SAY NO TO RAPE & HAPPY NEW YEAR.

    You're not a loser if you're not able satisfy certain needs of a woman but you're a great failure of your parents if you forced a woman to quench your lust. 

    The satisfaction you'll get when you can put a smile on a woman's face is far greater than the pleasure of sexuality harassing someone. 

    May god bless our coming with all kind of positive thoughts to respect a woman.

    kingsizecobra

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    मेरा नाम मनीष हैं और मैं आगरा से हूँ और दिल्ली में पढ़ाई कर रहा हूँ. मेरी हाईट 5 फिट 10 इंच हैं, कलर गोरा हैं और बॉडी एकदम अच्छी हैं. तब मेरी छुट्टियां थी और मैं दिल्ली से आगरा में जा रहा था. 10 बजे के बाद मैं ट्रेन में चढ़ा और मुझे नींद भी आ रही थी तो मैं लेट गया. लेकिन मुझे निंद नहीं आई क्यूंकि मेरी साइड बर्थ थी और मेरी हाईट की वजह से थोडा असहज फिल हो रहा था.

    इसलिए मैंने बुक निकाल के पढना चालू कर दिया. करीब 12 बजे मैंने मोबाइल में मूवी लगाईं और देखने लगा. लेकिन बेटरी ड्रेन होने लगी तो मैंने उसे भी बंद कर दिया. चार्जर निकाल के पॉइंट खोजने लगा. लेकिन उस ट्रेन में चार्जिंग पॉइंट दरवाजे और वाशरूम के पास में ही था. मैं वही दरवाजे के पास में खड़ा हो गया और अपने मोबाइल को चार्जिंग में लगा दिया.

    मुझे कुछ आवाज आई तो मैं पलटा. देखा तो एक सेक्सी लेडी रेड साडी में खड़ी हुई थी. वो भी अपने मोबाइल को चार्ज करने के लिए ही वहां आई हुई थी. उसने मोबाइल को प्लग किया और वो वही खड़ी हो के मोबाईल को थामे हुए थी. दरअसल उसका कोर्ड छोटा था इसलिए मोबाइल को पकड के ही चार्ज करना पड़ा उसे.

    मैं देख रहा था की ऐसी स्थिति में मोबाइल को उठाये रखने की वजह से अब उसके हाथ दुखने लगे थे. मैंने उसे ऐसे देखा तो अपने पास का एक्स्ट्रा केबल उसे ऑफर किया. उसने मुझे थेंक यु कहा और फिर हम दोनों के बिच में औपचारिक इंट्रो हुआ.

    उसका नाम तनवी था और वो दिखने में एकदम गोरी थी. और उसका फिगर एकदम सेक्सी था. उसके बूब्स 34 इंच के ऊपर के थे और कमर पतली सुडोल करीबी 28 इंच की. पीछे गांड बूब्स से भी बड़ी थी और उसका नाप कम से कम 36 इंच का तो होगा ही होगा. उसने बताया की वो कानपुर से थी लेकिन आगरा में जॉब करती थी और वही पर अपनी फेमली के साथ में रहती थी. और ऐसे ही चेटिंग करते हुए हम दोनों क्लोज से हो गए.

    उसने मुझे मेरे मोबाइल के मॉडल के बारे में पूछा और कहने लगी की मुझे भी ऐसा ही एक मोबाइल लेना हैं. मैंने उसे डिटेल्स बताई और उसे कहा की आप चाहो तो मेरा मोबाइल देख सकती हूँ. और वो मेरा फोन ले के देखने लगी. और उसने पहले सब फीचर्स देखे और फिर उसने एमएक्स प्लेयर ऑन कर दिया. मैं भूल गया की मेरे मोबाइल में पोर्न क्लिप्स भी थे.

    उसने उस फोल्डर को खोला, मुझे देखा और स्माइल देने लगी. मैं थोडा टेन्स हो गया. उसने मुझे मोबाइल वापस दे दिया, हम दोनों एकदम चुप से थे. उसने चुप्पी को तोडा और बोली की तुम को सेक्स के लिए कैसी लेडी पसंद हैं?

    मैं उसका प्रश्न सुन के एकदम चौंक गया. लेकीन मुझे उसकी सीधी बात करने की अदा पसंद आई. और मैंने उसे कहा की मुझे मच्योर लेडिज पसंद हैं. उसने स्माइल दी और उसने पूछा क्यूँ? और तुमको मच्योर लेडिज में क्या पसंद हैं? मैंने कहा मच्योर लेडिज बहुत ही होर्नी होती हैं और उनका वजन सब सही जगहों के ऊपर होता हैं. और ये कह के मैंने उसे आँख मार दी.

    वो शर्म से लाल हो गई और बोली क्या तुम मुझे एक फेवर कर सकते हो? मैंने कहा क्या? तो उसने कहा की क्या तुम मुझे ये वीडियो मेरे मोबाइल में भेजोगे, मैंने ऐसे क्सक्सक्स क्लिप्स नहीं देखे हैं कभी.

    मैंने कहा आप तो आलरेडी शादीशुदा हैं फिर भला आप को ऐसे ये सब देखने की क्या जरूरत आन पड़ी. उसने कहा की उसका पति उसको खुश नहीं कर पाता हैं सही तरह से. इसलिए वो पोर्न देख के खुद को शांत करना चाहती थी.

    मैंने आंटी को वीडियो भेज दिया और वीडियो ट्रांसफर हो रहा था तब मैंने उसे कहा की अगर आप चाहो तो मैं वीडियो दिखाने के सिवा और भी बहुत कुछ कर सकता हूँ. ये कह के मैंने उसे एक नोटी स्माइल दे दी. उसके चहरे के उपर ब्लशिंग हुई लेकिन वो एक भी शब्द नहीं बोली.

    इस वजह से मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उस से एक किस मांग ली. उसने पहले तो मना कर दिया लेकिन फिर वो मानी लेकिन कहने लगी की हम लोग ट्रेन में हैं यहाँ कैसे किस कर सकते हैं.

    मैंने उसे कहा की हम लोग बाथरूम में जा के किस कर सकते हैं. मैंने उसे रिक्वेस्ट किया और बहुत सब समझाने के बाद वो मानी. पहले मैं वाशरूम में घुसा और फिर मेरे पीछे पीछे 5 मिनिट में वो भी आ गई. मैंने दरवाजे की सटकनी लगा दी और फिर हम दोनों एकदम जनून के साथ किस करने लगे. स्लोवली मैंने अब उसके बूब्स को दबाना चालू कर दिया. और मैं पीछे उसकी गांड के ऊपर भी हाथ मार रहा था. वो एकदम होर्नी हो चुकी थी और मोअन कर रही थी हलके हलके से दबे स्वर में.

    अचानक उसने किस तोड़ दी और बोली, नहीं नहीं ये ठीक नहीं हैं मैं ये नहीं कर सकती.

    मैंने कहा अरे नहीं कुछ भी गलत नहीं हैं, तुम अपने आप को खुश और संतुष्ठ कर रही हो, जो चीज तुम्हे तुम्हारा हसबंड नहीं दे सकता हैं.

    वो चुप थी और मैंने फिर से उसे धीरे से किस करना चालू कर दिया. फिर मैंने उसकी साडी को ऊपर किया और पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को भी हिलाने लगा. उसकी चूत गीली हो चुकी थी और पानी निकल रहा था. वो एकदम चिपचिपी सी थी. वो अह्ह्ह अह्ह्ह्ह मोअन कर रही थी.

    मैंने अपनी पेंट से लंड को बहार निकाला और उसके हाथ को ले के लंड पर रख दिया. मेरे बदन में जैसे करंट की एक लहर दौड़ उठी थी. उसके हाथ एकदम सॉफ्ट थे. उसने मेरे लंड को दबाया और फिर आगे की चमड़ी को हटाया. मेरे लंड से भी प्रीकम निकल पड़ा था. आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

    मैंने उसकी गांड अपनी तरफ घुमा के पेंटी को साइड में कर दिया. और फिर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका के धीरे से पुश कर दिया. उसकी चूत काफी गरम थी. मैंने अब स्लोवली उसकी चुदाई चालू कर दी. वो मोअन कर रही थी अह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह. उसकी मांसल गांड धीरे धीरे मटक रही थी मेरे झटको की वजह से.

    मैंने उसकी आवाज को स्लो करने के लिए उसके होंठो के ऊपर अपने होंठो को रख के किस कर दी. फिर मैंने उसे चोदते हुए स्की जेकेट को खोला. मेरी स्पीड की वजह से उसकी गांड और जांघे आगे पीछे होने लगी थी. वो अह्ह्ह्ह अह्ह्ह मोअन कर रही थी. कुछ ही मिनिट की चुदाई में उसकी चूत का रस निकल के उसकी जांघो पर बह निकला.

    फिर 2 मिनिट में मेरा पानी भी निकलने को था. उसने कहा की मुझे पिला दो अपना वीर्य. मैंने उसे जोर जोर से और दो झटके दिए. और फिर वो फटाक से घुटनों के ऊपर बैठ गई. मैंने लंड को उसके मुहं में दे दिया. उसने चूस चूस के सब पानी निकाल दिया. और एक एक बूंद को वो जैसे अमृत समझ के पी भी गई. आखरी बूंद को मुहं में लेते हुए उसने लंड की नली को ऐसे चूसा जैसे स्ट्रॉ से कोका कोला की बोतल से आखरी बूंद खिंच रही हो.

