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    Bigg boss 2 ashwariya 👅👅👅

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    Aishwarya without abhi shake :) 

    ज्वाला देवी के प्रति रंजना के मन में बड़ा अजीब सा भाव उत्पन्न हो गया था। उसकी नज़र में वो इतनी गिर गयी थी कि उसके सारे आदर्शो, पतिव्रता के ढोंग को देख देख कर उसका मन गुस्से के मारे भर उठा था। उसके सारे कार्यों में रंजना को अब वासना और बदचलनी के अलावा कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा था। मगर अपनी मम्मी के बारे में इस तरह के विचार आते आते कभी वो सोचने लगती थी कि जिस काम की वजह से मम्मी बुरी है वही काम करवाने के लिये तो वो खुद भी अधीर है। वास्तविकता तो ये थी कि आजकल रंजना अपने अंदर जिस आग में जल रही थी, उसकी झुलस की वो उपेक्षा कर ही नहीं सकती थी। जितना बुरा गलत काम करने वाला होता है उतना ही बुरा गलत काम करने के लिये सोचने वाला भी होता है। बस! अगर ज्वाला देवी की गलती थी तो सिर्फ़ इतनी कि असमय ही चुदाई की आग रंजना के अंदर उसने जलायी थी। अभी उस बेचारी की उम्र ऐसी कहाँ थी कि वो चुदाई करवाने के लिये प्रेरित हो अपनी चूत कच्ची ही फ़ुड़वाले। बिरजु और ज्वाला देवी की चुदाई का जो प्रभाव रंजना पर पड़ा, उसने उसके रास्ते ही मोड़ कर रख दिये थे। उस रोज़ से ही किसी मर्द से चुदने के लिये उसकी चूत फ़ड़क उठी थी। कईं बार तो चूत की सील तूड़वाने के लिये वो ऐसी ऐसी कल्पनायें करती कि उसका रोम-रोम सिहर उठता था। अब पढ़ायी लिखायी में तो उसका मन कम था और एकान्त कमरे में रह कर सिर्फ़ चुदाई के खायाल ही उसे आने लगे थे। कईं बार तो वो गरम हो कर रात में ही अपने कमरे का दरवाजा ठीक तरह बंद करके एकदम नंगी हो जाया करती और घन्टो अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को दबाने और चूत को खुजाने से जब वो और भी गर्माँ जाती थी तो नंगी ही बिस्तर पर गिर कर तड़प उठती थी, कितनी ही देर तक अपनी हर्कतो से तंग आ कर वो बुरी तरह छटपटाती रहती और अन्त में इसी बेचैनी और दर्द को मन में लिये सो जाती थी। उन्ही दिनों रंजना की नज़र में एक लड़का कुछ ज्यादा ही चढ़ गया था। नाम था उसका मृदुल। उसी की क्लास में पढ़ता था। मृदुल देखने में बेहद सुन्दर-स्वस्थ और आकर्षक था, मुश्किल से दो वर्ष बड़ा होगा वो रंजना से, मगर देखने में दोनों हम उम्र ही लगते थे। मृदुल का व्यव्हार मन को ज्यादा ही लुभाने वाला था। न जाने क्या खासियत ले कर वो पैदा हुआ होगा कि लड़कियाँ बड़ी आसानी से उसकी ओर खींची चली आती थीं। रंजना भी मृदुल की ओर आकर्षित हुए बिना न रह सकी। मौके बेमौके उससे बात करने में वो दिलचस्पी लेने लगी। खूबसुरती और आकर्षण में यूँ तो रंजना भी किसी तरह कम न थी, इसलिये मृदुल दिलोजान से उस पर मर मिटा था। वैसे लड़कियों पर मर मिटना उसकी आदत में शामिल हो चुका था, इसी कारण रंजना से दो वर्ष बड़ा होते हुए भी वो अब तक उसी के साथ पढ़ रहा था। फेल होने को वो बच्चों का खेल मानता था। बहुत ही जल्द रंजना और मृदुल में अच्छी दोस्ती हो गयी। अब तो कॉलेज में और कॉलेज के बाहर भी दोनों मिलने लगे। इसी क्रम के साथ दोनों की दोस्ती रंग लाती जा रही थी। उस दिन रंजना का जन्म दिन था, घर पर एक पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें परिचित व रिश्तेदारों के अलावा ज्यादातर संख्या ज्वाला देवी के चूत के दिवानों की थी। आज बिरजु भी बड़ा सज धज के आया था, उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वो एक रद्दी वाला है। रंजना ने भी मृदुल को इस दावत के लिये इनविटेशन कार्ड भेजा था, इसलिये वो भी पार्टी में शामिल हुआ था। जिस तरह ज्वाला देवी अपने चूत के दिवानों को देख-देख कर खुश हो रही थी उसी तरह मृदुल को देख कर रंजना के मन में भी फ़ुलझड़ियाँ सी फूट रहीं थीं। वो आज बे-इन्तहा प्रसन्न दिखायी पड़ रही थी। पार्टी में रंजना ज्यादातर मृदुल के साथ ही रही। ज्वाला देवी अपने यारों के साथ इतनी व्यस्त थी कि रंजना चाहते हुए भी मृदुल का परिचय उससे न करा सकी। मगर पार्टी के समाप्त हो जाने पर जब सब मेहमान विदा हो गये तो रंजना ने जानबूझ कर मृदुल को रोके रखा। बाद में ज्वाला देवी से उसका परिचय कराती हुई बोली, “मम्मी ! ये मेरे खास दोस्त मृदुल हैं।” “ओहह ! हेंडसम बॉय।” ज्वाला देवी ने साँस सी छोड़ी और मृदुल से मिल कर वो जरूरत से ज्यादा ही प्रसन्नता ज़ाहिर करने लगी। उसकी निगाहें बारबार मृदुल की चौड़ी छाती, मजबूत कन्धों, बलशाली बाँहों और मर्दाने सुर्ख चेहरे पर ही टिकी रही। रंजना को अपनी मम्मी का यह व्यव्हार और उसके हाव-भाव बड़े ही नागवार गुज़र रहे थे। मगर वो बड़े धैर्य से अपने मन को काबू में किये सब सहे जा रही थी। जबकि ज्वाला देवी पर उसे बेहद गुस्सा आ रहा था। उसे यूँ लग रहा था जैसे वो मृदुल को उससे छीनने की कोशिश कर रही है। मृदुल से बातें करने के बीच ज्वाला देवी ने रंजना की तरफ़ देख कर बदमाश औरत की तरह नैन चलाते हुए कहा, “वाह रंजना ! कुछ भी हो, मृदुल… अच्छी चीज़ ढूँढी है तुमने, दोस्त हो तो मृदुल जैसा।” अपनी बात कह कर कुछ ऐसी बेशर्मी से मुस्कराते हुए वो रंजना की तरफ़ देखने लगी कि बेचारी रंजना उसकी निगाहों का सामना न कर सकी और शर्मा कर उसने अपनी गर्दन झुका ली। ज्वाला देवी ने मृदुल को छाती से लगा कर प्यार किया और बोली, “बेटा ! इसे अपना ही घर समझ कर आते रहा करो, तुम्हारे बहाने रंजना का दिल भी बहल जाया करेगा, ये बेचारी बड़ी अकेली सी रहती है।” “यस आन्टी ! मैं फिर आऊँगा।” मृदुल ने मुसकुरा कर उसकी बात का जवाब दिया और उसने जाने की इजाज़त माँगी, रंजना एक पल भी उसे अपने से अलग होने देना नहीं चाहती थी, मगर मजबूर थी। मृदुल को छोड़ने के लिये वो बाहर में गेट तक आयी। विदा होने से पहले दोनों ने हाथ मिलाया तो रंजना ने मृदुल का हाथ ज़ोर से दबा दिया, इस पर मृदुल रहस्य से उसकी तरफ़ मुसकुराता हुआ वहाँ से चला गया। अब आलम ये था कि दोनों ही अक्सर कभी रेस्तोराँ में तो कभी पार्क में या सिनेमा हाल में एक साथ होते थे। पापा सुदर्शन की गैरमौजूदगी का रंजना पूरा-पूरा लाभ उठा रही थी। इतना सब कुछ होते हुए भी मृदुल का लंड चूत में घुसवाने का सौभाग्य उसे अभी तक प्राप्त न हो पाया था। हाँ, चूमा चाटी तक नौबत अवश्य जा पहुंची थी। रोज़ाना ही एक चक्कर रंजना के घर का लगाना मृदुल का परम कर्तव्य बन चुका था। सुदर्शन जी की खबर आयी कि वे अभी कुछ दिन और मेरठ में रहेंगे। इस खबर को सुन कर माँ बेटी दोनों का मानो खून बढ़ गया हो। रंजना रोजाना कॉलेज में मृदुल से घर आने का आग्रह बार-बार करती थी। जाने क्या सोच कर ज्वाला देवी के सामने आने से मृदुल कतराया करता था। वैसे रंजना भी नहीं चाहती थी कि मम्मी के सामने वो मृदुल को बुलाये। इसलिये अब ज्यादातर चोरी-चोरी ही मृदुल ने उसके घर जाना शुरु कर दिया था। वो घन्टों रंजना के कमरे में बैठा रहता और ज्वाला देवी को ज़रा भी मालूम नहीं होने पाता था। फिर वो उसी तरह से चोरी-चोरी वापस भी लौट जाया करता था। इस प्रकार रंजना उसे बुला कर मन ही मन बहुत खुश होती थी। उसे लगता मानो कोई बहुत बड़ी सफ़लता उसने प्राप्त कर ली हो। चुदाई संबंधों के प्रति तरह-तरह की बातें जानने की इच्छा रंजना के मन में जन्म ले चुकी थी, इसलिये उन्ही दिनों में कितनी चोदन विषय पर आधारित पुस्तकें ज्वाला देवी के कमरे से चोरी-चोरी निकाल कर वो काफ़ी अध्य्यन कर रही थी। इस तरह जो कुछ उस रोज़ ज्वाला देवी व बिरजु के बीच उसने देखा था इन चोदन समबन्धी पुस्तकों को पढ़ने के बाद सारी बातों का अर्थ एक-एक करके उसकी समझ में आ गया था। और इसी के साथ साथ चुदाई की ज्वाला भी प्रचण्ड रूप से उसके अंदर बढ़ उठी थी। फिर सुदर्शनजी मेरठ से वापिस आ गये और माँ का बिरजु से मिलना और बेटी का मृदुल से मिलना कम हो गया। फिर दो महीने बाद रंजना के छोटे मामा की शादी आ गयी और उसी समय रंजना के फायनल एग्जाम भी आ गये। ज्वाला देवी शादी पर अपने मायके चली गयी और रंजना पढ़ाई में लग गई। उधर शादी सम्पन्न हो गई और इधर रंजना की परीक्षा भी समाप्त हो गई, पर ज्वाला देवी ने खबर भेज दी कि वह १५ दिन बाद आयेगी। सुदर्शनजी ऑफिस से शाम को कुछ जल्द आ जाते। ज्वाला के नहीं होने से वे प्रायः रोज ही शाज़िया की मारके आते इसलिये थके हारे होते और प्रायः जल्द ही अपने कमरे में चले जाते। रंजना और बेचैन रहने लगी और एक दिन जब पापा अपने कमरे में चले गये तो रंजना के वहशीपन और चुदाई नशे की हद हो गयी। हुआ यूँ कि उस रोज़ दिल के बहकावे में आ कर उसने चुरा कर थोड़ी सी शराब भी पी ली थी। शराब का पीना था कि चुदाई की इच्छा का कुछ ऐसा रंग उसके सिर पर चढ़ा कि वो बेहाल हो उठी। दिल की बेचैनी और चूत की खाज से घबड़ा कर वो अपने बिस्तर पर जा गिरी और बर्दाश्त से बाहर चुदाई की इच्छा और नशे की अधिकता के कारण वो बेचैनी से बिस्तर पर अपने हाथ पैर फेंकने लगी और अपने सिर को ज़ोर-ज़ोर से इधर उधर झटकने लगी। कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, दरवाजे पर एकमात्र परदा टंगा हुआ था। रंजना को ज़रा भी पता न चला कि कब उसके पापा उसके कमरे में आ गये। वे चुपचाप उसके बिस्तर तक आये और रंजना को पता चलने से पहले ही वे झुके और रंजना के चेहरे पर हाथ फेरने लगे फिर एकदम से उसे उठा कर अपनी बाँहों में भींच लिया। इस भयानक हमले से रंजना बुरी तरह से चौंक उठी, मगर अभी हाथ हिलाने ही वाली थी कि सुदर्शन ने उसे और ज्यादा ताकत लगा कर जकड़ लिया। अपने पापा की बाँहों में कसी होने का आभास होते ही रंजना एकदम घबड़ा उठी, पर नशे की अधिकता के कारण पापा का यह स्पर्श उसे सुहाना लगा। तभी सुदर्शनजी ने उससे प्यार से पुछा, “क्यों रंजना बेटा तबियत तो ठीक है न। मैं ऐसे ही इधर आया तो तुम्हें बिस्तर पर छटपटाते हुए देखा… और यह क्या तुम्हारे मुँह से कैसी गन्ध आ रही है।” रंजना कुछ नहीं बोल सकी और उसने गर्दन नीचे कर ली। सुदर्शनजी कई देर बेटी के सर पर प्यार से हाथ फेरते रहे और फिर बोले, “मैं समझता हूँ कि तुम्हें मम्मी की याद आ रही है। अब तो हमारी बेटी पूरी जवान हो गई है। तुम अकेली बोर हो रही हो। चलो मेरे कमरे में।” रंजना मन्त्र मुग्ध सी पापा के साथ पापा के कमरे में चल पड़ी। कमरे में टेबल पर शराब की बोतलें पड़ी थीं, आईस बॉक्स था और एक तश्तरी में कुछ काजू पड़े थे। पापा सोफ़े पर बैठे और रंजना भी पापा के साथ सोफ़े पर बैठ गई। सुदर्शनजी ने एक पेग बनाया और शराब की चुसकियाँ लेने लगे। इस दौरान दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई। तभी सुदर्शन ने मौन भंग किया। “लो रंजना थोड़ी पी लो तो तुम्हें ठीक लगेगा तुम तो लेती ही हो।” अब धीरे धीरे रंजना को स्थिती का आभास हुआ तो वह बोली, “पापा आप यह क्या कह रहे हैं?” तभी सुदर्शन ने रंजना के भरे सुर्ख कपोलों (गालों) पर हाथ फेरना शुरु किया और बोले, “लो बेटी थोड़ी लो शर्माओ मत। मुझे तो पता ही नहीं चला कि हमारी बेटी इतनी जवान हो गई है। अब तो तुम्हारी परीक्षा भी खतम हो गई है और मम्मी भी १५ दिन बाद आयेगी। अब जब तक मैं घर में रहूँगा तुम्हें अकेले बोर होने नहीं दूँगा।” यह कहते हुए सुदर्शन ने अपना गिलास रंजना के होंठों के पास किया। रंजना नशे में थी और उसी हालत में उसने एक घूँट शराब का भर लिया। सुदर्शन ने एक के बाद एक तीन पेग बनाये और रंजना ने भी २-३ घूँट लिये। रंजना एक तो पहले ही नशे में थी और शराब की इन २-३ और घूँटों की वजह से वह कल्पना के आकाश में उड़ने लगी। अब सुदर्शनजी उसे बाँहों में ले हल्के-हल्के भींच रहे थे। सुदर्शन को शाज़िया जैसी जवान चूत का चस्का तो पहले ही लगा हुआ था, पर १९ साल की इस मस्त अनछुई कली के सामने शाज़िया भी कुछ नहीं थी। इन दिनों रंजना के बारे में उनके मन में बूरे ख्याल पनपने लगे थे पर इसे कोरी काम कल्पना समझ वे मन से झटक देते थे। पर आज उन्हें अपनी यह कल्पना साकार होती लगी और इस अनायास मिले अवसर को वे हाथ से गँवाना नहीं चाहते थे। रंजना शराब के नशे में और पिछ्ले दिनों मृदुल के साथ चुदाई की कल्पनाओं से पूरी मस्त हो उठी और उसने भी अपनी बाँहें उठा कर पापा की गर्दन में डाल दी और पापा के आगोश में समा अपनी कुँवारी चूचियाँ उनकी चौड़ी छाती पर रगड़नी शुरु कर दीं। रंजना का इतना करना था कि सुदर्शन खुल कर उसके शरीर का जायका लूटने पर उतर आया। अब दोनों ही काम की ज्वाला में फुँके हुए जोश में भर कर अपनी पूरी ताकत से एक दूसरे को दबाने और भींचने लगे। तभी सुदर्शन ने सहारा देकर रंजना को अपनी गोद में बिठा लिया। रंजना एक बार तो कसमसाई और पापा की आँखों की तरफ़ देखी। तब सुदर्शन ने कहा। “आह! इस प्यारी बेटी को बचपन में इतना गोद में खिलाया है। पर इन दिनों में मैने तुम्हारी ओर ध्यान ही नहीं दिया। सॉरी, और तुम देखते-देखते इतनी जवान हो गई हो। आज प्यारी बेटी को गोद में बिठा खूब प्यार करेंगे और सारी कसर निकाल देंगे।” सुदर्शन ने बहुत ही काम लोलुप नज़रों से रंजना की छातियों की तरफ़ देखाते हुए कहा। परन्तु मस्ती और नशे में होते हुए भी रंजना इस ओर से लापरवाह नहीं रह सकी कि कमरे का दरवाजा खुला था। वह एकाएक पापा की गोद से उठी और फ़टाफ़ट उसने कमरे का दरवाजा बंद किया। दरवाजा बंद करके जैसे ही लौटी तो सुदर्शन सम्भल कर खड़ा हो चुका था और वासना की भूख उसकी आँखों में झलकने लगी। वो समझ गया कि बेटी चुदने के लिये खुब ब खुद तैयार है तो अब देर किस बात की। पापा ने खड़े-खड़े ही रंजना को पकड़ लिया और बुरी तरह बाँहों में भींच कर वे पागलो की तरह ज़ोर- ज़ोर से उसके गालों पर कस कर चुम्मी काटने लगे। गालों को उन्होने चूस-चूस कर एक मिनट में ही कशमीरी सेब की तरह सुरंग बना कर रख दिया। मस्ती से रंजना की भी यही हालत थी, मगर फिर भी उसने गाल चुसवात- चुसवाते सिसक कर कहा, “हाय छोड़ो न पापा आप यह कैसा प्यार कर रहे हैं। अब मैं जाती हूँ अपने कमरे में सोने के लिये।” पर काम लोलुप सुदर्शन ने उसकी एक न सुनी और पहले से भी ज्यादा जोश में आ कर उसने गाल मुँह में भर कर उन्हे पीना शुरु कर दिया। “ऊँऊँऊँऊँ हूँ… अब नहीं जाने दूँगा। मेरे से मेरी जवान बेटी की तड़प और नहीं देखी जाती। मैने तुम्हें अपने कमरे में तड़पते मचलते देखा। जानती हो यह तुम्हारी जवानी की तड़प है। तुम्हें प्यार चाहिये और वह प्यार अब मैं तुझे दूँगा।” मजबूरन वो ढीली पड़ गयी। बस उसका ढीला पड़ना था कि हद ही कर दी सुदर्शन ने। वहीं ज़मीन पर उसने रंजना को गिरा कर चित्त लिटा लिया और झपट कर उसके उपर चढ़ बैठा। इसी खीँचातानी में रंजना का स्कर्ट जाँघों तक खिसक गया और उसकी गोरी-गोरी तन्दुरुस्त जाँघें साफ़ दिखायी देने लगी। बेटी की इतनी लंड मार आकर्शक जाँघों को देखते ही सुदर्शन बदवास और खुँख्वार पागल हो उठा। सारे धैर्य की माँ चोद कर उसने रख दी, एक मिनट भी चूत के दर्शन किये बगैर रहना उसे मुश्किल हो गया था। अगले पल ही झटके से उसने रंजना का स्कर्ट खींच कर फ़ौरन ही उपर सरका दिया। उसका विचार था कि स्कर्ट के उपर खींचे जाते ही रंजना की कुँवारी चूत के दर्शन उसे हो जायेंगे और वो जल्दी ही उसमें डुबकी लगा कर जीभर कर उसमें स्नान करने का आनंद लूट सकेगा, मगर उसकी ये मनोकामना पूरी न हो सकी, क्योंकि रंजना स्कर्ट के नीचे कतई नंगी नहीं थी बल्कि उसके नीचे पैन्टी पहने हुये थी। चूत को पैन्टी से ढके देख कर पापा को बड़ी निराशा हुई। रंजना को भी यदि यह पता होता कि पापा उसके साथ आज ऐसा करेंगे तो शायद वह पैन्टी ही नहीं पहनती। रंजना सकपकाती हुई पापा की तरफ़ देख रही थी कि सुदर्शन शीघ्रता से एकदम उसे छोड़ कर सीधा बैठ गया। एक निगाह रंजना की जाँघों पर डाल कर वो खड़ा हो गया और रंजना के देखते देखते उसने जल्दी से अपनी पैन्ट और कमीज़ उतार दी। इसके बाद उसने बनियान और अन्डरवेयर भी उतार डाला और एकदम मादरजात नंगा हो कर खड़ा लंड रंजना को दिखाने लगा। अनुभवी सुदर्शन को इस बात का अच्छी तरह से पता था कि चुदने के लिये तैयार लड़की मस्त खड़े लंड को अपनी नज़रों के सामने देख सारे हथियार डाल देगी। इस हालत में पापा को देख कर बेचारी रंजना उनसे निगाहे मिलाने और सीधी निगाहों से लंड के दर्शन करने का साहस तक न कर पा रही थी बल्कि शर्म के मारे उसकी हालत अजीब किस्म की हो चली थी। मगर न जाने नग्न लंड में कशिश ही ऐसी थी कि अधमुँदी पलकों से वो बारबार लंड की ही ओर देखती जा रही थी। उसके सगे बाप का लंड एक दम सीधा तना हुआ बड़ा ही सख्त होता जा रहा था। रंजना ने वैसे तो बिरजु के लंड से इस लंड को न तो लंबा ही अनुभव किया और न मोटा ही मगर अपनी चूत के छेद की चौड़ाई को देखते हुए उसे लगा कि पापा का लंड भी कुछ कम नहीं है और उसकी चूत को फाड़ के रख देगा। नंगे बदन और जाँघों के बीच तनतनाते सुर्ख लंड को देख कर रंजना की चुदाई की इच्छा और भी भयंकर रूप धारण करती जा रही थी। जिस लंड की कल्पना में उसने पिछले कई महीने गुजारे थे वह साक्षात उसकी आँखों के सामने था चाहे अपने पापा का ही क्यों न हो। तभी सुदर्शन जमीन पर चित लेटी बेटी के बगल में बैठ गया। वह बेटी की चिकनी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। उसने बेटी को खड़ा लंड तो नंगा होके दिखा ही दिया अब वह उससे कामुक बातें यह सोच कर करने लगा कि इससे छोकरी की झिझक दूर होगी। फिर एक शर्माती नई कली से इस तरह के वासना भरे खेल खेलने का वह पूरा मजा लेना चाहता था। “वाह रंजना! इन वर्षों में क्या मस्त माल हो गई हो। रोज मेरी नज़रों के सामने रहती थी पर देखो इस ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया। वाह क्या मस्त चिकनी चिकनी जाँघें हैं। हाय इन पर हाथ फेरने में क्या मजा है। भई तुम तो पूरी जवान हो गई हो और तुम्हें प्यार करके तो बड़ा मजा आयेगा। हम तो आज तुम्हें जी भर