selvaraj-devi

    Goa fun 18.10.18

    harddick21blog

    Desi cuckold fun 

    जो बात मैं आप लोगो को बताने जा रहा हूँ वो सिर्फ़ इतनी है कि उसके होने के बाद मेरी सेक्स लाइफ थोडी बदल गई है। मेरा नाम शिवशंकर है और मैं अहमदाबाद में रहता हूँ। मेरी शादी को 6 साल हो चुके है और मेरा एक 4 साल का बच्चा भी है ! मेरी बीवी का नाम वैसे तो निधी है लेकिन मई उसे अपनी एंजल ही कहता हूँ और वो भी आज 26 साल की एक खूबसूरत युवती बन चुकी है।

    हम दोनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी की है और आज हम दोनों बहुत ही खुश हैं !

    हम दोनों हमेशा से ही कुछ नया करने की सोचते रहते हैं चाहे वो सामाजिक जीवन में हो या फिर यौन जीवन में !

    एक बार हम दोनों हिमाचल घूमने गए हुए थे। वहा पर न जाने क्या हुआ, एंजल ने सोचा कि क्यों न आज खुले आसमान के नीचे ही सेक्स किया जाए। तब हम दोनों ने वही किसी पहाड़ी पर झाड़ी के पीछे डरते डरते सेक्स के खूब मज़े लिए वो भी बिल्कुल नंगे हो कर। फिर वही कहीं नदी के किनारे में एंजल ने बिल्कुल नंगी होकर अपनी नहाते हुए फोटो भी खिंचवाई। वो फोटो आज भी देखता हूँ तो उतेजित हो जाता हूँ। तब हमें ये डर नहीं लगता कि कोई हमें देख लेगा तो क्या होगा !

    कई बार तो हमने अपनी बालकनी में भी सेक्स किया है बिल्कुल खुले में। एक बार हमें पड़ोस वाली भाभी ने देख लिया था ! उसने एंजल से कहा भी था पर एंजल ने कहा के हमें इस में ही मज़ा आता है !

    एक बार रात को मैं एंजल की मस्त चुदाई कर रहा था। उस रात मैंने एक दो पैग लगा लिए थे इस लिए मुझे कुछ सरूर ज्यादा था, एंजल को भी मैंने एक पैग दिया था इस लिए वो भी आज कुछ ज्यादा ही मज़े दे रही थी। वैसे एंजल पीती नहीं है पर मेरे साथ कभी कभी चल जाता है।

    एंजल को चोदते चोदते मैं उस से गन्दी गन्दी बातें भी कर रहा था। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने आज एक ब्लू फ़िल्म लगा रखी थी, उसको देखते देखते ही मैं एंजल को चोद रहा था।

    जैसे जैसे फ़िल्म में हो रहा था वैसे ही एंजल और मैं कर रहे थे। एंजल कभी मेरा लंड चूसती तो कभी मैं उसकी चूत चाटता कभी मैं एंजल को घोड़ी बना कर चोदता तो कभी उसकी गांड को फाड़ता। आज पूरे मज़े ले लेकर हम चुदाई कर रहे थे।

    तभी फ़िल्म में एक सीन आया उसमे एक आदमी एक लड़की को लंड चूसा रहा था और लड़की कुतिया की तरह खड़ी हो कर चूस रही थी। तभी एक दूसरा आदमी आया और उसी कुतिया के पोज़ में उसे चोदने लगा।

    ये देख कर एंजल भी मेरा लंड चूसने लगी और अपनी चूत में उंगली करने लगी। बहुत देर तक करते रहने के बाद उसका हाथ थकने लगा तो उसने उंगली हटा ली !

    ये देख कर मैंने कहा- क्या हुआ ! अगर ज्यादा ही मन है तो किसी दूसरे लंड का इन्तजाम करूँ क्या !

    एंजल भी जोश में थी और चुदाई उस वक्त उस पर हावी हो चुकी थी। उसने कहा- क्यों नहीं कब से मेरी इच्छा है दो दो लंड लेने की, पर तुम सिर्फ़ अकेले ही चोदते हो, कभी तो दूसरा लंड लेकर आओ मेरे लिए !

    हम अक्सर सेक्स करते हुए ऐसी बातें करते है इसलिए मैंने दुबारा उससे पूछा,’ तू ही बता दे ना तुझे किसका लंड चाहिए? जिसका तुझे पसंद होगा उसका ही दिला दूंगा तुझे !’

    एंजल झट से बोल पड़ी,’ हाँ हाँ श्रुकांत का लंड चाहिए मुझे उसका बहुत ही मोटा और तगड़ा है।’ ‘क्यों नहीं कल ही ले, तुझे श्रुकांत के लंड से चुदवाता हूँ, वो ही कल तेरी चूत की चटनी बनाएगा।’ ‘पक्का ना?’

    ‘पक्का ! पर एक शर्त है मेरे सामने चुदना होगा मैं यहाँ चुपचाप देखूंगा।’ ‘पर अगर तुम देखोगे तो मुझे दूसरा लंड कहा से मिलेगा?’ ‘तो क्या हुआ एक और मर्द बता दे जिससे चुदने की इच्छा है। ‘ ‘हाँ हाँ परमवीर का भी लंड बहुत मोटा होगा।’

    हम दोनों ऐसे ही बात करते जा रहे थे, तभी मैं झड़ गया तो मैंने अपना लंड हटा लिया और साफ़ करके सो गया।

    सुबह सब कुछ सामान्य था। मैं नाश्ता करके ऑफिस चला गया। ऑफिस में दिन में अचानक एंजल का फ़ोन आया,’ शिवशंकर कहाँ हो? अभी घर आ सकते हो?

    मैंने पूछा- क्यो? ‘बहुत मन कर रहा है!’ ‘शाम को आ कर चोदता हूँ ना’ ‘नहीं अभी आओ वरना में श्रुकांत परमवीर को बुला रही हूँ ‘ ‘बुला लो’

    ऐसा कह कर मैंने फ़ोन रख दिया।

    मैं सोचने लगा कि क्यों न इस बार ये भी करके देखा जाए, इस में बुरा ही क्या है, श्रुकांत और परमवीर मेरे दोस्त है और दोनों भी शादी शुदा है अगर दोनों उसे चोद भी देंगे तो घर की बात घर में रहेगी और वो दोनों भी अपनी बीवियों के डर से किसी को नहीं बताएँगे और मेरे और एंजल के लिए ये नया यौनानुभव होगा।

    ये सोच कर मैंने एंजल को दोबारा फ़ोन किया और कहा कि आज शाम को परमवीर और श्रुकांत को घर पर दारू पार्टी के लिए बुलाओ।

    ‘क्यों आज सही में इरादा है क्या मुझे दो दो से चुदवाने का ‘ ‘हाँ सोच तो ऐसे ही रहा हूँ ‘

    ‘सोच लो अगर उनके लंड ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी तो उनके लंड का स्वाद ही न लग जाए मुझे’ ‘कोई बात नहीं मेरी जान चूत की प्यास बुझाना कोई ग़लत नहीं है अगर पति न सही तो पति के दोस्त ही सही।’

    तब थोड़ी देर में ही सही पर एंजल मान गई उन दोनों से एक साथ चुदने को।

    पर मैंने उसको एक शर्त भी बता दी कि उन दोनों को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं भी तुम्हें चुदाई करवाते देख रहा हूँ और एंजल का ही काम है उन दोनों तो तैयार करना चोदने के लिए। एंजल इस के लिए तैयार हो गई। दोस्तों आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

    सब कुछ योजना के अनुसार हुआ। एंजल ने उन दोनों को खाने के बहाने घर पर बुलाया और मैं पहले ही आकर अपनी जगह पर छुप गया। ठीक शाम के 7 बजे दोनों घर पर आ चुके थे। दोनों अपने साथ एक व्हिस्की की बोतल भी लाये थे। दोनों वहीं सोफे पर बैठ कर फ़िल्म देखने लगे। मेरा इंतज़ार करते करते आधा घंटा हो गया तो परमवीर से नहीं रहा गया तो उसने मुझे फ़ोन मिला दिया। पर मैं अपना फ़ोन पहले ही बंद कर चुका था। परमवीर ने एंजल से पूछा कि आज शिवशंकर का फ़ोन नहीं मिल रहा है क्या बात है?

    ये सोच कर मैंने एंजल को दोबारा फ़ोन किया और कहा कि आज शाम को परमवीर और श्रुकांत को घर पर दारू पार्टी के लिए बुलाओ।

    ‘क्यों आज सही में इरादा है क्या मुझे दो दो से चुदवाने का ‘ ‘हाँ सोच तो ऐसे ही रहा हूँ ‘

    ‘सोच लो अगर उनके लंड ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी तो उनके लंड का स्वाद ही न लग जाए मुझे’ ‘कोई बात नहीं मेरी जान चूत की प्यास बुझाना कोई ग़लत नहीं है अगर पति न सही तो पति के दोस्त ही सही।’

    तब थोड़ी देर में ही सही पर एंजल मान गई उन दोनों से एक साथ चुदने को।

    पर मैंने उसको एक शर्त भी बता दी कि उन दोनों को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं भी तुम्हें चुदाई करवाते देख रहा हूँ और एंजल का ही काम है उन दोनों तो तैयार करना चोदने के लिए। एंजल इस के लिए तैयार हो गई।

    सब कुछ योजना के अनुसार हुआ। एंजल ने उन दोनों को खाने के बहाने घर पर बुलाया और मैं पहले ही आकर अपनी जगह पर छुप गया। ठीक शाम के 7 बजे दोनों घर पर आ चुके थे। दोनों अपने साथ एक व्हिस्की की बोतल भी लाये थे। दोनों वहीं सोफे पर बैठ कर फ़िल्म देखने लगे। मेरा इंतज़ार करते करते आधा घंटा हो गया तो परमवीर से नहीं रहा गया तो उसने मुझे फ़ोन मिला दिया। पर मैं अपना फ़ोन पहले ही बंद कर चुका था। परमवीर ने एंजल से पूछा कि आज शिवशंकर का फ़ोन नहीं मिल रहा है क्या बात है?

    ‘यार ये शिवशंकर भी न बहुत ही अजीब है हमेशा ऐसे करता है अब बताओ हमारी दारू पार्टी का क्या होगा हम तो पूरी बोतल ले आए हैं.’ श्रुकांत बोला- कोई बात नहीं मैं जीतू और दीपक को भी बुला लेता हूँ हम चारो मिल कर इसे ख़तम कर देंगे’

    एंजल ने ये सुना नहीं कि वो जीतू और दीपक को भी बुला रहे है वो भी मेरे ही दोस्त हैं।

    एंजल ने भी अपनी पूरी तैयारी कर ली थी। वो आज अपने पूरे बदन की वैक्सिंग करा कर आई थी। चूत पर से सारे बाल साफ़ करवा कर बिल्कुल उसे चिकनी कर के बिल्कुल दो दो लण्डों से चुदने को बेताब थी !

    एंजल ने अपनी सबसे सेक्सी ब्रा पैंटी का सेट पहना और उसके ऊपर एक घुटनों तक स्कर्ट और उसके ऊपर एक नीचे गले का टॉप। कसम से इतनी सेक्सी वो तब बन कर नहीं आती जब मैं उसे चोदता हूँ पर कोई बात नहीं आज उसे दो दो लंड चोदने वाले थे !

    तब तक श्रुकांत और परमवीर ने दारू पीनी शुरू कर दी थी। एंजल भी उनके बगल वाले सोफे पर जा कर बैठ गई। टॉप में उसके चुचे बाहर आने को मचल रहे थे। घुटने तक की स्कर्ट में उसकी गोल गोल जांघे दिखने का आभास दे रही थी। मैं देख रहा था कि श्रुकांत उसे चुपचाप देखे जा रहा था वो उसकी जांघो को ही देखे जा रहा था। सच में वो सोच रहा होगा काश इन दो जांघों के बीच की जगह पर वो लेटा होता ! परमवीर भी कम नहीं था वो भी एंजल के बदन को देखे जा रहा था जैसे कह रहा हो काश आज एंजल की गोल गोल मोटी गांड के पीछे से झटके मारता रहूँ।

    दोनों ने दो दो पैग लिए और तीसरा बनाने लगे। तभी एंजल कहने लगी- मैं तुम दोनों के लिए और कुछ खाने को लाती हूँ। एंजल किचन से कुछ लेकर आई तो जब मेज़ पर झुक कर रखने लगी तभी उसके मोटे मोटे चुचे उसके टॉप से बाहर आने को मचलने लगे। श्रुकांत और परमवीर आँखें फाड़ कर उसके चूचों को खा जाने वाली नजरों से देखने लगे।

    एंजल फिर वही बैठ गई और अपनी टांगें सोफे पर ऊपर कर के बैठ गई। ऐसा करते हुए उसकी थोडी सी जांघो के दर्शन उन दोनों को हो गए। अब तो उन दोनों को वहा बैठना बहुत ही भारी लगने लगा ! मैं समझ गया कि एंजल का दांव बिल्कुल ठीक बैठा है। अब वो दोनों भी समझ गए थे कि एंजल क्या चाहती है !

    श्रुकांत उठा और एंजल के पास जा कर बैठ गया और ऐसे ही बोला- और बताओ एंजल आज कल क्या चल रहा है ! और ऐसा कहते कहते एंजल की जांघो पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे उसकी जांघो को मसलने लगा। दोनों ऐसे ही बात करते रहे तो परमवीर से नहीं रहा गया और वो भी उठ कर एंजल के बगल में आ गया और उसकी दूसरी जांघ पर हाथ रख दिया।

    अब तक सब कुछ साफ़ हो चुका था कि सब क्या चाहते हैं इसलिए एंजल ने भी देरी न करते हुए अपना हाथ बढ़ाते हुए श्रुकांत की जिप पर अपना हाथ रखा और उसे खोलने लगी और अपने दूसरे हाथ से परमवीर के लंड को दबाने लगी। तब तक श्रुकांत का लंड बाहर आ चुका था। सच में काफी बड़ा लंड था उसका। पता नहीं उसकी बीवी उसे कैसे झेलती होगी। तब तक एंजल दोनों के लंड अपने हाथ में ले चुकी थी।

    मैं बाहर से उन तीनों का यह जवानी का खेल देख रहा था। मेरी बीवी मेरे सामने ही मेरे दोस्तों से चुद रही थी इससे बड़ी ब्लू फ़िल्म मेरे लिए और क्या होगी।

    एंजल उन दोनों का लंड बारी बारी से चूस रही थी कभी श्रुकांत का लंड मुँह में लेती तो कभी परमवीर का। श्रुकांत एंजल का टॉप उतार चुका था काले रंग की ब्रा में एंजल के मोटे मोटे चूचे क़यामत ढा रहे थे।

    परमवीर भी एंजल की स्कर्ट ऊपर उठा कर नीचे पैंटी के दर्शन कर रहा था। तभी एंजल ने उसे कहा,’ ये क्या कर रहे हो? यहाँ पर मैं तुम्हें फुल टॉस दे रही हूँ और तुम सिर्फ़ उसे क्लिक कर रहे हो ! आजा परमवीर आज अपनी भाभी की जवानी का मज़ा जी भर कर ले ले उतार दे ये’ परमवीर भी गरम हो चुका था पहले परमवीर ने अपने कपड़े उतारे और बिल्कुल नंगा हो कर एंजल के सामने पहुँच गया।

    ‘अरे वाह तेरा तो बहुत ही मोटा और लंबा लग रहा है? आज तू भाभी की चूत को बुरी तरह फाड़ने आया है क्या?’ श्रुकांत भी तब तक नंगा हो चुका था उन दोनों ने फिर मिलकर एंजल की स्कर्ट उतारी और श्रुकांत ने एंजल की ब्रा उतारी परमवीर ने पैंटी नीचे खींच दी !

    अब तीनों बिल्कुल नंगे हो कर एक दूसरे को लगातार किस किए जा रहे थे एंजल एक हाथ से कभी श्रुकांत का लंड पकड़ती और कभी दूसरे हाथ से परमवीर का लंड मुँह में लेती।

    मुझे ये सब देख इतना मज़ा आया कि मैं वहीं मुठ मारने लगा।

    अन्दर तब तक एंजल दोनों को बेड तक लेकर आ चुकी थी। वहाँ पर एंजल कुतिया की तरह पोज़ बना कर श्रुकांत का लंड अपनी चूत में ले चुकी थी परमवीर उसे अपना लंड चुसाये जा रहा था। दोस्तों आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

    तभी बाहर बेल बजी एंजल घबराहट में उठी और बोली- अब कौन आ गया मज़े ख़राब करने?

    परमवीर ने कहा- शायद शिवशंकर आया होगा ! नहीं वो अभी नहीं आएगा ! तो फिर कौन आया होगा !

    ‘जीतू और दीपक होगे मैंने उन्हें फ़ोन कर बुलाया था’

    ‘ये क्या कर दिया अब ले लो मज़े मेरी जवानी के !’ एंजल बोली- अभी तो फ़िल्म भी शुरू नहीं हुई है और तुमने इंटरवल कर दिया!’

    ‘तो क्या हुआ मेरी रानी जहाँ हम दो दोस्त हैं वहाँ वो दो और सही आज पूरे मज़े ले ही लो तो अच्छा है’ श्रुकांत बोला।

    एंजल ने भी सोचा हाँ क्यों न ये भी सही जहाँ दो पराये मर्दों से चुद रही हूँ वहा दो और आ जाएँगे तो क्या ग़लत है ! चलो फिर बुला लो उस दोनों को भी !

    परमवीर बाहर जा कर उन दोनों को अन्दर ले आया। अंदर आते ही वो सब कुछ समझ गए जब उन्होंने श्रुकांत और एंजल को नंगा देखा। ‘आ जाओ मेरे राजाओ नंगे हो कर तुम भी शामिल हो जाओ मेरी चूत और गांड की सवारी में ‘

    ‘साली कब से चाहता था तेरी नंगी चूत को चोदना ! आज तो जी भर कर चोदूंगा रात भर चोदूंगा ‘ जीतू अंदर आते ही नंगा होकर बोला।

    दीपक भी जोश में नंगा होकर बिस्तर पर आ गया अब मेरी बीवी बिल्कुल नंगी होकर चार नंगे मोटे मोटे लंड वाले मर्दों के बीच में चुदाई की कबड्डी खेलने को बिल्कुल तैयार लेटी थी। सबसे पहले जीतू ने अपना लंड उसकी प्यासी चूत में आधा अंदर घुसा दिया।

    ‘आहा मर गई जीतू कुत्ते ह्ह्ह्ह्ह् क्या मोटा लंड है तेरा कुत्ते ‘ ‘आज दीपक तू भी अपना लंड पकड़वा ! सबका चख लिया तेरा कैसा है तू भी चखा ना ‘

    एंजल दीपक का लंड चूसने लगी।

    ‘नहीं ऐसे मज़ा नहीं आएगा मुझे सब लंड एक साथ चाहिए अलग अलग नहीं !’ एंजल पुरे जोश से बोली।

    कुतिया बन रही हूँ, जिसको जहाँ जो छेद मिले वहीं अपना लंड घुसा दो जल्दी’

    एंजल कुतिया की तरह पोज़ लेकर उन चारों के बीच में आ गई।

    जीतू उसके नीचे आ गया और एंजल को अपने ऊपर ले लिया और उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया।

    श्रुकांत उसकी गांड के पीछे आ गया और अपना लंड उसकी गांड में धीरे से रख कर अन्दर धकेल दिया। दीपक ने भी अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया।

    अब परमवीर बचा था, परमवीर का लंड एंजल ने अपने हाथ में ले लिया और कहा,’ कोई बात नहीं परमवीर आज तेरी मुठ मैं ही मारूंगी, इन तीनों में से जो भी पहले झड़ेगा उसके बाद तू आ जाना !

    चारो अब शुरू हो गए,’ अआः अह्ह्ह्छा मर गई सालो ! कमीनो ! मार डाला आज तुमने एंजल को !’ ‘उईईइ उईईई अहा आ या क्या बात है चार चार लण्डों के बीच में अकेली चूत अह्ह्ह ‘फाड़ दे जीतू आज चूत को जी भर के फाड़ दीपक गांड को आज बिल्कुल मत छोड़ना गांड का कुआं बना दे आज !’

    ‘आ जाओ ! आ जाओ ! श्रुकांत परमवीर ! तुम्हारी लंड की खुजली को ख़तम करूँ बारी बारी से चूस कर !’ ‘अहाआया मज़ा आ गया !’ ‘और जोर से छोड़ मुझे जीतू हरामजादे कभी चूत नहीं मारी क्या !’ ‘श्रुकांत गांड फाड़ दे !’

    बड़ी देर तक चारों बदल बदल कर एंजल की चूत गांड को फाड़े जा रहे थे। चारों जब झड़ गए तब भी थोड़ी देर रुकने के बाद एक एक पैग लगा कर फिर से मैदान में आ जाते।

    और क्यों न आते आज उन्हें एंजल की चुदाई का सुख जो मिल रहा था।

    फिर न जाने कब तक वो चुदाई करते रहे पर एंजल का जी नहीं भरा पर जाना भी था। अगली बार सब वादा कर गए कि वो अगली बार 6 दोस्त एक साथ उसे चोदेंगे। मैं भी सोच रहा था कि 6-6 के लंड एंजल कैसे लेगी पर एंजल तैयार थी अगली चुदाई के लिए !

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    Busty sexy lady

    मेरा नाम मनीष हैं और मैं आगरा से हूँ और दिल्ली में पढ़ाई कर रहा हूँ. मेरी हाईट 5 फिट 10 इंच हैं, कलर गोरा हैं और बॉडी एकदम अच्छी हैं. तब मेरी छुट्टियां थी और मैं दिल्ली से आगरा में जा रहा था. 10 बजे के बाद मैं ट्रेन में चढ़ा और मुझे नींद भी आ रही थी तो मैं लेट गया. लेकिन मुझे निंद नहीं आई क्यूंकि मेरी साइड बर्थ थी और मेरी हाईट की वजह से थोडा असहज फिल हो रहा था.

    इसलिए मैंने बुक निकाल के पढना चालू कर दिया. करीब 12 बजे मैंने मोबाइल में मूवी लगाईं और देखने लगा. लेकिन बेटरी ड्रेन होने लगी तो मैंने उसे भी बंद कर दिया. चार्जर निकाल के पॉइंट खोजने लगा. लेकिन उस ट्रेन में चार्जिंग पॉइंट दरवाजे और वाशरूम के पास में ही था. मैं वही दरवाजे के पास में खड़ा हो गया और अपने मोबाइल को चार्जिंग में लगा दिया.

    मुझे कुछ आवाज आई तो मैं पलटा. देखा तो एक सेक्सी लेडी रेड साडी में खड़ी हुई थी. वो भी अपने मोबाइल को चार्ज करने के लिए ही वहां आई हुई थी. उसने मोबाइल को प्लग किया और वो वही खड़ी हो के मोबाईल को थामे हुए थी. दरअसल उसका कोर्ड छोटा था इसलिए मोबाइल को पकड के ही चार्ज करना पड़ा उसे.

    मैं देख रहा था की ऐसी स्थिति में मोबाइल को उठाये रखने की वजह से अब उसके हाथ दुखने लगे थे. मैंने उसे ऐसे देखा तो अपने पास का एक्स्ट्रा केबल उसे ऑफर किया. उसने मुझे थेंक यु कहा और फिर हम दोनों के बिच में औपचारिक इंट्रो हुआ.

    उसका नाम तनवी था और वो दिखने में एकदम गोरी थी. और उसका फिगर एकदम सेक्सी था. उसके बूब्स 34 इंच के ऊपर के थे और कमर पतली सुडोल करीबी 28 इंच की. पीछे गांड बूब्स से भी बड़ी थी और उसका नाप कम से कम 36 इंच का तो होगा ही होगा. उसने बताया की वो कानपुर से थी लेकिन आगरा में जॉब करती थी और वही पर अपनी फेमली के साथ में रहती थी. और ऐसे ही चेटिंग करते हुए हम दोनों क्लोज से हो गए.