    सच में एक सुखद और क्विक फकिंग थी मेरे लिए. मैं अभी भी जैसे ये सब सपने में हुआ था वैसे बेशुध्द सा था. आंटी ने मुझे खड़े होते हुए कहा, चलो अब जल्दी से कपडे पहनो लगता हे कोई स्टेशन आने वाला हैं. और वो अपने कपडे पहन के बहार निकल गई. फिर से वो चार्जिंग पॉइंट के पास खदीम मोबाइल को चार्ज करने लगी. 2 मिनिट के बाद मैंने दरवाजे को हलके से खोला और बहार आ गया.

    फिर हम दोनों वही खड़े हुए बातें कर रहे थे. मैंने उसके पास कांटेक्ट नम्बर माँगा तो उसने कहा की ट्रेन में हुई इस बात को प्लीज ट्रेन में ही भुला देना. यहाँ से उतर के हम दोनों फिर से अजनबी हैं. वैसे उसकी बात सही भी थी, शायद वो एक बार ही मेरा लंड ले के खुद की चूत की आग को छिपा लेना चाहती थी बस!

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    Release Date : 18 August 2018

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    यह कहानी तब की है जब मेरी दिवाली की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं अपने अंकल के वहाँ चला गया जो वड़ोदरा में रहते हैं। उनका तीन लोगों का परिवार है, अंकल-आंटी और उनका 7 साल का बेटा। यह कहानी मेरी आंटी के बारे में है। मेरी आंटी का फ़ीगर क्या बताऊँ दोस्तो, वो कद में मुझसे छोटी है पर दिखने में किसी कयामत से कम नहीं ! मेरी और आंटी की बहुत जमती थी और अंकल एक बिजनेसमैन हैं, अंकल मुझे बड़े बेटे की तरह कम और दोस्त ज्यादा रखते थे। एक दिन अंकल को किसी काम से दूसरे शहर जाना पड़ा। उस रात मैं और आंटी बैठे थे। मेरी और आंटी की अच्छी बनती थी पर मैंने कभी आंटी को उस नजर से नहीं देखा था पर उसके इरादे आज मुझे साफ नहीं लग रहे थे। फ़िर भी हम बैठे थे। वो मुझे बोल रही थी- पराग अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी ! मै- क्या कहा आपने? आंटी- शादी बुद्धू शादी। मै- आंटी, अभी तो मेरी पढ़ाई चल रही है? आंटी- तो क्या शादी के बाद नहीं पढ़ सकते क्या? दोस्तो, मैं बता दूँ कि हमारी बिरादरी में शादी बहुत जल्द हो जाती है। मै- हाँ, पढ़ तो सकते है लेकिन ! आंटी- लेकिन क्या पराग? मेरे जवाब देने से पहले आंटी ने फ़िर पूछा- देख पराग, तेरी पसन्द में कोई और हो तो बता दो वरना ! मै- नहीं, मुझे कोई पसन्द नहीं है। फ़िर मैंने पूछा- वरना क्या? आंटी- मैंने तुम्हारे पापा से बात की है कि मेरी छोटी बहन काजल को अपने घर की बहु बनाएँ। मैं- पर वो तो तुम्हारी बहन है। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |  पर दोस्तो, मैं अंदर से बहुत खुश था क्योंकि काजल दिखने में इतनी खूबसूरत है कि पूछो ही मत ! स्वर्ग की अप्सरा जैसी। आंटी- तो क्या हुआ? अगर मेरी बहन तुम्हारी बीवी बने? मै- पर अभी तो मैंने कमाना भी चालू नहीं किया और बड़ी प्रोब्लम तो यह है कि शादी के बाद क्या करते हैं, मुझे पता नहीं? आंटी- ओेई हरिचन्द्र, तेरे पापा का अच्छा बिजनेस चल रहा है तेरे अंकल का भी अच्छी तरह से चल रहा है तो क्या मेरी बहन भूखी रहेगी तेरे घर में? मैं- यह बात भी ठीक है ! इतने में आंटी बोली- तेरे दूसरे प्रोब्लम में मैं तेरी मदद कर सकती हूँ ! मै- वो कैसे? आंटी- मैं तुम्हें सब सिखा दूंगी। और मैं तैयार हो गया मैं तो सांसारिक जीवन कैसे जीते हैं यह सीखना चाहता था पर आंटी सेक्स सिखाना चाहती थी। बातों ही बातों में रात के 12 बज गये तो मैंने कहा- चलो सो जाते हैं। तो आंटी ने कहा- सीखना नहीं है? “मैं कुछ समझा नहीं?” तो अब आंटी ने अपनी शरम छोड़ते हुए कहा- इसकी क्लास तो रात में ही लगती है ! मै- यह आप क्या कह रही हैं? मुझे तो सब समझ आ गया था कि आज आंटी मुझसे चुदने वाली हैं, और मैं भी खुश था। और उसी ख्याल में मेरा लन्ड कब खड़ा हो गया पता ही नहीं चला। अब मैं भी गर्म हो गया था और आंटी तो जैसे ज्वाला की तरह गर्म थी। तो आंटी ने मुझे अपने बेडरूम की तरफ़ इशारा किया, मैं समझ गया कि लाईन साफ़ है। मैं जब अन्दर गया तो आंटी ने मुझे अपनी ओर जोर से खींच लिया और मुझे पूरे बदन पर चुम्बन करने लगी। मैं तो स्वर्ग की सैर कर रहा था क्योंकि पहले कभी किसी लड़की ने मुझे छुआ तक नहीं था। अब वो मेरा लन्ड पैन्ट के ऊपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी और मेरे मुँह से ओह आह की आवाज निकल रही थी और उसे मुझे तड़पा कर मजा आ रहा था। अब तक मैं ऐसे ही खड़ा था। अगले ही मिनट आंटी बोली- पराग, मैं तुम्हें पसन्द नहीं हूँ क्या? मै- नहीं आंटी, आप तो सुन्दर हैं।

    आंटी- तू झूठ बोल रहा है ! अगर मैं तुम्हें पसन्द होती तो अब तक तूने मुझे चोद दिया होता ! आंटी तीर पर तीर छोड़ रही थी और मेरे सब्र का बान्ध टूट रहा था। पर वो मेरी आंटी थी तो मैं उसे चोदना नहीं चाहता था लेकिन मैं भी जवान था, जल गया आंटी की ज्वाला में ! और मैं उसके ऊपर चढ़ गया लेकिन वो मेरे इस वार के लिए तैयार नहीं थी। फ़िर मैं उस पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मैं उसको पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी। आग दोनों तरफ से लगी हुई थी। अब आंटी ने मेरे शर्ट के बटन खोलने चालू किए और मुझे एक नशा सा छाने लगा। अब मुझे पता नहीं था कि मैं क्या कर रहा था पर आंटी तो पूरे मूड में थी। आंटी ने मेरी पैन्ट को नीचे कर दिया अब मैं सिर्फ अन्डरवीयर मैं आंटी के सामने खड़ा था पर अब मेरी बारी थी आंटी के कपड़े उतारने की | तो मैंने आंटी के ऊपरी वस्त्र उतारने लगा तो मैं थोड़ा डर रहा था, मैंने धीरे से उसके स्तन पर हाथ रख दिया तो उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबा दिया, मैंने उसका ऊपरी वस्त्र निकाल फेंका। अब उसके दोनों सन्तरे मेरे हाथों में थे तो मैं उनसे खेलने लगा। आंटी बोली- इनसे खेलते रहोगे या कुछ और करने का भी इरादा है? तो मैंने आंटी से कहा- वैसे तो मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ मेरी जान ! इस बार आंटी थोड़ा शरमा गई तो मैंने कहा- शरमा क्यूँ रही हो? आंटी मजाक करते हुए- तुम तो मेरे बेटे जैसे हो। मैं- हाँ, तो आज बेटे से ही चुदवा लो ! आंटी- बड़ा आया चोदने वाला ! मैंने देखा है तुम्हारा लौड़ा ! छीः ! मुझे तो तुम्हारे लौड़े को लौड़ा कहने में भी शरम आ रही है।आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं- क्यूँ, आपने कब देखा? आंटी- तो क्या हुआ अगर मैंने तेरा लण्ड नहीं देखा तो आज तो जी भर कर देखूँगी और…!! इतना कह कर वो मेरे लण्ड पर टूट पड़ी। मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया मेरे मुँह से आह ह्ह..अओह की आवाज आ रही थी क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तो दोस्तो, मैं 2 मिनट में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य आंटी के मुँह में छोड़ दिया और दोस्तो, क्या बताऊँ, दिल को कितना सुकून मिला ! पर दोस्तो, मैंने हार नहीं मानी। थोड़ी ही देर बाद आंटी को कस कर पकड़ कर अपना लण्ड आंटी की चूत के मुँह पर रख दिया और एक झटका लगाया तो मेर लण्ड आंटी चूत में पूरा समा गया। दोस्तो, इस अनुभव का मैं विस्तार नहीं कर सकता ! थोड़े शब्दो में कहूँ तो ”स्वर्ग भी कुछ नहीं है इस चूत के आगे !” पर मुझे लगा कि आंटी को कुछ परेशानी थी, उसकी आँखों से पानी निकल रहा था तो मैं रूक गया और आंटी को किस करने लगा और आंटी से पूछा- आंटी आपको बहुत दर्द हो रहा है? आंटी- हाँ, बहुत हो रहा है, इस तरह से कोई चोदता है अपनी आंटी को? मै- आपकी कोई मदद कर सकता हूँ? आंटी- हाँ, मादरचोद चोद दे मुझे मसल दे मेरी जवानी को… अब मैं आंटी को जोर-जोर से चोदने लगा, आंटी दर्द के मारे मुझसे कस कर लिपट गई और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए। आंटी बुरी तरह चिल्ला रही थी पर मैंने उस पर और उसकी चूत पर बिल्कुल रहम नहीं किया और जोर-जोर से अपना लण्ड पेलता रहा आंटी की चूत में। आंटी चिल्ला रही थी और बोल रही थी- पराग ! और जोर से चोदो… बहुत मजा आ रहा है, अओह… पराग चोद दो मुझे ! आज मत छोड़ना ! आह…आ आह ! की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। कितनी सेक्सी आवाज थी दोस्तो ! मैं तो पूरी ताकत से चोद रहा था। इतने में सब खत्म हो गया।  मैंने 20 मिनट चुदाई करके आंटी की चूत में ही झड़ गया क्योंकि मुझे पता था की आंटी की नसबंदी का ओपरेशन हो चुका है। इसलिए कोई प्रोब्लम नहीं थी। हम दोनों पर एक मदहोशी सी छाने लगी। इस दौरान आंटी तीन बार झड़ गई थी तो उसकी हालत तो मुझसे भी खराब थी, उसकी आँखें नशीली हो गई थी, उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था, अब वो मुझे किस कर रही थी और मेरी छाती को भी चूम रही थी। इतना सब होने के बाद रात के 3 बज गए, मैं और आंटी पूरी रात साथ बिना कपड़ों के ही सो गए। सुबह जब मैं उठा तो आंटी ने मुझे चाय के लिए बुलाया तो मैं चला तो गया आंटी के पास पर दोस्तो, रात के कारनामे से मैं आंटी के साथ आँख नहीं मिला पा रहा था। मैं चाय लेकर कम्रे में आ गया पर मैं अपने आप को रोक नहीं सका, मैं चाय पी करके रसोई में चला गया क्योंकि आंटी वहीं थी। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं रसोई में जाते ही आंटी की गर्दन पर किस करने लगा, तो आंटी पीछे मुड़ कर मेरे होंठों पर किस करने लगी और बोली- पराग, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… क्या तुम भी मुझे प्यार करते हो ? मैं- आई लव यू | दोस्तो, मैंने आंटी से यह नहीं कहा कि आप शादीशुदा हैं या ऐसा कुछ ! वैसे तो आप सभी काफी समझदार हैं, आंटी मुझसे क्यूँ चुदना चाहेगी उसका कारण तो आप जानते हो।  

