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    मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और बलबला कर उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया। मैं नेहा की कोरी चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, “बहन की लौड़ी दीदी! जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!” और आराम से सिगरेट सुलगाकर अपनी पीठ टिका कर पीने लगा। नेहा ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया, पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर नेहा के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसाता रहा। दस मिनट बाद मैंने नेहा को बोला, “चलो आज आपको घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ। मेरी प्यारी दीदी! करोगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?” नेहा ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “अनिल कैसे घोड़े की सवारी? तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में चोदूँ?” मैंने कहा, “हाँ दीदी! आपको तो सब पता है… पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए।” नेहा मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले। जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया। नेहा बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी। दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, “नेहा दीदी! अब आप अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे करो और लंड सवारी का मज़ा लो।” इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा। नेहा की हिम्मत मुझे माननी पड़ी कि दर्द होने के बावजूद भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार करीब आधे घंटे तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का फाऊँटेन उसकी चूत में गिरा दिया और नेहा को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे। करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा नेहा सिगरेट पीते हुए मेरे लंड से खेल और चूस रही थी। जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी। मैंने भी कहा, “दीदी! चूसो इसे… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने नेहा से कहा, “नेहा दीदी! आपको ये तो मानना पड़ेगा कि आज भी और आगे भी मैं जब आपको चोद कर ये सुख दूँगा, ये सब आपकी मम्मी की वजह से ही मुमकीन हुआ है।” नेहा तपाक से बोली, “यू आर राइट अनिल! ऑल थैंक्स टू मम्मी! अगर मम्मी नहीं मानतीं तो पता नहीं मेरी चूत कब चुदती।” मैंने कहा, “फिर तो दीदी ये गलत बात है कि हम दोनों अंदर इतना मज़ा ले रहे हैं और आपकी मम्मी बाहर अपनी चूत अपनी उँगली से ठंडी कर रही है। मेरी बड़ी इच्छा है कि आप दोनों को मैं एक ही पलंग पर एक साथ नंगा करके चोदूँ।” नेहा फ़ोरन ही तैयार हो गयी और बोली, “मैं अभी जा कर मम्मी को बुला कर लाती हूँ।” मैंने कहा, “नहीं! आप बैठ कर एक ड्रिंक और सिगरेट पियो। मैं आपकी मम्मी को लाता हूँ।” मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि ममता आंटी अपना ब्लाऊज़ उतार कर ब्रा और पेटीकोट में लेटी हुई थी और अपना पेटीकोट कमर तक उठा कर स्मोक करते हुए अपने वाइब्रेटर से मुठ मार रही थीं। मुझे देख कर बोली, “क्या बात है अनिल! नेहा ठीक तो है ना?” ममता आंटी की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं। मैंने कहा, “डार्लिंग घबराओ नहीं! मेरा लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की। अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है। चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है। इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी। तुम्हारी तरह वाइब्रेटर से ठंडी नहीं होगी।” ममता आंटी बोली, “क्या बात है (हुच्च) तू बाहर कैसे आ गया?” मैंने कहा, “ममता मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ और तुम्हारी चूत बजाऊँ।” ममता आंटी बोली, “व्हॉट? ऑर यू क्रेज़ी? (हुच्च) मुझे अपनी बेटी (हुच्च) के सामने चुदाने में शरम आती है।” नेहा जो शायद दरवाजे पर खड़ी हो कर हमारी बातें सुन रही थी, सिर्फ़ सैंडल पहने नंगी ही एक दम बाहर आ गयी और बोली, “मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना। मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है।” ममता आंटी उठ कर खड़ी हुईं तो गिरते-गिरते बचीं। उन्होंने काफ़ी ड्रिंक कर रखी थी और नशे और हाई पेन्सिल हील की सैण्डलों की वजह से उनका बैलेंस बिगड़ गया पर नेहा ने उनको अपनी बाहों में भर लिया। मैने भी पीछे से जा कर ममता आंटी की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबा लिया और ममता आंटी को बीच में दबाये हुए बेडरूम में ले कर आ गये क्योंकि वो नशे में अपने आप चलने की सूरत में नहीं थीं। मैंने नेहा को कहा, “चलो दीदी! अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ।” मैंने ममता आंटी की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं। नेहा ने भी ममता आंटी के सारे कपड़े उतार दिये और बोली, “लो अनिल अबकी बार मेरी मम्मी की चूत की सिकाई करो।” क्या नज़ारा था दोस्तों! अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ हाई हील सैण्डलों में, मेरे सामने थीं। मैंने भी नंगी ममता आंटी को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, “ममता डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा और जैसे तुमने उस दिन कहा था कि कोरी चूत तो नहीं दे सकी पर अपनी कोरी गाँड मरवाऊँगी, तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड का उद्घाटन करूँगा। अपनी गाँड मरवाओगी ना ममता डार्लिंग।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, “मेरे गाँडू राजा! मैं तुझे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ। साले (हुच्च) तू… तूने… मेरी चूत मारी… मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और…. और… यहाँ तक की साले चूतिये तूने मेरे सैण्डलों और पैरों को भी नहीं छोड़ा…. बोल साले भोसड़ी के… (हुच्च) तुझे कभी मैंने ना कहा क्या… हैं? तो इसके बाद क्या पूछता है… जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, अब गाँड मारनी है… तो साले गाँड मार ले, पर मेरी गाँड जरा प्यार से मारना, मैंने आज तक (हुच्च) तेरे अंकल को उँगली तक नहीं लगाने दी।” मैंने कहा, “डार्लिंग तुम बस आराम से एक और ड्रिंक लगा कर कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ… मैं अपना लंड नेहा से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ।” ममता आंटी ने ड्रिंक बनाने की बजाये व्हिस्की की बोत्तल ही मुँह से लगा कर पीने लगी। मुझे पहले तो चिंता हुई कि कहीं इतना पीने से बिल्कुल ही पस्त हो कर सो ना हो जायें और मेरा सब प्लैन चोपट हो जाये पर फिर ख्याल आया कि आंटी पीने की आदी हैं। वैसे तो आम-तौर से वो लिमिट में ही पीती हैं पर पहले भी मैंने उन्हें ज्यादा पी कर नशे में धुत्त देखा है और जब भी ममता आंटी नशे में कंट्रोल के बहार हुई हैं तब वो पस्त या शाँत होने की बजाय हमेशा काफ़ी बेकाबू और ज्यादा उत्तेजित ही हुई हैं। यही सोच कर मैंने नेहा को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, “लो नेहा दीदी! चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये। देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी। ममता! देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये। ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी। देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है।” मैं नेहा का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा। इतनी देर में ममता आंटी भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी। मैने नेहा के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, “दीदी चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये… अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आपकी मम्मी को ज्यादा तकलीफ न हो।” नेहा ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और ममता आंटी की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, “अनिल! मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है। मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है।”

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    तो वो बोली, “धत्त अनिल! तुम्हारा लंड और अपनी चूत!” नेहा मेरे आगोश में लेट कर बड़े ही प्यार से मेरे लंड से खेल रही थी जो अब फिर से खड़ा हो गया था। नेहा बोली, “अनिल तुम मेरी चूत में नहीं डालोगे क्या…? मेरी बहुत इच्छा हो रही है कि लेकर तो देखूँ कैसा लगता है। साली कुत्तिया संजीदा अपनी चूत के पपौटे दिखा-दिखा कर बहुत चिढ़ाती थी औ कहती थी कि देखो चुदा कर मेरी चूत तुम सबसे सुंदर है। अब मैं भी उसे चिढ़ाऊँगी कि देख साली रन्डी… तू तो सिर्फ पाँच-छः इंच वाले से चूदाती है। मैं तो अपने कज़न अनिल का साढ़े-आठ इंच का लंड लेती हूँ अपनी चूत में।” फिर बोली, “अनिल तुमने किसी को चोदा है पहले?” तब मैंने उसे सच-सच बताना ठीक समझा और बोला, “नेहा दीदी! मैं मन ही मन में आपको और आपकी मम्मी से बहुत प्यार करता हूँ और रात को आप दोनो के ख्वाब देख कर मुठ मारा करता था…” और फिर मैंने उसे पूरी कहानी बता दी। नेहा बड़े आश्चर्य के साथ बोली, “क्या??? अनिल तुम मम्मी को चोदते हो? मैं नहीं मानती।” तब मैंने कहा, “चलो ठीक है, कल जब आपकी मम्मी घर पर आयेंगी और मुझे जब अंदर बूलायेंगी तब आप बालकोनी से देखना… आपकी मम्मी कितने प्यार से मुझसे चुदवाती है। हमने तो प्लैन भी बनाया है कि आपकी मम्मी आपके साथ मेरी चुदाई करवायेंगी।” नेहा इतना सब सुन कर थोड़ी सी गरम हो गयी थी और अपनी चूत उसने मेरी टाँगों पर घिसनी चालू कर दी थी। मैंने कहा, “नेहा दीदी! मैं आपको बड़े प्यार से आंटी के प्लैन वाले दिन ही भोगना चाहता हूँ। इस लिये आज सिर्फ एक दूसरे की चूसाई करेंगे…” और इतना कह कर फिर से हम लोग ६९ के आसन में हो कर एक दूसरे को चूसने लगे। उस रात हम दोनों एक ही कमरे में एक दूसरे को बाहों में भर कर सोये। अगली सुबह मुझे ममता आंटी को लेने जाना था तो मैं सोती हुई नंगी नेहा को प्यारी से पप्पी दे कर ममता आंटी को लाने के लिये एयरपोर्ट चला गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | कार में बैठते ही ममता आंटी ने मुझे किस करा और बोली, “अनिल मैं तो बूरी तरह से मचल रही हूँ चुदाई के लिये। नेहा जब तक सो कर उठेगी तब तक तू मेरी जम कर चुदाई कर दे।” मैंने कहा, “ममता डार्लिंग! मैं भी तो तड़प रहा हूँ तुम्हें चोदने के लिये और तुम अब नेहा की चिंता छोड़ दो!” और मैंने ममता आंटी को सारी कहानी बता दी। ममता आंटी ने आगे बढ़ कर मुझे किस कर लिया और बोली, “मैं तो नेहा के साथ तेरी चुदाई कल करवाऊँगी। आज तो तू दिन भर सिर्फ मुझे चोद कस कर। मेरा तो पूरा बदन तरस रहा है तेरे हाथों से मसलवाने के लिये।” हम जब घर पहुँचे तो नेहा उठ गयी थी। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद ममता आंटी बोलीं, “नेहा देख मैं अनिल के साथ सोने जा रही हूँ, तो कोई भी फोन या कोई घर पर आये तो उसे मना कर देना और मुझे डिस्टर्ब मत करना।” नेहा मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और समझ गयी कि उसकी मम्मी कमरे में जा कर मुझसे चुदवायेंगी। ममता आंटी ने उसे देख लिया और बोली “नेहा बेटा! मुझे अनिल ने सब बता दिया है। तू घबरा मत… कल मैं तुझे ज़िंदगी का वो सुख दिलवाऊँगी जिसकी तूने कल्पना भी नहीं करी होगी।” इतना बोल कर ममता आंटी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मैंने उनको। फिर हम दोनों कमरे में घुस गये और घुसते ही एक दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे कितने दिनों के भूखे हों। मैं ममता आंटी को अपनी बाहों में भर कर बुरी तरह से मसलते हुए चूस रहा था और ममता आंटी मेरी पैंट खोल रही थी। मैंने देखा कि नेहा बालकोनी में खड़ी हो कर हम दोनों को देख रही थी। इस ख्याल से कि नेहा अपनी मम्मी को मुझ से चुदाते हुए देखेगी, मेरा लंड कुछ ज्यादा ही अकड़ गया और मैंने ममता आंटी के कँधे दबा कर उन्हें वहीं बिस्तर पर बिठा दिया और सिर को पकड़ कर अपना लंड ममता आंटी के मुँह में उतार दिया और नेहा को देखते हुए ममता आंटी का मुँह चोदने लगा और अपना पूरा लंड उनके मुँह में फँसा कर झड़ गया। फिर मैंने ममता आंटी कि साड़ी, ब्लाऊज़, पेटीकोट उतारे और नेहा को दिखाते हुए उनकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से पहले खूब मसलीं और बाद में उनकी ब्रा उतार के उनके दोनों निप्पल अपनी उँगलियों के बीच में मसले। ममता आंटी तो सितकार उठी और बोली, “मादरचोद इतना क्यों भड़का रहा है मेरी चूत की आग? पहले से ही चूत में आग भड़की हुई है।” मैंने ममता आंटी को खड़ी कर के उनके चूत्तड़ बालकोनी की तरफ कर दिये ताकि नेहा आराम से देख सके। ममता आंटी के हाई हील सैण्डलों में कसे पैर जमीन पर थे और मैंने उन्हें चूचियों के सहारे बिस्तर पर टिका दिया जिससे उनकी चूत और गाँड के छेद खुल कर सामने आ गये। मैंने नेहा की तरफ़ देखते हुए ममता आंटी की चूत और गाँड के छेद पर उँगली फेरनी चालू कर दी और एक हाथ से अपना लंड सहलाने लगा। उसके बाद मैने झुक कर ममता आंटी के सैण्डलों में कसे पैर चाटने लगा और फिर धीरे-धीरे उनकी टाँगों और जाँघों को चाटते हुए ऊपर बढ़ा और फिर उनकी उभरी हुई चूत को अपनी जीभ से चटना शुरू कर दिया जिससे ममता आंटी की सितकारियाँ निकलनी चलू हो गयी और वोह अपनी गाँड के धक्के मेरे मुँह पर देने लगी। ममता आंटी की चूत अपने मुँह में झड़वाने के बाद मैंने खड़े-खड़े ही अपना लंड नेहा को दिखाते हुए ममता आंटी की चूत पर रखा और झुक कर उनकी मदमस्त लटकती हुई चूचियों को पकड़ कर मसलते हुए जोर से धक्का मारा जिससे मेरा पूरा लंड ममता आंटी की चूत में समा गया। ममता आंटी इस पोज़ में अपने चूत्तड़ मटकाती हुई मेरा लंड ले रही थी और मैं भी पूरे जोश में उनकी चूत चोद रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर ममता आंटी की टाँगें फैला कर बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर दना-दन चोदने लगा। करीब आधा घँटा चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़े और ममता आंटी ने अपनी जाँघें बंद करके मेरा लंड अपनी चूत में ही रहने दिया और बोली, “डार्लिंग! ऐसे ही मेरे ऊपर सो जा ताकि जब तेरा दोबारा खड़ा हो तो बिना वक्त गंवाये मुझे चोदना चलू कर देना। मेरी चूत को इतनी ठंडक मिली है कि मैं तो एक सिगरेट पी कर सोऊँगी।” मैं तो मस्ती में था और ममता आंटी कि गुदाज़ चूचियों पर लेट कर सुस्ताने लगा। दिन भर हम दोनों ने जी भर के एक दूसरे के साथ चुदाई की और अपने बदन की हवस को पूरा शाँत की।

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    Fun with hubby’s friend

    करीब पाँच-दस मिनट बाद मैंने नेहा कि टाँगें खोलीं और उसकी जाँघों को चूसता हुआ अपनी जीभ उसकी कुँवारी बूर पर ले गया। मैंने भी अपनी जीभ की धार नेहा के बूर की दरार पर खूब घीसी। बाद में जब मस्ती बढ़ गयी तब मैंने अपने होंठ पूरे चौड़े किये और नेहा की मस्तानी चूत अपने मुँह में भर ली और चूसाई चालू कर दी। क्या मादक सुगँध आ रही थी। मैं तो जन्नत में था। करीब आधा घंटा बूर का मज़ा अपनी ज़ुबां से लूटने के बाद मैं उसकी खुली टाँगों के बीच बैठ गया और अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से अपना सुपाड़ा नेहा की चूत के लिप्स खोल कर घिसने लगा। थोड़ी ही देर में लौड़ा इतना उबाल खा गया कि इससे पहले मैं रोक पाता नेहा के खुले लिप्स के उपर ही मेरा लंड झड़ गया। मैंने करीब दो घँटे नेहा के शरीर के साथ जी भर के खेला, और बाद में फिर से उसे पैंटी पहना कर और नाइटी ढँग से बंद कर के मैं बाहर आ गया और टी.वी. देखने लग गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | नेहा करीब शाम को पाँच बजे उठी और उन ही कपड़ों में मेरे पास आ कर बैठ गयी और बोली “अनिल शरीर बहुत दुख रहा है!” मैने कहा, “कोई नहीं दीदी थोड़ा सा सुस्ता लो अभी आप ट्रिप से आयी हो इसके लिये थकान ज्यादा हो गयी है!” नेहा वहीं पर मेरी जाँघों का सहारा ले कर लेट गयी और सुस्ताने लगी। थोड़ी देर बाद वो उठी और फ़्रैश होने के लिये चली गयी। शाम के साढ़े सात बज चुके थे। मैं ममता आंटी के कमरे से व्हिस्की की बोत्तल ले आया और अपने लिये एक पैग बनाया और टी. वी. देखने लगा। इतने में नेहा बाहर आयी और मुझे व्हिस्की पीते देख बोली, “अनिल तुम कब से पीने लग गये, मैं पापा-मम्मी से तुम्हारी शिकायत कर दूँगी।” मैंने कहा, “नेहा दीदी आपकी मम्मी को मालूम है। मैं कभी-कभी उनके साथ छुप कर पी लेता हूँ।” मैंने नेहा को नहीं बताया कि उसकी मम्मी ने ही मुझे हफ़ते भर पहले पीना सिखाया है। और मेरी प्यारी दीदी आप क्या मेरी शिकायत करोगी! “सच में? रियली…?” तब नेहा बड़े ही शरारती मूड में मुझसे बोली, “एक शर्त है! तुम्हें मुझे भी टेस्ट करानी पड़ेगी।” मुझे तो जैसे मन माँगी मुराद मिल गयी। मैंने कहा “चलो आप बैठो। मैं आपके लिये एक पैग बना कर लाता हूँ।” मैंने अंदर जा कर तीन पैग के बराबर एक पैग बनाया और बाहर आ कर नेहा को दे दिया। नेहा एक दम मेरे बगल में बैठी और पहला घूँट उसने ऐसे पीया जैसे कोई कोका कोला हो। पूरा आधा ग्लास एक झटके में पी गयी। फिर बोली, “क्या अनिल यह तो बहुत स्ट्राँग है!” मैंने कहा, “कोई नहीं, आराम से एक-एक घूँट भर के पियो… तब आपको मज़ा आयेगा!” टी.वी. पर रोमाँटिक फिल्म चल रही थी। मैं ममता आंटी के रूम से जा कर सिगरेट ले कर आ गया। नेहा पर अब खुमारी चढ़नी चालू हो गयी थी। मैंने जब अपने लिये एक सिगरेट जलाई तो वो बोली, “अनिल ये तुम्हें को क्या हो गया है, पहले शराब, फिर सिगरेट!” मैंने कहा, “नेहा दीदी शराब का मज़ा दुगना हो जाता है स्मोक करने से!” उसने मेरे हाथों से सिगरेट छीन कर एक जोरदार कश लगाया। पहली बार पीने के कारण उसको खाँसी लग गयी। मैं एकदम घबरा उठा और उसकी पीठ सहलाने लगा और पेट के ऊपर हाथ ले जा कर उसे पीछे आराम से सोफे पर बैठाने की कोशिश करने लगा। नाइटी का कपड़ा चिकना होने के कारण मेरे हाथ फिसल गये और उसकी पूरी लैफ्ट साइड की चूँची मेरे हाथ में आ गयी। नेहा ने उसका कुछ बूरा नहीं माना और मैं भी उसकी चूँची दबाये हुए सोफे पर पीछे खींच लाया और बोला, “नेहा दीदी! ऐसे थोड़ी पी जाती है! देखो मैं बताता हूँ कि कश लिया जाता है!” नेहा शायद खाँसी से थोड़ा घबरा गयी थी। इस कारण वो मेरी बाहों का सहारा ले कर मेरे आगोश में बैठ गयी। पहले तो मैंने उसे उसका पैग दिया और बोला, “लो एक घूँट लगा लो, थोड़ा सा आराम मिलेगा और फिर एक कश लगाओ।” दो-तीन बार कश लगाने के बाद नेहा को मज़ा आने लगा और बोली, “अनिल मुझे एक पैग और दो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है!” मैंने फिर से पहले जैसा पैग बना कर नेहा को दे दिया। अब वो पैग और सिगरेट तो ऐसे पी रही थी जैसे कब से उसकी आदत हो और अब वो थोड़ा मस्ती में भी आ गयी थी। अचानक उसने मुझसे पूछा, “अनिल! ये लंड क्या कॉक… आय मीन… पेनिस किसको कहते है?” मैं तो नेहा के मुँह से लंड सुन कर हक्का बक्का रह गया। मैंने कहा, “आप ये मुझसे क्यों पूछ रही हो?” नेहा बोली, “इसलिये पूछ रही हूँ कि मुझे हिंदी के वर्ड नहीं पता बस कॉक दिक पेनिस वगैरह ही पता है! मैंने पहले कभी इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मेरी सहेली संजीदा ने मुझे बताया है कि अपनी पुस्सी में कॉक लेने में बड़ा मज़ा आता है। वो अपनी पुस्सी में अपने नौकर का कॉक खूब लेती है। उसका नौकर इसे लंड बोलता है! बताओ ना अनिल ये पेनिस को ही लंड कहते हैं ना? तुम्हारे पास भी तो होगा, मैं देखना चाहती हूँ!” मुझे नेहा के इस बात पर हँसी आ गयी। नेहा काफी पढ़ाकू लडकी थी और हमेशा फर्स्ट आती थी। मैंने कहा, “आप सहेलियाँ आपस में ऐसे बातें करती हो…?” तो वो एकदम बोली, “अनिल तुम भी एक दम अनाड़ी हो। मैंने बताया तो था सुबह कि अब की बार ट्रिप पर बहुत मज़ा आया। अबकी पहली बार हम सब ने इस तरह की बातें करी और पता है अनिल? हम चारों को एक रूम मिला था और संजीदा इतनी बदमाश है… उसी ने हम सबको यह सिखाया है। वो ही रात को हमारे सारे कपड़े उतार देती और फिर कहती थी कि एक-एक करके उसके ऊपर अपना बदन घिसो। मैं सारी सहेलियों में सबसे सुंदर हूँ तो उसने मुझे अपने नीचे लिटा लिया और बोली- नेहा तुझे तो नंगा देख कर ही किसी का भी लंड झड़ जायेगा, अब तू चुपचाप पड़ी रह और उसने मेरी पुस्सी पर अपना मुँह लगा दिया और अपनी जीभ से चाटने लगी। अनिल बहुत मज़ा आया था। सबसे सुंदर होने के कारण रोज़ तीनों मिल कर मेरे ऊपर चढ़ती थीं और मुझे चूसती थीं। आज मैं जब से सो कर उठी हूँ मेरे पूरे बदन में फिर से वैसी ही बेचैनी हो रही है जो मुझे तब होती थी जब मेरी सहेलियाँ मेरे साथ अपना बदन घिसती थीं।” मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है और नेहा को बोला कि, “मैं आपको अपना लंड दिखाऊँगा तो मुझे क्या मिलेगा?” नेहा फट से बोल पड़ी, “जो तुम लेना चाहो।” मैने कहा, “जो मैं बोलूँगा आपको मेरी बात माननी पड़ेगी और जैसे-जैसे मैं कहूँ वैसे ही आपको करना पड़ेगा। बोलो तैयार हो तो मैं अपना लंड दिखाऊँ।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | नेहा तो एकदम उतावली हो रही थी। मैंने उसे अपने सामने खड़ा करा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और अपने दोनों हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसके मस्त चूत्तड़ों को दबाने लगा। नेहा ने भी अपना मुँह खोल दिया था और मैं बड़े आराम से उसकी जीभ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने हाथ उसकी पैंटी पर से हटाये और उसकी नाइटी खोल दी और उसको सिर्फ पैंटी पहने रहने दिया। मैंने भी उसको छोड़ के अपने बदन पर अंडरवीयर के अलावा सारे कपड़े उतार दिये। नेहा को शराब के नशे में होश भी नहीं था कि मैं उसको नंगा कर चुका हूँ। बाद में मैंने उसकी पैंटी उतार दी और उसकी दरार पर अपना हाथ फेरने लगा। जैसे ही मैंने उसकी दरार पर हाथ फेरा तो नेहा का थोड़ा सा नशा टूटा और वोह बोली, “क्या अनिल तुमने मुझे तो नंगा कर दिया पर अभी तक अपना लंड नहीं दिखाया। यह बात गलत है!” मैंने जल्दी से अपना अंडरवीयर उतारा और अपना मोटा तगड़ा तंदुरूस्त लंड उसके हाथों में दे दिया। नेहा को तो मानो लकवा मार गया। वो बोली, “अनिल यह इतना सख्त बड़ा और मोटा कैसे हो गया!” तब मैंने नेहा को बड़े प्यार से अपनी जाँघों पर बिठाया और उसकी पुश्त चूचियों को अपने हाथों में भर कर बोला, “मेरी प्यारी दीदी! य़े तो आपको नंगा देख कर इतना बड़ा हो गया है! आपको पता है पुस्सी में को चूत कहते हैं और चूत में जब लंड जाता है तो उसे चुदाई कहते हैं! मर्दों को जब चूत नहीं मिलती और बहुत जोश में होते हैं तो वो अपने हाथ से अपने लंड को कसकर पकड़ लेते हुए आगे-पीछे करते हैं, जिसे मुठ मारना कहते हैं। इस तरह औरते भी जब मस्ती में होती हैं तो वोह अपनी जाँघें चौड़ी करके अपनी उँगली पर थूक लगा कर अपनी चूत के दाने को खूब मसल-मसल के अपनी आग ठंडी करती हैं। कईं औरतें अपनी चूत में गाजर, केला य बैंगन डाल कर अपनी प्यास बुझाती हैं!” नेहा हंसते हुए बोली, “अनिल मैं बच्ची नहीं हूँ तुमसे दो साल बड़ी हूँ और सैक्स, फकिंग और मैस्टरबेशन के बारे में जानती हूँ… बस ये हिंदी के वर्ड्स मेरे लिये नये हैं… मैं खुद भी कईं बार मैस्टरबेट करती हूँ… मेरा पूछने का मतलब ये था कि इतना बड़ा और मोटा लंड इतनी छोटी इतनी छोटी कंट… ऑय मीन चूत… ऑय मीन चूत में कैसे जायेगा। संजीदा तो कह रही थी कि लंड सिर्फ़ पाँच-छे इंच लम्बा होता है और करीब एक डेढ़ इंच मोटा होता है!” मैंने कहा, “आप अभी यह मत सोचो, समय आने पर आप बड़े प्यार से अपने अंदर ले लोगी, और तरसोगी कि और मिल जाये। पर अभी आप वक्त मत खराब करो। अभी आप इसे लॉलीपॉप की तरह अपने मुँह में लेकर चूसो और जब तक मेरा जूस नहीं निकल जाता, आप इसे चूसती रहना और मेरा पूरा जूस पी जाना और मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दो। मैं भी आपकी कुँवारी चूत का पानी पीना चाहता हूँ।” नेहा को मुँह में लेने में थोड़ी सी तकलीफ हुई क्योंकि मेरा लंड मोटा था और अभी उसका मुँह छोटा था पर धीरे-धीरे सरकाने पर वो बड़े आराम से अपना मुँह ऊपर नीचे करते हुए चूसने लगी। मैंने भी नेहा के दोनों चूत्तड़ अपने हाथों में ले लिये और उनको मसलते हुए उसकी ताज़ी जवान खुशबूदार चूत पर अपने होंठ चिपका दिये और नेहा की तरह मैं भी उसकी चूत तबियत से चूसने लगा। करीब आधा घँटा एक दूसरे की चूसाई के बाद मेरा लंड अपनी धार उसके ताजे मुँह में देने को तैयार था और इधर नेहा का भी मस्ती के मारे बुरा हाल था। वो अब आगे-पीछे होते हुए मेरे मुँह पर अपनी बूर जोर से घिस रही थी। मैंने उसका सिर अपने हाथ ले जा कर लंड पर दबा दिया और पिचकारी छोड़ दी। नेहा ने भी लंड बाहर नहीं निकाला और मेरा पूरा जूस पी गयी। मैंने भी अपनी जीभ की स्पीड और बूर की चूसाई तेज़ कर दी और तभी नेहा ने अपने मुँह से मेरा लंड निकाला और जोर से किलकारी मारते हुए मेरे मुँह में अपना जूस निकाल दिया। हम दोनों थोड़ी देर इस अवस्था में पढ़े रहे और फिर बाद में नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सोफे पर बैठ गये और स्मोक करने लगे। मैंने बड़े प्यार से नेहा का चेहरा उठा कर पूछा, “कैसा लगा अपने छोटे भाई का लंड और चूसाई? मज़ा आया कि नहीं?” वोह शरमाते हुए बोली, “अनिल तुम बड़े बदमाश हो, पर सच में इतना आनंद तो मैंने आज तक महसूस ही नहीं किया। संजीदा और बाकी सहेलियाँ भी जब चूसती थीं और अपना बदन घिसती थीं तब भी इतना मज़ा नहीं आता था। अनिल मैं तो अब रोज़ चूसूँगी और अपनी तुमसे चुसवाऊँगी!” मैंने भी अंजान बनते हुए कहा, “क्या नेहा दीदी?”