    उसने मुझे मेरे मोबाइल के मॉडल के बारे में पूछा और कहने लगी की मुझे भी ऐसा ही एक मोबाइल लेना हैं. मैंने उसे डिटेल्स बताई और उसे कहा की आप चाहो तो मेरा मोबाइल देख सकती हूँ. और वो मेरा फोन ले के देखने लगी. और उसने पहले सब फीचर्स देखे और फिर उसने एमएक्स प्लेयर ऑन कर दिया. मैं भूल गया की मेरे मोबाइल में पोर्न क्लिप्स भी थे.

    उसने उस फोल्डर को खोला, मुझे देखा और स्माइल देने लगी. मैं थोडा टेन्स हो गया. उसने मुझे मोबाइल वापस दे दिया, हम दोनों एकदम चुप से थे. उसने चुप्पी को तोडा और बोली की तुम को सेक्स के लिए कैसी लेडी पसंद हैं?

    मैं उसका प्रश्न सुन के एकदम चौंक गया. लेकीन मुझे उसकी सीधी बात करने की अदा पसंद आई. और मैंने उसे कहा की मुझे मच्योर लेडिज पसंद हैं. उसने स्माइल दी और उसने पूछा क्यूँ? और तुमको मच्योर लेडिज में क्या पसंद हैं? मैंने कहा मच्योर लेडिज बहुत ही होर्नी होती हैं और उनका वजन सब सही जगहों के ऊपर होता हैं. और ये कह के मैंने उसे आँख मार दी.

    वो शर्म से लाल हो गई और बोली क्या तुम मुझे एक फेवर कर सकते हो? मैंने कहा क्या? तो उसने कहा की क्या तुम मुझे ये वीडियो मेरे मोबाइल में भेजोगे, मैंने ऐसे क्सक्सक्स क्लिप्स नहीं देखे हैं कभी.

    मैंने कहा आप तो आलरेडी शादीशुदा हैं फिर भला आप को ऐसे ये सब देखने की क्या जरूरत आन पड़ी. उसने कहा की उसका पति उसको खुश नहीं कर पाता हैं सही तरह से. इसलिए वो पोर्न देख के खुद को शांत करना चाहती थी.

    मैंने आंटी को वीडियो भेज दिया और वीडियो ट्रांसफर हो रहा था तब मैंने उसे कहा की अगर आप चाहो तो मैं वीडियो दिखाने के सिवा और भी बहुत कुछ कर सकता हूँ. ये कह के मैंने उसे एक नोटी स्माइल दे दी. उसके चहरे के उपर ब्लशिंग हुई लेकिन वो एक भी शब्द नहीं बोली.

    इस वजह से मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उस से एक किस मांग ली. उसने पहले तो मना कर दिया लेकिन फिर वो मानी लेकिन कहने लगी की हम लोग ट्रेन में हैं यहाँ कैसे किस कर सकते हैं.

    मैंने उसे कहा की हम लोग बाथरूम में जा के किस कर सकते हैं. मैंने उसे रिक्वेस्ट किया और बहुत सब समझाने के बाद वो मानी. पहले मैं वाशरूम में घुसा और फिर मेरे पीछे पीछे 5 मिनिट में वो भी आ गई. मैंने दरवाजे की सटकनी लगा दी और फिर हम दोनों एकदम जनून के साथ किस करने लगे. स्लोवली मैंने अब उसके बूब्स को दबाना चालू कर दिया. और मैं पीछे उसकी गांड के ऊपर भी हाथ मार रहा था. वो एकदम होर्नी हो चुकी थी और मोअन कर रही थी हलके हलके से दबे स्वर में.

    अचानक उसने किस तोड़ दी और बोली, नहीं नहीं ये ठीक नहीं हैं मैं ये नहीं कर सकती.

    मैंने कहा अरे नहीं कुछ भी गलत नहीं हैं, तुम अपने आप को खुश और संतुष्ठ कर रही हो, जो चीज तुम्हे तुम्हारा हसबंड नहीं दे सकता हैं.

    वो चुप थी और मैंने फिर से उसे धीरे से किस करना चालू कर दिया. फिर मैंने उसकी साडी को ऊपर किया और पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को भी हिलाने लगा. उसकी चूत गीली हो चुकी थी और पानी निकल रहा था. वो एकदम चिपचिपी सी थी. वो अह्ह्ह अह्ह्ह्ह मोअन कर रही थी.

    मैंने अपनी पेंट से लंड को बहार निकाला और उसके हाथ को ले के लंड पर रख दिया. मेरे बदन में जैसे करंट की एक लहर दौड़ उठी थी. उसके हाथ एकदम सॉफ्ट थे. उसने मेरे लंड को दबाया और फिर आगे की चमड़ी को हटाया. मेरे लंड से भी प्रीकम निकल पड़ा था. आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

    मैंने उसकी गांड अपनी तरफ घुमा के पेंटी को साइड में कर दिया. और फिर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका के धीरे से पुश कर दिया. उसकी चूत काफी गरम थी. मैंने अब स्लोवली उसकी चुदाई चालू कर दी. वो मोअन कर रही थी अह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह. उसकी मांसल गांड धीरे धीरे मटक रही थी मेरे झटको की वजह से.

    मैंने उसकी आवाज को स्लो करने के लिए उसके होंठो के ऊपर अपने होंठो को रख के किस कर दी. फिर मैंने उसे चोदते हुए स्की जेकेट को खोला. मेरी स्पीड की वजह से उसकी गांड और जांघे आगे पीछे होने लगी थी. वो अह्ह्ह्ह अह्ह्ह मोअन कर रही थी. कुछ ही मिनिट की चुदाई में उसकी चूत का रस निकल के उसकी जांघो पर बह निकला.

    फिर 2 मिनिट में मेरा पानी भी निकलने को था. उसने कहा की मुझे पिला दो अपना वीर्य. मैंने उसे जोर जोर से और दो झटके दिए. और फिर वो फटाक से घुटनों के ऊपर बैठ गई. मैंने लंड को उसके मुहं में दे दिया. उसने चूस चूस के सब पानी निकाल दिया. और एक एक बूंद को वो जैसे अमृत समझ के पी भी गई. आखरी बूंद को मुहं में लेते हुए उसने लंड की नली को ऐसे चूसा जैसे स्ट्रॉ से कोका कोला की बोतल से आखरी बूंद खिंच रही हो.

    सच में एक सुखद और क्विक फकिंग थी मेरे लिए. मैं अभी भी जैसे ये सब सपने में हुआ था वैसे बेशुध्द सा था. आंटी ने मुझे खड़े होते हुए कहा, चलो अब जल्दी से कपडे पहनो लगता हे कोई स्टेशन आने वाला हैं. और वो अपने कपडे पहन के बहार निकल गई. फिर से वो चार्जिंग पॉइंट के पास खदीम मोबाइल को चार्ज करने लगी. 2 मिनिट के बाद मैंने दरवाजे को हलके से खोला और बहार आ गया.

    फिर हम दोनों वही खड़े हुए बातें कर रहे थे. मैंने उसके पास कांटेक्ट नम्बर माँगा तो उसने कहा की ट्रेन में हुई इस बात को प्लीज ट्रेन में ही भुला देना. यहाँ से उतर के हम दोनों फिर से अजनबी हैं. वैसे उसकी बात सही भी थी, शायद वो एक बार ही मेरा लंड ले के खुद की चूत की आग को छिपा लेना चाहती थी बस!

    nikixulu

    Meri pyari aunty aur main.. Purani yaadein

    harddick21blog

    Mateur Vs Amateur

    हैल्लो दोस्तों. आज जो मैं आप सभी को कहानी बताने जा रहा हूँ उसे पढ़ आप सभी को लगेगा की ये कहानी मनगढन है लेकिन ये कहानी एकदम सच्ची है हा थोडा इस कहानी को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए मैंने इसमे थोडा बाते बढ़ा चढ़ा के लिखा है. मेरा नाम वासिम है और मेरी उम्र 26 साल है.. दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि आज की मेरी यह कहानी आप लोगों को बहुत पसंद आएगी और आज जो में आप लोगो को कहानी सुनाऊंगा वो मेरी एक और सच्ची घटना है और अभी कुछ दिन पहले ही मेरे साथ घटित हुई है. दोस्तों अब में आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ..

    दोस्तों मुझे झारखंड जाना था. तो में बस से सतना पहुंचा और रेलवे स्टेशन पर जाकर एक्सप्रेस ट्रेन का इंतजार करने लगा और उसमे मेरा एसी कोच में रिज़र्वेशन था. कुछ देर बाद ट्रेन आई और वो रात का वक़्त था.. तो ट्रेन आते ही में अपनी बोगी नंबर 13 में गया. वहां पर मेरे केबिन में पहले से एक कपल और एक मस्त सेक्सी औरत बैठी हुई थी. उनकी उम्र 35 साल की थी.. बेबी कट बाल और वो पीले कलर का सूट पहने हुई थी और वो कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी और वो दिखने में किसी अमीर खानदान की लग रही थी.. लेकिन उसको देखकर अजीब सा लग रहा था.. क्योंकि वो एकदम चुपचाप बैठी हुई कुछ सोच रही थी.

    मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और में अपनी बर्थ पर आकर बेग रखकर लेट गया और ऊपर बर्थ से नीची की तरफ बैठी उस औरत को देखने लगा.. उसने दुपट्टा डाल रखा था.. तो मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. हाँ.. लेकिन इतना अनुमान ज़रूर लग रहा था कि उसके बूब्स बड़े बड़े है और फिर धीरे धीरे वक़्त गुजरा और 8 घंटे के बाद जबलपुर आया. तो वो कपल वहां पर उतार गया और अब उस केबिन में और वो आंटी थी.. वो शायद सो गई थी.

    फिर जब मैंने उसके सीने का गोरापन देखा तो लगा कि मेरा तो वीर्य निकल ही जाएगा. तो में कुछ देर देखकर नीचे उतरा और टॉयलेट में जाकर उसके बूब्स को सोचकर मुठ मारकर वापस आया और फिर बाहर उसके पास में जाकर उसका दुपट्टा उठाया और उसके हाथ को हल्के से पकड़कर हिलाकर उसे जगाया और उसका दुपट्टा दिया. तो वो मुझसे धन्यवाद बोली. तो में उसी के पास में बैठ गया.. लेकिन वो शायद वो बहुत गहरी नींद में थी इसलिए उसका हाथ सीने से गिरकर मेरी जाँघ पर आ गया.

    मैंने थोड़ी देर बाद उसका हाथ पकड़ा औ लंड े पास तक ले जाकर रख दिया उसके हाथों की नरमाई ही मेरे जोश बड़ाने लगी थी और कुछ देर बाद वो जागी तो उसने झट से अपना हाथ खींच लिया.. लेकिन में उसके बहुत पास था. तभी उसने अपना मुहं खोलकर हवा को अंदर बाहर किया तो मुझे एकदम से शराब की बदबू आई और फिर में समझ गया कि यह नशे में है और इसको अपनी बातों में फंसाकर इसके साथ चुदाई करनी चाहिए.. में एकदम पास में बैठा उनसे बात करने लगा.. लेकिन वो मेरी हर हर बात का अधूरा सा जवाब दे रही थी.

    फिर मैंने उससे कहा कि आप बड़ी सुंदर हो.. तो वो हाँ बोली और फिर मैंने कहा कि मेरी शादी नहीं हुई. तो वो बोली कि मेरी तो हो गई है.. मैंने कहा कि बहुत अच्छा, आपके तो बहुत मज़े है यहाँ हमारा तो अपना हाथ जगन्नाथ है. यह बात मेरे मुहं से सुनते ही वो एकदम से मुझे देखने लगी. तो मैंने हल्के से उनका हाथ पकड़ा.. लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली तो मेरा साहस और बढ़ा. फिर मैंने उससे कहा कि आपके हाथ बहुत नरम है लगता है आप कोई भी काम नहीं करती. तो वो बोली कि काम तो रात में करते है और में झट से समझ गया कि यह ट्रेन मेरी लाईन पर आ रही है और मैंने उनका हाथ पकड़कर किस कर लिया..

    वो आखे बंद किए हुई थी और में हाथ पर हाथ फेरने लगा.. थोड़ा ऊपर थोड़ा ऊपर और ऊपर और एक वक़्त आया कि जब में धीरे धीरे अपना हाथ कंधे तक हाथ ले जाने लगा तो में कंधो के पास तक जाकर उसके बूब्स क छू रहा था और अचानक से मैंने उसके एक बूब्स को पकड़ लिया. तो उसने मेरे हाथ को पकड़कर कहा कि नहीं ऐसा मत करो और जब मैंने अपनी पकड़ ढीली की तो उसने अपना सूट ठीक किया.. लेकिन मेरा हाथ अब भी वहीं पर था और उसने मेरा हाथ नहीं हटाया और में अपना हाथ उसके सूट में डालने लगा और उसके मस्त जिस्म की गरमाहट पाकर मेरा लंड गरम हो गया और मेरी हिम्मत बहुत बढ़ गई थी.

    मैंने अब बूब्स को दबाना, सहलाना शुरू कर दिया था. वो बड़ी गहरी गहरी साँसे लेने ल गी.. शायद उसको भी अब आनंद आ रहा था.. मेरे शरीर के अंदर एक अजीब सी खलबली मच गई और मैंने उनसे कह दिया कि क्यों आंटी आपको अच्छा लग रहा है? वो हाँ बोली और मैंने कहा कि क्या में दोनों दबाऊ? तो वो ना ना हाँ ना ना हाँ बोली और मैंने दोनों दूध पकड़ लिए धीरे धीरे सहलाने लगा. फिर मैंने हाथ हटाए और पेट के पास से सूट में अंदर हाथ डालकर ऊपर ले गया और ब्रा के ऊपर से दूध दबाने लगा और में इस कोशिश में ना जाने कब उसकी जाँघो पर बैठ गया, मुझे खुद को पता नहीं चला.

    फिर मैंने थोड़ी देर तक बूब्स दबाए तो वो बोली कि ऊपर से तो उतरो मुझे वजन लग रहा और पास में बैठकर दबाओ. तो में उनके पास में आकर उनके बड़े ही मुलायम, गरम, जोश से भरे हुए बूब्स दबाने लगा. फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी क्या आपको दूध पिलाना अच्छा लगता है? वो बोली कि हाँ तो मैंने कहा कि मुझे पिलाओ ना. तो वो बोली कि तुम्हे जो करना हो कर लो.. लेकिन प्लीज मुझे तंग मत करो. फिर मैंने इसका पूरा फायदा उठाया और उनका सूट ऊपर करके ब्रा के ऊपर से ही दूध पीने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने ऊपर की तरफ देखा तो पाया वो मुझे बड़े गौर से देख रही थी और में उनकी तरफ मुस्कुराया.

    वो बोली कि तुम तो बड़ी जल्दी जल्दी करने लगे. तो मैंने कहा कि आप इतनी सेक्सी हो कि मुझसे अब रहा नहीं गया कसम से आंटी आप अगर मेरी होती तो में आपको अपनी रातों की रानी बना लेता.

    तो वो हंसी और फिर से आख बंद करने लगी और फिर मैंने उनसे कहा कि देखो आंटी रात का वक़्त है और यहाँ पर चलती हुई ट्रेन में कोई भी नहीं आएगा क्यों ना हम दोनों मज़ा करे? फिर कौन सा दोबारा हम लोगो को मिलना है.. तुम अपनी जगह और में अपनी जगह. तो वो बोली कि नहीं, सिर्फ इतना ही बहुत है और फिर मैंने उनको छोड़ दिया और उनके पास में बैठ गया. तो वो कुछ सोचने लगी. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और सहलाने लगा और फिर उसकी नज़र एकदम मेरे लंड पर पड़ी तो वो मेरे लंड को एकटक देखने लगी.

    मैंने कहा कि देखो यह आपके पास में है और इतना तना हुआ है और अगर एक बार आप पकड़ लोगी तो क्या होगा? तो वो बोली कि तुम क्या समझ रहे हो.. क्या मैंने पी रखी है और में बहुत नशे में हूँ? तो मैंने बोला कि नहीं मैंने यह सब तो कहा ही नहीं और तभी उसने मेरा लंड पकड़कर कहा कि अच्छा है यार. तो मैंने कहा कि फिर भी तो आप एकदम दूर भाग रही हो.. में कह तो रहा हूँ हमारा थोड़ी दूर का साथ है क्यों ना हम मज़ा लेते है? तो वो बोली कि यार अब क्या बताऊँ?

    फिर मैंने कहा कि कुछ मत बताओ.. बस मेरे और करीब आ जाओ. वो मेरे लंड को पकड़े हुए थी.. में उठा और मेरा लंड उसके गालो पर रगड़ गया और मैंने कहा कि देखो यह अपने आप अपनी राह में जा रहा है प्लीज़ आंटी. तो वो चिल्लाकर बोली कि छुओ मत मुझे.. तो मैंने कहा कि सॉरी. वो नशे में थी और में उसकी जाँघो के ऊपर बैठ गया और दोनों पैर आसपास कर लिए और उनके कंधे पर हाथ रखकर चूमने लगा. मुझे उनके एकदम चिकने गाल चूमने में बहुत मज़ा आ रहा था और में अपना एक हाथ उसकी सलवार में ले गया.

    फिर उनकी गरम चूत पर फेरने लगा और मैंने महससू किया कि उनकी चूत एकदम गीली हो गई थी. शायद वो अब मूड में आ गई. तो मैंने मौका देखकर धीरे से सलवार को नाड़ा खोला और धीरे से उनकी सलवार को नीचे किया. तो वो बोली कि रूको और मुझे अपने ऊपर से हटाकर खुद ही अपनी सलवार पेंटी नीचे सरकाने लगी और उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे.. मैंने उनसे कहा कि प्लीज हिलना मत और वो ऊपर की बर्थ को पकड़कर खड़ी हो गई.

    मैंने उसके सूट को हटाया और अपने ऊप ढक लिया और उसकी चूत चाटने लगा. उनकी चूत का नमकीन पानी था और मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट चाटकर साफ कर दिया और अब में फुल मूड में था और में उसके आगे से हटकर पीछे की तरफ गया और उसके चूतड़ो को फैलाया और बीच में मुहं करके उसकी चिकनी गांड को चाटने लगा और वो चुपचाप मज़ा ले रही थी.

    फिर में ऊपर उठा और पीछे से उसके बूब्स को पकड़कर दबाने लगा. उसके इतने बड़े बूब्स थे कि वो मेरे हाथ में नहीं आ रहे थे और ऊपर से उसकी गांड का साईज़ भी कम नहीं था. तो में उसके कंधे को चूमते हुए बोला कि वाह क्या मस्त फिगर है तुम्हारा.. तुम्हे चोदने में बहुत मज़ा आएगा और तुम्हारे जैसी औरतें ही लड़को के लंड की राते रंगीन करती है.

    वो बोली कि ज़्यादा मत बोलो.. मैंने अपने लंड को सेट किया और दोनों कूल्हो के बीच करके आगे की तरफ हुआ और कहा कि में सच कह रहा हूँ.. देखो मेरा लंड अपने आप अपनी जगह पर चला जा रहा है. फिर वो अपना एक हाथ पीछे की तरफ लाई और एकदम से लंड को पकड़कर अपनी चूत के पास कर लिया और बोली कि इसकी जगह यहाँ पर है. तो मैंने कहा कि हाँ यह अपना रास्ता भटक गया था फिसल गया था. वो क्या है कि आपके जैसी चिकनी चूत साथ में हो तो यही होगा.

    मैंने मुहं से सईईईईईई कहा और लंड को चूत में सटाकर आगे कर दिया. लंड अंदर जाते ही वो सईईईईईईईइ आआहहह उह्ह्ह्ह सिसकियाँ लेने लगी और मैंने एक धक्के में लंड को पूरा ही अंदर कर दिया. वो नशे में सम्भल ना पाई और गिरने लगी तो नीचे बैठने वाली पट्टी को पकड़ लिया और ऐसे में उसका चूतड़ और अच्छे से खुल गया.

    तो मैंने उसकी तारीफ की.. आपका यह पोज़ तो लाजवाब है और में कमर पकड़ कर चोदने लगा वो आअहहा अह्ह्ह्हह आईईईई आह्ह्ह करने लगी. तो थोड़ी देर बाद मैंने कहा कि आपको क्या दर्द हो रहा ऐसे?

    वो हाँ बोली और में पीछे से अलग हुआ और नीचे लेट गया.. मेरा लंड सीधा खड़ा था. वो अपना सूट दोनों हाथों में पकड़कर मेरे लंड पर चूतरखकर बैठ गई. पूरा लंड फिसलकर अंदर घुस गया वो आआआहह उह्ह्ह्ह बोली और मेरी छाती पर दोनों हाथ रखकर आगे पीछे होने लगी और ट्रेन के हिलने के कारण उससे ज़्यादा हिलना नहीं हो रहा था.

    मैंने उसके दोनों बूब्स को पकड़ा और कहा कि थोड़ा ऊपर हो जाओ वो ऊपर की तरफ हुई तो में नीचे से धक्के देकर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.. ठप ठप फक फक की आवाज़ और उसकी सिसकियों की आवाज़ आने लगी. तो में चोदने से मस्ती में आ गया था और वो जोश में आकर चुद रही थी.. लेकिन में थोड़ी देर ही चोद पाया. फिर वो बोली कि मेरे पैर दर्द हो रहे.. तो मैंने उसको पकड़ा, नीचे लेटाया और फिर से लंड को चूत में डालकर चोदने लगा और दोनों बूब्स को तो में ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और वो ओह्ह्हह्ह्ह्ह सीईईईईइ आह्ह्ह्ह कह रही थी.

    फिर मैंने कहा कि आप अपनी गांड में ले लो.. लेकिन उसने एकदम साफ मना कर दिया. तो मैंने सोचा कि चूत मिल रही है तो इसी को चोदो.. में ताक़त वाले धक्के मारने लगा.. तब जाकर उसके मुहं से निकला आह्ह्ह्हह कितना बड़ा लंड है.. चोदो मुझे और में जोश में आकर चोदने लगा और कुछ ही देर में मुझे लगने लगा कि मेरा काम तमाम होने वाला है और मैंने कहा कि तुम बहुत सेक्सी हो और तुम्हारी चूत में जन्नत है और वो आह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह कहने लगी. तभी मैंने अपना लंड निकाला तो तुरंत ही पिचकारी निकली उसके सूट पर गिर गई और मैंने उसके पूरे सूट पर ही वीर्य गिरा दिया.

    वो बोली कि ओह तुमने मेरा सूट खराब कर दिया और फिर मैंने कहा कि जो मज़ा दिया उसके आगे सब चलेगा. तो वो मेरे नीचे से हटी और में अपने कपड़े पहने लगा कि अब उसका नशा उतर गया था.

    तो वो उठी अपना बेग खोला और जल्दी से सूट निकाला और अपना सूट उतारा. मैंने उस वक़्त उसी सन्दरता देखी वो गजब की औरत थी.. में आगे गया और मैंने उसको पकड़ लिया और उसकी पीठ पर किस किया और कहा कि तुम पूरे विश्व की सबसे सेक्सी औरत हो. फिर वो कपड़े पहन कर बैठ गई और मैंने कहा कि धन्यवाद.. वो चुप रही.

    फिर वो बोली कि अब कुछ करने की कोशिश मत करना.. तो में दूर हो गया और अपनी जगह पर आकर लेट गया. मुझे पता नहीं चला कब नींद आ गई और सुबह जब उठा तो ट्रेन रुकी हुई थी और वो उतरने जा रही थी. में झट से उतरा और उसके पास जाकर खड़ा हुआ.. लेकिन वो मुझे अनदेखा करके आगे चली गई और में उसको जाता हुआ खड़ा खड़ा देखता रहा और वो चली गई.. लेकिन अपनी छाप मुझमे छोड़ गई.

