरे.. मैं भीख मांगती हूँ मरर राजाअह्ह्ह्ह्ह.. चोद डाल मुझे, अपने बच्चे की माँ बना दे, हरदीप को एक भाई दे दे अह्ह्ह्ह्ह..

    मैं- ठीक है मरी रान्ड, आज ेरी कोख में अपना वीर्य डाल दूंगा रण्डी और नौ महीने बाद बच्चा देखने आऊंगा.

    जान्हवी- इस घर में एक बार फिर किलकारियाँ गूंजेंगी बेटा, अह्ह्ह्ह्ह.. ओहोहोहोहो.. डाल जल्दी डाल, खेलना बंद कर, असली काम कर जल्दी, अब सहन ना होता रे मुझ से अह्ह्ह्ह..

    मैं- तैयार हो जा जानेमन मेरा लवड़ा लेने के लिए.

    (फिर मैं जान्हवी ो बिसतर पर लेटाता हूँ और लण्ड को उसकी चूत में जिसकी झांटे सफ़ेद थी रखता हूँ और एक जोरदार झटका मारता हूँ जिससे

    लण्ड चूत ी गहरी खायी में समा जाता है) जान्हवी- आआआआआ.. अह्ह्ह्ह्ह.. मआरर डालाललाला.. अह्ह्ह्ह्ह.. ओहोहोहोहो.. उफ्फ्फ.. उईईईईई.. अम्मा!!! (फिर चुदाई प्रारम्भ होती है, मैं लण्ड को अंदर बाहर करता हूँ, उसने अपनी दोनों मोटी मोटी टाँगे मोड़ कर मेरी पीठ ने रखी दी, और जान्हवी मेरे होंटों को, गाल को, गले को मस्ती में चूमे जा रही थी और सिसकारियाँ ले रही थी, आहें भर रही थी, चुदाई चल रही थी, उसकी चूड़ियों की खनखन और पजेब की आवाज़ से कमरा स्वर्गमय हो गया था, चूड़ियों की खनखनाहट से मेरा जोश और बढ़ गया और मैंने अपनी रफ़्तार बुलेट ट्रेन की तरह कर दी)

    जान्हवी- अह्ह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह.. ओहोइऊओइ.. उईईईईईई.. उम्म्म्म्म हाये रेरेरेरेरेरेरे.. अह्ह्ह्ह.. धीरे धीरे हरआआआआमी उफ्फ्फ मर गयी अम्मा, मार डाला अंकित तूने, कर कर, और चुदाई कर, बना दे अपने बच्चे की माँ मुझे, दे दे एक और हरदीप अह्ह्ह्ह्ह.. मैं झड़ने वाली हूँ बेटा, मैं आईईईई मैं आईईईई.. मैं आईईईई.. अह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्!!!

    (और अंततः जान्हवी झड़ जाती है और ढेर सारा पानी छोड़ती है जिससे मेरा लण्ड गीला और चिपलादार हो जाता है इससे मुझे और आनंद की अनुभूति होती है और मैं फचापच चुदाई करते करते आंटी की चूत में झड़ने वाला होता हूँ)

    मैं- मैं भी आया रंडी आंटी, मैं आने वाला हूँ तेरी चूत में, झड़ने वाला है मेरा माल, अह्ह्ह्ह भेन की लोड़ी, भेनचोद रंडी, अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह मेरी पत्नी, मेरे होने वाले बच्चे की माँ, मैं आया अह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह..

    (और मैं अपना सारा माल आंटी चूत के अंदर छोड़ देता हूँ, हम दोनों ऐसे ही पसीने से लतपत एक दूसरे के ऊपर पड़े रहते हैं, आंटी अभी भी सिसकारी भर रही थी, मेरा लण्ड आंटी की चूत में ही था, 2 घण्टे हम ऐसे ही सोये रहते हैं)

    (फिर हरदीप घर आता है, अपनी माँ को नाईटी में देखकर वो गुस्सा करता है लेकिन मैं उसे बियर पिला देता हूँ और रात में फिर से जान्हवी आंटी की चुदाई करता हूँ, 9 महीने बाद आंटी की चूत से एक लड़के का जन्म होता है |

    गाँव में किसी को पता नहीं था कि ये किसका लड़का है तो गाँव वाले ऐसे ही धारणा बना देते हैं कि ये हरदीप का कुकर्म है और इस वजह से हरदीप का मुह काला करके पुरे गाँव में घुमाया जाता है |

    लेकिन हरदीप को पता चल गया था कि उसका भाई मेरा ही बच्चा है | आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट पर पढ़ रहे है | हरदीप ो गाँव वालों ने इस गंदे काम के लिए चप्पल से पीटा और मुह काला करके पुरे गाँव में घुमाया, और उसकी माँ को रंडी घोषित कर दिया, लेकिन मैंने एक दिन चुपके से रात को उसकी माँ को अपने साथ शहर भगा ले आया और जान्हवी से शादी कर ली, लेकिन हरदीप को पता नहीं उसकी माँ कहाँ है.

    गाँव वालों ने उसे उसकी माँ को गायब करने के दोष में उम्र कैद सुना दी है और अब हरदीप जेल में है और उसकी माँ जान्हवी मेरे साथ शहर में खुश है, हमने अपने बच्चे का नाम हरदीप रखा है और अब जान्हवी काफी मस्त और मोर्डन बन चुकी है, मैंने जान्हवी के लिए एक ब्यूटी पार्लर खोल दिया है जहाँ जान्हवी देह व्यापार करके भी कुछ पैसे कमाती है और हम दोनों का गुज़ारा हो जाता है).

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    Amazing feel in this position

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    झूला झुलाओ सजन मेरे 

    वोह थोड़ा सा लंड अपने मुँह से निकाल के बोली, “थोड़ा सा और ठहर डार्लिंग, अभी थोड़ा और चूस के लोहे की तरह बना दूँ, फिर जम के मेरी चूत बजाना!” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ये बोलकर उन्होंने मेरा पूरा लंड मुँह के बाहर निकाला और सिर्फ़ मेरे लंड के सुपाड़े को और मूतने वाले छेद को अपनी जीभ में लपेट-लपेट कर जो मज़ा देना चालू किया वो अभी तक का सबसे गुदगुदाने वाला मज़ा था। मैं मस्ती में आ के अपने चूत्तड़ों के नीचे दबी हुई उनकी मोटी-मोटी चूचियों को बड़ी बुरी तरह से मसलने लगा। करीब दो तीन मिनट ऐसे करने के बाद मेरा लंड वाकय में दोबारा फटने की कगार पे आ गया था। ममता आंटी इसे भाँप चूकी थीं। इसी लिये उन्होंने जीभ फेरना बंद करा और बोली, “अब आजा डार्लिंग! अब मेरी चूत खोल दे इस लौड़े से!” मैं ममता आंटी के उपर से हट कर उनकी जाँघों के बीच आ गया और उन्होंने भी अपनी जाँघें पूरी खोल दीं थी और अपनी उंगली से अपनी चूत के लिप्स खोल दिये थे जिससे उनका रस में डूबा हुआ गुलाबी छेद दिख रहा था। ममता आंटी बोलीं, “देख ले डार्लिंग! अपनी पूरी खोल के दे रही हूँ, बाद में मत कहना कि ममता आंटी ने खोल के चुदवाई नहीं!” मैंने आगे बढ़ कर अपने लंड का सुपाड़ा ममता आंटी की चूत के खुले हुए लिप्स के बीच में रख दिया और हाथ से पकड़ कर आराम से उनके गुलाबी छेद पर अपना सुपाड़ा रगड़ने लगा और ममता आंटी से पूछा कि “आज तुम्हारी चूत हलाल करूँ कि झटका चोदूँ?” ममता आंटी बोलीं, “हलाल तो बहुत हो चुकी डार्लिंग! आज तो झटका चुदाई कर दो और माँ चोद दो मेरी चूत की!” मैंने घुटने के बल हो कर ममता आंटी की दोनों टाँगें अपने कँधे पर रख कर उन्हें फैला दिया और अपनी गाँड का पूरा जोर लगा कर एक करारा सा झटका मारा जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लम्बा लौड़ा ममता आंटी की चूत में समा गया। ममता आंटी क्षण भर के लिये तो चीखीं और फिर बड़बड़ाने लगीं, “मादरचोद! आखिर तूने मेरी चूत की माँ चोद ही डाली। अरे भोसड़ी वाले मैंने यह थोड़ी बोला था कि अपना पूरा गन्ना मेरी चूत में एक झटके से उतार देना। बहन के लौड़े! आज मुझे वाकय में लग रहा है के मेरी असली सुहाग रात तो आज है। इतना दर्द तो मुझे पहली सुहाग रात को भी नहीं हुआ था। डार्लिंग क्या लौड़ा दिया है! मेरी तो चूत आज वाकय में चूत बन गयी। डार्लिंग तूने आज मुझे धन्य कर दिया। मैं तो तेरी गुलाम हो गयी। मादरचोद! तू मेरा हसबैंड बन जा आज से। ले मेरी चूत चोद ले… जितनी चोदनी है!” मैं तो बस लगातार दनादन उनकी चूत में अपने लौड़े के धक्के दिये जा रहा था। जब भी मेरा धक्क लगता तो मेरी जाँघें ममता आंटी के चूत्तड़ों और जाँघों से लग कर थप-थप की आवाज़ पैदा कर रही थीं। करीब आठ-दस मिनट के ज़ोरदार धक्कों के बाद ममता आंटी ने किलकारी मारते हुए मेरे लंड पर अपना पानी फेंक दिया। मैंने भी ममता आंटी की टाँगें अपने कँधों से उतार कर नीचे कर दीं और उन्हें चौड़ा कर के ममता आंटी के ऊपर लेट कर कसके उनको अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ उन के रसीले होंठों पर एक बार फिर से जमा कर उनकी जीभ को चूसने लगा। बड़े आराम से मैं अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल के ममता आंटी की चूत में अपना लौड़ा पेल रहा था। मेरी डार्लिंग आंटी ने भी अपने दोनों हाथ कस कर मेरे चूत्तड़ों पर दबाय हुए थे और जब मैं अपना लंड बाहर खींचता तब वोह अपने दोनों हाथों से मेरे चूत्तड़ दबा देती जिससे कि जल्दी से फिर मेरा लंड उनकी चूत में समा जाये। करीब पँद्रह-बीस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करने के बाद ममता आंटी बोली, “तुझे एक नया आसन बताती हूँ। उसमे मर्द का लंड औरत की चूत में पूरा अंदर तक जाता है!” इतना कह कर ममता आंटी ने मुझे अपने ऊपर से उतरने के लिये कहा और मेरे समने घुटने के बल एक कुत्तिया की तरह हो कर अपने चूत्तड़ मेरी तरफ कर दिये और बोली, “ले बहन के लौड़े! अब तू कुत्ता बन। मैं अपनी चूत उभार के देती हूँ और तू उसमें अपना मस्त गन्ना उतार और फिर कस-कस कर मेरे चूत्तड़ों पर धक्के मारते हुए तबला बजा!” इतना कह कर आंटी ने अपनी गाँड उपर की और उठा दी और चूचियों को बिस्तर पर टिका दिया और अपना पेट नीचे करके अपनी जाँघों के बीच में से मुस्कुराती हुई चूत खोल दी। ममता आंटी के चूत्तड़ चौड़े होने के कारण उनका मस्त भूरे रंग का गाँड का छेद दिख रहा था जिसको देख कर अन्दाज़ा हो रहा था कि ममता आंटी ने अभी तक गुदा-संभोग का लुत्फ नहीं उठाया है। दोस्तों इस समय वो नज़ारा दिख रहा था कि मैं अपने आप को रोकने में नाकाम था। मैने ममता आंटी की रिस रही बूर में लंड थोड़ा सा घिसा और धक्का मार कर पूरा लंड उनकी चूत में झटके से उतार दिया। वाह क्या मज़ा आया! जैसे ही मैंने अपनी जाँघों से ममता आंटी के फूली हुई चूत्तड़ों पर जम के धका दिया तो मक्खन की तरह मेरा लंड ममता आंटी की उभरी हुई चूत में घुसा और मेरे धक्के के दबाव से ममता आंटी के चूत्तड़ स्पंज की तरह दब कर फैल गये और फैल कर और चौड़े हो गये और बाद में स्पंज की ही तरह फिर से फूल कर अपनी शेप में आ गये जिससे मुझे ममता आंटी के चूत्तड़ों का धक्का महसूस हुआ। मुझे इस आसन में ममता आंटी की चूत लेने में बहुत मज़ा आ रहा था और मैं और जोश के साथ चूत बजाने लगा। जोश में आकर मैंने अपनी एक उँगली अपने थूक से गीली की और इससे पहले कि वोह कुछ समझ पातीं, मैंने अपनी उँगली ममता आंटी की गाँड में घुसा दी। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | वो एक दम चिहुँक उठी और बड़-बड़ाई, “क्या कर रहा है मादरचोद! मेरी चूत तो अपने लंड से भर दी अब क्या मेरी गाँड अपनी उँगली से भरेगा क्या? आज पहली बार किसी मर्द ने मेरी गाँड का छेद छेड़ा है। चल थोड़ा मेरी गाँड में अपनी उँगली चला दे!” वाकय में बहुत ही टाइट गाँड का छेद था। उँगली गीली होने के बावजूद बड़ी कसी-कसी उनकी गाँड में घुस रही थी। करीब आठ-दस मिनट तक कुत्ता चुदाई में ममता आंटी दो बार अपनी चूत का पानी निकाल चूकी थी और मेरे हर शॉट का जम कर जवाब अपने चूत्तड़ों के धक्के से दे रही थी और बड़-बड़ाते हुए कह रही थी की, “मेरे जानू आज तो ज़िंदगी का असली मज़ा आ गया। बहन के लौड़े जब तेरा मूसल जैसा लंड पूरा मेरे अंदर घुस कर मेरी बच्चेदानी पर लगता है तो मैं तो बस गनगना जाती हूँ। बहनचोद! तू मेरा हसबैंड क्यों नहीं बना? तुझसे तो इतना चुदवाती कि तू हमेशा मस्त रहता। मादरचोद तेरे से चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ जाता है। तेरी तो जिस से शादी होगी उसकी तो सुहाग रात वाले दिन माँ चुद जायेगी। ज़िन्दगी भर चोदना भूल जायेगी। चोद मेरे लंड, चोद, बहनचोद!” ममता आंटी बड़बड़ाती रही और मैंने अपने धक्के चलू रखे। कुछ देर बाद मेरे लंड का पानी बहुत उबाल खा चुका था और ममता आंटी की मस्त चूत में अपनी मस्ती निकालने के लिये बेकरार था। मैंने ममता आंटी को कहा कि “रानी अब तुम सीधी हो, मैं तुम्हारी चूचियों पर पसर कर तुम्हारा मुँह चूसते हुए झड़ना चाहता हूँ!” ममता आंटी मेरा लंड निकाल के फोरन सीधी हो गयी और मैंने भी बिना वक्त गवाये अपना लंड पूरा चूत में घुसेड़ कर उनके ऊपर लेट गया और ममता आंटी कि दोनों चूचियाँ अपने हाथों में पकड़ कर अपने होंठ उनके रसीले होंठों पर रख कर और चूसते हुए दनादन उनकी चूत में शॉट लगाये और जब मेरा लंड झड़ा, उस समय तो मैंने इतनी जोर की शॉट मारा कि ममता आंटी ने भी दर्द के मारे अपनी गाँड एक फुट हवा में उछाल दी, जैसे कह रही हो ले मादरचोद! भर मेरी चूत को! ममता आंटी ने मेरा पूरा माल अपनी चूत में सोख लिया और कसके मुझे अपने बदन से चिपका लिया और बुरी तरह मेरा मुँह चूसने लगी। मुझे तो इस चुदाई में सुबह से ज्यादा मज़ा आया था और इतनी देर चोदने के बाद ममता आंटी के गुदाज़ बदन पर लेटना बहुत ही अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चूत से अपना लंड निकाला तो ममता आंटी टपाक से उठ बैठीं और मेरा लंड चूसने लगी और अच्छी तरह से चूस कर पूरा लंड साफ कर दिया। ममता आंटी ने आगे बढ़कर दो सिगरेट जलाईं और बोली, “अनिल डार्लिंग! आज से तू सिर्फ मेरा हसबैंड है। तेरा अंकल तो बस नाम का मेरा हसबैंड है। मैं सिर्फ तेरी गुलाम बन कर रहुँगी। तूने मुझे जीवन का वो सुख दिया है जिसके लिये मैं पिछले इक्कीस साल से तरसी हूँ। बस मुझे दिन में एक बार जरूर चोद दिया कर। देख मेरी चूत अभी तक तेरे धक्कों से हिली हुई है। आज मुझे मालूम पड़ा असली मर्द क्या होता है। डार्लिंग देख तो सही मैं तेरे लंड से किस-किस को खुश करवाती हूँ!” मैंने भी सोचा ममता आंटी इस समय चुदवा कर पूरी तरह मस्त है, क्यों ना अपने दिल की बात कह दूँ। मैंने बड़े प्यार से ममता आंटी का चेहरा अपने हाथ से अपनी तरफ घुमाया और हिम्मत करके बोल डाला कि “ममता देखो आज के बाद तुम हमेशा मेरी रहोगी। मैं हर रोज़ तुम्हारी चूत की ऐसी चुदाई करूँगा कि तुम्हें रात में अंकल से चुदवाने कि इच्छा ही नहीं होगी पर तुम मेरा एक काम करवा दो डार्लिंग! ज़िंदगी भर तुम्हारा गुलाम बन कर रहूँगा!” ममता आंटी बोलीं, “बोल शरमाता क्यों है? अब तो मैं तेरी पत्नी हो गयी, अब तो तू दिल खोल के बोल जो भी बोलना है। अगर तू मेरी गाँड मारना चाहता है तो डार्लिंग मैं उसके लिये भी तैयार हूँ। अपने इस प्यारे लवर को नहीं दूँगी तो और किस को दूँगी। अगर कुँवारी चूत ना दे सकी तो क्या, अपनी कुँवारी गाँड तो दे ही सकती हूँ!” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने कहा, “नहीं ममता बात असल में ये है कि कल मैं तुम्हारी चुदाई देखने के बाद अँजाने में ही नेहा दीदी के कमरे में चला गया था और वहाँ पर उनके बदन को मैंने खूब चूसा और चाटा था और बाद में उनकी गाँड खूब सूँघी और चाटी थी। ममता! जो उनकी ताज़ी चूत की खुशबू आ रही थी वो मैं बता नहीं सकता। मैं नेहा दीदी के साथ चुदाई करना चाहता हूँ!”