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    करीब पन्द्रह बीस मिनट तक जम कर टाँगें उठा कर चोदने के बाद मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने ममता आंटी की दोनों टाँगें छोड़ कर उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और बोला, “मेरी रानी! ले मेरा पानी अपनी मस्त चूत में… कर ले ठंडा अपनी चूत को मेरे लंड के पानी से। ममता आंटी भी बोलीं कि राजा मैं भी बस झड़ने की कगार पर हूँ जरा दो तीन धक्के करारे-करारे जमा दे मेरी चूत में।” मैंने ममता आंटी को कस के अपने चूत्तड़ हिला-हिला कर जबरदस्त शॉट देने चालू कर दिये। ममता आंटी तो दो धक्कों बाद ही किलकारी मारते हुए झड़ने लगी। उनका पानी सीधा मेरे लंड के लाल हुए सुपाड़े पर गिर रहा था जिसे मैं पूरी तरह से महसूस कर रहा था। मैंने भी दो-तीन धक्के और मारे और ममता आंटी के होंठों पे अपने होंठ चिपका दिये और उनकी जीभ चूसते हुए अपने लंड का पानी ममता आंटी की चूत में निकाल दिया। दोस्तों मेरी ज़िन्दगी में वो पहला अवसर था जब मैंने किसी औरत के साथ संभोग करा था। ममता आंटी की चूत के अंदर झड़ने में जो स्वर्ग का आनन्द प्राप्त हो रहा था उसके कारण मैं क्षण भर के लिये अपने होश हवास खो बैठा। जब मुझ होश आया तो देखा ममता आंटी मेरे लंड पर झुकी हुई थी और बड़ी बेसब्री से मेरा लंड चूस रही थी। मुझे होश में आया देख उन्होंने मेरा लंड छोड़ कर दो सिगरेट जलाईं और मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरे सीने पर अपना सर रख कर स्मोक करने लगी और बोली, “अनिल मैं किस ज़ुबाँ से तेरा शुक्रिया अदा करूँ… मेरी समझ में नहीं आ रहा है… मैं तो आज से तेरी हो गयी! तू आज से सही मायने में मेरा हसबैंड है और मैं तेरी वाईफ! तुझे चूत का इतना सुख दूँगी की तू हमेशा मुझे याद करेगा! तूने मुझे बताया है कि असली चुदाई क्या होती है! आज पहली बार है कि चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ गया। मैं तो बस आज से तेरी गुलाम हो गयी। बस मेरे प्यारे अनिल… मुझे चोदना मत बँद करना, तेरे लिये तो मैं चूत-वालियों की लाइन लगा दूँगी। मेरी बहुत सी सहेलियाँ हैं जिनके मर्द सिर्फ़ नाम के मर्द हैं… साले कर कुछ नहीं पाते!” मैंने भी ममता आंटी को अपनी बाहों में कस कर कहा कि “ममता आज से तुम भी मेरी हो गयी… मैं सोच भी नहीं सकता था कि जिस सपनों की रानी की मैं पैंटी-ब्रा और सैंडल सूँघ-सूँघ कर मुठ मारता था वोही मुझे मेरे जीवन में चुदाई का पाठ पढ़ायेगी। ममता तुम नहीं… मैं तुम्हारा गुलाम हूँ और जब तक अंकल नहीं आते, तुम मेरी वाईफ बन जाओ और मुझे जम कर अपने शरीर की शराब पिलाओ।” ज़िंदगी की पहली चुदाई अपने सपनों की रानी के साथ करके मैं तो अपने आप को बड़ा ही भाग्यशाली समझ रहा था। पहली चुदाई करने के बाद मैं और आंटी एक स्मोक करते हुए एक दूसरे से लिपट कर पड़े हुए थे। ममता आंटी अपना सिर मेरी छाती पर रख कर स्मोक कर रही थी और मैं धीरे-धीरे उनके मस्त मोटे चूत्तड़ों पर हाथ फेर रहा था। मैंने कहा, “ममता डार्लिंग क्या हुआ… तुम तो एकदम ही शाँत हो कर लेट गयी हो।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | तो ममता आंटी ने शर्माते हुए मेरे होंठों का किस लिया और बड़े प्यार से लंड हाथ में लेकर बोली, “अनिल मुझे लग रहा है कि मेरी असली शादी तो आज हुई है और सुहाग रात मनी है… और जैसे कोई लड़की पहली बार अपने मर्द से चुदवाकर मस्त हो कर शर्माती है… बिल्कुल मुझे वैसा ही लग रहा है। अनिल मेरे सरताज… मेरी चूत के मालिक! तू जो बोलेगा मैं सब करूँगी पर तू मुझे आज कसम दे कि तू हर रोज़ मुझे चोदेगा। अंकल आ जायेगा तब भी मैं मौका निकाल कर तुझसे अपनी चूत ठंडी करवाऊँगी।” मैं तो अपने जीवन की पहली चुदाई कर के मस्त पड़ा हुआ था। मैंने भी कहा, “ममता मेरा मुठ मारने का हमेशा ही एक सीन मेरे दिमाग में घूमता था, जिस को मैं सोच-सोच कर तुम्हारी याद में अपना लंड मुठियाता था।” ममता आंटी बड़े प्यार से बोली, “अब क्या जरूरत है सपने देखने की… तू बोल तो सही… मैं तेरे लिये अब कुछ भी करूँगी।” मैंने कहा, “ममता मैं हमेशा ही यह सोचता था कि तुम्हारी शादी मुझ से हुई है और अपनी सुहाग रात वाले दिन तुम शर्माती हुई दुल्हन की तरह सज-धज के मेरे लिये पलंग पर बैठी हो और फिर मैं तुम्हें जी भर के चोदता हूँ।” ममता आंटी ने मेरे होंठों का एक लम्बा सा किस लिया और करीब पाँच मिनट तक मेरे होंठ चूसने के बाद बोली, “मेरे राजा! बस अब तुझे मेरी चूत और नहीं मिलेगी और ना ही तू मुठ मारेगा।” मेरे उपर तो जैसे पहाड़ गिर पड़ा। मैंने कहा, “ममता ये तुम क्या कह रही हो?” ममता आंटी बड़े ही मादक अँदाज़ में बोली, “मादरचोद! आज तेरी और मेरी, रात को सुहाग-रात मनेगी और मैं चाहती हूँ कि तू अब दिन भर मुझे नंगा देखे और अपना मूसल जैसा लौड़ा मसले ताकि जब रात को मेरे साथ सुहाग-रात मनाये तो मुझे कड़-कड़ाते हुए चोदे जिस से मेरी चूत का एक-एक पोर खुल जाये।” मैंने भी कहा, “ममता पर मैं रात तक कैसे दोबारा इंतज़ार करूँगा… इतनी नशीली शराब पीने का!” ममता आंटी ने मेरी छाती को चूमते हुए कहा, “बहनचोद तू मेरे बारे में सोच कि मैं कैसे रहुँगी रात तक तेरा मस्त मादरचोद लंड लिये बिना। मेरी चूत खुली हुई तो क्या हुआ पर मैं भी अपनी ज़िंदगी में वो सुख भोगना चाहती हूँ जिस की कभी मैंने कल्पना करी थी।” इसके बाद ममता आंटी उठी और अपनी पिंक ब्रा और पिंक पैंटी पहन ली। ममता आंटी दिन भर सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और मेरी पसंद के चार इंच ऊँची एड़ी के सैण्डलों में ही घूमती और घर के काम करती रही और बीच-बीच में अपने हाथ या सैण्डल से मेरे लंडा को सहला कर या कभी एक चूँची बाहर कर के मेरे होंठों के पास ला कर भाग जाती। कभी दूर खड़े हो कर अपनी पैंटी धीरे से नीचे खिसका कर अपनी चूत का उभार दिखाती, और कभी मेरे चेहरे के सामने अपने चूत्तड़ ला कर पैंटी सरकाती और अपनी गाँड दोनो हाथों से पकड़ कर चौड़ा कर के दिखाती। जब मैं पकड़ने को जाता तो कहती “मेरे मादरचोद डार्लिंग! ये सब माल जी भर के भोगना रात को।” मेरे लंड का तो बुरा हाल था। बेचारा दिन भर ममता आंटी का बदन देख-देख कर अटैंशन में खड़ा रहा। शायद वो भी सोच रहा था की छिनाल जितना तरसाना है तरसा ले, रात को तेरे भोसड़ी को भोंसड़ा नहीं बनाया तो मेरा नाम नहीं। ममता आंटी ने शाम को मुझे एक घंटे के लिये घर के बाहर भेज दिया और बोली कि “डार्लिंग! इंतज़ार के सारी घड़ियाँ खतम और वापस आ कर नहा धो कर एक दम दुल्हा बन कर अपनी दुल्हन की सुहाग-रात मना! आज तेरी शादी मुझ से हुई है और मैं तेरी दुल्हन और तेरी पत्नी हूँ और तू मेरा हसबैंड। जल्दी से आ मेरी जान! मेरी चूत में शोले भड़क रहे हैं। दिन भर तो मैंने बर्दाश्त कर लिया पर अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ!” मैं भी एक घंटे के लिये बड़े बेमन से बाज़ार घूमता रहा और वापस आ कर अपने कमरे में जा कर नहाने चला गया। रेज़र से अपनी सारी झँटें साफ़ करी और लंड पर खूब तेल की मालिश करी और अपने बदन को रगड़-रगड़ के साफ़ किया। तैयार होते वक्त अपने बदन पर खूब क्रीम मली और सैंट छिड़का। अपने सबसे स्मार्ट कपड़े पहने और शीशे में अपने को देख कर अपनी सुहाग-रात मनाने के लिये ममता आंटी के कमरे की तरफ़ चल पड़ा। मेरी ममता आंटी वाकय में एक बहुत ही स्टॉयलिश और मस्त औरत थी। जब मैंने उनके कमरे को खट- खटाया तो वो अंदर से बोली, “बस दो मिनट में अंदर आ जाना।” मैंने जब दो मिनट बाद दरवाज़ा खोला तो दँग रह गया कि आंटी ने घंटे भर में अपने कमरे की काया ही पलट दी थी। पूरा कमरा गुलाब से सज़ा हुआ था और भीनी-भीनी उत्तेजित करने वाले इम्पोर्टेड सैंट की खुशबू हवा में फैली हुई थी। ममता आंटी अपनी सबसे सैक्सी दिखने वली साड़ी पहन कर और अपने चेहरे पर एक लम्बा सा घूँघट डाल कर पलँग के बीचों-बीच बैठी हुई थी, और पलँग के साईड टबल पर एक पूरी व्हिस्की की बोत्तल और सिगरेट का पैकेट रखा हुआ था। दोस्तों बोलने की जरूरत नहीं है कि हम दोनों के जिस्म में उस समय एक लावा फूट रहा था एक दूसरे को बुरी तरह चोदने के लिये, और मेरी आंटी ने सब इंतज़ाम करा हुआ था कि आज जम कर रात भर चुदाई हो। मैंने धीरे से पलँग पर बैठ कर ममता आंटी को अपनी और खिसकाया और बड़े धीरे से उनका घूँघट ऊपर उठा दिया। ममता आंटी ने आज कुछ ज्यादा ही सैक्सी मेक-अप करा हुआ था। उन्होंने अपने होंठों पर लाल चमकने वाली लिपस्टिक लगायी हुई थी और पूरे मुखड़े पर बहुत ही सुंदर तरीके से मेक-अप करा हुआ था। ब्लाऊज़ उन्होंने बहुत ही लो कट पहना था और अगर ब्लाऊज़ को ब्रा बोला जाये तो ज्यादा मुनासिब होगा और अंदर उन्होंने ब्रा शायद बहुत ही छोटी साइज़ की पहनी हुई थी क्योंकि उसमें से ममता आंटी कि मस्तानी जवानी छलक-छलक के बाहर आने को मचल रही थी। उन्होंने अपने घने-घने बालों को खुला रखा था जो किसी झरने की तरह उनकी कमर तक लहरा रहे थे। ममता आंटी ने अपने हाथों और पैरों के नाखुनों पर लाल नेल पॉलिश लगा रखी थी। साथ ही उन्होंने मुझे और भी उत्तेजित करने के लिये काले रंग की बहुत ही ऊँची (लगभग पाँच इंच) पेन्सिल हील की सैण्डल पहनी हुई थी। उनके गोरे-गोरे पैरों को उन सैण्डलों में देख कर मेरा लंड मेरी पैंट के अंदर साँप की तरह फुँफकारने लगा। मैंने बड़े ही प्यार से ममता आंटी का चेहरा अपने हाथों में ले कर उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उनके होंठ और जीभ चूसने लगा और फिर ममता आंटी की कमर में हाथ डाल कर उनकी नंगी पीठ पर फेरने लगा। ममता आंटी ने भी मुझे अपनी बाहों में ले लिया और अपनी चूचियों का दबाव देते हुए मेरे होंठ और जीभ चूसने लगी। मुझे होश नहीं हम कब तक एक दूसरे को यूँ ही चूसते रहे। जब हम अलग हुए तो मैंने कहा, “ममता डार्लिंग तुम तो वाकय में बहुत खूबसुरत हो। मैं तुमको अपनी वाईफ बना कर धन्य हो गया। तुम्हारा बदन लगता है जैसे भगवान ने तुम्हें खुद अपने हाथों से बनाया है। तुम्हें देख लेने के बाद कैसे कोई इंसान कैसे अपने ऊपर काबू रख सकता है!”