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    Cuckold fun, mind blowing fun 

    मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और बलबला कर उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया। मैं नेहा की कोरी चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, “बहन की लौड़ी दीदी! जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!” और आराम से सिगरेट सुलगाकर अपनी पीठ टिका कर पीने लगा। नेहा ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया, पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर नेहा के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसाता रहा। दस मिनट बाद मैंने नेहा को बोला, “चलो आज आपको घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ। मेरी प्यारी दीदी! करोगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?” नेहा ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “अनिल कैसे घोड़े की सवारी? तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में चोदूँ?” मैंने कहा, “हाँ दीदी! आपको तो सब पता है… पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए।” नेहा मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले। जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया। नेहा बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी। दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, “नेहा दीदी! अब आप अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे करो और लंड सवारी का मज़ा लो।” इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा। नेहा की हिम्मत मुझे माननी पड़ी कि दर्द होने के बावजूद भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार करीब आधे घंटे तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का फाऊँटेन उसकी चूत में गिरा दिया और नेहा को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे। करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा नेहा सिगरेट पीते हुए मेरे लंड से खेल और चूस रही थी। जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी। मैंने भी कहा, “दीदी! चूसो इसे… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने नेहा से कहा, “नेहा दीदी! आपको ये तो मानना पड़ेगा कि आज भी और आगे भी मैं जब आपको चोद कर ये सुख दूँगा, ये सब आपकी मम्मी की वजह से ही मुमकीन हुआ है।” नेहा तपाक से बोली, “यू आर राइट अनिल! ऑल थैंक्स टू मम्मी! अगर मम्मी नहीं मानतीं तो पता नहीं मेरी चूत कब चुदती।” मैंने कहा, “फिर तो दीदी ये गलत बात है कि हम दोनों अंदर इतना मज़ा ले रहे हैं और आपकी मम्मी बाहर अपनी चूत अपनी उँगली से ठंडी कर रही है। मेरी बड़ी इच्छा है कि आप दोनों को मैं एक ही पलंग पर एक साथ नंगा करके चोदूँ।” नेहा फ़ोरन ही तैयार हो गयी और बोली, “मैं अभी जा कर मम्मी को बुला कर लाती हूँ।” मैंने कहा, “नहीं! आप बैठ कर एक ड्रिंक और सिगरेट पियो। मैं आपकी मम्मी को लाता हूँ।” मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि ममता आंटी अपना ब्लाऊज़ उतार कर ब्रा और पेटीकोट में लेटी हुई थी और अपना पेटीकोट कमर तक उठा कर स्मोक करते हुए अपने वाइब्रेटर से मुठ मार रही थीं। मुझे देख कर बोली, “क्या बात है अनिल! नेहा ठीक तो है ना?” ममता आंटी की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं। मैंने कहा, “डार्लिंग घबराओ नहीं! मेरा लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की। अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है। चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है। इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी। तुम्हारी तरह वाइब्रेटर से ठंडी नहीं होगी।” ममता आंटी बोली, “क्या बात है (हुच्च) तू बाहर कैसे आ गया?” मैंने कहा, “ममता मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ और तुम्हारी चूत बजाऊँ।” ममता आंटी बोली, “व्हॉट? ऑर यू क्रेज़ी? (हुच्च) मुझे अपनी बेटी (हुच्च) के सामने चुदाने में शरम आती है।” नेहा जो शायद दरवाजे पर खड़ी हो कर हमारी बातें सुन रही थी, सिर्फ़ सैंडल पहने नंगी ही एक दम बाहर आ गयी और बोली, “मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना। मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है।” ममता आंटी उठ कर खड़ी हुईं तो गिरते-गिरते बचीं। उन्होंने काफ़ी ड्रिंक कर रखी थी और नशे और हाई पेन्सिल हील की सैण्डलों की वजह से उनका बैलेंस बिगड़ गया पर नेहा ने उनको अपनी बाहों में भर लिया। मैने भी पीछे से जा कर ममता आंटी की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबा लिया और ममता आंटी को बीच में दबाये हुए बेडरूम में ले कर आ गये क्योंकि वो नशे में अपने आप चलने की सूरत में नहीं थीं। मैंने नेहा को कहा, “चलो दीदी! अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ।” मैंने ममता आंटी की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं। नेहा ने भी ममता आंटी के सारे कपड़े उतार दिये और बोली, “लो अनिल अबकी बार मेरी मम्मी की चूत की सिकाई करो।” क्या नज़ारा था दोस्तों! अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ हाई हील सैण्डलों में, मेरे सामने थीं। मैंने भी नंगी ममता आंटी को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, “ममता डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा और जैसे तुमने उस दिन कहा था कि कोरी चूत तो नहीं दे सकी पर अपनी कोरी गाँड मरवाऊँगी, तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड का उद्घाटन करूँगा। अपनी गाँड मरवाओगी ना ममता डार्लिंग।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, “मेरे गाँडू राजा! मैं तुझे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ। साले (हुच्च) तू… तूने… मेरी चूत मारी… मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और…. और… यहाँ तक की साले चूतिये तूने मेरे सैण्डलों और पैरों को भी नहीं छोड़ा…. बोल साले भोसड़ी के… (हुच्च) तुझे कभी मैंने ना कहा क्या… हैं? तो इसके बाद क्या पूछता है… जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, अब गाँड मारनी है… तो साले गाँड मार ले, पर मेरी गाँड जरा प्यार से मारना, मैंने आज तक (हुच्च) तेरे अंकल को उँगली तक नहीं लगाने दी।” मैंने कहा, “डार्लिंग तुम बस आराम से एक और ड्रिंक लगा कर कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ… मैं अपना लंड नेहा से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ।” ममता आंटी ने ड्रिंक बनाने की बजाये व्हिस्की की बोत्तल ही मुँह से लगा कर पीने लगी। मुझे पहले तो चिंता हुई कि कहीं इतना पीने से बिल्कुल ही पस्त हो कर सो ना हो जायें और मेरा सब प्लैन चोपट हो जाये पर फिर ख्याल आया कि आंटी पीने की आदी हैं। वैसे तो आम-तौर से वो लिमिट में ही पीती हैं पर पहले भी मैंने उन्हें ज्यादा पी कर नशे में धुत्त देखा है और जब भी ममता आंटी नशे में कंट्रोल के बहार हुई हैं तब वो पस्त या शाँत होने की बजाय हमेशा काफ़ी बेकाबू और ज्यादा उत्तेजित ही हुई हैं। यही सोच कर मैंने नेहा को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, “लो नेहा दीदी! चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये। देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी। ममता! देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये। ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी। देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है।” मैं नेहा का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा। इतनी देर में ममता आंटी भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी। मैने नेहा के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, “दीदी चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये… अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आपकी मम्मी को ज्यादा तकलीफ न हो।” नेहा ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और ममता आंटी की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, “अनिल! मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है। मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है।”

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    Bigg boss 2 ashwariya 👅👅👅

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    Aishwarya without abhi shake :) 