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    Kya Kamaal ka Christi hai yaar

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    आंटी की मस्त चुदाई 

    हैल्लो दोस्तों, राजकुमार का आप सभी को प्यार भरा नमस्कार। इस कहानी के पात्रो से आप सभी का परिचय करवा देता हूँ। दोस्तों राकेश मेरा बहुत पुराना दोस्त है और में हमेशा उसके साथ में अपनी हर एक बात करता हूँ और बहुत मौज मस्ती भी करता हूँ। दोस्तों राकेश 22 साल का एक हट्टाकट्टा लड़का है और हम दोनों में बहुत बनती है। दूसरी पात्र सीमा वो राकेश की माँ है जो कि एक सेक्सी माल है, उनकी उम्र करीब 35 है और वो बला की सुंदर, थोड़ी पुरानी सोच, लेकिन वो बहुत अच्छे व्यहवार और विचारों की औरत है और उनका फिगर 38 -34 -38 है और वो दिखने में दूध जेसी सफेद और आज भी बहुत जवान लगती है।

    दोस्तों इस कहानी का तीसरा पात्र जी हाँ वो में हूँ और मुझे चुदाई का बहुत शौक है और यह घटना मेरे साथ करीब एक साल पहले घटित हुई वैसे तो में एक चुड़क्कड़ किस्म का इंसान हूँ तो इसलिए में हमेशा कोई ना कोई चूत ढूंढता रहता हूँ। दोस्तों मेरा राकेश के यहाँ पर रोज का आना जाना लगा रहता था, लेकिन उसकी माँ को देखकर हमेशा से ही मेरा लंड उसे चोदने को होता था, लेकिन मुझे कभी कोई ऐसा मौका नहीं मिला जिसका में अच्छी तरह से फायदा उठा सकता? वैसे हम हमेशा थोड़ी बहुत हंसी, मजाक बातें कर लिया करते थे। दोस्तों अब राकेश का जन्मदिन बहुत नज़दीक आ रहा था और उसके पापा किसी जरूरी काम से कुछ दिनों के लिए बाहर गये हुए थे। मैंने उसे एक दिन फोन किया और पेपर होने के कारण हम ज़्यादा घूम नहीं पा रहे थे। 

    राकेश हैल्लो.. में : राकेश क्यों कहाँ है यार? राकेश : यार में तो अपने घर पर हूँ और टी.वी. देख रहा हूँ। में : यार चल ना कोई फिल्म देखने चलते है। राकेश : रुक में अभी अपनी माँ से पूछता हूँ। में : ठीक है थोड़ी देर बाद दोबारा फोन करता हूँ। राकेश : यार मेरी माँ मुझसे जाने के लिए मना कर रही है, वो कह रही है कि घर पर ही रह, यार तू मेरे घर पर आजा हम लोग घर पर ही फिल्म देख लेते है। में : ठीक है में बीस मिनट में तेरे पास आता हूँ। राकेश : हाँ ठीक है।

    फिर में तैयार होने लगा और मन ही मन बहुत खुश भी था कि मुझे आज उसकी सेक्सी माँ को देखने का मौका मिलेगा। में तैयार होकर राकेश के घर को निकल गया और उसके घर पर पहुंचकर मैंने घंटी बजाई, राकेश ने दरवाजा खोला और मुझसे अंदर आने को कहा।

    में : राकेश अंकल और आंटी कहाँ है? राकेश : यार पापा एक हफ्ते के लिए काम से बाहर गये है और माँ अभी सो रही है। में : यार छुट्टियाँ भी है, लेकिन मौज मस्ती नहीं की तो अब तरस रहा हूँ और तू बता तू तो अंजलि को मिलने जा रहा था ना? राकेश : नहीं यार नहीं जा पाया घर में काम बहुत है और माँ नाराज़ हो है इसलिए नहीं गया। में : कोई बात नहीं यार माँ मान जाएगी। राकेश : चल अब फिल्म देखते है, में कल ही लेकर आया था। में : हाँ चल बहुत दिन हो गये फिल्म देखे। दोस्तों अब हम राकेश के रूम में जाकर फिल्म देखने लगे और एक घंटे बाद आंटी उठ गई और उस कमरे में आई जिसमें हम बैठे हुए फिल्म देख रहे थे। आंटी : क्यों क्या देख रहे हो तुम दोनों? में : नमस्ते आंटी। राकेश : फिल्म देख रहे है माँ। आंटी : ठीक है, में तुम लोगों के लिए कुछ खाने को लेकर आती हूँ। फिर इतना बोलकर आंटी किचन में जाने लगी और में उनकी साड़ी में उनकी मटकती हुई गांड को देखने लगा, क्या मस्त लग रही थी? फिर हम फिल्म देखने लगे और बीस मिनट बाद आंटी हमारे लिए चाय और स्नेक्स लेकर आई और वो भी हम लोगों के साथ बैठ गई और मुझसे कहने लगी लो बेटा चाय पियो और अब हम दोनों अपनी अपनी चाय अपने हाथ में लेकर स्नेक्स खाने लगे। फिर आंटी ने मुझसे पूछा कि राजा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है? में : जी आंटी बहुत अच्छी चल रही है। आंटी : क्यों आज कल तुम घर पर आते नहीं हो? में : आंटी पेपर है तो ज़्यादा समय नहीं निकल पाता इसलिए। आंटी : हाँ बेटा अच्छी बात है और अपनी पढ़ाई में ज्यादा से ज्यादा मन लगाकर पढ़ाई करो। में : अरे यार राकेश तेरा जन्मदिन भी तीन दिन बाद है क्यों मनाएगा ना? राकेश : यार तू तो अच्छी तरह से जानता है कि इस समय पापा घर पर नहीं है तो बहुत मुश्किल है। में : देख में कुछ नहीं जानता मुझे तो पार्टी चाहिए। राकेश : यार, लेकिन। में : में लेकिन वेकिन कुछ नहीं जानता, में तेरे घर आ जाऊंगा और फिर में, आंटी और तू मज़े करेंगे, क्यों आंटी मैंने ठीक कहा ना? आंटी : हंसते हुए बोली कि हाँ ठीक है में खाना बना लूँगी। में : क्यों राकेश ठीक रहा ना? राकेश : हाँ ठीक है यार। में : अब यार में चलता हूँ जन्मदिन पर आ जाऊंगा, ठीक है आंटी नमस्ते। आंटी : ठीक है बेटा नमस्ते। अब में अपने घर के लिए निकल लिया। मैंने बाहर राकेश को बोला कि यार तू बिल्कुल भी फ़िक्र मत कर, में अपने साथ विस्की ले आऊंगा। राकेश : यार माँ के सामने तू क्या मुझे मरवाएगा? में : यार उसकी फ़िक्र तू मत कर, आंटी को में मना लूँगा, ठीक है बाय। राकेश : ठीक है बाय। फिर में अपने घर पर चला आया और में अपने घर पर आकर बस उसकी माँ को चोदने के बारे में सोच रहा था कि में उसे कैसे चोदूँ और बहुत सोचने के बाद मुझे उसके जन्मदिन पर वो मौका मिल रहा था और वो सब सोचते सोचते में ना जाने कब सो गया। फिर उसके जन्मदिन के दिन मैंने राकेश को फोन करके जन्मदिन की बधाईयाँ दे दी और मैंने उससे पार्टी का समय पूछा तो वो मुझसे बोला कि तुम शाम को 7 बजे आ जाना। फिर में बोला कि ठीक है और मैंने फोन कटकर दिया। दोस्तों उसकी माँ को सोचकर ही सारा दिन लंड खड़ा होता रहा। में तीन बजे घर से बाजार चला गया और मैंने राकेश के लिए एक शर्ट खरीद ली। उसके बाद मैंने एक वाईन शॉप से एक विस्की की फुल बोतल ली और फिर मैंने मेडिकल स्टोर से एक कंडोम का पेकेट भी ले लिया और अब अपने घर पर आकर में तैयार होने लगा, में आज बहुत खुश था और डियो लगाकर में राकेश के घर के लिए निकल गया और उसके घर पर ठीक समय पर पहुंच गया। फिर उसकी माँ ने दरवाजा खोल दिया और मैंने उनसे हैल्लो आंटी कहा। 

    आंटी : हैल्लो बेटा, चलो अंदर आ जाओ। में : क्या आंटी आप अभी तक तैयार नहीं हुई? आंटी : तैयार क्या होना बेटा तुम लोग जन्मदिन मना लेना। में : आंटी जन्मदिन तो जन्मदिन है ना और अब आपको भी हमारे साथ मनाना होगा, प्लीज आप अब तैयार हो लीजिए। आंटी : ठीक है बेटा तुम बैठो, राकेश अपने रूम में है और कहते हो तो में भी अभी तैयार होकर आती हूँ। दोस्तों अब आंटी अपने रूम में चली गई और में राकेश के रूम में। में : जन्मदिन मुबारक हो राकेश। राकेश : मेरे गले लग गया और उसने मुझे धन्यवाद बोला।

    में : मैंने उसे गिफ्ट वाली शर्ट दे दी और उससे तैयार होने को बोला और अब वो भी तैयार होने लगा। फिर मैंने उससे कहा कि राकेश देख में तेरी पसंद की ब्रांड विस्की लेकर आया हूँ तो वो उसे देखकर बहुत खुश हुआ और अब हम तैयार होकर हॉल में पहुंच गये और आंटी का इंतजार करने लगे। में : यार राकेश जन्मदिन पर तो गाना जरुर होना चाहिए ना। राकेश : हाँ यार रुक में अभी लगाता हूँ।

    तभी मेरी नज़र आंटी पर पड़ी, वो क्या लग रही थी उस नीले कलर की जालीदार साड़ी में बहुत हॉट, सेक्सी और उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी तो उनके बूब्स हिलते हुए बहुत मस्त लग रहे थे, उन्हें देखकर मेरा मन कर रहा था, उनसे चिपककर एक किस कर लूँ, लेकिन मैंने मन को कंट्रोल किया और फिर मैंने उनसे कहा कि वाह आंटी आप तो बहुत सुंदर दिख रही हो। आंटी : थोड़ा शरमाते हुए धन्यवाद बेटा, तुम लोग क्या कर रहे हो? में : आंटी, गाने लगा रहा हूँ।

    आंटी : ठीक है तो में तुम दोनों के लिए कोल्डड्रिंक्स लेकर आती हूँ और आंटी जाने लगी। दोस्तों उनका ब्लाउज पूरा खुला हुआ था और उसमें से उनकी कमर बहुत सेक्सी लग रही थी और उनकी वो मटकती हुई गांड देखकर में और भी पागल हो रहा था, में बस यही सोच रहा था कि अगर आज रात उसे चोद लूँ तो मज़ा आ जाए। फिर अचानक गाना शुरू हुआ तो में अपनी उस सोच से बाहर आया और हम बातें करने लगे। फिर आंटी कोल्ड ड्रिंक्स लेकर आई और फिर से जाने लगी तो में उन्हें रोकते हुए बोला कि आंटी आप कहाँ जा रही है प्लीज कुछ देर हमारे पास भी बैठिए ना?

    आंटी : बेटा तुम दोनों अपना काम करो और में खाना तैयार करती हूँ। में : आंटी आप भी हमारे साथ पार्टी में शामिल हो तो इसलिए आपको भी बैठना पड़ेगा क्यों राकेश? राकेश : हाँ माँ बैठो ना। आंटी : ठीक है बेटा तुम कहते हो तो में भी बैठ जाती हूँ।

    दोस्तों अब आंटी हमारे सामने बैठ गई और मैंने सबको कोल्ड ड्रिंक दे दी और फिर हम तीनों ने चियर्स किया और कोल्ड ड्रिंक पीकर बातें करने लगे। तभी राकेश मुझसे बहुत धीरे से बोला कि यार अब माँ को ड्रिंक के लिए कैसे मनाएँगे? दोस्तों वो मुझसे बिल्कुल चिपककर बैठा हुआ था और गाने चलने की वजह से सिर्फ में उसकी वो सभी बातें सुन रहा था। में : रुक में अभी उनसे बात करता हूँ। फिर में आंटी से बोला कि आंटी आज जन्मदिन है और आज के दिन अगर हम आपसे कुछ भी मांगे तो आप हमे मना नहीं करोगी। आंटी : हाँ बेटा बोलो तुम्हें ऐसा क्या चाहिए? में : आंटी क्या हम ड्रिंक कर सकते है? आंटी : थोड़ा गुस्सा होते हुए बोली कि ऐसा बिल्कुल नहीं, कुछ हो जाएगा तो और वैसे भी पीना शरीर के लिए बहुत खराब होता है। में : हाँ आंटी हमे पता है, लेकिन सिर्फ आज के दिन, प्लीज़ आंटी ऐसा कुछ नहीं होगा, बस आज के लिए प्लीज आंटी। आंटी : नाख़ूशी से बोली ठीक, लेकिन ज़्यादा नहीं पीना और अब में खाना बनाने जा रही हूँ। अब आंटी किचन में चली गई और इधर हम दोनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। फिर मैंने बोतल बाहर निकाली और दो पेग बनाए और चियर्स करके पीने लगे, राकेश को विस्की से जल्दी नशा हो जाता था और यह बात मुझे पहले से ही पता थी तो इसलिए मैंने उसे जानबूझ कर पहला भारी पेक दे दी और खुद भी लेने लगा, हम लोग को पीते हुए करीब 45 मिनट हो चुके थे और हम दोनों को शराब का असर शुरू हो चुका था और हमने आधी बोतल ख़त्म कर ली थी। फिर मैंने राकेश से बोला कि चल यार अब थोड़ा डांस करते है और मैंने एक अच्छा सा गाना लगा दिया और हम दोनों डांस करने लगे। तभी आंटी आई और उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा खाना बन गया है, में लगा देती हूँ और तुम आकर खा लो। आप लोग यह कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

    में : आंटी अभी तो हम नाचने लगे है प्लीज आप भी आ जाईए। आंटी : नहीं बेटा, में अब अपने कमरे में जा रही हूँ। में : प्लीज आंटी आइए ना।

    अब आंटी मेरे बहुत बार कहने पर बैठ गई और राकेश को अब ज़्यादा हो ही रही थी तो वो थोड़ी देर डांस करने के बाद सोफे पर बैठ गया। फिर में आंटी के पास चला गया और मैंने उन्हें डांस करने को कहा, लेकिन आंटी बोली कि नहीं बेटा तुम करो, में यह सब नहीं करूँगी। फिर मैंने उनसे आग्रह किया प्लीज आंटी करिए ना और थोड़ी देर ना के बाद वो अब मान गई। फिर मैंने उनका हाथ पकड़कर उन्हें खड़ा किया और अब हम दोनों डांस करने लगे और मैंने देखा कि राकेश को ज़्यादा नशा होने की वजह से वो अपनी दोनों आखें बंद करके बैठा रहा। अब मैंने एक रोमेंटिक गाना चला दिया और आंटी को डांस करने के लिए कहा, पहले तो वो मना करने लगी, लेकिन बाद में मेरे बहुत बार ज़िद करने पर वो मान गई। मैंने एक हाथ से उनका मुलायम हाथ पकड़ा और अपना एक हाथ उनकी पतली, गरम कमर पर रख दिया और अब हम डांस करने लगे। फिर मैंने महसूस किया कि आंटी थोड़ा शरमा रही थी। फिर मैंने आंटी से पूछा कि आंटी आप ऐसे घबरा क्यों रही हो? आंटी बोली कि बेटा मैंने कभी ऐसे डांस नहीं किया और अब में समझ गया कि यह चुद जरुर जाएगी, लेकिन आसानी से नहीं और मुझे थोड़ी मेहनत करनी होगी। फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी शरमाना कैसा? वैसे भी आप आज इस साड़ी में बहुत हॉट, सेक्सी लग रही हो और में मुस्कुरा दिया। फिर आंटी शरमाते हुए कहने लगी धत बदमाश, में अब खुद को आंटी से और भी सटाने लगा, जिसकी वजह से अब उनके बूब्स मेरी छाती के बिल्कुल पास थे और मेरा लंड भी अब जागने लगा। फिर मैंने आंटी से कहा कि आंटी आप सही में बहुत सुंदर और सेक्सी हो और में आपको बहुत पसंद करता हूँ, लेकिन में आपसे ना जाने क्यों यह बात कहने से डरता हूँ। दोस्तों आंटी मेरे मुहं से यह बात सुनकर एकदम से चुप हो गई और मुझे देखने लगी। मैंने धीरे से उन्हें और सटाकर बोला कि आंटी में आपसे बहुत प्यार करता हूँ और अब में एक हाथ से उनकी चूतड़ पर सहलाने लगा, आंटी मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी और वो मुझसे कहने लगी कि तुम अभी अपने पूरे होश में नहीं हो राजा प्लीज छोड़ दो मुझे, वरना राकेश देख लेगा। 

    फिर मैंने अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिए और चूमने, चूसने लगा, उम्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह उम्म्म अह्ह्ह्ह दोस्तों वाह क्या होंठ थे उनके और वो मुझसे लगातार छूटने की कोशिश करती रही, लेकिन में अब उन्हें ऐसे छोड़ने वाला नहीं था और में उन्हें लगातार किस करता रहा और उनकी गांड को सहलाता रहा। अब उनकी सांसे भी बहुत तेज़ हो गई थी और उन्होंने किसी तरह अपने आपको मुझसे छुड़ाया और फिर दूर हट गई और गुस्से से बोली क्यों तुम अपने होश में हो? फिर में बोला कि आंटी प्लीज मुझे माफ़ करना, लेकिन आपको देखकर में कंट्रोल नहीं कर पाया। तभी राकेश भी उठ गया और उसने पूछा कि क्या हुआ? आंटी ने कहा कि कुछ नहीं चलो खाना खा लो। फिर राकेश ने कहा कि उसे इस समय भूख नहीं बहुत नींद आ रही है। फिर आंटी और में उसे पकड़कर कमरे तक ले गये और लेटा दिया, कमरे से बाहर आकर आंटी ने कहा कि तुम बैठो में तुम्हारे लिए खाना लेकर आती हूँ। आप लोग यह कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