के प्यार करेंगें और पूरा देखेंगें कि बेटी कितनी जवान हो गई है!” फिर सुदर्शन ने रंजना को बैठा दिया और शर्ट खोल दिया। शर्ट के खुलते ही रंजना की ब्रा में कैद सख्त चूचियाँ सिर उठाये वासना में भरे पापा को निमंत्रण देने लगीं। सुदर्शन ने फौरन उन पर हाथ रख दिया और उन्हें ब्रा पर से ही दबाने लगा। “वाह रंजना तुमने तो इतनी बड़ी -बड़ी कर लीं। तुम्हारी चिकनी जाँघों की ही तरह तुम्हारी चूचियाँ भी पूरी मस्त हैं। भई हम तो आज इनसे जी भर के खेलेंगे, इन्हें चूसेंगे!” यह कह कर सुदर्शन ने रंजना की ब्रा उतार दी। ब्रा के उतरते ही रंजना की चूचियाँ फुदक पड़ी। रंजना की चूचियाँ अभी कच्चे अमरूदों जैसी थीं। अनछुयी होने की वजह से चूचियाँ बेहद सख्त और अंगूर के दाने की तरह नुकीली थीं। सुदर्शन उनसे खेलने लगा और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। रंजना मस्ती में भरी जा रही थी और न तो पापा को मना ही कर रही थी और न ही कुछ बोल रही थी। इससे सुदर्शन की हिम्मत और बढ़ी और बोला, “अब हम प्यारी बेटी की जवानी देखेंगे जो उसने जाँघों के बीच छुपा रखी है। जरा लेटो तो।” रंजना ने आँखें बंद कर ली और चित लेट गई। सुदर्शन ने फिर एक बार चिकनी जाँघों पर हाथ फेरा और ठीक चूत के छेद पर अंगुल से दबाया भी जहाँ पैन्टी गिली हो चुकी थी। “हाय रन्जू! तेरी चूत तो पानी छोड़ रही है।” यह कहके सुदर्शन ने रंजना की पैन्टी जाँघों से अलग कर दी। फिर वो उसकी जाँघों, चूत, गाँड़ और कुंवारे मम्मों को सहलाते हुए आहें भरने लगा। चूत बेहद गोरी थी तथा वहाँ पर रेशमी झाँटों के हल्के हल्के रोये उग रहे थे। इसलिये बेटी की इस अनछुई चूत पर हाथ सहलाने से सुदर्शन को बेहद मज़ा आ रहा था। सख्त मम्मों को भी दबाना वो नहीं भूला था। इसी दौरान रंजना का एक हाथ पकड़ कर उसने अपने खड़े लंड पर रख कर दबा दिया और बड़े ही नशीले स्वर में बोला, “रंजना! मेरी प्यारी बेटी! लो अपने पापा के इस खिलौने से खेलो। ये तुम्हारे हाथ में आने को छटपटा रहा है मेरी प्यारी प्यारी जान.. इसे दबाओ आह!” लंड सहलाने की हिम्मत तो रंजना नहीं कर सकी, क्योंकि उसे शर्म और झिझक लग रही थी। मगर जब पापा ने दुबारा कहा तो हलके से उसने उसे मुट्ठी में पकड़ कर भींच लिया। लंड के चारों तरफ़ के भाग में जो बाल उगे हुए थे, वो काले और बहुत सख्त थे। ऐसा लगता था, जैसे पापा शेव के साथ साथ झाँटें भी बनाते हैं। लंड के पास की झाँटे रंजना को हाथ में चुभती हुई लग रही थी, इसलिये उसे लंड पकड़ना कुछ ज्यादा अच्छा नहीं लग रहा था। अगर लंड झाँट रहित होता तो शायद रंजना को बहुत ही अच्छा लगता क्योंकि वो बोझिल पलकों से लंड पकड़े पकड़े बोली, “ओहह पापा आपके यहाँ के बाल भी दाढ़ी की तरह चुभ रहे हैं.. इन्हे साफ़ करके क्यों नहीं रखते।” बालों की चुभन सिर्फ़ इसलिये रंजना को बर्दाश्त करनी पड़ रही थी क्योंकि लंड का स्पर्श उसे बड़ा ही मनभावन लग रहा था। एकाएक सुदर्शन ने लंड उसके हाथ से छुड़ा लिया और उसकी जाँघों को खींच कर चौड़ा किया और फिर उसके पैरों की तरफ़ उकड़ू बैठा। उसने अपना फ़नफ़नाता हुआ लंड कुदरती गिली चूत के अनछुए द्वार पर रखा। वो चूत को चौड़ाते हुए दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर काफ़ी देर तक उसे वहीं पर रगड़ता हुआ मज़ा लेता रहा। मारे मस्ती के बावली हो कर रंजना उठ-उठ कर सिसक रही थी, “उई पापा आपके बाल .. मेरी चूत पर चुभ रहे हैं.. उन्हे हटाओ.. बहुत गड़ रहे हैं। पापा अंदर मत करना मेरी बहुत छोटी है और आपका बहुत बड़ा।” वास्तव में अपनी चूत पर झाँट के बालों की चुभन रंजना को सहन नहीं हो रही थी, मगर इस तरह से चूत पर सुपाड़े के घस्सों से एक जबर्दस्त सुख और आनंद भी उसे प्राप्त हो रहा था। घस्सों के मज़े के आगे चुभन को वो भूलती जा रही थी। रंजना ने सोचा कि जिस प्रकार बिरजु ने मम्मी की चूत पर लंड रख कर लंड अंदर घुसेड़ा था उसी प्रकार अब पापा भी ज़ोर से धक्का मार कर अपने लंड को उसकी चूत में उतार देंगे, मगर उसका ऐसा सोचना गलत साबित हुआ। क्योंकि कुछ देर लंड को चूत के मुँह पर ही रगड़ने के बाद सुदर्शन सहसा उठ खड़ा हुआ और उसकी कमर पकड़ कर खींचते हुए उसने उसे उपर अपनी गोद में उठा लिया। गोद में उठाये ही सुदर्शन ने उसे पलंग पर ला पटका। अपने प्यारे पापा की गोद में भरी हुई जब रंजना पलंग तक आयी तो उसे स्वर्गीय आनंद की प्राप्ति हो रही थी। पापा की गरम साँसों का स्पर्श उसे अपने मुँह पर पड़ता हुआ महसूस हो रहा था, उसकी साँसों को वो अपने नाक के नथुनो में घुसती हुई और गालों पर लहराती हुई अनुभव कर रही थी। इस समय रंजना की चूत में लंड खाने की इच्छा अत्यन्त बलवती हो उठी थी। पलंग के उपर उसे पटक सुदर्शन भी अपनी बेटी के उपर आ गया था। जोश और उफ़ान से वो भरा हुआ तो था ही साथ ही साथ वो काबू से बाहर भी हो चुका था, इसलिये वो चूत की तरफ़ पैरों के पास बैठते हुए टाँगों को चौड़ा करने में लग गया। टाँगों को खूब चौड़ा कर उसने अपना लंड उपर को उठ चूत के फ़ड़फ़ड़ाते सुराख पर लगा दिया। रंजना की चूत से पानी जैसा रिस रहा था शायद इसीलिये सुदर्शन ने चूत पर चिकनायी लगाने की जरूरत नहीं समझी। उसने अच्छी तरह लंड को चूत पर दबा कर ज्यों ही उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश में और दबाव डाला कि रंजना को बड़े ज़ोरों से दर्द होने लगा और असहनीय कष्ट से मरने को हो गयी। दबाव पल प्रति पल बढ़ता जा रहा था और वो बेचारी बुरी तरह तड़फ़ड़ाने लगी। लंड का चूत में घुसना बर्दाश्त न कर पाने के कारण वो बहुत जोरों से कराह उठी और अपने हाथ पांव फ़ेंकती हुई दर्द से बिलबिलाती हुई वो तड़पी, “हाय! पापा अंदर मत डालना। उफ़ मैं मरी जा रही हूँ। हाय पापा मुझे नहीं चाहिये आपका ऐसा प्यार!” रंजना के यूँ चीखने चिल्लाने और दर्द से कराहने से तंग आ कर सुदर्शन ने लंड का सुपाड़ा जो चूत में घुस चुका था उसे फ़ौरन ही बाहर खींच लिया। फिर उसने अंगुलियों पर थूक ले कर अपने लंड के सुपाड़े पर और चूत के बाहर व अंदर अंगुली डाल कर अच्छी तरह से लगाया। पुनः चोदने की तैयारी करते हुए उसने फिर अपना दहकता सुपाड़ा चूत पर टिका दिया और उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। हालाँकि इस समय चूत एकदम पनियायी हुई थी, लंड के छेद से भी चिपचिपी बून्दे चू रहीं थीं और उसके बावजूद थूक भी काफ़ी लगा दिया था मगर फिर भी लंड था कि चूत में घुसाना मुश्किल हो रहा था। कारण था चूत का अत्यन्त टाईट छेद। जैसे ही हल्के धक्के में चूत ने सुपाड़ा निगला कि रंजना को जोरों से कष्ट होने लगा, वो बुरी तरह कराहने लगी, “धीरे धीरे पापा, बहुत दर्द हो रहा है। सोच समझ कर घुसाना.. कहीं फ़ट .. गयी.. तो.. उफ़्फ़.. मर.. गयी। हाय बड़ा दर्द हो रहा है.. टेस मार रही है। हाय क्या करूँ।” चूँकि इस समय रंजना भी लंड को पूरा सटकने की इच्छा में अंदर ही अंदर मचली जा रही थी। इसलिये ऐसा तो वो सोच भी नहीं सकती थी कि वो चुदाई को एकदम बंद कर दे। वो अपनी आँखों से देख चुकी थी कि बिरजु का खूँटे जैसा लंड चूत में घुस जाने के बाद ज्वाला देवी को जबर्दस्त मज़ा प्राप्त हुआ था और वो उठ-उठ कर चुदी थी। इसलिये रंजना स्वयं भी चाहने लगी कि जल्दी से जल्दी पापा का लंड उसकी चूत में घुस जाये और फिर वो भी अपने पापा के साथ चुदाई सुख लूट सके, ठीक बिरजु और ज्वाला देवी की तरह। उसे इस बात से और हिम्मत मिल रही थी कि जैसे उसकी माँ ने उसके पापा के साथ बेवफ़ाई की और एक रद्दी वाले से चुदवाई अब वो भी माँ की अमानत पर हाथ साफ़ करके बदला ले के रहेगी। रंजना यह सोच-सोच कर कि वह अपने बाप से चुदवा रही है जिससे चुदवाने का हक केवल उसकी माँ को है, और मस्त हो गई। क्योंकि जबसे उसने अपनी माँ को बिरजु से चुदवाते देखा तबसे वह माँ से नफ़रत करने लगी थी। इसलिये अपनी गाँड़ को उचका उचका कर वो लंड को चूत में सटकने की कोशिश करने लगी, मगर दोनों में से किसी को भी कामयाबी हासिल नहीं हो पा रही थी। घुसने के नाम पर तो अभी लंड का सुपाड़ा ही चूत में मुश्किल से घुस पाया था और इस एक इंच ही घुसे सुपाड़े ने ही चूत में दर्द की लहर दौड़ा कर रख दी थी। रंजना जरूरत से ज्यादा ही परेशान दिखायी दे रही थी। वो सोच रही थी कि आखिर क्या तरकीब लड़ाई जाये जिससे लंड उसकी चूत में घुस सके। बड़ा ही आश्चर्य उसे हो रहा था। उसने अनुमान लगाया था कि बिरजु का लंड तो पापा के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था फिर भी मम्मी उसे बिना किसी कष्ट और असुविधा के पूरा अपनी चूत के अंदर ले ली थी और यहाँ उसे एक इंच घुसने में ही प्राण गले में फ़ंसे महसूस हो रहे थे। फिर अपनी सामान्य बुद्धि से सोच कर वो अपने को राहत देने लगी, उसने सोचा कि ये छेद अभी नया-नया है और मम्मी इस मामले में बहुत पुरानी पड़ चुकी है। चोदू सुदर्शन भी इतना टाईट व कुँवारा छेद पा कर परेशान हो उठा था मगर फिर भी इस रुकावट से उसने हिम्मत नहीं हारी थी। बस घबड़ाहट के कारण उसकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी इसलिये वो भी उलझन में पड़ गया था और कुछ देर तक तो वो चिकनी जाँघों को पकड़े पकड़े न जाने क्या सोचता रहा। रंजना भी साँस रोके गर्मायी हुई उसे देखे जा रही थी। एकाएक मानो सुदर्शन को कुछ याद सा आ गया हो वो एलर्ट सा हो उठा, उसने रंजना के दोनों हाथ कस कर पकड़ अपनी कमर पर रख कर कहा, “बेटे ! मेरी कमर ज़रा मजबूती से पकड़े रहना, मैं एक तरकीब लड़ाता हूँ, घबड़ाना मत।” रंजना ने उसकी आज्ञा का पालन फ़ौरन ही किया और उसने कमर के इर्द गिर्द अपनी बाँहें डाल कर पापा को जकड़ लिया। वो फिर बोला, “रंजना ! चाहे तुम्हे कितना ही दर्द क्यों न हो, मेरी कमर न छोड़ना, आज तुम्हारा इम्तिहान है। देखो एक बार फाटक खुल गया तो समझना हमेशा के लिये खुल गया।” इस बात पर रंजना ने अपना सिर हिला कर पापा को तसल्ली सी दी। फिर सुदर्शन ने भी उसकी पतली नाज़ुक कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ा और थोड़ा सा बेटी की फूलती गाँड़ को उपर उठा कर उसने लंड को चूत पर दबाया तो, “ओह! पापा रोक लो। उफ़ मरी..” रंजना फिर तड़पाई मगर सुदर्शन ने सुपाड़ा चूत में अंदर घुसाये हुए अपने लंड की हरकत रोक कर कहा, “हो गया बस, मेरी इतनी प्यारी बेटी। वैसे तो हर बात में अपनी माँ से प्रतियोगिता करती हो और अभी हार मान रही हो। जानती हो तुम्हारी माँ बोल-बोल के इसे अपनी वाली में पिलवाती है और जब तक उसके भीतर इसे पेलता नहीं सोने नहीं देती। बस। अब इसे रास्ता मिलता जा रहा है। लो थोड़ा और लो..” यह कह सुदर्शन ने उपर को उठ कर मोर्चा संभाला और फिर एकाएक उछल कर उसने जोरों से धक्के लगाना चालू कर दिया। इस तरह से एक ही झटके में पूरा लंड सटकने को रंजना हर्गिज़ तैयार न थी इसलिये मारे दर्द के वो बुरी तरह चीख पड़ी। कमर छोड़ कर तड़पने और छटपटाने के अलावा उसे कुछ सुझ नहीं रहा था, “मरी… आ। नहीं.. मरी। छोड़ दो मुझे नहीं घुसवाना… उउफ़ मार दिया। नहीं करना मुझे मम्मी से कॉंपीटिशन। जब मम्मी आये तब उसी की में घुसाना। मुझे छोड़ो। छोड़ो निकालो इसे .. आइइई हटो न उउफ़ फ़ट रही है.. मेरी आइई मत मारो।” पर पापा ने जरा भी परवाह न की। दर्द जरूरत से ज्यादा लंड के यूँ चूत में अंदर बाहर होने से रंजना को हो रहा था। बेचारी ने तड़प कर अपने होंठ अपने ही दांतों से चबा लिये थे, आँखे फ़ट कर बाहर निकलने को हुई जा रही थीं। जब लंड से बचाव का कोई रास्ता बेचारी रंजना को दिखायी न दिया तो वो सुबक उठी, “पापा ऐसा प्यार मत करो। हाय मेरे पापा छोड़ दो मुझे.. ये क्या आफ़त है.. उफ़्फ़ नहीं इसे फ़ौरन निकाल लो.. फ़ाड़ डाली मेरी । हाय फ़ट गयी मैं तो मरी जा रही हूँ। बड़ा दुख रहा है । तरस खाओ आहह मैं तो फँस गयी..” इस पर भी सुदर्शन धक्के मारने से बाज़ नहीं आया और उसी रफ़्तार से जोर जोर से धक्के वो लगाता रहा। टाईट व मक्खन की तरह मुलायम चूत चोदने के मज़े में वो बहरा बन गया था। पापा के यूँ जानवरों की तरह पेश आने से रंजना की दर्द से जान तो निकलने को हो ही रही थी मगर एक लाभ उसे जरूर दिखायी दिया, यानि लंड अंदर तक उसकी चूत में घुस गया था। वो तो चुदवाने से पहले यही चाहती थी कि कब लंड पूरा घुसे और वो मम्मी की तरह मज़ा लूटे। मगर मज़ा अभी उसे नाम मात्र भी महसूस नहीं हो रहा था। सहसा ही सुदर्शन कुछ देर के लिये शांत हो कर धक्के मारना रोक उसके उपर लेट गया और उसे जोरों से अपनी बाँहों में भींच कर और तड़ातड़ उसके मुँह पर चुम्मी काट काट कर मुँह से भाप सी छोड़ता हुआ बोला, “आह मज़ा आ गया आज, एक दम कुँवारी चूत है तुम्हारी। अपने पापा को तुमने इतना अच्छा तोहफ़ा दिया है। रंजना मैं आज से तुम्हारा हो गया।” तने हुए मम्मों को भी बड़े प्यार से वो सहलाता जा रहा था। वैसे अभी भी रंजना को चूत में बहुत दर्द होता हुआ जान पड़ रहा था मगर पापा के यूँ हल्के पड़ने से दर्द की मात्रा में कुछ मामूली सा फ़र्क तो पड़ ही रहा था और जैसे ही पापा की चुम्मी काटने, चूचियाँ मसलने और उन्हे सहलाने की क्रिया तेज़ होती गयी वैसे ही रंजना आनंद के सागर में उतरती हुई महसूस करने लगी। अब आहिस्ता आहिस्ता वो दर्द को भूल कर चुम्मी और चूची मसलायी की क्रियाओं में जबर्दस्त आनंद लूटना प्रारम्भ कर चुकी थी। सारा दर्द उसे उड़न छू होता हुआ लगने लगा था। सुदर्शन ने जब उसके चेहरे पर मस्ती के चिन्ह देखे तो वो फिर धीरे-धीरे चूत में लंड घुसेड़ता हुआ हल्के-हल्के घस्से मारने पर उतर आया। अब वो रंजना के दर्द पर ध्यान रखते हुए बड़े ही आराम से उसे चोदने में लग गया। उसके कुँवारे मम्मो के तो जैसे वो पीछे ही पड़ गया था। बड़ी बेदर्दी से उन्हे चाट-चाट कर कभी वो उन पर चुम्मी काटता तो कभी चूची का अंगूर जैसा निपल वो होंठों में ले कर चूसने लगता। चूची चूसते-चूसते जब वो हाँफ़ने लगता तो उन्हे दोनों हाथों में भर कर बड़ी बेदर्दी से मसलने लगता था। निश्चय ही चूचियों के चूसने मसलने की हरकतों से रंजना को ज्यादा ही आनंद प्राप्त हो रहा था। उस बेचारी ने तो कभी सोचा भी न था कि इन दो मम्मों में आनंद का इतना बड़ा सागर छिपा होगा। इस प्रथम चुदाई में जबकि उसे ज्यादा ही कष्ट हो रहा था और वो बड़ी मुश्किल से अपने दर्द को झेल रही थी मगर फिर भी इस कष्ट के बावजूद एक ऐसा आनंद और मस्ती उसके अंदर फ़ूट रही थी कि वो अपने प्यारे पापा को पूरा का पूरा अपने अंदर समेट लेने की कोशिश करने लगी। क्योंकि पहली चुदाई में कष्ट होता ही है इसलिये इतनी मस्त हो कर भी रंजना अपनी गाँड़ और कमर को तो चलाने में अस्मर्थ थी मगर फिर भी इस चुदाई को ज्यादा से ज्यादा सुखदायक और आनन्ददायक बनाने के लिये अपनी ओर से वो पूरी तरह प्रयत्नशील थी। रंजना ने पापा की कमर को ठीक इस तरह कस कर पकड़ा हुआ था जैसे उस दिन ज्वाला देवी ने चुदते समय बिरजु की कमर को पकड़ रखा था। अपनी तरफ़ से चूत पर कड़े धक्के मरवाने में भी वो पापा को पूरी सहायता किये जा रही थी। इसी कारण पल प्रतिपल धक्के और ज्यादा शक्तिशाली हो उठे थे और सुदर्शन जोर जोर से हाँफ़ते हुए पतली कमर को पकड़ कर जानलेवा धक्के मारता हुआ चूत की दुर्गति करने पर तुल उठा था। उसके हर धक्के पर रंजना कराह कर ज़ोर से सिसक पड़ती थी और दर्द से बचने के लिये वो अपनी गाँड़ को कुछ उपर खिसकाये जा रही थी। यहाँ तक कि उसका सिर पलंग के सिरहाने से टकराने लगा, मगर इस पर भी वो दर्द से अपना बचाव न कर सकी और अपनी चूत में धक्कों का धमाका गूँजता हुआ महसूस करती रही। हर धक्के के साथ एक नयी मस्ती में रंजना बेहाल हो जाती थी। कुछ समय बाद ही उसकी हालत ऐसी हो गयी कि अपने दर्द को भुला डाला और प्रत्येक दमदार धक्के के साथ ही उसके मुँह से बड़ी अजीब से दबी हुई अस्पष्ट किलकारियाँ खुद-ब-खुद निकलने लगीं। “ओह पापा अब मजा आ रहा है। मैने आपको कुँवारी चूत का तोहफ़ा दिया तो आप भी तो मुझे ऐसा मजा देकर तोहफ़ा दे रहे हैं। अब देखना मम्मी से इसमें भी कैसा कॉंपीटिशन करती हूँ। ओह पापा बताइये मम्मी की लेने में ज्यादा मजा है या मेरी लेने में?” सुदर्शन रंजना की मस्ती को और ज्यादा बढ़ाने की कोशिश में लग गया। वैसे इस समय की स्तिथी से वो काफ़ी परिचित होता जा रहा था। रंजना की मस्ती की ओट लेने के इरादे से वो चोदते चोदते उससे पूछने लगा, “कहो मेरी जान.. अब क्या हाल है? कैसे लग रहे हैं धक्के.. पहली बार तो दर्द होता ही है। पर मैं तुम्हारे दर्द से पिघल कर तुम्हें इस मजे से वँचित तो नहीं रख सकता था न मेरी जान, मेरी रानी, मेरी प्यारी।” उसके होंठ और गालों को बुरी तरह चूसते हुए, उसे जोरों से भींच कर उपर लेटे लेटे ज़ोरदार धक्के मारता हुआ वो बोल रहा था, बेचारी रंजना भी उसे मस्ती में भींच कर बोझिल स्वर में बोली, “बड़ा मज़ा आ रहा है मेरे प्यारे सा…. पापा, मगर दर्द भी बहुत ज्यादा हो रहा है..” फ़ौरन ही सुदर्शन ने लंड रोक कर कहा, “तो फिर धक्के धीरे धीरे लगाऊँ। तुम्हे तकलीफ़ में मैं नहीं देख सकता। तुम तो बोलते-बोलते रुक जाती हो पर देखो मैं बोलता हूँ मेरी सजनी, मेरी लुगाई।” ये बात वैसे सुदर्शन ने ऊपरी मन से ही कही थी। रंजना भी जानती थी कि वो मज़ाक के मूड में है और तेज़ धक्के मारने से बाज़ नहीं आयेगा, परन्तु फिर भी कहीं वो चूत से लंड न निकाल ले इस डर से वो चीख पड़ी, “नहीं.. नहीं।! ऐसा मत करना ! चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाये, मगर आप धक्कों की रफ़्तार कम नहीं होने देना.. इतना दर्द सह कर तो इसे अपने भीतर लिया है। आहह मारो धक्का आप मेरे दर्द की परवाह मत करो। आप तो अपने मन की करते जाओ। जितनी ज़ोर से भी धक्का लगाना चाहो लगा लो अब तो जब अपनी लुगाई बना ही लिया है तो मत रुको मेरे प्यारे सैंया.. मैं.. इस समय सब कुछ बर्दाश्त कर लूँगी.. अहह आई रिइइ.. पहले तो मेरा इम्तिहान था और अब आपका इम्तिहान है। यह नई लुगाई पुरानी लुगाई को भुला देगी।”