    ज्वाला देवी के प्रति रंजना के मन में बड़ा अजीब सा भाव उत्पन्न हो गया था। उसकी नज़र में वो इतनी गिर गयी थी कि उसके सारे आदर्शो, पतिव्रता के ढोंग को देख देख कर उसका मन गुस्से के मारे भर उठा था। उसके सारे कार्यों में रंजना को अब वासना और बदचलनी के अलावा कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा था। मगर अपनी मम्मी के बारे में इस तरह के विचार आते आते कभी वो सोचने लगती थी कि जिस काम की वजह से मम्मी बुरी है वही काम करवाने के लिये तो वो खुद भी अधीर है। वास्तविकता तो ये थी कि आजकल रंजना अपने अंदर जिस आग में जल रही थी, उसकी झुलस की वो उपेक्षा कर ही नहीं सकती थी। जितना बुरा गलत काम करने वाला होता है उतना ही बुरा गलत काम करने के लिये सोचने वाला भी होता है। बस! अगर ज्वाला देवी की गलती थी तो सिर्फ़ इतनी कि असमय ही चुदाई की आग रंजना के अंदर उसने जलायी थी। अभी उस बेचारी की उम्र ऐसी कहाँ थी कि वो चुदाई करवाने के लिये प्रेरित हो अपनी चूत कच्ची ही फ़ुड़वाले। बिरजु और ज्वाला देवी की चुदाई का जो प्रभाव रंजना पर पड़ा, उसने उसके रास्ते ही मोड़ कर रख दिये थे। उस रोज़ से ही किसी मर्द से चुदने के लिये उसकी चूत फ़ड़क उठी थी। कईं बार तो चूत की सील तूड़वाने के लिये वो ऐसी ऐसी कल्पनायें करती कि उसका रोम-रोम सिहर उठता था। अब पढ़ायी लिखायी में तो उसका मन कम था और एकान्त कमरे में रह कर सिर्फ़ चुदाई के खायाल ही उसे आने लगे थे। कईं बार तो वो गरम हो कर रात में ही अपने कमरे का दरवाजा ठीक तरह बंद करके एकदम नंगी हो जाया करती और घन्टो अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को दबाने और चूत को खुजाने से जब वो और भी गर्माँ जाती थी तो नंगी ही बिस्तर पर गिर कर तड़प उठती थी, कितनी ही देर तक अपनी हर्कतो से तंग आ कर वो बुरी तरह छटपटाती रहती और अन्त में इसी बेचैनी और दर्द को मन में लिये सो जाती थी। उन्ही दिनों रंजना की नज़र में एक लड़का कुछ ज्यादा ही चढ़ गया था। नाम था उसका मृदुल। उसी की क्लास में पढ़ता था। मृदुल देखने में बेहद सुन्दर-स्वस्थ और आकर्षक था, मुश्किल से दो वर्ष बड़ा होगा वो रंजना से, मगर देखने में दोनों हम उम्र ही लगते थे। मृदुल का व्यव्हार मन को ज्यादा ही लुभाने वाला था। न जाने क्या खासियत ले कर वो पैदा हुआ होगा कि लड़कियाँ बड़ी आसानी से उसकी ओर खींची चली आती थीं। रंजना भी मृदुल की ओर आकर्षित हुए बिना न रह सकी। मौके बेमौके उससे बात करने में वो दिलचस्पी लेने लगी। खूबसुरती और आकर्षण में यूँ तो रंजना भी किसी तरह कम न थी, इसलिये मृदुल दिलोजान से उस पर मर मिटा था। वैसे लड़कियों पर मर मिटना उसकी आदत में शामिल हो चुका था, इसी कारण रंजना से दो वर्ष बड़ा होते हुए भी वो अब तक उसी के साथ पढ़ रहा था। फेल होने को वो बच्चों का खेल मानता था। बहुत ही जल्द रंजना और मृदुल में अच्छी दोस्ती हो गयी। अब तो कॉलेज में और कॉलेज के बाहर भी दोनों मिलने लगे। इसी क्रम के साथ दोनों की दोस्ती रंग लाती जा रही थी। उस दिन रंजना का जन्म दिन था, घर पर एक पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें परिचित व रिश्तेदारों के अलावा ज्यादातर संख्या ज्वाला देवी के चूत के दिवानों की थी। आज बिरजु भी बड़ा सज धज के आया था, उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वो एक रद्दी वाला है। रंजना ने भी मृदुल को इस दावत के लिये इनविटेशन कार्ड भेजा था, इसलिये वो भी पार्टी में शामिल हुआ था। जिस तरह ज्वाला देवी अपने चूत के दिवानों को देख-देख कर खुश हो रही थी उसी तरह मृदुल को देख कर रंजना के मन में भी फ़ुलझड़ियाँ सी फूट रहीं थीं। वो आज बे-इन्तहा प्रसन्न दिखायी पड़ रही थी। पार्टी में रंजना ज्यादातर मृदुल के साथ ही रही। ज्वाला देवी अपने यारों के साथ इतनी व्यस्त थी कि रंजना चाहते हुए भी मृदुल का परिचय उससे न करा सकी। मगर पार्टी के समाप्त हो जाने पर जब सब मेहमान विदा हो गये तो रंजना ने जानबूझ कर मृदुल को रोके रखा। बाद में ज्वाला देवी से उसका परिचय कराती हुई बोली, “मम्मी ! ये मेरे खास दोस्त मृदुल हैं।” “ओहह ! हेंडसम बॉय।” ज्वाला देवी ने साँस सी छोड़ी और मृदुल से मिल कर वो जरूरत से ज्यादा ही प्रसन्नता ज़ाहिर करने लगी। उसकी निगाहें बारबार मृदुल की चौड़ी छाती, मजबूत कन्धों, बलशाली बाँहों और मर्दाने सुर्ख चेहरे पर ही टिकी रही। रंजना को अपनी मम्मी का यह व्यव्हार और उसके हाव-भाव बड़े ही नागवार गुज़र रहे थे। मगर वो बड़े धैर्य से अपने मन को काबू में किये सब सहे जा रही थी। जबकि ज्वाला देवी पर उसे बेहद गुस्सा आ रहा था। उसे यूँ लग रहा था जैसे वो मृदुल को उससे छीनने की कोशिश कर रही है। मृदुल से बातें करने के बीच ज्वाला देवी ने रंजना की तरफ़ देख कर बदमाश औरत की तरह नैन चलाते हुए कहा, “वाह रंजना ! कुछ भी हो, मृदुल… अच्छी चीज़ ढूँढी है तुमने, दोस्त हो तो मृदुल जैसा।” अपनी बात कह कर कुछ ऐसी बेशर्मी से मुस्कराते हुए वो रंजना की तरफ़ देखने लगी कि बेचारी रंजना उसकी निगाहों का सामना न कर सकी और शर्मा कर उसने अपनी गर्दन झुका ली। ज्वाला देवी ने मृदुल को छाती से लगा कर प्यार किया और बोली, “बेटा ! इसे अपना ही घर समझ कर आते रहा करो, तुम्हारे बहाने रंजना का दिल भी बहल जाया करेगा, ये बेचारी बड़ी अकेली सी रहती है।” “यस आन्टी ! मैं फिर आऊँगा।” मृदुल ने मुसकुरा कर उसकी बात का जवाब दिया और उसने जाने की इजाज़त माँगी, रंजना एक पल भी उसे अपने से अलग होने देना नहीं चाहती थी, मगर मजबूर थी। मृदुल को छोड़ने के लिये वो बाहर में गेट तक आयी। विदा होने से पहले दोनों ने हाथ मिलाया तो रंजना ने मृदुल का हाथ ज़ोर से दबा दिया, इस पर मृदुल रहस्य से उसकी तरफ़ मुसकुराता हुआ वहाँ से चला गया। अब आलम ये था कि दोनों ही अक्सर कभी रेस्तोराँ में तो कभी पार्क में या सिनेमा हाल में एक साथ होते थे। पापा सुदर्शन की गैरमौजूदगी का रंजना पूरा-पूरा लाभ उठा रही थी। इतना सब कुछ होते हुए भी मृदुल का लंड चूत में घुसवाने का सौभाग्य उसे अभी तक प्राप्त न हो पाया था। हाँ, चूमा चाटी तक नौबत अवश्य जा पहुंची थी। रोज़ाना ही एक चक्कर रंजना के घर का लगाना मृदुल का परम कर्तव्य बन चुका था। सुदर्शन जी की खबर आयी कि वे अभी कुछ दिन और मेरठ में रहेंगे। इस खबर को सुन कर माँ बेटी दोनों का मानो खून बढ़ गया हो। रंजना रोजाना कॉलेज में मृदुल से घर आने का आग्रह बार-बार करती थी। जाने क्या सोच कर ज्वाला देवी के सामने आने से मृदुल कतराया करता था। वैसे रंजना भी नहीं चाहती थी कि मम्मी के सामने वो मृदुल को बुलाये। इसलिये अब ज्यादातर चोरी-चोरी ही मृदुल ने उसके घर जाना शुरु कर दिया था। वो घन्टों रंजना के कमरे में बैठा रहता और ज्वाला देवी को ज़रा भी मालूम नहीं होने पाता था। फिर वो उसी तरह से चोरी-चोरी वापस भी लौट जाया करता था। इस प्रकार रंजना उसे बुला कर मन ही मन बहुत खुश होती थी। उसे लगता मानो कोई बहुत बड़ी सफ़लता उसने प्राप्त कर ली हो। चुदाई संबंधों के प्रति तरह-तरह की बातें जानने की इच्छा रंजना के मन में जन्म ले चुकी थी, इसलिये उन्ही दिनों में कितनी चोदन विषय पर आधारित पुस्तकें ज्वाला देवी के कमरे से चोरी-चोरी निकाल कर वो काफ़ी अध्य्यन कर रही थी। इस तरह जो कुछ उस रोज़ ज्वाला देवी व बिरजु के बीच उसने देखा था इन चोदन समबन्धी पुस्तकों को पढ़ने के बाद सारी बातों का अर्थ एक-एक करके उसकी समझ में आ गया था। और इसी के साथ साथ चुदाई की ज्वाला भी प्रचण्ड रूप से उसके अंदर बढ़ उठी थी। फिर सुदर्शनजी मेरठ से वापिस आ गये और माँ का बिरजु से मिलना और बेटी का मृदुल से मिलना कम हो गया। फिर दो महीने बाद रंजना के छोटे मामा की शादी आ गयी और उसी समय रंजना के फायनल एग्जाम भी आ गये। ज्वाला देवी शादी पर अपने मायके चली गयी और रंजना पढ़ाई में लग गई। उधर शादी सम्पन्न हो गई और इधर रंजना की परीक्षा भी समाप्त हो गई, पर ज्वाला देवी ने खबर भेज दी कि वह १५ दिन बाद आयेगी। सुदर्शनजी ऑफिस से शाम को कुछ जल्द आ जाते। ज्वाला के नहीं होने से वे प्रायः रोज ही शाज़िया की मारके आते इसलिये थके हारे होते और प्रायः जल्द ही अपने कमरे में चले जाते। रंजना और बेचैन रहने लगी और एक दिन जब पापा अपने कमरे में चले गये तो रंजना के वहशीपन और चुदाई नशे की हद हो गयी। हुआ यूँ कि उस रोज़ दिल के बहकावे में आ कर उसने चुरा कर थोड़ी सी शराब भी पी ली थी। शराब का पीना था कि चुदाई की इच्छा का कुछ ऐसा रंग उसके सिर पर चढ़ा कि वो बेहाल हो उठी। दिल की बेचैनी और चूत की खाज से घबड़ा कर वो अपने बिस्तर पर जा गिरी और बर्दाश्त से बाहर चुदाई की इच्छा और नशे की अधिकता के कारण वो बेचैनी से बिस्तर पर अपने हाथ पैर फेंकने लगी और अपने सिर को ज़ोर-ज़ोर से इधर उधर झटकने लगी। कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, दरवाजे पर एकमात्र परदा टंगा हुआ था। रंजना को ज़रा भी पता न चला कि कब उसके पापा उसके कमरे में आ गये। वे चुपचाप उसके बिस्तर तक आये और रंजना को पता चलने से पहले ही वे झुके और रंजना के चेहरे पर हाथ फेरने लगे फिर एकदम से उसे उठा कर अपनी बाँहों में भींच लिया। इस भयानक हमले से रंजना बुरी तरह से चौंक उठी, मगर अभी हाथ हिलाने ही वाली थी कि सुदर्शन ने उसे और ज्यादा ताकत लगा कर जकड़ लिया। अपने पापा की बाँहों में कसी होने का आभास होते ही रंजना एकदम घबड़ा उठी, पर नशे की अधिकता के कारण पापा का यह स्पर्श उसे सुहाना लगा। तभी सुदर्शनजी ने उससे प्यार से पुछा, “क्यों रंजना बेटा तबियत तो ठीक है न। मैं ऐसे ही इधर आया तो तुम्हें बिस्तर पर छटपटाते हुए देखा… और यह क्या तुम्हारे मुँह से कैसी गन्ध आ रही है।” रंजना कुछ नहीं बोल सकी और उसने गर्दन नीचे कर ली। सुदर्शनजी कई देर बेटी के सर पर प्यार से हाथ फेरते रहे और फिर बोले, “मैं समझता हूँ कि तुम्हें मम्मी की याद आ रही है। अब तो हमारी बेटी पूरी जवान हो गई है। तुम अकेली बोर हो रही हो। चलो मेरे कमरे में।” रंजना मन्त्र मुग्ध सी पापा के साथ पापा के कमरे में चल पड़ी। कमरे में टेबल पर शराब की बोतलें पड़ी थीं, आईस बॉक्स था और एक तश्तरी में कुछ काजू पड़े थे। पापा सोफ़े पर बैठे और रंजना भी पापा के साथ सोफ़े पर बैठ गई। सुदर्शनजी ने एक पेग बनाया और शराब की चुसकियाँ लेने लगे। इस दौरान दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई। तभी सुदर्शन ने मौन भंग किया। “लो रंजना थोड़ी पी लो तो तुम्हें ठीक लगेगा तुम तो लेती ही हो।” अब धीरे धीरे रंजना को स्थिती का आभास हुआ तो वह बोली, “पापा आप यह क्या कह रहे हैं?” तभी सुदर्शन ने रंजना के भरे सुर्ख कपोलों (गालों) पर हाथ फेरना शुरु किया और बोले, “लो बेटी थोड़ी लो शर्माओ मत। मुझे तो पता ही नहीं चला कि हमारी बेटी इतनी जवान हो गई है। अब तो तुम्हारी परीक्षा भी खतम हो गई है और मम्मी भी १५ दिन बाद आयेगी। अब जब तक मैं घर में रहूँगा तुम्हें अकेले बोर होने नहीं दूँगा।” यह कहते हुए सुदर्शन ने अपना गिलास रंजना के होंठों के पास किया। रंजना नशे में थी और उसी हालत में उसने एक घूँट शराब का भर लिया। सुदर्शन ने एक के बाद एक तीन पेग बनाये और रंजना ने भी २-३ घूँट लिये। रंजना एक तो पहले ही नशे में थी और शराब की इन २-३ और घूँटों की वजह से वह कल्पना के आकाश में उड़ने लगी। अब सुदर्शनजी उसे बाँहों में ले हल्के-हल्के भींच रहे थे। सुदर्शन को शाज़िया जैसी जवान चूत का चस्का तो पहले ही लगा हुआ था, पर १९ साल की इस मस्त अनछुई कली के सामने शाज़िया भी कुछ नहीं थी। इन दिनों रंजना के बारे में उनके मन में बूरे ख्याल पनपने लगे थे पर इसे कोरी काम कल्पना समझ वे मन से झटक देते थे। पर आज उन्हें अपनी यह कल्पना साकार होती लगी और इस अनायास मिले अवसर को वे हाथ से गँवाना नहीं चाहते थे। रंजना शराब के नशे में और पिछ्ले दिनों मृदुल के साथ चुदाई की कल्पनाओं से पूरी मस्त हो उठी और उसने भी अपनी बाँहें उठा कर पापा की गर्दन में डाल दी और पापा के आगोश में समा अपनी कुँवारी चूचियाँ उनकी चौड़ी छाती पर रगड़नी शुरु कर दीं। रंजना का इतना करना था कि सुदर्शन खुल कर उसके शरीर का जायका लूटने पर उतर आया। अब दोनों ही काम की ज्वाला में फुँके हुए जोश में भर कर अपनी पूरी ताकत से एक दूसरे को दबाने और भींचने लगे। तभी सुदर्शन ने सहारा देकर रंजना को अपनी गोद में बिठा लिया। रंजना एक बार तो कसमसाई और पापा की आँखों की तरफ़ देखी। तब सुदर्शन ने कहा। “आह! इस प्यारी बेटी को बचपन में इतना गोद में खिलाया है। पर इन दिनों में मैने तुम्हारी ओर ध्यान ही नहीं दिया। सॉरी, और तुम देखते-देखते इतनी जवान हो गई हो। आज प्यारी बेटी को गोद में बिठा खूब प्यार करेंगे और सारी कसर निकाल देंगे।” सुदर्शन ने बहुत ही काम लोलुप नज़रों से रंजना की छातियों की तरफ़ देखाते हुए कहा। परन्तु मस्ती और नशे में होते हुए भी रंजना इस ओर से लापरवाह नहीं रह सकी कि कमरे का दरवाजा खुला था। वह एकाएक पापा की गोद से उठी और फ़टाफ़ट उसने कमरे का दरवाजा बंद किया। दरवाजा बंद करके जैसे ही लौटी तो सुदर्शन सम्भल कर खड़ा हो चुका था और वासना की भूख उसकी आँखों में झलकने लगी। वो समझ गया कि बेटी चुदने के लिये खुब ब खुद तैयार है तो अब देर किस बात की। पापा ने खड़े-खड़े ही रंजना को पकड़ लिया और बुरी तरह बाँहों में भींच कर वे पागलो की तरह ज़ोर- ज़ोर से उसके गालों पर कस कर चुम्मी काटने लगे। गालों को उन्होने चूस-चूस कर एक मिनट में ही कशमीरी सेब की तरह सुरंग बना कर रख दिया। मस्ती से रंजना की भी यही हालत थी, मगर फिर भी उसने गाल चुसवात- चुसवाते सिसक कर कहा, “हाय छोड़ो न पापा आप यह कैसा प्यार कर रहे हैं। अब मैं जाती हूँ अपने कमरे में सोने के लिये।” पर काम लोलुप सुदर्शन ने उसकी एक न सुनी और पहले से भी ज्यादा जोश में आ कर उसने गाल मुँह में भर कर उन्हे पीना शुरु कर दिया। “ऊँऊँऊँऊँ हूँ… अब नहीं जाने दूँगा। मेरे से मेरी जवान बेटी की तड़प और नहीं देखी जाती। मैने तुम्हें अपने कमरे में तड़पते मचलते देखा। जानती हो यह तुम्हारी जवानी की तड़प है। तुम्हें प्यार चाहिये और वह प्यार अब मैं तुझे दूँगा।” मजबूरन वो ढीली पड़ गयी। बस उसका ढीला पड़ना था कि हद ही कर दी सुदर्शन ने। वहीं ज़मीन पर उसने रंजना को गिरा कर चित्त लिटा लिया और झपट कर उसके उपर चढ़ बैठा। इसी खीँचातानी में रंजना का स्कर्ट जाँघों तक खिसक गया और उसकी गोरी-गोरी तन्दुरुस्त जाँघें साफ़ दिखायी देने लगी। बेटी की इतनी लंड मार आकर्शक जाँघों को देखते ही सुदर्शन बदवास और खुँख्वार पागल हो उठा। सारे धैर्य की माँ चोद कर उसने रख दी, एक मिनट भी चूत के दर्शन किये बगैर रहना उसे मुश्किल हो गया था। अगले पल ही झटके से उसने रंजना का स्कर्ट खींच कर फ़ौरन ही उपर सरका दिया। उसका विचार था कि स्कर्ट के उपर खींचे जाते ही रंजना की कुँवारी चूत के दर्शन उसे हो जायेंगे और वो जल्दी ही उसमें डुबकी लगा कर जीभर कर उसमें स्नान करने का आनंद लूट सकेगा, मगर उसकी ये मनोकामना पूरी न हो सकी, क्योंकि रंजना स्कर्ट के नीचे कतई नंगी नहीं थी बल्कि उसके नीचे पैन्टी पहने हुये थी। चूत को पैन्टी से ढके देख कर पापा को बड़ी निराशा हुई। रंजना को भी यदि यह पता होता कि पापा उसके साथ आज ऐसा करेंगे तो शायद वह पैन्टी ही नहीं पहनती। रंजना सकपकाती हुई पापा की तरफ़ देख रही थी कि सुदर्शन शीघ्रता से एकदम उसे छोड़ कर सीधा बैठ गया। एक निगाह रंजना की जाँघों पर डाल कर वो खड़ा हो गया और रंजना के देखते देखते उसने जल्दी से अपनी पैन्ट और कमीज़ उतार दी। इसके बाद उसने बनियान और अन्डरवेयर भी उतार डाला और एकदम मादरजात नंगा हो कर खड़ा लंड रंजना को दिखाने लगा। अनुभवी सुदर्शन को इस बात का अच्छी तरह से पता था कि चुदने के लिये तैयार लड़की मस्त खड़े लंड को अपनी नज़रों के सामने देख सारे हथियार डाल देगी। इस हालत में पापा को देख कर बेचारी रंजना उनसे निगाहे मिलाने और सीधी निगाहों से लंड के दर्शन करने का साहस तक न कर पा रही थी बल्कि शर्म के मारे उसकी हालत अजीब किस्म की हो चली थी। मगर न जाने नग्न लंड में कशिश ही ऐसी थी कि अधमुँदी पलकों से वो बारबार लंड की ही ओर देखती जा रही थी। उसके सगे बाप का लंड एक दम सीधा तना हुआ बड़ा ही सख्त होता जा रहा था। रंजना ने वैसे तो बिरजु के लंड से इस लंड को न तो लंबा ही अनुभव किया और न मोटा ही मगर अपनी चूत के छेद की चौड़ाई को देखते हुए उसे लगा कि पापा का लंड भी कुछ कम नहीं है और उसकी चूत को फाड़ के रख देगा। नंगे बदन और जाँघों के बीच तनतनाते सुर्ख लंड को देख कर रंजना की चुदाई की इच्छा और भी भयंकर रूप धारण करती जा रही थी। जिस लंड की कल्पना में उसने पिछले कई महीने गुजारे थे वह साक्षात उसकी आँखों के सामने था चाहे अपने पापा का ही क्यों न हो। तभी सुदर्शन जमीन पर चित लेटी बेटी के बगल में बैठ गया। वह बेटी की चिकनी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। उसने बेटी को खड़ा लंड तो नंगा होके दिखा ही दिया अब वह उससे कामुक बातें यह सोच कर करने लगा कि इससे छोकरी की झिझक दूर होगी। फिर एक शर्माती नई कली से इस तरह के वासना भरे खेल खेलने का वह पूरा मजा लेना चाहता था। “वाह रंजना! इन वर्षों में क्या मस्त माल हो गई हो। रोज मेरी नज़रों के सामने रहती थी पर देखो इस ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया। वाह क्या मस्त चिकनी चिकनी जाँघें हैं। हाय इन पर हाथ फेरने में क्या मजा है। भई तुम तो पूरी जवान हो गई हो और तुम्हें प्यार करके तो बड़ा मजा आयेगा। हम तो आज तुम्हें जी भर के प्यार करेंगें और पूरा देखेंगें कि बेटी कितनी जवान हो गई है!” फिर सुदर्शन ने रंजना को बैठा दिया और शर्ट खोल दिया। शर्ट के खुलते ही रंजना की ब्रा में कैद सख्त चूचियाँ सिर उठाये वासना में भरे पापा को निमंत्रण देने लगीं। सुदर्शन ने फौरन उन पर हाथ रख दिया और उन्हें ब्रा पर से ही दबाने लगा। “वाह रंजना तुमने तो इतनी बड़ी -बड़ी कर लीं। तुम्हारी चिकनी जाँघों की ही तरह तुम्हारी चूचियाँ भी पूरी मस्त हैं। भई हम तो आज इनसे जी भर के खेलेंगे, इन्हें चूसेंगे!” यह कह कर सुदर्शन ने रंजना की ब्रा उतार दी। ब्रा के उतरते ही रंजना की चूचियाँ फुदक पड़ी। रंजना की चूचियाँ अभी कच्चे अमरूदों जैसी थीं। अनछुयी होने की वजह से चूचियाँ बेहद सख्त और अंगूर के दाने की तरह नुकीली थीं। सुदर्शन उनसे खेलने लगा और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। रंजना मस्ती में भरी जा रही थी और न तो पापा को मना ही कर रही थी और न ही कुछ बोल रही थी। इससे सुदर्शन की हिम्मत और बढ़ी और बोला, “अब हम प्यारी बेटी की जवानी देखेंगे जो उसने जाँघों के बीच छुपा रखी है। जरा लेटो तो।” रंजना ने आँखें बंद कर ली और चित लेट गई। सुदर्शन ने फिर एक बार चिकनी जाँघों पर हाथ फेरा और ठीक चूत के छेद पर अंगुल से दबाया भी जहाँ पैन्टी गिली हो चुकी थी। “हाय रन्जू! तेरी चूत तो पानी छोड़ रही है।” यह कहके सुदर्शन ने रंजना की पैन्टी जाँघों से अलग कर दी। फिर वो उसकी जाँघों, चूत, गाँड़ और कुंवारे मम्मों को सहलाते हुए आहें भरने लगा। चूत बेहद गोरी थी तथा वहाँ पर रेशमी झाँटों के हल्के हल्के रोये उग रहे थे। इसलिये बेटी की इस अनछुई चूत पर हाथ सहलाने से सुदर्शन को बेहद मज़ा आ रहा था। सख्त मम्मों को भी दबाना वो नहीं भूला था। इसी दौरान रंजना का एक हाथ पकड़ कर उसने अपने खड़े लंड पर रख कर दबा दिया और बड़े ही नशीले स्वर में बोला, “रंजना! मेरी प्यारी बेटी! लो अपने पापा के इस खिलौने से खेलो। ये तुम्हारे हाथ में आने को छटपटा रहा है मेरी प्यारी प्यारी जान.. इसे दबाओ आह!” लंड सहलाने की हिम्मत तो रंजना नहीं कर सकी, क्योंकि उसे शर्म और झिझक लग रही थी। मगर जब पापा ने दुबारा कहा तो हलके से उसने उसे मुट्ठी में पकड़ कर भींच लिया। लंड के चारों तरफ़ के भाग में जो बाल उगे हुए थे, वो काले और बहुत सख्त थे। ऐसा लगता था, जैसे पापा शेव के साथ साथ झाँटें भी बनाते हैं। लंड के पास की झाँटे रंजना को हाथ में चुभती हुई लग रही थी, इसलिये उसे लंड पकड़ना कुछ ज्यादा अच्छा नहीं लग रहा था। अगर लंड झाँट रहित होता तो शायद रंजना को बहुत ही अच्छा लगता क्योंकि वो बोझिल पलकों से लंड पकड़े पकड़े बोली, “ओहह पापा आपके यहाँ के बाल भी दाढ़ी की तरह चुभ रहे हैं.. इन्हे साफ़ करके क्यों नहीं रखते।” बालों की चुभन सिर्फ़ इसलिये रंजना को बर्दाश्त करनी पड़ रही थी क्योंकि लंड का स्पर्श उसे बड़ा ही मनभावन लग रहा था। एकाएक सुदर्शन ने लंड उसके हाथ से छुड़ा लिया और उसकी जाँघों को खींच कर चौड़ा किया और फिर उसके पैरों की तरफ़ उकड़ू बैठा। उसने अपना फ़नफ़नाता हुआ लंड कुदरती गिली चूत के अनछुए द्वार पर रखा। वो चूत को चौड़ाते हुए दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर काफ़ी देर तक उसे वहीं पर रगड़ता हुआ मज़ा लेता रहा। मारे मस्ती के बावली हो कर रंजना उठ-उठ कर सिसक रही थी, “उई पापा आपके बाल .. मेरी चूत पर चुभ रहे हैं.. उन्हे हटाओ.. बहुत गड़ रहे हैं। पापा अंदर मत करना मेरी बहुत छोटी है और आपका बहुत बड़ा।” वास्तव में अपनी चूत पर झाँट के बालों की चुभन रंजना को सहन नहीं हो रही थी, मगर इस तरह से चूत पर सुपाड़े के घस्सों से एक जबर्दस्त सुख और आनंद भी उसे प्राप्त हो रहा था। घस्सों के मज़े के आगे चुभन को वो भूलती जा रही थी। रंजना ने सोचा कि जिस प्रकार बिरजु ने मम्मी की चूत पर लंड रख कर लंड अंदर घुसेड़ा था उसी प्रकार अब पापा भी ज़ोर से धक्का मार कर अपने लंड को उसकी चूत में उतार देंगे, मगर उसका ऐसा सोचना गलत साबित हुआ। क्योंकि कुछ देर लंड को चूत के मुँह पर ही रगड़ने के बाद सुदर्शन सहसा उठ खड़ा हुआ और उसकी कमर पकड़ कर खींचते हुए उसने उसे उपर अपनी गोद में उठा लिया। गोद में उठाये ही सुदर्शन ने उसे पलंग पर ला पटका। अपने प्यारे पापा की गोद में भरी हुई जब रंजना पलंग तक आयी तो उसे स्वर्गीय आनंद की प्राप्ति हो रही थी। पापा की गरम साँसों का स्पर्श उसे अपने मुँह पर पड़ता हुआ महसूस हो रहा था, उसकी साँसों को वो अपने नाक के नथुनो में घुसती हुई और गालों पर लहराती हुई अनुभव कर रही थी। इस समय रंजना की चूत में लंड खाने की इच्छा अत्यन्त बलवती हो उठी थी। पलंग के उपर उसे पटक सुदर्शन भी अपनी बेटी के उपर आ गया था। जोश और उफ़ान से वो भरा हुआ तो था ही साथ ही साथ वो काबू से बाहर भी हो चुका था, इसलिये वो चूत की तरफ़ पैरों के पास बैठते हुए टाँगों को चौड़ा करने में लग गया। टाँगों को खूब चौड़ा कर उसने अपना लंड उपर को उठ चूत के फ़ड़फ़ड़ाते सुराख पर लगा दिया। रंजना की चूत से पानी जैसा रिस रहा था शायद इसीलिये सुदर्शन ने चूत पर चिकनायी लगाने की जरूरत नहीं समझी। उसने अच्छी तरह लंड को चूत पर दबा कर ज्यों ही उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश में और दबाव डाला कि रंजना को बड़े ज़ोरों से दर्द होने लगा और असहनीय कष्ट से मरने को हो गयी। दबाव पल प्रति पल बढ़ता जा रहा था और वो बेचारी बुरी तरह तड़फ़ड़ाने लगी। लंड का चूत में घुसना बर्दाश्त न कर पाने के कारण वो बहुत जोरों से कराह उठी और अपने हाथ पांव फ़ेंकती हुई दर्द से बिलबिलाती हुई वो तड़पी, “हाय! पापा अंदर मत डालना। उफ़ मैं मरी जा रही हूँ। हाय पापा मुझे नहीं चाहिये आपका ऐसा प्यार!” रंजना के यूँ चीखने चिल्लाने और दर्द से कराहने से तंग आ कर सुदर्शन ने लंड का सुपाड़ा जो चूत में घुस चुका था उसे फ़ौरन ही बाहर खींच लिया। फिर उसने अंगुलियों पर थूक ले कर अपने लंड के सुपाड़े पर और चूत के बाहर व अंदर अंगुली डाल कर अच्छी तरह से लगाया। पुनः चोदने की तैयारी करते हुए उसने फिर अपना दहकता सुपाड़ा चूत पर टिका दिया और उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। हालाँकि इस समय चूत एकदम पनियायी हुई थी, लंड के छेद से भी चिपचिपी बून्दे चू रहीं थीं और उसके बावजूद थूक भी काफ़ी लगा दिया था मगर फिर भी लंड था कि चूत में घुसाना मुश्किल हो रहा था। कारण था चूत का अत्यन्त टाईट छेद। जैसे ही हल्के धक्के में चूत ने सुपाड़ा निगला कि रंजना को जोरों से कष्ट होने लगा, वो बुरी तरह कराहने लगी, “धीरे धीरे पापा, बहुत दर्द हो रहा है। सोच समझ कर घुसाना.. कहीं फ़ट .. गयी.. तो.. उफ़्फ़.. मर.. गयी। हाय बड़ा दर्द हो रहा है.. टेस मार रही है। हाय क्या करूँ।” चूँकि इस समय रंजना भी लंड को पूरा सटकने की इच्छा में अंदर ही अंदर मचली जा रही थी। इसलिये ऐसा तो वो सोच भी नहीं सकती थी कि वो चुदाई को एकदम बंद कर दे। वो अपनी आँखों से देख चुकी थी कि बिरजु का खूँटे जैसा लंड चूत में घुस जाने के बाद ज्वाला देवी को जबर्दस्त मज़ा प्राप्त हुआ था और वो उठ-उठ कर चुदी थी। इसलिये रंजना स्वयं भी चाहने लगी कि जल्दी से जल्दी पापा का लंड उसकी चूत में घुस जाये और फिर वो भी अपने पापा के साथ चुदाई सुख लूट सके, ठीक बिरजु और ज्वाला देवी की तरह। उसे इस बात से और हिम्मत मिल रही थी कि जैसे उसकी माँ ने उसके पापा के साथ बेवफ़ाई की और एक रद्दी वाले से चुदवाई अब वो भी माँ की अमानत पर हाथ साफ़ करके बदला ले के रहेगी। रंजना यह सोच-सोच कर कि वह अपने बाप से चुदवा रही है जिससे चुदवाने का हक केवल उसकी माँ को है, और मस्त हो गई। क्योंकि जबसे उसने अपनी माँ को बिरजु से चुदवाते देखा तबसे वह माँ से नफ़रत करने लगी थी। इसलिये अपनी गाँड़ को उचका उचका कर वो लंड को चूत में सटकने की कोशिश करने लगी, मगर दोनों में से किसी को भी कामयाबी हासिल नहीं हो पा रही थी। घुसने के नाम पर तो अभी लंड का सुपाड़ा ही चूत में मुश्किल से घुस पाया था और इस एक इंच ही घुसे सुपाड़े ने ही चूत में दर्द की लहर दौड़ा कर रख दी थी। रंजना जरूरत से ज्यादा ही परेशान दिखायी दे रही थी। वो सोच रही थी कि आखिर क्या तरकीब लड़ाई जाये जिससे लंड उसकी चूत में घुस सके। बड़ा ही आश्चर्य उसे हो रहा था। उसने अनुमान लगाया था कि बिरजु का लंड तो पापा के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था फिर भी मम्मी उसे बिना किसी कष्ट और असुविधा के पूरा अपनी चूत के अंदर ले ली थी और यहाँ उसे एक इंच घुसने में ही प्राण गले में फ़ंसे महसूस हो रहे थे। फिर अपनी सामान्य बुद्धि से सोच कर वो अपने को राहत देने लगी, उसने सोचा कि ये छेद अभी नया-नया है और मम्मी इस मामले में बहुत पुरानी पड़ चुकी है। चोदू सुदर्शन भी इतना टाईट व कुँवारा छेद पा कर परेशान हो उठा था मगर फिर भी इस रुकावट से उसने हिम्मत नहीं हारी थी। बस घबड़ाहट के कारण उसकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी इसलिये वो भी उलझन में पड़ गया था और कुछ देर तक तो वो चिकनी जाँघों को पकड़े पकड़े न जाने क्या सोचता रहा। रंजना भी साँस रोके गर्मायी हुई उसे देखे जा रही थी। एकाएक मानो सुदर्शन को कुछ याद सा आ गया हो वो एलर्ट सा हो उठा, उसने रंजना के दोनों हाथ कस कर पकड़ अपनी कमर पर रख कर कहा, “बेटे ! मेरी कमर ज़रा मजबूती से पकड़े रहना, मैं एक तरकीब लड़ाता हूँ, घबड़ाना मत।” रंजना ने उसकी आज्ञा का पालन फ़ौरन ही किया और उसने कमर के इर्द गिर्द अपनी बाँहें डाल कर पापा को जकड़ लिया। वो फिर बोला, “रंजना ! चाहे तुम्हे कितना ही दर्द क्यों न हो, मेरी कमर न छोड़ना, आज तुम्हारा इम्तिहान है। देखो एक बार फाटक खुल गया तो समझना हमेशा के लिये खुल गया।” इस बात पर रंजना ने अपना सिर हिला कर पापा को तसल्ली सी दी। फिर सुदर्शन ने भी उसकी पतली नाज़ुक कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ा और थोड़ा सा बेटी की फूलती गाँड़ को उपर उठा कर उसने लंड को चूत पर दबाया तो, “ओह! पापा रोक लो। उफ़ मरी..” रंजना फिर तड़पाई मगर सुदर्शन ने सुपाड़ा चूत में अंदर घुसाये हुए अपने लंड की हरकत रोक कर कहा, “हो गया बस, मेरी इतनी प्यारी बेटी। वैसे तो हर बात में अपनी माँ से प्रतियोगिता करती हो और अभी हार मान रही हो। जानती हो तुम्हारी माँ बोल-बोल के इसे अपनी वाली में पिलवाती है और जब तक उसके भीतर इसे पेलता नहीं सोने नहीं देती। बस। अब इसे रास्ता मिलता जा रहा है। लो थोड़ा और लो..” यह कह सुदर्शन ने उपर को उठ कर मोर्चा संभाला और फिर एकाएक उछल कर उसने जोरों से धक्के लगाना चालू कर दिया। इस तरह से एक ही झटके में पूरा लंड सटकने को रंजना हर्गिज़ तैयार न थी इसलिये मारे दर्द के वो बुरी तरह चीख पड़ी। कमर छोड़ कर तड़पने और छटपटाने के अलावा उसे कुछ सुझ नहीं रहा था, “मरी… आ। नहीं.. मरी। छोड़ दो मुझे नहीं घुसवाना… उउफ़ मार दिया। नहीं करना मुझे मम्मी से कॉंपीटिशन। जब मम्मी आये तब उसी की में घुसाना। मुझे छोड़ो। छोड़ो निकालो इसे .. आइइई हटो न उउफ़ फ़ट रही है.. मेरी आइई मत मारो।” पर पापा ने जरा भी परवाह न की। दर्द जरूरत से ज्यादा लंड के यूँ चूत में अंदर बाहर होने से रंजना को हो रहा था। बेचारी ने तड़प कर अपने होंठ अपने ही दांतों से चबा लिये थे, आँखे फ़ट कर बाहर निकलने को हुई जा रही थीं। जब लंड से बचाव का कोई रास्ता बेचारी रंजना को दिखायी न दिया तो वो सुबक उठी, “पापा ऐसा प्यार मत करो। हाय मेरे पापा छोड़ दो मुझे.. ये क्या आफ़त है.. उफ़्फ़ नहीं इसे फ़ौरन निकाल लो.. फ़ाड़ डाली मेरी । हाय फ़ट गयी मैं तो मरी जा रही हूँ। बड़ा दुख रहा है । तरस खाओ आहह मैं तो फँस गयी..” इस पर भी सुदर्शन धक्के मारने से बाज़ नहीं आया और उसी रफ़्तार से जोर जोर से धक्के वो लगाता रहा। टाईट व मक्खन की तरह मुलायम चूत चोदने के मज़े में वो बहरा बन गया था। पापा के यूँ जानवरों की तरह पेश आने से रंजना की दर्द से जान तो निकलने को हो ही रही थी मगर एक लाभ उसे जरूर दिखायी दिया, यानि लंड अंदर तक उसकी चूत में घुस गया था। वो तो चुदवाने से पहले यही चाहती थी कि कब लंड पूरा घुसे और वो मम्मी की तरह मज़ा लूटे। मगर मज़ा अभी उसे नाम मात्र भी महसूस नहीं हो रहा था। सहसा ही सुदर्शन कुछ देर के लिये शांत हो कर धक्के मारना रोक उसके उपर लेट गया और उसे जोरों से अपनी बाँहों में भींच कर और तड़ातड़ उसके मुँह पर चुम्मी काट काट कर मुँह से भाप सी छोड़ता हुआ बोला, “आह मज़ा आ गया आज, एक दम कुँवारी चूत है तुम्हारी। अपने पापा को तुमने इतना अच्छा तोहफ़ा दिया है। रंजना मैं आज से तुम्हारा हो गया।” तने हुए मम्मों को भी बड़े प्यार से वो सहलाता जा रहा था। वैसे अभी भी रंजना को चूत में बहुत दर्द होता हुआ जान पड़ रहा था मगर पापा के यूँ हल्के पड़ने से दर्द की मात्रा में कुछ मामूली सा फ़र्क तो पड़ ही रहा था और जैसे ही पापा की चुम्मी काटने, चूचियाँ मसलने और उन्हे सहलाने की क्रिया तेज़ होती गयी वैसे ही रंजना आनंद के सागर में उतरती हुई महसूस करने लगी। अब आहिस्ता आहिस्ता वो दर्द को भूल कर चुम्मी और चूची मसलायी की क्रियाओं में जबर्दस्त आनंद लूटना प्रारम्भ कर चुकी थी। सारा दर्द उसे उड़न छू होता हुआ लगने लगा था। सुदर्शन ने जब उसके चेहरे पर मस्ती के चिन्ह देखे तो वो फिर धीरे-धीरे चूत में लंड घुसेड़ता हुआ हल्के-हल्के घस्से मारने पर उतर आया। अब वो रंजना के दर्द पर ध्यान रखते हुए बड़े ही आराम से उसे चोदने में लग गया। उसके कुँवारे मम्मो के तो जैसे वो पीछे ही पड़ गया था। बड़ी बेदर्दी से उन्हे चाट-चाट कर कभी वो उन पर चुम्मी काटता तो कभी चूची का अंगूर जैसा निपल वो होंठों में ले कर चूसने लगता। चूची चूसते-चूसते जब वो हाँफ़ने लगता तो उन्हे दोनों हाथों में भर कर बड़ी बेदर्दी से मसलने लगता था। निश्चय ही चूचियों के चूसने मसलने की हरकतों से रंजना को ज्यादा ही आनंद प्राप्त हो रहा था। उस बेचारी ने तो कभी सोचा भी न था कि इन दो मम्मों में आनंद का इतना बड़ा सागर छिपा होगा। इस प्रथम चुदाई में जबकि उसे ज्यादा ही कष्ट हो रहा था और वो बड़ी मुश्किल से अपने दर्द को झेल रही थी मगर फिर भी इस कष्ट के बावजूद एक ऐसा आनंद और मस्ती उसके अंदर फ़ूट रही थी कि वो अपने प्यारे पापा को पूरा का पूरा अपने अंदर समेट लेने की कोशिश करने लगी। क्योंकि पहली चुदाई में कष्ट होता ही है इसलिये इतनी मस्त हो कर भी रंजना अपनी गाँड़ और कमर को तो चलाने में अस्मर्थ थी मगर फिर भी इस चुदाई को ज्यादा से ज्यादा सुखदायक और आनन्ददायक बनाने के लिये अपनी ओर से वो पूरी तरह प्रयत्नशील थी। रंजना ने पापा की कमर को ठीक इस तरह कस कर पकड़ा हुआ था जैसे उस दिन ज्वाला देवी ने चुदते समय बिरजु की कमर को पकड़ रखा था। अपनी तरफ़ से चूत पर कड़े धक्के मरवाने में भी वो पापा को पूरी सहायता किये जा रही थी। इसी कारण पल प्रतिपल धक्के और ज्यादा शक्तिशाली हो उठे थे और सुदर्शन जोर जोर से हाँफ़ते हुए पतली कमर को पकड़ कर जानलेवा धक्के मारता हुआ चूत की दुर्गति करने पर तुल उठा था। उसके हर धक्के पर रंजना कराह कर ज़ोर से सिसक पड़ती थी और दर्द से बचने के लिये वो अपनी गाँड़ को कुछ उपर खिसकाये जा रही थी। यहाँ तक कि उसका सिर पलंग के सिरहाने से टकराने लगा, मगर इस पर भी वो दर्द से अपना बचाव न कर सकी और अपनी चूत में धक्कों का धमाका गूँजता हुआ महसूस करती रही। हर धक्के के साथ एक नयी मस्ती में रंजना बेहाल हो जाती थी। कुछ समय बाद ही उसकी हालत ऐसी हो गयी कि अपने दर्द को भुला डाला और प्रत्येक दमदार धक्के के साथ ही उसके मुँह से बड़ी अजीब से दबी हुई अस्पष्ट किलकारियाँ खुद-ब-खुद निकलने लगीं। “ओह पापा अब मजा आ रहा है। मैने आपको कुँवारी चूत का तोहफ़ा दिया तो आप भी तो मुझे ऐसा मजा देकर तोहफ़ा दे रहे हैं। अब देखना मम्मी से इसमें भी कैसा कॉंपीटिशन करती हूँ। ओह पापा बताइये मम्मी की लेने में ज्यादा मजा है या मेरी लेने में?” सुदर्शन रंजना की मस्ती को और ज्यादा बढ़ाने की कोशिश में लग गया। वैसे इस समय की स्तिथी से वो काफ़ी परिचित होता जा रहा था। रंजना की मस्ती की ओट लेने के इरादे से वो चोदते चोदते उससे पूछने लगा, “कहो मेरी जान.. अब क्या हाल है? कैसे लग रहे हैं धक्के.. पहली बार तो दर्द होता ही है। पर मैं तुम्हारे दर्द से पिघल कर तुम्हें इस मजे से वँचित तो नहीं रख सकता था न मेरी जान, मेरी रानी, मेरी प्यारी।” उसके होंठ और गालों को बुरी तरह चूसते हुए, उसे जोरों से भींच कर उपर लेटे लेटे ज़ोरदार धक्के मारता हुआ वो बोल रहा था, बेचारी रंजना भी उसे मस्ती में भींच कर बोझिल स्वर में बोली, “बड़ा मज़ा आ रहा है मेरे प्यारे सा…. पापा, मगर दर्द भी बहुत ज्यादा हो रहा है..” फ़ौरन ही सुदर्शन ने लंड रोक कर कहा, “तो फिर धक्के धीरे धीरे लगाऊँ। तुम्हे तकलीफ़ में मैं नहीं देख सकता। तुम तो बोलते-बोलते रुक जाती हो पर देखो मैं बोलता हूँ मेरी सजनी, मेरी लुगाई।” ये बात वैसे सुदर्शन ने ऊपरी मन से ही कही थी। रंजना भी जानती थी कि वो मज़ाक के मूड में है और तेज़ धक्के मारने से बाज़ नहीं आयेगा, परन्तु फिर भी कहीं वो चूत से लंड न निकाल ले इस डर से वो चीख पड़ी, “नहीं.. नहीं।! ऐसा मत करना ! चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाये, मगर आप धक्कों की रफ़्तार कम नहीं होने देना.. इतना दर्द सह कर तो इसे अपने भीतर लिया है। आहह मारो धक्का आप मेरे दर्द की परवाह मत करो। आप तो अपने मन की करते जाओ। जितनी ज़ोर से भी धक्का लगाना चाहो लगा लो अब तो जब अपनी लुगाई बना ही लिया है तो मत रुको मेरे प्यारे सैंया.. मैं.. इस समय सब कुछ बर्दाश्त कर लूँगी.. अहह आई रिइइ.. पहले तो मेरा इम्तिहान था और अब आपका इम्तिहान है। यह नई लुगाई पुरानी लुगाई को भुला देगी।”