    दोस्तों आंटी उस समय बहुत गुस्से में थी और अब मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। फिर भी में किचन में चला गया और उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया और मैंने उनसे कहने लगा कि प्लीज आंटी मुझे माफ़ कर दो, लेकिन में आपको दिल से बहुत पसंद करता हूँ और आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। अब आंटी कुछ नहीं बोली बस आश्चर्यचकित होकर देखती रही और मैंने इस बात का फायदा उठाते हुए उन्हें पीछे से पकड़कर उनकी कमर को चूमने लगा उम्म्म अह्ह्ह्ह उम्म्म तो आंटी मेरा विरोध करने लगी और मुझसे कहने लगी कि नहीं, प्लीज राजा छोड़ो मुझे, तुम यह क्या कर रहे हो? लेकिन मैंने उनकी एक भी बात ना सुनी और मैंने अपने हाथ उनके बूब्स पर रख दिए और उनके बूब्स दबाते हुए उनकी गर्दन पर किस करने लगा उम्म्म उम्म अह्ह्ह में आपसे बहुत प्यार करता हूँ आंटी उम्म्म में आपको चोदना चाहता हूँ। दोस्तों बूब्स दबाने से आंटी तेज़ी से सिसकियाँ ले रही थी, अह्ह्ह्ह उह्ह्ह प्लीज राजा छोड़ो मुझे, थोड़ा होश में आओ, एम्म्म आह राजा, अब में बूब्स दबाता रहा और फिर मैंने उन्हें बिल्कुल सीधा किया और उनके होंठो को चूसने लगा उम्म्म एम्म उम्म्म आंटी उम्म्म उम्म्म। अब उनकी धड़कने बहुत तेज़ होती जा रही थी और अब उनका विरोध भी धीरे धीरे कम हो रहा था और में उनके बूब्स के ऊपर किस करने लगा और मैंने उनका पल्लू नीचे गिरा दिया, इसस्सस्स राजा प्लीज छोड़ो उम्म्म्म अह्ह्ह्हह राजा, राकेश देख लेगा, उह्ह्ह्ह। अब वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी थी। फिर मैंने किस करते हुए उनके ब्लाउज को खोल दिया और उतारकर फेंक दिया और अब उनके बूब्स को दबाते हुए किस करने लगा, अह्ह्ह्ह राजा प्लीज ऐसा मत करो, अह्ह्ह्हह उईईइ प्लीज राजा छोड़ दो आअहहअया। में बस अब उन्हें चोदना चाहता था और मैंने बिना देर किए उनकी साड़ी और पेटीकोट को नीचे सरका दिया और उनकी गांड और बूब्स को दबाते हुए किस करने लगा, आह्ह राजा बस करो उम्म्म उईईइ अह्ह्ह्ह राजा प्लीज छोड़ो मुझे अह्ह्ह्ह राजा। 

    अब में अपने होंठो को बूब्स पर रखकर बूब्स चूसने लगा और ज़ोर ज़ोर से निचोड़ने लगा और अब वो पागल होने लगी उम्म्म उम्म्म उहहहह उहह में तेज़ी से बूब्स को दबाकर उन्हें चूस रहा था। दोस्तों वाह क्या मस्त बूब्स थे, उस साली को मज़ा आ गया और वो अब मस्ती में आकर चुसवा रही थी और सिसकियाँ ले रही थी, आह्ह्ह्हह आईईईई राजा दर्द हो रहा है प्लीज अउईईइ बस करो, लेकिन में नहीं रुका और मैंने एक हाथ उसकी कम बालों वाली चूत पर रख दिया और मेरा हाथ लगते ही वो तेज़ से चिल्लाई उफ्फ्फ्फ़ राजा प्लीज अब बस छोड़ दो मुझे अह्ह्ह्ह। फिर मैंने तुरंत अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिए और अब में उसकी चूत को सहलाने लगा, वो अब बहुत गरम हो चुकी थी। फिर मैंने नीचे जाकर अपनी जीभ उसकी चूत में लगाकर उसकी चूत को चाटने लगा तो वो आह्ह्ह्ह राजा उईईइ बस करो, में अब सह नहीं पा रही हूँ, अह्ह्ह राजा आअउहह। वाह दोस्तों क्या मस्त स्वाद था उसकी चूत का। में अब अपनी पूरी जीभ को चूत के अंदर डालकर चूसने लगा, आह्ह्ह्ह राजा उहह उम्म्म उम्म्म और अब उसका एक हाथ मेरा सर उसकी चूत में दबा रहा था और मैंने ज़्यादा देर करना ठीक ना समझते हुए सारे कपड़े उतार दिए और उसका एक पैर हाथ से उठाकर उसको किस करने लगा, उम्म्म उह्ह्ह्ह अब मैंने महसूस किया कि उसकी सिसकियों की आवाज दब गई है।

    फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहं से सटाकर एक ज़ोर का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गीली चूत में फिसलता हुआ समा गया और उस ज़ोर के धक्के की वजह से उसने तेज़ी से चिल्लाते हुए अपनी दोनों आखों को बंद कर लिया, आह्ह्ह्ह राजा प्लीज बाहर निकालो इसे, मुझे बहुत दर्द हो रहा है ईससस्स अह्ह्ह्हह प्लीज अब बस करो, लेकिन में अब सुनने वाला नहीं था और में उसे तेज़ी से धक्के देकर चोदने लगा और वो आँख बंद किए हुए सिसकियाँ भरती रही, आआअहह आअहह उफ्फ्फ्फ़ राजा बस करो प्लीज आईईईइ अब नहीं। फिर में उसके होंठ चूसते हुए अपना लंड और स्पीड से लगातार अंदर बाहर करता रहा और वो आँख बंद किए चुदवाती रही। दोस्तों में आपको बता नहीं सकता उसकी चूत में क्या मस्त लंड जा रहा था? में अब उसे गोद में उठाकर तेज़ी से धक्के देकर चोदने लगा और वो मेरे कंधे पकड़कर मस्ती में चुदवाने लगी, उईईइ आआहह राजा बस उम्म्म बहुत दर्द हो रहा है आआहह। दोस्तों में उसे लगातार धक्के देकर चोद रहा था और फिर मैंने उसे किचन की अलमारी में बैठा दिया और चोदने लगा और हर धक्के से उसके बूब्स ज़ोर से हिल रहे थे और उसकी सिसकियाँ मुझे जानवर बना रही थी, अअयाउहह उम्म्म उम्म इससस्स। अब उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरी पीठ पर नाख़ून गड़ाने लगी तो में तुरंत समझ गया कि यह अब झड़ने वाली है और मैंने भी अपनी स्पीड को तेज़ कर दिया और चोदता रहा, आह्ह्ह्हह राजा अउईईइ माँ में गई, आआहह इससस्स अयाआहह और फिर वो झड़ गई और में भी साथ में झड़ गया और थककर पास में खड़ा हो गया, वो अपने बाल ठीक करते हुए अपना सर नीचे करके बैठी रही। फिर मैंने उससे कहा कि आंटी मुझे माफ़ करना, लेकिन में आपको बहुत पसंद करता हूँ तो इसलिए में खुद को रोक नहीं पाया। फिर वो मुझसे बिना कुछ बोले अपने कपड़े उठाकर बाथरूम में चली गई और में चुपचाप हॉल में जाकर बैठ गया। फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे अपने रूम से आवाज़ देकर बुलाया तो में उनके रूम के बाहर जाकर खड़ा हो गया और उन्होंने मुझसे अंदर आने को बोला और अब वो दरवाजा बंद करके मुझसे लिपट गई। फिर वो बोली कि तुम बहुत अच्छे हो राजा, आज तुमने मुझे चोदकर बहुत ख़ुशी दी है और में कई दिनों बाद मुझे किसी ने इतना जमकर चोदा है और वो मुझे किस करने लगी। फिर में भी उनको किस करने लगा और उस रात हमने तीन बार चुदाई की और थककर सो गए। सुबह में अपने घर चला आया और अब जब भी समय मिलता है तो हम चुदाई करते है ।।

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    देसी चुदाई की दास्ताँ 

    मेरा नाम विश्वा है. मेरी उम्र 25 साल की है. मै कोलकाता के एक अमीर घर का इकलौता वारिस हूँ. मेरे घर पर मेरे पापा और मम्मी के अलावा और कोई नहीं रहता. मेरे पापा एक जाने माने बिजनसमैन हैं. मम्मी घर पर ही रहती हैं. घर काफी बड़ा होने के कारण घर के काम काज करने घर में एक नौकरानी भी रख ली गयी है. नौकरानी का नाम मानसी है. वो बिहार के किसी गाँव की थी. उम्र कोई 23- 24 साल की होगी. तीन बच्चों की माँ होने के बावजूद देखने में काफी खुबसूरत भी थी. लेकिन मेरा ध्यान उस पर नही जाता था. मै अपने कालेज से आ कर सीधे अपने कमरे में चला जाता और अपना काम करता.

    मानसी सुबह के छः बजे ही आ जाती थी जब सभी कोई सोये रहते थे. वो आ कर सबसे पहले सभी कमरों की सफाई करती थी.

    एक दिन घर में पापा और मम्मी नहीं थे . वो दोनों मेरे मामा के यहाँ गए थे. उस रात मै अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था. मै आराम से नंगा हो कर पूरी रात फिल्म देखता रहा. फिल्म देखने के दौरान ैंने 3 बार मुठ मार लिया. मै कब नंगे ही निढाल हो कर बिस्तर पर सो गया की मुझे पता भी नहीं चला. सुबह के छः बजे मानसी मेरे घर आई. उसके पास भी मेरे घर की एक चाभी रहती थी. इसलिए मुझे पता भी नही चला कि मानसी आई है. और मै नंगा ही सोया हुआ था. मानसी मेरे कमरे में अचानक आ गयी. उसने मुझे नंगा सोया हुआ देखा तो वो मुझे वापस नहीं लौट मेरे कमरे की सफाई करने लगी. सफाई कर के वो वापस दुसरे कमरे में चली गयी. उसकी ड्यूटी सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक की थी. आज मम्मी पापा थे नहीं इसलिए उसे नाश्ता भी बनाना था.

    मै सुबह के नौ बजे उठा. मैंने अपने आप को नंगा पाया तो सोचा चलो कोई बात नहीं किसने मुझे देखा है? अचानक कमरे में नजर दौड़ायी तो देखा हर सामान करीने से रखा हुआ है. तो क्या मानसी मेरे कमरे में आयी थी? क्या उसने मुझे नंगा देख लिया? मै सोच कर शर्मा गया. मै सोचा क्या सोचती होगी वो. मेरी तो सारी इज्ज़त मिटटी में मिल गयी. खैर मैंने कपडे पहने और अपने कमरे से बाहर आया. देखा मानसी किचन में काम कर रही थी. थोड़ी देर के बाद जब मै फ्रेश हो गया तो मैंने मानसी से नाश्ता मांगा. उसने मुझे पराठा और सब्जी ला कर दी. मै चुप चाप खाता रहा.

    मैंने धीरे से पूछ लिया – मेरे कमरे की सफाई तुमने कर दी? मानसी ने कहा- हाँ. मैंने कहा – कब? मानसी ने कहा – जब आप सोये हुए थे. मेरा गाल शर्म से लाल हो गया.

    मैंने थोड़े गुस्से में कहा- मुझे जगा कर ना मेरे कमरे में आना चाहिए था?

    मानसी ने लापरवाही से कहा- क्यों? पहले तो कभी जगा कर कमरे में नही जाती थी. आप कितनी बार सोये रहते और मै आपके कमरे की सफाई कर देती हूँ. फिर आज मै क्यों आपको जगा कर आपके कमरे में जाती?

    बात भी सही थी.

    मैंने कहा- अच्छा सुनो, मम्मी को नहीं बता देना आज सुबह के बारे में.

    मानसी – क्या?

    मैंने कहा – यही कि विश्वा बाबा नंगा सोया हुआ था.

    मानसी ने मुस्ुरते हुए कहा – सिर्फ नंगे सोये थे आप? आपके तौलिये में ढेर सारा माल है वो किसका था?

    मैंने कहा – हाँ जो भी था. किसी को बताना नही.

    मानसी ने कहा- चिंता नहीं करें. नहीं बताऊँगी. अरे आप जवान है. ये सब तो चलता रहता है.

    मै अब कुछ निश्चिंत हो गया. उसने मुझे जवान होने के कारण कुछह छुट दे दी . मै खा रहा था.

    मानसी ने कहा- एक बात कहूं विश्वा बाबु? बुरा तो नहीं मानोगे?

    मैंने कहा – बोलो क्या बात है?

    मानसी ने कहा- आपका हथियार छोटा है. इसे बड़ा कीजिये. नहीं तो आपकी बीबी क्या कहेगी.

    मैंने कहा – हथियार? ये हथियार क्या है?

    मानसी – हथियार मतलब आपका लंड.

    कह के वो मुस्कुराने लगी. ये सुन के मेरा दिमाग सनन रह गया. तो इसने मेरे लंड का साइज़ भी देख लिया. हाँ ये बात सच थी की मेरे लंड का साइज़ छोटा था और मै इस से काफी चिंतित भी रहा करता था. लेकिन मेरे लंड पर टिप्पणी करने का अधिकार मानसी को किसने दे दिया? मै अचानक उठा और अपने कमरे में आ कर लेट गया. मुझे मानसी पर काफी गुस्सा आ रहा था.

    थोड़ी देर के बाद मेरा गुस्सा कुछ कम हुआ.

    मै सोचने लगा – सचमुच मेरे लंड का साइज़ छोटा है. जब मेरी शादी होगी तो मेरी पत्नी क्या सोचेगी.?

    ये सोच कर मै परेशान हो गया. अचानक दिल में ख़याल आया कि हो सकता है की मानसी को इसे इलाज़ के बारे में कुछ देशी नुस्खा पता हो. मैंने पहले अपने सभी खिडकी को बंद किया और फिर वहीँ से मानसी को आवाज लागई. मानसी मेरे कमरे में आई.

    मैंने मानसी से कहा- क्या कर रही है तू अभी?

    मानसी – कुछ नही बाबा. बस इधर उधर सफाई कर रही थी.

    मैंने कहा – वो सब छोड़. देख न मेरा बदन बड़ा दुःख रहा है क्या तू मेरी मालिश कर देगी?.

    वो मेरे बगल में मेरे बिस्तर पर बैठ गयी. बोली – हाँ , क्यों नहीं .आप लेट जाओ मै आपकी मालिश कर देती हूँ.

    मै कहा – नहीं सिर्फ कंधे को थोडा दबा दो कह कर मैंने शर्ट उतार दिया. .

    वो मेरे कंधो की मालिश करने लगी. फिर बोली – ये गंजी भी खोल दो बाबा, अच्छे े तल लगा कर मालिश कर देती हूँ. मैंने गंजी उतार दिया. और बिस्तर पर लेट गया.मै सिर्फ हाफ पैंट में था. वो मेरे नंगे छाती और पीठ की बेहतरीन तरीके से मालिश कर रही थी. घर में कोई नहीं था और एक औरत मेरे बदन की मालिश कर रही थी. मामला फिट था. लगा अब सही मौका है इसे शीशे में उतारने का.

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    मै उसकी चूची को घूरने लगा. वो मेरी नजर को पढ़ रही थी लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

    मैंने उस से कहा – मानसी , तू दिन भर काम करती है. थकती नहीं है क्या?

    मानसी मेरे छाती पर हाथ फेरती हुई बोली – साहब, थकती तो हूँ , मगर काम तो निपटाना होता है न.

    मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी मालिश रोकते हुए कहा – आज कौन सा काम है तुझे. देखो न घर में कोई है भी नहीं बात चीत करने के लिए . मै बहुत बोर हो रहा हूँ. तू यहाँ बैठ मेरे पास. आज तुझसे ही बात करके मन बहलाऊंगा.

    मानसी – अच्छा बाबा. जैसा आप कहें.

    मैंने – ठीक से बैठ ना ..नहीं तू लेट जा….आराम से.. इसे अपना बिस्तर समझ.

    मैंने जब ये कहाँ तो वो धीरे से ेर बिस्तर पर मेरे बगल में लेट गयी. उसकी बड़ी बड़ी चूची किसी गुम्बद की तरह ऊपर की तरफ ताक रही थी. मेरी नजर कामुक होने लगी. मै उसके ढीले ब्लाउज में से झांकते उसके गोरे गोरे चुचियों पर नजर गडाने लगा. वो भी मेरी नजर को ताड़ गयी थी. उसने जान बुझ पर अपनी साडी का पल्लू नीचे कर दिया और कहा – आज बड़ी गरमी है ना विश्वा बाबा.

    अब उसकी चुचीयों के गहरी घाट बड़ी आसानी से दिख रहे थे. उसके चूची के घाट के ऊपर में कुछ गुदा हुआ सा था. मुझे लग गया कि ये बहूत ही खुली हुई मस्त औरत है और इस से कुछ गरम बातें की जा सकती है. वैसे भी घर पर कोई और है नहीं.

    मैंने उसके साड़ी के पल्लू को उसके बदन से दूर हटाते हुए कहा कहा – हाँ सही कह रही है तू, बड़ी गरमी है. वो बिना किसी परेशानी के मेरे बदन में सट गयी थी.

    फिर मै उसके बदन से थोडा और सटते हुए मैंने अपना एक हाथ उसके पेट पर रखा और कहा – और बता, तेरे घर में कौन कौन है.

    उसने बेफिक्री के साथ कहा – मै, मेरा मरद और तीन बच्चे,

    मैं उसकी नाभी पर उंगली फेरते हुए कहा – तीन बच्चे? तू लगती तो नहीं तीन बच्चों की माँ.

    मानसी – साहब 23 साल में ही तीसरी बच्चे की माँ बन गयी थी. अभी तो वो दो साल का भी नहीं हुआ है.

    मैंने उसकी नाभि में उंगली डालते हुए पूछा – पहला बच्चा कितने साल में पैदा कर दी थी तुने.

    मानसी – जब पहला पैदा हुआ था तो मेरी उम्र 20 साल की थी . दुसरे के वकत मै 22 साल की और तीसरे की वक़त 24 साल की थी.

    मै उसके नाभि में उंगली डाल रहा था लेकिन उसने किसी प्रकार का कोई प्रतिरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढी और मैंने उसके चूची की घाटी के उपरी हिस्से पर गुदे हुए अक्षर पर अपना हाथ ले गया और उस से पूछा – मानसी , ये क्या है?

    मानसी – ये? जब मै आठ-नौ साल की थी तभी मेरी दादी ने मेरे सीने पर ये गुदवा दिया था. इसमें मेरा नाम लिखा हुआ है.

    इधर मेरा लंड टाईट होने लगा था .

    मै जान बुझ कर उसके चूची पर हाथ रखे रहा और काफी धीरे धीरे सहलाते हुए कहा – मुझे आज तक पता नहीं था की तू तीन बच्चे की माँ है. मुझे लगा कि तेरी अभी अभी शादी हुई होगी. तेरा बदन तो एकदम ढीला नहीं हुआ है.

    मानसी – अच्छा? बदन ढीला होता है तो क्या होता है?

    मैंने उसके चूची को दबाते हुए कहा – देख, तेरी चूची अभी भी किसी कुंवारी लड़की से कम टाईट थोड़े ही है. मैंने दोनों चूची को बारी बारीसे दबा दबा कर मुस्कुराते हुए कहा – तू अभी भी किसी कुंवारी लड़की से कम नहीं.

    मानसी – वो तो मेरा मरद भी कहता है.

    मै उसके चूची को खुल्लम खुल्ला जोर जोर से दबाने लगा.अब मुझे अन्दर से काफी यकीन हो गया कि इस से कुछ और भी काम करवाया जा सकता है. मैंने अपनी एक टांग उसके ऊपर चढाते हुए उस से सट कर कहा – मानसी अगर मै तुमसे एक सवाल पूछूंगा तो तुम बुरा तो नहीं मानोगी?

    मानसी ने कहा – पहले पूछिए तो सही.

    मैंने कहा – तू अपने मरद से रोज़ सेक्स करती है क्या?

    मानसी – सेक्स मतलब?