    ममता आंटी बोली, “मॉय डार्लिंग! मैं बहुत खुश किस्मत हूँ कि तुम मेरे हसबैंड हो और आशा करती हूँ कि तुम मेरी बूर को चूत और चूत को भोंसड़ा बना दोगे!” इतना कह कर हम दोनों पलंग से उठे और एक दूसरे को बाहों में भर कर डाँस करने लगे। डाँस करते- करते मैंने ममता आंटी की साड़ी पीछे से उठायी और उनकी पैंटी में हाथ डाल के उनके चूत्तड़ मसलने लगा। इधर ममता आंटी भी मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी और खोल कर मेरी शर्ट को फेंक दिया। मैंने भी ममता आंटी की साड़ी का एक छोर पकड़ कर खींचना चालू कर दिया और ममता आंटी ने भी अपना पूरा मस्त शरीर घूम-घूम कर दिखाते हुए साड़ी को उतरवाया। अब ममता आंटी सिर्फ़ ब्रा-कट ब्लाऊज़ और एक बहुत ही झीने पेटीकोट में थीं, जिसमें से अंदर का सब कुछ दिख रहा था। ममता आंटी ने आज ब्लैक कलर की जी-स्ट्रिंग पैंटी पहनी हुई थी जिस से सिर्फ़ उनकी चूत ढकी हुई थी और उनके गोरे-गोरे और मोटे-मोटे माँसल चूत्तड़ एक दम नंगे हो कर गज़ब ढा रहे थे। ममता आंटी एक दम नयी नवेली दुल्हन कि तरह शरमाने लगी तो मैंने आगे बढ़ कर उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और पेटीकोट के ऊपर से उनके गुदाज़ चूतड़ों को दबाने लगा। ममता आंटी ने भी अपने हाथ आगे करे और मेरी पैंट को खोल कर उतार दिया। इधर मैंने भी ममता आंटी के झीने से पेटीकोट का नाड़ा खोल कर नीचे गिरा दिया और अपने हाथ पीछे ले जा कर उनके ब्रा-नुमा ब्लाऊज़ के हुक खोल दिये और उनका ब्लाऊज़ धीरे से उनकी बाहों पर से सरकाते हुए उतारने लगा। ममता आंटी ने आज बहुत ही छोटी (माइक्रो) ब्रा पहनी हुई थी। मैं साफ़-साफ़ देख रहा था कि ब्रा के कप बडी ही मुशकिल से ममता आंटी के निप्पलों को ढक पा रहे थे और साथ ही ब्रा काफी टाइट भी होने के कारण ममता आंटी के मम्मे उबाल खा कर बाहर आने को मचल रहे थे। ममता आंटी अब सिर्फ़ पैंटी-ब्रा और हाई हील सैण्डलों मैं थी और मैं भी अब सिर्फ़ अंडरवीयर में था। हमने एक दूसरे को फिर से बाहों में जकड़ लिया और एक दूसरे को मसलते हुए नाचने लगे। थोड़ी देर बाद मैं कुर्सी पर बैठ गया और ममता आंटी को बोला, “डार्लिंग तुम आज अपनी गाँड हिलाते हुए दो पैग बनाओ और अपने हाथों से मुझे पिलाओ।” ममता आंटी भी बड़े ही मादक अंदाज़ में अपने भारी-भारी चूत्तड़ मेरे चेहरे के सामने ला कर टेबल पर झुक कर दो पैग बनाने लग गयी। जी-स्ट्रिंग पैंटी पहने होने के कारण ममता आंटी की चूत तो पूरी ढकी थी और स्ट्रिंग का स्ट्राप पूरा ममता आंटी की गाँड की दरार के अंदर घुस कर उनकी गाँड के भूरे रंग के छेद को छिपाये हुए था। ममता आंटी के मस्त फूले हुए चूत्तड़ अपनी आँखों के सामने पा कर मदहोश हो गया और अपने होंठ ममता आंटी के चूत्तड़ों पर लगा कर उनकी गाँड की दरार में अपनी जीभ घुसाड़ने लगा। ममता आंटी एकदम सितकार उठी और बोली, “डार्लिंग! ये क्या कर रहे हो, बड़ी गुद-गुदी हो रही है!” मैंने कोई ध्यान ना देते हुए अपनी जीभ ममता आंटी की गाँड के भूरे छेद पर फेरनी चालू रखी और हाथ बड़ा कर उनकी झुकी हुई मस्तानी छातियों को पकड़ लिया और दबाने लगा। ममता आंटी तो मस्ती के मारे अपने चूत्तड़ गोल-गोल हिलाने लगी। पैग बनाने के बाद मैंने ममता आंटी को खींच के अपनी गोदी में बैठा लिया और बोला, “ममता क्या बात है… मैंने ऐसी पैंटी तो आज तक नहीं देखी जिसमे चूत तो ढकी रहती है पर गाँड पूरी नंगी रहती है।” ममता आंटी बड़ी मस्ती में बोली, “डार्लिंग इसे जी-स्ट्रिंग कहते हैं और ये खास कर चुदास औरतों के लिये ही बनाई गयी है। जिनकी चूत में ज्यादा खुजली होती है और जो पब्लिक में अपने चूतड़ों का जलवा दिखाना चाहती हैं वो ऐसी पैंटियाँ और हाई हील सैंडल खूब पहनती हैं। हाई हील सैंडलों से चाल और भी मस्तानी हो जाती है और पीछे से गाँड और सामने से छातियाँ सैक्सी तरह से उघड़ जाती हैं। मैंने आज खास तेरे लिये पहनी है।” मैंने उनकी फूली हुई चूचियों की घाटी में अपना मुँह लगा दिया और पसीने और सैंट की महक सूँघते हुए उनके चूचियों कि घाटी चूसने लगा। ममता आंटी ने भी मेरा सर पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबा लिया। थोड़ी देर ममता आंटी की चूचियों कि घाटी चूसने के बाद मैंने ममता आंटी को कहा कि अब वो मुझे ड्रिंक पिलायें। उन्होंने टेबल पर से ग्लास उठा कर मेरे होंठों से लगा दिया और बोली, “डार्लिंग एक घूँट में खतम करना…!” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने भी दूसरा ग्लास उठा कर ममता आंटी के होंठों से लगा दिया। ममता आंटी बड़ी ही मादरचोद थी। उन्होंने ड्रिंक पूरी नीट बनाई थी, बिना सोडे और पानी के। ममता आंटी तो रोज़ जम कर पीती थी पर मैं तो अभी नौसिखिया ही था। पर हिम्मत कर के मैंने भी एक घूँट में खाली कर दी और ममता आंटी ने भी पूरी ड्रिंक एक घूँट में खाली कर दी। मैंने कस कर उनकी कमर में बाहें डाल कर अपनी और खींच लिया और उनकी उठी हुई मदमस्त चूचियों को दबाने लगा और ममता आंटी को बोला, “मेरी जान एक सिगरेट पिला दो!” ममता आंटी बोली, “डार्लिंग! सिगरेट मैं अपने स्टाइल से पिलाऊँगी।” इतना कह कर उन्होंने सिगरेट जलायी और एक कश ले कर अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये और सारा धुआँ मेरे मुँह में छोड़ दिया। मेरे दोस्तों जो सिगरेट के शौकीन हैं, मेरे कहने से एक बार ऐसे सिगरेट पी कर जरूर देखें, वादा करता हूँ की आपका लंड एकदम उबाल खा जायेगा। मैंने कस कर ममता आंटी की एक चूँची जो मेरी हाथेली में थी बहुत ही बे-दर्दी से मसल दिया। ममता आंटी भी चिहुँक उठी, और बोली, “तुम बड़े वोह हो जी… मेरी मस्त जवानी इतनी बुरी तरह से मसल कर रख दी।” मैंने भी कहा, “ममता रानी आज तुम्हारी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही उभार लिये हुए हैं, तुमने क्या जादू करा है कि सुबह से लेकर शाम तक तुम्हारी चूँची एक दम इतनी बड़ी हो गयी।” ममता आंटी शर्माते हुए बोली कि “मैं आज तुमको उन चूचियों का मज़ा देना चाहती हूँ जो मेरी शादी के समय थी। इसी लिये मैंने आज इस टाइट माइक्रो ब्रा में अपनी चूचियाँ कसी है ताकि मेरी चूचियाँ उसमें समायें नहीं और फूट-फूट के बाहर निकल आने को तरसें।” ममता आंटी बोली, “मेरी चूचियाँ कब से तड़प रही हैं तुम्हारे होंठों से चुसाने के लिये।” मैंने भी बिना देर करे हुए अपने हाथ पीछे ले जा कर ममता आंटी की माइक्रो ब्रा के हुक खोल दिये। ब्रा के हुक खुलते ही ममता आंटी कि चूचियाँ एक दम स्प्रिंग की तरह उछली और मचल कर ब्रा की कैद से बाहर आ गयी। ममता आंटी ने अपने भूरे रंग के निप्पलों को आज रूज़ लगा कर एक दम गुलाबी बनाया हुआ था और मैंने बेसब्री से उन पिंक निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया और लम्बे-लम्बे चुस्से मारने लगा। रूज़ लगे होने के कारण ममता आंटी के निप्पल एक दम चैरी की तरह मीठे थे। ममता आंटी की तो सितकारी ही निकली जा रही थी और मेरी तो ऐसी इच्छा हो रही थी कि ममता आंटी की चूत का जूस इन निप्पलों से निकले और मैं पी जाऊँ। ममता आंटी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाती हुई सितकारियाँ भर रही थी और बोल रही थी कि “डार्लिंग! पी ले मेरे जिस्म का नशा। आज तो जी खोल के अपनी जवानी का नशा पिलाऊँगी तुझे। अरे मादरचोद चूस ले मेरे निप्पलों को…!” और आंटी ने अपने हाथों से मेरी पैंटी उतार दी जिससे मेरा लौड़ा ममता आंटी के पेट पर टक्कर मारने लगा। ममता आंटी लंड को कस कर अपने हाथों से दबा रही थी और बोली, “वाह मेरे बहन के लौड़े! अपनी दुल्हन से मिलने के लिये चिकना बन कर आया है। आज देखती हूँ कि किसकी माँ चुदती है, मेरी चूत की या तेरी।” ममता आंटी ने मेरे बाल पकड़ कर अपनी चूचियों पर से मेरा सर उठाया और बोलीं, ”डार्लिंग पहले एक मीठा सा चोदा लगा दे, मेरी चूत इस समय धड़क रही है, नहीं तो जल कर खाक हो जायगी। बाद में आराम से चूसाते हुए और चाटते हुए एक दूसरे को चोदेंगे।” मेरा भी बुरा हाल था। सुबह की चुदाई के बाद तो मैं भी तड़प रहा था ममता आंटी को चोदने के लिये। मैंने उनको अपनी गोदी में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और ममता आंटी की टाँगें फैला कर जी-स्ट्रिंग उतारी। वाह क्या नज़ारा था! ममता आंटी ने अपनी चूत के लिप्स भी रूज़ लगा कर गुलाबी करे हुए थे। मैंने कहा, “ममता थोड़ा सा और तड़प ले मेरी जान… अभी तो तेरी बूर के लिप्स मुझे इनवाइट कर रहे हैं चूसने के लिये…” और बोलते हुए मैंने अपने होंठ ममता आंटी की बूर के होंठों से चिपका कर जीभ चूत में घूसेड़ दी। ममता आंटी बोलती रहीं कि, “डार्लिंग मैं अपनी चूत का पहला पानी तेरे लंड पर झाड़ना चाहती हूँ। मादरचोद बाद में चाट लियो मेरी बूर। अभी तो अपने गन्ने से मेरी चूत को चोद दे। जालिम कितना और तड़पायेगा अपनी ममता को।” मैंने देखा की ममता आंटी की चूत से उनका थोड़ा-थोड़ा मदन रस रिसना चालू हो गया था और अगर मैं ज्यादा उनकी चूत चूसता तो वो वहीं पर अपना सारा माल निकाल देतीं। मैंने उनकी चूत पर से मुँह हटा लिया और ममता आंटी के ऊपर चढ़ कर उनकी मोटी-मोटी चूचियों पर अपने चूतड़ रखे और अपना लंड ममता आंटी के सामने लहराते हुए बोला, “मेरी जान! जरा अपनी चूँची के निप्पल से मेरी गाँड मारो और मेरे लंड को अपने होंठों का प्यार दो। फिर देखो आज तुम्हारी चूत की क्या भजिया बनाता हूँ!” ममता आंटी ने झट से मेरा लौड़ा अपने होंठों में ले लिया और दोनो हाथों से अपनी चूँची पकड़ कर कभी एक निप्पल तो कभी दूसरा निप्पल मेरी गाँड के छेद पर रगड़ने लगी और मैं धीरे-धीरे ममता आंटी का मुँह चोद रहा था और बोला, “मेरी जान! आज तो लंड की पहली धार तुम्हारे मुँह में ही उतारूँगा। ज़रा तबियत से चूस। मेरी प्यारी जान… झड़ने के बाद तू लंड के खड़े होने की चिंता मत कर… आज तो जम के तेरे साथ सुहाग रात मनानी है। मैं तो आज पूरी रात चोदूँगा।” फिर धीरे से मैंने अपने शॉट की स्पीड बढ़ा दी और हुमच-हुमच के ममता आंटी के मुँह में लंड पेलने लगा। एक शॉट में पूरा जड़ तक उनके गले तक उतार देता और उसी क्षण खींच के बाहर निकाल लेता और इस से पहले कि आंटी सम्भलें, दोबारा लंड उनके गले तक उतार देता। ममता आंटी भी पीछे नहीं थी। वाकय में ऐसे चूस रही थी जैसे सदियों से लंड चूसने के लिये तरस रही हों। मैं पाँच मिनट तक उनके मुँह को ऐसे ही चोदता रहा और आखिर में अपना पूरा लंड उनके गले में फंसा कर बलबला कर झड़ गया। ममता आंटी के गले में पूर लंड फंसा होने के कारण मेरी पूरी धार सीधी उनके गले में उतर रही थी और वोह हरामजादी आंटी भी बिना नुकुर-पुकुर किये मेरा रस पी रही थीं। पूरा रस निकलने के बाद जब मैंने अपना लंड उनके मुँह से निकालना चाहा तो उन्होंने मेरे चूत्तड़ पकड़ कर अपने मुँह पर दबा लिये और मेरे झड़े हुए लंड की दोबारा से चूसाई चालू कर दी। मैं तो इस नशीली चूसाई से पागल हो गया। झड़ कर दोबारा चुसवाने में जो मज़ा आ रहा था उसका वर्णन करना बड़ा मुश्किल है। मेरा साला लंड भी मादरचोद हो गया था। पाँच मिनट की चूसाई में ही साला फिर से तैयार हो गया था। मैंने कहा, “ममता आ जाओ… अब तुम्हारी चूत रानी बजाता हूँ!”

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    Watching @bbclustslut getting fucked by one of her daddies🔥

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    and should stay away to make your false friends

    harddick21blog

    BBC enjoying wife

    सामान्य मैथुन से पुरुष की तृप्ति तो हो जाती है पर अधिकांश महिलाऐं चरमोत्कर्ष को प्राप्त नहीं कर पातीं क्योंकि पुरुष जल्दी ही परमोत्कर्ष तक पहुँच जाता है और शिथिल लिंग से वह स्त्री को उत्कर्ष तक नहीं ले जा पाता। बहुत कम ऐसे पुरुष होते हैं जो मैथुन के द्वारा स्त्री को अपने से पहले पराकाष्ठा तक ले जा पाते हैं। सम्भोग (सम + भोग) का मतलब है समान भोग,यानि स्त्री और पुरुष को बराबर का आनन्द मिलना चाहिए। ऐसे में स्त्री कोचरम आनन्द से वंचित रखना सम्भोग नहीं कहा जा सकता। असल पुरुष वही है जो अपनीतृप्ति के साथ-साथ लड़की की कामुक तृप्ति के बारे में भी सोचे। अगर वह उसे लिंग-योनि घर्षण से तृप्त नहीं करपाया तो और तरीक़ों से कर सकता है। सबसे आसान तरीका है लिंग की जगह अपनी उंगली से उसकी योनि की चुदाई करे और उसके योनि-मुकुट (भग-शिश्न, clitoris) के इर्द-गिर्द ऊँगली चलाए। ध्यान रहे कि मुकुट पर सीधा दबाव ना डाला जाये क्योंकि वह एक अत्यंत ही मार्मिक अंग होता है। अगर एक उंगली कम पड़े तो दो उंगलियाँ या फिर तीन उंगलियाँ भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।योनि के करीबदो-ढाई इंच अंदर और पेट की तरफ का हिस्सा अत्यधिक संवेदनशील होता है। इसे G-Spot कहते हैं। यह छूने में थोड़ा खुरदुरा होता है। उंगलियों से चोदते वक्त इस इलाके को टटोलने का प्रयास करना चाहिए जिससे लड़की को ना केवल जल्दी उत्कर्ष प्राप्त हो बल्कि उसका उत्कर्ष परम आनन्ददायक और विस्फोटक हो। जब लड़की यौन पराकाष्ठा को प्राप्त हो जाये तो समझो सम्भोग पूरा हुआ। वह ज़रूर पुरुष की आभारी होगी। सम्भोग उपरान्त सम्भोग के बाद पुरुष का आचरण बहुत ज़रूरी है। कुछ लोग उठ कर चले जाते हैं या पलट कर सो जाते हैं। यह गलत बात है। सम्भोग हमारे जीवन की सबसे सुखदाई क्रिया होती है। इस क्रिया में साथ देने वाली लड़की को सम्भोग के तुरंत बाद छोड़ देना ठीक नहीं है। पुरुषार्थ इसमें है कि सहवास के बाद कुछ समय लड़कीके साथ बिताया जाये। ऐसे मौकों पर ज्यादा बातचीत नहीं हो पाती। इसलिए एकदूसरे को प्यार से सहलाना या लड़की पर एक हाथ और एक टांग रख कर एक-करवट कुछ देर लेटना अच्छा होगा। जवानी में एक समय में एक सम्भोग से भूखनहीं मिटती। अधिकतर मर्द कम से कम दो बार चुदाई करना चाहते हैं और कुछ तो तीसरी बार का भी मौक़ा ढूंढते हैं। हालाँकि लड़कियों में सहवास की क्षमता मर्दों के बनिस्पत कई गुना होती है, ज़्यादातर लड़कियाँ एक बार के मैथुन से तृप्त हो जाती हैं बशर्ते कि उन्हें भी चरमोत्कर्ष की प्राप्ति हुई हो। अगर दोनों राज़ी हों और पुरुष में सामर्थ्य हो तो करीब आधे घंटे के बाद दोबारा मैथुन का प्रयास करना चाहिए। इसमें एक ही बाधा आ सकती है। वह है लिंग का खड़ा ना होना। उसे दोबारा खड़ा करने में लड़की बहुत अहम भूमिका निभा सकती है। वह चाहे तो एक औसत पुरुष का लिंग अवश्य खड़ा होगा। दूसरी बार किया हुआ सम्भोग पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा समय के लिए होगा क्योंकि अब पुरुष को उत्कर्ष तक पहुँचने में देर लगेगी। यह पुरुष के लिए अच्छी बात है क्योंकि वह ज्यादा देर तक मज़े लूट सकेगा और उसे अपनी मर्दानगी पर भी गर्व होगा। लड़कियों के लिए भी कुछ हद तक यह मजेदारबात रहती है क्योंकि उन्हें भी लिंग के घर्षण से उत्कर्ष तक पहुँचने का मौक़ा मिलता है। पर अगर मैथुन बहुत देर तक चले और वीर्योत्पात ना हो यह तकलीफ दायक हो जाता है। मर्द को तो चुदाई मेंआनन्द आता रहता है पर स्त्री की योनि में तकलीफ हो सकती है। पुरुष को इस बातका ध्यान रखना चाहिए और बीच-बीच में कुछ देर के लिए घर्षण रोक देना चाहिए या फिर आसन बदलते रहना चाहिए। स्त्री को चाहिए कि अगर वह थक गई है और उसके मर्द की तृप्ति नहीं हुई है तो वहउसे अपने मुँह से तृप्त करने का विकल्प दे। बिरला ही कोई पुरुष इसके लिए मना करेगा। इसी प्रकार अगर पुरुष की तृप्ति हो गई है और स्त्री की नहीं, तो पुरुष भी उसकी योनि को मुँह से तृप्त कर सकता है। स्त्री और पुरुष, दोनों ही मौखिक-मैथुन से जल्दी उत्कर्ष को पा लेते हैं अतः हर स्त्री-पुरुष को ना केवल यह कला आनी चाहिए, उन्हें इसका भरपूर प्रयोग करकेएक दूसरे को तृप्त रखना चाहिए।

    उपसंहार इस लेख में मैंने एक कुंवारी लड़की के साथ पहले-पहले मैथुन की विधि बताई है।मैथुन एक बहुत ही विषम और निजी विषय है। इसमें बताई हर बात हर किसी के लिए उपयुक्त ना हो क्योंकि हम में काफी समानताओं के साथ-साथ कई भेद भी हैं। फिर भी, एक औसत पुरुष और स्त्री को यह क्रिया कैसे करनी चाहिए और वे क्या-क्या अपेक्षा रख सकते हैं, यह बताने का मेरा प्रयास रहा है। आशा है यह उपयोगी साबित होगा।