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    चन्द लम्हों के अंदर ही उसकी चूत को चोद कर रख दिया था बिरजु ने। जानदार लंड से चूत का बाजा बजवाने में स्वर्गीय आनंद ज्वाला देवी लूट-लूट कर बेहाल हुई जा रही थी। चूत की आग ने ज्वाला देवी की शर्मो हया, पतिव्रत धर्म सभी बातों से दूर करके चुदाई के मैदान में ला कर खड़ा कर डाला था। लंड का पानी चूत में बरसवाने के लिये वो जी जान की बाज़ी लगाने पर उतर आयी थी। इस समय भूल गयी थी ज्वाला देवी की वो एक जवान लड़की की माँ है, भूल गयी थी कि वो एक इज़्ज़तदार पति की पत्नी भी है। उसे याद था तो सिर्फ़ एक चीज़ का नाम और वो चीज़ थी बिरजु का मोटा ताकतवर और चूत की नस-नस तोड़ देने वाला शानदार लंड। इसी लंड ने उसके रोम-रोम को झंकृत करके रख दिया था। लंड था की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। एकाएक बिरजु ने जो अत्यन्त ज़ोरों से चूत में लंड का आवागमन प्रारम्भ किया तो मारे मस्ती के ज्वाला देवी उठ-उठ कर सिसक उठी। तभी उसकी एक चूची की घुन्डी मुँह में भर कर सुपाड़े तक लंड बाहर खींच जो एक झटके से बिरजु ने धक्का मारा की सीधा हमला बच्चेदानी पर जा कर हुआ। “ऐई ओहह फाड़ डाली ओह उफ़ आह री मरी सी आइई फ़ट्टी वाक्क्क्कई मोटा है। उफ़ फसा आह ऊह मज़ा ज़ोर से और ज़ोर से शाबाश रद्दी वाले।” इस बार बिरजु को ज्वाला देवी पर बहुत गुस्सा आया। अपने आपको रद्दी वाला कहलवाना उसे कुछ ज्यादा ही बुरा लगा था। ज़ोर से उसकी गाँड पर अपने हाथों के पंजे गड़ा कर धक्के मारता हुआ वो भी बड़बड़ाने लगा, “तेरी बहन को चोदूँ, चुदक्कड़ लुगायी आहह .. साली चुदवा रही है मुझसे, खसम की कमी पूरी कर रहा हूँ मैं…आहह और.. आहह साली कह रही है रद्दी वाला, तेरी चूत को रद्दी न बना दूँ, तो कबाड़ी की औलाद नहीं, आह हाय शानदार चूत खा जाऊँगा फाड़ दूँगा ले… ले और चुद आज” बिरजु के इन खूंख्वार धक्कों ने तो हद ही कर डाली थी। चूत की नस-नस हिला कर रख दी थी लंड की चोटों ने। ज्वाला देवी पसीने में नहा उठी और बहुत ज़ोरों से अपनी गाँड उछाल-उछाल कर तथा बिरजु की कस कर कोली भर कर वो उसे और ज्यादा ज़ोश में लाने के लिये सिसिया उठी, “आहह री ऐसे ही हाँ… हाँ ऐसे ही मेरी चूत फाड़ डालो राज्ज्ज्जा। माफ़ कर दो अब कभी तुम्हे रद्दी वाला नहीं कहुँगी। चोदो ईईईई उउम चोदो..” इस बात को सुन कर बिरजु खुशी से फूल उठा था उसकी ताकत चार गुनी बढ़ा कर लंड में इकट्ठी हो गयी थी। द्रुत गति से चूत का कबाड़ा बनाने पर वो तुल उठा था। उसके हर धक्के पर ज्वाला देवी ज़ोर-ज़ोर से सिसकती हुई गाँड को हिला-हिला कर लंड के मज़े हासिल कर रही थी। मुकाबला ज़ोरो पर ज़ारी था। बुरी तरह बिरजु से चिपटी हुई ज्वाला देवी बराबर बड़बड़ाये जा रही थी, “आहहह ये मारा… मार डाला। वाह और जमके उफ़ हद कर दी ओफ़्फ़ मार डालो मुझे..” और जबरदस्त खुंखार धक्के माराता हुआ बिरजु भी उसके गालों को पीते-पीते सिस्कियाँ भर रहा था, “वाहह मेरी औरत आहह हाय मक्खन चूत है तेरी तो.. ले.. चोद दूँगा.. ले… आहह।” और इसी ताबड़तोड़ चुदाई के बीच दोनों एक दूसरे को जकड़ कर झड़ने लगे थे, ज्वाला देवी लंड का पानी चूत में गिरवा कर बेहद तृप्ती महसूस कर रही थी। बिरजु भी अन्तिम बूँद लंड की निकाल कर उसके उपर पड़ा हुआ कुत्ते की तरह हाँफ़ रहा था। लंड व चूत पोंछ कर दोनों ने जब एक दूसरे की तरफ़ देखा तो फिर उनकी चुदाई की इच्छा भड़क उठी थी, मगर ज्वाला देवी चूत पर काबू करते हुए पेटिकोट पहनते हुए बोली, “जी तो करता है की तूमसे दिन रात चुदवाती रहूँ, मगर मोहल्ले का मामला है, हम दोनों की इसी में भलाई है की अब कपड़े पहन अपना अपना काम सम्भालें।” “म..मगर। मेम साहब.. मेरा तो फिर खड़ा होता जा रहा है। एक बार और दे दो न हाय।” एक टीस सी उठी थी बिरजु के दिल में, ज्वाला देवी का कपड़े पहनना उसके लंड के अरमानों पर कहार ढा रहा था। एकाएक ज्वाला देवी तैश में आते हुए बोल पड़ी, “अपनी औकात में आ तू अब, चुपचाप कपड़े पहन और खिसक ले यहाँ से वर्ना वो मज़ा चखाऊँगी की मोहल्ले तक को भूल जायेगा, चल उठ जल्दी।” ज्वाला देवी के इस बदलते हुए रूप को देख बिरजु सहम उठा और फ़टाफ़ट फुर्ती से उठ कर वो कपड़े पहनने लगा। एक डर सा उसकी आँखों में साफ़ दिखायी दे रहा था। कपड़े पहन कर वो आहिस्ते से बोला, “कभी-कभी तो दे दिया करोगी मेमसाहब, मैं अब ऐसे ही तड़पता रहुँगा?” बिरजु पर कुछ तरस सा आ गया था इस बार ज्वाला देवी को, उसके लंड के मचलते हुए अरमानों और अपनी चूत की ज्वाला को मद्देनज़र रखते हुए वो मुसकुरा कर बोली, “घबड़ा मत, हफ़्ते दो हफ़्ते में मौका देख कर मैं तुझे बुला लिया करूँगी, जी भर कर चोद लिया करना, अब तो खुश?” वाकई खुशी के मारे बिरजु का दिल बल्लियों उछल पड़ा और चुपचाप बाहर निकल कर अपनी सायकल की तरफ़ बढ़ गया। थोदी देर बाद वो वहाँ से चल पड़ा था। वो यहाँ से जा तो रहा था मगर ज्वाला देवी की मक्खन चूत का ख्याल उसके ज़ेहन से जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। वाह री चुदाई, कोई न समझा तेरी खुदाई। सुदर्शन जी सरकारी काम से १ हफ़्ते के लिये मेरठ जा रहे थे, ये बात जब ज्वाला देवी को पता चली तो उसकी खुशी का ठिकाना ही न रहा। सबसे ज्यादा खुशी तो उसे इसकी थी कि पति की गैरहाज़िरी में बिरजु का लंबा व जानदार लंड उसे मिलने जा रहा था। जैसे ही सुदर्शन जी जाने के लिये निकले, ज्वाला ने बिरजु को बुलवा भेजा और नहा धो कर उसी दिन की तरह तैयार हुई और बिरजु के आने का इंतज़ार करने लगी। बिरजु के आते ही वो उससे लिपट गयी। उसके कान में धीरे से बोली, “राजा आज रात को मेरे यहीं रुको और मेरी चूत का बाजा जी भर कर बजाना।” ज्वाला देवी बिरजु को ले कर अपने बेडरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद करके उसके लौड़े को सहलाने लगी। लेकिन उस रात गज़ब हो गया, वो हो गया जो नहीं होना चाहिये था, यानि उन दोनों के मध्य हुई सारी चुदाई-लीला को रंजना ने जी भर कर देखा और उसी पर निश्चय किया कि वो भी अब जल्द ही किसी जवान लंड से अपनी चूत का उद्घाटन जरूर करा कर ही रहेगी। हुआ यूँ था की उस दिन भी रंजना हमेशा की तरह रात को अपने कमरे में पढ़ रही थी। रात १० बजे तक तो वो पढ़ती रही और फिर थकान और उब से तंग आ कर कुछ देर हवा खाने और दिमाग हल्का करने के इरादे से अपने कमरे से बाहर आ गयी और बरामदे में चहल कदमी करती हुई टहलने लगी। मगर सर्दी ज्यादा थी इसलिये वो बरामदे में ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकी और कुछ देर के बाद अपने कमरे की और लौटने लगी कि मम्मी के कमरे से सोडे की बोतलें खुलने की आवाज़ उसके कानो में पड़ी। बोतलें खुलने की आवाज़ सुन कर वो ठिठकी और सोचने लगी, “इतनी सर्दी में मम्मी सोडे की बोतलों का आखिर कर क्या रही है?” अजीब सी उत्सुकता उसके मन में पैदा हो उठी और उसने बोतलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से ज्वाला देवी के कमरे की तरफ़ कदम बढ़ा दिये। इस समय ज्वाला देवी के कमरे का दरवाज़ा बंद था इसलिये रंजना कुछ सोचती हुई इधर उधर देखने लगी और तभी एक तरकीब उसके दिमाग में आयी। तरकीब थी पिछला दरवाजा, जी हाँ पिछला दरवाजा। रंजना जानती थी की मम्मी के कमरे में झाँकने के लिये पिछले दरवाजे का की-होल है। वहाँ से वो सुदर्शन जी और ज्वाला देवी के बीच चुदाई- लीला भी एक दो बार देख चुकी थी। रंजना पिछले दरवाजे पर आयी और ज्योंही उसने की-होल से अंदर झांका कि वो बुरी तरह चौंक पड़ी। जो कुछ उसने देखा उस पर कतई विश्वास उसे नहीं हो रहा था। उसने सिर को झटका दे कर फिर अंदर के दृश्य देखने शुरु कर दिये। इस बार तो उसके शरीर के कुँवारे रोंगटे झनझना कर खड़े हो गये, जो कुछ उसने अंदर देखा, उसे देख कर उसकी हालत इतनी खराब हो गयी कि काफ़ी देर तक उसके सोचने समझने की शक्ति गायब सी हो गयी। बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू करके वो सही स्थिती में आ सकी। रंजना को लाल बल्ब की हल्की रौशनी में कमरे का सारा नज़ारा साफ़-साफ़ दिखायी दे रहा था। उसने देखा की अंदर उसकी मम्मी ज्वाला देवी और वो रद्दी वाला बिरजु दोनों शराब पी रहे थे। ज़िन्दगी में पहली बार अपनी मम्मी को रंजना ने शराब की चुसकियाँ लेते हुए और गैर मर्द से रंग-रंगेलियाँ मनाते हुए देखा था। बिरजु इस समय ज्वाला देवी को अपनी गोद में बिठाये हुए था, दोनों एक दूसरे से लिपट चिपट रहे थे। दुनिया को नज़र अंदाज़ करके चुदाई का ज़बर्दस्त मज़ा लेने के मूड में दोनों आते जा रहे थे। इस दृश्य को देख कर रंजना का हाल अजीब सा हो चला था, खून का दौरा काफ़ी तेज़ होने के साथ साथ उसका सिर भी ज़ोरों से घुम रहा था और चूत के आस पास सुरसुराहट सी होती हुई उसे लग रही थी। दिल की धड़कनें ज़ोर-ज़ोर से जारी थीं। गला व होंठ खुश्क पड़ते जा रहे थे और एक अजीब सा नशा उस पर भी छाता जा रहा था। ज्वाला देवी शराब पीती हुई बिरजु से बोले जा रही थी, उसकी बाँहें पीछे की ओर घुम कर बिरजु के गले का हार बनी हुई थी। ज्वाला देवी बिरजु को बार-बार “सनम” और “सैंया” के नाम से ही सम्बोधित कर रही थी। बिरजु भी उसे “रानी” ओर “मेरी जान” कह कह कर उसे दिलो जान से अपना बनाने के चक्कर में लगा हुआ था। बिरजु का एक हाथ ज्वाला देवी की गदराई हुई कमर पर कसा हुआ था, और दूसरे हाथ में उसने शराब का गिलास पकड़ रखा था। ज्वाला देवी की कमर में पड़ा उसका हाथ कभी उसकी चूची पकड़ता और कभी नाभी के नीचे अंगुलियाँ गड़ाता तो कभी उसकी जाँघें। फिर शराब का गिलास उसने ज्वाला देवी के हाथ में थमा दिया। तब ज्वाला देवी उसे अपने हाथों से शराब पिलाने लगी। मौके का फ़ायदा उठाते हुए बिरजु दोनों हाथों से उसकी भारी मोटी मोटी चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से भींचता और नोचता हुआ मज़ा लेने में जुट गया। एकाएक ज्वाला देवी कुछ फ़ुसफ़ुसाई और दोनों एक दूसरे की निगाहों में झांक कर मुसकुरा दिये। शराब का खाली गिलास एक तरफ़ रख कर बिरजु बोला, “जान मेरी ! अब खड़ी हो जाओ।” बिरजु की आज्ञा का तुरंत पालन करती हुई ज्वाला देवी मुस्कराते हुए ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी। बिरजु बड़े गौर से और चूत-फ़ाड़ निगाहों से उसे घूरे जा रहा था और ज्वाला देवी उसकी आँखों में आँखे डाल कर चूत की ज्वाला में मचलती हुई मुस्कराते हुए अपने कपड़े उतारने में लग गयी। उसके हाथ तो अपना बदन नंगा करने में जुटे हुए थे मगर निगाहें बराबर बिरजु के चेहरे और लंड के उठान पर ही जमी हुई थी। अपने शरीर के लगभग सारे कपड़े उतारने के बाद एक ज़ोरदार अंगड़ायी ले कर ज्वाला देवी अपना निचला होंठ दांतों में दबाते हुए बोली, “हाय ! मैं मर जाऊँ सैंया! आज मुझे उठने लायक मत छोड़ना। सच बड़ा मज़ा देता है तू, मेरी चूत को घोट कर रख देता है तू।” पैन्टी, ब्रा और हाई हील सैण्डलों में ज्वाला देवी इस उम्र में भी लंड पर कयामत ढा रही थी। उसका नंगा बदन जो गोरा होने के साथ-साथ गुद्देदार भींचने लायक भी था। लाल बल्ब की हल्की रौशनी में बड़ा ही लंड मार साबित हो रहा था। वास्तव में रंजना को ज्वाला देवी इस समय इतनी खराब सी लगने लगी थी कि वो सोच रही थी कि ‘काश! मम्मी की जगह वो नंगी हो कर खड़ी होती तो चूत के अरमान आज अवश्य पूरे हो जाते।’ मगर सोचने से क्या होता है? सब अपने-अपने मुकद्दर का खाते हैं। बिरजु का लंड जब ज्वाला देवी की चूत के मुकद्दर में लिखा है तो फिर भला रंजना की चूत की कुँवारी सील आज कैसे टूट सकती थी। जोश में आ कर बिरजु अपनी जगह छोड़ कर खड़ा हुआ और मुसकुराता हुआ ज्वाला देवी के ठीक सामने आ पहुँचा। कुछ पल तक उसने सिर से पांव तक उसे देखने के बाद अपने कपड़े उतारने चालू कर दिये। एक-एक करके सभी कपड़े उसने उतार कर रख दिये और वो एक दम नंग धड़ंग हो कर अपना खड़ा लंड हाथ में पकड़ कर दबाते हुए सिसका, “हाय रानी आज! इसे जल्दी से अपनी चूत में ले लो।” इस समय जिस दृष्टिकोण से रंजना अंदर की चुदाई के दृश्य को देख रही थी उसमें ज्वाला देवी का सामने का यानि चूत और चूचियाँ तथा बिरजु की गाँड और कमर यानि पिछवाड़ा उसे दिखायी पड़ रहा था। बिरजु की मर्दाना तन्दुरुस्त मजबूत गाँड और चौड़ा बदन देख कर रंजना अपने ही आप में शरमा उठी थी। अजीब सी गुदगुदी उसे अपनी चूचियों में उठती हुई जान पड़ रही थी। बिरजु अभी कपड़े उतार कर सीधा खड़ा हुआ ही था की ज्वाला देवी ने अपनी गुद्दाज व मुलायम बाँहें उसकी गर्दन में डाल दीं और ज़ोर से उसे भींच कर बुरी तरह उससे चिपक गयी। चुदने को उतावली हो कर बिरजु की गर्दन पर चुम्मी करते हुए वो धीरे से फ़ुसफ़ुसा कर बोली, “मेरे सनम ! बड़ी देर कर दी है तूने ! अब जल्दी कर न! देखो, मारे जोश के मेरी तो ब्रा ही फ़टी जा रही है, मुझे बड़ी जलन हो रही है, उफ़्फ़! मैं तो अब बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ, आह जल्दी से मेरी चूत का बाजा बजा दे सैंया… आह।” बिरजु उत्तर में होंठो पर जीभ फ़िराता हुआ हँसा और बस फिर अगले पल अपनी दोनों मर्दानी ताकतवर बाँहें फ़ैला कर उसने ज्वाला देवी को मजबूती से जकड़ लिया। जबरदस्त तरीके से भींचता हुआ लगातार कई चुम्मे उसके मचलते फ़ड़फ़ड़ाते होंठों और दहकते उभरे गोरे-गोरे गालों पर काटने शुरु कर डाले। ज्वाला देवी मदमस्त हो कर बिरजु के मर्दाने बदन से बुरी तरह मतवाली हो कर लिपट रही थी। दोनों भारी उत्तेजना और चुदाई के उफ़ान में भरे हुए ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ते हुए पलंग की तरफ़ बढ़ते जा रहे थे। पलंग के करीब पहुंचते ही बिरजु ने एक झटके के साथ ज्वाला देवी का नंगा बदन पलंग पर पटक दिया। अपने आपको सम्भालने या बिरजु का विरोध करने की बजाये वो गेंद की तरह हँसती हुई पलंग पर धड़ाम से जा गिरी। पलंग पर पटकने के तुरन्त बाद बिरजु ज्वाला देवी की तरफ़ लपका और उसके उपर झुक गया। अगले ही पल उसकी ब्रा खींच कर उसने चूचियों से अलग कर दी और उसके बाद चूत से पैन्टी भी झटके के साथ जोश में आ कर उसने इस तरह खींची कि पैन्टी ज्वाला देवी की कमर व गाँड का साथ छोड़ कर एकदम उसकी टाँगो में आ कर गिरी। जैसे ही बिरजु का लंड हाथ में पकड़ कर ज्वाला देवी ने ज़ोर से दबाया तो वो झुँझला उठा, इसी झुँझलाहट और ताव में आ कर उसने ज्वाला देवी की उठी हुई चूचियों को पकड़ कर बेरहमी से खींचते हुए वो उन पर खतरनाक जानवर की तरह टूट पड़ा। ज्वाला देवी के गुलाबी होंठो को जबर्दस्त तरीके से उसने पीना शुरु कर दिया। उसके गालों को ज़ोर- ज़ोर से भींच कर होंठ चूसते हुए वो अत्यन्त जोशीलापन महसूस कर रहा था। चन्द पलों में उसने होंठों को चूस-चूस कर उनकी माँ चोद कर रख दी। जी भर कर होंठ पीने के बाद उसने एकदम ही ज्वाला देवी को पलंग पर घुमा कर चित्त पटक दिया और तभी उछल कर वो उसके उपर सवार हो गया। अपने शरीर के नीचे उसे दबा कर उसका पूरा शरीर ही उसने ऐसे ढक लिया मानो ज्वाला देवी उसके नीचे पिस कर रहेगी। बिरजु इस समय ज्वाला देवी के बदन से लिपट कर और उसे ज़ोरों से भींच कर अपना बदन उसके मुलायम जनाने बदन पर बड़ी बेरहमी से रगड़े जा रहा था। बदन से बदन पर घस्से मारता हुआ वो दोनों हाथों से चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाता जा रहा था और बारी-बारी से उसने चूचियों को मुँह में ले कर तबियत से चूसना भी स्टार्ट कर दिया था। बिरजु और ज्वाला देवी दोनों ही इस समय चुदाई की इच्छा में पागल हो चुके थे। बिरजु के दोनों हाथों को ज्वाला देवी ने मजबूती से पकड़ कर उसकी चुम्मों का जवाब चुम्मों से देना शुरु कर दिया। ज्वाला देवी मस्ती में आ कर बिरजु के कभी गाल पर काट लेती तो कभी उसके कंधे पर काट कर अपनी चूत की धधकती ज्वाला का प्रदर्शन कर रही थी। अपनी पूरी ताकत से वो ज़ोर से बिरजु को भींचे जा रही थी। एकाएक ज्वाला ने बिरजु की मदद करने के लिये अपनी टाँगे उपर उठा कर अपने हाथों से टाँगों में फ़ंसी हुई पैन्टी निकाल कर बाहर कर दी और हाई हील सैण्डलों के अलावा किसी कपड़े का नामोनिशान तक अपने बदन से उसने हटा कर रख दिया। उसकी तनी हुई चूचियों की उभरी हुई घुन्डी और भारी गाँड सभी रंजना को साफ़ दिखायी पड़ रहा था। बस उसे तमन्ना थी तो सिर्फ़ इतनी कि कब बिरजु का लंड अपनी आँखों से वो देख सके। सहसा ही ज्वाला देवी ने दोनों टाँगे उपर उठा कर बिरजु की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली और जोंक की तरह उससे लिपट गयी। दोनों ने ही अपना-अपना बदन बड़ी ही बेरहमी और ताकत से एक दूसरे से रगड़ना शुरु कर दिया। चुम्मी काटने की क्रिया बड़ी तेज़ और जोशीलेपन से जारी थी। ज़ोर ज़ोर से हाँफ़ते सिसकारियाँ छोड़ते हुए दोनों एक दूसरे के बदन की माँ चोदने में जी जान एक किये दे रहे थे। तभी बड़ी फ़ुर्ती से बिरजु ज़ोर-ज़ोर से कुत्ते की तरह हाँफ़ता हुआ सीधा बैठ गया और तेज़ी से ज्वाला देवी की टाँगों की तरफ़ चला आया। इस पोजिशन में रंजना अपनी मम्मी को अच्छी तरह नंगी देख रही थी। उसने महसूस किया की मम्मी की चूत उसकी चूत से काफ़ी बड़ी है। चूत की दरार उसे काफ़ी चौड़ी दिखायी दे रही थी। उसे ताज्जुब हुआ की मम्मी की चूत इतनी गोरी होने के साथ-साथ एकदम बाल रहित सफ़ाचट थी। कुछ दिन पहले ही बड़ी-बड़ी झांटों का झुरमुट स्वयं अपनी आँखों से उसने ज्वाला देवी की चूत पर उस समय देखा था, जब सुबह सुबह उसे जगाने के लिये गयी थी। इस समय ज्वाला देवी बड़ी बेचैन, चुदने को उतावली हो रही थी। लंड सटकने वाली नज़रों से वो बिरजु को एक टक देख रही थी। चूत की चुदाई करने के लिये बिरजु टाँगों के बल बैठ कर ज्वाला देवी की जाँघों पर, चूत की फाँकों पर और उसकी दरार पर हाथ फ़िराने में लगा हुआ था और फिर एकदम से उसने घुटने के पास उसकी टाँग को पकड़ कर चौड़ा कर दिया। तत्पश्चात उसने पलंग के पास मेज़ पर रखी हुई खुश्बुदार तेल की शीशी उठायी और उसमें से काफ़ी तेल हाथ में ले कर ज्वाला देवी की चूत पर अच्छी तरह से अंदर और बाहर इस तरह मलना शुरु किया की उसकी सुगन्ध रंजना के नथुनों में भी आ कर घुसने लगी। अपनी चूत पर किसी मर्द से तेल मालिश करवाने के लिये रंजना भी मचल उठी। उसने खुद ही एक हाथ से अपनी चूत को ज़ोर से दबा कर एक ठंडी साँस खींची और अंदर की चुदाई देखने में उसने सारा ध्यान केन्द्रित कर दिया। ज्वाला देवी की चूत तेल से तर करने के पश्चात बिरजु का ध्यान अपने खड़े हुए लंड पर गया। और जैसे ही उसने अपने लम्बे और मोटे लंड को पकड़ कर हिलाया कि बाहर खड़ी रंजना की नज़र पहली बार लंड पर पड़ी। इतनी देर बाद इस शानदार डंडे के दर्शन उसे नसीब हुए थे। लंड को देखते ही रंजना का कलेजा मुँह को आ गया। उसे अपनी साँस गले में फ़ंसती हुई जान पड़ी। वाकई बिरजु का लंड बेहद मोटा, सख्त और जरूरत से ज्यादा ही लंबा था। देखने में लकड़ी के खूंटे की तरह वो उस समय दिखायी पड़ रहा था। शायद इतने शानदर लंड की वजह ही थी की ज्वाला देवी जैसी इज़्ज़तदार औरत भी उसके इशारों पर नाच रही थी। रंजना को अपनी सहेली की कही हुई शायरी याद आ गयी, “औरत को नहीं चाहिये ताज़ो तख्त, उसको चाहिये लंड लंबा, मोटा और सख्त।” हाँ तो बिरजु ने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से तेल की शीशी उल्टी करके लंड के उपर तेल की धार उसने डाल दी। फ़ौरन शीशी मेज़ पर रख कर उसने उस हाथ से लंड पर मालिश करनी शुरु कर दी। मालिश के कारण लंड का तनाव, कड़ापन और भी ज्यादा बढ़ गया। चूत में घुसने के लिये वो ज़हरीले सांप की तरह फ़ुफ़कारने लगा। ज्वाला देवी लंड की तरफ़ कुछ इस अंदाज़ में देख रही थी मानो लंड को निगल जाना चाहती हो या फिर आँखों के रास्ते पी जाना चाहती हो। सारे काम निबटा कर बिरजु खिसक कर ज्वाला देवी की टाँगों के बीच में आ गया। उसने टाँगों को जरूरत के मुताबिक मोड़ा और फिर घुटनों के बल उसके उपर झुकते हुए अपने खूंटे जैसे सख्त लंड को ठीक चूत के फ़ड़फ़ड़ाते छेद पर टिका दिया। इसके बाद बिरजु पंजो के बल थोड़ा उपर उठा। एक हाथ से तो वो तनतनाते लंड को पकड़े रहा और दूसरे हाथ से ज्वाला देवी की कमर को उसने धर दबोचा। इतनी तैयारी करते ही ज्वाला देवी की तरफ़ आँख मारते हुए उसने चुदाई का इशारा किया। परिणाम स्वरूप, ज्वाला देवी ने अपने दोनों हाथों की अंगुलियों से चूत का मुँह चौड़ा किया। अब चूत के अंदर का लाल-लाल हिस्सा साफ़ दिखायी दे रहा था। बिरजु ने चूत के लाल हिस्से पर अपने लंड का सुपाड़ा टिका कर पहले खूब ज़ोर-ज़ोर से उसे चूत पर रगड़ा। इस तरह चूत पर गरम सुपाड़े की रगड़ायी से ज्वाला देवी लंड सटकने को बैचैन हो उठी। “देख! देर न कर, डाल .. उपर-उपर मत रहने दे.. आहह। पूरा अंदर कर दे उउफ़ सीईई सी।” ज्वाला देवी के मचलते अरमानों को महसूस कर बिरजु के सब्र का बांध भी टूट गया और उसने जान लगा कर इतने जोश से चूत पर लंड को दबाया कि आराम के साथ पूरा लंड सरकता चूत में उतर गया। ऐसा लग रहा था जैसे लंड के चूत में घुसते ही ज्वाला देवी की भड़कती हुई चूत की आग में किसी ने घी टपका दिया हो, यानि वो और भी ज्यादा बेचैन सी हो उठी। और जबर्दस्त धक्कों द्वारा चुदने की इच्छा में वो मचली जा रही थी। बिरजु की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ वो उसे अपनी ओर खींच-खींच कर पागलों की तरह पेश आ रही थी। बड़ी बेचैनी से वो अपनी गर्दन इधर-उधर पटकते हुए अपनी दोनों टाँगों को भी उछाल-उछाल कर पलंग पर मारे जा रही थी। लंड के स्पर्श ने उसके अंदर एक जबर्दस्त तूफ़ान सा भर कर रख दिया था। अजीब-अजीब तरह की अस्पष्ट आवाज़ें उसके मुँह से निकल रही थी। “ओहह मेरे राजा मार, जान लगा दे। इसे फ़ाड़ कर रख दे .. रद्दी वाले आज रुक मत अरे मार न मुझे चीर कर रख दे। दो कर दे मेरी चूत फ़ाड़ कर आह.. सीईई।” बिरजु के चूत में लंड रोकने से ज्वाला देवी को इतना गुस्सा आ रहा था कि वो इस स्तिथी को सहन न करके ज़ोरों से बिरजु के मुँह पर चांटा मारने को तैयार हो उठी थी। मगर तभी बिरजु ने लंड को अंदर किया ओर थोड़ा दबा कर चूत से सटा दिया और दोनों हाथों से कमर को पकड़ कर वो कुछ उपर उठा और अपनी कमर तथा गाँड को उपर उठा कर ऐसा उछला कि ज़ोरों का धक्का ज्वाला देवी की चूत पर जा कर पड़ा। इस धक्के में मोटा, लंबा और सख्त लंड चूत में तेज़ी से घुसता चला गया और इस बार सुपाड़े की चोट चूत की तलहटी पर जा कर पड़ी। इतनी ज़ोर से मम्मी की चूत पर हमला होता देख कर रंजना बुरी तरह कांप उठी मगर अगले ही पल उसके आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि ज्वाला देवी ने कोई दिक्कत इस भारी धक्के के चूत पर पड़ने से नहीं ज़ाहिर की थी, बल्कि उसने बिरजु को बड़े ही ज़ोरों से मस्ती में आ कर बाँहों में भींच लिया। इस अजीब वारदात को देख कर रंजना को अपनी चूत के अंदर एक न दिखायी देने वाली आग जलती हुई महसूस हुई। उसके अंदर सोयी हुई चुदाई इच्छा भी प्रज्वलित हो उठी थी। उसे लगा कि चूत की आग पल-पल शोलो में बदलती जा रही है। चूत की आग में झुलस कर वो घबड़ा सी गयी और उसे चक्कर आने शुरु हो गये। इतना सब कुछ होते हुए भी चुदाई का दृश्य देखने में बड़ा अजीब सा मज़ा उसे प्राप्त हो रहा था, वहाँ से हटने के बारे में वो सोच भी नहीं सकती थी। उसकी निगाहे अंदर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। जबकि शरीर धीरे-धीरे जवाब देता जा रहा था। अब उसने देखा कि बिरजु का लंड चूत के अंदर घुसते ही मम्मी बड़े अजीब से मज़े से मतवाली हो कर बुरी तरह उससे लिपट गयी थी और अपने बदन तथा चूचियों और गालों को उससे रगड़ते हुए धीरे-धीरे मज़े की सिसकारियाँ छोड़ रही थी, “पेल.. वाह..रे.. मार.. ऐसे ही श.. म.. हद.. हो गयी वाहह और मज़ा दे और दे सी आह उफ़ ।” लंड को चूत में अच्छी तरह घुसा कर बिरजु ने मोर्चा सम्भाला। उसने एक हाथ से तो ज्वाला देवी की मुलायम कमर को मजबूती से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी भारी उभरी हुई गाँड के नीचे लगा कर बड़े ज़ोर से हाथ का पन्जा, गाँड के गोश्त मे गड़ाया। ज़ोर-ज़ोर से गाँड का गुद्दा वो मसले जा रहा था। ज्वाला देवी ने भी जवाब में बिरजु की मर्दानी गाँड को पकड़ा और ज़ोर से उसे खींचते हुए चूत पर दबाव देती हुई वो बोली, “अब इसकी धज्जियाँ उड़ा दे सैंया। आह ऐसे काम चलने वाला नहीं है.. पेल आह।” उसके इतना कहते ही बिरजु ने सम्भाल कर ज़ोरदार धक्का मारा और कहा, “ले। अब नहीं छोड़ूँगा। फ़ाड़ डालूँगा तेरी…” इस धक्के के बाद जो धक्के चालू हुए तो गजब ही हो गया। चूत पर लंड आफ़त बन कर टूट पड़ा था। ज्वाला देवी उसकी गाँड को पकड़ कर धक्के लगवाने और चूत का सत्यानाश करवाने में उसकी सहायता किये जा रही थी। बिरजु बड़े ही ज़ोरदार और तरकीब वाले धक्के मार-मार कर उसे चोदे जा रहा था। बीच-बीच में दोनों हाथों से उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए वो बुरी तरह उसके होंठो और गालों को काटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। चूत में लंड से ज़ोरदार घस्से छोड़ता हुआ वो चुदाई में चार चांद लगाने में जुटा हुआ था। चूत पर घस्से मारते हुए वो बराबर चूचियों को मुँह में दबाते हुए घुन्डियों को खूब चूसे जा रहा था। ज्वाला देवी इस समय मज़े में इस तरह मतवाली दिखायी दे रही थी कि अगर इस सुख के बदले उन पलो में उसे अपनी जान भी देनी पड़े तो वो बड़ी खुशी से अपनी जान भी दे देगी, मगर इस सुख को नहीं छोड़ेगी। अचानक बिरजु ने लंड चूत में रोक कर अपनी झांटे व अन्डे चूत पर रगड़ने शुरु कर दिये। झांटो व अन्डों के गुदगुदे घस्सो को खा-खा कर ज्वाला देवी बेचैनी से अपनी गाँड को हिलाते हुए चूत पर धक्कों का हमला करवाने के लिये बड़बड़ा उठी, “हाय उउई झांटे मत रगड़.. आहह तेरे अन्डे गुदगुदी कर रहे हैं सनम, उउई मान भी जो आईईईई चोद पेल… आहह रुक क्यों गया ज़ालिम… आहह मत तरसा आहह.. अब तो असली वक्त आया है धक्के मारने क। मार खूब मार जल्दी कर.. आज चूत के टूकड़े टूकड़े… फ़ड़ डाल इसे… हाय बड़ा मोटा है.. आइइई।” बिरजु का जोश ज्वाला देवी के यूँ मचलने सिसकने से कुछ इतना ज्यादा बढ़ उठा, अपने उपर वो काबू न कर सका और सीधा बैठ कर जबर्दस्त धक्के चूत पर लगाने उसने शुरु कर दिये। अब दोनों बराबर अपनी कमर व गाँड को चलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाये जा रहे थे। पलंग बुरी तरह से चरमरा रहा था और धक्के लगने से फ़चक-फ़चक की आवाज़ के साथ कमरे का वातावरण गूंज उठा था। ज्वाला देवी मारे मज़े के ज़ोर ज़ोर से किल्कारियाँ मार रही थी, और बिरजु को ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने के लिये उत्साहित कर रही थी, “राजा । और तेज़.. और तेज़.. बहुत तेज़.. रुकना मत। जितना चाहे ज़ोर से मार धक्का.. आह। हाँ। ऐसे ही। और तेज़। ज़ोर से मार आहह।” बिरजु ने आव देखा न ताव और अपनी सारी ताकत के साथ बड़े ही खुँख्वार चूत फ़ाड़ धक्के उसने लगाने प्रारम्भ कर दिये। इस समय वो अपने पूरे जोश और उफ़ान पर था। उसके हर धक्के में बिजली जैसी चमक और तेज़ कड़कड़ाहट महसूस हो रही थी। दोनों की गाँड बड़ी ज़ोरो से उछले जा रही थी। ओलों की टप-टप की तरह से वो पलंग को तोड़े डाल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनों एक दूसरे के अंदर घुस कर ही दम लेंगे, या फिर एक दूसरे के अंग और नस-नस को तोड़ मरोड़ कर रख देंगे। उन दोनों पर ही इस समय कातिलाना भूत पूरी तरह सवार था। सहसा ही बिरजु के धक्कों की रफ़्तार असाधारण रूप से बढ़ उठी और वो ज्वाला देवी के शरीर को तोड़ने मरोड़ने लगा। ज्वाला देवी मज़े में मस्तानी हो कर दुगुने जोश के साथ चीखने चिल्लाने लगी, “वाह मेरे प्यारे.. मार.. और मार हाँ बड़ा मज़ा आ रहा है। वाह तोड़ दे फ़ाड़ डाल, खा जा छोड़ना मत उफ़्फ़.. सी.. मार जम के धक्का और पूरा चोद दे इसे हाय।” और इसी के साथ ज्वाला देवी के धक्कों और उछलने की रफ़्तार कम होती चली गयी। बिरजु भी ज़ोर-ज़ोर से उछलने के बाद लंड से वीर्य फैंकने लगा था। दोनों ही शांत और निढाल हो कर गिर पड़े थे। ज्वाला देवी झड़ कर अपने शरीर और हाथ पांव ढीला छोड़ चुकी थी तथा बिरजु उसे ताकत से चिपटाये बेहोश सा हो कर आँखें मूंदे उसके उपर गिर पड़ा था और ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ने लगा था। इतना सब देख कर रंजना का मन इतना खराब हुआ कि आगे एक दृश्य भी देखना उसे मुश्किल जान पड़ने लगा था। उसने गर्दन इधर-उधर घुमा कर अपने सुन्न पड़े शरीर को हरकत दी, इसके बाद आहिस्ता से वो भारी मन, कांपते शरीर और लड़खड़ाते हुए कदमों से अपने कमरे में वापस लौट आयी। अपने कमरे में पहुँच कर वो पलंग पर गिर पड़ी, चुदाई की ज्वाला में उसका तन मन दोनों ही बुरी तरह छटपटा रहे थे, उसका अंग-अंग मीठे दर्द और बेचैनी से भर उठा था, उसे लग रहा था कि कोई ज्वालामुखी शरीर में फ़ट कर चूत के रास्ते से निकल जाना चाहता था। अपनी इस हालत से छुटकारा पाने के लिये रंजना इस समय कुछ भी करने को तैयार हो उठी थी, मगर कुछ कर पाना शायद उसके बस में ही नहीं था। सिवाय पागलो जैसी स्तिथी में आने के। इच्छा तो उसकी ये थी कि कोई जवान मर्द अपनी ताकतवर बाँहों में ज़ोरों से उसे भींच ले और इतनी ज़ोर से दबाये कि सारे शरीर का कचुमर ही निकल जाये। मगर ये सोचना एकदम बेकार सा उसे लगा। अपनी बेबसी पर उसका मन अंदर ही अंदर फ़ुनका जा रहा था। एक मर्द से चुदाई करवाना उसके लिये इस समय जान से ज्यादा अनमोल था, मगर न तो चुदाई करने वाला कोई मर्द इस समय उसको मिलने जा रहा था और न ही मिल सकने की कोई उम्मीद या आसार आस पास उसे नज़र आ रहे थे। उसने अपने सिरहाने से सिर के नीचे दबाये हुए तकिये को निकाल कर अपने सीने से भींच कर लगा लिया और उसे अपनी कुँवारी अनछुई चूचियों से लिपट कर ज़ोरो से दबाते हुए वो बिस्तर पर औंधी लेट गयी। सारी रात उसने मम्मी और बिरजु के बीच हुई चुदाई के बारे में सोच-सोच कर ही गुज़ार दी। मुश्किल से कोई घन्टा दो घन्टा वो सो पायी थी। सुबह जब वो जागी तो हमेशा से एक दम अलग उसे अपना हर अंग दर्द और थकान से टूटता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था बेचारी को, जैसे किसी मज़दूर की तरह रात में ओवरटाइम ड्यूटी करके लौटी है। जबकि चूत पर लाख चोटें खाने और जबर्दस्त हमले बुलवाने के बाद भी ज्वाला देवी हमेशा से भी ज्यादा खुश और कमाल की तरह महकती हुई नज़र आ रही थी। खुशियाँ और आत्म-सन्तोश उसके चेहरे से टपक रहा था। दिन भर रंजना की निगाहें उसके चेहरे पर ही जमी रही। वो उसकी तरफ़ आज जलन और गुस्से से भरी निगाहों से ही देखे जा रही थी।