    मैंने कहा – मेरा मतलब तू अपनी पति से रोज़ चुदवाती हो क्या?

    मानसी – नहीं , रोज़ तो नहीं लेकिन लगभग हर तीसरे दिन वो मुझे चोद ही डालता है.

    मैंने कहा – मानसी, तुमने जो कहा की हथियार यानी लंड को बड़ा कीजिये . कितना बड़ा होना चाहिए ये?

    मानसी – उतना तो जरुर होना चाहिए कि बीबी को खुश रख सके.

    मैंने कहा – तेरे मरद का कितना बड़ा लंड है?

    मानसी – कोई ख़ास नहीं. लेकिन ठीक ठाक है.

    मैंने कहा – मेरा लंड क्या सचमुच काफी छोटा है? क्या मै सचमुच अपनी बीबी को खुश नही कर पाऊँगा?

    मेरे सवाल को सुन कर वो मुसुकुराने लगी .मैंने भी उस कि चूची को मसलते हुए फिर कहा – ए, बोल ना, मेरा लंड क्या सचमुच काफी छोटा है? क्या मै सचमुच अपनी बीबी को खुश नही कर पाऊँगा? क्या कोई उपाय है क्या लिंग को बड़ा करने का?

    मानसी ने हँसते हुए कहा- अरे विश्वा बाबु ,इतने सारे सवाल एक साथ? मै क्या कोई मास्टर हूँ? मै तो मज़ाक कर रही थी, लंड के छोटे बड़े होने से बीबी को थोड़े ही कोई फर्क पड़ता है? वैसे आपका लंड इतना भी छोटा नही है.

    मानसी के मुह से लंड शब्द सुन कर मेरे मन में कुछ होने लगा.

    मैंने कहा- अच्छा, ये बता कि बीबी को तो बड़ा लंड चाहिए ना?

    मानसी ने कहा- मर्द का लंड कितना भी ोटा क्यों ना हो वो बीबी को चोद ही डालता है. बीबी की चुदाई हर लंड से की जा सकती है.

    मानसी के इतना खुल के बोलने पर मै पूरी तरह से आज़ाद हो गया.

    मैंने उस पर लगभग चढ़ गया और अपना लंड उसके बदन पर दबाते हुए पूछा – अगर बीबी की गांड मारनी हो तो?

    मानसी ने कहा – वो भी होती है. चूत और गांड सभी आराम से मार सकते हो.

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    मैंने उसके चूची को जोर से दबाते हुए कहा – मानसी, बड़े लंड से चुदवाने पर औरत को ज्यादा मज़ा आता है या दर्द होता है?

    मानसी – ये तो चुदने वाली औरत पर निर्भर करता है कि वो नयी है पुरानी. अगर नयी हुई तो छोटा लंड भी उसे दर्द देगा. लेकिन अगर पुरानी हुई तो बड़ा लंड भी उसे मज़ा देगा.

    मैंने मानसी से कहा- मानसी , अगर तुम बुरा नहीं मानो तो क्या तुम मेरे लंड को देख कर बता सकती हो की मेरा लंड कितने पानी में है?

    मानसी ने मुस्कुराते हुए कहा- ठीक है. आप पैंट उतारो . मै देखती हूँ आपके लंड को .

    मैंने पैंट उतार दिया. अब मै अंडरवियर में था. मेरा लिंग खडा हो गया था .

    मैंने कहा- बताओ.

    मानसी ने कहा – अरे बाबा , पूरा दिखाओ ना. ये अंडरवियर उतारो ना.

    मेरा दिल जोर से धड़क रहा था. मैंने आज तक किसी मर्द के सामने अपने लंड को नहीं दिखाया ये तो औरत है. लेकिन फिर भी मन में एक अजीब सा आनंद था कि कोई औरत स्वयं ही मेरे लंड को देखना चाहती है. इसलिए मैंने थोडा हिचकते हुए अपने अंडरवियर को अपने लंड से थोडा नीचे किये. मेरा लंड सामने आ गया.

    मानसी जमीन पर ठेहुने के बल बैठ गयी और अपना मुह मेरे लंड के सीध में लेते आई. मेरे लंड को वो गौर से देख रही थी . उसने मेरे अंडरवियर को पकड़ा और जमीन तक लेते आई. मैंने पैर उठा कर अंडरवियर को पुरी तरह खोल दिया. अब मै कमर के नीचे बिलकूल नंगा था. अचानक मानसी ने मेरे लंड को पकड़ा और उसे सहलाने लगी. मेरा लंड तनतना गया .

    मैंने कहा- ये क्यों कर रही हो?

    मानसी ने कहा- देख रही हूँ कि कितना बड़ा होता है.

    मुझे काफी आनंद आ हा ा. मेरे सामने रात वाली ब्लू फिल्म का सीन दौड़ने लगा.

    मैंने कहा – बोल ना? कैसा है मेरा लंड?

    मानसी – बढ़िया है बाबा. एकदम परफेक्ट.

    मैंने कहा – अब बता , तेरे मरद से बड़ा है कि छोटा..?

    मानसी – बिलकूल बराबर है.

    मैंने कहा- मानसी, आज तक मैंने किसी औरत का चूत नहीं देखा है तू अपनी चूत मुझे दिखा ना. मै सिर्फ देखूँगा. कुछ करूंगा नहीं.

    मानसी ने कहा- ठीक है. इसमें कौन सी बड़ी बात है.

    कह कर वो खडी हुई और एक झटके में अपनी साडी खोल दी. उसने पेंटी नहीं पहन रखी थी. उसने खुद ही अपनी पेटीकोट को थोड़ी नीचे कर दी . मै उसके चूत को एकटक निहार रहा था. चिकना चूत था उसका. चौड़ा और फुला हुआ.

    मैंने कहा- ये पेटीकोट पूरा खोल ना.

    उसने अपनी पेटीकोट पूरी तरह से खोल दी. अब वो सिर्फ ब्लाउज में थी. इधर मेरा लंड तनतना रहा था.

    मैंने झट से कहा- मानसी मै तेरे चूत को छूना चाहता हूँ.

    वो बोली – छु लो ना. इसमें कौन सी बड़ी बात है?

    मै उसके चूत को सहलाने लगा. बिलकूल ही कोमल पत्ते की तरह बुर था . उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया. अब मै कुछ भी करने के लिया आज़ाद था. मैंने एक हाथ उसके चूची पर रखा और सहलाने लगा. अगले मिनट में ही मैंने उसके चूची को भी नंगा कर दिया. अब वो मेरे सामने बिलकूल नंगी खड़ी थी और मेरा लंड सहला रही थी.

    मैंने कहा – मानसी, तेरी चूत एकदम इतनी चिकनी कैसी है? क्या रोज़ शेविंग करती हो?

    मानसी – मेरा मर्द है ना. वो हर सप्ताह मेरी चूत अपनी रेजर से साफ़ कर देता है. ये सुनते ही मेरा लिंग इतना बड़ा हो गया था कि मैंने कभी कल्पना भी नही की थी कि मेरा लंड इतना बड़ा हो सकता है.

    मैंने कहा – हाय, इतनी चिकनी चूत देख मुझे इसे चूसने का मन कर रहा है.

    मानसी – तो चुसो ना साहब इसे.

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    मैंने मानसी को अपने बिस्तर पर लिटा दिया और उसके चूत पर अपनी जीभ घुसा कर उसे चाटने लगा. ानसी 3 बच्चों की माँ हो कर भी किसी कुवारी लड़की से कम नहीं थी. उसका बुर और चूची में काफी कडापन था. थोड़ी देर में उसके चूत ने मस्त पानी निकाला. मै उसके पानी को चाटने के बाद धीरे धीरे मै ऊपर की तरफ बढ़ा और उसकी चूची को मुह में ले कर चूसने लगा.

    मेरा लंड तनतना रहा था. मानसी ने मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी.

    वो बोली – विश्वा बाबा, एक काम करो. तुम अपना लंड मेरे चूत में डालो. तब पता चलेगा कि तुम्हारा लंड का साइज़ सही है कि नहीं.

    मैंने कहा – तू मुझसे चुदवायेगी?

    वो बोली – हाँ, क्यों नहीं. जरा देखूं तो सही. बाबा का हथियार सही है या नहीं?

    मै मन ही मन काफी खुश हो गया. मैंने अपने लंड को एक हाथ से पकड़ा और मानसी के बुर में घुसा दिया. जब मेरा लंड मानसी के बुर में अन्दर जा रहा था तो मुझे काफी मज़ा आया. मैंने काफी अन्दर तक अपना लंड घुसा दिया. लेकिन वो कराहने लगी.

    वो बोली – बस बाबा, अब और अन्दर नहीं जाएगा. बहुत बड़ा है तेरा लंड. अब यही से चोदो.

    मैंने उसके चूत को चोदना शुरू कर दिया. उसके बुर में जा कर मेरा लंड और भी बड़ा और मोटा हो गया. मानसी के मुह से आह आह की आवाज निकलने लगी.

    वो बोली – धीरे धीरे कीजिये ना. दर्द होता है.

    मुझे महसूस हुआ कि जिस लंड को मै हमेशा छोटा मानता आया हूँ वो किसी महिला के भी बुर में दर्द पैदा करने के लिए काफी है. 5 मिनट की चुदाई के बाद उसके बुर ने दोबारा पानी छोड़ दिया. 10 मिनट तक चुदाई करने के बाद मेरा माल निकलने वाला था. उसे अनुभव हो गया था कि मेरा माल निकलने वाला है.

    वो बोली – माल अन्दर में मत गिरा देना साहब .

    ज्यों ही मेरा शरीर अकड़ने लगा त्यों ही उसने अपने कमर को नीचे कर के मेरे लंड से अपने बुर को निकाल ली और झट से नीचे आ कर मेरे लंड को अपने मुह में ले ली. 3-4 सेकेंड में ही मेरा लंड महाराज से वीर्य निकलना शुरू हो गया. कुछ वीर्य उसने पी ली और कुछ उसके मुह से बाहर निकल आया.

    थोड़ी देर के बाद उसने कहा- देखा ना िश्वा बाबु, लंड छोटा या बड़ा नही होता. सभी लंड चुदाई के लिए अव्वल होते हैं.

    थोड़ी देर के बाद मैंने अपने लंड की साइज़ की सत्यता जांचने के बहाने मानसी की गांड की भी चुदाई की . उस में भी मै सफल हो गया.

    मानसी ने आज मुझे विश्वास दिला दिया कि मर्द कभी भी नामर्द नहीं हो सकता. मैंने उसे एक हज़ार का पत्ता निकाल के दिया. उस के बाद जब भी मौक़ा मिलता मै मानसी को अवश्य ही चोदता हूँ . इसके लिए मैं मानसी को अलग से सभी से छुपा कर पैसे भी देता हूँ.

    therealsthings

    Pyasi bhabhi

    harddick21blog

    भाभी और ननद की अठखेलियाँ 

    सबसे पहले मैं आप सबको बता देती हूँ कि मेरा नाम सीमा है. मेरी उम्र 30 साल की है. फिगर बड़ा मस्त है.. एकदम सांचे में ढला हुआ, ये 32-36-38 का कटाव लिए हुए है. ख़ास बात ये कि मैं एकदम दूध सी गोरी और मक्खन सी कोमल हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 3 इंच है, मैरिड हूँ. मेरे पति का जॉब विदेश में होने के कारण वे मुझसे अलग बाहर ही रहते हैं. मैं यहां अपने बेटे के साथ रहती हूँ.. लेकिन लास्ट ईयर से बेटा पढ़ाई के कारण हॉस्टिल में रहने लगा है, सो अभी मैं अकेली ही रहती हूँ.

    अब जब दस साल से पति बाहर हैं, कभी कभार आते हैं तो तो मेरी सेक्स की इच्छा अधूरी ही है और वैसे भी मेरे पति को सेक्स में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है, मुझे अभी सिर्फ़ साल में 2-3 बार ही सेक्स का सुख मिल पाता है, जिससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूँ.

    अब चूंकि जब से अकेली रहने लगी हूँ, तब से मेरे मन में सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए किसी और के साथ सम्बन्ध बनाने को लेकर बहुत सोचती हूँ, लेकिन थोड़ा डर भी लगता है, सो हिम्मत नहीं कर पाती हूँ.

    मुझे नवरात्रों में डांडिया खेलने का बड़ा शौक है, मैं नवरात्रि में गरबा करने घाघरा चोली पहन कर हमारे काम्प्लेक्स के नज़दीक में, जहां गरबा होता है, वहां चली जाती हूँ

    एक दिन वहां मुझे एक मेरे से छोटी उम्र की महिला मिली. उसका नाम रीना था, वो मेरे पास वाले फ्लैट की है. उस लेडी से मेरी दोस्ती हुई. वो भी मेरी तरह शौकीन मिजाज की थी.

    अब हम दोनों का नवरात्रि के बाद भी एक दूसरे के घर आना जाना, बात करना शुरू हो गया था. हम दोनों एक सी विचारधारा की थी तो अपनी पर्सनल बातें भी करने लगी थी. वो मुझे कई बार बोलती थी कि आप इतने साल से बिना सेक्स किए कैसे रहती हो.. मुझे तो मेरा पति रोज एक बार तो चोदता ही है, फिर भी मैं संतुष्ट नहीं हो पाती हूँ, सो मैं दूसरे के पास भी चली जाती हूँ.

    इस तरह से उसने मुझे उसके लव अफेयर के बारे में भी बताया उअर मुझसे पूछा- आपका कोई ब्वॉयफ्रेंड है? तो मैंने ना बोला.

    एक दिन उसने मुझसे बोला- आज सिनेमा देखने का मूड है, चलो सीमा, चलते हैं. मैं भी बोर हो रही थी, मैंने हां बोल दिया. हम सिनेमा के लिए हमारी सोसायटी से थोड़े दूर ही निकले थे कि एक फ़ौरचूनर कार आई. उसने मुझसे बोला- चलो सीमा, गाड़ी में बैठो. मैं तो कुछ समझ ही नहीं पायी. कार में आगे की सीट पर ड्राइवर और एक गन वाला आदमी था.

    बीच की सीट में एक उम्रदराज आदमी बैठे थे, समझो करीब 60 साल के ऊपर के रहे होंगे. वो आदमी एकदम हट्टा कट्टा, थोड़ा काला, मुँह में पान चबाए हुए था. वो कुर्ता और लुंगी पहने हुए एक मुस्लिम था. उसकी दाढ़ी भी एकदम सफ़ेद थी. रीना उसके पास बैठी और मैं रीना के पास बैठ गई. अब हम तीनों फिल्म देखने आ गए, वो रीना के कंधे पे हाथ डालकर बैठा था और जब थोड़ा अंधेरा हो जाता तो वो उसके मम्मों को दबा देता था.. ये सब मैं देखती थी.

    फिर आधी फिल्म खत्म हुई, तो हम निकल आए. वो अपनी कार को सिटी से दूर एक फार्महाउस पर ले गए, वहां मुझे एक हॉल में बिठा कर वो दोनों करीब दो घंटे तक एक रूम में जाकर एंजाय करते रहे.. फिर उसने हम दोनों को घर छोड़ा.

    मैंने रीना से पूछा तो उसने बताया कि मैंने तुम्हें बोला था ना, मेरा लवर है. मैंने बोला- इतनी उम्र का? तो वो बोली- उम्र से क्या होता, वो कितना पैसा मेरे लिए खर्च करता है और जितना सेक्स का मजा देता है, ऐसा तो कोई 25 साल का लड़का भी नहीं देगा. मैं उसकी बात सुनकर हतप्रभ थी.

    ऐसे ही मैं उसके साथ 3-4 बार गई और वो दोनों एंजाय करते थे.

    एक दिन रीना मेरे घर आई थी. उसने मुझे बोला- सीमा तुम्हारे लिए एक ऑफर है.. बताऊं? मैंने बोला- हां, बोला ना?

    उसने बोला कि मुझे उन्होंने मतलब उसके लवर ने बोला है कि उनका एक दोस्त हैदराबाद से अगले वीक दो नाइट के लिए आने वाला है, यदि तुम उनको खुश करो तो..! मैंने तो एकदम मना कर दिया- तुम क्या बोलती हो रीना! फिर उसने बोला- जल्दी मत करो सीमा.. आराम से सोचना.. फिर बोलना, एकदम से मत बोलो. देखो तुम वैसे भी बिना सेक्स तड़पती हो, ये मैं जानती हूँ. तुम कैसे अपनी रातें काटती होगी, यहां तुम्हें सेक्स का सुख भी मिलेगा और सेफ्टी भी, ऊपर से वो तुम्हें 2 नाइट के लिए 1 लाख रूपया भी देंगे.

    मैं उसकी बात सुनकर चुप रही. फिर उसने अपने फोन से उसके लवर को कॉल किया और बोला- मैंने सीमा से आने को बोला है. लेकिन वो मना करती है.

    फोन स्पीकर पर था, तो सामने से उन्होंने बोला- देखो कोई बात नहीं.. ये तो मैंने सोचा कि तुम्हारी सहेली है, इसलिए.. वरना मेरे पास 10 औरतों का बायोडाटा फोटो के साथ है. वो तो मेरे दोस्त को एकदम घरेलू जैसी ही चाहिए थी, सो मैंने बोला, बाकी जैसी उसकी मर्ज़ी, लेकिन जो भी है, मुझे कल बताना. फिर जिसको सिलेक्ट करूँगा, उसके लिए कपड़े वगैरह भी सब बनाना है.

    इतनी बात के बाद उसने कॉल कट कर दिया. रीना भी मुझे सोचने का समय देकर चली गई.

    उस दिन पूरी रात मुझे नींद नहीं आई. मैं सोचती रही. मेरे मन में सेक्स की तो इच्छा थी ही, रात में सेक्स के बारे में सोचते सोचते मेरी चूत से दो बार पानी निकल गया, पूरी पेंटी गीली हो गई.

    सुबह में रीना का मैसेज आया- क्या सोचा? मैंने बोला- तू पहले घर आ … फिर देखती हूँ. फिर वो आई, मैंने बोला- रीना मैंने आज तक कभी ऐसा नहीं किया, सो डर लगता है, सोसाइटी में किसी को पता चलेगा तो? रीना ने बोला- इस सबकी तुम बिल्कुल चिंता मत करो.. मैं हूँ ना.. और वैसे भी तुम्हें मालूम है, मेरे लव का, वो अपने एरिया के कॉरपोरेटर हैं और यहां के डॉन हैं. कोई तुम्हारे सामने आँख उठा कर भी नहीं देख सकेगा, जब कोई जानेगा कि तुम किसके साथ रीलेशन रखती हो, तो वैसे ही चुप हो जाएगा.

    मैं चुप हो गई.. तो उसने सीधा फोन लगाया और उनको बोला कि सीमा तैयार हो गई है, अब और किसी को मत बोलना. मैं तो देखती ही रह गई थी और उसने सीधा हां बोल दिया था. खैर.. मैंने भी मन बनाने को सोचा कि जो होगा देखा जाएगा. फोन अभी चालू था और स्पीकर पर था.