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    मैंने कहा, “आराम से खूब क्रीम मलो। थोड़ी देर बाद जब गाँड का छेद रीलैक्स हो जायेगा तब बड़े आराम से मेरा लंड अंदर जायेगा…” और मैं स्मोक करने लग गया। दोस्तों क्या सीन था कि एक बेटी अपनी माँ की गाँड पर पूरी लगन से क्रीम मल रही थी और अपनी माँ को गाँड मरवाने के लिये तैयार कर रही थी। सिगरेट खतम होने के बाद मैं पलंग पर चढ़ा और अपना तन्नाया हुआ लंड ममता आंटी के चूत्तड़ों पर फेरने लगा और नेहा को बोला, “अब ज़रा मेरे लंड के ऊपर भी क्रीम लगाओ! अब मैं आपकी मम्मी के भूरे रंग के गाँड के छेद को खोलूँगा।” नेहा ने बड़े ही प्यार से मेरे लंड पर क्रीम लगायी और एकदम चिकना कर दिया। मैंने नेहा को कहा कि वो अपने दोनों हाथों से अपनी मम्मी के चूत्तड़ पकड़ ले और खींच कर चौड़े करे ताकि ममता आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल जाये। नेहा ने मेरे कहे अनुसार अपनी मम्मी के दोनों विशाल चूत्तड़ों को पकड़ लिया और चौड़े कर दिये जिससे ममता आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल गया। मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और गाँड के भूरे छेद पर टिका दिया और दूसरे हाथ की उँगलियों से गाँड के छेद को और चौड़ा किया और लंड का सुपाड़ा टिका कर हल्के से झटका दे कर ममता आंटी की कोरी गाँड में सरका दिया। क्रीम की चिकनाहट के कारण मेरा एक इंच लंड ममता आंटी की गाँड के छल्ले में जा कर फँस गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी बोलीं, “अनिल बहुत दर्द कर रहा है बाहर निकाल ले।” मैंने कहा, “ममता घबराओ नहीं। आराम-आराम से दूँगा। बस तुम हिम्मत कर के लंड लेती रहो।” इतना बोल कर मैंने नेहा को इशारा किया कि वो अपनी माँ की गाँड एक दम कस कर पकड़ ले। नेहा ने भी मेरा कहना माना और मैंने अपने दोनों हाथों से ममता आंटी की कमर पकड़ ली और ज़ोरदार झटका मारा जिससे चिकनाहट होने के कारण मेरा लंड सरकते हुए पूरा सात इंच ममता आंटी की गाँड में समा गया। ममता आंटी को तो जैसे बिजली का शॉक लग गया हो। अगर नेहा ने उनके चूत्तड़ और मैंने उनकी कमर कस कर नहीं पकड़ी होती तो शायद ममता आंटी मेरा लंड निकाल देतीं पर बेचारी मजबूर थी… सिवाये कसमसाने के और गालियाँ देने के अलावा वो कुछ भी नहीं कर सकती थीं। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने भी बिना कुछ परवाह किये बिना अपना पूर लंड ममता आंटी की गाँड में उतार कर ही दम लिया और हल्के-हल्के शॉट देने लगा। ममता आंटी तो दर्द के मारे पागल हो गयी थी और बोले जा रही थीं, “अरे मादरचोद, भोसड़ी वाले मार डाला रे। तेरी माँ का भोंसड़ा मादरचोद! अगर मुझे मालूम होता कि गाँड मरवाने में इतना दर्द होता है तो बहन के लंड तुझे छूने भी ना देती। बहनचोद मैं ज़िंदगी भर तुझे जैसे कहेगा वैसे ही चुदवाऊँगी और चूसूँगी। तू जिसको बोलेगा मैं उसको चुदवा दूँगी तेरे से। मुझे छोड़ दे माँ के लौड़े। हाय मेरी माँ! फट गयी मेरी गाँड। मादरचोद सत्यानाश कर दिया तूने आज मेरी गाँड का। आज तक मैंने बड़े प्यार से बचा कर रखी थी।” ममता आंटी बोलती रहीं पर अब मैं ताव में आ चुका था और हुमच-हुमच कर अपना लंड गाँड में पेल रहा था। ममता आंटी को भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि अब वो कह रही थीं, “मार ले मेरे डार्लिंग! मार ले अपनी आंटी की गाँड। हाय हाय! शूरू-शूरू में तो बहुत दर्द हुआ डार्लिंग पर वाकय में अब बहुत मज़ा आ रहा है। नेहा तू भी अनिल से अपनी गाँड जरूर मरवाना।” करीब बीस पच्चीस मिनट तक ममता आंटी की गाँड मारने के बाद मैंने अपना रस ममता आंटी की गाँड में ही निकाल दिया। दोस्तों! उस दिन के बाद महीने भर जब तक अंकल नहीं आये, मैंने उन दोनों माँ-बेटी को एक ही बिस्तर पर एक साथ नंगा करके खूब चोदा। अंकल के आने के बाद, ममता आंटी को दिन में जब भी समय मिलता, एक बार तो चुदवा ही लेती थी। और मैं हर रोज़ नेहा के साथ सोता था और हम दोनों जम कर चुदाई करते थे। ममता आंटी ने और नेहा ने अपनी सहेलियों का भी खूब मज़ा दिलवाया। ममता आंटी और नेहा के कारण मुझे अलग-अलग औरतों को चोदने का मौका मिला। आशा करता हूँ कि आप सब को मेरी आप-बीती सुन कर मज़ा आया होगा।