    singhnishakanpur

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    Desi threesome

    Such threesomes where you have least expectation and if you get this which you did not imagine in your wild dreams ever is like a dream come true. Such enjoyment is the real enjoyment where there is no compulsion and restriction by the other party. Their only requirement is explore the maximum and enjoy the given time at fullest.

    abirpooja

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    Bhabhi on tower

    Bhabhi was not getting signal properly from old tower, so she decided to connect her device with fresh and young tower and i hope she might have got proper signal in her device. Such bhabhi’s if their respective husbands let her to explore all the towers they would not mind to go for that as they could check the stamina and power of all the fresh towers. :) 

    singhnishakanpur

    Desi bhabhi fucked in pink Saree…

    harddick21blog

    Desi Kaand

    When is see such videos on social media, i feel like i should kill those bastards who are doing such stuff to prove their masculinity. Guys, if you are a real man then please make your own video with your face and put it on social media then only you can be able to understand what one has to go after such posting on social media. ?? This is weird and am totally against this. 

    vrajseema

    Seema enjoing on top

    rashmi sucking her hubbys cock and stay lubricated

    #Seema#Vraj#Swap#

    #Lonavla#Love#fun#

    harddick21blog

    Threesome with two female

    सबसे पहले मैं अपना परिचय देती हूं, मेरा नाम सविता अग्निहोत्री है। मेरी उम्र 48 साल है और मैं जयपुर से हूं। मेरा अपना बिज़नस है जो पिछले दो सालों से बहुत अच्छा चल रहा है। महीने के 2 लाख रुपये तक बच जाते हैं। पिछले 4 साल से मेरे हस्बैंड मेरे साथ नहीं रहते।

    आप आपको अपने बेटे का परिचय देती हूँ, उसका नाम वरुण अग्निहोत्री है, उसकी उम्र 24 साल है और वो नॉएडा में एक सॉफ्टवेयर क बात करीब एक महीने पहले की है जब वो जयपुर आया था। उसके जाने के बाद में उसके कमरे में सफाई करने गयी तो मुझे वहाँ पे एक डायरी मिली जो वरुण की व्यक्तिगत डायरी थी, उसमें वो सारी बातें लिखता था। मैंने उस डायरी को पढ़ना शुरू किया तो हैरान रह गयी। उसने उसमें अपने सेक्स के किस्से लिखे हुए थे। सबसे ज्यादा हैरानी तो मुझे तब हुई जब उसने एक पेज पे मेरे बारे में लिखा हुआ था।

    पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया और फिर सोचा इस उम्र में हो सकता है कि ऐसा ही होता हो और मैंने माँ बेटे के बीच में सेक्स संबंध के बारे में पढ़ना शुरू किया और मुझे पता लगा कि यह आज कल सामान्य बात है। इस बात ने मुझे बहुत उत्तेजित किया तो मैंने सोचा क्यूँ न वरुण के बारे में और पता किया जाये।

    मैंने बाजार से एक नया सिम लिया और उसको कॉल किया जिसे उसने गलत नंबर बोल कर रख दिया। फिर मैंने उसे व्ट्सऐप मैसेज किया और सॉरी बोला गलती से फोन करने के लिए! रात को 12 बजे के आस पास उसका मैसेज आया और थोड़ी बहुत बात हुई। मैंने उसे अपना नाम स्मिता बताया।

    फिर हमारी रोज़ बातें होने लग गयी और रोज़ 2-3 घंटे बातें करते। फ़ोन पे भी बात हो जाती थी।

    एक रात हम बात कर रहे थे तो वरुण बोला- आपको हॉट चैट पसंद है? स्मिता- तुम्हारे साथ? तुम बहुत छोटे हो! वरुण- करके तो देखो! स्मिता- अच्छा ठीक है!

    वरुण- एक गेम खेलें? स्मिता- कैसा गेम? वरुण- सच और सिर्फ सच… स्मिता- ठीक है वरुण- बिना किसी रोक टोक के? स्मिता- जैसा तुम्हें पसंद हो! वरुण- टीक है, हम कुछ भी पूछ सकते हैं। स्मिता- चलो ठीक है, देखते हैं तुम कितना बता पाते हो, पहले तुम पूछो।

    वरुण- आपके साइज क्या है? स्मिता- 36डी 32 38

    स्मिता- तुम्हारा साइज क्या है? वरुण- मेरा खड़ा हुआ 8″ का है. वरुण- तुम्हें सेक्स चैट करना पसंद है? स्मिता- हाँ पसंद है अच्छा लगता है परन्तु किसी किसी के साथ, हर किसी के साथ नहीं!

    स्मिता- तुम्हें क्या ज्यादा पसंद है सेक्स चैट, सेक्स कहानी या फिर पोर्न? वरुण- मुझे सेक्स कहानियाँ बहुत पसंद है और अगर आप जैसा कोई खुले दिमाग का हो तो सेक्स चैट का मज़ा भी अलग ही है.

    वरुण- क्या तुम पोर्न देखती हो? या सेक्स स्टोरीज पढ़ती हो? और क्या ज्यादा पसंद है सेक्स स्टोरीज या पोर्न? स्मिता- मुझे सेक्स स्टोरीज ज्यादा पसंद हैं, उनमें ज्यादा एक्साईटमेंट रहता है. स्मिता- तुम्हें किस तरह की सेक्स स्टोरीज पसंद हैं? वरुण- मुझे वैसे तो सभी पसंद हैं लेकिन मुझे फॅमिली वाली स्टोरीज ज्यादा अच्छी लगती हैं जैसे कि देवर भाभी, मामी भांजा, चाची भतीजा…

    वरुण- तुम्हें किस तरह की सेक्स स्टोरीज पसंद हैं? स्मिता- मैंने अभी तक तो ज्यादा नहीं पढ़ी है मैंने नौकरानी-मालिक, दोस्त की बहन, माँ और कुछ रिश्तों में सेक्स स्टोरीज भी पढ़ी हैं माँ-बेटे, देवर-भाभी, मामी-भांजा, चाची-भतीजा!

    स्मिता- वैसे तुम्हें देख कर लगता तो नहीं, हो तो तुम हरामी लेकिन क्या तुमने कभी सेक्स किया है? वरुण- हाँ, बहुत बार किया है!

    वरुण- तुम भी हो तो मस्तीखोर… तुम्हारे में सेक्स की कितनी आग है! स्मिता- आग तो बहुत है मेरे पति आज तक मुझे संतुष्ट नहीं कर पाए!

    स्मिता- तूने किस किस के साथ किया है? वरुण- मैंने गर्लफ्रेंड, पड़ोस वाली आंटी, और एक मम्मी की सहेली है, उसके साथ!

    वरुण- आपने किस किस के साथ किया है? स्मिता- शादी से पहले तो किसी के साथ नहीं किया लेकिन शादी के बाद पति और बॉयफ्रेंड के साथ किया है.

    स्मिता- तुमने टोटल कितनी लड़कियों के साथ किया है आज तक? वरुण- टोटल 5 लड़कियों से किया है आज तक, 3 गर्लफ्रेंड, 1 पड़ोस वाली आंटी और 1 मम्मी की सहेली!

    वरुण- तुम कितने लण्ड से चुद चुकी हो? स्मिता- पति का मिला कर या उसके अलावा? वरुण- पति का मिला कर! स्मिता- पति का मिला कर टोटल 17… एक पति और 16 मेरे यार! वरुण- यार बुरा नहीं मानना लेकिन तुम तो एकदम चुदक्कड़ हो!

    स्मिता- तुम्हें कैसी लड़किया पसंद हैं कमसिन या आंटी, मम्मी टाइप? वरुण- मुझे मेच्योर औरतें पसंद हैं, एकदम मोटी गांड, मोटे चूचे, चुदने में एक्सपर्ट, वो जानती हैं उनको एक आदमी से क्या चाहिए! मेरी गर्लफ्रेंड बहुत नाटक करती थी, टच भी नहीं करने देती थी लेकिन मम्मी की सहेली एकदम चुदक्कड़, हमेशा तैयार रहती थी!

    वरुण- तुम्हें कैसे लड़के पसंद हैं? स्मिता- मुझे ज्यादा उम्र के लड़के पसंद नहीं हैं, लड़के 24-27 साल तक के हो, लण्ड मोटा और लम्बा ताकि चूसने में भी मज़ा आये और चुदने में भी!

    स्मिता- तुम्हें औरतों में क्या ज्यादा पसंद है चूचे या गांड? वरुण- मुझे औरटों की मोटी गांड बहुत पसंद है, हमेशा मसलने का मन करता है.

    वरुण- तुमने कितना बड़ा लण्ड ट्राई किया हुआ है? स्मिता- 9″… एक मेरा बॉयफ्रेंड था उसका बहुत लम्बा एंड मोटा था. उसके साथ करीब 3 महीने तक चला था मेरा!

    स्मिता- तुम्हारा बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस क्या था आज तक का? वरुण- मेरा बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस मम्मी की सहेली के साथ था. मुझे पता था कि वो चुदक्कड़ है, मेरा उनके घर आना जाना भी था, एक दिन उनकी सीडी कंप्यूटर में अटक गयी थी तो उसने मुझे बुलाया और बोली- सीडी अटक गयी है निकाल दो. थोड़ी मेहनत करने के बाद सीडी चल गयी. जब चली तो पता लगा कि वो पोर्न मूवी थी. मैं पोर्न देखने लगा तभी मुझे अहसास हुआ कि आंटी का हाथ मेरे लण्ड पे है और वो पकड़ के बोली ‘एकदम मर्द है… चल मुझे स्वर्ग की सैर करवा दे!’ फिर हम एक दूसरे के साथ सेक्स में मस्त हो गए. हमें पता ही नहीं लगा कि उनकी बेटी जो मेरे से थोड़ी छोटी थी, आकर गेट पे खड़ी हो गयी और चिल्लायी ‘मम्मी, ये क्या कर रहे हो?’ हमने फटाफट कपड़े पहने और उससे बात करने लगे. आंटी ने उसे समझाया कि उसके पापा आंटी को सन्तुष्ट नहीं कर पाते. उसका रिप्लाई बहुत शॉकिंग था, वो बोली ‘ठीक है, आपकी लाइफ है जैसे मर्ज़ी एन्जॉय करो… लेकिन मुझे अपने बॉयफ्रेंड के साथ मस्ती करनी होगी तो मैं घर पर लेकर आऊँगी. और जाते जाते मुझे आँख मारती हुई बोली ‘नाईस कॉक!’