    उधर से उन्होंने बोला- ठीक है तो 3 बजे तुम दोनों बाहर आजो, मैं तुम्हें शॉपिंग के लिए ले जाऊंगा.. अभी 5 दिन बाकी हैं.

    हम 3 बजे बाहर गए, उनकी कार आ कर हम दोनों को एक बहुत महंगे टेलर के पास ले गई. जहां कपड़ा भी उनके पास ही था, सिर्फ़ हमें कलर और फेब्रिक पसंद करना था.

    मैंने और रीना ने कपड़े पसंद किये. मेरे लिए एक चोली घाघरा का कपड़ा पसंद किया. सिर्फ वो कपड़ा ही 25 हजार का था, उसकी सिलाई 15 हजार थी. फिर हम मॉल गए, उधर हमने 3-4 सैट फैंसी अंडरगारमेंट लिए, मेकअप का सामान वगैरह सब ले लिया. उन्होंने उस दिन मेरे लिए 75 हजार से भी ज़्यादा खर्चा किया.. ये सब तो सिर्फ़ मुझे सजाने के लिए खर्च किया गया था.

    रीना मुझे शनिवार की सुबह में ही लेके निकल गई थी. वो बोली थी कि ब्यूटीपार्लर जाना है. जब मैं वहां आ गई तो मेरी बगलों के बाल, मेरी चूत के बाल, लेग वगैरह सब जगह वॅक्स करके एकदम मुझे चिकनी बंदी बना दिया गया.

    इसके बाद मुझे वो करीब 4 बजे फार्म हाउस लेकर गई. मैंने देखा पूरे फार्महाउस पे सजावट हो रही थी. इतने आदमी काम कर रहे थे कि मुझे लगा कि कोई जलसा है. मैंने बोला- इतना क्या है रीना यहां? उसने बोला- वो जो उनके दोस्त आने वाले है, उनके लिए पार्टी अरेंज की है, ये सब उसी की तैयारी हो रही है. रात में पार्टी होगी, करीबन 150 लोग होंगे. पार्टी में सब मर्द उनके, जो बिजनेस रिलेटेड हैं, वे सब शिरकत करेंगे.

    ये देख कर मैं शर्मा रही थी.

    उसने बोला- अब चिंता मत करो.. चलो ऊपर चलते हैं. आज का तुम्हारा रूम दिखाती हूँ, जिधर तुमको संतुष्टि मिलेगी.

    जब उसने ऊपर जाकर रूम खोला, तो मैं हैरान थी. बाप रे.. मैं देख कर दंग रह गई. पूरा बड़ा हॉल जैसा रूम था, जिसमें 10×10 का एक बेड लगा हुआ था, उस बेड को ताजे फूलों से खूबसूरत तरीके से सजाया जा रहा था. अभी काम चालू था. एक तरफ सोफा था, एक डाइनिंग टेबल भी थी. मैं तो पागल जैसे रह गई थी.

    रीना बोली- सीमा, आज तुम्हारी सच में सुहागरात होगी. यह कह कर वो हंसने लगी. मैं भी थोड़ा मुस्कुरा दी.

    मुझे फिर उसने तैयार किया, चोली घाघरा पहनाया. मेरे लिए सोने का नैकलेस, रिंग, कंगन आदि सब लाया गया था. वो सब पहन कर दुल्हन की तरह सज गई. फिर रीना बोली- देखो अब वो 8 बजे आएँगे, तुम्हें उनका वेलकम करने जाना है ओके.. सिर्फ़ तुम अकेली होगी, तब मैं नहीं आऊंगी. तुमको उन्हें गुलदस्ता देकर गेट से पार्टी में लेकर आना होगा. फिर बारी बारी सब लोग उनको वेलकम करने आएँगे, फिर पार्टी शुरू होगी, तो वो तुम्हें लेकर ऊपर आएँगे.

    अब रीना धीरे से बोली- सीमा देखो. वो बहुत पैसे वाले हैं.. हां उम्रदराज हैं.. लेकिन अगर तुम उनको खुश करोगी, तो वो तुम्हें मालामाल कर देंगे. मैं चुप रही.

    फिर उसने बोला कि तुम्हारे बेड पे एक वाइट सिल्क का पेटीकोट रखा है, जब आप दोनों चुदाई शुरू करो, तुम अपने नीचे उसे रख लेना क्योंकि आज तुम्हारी रियल सुहागरात होगी, ब्लीडिंग हुई तो वो बेडशीट खराब ना हो और तुम्हें अपने सुहागरात की निशानी भी तो रखनी है ना.

    इतना कह कर मुस्कुरा दी.

    सब सैट हो गया था. अब मुझे भी चुदाई का इन्तजार था. ठीक 8 बजे वो आए, मुझे रीना का लवर लेकर गया- चलो सीमा, बॉस आ गए हैं. मैं गई, उनको गुलदस्ता देकर स्वागत किया. जब मैंने उनको देखा.. बाप रे कम से कम 6.5 फिट की हाईट, बहुत मोटा सा आदमी एकदम काला भुजंग, करीब 65 साल की उम्र दिखती थी.. दाढ़ी एकदम सफ़ेद थी. वो कुर्ता पजामा में था.

    जब मैंने गुलदस्ता दिया, उन्होंने जानबूझ कर मेरे हाथ को भी छू लिया था. वे मेरे बदन को पूरा निहार रहे थे. उनका वजन कम से कम 125 किलो का होगा. मैं एकदम घबरा गई थी लेकिन अब मेरे पास कोई रास्ता भी तो नहीं था. वो स्टेज पे मुझे अपने साथ लिए खड़े रहे, जैसे उनकी मैं बीवी होऊं. वो मुझे लेकर खड़े रहे.. बारी बारी सब लोग आकर उनको विश करते थे.

    ठीक 9 बजने को आया, सब लोगों का मिलना पूरा हुआ तो रीना के लवर ने बोला कि बॉस अब आप भी ऊपर जाके खाना खाइए, आपकी पसंद का गुजराती भोजन तैयार है. यह कह कर वो थोड़ा मुस्कुराया.

    हम तीनों ऊपर चले गए. नीचे पार्टी चालू थी. हम रूम में आए, रीना के लवर ने बोला- बॉस प्लीज़ अन्दर जाइए, आज की नाइट के लिए बेस्ट ऑफ लक.. सीमा तुम्हें भी बेस्ट ऑफ लक.

    जैसे ही उनके साथ मैं रूम में गई, वो भी अन्दर आ गए और उन्होंने दरवाजा लॉक कर दिया. मैंने देखा कि डायनिंग टेबल पर हर तरह के स्वीट, जूस, फ्रूट आदि सजे थे. एक से एक डिश सजी थीं.. पानी की बॉटल रखी थीं.

    उन्होंने मुझसे बोला- सीमा, मुझे मालूम है तुम्हें रात में सिर्फ़ जूस एंड फ्रूट लेने की आदत है.. सो मैंने खाने के लिए सिर्फ़ वो ही तैयार करवाया है, लेकिन आज हमारी पहली मुलाकात है, सो स्वीट तो चलना ही चाहिए. इसलिए थोड़ी स्वीट भी रखी है. चलो बैठो, हम खाना खाते हैं.

    हम दोनों बैठ गए, फिर उन्होंने मुझे एक गुलाब जामुन मेरे मुँह में डाला. मैंने आधा खाया और आधा उनके मुँह में डाल कर खिलाया. फिर हम दोनों ने 2-3 तरह के जूस पिए. एक-दूसरे का झूठा खाया. बिल्कुल पति पत्नी जैसी फीलिंग आ रही थी.

    अब उन्होंने बोला- बस मेरा हो गया. फिर हम दोनों साथ में जाकर हाथ धोकर आए. उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. मैं तो सोच नहीं सकती थी कि इस उम्र में एकदम इतना पावर होगा. उन्होंने एक झटके में मुझे उठाया और बेड पे लेकर गए.

    मैंने उनको बोला- लाइट ऑफ कीजिए ना. तो वो बोले- अरे जानेमन.. जिस जिस्म को देखने हम पिछले एक वीक से तड़प रहे थे, बिना लाइट के उस हुस्न को कैसे देखेंगे. जब से तुम्हारी फोटो देखी है, हम तो तुम्हारे दीवाने हो गए थे जान. उनकी बात सुनकर मैं शर्मा गई.

    फिर उन्होंने धीरे से मुझे बांहों में लेकर किस करना शुरू किया. धीरे से मेरी पीठ पर मेरी ब्लाउज में हाथ डालकर ऊपर से सहलाना शुरू किया. जब उनका हाथ मेरे बदन पे पड़ा, लाइफ पे पहली बार मुझे लगा कि कोई मर्द का हाथ है. उनके हाथों का स्पर्श एकदम मजबूत और सख्त था. अब मैंने भी धीरे से उनको बांहों में लेकर क़िस करना शुरू किया. मुझे तो ये सब करते ही एकदम पहली बार पानी छूट गया था.

    अब उन्होंने मेरा ब्लाउज खोला और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगे.. चूचियों को सहलाने लगे. अब उन्होंने मेरा घाघरा भी निकाल दिया. मैं सिर्फ़ ब्रा पेंटी में रह गई थी. वो मेरे बदन को सहलाते निहारते रहे और मैं उनके बदन की सख्ती को स्पर्श करती रही.

    जैसे ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोला, मेरे चूचे एकदम से बाहर उछल आए. वो अपने हाथ से मेरे मम्मों को मसलने लगे. मैंने धीरे से उनके सिर को मेरी एक चूची पे लगाकर एक निप्पल उनके मुँह में डाल दिया. मैं अपने हाथ से अपने चूचे दबाकर उनको चुसवाने लगी.

    बारी बारी से वो मेरे दोनों अंगूर चूसते रहे. वे मेरे दोनों चूचुकों को बहुत हार्ड सक कर रहे थे. मैंने बोला- आह.. धीरे जी.. काटना मत प्लीज़.

    उन्होंने मुझे उनके कपड़े निकालने को बोला. मैंने पहले उनका कुर्ता निकाला. जब मैंने उनका पज़ामा देखा, मैं एकदम बेहाल हो गई. उनके पजामे का आगे का भाग इतना उभरा हुआ था कि मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था.

    फिर मैंने पजामा निकाला तो अंडरवियर के ऊपर से देखा कि उनका लंड बहुत मोटा था. मेरे मुँह से निकल गया- बापरे इतना मोटा??? मैंने तो लाइफ में पहली बार देखा है.. मैं इसे नहीं ले पाऊंगी. उन्होंने मुझे बांहों में लेकर बोला- सीमा डरो मत… कुछ नहीं होगा. हां फर्स्ट टाइम थोड़ा दर्द होगा, वो तो वैसे भी तुम्हारी रियल सुहागरात है, तो दर्द तो होगा ही.

    यह कह कर वो मुस्कुराने लगे. फिर मैंने उनका अंडरवियर निकाला, एकदम काला कम से कम दस इंच लंबा और मेरी कलाई से भी मोटा लंड था उनका.. बिना स्किन का सुपारा था, एकदम चिकना और काला चुकन्दर जैसा दिख रहा था.

    अब धीरे से उन्होंने मुझसे बोला- सीमा तुम इसे मुँह में लो.

    मैं धीरे से नीचे जाके उनके पैरों के बीच में बैठ गई और उनका सुपारे पर किस करके धीरे धीरे मुँह में लंड लेना शुरू किया. उस सुपारे से कुछ मस्त कर देने वाली महक आ रही थी. कुछ ही पलों में मुझे लंड चूसना अच्छा लगने लगा. मैंने कम से कम 20 मिनट उनका लंड पूरा चूसा.

    अब उनका मूसल सा लंड एकदम हार्ड हो गया था.. मेरी लार से.. और उनके रस से, उनका पूरा लंड चिकना हुआ पड़ा चमक रहा था. इस समय वो मेरी चूत में उंगली डालकर सहला रहे थे, मेरी चूत भी एकदम गीली हो गई थी. मैं एकदम गरम हो गई थी.

    फिर उन्होंने मुझसे बोला- अब लेट जाओ सीमा रानी.. मैं लंड अन्दर डालता हूँ. मैं अपने पैर खोल कर चित हो गई. फिर वो मेरे ऊपर आकर बोले- सीमा मेरा वजन झेल लोगी ना? मैंने बोला- हां..

    जैसे उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के होल पर रखा, मैंने अपने हाथ से उसे थोड़ा सा अपनी चूत पे घिसते हुए लंड को चुत के होल के ऊपर रखा और उनको धीरे से बोला- हां अब डालो. उन्होंने लंड को अन्दर डालने की जैसे ही कोशिश की, मेरे मुँह से ज़ोर से चीख निकल गई- बाप रे ईई.. मर गईईई.. कोई बचाओ.. फिर भी उन्होंने एक ज़ोर से झटका मार दिया. मेरी चूत तो जैसे फटी जा रही थी. ऐसा लग रहा था कि आज किसी ने गरम सरिया मेरी चूत में पेल दिया हो.

    मैं लगभग बेहोश हो गई थी. फिर वो थोड़ी देर रुके, फिर एक ज़ोर से झटका मारा. मैंने मरी सी आवाज में बोला- अभी कितना गया? उन्होंने बोला- आधा गया है.. अब एक ही झटके में पूरा घुस जाएगा सीमा. यह कहते ही उन्होंने एक ज़ोर से झटका दे मारा, मेरी आँख से आँसू निकल गए. उनका पूरा मूसल लंड मेरी चूत के अन्दर चीरता हुआ चला गया.

    मैं दर्द से कलप उठी. करीब 5 मिनट वो ऐसे ही पड़े रहे. फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी चूत में लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया. कुछ देर के दर्द के बाद अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. हां मेरी चूत के अन्दर बहुत जलन हो रही थी, दर्द भी बहुत ज्यादा था, अब खूब मज़ा भी आने लगा था.

    वो मेरे ऊपर ही चढ़े हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोद रहे थे.. साथ में मेरे बूब्स को भी दबा रहे थे. मैं उनकी पीठ सहलाती जा रही थी. मेरे मुँह से मस्त कामुक आवाजें निकल रही थीं- उहह.. अहह..

    कुछ देर की मस्त चुदाई से हम दोनों के बदन एकदम पसीने से भीग गए थे. वे मुझे पेलते हुए बोले- सीमा तुम मेरी लाइफ में 22 वीं औरत हो, जिसे मैं चोद रहा हूँ.. लेकिन तुम जैसी इतनी कमाल कोई नहीं देखी.. आह.. क्या मस्त चूत है, साली लंड को छोड़ती ही नहीं है.. एकदम अन्दर पकड़ के रखा है.

    उनकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा दी और उनको चूम लिया. उन्होंने मुझे कम से कम 45 मिनट तक चोदा.. इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी. वे अब भी मुझे चोदने में लगे थे.

    वो तभी एकदम तेज हुए और बोले- अब मेरा निकलेगा.. आज पहली बार है सो चूत में ही निकालूँगा. तभी एक ज़ोर से गरम पिचकारी मेरी चूत में मुझे फील हुई और मेरी चूत पूरी भर गई. वो मेरे ऊपर ही छा गए. दस मिनट तक लंड को चुत में डालकर पड़े रहे. नीचे मेरी चूत से रस बह रहा था.

    फिर वो मेरे ऊपर से उतरे, देखा नीचे मेरे वाइट पेटीकोट पर बहुत खून निकला हुआ था.. उनका वीर्य भी था. वो खुश होकर बोले- देखो, ये सच्ची सुहागरात हुई.

    उन्होंने अपने दोस्त को कॉल किया कि रीना को भेजो, मेरी सीमा उसको ये पेटीकोट, उसकी सुहागरात की निशानी देना चाहती है. वे मुझे चूमते हुए बोले- जाओ थोड़ा दरवाजा खोलकर तुम ये रीना को देकर आओ.

    मैं जरा लंगड़ाते नंगी ही गई, थोड़ा दरवाजा खोला तो बाहर से रीना बोली- बधाई हो सीमा.. उसने मेरे हाथ से पेटीकोट लिया और चली गई. वो जाते हुए बोली- पूरी रात के लिए बेस्ट ऑफ लक.

    उस रात उन्होंने मुझे पूरी रात में 5 बार चोदा. मैं सुबह उठ ही नहीं पा रही थी, इतना दर्द हो रहा था.

    वैसे ही दूसरे दिन भी उन्होंने मुझे 5 बार चोदा.

    इसके बाद मुझे विदाई मिली, बहुत सारे जेवर, रुपए और सबसे बड़ी बात मेरी चूत को संतुष्टि मिली.