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    Self inflicted fun

    चन्द लम्हों के अंदर ही उसकी चूत को चोद कर रख दिया था बिरजु ने। जानदार लंड से चूत का बाजा बजवाने में स्वर्गीय आनंद ज्वाला देवी लूट-लूट कर बेहाल हुई जा रही थी। चूत की आग ने ज्वाला देवी की शर्मो हया, पतिव्रत धर्म सभी बातों से दूर करके चुदाई के मैदान में ला कर खड़ा कर डाला था। लंड का पानी चूत में बरसवाने के लिये वो जी जान की बाज़ी लगाने पर उतर आयी थी। इस समय भूल गयी थी ज्वाला देवी की वो एक जवान लड़की की माँ है, भूल गयी थी कि वो एक इज़्ज़तदार पति की पत्नी भी है। उसे याद था तो सिर्फ़ एक चीज़ का नाम और वो चीज़ थी बिरजु का मोटा ताकतवर और चूत की नस-नस तोड़ देने वाला शानदार लंड। इसी लंड ने उसके रोम-रोम को झंकृत करके रख दिया था। लंड था की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। एकाएक बिरजु ने जो अत्यन्त ज़ोरों से चूत में लंड का आवागमन प्रारम्भ किया तो मारे मस्ती के ज्वाला देवी उठ-उठ कर सिसक उठी। तभी उसकी एक चूची की घुन्डी मुँह में भर कर सुपाड़े तक लंड बाहर खींच जो एक झटके से बिरजु ने धक्का मारा की सीधा हमला बच्चेदानी पर जा कर हुआ। “ऐई ओहह फाड़ डाली ओह उफ़ आह री मरी सी आइई फ़ट्टी वाक्क्क्कई मोटा है। उफ़ फसा आह ऊह मज़ा ज़ोर से और ज़ोर से शाबाश रद्दी वाले।” इस बार बिरजु को ज्वाला देवी पर बहुत गुस्सा आया। अपने आपको रद्दी वाला कहलवाना उसे कुछ ज्यादा ही बुरा लगा था। ज़ोर से उसकी गाँड पर अपने हाथों के पंजे गड़ा कर धक्के मारता हुआ वो भी बड़बड़ाने लगा, “तेरी बहन को चोदूँ, चुदक्कड़ लुगायी आहह .. साली चुदवा रही है मुझसे, खसम की कमी पूरी कर रहा हूँ मैं…आहह और.. आहह साली कह रही है रद्दी वाला, तेरी चूत को रद्दी न बना दूँ, तो कबाड़ी की औलाद नहीं, आह हाय शानदार चूत खा जाऊँगा फाड़ दूँगा ले… ले और चुद आज” बिरजु के इन खूंख्वार धक्कों ने तो हद ही कर डाली थी। चूत की नस-नस हिला कर रख दी थी लंड की चोटों ने। ज्वाला देवी पसीने में नहा उठी और बहुत ज़ोरों से अपनी गाँड उछाल-उछाल कर तथा बिरजु की कस कर कोली भर कर वो उसे और ज्यादा ज़ोश में लाने के लिये सिसिया उठी, “आहह री ऐसे ही हाँ… हाँ ऐसे ही मेरी चूत फाड़ डालो राज्ज्ज्जा। माफ़ कर दो अब कभी तुम्हे रद्दी वाला नहीं कहुँगी। चोदो ईईईई उउम चोदो..” इस बात को सुन कर बिरजु खुशी से फूल उठा था उसकी ताकत चार गुनी बढ़ा कर लंड में इकट्ठी हो गयी थी। द्रुत गति से चूत का कबाड़ा बनाने पर वो तुल उठा था। उसके हर धक्के पर ज्वाला देवी ज़ोर-ज़ोर से सिसकती हुई गाँड को हिला-हिला कर लंड के मज़े हासिल कर रही थी। मुकाबला ज़ोरो पर ज़ारी था। बुरी तरह बिरजु से चिपटी हुई ज्वाला देवी बराबर बड़बड़ाये जा रही थी, “आहहह ये मारा… मार डाला। वाह और जमके उफ़ हद कर दी ओफ़्फ़ मार डालो मुझे..” और जबरदस्त खुंखार धक्के माराता हुआ बिरजु भी उसके गालों को पीते-पीते सिस्कियाँ भर रहा था, “वाहह मेरी औरत आहह हाय मक्खन चूत है तेरी तो.. ले.. चोद दूँगा.. ले… आहह।” और इसी ताबड़तोड़ चुदाई के बीच दोनों एक दूसरे को जकड़ कर झड़ने लगे थे, ज्वाला देवी लंड का पानी चूत में गिरवा कर बेहद तृप्ती महसूस कर रही थी। बिरजु भी अन्तिम बूँद लंड की निकाल कर उसके उपर पड़ा हुआ कुत्ते की तरह हाँफ़ रहा था। लंड व चूत पोंछ कर दोनों ने जब एक दूसरे की तरफ़ देखा तो फिर उनकी चुदाई की इच्छा भड़क उठी थी, मगर ज्वाला देवी चूत पर काबू करते हुए पेटिकोट पहनते हुए बोली, “जी तो करता है की तूमसे दिन रात चुदवाती रहूँ, मगर मोहल्ले का मामला है, हम दोनों की इसी में भलाई है की अब कपड़े पहन अपना अपना काम सम्भालें।” “म..मगर। मेम साहब.. मेरा तो फिर खड़ा होता जा रहा है। एक बार और दे दो न हाय।” एक टीस सी उठी थी बिरजु के दिल में, ज्वाला देवी का कपड़े पहनना उसके लंड के अरमानों पर कहार ढा रहा था। एकाएक ज्वाला देवी तैश में आते हुए बोल पड़ी, “अपनी औकात में आ तू अब, चुपचाप कपड़े पहन और खिसक ले यहाँ से वर्ना वो मज़ा चखाऊँगी की मोहल्ले तक को भूल जायेगा, चल उठ जल्दी।” ज्वाला देवी के इस बदलते हुए रूप को देख बिरजु सहम उठा और फ़टाफ़ट फुर्ती से उठ कर वो कपड़े पहनने लगा। एक डर सा उसकी आँखों में साफ़ दिखायी दे रहा था। कपड़े पहन कर वो आहिस्ते से बोला, “कभी-कभी तो दे दिया करोगी मेमसाहब, मैं अब ऐसे ही तड़पता रहुँगा?” बिरजु पर कुछ तरस सा आ गया था इस बार ज्वाला देवी को, उसके लंड के मचलते हुए अरमानों और अपनी चूत की ज्वाला को मद्देनज़र रखते हुए वो मुसकुरा कर बोली, “घबड़ा मत, हफ़्ते दो हफ़्ते में मौका देख कर मैं तुझे बुला लिया करूँगी, जी भर कर चोद लिया करना, अब तो खुश?” वाकई खुशी के मारे बिरजु का दिल बल्लियों उछल पड़ा और चुपचाप बाहर निकल कर अपनी सायकल की तरफ़ बढ़ गया। थोदी देर बाद वो वहाँ से चल पड़ा था। वो यहाँ से जा तो रहा था मगर ज्वाला देवी की मक्खन चूत का ख्याल उसके ज़ेहन से जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। वाह री चुदाई, कोई न समझा तेरी खुदाई। सुदर्शन जी सरकारी काम से १ हफ़्ते के लिये मेरठ जा रहे थे, ये बात जब ज्वाला देवी को पता चली तो उसकी खुशी का ठिकाना ही न रहा। सबसे ज्यादा खुशी तो उसे इसकी थी कि पति की गैरहाज़िरी में बिरजु का लंबा व जानदार लंड उसे मिलने जा रहा था। जैसे ही सुदर्शन जी जाने के लिये निकले, ज्वाला ने बिरजु को बुलवा भेजा और नहा धो कर उसी दिन की तरह तैयार हुई और बिरजु के आने का इंतज़ार करने लगी। बिरजु के आते ही वो उससे लिपट गयी। उसके कान में धीरे से बोली, “राजा आज रात को मेरे यहीं रुको और मेरी चूत का बाजा जी भर कर बजाना।” ज्वाला देवी बिरजु को ले कर अपने बेडरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद करके उसके लौड़े को सहलाने लगी। लेकिन उस रात गज़ब हो गया, वो हो गया जो नहीं होना चाहिये था, यानि उन दोनों के मध्य हुई सारी चुदाई-लीला को रंजना ने जी भर कर देखा और उसी पर निश्चय किया कि वो भी अब जल्द ही किसी जवान लंड से अपनी चूत का उद्घाटन जरूर करा कर ही रहेगी। हुआ यूँ था की उस दिन भी रंजना हमेशा की तरह रात को अपने कमरे में पढ़ रही थी। रात १० बजे तक तो वो पढ़ती रही और फिर थकान और उब से तंग आ कर कुछ देर हवा खाने और दिमाग हल्का करने के इरादे से अपने कमरे से बाहर आ गयी और बरामदे में चहल कदमी करती हुई टहलने लगी। मगर सर्दी ज्यादा थी इसलिये वो बरामदे में ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकी और कुछ देर के बाद अपने कमरे की और लौटने लगी कि मम्मी के कमरे से सोडे की बोतलें खुलने की आवाज़ उसके कानो में पड़ी। बोतलें खुलने की आवाज़ सुन कर वो ठिठकी और सोचने लगी, “इतनी सर्दी में मम्मी सोडे की बोतलों का आखिर कर क्या रही है?” अजीब सी उत्सुकता उसके मन में पैदा हो उठी और उसने बोतलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से ज्वाला देवी के कमरे की तरफ़ कदम बढ़ा दिये। इस समय ज्वाला देवी के कमरे का दरवाज़ा बंद था इसलिये रंजना कुछ सोचती हुई इधर उधर देखने लगी और तभी एक तरकीब उसके दिमाग में आयी। तरकीब थी पिछला दरवाजा, जी हाँ पिछला दरवाजा। रंजना जानती थी की मम्मी के कमरे में झाँकने के लिये पिछले दरवाजे का की-होल है। वहाँ से वो सुदर्शन जी और ज्वाला देवी के बीच चुदाई- लीला भी एक दो बार देख चुकी थी। रंजना पिछले दरवाजे पर आयी और ज्योंही उसने की-होल से अंदर झांका कि वो बुरी तरह चौंक पड़ी। जो कुछ उसने देखा उस पर कतई विश्वास उसे नहीं हो रहा था। उसने सिर को झटका दे कर फिर अंदर के दृश्य देखने शुरु कर दिये। इस बार तो उसके शरीर के कुँवारे रोंगटे झनझना कर खड़े हो गये, जो कुछ उसने अंदर देखा, उसे देख कर उसकी हालत इतनी खराब हो गयी कि काफ़ी देर तक उसके सोचने समझने की शक्ति गायब सी हो गयी। बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू करके वो सही स्थिती में आ सकी। रंजना को लाल बल्ब की हल्की रौशनी में कमरे का सारा नज़ारा साफ़-साफ़ दिखायी दे रहा था। उसने देखा की अंदर उसकी मम्मी ज्वाला देवी और वो रद्दी वाला बिरजु दोनों शराब पी रहे थे। ज़िन्दगी में पहली बार अपनी मम्मी को रंजना ने शराब की चुसकियाँ लेते हुए और गैर मर्द से रंग-रंगेलियाँ मनाते हुए देखा था। बिरजु इस समय ज्वाला देवी को अपनी गोद में बिठाये हुए था, दोनों एक दूसरे से लिपट चिपट रहे थे। दुनिया को नज़र अंदाज़ करके चुदाई का ज़बर्दस्त मज़ा लेने के मूड में दोनों आते जा रहे थे। इस दृश्य को देख कर रंजना का हाल अजीब सा हो चला था, खून का दौरा काफ़ी तेज़ होने के साथ साथ उसका सिर भी ज़ोरों से घुम रहा था और चूत के आस पास सुरसुराहट सी होती हुई उसे लग रही थी। दिल की धड़कनें ज़ोर-ज़ोर से जारी थीं। गला व होंठ खुश्क पड़ते जा रहे थे और एक अजीब सा नशा उस पर भी छाता जा रहा था। ज्वाला देवी शराब पीती हुई बिरजु से बोले जा रही थी, उसकी बाँहें पीछे की ओर घुम कर बिरजु के गले का हार बनी हुई थी। ज्वाला देवी बिरजु को बार-बार “सनम” और “सैंया” के नाम से ही सम्बोधित कर रही थी। बिरजु भी उसे “रानी” ओर “मेरी जान” कह कह कर उसे दिलो जान से अपना बनाने के चक्कर में लगा हुआ था। बिरजु का एक हाथ ज्वाला देवी की गदराई हुई कमर पर कसा हुआ था, और दूसरे हाथ में उसने शराब का गिलास पकड़ रखा था। ज्वाला देवी की कमर में पड़ा उसका हाथ कभी उसकी चूची पकड़ता और कभी नाभी के नीचे अंगुलियाँ गड़ाता तो कभी उसकी जाँघें। फिर शराब का गिलास उसने ज्वाला देवी के हाथ में थमा दिया। तब ज्वाला देवी उसे अपने हाथों से शराब पिलाने लगी। मौके का फ़ायदा उठाते हुए बिरजु दोनों हाथों से उसकी भारी मोटी मोटी चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से भींचता और नोचता हुआ मज़ा लेने में जुट गया। एकाएक ज्वाला देवी कुछ फ़ुसफ़ुसाई और दोनों एक दूसरे की निगाहों में झांक कर मुसकुरा दिये। शराब का खाली गिलास एक तरफ़ रख कर बिरजु बोला, “जान मेरी ! अब खड़ी हो जाओ।” बिरजु की आज्ञा का तुरंत पालन करती हुई ज्वाला देवी मुस्कराते हुए ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी। बिरजु बड़े गौर से और चूत-फ़ाड़ निगाहों से उसे घूरे जा रहा था और ज्वाला देवी उसकी आँखों में आँखे डाल कर चूत की ज्वाला में मचलती हुई मुस्कराते हुए अपने कपड़े उतारने में लग गयी। उसके हाथ तो अपना बदन नंगा करने में जुटे हुए थे मगर निगाहें बराबर बिरजु के चेहरे और लंड के उठान पर ही जमी हुई थी। अपने शरीर के लगभग सारे कपड़े उतारने के बाद एक ज़ोरदार अंगड़ायी ले कर ज्वाला देवी अपना निचला होंठ दांतों में दबाते हुए बोली, “हाय ! मैं मर जाऊँ सैंया! आज मुझे उठने लायक मत छोड़ना। सच बड़ा मज़ा देता है तू, मेरी चूत को घोट कर रख देता है तू।” पैन्टी, ब्रा और हाई हील सैण्डलों में ज्वाला देवी इस उम्र में भी लंड पर कयामत ढा रही थी। उसका नंगा बदन जो गोरा होने के साथ-साथ गुद्देदार भींचने लायक भी था। लाल बल्ब की हल्की रौशनी में बड़ा ही लंड मार साबित हो रहा था। वास्तव में रंजना को ज्वाला देवी इस समय इतनी खराब सी लगने लगी थी कि वो सोच रही थी कि ‘काश! मम्मी की जगह वो नंगी हो कर खड़ी होती तो चूत के अरमान आज अवश्य पूरे हो जाते।’ मगर सोचने से क्या होता है? सब अपने-अपने मुकद्दर का खाते हैं। बिरजु का लंड जब ज्वाला देवी की चूत के मुकद्दर में लिखा है तो फिर भला रंजना की चूत की कुँवारी सील आज कैसे टूट सकती थी। जोश में आ कर बिरजु अपनी जगह छोड़ कर खड़ा हुआ और मुसकुराता हुआ ज्वाला देवी के ठीक सामने आ पहुँचा। कुछ पल तक उसने सिर से पांव तक उसे देखने के बाद अपने कपड़े उतारने चालू कर दिये। एक-एक करके सभी कपड़े उसने उतार कर रख दिये और वो एक दम नंग धड़ंग हो कर अपना खड़ा लंड हाथ में पकड़ कर दबाते हुए सिसका, “हाय रानी आज! इसे जल्दी से अपनी चूत में ले लो।” इस समय जिस दृष्टिकोण से रंजना अंदर की चुदाई के दृश्य को देख रही थी उसमें ज्वाला देवी का सामने का यानि चूत और चूचियाँ तथा बिरजु की गाँड और कमर यानि पिछवाड़ा उसे दिखायी पड़ रहा था। बिरजु की मर्दाना तन्दुरुस्त मजबूत गाँड और चौड़ा बदन देख कर रंजना अपने ही आप में शरमा उठी थी। अजीब सी गुदगुदी उसे अपनी चूचियों में उठती हुई जान पड़ रही थी। बिरजु अभी कपड़े उतार कर सीधा खड़ा हुआ ही था की ज्वाला देवी ने अपनी गुद्दाज व मुलायम बाँहें उसकी गर्दन में डाल दीं और ज़ोर से उसे भींच कर बुरी तरह उससे चिपक गयी। चुदने को उतावली हो कर बिरजु की गर्दन पर चुम्मी करते हुए वो धीरे से फ़ुसफ़ुसा कर बोली, “मेरे सनम ! बड़ी देर कर दी है तूने ! अब जल्दी कर न! देखो, मारे जोश के मेरी तो ब्रा ही फ़टी जा रही है, मुझे बड़ी जलन हो रही है, उफ़्फ़! मैं तो अब बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ, आह जल्दी से मेरी चूत का बाजा बजा दे सैंया… आह।” बिरजु उत्तर में होंठो पर जीभ फ़िराता हुआ हँसा और बस फिर अगले पल अपनी दोनों मर्दानी ताकतवर बाँहें फ़ैला कर उसने ज्वाला देवी को मजबूती से जकड़ लिया। जबरदस्त तरीके से भींचता हुआ लगातार कई चुम्मे उसके मचलते फ़ड़फ़ड़ाते होंठों और दहकते उभरे गोरे-गोरे गालों पर काटने शुरु कर डाले। ज्वाला देवी मदमस्त हो कर बिरजु के मर्दाने बदन से बुरी तरह मतवाली हो कर लिपट रही थी। दोनों भारी उत्तेजना और चुदाई के उफ़ान में भरे हुए ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ते हुए पलंग की तरफ़ बढ़ते जा रहे थे। पलंग के करीब पहुंचते ही बिरजु ने एक झटके के साथ ज्वाला देवी का नंगा बदन पलंग पर पटक दिया। अपने आपको सम्भालने या बिरजु का विरोध करने की बजाये वो गेंद की तरह हँसती हुई पलंग पर धड़ाम से जा गिरी। पलंग पर पटकने के तुरन्त बाद बिरजु ज्वाला देवी की तरफ़ लपका और उसके उपर झुक गया। अगले ही पल उसकी ब्रा खींच कर उसने चूचियों से अलग कर दी और उसके बाद चूत से पैन्टी भी झटके के साथ जोश में आ कर उसने इस तरह खींची कि पैन्टी ज्वाला देवी की कमर व गाँड का साथ छोड़ कर एकदम उसकी टाँगो में आ कर गिरी। जैसे ही बिरजु का लंड हाथ में पकड़ कर ज्वाला देवी ने ज़ोर से दबाया तो वो झुँझला उठा, इसी झुँझलाहट और ताव में आ कर उसने ज्वाला देवी की उठी हुई चूचियों को पकड़ कर बेरहमी से खींचते हुए वो उन पर खतरनाक जानवर की तरह टूट पड़ा। ज्वाला देवी के गुलाबी होंठो को जबर्दस्त तरीके से उसने पीना शुरु कर दिया। उसके गालों को ज़ोर- ज़ोर से भींच कर होंठ चूसते हुए वो अत्यन्त जोशीलापन महसूस कर रहा था। चन्द पलों में उसने होंठों को चूस-चूस कर उनकी माँ चोद कर रख दी। जी भर कर होंठ पीने के बाद उसने एकदम ही ज्वाला देवी को पलंग पर घुमा कर चित्त पटक दिया और तभी उछल कर वो उसके उपर सवार हो गया। अपने शरीर के नीचे उसे दबा कर उसका पूरा शरीर ही उसने ऐसे ढक लिया मानो ज्वाला देवी उसके नीचे पिस कर रहेगी। बिरजु इस समय ज्वाला देवी के बदन से लिपट कर और उसे ज़ोरों से भींच कर अपना बदन उसके मुलायम जनाने बदन पर बड़ी बेरहमी से रगड़े जा रहा था। बदन से बदन पर घस्से मारता हुआ वो दोनों हाथों से चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाता जा रहा था और बारी-बारी से उसने चूचियों को मुँह में ले कर तबियत से चूसना भी स्टार्ट कर दिया था। बिरजु और ज्वाला देवी दोनों ही इस समय चुदाई की इच्छा में पागल हो चुके थे। बिरजु के दोनों हाथों को ज्वाला देवी ने मजबूती से पकड़ कर उसकी चुम्मों का जवाब चुम्मों से देना शुरु कर दिया। ज्वाला देवी मस्ती में आ कर बिरजु के कभी गाल पर काट लेती तो कभी उसके कंधे पर काट कर अपनी चूत की धधकती ज्वाला का प्रदर्शन कर रही थी। अपनी पूरी ताकत से वो ज़ोर से बिरजु को भींचे जा रही थी। एकाएक ज्वाला ने बिरजु की मदद करने के लिये अपनी टाँगे उपर उठा कर अपने हाथों से टाँगों में फ़ंसी हुई पैन्टी निकाल कर बाहर कर दी और हाई हील सैण्डलों के अलावा किसी कपड़े का नामोनिशान तक अपने बदन से उसने हटा कर रख दिया। उसकी तनी हुई चूचियों की उभरी हुई घुन्डी और भारी गाँड सभी रंजना को साफ़ दिखायी पड़ रहा था। बस उसे तमन्ना थी तो सिर्फ़ इतनी कि कब बिरजु का लंड अपनी आँखों से वो देख सके। सहसा ही ज्वाला देवी ने दोनों टाँगे उपर उठा कर बिरजु की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली और जोंक की तरह उससे लिपट गयी। दोनों ने ही अपना-अपना बदन बड़ी ही बेरहमी और ताकत से एक दूसरे से रगड़ना शुरु कर दिया। चुम्मी काटने की क्रिया बड़ी तेज़ और जोशीलेपन से जारी थी। ज़ोर ज़ोर से हाँफ़ते सिसकारियाँ छोड़ते हुए दोनों एक दूसरे के बदन की माँ चोदने में जी जान एक किये दे रहे थे। तभी बड़ी फ़ुर्ती से बिरजु ज़ोर-ज़ोर से कुत्ते की तरह हाँफ़ता हुआ सीधा बैठ गया और तेज़ी से ज्वाला देवी की टाँगों की तरफ़ चला आया। इस पोजिशन में रंजना अपनी मम्मी को अच्छी तरह नंगी देख रही थी। उसने महसूस किया की मम्मी की चूत उसकी चूत से काफ़ी बड़ी है। चूत की दरार उसे काफ़ी चौड़ी दिखायी दे रही थी। उसे ताज्जुब हुआ की मम्मी की चूत इतनी गोरी होने के साथ-साथ एकदम बाल रहित सफ़ाचट थी। कुछ दिन पहले ही बड़ी-बड़ी झांटों का झुरमुट स्वयं अपनी आँखों से उसने ज्वाला देवी की चूत पर उस समय देखा था, जब सुबह सुबह उसे जगाने के लिये गयी थी। इस समय ज्वाला देवी बड़ी बेचैन, चुदने को उतावली हो रही थी। लंड सटकने वाली नज़रों से वो बिरजु को एक टक देख रही थी। चूत की चुदाई करने के लिये बिरजु टाँगों के बल बैठ कर ज्वाला देवी की जाँघों पर, चूत की फाँकों पर और उसकी दरार पर हाथ फ़िराने में लगा हुआ था और फिर एकदम से उसने घुटने के पास उसकी टाँग को पकड़ कर चौड़ा कर दिया। तत्पश्चात उसने पलंग के पास मेज़ पर रखी हुई खुश्बुदार तेल की शीशी उठायी और उसमें से काफ़ी तेल हाथ में ले कर ज्वाला देवी की चूत पर अच्छी तरह से अंदर और बाहर इस तरह मलना शुरु किया की उसकी सुगन्ध रंजना के नथुनों में भी आ कर घुसने लगी। अपनी चूत पर किसी मर्द से तेल मालिश करवाने के लिये रंजना भी मचल उठी। उसने खुद ही एक हाथ से अपनी चूत को ज़ोर से दबा कर एक ठंडी साँस खींची और अंदर की चुदाई देखने में उसने सारा ध्यान केन्द्रित कर दिया। ज्वाला देवी की चूत तेल से तर करने के पश्चात बिरजु का ध्यान अपने खड़े हुए लंड पर गया। और जैसे ही उसने अपने लम्बे और मोटे लंड को पकड़ कर हिलाया कि बाहर खड़ी रंजना की नज़र पहली बार लंड पर पड़ी। इतनी देर बाद इस शानदार डंडे के दर्शन उसे नसीब हुए थे। लंड को देखते ही रंजना का कलेजा मुँह को आ गया। उसे अपनी साँस गले में फ़ंसती हुई जान पड़ी। वाकई बिरजु का लंड बेहद मोटा, सख्त और जरूरत से ज्यादा ही लंबा था। देखने में लकड़ी के खूंटे की तरह वो उस समय दिखायी पड़ रहा था। शायद इतने शानदर लंड की वजह ही थी की ज्वाला देवी जैसी इज़्ज़तदार औरत भी उसके इशारों पर नाच रही थी। रंजना को अपनी सहेली की कही हुई शायरी याद आ गयी, “औरत को नहीं चाहिये ताज़ो तख्त, उसको चाहिये लंड लंबा, मोटा और सख्त।” हाँ तो बिरजु ने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से तेल की शीशी उल्टी करके लंड के उपर तेल की धार उसने डाल दी। फ़ौरन शीशी मेज़ पर रख कर उसने उस हाथ से लंड पर मालिश करनी शुरु कर दी। मालिश के कारण लंड का तनाव, कड़ापन और भी ज्यादा बढ़ गया। चूत में घुसने के लिये वो ज़हरीले सांप की तरह फ़ुफ़कारने लगा। ज्वाला देवी लंड की तरफ़ कुछ इस अंदाज़ में देख रही थी मानो लंड को निगल जाना चाहती हो या फिर आँखों के रास्ते पी जाना चाहती हो। सारे काम निबटा कर बिरजु खिसक कर ज्वाला देवी की टाँगों के बीच में आ गया। उसने टाँगों को जरूरत के मुताबिक मोड़ा और फिर घुटनों के बल उसके उपर झुकते हुए अपने खूंटे जैसे सख्त लंड को ठीक चूत के फ़ड़फ़ड़ाते छेद पर टिका दिया। इसके बाद बिरजु पंजो के बल थोड़ा उपर उठा। एक हाथ से तो वो तनतनाते लंड को पकड़े रहा और दूसरे हाथ से ज्वाला देवी की कमर को उसने धर दबोचा। इतनी तैयारी करते ही ज्वाला देवी की तरफ़ आँख मारते हुए उसने चुदाई का इशारा किया। परिणाम स्वरूप, ज्वाला देवी ने अपने दोनों हाथों की अंगुलियों से चूत का मुँह चौड़ा किया। अब चूत के अंदर का लाल-लाल हिस्सा साफ़ दिखायी दे रहा था। बिरजु ने चूत के लाल हिस्से पर अपने लंड का सुपाड़ा टिका कर पहले खूब ज़ोर-ज़ोर से उसे चूत पर रगड़ा। इस तरह चूत पर गरम सुपाड़े की रगड़ायी से ज्वाला देवी लंड सटकने को बैचैन हो उठी। “देख! देर न कर, डाल .. उपर-उपर मत रहने दे.. आहह। पूरा अंदर कर दे उउफ़ सीईई सी।” ज्वाला देवी के मचलते अरमानों को महसूस कर बिरजु के सब्र का बांध भी टूट गया और उसने जान लगा कर इतने जोश से चूत पर लंड को दबाया कि आराम के साथ पूरा लंड सरकता चूत में उतर गया। ऐसा लग रहा था जैसे लंड के चूत में घुसते ही ज्वाला देवी की भड़कती हुई चूत की आग में किसी ने घी टपका दिया हो, यानि वो और भी ज्यादा बेचैन सी हो उठी। और जबर्दस्त धक्कों द्वारा चुदने की इच्छा में वो मचली जा रही थी। बिरजु की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ वो उसे अपनी ओर खींच-खींच कर पागलों की तरह पेश आ रही थी। बड़ी बेचैनी से वो अपनी गर्दन इधर-उधर पटकते हुए अपनी दोनों टाँगों को भी उछाल-उछाल कर पलंग पर मारे जा रही थी। लंड के स्पर्श ने उसके अंदर एक जबर्दस्त तूफ़ान सा भर कर रख दिया था। अजीब-अजीब तरह की अस्पष्ट आवाज़ें उसके मुँह से निकल रही थी। “ओहह मेरे राजा मार, जान लगा दे। इसे फ़ाड़ कर रख दे .. रद्दी वाले आज रुक मत अरे मार न मुझे चीर कर रख दे। दो कर दे मेरी चूत फ़ाड़ कर आह.. सीईई।” बिरजु के चूत में लंड रोकने से ज्वाला देवी को इतना गुस्सा आ रहा था कि वो इस स्तिथी को सहन न करके ज़ोरों से बिरजु के मुँह पर चांटा मारने को तैयार हो उठी थी। मगर तभी बिरजु ने लंड को अंदर किया ओर थोड़ा दबा कर चूत से सटा दिया और दोनों हाथों से कमर को पकड़ कर वो कुछ उपर उठा और अपनी कमर तथा गाँड को उपर उठा कर ऐसा उछला कि ज़ोरों का धक्का ज्वाला देवी की चूत पर जा कर पड़ा। इस धक्के में मोटा, लंबा और सख्त लंड चूत में तेज़ी से घुसता चला गया और इस बार सुपाड़े की चोट चूत की तलहटी पर जा कर पड़ी। इतनी ज़ोर से मम्मी की चूत पर हमला होता देख कर रंजना बुरी तरह कांप उठी मगर अगले ही पल उसके आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि ज्वाला देवी ने कोई दिक्कत इस भारी धक्के के चूत पर पड़ने से नहीं ज़ाहिर की थी, बल्कि उसने बिरजु को बड़े ही ज़ोरों से मस्ती में आ कर बाँहों में भींच लिया। इस अजीब वारदात को देख कर रंजना को अपनी चूत के अंदर एक न दिखायी देने वाली आग जलती हुई महसूस हुई। उसके अंदर सोयी हुई चुदाई इच्छा भी प्रज्वलित हो उठी थी। उसे लगा कि चूत की आग पल-पल शोलो में बदलती जा रही है। चूत की आग में झुलस कर वो घबड़ा सी गयी और उसे चक्कर आने शुरु हो गये। इतना सब कुछ होते हुए भी चुदाई का दृश्य देखने में बड़ा अजीब सा मज़ा उसे प्राप्त हो रहा था, वहाँ से हटने के बारे में वो सोच भी नहीं सकती थी। उसकी निगाहे अंदर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। जबकि शरीर धीरे-धीरे जवाब देता जा रहा था। अब उसने देखा कि बिरजु का लंड चूत के अंदर घुसते ही मम्मी बड़े अजीब से मज़े से मतवाली हो कर बुरी तरह उससे लिपट गयी थी और अपने बदन तथा चूचियों और गालों को उससे रगड़ते हुए धीरे-धीरे मज़े की सिसकारियाँ छोड़ रही थी, “पेल.. वाह..रे.. मार.. ऐसे ही श.. म.. हद.. हो गयी वाहह और मज़ा दे और दे सी आह उफ़ ।” लंड को चूत में अच्छी तरह घुसा कर बिरजु ने मोर्चा सम्भाला। उसने एक हाथ से तो ज्वाला देवी की मुलायम कमर को मजबूती से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी भारी उभरी हुई गाँड के नीचे लगा कर बड़े ज़ोर से हाथ का पन्जा, गाँड के गोश्त मे गड़ाया। ज़ोर-ज़ोर से गाँड का गुद्दा वो मसले जा रहा था। ज्वाला देवी ने भी जवाब में बिरजु की मर्दानी गाँड को पकड़ा और ज़ोर से उसे खींचते हुए चूत पर दबाव देती हुई वो बोली, “अब इसकी धज्जियाँ उड़ा दे सैंया। आह ऐसे काम चलने वाला नहीं है.. पेल आह।” उसके इतना कहते ही बिरजु ने सम्भाल कर ज़ोरदार धक्का मारा और कहा, “ले। अब नहीं छोड़ूँगा। फ़ाड़ डालूँगा तेरी…” इस धक्के के बाद जो धक्के चालू हुए तो गजब ही हो गया। चूत पर लंड आफ़त बन कर टूट पड़ा था। ज्वाला देवी उसकी गाँड को पकड़ कर धक्के लगवाने और चूत का सत्यानाश करवाने में उसकी सहायता किये जा रही थी। बिरजु बड़े ही ज़ोरदार और तरकीब वाले धक्के मार-मार कर उसे चोदे जा रहा था। बीच-बीच में दोनों हाथों से उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए वो बुरी तरह उसके होंठो और गालों को काटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। चूत में लंड से ज़ोरदार घस्से छोड़ता हुआ वो चुदाई में चार चांद लगाने में जुटा हुआ था। चूत पर घस्से मारते हुए वो बराबर चूचियों को मुँह में दबाते हुए घुन्डियों को खूब चूसे जा रहा था। ज्वाला देवी इस समय मज़े में इस तरह मतवाली दिखायी दे रही थी कि अगर इस सुख के बदले उन पलो में उसे अपनी जान भी देनी पड़े तो वो बड़ी खुशी से अपनी जान भी दे देगी, मगर इस सुख को नहीं छोड़ेगी। अचानक बिरजु ने लंड चूत में रोक कर अपनी झांटे व अन्डे चूत पर रगड़ने शुरु कर दिये। झांटो व अन्डों के गुदगुदे घस्सो को खा-खा कर ज्वाला देवी बेचैनी से अपनी गाँड को हिलाते हुए चूत पर धक्कों का हमला करवाने के लिये बड़बड़ा उठी, “हाय उउई झांटे मत रगड़.. आहह तेरे अन्डे गुदगुदी कर रहे हैं सनम, उउई मान भी जो आईईईई चोद पेल… आहह रुक क्यों गया ज़ालिम… आहह मत तरसा आहह.. अब तो असली वक्त आया है धक्के मारने क। मार खूब मार जल्दी कर.. आज चूत के टूकड़े टूकड़े… फ़ड़ डाल इसे… हाय बड़ा मोटा है.. आइइई।” बिरजु का जोश ज्वाला देवी के यूँ मचलने सिसकने से कुछ इतना ज्यादा बढ़ उठा, अपने उपर वो काबू न कर सका और सीधा बैठ कर जबर्दस्त धक्के चूत पर लगाने उसने शुरु कर दिये। अब दोनों बराबर अपनी कमर व गाँड को चलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाये जा रहे थे। पलंग बुरी तरह से चरमरा रहा था और धक्के लगने से फ़चक-फ़चक की आवाज़ के साथ कमरे का वातावरण गूंज उठा था। ज्वाला देवी मारे मज़े के ज़ोर ज़ोर से किल्कारियाँ मार रही थी, और बिरजु को ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने के लिये उत्साहित कर रही थी, “राजा । और तेज़.. और तेज़.. बहुत तेज़.. रुकना मत। जितना चाहे ज़ोर से मार धक्का.. आह। हाँ। ऐसे ही। और तेज़। ज़ोर से मार आहह।” बिरजु ने आव देखा न ताव और अपनी सारी ताकत के साथ बड़े ही खुँख्वार चूत फ़ाड़ धक्के उसने लगाने प्रारम्भ कर दिये। इस समय वो अपने पूरे जोश और उफ़ान पर था। उसके हर धक्के में बिजली जैसी चमक और तेज़ कड़कड़ाहट महसूस हो रही थी। दोनों की गाँड बड़ी ज़ोरो से उछले जा रही थी। ओलों की टप-टप की तरह से वो पलंग को तोड़े डाल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनों एक दूसरे के अंदर घुस कर ही दम लेंगे, या फिर एक दूसरे के अंग और नस-नस को तोड़ मरोड़ कर रख देंगे। उन दोनों पर ही इस समय कातिलाना भूत पूरी तरह सवार था। सहसा ही बिरजु के धक्कों की रफ़्तार असाधारण रूप से बढ़ उठी और वो ज्वाला देवी के शरीर को तोड़ने मरोड़ने लगा। ज्वाला देवी मज़े में मस्तानी हो कर दुगुने जोश के साथ चीखने चिल्लाने लगी, “वाह मेरे प्यारे.. मार.. और मार हाँ बड़ा मज़ा आ रहा है। वाह तोड़ दे फ़ाड़ डाल, खा जा छोड़ना मत उफ़्फ़.. सी.. मार जम के धक्का और पूरा चोद दे इसे हाय।” और इसी के साथ ज्वाला देवी के धक्कों और उछलने की रफ़्तार कम होती चली गयी। बिरजु भी ज़ोर-ज़ोर से उछलने के बाद लंड से वीर्य फैंकने लगा था। दोनों ही शांत और निढाल हो कर गिर पड़े थे। ज्वाला देवी झड़ कर अपने शरीर और हाथ पांव ढीला छोड़ चुकी थी तथा बिरजु उसे ताकत से चिपटाये बेहोश सा हो कर आँखें मूंदे उसके उपर गिर पड़ा था और ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ने लगा था। इतना सब देख कर रंजना का मन इतना खराब हुआ कि आगे एक दृश्य भी देखना उसे मुश्किल जान पड़ने लगा था। उसने गर्दन इधर-उधर घुमा कर अपने सुन्न पड़े शरीर को हरकत दी, इसके बाद आहिस्ता से वो भारी मन, कांपते शरीर और लड़खड़ाते हुए कदमों से अपने कमरे में वापस लौट आयी। अपने कमरे में पहुँच कर वो पलंग पर गिर पड़ी, चुदाई की ज्वाला में उसका तन मन दोनों ही बुरी तरह छटपटा रहे थे, उसका अंग-अंग मीठे दर्द और बेचैनी से भर उठा था, उसे लग रहा था कि कोई ज्वालामुखी शरीर में फ़ट कर चूत के रास्ते से निकल जाना चाहता था। अपनी इस हालत से छुटकारा पाने के लिये रंजना इस समय कुछ भी करने को तैयार हो उठी थी, मगर कुछ कर पाना शायद उसके बस में ही नहीं था। सिवाय पागलो जैसी स्तिथी में आने के। इच्छा तो उसकी ये थी कि कोई जवान मर्द अपनी ताकतवर बाँहों में ज़ोरों से उसे भींच ले और इतनी ज़ोर से दबाये कि सारे शरीर का कचुमर ही निकल जाये। मगर ये सोचना एकदम बेकार सा उसे लगा। अपनी बेबसी पर उसका मन अंदर ही अंदर फ़ुनका जा रहा था। एक मर्द से चुदाई करवाना उसके लिये इस समय जान से ज्यादा अनमोल था, मगर न तो चुदाई करने वाला कोई मर्द इस समय उसको मिलने जा रहा था और न ही मिल सकने की कोई उम्मीद या आसार आस पास उसे नज़र आ रहे थे। उसने अपने सिरहाने से सिर के नीचे दबाये हुए तकिये को निकाल कर अपने सीने से भींच कर लगा लिया और उसे अपनी कुँवारी अनछुई चूचियों से लिपट कर ज़ोरो से दबाते हुए वो बिस्तर पर औंधी लेट गयी। सारी रात उसने मम्मी और बिरजु के बीच हुई चुदाई के बारे में सोच-सोच कर ही गुज़ार दी। मुश्किल से कोई घन्टा दो घन्टा वो सो पायी थी। सुबह जब वो जागी तो हमेशा से एक दम अलग उसे अपना हर अंग दर्द और थकान से टूटता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था बेचारी को, जैसे किसी मज़दूर की तरह रात में ओवरटाइम ड्यूटी करके लौटी है। जबकि चूत पर लाख चोटें खाने और जबर्दस्त हमले बुलवाने के बाद भी ज्वाला देवी हमेशा से भी ज्यादा खुश और कमाल की तरह महकती हुई नज़र आ रही थी। खुशियाँ और आत्म-सन्तोश उसके चेहरे से टपक रहा था। दिन भर रंजना की निगाहें उसके चेहरे पर ही जमी रही। वो उसकी तरफ़ आज जलन और गुस्से से भरी निगाहों से ही देखे जा रही थी।