    वरुण- स्मिता, तुम्हारा बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस क्या था आज तक का? स्मिता- मेरे बॉयफ्रेंड ने पार्टी दी थी. वो एक पूल पार्टी थी. मुझे पता नहीं था कि वहां ड्रेस कोड है, मैं मिनी पहन कर चली गयी, लेकिन ड्रेस कोड स्विमिंग कोस्टयूम था जो मेरे पास था नहीं. सभी तो वहां पे स्विमिंग कोस्टयूम पहने हुए थे! एक कपल बोले ‘बिना स्विमिंग कोस्टयूम के पूल में नहीं जा सकते!’ एक लड़की बोली ‘स्मिता तुम नंगी हो जाओ, फिर तुम जा सकती हो.’ तभी मेरा बॉयफ्रेंड पीछे से आया और मेरे चुच्चे दबाने लगा. मेरे कान में बोला ‘क्या मैं तुम्हें नंगी कर सकता हूँ, सबको जलाना चाहता हूँ कि मेरी गर्लफ्रेंड कितनी हॉट है.’ मैंने भी बोला ‘तुम मुझे नंगी करो, मैं तुम्हें करती हूँ.’ फिर वो बोला ‘यो बेबी…सेक्स इन द पूल! मेरा फिगर देख कर सबके होश उड़ गए फिर हम सबने कपड़े उतार दिए और हम लोगों ने पूल में ही सेक्स किया. सब लोग मुझे चोदने की फिराक में थे, उस रात हमने 3 बार सेक्स किया.

    स्मिता- तुम्हें सेक्स में कौन सी पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद है? वरुण- डोगी स्टाइल! वरुण- तुम्हें सेक्स में कौनसी पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद है स्मिता- यही डोगी स्टाइल!

    स्मिता- आखिरी बार कब और किसके साथ सेक्स किया था तुमने? वरुण- आज मॉर्निंग में पड़ोस वाली आंटी के साथ जब उसका पति वॉक पे गया हुआ था!

    वरुण- तुम्हारी कोई ऐसी सेक्स की इच्छा जो अभी तक पूरी ना हुई हो और तुम पूरा करना चाहते हो? स्मिता- मैं रात को समुद्रतट पर सेक्स करना चाहती हूँ पूरी रात!

    स्मिता- तुम बताओ कोई ऐसी औरत जिसको तुम चोदना चाहते हो लेकिन अभी तक चोद नहीं पाए हो, तुम्हारी सपनों की रानी? वरुण- मैं अपनी माँ को चोदना चाहता हूँ. स्मिता- क्या वो तुम्हारी सौतेली माँ है? वरुण- नहीं, वो मेरी सगी माँ है.

    वरुण- स्मिता, तुम बताओ क्या तुम्हें लगता है कि ये गलत है ऐसा सोचना? स्मिता- मैं जवाब देने से पहले तुम्हारे और तुम्हारे माँ के बारे में जानना चाहूँगी. स्मिता- तुम्हारी माँ का नाम क्या है? वरुण- उसका नाम सविता अग्निहोत्री है. स्मिता- उम्र क्या है तुम्हारी माँ की? वरुण- लगभग 48 साल! स्मिता- क्या करती है तुम्हारी माँ? वरुण- उसकी अपनी शॉप है, खुद का बिजनेस है! स्मिता- किस चीज का बिजनेस है? वरुण- मॉडर्न लौन्ज़री शॉप!

    स्मिता- तुम्हारे पापा क्या करते हैं और वो कहाँ रहते हैं? वरुण- पापा हमारे साथ नहीं रहते, वो 3 साल पहले मम्मी को छोड़ कर चले गए थे, उसके बाद वो कभी लौट कर नहीं आये. स्मिता- आई एम् सॉरी! अच्छा ये बताओ, तुम्हें तुम्हारी माँ में क्या अच्छा लगता है जो तुम्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है? वरुण- वैसे तो वो पूरी ही माल है, लेकिन मुझे उसके मोटे मोटे चूचे और मस्त गोल गोल मोटी गांड बहुत पसंद है!

    स्मिता- सबको औरत में चूचे और गांड ही पसंद होती है, तुम्हारी माँ में क्या ज्यादा मस्त है उसकी गांड या चूचे? वरुण- मुझे और बाकी सबको भी उसकी गांड ही पसंद है, जब वो चलती है तो उसके भरे हुए चूतड़ क्या मस्त हिलते हैं, पागल कर देते हैं। स्मिता- बाकी सब कौन? वरुण- मेरे दोस्त लोग। स्मिता- तुम्हें कैसे पता कि तुम्हारे दोस्तों को तुम्हारी माँ की गांड पसंद है? वरुण- मैंने सुना है उन लोगों को बात करते हुए… और एक बार की बात है, मैं अपने एक दोस्त के साथ दारू पी रहा था, हम दोनों ने काफी पी ली थी। फिर हम लड़की की बातें करने लगे तब वो बोला कि तेरी माँ जैसी मस्त औरत कोई नहीं है। क्या तूने साली की गांड देखी है जब वो चलती है, लंड में आग लगा देती है। मैं सोच भी नहीं सकता कितनी चुदक्कड़ होगी तेरी माँ।

    स्मिता- बहुत हॉट लगती है तेरी माँ! अच्छा यह बता कि तूने अपनी मॉम को नंगी देखा है? वरुण- हाँ, दो बार देखा है. स्मिता- कैसे? वरुण- पहली बार ऐसा हुआ कि मैं मम्मी के रूम में अचानक चला गया, मैंने ऐसा सोचा नहीं था कि ऐसा हो जायेगा। जैसे ही मैं अंदर गया तो देखा कि माँ शीशे के सामने नंगी खड़ी है और खुद को शीशे में निहार रही है, मेरी नज़र सीधे उसकी गांड पे गयी, क्या मस्त मोटी गांड थी. दूसरी बार तब देखा जब एक रात मैं रात को पानी पीने उठा तो देखा माँ के रूम की लाइट जल रही थी रात के 2 बजे होंगे। मेरा रूम ऊपर है और माँ का नीचे और मेरे रूम की जाली से माँ का बेड दिखता है। उस रात मैंने देखा कि मेरी माँ बेड पे नंगी लेटी हुई है और अपनी चूत को रगड़ रही है और फ़ोन पे किसी से बात कर रही है। जब मैंने यह सीन देखा तो मुझसे रहा नहीं गया और अलमारी में रखी हुई दूरबीन से मम्मी के रूम में देखा, क्या मस्त नज़ारा था माँ एकदम गर्म हो रही थी और तेज़ी से अपनी चूत रगड़ रही थी, शायद अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही होगी।

    स्मिता- तुझे कैसे पता कि वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी, क्या उसका बॉयफ्रेंड है? वरुण- मुझे पता है वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही होगी! स्मिता- कैसे? तुम्हें कैसे पता कि वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी? वरुण- मेरा एक दोस्त है, वो माँ का बॉयफ्रेंड था.

    स्मिता- तुम्हें इस बात का कैसे पता कि तुम्हारा दोस्त तुम्हारी माँ का बॉयफ्रेंड था? वरुण- यह बात भी दारू पे हुई, हम दोनों एक रात उसके घर पे दारू पी रहे थे और हम दोनों ने बहुत ज्यादा पी ली थी। मैं बोला कि यार चुदाई किये हुए बहुत दिन हो गए, बहुत मन हो रहा है, तब वो बोला ‘बुरा मत मानना तो एक बात बताऊँ?’ मैं बोला ‘बता…’ वो बोला ‘भाई, चोदने के लिए तुझे कहीं बाहर ढूंढने की क्या जरूरत है तेरी माँ है ना, बहुत बड़ी चुदक्कड़ है उसी को चोद… मज़ा आ जायेगा।’ यह बात सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने उससे पूछा ‘तुझे क्या पता कि मेरी माँ चुदक्कड़ है?’ वो बोला ‘मैं तेरी माँ का बॉयफ्रेंड था, दो महीने तक खूब चोदा है तेरी माँ को। फिर उसने मेरी माँ के मैसेज दिखाये मुझे।

    स्मिता- उससे पूछा नहीं कि कितने बॉयफ्रेंड रह चुके हैं तुम्हारी माँ के? वरुण- फिर मैंने सोचा कि क्यों ना माँ के बारे में और मालूम किया जाये और मैंने उसे और दारू पिलाई और फिर बहुत कुछ पूछा। स्मिता- तो क्या बताया कितने यार रह चुके है तेरी माँ के? वरुण- वो माँ का नौवां बॉयफ्रेंड था.

    स्मिता- और क्या पूछा, तेरी माँ को मुख सेक्स में क्या पसंद है? वरुण- उसको चूत चटवाना पसंद है और डोगी स्टाइल उसकी पसंदीदा सेक्स पोजीशन है.

    स्मिता- सही में तेरी माँ चुदक्कड़ लगती है, ये बता कि अगर तेरी माँ सच में मिल जाये तो उसको चोदेगा? फट तो नहीं जायेगी तेरी? वरुण- अगर मौका मिला तो ऐसी चूत चुदाई करुगा माँ फैन हो जायेगी मेरी, खुश कर दूँगा उसको! स्मिता- अगर एक लाइन अपनी माँ के लिए बोलगे तो क्या बोलोगे? वरुण- शी इस अ हॉट फकिंग बिच! ( वो एक गर्म चोदने लायक कुतिया है.)

    स्मिता- चल तेरी माँ को चोदने का प्लान बनाते हैं। ये बता तेरी माँ के साइज क्या हैं? वरुण- वो तो नहीं पता, बस यह पता है कि बहुत बड़े हैं। स्मिता- सबसे पहले वही पता करते हैं। वरुण- कैसे? स्मिता- तेरी माँ कैसे कपड़े पहनती है पारंपरिक जैसे साड़ी सलवार कुर्ता या आधुनिक जैसे जींस टॉप, स्कर्ट आदि? वरुण- दोनों तरह के ही पहनती है लेकिन आधुनिक ज्यादा पहनती है.

    स्मिता- अच्छा अब ध्यान से सुन, अपनी माँ को शॉपिंग पे लेकर जाना और कुछ मॉडर्न ड्रेस दिलवाना! और जब वो उन ड्रेस को ट्राई करने जाये तो उसको छोटे साइज की ब्रा पेंटी लेकर देना और उनको भी ट्राई करने को बोलना, शायद वो मना कर दे तो जिद करना… अगर उसने ट्राई की तो वो जरूर बोलेगी क़ि ये छोटी हैं. और फिर तू बहुत बड़ी वाली लेकर जाना. वो फिर बोलेगी कि बड़ी है तब तू मैसेज करके बोलना कि माँ आपका साइज़ बता दो, मैं आपके साइज की ले आऊँगा और ट्रांसपेरेंट टाइप की ब्रा पेंटी लेना।

    वरुण- अच्छा ठीक है, वैसे मैं आज रात ही जयपुर जा रहा हूँ. अगर सब कुछ सही रहा तो कल तुम्हें मैसेज करके बताता हूँ कि माँ का क्या साइज है।

    कहानी जारी रहेगी. दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है? अपने कमेंट्स जरूर भेजें! मेरा ईमेल है: sexgurumd@gmail.com PART2 मेरी सेक्स कहानी के प्रथम भाग मेरे बेटे की डायरी: बेटे ने अपनी माँ को चोदा-1 में आपने पढ़ा कि मुझे अपने बेटे की डायरी से पता चला कि वो अपनी मॉम को यानि मुझको चोदना चाहता है. मैंने उसके मन की बात जानने के लिए उसकी फोन फ्रेंड बन कर उससे चैट की, फिर सेक्स चैट पर आकर उससे सब कुछ पूछा! अब आगे:

    वरुण सुबह जयपुर पहुँच गया और अपनी माँ से मिला, दोपहर के टाइम उसने अपनी माँ से कहा- माँ मैं आपके लिए मॉडर्न ड्रेसेस लेना चाहता हूँ, क्या आप मेरे साथ चलोगी? सविता- बेटा शॉपिंग तो करनी थी मुझे, लेकिन मैं अकेले चली जाऊँगी, तू कहाँ परेशान होगा लेडीज की शॉपिंग में। वरुण- माँ, परेशानी की क्या बात है, मुझे अच्छा लगेगा आपको शॉपिंग करवा कर!

    सविता- बेटा मुझे अंडर गारमेंट्स भी लेने हैं, तुझे अजीब लगेगा. वरुण यह सुन कर सोचने लगा कि यह तो लॉटरी लग गयी, फिर बोला- माँ, हम पहले कपड़े ले लेंगे फिर आप अपने अंडर गारमेंट्स ले लेना! सविता- ठीक है, ऐसा कर लेंगे।

    फिर हम शॉपिंग करने एक मॉल में गए और वहाँ पर हमें एक सेल्समैन ने अटेंड किया और उसने बहुत अच्छे मॉडर्न ड्रेसेस दिखाई जो हमे पसंद आयी, करीब 12 ड्रेसेस के साथ माँ को पहन कर देखने के लिए भेज दिया और फिर:

    वरुण- मुझे मैडम के लिए ब्रा पेंटी देखनी है, कुछ अच्छी ब्रा पेंटी दिखा दीजिये! सेल्समैन- सर, हमारे पास एकदम अलग कुछ हट कर ब्रा पेंटी हैं, जो मैडम पर बहुत अच्छे लगेंगी. वरुण- दिखाओ?

    सेल्समैन- मैडम का साइज क्या होगा? वरुण- साइज का तो आईडिया नहीं है, तुम्हें क्या लगता है क्या साइज होगा? सेल्समैन- सर, मेरे हिसाब से 36 आयेगा मैडम को! वरुण- एक काम करो 34 निकाल दो, मैं ट्राई करवा लेता हूँ.

    एक सेट लाकर ट्राई रूम के पास जाकर वरूण बोला- माँ, आपको कैसी लग रही है ड्रेसेस? सविता- बहुत अच्छी हैं. वरुण- माँ, कुछ और ड्रेसेस हैं, ट्राई कर लो, आज सारी शॉपिंग मेरी पसंद से करेंगे! सविता- ओके! मैंने ट्राई रूम से हाथ बहार निकाल कर वरुण से ब्रा पेंटी पकड़ ली!

    ब्रा पेंटी ट्रायल रूम में लेने के बाद माँ ने यानि मैंने मैसेज किया- ये मैं अपने आप ले लूंगी. वरुण- आपने अभी बोला है कि आज शॉपिंग मेरी पसंद से होगी, वैसे आपको पसंद नहीं है क्या? सविता- अच्छी है लेकिन छोटी है, फिट नहीं आ रही है. वरुण- ओके माँ, मैं बड़ा साइज लेकर आता हूँ।

    फिर मैं सेल्समेन के पास गया और बोला- छोटी है, बड़े साइज की दो. सेल्समैन- सर, मैंने तो कहा ही था 36 आएगी। वरुण- हाँ, तुम सही कह रहे हो। तुम 38 साइज का दे दो!

    वरुण बड़ी ब्रा पेंटी लेकर ट्राई रूम के दरवाजे पर आया और बोला- माँ, ये बड़े साइज का ट्राई करो! सविता- ये बहुत बड़ा है इससे छोटा चाहिए, तुम सेल्समेन को बोल दो, वो दे देगा! वरुण- माँ, आप अपना साइज़ मुझे मैसेज कर दो, मैं उसी साइज का ले आऊँगा! सविता- मैं खुद ले लूंगी.

    वरुण- माँ आपने कहा था शॉपिंग मेरी पसंद से होगी, आप अपना साइज दो, मैं लेकर आता हूँ! सविता- ठीक है, 36डी 32 38

    फिर हमने इस साइज की 3 ब्रा पेंटी का सेट लिया और फिर हम घर के लिए निकल गए। जब हम कार में थे तो मेरे बेटे ने मुझसे पूछा- माँ शॉपिंग करके कैसा लगा? सविता- अच्छा लग रहा है!

    फिर हमने थोड़ी जनरल बातें की और घर पे आ गए.

    और घर आकर सबसे पहले वरूण स्मिता को मैसेज किया- धन्यवाद स्मिता, माँ को शॉपिंग पे लेकर गया था और माँ के साइज पता लग गए। आगे क्या करना है? स्मिता- अब रात को… थोड़ी लेट में अपनी माँ को मैसेज करना और पहले उनकी तारीफ करना फिर थोड़ा ओपन चैट करने की कोशिश करना। अगर कर सको तो उनके फिगर की तारीफ कर देना! फिर कोशिश करना कि ओपन चैट हो और अपने माँ के बॉयफ्रेंड बनने की बात करना। उसके बाद जितनी ज्यादा चैट कर सको उतना अच्छा!

    खाना खाने के बाद करीब 11 बजे मेरे बेटे ने मुझको मैसेज किया और बोला- आप सोयी नहीं क्या? सविता- नहीं, अभी नींद नहीं आ रही है. वरुण- मुझे भी नींद नहीं आ रही है, क्या हम बातें कर सकते हैं? सविता- हाँ, क्यों नहीं! वरुण- क्या आप मेरी दोस्त बनोगी? सविता- हाँ ठीक है! वरुण- और अगर मैं दोस्ती में कुछ आपको बोल दूँ तो प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना, मैं अपने दोस्तों के साथ थोड़ा फ्रैंक हो जाता हूं. सविता- कोई प्रॉब्लम नहीं है।

    वरुण- आपको शॉपिंग में क्या अच्छा लगा? सविता- सब कुछ अच्छा था, मज़ा आया शॉपिंग में। ऐसे कपड़े तो शायद मैं भी नहीं लेती, तुझे क्या अच्छा लगा? वरुण- मुझे तो आपकी ब्रा पेंटी की शॉपिंग में बहुत मज़ा आया! सविता- क्यों? वरुण- मैंने पहले कभी ऐसी शॉपिंग नहीं की वो भी एक औरत के लिए जिसके इतने मोटे चूचे और इतनी मोटी गांड हो, सॉरी माँ, लेकिन आज में अपने विचार कण्ट्रोल नहीं करना चाहता! सविता- कोई बात नहीं, आज तूने मुझे इतनी अच्छी शॉपिंग करवाई और आज तू दोस्त भी बना है। लेकिन कोशिश करो थोड़ा लिमिट में रहो!

    वरुण- माँ, आपका इतना मस्त फिगर है लड़के आपको ताड़ते नहीं हैं? सविता- बहुत ताड़ते हैं, कौन रोक सकता है उनको! वरुण- आपको किसी ने प्रपोज़ नहीं किया अभी तक? सविता- किया है… लेकिन इन सब कामों के लिए मैं बूढ़ी हो चुकी हूं. वरुण- आपको देख कर कहीं से भी नहीं लगता कि आप बूढ़ी हो। आपके चेहरे की रौनक, आपका फिगर, आपके मोटे मोटे बूब्स और गांड किसी को भी पागल कर दे! सविता- थैंक्स बेटा!

    वरुण- आपको मेरी कसम है, एक बात सच सच बताना, पापा तो चले गए अब क्या आपका सेक्स करने का मन नहीं करता? सविता- करता है… लेकिन कोई ऑप्शन नहीं है मेरे पास! वरुण- माँ, मेरी नज़र में तो आपको अपनी इच्छा पूरी करने का हक़ है, अगर आपको सेक्स करने का मन होता है तो आपको पूरा हक़ है कि आपकी बहुत अच्छे से चुदाई हो! सविता- ऐसा नहीं हो सकता, कौन मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनायेगा?

    वरुण- सच तो यह है कि अगर मेरा बस चलता तो मैं ही आपको अपनी गर्लफ्रेंड बना लेता। बाकी तो आपके ऊपर है आपको कैसा रिलेशनशिप चाहिए- लम्बे अरसे तक के लिए या सिर्फ सेक्स के लिए। मेरी तरफ से पूरी छूट है आपको! सविता- मुझे बॉयफ्रेंड बनाना नहीं आता।

    वरुण- चलो आपका पहला बॉयफ्रेंड में बनवा दूँगा लेकिन ये बताओ आपको कैसा रिलेशनशिप चाहिए? सविता- मुझे अभी कुछ ज्यादा पता नहीं, तो अभी के लिए तो बस 1-2 महीने के लिए बॉयफ्रेंड बन जाये! वरुण- आपको किस उम्र के लड़के पसंद हैं? सविता- 24-27 साल का हो! वरुण- अपना जीवन जीने के लिए तैयार हो जाओ, ऐसा बॉयफ्रेंड बनवाऊँगा कि रोज़ चुदोगी अब आप! सविता- शर्म नहीं आती ऐसी बातें बोलते हुए? वरुण- मैं तो सिर्फ बोल रहा हूँ, और आप तैयार हो जाओ चुदने के लिए!