    उसे चुत चुदाई से ज्यादा अपनेपन की जरूरत थी (किसी और की जुबानी)

    दोस्तो, मेरी ये कहानी बहुत रोमांचक है कि कैसे मैंने एक बिज़नेस वुमन की चूत और गांड का मजा लिया। मेरी सभी कहानियां सच पर आधारित होती हैं, सिर्फ पार्टनर का नाम काल्पनिक होता है।

    सुबह के सात बजे थे एक अनजान नंबर से मेरे मोबाइल पर कॉल आया। में थोड़ी देर और सोना चाहता था इसलिए मैंने फ़ोन साइलेंट कर दिया।

    नौ बजे जब मैं सो कर उठा तो उसी अनजान नंबर से पूरे पांच मिस कॉल थे। मैंने लेटे हुए ही फ़ोन लगाया एक ही घंटी में वहां से फ़ोन उठ गया और सुबह सुबह एक मिश्री जैसी मीठी आवाज मेरे कानों में गूंजी- हेलो… मैं सोनाली बोल रही हूँ नोएडा से, मुझे आपका नंबर मेरी फ्रेंड ने दिया है। मैं कल से तीन दिन के सेमिनार में ग्वालियर जा रही हूँ और चाहती हूं कि आप मुझे अपनी कंपनी दें।

    Advertisement Scroll Up मैंने उसकी फ्रेंड के बारे में थोड़ी जानकारी करी और जब मैं संतुष्ट हो गया कि मैं उसकी फ्रेंड को जानता हूँ तो बात शुरू की। मैंने हँस कर पूछा- ठीक है, पर यह बताओ कि सिर्फ कंपनी चाहिए या सर्विस भी चाहिए। वो खिलखिला कर हँस दी और कहा- कंपनी और सर्विस दोनों चाहिए, फीस की चिंता मत करिए। मैंने भी कहा- आपको भी जो चाहिए वही मिलेगा।

    तय हुआ कि वो काल सुबह जल्दी नोएडा से अपनी कार से निकलेगी और मुझे सिटी सेन्टर मेट्रो स्टेशन से पिक कर लेगी।

    अगले दिन सुबह 5:30 पर वो अपनी होंडा सिटी कार से मेट्रो स्टेशन पहुँच गयी; मैं पांच मिनट लेट था; गाड़ी नंबर मेरे पास था इसलिए मैं गाड़ी तक पहुँचा, उसने मुझे गाड़ी के अंदर आने का इशारा किया। मैंने गाड़ी का दरवाजा खोल कर उसे हेलो कहा और उससे हाथ मिलाया। मेरे बैठते ही उसने गाड़ी आगे बढ़ा दी।

    सोनाली की उम्र लगभग 35 के आसपास थी। बॉडी शेप पतला था उसका लेकिन बूब्स का साइज लगभग 34 था। बहुत कड़क माल थी सोनाली। उसने ब्राउन कलर का ट्रॉउजर, व्हाइट कलर की शर्ट और ब्राउन कलर का ही शार्ट कोट पहना हुआ था। उसके नैन नक्श बहुत आकर्षक थे। पूरी गाड़ी उसके बदन की खुशबू से महक रही थी।

    उसने बताया कि वो पहले सेमिनार में जाएगी और वहां एक घंटा रुक कर फिर मेरे साथ ही रहेगी। सोनाली की गाड़ी अब एक्सप्रेस वे पर पहुँच चुकी थी।

    उसने बताया कि उसकी फैमिली में वो ओर उसके हस्बैंड ही हैं। उनका गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग का बिज़नेस है। फैक्ट्री के काम के लिए उसके हस्बैंड कोलकाता गए हैं। इसलिए सेमिनार में उसी को जाना पड़ रहा है।

    हमारे देश में सेक्स सबसे ज्यादा सोचे जाने वाला विषय है लेकिन आज भी हम सेक्स के बारे में बात करने से हिचकते हैं। लेकिन इसके उलट सोनाली ने मुझसे खुल कर सेक्स के बारे में बात शुरू कर दी- सुनो प्रियम, मैं अपनी रूटीन लाइफ से बोर हो चुकी हूं। मुझे लाइफ में थोड़ा फन चाहिए लेकिन हमारे बीच जो भी होगा वो हमेशा सीक्रेट ही रहेगा। अगर मेरे हस्बैंड मुझे सेक्सुअली सन्तुष्ट रख पाते तो मैं तुम्हें कभी कॉल नहीं करती। महीने में मुश्किल से एक या दो बार ही हम सेक्स करते हैं, उसमें भी उनका बहुत जल्दी हो जाता है और मैं पूरी रात सुलगती रहती हूं। मेरा आज तक मेरे पति के अलावा कभी भी किसी के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं रहा। लेकिन जैसे पेट की आग के लिए खाना जरूरी है वैसे ही शरीर की आग शरीर से ही बुझती है। बस कैसे भी मेरी शरीर की आग शांत कर दो प्रियम।

    मैंने कहा- सोनाली, मैं पूरी कोशिश करूंगा कि तुम्हें भरपूर सेक्स का मजा दूँ।

    बात करते हुए पहला टोल आ चुका था। अब मैं ड्राइविंग सीट पर था और कनिका मेरे बगल वाली सीट पर। प्रियम मुझे तुम्हारा लण्ड देखना है। मैंने कहा- अगले तीन दिन यह मेरा नहीं, तुम्हारा लण्ड है, तुम्हें जो करना है करो।

    इतना सुनते ही वो थोड़ा सा करीब आयी और मेरी पैंट की चेन खोल दी। अंडरवियर के अंदर मेरा लण्ड खड़ा हुआ था। सोनाली लण्ड को अंडरवियर के ऊपर से ही दबाने लगी। एक्सप्रेस वे पर हमें किसी के देखे जाने का बिल्कुल डर नहीं था।

    सोनाली के हाथ के स्पर्श से मेरा लण्ड बाहर आने को मचल रहा था तो मैंने एक हाथ से अपनी पैंट के हुक खोल दिये। सोनाली को पैंट के अंदर हाथ डालने की जगह मिलते ही उसने अपना हाथ अंदर घुसा दिया। अब मेरा लण्ड सोनाली के हाथ में था। मेरे लण्ड की लंबाई ओर गरमाहट महसूस करते ही सोनाली कामोत्तेजित हो गयी, बोली- बहुत तगड़ा माल है तुम्हारा तो! मैं उसकी बात सुनकर सिर्फ मुस्कुरा दिया।

    “प्रियम, मुझे तुम्हारा लण्ड चूसना है अभी!” “तुम्हें जो करना है कर सकती हो।”

    ऐसा सुनकर सोनाली ने मेरा लण्ड बाहर निकाला और नीचे झुककर एक प्यारी सी किस लण्ड पर करी। मैंने अपना शरीर थोड़ा सा ढीला छोड़ दिया पर मेरा पूरा ध्यान ड्राइविंग पर था।

    सोनाली ने अब मेरे लण्ड को अपने मुख में लेकर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। चलती गाड़ी में सकिंग करवाना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। सोनाली पूरा लण्ड अपने मुंह में ले रही थी जिससे कभी कभी उसके गले से गूं गूं की आवाज निकल जाती थी।

    चलती गाड़ी में जितना भी हो सकता था उससे ज्यादा वो करने की कोशिश कर रही थी। अब उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी थी। मेरा लण्ड उसने चूस कर लाल कर दिया था। अब उसने मेरे लण्ड को सिर्फ अपने होठों से चूसना शुरू किया। मेरा लण्ड सिर्फ उसके होठों से छूकर उसके मुँह के अंदर जा रहा था। मतलब कि उसकी जीभ मेरे लण्ड से बिल्कुल भी टच नहीं हो रही थी। जैसे ही सोनाली के होंठ मेरे लण्ड पर नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे जाते एक अजीब सी सिरहन मेरे शरीर में दौड़ जाती। किसी अनुभवी खिलाड़ी की तरह वो मेरे लण्ड से खेल रही थी। बीच बीच में वो मुझे देखकर मुस्करा भी जाती थी।

    अगला टोल आने वाला था, मैंने पूछा- क्या मैं लण्ड का पानी तुम्हारे मुँह में निकाल दूँ? तो उसने अपने हाथ के इशारे से मुझे मना कर दिया।

    थोड़ी देर और चूसने के बाद वो सीधी होकर बैठ गयी और लंबी लंबी सांसें लेने लगी। उत्तेजना की वजह से उसका बुरा हाल था। मैंने उसे पानी की बोतल दी। हम दोनों ने गाड़ी साइड में रोककर अपने कपड़े ठीक किये और चल दिये।

    अब सोनाली ने मेरे करीब आकर मेरे गालों पर एक किस किया और मुझे थैंक्स बोला- प्रियम, मुझे बहुत अच्छा लगता अगर मैं तुम्हारे लण्ड का पानी पी पाती… लेकिन मुझे पहले सेमिनार में जाना है और मैं नहीं चाहती कि मेरे कपड़े खराब हो जाएं। और कपड़ों से ज्यादा मुझे अपने मूड की चिंता है कि अगर ये खराब हो गया तो फिर सिर्फ होटल का रूम दिखाई देगा। मैं उसकी बात सुनकर हँस दिया।

    “प्रियम, तुम्हारा लण्ड वाकई बहुत तगड़ा है। बस अब मुझे इतना चोदना कि मेरा दम निकल जाए। मैं कितना भी मना करूँ लेकिन तुम मुझे चोदना बंद मत करना।” मैंने कहा- ठीक है, ये मेरा वादा है कि ये ट्रिप आपके जीवन की सबसे यादगार ट्रिप होगी। मेरे लण्ड की जी भर के सवारी कर लेना।

    उसने मुझे एक किस ओर दी और अपने बैग से लिपस्टिक निकाल कर अपने होठों पर लगाने लगी। उसकी सारी लिपस्टिक मेरा लण्ड पहले ही खा चुका था।

    जिस होटल में सोनाली का सेमिनार था उसी होटल में उसका एक रूम पहले से ही बुक था। सोनाली ने मेरे लिए भी अलग से एक रूम बुक करा दिया था। प्लान था कि वो मेरे रूम में मेरे साथ रहेगी जबकि उसका रूम खाली ही रहेगा।

    रास्ते में खाते पीते और बातचीत करते हुए हम ग्वालियर पहुँच गए। गाड़ी पार्किंग में लगाकर हमने रिसेप्शन पर अलग अलग चेक इन किया। सोनाली का रूम सेकंड फ्लोर पर था और मेरा रूम थर्ड फ्लोर का। सोनाली ने अपने रूम से मुझे फ़ोन किया कि वो लंच टाइम में सेमिनार खत्म करके मेरे पास आ जायेगी। तब तक मैं आराम करूँ।

    मैं फ्रेश होकर आराम करने लगा और सोनाली के बारे में सोचने लगा; कैसी फुद्दी होगी कैसे मुम्मे होंगे… सोचते सोचते मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैंने अपने लण्ड को समझाया कि रुक जा बेटा थोड़ी देर इंतज़ार कर… अभी तुझे थोड़ी देर में खुराक मिल जाएगी।

    एक बजे सोनाली का फोन आया कि वो एक घंटे में फ्री होकर आ रही है, उसके आने से पहले में खाना रूम में मँगा लूं। मैंने डेढ़ बजे बियर और खाने का आर्डर कर दिया।

    सोनाली जब रूम में आयी तो खाना आ चुका था। सोनाली एक छोटा बैग लेकर मेरे रूम में आयी थी। आते ही मैंने उसे बिस्तर पर गिरा दिया और अपने होंठ उसके होठों से लगा दिए। सोनाली भी मेरा साथ देने लगी। मेरे हाथ उसकी शर्ट के ऊपर से ही उसके मुम्मे दबा रहे थे उसने पैडेड ब्रा पहनी हुई थी। सोनाली भी मेरा लण्ड मेरे लोअर के ऊपर से मसल रही थी। मैंने सोनाली के शर्ट के बटन खोल दिये और ब्रा को उतार दिया। उसके मुम्मे 32 साइज के थे जो पैडेड ब्रा की वजह से 34 के लग रहे थे। मुम्मों के ऊपर ब्राउन निप्पल बहुत छोटी थीं शायद उसके पति ने ठीक से कभी उसके मुम्मे न दबाये थे न उनका रसपान किया था।

    मैंने उसके बाएं मुम्मे को अपने मुँह में पूरा भर लिया, उसकी सिसकारी निकल गयी। उसने अपना हाथ मेरे लोअर के अंदर डाल दिया और मेरे लण्ड को कसकर दबाने लगी। मैं उसके दोनों मुम्मे बारी बारी से पी रहा था। उसके भूरे चूचुकों को मैंने जैसे ही अपने दांतों से काटा, उसने उत्तेजना के मारे अपनी जीभ मेरी जीभ से उलझा दी। बहुत देर तक हम एक दूसरे को किस करते रहे।

    मैंने कहा- सोनाली, पहले खाना खा लेते हैं, उसके बाद में तुम्हारी चूत चाटूंगा। बड़ी मुश्किल से मैंने उसे खुद से अलग किया।

    सोनाली टॉपलेस थी, उसी पोजीशन में हम दोनों ने साथ में बियर पी और फिर खाना खाया। अब मेरे दिल में भी तमन्ना थी कि इसकी चूत देखूँ।

    हम दोनों बेड पर आ गए। हमने एक कंबल ओढा और एक दूसरे से चिपक गए। हम दोनों के हाथ एक दूसरे के कपड़े उतारने में लग गए। मैंने सोनाली का ट्राउज़र और पैंटी एक साथ उतार दी। उसने भी मेरा लोअर अपने पैरों से खींच कर उतार दिया।

    कम्बल के अंदर हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने एक हाथ सोनाली की चूत पर रखा और उसे सहलाने लगा। सोनाली की चूत पर बहुत छोटे छोटे बाल थे। मैं अपनी उंगली इसकी चूत की खांप में फिराने लगा। सोनाली ने भी मेरा लण्ड अपने हाथ से पकड़ा और मेरा मुट्ठ मारने लगी।

    “सोनाली, तुम्हें अच्छा तो लग रहा है ना?” “बहुत अच्छा लग रहा है प्रियम!” यह कहकर वो घूमकर मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में आ गयी। उसकी चूत की खुशबू मुझे आनंदित कर रही थी।

    उसकी चूत का दाना फड़क रहा था, मैं उसके दाने को अपने दोनों होठों से चूसने लगा। अचानक से उसे कुछ याद आया, वो उठी और उसने अपने बैग से एक चॉकलेट निकाला। चॉकलेट बैग में रखे होने की वजह से पिघल गया था। उसने पिघली चॉकलेट को अपनी चूत और मेरे लण्ड पर लगाया और फिर से 69 पोजीशन में आ गयी। अब हम दोनों एक दूसरे के यौन अंगों को स्वाद लेकर चाटने लगे।

    मैंने सोनाली की चूत चाट चाट कर पूरी चॉकलेट साफ कर दी थी। सोनाली को अपनी चूत चटवाने में बहुत मजा आ रहा था। वो अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत मेरे मुँह में घुसाए जा रही थी। मैंने भी अब अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर तक घुसा दी। अब मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदने लग गया।

    सोनाली भी मेरा लण्ड पागलों की तरह चाटे जा रही थी। अब उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी चूत का दबाव मेरे मुँह पर बढ़ गया; उसका पानी छूटने ही वाला था। मैंने भी अब उसकी चूत में अपनी जीभ की स्पीड बढ़ा दी। दो मिनट बाद सोनाली झड़ गयी। मैंने भी तुरंत अपना पानी उसके मुँह में छोड़ दिया। अब हम एक दूसरे के प्रेम रस को पीने लगे।

    सोनाली ने मेरे लण्ड के आस पास का पूरा हिस्सा चाट कर गीला कर दिया था। अब वो उठ कर मेरी छाती पर बैठ गयी और अपनी उंगलियों मेरे बालों में फिराने लगी। उसकी गुलाबी चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत बिल्कुल कसी हुई लग रही थी। लगता नहीं था कि उसको कभी कोई तगड़ा लण्ड मिला भी होगा।

    “प्रियम, तुमने तो अभी से मेरी हालत खराब कर दी यार… शरीर की एक एक नस खोल दी है तुमने! काश मेरा पति भी तुम जैसे होता!” यह कहते हुए उसकी आंखें गीली हो गईं। मैंने उसे अपने ऊपर लिटाया और समझाया- नसीब में जो होता है वही मिलता है।

    उसने मुझे कस कर अपनी बाहों में कैद कर लिया- अब चोदो मुझे… इतना चोदो कि मेरी चूत से खून निकलने लगे। “रानी, मेरा भी लण्ड मचल रहा है तुम्हारी चूत में जाने के लिए।”

    मैंने सोनाली को लिटाकर उसकी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख लीं। ऐसा करने से उसकी चूत थोड़ी और उभर गयी। मैंने अपना लण्ड उसके छेद पर सेट किया और हल्का सा झटका मारा; सिर्फ टोपा ही मुश्किल से अंदर जा पाया और दर्द की वजह से उसने भी अपने होठों को भींच लिया।

    मैंने बहुत धीरे धीरे लण्ड को अंदर पेलना शुरू किया; थोड़ी कोशिश के बाद मेरा लोहे जैसा लण्ड सोनाली की चूत में पूरा घुस गया था। सोनाली की चूत किसी कुंवारी लड़की की चूत की तरह ही टाइट थी। उसकी हालत भी खराब थी।

    थोड़ी देर मैं उसकी चूत में लण्ड को डाले बैठा रहा। जब वो थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू किया। सोनाली अपने दोनों हाथों से अपने मुम्मे दबाये जा रही थी- आह… आह.. प्रियम आह… उम्म.. ओ… आह… चोदो मुझे… जोर से चोदो मुझे… सोनाली की कामुक आवाजों से पूरा कमरा गूंज रहा था।

    मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी थी, सोनाली भी मेरे हर धक्के का जवाब अपनी गांड उठा कर दे रही थी। उसकी चूत अब थोड़ी गीली हो गयी थी, मेरा लण्ड आसानी से अंदर जा रहा था। अब मैंने उसकी एक टांग को नीचे किया और थोड़ा टेढ़ा होकर लण्ड को अंदर पेलने लगा। इससे उसकी चूत की दीवारों में लण्ड का घर्षण बढ़ गया।

    साथ ही मैं एक उंगली धीरे धीरे उसकी गांड में घुसाने लगा। मैं सोनाली को ये संकेत दे रहा था कि अब तेरी गांड की ही बारी है। काफी देर की लगातार चुदाई के बाद उसका बदन अकड़ने लगा, सोनाली ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होठों को चूमने लगी। वो अब किसी भी वक़्त स्खलित हो सकती थी।

    मैंने भी उसके ऊपर लेटे लेटे झटकों की स्पीड और बढ़ा दी। पांच मिनट बाद दोनों एक साथ बह निकले। उसने अपनी टाँगे कैंची की तरह मेरी टाँगों में फंसा दी। पानी छूटने के बाद भी हम दोनों आधे घंटे तक एक दूसरे से चिपके रहे। “प्रियम यू आर अमेजिंग… (प्रियम तुम अदभुत हो) इतना लंबा सेक्स मेरे पति ने कभी भी नहीं किया है। तुमने मेरा दिल जीत लिया है। थैंक्स प्रियम, मुझे यह दिन हमेशा याद रहेगा। मुझे खुशी है कि मैंने सही इंसान चुना।”

    सोनाली ने मुझे भी भरपूर मजे दिए थे इसलिए मैंने भी उसे थैंक्स कहा।

    मैंने अगले तीन दिन तक उसकी जबरदस्त चुदाई करी। चूत के साथ उसने अपनी गांड का भी मुझे मजा दिया। सोनाली लण्ड के लिए बहुत प्यासी थी और मैंने उसकी उम्मीद से भी ज्यादा प्यास बुझा दी थी। सेमिनार उसने सिर्फ पहले और आखिरी दिन अटेंड किया। उसके बाद उसने मुझे नोएडा छोड़ दिया।

    आज भी सोनाली मेरी रेगुलर क्लाइंट है। जब भी उसे मेरी जरूरत होती है वो मिलने का प्लान बना लेती है।

    बॉडी मसाज से चूत चुदाई तक का सफ़र (किसी और की जुबानी)

    मेरा नाम राहूल है और मै चंडीगढ में रहता हूँ. मेरी उम्र 25 साल है. मैं आपको मेरी वो कहानी बताऊंगा, जो कुछ समय पहले ही घटी है. ऊपर वाले ने मेरे साथ क्या खेल खेला, ये आपको भी जानने का हक है.

    घर की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मैंने काम करने का फैसला लिया. परंतु बहुत ढूंढने के बाद भी कुछ नहीं हुआ.

    इसी बीच मैं एक बार दाढ़ी बनवाने के लिए सैलून गया, वहां पर एक पोस्टर लगा था, जिसमें लिखा था कि बॉडी मसाज के लिए 22+ युवकों की आवश्यकता है. यहां पर आपको पहले ट्रेनिंग दी जाएगी. इस सब डिटेल के बाद नीचे नम्बर दिया हुआ था.

    मैं नौकरी का मारा, मैंने तुरन्त उस नम्बर पर कॉल किया और पोस्टर में बताई गई जगह पर पहुंच गया. मैंने वहां जाते ही मैनेजर से बात की, सेल्फ आइडेंटिफिकेशन के लिए आधार व अन्य कुछ दस्तावेज दिए और उसी दिन से मेरी ट्रेनिंग चालू हो गई.