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    मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और बलबला कर उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया। मैं नेहा की कोरी चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, “बहन की लौड़ी दीदी! जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!” और आराम से सिगरेट सुलगाकर अपनी पीठ टिका कर पीने लगा। नेहा ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया, पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर नेहा के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसाता रहा। दस मिनट बाद मैंने नेहा को बोला, “चलो आज आपको घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ। मेरी प्यारी दीदी! करोगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?” नेहा ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “अनिल कैसे घोड़े की सवारी? तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में चोदूँ?” मैंने कहा, “हाँ दीदी! आपको तो सब पता है… पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए।” नेहा मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले। जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया। नेहा बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी। दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, “नेहा दीदी! अब आप अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे करो और लंड सवारी का मज़ा लो।” इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा। नेहा की हिम्मत मुझे माननी पड़ी कि दर्द होने के बावजूद भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार करीब आधे घंटे तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का फाऊँटेन उसकी चूत में गिरा दिया और नेहा को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे। करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा नेहा सिगरेट पीते हुए मेरे लंड से खेल और चूस रही थी। जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी। मैंने भी कहा, “दीदी! चूसो इसे… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने नेहा से कहा, “नेहा दीदी! आपको ये तो मानना पड़ेगा कि आज भी और आगे भी मैं जब आपको चोद कर ये सुख दूँगा, ये सब आपकी मम्मी की वजह से ही मुमकीन हुआ है।” नेहा तपाक से बोली, “यू आर राइट अनिल! ऑल थैंक्स टू मम्मी! अगर मम्मी नहीं मानतीं तो पता नहीं मेरी चूत कब चुदती।” मैंने कहा, “फिर तो दीदी ये गलत बात है कि हम दोनों अंदर इतना मज़ा ले रहे हैं और आपकी मम्मी बाहर अपनी चूत अपनी उँगली से ठंडी कर रही है। मेरी बड़ी इच्छा है कि आप दोनों को मैं एक ही पलंग पर एक साथ नंगा करके चोदूँ।” नेहा फ़ोरन ही तैयार हो गयी और बोली, “मैं अभी जा कर मम्मी को बुला कर लाती हूँ।” मैंने कहा, “नहीं! आप बैठ कर एक ड्रिंक और सिगरेट पियो। मैं आपकी मम्मी को लाता हूँ।” मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि ममता आंटी अपना ब्लाऊज़ उतार कर ब्रा और पेटीकोट में लेटी हुई थी और अपना पेटीकोट कमर तक उठा कर स्मोक करते हुए अपने वाइब्रेटर से मुठ मार रही थीं। मुझे देख कर बोली, “क्या बात है अनिल! नेहा ठीक तो है ना?” ममता आंटी की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं। मैंने कहा, “डार्लिंग घबराओ नहीं! मेरा लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की। अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है। चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है। इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी। तुम्हारी तरह वाइब्रेटर से ठंडी नहीं होगी।” ममता आंटी बोली, “क्या बात है (हुच्च) तू बाहर कैसे आ गया?” मैंने कहा, “ममता मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ और तुम्हारी चूत बजाऊँ।” ममता आंटी बोली, “व्हॉट? ऑर यू क्रेज़ी? (हुच्च) मुझे अपनी बेटी (हुच्च) के सामने चुदाने में शरम आती है।” नेहा जो शायद दरवाजे पर खड़ी हो कर हमारी बातें सुन रही थी, सिर्फ़ सैंडल पहने नंगी ही एक दम बाहर आ गयी और बोली, “मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना। मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है।” ममता आंटी उठ कर खड़ी हुईं तो गिरते-गिरते बचीं। उन्होंने काफ़ी ड्रिंक कर रखी थी और नशे और हाई पेन्सिल हील की सैण्डलों की वजह से उनका बैलेंस बिगड़ गया पर नेहा ने उनको अपनी बाहों में भर लिया। मैने भी पीछे से जा कर ममता आंटी की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबा लिया और ममता आंटी को बीच में दबाये हुए बेडरूम में ले कर आ गये क्योंकि वो नशे में अपने आप चलने की सूरत में नहीं थीं। मैंने नेहा को कहा, “चलो दीदी! अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ।” मैंने ममता आंटी की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं। नेहा ने भी ममता आंटी के सारे कपड़े उतार दिये और बोली, “लो अनिल अबकी बार मेरी मम्मी की चूत की सिकाई करो।” क्या नज़ारा था दोस्तों! अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ हाई हील सैण्डलों में, मेरे सामने थीं। मैंने भी नंगी ममता आंटी को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, “ममता डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा और जैसे तुमने उस दिन कहा था कि कोरी चूत तो नहीं दे सकी पर अपनी कोरी गाँड मरवाऊँगी, तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड का उद्घाटन करूँगा। अपनी गाँड मरवाओगी ना ममता डार्लिंग।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, “मेरे गाँडू राजा! मैं तुझे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ। साले (हुच्च) तू… तूने… मेरी चूत मारी… मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और…. और… यहाँ तक की साले चूतिये तूने मेरे सैण्डलों और पैरों को भी नहीं छोड़ा…. बोल साले भोसड़ी के… (हुच्च) तुझे कभी मैंने ना कहा क्या… हैं? तो इसके बाद क्या पूछता है… जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, अब गाँड मारनी है… तो साले गाँड मार ले, पर मेरी गाँड जरा प्यार से मारना, मैंने आज तक (हुच्च) तेरे अंकल को उँगली तक नहीं लगाने दी।” मैंने कहा, “डार्लिंग तुम बस आराम से एक और ड्रिंक लगा कर कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ… मैं अपना लंड नेहा से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ।” ममता आंटी ने ड्रिंक बनाने की बजाये व्हिस्की की बोत्तल ही मुँह से लगा कर पीने लगी। मुझे पहले तो चिंता हुई कि कहीं इतना पीने से बिल्कुल ही पस्त हो कर सो ना हो जायें और मेरा सब प्लैन चोपट हो जाये पर फिर ख्याल आया कि आंटी पीने की आदी हैं। वैसे तो आम-तौर से वो लिमिट में ही पीती हैं पर पहले भी मैंने उन्हें ज्यादा पी कर नशे में धुत्त देखा है और जब भी ममता आंटी नशे में कंट्रोल के बहार हुई हैं तब वो पस्त या शाँत होने की बजाय हमेशा काफ़ी बेकाबू और ज्यादा उत्तेजित ही हुई हैं। यही सोच कर मैंने नेहा को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, “लो नेहा दीदी! चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये। देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी। ममता! देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये। ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी। देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है।” मैं नेहा का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा। इतनी देर में ममता आंटी भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी। मैने नेहा के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, “दीदी चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये… अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आपकी मम्मी को ज्यादा तकलीफ न हो।” नेहा ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और ममता आंटी की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, “अनिल! मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है। मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है।”