    वरुण ने स्मिता को मैसेज किया और बताया क़ि वरुण की सविता से क्या बात हुई. स्मिता- क्या बात है… तुम्हारी माँ तो चुदने के लिए तैयार बैठी है, जाओ और चोदो अपनी माँ को! वरुण- कैसे, क्या वो मुझसे चुदने के लिए मानेगी?

    स्मिता- बिल्कुल मानेगी, बस एक कदम और लेना है तुझे! एक बिल्कुल ट्रांसपेरेंट बिकिनी लेकर आ और एक लेटर लिख अपनी माँ को, कि अगर अपनी चूत की आग मिटानी है तो आज रात मेरे कमरे में आ जाना और सिर्फ ये ब्रा पेंटी पहन कर आना। एक बेटे का लंड अपनी माँ की चूत की प्रतीक्षा कर रहा है… और हो सके तो गिफ्ट देने से पहले अपनी मॉम से थोड़ी हॉट चैट कर लेना वरुण- थैंक यू स्मिता!

    शाम को करीब 6 बजे: वरुण- कैसा लग रहा है माँ? सविता- अच्छा लग रहा है, तूने सोये हुए अरमान जगा दिए, क्या प्लान है तेरा कब बनवा रहा है मेरा बॉयफ्रेंड? वरुण- अच्छा बॉयफ्रेंड बनवाने में थोड़ा टाइम लगेगा लेकिन अगर सिर्फ एन्जॉय करना है तो एक प्लान है मेरे पास! सविता- क्या प्लान है बेटा? वरुण- मिल कर बताऊँगा!

    9 बजे वरुण मेरे रूम में आया और बोला- माँ, आज रात का प्लान तो सेट नहीं हो पाया लेकिन आपके लिए एक गिफ्ट है, मेरे जाने के बाद आप इसे खोल कर देखना।

    जब मैंने गिफ्ट खोल कर देखा तो एक ट्रांसपेरेंट बिकिनी और एक लेटर था जिस में लिखा था: माँ, जब से जवान हुआ हूँ, तुम्हें ही चाहता हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि तुम भी बहुत चुदक्कड़ हो और चुदने के लिए तैयार हो. तो क्यूँ न मिल कर एक दूसरे की इच्छा पूरी करें! भूल जाओ कि हम माँ-बेटे हैं, बस यह याद रखो कि तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द। अगर आज की रात यादगार बनाना चाहते हो तो सिर्फ मेरी दी हुई बिकनी पहनकर मेरे आलिंगन में आ जाओ! और मैं वादा करता हूँ कि तुम्हें खुश रखूंगा। एक बेटे का लंड अपनी माँ को चोदने के लिए उत्तेजित है! आपका बेटा

    मैं तो इंतजार ही कर रही थी इस घड़ी का! रात करीब 11.30 को मैंने वरुण के कमरे का दरवाजा खटखटाया. जैसे ही वरुण ने दरवाजा खोला, मैं हैरान रह गयी, रूम फूलों और मोमबत्तियों से सजा हुआ था और बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी, यह खुशबू मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी.

    हम माँ बेटे एक दूसरे को देख रहे थे. फिर वरुण बोला- मुझे विश्वास था मॉम, कि आप आज रात आओगी मेरे कमरे में! इतना बोलते हुए उसने मुझे अपने कमरे में खींच लिया और मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और पागलों की तरह चूसने लगा।

    तभी मुझे अहसास हुआ कि उसके हाथ मेरे चूतड़ सहला रहे हैं. और धीरे-2 उसने अपने हाथों का दबाव बढ़ाना शुरू किया, मेरा बेटा वरुण अपनी मॉम यानि मेरे मोटे चूतड़ों को अपने सख्त हाथों से बहुत जोर-2 से दबा रहा था और मैं तो जैसे सातवें आसमान में थी.

    फिर वरुण ने मुझे अपने हाथों में उठाया और अपने बेड पे लिटा दिया। पूरे बेड पे फूल बिखरे हुए थे और मेरी कामुकता, मेरे अन्दर की हवस जाग चुकी थी। फिर वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे होंठों को चूसने लगा और मेरे चूचों को जोर-2 से दबाने लगा।

    मैंने भी तब तक उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया, मेरे बेटे का एकदम टाइट लंड मजबूत औज़ार की तरह लग रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे एक जानवर पैन्ट में समाया हुआ था। फिर मैंने उसको बिस्तर पे लिटाया और उसको नंगा कर दिया। अब मेरे बेटे की जांघों के बीच का वो जानवर मेरी नज़र के सामने था, मैंने उसके लंड को कस कर हाथ में पकड़ा और अपने हाथों से सहलाया.

    वरुण की सिसकारियां चालू हो चुकी थी- आआआआ… मज़ा आ रहा है। मैंने बेटे का लंड अपने मुंह में लिया, मानो वरुण तो पागल ही हो गया हो, मेरी जीभ के गर्म स्पर्श से उसका लंड और टाइट हो रहा था मानो फट ही जायेगा.

    मेरा बेटा बहुत तेज आहें भर रहा था, वो बोला- आह मॉम, आज से पहले किसी ने मेरा लंड ऐसे नहीं चूसा।

    अब वरुण ने मुझे अपने नीचे पटका और झटके से मेरे सारे कपड़े फाड़ दिए, मैं समझ चुकी थी कि आज मेरी जोरदार चुदाई होने वाली है।

    वरुण ने मुझे उल्टा किया और मेरे चूतड़ों को जोर-2 से दबाने लगा और अपने होंठों को मेरे चूतड़ पे लगा कर चूसने लगा। मैं मस्त होती जा रही थी. फिर उसने मुझे सीधी किया और मेरे मोटे-2 बूब्स को जोर-2 से चूसने लगा और अपने एक हाथ से मेरी चूत को सहला रहा था।

    अचानक उसने अपनी एक उंगली मेरी चूत में डाली, मेरी चूत पहले से ही गीली हो रही थी। फिर वरुण धीरे-2 नीचे जाने लगा मेरी चूत की तरफ। उसने अपने होंठ जैसे ही मेरी चूत पर लगाकर चूसना शुरू किया, पूरा कमरा मेरी सिस्कारियों से गूँज रहा था- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ आह… 10 मिनट उसने मेरी चूत को चूसा।

    फिर मैंने उसे चोदने का इशारा किया, मेरा इशारा पाते ही उसने अपने जानवर को मेरी कोमल सी चूत मुंह पे लगाया और एक ही झटके में पूरा अंदर डाल दिया और मेरे मुँह से बहुत तेज सिसकारी निकली- अआह… हहा… जिससे पूरा कमरे का माहौल गर्म हो गया और मेरी सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूंज रही थी और इन्ही सिसकारियों के बीच वरुण ने अपने चोदने की स्पीड बढ़ा दी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत में तूफान आ गया है। चुदाई के जोश में हमें याद ही नहीं रहा की वरुण ने कंडोम नहीं पहना है।

    आज मेरा बेटा पूरे मर्द की तरह अपने माँ की चुदाई कर रहा था। पूरा कमरा मेरी सिसकारियों से गर्म हो रहा था.

    इसी बीच मेरी जोरदार चीख निकली और मैं झड़ गयी और मैं वरुण से बोली- अपनी मॉम की चूत में अपना माल मत छोड़ना। उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मेरे मुंह में दे दिया। मैं लंड की भूखी बेटे के गीले लंड को चूसने लगी क़ि तभी उसने एक पिचकारी मेरे मुंह में ही छोड़ दी।

    फिर हम माँ बेटा एक दूसरे के बगल में लेट गए और बातें करने लगे, वो बोला- माँ, तुम जैसी मस्त औरत नहीं देखी, शक्ल से जितनी भोली हो, उतनी ही ज्यादा चुदक्कड़ हो। फिर उसने मुझे अपनी फ्रेंड स्मिता के बारे में बताया।

    तब मैंने उसे सारी सच्चाई बतायी कि इतने दिन से तू मुझसे ही बातें कर रहा था और जब तू अपनी दोस्त को बोल रहा था कि अपनी माँ को चोदने चाहता है तब तू मुझे ही बता रहा था कि तू मुझे चोदने चाहता है।

    उस रात मुझे एक स्थायी टिकाऊ बॉयफ्रेंड मिल गया, उसके बाद उस रात हमने 3 बार चुदाई की।

    singleadi

    आप सब केरल की बाढ मे व्यस्त हो गये और इधर किसी ने new album रीलिज कर दी

    pra-bha

    Sing king

    harddick21blog

    Desi Kaand

    हैलो फ्रेंड्स मेरा नाम पिंकी है, मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ. मेरा फिगर 36-30-38 का है, मैं आप सबको अपनी सच्ची चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ कि कैसे मकान मालिक ने लंड दिखा कर मुझे चोदा, मेरी चूत मारी, मेरी गांड मारी!

    दिल्ली में मेरी एक सहेली किराये पर रहती है और वो मेरे साथ कॉल सेण्टर में जॉब करने जाती है. मैं कभी कभी अपनी सहेली को बुलाने जाती हूँ, तो मैं उसके मकान मालिक से बातें कर लेती हूँ क्योंकि वो मुझसे हमेशा अच्छी बातें करता था. जबकि मेरी सहेली बताती थी कि उसका मकान मालिक बहुत ही रंगीला आदमी है. उसने अपनी किरायेदारी में रहने वाली बहुत सारी औरतों को और अपनी नौकरानी को भी चोदा है.

    मकान मालिक मुझसे भी बोलता था कि अगर किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बताना. उसके साथ मैं थोड़ी देर यूं ही इधर उधर की बातें करने के बाद अपनी सहेली के साथ ऑफिस चली जाती थी.

    मैं एक बात नोटिस करती थी कि मकान मालिक जब भी मुझसे बात करता था, तो वो मेरी चूची को देखता रहता था. चूंकि मेरी चूची की साइज़ भी बहुत बड़ी है, इसलिए मेरी चूची का ऊपर का हिस्सा और उसका साइज़ मकान मालिक को भरपूर दिखता रहता था. साथ ही मैं बहुत टाइट सलवार सूट पहनती थी, जिससे मेरे मम्मे उभरे हुए दिखते थे.

    मैं यह नहीं जानती थी कि मैं कभी मकान मालिक से चुदूँगी क्योंकि मेरा बॉयफ्रेंड मुझे बहुत अच्छे से चोदता था और मेरी चूत की खुजली मिटा देता था. मैं अपनी सहेली से बहुत बार ये बात सुनी थी कि मकान मालिक अपनी नौकरानी को चोदता है और अपनी किरायेदारों की औरतों को भी चोदता रहता है.. इससे मुझे कभी कभी लगने लगता था कि कभी लंड का टेस्ट चेंज करना हुआ तो इससे चुदने की सोचूँगी.

    एक दिन मैंने ये बात अपनी सहेली से पूछी कि क्या तुम्हारा मकान मालिक तुमको भी चोदता है? उसने बताया कि नहीं, वो उससे नहीं चुदवाती है. चूंकि मेरी सहेली का भी एक बॉयफ्रेंड था और वो भी अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाती थी.

    लेकिन उसने एक बात ऐसी कही जिससे मुझे चुदास सी चढ़ने लगी. उसने कहा कि जिस नौकरानी को वो मकान मालिक चोदता है, उसने एक बार ऐसे ही बातों बातों में बताया था कि इसका लंड बहुत मोटा और बड़ा है. इस बात से मुझे चुत में कुछ कुछ होने लगा था.

    जैसा कि मैंने बताया कि मैं जब भी अपने सहेली के रूम पर जाती थी तो उसका मकान मालिक मुझसे खूब बातें करता था. अब वो मुझसे थोड़ा खुल कर बातें भी करने लगा था. वो अपने मकान में किराये से रहने वाली औरतों के बारे में भी बातें करने लगा कि कौन कैसी है और किसका स्वभाव कैसा है.

    एक दिन मैं और मेरी सहेली शॉपिंग करने गए क्योंकि जब भी ऑफिस की छुट्टी होती है तो हम दोनों लोग शॉपिंग के लिए जाते थे.

    उस दिन मेरी सहेली का मकान मालिक ने भी बोला कि उसको भी शॉपिंग करनी है, तो वो भी अपनी वाइफ के साथ हम दोनों लोगों को भी अपने साथ लेकर शॉपिंग करने के लिए ले गया. उधर वो एक पैन्ट को ट्रायल रूम में चैक करने घुसा, मैं उधर ही खड़ी थी. तभी उसने ट्रायल रूम का गेट खोला और मुझे पैन्ट दिखाते हुए कहने लगा कि देखो कैसी लग रही है.

    तभी मेरी नजर उसकी खुली जिप पर पड़ी तो मैंने देखा कि उसका भुजंग लंड जिप से बाहर अपना गुलाबी सुपारा दिखा रहा था.

    मैंने उसके मोटे लंड को घूर कर देखा तो उसने उसी वक्त अपने लंड को सहलाया और मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद करके ट्रायल रूम में वापस घुस गया.

    इसके बाद शॉपिंग पूरी हो गई, उसने मेरी शॉपिंग का पैसा भी दे दिया था. मैंने मेरी सहेली को मैंने ये बात नहीं बताई कि उसके मकान मालिक ने मेरी शॉपिंग करवाई है. हालांकि मुझे उसके लंड दिखाने की बात से समझ आ गया था कि ये पक्का मुझे चोदने की फिराक में है.

    इसके बाद मैंने मेरी सहेली के मकान मालिक से पर बहुत दिन तक बातें की और मैं उसके साथ काफी हद तक खुल गई. एक दिन उसने मुझे अपनी दिल की बातें बताई और बोला कि वो मुझे पसंद करता है लेकिन मैंने उसकी बात को हंस कर टाल दिया.

    इसके बाद उसने मुझे एक दिन कॉफ़ी पिलाने के लिए बुलाया. हम दोनों लोग एक होटल में मिले और हम दोनों ने कॉफ़ी पीते हुए बहुत देर तक बातें की. उसने मुझसे बोला कि वो मुझे बहुत पसंद करता है और वो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है. मैं उससे बोली कि मेरा एक बॉयफ्रेंड है. उसने बोला कि वो मेरे बॉयफ्रेंड से भी ज्यादा मेरी देखभाल करेगा और मेरी सारी जरूरत पूरी करेगा.

    वो मकान मालिक वास्तव में मेरी बहुत देखभाल करता था और मेरी सारी जरूरतें पूरी करता था. जबकि मेरा बॉयफ्रेंड तो बस मुझे किस करता था या कभी कभी चोद देता था. इसके अलावा वो और कुछ नहीं करता था. साथ ही मुझे अब मकान मालिक के लम्बे लंड की बात भी याद आने लगी थी.

    मकान मालिक ने मेरी ये बात पता नहीं कैसे ताड़ ली कि मैं अपने ब्वॉयफ्रेंड से ज्यादा खुश नहीं हूँ. वो मुझसे लगातार फ़ोन पर बातें करता रहता था.. इसलिए मैं उसकी तरफ झुकती चली गई और अपने बॉयफ्रेंड से मैंने ब्रेकअप कर लिया.

    इस तरह मैं और मकान मालिक बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड बन गए. मैं अब जब भी अपनी सहेली को ऑफिस ले जाने के लिए जाती थी तो मकान मालिक मुझे अपने रूम में बुलाकर मुझे किस करता था और उसके बाद में मैं और मेरी सहेली हम दोनों लोग ऑफिस जाते थे.

    मेरी सहेली को ये बात नहीं पता थी कि मैं उसके मकान मालिक की गर्लफ्रेंड बन गई हूँ. उसके घर से जाने के बाद भी मैं और मकान मालिक हम दोनों लोग फ़ोन पर भी बातें करते रहते थे.

    एक दिन मकान मालिक ने मुझसे बोला कि वो मुझे आज शाम को शॉपिंग करवाना चाहता है. मैं भी बोली कि ठीक है. मैं अपने रूम में जाकर तैयार होने लगी. मैंने घर पर कह दिया था कि मुझे आने में देर हो जाएगी.

    मैं कुछ देर के बाद मकान मालिक के साथ उसकी कार में बैठकर शॉपिंग करने चल दी. वो अपनी कार में गाना बजा रहा था और कभी कभी वो मेरी चूची को भी दबा रहा था. हम दोनों मस्ती करते हुए कार में बैठकर शॉपिंग मॉल की तरफ जा रहे थे. मॉल में जाकर मैंने और मकान मालिक ने बहुत देर तक शॉपिंग की और जब शाम हो गई तो उसके बाद हम दोनों लोग एक दूसरे के हाथों में हाथ डाले हुए कार में आकर बैठे और बड़ी देर तक कार में चूमा-चाटी की. उस दिन उसने मेरे मम्मों को भी खूब मसला.

    उसके बाद हम दोनों लोग एक होटल में गए और वहाँ पर हम दोनों ने खाना आर्डर किया. कुछ देर बाद खाना सर्व हुआ तो हम दोनों लोग खाना खाने लगे. इसी बीच मैं मकान मालिक से बोली कि आप ड्रिंक करते हैं? वो बोले कि हां कभी कभी. मैं चुप हो गई तो उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम ड्रिंक करती हो? मैं उससे बोली कि नहीं मैं ड्रिंक नहीं करती हूँ.

    वैसे मैं अपनी सहेली के साथ ड्रिंक करती हूँ और मैं ये बात मकान मालिक को नहीं बताई क्योंकि हम दोनों को बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बने कुछ दिन ही हुए थे, इसलिए मैंने ये बात उसको नहीं बताई कि मैं शराब पीना पसंद करती हूँ.

    मैं और मकान मालिक खाना खाने के बाद होटल से बाहर आ गए और उसके बाद मकान मालिक मुझसे बोला कि और कुछ लेना है? मैं बोली कि डॉक्टर के पास चलते हैं. “क्यों?” “कुछ काम है, दवाईयां भी लेनी है.” “तुम ठीक तो हो ना?” “हाँ.. मैं ठीक हूँ.”

    मैं और मकान मालिक उनकी कार में बैठकर डॉक्टर के पास गए और वहां पर मैंने डॉक्टर से कुछ विटामिन्स की गोलियां और कुछ सीरप वगैरह लिखवा लिए क्योंकि मैं ऑफिस जाती हूँ और काम करती हूँ तो थक जाती हूँ. अब मैंने मेडिकल स्टोर से विटामिन की गोलियां लीं और कुछ सिरप भी ले लिए. इसके बाद मकान मालिक ने भी मेडिकल स्टोर से कंडोम का पैकेट ले लिया. मैंने देखा तो उसने मुझे आँख मारते हुए बोला कि ये भी ले लो, काम आता रहता है.

    हम दोनों लोग एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे और केमिस्ट भी हम दोनों लोगों को देख कर मुस्कुरा रहा था.

    इसके बाद हम दोनों लोग उधर से दवाईयाँ और कंडोम लेने के बाद मकान मालिक की कार में बैठकर घर चल दिए.