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    मेरा नाम अजित है मैं कोलकाता से हू मेरी उम्र 30 हू मुझे लड़की भाभी की चूत चाटना पसंद है और डर्टी सेक्स करना और कपल के साथ सेक्स करना पसंद है और लड़की की चूत चाट के उसका पानी पीना पसंद है.

    दोस्तो मुझे कुछ दिन पहले निशांत नाम के आदमी पनी कहानी भेजी दोस्तो निशांत ने अपनी कहानी कुछ इस तरह बताई कि अपनी सुहागरात के दिन वो बहुत डरा हुआ था और वही हुआ. उसने बताया कि सुबह तक वो अपनी दुल्हन से बातें करता रहा, प्यार करता रहा, उसकी चुचिया दबाई उसकी चूत सहलाई पर उसका लंड खड़ा ही नही हुआ.

    उसकी वाइफ बहुत गरम हो गई थी, उसने पायजामे का नाडा खोलना चाहा तो इसने उसका हाथ धकेल दिया लेकिन उसने ज़बरदस्ती इसका नाडा खोला तो कभी वो इसका चेहरा देखती तो कभी इसके लंड (सिर्फ़ नाम का) को और वो रोने लगी, इसकी छाती पर घुसे मारने लगी, दोनो हाथों से इसके दोनो गालों पर थप्पड़ मारने लगी.

    वो बोली तुम ऐसे थे तो शादी क्यों की, मेरी ज़िंदगी क्यों खराब की. निशांत ने बताया कि उसने अपनी वाइफ के पैर पकड़े, माफी माँगी और बदनामी नही करने को कहा. काफ़ी जद्दो जहद के बाद वो इस बात पर राज़ी हो गई कि वो किसी से भी चुदवायेगि निशांत कुछ नही बोलेगा, बेचारा क्या करता हां कर दी. निशांत की शादी लुधियाना मे हुई थी और मध्य प्रदेश मे जॉब करता था सो कुछ दिन बाद वो अपनी वाइफ को लेकर ऍम.पी जबलपुर मे उपर के दो कमरे वाले मकान मे किराए पर रहने लगा.