    लगभग एक महीने में मैंने बॉडी मसाज का पूरा कोर्स कम्पलीट कर लिया. उसके बाद मैनेजर ने मुझे वेतन देना चालू कर दिया. फिर 2-3 महीने तक में केवल सैलून में ही आने वाले लोगों को बॉडी मसाज देने लगा. लेकिन मैं संतुष्ट नहीं था. क्योंकि मुझे वेतन बहुत कम मिलता था. मैं अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाता था.

    तब मैंने मैनेजर से कहा- सर मैं अब सैलून छोड़ना चाहता हूँ. मैनेजर ने कहा- हमारे सैलून में तुमसे अच्छा बॉडी मसाज कोई नहीं कर पाता, तुम छोड़ दोगे तो बहुत नुकसान हो जाएगा. मैंने कहा- जी जानता हूँ, फिर भी मैं मजबूर हूँ. मैनेजर ने कहा- ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा.

    मैंने वो जॉब छोड़ दी. इस नौकरी के बाद इन दिनों मैं बेरोजगार घूम रहा था. फिर एक दोस्त ने मुझे सलाह दी कि फेसबुक पर एक एकाउंट बनाओ, जिसमें डिटेल्स के रूप में तेरी बॉडी मसाज से जुड़ी जानकारी डाल देना.

    मैंने ऐसा ही किया, उसी दिन रात को मैंने एफबी पर एक एकाउंट बनाया, जिसमें सारी जानकारी डाल दी. कुछ देर तक फेसबुक चलाने के बाद मैं सो गया.

    अगले दिन कुछ 4-5 लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, मैंने एक्सेप्ट की और मैसेज भी कर दिए ताकि अगर उन्हें जरूरत हो तो वो मुझे सेवा का मौका दे दें.

    ऐसे ही लगभग 15 दिन तक मैं रोज उस एकाउंट पर एक्टिव रहता, इसी इंतजार में कि कोई मसाज के लिए मुझे बुक करे. लेकिन मैं हताश होता जा रहा था, कोई वापस मैसेज ही नहीं कर रहा था. बहुत लोगों को मैंने फ्रैंड लिस्ट में ऐड किया.

    फिर लगभग 1 महीने बाद एक औरत का मैसेज आया, जिसका नाम प्रेरणा (बदला हुआ) था, मैंने तुरंत उसे रिक्वेस्ट सेंड की, परंतु बहुत देर तक उसने एक्सेप्ट नहीं की. तब मैंने उसके मैसेज का रिप्लाई हैलो बोलकर किया.

    उसका तुरंत मैसेज आया कि आप बॉडी मसाजर हो? मैंने कहा- जी हां. प्रेरणा- मुझे कब का अपॉइंटमेंट दे सकते हो. मैंने- जब आप बोल दें तब.. प्रेरणा- जी.. मसाज देने का आपका चार्ज क्या है? मैंने- जी 1500 मात्र.

    प्रेरणा- ठीक है, वैसे आप कहाँ आ सकते हैं? मैंने- आपको जिधर उचित लगे, आप बता दें. प्रेरणा- ठीक है, आप मेरे घर ही आ जाना. मैंने- जी ठीक है, जैसा आप कहें. प्रेरणा- आप कल सुबह 10 बजे आ जाइयेगा.. मेरे एड्रेस पर आ जाएं और मुझे कॉल कर दें. ये मेरा कॉन्टेक्ट नम्बर है. मैंने- जी ठीक है, मैं पहुंच जाऊंगा.

    मैं उस दिन मैं बहुत खुश था.. क्योंकि बहुत दिनों बाद कोई काम मिला या. उस दिन मुझे सुकून की नींद आई.

    अलगे दिन मैं अपना सारा सामान लेकर बताई हुई जगह पर ठीक 10 बजे पहुँच गया. मैंने प्रेरणा जी को कॉल किया.

    मैंने- जी मैं अंकित.. मैं आपकी बताई जगह पर पहुंच गया हूँ. प्रेरणा- आप वहीं 5 मिनट रुकिए, मेरा ड्राइवर कार लेकर आता ही होगा, आप उसमें बैठ जाना, वो आपको ले आएगा. मैंने- जी ठीक है.

    फिर 5 मिनट बाद एक कार आई और ड्राइवर ने मुझे बैठने को कहा. मैं बैठ गया और वो मुझे एक आलीशान बंगले पर ले गया. उसने कार रोक कर कहा- आप पहुंच गए हैं.. मैडम अन्दर आपका इंतजार कर रही हैं.

    मैं गाड़ी से उतरा और दरवाजे पर जाकर बेल बजाई. जब दरवाजा खुला तब मैंने देखा कि एक साधारण से कपड़ों में एक महिला खड़ी थी. मैंने पूछा- आप ही प्रेरणा जी हैं? उसने कहा- नहीं मालकिन अन्दर हैं, आप आइये.

    मैं अन्दर गया और बंगले को बड़ी गौर से निहार रहा था, तभी अन्दर से एक महिला आ रही थी. वो दुल्हन जैसी लाल साड़ी पहने हुए थी और ऐसी लग रही थी मानो अभी मेरे पास आकर मुझे वरमाला पहना देगी. ये सब सोच ही रहा था कि वह मेरे पास आई और बोली- क्या हुआ इतनी गौर से क्या देख रहे हो आप.. आइये बैठिये.

    फिर मैंने अपना बैग सोफे पे रखा और बैठ गया. वो भी मेरे सामने सोफे पे बैठ गई. फिर उसने उसकी नौकरानी से पानी लाने के लिए कहा. तब मैं बोला- आप ही प्रेरणा जी हैं? उसने कहा- जी हां.

    तभी उसकी नौकरानी पानी लेकर आई, मैंने पानी पिया. फिर उसने कहना शुरू किया- आप मॉडलिंग या एक्टिंग भी करते हो क्या? मैं एकदम से शॉक हो गया कि ये ऐसा क्यों बोल रही है? तब मैंने पूछा- जी आप ऐसा क्यों पूछ रही हैं? प्रेरणा- आपकी बॉडी और पर्सनालिटी देखकर लगता है. मैंने- जी नहीं, केवल मैं एक बॉडी मसाजर हूँ. प्रेरणा- आप इतने स्मार्ट हो, पर्सनालिटी भी कमाल की है, आपको मॉडलिंग करनी चाहिए. मैंने- इसके लिए पैसे भी बहुत लगते हैं और वैसे भी मैं बॉडी मसाज करके ही खुश हूँ.

    फिर टॉपिक चेंज करते हुए मैंने कहा- चलिए अपना काम शुरू करते हैं. तब प्रेरणा अचानक बोली- मुझे एक्स्ट्रा सर्विस लगेगी, आपको एनर्जी ड्रिंक की जरूरत पड़ सकती है.

    मुझे लगा एक्सट्रा सर्विस का बोल रही है तो शायद ज्यादा देर तक मसाज करने का बोल रही है.

    तौ मैंने कहा- ठीक है. प्रेरणा ने अपनी नौकरानी को आवाज देते हुए कहा- फ्रीज से एक रेड बुल लेकर आना. फिर प्रेरणा ने मुझसे कहा- आज आपको मसाज का एक नया ही अनुभव मिलेगा. मैंने कहा- अच्छा है, मेरी सर्विस में भी और पूर्णता आएगी.

    इतने में नौकरानी रेड बुल लाई और मुझे दे दी, मैंने पी ली. प्रेरणा मुझे घूरे जा रही पी और साथ में कातिलाना स्माइल भी दे रही थी. मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि वो चाहती क्या है. तब मैंने कहा- अच्छा तो प्रोसेस स्टार्ट कहाँ करना है? प्रेरणा- बेडरूम में चलिए.

    वो बेडरूम की तरफ चल पड़ी, मैंने अपना बैग उठाया और मैं भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा. हम दोनों सीढ़ियों से होते हुए बेडरूम में पहुंच गए. तब मैंने कहा- जमीन पे चटाई लगा दीजिये. उसने नौकरानी को आवाज लगाई, उससे चटाई बुलवाई और जमीन पर लगा दी.

    मैं वहीं चटाई पर बैठ कर अपना बैग खोलने लगा. तभी प्रेरणा ने कहा- मैं चेंज करके आती हूँ. मैंने- जी ठीक है.

    वह चेंजिंग रूम में चली गई. तब तक मैंने अपना मसाज का सारा सामान बैग से निकालकर जमा दिया. कुछ देर बाद वो चेंजिंग रूम से बदन पर टॉवेल लपेट कर बाहर आई.

    मैं तो उसे देखते ही रह गया. हालांकि ये मेरा पहली बार नहीं था, मैं सैलून में बहुत सी औरतों की मसाज कर चुका हूँ. किन्तु ऐसी खूबसूरत चीज आज तक नहीं देखी थी. हालांकि मेरे मन में कोई ऐसी गलत भावना नहीं थी, मैं केवल मसाज करता हूँ.

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    वह करीब आई और बोली- अब क्या करूँ? मैंने कहा- यहां छाती के बल लेट जाइए. तब वह कहे अनुसार लेट गई.

    फिर मसाज के लिए मैंने उसका टॉवेल निकाल दिया, मुझे लगा कि इसने ब्रा, पेंटी तो पहनी ही होगी. किन्तु जब मैंने टॉवेल निकाला तो देखा कि अन्दर कुछ भी नहीं पहना है.

    तब मैंने कहा- ये क्या आपने अन्दर कुछ भी नहीं पहना है. प्रेरणा- कुछ पहनती तो पूरी बॉडी की मसाज कैसे होती. मैंने कहा- ये भी सही है.

    फिर मैं उसके पैरों से हल्के हाथ से मसाज करते हुए, कूल्हों से होते हुए गर्दन और पीठ तक पहुंचा. फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और थोड़ा सा तेल पीठ और गर्दन पर डाल दिया और उसे हल्के हाथों से मसाज करने लगा. कुछ देर बाद मैं उसके कूल्हों पर बैठ गया और अच्छे से मसाज करने लगा. ऐसे करते हुए गर्दन से पैरों तक 20 मिनट लगे. पहले स्टेप में मैंने हल्की हल्की मसाज की.

    तब मैंने कहा- अब आप पीठ के बल लेट जाएं. वह पीठ के बल लेट गई. जैसे ही उसके बड़े-बड़े बोबे और एकदम क्लीन शेव चुत मेरे सामने आई, मैं तो जैसे पागल सा हो गया.

    मेरे मुँह से निकल गया- क्या कमाल की मेन्टेन करके रख है बॉडी को, आपको मसाज की कोई जरूरत ही नहीं है. प्रेरणा ने कहा- बॉडी मसाज ही नहीं, डीप मसाज भी करनी पड़ती है अंकित जी. मैंने कहा- क्या मतलब? प्रेरणा- कुछ नहीं अभी आप अपना काम करें.

    फिर मैं उसकी चूत के ऊपर बैठ गया और शीशी से तेल निकाल कर उसके बोबों पर डाल कर हल्की हल्की मसाज करने लगा, मेरे ऐसा करने से वो सिसकारियां ले रही थी और मुँह से ‘आआहह.. ओऊ..’ निकल रही थी.

    मैं जब भी किसी औरत की मसाज करता था, तब ये सब होता ही था, न जाने मेरे हाथों ये क्या जादू है. फिर मैं मसाज करते करते पेट से होते हुए चूत तक आया और चूत के आस-पास तेल लगाकर मसाज करने लगा. लगभग 5 मिनट तक चूत के आस पास मसाज करता रहा क्योंकि चूत के आस-पास मसाज करने से औरतों को बहुत सुकून मिलता है और उन्हें मजा भी आता है.

    प्रेरणा सिसकारियां ले रही थी और अचानक बोल पड़ी- डीप मसाज करो मेरी चूत की. तब मैंने कहा- क्या मतलब? मैं ये सब नहीं करता. प्रेरणा- आप बॉडी मसाज करते हैं तो पूरी बॉडी की करना पड़ेगा ना. अब मेरे पास कोई और ऑप्शन भी नहीं था, प्रेरणा ने बात ही ऐसी बोल दी थी. फिर मैंने कहा- ये भी सही है.

    वैसे मैं ऐसा पहली बार करने जा रहा था, थोड़ी घबराहट भी थी. फिर मैंने उसकी चूत को दो उंगलियों से चौड़ा किया.

    जैसे ही मैंने उसकी चूत को छुआ, वो उछल पड़ी और कहने लगी- आह.. जल्दी-जल्दी करो.. बहुत मजा आने वाला है. वो लंबी लंबी सांसें लेने लगी तथा कामुक सिसकारियां लेने लगी. मैंने उसकी चुत में जरा सा तेल डाल दिया और एक उंगली चूत के अन्दर डाली. कसम से दोस्तो मजा आ गया, क्या मखमली एहसास था. मैं उंगली को चुत के अन्दर बाहर करने लगा.

    मेरे ऐसा करने से वो तड़प रही थी और मुँह से आवाजें निकाल रही थी- आआह.. अम्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…. येई.. आह.. ओह अंकित और तेज.. और तेज बस करते रहो..

    मैं भी जोश में जा गया और मैंने एक साथ अपनी तीन उंगलियां उसकी चूत में घुसेड़ दीं. वो एकदम से चिल्लाई और उसने मेरे होंठों से होंठ लगा कर किस करने लगी. मैं भी एक हाथ से उसकी चूत में उंगलियां कर रहा था और दूसरे हाथ से उसके सर को पकड़ कर जमकर किस कर रहा था. कभी वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डालती, तो कभी मैं अपनी जीभ उसके मुँह में डाल देता. बीच बीच में वो मेरे होंठ को हल्के से काट भी लेती.

    करीब 8-10 मिनट तक हम दोनों किस करते रहे. फिर उसने मेरा मुँह पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया और कहा- अब मेरी चूत को चाटकर चूत की मसाज करो. मैंने पहली बार चूत पर जुबान लगाई थी, क्या स्वाद था उसकी चूत का, नमकीन-नमकीन आहा.. मजा आ गया दोस्तो..

    जैसे ही मैंने जीभ को चूत के छेद में डाला वो एकदम से काँप गई और कहने लगी- आआहह.. उईई उहहह.. खा जा अंकित माय डार्लिंग.. मेरी चूत को खा जा कमीनी बहुत पानी छोड़ती है.. आज तो पी जा इसे.. खाली कर दे इसे… मैं इसी तरह उसकी चूत को 15-20 मिनट तक चाटता रहा.

    फिर प्रेरणा ने कहा- डार्लिंग अब रहा नहीं जाता यार.. डाल दे तेरे हथियार को इसके अन्दर. मैंने कहा- पहले हथियार की मसाज तो कर दो.

    इतना कहते ही उसने तुरंत मेरे पेंट की जिप खोली और लंड को तुरत खींचकर बाहर निकाला. उसकी जल्दबाजी से मुझे दर्द हुआ, पर इतना पता नहीं चला.

    फिर उसने लंड को देखकर कहा- ओह माय गॉड, इतना बड़ा.. अब क्या होगा मेरा.. ये तो मेरी फाड़ ही देगा.. ये तो 7-8 इंच लंबा है.. और लगता है 2.5-3 इंच मोटा भी है. मैंने कहा- मैंने इसे बहुत संभाल के हट्टा-कट्टा किया है.

    वो तुरंत लंड को मुँह में लेकर चाटने लगी. वाह दोस्तो क्या एहसास था.. लग रहा था मानो मैं हवा में उड़ रहा हूँ, मजा आ गया था.

    ऐसे ही 10-15 मिनट तक तो लंड को चूसती रही और मैंने लंड के पानी को उसके मुँह में ही झड़ा दिया. वो मेरा पूरा माल पी गई और बोली- वाह क्या नमकीन स्वाद है, अब से मैं यही पिया करूंगी, तुम्हारा रस बहुत टेस्टी है.

    वो खड़ी होकर बेड पर लेट गई और बोली- अब मुझसे रहा नहीं जाता.. मेरी चूत में अपना हथियार जल्दी डालो. मैं तुरंत खड़े होकर बेड पे गया और उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पे रख कर लंड को उसकी चुत पर सैट कर दिया. फिर कुछ पल लंड को ऊपर नीचे करके चूत को सहलाता रहा.. और अचानक एक जोर का झटका लगाया और लंड का टोपा उसकी चूत में पेल दिया.

    सुपारा घुसा तो वो चिल्ला उठी और कहने लगी- आह.. मार दिया.. मगर रुकना नहीं.. पूरा डालो अन्दर.. फाड़ दो इस हरामजादी को.. बहुत खुजली मचती है इसको, बहुत आग है कमीनी में, आज तो अपने लंड के अमृत से इसकी प्यास बुझा ही दो.

    अब मैं उसकी बातें सुनकर ख़तरनाक जोश में आ गया, मैंने पूरी ताकत के साथ एक और धक्का लगा दिया. इस बार मेरा आधा लंड प्रेरणा की चूत में समा गया. उसकी आंखों से आंसू आ गए, तब भी वो चोदने को कहे जा रही थी. उसकी हिम्मत की देखकर मैंने एक और जोर का धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत में समा गया.

    उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी, फिर भी वो कह रही थी- आज चूत गांड एक कर दो, फाड़ दो सब कुछ.

    फिर मैं कुछ समय रुका और उसे किस करने लगा. दो मिनट किस करने के बाद में धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा. बस 4-5 मिनट तक यूं ही धीरे धीरे चोदता रहा. जब वो नीचे से चूतड़ उछालकर चुदवाने लगी, तब मैंने भी स्पीड बढ़ा दी. मैं धक्के पे धक्का, धक्के पे धक्का, जोर-जोर का धक्का लगाये जा रहा था.

    वो भी- आहहह.. येई.. ले ले मेरी आज, फाड़ दे, मिटा दे मेरी चुदक्कड़ चूत की प्यास.. अहहह.. ओओहह.. इन सब आवाजों से पूरा बेडरूम गूंज रहा था.

    करीब 10 मिनट तक ऐसी ही थका देने वाली चुदाई चलती रही. अब वो झड़ने वाली थी. उसने मुझे कसके पकड़ लिया, उसका पूरा शरीर अकड़ गया था. उसकी चूत ने मेरे लंड को चारों तरफ से जकड़ सा लिया. उसकी चूत मानो मेरे लंड को पकड़ के अपने अन्दर खींच रही थी. ऐसा एहसास मुझको कभी नहीं हुआ था, उस समय लगा जैसे यही जीवन का असली सुख है.

    तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, उसका शरीर भी ढीला पड़ गया, उसका पानी चूत से होते हुए मेरे लंड के आस पास से निकल रहा था.

    परंतु मैं अभी तक झड़ा नहीं था, मैंने धक्के और तेज कर दिए. उसके झड़ने के 1-2 मिनट बाद में भी झड़ने वाला था, मैंने उसे इशारा किया कि मैं झड़ने वाला हूँ.. तो उसने कहा- मेरी चूत ही इस अमृत को पियेगी.