    आज मैं मकान मालिक को अपने घर में लेकर आई थी. उस समय मेरे घर में सब लोग सो रहे थे. मैं और मकान मालिक हम दोनों लोग चुपचाप मेरे बेडरूम में आ गए. हम दोनों को शॉपिंग करते करते रात हो गई थी, इसलिए थकान हो रही थी. हम दोनों बेडरूम में आकर आराम करने लगे. मैं मकान मालिक के लिए कॉफ़ी बनाकर ले आई और हम दोनों ने कॉफ़ी पी.

    इसके बाद मैं और मकान मालिक हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. मकान मालिक बोल रहा था कि मैं तुमको बहुत दिनों से चोदना चाहता था लेकिन आज तुमको चोदने का मौका मिला. मैं आज तुमको बहुत चोदूँगा और मैं आज तुम्हारी गांड भी मारूँगा.

    मैं भी गरम हो गई थी और उसके साथ चुदने का मूड बना चुकी थी.

    हम दोनों लोग एक दूसरे को होंठों पर किस करने लगे. वो मेरा सलवार सूट निकालने लगा और मैं भी उसके कपड़ों को निकालने लगी. जल्दी ही हम दोनों अधनंगे हो गए. मैं ब्रा और पेंटी में रह गई थी और वो अंडरवियर में हो गया था. उसके बाद हम दोनों लोग एक दूसरे को चिपका कर किस करने लगे. मकान मालिक मेरे चूतड़ों को दबा रहे थे और मुझे किस कर रहे थे और मैं सिस्कारियां ले रही थी.

    वो कभी कभी मेरी गांड पर बहुत जोर जोर दबा दे रहा था. इसके बाद उसने मेरी पेंटी निकाल दी और मेरी साफ़ चूत को देख कर वो मेरी चूत को चाटने लगा. वो मेरी चूत को चाटते समय थोड़ा सा ऊपर वाला हिस्सा को बहुत मसल रहा था. मैं चुदवाने के लिए एकदम मदहोश हो गई थी.

    मकान मालिक मेरी चूत को बहुत देर तक चाटता रहा और उसी दौरान मैं झड़ गई. वो मेरी चूत को झड़ने के बाद भी चाटता रहा. इसके बाद उसने मेरी गांड के छेद में भी अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा. मैं कामुक सिस्कारियां लेने लेने लगी.

    वो काफी देर तक मेरी गांड को चाटने के बाद मेरी चूची को दबाने लगा और मेरी चूची को चूसने लगा. मैं उनका सर पकड़ कर अपने मम्मों पर दबाए जा रही थी. हम दोनों लोग एक दूसरे को बड़ी बेताबी से किस करने लगे.

    मकान मालिक ने मुझसे अपना लंड चूसने के लिए बोला और मैं मकान मालिक का लंड चूसने लगी. वो बड़ी मस्ती से मुझसे अपना लंड चुसवा रहा था और कुछ देर एक बाद लंड चूसने के बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गया.

    कुछ देर यूं ही मस्ती करने के बाद मकान मालिक ने अपने लंड में कंडोम लगाया और मुझे चित्त लिटा कर अपना लंड मेरी चूत पर लगा दिया.

    मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने आँख दबाते हुए लंड को मेरी खुली चुत में पेल दिया. अब वो मुझे दबादब चोदने लगा. मैं भी गांड उठा कर उसके लम्बे और मोटे लंड से चुत चुदाई का मजा लेने लगी. हम दोनों लोग घमासान चुदाई करने लगे. मकान मालिक मुझे हचक का चोद रहा था और हम दोनों लोग मादक सिसकारियां ले रहे थे और कमरे में आह आह आह की आवाज आ रही थी.

    जिस बेदर्दी से मकान मालिक मुझे चोद रहा था, उससे मैं बहुत गरम हो गई थी और मैं उसकी पीठ पर अपने नाख़ून से नोंच रही थी.

    हम दोनों काफी देर तक चुदाई करते रहे. चूंकि लंड चुत की चुसाई के दौरान हम दोनों एक एक बार झड़ चुके थे तो जल्दी झड़ने का कोई सवाल ही नहीं था.

    हम दोनों मस्ती से एक दूसरे को किस करते हुए चुदाई का मजा ले रहे थे. मकान मालिक ने मुझे चोदते हुए रुक कर कहा- अब दूसरे तरीके से चोदूँगा.

    इसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मुझे पीछे से लंड लगा कर चोदने लगे. इस आसन में मुझे बहुत मजा आ रहा था. वो मुझे मस्ती से चोदे जा रहा था और मैं सिसकारियां लेकर गांड को पीछे धकेलते हुए उससे चुदवा रही थी. मेरे घर में सब लोग सो रहे थे, इसलिए मैं धीरे धीरे चुदवा रही थी और धीरे धीरे सिस्कारियां ले रही थी.

    काफी देर तक चुदाई करने के बाद हम दोनों झड़ गए. मकान मालिक मुझे चोदने के बाद कुछ देर बिस्तर में पड़ा रहा और इसके बाद मैंने बाहर आकर देखा कि सब सो रहे थे तो मैंने उसे जाने के लिए इशारा कर दिया और वो अपने घर चला गया.

    इसके बाद तो मैंने और मकान मालिक ने बहुत बार चुदाई का मजा लिया. कभी कभी तो मकान मालिक मुझे होटल में ले जाकर चोदता.

    एक दिन मकान मालिक ने होटल में ले जाकर मुझे दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी थी. हम दोनों ने उस दिन दो बार चुदाई का मजा लिया था. अब मकान मालिक मुझे एक फिक्स होटल में लेकर जाता है, उधर उसने सैटिंग बना रखी है. वो पहले मेरी चूत को चोदता है और फिर मेरी गांड को भी चोदता है.

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    Crazy couples think more while silent fuck

    Even we did this many times 😉

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    Desi couple in a corner for fun 

    मैं रमित हाज़िर हूँ अपनी कहानी लेकर,

    में ही पता चल गया है कि मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ और चण्डीगढ में रह रहा हूँ। और एक मेल एस्कॉर्ट्स का काम करता हूं। पिछली कहानी मेरे ही शहर की रहने वाली एक लड़की की थी। इस बार की कहानी भी मेरे और मेरी एक क्लाइंट की ही है।

    कहानी पिछले रविवार की है, छुट्टी का दिन था, मैं अपने कमरे में बैठा आराम से मूवी देख रहा था। तभी फोन बजा, मैंने कॉल रिसीव की तो उधर से एक प्यारी सुरीली आवाज सुनाई दी। थोड़ी सी बात हुई तो पता चला कि मैडम को आज रात सर्विस चाहिए, रात की कोई बुकिंग थी नहीं तो मैंने भी हाँ कर दी।

    मैडम ने अपना नाम नीतू बताया। थोड़ी देर में घर का पता भी मैसेज पर आ गया, एड्रेस गोमती नगर के एक घर का था। मैंने भी जाने की तैयारी शुरू कर दी। बैग पैक किया, फिर खुद को जैसे की नीचे और बगल के बाल वगैरह साफ किए, और थोड़ी बहुत तैयारी और भी की।

    शाम को मैं दिए हुए पते पर तय समय पर पहुंच गया। वहां पहुंच कर मैंने उसी नंबर पर वापस कॉल की, उसने फोन पर दो मिनट में आने को बोला। थोड़ी देर बाद उस मकान का दरवाजा खुला, मैं सड़क के दूसरी तरफ खड़ा था। उसने मुझे दोबारा कॉल की, मैंने दूसरी ओर से ही हाथ उठाकर इशारा किया तो उसने मुझे उस तरफ आ कर अंदर आने का इशारा किया। मैंने रोड क्रॉस की और गेट पर पहुंच गया।

    हाथों में भरी हुई लाल चूड़ियाँ, टाइट जीन्स, टॉप, गोरा रंग, एकदम भरा हुआ शरीर, 32-30-34 का फिगर… देख कर लग रहा था कि अभी कुछ दिन पहले ही शादी हुई हो, देखने में एकदम मस्त लड़की लग रही थी। उसको देखकर कुछ देर के लिए तो मैं खो सा गया था।

    अचानक से उसने चुटकी बजाकर इशारा किया, मैं तो मानो नींद से जगा। उसने अपने पीछे आने को कहा। मेरे गेट के अंदर आते ही उसने गेट लॉक किया और गार्डन एरिया से आगे बढ़ कर मकान में अंदर चलती चली गई। मैं भी एक रोबोट की तरह उसके पीछे पीछे चल रहा था।

    अंदर पहुचते ही उसने मुझे बैठने को कहा और मेरे बारे में पूछने लगी। मुझसे बातचीत करते हुए वो सभी खिड़की दरवाजे लॉक कर रही थी।

    नीतू का घर बहुत ही शानदार था। हर चीज ठीक ढंग से अपनी जगह पर थी। महँगे सजावट के सामान, महंगा सोफा, हर एक चीज अपनी अपनी कीमत बता रही थी। काफी अमीर लोग थे। उसने मुझसे चाय या ड्रिंक्स का भी पूछा लेकिन मैंने मना कर दिया।

    अब वो अपना काम खत्म कर के मेरे बगल में आ कर बैठ गई। मैंने उससे उसके और उसके परिवार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसकी शादी अभी दो हफ्तों पहले ही हुई है। उसके पति बैंक मैनेजर हैं, ससुर आर्मी से रिटायर हैं और बिज़नस करते हैं। फिलहाल बेटे की शादी की खुशी में चारों धाम की यात्रा पर गए हैं।

    उसने आगे बताया कि उसकी शादी अरेंज मैरिज है। घर वालों ने अच्छा कमाता खाता परिवार देख कर शादी कर दी। मॉडर्न फैमिली से होने के कारण उसकी एजुकेशन काफी अच्छी है और शादी से पहले उसके बॉयफ्रेंड भी थे। जिनसे उसके फिजिकल रिलेशन भी रहे थे पर परिवार की वजह से उसने सब कुछ छोड़ कर अरेंज मैरिज कर ली। पर उसे अपने पति से वो शारीरिक सुख नहीं मिला जैसा वो चाहती थी। परिवार की इज़्ज़त के लिए उसने एडजस्ट करने की सोची है। वो अपने किसी भी पुराने बॉयफ्रेंड को बुलाना नहीं चाहती क्यूँकि इससे बदनामी का भी डर रहेगा और उसकी खुद की इज़्ज़त जाने का भी। sexgurumd@gmail.com

    नीतू- आओ, अब बेडरूम में चलते हैं, आगे का प्रोग्राम वहीं करते हैं. वो मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बेडरूम में ले आई।

    क्या मस्त बड़ा बेडरूम था, राउंड बेड लार्ज साइज़, साइड में सोफा। ऐसा लग रहा था कि किसी फाइव स्टार होटल का रूम हो। नीतू- अमित यार… आज मुझे वो खुशियां दे दो जिनके लिये मैं तरस रही हूँ। आरती ने काफ़ी तारीफ की है तुम्हारी, देखते है कि आप सचमुच तारीफ के काबिल हैं या नहीं। मैं- नीतू जी, अब इसके लिए आप पहले मुझे बता दें कि आप को किस तरह का सेक्स पसंद है। आपकी फंतासी क्या है, आप सेक्स को किस नज़रिए से लेती हैं। और सबसे पहले आप अपने आप को मेरे हवाले कर दीजिए।

    नीतू- रमित, मुझे वाइल्ड सेक्स पसंद है। आरती ने मुझे बताया था कि आप मसाज करते हैं लेकिन वो फिर कभी। आज आप अपने सबसे बेस्ट तरीके से मुझे सेक्स के सारे मजे दे दो, और मैं ये दिन कभी ना भूल पाऊँ। अब आप पर है आप क्या करते हो कैसे करते हो मेरे साथ।

    अब तो बात अपनी इज़्ज़त पर आ गई थी। अब तो कुछ सबसे अलग और सबसे बेहतर करना ही था। मैंने उसे अपनी बांहों में लिया और उसके लबों पर अपने लब रख दिए. वो खुद से ही मेरे लबों को चूसने लगी. मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर चल रहे थे, मैं उन्हें सहला कर मसल कर मजा ले रहा था.

    कुछ देर बाद मैंने उसे कपड़े उतारने को बोला, मेरा इशारा पाते ही उसने अपनी जीन्स और टॉप उतार दिये, अंदर उसने ब्रांडेड ब्लैक ब्रा पैंटी पहन रखी थी। क्या ग़ज़ब का आइटम लग रही थी, दिल खुश हो गया। ऊपर से हाथों में लाल चूड़ियाँ, थोड़ी-थोड़ी सुहागरात वाली फीलिंग आ रही थी।

    अब मैंने भी देर न करते हुए अपने कपड़े उतारे और केवल अंडरवियर में रह गया। अब वो बिल्कुल मेरे नजदीक आ गई। मैंने एक हाथ उसकी कमर पर रख कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसे स्मूच करना शुरू कर दिया। स्मूच करते करते मैं उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही मसलना चालू कर दिया। उसके अंदर से हल्की हल्की उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकलनी चालू हो गई।

    थोड़ी देर में उसके शरीर से उसकी ब्रा और पैंटी अलग हो गयी और अब वो एकदम नंगी रह गई, मैंने भी अपनी अंडरवियर उतार दी। अब दो नंगे जिस्म एक दूसरे से लिपटे हुए थे। सच बताऊँ तो जन्नत वाली फीलिंग आ रही थी। हम दोनों एक दूसरे को चूमते चाटते जन्नत की सैर कर रहे थे।

    थोड़ी ही देर बाद ओरल सेक्स करने के लिए हम दोनों 69 की अवस्था में थे, उसने अपनी चूत की झांटे एकदम ताजा ताजा साफ़ की हुई थी तो उसकी चूत एकदम चिकनी, गोरी, सफेद चमकदार थी। चूत की दोनों फलक आपस में सटी हुई थी, बस एक लकीर सी नजर आ रही थी। हल्की हल्की भीनी भीनी खुशबू बिखेरती उसकी चूत माहौल को और उत्तेजक बना रही थी।

    जैसे जैसे मेरी चूत चाटने की रफ्तार बढ़ रही थी, नीतू के मुंह से निकलने वाली कामुक सीत्कार बढ़ती जा रही थी उम्म…हाँ.. अह… हहा… करो.. मजा आ रहा है… हाँ.. उम्हह…

    अचानक से नीतू मैडम का शरीर अकड़ने लगा और वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर ओरल सेक्स का मजा ले रही थी. कुछ ही देर बाद वो कटे पेड़ की तरह बिस्तर पर गिर कर निढाल हो गई। उसकी चूत ने मेरे मुँह पर गरम-गरम कामरस की बौछार कर दी जिसे मैं पूरा का पूरा चट कर गया।

    उसने अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दिया और आराम करने लगी।

    फिर मैंने उससे फ्रिज के बारे में पूछा। उसके बताते ही मैं जा कर फ्रिज से आइस ट्रे लेकर आया। अब तक नीतू भी रिलैक्स हो गई थी, मैंने उसे दुबारा से सहलाना शुरू किया। उसे सहलाते सहलाते मैं उसे दुबारा गर्म करने की कोशिश कर रहा था।

    जब उसकी हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी तो मैंने आइस ट्रे से एक आइस क्यूब लेकर उसकी चूत में डाल दिया। वो अचानक हुई इस घटना से बिल्कुल पागल सी हो गई। उसकी चूत की गर्मी से बर्फ पिघल कर बाहर आ रही थी और बर्फ की ठण्ड उसे एक अलग ही अहसास दे रही थी। बर्फ के पूरी तरह पिघलने तक वो बिल्कुल पागल सी हो गई थी।

    अब मैं उसकी चूत को चाटने लगा, वो बिस्तर पर अपने पाँव पटकने लगी थी. थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा, जो चाटने की वजह से एकदम गीली हो गई थी, और एक ज़ोर का झटका लगा दिया। लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में पूरा घुस गया।

    वो चूत पर लंड के इस अचानक हमले से एकदम से चीख पड़ी। थोड़ी देर में वो नॉर्मल हो गई और इस ताबड़तोड़ चुदाई में अपने चूतड़ उठा उठा कर पूरा साथ देने लगी। करीब 15 मिनट की धकापेल चुदाई के बीच वो 3 बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने भी अपना माल उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया। अब हम दोनों बिस्तर पर पड़े सुस्ता रहे थे। वो बहुत खुश थी और सबसे बड़ी बात वो पूरी तरह संतुष्ट थी।

    उस पूरी रात में हम लोगों ने 2 राउंड चुदाई और की और कई नई चीजें हमने ट्राई की, जिसमें उसे बहुत मज़ा आया और उसे पूरी संतुष्टि मिली।

    सुबह उसने मुझे थैंक्स बोला और मेरी पेमेंट मुझे दे दी और मैं वहां से चला आया।

    तब से लेकर अभी तक उसने मुझे कई बार बुलाया है और कई बार अपने साथ बाहर ट्रिप पर भी लेकर गई है। साथ ही साथ 2 नई क्लाइंट भी दिलाई हैं।

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    harddick21blog

    Lollypop sucking

    सभी पाठकों को मेरा नमस्कार, सलाम एवं सभी पाठिकाओं को मेरे भुजंग का प्रणाम। मेरा नाम आर्य है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मैं एक गोरा हैंडसम बंदा हूँ, मेरी हाइट 5’11” है और मेरा लंड 7″लंबा और 3″ मोटा है और उसका भी रंग हल्का सांवलापन लिए हुए है।

    दोस्तो, मेरा सेक्स से परिचय काफी कम उम्र में हो गया था और मैंने मुठ मारना पोर्न देखना तभी से चालू किया था। जब मैं पढ़ाई कर रहा था, उन्ही दिनों मेरी मौसी की छोटी बेटी जिनका नाम गौरी है, हमारे यहाँ रहने आयी। दरअसल गौरी दीदी ने उसी साल बारहवीं पास की थी और आगे की पढ़ाई के लिए हमारे यहाँ आ गयी थी। वो मुझसे बड़ी थी।

    गौरी दीदी का फिगर… दोस्तो, मैं क्या कहूँ, एकदम गुलाबी दूधिया रंग और फिगर 32″ 26″ 34″ उनकी हाइट लगभग 5’4″ है। जब वो हमारे यहाँ आयी तो उनके रहने का इंतज़ाम मेरे ही कमरे में किया गया, मैंने इसका विरोध किया क्योंकि मेरी आदत थी कि जब भी मन किया मैं लंड निकाल के हिलाने लगता। पर मेरी मम्मी ने एक नहीं सुनी, आखिर गौरी दीदी का सिंगल बेड मेरे ही कमरे में लग गया।

    जब गौरी दीदी आयी तो उन्होंने ब्लू जीन्स और वाइट शर्ट पहनी थी। उनका मस्त बदन देख मेरे अंदर का शैतान जाग गया और मैंने आँखों से ही उनको चोदना शुरू कर दिया। मुझे सबसे प्यारी चीज़ उनके लिप्स और चूतड़ लगे; उठी हुई भरी भरी 34″ की गांड।

    खैर चूँकि वो शाम को आयी थी तो जल्दी ही सब लोग खाना खा कर टीवी देखने लगे। मेरी और गौरी दी की मुलाकात कई साल बाद हुई थी, बचपन में मेरी और उनकी बहुत बनती थी; उम्र में ज्यादा फर्क न होने से हम दोनों साथ साथ खेलते थे। तो मैं और गौरी दी छत पर जा कर बचपन की बातें करने लगे।

    थोड़ी देर में उन्हें नींद आने लगी और वो बोली- चलो आर्य, सोते हैं। मैंने कहा- ठीक है. और हम दोनों कमरे में आ गए।