    पड़ोस मे चार लड़के ( दो सरदार, एक बंगाली और एक बिहारी ) रेंट पर रहते थे. एक शाम को ऑफीस से आने के बाद वो छत पर अपनी वाइफ के साथ चाय पी रहा था तो उसने देखा उसकी वाइफ बगल वाली छत पर दो लड़कों को बार बार देख रही थी. थोड़ी देर मे उसकी वाइफ ने उन लड़को से कहा भैया आप लोग क्या करते हो, उनके अनुसार एक जॉब करता था और कॉलेज मे पढ़ता था. बातों ही बातों मे पता चला कि दोनो सरदार भी कॉलेज मे पढ़ते है और चारो मे पक्की दोस्ती है.

    एक शाम निशांत ऑफीस से रात 9 बजे घर आया, अंदर जाकर देखा तो एक सरदार (पड़ोस वाला लड़का) सोफे पर बैठा था और उसकी वाइफ उसके सामने बेड पर बैठ कर बातें कर रहे थे. फ्रेश होकर निशांत भी सरदार के बगल मे सोफे पर बैठ गया. दो चार बातें करने के बाद उसकी वाइफ तीनो के लिए प्लेट्स मे खाना लेकर आई, खाना खाने के बाद तीनो ने कॉफी पी. निशांत सोच रहा था इन दोनो ने ज़रूर चुदाई की होगी.

    उसकी वाइफ बोली आप टाइयर्ड दिख रहे है दूसरे कमरे मे जाकर लेट जाओ. बेचारा निशांत अपनी कमज़ोरी के कारण चुप चाप दूसरे कमरे मे जाकर लेट गया पर वो परेशान हो रहा था की वो इधकेला लेटा है और दूसरे कमरे मे उसकी वाइफ एक जवान लड़के के साथ अकेली ???? इस वक़्त क्या कर रहे होंगे. निशांत दबे पावं कमरे से बाहर आया तो देखा कमरे के दरवाजे पर परदा बंद था, उसने चुपके से उंगली से परदा साइड मे किया सामने सरदार उसकी वाइफ की मॅक्सी उपर उठाकर दूध पी रहा था.

    उसने बताया कि उसके पूरे बदन मे आग लग गई, उसका मन किया कि दोनो की जान लेलू पर अपनी नमार्दानगी के कारण चुप चाप खड़े खड़े पर्दे की ओट से देखता रहा सरदार जी उसकी वाइफ के दोनो दूध पीता, गर्दन और गालों को चूमता, इसके बाद सरदार ने उसकी वाइफ को बेड पर लिटाया और पेट के उपर चाटने लगा, सयद गुदगुदी के कारण उसकी वाइफ बीच बीच मे ज़ोर से हंस रही थी.

    सरदार ने उसकी वाइफ की मॅक्सी उतार कर अलग फेंक दी और उसके दोनो पैरो के घुटनो को मोड़ कर उसकी चूत को चाटने लगा. थोड़ी देर मे सरदार ने अपने कपड़े उतारकर पूरा नंगा हो गया. निशांत उसका लंड देख कर हैरान रह गया. उसका दिल धक धक करने लगा और सोचने लगा क्या सरदार का लंड उसकी वाइफ की चूत को फाड़ तो नही देगा? निशांत को शायद पता नही था कि औरत की चूत भी कमाल की होती है जो छोटा, मोटा, टेढ़ा और कितना भी लंबा लंड हो गपक जाती है और चूं भी नही करती.

    जितना मोटा और जितना लंबा लंड चूत मे घुसेगा, चूत मौसमी चटर्जी की तरह हँसती है, केवल एक बार अंदर जाना चाहिए. सरदार जी ने उसकी वाइफ की चूत पर अपना थूक लगाया और लंड अंदर डालने की कोसिस करने लगा, सरदार के ज़ोर लगाने पर उसकी वाइफ नीचे से अपने चुतड साइड मे कर देती शायद लंड मोटा होने के कारण अंदर नही घुस रहा था और उसकी वाइफ को दर्द हो रहा था.

    उसकी वाइफ ने सरदार से इशारा कर ड्रेसिंग टेबल से आयिल की बोतल मंगाई और अपनी चूत पर खूब सारा आयिल लगाया और सरदार के लंड को भी आयिल से गीला कर दिया. अब सरदार ने एक धक्का मारा तो निशांत की वाइफ आआआआआआ की आवाज़ कर ज़ोर से चिल्लाई, निशांत भी अपनी जगह पर खड़े खड़े हिल गया जैसे सरदार का लंड इसकी गान्ड मे घुसा हो, होता है आख़िर निशांत की अपनी सग़ी वाइफ थी.

    बेचारा अपनी नई नई दुल्हन को पराए लड़के से चुद्ते हुए देख रहा था, खुद एक बार भी नही चोद पाया. ज़्यादा देर नही देख सका और दूसरे कमरे मे आकर लेट गया. करीब एक घंटे के बाद उसकी वाइफ उसके पास आई और बोली नाराज़ क्यों होते हो तुमने प्रॉमिस किया था आख़िर मेरे भी अरमान हैं, तुम्ही बताओ मैं क्या करूँ और वो निशांत से लिपटकर प्यार करने लगी.

    सनडे का दिन था, निशांत की वाइफ ने उस से कहा आज डिन्नर पर चारों लड़को ो इ्वाइट करते है और 8 बजे रात चारों लड़के उनके घर मे आए. निशांत ने दिन भर महसूस किया उसकी वाइफ आज बहुत एग्ज़ाइटेड थी, शाम को गजब का मेकप किया था. निशांत के दिमाग़ मे सारे दिन घंटियाँ बजती रही कि आज क्या गुल खिलने वाला है. चारों लड़के सोफे पर बैठ गये और वो अपनी वाइफ के साथ बेड पर बैठ गया.

    घर की और चारों लड़कों की दिन चर्या के बारे मे बाते हुई. बिहारी लड़का उठकर गया और एक विस्की की बोतल 4 बीअर लेकर टेबल पर रख कर उसकी वाइफ से बोला भाभी जी 6 ग्लास लेकर आओ प्लीज़. वो बोली मैं ड्रिंक नही करूँगी, कभी नही की. उन्होने केवल बीअर पीने के लिए ज़ोर देकर 6 ग्लास टेबल पर आ गये. लड़कों ने विस्की पी, निशांत और उसकी वाइफ ने बीअर. एक ग्लास पीने के बाद ही निशांत की वाइफ को नशा हो गया.

    निशांत ने सबके लिए प्लेट्स मे मटन, रोटी और चावल परोसे और फिर पीने और खाने का दौर चल पड़ा. इस बीच लड़कों ने उसकी वाइफ के ग्लास मे बीअर के साथ विस्की मिक्स कर उसे पिलाई. उसकी ज़बान लड़खड़ाने लगी. सबके सामने निशांत को किस करने लगी, शायद निशांत को भी ज़्यादा नशा हो गया था और वो भी किस करते हुवे उसके दूध को दबाने लगा. थोड़ी देर मे निशांत उसका ब्लाउस और ब्रा उतारकर दूध पीने लगा.

    इसके बाद निशांत को तब होश आया जब उसको अपनी गान्ड मे दर्द हुवा, उसको लगा उसकी गान्ड मे कुच्छ घुस रहा है, जब तक वो कुछ समझता तब तक कई ध्के ग चुके थे. निशांत ने बताया कि ऐसे मे अगर वो कुछ हरकत करता है तो लड़कों से कभी नज़र नही मिला पाएगा इस लिए उनको इस ग़लत फ़हमी मे रहने दिया कि मुझे बहुत नशा है और मुझे पता नही चल रहा है कि कोई मेरी गान्ड मार रहा है.

    कुतिया का पोज़ बनाकर उसकी गान्ड मारी जा रही थी. उसने चुप चाप आँखे खोली, देखा सेंटर टेबल की जगह पर उसकी वाइफ को बिहारी लड़का कुतिया बना कर चोद रहा था, बिंगाली लड़के ने उसके मूह मे अपना लंड दे रखा था और बगल मे एक सरदार पॅंट की जिप से लंड बाहर निकाल हिला रहा था. इसका मतलब जिस सरदार ने उसकी वाइफ को चोदा था आज वो इसकी गान्ड मार रहा था.

    गान्ड मे पेन तो बहुत हो रहा था पर नीचे अब इसका छोटा सा लंड झटके मारने लगा था जिस से निशांत को मज़ा आने लगा. उसने बताया जब सरदार अपना लंड उसकी गान्ड से बाहर निकालता तब पेन होता था पर जब अंदर डालता था, पेन के साथ निशांत के लंड पर भी झटके लगते थे.

    बीच बीच मे उसकी वाइफ की आआआआआः आआआआआआआआः की आवाज़ भी आ रही थी. बिहारी का शायद पानी झाड़ गया था वो हटा तो बिंगाली ने उसकी जगह लेली और अब सरदार जी का लंड उसकी वाइफ के मूह मे था. बिहारी सोफे पर निढाल होकर पसर गया. बिंगाली और सरदार बारी बारी से अपनी जगह बदलते रहे.

    दो तीन ऊऊऊऊऊं ऊऊऊऊऊं की आवाज़ उसकी वाइफ के मूह से आई और एक हाथ से सरदार की थाई अपनी तरफ खींच कर गान्ड सरदार से चिपका दी शायद उसकी वाइफ का भी पानी झड गया था. इधर दूसरे सरदार ने अपना पानी निशांत की गान्ड मे ही निकाल कर निशांत को बेड पर लिटा दिया और बेड से नीचे उतर गया. 

    निशांत ने देखा उसकी वाइफ बिल्कुल नंगी थी जबकि चारों लड़को ने सिर्फ़ जिप खोल कर अपने अपने लंड बाहर निकाल रखे थे. बिंगाली बोला अबे सालो तुम तो झाड़ गये, भाभी जी प्लीज़. उसकी वाइफ बोली भैया थोड़ा साँस तो लेने दो दो-दो के पानी से मेरी चूत भर गयी है अभी पिसाब कर के आती हूँ फिर तू भी झाड़ देना और वो कमरे से बाहर चली गई.

    चारों आपस मे बातें कर रहे थे- क्या चूत है यार लगता नही ये लोग शादी शुदा है, सरदार बोला इसकी गान्ड मारते मारते मेरा लंड छिल गया है पेन हो रहा है. ऐसा करते है इसको (निशांत) सोफे पर लिटा देते है और चारों मिलकर बेड पर चुदाई करेंगे. निशांत नशे का ढोंग करके लेटा रहा. चारों ने मिलकर निशांत को उठाया और सोफे पर लिटा दिया. बिहारी बोला साला बहुत भारी है. उसकी वाइफ के अंदर आने से पहले चारों ने अपनी अपनी पॅंट और अंडररवेर उतार दिए थे. बिंगाली बोला भाभी जी भाई साहब किस्मत वाले है, इतनी सुंदर चूत को रोज चोद्ते होंगे,

    बेड पर बैठते हुवे वो ब मेरी ऐसी किस्मत कहाँ ये मुआ तो नमार्द है, इसका तो लंड ही नही है. बिहारी ने आकर निशांत का पायजामा खोला तो अरीई की दो तीन आवाज़े सुनाई दी. सरदार बोला मेरी जान तुसी चिंता ना करो जब दिल करे आवाज़ दे देना. एक बोला आप के साथ तो धोखा हुआ है, शॉडी से पहले पता नही था क्या?. बिंगाली बोला अरे छोड़ो यार मुर्दे क्यों उखाड़ रहे हो और उसकी वाइफ का दूध पीना सुरू कर दिया.

    इसके बाद उन्होने उसकी वाइफ को बेड पर लिटा दिया. एक सरदार उसकी चूत चाटने लगा, बिंगाली दूध पी रहा था दूसरा सरदार गालों पर किस कर रहा था और बिहारी लड़का उसके पेट और नाभि चूम रहा था. उसकी वाइफ बीच बीच मे अया अयाया कर रही थी. बिंगाली बहुत जोश मे था बोला मॉंटी (सरदार) प्लीज़ यार मुझे चुदाई करने दे और सरदार के हटने के बाद वो पागलों की तरह ज़ोर-ज़ोर से उसकी वाइफ को चोदने लगा.

    2 मिनट मे ही उसने अपना लंड बाहर निकाल कर बेड पर ही वीर्य टपका दिया. बिहारी बोला भेन्चोद बहुत उतावला हो रहा था क्या हुआ. बिहारी ने पीठ के बल लेटकर उसकी वाइफ को अपने उपर छाती के बल लिटा कर उसकी चूत मे लंड डाल कर चोदने लगा और बिंगाली उसके मुहमे लंड देकर दुबारा तैयार होने की कोसिस करने लगा. दोनो सरदार बेड से नीचे उतर कर अपना अपना लंड हिला रहे थे.

    बिहारी दोनो हाथो से उसकी वाइफ के दोनो हिप्स को दबाकर नीचे से स्पीड मे 10-12 धक्के मरता और रुक जाता. उसने कसकर उसकी वाइफ की कमर कसकर अपना पानी झाड़ दिया.

    अब बिहारी की जगह एक सरदार ने ले ली और उसी स्टाइल मे चोदने लगा, दूसरा सरदार उसकी गान्ड मारने की कोसिस कर रहा था पर नही हो पा रहा था. पहले सरदार के उपर से दूसरे सरदार ने उसको कुतिया के पोज़ मे लिटाया, उसकी गान्ड मे आयिल लगाकर लंड अंदर डाल कर करवट लेकर अपने आप पीठ के लेट गया और उसकी अपनी छाती पर उसको पीठ के बल लिटा कर उसकी गान्ड मे लंड को अंदर बाहर करने लगा.

    अब दोनो सरदार ठीक उसके उपर आकर उसको चोदने लगे. उसकी वाइफ एक साथ चूत और गान्ड मरवाने का मज़ा ले ही थी. िंगाली और बिहारी बात करने लगे चलो हम दोनो उसकी (निशांत की) गान्ड मारते है और दोनो ने ज़मीन पर सोफे की गद्दियाँ बिछाई और निशांत को उनके उपर कुतिया के पोज़ मे लाकर भारी उसकी गान्ड मारने लगा. भारी का पानी झाड़ जाने के बाद बिंगाली स्टार्ट हो गया.

    उधर निशांत अब अपनी वाइफ को नही देख पा रहा था पर उसके कानो मे आआआअ ऊऊऊओ की आवाज़े लगातार आ रही थी. अब उसकी वाइफ ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी मॉंटी मार जूऊर से माआआआर आआआआ जूऊओर से और जूऊर से आआआआअ साराआआ डााअल फ़ाआद दे आआआअ तेरा तो हो गय्ाआ नरेन्दर (दूसरा सरदार) तू आ जल्दी से ज़ोर से स्पीड मे करना. आआआआ. 

    हां गुड और ज़ोर से अबे मर गयी जोर्र्र्रर से उई माआ साआाअले ज़ोर से आआआआआआअ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआआआआ मज़ा आआआअ एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स और आवाज़ आनी बंद हो गई. इधर बिंगाली ने निशांत की गान्ड से लंड बाहर निकाल कर उसकी वाइफ के उपर चढ़ गया. थोड़ी देर मे बिंगाली की एक आवाज़ आई ऊऊऊऊऊऊऊः. उसकी वाइफ बोली भाई दूसरी बार झड़ने मे तो मज़ा ही आ गया, असली चुदाई का मज़ा दो दूसरी बार झड़ने मे ही है दिल कर रहा था चारों लंड एक साथ चूत मे घुसते तो और भी मज़ा आ जाता.

    जाते जाते चारो बोले भाभी जी जब मन करे बुला देना. निशांत अंजान बना ऐसे ही लेटा रहा मानो इस कमरे मे जो कुच्छ हुआ उसको कुच्छ भी पता नही है. बाथ रूम से आने के बाद उसकी वाइफ ने उसके उपर चादर डाली और लाइट ऑफ कर बेड पर सो गई. कुछ महीनो के बाद निशांत ने दूसरी जगह मे अपना फ्लॅट लिया और वही शिफ्ट कर लिया.

    उसकी वाइफ ने वहाँ भी अपनी चुदाई का इंतज़ाम किया मगर पड़ोस मे नही बाहर से ही किसी ना किसी को लाकर दिन मे ही चुदवाती थी. उनका एक बेटा हुआ उन्दोनो को भी नही पता कि आक्चुयल मे किसका है. 55-56 की एज मे भी वो महीने मे 2-3 बार मेच्यूर आदमियों से चुदवाती है और निशांत पैसे देकर गान्ड मरवाता है. अपना अपना नसीब है.

    singhnishakanpur

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    Crazy couples think more while silent fuck

    Even we did this many times 😉

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    Desi couple in a corner for fun 

    मैं रमित हाज़िर हूँ अपनी कहानी लेकर,

    में ही पता चल गया है कि मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ और चण्डीगढ में रह रहा हूँ। और एक मेल एस्कॉर्ट्स का काम करता हूं। पिछली कहानी मेरे ही शहर की रहने वाली एक लड़की की थी। इस बार की कहानी भी मेरे और मेरी एक क्लाइंट की ही है।

    कहानी पिछले रविवार की है, छुट्टी का दिन था, मैं अपने कमरे में बैठा आराम से मूवी देख रहा था। तभी फोन बजा, मैंने कॉल रिसीव की तो उधर से एक प्यारी सुरीली आवाज सुनाई दी। थोड़ी सी बात हुई तो पता चला कि मैडम को आज रात सर्विस चाहिए, रात की कोई बुकिंग थी नहीं तो मैंने भी हाँ कर दी।

    मैडम ने अपना नाम नीतू बताया। थोड़ी देर में घर का पता भी मैसेज पर आ गया, एड्रेस गोमती नगर के एक घर का था। मैंने भी जाने की तैयारी शुरू कर दी। बैग पैक किया, फिर खुद को जैसे की नीचे और बगल के बाल वगैरह साफ किए, और थोड़ी बहुत तैयारी और भी की।

    शाम को मैं दिए हुए पते पर तय समय पर पहुंच गया। वहां पहुंच कर मैंने उसी नंबर पर वापस कॉल की, उसने फोन पर दो मिनट में आने को बोला। थोड़ी देर बाद उस मकान का दरवाजा खुला, मैं सड़क के दूसरी तरफ खड़ा था। उसने मुझे दोबारा कॉल की, मैंने दूसरी ओर से ही हाथ उठाकर इशारा किया तो उसने मुझे उस तरफ आ कर अंदर आने का इशारा किया। मैंने रोड क्रॉस की और गेट पर पहुंच गया।

    हाथों में भरी हुई लाल चूड़ियाँ, टाइट जीन्स, टॉप, गोरा रंग, एकदम भरा हुआ शरीर, 32-30-34 का फिगर… देख कर लग रहा था कि अभी कुछ दिन पहले ही शादी हुई हो, देखने में एकदम मस्त लड़की लग रही थी। उसको देखकर कुछ देर के लिए तो मैं खो सा गया था।

    अचानक से उसने चुटकी बजाकर इशारा किया, मैं तो मानो नींद से जगा। उसने अपने पीछे आने को कहा। मेरे गेट के अंदर आते ही उसने गेट लॉक किया और गार्डन एरिया से आगे बढ़ कर मकान में अंदर चलती चली गई। मैं भी एक रोबोट की तरह उसके पीछे पीछे चल रहा था।

    अंदर पहुचते ही उसने मुझे बैठने को कहा और मेरे बारे में पूछने लगी। मुझसे बातचीत करते हुए वो सभी खिड़की दरवाजे लॉक कर रही थी।

    नीतू का घर बहुत ही शानदार था। हर चीज ठीक ढंग से अपनी जगह पर थी। महँगे सजावट के सामान, महंगा सोफा, हर एक चीज अपनी अपनी कीमत बता रही थी। काफी अमीर लोग थे। उसने मुझसे चाय या ड्रिंक्स का भी पूछा लेकिन मैंने मना कर दिया।

    अब वो अपना काम खत्म कर के मेरे बगल में आ कर बैठ गई। मैंने उससे उसके और उसके परिवार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसकी शादी अभी दो हफ्तों पहले ही हुई है। उसके पति बैंक मैनेजर हैं, ससुर आर्मी से रिटायर हैं और बिज़नस करते हैं। फिलहाल बेटे की शादी की खुशी में चारों धाम की यात्रा पर गए हैं।

    उसने आगे बताया कि उसकी शादी अरेंज मैरिज है। घर वालों ने अच्छा कमाता खाता परिवार देख कर शादी कर दी। मॉडर्न फैमिली से होने के कारण उसकी एजुकेशन काफी अच्छी है और शादी से पहले उसके बॉयफ्रेंड भी थे। जिनसे उसके फिजिकल रिलेशन भी रहे थे पर परिवार की वजह से उसने सब कुछ छोड़ कर अरेंज मैरिज कर ली। पर उसे अपने पति से वो शारीरिक सुख नहीं मिला जैसा वो चाहती थी। परिवार की इज़्ज़त के लिए उसने एडजस्ट करने की सोची है। वो अपने किसी भी पुराने बॉयफ्रेंड को बुलाना नहीं चाहती क्यूँकि इससे बदनामी का भी डर रहेगा और उसकी खुद की इज़्ज़त जाने का भी। sexgurumd@gmail.com

    नीतू- आओ, अब बेडरूम में चलते हैं, आगे का प्रोग्राम वहीं करते हैं. वो मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बेडरूम में ले आई।

    क्या मस्त बड़ा बेडरूम था, राउंड बेड लार्ज साइज़, साइड में सोफा। ऐसा लग रहा था कि किसी फाइव स्टार होटल का रूम हो। नीतू- अमित यार… आज मुझे वो खुशियां दे दो जिनके लिये मैं तरस रही हूँ। आरती ने काफ़ी तारीफ की है तुम्हारी, देखते है कि आप सचमुच तारीफ के काबिल हैं या नहीं। मैं- नीतू जी, अब इसके लिए आप पहले मुझे बता दें कि आप को किस तरह का सेक्स पसंद है। आपकी फंतासी क्या है, आप सेक्स को किस नज़रिए से लेती हैं। और सबसे पहले आप अपने आप को मेरे हवाले कर दीजिए।

    नीतू- रमित, मुझे वाइल्ड सेक्स पसंद है। आरती ने मुझे बताया था कि आप मसाज करते हैं लेकिन वो फिर कभी। आज आप अपने सबसे बेस्ट तरीके से मुझे सेक्स के सारे मजे दे दो, और मैं ये दिन कभी ना भूल पाऊँ। अब आप पर है आप क्या करते हो कैसे करते हो मेरे साथ।

    अब तो बात अपनी इज़्ज़त पर आ गई थी। अब तो कुछ सबसे अलग और सबसे बेहतर करना ही था। मैंने उसे अपनी बांहों में लिया और उसके लबों पर अपने लब रख दिए. वो खुद से ही मेरे लबों को चूसने लगी. मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर चल रहे थे, मैं उन्हें सहला कर मसल कर मजा ले रहा था.