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    Pole in hanging hole

    मैं एक सुंदर और आकर्षक जिस्म का मालिक हूँ. मेरे लंड की लम्बाई 7 इंच और मोटाई 3.5 इंच है, जिसने कई लड़कियों और भाभियों की चूत को फाड़ कर उन्हें संतुष्ट किया है.

    ये घटना अभी 2 साल पहले की है. मैं मैकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई कर रहा हूँ. अभी मेरी ट्रेनिंग चल रही है तो मुझे अपने खर्च के लिए रूपये की जरूरत थी. क्योंकि जो रूपये मुझे घर से मिलते थे, उसमें मेरा गुजारा नहीं हो रहा था. फिर मैंने पढ़ाई के साथ साथ जॉब करने की सोची और काफी ढूँढने के बाद मुझे एक जॉब मिली, लेकिन उसमें भी मेरा खर्च पूरा नहीं हो रहा था… क्योंकि ये जॉब मुझे मात्र 15000 ही दे रही थी. फिर भी मैं काम करता रहा और इसी दौरान मेरी मुलाकात मेरे ही साथ काम करने वाले एक रोहित नाम के लड़के से हुई, जो कि जॉब के साथ साथ एक प्लेबॉय भी था.

    एक दिन मैंने उसे अपनी प्रॉब्लम बताई तो पहले तो वह हँसा और कहने लगा कि मेरे पास तेरे लिए काम है. तू इतना स्मार्ट है और शरीर की फिटनेस भी ठीक है… इस पर भी तू परेशान है. तू साले गांड मरा के भी पैसे कमा सकता है

    मुझे उसकी ये बात सुनकर बहुत गुस्सा आया. मैंने उसे गाली देकर बोला- बहनचोद, अब यही काम बचा है… जब मैं छोटा और नासमझ था, तब से अपनी गांड बचाता आ रहा हूँ, आज जब समझदार हो गया तो इसे लुटा दूँ… बहन के लंड… सही नहीं बोलना है तो मत बोल. वह बोला- अबे नाराज क्यों होता है मेरे भाई… मैं तो मजाक कर रहा हूँ. मैंने कहा- ठीक है… पर मुझे ऐसा मजाक पसंद नहीं है. उसने कहा- ठीक है… मैं अब ऐसे मजाक नहीं करूँगा.

    मैं हंस दिया तो फिर उसने कहा कि आज जॉब से छूटने के बाद मैं तुझे किसी से मिलाऊंगा, वह तेरी प्रॉब्लम सॉल्व कर देगी. मैंने कहा- ठीक है.

    फिर हम दोनों जॉब से छूटने के बाद बाहर आए, मैं उसकी बाइक पर बैठ कर उसके साथ चल दिया. करीब 15 किलोमीटर जाने के बाद वह एक फार्म के सामने रुका. मैं बोला- कहां लाया है भाई? तो उसने कहा- बस तू चल… तेरी मंजिल आ गई.

    उसने डोरबेल बजाई और सामने से एक लड़की ने दरवाजा खोला. रोहित ने उससे पूछा- मरीयम मैडम कहां हैं? वह पहले तो लपक कर उसके गले लग गई और कहने लगी- बहुत दिन बाद आया यार… कहाँ था इतने दिन? रोहित ने उसे चूमते हुए कहा कि यार जॉब में व्यस्त चल रहा था. उसने पूछा कि ये जनाब कौन हैं? रोहित ने बताया कि ये मेरे दोस्त हैं. उसने मुस्कुराते हुए कहा- हैलो. मैंने भी हैलो बोला. उसने मेरे से हाथ मिलाया और कहने लगी- आप तो बहुत ही स्मार्ट और सेक्सी हैं.

    यह कह कर उसने मेरा हाथ दबाया और आंख मार दी. मैं उसके इस प्रतिक्रिया से एकदम से शॉक्ड हो गया.

    फिर उसने बोला- मैडम नहा रही हैं. तुम लोग अन्दर बैठ कर इंतजार करो.

    हम अन्दर आ गए और सोफे पर बैठ गए. फिर कुछ देर बाद मरीयम मैडम आईं. मैं तो उन्हें देखता रह गया, क्या लग रही थी यार… एकदम कयामत लग रही थी. उसके भीगे हुए खुले बाल कहर ढा रहे थे. इस वक्त उसने काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी, जिसमें वह एकदम सेक्सी लग रही थी. उसकी उम्र 23 साल थी. उसका फिगर तो लाजवाब था यार उसके चुचे करीब 32 इंच के थे और उसकी कमर तो ऐसी बल खा रही थी कि साली अच्छे अच्छे की जान ले ले. उसकी कमर 26 इंच की थी और उसकी गांड के बारे में क्या बताऊं यार… साली की गांड देखते ही बहनचोद लंड तो पैंट फाड़ के बहर निकलने को तैयार हो उठा था. उसकी बहन की लौड़ी की गांड 34 इंच की उठी हुई एकदम तोप जैसी थी. उसको देखते ही मैंने अपने लंड को पैंट में एडजस्ट किया.

    मरीयम मैडम ने रोहित से पूछा- आज कैसे रास्ता भूल गए जो हमारे घर पहुंच गए? और ये किस मेहमान को साथ लेकर आए हो, जिसका लंड मुझे देखते ही बेकाबू हो गया है. जो कि उन्हें बार बार ठीक करना पड़ रहा है. उसकी बिंदास भाषा को सुनकर मैं हतप्रभ था. मैं शर्मा भी गया था और मैंने सर नीचे कर लिया.

    रोहित ने उसे बताया कि यह मेरा दोस्त है, जो मेरे साथ काम करता है. ये मैकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई कर रहा है और जितना ये कमाता है, उसमें इसका खर्चा पूरा नहीं होता है. तो उसने कहा- अच्छा ये बात है… ठीक है, तू जा… मैं समझ लूँगी. रोहित उठ कर जाने लगा तो मैंने पूछा- तू कहां जा रहा है? उसने कहा- काम हो गया है… अब तेरा इन्टरव्यू होगा. यह कह कर वो चला गया.

    मरीयम मैडम ने मुझसे पूछा- कुछ अपने में बताओ? मैंने बोला- मैं सैफ दिल्ली से हूँ. और इस वक्त गुडगाँव में हूँ. फिर उसने कहा- ठीक है.

    इसके बाद उसने उस लड़की को बुलाया, जिसने दरवाजा खोला था. वो आई तो उससे कहा कि जाओ इसे नहला के क्लीन कर दो.

    फिर वह लड़की मेरे साथ बाथरूम में आ गई. मैं मंत्रमुग्ध सा उसके साथ सब करता जा रहा था. वो लड़की मेरे कपड़े उतार कर मेरे लंड के बालों को साफ करने लगी. उसके हाथ लगाने से मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया.

    उसने मेरा लंड पकड़ कर बोला- ओहो इतना बड़ा… इसे लेने में तो मजा आ जाएगा.

    फिर वह लंड को नापने लगी और फिर उसे मुँह में लेकर चाटने लगी. दस मिनट चाटने के बाद कहने लगी- ओह यार… ये मैं क्या कर रही हूँ… मैंने हंस कर कहा- तुम केला खा रही हो. वो भी हंस पड़ी और मुझसे कहा- प्लीज मैडम को ये बात मत बताना. मैंने कहा- ठीक है.

    फिर उसने मुझे नहला दिया. मैं एक गाऊन में बाथरूम से बाहर आया. मैडम ने कहा- आओ बैठ जाओ… खाना खा लो. मैंने मैडम के साथ बैठ कर खाना खाया, खाने के बाद केसर का दूध का गिलास पिया.

    मैं हाथ ही धोने लगा था कि मैडम ने बोला- मुझे गोद में उठाओ और बेडरूम में ले चलो.

    मैंने उन्हें अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर लिटा दिया. उसने मुझसे पूछा- तुमने कभी सेक्स किया है? मैंने कहा- हाँ किया है. “ठीक है… फिर तुम मुझे खुश करके दिखाओ!” मैंने कहा- ठीक है मैं जो करूंगा आप ऑब्जेक्शन तो नहीं करोगी? उसने कहा- ठीक है… नहीं करूँगी.

    इसके बाद मैंने उसकी कमर पकड़ के उसके होंठों पर एक जोरदार किस किया. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. हम दोनों दस मिनट तक यूं ही किस करते रहे. फिर मैंने उसके मुँह में अपनी जुबान डाल दी और जुबान को चूसने लगा. वो एकदम कंपने लगी. हमारी साँसें एकदम गर्म हो गईं और उसका दम सा भी घुटने लगा.

    मैंने उसे छोड़ दिया और गर्दन पर किस करने लगा. वो मेरा पूरा साथ दे रही थी. वो भी मेरी गर्दन और कान के पास किस कर रही थी. हम दोनों एकदम गर्म हो चुके थे. फिर उसने मेरे गाऊन को फाड़ दिया और मैंने उसकी नाइटी को फाड़ कर हटा दिया. हम एक दूसरे को चूमते चाटते रहे.

    मैं उसके चूचों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने और दातों से काटने लगा. वह पागल होने लगी. मैंने उसकी ब्रा को खींच कर फाड़ दिया, जिससे उसके दोनों चूचे आजाद हो गए.

    एक चूचे को मैं मुँह में लेके चूसने लगा और दूसरे को हाथों से मसलने लगा. हम दोनों करीब 30 मिनट तक ऐसे ही रोमांस करते रहे.

    फिर वह मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी और कहने लगी- वाह क्या लंड है… इतना लम्बा मोटा तगड़ा लंड आज मैं पहली बार देख रही हूँ. इतने बड़े लंड से मैं आज तक नहीं चुदी.

    मैंने भी लंड उसके मुँह में डाल दिया. वो लपक कर लंड चूसने लगी. यार मैं क्या बताऊं… जब उसने अपने दोनों होंठों से मेरे लंड को दबाया तो जैसे मुझे लगा कि मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ. वह मेरे लंड को मुँह में लेकर आंड सहलाते हुए लंड को आगे पीछे करने लगी.

    मुझे मजा आ रहा था. मैं आँख बंद करके लंड चुसाई का मजा ले रहा था. हम दोनों ऐसे ही काफी देर तक मजा करते रहे.

    इसके बाद मैंने उसको लिटा दिया और उसे फिर से किस करने लगा. अब मैं एक हाथ से उसके चुचे दबा रहा था और दूसरे हाथ को उसकी पैंटी में डालकर चूत सहलाने लगा. वह एकदम गर्म थी, उसकी पैंटी एकदम गीली हो चुकी थी.

    फिर मैंने उसकी पैंटी भी फाड़ दी और उसकी चूत देखने लगा. उसकी चूत गुलाबी थी और क्लीन शेव थी. चुत पर एक भी बाल नहीं था. मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी, वह एकदम सिहर उठी. फिर मैं अपनी उंगली चुत में आगे पीछे करने लगा. अब उसकी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं, वह अजीब अजीब आवाजें निकालने लगी “अह अह ओह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह अह… कम ऑन फक मी, यार कम ऑन… ओह… अह्ह…”

    मैंने उसकी चुत को छोड़ा और चोदने के लिए तैयार हुआ. उसने झट से बगल से कंडोम निकाला और मेरे लंड पर चढ़ा दिया. मैं देर न करते हुए उसकी जांघें फैला दीं और अपना लंड को उसकी चूत पे रगड़ने लगा. इससे वह पागल होने लगी और मुझे नोंचते हुए कहने लगी- डाल भी दे यार… वरना मैं मर जाऊँगी.

    मैंने लंड को उसकी चूत के छेद पर लगाया और धीरे से अन्दर की ओर धक्का दे दिया, जिससे लंड उसकी चूत में घुस गया और वो चिल्लाने लगी- आआऊउ एई… निकाल ले बाहर… वरना मैं मर जाउंगी… वो छटपटाते हुए मेरे बाल नोंचने लगी.

    मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और उसे किस करने लगा. फिर वह धीरे धीरे शांत होने लगी और मेरा साथ देने लगी. मैं धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. वो भी चूत को टाइट करके नीचे से गांड उठा उठा कर साथ देने लगी.

    कुछ देर यूं ही चोदने के बाद जब लंड सटासट चुत में अन्दर बाहर होने लगा तो मैंने उसकी टांगों को उठा कर अपने कंधों पर रख लीं और उसकी चुदाई जमकर करने लगा.

    करीब दस मिनट तक उसकी चुत फाड़ चुदाई करता रहा. वह भी अजीब अजीब आवाजें निकालते हुए मचल रही थी- आहाह अह अह अह अह्ह्ह्ह्ह फक मी एह एह… अह अह और जोर से चोद… और जोर से कम ऑन फक मी कमीने चोद दो मुझे… आह फाड़ डालो इसे…

    वो अब तक तीन बार झड़ चुकी थी. फिर मैंने उसे घोड़ी बना कर लगभग 15 मिनट तक चोदा. इसके बाद मैं नीचे लेट गया और वह मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर ऊपर नीचे उछलने लगी. ऐसे 10 मिनट उछलने के बाद वह फिर झड़ गई.

    मैंने उसे नीचे लिटा कर अपनी स्पीड बढ़ाकर फिर से दस मिनट की जोरदार चुदाई की. इसके बाद मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने लंड बाहर निकाल कर कंडोम को उतार कर उसके मुँह में लंड झड़ा दिया.

    उसका पूरा मुँह मेरे वीर्य से भर गया और उसने सारे वीर्य को निगल कर मेरे लंड को अच्छे से चाट चाट कर साफ कर दिया. पूरा लंड साफ़ करने के बाद भी वह कुछ देर तक मेरे लंड को चाटती रही.

    मैं अब थक गया था… सो मैं लेट गया. वो भी कुछ देर मेरे ऊपर लेटी रही और फिर थोड़ी देर बाद वह फिर से मेरे लंड के साथ खेलने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और वह उसे मुँह में लेकर चूसने लगी. करीब दस मिनट तक वह मेरा लंड को चूसती रही.

    मैंने उससे कहा- मैं इस बार तेरी गांड मारूँगा. पहले तो वह मना करने लगी, फिर मेरे बहुत बोलने पर तैयार हो गई. उसने मुझे बोरोप्लस का ट्यूब दिया, जिसे मैंने अपने लंड और उसकी गांड पर अच्छे से लगा दिया. मैं उसे घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी गांड में लंड डालने लगा. अभी मेरे लंड का टोपा ही उसकी गांड में गया था कि वह जोर जोर से चिल्लाने लगी. मैं रुक गया, मुझे भी दर्द हो रहा था क्योंकि उसकी गांड बहुत टाइट थी.

    फिर थोड़ी देर बाद मैंने एक जोरदार झटका मारा और मेरा 3 इंच लंड उसकी गांड में घुस गया. वह जोर जोर से रोने लगी और चिल्लाने लगी, वह मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी और कहने लगी- आह… मार डाला मुझे मादरचोद भोसड़ी के फाड़ डाली मेरी गांड…

    मैंने उसकी गांड की ओर देखा तो उसकी गांड से खून निकल रहा था. मैं उसकी चूची दबाने लगा और उसे उसका दर्द भुलाने के लिये उसे गर्म करने लगा.

    वह थोड़ी देर बाद शांत हो गई और गांड हिलाने लगी. धीरे धीरे मैं लंड को आगे पीछे करने लगा. फिर थोड़ी देर तक मैं ऐसा ही करता रहा और फिर मैंने एक जोरदार झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया. वह जोर से चिल्ला उठी और फिर उसकी गांड से खून निकलने लगा. इस बार वह बेड पर गिर पड़ी और बेहोश हो गई. मैं भी उसके गांड में लंड डाल कर उसके ऊपर चढ़ा रहा और धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करता रहा. साथ ही उसकी चूचियां भी दबाता रहा. थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो अब वह मेरा साथ देने लगी. कुछ ही देर में उसको मजा आने लगा और उसकी गांड ने मेरे लंड को जज्ब कर लिया था. अब वो भी गांड उठा उठा कर मजा लेने आगी थी.

    कुछ ही देर में हम दोनों ने आसन बदला और अब वो मेरे लंड पर बैठ कर ऊपर नीचे होने लगी. काफी देर के बाद मैंने उसकी पूरी गांड को अपने वीर्य से भर दिया और फिर उसी के ऊपर लेट कर अपना लंड उसी की गांड में डालकर छोड़ दिया. उसने मेरे लंड को अपनी गांड को टाईट करके दबोच सा लिया और लंड को एकदम निचोड़ लिया.

    हम दोनों अब तक बहुत थक चुके थे. सो हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए.

    जब मैं सुबह उठा तो मैंने उसे उठाकर बाथरूम में चलने को कहा, पर उससे चला नहीं जा रहा था. मैं उसे गोद में उठा कर बाथरूम में ले गया. दोनों ने अच्छे से नहा कर खुद को साफ़ किया, कमरे में आए. फिर मैंने उसे आँख मारते हुए पूछा- कैसा रहा टेस्ट… कितने नंबर मिलेंगे मुझे? उसने बोला- फुल से भी ज्यादा… तुम बहुत देर तक टिकते हो… तुम्हारे लंड में अच्छी खासी रांड को थका देने का पावर है.

    मैंने उसे गले से लगा कर चूमा. उसने मुझे 2500 रूपये दिए और बोली कि ये पेशगी है, रख लो… कई जगह जाना पड़ेगा… तब तुमको भरपूर मिलेगा.

    फिर उसने मुझे कई जगह चुदाई के लिये भेजा और मैंने अपनी ग्राहकों को चोद कर अच्छे से संतुष्ट किया. अब मुझे इसमें मजा आने लगा है.