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    शाम को ममता आंटी बिस्तर पर सिर्फ हाई हील वाले काले और चमचमाते सैण्डल पहने, नंगी पसरे हुए ड्रिंक पी रही थीं और मैं अपने होंठ और जीभ उनके सैण्डलों और पैरों पर फिरा रहा था। मुझे उनके सैण्डलों और पैरों की महक और टेस्ट बहुत अच्छा और उत्तेजक लग रहा था, जिसकी वजह से मेरा लौड़ा तन कर सीधा खड़ा था। ममता आंटी बोली, “डार्लिंग अब और चूदाई नहीं करेंगे ताकि तेरा लंड कल नेहा की चूत के लिये एकदम तैयार और बे-करार रहे। मैं चाहती हूँ कि जब उसे तेरा लंड मिले तो एक दम ताज़ा और मस्त मिले। कल दिन में नेहा के साथ अपना हनीमून मना लेना।” मैंने उनकी सैण्डल चाटते हुए कहा, “ममता आंटी! दिदी मेरे लिये एकदम तैयार कर देना और हनीमून मैं उनके साथ मॉडर्न ड्रैस में मनाऊँगा।” ममता आंटी बोली, “तू चिंता मत कर! मैं उसे कल सुबह बाज़ार से सैक्सी काली ब्रा-पैंटी, मॉडर्न ड्रैस और सैक्सी हाई हील सैंडल दिला कर लाऊँगी जिसे देख कर तेरा लंड और तन जाये। मैं उसे बिलकुल मॉडर्न तरह से तैयार करूँगी और ध्यान रहे कल बारह-एक बजे तक तू घर पर मत रहना। मैं अपनी बेटी को बड़े प्यार से तैयार करना चाहती हूँ ताकि उसे अपनी पहली चूदाई हमेशा याद रहे!” मैंने कहा, “पर अभी अपने इस तने हुए लंड का क्या करूँ?” ममता आंटी बोलीं, “तुझे मेरे सैंडल पहने हुए पैर बहुत सैक्सी लगते हैं ना! तो तू अभी अपना लंड इन्हीं पर घिस कर क्यों नहीं ठंडा कर लेता। सच, तुझे मेरे हाई हील सैंडल पहने पैरों को चोदने में जरूर मज़ा आयेगा।” ममता आंटी का यह आईडिया सुन कर मेरा लंड और भी अकड़ गया। मैंने झट से उनके सैंडल पहने पैरों को अपने दोनों हाथों में लिया और अपना लंड दोनों सैंडलों के बीच में आगे-पीछे करने लगा। सैंडल के तलुवों और लैदर का फील बहुत मस्त लग रहा था और चार-पाँच मिनट में ही मेरी पिचकारी ममता आंटी के सैंडल, पैरों और टखनों पर छूट गयी। उसके बाद ममता आंटी को नंगा बिस्तर पर छोड़ के बाहर आ गया और सीधा नेहा के कमरे में गया। नेहा सिगरेट पीते हुए पूरी नंगी हो कर अपनी चूत के दाने को घिस रही थी और मस्ती में अपने चूत्तड़ ऊपर नीचे उछाल रही थी। मुझे आया देख कर शरमा गयी और बोली, “अनिल ये क्या… तुम बिना नॉक करे ही आ गये।” मैंने प्यार से उसका किस लिया और बोला, “मेरी प्यारी दीदी! बस आज-आज मुठ मार लो, कल के बाद तो आपकी जब भी इच्छा होगी, मैं आपको खूब चोदूँगा। बताओ आपको कैसा लगा अपनी मम्मी की चूदाई देख कर?” नेहा बोली, “अनिल! मम्मी बहुत ही सैक्सी दिखती है नंगी हो कर। मैंने तो मम्मी के साथ तुम्हें नंगा देख कर ही अपनी जाँघें कस ली थीं और जब तुम मम्मी के चूत्तड़ फैला कर उनकी चूत चाट रहे थे, मैंने अपना एक हाथ अपनी पैंटी में डाल कर अपने दाने को खुब घिसा था। अनिल बताओ ना! मम्मी मेरी तुम्हारे साथ चुदाई कब करवायेंगी।” मैं बोला, “बस मेरी डार्लिंग दीदी! कल के लिये आप तैयार हो जाओ। कल आपको कच्ची कली से पूरा फूल बना दूँगा। फ़िलहाल अभी थोड़ा मेरे लंड को चूसते हुए अपनी मुठ मारो। देखो कितना मज़ा आयेगा।” नेहा ने लपक के मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया और अपनी चूत घिसते हुए सका-सक मेरा लौड़ा चूसने लगी और पँद्रह-बीस मिनट बाद तबियत से चूसते हुए अपनी चूत का और मेरे लंड का पानी निकाला। मैंने भी झुक के उसकी चूत का पानी अपनी जीभ से चाट-चाट कर पीया। ममता आंटी नहा-धो कर सिर्फ़ पैंटी-ब्रा और सैण्डलों में ही अपने रूम से निकली और अपने मोटे-मोटे चूत्तड़ मेरी गोदी में रख कर बैठ गयी और हम तीनों ने एक साथ ड्रिंक की और स्मोक किया। ममता आंटी उसके बाद उठीं और सोफ़े पर बैठ कर नेहा को अपनी गोद में बिठाया और बोली, “मॉय डीयर! तू तैयार है ना औरत बनने के लिये?” नेहा ने शरमा कर अपना मुँह ममता आंटी की ब्रा में कैद उन्नत चूचियों में छुपा लिया। ममता आंटी ने उसका सिर उठा कर कहा, “नेहा तू बड़ी किस्मत वाली है जो तुझे घर बैठे इतना तगड़ा मर्द और मस्त लंड मिलेगा। मैं नहीं चाहती कि तू भी मेरी तरह चुदाई के लिये तड़पे। तेरे पापा मुझे एक दम ठंडा नहीं कर पाते हैं, जिससे मेरा दिमाग खराब रहता था। पर अब मुझे अनिल का लंड मिल गया है जो मुझे पोर-पोर तक चुदाई का सुख देता है। मेरी इच्छा यही है नेहा बेटी कि तू भी भरपूर चुदाई का मज़ा ले ले शादी से पहले। पता नहीं शादी के बाद ये सुख तुझे मिले ना मिले।” उसके बाद हमने खाना खाया और अपने-अपने कमरे में चले गये। अगले दिन मैं सुबह नहा-धो कर बाहर चला गया ऐसे ही घूमने के लिये और करीब साढ़े बारह बजे वापस आया। ममता आंटी ने मुझे पहले तो बाहों में लेकर किस करा और बोली, “तेरी रानी अंदर बैठी है सज-सँवर के। जा पहले तू नहा-धो ले और फ़्रैश हो जा। अब कल सुबह तक तुझे उसकी जम कर चुदाई करनी है। मैं सब कुछ रूम में ही पहूँचा दूँगी।” मैं भी बेसब्री के साथ नहा-धो कर तैयार हुआ और सिर्फ़ अपनी सबसे सैक्सी दिखने वाली अंडरवियर पहनी और ममता आंटी का चुम्बन लेकर कमरे में घुस गया। मज़ा आ गया था। अंदर ममता आंटी ने पूरा डिस्को बनाया हुआ था और नेहा को बहुत ही सैक्सी टॉप-स्कर्ट में तैयार करा हुआ था। नेहा की टॉप के उपर के चार बटन खोल कर नीचे से गाँठ बन्धी हुई थी और गज़ब का मेक-अप करा हुआ था। नेहा भी हाई हील्स पहन कर एक डाँस पर अपने चूत्तड़ थिरकाते हुए नाच रही थी। मैंने चुपचाप पीछे से जा कर उसकी मचलती हुई चूचियों को पकड़ लिया और नेहा को हवा में घूमा दिया। फिर सीधा कर के हमने एक दूसरे को बाहों में कस लिया और तड़ातड़ एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे। ममता आंटी ने सही कहा था। वाकय में नेहा बहुत ही सैक्सी लग रही थी और अगर वोह ऐसे रूप में कहीं सड़क पर चली जाती तो जरूर उसकी चूत का आज भोंसड़ा बन जाता। नेहा ने झूक कर ड्रिंक बनाना चालू किया तो मैंने भी पीछे से उसकी स्कर्ट नीचे खिस्का दी और झुक कर कुत्ते कि तरह उसके चूत्तड़ों में अपना मुँह लगा दिया और चाटने लगा। ममता आंटी ने नेहा को काले रंग की नेट की बहुत ही टाईट रेशमी पैंटी पहनायी थी जिससे वो उसकी गाँड की दरार में घुस गयी थी और उसके गोरे फूले हुए छोटे-छोटे मस्त चूत्तड़ों को और मादक बना रही थी। क्या महक आ रही थी उसके पिछवाड़े से। मैं तो मस्ती के आलम में आ गया था। नेहा ने मुझे एक ड्रिंक दी और अपने लिये एक सिगरेट जलाई और मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर बोली, “अनिल… अनिल… आज जी भर के अपनी चचेरी बहन को चोद लो!” और मुझे बिस्तर पर बिठाकर मेरी अंडरवियर में तन्नाए हुए लंड पर अपने चूत्तड़ घिसते हुए बैठ कर ड्रिंक और स्मोक करने लगी। मैंने उसकी टॉप के बटन और बंधी हुई गाँठ को खोला और उसकी स्टॉप उतार दी। ममता आंटी ने नेहा को क्या मस्त काले रंग की रेशमी ब्रा पहनायी थी। एकदम पतले स्ट्रैप थे और ब्रा के कप सिर्फ़ उसके आधे निप्पल और नीचे की गोलाइयाँ छुपाये हुए थे। रेशमी नेट के अंदर से उसकी दूधिया चूचियों की बड़ी साफ झलक मिल रही थी। मैंने उसे खड़ा होने को कहा और कुर्सी पर टाँगें फैला कर बैठ गया और नेहा को बोला कि वो अपनी टाँगें मेरी टाँगों के दोनों तरफ करके अपनी पैंटी में कसी हुई बूर मेरे लंड पर रखे और आराम से बैठ कर ड्रिंक करे। तब तक मैं उसकी कसी हुई मस्त जवानी जम कर चूसना और दबाना चाहता था। नेहा बड़े ही कायदे से मेरे लंड के उठान पर बैठ गयी और बहुत हल्के-हल्के ढँग से अपनी पैंटी मेरे लंड से उठी हुई मेरी अंडरवियर पर घिसते हुए मेरी गर्दन में बाहें डाल कर ड्रिंक और स्मोक करते हुए बोली, “अनिल डार्लिंग मसल डालो मेरी इन जवानियों को। देखो तो सही कैसे तन कर खड़ी है तुमसे चुसाने के लिये। मेरे मस्ताने सेबों का मज़ा ले लो मेरी जान।” मैं भी अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हूक खोल दिये और बड़े प्यार से उसकी चूचियाँ नंगी करी। उसकी बत्तीस साइज़ की कसी हुई मस्तियाँ मेरे सामने तन कर खड़ी हुई थीं और मैंने भी बिना वक्त गँवाये दोनों चूचियों पर अपना मुँह मारना शूरू कर दिया। मैं बहुत ही बेसब्रा हो कर उसकी चूचियाँ मसल और चूस रहा था जिससे उसको थोड़ा सा दर्द हो रहा था। पर फिर भी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए कह रही थी, “डार्लिंग आराम से मज़ा लो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो। आज तो हमारा हनीमून है। कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ। जम के चूसवाऊँगी और मसलवाऊँगी। इनको इतना मसलो कि कॉलेज में मेरी चूचियाँ सबसे बड़ी हो