    कुछ देर बाद मैंने उसे कपड़े उतारने को बोला, मेरा इशारा पाते ही उसने अपनी जीन्स और टॉप उतार दिये, अंदर उसने ब्रांडेड ब्लैक ब्रा पैंटी पहन रखी थी। क्या ग़ज़ब का आइटम लग रही थी, दिल खुश हो गया। ऊपर से हाथों में लाल चूड़ियाँ, थोड़ी-थोड़ी सुहागरात वाली फीलिंग आ रही थी।

    अब मैंने भी देर न करते हुए अपने कपड़े उतारे और केवल अंडरवियर में रह गया। अब वो बिल्कुल मेरे नजदीक आ गई। मैंने एक हाथ उसकी कमर पर रख कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसे स्मूच करना शुरू कर दिया। स्मूच करते करते मैं उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही मसलना चालू कर दिया। उसके अंदर से हल्की हल्की उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकलनी चालू हो गई।

    थोड़ी देर में उसके शरीर से उसकी ब्रा और पैंटी अलग हो गयी और अब वो एकदम नंगी रह गई, मैंने भी अपनी अंडरवियर उतार दी। अब दो नंगे जिस्म एक दूसरे से लिपटे हुए थे। सच बताऊँ तो जन्नत वाली फीलिंग आ रही थी। हम दोनों एक दूसरे को चूमते चाटते जन्नत की सैर कर रहे थे।

    थोड़ी ही देर बाद ओरल सेक्स करने के लिए हम दोनों 69 की अवस्था में थे, उसने अपनी चूत की झांटे एकदम ताजा ताजा साफ़ की हुई थी तो उसकी चूत एकदम चिकनी, गोरी, सफेद चमकदार थी। चूत की दोनों फलक आपस में सटी हुई थी, बस एक लकीर सी नजर आ रही थी। हल्की हल्की भीनी भीनी खुशबू बिखेरती उसकी चूत माहौल को और उत्तेजक बना रही थी।

    जैसे जैसे मेरी चूत चाटने की रफ्तार बढ़ रही थी, नीतू के मुंह से निकलने वाली कामुक सीत्कार बढ़ती जा रही थी उम्म…हाँ.. अह… हहा… करो.. मजा आ रहा है… हाँ.. उम्हह…

    अचानक से नीतू मैडम का शरीर अकड़ने लगा और वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर ओरल सेक्स का मजा ले रही थी. कुछ ही देर बाद वो कटे पेड़ की तरह बिस्तर पर गिर कर निढाल हो गई। उसकी चूत ने मेरे मुँह पर गरम-गरम कामरस की बौछार कर दी जिसे मैं पूरा का पूरा चट कर गया।

    उसने अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दिया और आराम करने लगी।

    फिर मैंने उससे फ्रिज के बारे में पूछा। उसके बताते ही मैं जा कर फ्रिज से आइस ट्रे लेकर आया। अब तक नीतू भी रिलैक्स हो गई थी, मैंने उसे दुबारा से सहलाना शुरू किया। उसे सहलाते सहलाते मैं उसे दुबारा गर्म करने की कोशिश कर रहा था।

    जब उसकी हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी तो मैंने आइस ट्रे से एक आइस क्यूब लेकर उसकी चूत में डाल दिया। वो अचानक हुई इस घटना से बिल्कुल पागल सी हो गई। उसकी चूत की गर्मी से बर्फ पिघल कर बाहर आ रही थी और बर्फ की ठण्ड उसे एक अलग ही अहसास दे रही थी। बर्फ के पूरी तरह पिघलने तक वो बिल्कुल पागल सी हो गई थी।

    अब मैं उसकी चूत को चाटने लगा, वो बिस्तर पर अपने पाँव पटकने लगी थी. थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा, जो चाटने की वजह से एकदम गीली हो गई थी, और एक ज़ोर का झटका लगा दिया। लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में पूरा घुस गया।

    वो चूत पर लंड के इस अचानक हमले से एकदम से चीख पड़ी। थोड़ी देर में वो नॉर्मल हो गई और इस ताबड़तोड़ चुदाई में अपने चूतड़ उठा उठा कर पूरा साथ देने लगी। करीब 15 मिनट की धकापेल चुदाई के बीच वो 3 बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने भी अपना माल उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया। अब हम दोनों बिस्तर पर पड़े सुस्ता रहे थे। वो बहुत खुश थी और सबसे बड़ी बात वो पूरी तरह संतुष्ट थी।

    उस पूरी रात में हम लोगों ने 2 राउंड चुदाई और की और कई नई चीजें हमने ट्राई की, जिसमें उसे बहुत मज़ा आया और उसे पूरी संतुष्टि मिली।

    सुबह उसने मुझे थैंक्स बोला और मेरी पेमेंट मुझे दे दी और मैं वहां से चला आया।

    तब से लेकर अभी तक उसने मुझे कई बार बुलाया है और कई बार अपने साथ बाहर ट्रिप पर भी लेकर गई है। साथ ही साथ 2 नई क्लाइंट भी दिलाई हैं।

    singleadi

    Office sex

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    हैलो फ्रेंड्स मेरा नाम पिंकी है, मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ. मेरा फिगर 36-30-38 का है, मैं आप सबको अपनी सच्ची चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ कि कैसे मकान मालिक ने लंड दिखा कर मुझे चोदा, मेरी चूत मारी, मेरी गांड मारी!

    दिल्ली में मेरी एक सहेली किराये पर रहती है और वो मेरे साथ कॉल सेण्टर में जॉब करने जाती है. मैं कभी कभी अपनी सहेली को बुलाने जाती हूँ, तो मैं उसके मकान मालिक से बातें कर लेती हूँ क्योंकि वो मुझसे हमेशा अच्छी बातें करता था. जबकि मेरी सहेली बताती थी कि उसका मकान मालिक बहुत ही रंगीला आदमी है. उसने अपनी किरायेदारी में रहने वाली बहुत सारी औरतों को और अपनी नौकरानी को भी चोदा है.

    मकान मालिक मुझसे भी बोलता था कि अगर किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बताना. उसके साथ मैं थोड़ी देर यूं ही इधर उधर की बातें करने के बाद अपनी सहेली के साथ ऑफिस चली जाती थी.

    मैं एक बात नोटिस करती थी कि मकान मालिक जब भी मुझसे बात करता था, तो वो मेरी चूची को देखता रहता था. चूंकि मेरी चूची की साइज़ भी बहुत बड़ी है, इसलिए मेरी चूची का ऊपर का हिस्सा और उसका साइज़ मकान मालिक को भरपूर दिखता रहता था. साथ ही मैं बहुत टाइट सलवार सूट पहनती थी, जिससे मेरे मम्मे उभरे हुए दिखते थे.

    मैं यह नहीं जानती थी कि मैं कभी मकान मालिक से चुदूँगी क्योंकि मेरा बॉयफ्रेंड मुझे बहुत अच्छे से चोदता था और मेरी चूत की खुजली मिटा देता था. मैं अपनी सहेली से बहुत बार ये बात सुनी थी कि मकान मालिक अपनी नौकरानी को चोदता है और अपनी किरायेदारों की औरतों को भी चोदता रहता है.. इससे मुझे कभी कभी लगने लगता था कि कभी लंड का टेस्ट चेंज करना हुआ तो इससे चुदने की सोचूँगी.

    एक दिन मैंने ये बात अपनी सहेली से पूछी कि क्या तुम्हारा मकान मालिक तुमको भी चोदता है? उसने बताया कि नहीं, वो उससे नहीं चुदवाती है. चूंकि मेरी सहेली का भी एक बॉयफ्रेंड था और वो भी अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाती थी.

    लेकिन उसने एक बात ऐसी कही जिससे मुझे चुदास सी चढ़ने लगी. उसने कहा कि जिस नौकरानी को वो मकान मालिक चोदता है, उसने एक बार ऐसे ही बातों बातों में बताया था कि इसका लंड बहुत मोटा और बड़ा है. इस बात से मुझे चुत में कुछ कुछ होने लगा था.

    जैसा कि मैंने बताया कि मैं जब भी अपने सहेली के रूम पर जाती थी तो उसका मकान मालिक मुझसे खूब बातें करता था. अब वो मुझसे थोड़ा खुल कर बातें भी करने लगा था. वो अपने मकान में किराये से रहने वाली औरतों के बारे में भी बातें करने लगा कि कौन कैसी है और किसका स्वभाव कैसा है.

    एक दिन मैं और मेरी सहेली शॉपिंग करने गए क्योंकि जब भी ऑफिस की छुट्टी होती है तो हम दोनों लोग शॉपिंग के लिए जाते थे.

    उस दिन मेरी सहेली का मकान मालिक ने भी बोला कि उसको भी शॉपिंग करनी है, तो वो भी अपनी वाइफ के साथ हम दोनों लोगों को भी अपने साथ लेकर शॉपिंग करने के लिए ले गया. उधर वो एक पैन्ट को ट्रायल रूम में चैक करने घुसा, मैं उधर ही खड़ी थी. तभी उसने ट्रायल रूम का गेट खोला और मुझे पैन्ट दिखाते हुए कहने लगा कि देखो कैसी लग रही है.

    तभी मेरी नजर उसकी खुली जिप पर पड़ी तो मैंने देखा कि उसका भुजंग लंड जिप से बाहर अपना गुलाबी सुपारा दिखा रहा था.

    मैंने उसके मोटे लंड को घूर कर देखा तो उसने उसी वक्त अपने लंड को सहलाया और मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद करके ट्रायल रूम में वापस घुस गया.

    इसके बाद शॉपिंग पूरी हो गई, उसने मेरी शॉपिंग का पैसा भी दे दिया था. मैंने मेरी सहेली को मैंने ये बात नहीं बताई कि उसके मकान मालिक ने मेरी शॉपिंग करवाई है. हालांकि मुझे उसके लंड दिखाने की बात से समझ आ गया था कि ये पक्का मुझे चोदने की फिराक में है.

    इसके बाद मैंने मेरी सहेली के मकान मालिक से पर बहुत दिन तक बातें की और मैं उसके साथ काफी हद तक खुल गई. एक दिन उसने मुझे अपनी दिल की बातें बताई और बोला कि वो मुझे पसंद करता है लेकिन मैंने उसकी बात को हंस कर टाल दिया.

    इसके बाद उसने मुझे एक दिन कॉफ़ी पिलाने के लिए बुलाया. हम दोनों लोग एक होटल में मिले और हम दोनों ने कॉफ़ी पीते हुए बहुत देर तक बातें की. उसने मुझसे बोला कि वो मुझे बहुत पसंद करता है और वो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है. मैं उससे बोली कि मेरा एक बॉयफ्रेंड है. उसने बोला कि वो मेरे बॉयफ्रेंड से भी ज्यादा मेरी देखभाल करेगा और मेरी सारी जरूरत पूरी करेगा.

    वो मकान मालिक वास्तव में मेरी बहुत देखभाल करता था और मेरी सारी जरूरतें पूरी करता था. जबकि मेरा बॉयफ्रेंड तो बस मुझे किस करता था या कभी कभी चोद देता था. इसके अलावा वो और कुछ नहीं करता था. साथ ही मुझे अब मकान मालिक के लम्बे लंड की बात भी याद आने लगी थी.

    मकान मालिक ने मेरी ये बात पता नहीं कैसे ताड़ ली कि मैं अपने ब्वॉयफ्रेंड से ज्यादा खुश नहीं हूँ. वो मुझसे लगातार फ़ोन पर बातें करता रहता था.. इसलिए मैं उसकी तरफ झुकती चली गई और अपने बॉयफ्रेंड से मैंने ब्रेकअप कर लिया.

    इस तरह मैं और मकान मालिक बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड बन गए. मैं अब जब भी अपनी सहेली को ऑफिस ले जाने के लिए जाती थी तो मकान मालिक मुझे अपने रूम में बुलाकर मुझे किस करता था और उसके बाद में मैं और मेरी सहेली हम दोनों लोग ऑफिस जाते थे.

    मेरी सहेली को ये बात नहीं पता थी कि मैं उसके मकान मालिक की गर्लफ्रेंड बन गई हूँ. उसके घर से जाने के बाद भी मैं और मकान मालिक हम दोनों लोग फ़ोन पर भी बातें करते रहते थे.

    एक दिन मकान मालिक ने मुझसे बोला कि वो मुझे आज शाम को शॉपिंग करवाना चाहता है. मैं भी बोली कि ठीक है. मैं अपने रूम में जाकर तैयार होने लगी. मैंने घर पर कह दिया था कि मुझे आने में देर हो जाएगी.

    मैं कुछ देर के बाद मकान मालिक के साथ उसकी कार में बैठकर शॉपिंग करने चल दी. वो अपनी कार में गाना बजा रहा था और कभी कभी वो मेरी चूची को भी दबा रहा था. हम दोनों मस्ती करते हुए कार में बैठकर शॉपिंग मॉल की तरफ जा रहे थे. मॉल में जाकर मैंने और मकान मालिक ने बहुत देर तक शॉपिंग की और जब शाम हो गई तो उसके बाद हम दोनों लोग एक दूसरे के हाथों में हाथ डाले हुए कार में आकर बैठे और बड़ी देर तक कार में चूमा-चाटी की. उस दिन उसने मेरे मम्मों को भी खूब मसला.

    उसके बाद हम दोनों लोग एक होटल में गए और वहाँ पर हम दोनों ने खाना आर्डर किया. कुछ देर बाद खाना सर्व हुआ तो हम दोनों लोग खाना खाने लगे. इसी बीच मैं मकान मालिक से बोली कि आप ड्रिंक करते हैं? वो बोले कि हां कभी कभी. मैं चुप हो गई तो उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम ड्रिंक करती हो? मैं उससे बोली कि नहीं मैं ड्रिंक नहीं करती हूँ.

    वैसे मैं अपनी सहेली के साथ ड्रिंक करती हूँ और मैं ये बात मकान मालिक को नहीं बताई क्योंकि हम दोनों को बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बने कुछ दिन ही हुए थे, इसलिए मैंने ये बात उसको नहीं बताई कि मैं शराब पीना पसंद करती हूँ.

    मैं और मकान मालिक खाना खाने के बाद होटल से बाहर आ गए और उसके बाद मकान मालिक मुझसे बोला कि और कुछ लेना है? मैं बोली कि डॉक्टर के पास चलते हैं. “क्यों?” “कुछ काम है, दवाईयां भी लेनी है.” “तुम ठीक तो हो ना?” “हाँ.. मैं ठीक हूँ.”

    मैं और मकान मालिक उनकी कार में बैठकर डॉक्टर के पास गए और वहां पर मैंने डॉक्टर से कुछ विटामिन्स की गोलियां और कुछ सीरप वगैरह लिखवा लिए क्योंकि मैं ऑफिस जाती हूँ और काम करती हूँ तो थक जाती हूँ. अब मैंने मेडिकल स्टोर से विटामिन की गोलियां लीं और कुछ सिरप भी ले लिए. इसके बाद मकान मालिक ने भी मेडिकल स्टोर से कंडोम का पैकेट ले लिया. मैंने देखा तो उसने मुझे आँख मारते हुए बोला कि ये भी ले लो, काम आता रहता है.

    हम दोनों लोग एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे और केमिस्ट भी हम दोनों लोगों को देख कर मुस्कुरा रहा था.

    इसके बाद हम दोनों लोग उधर से दवाईयाँ और कंडोम लेने के बाद मकान मालिक की कार में बैठकर घर चल दिए.

    आज मैं मकान मालिक को अपने घर में लेकर आई थी. उस समय मेरे घर में सब लोग सो रहे थे. मैं और मकान मालिक हम दोनों लोग चुपचाप मेरे बेडरूम में आ गए. हम दोनों को शॉपिंग करते करते रात हो गई थी, इसलिए थकान हो रही थी. हम दोनों बेडरूम में आकर आराम करने लगे. मैं मकान मालिक के लिए कॉफ़ी बनाकर ले आई और हम दोनों ने कॉफ़ी पी.

    इसके बाद मैं और मकान मालिक हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. मकान मालिक बोल रहा था कि मैं तुमको बहुत दिनों से चोदना चाहता था लेकिन आज तुमको चोदने का मौका मिला. मैं आज तुमको बहुत चोदूँगा और मैं आज तुम्हारी गांड भी मारूँगा.

    मैं भी गरम हो गई थी और उसके साथ चुदने का मूड बना चुकी थी.

    हम दोनों लोग एक दूसरे को होंठों पर किस करने लगे. वो मेरा सलवार सूट निकालने लगा और मैं भी उसके कपड़ों को निकालने लगी. जल्दी ही हम दोनों अधनंगे हो गए. मैं ब्रा और पेंटी में रह गई थी और वो अंडरवियर में हो गया था. उसके बाद हम दोनों लोग एक दूसरे को चिपका कर किस करने लगे. मकान मालिक मेरे चूतड़ों को दबा रहे थे और मुझे किस कर रहे थे और मैं सिस्कारियां ले रही थी.

    वो कभी कभी मेरी गांड पर बहुत जोर जोर दबा दे रहा था. इसके बाद उसने मेरी पेंटी निकाल दी और मेरी साफ़ चूत को देख कर वो मेरी चूत को चाटने लगा. वो मेरी चूत को चाटते समय थोड़ा सा ऊपर वाला हिस्सा को बहुत मसल रहा था. मैं चुदवाने के लिए एकदम मदहोश हो गई थी.

    मकान मालिक मेरी चूत को बहुत देर तक चाटता रहा और उसी दौरान मैं झड़ गई. वो मेरी चूत को झड़ने के बाद भी चाटता रहा. इसके बाद उसने मेरी गांड के छेद में भी अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा. मैं कामुक सिस्कारियां लेने लेने लगी.

    वो काफी देर तक मेरी गांड को चाटने के बाद मेरी चूची को दबाने लगा और मेरी चूची को चूसने लगा. मैं उनका सर पकड़ कर अपने मम्मों पर दबाए जा रही थी. हम दोनों लोग एक दूसरे को बड़ी बेताबी से किस करने लगे.

    मकान मालिक ने मुझसे अपना लंड चूसने के लिए बोला और मैं मकान मालिक का लंड चूसने लगी. वो बड़ी मस्ती से मुझसे अपना लंड चुसवा रहा था और कुछ देर एक बाद लंड चूसने के बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गया.

    कुछ देर यूं ही मस्ती करने के बाद मकान मालिक ने अपने लंड में कंडोम लगाया और मुझे चित्त लिटा कर अपना लंड मेरी चूत पर लगा दिया.

    मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने आँख दबाते हुए लंड को मेरी खुली चुत में पेल दिया. अब वो मुझे दबादब चोदने लगा. मैं भी गांड उठा कर उसके लम्बे और मोटे लंड से चुत चुदाई का मजा लेने लगी. हम दोनों लोग घमासान चुदाई करने लगे. मकान मालिक मुझे हचक का चोद रहा था और हम दोनों लोग मादक सिसकारियां ले रहे थे और कमरे में आह आह आह की आवाज आ रही थी.

    जिस बेदर्दी से मकान मालिक मुझे चोद रहा था, उससे मैं बहुत गरम हो गई थी और मैं उसकी पीठ पर अपने नाख़ून से नोंच रही थी.

    हम दोनों काफी देर तक चुदाई करते रहे. चूंकि लंड चुत की चुसाई के दौरान हम दोनों एक एक बार झड़ चुके थे तो जल्दी झड़ने का कोई सवाल ही नहीं था.

    हम दोनों मस्ती से एक दूसरे को किस करते हुए चुदाई का मजा ले रहे थे. मकान मालिक ने मुझे चोदते हुए रुक कर कहा- अब दूसरे तरीके से चोदूँगा.

    इसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मुझे पीछे से लंड लगा कर चोदने लगे. इस आसन में मुझे बहुत मजा आ रहा था. वो मुझे मस्ती से चोदे जा रहा था और मैं सिसकारियां लेकर गांड को पीछे धकेलते हुए उससे चुदवा रही थी. मेरे घर में सब लोग सो रहे थे, इसलिए मैं धीरे धीरे चुदवा रही थी और धीरे धीरे सिस्कारियां ले रही थी.

    काफी देर तक चुदाई करने के बाद हम दोनों झड़ गए. मकान मालिक मुझे चोदने के बाद कुछ देर बिस्तर में पड़ा रहा और इसके बाद मैंने बाहर आकर देखा कि सब सो रहे थे तो मैंने उसे जाने के लिए इशारा कर दिया और वो अपने घर चला गया.

    इसके बाद तो मैंने और मकान मालिक ने बहुत बार चुदाई का मजा लिया. कभी कभी तो मकान मालिक मुझे होटल में ले जाकर चोदता.

    एक दिन मकान मालिक ने होटल में ले जाकर मुझे दारू पिला कर मेरी गांड भी मारी थी. हम दोनों ने उस दिन दो बार चुदाई का मजा लिया था. अब मकान मालिक मुझे एक फिक्स होटल में लेकर जाता है, उधर उसने सैटिंग बना रखी है. वो पहले मेरी चूत को चोदता है और फिर मेरी गांड को भी चोदता है.

    A naked woman is amazing

    Submission from one of my new follower for all my friends.  He'd never seen it this way, in full light, without half-off clothes or a beach blanket across the lap or sex in a dark car. This was her whole body naked in light, standing and lying and front and back and open and showing and then different when she walked, surer than he was, unclunky and smooth-moving, with parts that didn't bounce. She knew how to be naked. She looked like she'd been raised naked in this room, a skinny girl when she was a girl, probably, and skinny in a certain way, with a little bulgy belly and ashamed of her feet, but grown out of shyness and wrong proportions now, and being married of course, used to being seen, and she didn't have curves and swerves but was good looking naked and stuck to him when they fucked like a thing fighting for light, a great wet papery moth.

    candyisland1

    real reason he stay loyal to her 

    harddick21blog

    Once the sense of safety is there, we can practice Allowing during sex.

    Allowing what?

    Anything.

    Literally, anything.

    You won’t move through things by avoiding them. You can only move through things by moving into them and experiencing them fully.

    If you feel pain, allow that. Share with your partner what you are experiencing. Be there for your partner, ready to hold space and help them move through things.

    luvlyshasha

    Hahahaha.. Amazing!!

    harddick21blog

    WHEN SEX HURTS and give enjoyment 

    People commonly think that sex is all about pleasure, joy, ecstasy and orgasms.

    But most of us have experienced sex which was painful, sex during which we experienced burning and aching in the genitals and pelvis. Many people have also experienced sex which provoked tears of sadness and possibly even rage.

    pravinbombay

    Album no 01

    pra-bha

    Black n white

    harddick21blog

    Black and white movie 

    Once you have clarity about the situation, what follows is very similar to what I talk about in my video Woman as an Initiatress on YouTube (pardon the poor quality but the material is gold, and it can be equally addressed to men). When you are enjoying a dance with someone and then this person is trying to get sexy with you right there and then – and it’s neither something that you find desirable or that appeals to you naturally, what do you do?

    If you get pissed and yell at the person you are getting pulled to their standpoint.

    harddick21blog

    Enjoying with a slut

    What if we really let people be who they are? Without the need for their experience to make any sense to us. What if we developed so much empathy that we could feel others without the need for their experience to be confirmed within us?

    What if we stayed deeply present with our own experience and didn’t succumb to the fearful mind which will always find reasons to worry?

    singhnishakanpur

    Desi middle age couple..

    Gud night 2 all my followers…

    Luv u all and have sexy dream…

    harddick21blog

    Could it be different?

    They will stay there sniffing your wounds from all directions. This is nothing except another way that we keep ourselves and others small. Of course it is not intentional. But it is conditional.

    We don’t have a culture of allowing another person’s bigness. We have a culture of making comparisons, and inevitably either finding others better than ourselves, or ourselves better than them.

    singhnishakanpur

    Desi cpl caught outdoor while fucking…

    harddick21blog

    Conscious men and women

    Those good “conscious” men.

    It’s no magic. It’s the result of deep inner work on activating our energy body and our inner radiance. A woman who is oozing radiance is magnetic by definition.

    Once our magnetic field is activated we naturally draw in things and people that truly resonate with us. Without much effort. This is the real secret of the feminine/yin know-how. And it really works.

    There are various ways to activate our radiance, but nothing works as quickly and directly as specific work on activating our sexuality and de-shaming the inner slut (yes yes). Trust me, I did make lots of experiments with this over the last 10 years.

    nancyaakash

    Real stufff😂

    harddick21blog

    Original desi Bollywood scene

    No one could ever think that our Bollywood can make such movies and shot such scenes. Now a days, these scenes are very common and on top of that our actors are also ready to perform such scenes on camera without having any hesitation in their heart. They are bold enough to allow the directors to take a retake for the same scene. 

    harddick21blog

    Enjoying a desi bitch in a hotel

    How can you be unconsciously scaring away a potential partner?

    - By having (conscious or unconscious) expectations or demands on how they should show up. All the thoughts starting with “I deserve…” “He/she has to…”, which basically means that you do not accept the other person and wish that they showed up differently. The question is: “if you want this person to be different, why are you even bothered to focus so much on them?”

    cinnakunji5

    Dam 🔥 doggy

    apekarlo

    Sounds so good

    harddick21blog

    ARE YOU SCARING AWAY YOUR BELOVED?

    I receive many emails from people (mostly women) asking how to attract a beloved. Maybe there is someone in your life that you want a deeper connection with. Or maybe you haven’t met this person, yet, but you want to welcome him/her into your life.

    Some women end up saying that there are no good men - or no *conscious* - men around.

    If you can identify with any of the above, I invite you to tune into this:

    What if the issue was not about the man or the woman, but about you?