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    आज मैं अपने जीवन की ससुर बहु सेक्स की सच्ची कहानी लिख रही हूँ, चाचा ससुर ने बहु की चुदाई कैसे की. आशा है कि आप सभी को पसंद आएगी। मैं शिवानी हूँ.. इंदौर में रहती हूँ। मेरी उम्र 38 साल की है। मेरे पति एक कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं। मेरा एक 12 साल का बेटा है, जोकि नैनीताल में हॉस्टिल में रहकर पढ़ाई करता है। इंदौर में मैं और मेरे पति ही रहते हैं। आज मैं अपने जीवन की सच्ची कहानी लिख रही हूँ, आशा है कि आप सभी को पसंद आएगी।

    मेरे पति को कंपनी के काम से एक महीने के लिए लेटिन अमेरिका जाना था, वो मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे इसलिए उन्होंने उनके चाचा को मेरे पास रहने को बुला लिया। फिर मेरे पति टूर पर चले गए।

    अब घर में मैं और चाचा ससुर ही रह गए। उनकी आयु 58 की है.. उनकी बीवी 5 साल पहले गुजर गई हैं। वे गाँव में रहकर खेती संभालते हैं। मेरे सास-ससुर मेरे देवर के साथ दुबई में रहते हैं.. इसलिए वो मेरे साथ नहीं आ सकते थे।

    मेरे चाचा ससुर का एक बेटा है। वो दिल्ली में रहता है, पर उसकी बीवी मेरे चाचा ससुर से बात भी नहीं करती। वो अकेले थे, इसी लिए मेरे पास रहने आने को जल्दी ही मान गए। चाचा का कद 6 फुट 2 इंच है.. वे दिखने में बहुत ही अच्छे लगते हैं।

    मेरे पति जब मेरे पास होते हैं मुझे जमकर चोदते हैं, पर अब वो नहीं थे। मैं हमेशा घर में नाइटी ही पहनती हूँ, पर चाचाजी के सामने कैसे पहनूं, ये मेरे लिए दिक्कत की बात थी।

    एक दिन की बात है.. मैं चाचा जी के कमरे में किसी के काम से गई, तब वो आँख बंद करके अपने लंड की मालिश कर रहे थे। उनको पता नहीं था कि मैं देख रही हूँ। वो बस आँखें बंद करके लंड की मालिश किए जा रहे थे और कुछ बड़बड़ा भी रहे थे।

    मैं वहाँ से भाग आई.. पर उससे क्या होता है, चाचा जी का मोटा लंड देख कर मेरी चूत तो बहने लगी थी। उनका इतना मस्त काला और लम्बा लंड मैंने पहली बार देखा था। मुझे पसीना आने लगा था। अब तो बस मुझे सिर्फ़ उनका लंड दिखाई दे रहा था.. पर रिश्ता कुछ नाजुक था इसीलिए ऐसा-वैसा कुछ सोच भी नहीं सकती थी।

    इस बात को 3 दिन हो गए। अब मैं थोड़ी नॉर्मल हो गई थी। एक रात में सो रही थी, तब मुझे कुछ महसूस हुआ। किसी का हाथ मेरे चूचे दबा रहे थे। मैं समझ गई कि ये चाचाजी ही हैं। मैंने भी उनके लंड को याद किया और सोने का नाटक करती रही।

    कुछ देर बाद वो मेरे पैरों को चूमने लगे, मेरी नाइटी भी उन्होंने ऊपर तक उठा दी और मेरी चूत को सहलाने लगे। अब मेरे से कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। मैंने अपनी दोनों टांगें खोल दीं। चाचा जी समझ गए कि मेरी चूत चुदना चाह रही है।

    चाचा जी बेख़ौफ़ होकर मेरे ऊपर चढ़ गए और उन्होंने मेरे कान में कहा- बहू जाग जाओ.. खुल कर मजा लो। मैंने कुछ जबाव नहीं दिया तो और वो बोले- शिवानी, मुझे पता है.. तुम जाग रही हो और मजा ले रही हो। तब मैंने बिना आँखें खोले ही रिप्लाइ दिया- चाचाजी.. चाचाजी- बोलो बहू! मैं- क्या कर रहे हो..! चाचाजी- बस तुझे प्यार कर रहा हूँ। मैं- ये कैसा प्यार है? चाचाजी- तुम 3 दिन पहले मुझे देखकर क्यों भागी थीं? मैं- क्या..! चाचाजी- अब बस भी करो यार.. आँखें खोलो और चुदाई का खुल कर मजा लो।

    वो खड़े हो गए और बत्ती जला दी। वो सिर्फ़ लुंगी में ही थे और मैं नाइटी में थी। फिर उन्होंने लुंगी निकाल दी और अपना तन्नाया हुआ लंड हाथ में लेकर हिलाने लगे। मैं उनके लंड को बड़ी प्यासी नजरों से देख रही थी। उन्होंने मेरे पास आकर लंड मेरे मुँह के सामने किया।

    चाचाजी- शिवानी इसको तुम्हारे मुँह का टेस्ट कराओ, तुम इतनी खूबसूरत हो.. इसलिए मेरे से संभलना मुश्किल हो जाता है।

    चाचाजी गाँव के थे.. उनका शरीर एकदम फिट था। मैंने उनका लंड मुँह में ले लिया। मेरे मुँह में लंड नहीं आ रहा था.. पर मैं इतने मस्त लंड को छोड़ना नहीं चाहती थी.. इसलिए मैं उनके लंड को जीभ से चाटने लगी। चाचा जी का लंड बड़ा स्वादिष्ट लगा, तो मैं उनकी बड़ी-बड़ी गोटियों को भी चाटते हुए चूस और चूम लेती थी।

    दो-तीन बार मैंने चाचा जी के लंड पर अपने दाँत भी गड़ा दिए.. तो चाचाजी चिल्ला पड़े- ओह.. आह्ह.. बहू क्या कर रही हो.. तू तो मस्त चूसती हो.. आज तक मैंने गाँव में बहुत सारी चूतें चोदी है, पर तेरे जैसा किसी ने नहीं चूसा.. आह.. मजा आ रहा है.. मेरा सब कुछ तेरा ही है.. ले चाट ले इसको..!

    मैं- क्या चाचाजी.. क्या कहा आपने? चाचाज- ओह.. हाँ गाँव की औरतों में मेरा लंड बहुत फेमस है.. खुद सामने से आकर चूत चुदवाकर चली जाती हैं। आज तक मैंने किसी को चोदने को नहीं कहा, वे सब खुद आकर अपना घाघरा ऊँचा करके मेरे लंड से अपनी चूत की ठुकाई करवाती हैं। पर आज तक कभी शहर वाली चूत को नहीं चोदा.. आज तुम मिल गई.. अह.. तू तो शहर वाली है ना.. ये ख्वाहिश भी पूरी हो गई। मैं- हाँ चाचाजी..

    मैं मस्ती से उनका लंड चूस रही थी। फिर मैं इतने जोरों से लंड चूसने लगी कि उनका पानी निकल गया और उनका पानी मैं गटगट पी गई। आज तक मैंने कभी वीर्य पिया नहीं था, पर आज पिया तो बहुत ही टेस्टी लगा।

    अब मेरे पर चुदाई सवार हो गई थी। मैंने उनका लंड जीभ से साफ किया, तो लंड में फिर से जान आ गई। मैं- चाचाजी कैसा लगा? चाचाजी- बहू तू बड़ा मजा देती है बहू.. बहु की चुदाई का मजा ही अलग है… अब तू जो बोलेगी.. मैं वो करूँगा.. आज से मैं तेरा गुलाम हो गया। मैं- चाचाजी।

    वो जोरों से मेरे मम्मों को दबाने लगे, मैं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करने लगी। वो बड़े बेरहमी से मेरे थन मसल रहे थे। यह हिंदी चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

    फिर उन्होंने मेरा लिपलॉक किया और मेरी जीभ को चूसने लगे। एक हाथ से मम्मों को मसल रहे थे और जीभ से चूत का दाना सहला रहे थे। मैंने उनको जोर से पकड़ रखा था।

    मैं- चाचाजी मुझे आपका लंड फिर से चूसना है। चाचाजी- मैं तो तेरा गुलाम हूँ.. मुझे तू बोल आप नहीं..! मैं- जी ठीक है।

    चाचाजी ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मुझे उनका हब्शी लंड चूसने में बड़ा मजा आ रहा था। हम दोनों 69 में आ गए.. वो मेरी चूत को चाट रहे थे और मैं अपनी गांड उठा-उठा कर चूत चटा रही थी।

    अब चाचाजी मेरे टांगों बीच में आ गए और कहने लगे- बहू तेरी चूत नहीं है ये गरम भट्टी है.. तेरी जैसी लुगाई आज तक नहीं देखी.. आह.. साली मस्त है रे तू.. मेरी कुतिया आज तो मैं तेरी चूत को खा जाऊँगा।

    मैं- चल खा जा.. साले मेरा पानी निकाल दे हरामी.. अह.. चाचाजी- हाय मेरी रंडी..

    उन्होंने मेरी चूत में अपनी लंबी जीभ डाल दी और जीभ से चूत को चोदने लगी।

    मैं- आहह.. मर जाऊँगी मेरे चाचा.. तूने क्या कर दिया.. आज मुझे अपनी बना ले और मेरी चूत का सलाद बना दे। ‘ले रंडी ले साली..’ मैं- चाचा मेरे से अब रहा नहीं जा रहा, अब चोद दे। चाचाजी- अभी नहीं चोदूंगा.. पहले चूत को खाने दे..! मैं- तेरे मूसल से मेरी चूत खा मेरे भड़वे.. अह.. चाचाजी- नहीं कुतिया.. अभी और मजा ले ले।

    वो मुझे तड़पा रहे थे और मुझसे सहन नहीं हो रहा था, अब जैसे भी हो मुझे बस लंड चाहिए था। मैंने उनको उकसाने के लिए कहा- लगता है तुम्हारे लंड में जान नहीं है.. साले तेरा लंड कुछ काम का नहीं है.. चल हट साले भड़वे..!

    अब वो थोड़े गुस्सा हुए और उन्होंने मेरी टांगें खोलते हुए अपने हब्शी लंड को मेरी छोटी सी चूत के आगे टिका दिया, फिर बोले- ले अब भोसड़ी की.. मेरे मूसल को झेल..!

    यह कहते हुए उन्होंने एक ठोकर मारी, पर उनका लंड अन्दर नहीं जा पा रहा था.. इतना मोटा जो था। मैंने कहा- चाचा लवड़े साले.. डाल इसको अन्दर..! उन्होंने थोड़ा आगे पीछे होते हुए 3-4 धक्के लगाए.. तब उनके मोटे लंड का आंवला सरीखा सुपारा चूत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर को चला गया।

    अब वो मुझे चोदते हुए और मेरे दूध मसकते हुए कहने लगे- बहू बहुत मजा आ रहा है.. तू साली चीज बड़ी मस्त है।

    मुझे हालांकि उनके मोटे लंड से तकलीफ हो रही थी, पर मैं दांतों को भींचे हुए उनके लंड की मोटाई को अपनी चूत में जज्ब करने की कोशिश कर रही थी। कुछ ही देर में रस के कारण चूत ने दर्द को भुला दिया और मैं अपनी गांड उठाकर चुदवाने लगी।

    कुछ देर बाद उनका पूरा लंड चूत की जड़ तक अन्दर-बाहर होने लगा और धमाकेदार धक्कों से मेरी चूत का बाजा बज उठा। इसके बाद उन्होंने फिर मुझे उल्टा किया और मेरी गांड में जीभ डाल दी। मैं मस्ती में ‘आह..’ करने लगी।

    उन्होंने अपने लंड को पीछे से चूत में पेल दिया और जोरों से चोदने लगे। मैं चिल्लाए जा रही थी।

    कुछ देर चोदने के बाद उन्होंने कहा- मैं आने वाला हूँ। अब मैं सीधी हो गई और वो मुझे ऊपर से चोदने लगे। मेरा शरीर भी अकड़ने लगा था। चाचाजी- शिवानी बोल बीज कहाँ डालूँ? मैं- चाचाजी सब माल अन्दर ही डाल दो, जो होगा सो देखा जाएगा।

    उन्होंने अपने लंड का पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया और मेरे ऊपर निढाल हो गए, मेरी चूत से उनका रस बहता रहा। बाद में उन्होंने मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए। चाचा ने मेरी चूत को साफ किया।

    अब मुझे कुछ शर्म आ रही थी। मैंने उनको ‘सॉरी’ बोला कि मुझसे ग़लती हो गई। तब उन्होंने कहा- बहू ऐसा मत सोच.. मुझे एक औरत की जरूरत थी और तुझे एक मर्द की.. वही किया है हम दोनों ने। इसमें कुछ ग़लत नहीं है।

    मैं मुस्कुरा कर चाचा जी से लिपट गई। उस रात उन्होंने मेरी गांड भी मारी और जब तक चाचा जी हमारे घर रहे, तब तक ससुर में मुझे यानी अपनी बहु की चुदाई रोज 3-4 बार की। मैं उनका पानी पी जाती थी। इस ससुर बहु सेक्स से अब मैं बहुत खुश थी। उन्होंने मुझे बहुत सारे जेवर भी लाकर दिए। वो मुझसे हमेशा मिलने आते हैं और मौका मिलते ही मुझे खूब चोदते भी हैं। शायद वो मुझे मेरे पति से ज़्यादा अच्छे से तरीके से चोदते हैं, चाचा जी का लंड बड़ा है न.. इसलिए मुझे ही उनके लंड से चुदने में मजा आता है।

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    Black Anaconda

    मेरे बारे मैं तो आप सभी जानते ही हैं कि मेरे पति आर्मी में हैं. मेरी फिगर के बारे में भी आपको पता है कि मेरा गोरा बदन, पतली कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे चूचों को देख देख लड़के तो क्या बूढ़े भी मुठ मारने के लिए मजबूर हो जाते हैं. मुझे पटाने के लिए लड़के तो क्या बूढ़े भी तरसते हैं.

    तो अब मैं अपनी कहानी पर आती हूँ. कुछ दिन पहले की बात है, हमारे घर मेरे पति के फूफा जी आए हुए थे, जो करीब 50 साल के होंगे मगर पूरी तरह से तन्दरुस्त और फिट हैं. वो जब भी हमारे घर आते तो अक्सर मुझे घूर घूर के देखते, कभी मेरी बड़ी सी मटक मटक कर चलती गांड को और कभी मेरे डीप गले से बाहर आते चुचों को. मैं भी उनकी नज़रें पहचानती थी मगर सास ससुर के रहते वो कुछ नहीं कर सकते थे.

    रात का खाना खाते वक़्त ससुर जी ने शराब की बोतल खोल ली क्योंकि फूफा जी शराब के बहुत शौकीन थे और फुल टाइट होने तक पीते थे, ससुर जी इतनी ज़्यादा नहीं पीते थे मगर आज उनको भी कुछ ज़्यादा ही हो गई. मैं और सासू माँ अपने अपने कमरे में सोने चली गई मगर फूफा जी इतने टाइट हो गये कि उनसे चल पाना भी मुश्किल था.

    रात के 11 बज चुके थे कि मुझे ससुर जी ने आवाज़ लगाई. मैं बाहर गई तो ससुर जी बोले- बहू, यह देखो तुम्हारे फूफा तो यहीं पर सो गये… मैंने इनको उठाने की और अंदर ले जाने की बहुत कोशिश की मगर यह तो बेहोश होकर पड़े हैं. ज़रा तुम मेरी मदद करो और हम इनको अंदर ले जाकर सुला देते हैं.

    मैंने कहा- ठीक है पिताजी, एक तरफ से मैं पकड़ती हूँ और दूसरी तरफ से आप पकड़िए! और फिर मैंने फूफा जी का एक बाजू अपने गले में डाला, ससुर जी ने भी सहारा दिया और फिर धीरे धीरे उनको अंदर ले जाने लगे.

    फूफा जी ने मेरे कंधे को ज़ोर से पकड़ रखा था और मेरे दोनों बूब्स उनके साथ चिपके हुए थे. शायद फूफा जी को पता नहीं था कि उनकी बगल में मैं हूँ, नहीं तो वो मेरे कंधे को नहीं सीधा मेरे चूचे पकड़ते. फिर मैंने ससुर जी से कहा- पिता जी, आप दरवाजा खोलिए, मैं फूफा जी को संभाल लूँगी.

    तो ससुर जी ने फूफा जी को छोड़ दिया. मैं बड़ी मुश्किल से उनको अंदर लेकर गई और ससुर जी को कहा- पिता जी, आप जाओ, मैं फूफा जी का लिटा कर आ जाती हूँ. पिताजी तो पहले ही नशे की हालत में मुश्किल से खड़े थे, इसलिए वो भी बोले- हाँ बहू, तुम भाई साहिब को लिटा कर आ जाना और रात को भी एक दो बार देख लेना और पानी वग़ैरा पिला देना. मैंने कहा- ठीक है पिता जी, मैं अच्छे से फूफा जी का ख्याल रखूँगी.

    ससुर जी चले गये और मैंने फूफा जी को बेड पर लिटा दिया, मगर उनको लिटाते वक़्त मुझे उनको सामने से पकड़ना पड़ा और उस वक़्त फूफा जी की छाती मेरे दोनों चूचों से एकदम से सटी हुई थी और उनका लंड भी मेरी चूत के बिल्कुल सामने था. फूफा जी का एक हाथ मेरे गले में था और दूसरा हवा में लटक रहा था, जब में उनको बेड के ऊपर लिटाने लगी तो उनका वजन ज़्यादा होने के कारण संभाल नहीं पाई और खुद भी उनके ऊपर ही गिर गई.

    मैंने जल्दी से बाहर की तरफ देखा कि कहीं ससुर जी देख तो नहीं रहे… मगर वो जा चुके थे. एक पल के लिए तो मेरा मन हुआ कि ऐसे ही लेटी रहूं और फूफा जी के लंड पर अपनी चूत रगड़ दूं. मैं ना चाहते हुए भी फूफा जी के ऊपर से उठी और बाहर देखा तो ससुर जी अपने कमरे में जा चुके थे.

    अब मेरे मन में और शैतानी आने लगी और मैंने सोच लिया कि आज फूफा जी का लंड देख कर ही दम लूँगी. फिर मैंने फूफा जी के जूते निकाले और उनको टाँगों से पकड़ कर सीधा करके बेड पर लिटा दिया. फूफा जी को कुछ भी पता नहीं था. फिर मैं अपने कमरे में गई और ज़ोर से दरवाजा बंद किया ताकि सासू जी और ससुर जी को पता चल जाए कि मैं अपने कमरे में आ गई हूँ. और थोड़ी देर बाद ही फिर से फूफा जी के कमरे में आ गई और दरवाजा लॉक कर दिया.

    मैंने देखा कि फूफा जी अब भी वैसे ही पड़े हैं जैसे मैं लिटा कर गई थी. मैं फूफा जी के पास गई और धीरे से फूफा जी को आवाज़ लगाई ताकि मुझे पता चल जाए कि वो पक्का सो रहे हैं. जब फूफा जी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने फूफा जी के लंड पर हाथ रखा.. उफ्फ़ क्या लंड था फूफा जी का… सोते वक़्त भी कितना बड़ा था! अब तो फूफा जी का लंड देखने को मैं और भी उतावली हो गई… मैंने फूफा जी की पैंट की ज़िप खोली और अंदर हाथ डाल कर देखा, फूफा जी ने कच्छा पहना हुआ था.

    मैंने फूफा जी की पैंट की हुक भी खोल दी और पैंट को नीचे सरका दिया, फिर फूफा जी का कच्छा भी नीचे सरका दिया, अब फूफा जी का सोता हुया 7 इंच का लंड मेरी नज़रों के सामने था. एकदम काला मोटा साँप जैसा… मैंने उनके लंड को हाथ मैं पकड़ा और सीधा खड़ा किया और फिर हिलाने लगी. बहुत ही मजेदार लंड था फूफा जी का!

    मैं बेड के पास नीचे ही घुटनों के बल बैठी थी और लंड मेरे मुँह के सामने था… वैसे भी इतना बड़ा लंड मेरे हाथ में हो और मैं मुँह में लिए बिना रह जाऊँ… हो ही नहीं सकता! मैंने अपने होंठ खोले और लंड को अपने मुँह में भर लिया. उधर शायद फूफा जी के लंड पर भी मेरे होंठों का नशा चढ़ने लगा… फूफा जी का लंड धीरे धीरे अकड़ना शुरू हो गया था और 7 इंच से 8 इंच और फिर 9 इंच का हो गया.. मेरे मुँह में लंड मोटा होता जा रहा था. उफ़फ्फ़ लंड देखकर तो मेरी चूत में खुजली होने लगी थी.

    लंड को खड़ा होता देख मैंने सोचा कि आज फूफा जी के लंड को चूत में भी डाल लेती हूँ और फूफा जी को भी पता नहीं चलेगा और इतना बड़ा लंड मेरी चूत की प्यास भी अच्छे से बुझा देगा. फूफा जी का लंड अब भी मेरे हाथ में था और मैं लंड को पागलों की तरह अपने चेहरे और बूब्स पर रब कर रही थी.

    फिर मैं फूफा जी के पैरों की तरफ गई और उनकी पैंट को खींच कर उतार दिया और कच्छे को भी उतार फेंका. फिर मैंने उनकी शर्ट के सारे बटन खोल दिए. अब फूफा जी मुझे करीब करीब नंगे दिखाई पड़ रहे थे… उनका लंड अब भी टाइट हुए खड़ा था… मैं लंड को देखकर पागल हुए जा रही थी.

    मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और उतार फेंकी फिर मैंने अपनी कमीज़, ब्रा और पैंटी भी उतार दी और पूरी तरह से नंगी हो गई… मैंने फिर से फूफा जी का लंड पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी. उनका लंड पहले से भी ज़्यादा बड़ा हो चुका था करीब 10-11 इंच का… मेरी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी… फूफा जी सीधे लेटे थे और उनका लंड भी ऊपर की तरफ तना हुआ था.

    मैं फूफा जी के ऊपर आ गई और दोनों तरफ़ टांगें करके लंड को अपनी चूत के बीच में रख लिया. मेरी चूत तो पहले से ही गीली थी इस लिए लंड का 4 इंच का मोटा सुपारा मेरी चूत के दोनों होंठ खोलता हुआ अंदर घुस गया. मैंने थोड़ा सा और वजन डाला तो फूफा जी का आधा लंड मेरी चूत में समा गया. उफ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आअहह…आहहा अहह… लंड अंदर जाते ही मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी थी.

    मैंने अपने एक हाथ से लंड को नीचे से पकड़ा हुआ था और धीरे धीरे उस पर वजन डाले जा रही थी और वो मोटा भयंकर लंड भी मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुसता जा रहा था. फूफा जी अब भी बेहोश थे मगर वो नशे की हालत में ही अपनी टाँगों को ऐसे अक़ड़ा रहे थे जैसे उनको भी महसूस हो रहा हो कि उनका लंड किसी चूत में घुस रहा है. अब भी उनका लंड मेरी चूत में से 4 इंच बाहर था… इतना बड़ा लंड पहली बार में ही लेना आसान नहीं था, इसलिए मैं लंड के ऊपर ही उठने बैठने ल्गी और लंड को अंदर बाहर करने लगी.

    लंड मेरी चूत की दीवारों से चिपका हुआ था इसलिए अंदर बाहर करने में भी मुझे दर्द हो रहा था.. मगर मज़ा बहुत ज़्यादा आ रहा था… मेरी गीली चूत कुछ ही देर में लंड को आसानी से अंदर बाहर करने लगी और पूरा लंड मेरी चूत में चला गया. मैं फूफा जी के ऊपर ही लेट गई और लेटे लेटे ही लंड को अंदर बाहर करने लगी.

    जैसे जैसे फूफा जी का लंड टाइट होता जा रहा था, फूफा जी का नशा भी कम हो रहा था. मेरे दोनों चूचे उनकी बालों से भरी छाती से रगड़ रहे थे. मैं अपने दोनों हाथ फूफा जी की कमर के नीचे ले गई और उनको कस के अपनी बाहों में ले लिया और ज़ोर ज़ोर से गांड हिलाने लगी. फूफा जी का लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था और अब तो फूफा जी भी नशे में ही अपनी कमर हिला हिला कर मेरी चूत में अपने लंड पेल रहे थे और उनके दोनों हाथ भी मेरी नंगी पीठ पर चल रहे थे.

    हम दोनों एक साथ झटका लगाते और फूफा जी का लंड मेरी चूत में जड़ तक घुस जाता.

    अचानक से फूफा जी नशे की हालत में ही बड़बड़ाने लगे- ओह माइ स्वीट हार्ट… मेरी पम्मी डार्लिंग…क्या मज़ा देती है तू मेरी पम्मी… क्या मस्त चूत है तेरी…आहह उफफफा आहह!

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    फूफा जी के मुँह से पम्मी नाम सुन कर मैं हैरान रह गई… क्योंकि बुआ जी का नाम तो मिन्नी था… फिर मैंने सोचा शायद पम्मी फूफा जी की गर्लफ्रेंड होगी और नशे में यह पम्मी को चोद रहे हैं… मैंने सोचा अच्छा है कि फूफा जी को मेरे बारे में पता नहीं चला. फूफा जी मुझे अपनी बाहों में कसते जा रहे थे और नीचे से ही अपनी गांड हिला हिला कर मुझे चोद रहे थे.