जायें।” करीब आधा घँटा इस चूसाई के बाद मैंने कहा, “नेहा दीदी! अब तो आप तैयार हो जाओ औरत बनने के लिये।” मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और फूलों से सजे पलंग पर लिटा दिया। लाल गुलाब से सजे पलंग पर काले रंग की पैंटी से ढका नेहा का गोरा बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपसरा अपने कपड़े उतार के सो रही हो और काला भँवरा उसकी ताज़ी चूत का रस चूस रहा हो। मैं करीब पाँच मिनट तक नेहा के नंगे बदन की शराब अपनी आँखों से पीता रहा, और फिर बिस्तर पर चढ़ कर मैंने नेहा की कमर चूसनी चालू करी और चूसते हुए अपना मुँह उसकी पैंटी पर लाया और पैंटी का इलास्टिक अपने दाँतों में दबा कर अपने मुँह से उसकी पैंटी उतारने लगा। नेहा ने भी अपने चूत्तड़ हवा में उठा दिये थे ताकि पैंटी उतारने में परेशानी ना हो। पर ममता आंटी ने इतनी टाइट पैंटी पहनाई थी कि मुझे अपने हाथ भी लगाने हे पड़े उतारने में। दोस्तों! पैंटी उतार के जो नज़ारा मेरे सामने था, मैं आपको बता नहीं सकता। ममता आंटी ने बड़े ही प्यार से नेहा की चूत के बाल साफ़ करे थे। नेहा चूत चुदने के लिये इतनी बेकरार थी कि चूत के लिप्स गीले थे। नेहा बोली, “डार्लिंग! मम्मी ने मेरी पूसी क्रीम से साफ करी है और मुझे बोला है कि मैं कभी भी अपनी पूसी शेव नहीं करूँ नहीं तो खराब हो जायेगी।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मेरा लंड तो नेहा की चिकनी नंगी मस्ताई हुई, चुदने के लिये तैयार चूत को देख कर ही मेरी अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने के लिये बेकरार था और उछल-कूद मचा रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना मुँह मेरे सामने लेटी हुई नशे की बोतल के खज़ाने के मुँह पर लगा दिया। नेहा तो मस्त हो गयी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी चाहता था कि नेहा थोड़ा पानी छोद दे ताकि उसकी ताज़ी कुँवारी चूत थोड़ी चिकनी हो जाये और तकलीफ कम हो। मैंने उसकी चूत का दाना चूसते हुए अपनी जीभ से उसकी चुदाई चालू कर दी और करीब पाँच मिनट बाद ही नेहा ने मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और कस कर अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और जोश में काँपते हुए चूत्तड़ों के धक्के देती हुई मेरे मुँह में अपना रस देने लगी। मैंने भी मन से उसकी जवान चूत चूसी और चूत के लाल होंठों को अपने होंठों से चूसा। फिर मैं घूटने के बल नेहा के सामने बैठ गया और बूरी तरह अकड़ा हुआ अपना लंड उसके सामने कर दिया और नेहा की गर्दन में हाथ डाल कर उसका मुँह अपने लंड के पास लाया और बोला, “मेरी प्यारी नेहा दीदी, मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी चूत बजाने के लिये तो इनवाइट करो।” नेहा ने तपाक से अपना मुँह खोला और मेरा सुपाड़ा अपने होंठों के बीच ले लिया और जीभ फेरने लगी। मेरे लंड पर नेहा के जीभ फेरने ने वो काम किया जो आग में घी करता है। मुझसे रहा नहीं गया और दोनों हाथों से नेहा का सर पकड़ कर उसके मुँह में ही मैंने आठ-दस शॉट लगा दिये। लौड़े का तो मारे गुस्से के बूरा हाल था। एक तो उसे कल से चूत नहीं मिली थी और दूसरा उसके सामने ऐसी मलाईदार चूत थी और मैं चूतिया की तरह उसकी भूख मिटाने की बजाये चुम्मा चाटी कर रहा था। अपना लंड नेहा के मुँह से बाहर निकाल कर के मैं बिस्तर पर से उतरा और ममता आंटी ने पहले से ही इम्पोर्टेड बड़ी ही खुशबू वाली चिकनाहट की क्रीम मेज पर रखी हुई थी। मैंने उसे उठा कर थोड़ी ज्यादा ले कर नेहा की चूत पर और चूत के अंदर की दीवारों पर लगा दी और फिर अपने लंड पर लगाने लगा। नेहा बोली, “ये तुम क्या कर रहे हो?” मैंने उसे समझाया और बोला, “आज मैं आपकी चूत को भोंसड़ा बनाने जा रहा हूँ तो मुझे अपना लंड आपकी चूत में घूसेड़ना पड़ेगा और आपको तकलीफ ना हो इस लिये मैं आपकी चूत को और अपने लंड को चिकना कर रहा हूँ।” मैंने बिस्तर पर चढ़ कर नेहा की जाँघों को अपने हाथों से पूरा फैला दिया और एक हाथ से लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से नेहा की चूत के लिप्स खोल कर अपना गुस्साया हुआ लाल सुपड़ा उसकी गुलाबी चूत से सटा दिया और बहुत हल्के-हल्के घिसते हुए बोला, “देख लो नेहा दीदी! अपने लंड की आपकी चूत से मुलाकात करा रहा हूँ।” नेहा को भी अपनी चूत पर लंड घिसाई बहुत अच्छी लग रही थी। वोह सिर्फ़ मस्ती में “ऊँमम ऊँमम” कर सकी। एक दो मिनट बाद मैंने देखा कि नेहा पर मस्ती पूरी तरह से सवार हो चूकी है तो मैंने अपने लंड का एक हल्का सा शॉट दिया जिससे मेरा लंड नेहा की चूत बहुत ज्यादा कसी होने के कारण से फिसल कर बाहर आ गया। इससे पहले कि नेहा कुछ समझ पाती, मैंने एक हाथ से अपना लंड नेहा के चूत के लिप्स खोल के उसके छेद पर रखा और अपने चूत्तड़ों से कस के धक्का दिया जिससे मेरा मोटा तगड़ा लंड दो इंच नेहा की चूत में घुस गया। नेहा की गाँड में तो जैसे भूचाल आ गया। वोह जोर से चीखी, “अनिल मार डाला! ये क्या डाला है मेरे अंदर। बहुत दर्द हो रहा है। अनिल प्लीज़ बाहर निकाल ले।” मैंने कुछ परवाह ना करते हुए दूसरा शॉट और कस के लगाया और अब मेरा पाँच इंच लंड नेहा की चूत में समा चुका था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल के छोटे छेद में अपना लंड घुसा दिया हो और बोत्तल के मुँह ने कस कर मेरे लंड को पकड़ लिया हो। अगर मैंने नेहा की कमर कस के पकड़ नहीं रखी होती तो नेहा मेरा लंड निकाल के बाहर भाग जाती और ज़िंदगी भर कभी भी किसी से चुदवाती नहीं। नेहा अब मेरे सीने पर मुक्के मारने लगी तो मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर फैला दिये और अपने पूरे शरीर का भार देते हुए उसके ऊपर लेट कर अपना पाँच इंच लंड अंदर-बाहर करने लगा। करीब पाँच-दस मिनट तक सिर्फ पाँच इंच से ही संतोष करने के बाद मैंने नेहा से पूछा, “दीदी अब कैसा लग रहा है?” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | तो बड़ी रुआँसी बोली, “जब तुमने घुसेड़ा था उस समय तो मेरी जान ही निकल गयी थी पर अब तुम्हारी लंड घिसाई से थोड़ी राहत मिली है और अच्छा भी लग रहा है।” मैंने मौका अच्छा देख और अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और उसे पूरा दबोच कर एक ज़ोरदार कड़कड़ाता हुआ शॉट दिया जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लौड़ा नेहा की चूत में समा गया। मेरे होंठ उसके होंठों पर रखे हुए थे इस कारण वो ज्यादा जोर से नहीं चीख पायी। मेरा पूरा लंड जो उसकी चूत में समा गया था उससे नेहा को दर्द इतना हो रहा था कि अगले पाँच मिनट तक मैं तो शाँत अपना लंड उसकी चूत में डाल कर उसके रसीले होंठ चूसता रहा और नेहा नीचे से दर्द के मारे लगातार अपने चूत्तड़ उछालती रही। जब पाँच मिनट बाद उसने अपने चूत्तड़ उछालना बँद किया तब मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी चूत में सरकाना चालू किया। नेहा अभी भी अपना बदन दर्द के मारे कसमसा रही थी पर पूरी मेरे नीचे दबी होने के कारण कुछ कर नहीं पा रही थी और पँद्रह-बीस धक्के अपनी चूत में ले लेने के बाद उसका दर्द भी कम हो गया था और उसका कसमसाना भी। मैंने नेहा के होंठों के ऊपर से अपने होंठ हटा लिये और बोला, “क्यों मेरी प्यारी दीदी! अब बताओ कैसा महसूस हुआ जब मैंने अपना मस्त लौड़ा आपकी चूत में डाल कर कली से फूल बना दिया और अब कैसा लग रहा है दर्द खतम होने पर।” नेहा बोली, “क्या डार्लिंग तुमने तो मेरी जान ही निकल दी। जब तुमने अपना लंड मेरी चूत में पेला था उस समय तो मुझे ऐसा लगा था कि शायद आज तुम मुझे मेरी चूत से लेकर दो हिस्सों में फ़ाड़ के रख दोगे। बहुत दर्द हुआ था अनिल पर तुमने इतने प्यार से मुझे सम्भाला और बाद में जो प्यार से मेरी चूत बजा रहे हो तो ऐसा लग रहा है कि मैं ज़न्नत में हूँ। मेरे बदन से ऐसी मस्ती छूट रही है कि क्या बताऊँ। अनिल अब बहुत मज़ा आ रहा है। अब तुम जी भर के मुझे चोदो।” मैंने नेहा की दोनों जाँघें चौड़ी कर दीं और अपने हाथों से उसकी दोनों सैंडल की हील पकड़ लीं और खुद घूटने के बल बैठ कर अपनी गाँड के दनादन धक्के मारने लगा। नेहा को अब भी तकलीफ हो रही थी पर वो भी अब चुदाई में पूरा साथ दे रही थी। पहली चुदाई के कारण वो और ज्यादा मस्ती सहन नहीं कर पायी और सितकारी भरती हुए अपनी चूत का पानी मेरे लंड पर गिराने लगी और बड़बड़ा रही थी, “आह आँह अनिल मज़ा आ गया। मुझे क्या मालूम था इतनी तकलीफ के बाद इतना सुख मिलेगा। इस सुख के लिये तो मैं अपनी चूत बार-बार तुमसे फड़वाऊँगी।”