    दीदी बोली- मैं चेंज कर लेती हूं. और वो कपड़े ले कर बाथरूम में चली गईं।

    जब वो चेन्ज करके आयी तो मैं उन्हें देखता रह गया, उन्होंने स्कर्ट टॉप पहन रखा था। स्कर्ट जांघों तक थी तो उनके गुलाबी पैर चमक रहे थे, पैरों पर एक भी बाल नहीं एकदम चिकने भरे हुए गुलाबी सुडौल पैर। मेरी नज़र उनके चूचों पर अटक गयी; शायद उन्होंने ब्रा उतार दी थी तो उनके चलने से वो जेली की तरह हिल रहे थे, उनकी शेप देख मेरा लंड सलामी देने लगा।

    दीदी ने मुझे उन्हें घूरते पाया तो बोली- क्या देख रहे हो इतनी गौर से? मैं पहले तो हड़बड़ा गया पर जल्दी ही सँभलते हुए बोला- आप तो गज़ब की सुन्दर हो गयी हो, मोहल्ले में क़त्ल-ए-आम हो जाएगा। वो हँसने लगी और बोली- अच्छा जी, तो आप शायर भी हो गए हैं।

    वो अपने बेड पर लेट गयी और इधर उधर की बातें करते हुए उन्होंने अचानक पूछा- तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनायी या नहीं? मैंने झेंपते हुए कहा- मैं तो अभी छोटा हूँ, गर्लफ्रेंड तो बड़े लड़के बनाते हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा- जब बॉडी पर बाल उग जाये तो कोई बच्चा नहीं होता। मैंने चौंक कर उनकी तरफ देखा तो उन्होंने जल्दी से कहा- अरे, तुम्हारी भी तो दाढ़ी मूछ आ गयी हैं। खैर जल्दी ही हम दोनों सो गए।

    रात को अचानक मेरी आँख खुली तो मैं उठ कर बाथरूम की साइड जाने लगा। तभी मेरी नज़र दीदी की तरफ गयी, मेरी आँखें फटी रह गयी, नज़ारा ही ऐसा था दोस्तो! दीदी की चादर एक तरफ हो गयी थी, उनकी स्कर्ट ऊपर को चढ़ कर चूतड़ों से ऊपर खिसक गयी थी, सफ़ेद रंग की लेसेज़ वाली फैंसी पैंटी में से दो बड़े बड़े गुलाबी ख़रबूज़ झांक रहे थे। केले के तने जैसी गुलाबी जाँघें… वाह मेरी तो नींद ही उड़ गयी। मैं बाथरूम से जल्दी जल्दी लौट आया।

    दीदी ने मेरी तरफ पीठ की हुई थी, मैं पहले तो अपने बेड से उनके शानदार चूतड़ देखता रहा, फिर मैं उठा और दीदी के बेड के पास फर्श पर बैठ गया। अब दीदी के चूतड़ एकदम मेरे चेहरे के पास थे। मैंने हल्के से अपने हाथ दीदी की गांड पर रखे… ओह… क्या अहसास था… आज तक नंगा बदन सिर्फ पोर्न फिल्म में देखा था और आज असलियत में छू कर पता लगा कि क्या अहसास होता है। मेरे बदन की नसें तन गयी गर्म हो गयी.

    उधर मेरा लंड आजतक के अपने सबसे सख्त अंदाज़ में तन गया; लंड इस कदर टाइट हो गया कि मुझे दर्द होने लगा।

    अब मेरे मन में थोड़ा और पाने की लालसा हुई, मैंने पहले उठ कर दीदी के चेहरे को देखा तो पाया वो थकन से गहरी नींद में सो रही थी। मैं फिर उनकी गांड की तरफ आया और उनके एक चूतड़ पर से उनकी पैंटी की लेस पकड़ कर एक तरफ खिसकने लगा।

    तभी दीदी ने करवट ली; मेरी तो गांड ही फट गयी और मैं तुरंत अपने बेड पर आकर बैठ गया। करवट बदलने से दीदी पीठ के बल सो रही थी और अब उनकी पैंटी में छुपी हुई पाव जैसी फूली हुई चूत मुझे ललचा रही थी।

    थोड़ी देर तक स्थिति का जायज़ा लेने के बाद जब मैं आश्वस्त हुआ कि वो अब भी गहरी नींद में हैं तो मैं फिर उनके बेड के पास पहुँच गया। अब मैंने उनके पेट की तरफ से उनकी पैंटी को धीरे धीरे नीचे खिसकाया। जैसे जैसे पैंटी खिसक रही थी, मेरा दिल मेरे दिमाग में धाड़ धाड़ कर के ठोकर मार रहा था।

    जब पैंटी जांघों पर खिसक गयी तो मेरे सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ थी। दीदी की चूत भी उनके बाकी बदन की तरह गुलाबी गोरे रंग की थी। उनकी चूत ने कस कर अपने होंठ भींच रखे थे जैसे कभी उस लकीर को अलग होने का मौका ही नहीं मिला था। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था एक चिकनी फूली हुई गुलाबी चूत जैसा पोर्न में भी कभी नहीं देखा था।

    अचानक मुझे लगा कि दीदी हिल रही है। मैंने जल्दी से पैंटी ठीक की और अपने बेड पर लेट गया।

    बस तभी दीदी जाग गयी और उठ बैठी; उठते ही उन्हें अपनी हालत का अंदाज़ा हुआ और उन्होंने स्कर्ट ठीक करते हुए मेरी तरफ देखा। मैंने चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया था। उन्होंने आवाज़ दी- आर्य! तो मैंने उनकी तरफ देखा। उन्होंने पूछा- सोये नहीं अब तक तुम? मैंने कहा- मैं तो सो गया था दीदी, पर अचानक आँख खुल गयी और बेचैनी सी हो रही है। उन्होंने कहा- अच्छा रुको मै आती हूँ.

    और वो बाथरूम चली गयी। जब वो लौट कर आई तो पूछा- क्या हुआ? क्यों बेचैनी हो रही है? मैंने कहा- पता नहीं।

    वो उठ कर मेरे बेड पर आ गईं और मेरा सिर सहलाते हुए बोली- होता है यार, जब बोर्ड क्लास में आता है बंदा, तो टेंशन हो ही जाती है। मैंने कहा- अरे नहीं दीदी, मुझे पढ़ाई को लेकर बेचैनी नहीं हो रही है। वो बोली- फिर क्यों परेशान हो? मैंने कहा- छोड़िये, आपको नहीं बता सकता। वो बोली- अरे ऐसा क्या है जो मुझे नहीं बता सकते?

    मैंने कहा- दीदी, मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं एक कहानी पढ़ने लगा, बस वही कहानी पढ़ कर मैं बेचैन हो गया हूं। उन्होंने कहा- देखूँ ज़रा कौन सी कहानी है? मैंने कहा- अरे, वो आपके पढ़ने लायक नहीं है, वैसी वाली कहानी है। “कैसी वाली कहानी… क्या बोल रहे हो? मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा।”

    मैंने कहा- छोड़ो, आप सो जाओ। वो ज़िद करने लगी… कहने लगी- दिखाओ कौन सी कहानी है? मैंने कहा- ठीक है, पर आप गुस्सा मत होना और किसी को बताना मत कि मैं ऐसी कहानियाँ पढ़ता हूँ. मैं आपको वाट्सएप्प पर कहानी भेजता हूँ. वो बोली- ठीक है, भेजो।

    मैंने जल्दी से अपने फोन पर अन्तर्वासना का पेज खोला और एक भाई बहन की कहानी कॉपी कर के दीदी को भेज दी। दीदी ने कहानी पढ़नी शुरू की, जैसे जैसे वो कहानी पढ़ती जाये वैसे वैसे उनका चेहरा लाल होता जाये।

    जब उन्होंने कहानी पढ़ ली तो आँख बंद करके लेट गयी। मेरी हालात खराब हुई कि कहीं ये किसी को बता न दे। मैंने पूछा- क्या हुआ दीदी? वो कुछ नहीं बोली तो मैंने फिर पूछा। वो बोली- ये तो है ही ऐसी कहानी कि बेचैन कर दे… बेवक़ूफ़ तुम ऐसी गन्दी कहानियाँ क्यों पढ़ते हो? मैंने कहा- दीदी क्या करूँ, आदत लग गयी है, बिना पढ़े रहा नहीं जाता। दीदी ने कहा- अपने दिमाग को शांत करो और सो जाओ. इतना कह कर वो मेरी तरफ पीठ करके सोने की एक्टिंग करने लगी।

    मै समझ गया कि वो भी गर्म हो गयी हैं, मैंने कहा- दीदी, आपसे कुछ कहूँ, बुरा तो नहीं मानोगी? वो बोली- आर्य सो जाओ, बहुत रात हो गयी है। मैंने कहा- दीदी प्लीज सुन तो लो। वो वैसे ही लेटे लेटे बोली- अच्छा बोलो, क्या बात है?

    मैंने कहा- दीदी, मुझे आपको छू कर देखना है एक बार… वो एकदम से मेरी ओर पलट कर बोली- क्या मतलब? मैंने कहा- दीदी, एक आप ही हो जिससे मैं इतनी बातें कर लेता हूं, अपने दिल की बात बता लेता हूं… इसी लिए आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूँ… ज्यादा नहीं, बस एक बार ऊपर वाले दिखा दो। वो कुछ नहीं बोली और फिर दूसरी तरफ मुंह कर के लेट गयी।

    मैं लगातार मिन्नत करता रहा कि दिखा दो… दिखा दो। आखिर वो मेरी तरफ पलटी और बोली- नहीं यार, यह गलत है, हम भाई बहन हैं। मैंने कहा- दीदी, इसीलिए तो मैं चाहता हूँ कि यह बात किसी को पता न चले। हम दोनों आपस में रखेंगे ये बात और मेरा बोर्ड भी बर्बाद होने से बच जाएगा वर्ना मैं फ़ेल हो जाऊंगा. प्लीज यार दीदी, बचा लो मुझे।

    वो सोचने लगी, फिर बोली- सिर्फ ऊपर वाला देख लो, वो भी सिर्फ आज… दोबारा मत कहना। मैंने झट से कहा- पक्का। उन्होंने कहा- लाइट बंद कर दो और इधर आ जाओ। मैंने कहा- फिर देखूंगा कैसे? वो हँसी और बोली- अच्छा बाबा, आ जाओ, मैं ही आँख बंद कर लेती हूँ।

    मैंने मुस्कुराते हुए थैंक्यू कहा और उठ कर दीदी के बगल में बैठ गया। दीदी ने अपना एक हाथ सर पर रख कर आँख बंद कर ली। मैंने धीरे धीरे उनके टॉप के बटन खोलने शुरू किये पेट से चूचियों की तरफ। जब मैं धीरे धीरे ऊपर के बटन खोल रहा था तो दीदी की चूचियों का निचली गोलाई नज़र आने लगी मेरा लंड ज़बरदस्त सलामी देते हुए मेरे शॉर्ट्स में तंबू बना चुका था।

    अब मैंने दीदी के टॉप का आखिरी बटन खोल कर उनका टॉप सर की साइड से निकलना चाहा तो उनका हाथ अड़ गया। मैंने कहा- दीदी, हाथ सीधा करो। उन्होंने हाथ सीधा किया तो मैंने टॉप तुरंत उनके बदन से अलग कर दिया।

    उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी। जैसे ही उन्होंने हाथ नीचे किया तो उनका एक हाथ मेरे खड़े लंड पर पड़ा और उन्होंने चौंक कर उधर देखा। वो बोली- ये शॉर्ट्स में क्या छुपा रखा है तुमने? मैंने कुछ नहीं कहा तो वो टटोल कर देखने लगी लगी और उनका मुँह खुल गया, आश्चर्य से मेरी तरफ देखती हुई वो बोली- आर्य तुम्हारा सुसु इतना बड़ा और मोटा कैसे हो गया? डॉक्टर को दिखाया या नहीं?

    मैं हँसने लगा, मैंने कहा- दीदी, लड़कों का लंड ऐसे उम्र के साथ बड़ा और मोटा हो जाता है। तो उन्होंने कहा- पर ये इतना हार्ड क्यों हो गया है? तुम्हें दिक्कत नहीं हो रही? अभी भी उनका हाथ मेरे लंड को दबा दबा कर पकड़ कर नापने टटोलने में लगा हुआ था।

    मैंने कहा- दीदी, जब लड़का उत्तेजित हो जाता है तो उसका लण्ड ऐसे ही सख्त हो जाता है वर्ना मुलायम लण्ड चूत में कैसे जाएगा। दीदी ने बड़ी मासूमियत से पूछा- ये लण्ड और चूत क्या है? मैंने कहा- जिसे आपने हाथ में पकड़ा है, इसे लंड कहते हैं. और फिर मैंने दीदी की स्कर्ट में हाथ डाल कर उनकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही दो उंगलियों के बीच में दबाते हुए कहा- इसे चूत कहते हैं।

    दीदी के मुँह से सिसकारी निकल गयी और वो मदहोश सी आवाज़ में बोली- क्या पूरे को चूत कहते हैं? मैंने अपनी एक उंगली पैंटी के ऊपर से ही उनके छेद पर थोड़ा अंदर दबाते हुए कहा- नहीं, ये है असली चूत। दीदी का चेहरा लाल हो गया था, मैं समझ गया कि वो गर्म हो गयी हैं।

    फिर मैंने अपने हाथों को तेज़ चलते हुए उनकी दोनों चूचियाँ बारी बारी दबानी शुरू कर दी, बीच बीच में उनके चूचुकों को उंगलियों से मसल देता। दीदी लगातार ‘स्स्स स्स्स… बस करो… हो गया न स्स्स अब देख लिया न…’ बड़बड़ा रही थी और मेरे लंड और बॉल्स को मसल रही थी।

    फिर एकदम से वो उठ बैठी और मुझे अलग करते हुए कहा- तुमने ऊपर का देखने को बोला था, अब हो गया सो जाओ। मैंने कहा- दीदी, अभी तो कुछ हुआ ही नहीं, तुमने बातों में उलझा दिया। उन्होंने कहा- अब और क्या करना है? हो तो गया। मैंने कहा- अरे अभी तो तुम्हारी चूचियों को चूसना है, तुम्हारी चूत को किस करना है। वो आश्चर्य से बोली- छी… वो भी कोई किस करने की जगह है, वहाँ तो बाल ही बाल होते हैं और गन्दी होती है। मैंने कहा- पर आपके कोई बाल नहीं हैं और एकदम गोरी सी पिंक पिंक है। उन्होंने चौंकते हुए मेरी तरफ देखा- तुमने कब देख लिया कि मेरे वहाँ बाल नहीं हैं? कहीं तुमने मुझे कपड़े बदलते हुए तो नहीं… “नहीं नहीं… मतलब सोते हुए…” “ओह, तुम बहुत बदतमीज और बेशर्म हो आर्य?”

    मैंने कहा- नहीं दीदी, मैंने तो बस अंदाज़ा लगाया। पर वो ज़िद पर अड़ गयी फिर मैंने उन्हें सब बता दिया।

    उन्होंने कहा- बस अब बहुत हो गया, मुझे कपड़े पहनने दो, मुझे शर्म आ रही है। मैंने फिर मिन्नत की तो वो मुझे चूचियाँ चूसाने को तैयार हो गयी और फिर से लेट गयी।

    मैंने लपक कर उनके एक चुचे को मुँह में भर लिया और चूसने लगा, बीच बीच में मैं चूचुकों को दांतों से दबा देता तो दीदी सिसक उठती।

    बारी बारी दोनों चूचियों को चूसने के बाद मैंने चूचियों की निचली गोलाइयों को जीभ से चाटना शुरू किया. दीदी ने मेरे बालों को पकड़ कर अपने चूचों पर दबाना शुरू कर दिया। अब मैंने नीचे खिसकते हुए दीदी को पेट पर चाटना किस करना शुरू किया, दीदी बार बार ‘स्स्स धीरे करो न आर्य… प्लीज स्स्स हल्के से…’ प्लीज बोल रही थी।

    मैंने दीदी की गोल नाभि में अपनी जीभ डाल कर घुमाना शुरू कर दिया. दीदी एकदम से चिहुँक पड़ी और ‘आआह्ह स्स्स मम्मम’ जैसी आवाजें कर रही थी।

    अब मैंने दीदी की पैंटी की इलास्टिक दोनों साइड से पकड़ कर नीचे खिंचनी चाही पर वो उनके भारी चूतड़ों में अटक गयी। मैंने आशा भरी नज़रों से दीदी को देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए पहले ना में सिर हिलाया पर फिर अपनी गांड हल्की सी उठा दी। मैंने उनकी पैंटी को खींच के अलग कर दिया।

    उन्होंने शर्मा कर अपनी मुनिया को एक हाथ से ढक लिया; मैंने उनके हाथ पर किस किया फिर उनकी केले की तने जैसी जांघों को चूसना किस करना शुरू कर दिया। अब दीदी का हाथ खुद चूत पर हट कर मेरे सर को सहला रहा था। उन्होंने धीरे धीरे मेरी पीठ पर हाथ फेरा और मेरी जांघ दबाने लगी।

    मैंने उठकर अपने शॉर्ट्स उतार दिए अब मेरा 7″ का लण्ड मुँह उठाये हवा में तना हुआ था। दीदी बड़े गौर से मेरे लंड को अपलक निहार रही थी। मैंने पूछा- क्या देख रही हो? वो बोली- पैंट में ये डरावना लग रहा था पर अब सुन्दर लग रहा है।

    मैंने लंड उनके हाथ में दे कर ऊपर नीचे करने को कहा और खुद उनकी चूत से मुँह चिपका दिया।

    क्या बताऊँ दोस्तो, ऐसी मखमली चूत की आप कल्पना भी नहीं कर सकते। मैंने दीदी की चूत की लकीर में ऊपर नीचे जीभ फिराई फिर एक बार में चूत को मुँह में भर लिया। दीदी मचल उठी और जोर जोर से मेरा लंड हिलाने लगी… साथ में बड़बड़ा रही थी- आआह मम्मम्म आर्य चूसो चूसो… आआह स्स्स ओह्ह… मम्मम्म आर्य प्लीज आआह…

    अब मैंने दो उंगलियों से चूत खोली और जीभ अंदर डालने लगा, दीदी की तड़प बढ़ चुकी थी। मैंने दीदी की चूत को बदस्तूर जीभ से चोदना चालू रखा। दोस्तो, मुझे उस समय क्लाइटोरिस यानि चूत के दाने का ज्ञान नहीं था तो मैं पूरी चूत को ऊपर से नीचे तक खूब चाटा। दीदी की चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया था, गुलाबी चूत से नमकीन पानी निकल कर मेरे मुँह में गजब का स्वाद बना रहा था। मेरा एक हाथ दीदी की चूचियों, पेट और चूतड़ों को दबा रहा था।

    उधर दीदी ने मेरे लंड का रस निचोड़ने की पूरी कोशिश शुरू कर दी थी। मैं मौका देख कर दीदी के ऊपर आ कर लेट गया, अब मेरा लंड दीदी की चूत के ऊपर चिपक गया, मैंने वैसे ही ऊपर से दीदी की चूत पर लण्ड रगड़ना शुरू किया और अपने होंठ दीदी के पतले पतले होठों से चिपका दिए.