    मैं अब झड़ने वाली थी इस लिए मैं और भी ज़ोर ज़ोर से अपनी गांड हिलाने लगी और अपना सारा गर्म पानी फूफा जी लंड पर उड़ेल दिया.

    मैं थक तो चुकी थी मगर फूफा जी की बाहों में पड़ी अब भी उनसे चुद रही थी. फूफा जी पम्मी को याद करते हुए कभी मेरे होंठ चूसते तो कभी मेरे मम्मों को चूसते.. उनके दोनों हाथ मेरी कमर और मेरे काले घने रेशमी बालों में घूम रहे थे.

    फिर अचानक से फूफा जी ने मुझे अपने ऊपर से उठा कर साइड पर लिटाने की कोशिश की मगर नशे के कारण वो ऐसा कर नहीं पाए. मगर मैं समझ गई थी कि फूफा जी अब मेरे ऊपर आना चाहते हैं इसलिए मैं खुद ही फूफा जी के साथ चिपके चिपके एक साइड को हो गई और फूफा जी को भी खींच कर अपने ऊपर लाने की कोशिश करने लगी. फूफा जी भी पलटी मार के मेरे ऊपर आ गये… मैंने अपना चेहरा अपने बालों से ढक लिया था कि अगर फूफा जी की आँख खुल भी जाए तो वो मुझे पहचान नहीं पाएँ!

    फूफा जी के ऊपर आते ही मैंने अपनी दोनों टांगें ऊपर को उठा कर उनका लंड अपनी चूत में डाल लिया. फूफा जी ने फिर से मेरी चुदाई शुरू कर दी थी… वो अपना पूरा लंड मेरी चूत में से बाहर निकालते और फिर एक ही झटके में वापिस अंदर डाल देते… सच में बड़ी जबरदस्त चुदाई कर रहे थे फूफा जी मेरी… मेरी दोनों टांगे ऊपर उठी हुई हवा में झूल रही थी और इतनी ताबड़तोड़ चुदाई से मेरा मन चिल्लाने को कर रहा था… मैं अपने ऊपर कंट्रोल रखने की कोशिश कर रही थी मगर फिर भी कभी कभी मेरे मुँह से आअहह औउच की आवाज़ें निकल जाती.

    फूफा जी ने मुझे अपनी टाँगों और दोनों बांहों में ऐसे जकड़ रखा था कि मेरा हिल पाना भी मुश्किल था. मगर जिस तरह से फूफा जी मुझे चोद रहे थे, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. अब दूसरी बार भी मैं झड़ने के बहुत करीब थी इसलिए मैं भी अपनी गांड फूफा जी के झटकों के साथ मिलाकर हिलाने लगी. फूफा जी ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी थी, शायद वो भी झड़ने वाले थे. मैंने फूफा जी को कस के अपनी बाहों में ले रखा था और फूफा जी ने मुझे… हम दोनों एक दूसरे को तेज़ी से चोद रहे थे.

    मेरा पानी बहने लगा था मगर फूफा जी अब भी वैसे ही मेरी टाँगों को ऊपर उठाए हुए ज़ोर ज़ोर के झटके लगा रहे थे. अब तो हर झटके के साथ मेरे मुँह से आहह आहह की आवाज़ निकल रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि अब फूफा जी मेरी चूत फाड़ कर ही दम लेंगे.

    फिर एक दो और झटकों के साथ फूफा जी ने अपना सारा माल मेरी चूत में भर दिया और आखिरी झटका तो उनका ऐसा था कि उनका लंड गोटियों समेत मुझे अपनी चूत में घुसा महसूस हो रहा था. उस वक़्त तो मेरी ज़ोर से चीख भी निकल गई थी.

    फूफा जी ने झटके लगाने तो बंद कर दिए थे मगर उनका लंड अब भी मेरी चूत में जड़ तक घुसा हुआ था… मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मेरी चीख सास या ससुर जी ने सुन ना ली हो. इस लिए मैं अब जल्दी से जल्दी फूफा जी के नीचे से निकलना चाहती थी… मगर फूफा जी तो मुझ पर बेहोश पड़े हुए थे और उनको हटा पाना मेरे लिए मुश्किल था. अगर फूफा जी को ज़ोर से धकेलने की कोशिश करती भी तो मेरी चूत में गड़ा हुया उनका लंड उनको हिलने नहीं देता.

    फूफा जी के लंड से गर्म माल अब भी मेरी चूत में टपक रहा था इसलिए फूफा जी भी अपना लंड बाहर निकालना नहीं चाहते थे और मैं उनके नीचे दबी पड़ी थी.

    करीब एक घंटे की चुदाई के बाद फूफा जी 15 मिनट तक ऐसे ही मेरी चूत में लंड गाड़े मुझ पर लेटे रहे. अब उनका लंड भी ढीला होने लगा था और खुद ही चूत से बाहर आ रहा था… अब मेरी भी जान में जान आ चुकी थी इसलिए मैंने फूफा जी को ज़ोर से धकेला और नीचे से निकल गई.

    फूफा जी का लंड मेरे और उनके माल से सना पड़ा था और मेरी चूत का तो और भी बुरा हाल था… चूत में से फूफा जी का माल ऐसे निकल रहा था जैसे चूत में बाढ़ आ गई हो. फिर मैंने फूफा जी के कच्छे से अपनी चूत को साफ किया और फूफा जी का सोया हुया लंड अपने मुँह में लेकर चाट चाट कर साफ करने लगी.

    मगर यह क्या उनका लंड तो फिर से खड़ा होना शुरू हो गया था… और फूफा जी ने नशे की हालत में ही मुझे फिर से पकड़ लिया और मेरे ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगे… मगर अब मुझे पता था कि अगर फूफा जी ने फिर से मुझे पकड़ लिया तो मैं चीख चीख कर पूरा गाँव बुला लूँगी… इसलिए मैंने किसी तरह खुद को फूफा जी से छुड़वाया और उनको ऐसे ही नंगा छोड़ कर अपने कपड़े उठा कर अपने कमरे में भाग गई.

    ऐसी भयंकर चुदाई के बाद मेरी टांगें और पूरा बदन दुख रहा था… बस एक चूत ही थी जो बिल्कुल शांत थी क्योंकि उसने आज जी भर के अपनी प्यास एक मोटे लंड से बुझाई थी.

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    जैसा कि मैंने बताया कि मैंने अपनी बीवी संजना को कैसे अपनी फंतासी पूरी करने के लिए गैर मर्द से चुदवाया था. उसी तरह मेरी एक और भी फंतासी थी. यहां मैं यह बता देना चाहता हूँ कि कुंवारे जीवन से ही काफ़ी सारे सेक्स आर्टिकल्स, बॉलीवुड फ ढ़ते पढ़ते मेरे मन में कई तरह की फंतासियां घर कर गई हैं, जिसे मैं पूरा करना चाहता हूँ. इसमें एक फंतासी किसी गैर शादी-शुदा औरत को चोदने की भी है.

    मैं आपको एक बार फिर बता दूं कि मैं एक 30 साल का 177 सेंटीमीटर लंबा एथलीट टाइप की बॉडी वाला बांका जवान मर्द हूँ. मेरे लंड का ओरिजिनल साइज़ 6.2 इंच है, जैसा कि मैंने इरेक्ट पोजीशन में नापा हुआ है. मेरा जो पॉज़िटिव पॉइंट है, वो है मेरी ताकत. जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूँ कि अपनी इसी गुणवत्ता की वजह से मेरी बीवी मुझसे पूरी तरह से संतुष्ट थी और उसके झड़ने के बाद भी मैं काफ़ी देर तक उसको चोदता रहता था

    मैं जहां किराए पर रहता हूँ, वो दो मंज़िला बिल्डिंग है, जिसके ऊपरी मंज़िल पर मैं और निचली मंजिल में मकान मालिक का परिवार और एक पड़ोसी रहता है.

    ये बात दुर्गा पूजा के समय की है, मेरी वाइफ संजना 20 दिनों के लिए अपने पीहर चली गई थी. मैं अपनी वाइफ को छोड़ कर जब अपनी जॉब वाली जगह पर आया और मैंने गेट खोला तो पाया कि रूम ऑनर के गेट पर ताला लगा हुआ है.

    मैंने बगल के पड़ोसी, जो कि उसी मकान में रहता है, के यहाँ गया और उसे आवाज़ दी.

    मेरे पड़ोसी का नाम विजय है. वो अपनी बीवी पायल और अपने एक 6 साल के बेटे के साथ रहता है. उसकी बीवी पायल की उम्र तकरीबन 33-34 साल की होगी. वो देखने में मेरी बीवी संजना से काफ़ी कम सुन्दर है. पायल एकदम दुबली पतली थी. मुझे लगता है कि उसका वजन 44-45 किलो के आस पास होगा. उसका साइज़ 30-26-30 के लगभग का रहा होगा. वो देखने में सांवली थी.

    जहाँ तक मेरे वजन का सवाल है तो मेरा वजन 80 किलोग्राम है. मुझे ऐसा लगता था कि जब से मैं इस फ्लैट में रहने आया हूँ, तब से वो मुझे पसंद करती थी, पर मैं उसे उस नजरिये से नहीं देखता था, जिस तरह की उसकी नजर थी. क्योंकि मेरी बीवी ज़्यादा सुन्दर थी.. और ये तो आप भी जानते हैं कि बढ़िया माल को छोड़ कर कौन कम बढ़िया आइटम पर ध्यान देता है.

    तो मैंने जैसे ही आवाज़ लगाई, पायल बाहर निकली. मैंने उससे पूछा- अंकल लोग (रूम ऑनर) दिखाई नहीं दे रहे हैं. वो मुस्कुरा कर बोली- ये लोग 20-25 दिन के लिए अपने बेटे के यहाँ गए हैं. मैं ‘अच्छा..’ बोल कर अपने रूम जाने लगा, तो वो फिर बोली- वाइफ को पीहर छोड़ आए क्या? मैं बोला कि हां, उसको छोड़ कर मैं अकेला ही वापस आ गया हूँ. वो फिर बोली कि वो और राहुल भी (उसका पति और उसका बेटा) अपनी दादी के यहां गए हैं. मैंने बोला कि तो मतलब आप अकेली हैं? वो मुस्कुरा कर बोली- हाँ. मैंने पूछा- कब तक आएंगे? वो बोली- पांच दिन बाद.

    इसके बाद मैं अपने रूम में चला गया, फिर कुछ देर बाद वहां से अपने ऑफिस चला गया.

    मैं जब रात को रूम पर आया तो मैंने टीवी पर एक ब्लूफिल्म चला दी, जिसे देख कर मुझे चुत चोदने का मन करने लगा. बीवी नहीं रहने की वजह से मुझे मन मसोस कर रहना पड़ा. दो दिन में ही मुझे पूरी व्याकुलता और बीवी की कमी खलने लगी. मैं किसी को भी चोदने के लिए व्याकुल हो गया.

    उस दिन मैं शाम को ऑफिस से घर आया और अपना गेट खोल रहा था कि मैंने देखा पायल अपने गेट के दरवाजे पर चेयर लगा कर बैठी थी. एकाएक मेरे दिमाग़ में अपनी हवस को पूरी करने का डर्टी आइडिया आ गया.

    मैं फिर वहीं रुक गया और उसकी ओर ध्यान देते हुए उससे कहा- क्या भाभी.. मन लग रहा है? वो बोली- मन लगाना पड़ता है. मैंने फिर पूछा- रात को आपको अकेले रहने में डर नहीं लगता है? वो बोली- नहीं.. अब तो आदत हो गई है. मैं बोला- मुझसे तो अकेले नहीं रहा जाता.. देखिए ना मुझे संजना की कमी खल रही है. इस पर वो मुस्कुरा दी.

    मैं फिर बोला- अगर आपको किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बोलिएगा. यहाँ तक कि अगर रात को डर भी लगे, तो मुझे ज़रूर जगा लेना. वो कुछ नहीं बोली, सिर्फ़ मुस्कुरा दी. मेरा हिम्मत बढ़ी और मैंने कहा- मेरा नम्बर ले लीजिए, अगर रात को किसी तरह की परेशानी हो तो आख़िर पड़ोसी ही काम आएगा ना.

    मैंने जबरदस्ती उसे अपना नम्बर नोट करवा दिया और उसकी आँखों में वासना भरी नज़रों से देखते हुए अपने रूम में चला गया. अब मैं उसे चोदने का आइडिया सोचने लगा.

    रात के करीब 11 बजा होगा कि मेरे मोबाइल की घंटी बजी. मैंने मोबाइल उठाया तो अज्ञात नम्बर देखा.

    मैंने हैलो बोला, तो उधर से पायल की आवाज़ आई और उसने कहा- रिया है क्या? मैं तो पहले चौंका और फिर बोला- कौन रिया.. और आप तो पायल भाभी हो ना? वो जल्दबाजी में बोली- ओह लगता है ग़लती से आपके पास लग गया, मैं कहीं और लगा रही थी. उसने फ़ोन काट दिया.

    मैंने दिमाग़ लगाया तो पाया कि वो झूठ बोल रही थी. वो जानबूझ कर मुझसे घुमा-फिरा कर कुछ और ही चाह रही थी. मैं भी खिलाड़ी आदमी था. मैंने आधे घंटे बाद उसी नम्बर पर कॉल बैक किया उसने तुरंत मेरा फोन उठाया और हैलो किया. मैंने कहा- कुछ बात है क्या, डर लग रहा है क्या? वो धीरे से बोली- हा.. न.. मैं बोला- मैं आऊं?

    वो कुछ नहीं बोली.

    मैं तुरंत नीचे गया देखा वो पूरा क्रीम पाउडर लगा कर रूम में बैठी हुई थी.

    मैंने कहा- ज़्यादा डर लग रहा है तो ऊपर चलिएगा.. मेरे दो बेडरूम हैं. एक में आप सो जाइएगा.

    वो पहले ना नुकुर करती रही, फिर नखरा दिखाते हुए मेरे कमरे में आ गई. रूम में आने के बाद मैंने टीवी चालू कर दिया. संयोग से उस वक़्त टीवी पर हेट स्टोरी- 3 मूवी चल रही थी. उसमें ज़रीन ख़ान और हीरो का सेक्स वाला सीन दे रहा था. दोनों चुपचाप उसे देख रहे थे.

    एकाएक मैंने बोला- साला आजकल की हिरोइन कितना गंदा गंदा रोल करती हैं. वो बोली- हाँ, पहले कितनी अच्छी हिरोइन थीं. मैंने कहा- आपकी फेवरेट हिरोइन कौन है? तो वो बोली- रेखा. मैंने बोला- वो भी तो बहुत गंदा रोल करती थी. वो बोली- नहीं ऐसा नहीं हो सकता है. मैंने बोला- आपको विश्वास नहीं है, तो देखिए.

    मैंने टीवी में पेन ड्राइव डाल कर रेखा की एक फिल्म, जो ओमपुरी के साथ है, उसे देखने लगा. इस फिल्म में रेखा का बहुत ही ज़्यादा सेक्सी और कामुक रोल था.

    उसे देख कर उसके चेहरे के भाव से लग रहा था कि वो कुछ शॉक्ड भी थी और कुछ कुछ गर्म भी होने लगी थी. मैं उस समय बाथरूम चला गया.

    बाथरूम से निकला तो देखा कि वो रिमोट से पेन ड्राइव में सेव दूसरी मूवी ओपन करना चाह रही थी. एकाएक मुझे याद आया कि उसमें तो बहुत सारी ब्लूफिल्म भरी हुई है. मैं ये सोच कर दरवाजे के किनारे से छुपकर देखने लगा. मैंने देखा कि पायल एक दूसरी मूवी को जैसे ही ओपन करती है तो ब्लूफिल्म खुल जाती है. वो पीछे मुड़ कर बाथरूम की तरफ देखने लगी. मैं छुप गया, वो समझी कि मैं बाथरूम में ही हूँ और फिल्म म्यूट करके देखने लगी.

    करीब 5 मिनट तक चुदाई के सीन देखने के बाद उसका हाथ उसकी बुर के ऊपर चला गया. एकाएक मैं धम्म से कमरे में आ गया और बोला- क्या देख रही हैं? वो हड़बड़ा कर टीवी बंद करने लगी तो मैं बोला- अरे बंद मत कीजिए.

    उसके करीब आकर मैंने एकाएक उसको गले लगा लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ सटा कर चूसने लगा. वो दो मिनट तक शांत रही, फिर वो भी साथ देने लगी. मैंने उसे अपने पलंग पर लिटा दिया और उसके होंठों को बेतहाशा खाने लगा. वो पूरी बदहवासी में मेरा साथ देने लगी.

    एकाएक मैंने अपने दोनों हाथ उसके मम्मों पर रख दिए और ज़ोर से दबाने लगा. वो चिहुंक गई और ‘आ आह..’ की आवाज निकालने लगी. उसकी चुचियां संजना से काफ़ी छोटी थीं, पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों को ज़ोर ज़ोर से दबोचने लगा. वो कामुक भाव में बोली- आ… धीरे से करो.. दर्द हो र..हा.. है.

    मैं एकाएक उठा और उसकी साड़ी को उसके बदन से अलग कर दिया और उसका ब्लाउज खोलने लगा. पहले उसने मुझे रोकने का प्रयास किया, फिर शांत हो गई. उसका ब्लाउज खुलते ही उसकी मदमस्त चुचियां बाहर आ गईं, क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी.

    मैंने आव देखा ना ताव, अपने मुँह से उसके एक चूचे को भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. वो आँख बंद करके इधर उधर सर पटकने लगी और आहें भरते हुए ‘इसस्स.. स.. स.. आ.. ओ..हो..’ करने लगी

    मैंने लगभग दस मिनट तक उसके दोनों चूचियों को खूब चूसा, काटा और निचोड़ा. उसके मम्मों की घुंडी पूरी तन कर कड़क और लाल हो गई थीं.

    मैंने अब उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे पूरा नंगा कर दिया. उसकी बुर पूरा काली था और उसकी बुर की झांटेंभी बहुत बड़ी बड़ी थीं. उसकी बुर से काफ़ी पानी निकल रहा था, जिससे उसकी पूरी झांटें भीग गई थीं. चुत के चारों तरफ साइड में पानी लगा हुआ था. मैं आज पहली बार किसी गैर औरत की बुर देख रहा था. मेरा जोश बेकाबू हो गया और मैं पूरा पागल हो गया. मैंने एक भूखे भेड़िए की तरह उसकी बुर पर अपना मुँह सटा दिया.

    उसकी आँखें बंद थीं, जैसे ही उसको उसकी बुर में मेरे होंठ के स्पर्श का अनुभव हुआ, वो तो जैसे उछल पड़ी और शरीर को खींचने लगी.

    मैंने उसको अपने हाथों से जकड़ कर उसकी बुर पर अपना मुँह रख दिया.

    वो बोली- क्या इसको चूसियेगा? मैंने कहा- हाँ आज मैं इसको खा जाऊंगा. वो बोली- छी:.. मेरे पति तो आज तक इसको अपने मुँह के पास भी नहीं ले गया है. मैं बोला- वो साला भडुआ है.

    मैंने अपने होंठों को पूरी तरह से उसकी काली, गीली और बाल से भरी हुई बुर में चिपका दिया.

    उसकी बुर से एक अजीब सी दुर्गंध आई, जैसे लगा कि वो बुर को साफ नहीं करती थी. पर मुझ पर तो जैसे भूत सवार था. मैंने उसकी गंदी बुर में अपनी जीभ को ठूंस दिया और उसकी बुर को चाटते हुए बुर का पानी पीने लगा.

    वो पूरी तिलमिला गई और उसका शरीर कांपने लगा. वो पूरी मस्त होकर ‘आ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… एयेए.. हहा.. उई ईईईई.. सस्स..’ करते हुए बहुत लंबी लंबी साँसें भरने लगी.

    मुझे और जोश चढ़ा और मैं उसकी पूरी बुर को एक तरह से खाने लगा और पागलों की तरह उसकी बुर की सारी गंदगी को भी चाट गया. अब मैं उसकी क्लिट को चूसने लगा. वो मेरे इस वार को सह नहीं पाई. उसने ज़ोर से चीखते हुए अपने पूरे शरीर एकदम से टाइट कर लिया और बेतहाशा झड़ने लगी.

    मैं भी बेतहाशा उसकी बुर को चूसे जा रहा था. वो अब निढाल हो गई थी और हाँफ रही थी. अब मुझे वो छोड़ने को कह रही थी. पर मैं कहाँ छोड़ने वाला था. मेरा तो अभी सेक्स का पागलपन शुरू हुआ था.

    कुछ देर बाद मैं उठा और अपना लंड, जो कि अब लोहे की तरह तन कर खड़ा हो गया था, बाहर निकाला. जैसे ही उसने लंड को देखा, वो बोली- बाप रे बाप इतना बड़ा और मोटा लंड, मेरे पति का तो इससे काफ़ी छोटा है. मैं बता दूं कि उसका पति भी काफ़ी दुबला पतला और बौना टाइप का है. मैंने कहा- अभी बुर में पेलूँगा तो जन्नत का मज़ा आएगा.

    मैं अपना लंड उसके मुँह में घुसेड़ने लगा तो वो बोली कि नहीं.. मैंने आज तक इसे मुँह में नहीं लिया है.

    तब मैंने सोचा कि अभी ये लोग सेक्स के हरेक पहलू से काफ़ी अंजान हैं.

    मैंने फिर रिक्वेस्ट करके उसके मुँह में लंड डाल दिया. उसके छोटे से मुँह में मेरा लंड नहीं समा रहा था, फिर भी वो बढ़े चाव से मेरे लंड को चूसे जा रही थी. वो बोली- ये तो बहुत टेस्टी केला है.

    पांच मिनट लंड चूसने के बाद मेरा लंड की सारी नसें एकदम फूल गईं.. लंड भी मोटा हो गया, ऐसा कड़क हो गया जैसे टीएमटी की रॉड हो. मैंने उसके मुँह से अपना लंड निकाल कर, उसे पीठ के बल पलंग पर लिटा दिया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगा कर मैं पलंग से नीचे उतर आया. मैं उसकी काली कलूटी बुर में अपना लंड डालने लगा, पर उसकी बुर का पानी सूख जाने की वजह से मेरा लंड का सुपारा भी बुर में नहीं घुस पाया था. वो दर्द से कराहने लगी और बोली- प्लीज़ धीरे धीरे करो..

    मैं किचन से सरसों का तेल ले आया और उसकी बुर में तेल गिरा कर पूरा इलाका चिपचिपा कर दिया. फिर मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया और उसकी बुर में लंड को डालने लगा. अब धीरे धीरे मेरा लंड उसकी बुर में जाने लगा. अभी आधा लंड ही गया था कि वो दर्द से तड़फ कर बोली- आह.. बहुत मोटा है, दर्द कर रहा है.

    मैं उसकी गर्दन पर चूमने चूसने लगा और चुचियों की घुंडी को चूसने लगा. तभी पता नहीं क्या हुआ कि वो फिर से झड़ने लगी और उसकी बुर से पानी निकलने लगा. मैं धीरे धीरे उसकी बुर में अपना लंड और ज़्यादा अन्दर करने लगा.

    मेरा लंड अब उसकी बुर में पूरी तरह से घुस गया था, लेकिन वो कराह रही थी. मैं धीरे धीरे लंड को उसकी चुत में अन्दर बाहर करने लगा. उसकी बुर से पूरा पानी निकल रहा था.

    पूरे रूम में उसकी आवाज़ गूँज रही थी- अया.. हह.. इसस्स्सस्स… बाप रे, बहुत मज़ा आ रहा है.. आ..हो.. इसस्स्सस्स.. स.. और जोर से करो.. आह हां..

    उसकी मादक आवाजें सुनकर मैं अपनी स्पीड बढ़ाने लगा और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. उसका दुबला शरीर, मेरा 80 किलो का वजन और मेरे लंड का ज़बरदस्त प्रहार वो बर्दाश्त ही नहीं कर पा रही थी. पूरी तरह से कराह रही थी. मेरा पलंग भी बुरी तरह से आवाज़ कर रहा था.

    पायल आँख बंद करके सिसिया रही थी- बाप रे.. मैं गई रे.. अया…. इससस्स.. उम्म्म.. ओयूऊऊ.. हुन्न्ञन्..

    मैं लगभग इस तरह 20 मिनट तक लगातार उसको चोदता रहा. फिर मैंने एकदम से स्पीड को बढ़ा दिया. मेरा पूरा रूम ‘फ़च्छ.. फ़च.. फ़चक.. फचक..’ की आवाज़ से गूँज रहा था.

    वो पूरे ज़ोर से ‘मर गई बाप रे..’ कहे जा रही थी. मैंने कहा- दर्द कर रहा है क्या? वो बोली- दर्द तो कर रहा है लेकिन उसके हज़ार गुना ज़्यादा मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा आज तक मुझे नहीं मिला है.