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    She’s got game, doesn’t she?! ♠️❤️♣️

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    Dirty games in the room

    मैं ३५ साल का मस्त जवान हूँ और मेरा लण्ड चोदने के लिए तड़पता रहता है। बीवी को चोद-चोद कर ये अब कुछ नया चाहता है। हमारे घर में पार्ट-टाईम नौकरानियाँ काम करतीं हैं। लेकिन कोई भी सुन्दर नहीं थी। बीवी बड़ी होशियार थी। सब काली-कलूटी और भद्दी-भद्दी चुन-चुनकर रखती थी। जानती थी ना कि मेरे मियाँ को चूत का बड़ा शौक है। आख़िर में जब कोई नहीं मिली तो एक को रखना ही पड़ा – जो कि १९-२० साल की मस्त जवान कुँवारी लड़की थी। साँवला रंग था और क्या यौवन ! सुन्दर ऐसी की देख कर ही लण्ड खड़ा हो जाए। मम्मे ऐसे गोल-गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज़ में समाते ही नहीं। बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि चोदने के लिए एकदम मस्त चीज़ थी। सोच-सोच कर मैंने कई बार मुट्ठ भी मारी। बहुत ज़ोरों की तमन्ना थी कब मौक़ा मिले और कब मैं उसके बुर में अपना लंड घुसा दूँ। वह भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी-चोरी नापता रहता था। मन-ही-मन उसे कई बार नंगा कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच-सोच कर मेरा लंड गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा होता। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल-गोल चूचियों को दबाऊँ। एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानों करंट सा लग गया और वो शरमाती हुई खिलखिला पड़ी और भाग गई। मैंने मन-ही-मन कहा मौका आने दे, रानी ! तुझे खूब चोदूँगा। लण्ड तेरी चिकनी बुर में डाल कर भूल जाऊँगा। चूची को चूस-चूस कर प्यास बुझाऊँगा और दबा-दबा कर मज़े लूँगा, होठों को तो खा ही जाऊँगा। रानी उसका प्यारा सा नाम था। कहते हैं उसके घर में देर है पर अन्धेर नहीं। एक दिन मेरी बीवी ने कहा- मैं मायके जा रही हूँ, रानी आएगी तो घर का काम करवा लेना। रविवार का दिन था। बच्चे भी बीवी के साथ चले गए। और मेरे लंड महाराज तो उछल पड़े। मौका चूकने वाला नहीं था। लेकिन शुरू कैसे करें। कहीं चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गई तो? दोस्तों, तुम यह जान लो कि लड़कियाँ कितनी ही शर्माएँ, लेकिन दिल में उनकी इच्छा रहती है कि कोई उन्हें छेड़े या चोदे।। मैंने रानी को बुलाया और उसे देखते हुए कहा, “रानी, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो?” वो बोली, “बाबूजी, इतनी पैसे कहां कि चोली ख़रीद सकूँ ! आप दिलवाएँगे?” मैंने कहा, “दिलवा तो मैं दूँगा। लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी ने तुझे छेड़ा है।” उसने जवाब दिया, “नहीं साहब।” मैंने कहा, “इसका मतलब तू एकदम कुँवारी है।” “जी साहब।” “अगर मैं कहूँ कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज़ तो नहीं होगी?” “नाराज़ क्यों होऊँगी साहब। आप तो बहुत अच्छे हो।” बस यही उसका सिग्नल था मेरे लिए। मैंने हिम्मत रख कर पूछा, “अगर मैं तुम्हे थोड़ा प्यार करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?” अपने पैर की उँगलियों को ज़मीन पर रगड़ती हुई वह बोली, “आप तो बड़े वो हो साहब।” मैंने आगे बढ़ते हुए कहा, “अच्छा, अपनी आँखें बन्द कर ले, और अभी खोलना नहीं।” उसने आँखें बन्द कीं और हल्के से मुँह ऊपर की तरफ कर लिया। मैंने कहा – बेटा लोहा गरम हैं, मार दे हथौड़ा। आहिस्ता से पहले मैंने उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर रख दिए अपने होंठ उसके होठों पर। हाय, क्या गज़ब की लड़की थी। क्या स्वाद था। दुनिया की कोई भी शराब उसका मुक़ाबला नहीं कर सकती थी। ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बाँध टूट गए। मेरे होठों ने कस कर उसके होठों को चूसा और चूसते ही रहे। मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया। मेरी जीभ उसकी जीभ का स्वाद लेने लगी। इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा। बस मज़ा लेती रही। अचानक उसने आँखों खोलीं और बोली, “साहबजी, बस, कोई देख लेगा।” मैंने कहा, “रानी, अब तो मत रोको मुझे। सिर्फ एक बार।” “एक बार, क्या साहब?” दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने उसके कान के पास जाकर कहा, “चुदवाएगी? एक बार बुर में लंड घुसवाएगी? देख मना मत करना। कितनी सुन्दर है तू।” यह कहकर मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और दाहिने हाथ से उसकी बाईं चूचि को दबाने लगा। मुँह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होठों पर, और हर जगह चूमने लगा… पागलों की तरह। क्या चूची थी, मानों सख्त संतरे। दबाओ तो छिटक-छिटक जाएँ। उफ्फ, मलाई थी पूरी की पूरी। रानी ने जवाब दिया, “साहबजी, मैंने ये सब कभी नहीं किया। मुझे शरम आ रही है।” उखड़ी साँसों से मैंने कहा, “हाय मेरी जान रानी, बस इतना बता, अच्छा लगा या नहीं। मज़ा आ रहा है कि नहीं? मेरा तो लण्ड बेताब है जानेमन। और मत तड़पा।” “साहबजी, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जाएगा तो?” बस मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया। कस कर चूमते हुए मैंने उसके कपड़ों को उतारा। फिर अपने कपड़े भी जल्दी से उतारे। ७” मेरा लण्ड फड़फड़ाते हुए बाहर निकला। देखकर उसकी आँखें बन्द हो गईं। बोली, “हाय, ये क्या है? ये तो बहुत बड़ा है।” “पकड़ ले इसे मेरी जान।” कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया। उसके बदन को पहली बार नंगा देखकर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा। चूची ऐसी मस्त थी कि पूछो मत। चूत पर बाल इतने अच्छे लग रहे थे कि मेरे हाथ उसकी तरफ बढ़ ही गए। क्या गरम चूत थी। उँगली आहिस्ता से अन्दर घुसाई। रस बह रहा था और उसकी बुर गीली हो गई थी। गुलाबी-गुलाबी बुर को उँगलियों से अलग किया, और मैंने अपना लंड आहिस्ता से घुसाया। हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। मुँह से उसके होठों को मैं चूस रहा था। “आह, साहबजी, आहिस्ता, लग रहा है।” “रानी, मज़ा आ रहा है?” “साहबजी, जल्दी करिए ना जो भी करना है।” “हाँ मेरी जान, बोल क्या करूँ?” “डालिए ना। कुछ करिए ना।” “रानी, बोल क्या करूँ।” कहते हुए मैंने लंड को थोड़ा और घुसाया। “अपना ये डाल दीजिए।” “बोल ना, कहाँ डालूँ मेरी जान, क्या डालूँ।” “आप ही बोलिए ना साहबजी, आप अच्छा बोलते हैं।” “अच्छा, ये मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी बुर में घुस गया। और अब ये तुझे चोदेगा।” “चोदिए ना, साहबजी।” उसके मुँह से सुनकर तो लंड और भी मस्त हो गया। “हाय रानी, क्या बुर है तेरी, क्या चूची है तेरी। कहाँ छुपा कर रखा था इतने दिन। पहले क्यों नहीं चुदवाया।” “साहबजी, अपका भी लंड बहुत मज़ेदार है। बस चोद दीजिए जल्दी से।” और उसने अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | अब मैंने उसकी दाहिनी चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। एक हाथ से दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए, मैं उछल उछल कर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। जन्नत का मज़ा आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस चोदता ही रहूँ, चोदती ही रहूँ इस प्यारी-प्यारी चूत को। मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से उसकी गुलाबी गीली गरम-गरम बुर को चोद रहा था। “हाय रानी, चोद रहा है ना। बोल मेरी जान, बोल।” “हाँ साहब, चोद रहा है। बहुत मज़ा आ रहा है। साहब आप बहुत अच्छा चोदते हैं। साहब, ये मेरी बुर आपके लंड के लिए ही बनी है। है ना साहब। साहब, चूची ज़ोर से दबाइए। साहब, ओओओओहह, मज़ा आ गया, ओओओओओहहहहह।” अचानक, हम दोनों साथ-साथ ही झड़े। मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी-प्यारी बुर में घोल दिया। हाय क्या बुर थी। क्या लड़की थी, गरम-गरम हलवा। नहीं उससे भी ज़्यादा स्वादिष्ट। मैंने पूछा, “रानी, तेरा महीना कब हुआ था री?” शर्माते हुए बोली, “परसों ही खतम हुआ। आप बड़े वो हैं, यह भी कोई पूछता है?” बाहों में भर कर होठों को चूमते हुए, चूचियों को दबाते हुए मैंने कहा, “मेरी जान, चुदवाते-चुदवाते सब सीख जाएगी।” एकदम सुरक्षित था। गर्भवती होने का कोई मौक़ा नहीं था अभी। दोस्तों, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज्यादा मज़ा आया। क्योंकि लंड भी देर से झड़ा। चूत उसकी गीली थी। चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी साली। उसकी चूचियों को तो मसल-मसल कर और चूस-चूस कर निचोड़ ही दिया मैंने। जाने फिर कब मौक़ा मिले। आज इसका बुर चूस ही लो। बुर का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि किसी भी शराब में ऐसा नशा नहीं। चोदते समय तो मैंने उसके होठों को खा ही लिया। “ये मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान। तोरी बुर में मेरा लंड – उसकी को चुदाई कहते हैं रानी। कहाँ छुपा रखा था ये चूत जानी।” कहते हुए मैं बस चोद रहा था और मज़ा लूट रहा था। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | “चोद दीजिए साहबजी, चोद दीजिए। मेरी बुर को चोद दीजिए।” कह-कह कर चुदवा रही थी मेरी रानी। दोस्तों, चुदाई तो खत्म हुई लेकिन मन नहीं भरा। दबोचते हुए मैंने कहा, “रानी, मौका निकाल कर चुदवाती रहना। तेरी बुर का दीवानी है यह लंड। मालामाल कर दूँगा जानेमन।” यह कह कर मैंने उसे ५०० रूपये दिए और चूमते हुए, मसलते हुए रूख़सत किया।