    ऐसा करते ही दीदी की आँखें, जो अब तक बंद थी, खुल गयी और उन्होंने पहले मुझे हटाना चाहा पर जैसे ही मैंने जम कर किस किया, उन्होंने फिर आँखें बंद की और मम्मम्म ह्म्म्म की आवाज़ करने लगी।

    मैंने थोड़ी देर दीदी को किस किया फिर उनकी गर्दन कान माथे को किस किया। जब मुझे लगा कि वो अब तैयार हैं और बार बार गांड उठा रही हैं तो मैंने एक हाथ से लण्ड को चूत के छेद पर सेट किया और धक्का दिया. दीदी उतने में ही बिलबिला उठी और मुझे हटाने लगी, मेरे लण्ड का सुपारा उनकी चूत में फंस गया था।

    मैं तो अभी से जन्नत में था। जब दीदी का विरोध कम हुआ तो मैंने उनके होठों को अपने होठों में कैद कर लिया और एक जोरदार झटका मारा। दीदी की चीख मेरे मुंह में घुट कर रह गयी, उनकी आँखों से आंसू बहने लगे पर मेरा लण्ड पूरा चूत में समा गया था।

    थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किये, थोड़ी सी कोशिश के बाद लण्ड चूत में आराम से फिसलने लगा। अब दीदी भी मेरा साथ दे रही थी।

    मैंने अपनी स्पीड तेज़ की और अब कमरे में हल्की हल्की ठप ठप पक पक की आवाज़ आ रही थी और उसमें घुली हुई थी हमारे सिसकारियाँ और तेज़ साँसों की आवाज़।

    दीदी अब मुझसे ऐसे चिपकी हुई थी जैसे चन्दन से साँप लिपटा हो, दोनों के शरीर पसीने से चिप चिप हो गए थे। मुझे महसूस हुआ कि मैं झड़ने वाला हूँ और दीदी झड़ चुकी हैं। मैंने अपना लण्ड बाहर खींचा तो थोड़ा डर गया क्योंकि उस पर खून लगा हुआ था. फिर मुझे याद आया कि दीदी वर्जिन हैं। मैंने बिना समय बिताये अपना लण्ड दीदी की चूचियों के बीच दबाया और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा। दीदी ने देखने के लिए सर उठाया तो मेरा लण्ड उनके होठों से टकराया, उन्हें शायद अच्छा लगा और वो बीच बीच में लण्ड को किस करने लगी। तभी मेरा लावा फूट पड़ा। उतना माल मेरा कभी भी नहीं निकला था, मैंने सारा माल दीदी की चूचियों पर निकाल दिया।

    जब दीदी ने देखा तो गुस्सा करने लगी, पर मैंने कहा- दीदी, ये शुद्ध प्रोटीन है, चाट लो। वो बोली- तुम्ही चाट लो! मैंने कहा- मैंने अपने हिस्से का प्रोटीन तो कब का पी लिया।

    तो वो शर्मा गयी और उन्होंने एक उंगली से थोड़ा सा वीर्य चाट लिया और बोली- इतना प्रोटीन काफी है, फिगर ख़राब हो जाएगा वरना! मैं दीदी के बगल में ही लेट गया, अब दीदी मेरे मुरझाये लण्ड को सहला रही थी और मैं दीदी की चूचियों को सहला रहा था।

    दीदी बोली- इसकी तो सब अकड़ निकाल दी मैंने! तो मैंने कहा- तुमने नहीं, तुम्हारी चूत ने! पर इसने भी तो तुम्हारी चूत खोद कर पानी निकल दिया। हम दोनों हँसने लगे।

    मैंने पूछा- दीदी, तुम्हारी चूत पर बाल क्यों नहीं हैं? दीदी बोली- बुद्धू, मैं हेयर रिमूवर से हटा देती हूं ताकि हाइजीन बनी रहे। इसीलिए तो तुम भी आज इतने मजे से उसे चाट रहे थे। यूँ बातें करते करते हम दोनों नंगे एक साथ सो गए।

    One glimpse

    Second submission from the same follower for all my followers. 

    One glimpse of a wide, hair-matted chest, the merest hint of a jutting arousal was all she had before he planted his hands very deliberately alongside her body. Fionna smothered a sound of disappointment. Maidenly honest be damned, she'd wanted to see for herself the part of him that- The thought was cut abruptly short when he stretched out above her. Skin against skin. Breasts against chest. Belly to belly. There was not an inch of her body that wasn't engulfed by his. Had he not propped himself up on his elbows, his weight would have been intolerable. He kissed her again, and she sensed his struggle to keep his desire in check. A little playfully- no, perhaps naughtily- she ran her toe up and down the knotted muscles of his calf. Aidan lifted his head. Now he was the one who gave a hoarse laugh. "Do you toy with me, you little witch?" The shift in her leg had also made her breathtakingly aware of the steely erection that lay thick and hard against her belly... as well as the twin fullness that lay below.”

    officialxgossips-deactivated201

    When you send your wife to boss workship , your boss fucking her whole night

    harddick21blog

    Overtime work for promotion

    आज मैं आपको एक नयी कहानी बताने जा रहा हूँ.

    मेरा एक दोस्त था, जिसका नाम रवि था. ये उसका बदला हुआ नाम है. तो रवि और मैं और दो अन्य दोस्त काफी मिलजुल कर रहा करते थे. हम सबको जब भी टाइम मिलता था तो हम सब मिलकर एक साथ पार्टी करते थे. अब आप तो समझ ही गए होंगे कि किस चीज की पार्टी.. और जो नहीं समझा है उन्हें मैं बता दूँ कि जवान लौंडों की सौ में नब्बे टाइम दारू की पार्टी ही होती है.

    हम सब दोस्त मिल कर रात को बारह एक बजे तक पार्टी करते थे. हमारी ये पार्टी ज्यादातर रवि के यहां ही होती थी.

    मैं अब आपको अपने दोस्त रवि के बारे में बता देता हूं. उसकी उम्र 27 साल है और उसकी शादी उसके ज्यादा उम्र वाली लड़की से हो चुकी है. उसकी वो शादी किसके साथ हुई, वो लिख रहा हूँ.

    रवि के एक बड़े भाई भी थे, जो उससे कम से कम 8 साल बड़े थे. उनकी शादी भी हो चुकी थी, लेकिन अभी तक उनको कोई औलाद का सुख नहीं मिला था. इसी कारण वो ज्यादा परेशान रहने लगे थे. ये चिंता इतनी अधिक बढ़ गई कि एक दिन अचानक दिल का दौरा पड़ने से रवि के भाई को मौत हो गई. इसी कारण रवि के घर वालों ने रवि की शादी उसकी भाभी से कराने की सोची, लेकिन भाभी की उम्र 35 साल की थी, इसलिए रवि ये शादी करने से मना कर रहा था. लेकिन घर वालों के सामने कहां चलती है. सो जबरदस्ती उसकी शादी उसकी भाभी से करा दी गई. इस तरह रवि की शादी हो गई थी.

    मैं और रवि आपस में बहुत अच्छे दोस्त हैं इसलिए उसने मुझे ये सब बात बताई. मैंने कहा- तू घर से भाग जा! लेकिन उसके भाई की मौत के बाद उसके घर का सारा बोझ और खर्च उसके ऊपर आ गया था इसलिए वो घर वालों को अकेला नहीं छोड़ सकता था. उसने मजबूरी में अपनी भाभी से शादी कर ली. ये शादी इतनी जल्दी हुई कि उन्होंने मंदिर से ही शादी करवा दी. किसी भी मेहमान को भी नहीं बुलाया और न ही किसी दोस्त को.

    लेकिन एक दिन उसने सब दोस्त को शादी की पार्टी दी. हम लोग 5 दोस्त थे और उसके छत पर ही पार्टी करने लगे. फिर सब के कहने पर उसने हमारी भाभी मतलब उसकी पत्नी को हम सब से मिलवाया.

    दोस्तो, उसकी भाभी/पत्नी इतनी खूबसूरत थी कि लग ही नहीं रही थी कि उसकी उम्र 30 की है. फिर हम सब पार्टी करके वहां से चले गए.

    मेरा उसके घर पर आना जाना था, तो रवि की वाइफ मतलब मेरी भाभी से भी मेरी अच्छी दोस्ती हो गई. हम दोनों भाभी देवर में हंसी मजाक भी चालू हो गया. मजाक मजाक में मैं कभी उसके शरीर पर हाथ रख देता तो कभी वो मेरे शरीर पर हाथ रख देती थी.

    इस सब में मजा तो बड़ा आता लेकिन मैंने कभी भी भाभी के बारे में गलत नहीं सोचा था.

    ऐसा ही चलता रहा, एक दिन रवि की रात को तबियत खराब हो गई तो भाभी ने तुरंत मुझे फ़ोन लगाया. मैं अपनी कार लेकर रवि और भाभी के साथ रवि को डॉक्टर के पास ले गए.

    दोस्तो, मैं आपको रवि की वाइफ का नाम तो बताना ही भूल गया, उसका नाम स्वाति था.

    रात में रवि का डॉक्टर इलाज कर रहे थे इसलिए मैं और स्वाति हम दोनों बाहर ही कुर्सी पर बैठ गए. देर तक बैठे रहने से स्वाति को जरा नींद सी आ गई और वो मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई. मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि स्वाति मेरे इतना क्यों पास आ रही है. दो दिन में रवि स्वस्थ हो गया और बस ऐसा ही चलता रहा.

    फिर एक दिन रवि और मैं उसके घर पर पार्टी कर रहे थे. उस दिन हम दोनों ने इतना पी ली थी कि मैं अपने घर तक नहीं जा पा रहा था. तो रवि बोला- आज तू मेरे ही घर पर सो जा. मैं रवि के घर पर ही सो गया. मैं अलग कमरे में सो गया और रवि अपने कमरे में सो गया.

    उस दिन रात को 3 बजे के लगभग मुझे लगा कि मेरे साथ चिपका हुआ है और मेरे कपड़े उतार रहा था. मेरी एकदम से नींद खुली तो देखा कि ये स्वाति थी. उसे देख कर मैं चौंक गया और उठ कर उसको मना किया कि ये सब गलत है. लेकिन मैंने दारू पी हुई थी और इसीलिए मुझमें इतनी ताकत नहीं थी कि मैं उसे रोक पाऊँ. वो मुझ पर अपना शिकंजा कसती ही जा रही थी. कुछ देर बाद मैं पस्त हो गया और स्वाति अपनी मनमानी करने लगी.

    उस रात तब तक भाभी मेरे लंड को ही चूस पायी थी कि अचानक उसके पति रवि के आवाज लगाने के कारण वह वहां से चली गई और मैं सो गया. फिर मैं सुबह उठा और अपने घर आ गया. लेकिन मुझे रात की बात सोच कर अच्छा नहीं लग रहा था.

    एक दिन मुझे रवि के घर किसी काम से जाना पड़ा तो स्वाति ने कहा कि वो तो घर पर नहीं है. मैं जाने लगा लेकिन उसने कहा- आपसे मुझे कुछ बात करनी है तो आप अन्दर आओ.

    मैं अन्दर गया लेकिन अब मेरा भी मन स्वाति को चोदने का करने लगा था.. इसलिए मैं भी जल्दी से अन्दर घुस गया. मैंने पूछा- रवि की मम्मी भी नहीं हैं क्या? उसने कहा- मम्मी जी बाहर गई हैं. मतलब घर पर कोई नहीं था.

    फिर स्वाति ने मुझे पानी पिलाया और कहा- उस रात के लिए सॉरी. तो मैंने कहा- अपने उस दिन गलत किया था. उसने कहा- पता नहीं मेरे मन को क्या हो गया था. मैंने कहा- ये सब रवि के साथ किया करिये. उसने कुछ नहीं कहा.

    लेकिन मेरा मन तो स्वाति को चोदने लिए कर रहा था तो मैं उसके पास चला गया और उससे बोला कि तुमको कोई प्रॉब्लम है.. मुझे बताओ.. मैं शायद तुम्हारी मदद कर सकूँ. तब भी वह चुप रही और एकदम से उसने मुझे किस करने चालू कर दिए. मैंने मना भी किया. उसने कहा- आपको तो मेरी मदद करनी है ना. मैं बोला कि ये कैसी मदद हुई? उसने कहा- आपको मेरी कसम.. मुझे मत रोको.. अभी सिर्फ जैसा मैं कहती हूं वैसा करो. मैंने कहा कि नहीं.. ये रवि का साथ धोखा होगा.

    फिर भी वह नहीं मानी और मुझे किस करने लगी. बस दोस्तो अब तो सारी हदें पार हो चुकी थीं, सो मैंने भी उसका साथा देना शुरू कर दिया.

    मैं उसके होंठों पर किस करने लगा. इस वक्त जोश इतना ज्यादा चढ़ गया था कि क्या बताऊं. मैं उसके दूध इतने जम के दबाने लगा कि वो आवाज करने लगी- आह.. दर्द हो रहा है.. आराम से करो.. मैंने कहा- तुझे चुदने का बहुत शौक है ना तो अब सहन कर साली..

    हम दोनों ने एक-दूसरे को बांहों में भरकर देर तक चूमाचाटी की, माहौल गरमाने लगा. मैंने भाभी के कपड़े खींचते हुए उतारने शुरू किए, जिस कारण उसकी ब्रा फट गई लेकिन मैं रुका नहीं.. मैं पूरे जोश में था.

    फिर स्वाति भाभी बोली- जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल कर चोद दो.. नहीं तो रवि आ जाएगा. मैंने भी देर न करते हुए स्वाति को लेटा दिया और अपना लंड उसकी चुत पर रगड़ कर डालने लगा. लंड उसकी चूत में जा ही नहीं रहा था.

    मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा कि मेरी बहुत टाइम से चुदाई नहीं हुई है. उसकी इस बात से मैं चौंका कि क्या रवि भी इसको नहीं चोदता है. फिर मैंने सोचा कि फिलहाल तो भाभी की नंगी चुत की खाज मिटाने में ही भलाई है.. इसलिए मैंने सोचना बंद किया और उसकी चूत में लंड पेलने की सोचने लगा.

    जब लंड नहीं घुसा तो मैंने अपने लंड पर क्रीम लगाई और फिर अपना लंड उसकी चुत में पेल दिया. जैसे ही मेरा लंड अन्दर गया, स्वाति ने इतनी जोर से आवाज की कि मुझे अपना हाथ उसके मुँह पर रखना पड़ा.

    थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई तो मैंने जोर जोर से उसकी चुत में लंड पेलना चालू किया. स्वाति को बहुत मजा आ रहा था और वो भी अपनी गांड उठा कर मेरा पूरा साथ दे रही थी.

    कुछ देर के बाद मैंने अपने दोस्त की बीवी को अपने ऊपर ले लिया और लंड पर बिठा कर उछलने को कहा. अब मेरा पूरा लंड स्वाति की चुत में जा रहा था और स्वाति भाभी मस्ती से अपनी चूचियों को उछालते हुए अपनी चुदास शांत करवा रही थी.

    इसी बीच वह दो बार झड़ गई और अब ऊपर चढ़ने का मेरा नम्बर था. कुछ देर धकापेल चुदाई हुई. मैं भी झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा कि मेरा आने वाला है.. किधर लोगी? उसने कहा- मेरे अन्दर ही गिरा दो. मैं दोस्त की बीवी की चुत में ही झड़ गया और हम दोनों कुछ देर बाद अलग हो कर तैयार हो गए. Like kre

    भाभी की चुदाई के मजे लूटने के बाद मैं अपने घर आ गया.

    उसके बाद से मैंने अपने दोस्त की बीवी को कई बार चोदा है. लेकिन मुझे अब तक ये नहीं मालूम चल सका कि रवि के अलावा वो मुझसे क्यों चुदती है. अब तो मैंने भी उसकी चूत चोदने के अलावा कुछ भी सोचना और पूछना बंद कर दिया. जो भी हो, मुझे भाभी को चोदने में खूब मजा आता है.

    favorite-desi

    What a extraordinary desi fucking scene💘💘 dam hot 💋💋💋💋💋

    rock2612-jh

    My cousin sister fucked record by me….

    harddick21blog

    Desi rocks

    I was burying myself in my own guilt. Looking at how much pain I created in my relationships while being in my avoidant patterns. Although of course I knew that the pain had been there long before me.

    Still, it was a moment of my grand guilt.

    Avoidant is nothing but an extremely sensitive person being overwhelmed and not being good at creating boundaries, timely.

    It is really just that.

    But I like to go all the way, you know.

    So I found all the symptoms of all the personality disorders...

    muslim-lund

    Does anyone know this girl?

    harddick21blog

    Desi Beauty

    We need to get comfortable with darkness.

    Darkness can be so dense, you cannot see your own hands.

    Darkness is not different to light, it is just another side of the spectrum of the One.

    However we never learnt to be comfortable in the dark. Since early times we were taught to avoid darkness and focus on the nice and pleasant things in life.

    One thing is inevitable though: darkness will come, as surely as night that follows the day.

    singhnishakanpur

    Punjab university students..

    pra-bha

    Students are very fast

    harddick21blog

    Desi University Kaand

    What if we taught ourselves to trust our knowing, our gut, our intuition rather than the mind? If you feel affected by others and out of yourself, take a moment to pause everything.

    Ask yourself: Which influences are affecting you? Are you feeling yourself becoming defensive? What wounds are being triggered? What do you need to regain clarity?

    singhnishakanpur

    Desi cpl caught outdoor while fucking…

    harddick21blog

    Conscious men and women

    Those good “conscious” men.

    It’s no magic. It’s the result of deep inner work on activating our energy body and our inner radiance. A woman who is oozing radiance is magnetic by definition.

    Once our magnetic field is activated we naturally draw in things and people that truly resonate with us. Without much effort. This is the real secret of the feminine/yin know-how. And it really works.

    There are various ways to activate our radiance, but nothing works as quickly and directly as specific work on activating our sexuality and de-shaming the inner slut (yes yes). Trust me, I did make lots of experiments with this over the last 10 years.

    nancyaakash

    Real stufff😂

    harddick21blog

    Original desi Bollywood scene

    No one could ever think that our Bollywood can make such movies and shot such scenes. Now a days, these scenes are very common and on top of that our actors are also ready to perform such scenes on camera without having any hesitation in their heart. They are bold enough to allow the directors to take a retake for the same scene. 

    londonpunjabi

    #private #function

    harddick21blog

    Bachelor party (Female)

    This video seems to me from India or related to Indians but am not sure. Better i should say asians. This video they might have shot to please the bride exact before her marriage day. In India it’s not very common but outside it is specially in UK. They throw a bachelor party for both male and female. This girl is being pleased this white hung male. Unfortunately, we have not full video with us but whatever we have we can manage with it... what say guys?? :P 

    harddick21blog

    Enjoying a desi bitch in a hotel

    How can you be unconsciously scaring away a potential partner?

    - By having (conscious or unconscious) expectations or demands on how they should show up. All the thoughts starting with “I deserve…” “He/she has to…”, which basically means that you do not accept the other person and wish that they showed up differently. The question is: “if you want this person to be different, why are you even bothered to focus so much on them?”

    singhnishakanpur

    Desi wife fucked by 3 bulll…

    harddick21blog

    Bull is wonderful

    As soon as the man is no longer erect most couples end the lovemaking. Of course if he ejaculated he will have the refractory period as there is a loss of energy. But if he didn’t ejaculate and the cock is soft - is it the sign to stop? My invitation is to reframe the idea that to make love you need to be hard. My invitation is to learn to trust the intelligence of the body. When the cock becomes soft don’t label it as a failure or end.

    happylund69-blog

    Elite Lady Shailaja Sharing her Climax Shoot for my unseen Friends

    harddick21blog

    Mature elite aunty having fun 

    Make sure every your heartbeat is dedicated to Love. Make sure you are burning from within with passion for life. Make sure you are relating only with people who set your soul on fire, who ignite feelings in you that you have no words for. Make sure you don’t ever hold back even a drop of your love.

    This is something that will expand your capacity for love and true freedom.

    There is no greater joy in life than loving, without holding anything back.

    With every breath dedicated to Love, you receive blessings from the Universe herself.