    मैं और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा, वो बोली- हां और ज़ोर से.. मैं अपने पूरे शरीर की ताक़त लगा के पागलों की तरह उसे चोदने लगा और सोचने लगा कि ये साली 40-45 किलो की औरत मेरे वजन को सह कैसे पा रही है.

    एकाएक उसका शरीर फिर अकड़ा. वो फिर जबरदस्त तरीके से झड़ने लगी और वो निढाल हो कर पस्त हो गई. पर मेरा लंड अभी तक नहीं झड़ा था.

    वो बोली- अब मेरा पूरा शरीर जवाब दे रहा है. अब छोड़ दीजिए ना. मैंने कहा- मेरा अभी तक नहीं हुआ है.. कुछ देर और बर्दाश्त कर लो.

    अब मैं उसकी बुर से अपना लंड निकालने लगा तो देखा कि उसकी बुर और मेरे लंड में सफेद सफेद उसका ढेर सारा पानी ने जम कर किसी सफेद सर्फ के झाग की तरह पूरे बालों को ढक लिया था. उस सफेदी में थोड़ा ब्लड भी था, जिससे पता चला कि शायद चोदते चोदते उसकी बुर ज़ख्मी हो गई थी. मैंने उसकी बुर और अपने लंड को साफ किया और अब उसे डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया.

    वो बोली- प्लीज़ अब सहा नहीं जा रहा है, लगता है जैसे बेहोश हो जाऊंगी. मैं बोला- जरा सा सहन करो डार्लिंग.. मेरा पानी भी झड़ने दो ना.

    मैंने उसी पोज़ में बुर और लंड में तेल लगा के उसकी बुर में फिर से लंड घुसा दिया. लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से टकराया और वो दर्द से कराह उठी. पर मैं जानता था कि इस पोज़ में डायरेक्ट जी-स्पॉट पर लंड टकराता है, जिस वजह से महिला को असीम आनन्द की प्राप्ति होती है.

    इस पोज़ में 5 मिनट चोदने के बाद फिर से उसकी बुर गीली हो गई. वो ‘आह.. उहह.. बहुत मज़ा आ रहा है.. आअहह.. इससस्स.. हन्णन्न्..’ करने लगी. पर उसका शरीर मेरे लंड के हमलों को सह नहीं पा रहा था और वो उसी पोज़ में पलंग पर गिर गई. पर मैं पूरे जोश में था और उसको गिरे हुए पोज़ में ही बेतहाशा चोदे जा रहा था.

    वो एकाएक फिर अकड़कर उछली और फिर निढाल हो गई. उसने आँख मूंद कर करुणा भरे स्वर में कहा- अब निकाल दीजिए ना.. अगली बार फिर चोद लीजिएगा.

    मुझे लगा कि अब ये सह नहीं पाएगी. मैं पूरे ज़ोर से 10-20 धक्का लगाने के बाद उसके बुर में ही झड़ने लगा. मेरा स्पर्म पता नहीं उस दिन इतना ज़्यादा कैसे निकला. मेरे स्पर्म से उसकी पूरी बुर भर गई और वो वहीं उसी पोज़ में सो गई.

    मैंने देखा उसकी बुर पूरी तरह से फूल गई थी. पायल ज़ोर ज़ोर से हाँफ रही थी.

    मैं बाथरूम जा कर फ्रेश हुआ और आया तो पायल उसी पोज़िशन में सो गई थी. करीब रात को 3 बजे उसकी नींद खुली तो वो पेशाब करने जाने लगी. जैसे ही पलंग से नीचे उतरी, वो लड़खड़ा के गिर गई. मैं सोया था, उसकी आवाज़ सुन कर जागा तो देखा वो गिरी हुई थी. मैंने बोला- क्या हुआ? वो कराह के बोली- पूरा शरीर का पोर पोर दर्द कर रहा है, मुझे टॉयलेट जाना है, पर चल नहीं पा रही हूँ.

    मैंने उसे गोद में उठाया और बाथरूम ले गया. उसने बड़ी मुश्किल से पेशाब की और फिर मैंने उसे गोद में ही उठा कर बेड पर ले आया. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया था.

    उसने खड़े लंड को देखा और कराहते हुए मुस्कुरा कर बोली- अब मुझमें इतनी ताक़त नहीं है कि मैं आपके इस हथियार का सामना कर पाऊं. मैंने लंड हिलाते हुए बोला- डार्लिंग सिर्फ़ एक बार. वो बोली- चुदवा तो नहीं पाऊंगी लेकिन मैं इसे मुँह से चूस ज़रूर सकती हूँ, ऐसे भी मुझे आपके लंड का टेस्ट काफ़ी अच्छा लगा.

    मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया. वो बेड पे लेटी लेटी लंड चूसने लगी.

    दस मिनट लंड चूसने के बाद बोली- मेरा मुँह दर्द करने लगा है. मैं बोला- तुम बेड पे लेटी रहो मैं लंड से तुम्हारा मुँह को चोदता हूँ.

    मैंने 15 मिनट तक उसके मुँह में लंड पेल कर मुँह चुदाई की. उसके मुँह से काफ़ी लार निकलने लगी थी और वो उबकी ले रही थी. फिर वो मुँह को हटा कर बोली- अब छोड़ दीजिए ना.

    मैंने फिर अपने आपको प्रेशर डाल कर उसके मुँह में ही अपना माल झड़ाने लगा. वो ऐसा नहीं चाहती थी. उसने मुँह को हटाने का प्रयास किया, पर मैंने उसका मुँह पकड़ कर सारा का सारा माल उसके मुँह में डाल दिया.

    मैंने बोला- प्लीज़ इसे खा जाओ ना.. बहुत टेस्टी लगेगा.

    पहले तो उसने उल्टी जैसी की, पर बाद में बड़े स्वाद से चाव से खाने लगी. लंड का रस खाने के बाद बोली- बहुत टेस्टी लगा.. जैसे नमकीन नमकीन रबड़ी खा रही हूँ.

    वो मुस्कुरा कर मेरे गले से लग गई. मैंने उसे ज़ोर से जकड़ा तो वो कराह दी और अलग होकर बड़े कातिलाना अंदाज़ में बोली- आप मर्द हो कि घोड़ा, इतनी दरिंदगी से कोई चोदता है.

    उस रात मुझे और भी एक बार चोदने का मन किया, पर पायल का शरीर पूरी तरह से टूट चुका था. जिस वजह से मैं ना चाहते हुए भी सो गया.

    जब तक उसका पति और बच्चा नहीं आया, तब तक कभी वो मेरे फ्लैट में तो, कभी में, उसके फ्लैट में खूब चुदाई का मजा किया.

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    मेरा नाम प्रीति है और मेरी उम्र 20 साल की है। मैं पंजाब से हूँ। मेरा एक भाई है और दो कजिन है काजल और रोहित। काजल 22 साल की है और रोहित 19 साल का। मेरी कहानी मेरी चूत की चुदाई यात्रा है।

    जब मैं 18 साल थी तो मेरी बहन काजल को हमारे किरायेदार ने चोद दिया. इस बात पे बहुत बवाल हुआ जब ताई ने काजल और उस आदमी को नंगे चुदाई में लगे पकड़ लिया। तब उस आदमी को घर से निकाल दिया और काजल का एक बार कॉलेज जाना बंद हो गया।

    मैंने जब अपनी बहन काजल से चुदाई के बारे में पूछा तो उसने बताया कि इस में बहुत मज़ा आता है। वो काजल को पिछले 6 महीने से चोद रहा है। काजल ने जब विस्तार से लंड और चूत और उसके बीच हुए सेक्स के बारे में बताया तो मेरी चूत गीली हो गयी। उस दिन के बाद मैं काजल से हर रात उसकी चुदाई की कहानियां सुनती और बाथरूम में उंगली से अपनी चूत की आग को ठण्डा करती। दिन पर दिन मेरा सेक्स करने को दिल मचल रहा था पर दिक्कत यह थी कि ना मेरा कोई बॉयफ्रेंड था और काजल का काम बंद हो गया था।

    काजल और मैं दोनों लेस्बियन सेक्स करने लगी पर लंड के बिना चूत शांत नहीं हो पा रही थी। हम दोनों अब एक दूजी की राज़दार थी, हमें लंड की ज़रूरत थी।

    इस बीच काजल ने एक धांसू बात कही कि क्यों न रोहित भाई से आग बुझा ली जाए। एक बार मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई कि कैसे काजल अपने आप को अपने सगे भाई से चुदवा सकती है औऱ मुझे अपने कज़िन से पर कोई चारा नहीं था।

    काजल ने कहा- पहले तू भाई रोहित को पटा ले… क्योंकि सगी बहन को वो ना सही, कजन बहन को वो आसानी से चोदेगा।

    काजल ने मेरे और रोहित के लिए एक दिन सेट किया जब काजल के मम्मी पापा कहीं बाहर गए थे रोहित और काजल अकेले थे। काजल मुझे बताया उसने रोहित को कई बार मुठ मारते देखा है क्यों ना इस बात पे उसे ब्लैकमेल किया जाए? आज घर पे कोई नहीं है और वो मुठ ज़रूर मारेगा।

    मेरा दिल ज़ोर ज़ोर धड़क रहा था जब मैं काजल के घर गयी। उसने बताया कि उसने रोहित के रूम की खिड़की की कुंडी खोल दी है और उसमें से हम नज़ारा देख सकते हैं। हम दोनों टीवी देखने लगी और इंतज़ार करने लगी।

    हमारी नज़र अपने भाई पर थी, उसने लैपटॉप लिया और अपना कमरा बंद कर लिया। काजल मुझसे बोली- जा मेरी जान, अपने लिए भी लंड का इंतज़ाम कर और मेरे लिए भी।

    थोड़ी देर बाद मैंने और काजल ने खिड़की से चुपके से पर्दा हटा कर देखा तो हमारी योजना कामयाब थी, रोहित ने अपनी लोअर नीचे की हुई थी और अपना लंड बाहर निकाल के रखा हुआ था, मेरी और काजल की आँखें मिली 6 इंच का सुन्दर लंड देख के।

    काजल ने मुझे एक्शन बोला और मैंने खिड़की खोली और अंदर आ गयी, मुझे अचानक देख कर रोहित भाई डर गया, उसने अपना लंड लोअर में डाल लिया पर लैपटॉप न बंद कर सका. और लैपटॉप पर मज़ेदार फ़िल्म चल रही थी, एक बड़े लंड वाला काला नीग्रो एक छोटी सी लड़की को धकापेल चोद रहा था।

    मैंने रोहित से कहा- यह क्या कर रहे थे भाई? उसने घबराते हुए कहा- कुछ नहीं, तुम यहाँ कैसे आयी? मेरा दिल बहुत जोर से धड़क रहा था, मैंने रोहित से कहा- तू यह सब क्या कर रहा था? वो बोला- तू जा यहां से!

    मैंने प्लान के मुताबिक कहा- ज़्यादा बन मत भाई… मैं ताई को और काजल को बता दूँगी कि तू क्या कर रहा था। वो थोड़ा डर गया और बोला- किसी से मत कहना, तू जो बोलेगी मैं करूँगा। मैंने डरते डरते कि, पता नहीं यह मानेगा या नहीं, बोल दिया- मुझे चुदने का मन हो रहा है तेरा लंड और ब्लू फिल्म देख के! एक बार तो वो बोला- नहीं, तू मेरी बहन है.

    फ़िर पता नहीं थोड़ी देर सोचने के बाद बोला- मुझे भी तेरी फ़ुद्दी लेनी है पर काजल घर पे है। मैंने कहा- तू उसकी परवाह न कर, वो टीवी देखते देखते सो गई गयी है।

    मेरे चचेरे भाई ने मुझे अपने गले से लगा लिया और कहा- यह बात हम दोनों के बीच रहनी चाहिए। sexgurumd@ जब रोहित ने मुझे गले से लगा कर मेरे शरीर पर हाथ फेरना शुरू किया तो मेरे शरीर में चीटियां सी रेंगने लगी क्योंकि यह किसी लड़के की पहली छुअन थी मेरे कच्चे नाजुक कुंवारे बदन पर। उसने मुझे पटक कर बेड पे लिटा दिया और मेरे कमीज के ऊपर से मेरे मुम्मे दबाने लगा। मैं सिसकारियां भरने लगी।

    पहले उसने मेरा कमीज़ उतार के साइड पे रख दिया और ब्रा को ऊपर उठा के मेरा एक चूचा अपने मुँह में डाल के चूसने लगा, भाई मेरे दूसरे चूचे को बारी बारी से दबा रहा था, यह अभी शुरुआत थी और मैं ज़न्नत में थी।

    कुछ देर बाद उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया मेरी पेंटी की इलास्टिक में हाथ डालकर पेंटी और सलवार दोनों एक झटके में उतार दी। मैंने जोश मे आकर एकमात्र ब्रा जो मेरे शरीर पर बाक़ी रह गयी थी, वो भी उतार दी. रोहित ने अपना लोअर और टीशर्ट उतार कर साइड में रख दिया। अब हम दोनों भाई बहन नंगे थे।

    भाई ने अपनी चचेरी बहन को बांहों में भर लिया! आह क्या नज़ारा था… दो नंगे जवान जिस्म, भाई बहन के।

    मेरे बूब्स उसकी छाती से दब रहे थे वो मेरी पीठ पर, गांड पर, फ़ुद्दी पर हाथ फिरा रहा था। मैं पहले से ही तैयारी करके आई थी, मैंने अपनी चूत की झांटें क्रीम लगाकर साफ़ कर रखी थी और मेरी चूत चमक रही थी.

    कुछ देर बाद उसने मुझे लिटा कर मेरी टाँगें खोल दी और मेरी फ़ुद्दी पर अपने होंठ रख दिये। मेरे मुँह से जोर की सिसकारी निकली और मेरे पूरे बदन में एक करन्ट सा दौड़ गया।

    फ़िर क्या कहूँ… उसने पाँच मिनट तक मेरी जम के फ़ुद्दी चूसीऔर मेरा पानी निकाल दिया।

    थोड़ी देर बाद जब मैं होश में आई तो उसने कहा- अब मेरी बारी मजा लेने की! और अपना 6 इंच का लौड़ा मेरे मुंह के रास्ते मेरे हलक में उतार दिया।

    मैंने भी लॉलीपॉप की तरह चूस चूस कर भाई का लौड़ा लाल कर दिया। उसके बाद उसने लौड़े ने पानी छोड़ दिया जिसकी पहली पिचकारी मेरे हलक के अंदर छूटी, उसने मेरा सिर दबा लिया और जब तक उसके लौड़े ने वीर्य की अंतिम बूंद नहीं निकाली, छोड़ा नहीं। मैंने भी सारा माल गटक के पी लिया। मेरा भाई रोहित बोला- बहना… तू बहुत बड़ी रंडी बनेगी, तेरी चूत मे में गर्मी बहुत है।

    थोड़ी देर में मैंने उसका लौड़ा फ़िर से खड़ा कर दिया। अब पहली बार मेरी चूत में लौड़ा जाना था और हैरत की बात यह थी कि वो लौड़ा मेरे चचेरे भाई का था। मैंने उसका लौड़ा चूस के खड़ा कर दिया।

    अब रोहित ने मुझे बेड पे लिटा के मेरी कमर के नीचे तकिया लगा दिया जिससे मेरी चूत खुल के उसके लौड़े के सामने थी। वो मेरी टांगों के बीच आ गया और मेरी मेरी चूत पर लौड़े का टोपा घिसने लगा, मेरी चूत की खुजली बढ़ गयी। मैंने सिसकारियां लेते हुए कहा- भाई अब डाल दे मेरी फ़ुद्दी में अपना लौड़ा और बना ले अपनी बहन को अपनी रंडी!

    उसने ज़ोर का झटका दिया और अपना आधा लौड़ा मेरी चूत में उतार दिया, ऐसा लगा किसी ने जलती रॉड मेरी चूत में डाल दी हो। मेरी आँखों में आंसू आ गए पर वो धीरे धीरे लंड को अंदर सरकाता गया। अब भाई का लंड मेरे गर्भाशय से टकरा रहा था, जो बड़े लंड खाने वाली है वो जानती होंगी क्या मज़ा है जब लंड का सिरा अंत में जाकर टकराता है।

    मेरी आँखों के सामने रंगीन सितारे झिलमिलाने लगे, मैंने रोहित को कस के भींच लिया और अपनी टाँगें उसकी कमर पे लपेट दी। अब धीरे धीरे मेरा दर्द कम हो रहा था और मज़ा आ रहा था। पूरे 15 मिनट तक मेरी चूत मेरे भाई का लौड़ा लेती रही। मेरी गीली चूत में उसका लौड़ा फिसलता अंदर और बाहर हो रहा था, मेरे चूतड़ और गांड के छेद पर उसके टट्टे चोट मार रहे थे, इससे कमरे में टप टप की आवाज़ आ रही थी.

    मैं सिसकारियां भर रही थी, रोहित पेले ही जा रहा था।

    अचानक मेरा शरीर अकड़ने लगा और ऐसा लगा कि मेरा सारा खून मेरी फ़ुद्दी की ओर आ गया और मेरी फ़ुद्दी ने पानी छोड़ दिया। मैंने रोहित को भींच लिया पर वो धकधक पेले जा रहा था, थोड़ी देर में वो बोला- आह… जान… आह… और उसने अपना गरमागर्म वीर्य मेरे पेट और बूब्स पर छोड़ दिया।

    क्या बला का सीन था… मेरा पेट और नाभि उसके वीर्य से सराबोर हो गए। थोड़ा वीर्य मेरे गले और बूब्स पे भी आ के गिरा। भाई ने अपनी उंगली से वो माल इकट्ठा करके मेरे मुँह में डाल दिया मैंने भी पोर्न स्टार की तरह सारा रस चूस लिया, बाकी बचा अपने बूब्स और पेट पर रगड़ लिया।

    रोहित मेरे बगल में लेट गया मेरे होंठ चूम के बोला- दीदी, तेरी फ़ुद्दी में तो जन्नत है। मैंने मुस्करा कर कहा- भाई तेरा लौड़ा भी कम नहीं है।

    इसके बाद मैं कमरे के बाहर आई और रोहित से बोली- मैं देख कर आती हूँ कि काजल कहीं उठ तो नहीं गयी? मैंने कपड़े पहने और बाहर आ गयी, जब मैं काजल के कमरे में गयी तो वो बोली- वाह मेरी रानी, फ़ुद्दी में लौड़ा ले ही लिया, कैसा लगा भाई का लौड़ा? मैंने कहा- बस जन्नत है।

    वो बोली- ऐसे ही मैं राजू किरायेदार का लौड़ा खाती थी, अब यह सोच तू तो फ़ुद्दी की आग बुझा के आ गयी; अब मेरा भी कुछ कर। मैंने कहा- करते है कुछ! तभी मेरे दिमाग एक आईडिया आया, मैंने कहा- कोई बात नहीं, हमारे पास अभी 3 दिन हैं, इन 3 दिन में तो मैं तुझे भाई के लंड से चुदवा ही दूँगी। वैसे तू है बड़ी रंडी… अपने भाई का लौड़ा लेना चाहती है। वो बोली- लौड़े का काम चूत को फाड़ना है, चाहे वो किसी की भी हो, और चूत का काम लौड़ा खाना है चाहे वो भाई का हो। मैंने कहा- चल तू सो अभी, मैं करती हूँ तेरा काम।

    मैं कमरे में गयी तो रोहित ने मुझे फिर पकड़ लिया, मेरा भी मूड बन गया पर काजल बड़ी बेसब्री से चुदने को तैयार थी। मैंने भाई से कहा- काजल जाग रही है. वो थोड़ा निराश हो गया.

    दिल मेरा भी लौड़ा लेने को कर रहा था क्योंकि भाई के हाथ मेरे मुम्मे और फ़ुद्दी पे रेंग रहे थे। उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल के सलवार घुटनों तक कर दी और मुझे बेड के किनारे घोड़ी बना लिया, मैंने भी झुक के अपनी फ़ुद्दी खोल ली पीछे की ओर।

    उसने लंड पे थूक लगा कर मेरी फ़ुद्दी पे रखा और एक झटके में अंदर उतार दिया। आह क्या आनन्द था इस तरह कपड़े पहने हुए सिर्फ फ़ुद्दी और लंड का मिलन करवाने में।

    अब शुरू हुए लगातार धक्के… जो 10 मिनट तक चले, बीच में उसने मुझे चित लिटा कर लगातार चोदा जिससे मेरा पानी निकल गया। उसका भी पानी मेरी फ़ुद्दी में पिचकारियों के रूप में जज़्ब हो गया। मैं भाई के लंड का गरम गरम पानी अपनी फ़ुद्दी में पाकर निहाल हो गई और चढ़ी हुई साँस को नॉर्मल करने लगी।

    मैंने सलवार को ऊपर किया और नाड़ा बांध लिया, उसने भी अपनी लोअर टीशर्ट पहन ली। उसने कहा- दीदी, किसी से बोलना नहीं कि हमने यह सब किया है। मैंने हां में सर हिला दिया।

    sensualhotwife

    When you let your wife have that young man with the big cock….

    taffydragon1972

    Hot love watching a big cock hammer a wife

    harddick21blog

    Brutal fun with stranger’s wife

    It does take one very important prerequisite: safety of the container.

    Safety provides a space of trust.

    If you feel unsafe with your partner you need to figure out what can help you feel safer. Maybe there is a conversation that needs to take place? Sometimes it can be as simple as asking each other simple questions about where you both stand in relation to each other, and receiving answers. Requesting things like more touch, more words of appreciation or quality time together can bring deeper trust.

    ike96

    All holes as much as you like. Just give it to her non stop

    mfm-orgasms

    Still one of the best.

    harddick21blog

    Cuckold Gangbang

    Usually physical or emotional discomfort during sex is something that we take as a signal to end the intercourse, or - even worse - something that we silently bear and wait until sex ends.

    What if this view could be different?

    What if we didn’t even need sex to be pleasurable and instead approached sex like a practice?

    Sex can be a practice of allowing.

    selimnurciftii

    cuckold çiftiz aramıza katılmak isteyen tek beyler paylaşımızı yapana cevap verıyoruz

    harddick21blog

    WHAT TO DO WHEN YOU ARE AFFECTED BY THE OPINIONS OF OTHERS?

    You may feel as if people are trying to bring you down to their view of reality. You may feel that people are trying to make you digestable, comprehensible…

    This ranges from people who only see you as a sex object, to people who want you to be their good daughter or good partner, to people who think they want to be your friend and for you to be like them.

    They will tug on you where you are wounded and tell you this is where your place is.

    blkdmnd28

    Your wife was creaming all over my dick as if she’s never been fukk or is it bcuz of my blk dick?

    drae1965

    Nice ass

    sexuallyinclinedd

    Helpless! Just taking dick.

    harddick21blog

    Black Mamba white Jamba

    In order to be emotional intimate with a partner we need to be able to be intimate with ourselves, feeling our vulnerability without judgment and developing healthy self-love. If we are not comfortable with our own vulnerability, we cannot receive the vulnerability of another person fully and emotional intimacy is blocked. No matter how hot the sex and how great physical intimacy is, if we don’t develop or have emotional intimacy and the safety to express ourselves that way, a relationship and the sexual union can go only so far, keeping it on a lower vital level.

    bigblackdesires

    Married wife screaming and getting DPed by two big black cocks as her husband sits on the sofa stroking and recording it all. That is cuckold perfection 😈

    harddick21blog

    Double Black Fun 

    Women can Lift you.

    When down, broken and lost, they can get into our weakness and raise us up to believe in ourselves again. They can tenderly reveal your blind spots in ways you can’t deny. They can believe in you when you can’t yourself. Their flowing sexual gifts invigorate our masculine stiffness. They can be the wind beneath our wings.

    brownmanxxx

    Black guy from the bar with wife as husband records. ♠

    harddick21blog

    Black fun 

    Women can Ruin you.

    When they can’t feel the anchor of your purpose, they wave around emotionally like untethered kites. Our lack of depth, commitment to mission and the boyish desire to be emotionally breastfed makes them go crazy. Their bodies tighten and their shine dims by having to hold their own masculine in their own safekeeping. They become shadows by the Light we hide.

    harddick21blog

    Chinese fun (Cuckold)

    The components of the BBTRs system are there to release the tensions and the undischarged energy. The deep connected breathing which is the core of the system stimulates the Sympathetic Nervous system to go into flight or fight, Trauma Release Exercises (TRE) induce neurogenic tremoring to begin the process of shaking and therapeutic touch in areas of chronic tension furthers the release of the energy.