    उसके इतना कहते ही मैं उसकी चूत में ही झड़ गया, मेरा ढेर सारा माल उसकी चूत में ही समा गया और मैं निढाल होकर उसके ऊपर ही गिर गया.

    फिर 4-5 मिनट बाद हम दोनों उठे और वो मेरे लंड को चाटकर साफ करने लगी. इतने में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. ये देखकर वो मुस्कुराई, फिर क्या था.. हो गया फिर से कार्यक्रम शुरू.

    उस दिन हमने 4 बार चुदाई की. फिर हम दोनों नहाये और फिर हमने साथ में उसके घर ही खाना खाया. अंत में उसने मुझे 3000 रूपए दिए.

    तब मैंने वापस देते हुए बोला- शायद आप भूल गई. मेरा चार्ज 1500 ही है. तब उसने बोला- आज तुमने मुझे बहुत खुश किया है, मैं अपनी खुशी से दे रही हूँ. मैंने कहा- ठीक है.

    उसकी कार में उसका ड्राइवर मुझे मेरे घर तक छोड़ने गया. उसके बाद बहुत बार प्रेरणा ने मसाज ले लिए बुलाया और मैंने प्रेरणा की बॉडी मसाज की और चुदाई भी की.

    अब इन्तजार है कि कोई और ग्राहक मिले और आशा करता हूँ कि कोई औरत ही मिले.

    एक कहानी, दोस्त की जुबानी 

    मैं पुणे के एक अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र हूँ. मैं बचपन में बहुत शर्मीला लड़का था. पिछले लगातार चार साल कसरत करने से अब मेरा जिस्म बिल्कुल एक मंजे हुए पहलवान की तरह गठीला हो गया है. ऊपर से मेरे घुंघराले बाल मेरा पुरुषार्थ ब्यान कर रहे थे. मेरा 5 फुट 8 इंच का कद है और सिक्स पैक्स भी है. बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में बहुत होशियार था.

    तो जैसा कि मैंने लिखा कि मेरी कहानी पर ढेर सारे ईमेल आए थे, उन्हीं ईमेल में से एक ईमेल एक महिला का भी था, वो भी पुणे से ही थीं. उनका नाम तो मैं नहीं बता सकता. ईमेल में उन्होंने मेरी कहानी में मौसी की चुदाई के बारे में कहा कि मौसी से बात कर लो, अच्छा फील करोगे और वो तुम्हें भी माफ कर देंगी.

    उनसे ऐसे ही कुछ बातें हुईं और मैं भी उनको रेस्पॉन्स देता गया. उसके बाद पता चला कि उनकी उम्र तीस साल थी और वो एक हाउसवाइफ थीं. उनका एक बच्चा भी था, वो 3 साल का था. उन्होंने बताया कि उनके घर वालों ने उनकी जल्दी ही कम उम्र में ही शादी करवा दी. उनके पति एक कंपनी में जॉब करते थे और पूरे दिन भर घर में वो अकेली रहती थीं. रात को भी उनके पति थक कर आते थे और जल्दी सो जाते थे.

    मैं समझ गया कि वो मुझसे क्या चाहती है. उसके बाद हमने फोन नंबर्स एक्सचेंज कर लिए और व्हाट्सएप्प पर बातें करने लगे. मैं उन्हें सेक्स की बातें करके हर बार गर्म कर देता था. अब उनकी भी चूत मचलने लगी थी.

    ऐसे ही बातें करके उन्होंने पूछ ही लिया कि मेरी प्यास बुझाने कब आओगे? पहले तो मैंने टोक दिया और कहा कि मैं कोई कॉलब्वॉय नहीं हूँ.

    फ़िर भी मुझे सामने चूत दिख रही थी तो कब तक मेरे जैसा जवान खुद को रोक सकता था. तो मैंने भी उनको हां कर दी.

    उन्होंने मुझे एक मॉल में आने को बोला तो मैं भी सज-धज के निकल पड़ा. जब मैं पहुंचा तो लगा कि शायद किसी ने मजाक कर दिया है. लगभग बीस मिनट के बाद वो आयी और मुझे कॉल करके पार्किंग एरिया में बुलाया.

    मैं उधर गया तो कोई दिखाई नहीं दे रहा था, तभी उनका कॉल आया और कहा कि पीछे मुड़कर काली कार में आ जाओ.

    मैंने देखा तो एक काली गाड़ी में से एक औरत हाथ हिला रही थी. तो मैं कार में जाकर उनके बगल में बैठ गया. वो तो बहुत ही सेक्सी और कामुक औरत थी दोस्तो. उनके बदन की खुशबू तो चार चांद लगा रही थी. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे. उनको हैलो बोल कर मैंने उनको देखा तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

    उसके बाद हम उनके घर की ओर चल पड़े. सफर में मैं उनके एक हाथ और उनके बालों से ही खेल रहा था. उनको भी शायद अच्छा लग रहा था. गाड़ी में ऐसे ही कुछ नार्मल बातें हुईं.

    करीब 15 मिनट के बाद हम उनके आलीशान घर में पहुँच गए. वो मुझे अपना बड़ा सा घर दिखाने लगीं. मुझे पानी दे कर वो कॉफ़ी बनाने चली गईं. थोड़ी देर बाद वो कॉफ़ी लेकर आईं और बोलीं- मैं चेंज करके आती हूँ.

    कॉफी पीते पीते में उनके बारे में ही सोच रहा था कि वो आ गईं. अब तो वो और भी खूबसरत लगने लगी थीं. उन्होंने सेक्सी काली स्लीवलैस नाइटी पहनी थी जो कि उनके घुटनों तक ही आ रही थी. उनके गोरे बदन पे वो काली नाइटी बहुत जंच रही थी, जैसे कोई चैस बोर्ड दिख रहा हो, काली गोरी का मैच बड़ा सेक्सी लुक दे रहा था. उनकी फिगर लगभग 34-30-32 की होगी. उनकी ऊंचाई भी 5 फुट 3 इंच की थी. उनको देख के तो मैं खो ही गया था. मेरे साथ बिल्कुल किसी सपने में होता है वैसा हो रहा था.

    फिलहाल वो आईं और एक सेक्सी डांस का लुक देकर मेरे बगल में आकर बैठ गईं और मेरी और देख मुस्कराईं. मैं उनका इशारा समझ गया और उनको बांहों में ले कर उनके बेडरूम में ले गया. मैंने उनको चूमते हुए उनके बड़े से गोल आकार के बिस्तर पे पटक दिया.

    वो मुस्कुराईं और बोलीं कि इतनी कम उम्र के होकर भी बड़ी प्रोफेशनल फील देते हो.

    फिर मैंने अपनी जैकेट और टी-शर्ट उतार दी और उनकी उनके सामने ही नकल करने लगा तो वो हंस पड़ीं. उनके चलने का ढंग, उनके बातें करने का तरीका, उनकी हर अदाएं मैं बिल्कुल सही से कर रहा था.

    उसके बाद मैंने उनको उठाकर उनके साथ साल्सा डांस भी किया. थोड़ी देर बाद हम थक कर बिस्तर में लेट गए और मैंने उनको मेरी बांहों में ले लिया था और बातें करने लगा. वो बहुत खुश लग रही थीं. उस दिन मुझे इस बात का एहसास तो हुआ कि मैं किसी को कुछ किये बिना ही खुश रख सकता हूँ. उनसे बातें करते करते मैं उनके सर पर बार बार चूम रहा था. उनको भी इस बात की कोई आपत्ति नहीं थी.

    दोस्तो, किसी भी औरत को सेक्स से ज्यादा किसी अच्छे साथ की जरूरत होती है. उस दिन से मुझे पता चला कि शायद उनकी जिंदगी में ऐसा कोई नहीं था कि जो उनको वक़्त दे सके, उनसे हंसी मजाक कर सके और उनको खुश कर सके.

    करीब एक घण्टे बातें करने के बाद वो फिर से कॉफी बनाने जाने लगीं, तो मैंने उन्हें रोक लिया, मैंने कहा कि इस बार कॉफ़ी में बनाऊंगा. तो वो हंस दीं और बोलीं- ठीक है.

    मैं उनके किचन में जाकर कॉफी बनाने लगा, तो वो भी आ गईं और कहने लगी कि तुम्हारी होने वाली बीवी बहुत ही खुशनसीब होगी, जो उससे तुम्हारे जैसा पति मिलेगा. मैं तुम्हारी बीवी से बहुत जेलस फील करूँगी.

    इतना कह कर वो हंस पड़ीं. फिर मैंने उनको कॉफ़ी दी और हम कॉफ़ी पीने लगे.

    तब तक उनके बच्चे का स्कूल से आने के समय हो गया था. तो उन्होंने कहा कि तुम ऊपर वाले बेडरूम में टीवी देखना तब तक मैं बेटे को लेकर आती हूँ.

    फिर मैं ऊपर जाकर टीवी देखने लगा, पता नहीं मुझे नींद कब लग गई और मैं उसी बेड पे लेट गया. टीवी चालू ही था. काफी देर बाद में नींद से उठा. अब शाम हो गई थी. मैं सोच रहा था कि वो अब तक आई कैसे नहीं? फिर मैं नीचे जाके उनको देखने लगा तो वो किचन में सब्जी काट रही थीं. मैंने उन्हें पीछे से हग किया तो वो बहुत डर गईं, फिर हंस पड़ीं.

    मैंने उनसे वैसे ही पूछा कि आपने मुझे उठाया क्यों नहीं? तो उन्होंने कहा कि तुम सोते हुए बहुत मासूम लग रहे थे.

    मैंने उन्हें गाल पे किस किया तो वो कसमसा गईं. कुछ वक्त तो वो वैसे ही मेरी बांहों में बनी रहीं और मेरे आगोश में लिपटी हुई थीं. फिर उन्होंने कहा- अभी मस्ती बस.. तुम ऊपर के बेडरूम में जाके मेरा इंतज़ार करो.

    फिर लगभग एक घंटे बाद वो ऊपर आईं. वो साथ में खाना भी लेकर आईं और उनके बेटे को शक न हो इसीलिए तुरंत ही नीचे चली गईं. मैंने वो खाना खा लिया और टीवी देखने लगा. लगभग एक घंटा और बीत गया, वो फिर भी नहीं आईं तो मैं बेचैन होने लगा. मैंने उन्हें कॉल किया तो उन्होंने कहा कि बस बेटे को सुला कर आती हूँ.

    तकरीबन आधे घंटे बाद वो आ गईं. आते ही उन्होंने लाइट बन्द कर दी और मूनलाइट जला दी. वो मेरे पास आके लेट गईं. उन्होंने उस वक़्त पर्पल कलर की मैक्सी पहनी थी.

    हम ऐसे ही बातें करने लगे तो मैंने उनसे पूछा कि आपके पति कहां पे है? उन्होंने कहा कि वो उनके दोस्त के शादी में गए है. दो दिन बाद आएँगे. उसके बाद मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने मेरे जैसे किसी अनजान लड़के को मिलने घर क्यों बुलाया? उन्होंने कहा कि तुम्हारे बात करने के तरीके से तुम मुझे बहुत अच्छे लगे और मेरे साथ मेरे बेड पे सो रहे हो तो तुम अनजान कैसे?

    इस बात पर हम दोनों हंसने लगे.

    अब मैंने देर ना करते हुए उनकी चुचियां पकड़ लीं. एक को चूसने लगा.. और दूसरे हाथ से दबाने लगा. साथ में ही उनकी गर्दन चूम लेता, तो कभी उनकी चुत में उंगली डाल देता. अब धीरे धीरे वो भी फिर से गर्म होने लगीं.

    अब वो बोलने लगीं कि अब अपना लंड डाल भी दो.

    लेकिन मुझे उन्हें और थोड़ी देर तरसाना था. मैं उनकी चुत चाटने लगा. मैं ऐसे चुत चाट रहा था, जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम चूस रहा हो. कुछ देर बाद मैं उनकी चुत के ऊपर अपना लंड रगड़ने लगा तो वो चिहुँक उठीं. जैसे किसी प्यासे इंसान का पानी के बिना हाल होता है, वैसा ही उनका हो रहा था. फिर मैंने अपने लंड पर धीरे धीरे दबाव बनाते हुए उनकी चुत में डालने लगा. आधा लंड घुसने के बाद एक जोर के झटके के साथ मैंने पूरा लंड उनकी चुत में उतार दिया.

    उन्होंने मुँह से प्यार भरी ‘आह.. मर गई…’ की कराह निकाली.

    अब मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना चालू कर दिए. उनकी चुत किसी गर्म भट्टी की तरह हो गई थी. मेरा लंड भी उनके गरमी की वजह से पूरा गर्मा गया था. अब वो बोलने लगीं- आह चोद दो जोर जोर से. मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा.

    हम मिशनरी अवस्था में थे तो आप कल्पना कर सकते हो कि हमें कितना मज़ा आ रहा था. उनका पूरा जिस्म मेरी मजबूत बांहों में था. धक्के लगाते हुए मैं उनकी गर्दन को भी चूमे जा रहा था. वो तो पूरी तरह से पागल हो कर कुछ भी बड़बड़ा रही थीं.

    एक अँधेरी रात में जैसे दो पंछी प्रेमविहार में डूबे हों, वैसा नजारा था.

    आज पहली बार दिल को सुकून मिल गया था. बाद में मैंने पोजीशन बदलने को चाहा और खुद एक कुर्सी पर बैठ कर उन्हें अपने लंड पर बिठा कर झटके मारने को बोला. वे वैसे ही हो गईं.

    अब मेरा लंड उनके चुत की कश्ती में झटके लगा रहा था. ऐसा लग रहा था यह पल बस यहीं थम जाए. बाद में मुझे मेरे लंड में कुछ गर्म एहसास हुआ, मैडम ने अपना लावा छोड़ दिया था. झड़ जाने के बाद उन्होंने अपना जिस्म पूरी तरह से मेरे हवाले कर दिया था.

    कुछ देर झटके लगने के बाद मैं भी उनकी चुत में झड़ गया. मैं उनको उठा कर बिस्तर पर ले आया. वो मेरी बांहों में वैसी ही लेटी रहीं और हम दोनों वैसे ही नंगे बिस्तर पर लेटे रहे. किसी कैदी को जैसे जेल से बाहर आने पर होता है, शायद वैसा ही हाल मेरा लंड को हुआ होगा. कब उनकी बांहों में नींद आ गई, पता ही नहीं चला.

    फिर सुबह उठकर उन्होंने मुझे 5 हजार रूपए दिए और बोला कि मैं फिर से कॉल करूँगी.

    तो दोस्तो यह रही मेरी प्लेबॉय बनने की दास्तान.. कैसी लगी मुझे जरूर बता

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    यार के साथ पति के सामने 

    अपने पति के सामने दुसरे के लंड को सहलाना...एक अलग तरह का ही एहसास होता है. इसमें पति दूर रहकर सिर्फ अपना लंड हिलाता है और उसकी बीवी किसी और के लंड को हिला रही होती है. जब लंड चढाई को तैयार हो जाता है तब पत्नी उस लंड की सवारी करती है और तब तक करती है जब तक लंड थक कर उसकी चूत में उलटी न कर दे. इसमें लड़की और लड़के दोनों के एक्सप्रेशन देखने लायक है.

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    लड़के को जवान बनाने का खेल 

    आजकल के लड़कों को सब्र नहीं है. हर चीज में जल्दबाजी करनी है उन्हें. जवानी के खेल को जो लोग व्यस्क होने के बाद खेलते हैं उन्हें ये अभी खेलना है कम उम्र में ही...उन्हें इस बात तक की समझ नहीं है इस खेल से उन्हें कितना नुक्सान और कितना फायेदा होने वाला है. खैर जो भी हो, जब तक उनसे किसी को नुक्सान नहीं पहुँचता और उन्हें कोई नुक्सान नहीं पहुंचाता है तब तक ये ठीक है. क्यूंकि सुरक्षा दोनों की हो तो ठीक है. 

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    कोने में चुदाई

    ऐसी लड़की मिल जाए तो कोई भी कहीं भी काम पर लग सकता है. जिस जिस ककोल्ड की ऐसी घरवाली होगी उसे बुल ढूँढने की जरुरत नहीं है उन्हें बुल खुद ही ढूंढ लेंगे. ऐसी सेक्सी हसीना को तो लोग देख कर ही उत्तेजित हो जाते हैं तो जब सामने कोई ककोल्ड उन्हें अपनी बीवी चोदने को देगा तो पता नहीं क्या करेंगे...जो भी कुछ करेंगे उससे ककोल्ड और हसीना दोनों को पसीना तो आएगा ही साथ में मजा भी बहुत आएगा. इस फिल्म में लड़की भी पूरा एन्जॉय कर रही है वैसे ही ककोल्ड की बीवी भी एन्जॉय करेगी. 

    nilofarsingh

    this is movie CHEMISTRY

    harddick21blog

    भिन्न भिन्न तरह की चुदाई

    इस विडियो में निर्देशक ने हीरो से बहुत श्रम करवाया है. लड़के ने भी पूरा लंड घुसाकर अन्दर तक मेहनत कर उसे निराश नहीं किआ है. निर्देशक ने पूरा पैसा वसूल करवाया है लड़के से और लड़के ने भी आम के आम गुठलियों के दाम लिए हैं. पैसे और चूत दोनों लिए हैं इस काम के लिए. लड़की को भी मजा पूरा मिल गया है. इस विडियो में कई सारे विडियो को काट कर डाला गया है और इसमें सिर्फ चुदाई का हिस्सा ही शामिल कर इसे और हॉट बना दिया है. 

    harddick21blog

    चुदाई वाला स्कूल 

    काश इस स्कूल में मैं भी पढ़ा होता. ऐसे स्कूल भी दुनिया में होता है क्या ?? जितने भी लोगों ने इस विडियो को देखा होगा सभी के मन में यही ख्याल आया होगा जो अभी मेरे मन में आया है. सब निर्देशक के दिमाग की उपज है. हमेशा कुछ नया दर्शकों के सामने लाने की कोशिश में ही ऐसा सामने आता है. दर्शक भी एक तरह की चीजें देख देख कर बोर हो चुके होते हैं उन्हें भी कुछ नया चाहिए और ये नया लेकर इस तरह से सामने आते हैं. 

    mrsfarhana

    Aaaahhhh

    faizyahem

    Wats d movie name pld tell me

    harddick21blog

    आह से अआहा तक 

    हर फिल्म का एक ही मकसद होता है चूत में लंड घुसवा देना. कहानी थोड़ी कभी कभी अच्छी बना देते हैं पर होता सभी में एक ही चीज है बस पात्र बदल जाते हैं. इस कहानी में काफी मजा  आया देख कर और जो इनके एक्सप्रेशन हैं वो काबिले तारीफ हैं. कहानी में हर कुछ आराम आराम से आगे बढे तो देखने में भी मजा आ जाता है. एक दम से सब कुछ हो जाए तो देखने में उतना मजा नहीं आता है.