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    सामान्य मैथुन से पुरुष की तृप्ति तो हो जाती है पर अधिकांश महिलाऐं चरमोत्कर्ष को प्राप्त नहीं कर पातीं क्योंकि पुरुष जल्दी ही परमोत्कर्ष तक पहुँच जाता है और शिथिल लिंग से वह स्त्री को उत्कर्ष तक नहीं ले जा पाता। बहुत कम ऐसे पुरुष होते हैं जो मैथुन के द्वारा स्त्री को अपने से पहले पराकाष्ठा तक ले जा पाते हैं। सम्भोग (सम + भोग) का मतलब है समान भोग,यानि स्त्री और पुरुष को बराबर का आनन्द मिलना चाहिए। ऐसे में स्त्री कोचरम आनन्द से वंचित रखना सम्भोग नहीं कहा जा सकता। असल पुरुष वही है जो अपनीतृप्ति के साथ-साथ लड़की की कामुक तृप्ति के बारे में भी सोचे। अगर वह उसे लिंग-योनि घर्षण से तृप्त नहीं करपाया तो और तरीक़ों से कर सकता है। सबसे आसान तरीका है लिंग की जगह अपनी उंगली से उसकी योनि की चुदाई करे और उसके योनि-मुकुट (भग-शिश्न, clitoris) के इर्द-गिर्द ऊँगली चलाए। ध्यान रहे कि मुकुट पर सीधा दबाव ना डाला जाये क्योंकि वह एक अत्यंत ही मार्मिक अंग होता है। अगर एक उंगली कम पड़े तो दो उंगलियाँ या फिर तीन उंगलियाँ भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।योनि के करीबदो-ढाई इंच अंदर और पेट की तरफ का हिस्सा अत्यधिक संवेदनशील होता है। इसे G-Spot कहते हैं। यह छूने में थोड़ा खुरदुरा होता है। उंगलियों से चोदते वक्त इस इलाके को टटोलने का प्रयास करना चाहिए जिससे लड़की को ना केवल जल्दी उत्कर्ष प्राप्त हो बल्कि उसका उत्कर्ष परम आनन्ददायक और विस्फोटक हो। जब लड़की यौन पराकाष्ठा को प्राप्त हो जाये तो समझो सम्भोग पूरा हुआ। वह ज़रूर पुरुष की आभारी होगी। सम्भोग उपरान्त सम्भोग के बाद पुरुष का आचरण बहुत ज़रूरी है। कुछ लोग उठ कर चले जाते हैं या पलट कर सो जाते हैं। यह गलत बात है। सम्भोग हमारे जीवन की सबसे सुखदाई क्रिया होती है। इस क्रिया में साथ देने वाली लड़की को सम्भोग के तुरंत बाद छोड़ देना ठीक नहीं है। पुरुषार्थ इसमें है कि सहवास के बाद कुछ समय लड़कीके साथ बिताया जाये। ऐसे मौकों पर ज्यादा बातचीत नहीं हो पाती। इसलिए एकदूसरे को प्यार से सहलाना या लड़की पर एक हाथ और एक टांग रख कर एक-करवट कुछ देर लेटना अच्छा होगा। जवानी में एक समय में एक सम्भोग से भूखनहीं मिटती। अधिकतर मर्द कम से कम दो बार चुदाई करना चाहते हैं और कुछ तो तीसरी बार का भी मौक़ा ढूंढते हैं। हालाँकि लड़कियों में सहवास की क्षमता मर्दों के बनिस्पत कई गुना होती है, ज़्यादातर लड़कियाँ एक बार के मैथुन से तृप्त हो जाती हैं बशर्ते कि उन्हें भी चरमोत्कर्ष की प्राप्ति हुई हो। अगर दोनों राज़ी हों और पुरुष में सामर्थ्य हो तो करीब आधे घंटे के बाद दोबारा मैथुन का प्रयास करना चाहिए। इसमें एक ही बाधा आ सकती है। वह है लिंग का खड़ा ना होना। उसे दोबारा खड़ा करने में लड़की बहुत अहम भूमिका निभा सकती है। वह चाहे तो एक औसत पुरुष का लिंग अवश्य खड़ा होगा। दूसरी बार किया हुआ सम्भोग पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा समय के लिए होगा क्योंकि अब पुरुष को उत्कर्ष तक पहुँचने में देर लगेगी। यह पुरुष के लिए अच्छी बात है क्योंकि वह ज्यादा देर तक मज़े लूट सकेगा और उसे अपनी मर्दानगी पर भी गर्व होगा। लड़कियों के लिए भी कुछ हद तक यह मजेदारबात रहती है क्योंकि उन्हें भी लिंग के घर्षण से उत्कर्ष तक पहुँचने का मौक़ा मिलता है। पर अगर मैथुन बहुत देर तक चले और वीर्योत्पात ना हो यह तकलीफ दायक हो जाता है। मर्द को तो चुदाई मेंआनन्द आता रहता है पर स्त्री की योनि में तकलीफ हो सकती है। पुरुष को इस बातका ध्यान रखना चाहिए और बीच-बीच में कुछ देर के लिए घर्षण रोक देना चाहिए या फिर आसन बदलते रहना चाहिए। स्त्री को चाहिए कि अगर वह थक गई है और उसके मर्द की तृप्ति नहीं हुई है तो वहउसे अपने मुँह से तृप्त करने का विकल्प दे। बिरला ही कोई पुरुष इसके लिए मना करेगा। इसी प्रकार अगर पुरुष की तृप्ति हो गई है और स्त्री की नहीं, तो पुरुष भी उसकी योनि को मुँह से तृप्त कर सकता है। स्त्री और पुरुष, दोनों ही मौखिक-मैथुन से जल्दी उत्कर्ष को पा लेते हैं अतः हर स्त्री-पुरुष को ना केवल यह कला आनी चाहिए, उन्हें इसका भरपूर प्रयोग करकेएक दूसरे को तृप्त रखना चाहिए।

    उपसंहार इस लेख में मैंने एक कुंवारी लड़की के साथ पहले-पहले मैथुन की विधि बताई है।मैथुन एक बहुत ही विषम और निजी विषय है। इसमें बताई हर बात हर किसी के लिए उपयुक्त ना हो क्योंकि हम में काफी समानताओं के साथ-साथ कई भेद भी हैं। फिर भी, एक औसत पुरुष और स्त्री को यह क्रिया कैसे करनी चाहिए और वे क्या-क्या अपेक्षा रख सकते हैं, यह बताने का मेरा प्रयास रहा है। आशा है यह उपयोगी साबित होगा।

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    Taking care of cocks

    वैसे तो सम्भोग के लिए कई आसन हैं पर पहली बार के लिए एक ऐसा आसन होना चाहिए जो दोनों के लिए सरल हो, जिसमें मर्द कानियंत्रण रहे और जिसमें गहराई तक लिंगप्रवेश मुमकिन हो। इसके लिए लड़की पीठ के बल नीचे लेटी हो और मर्द उसके ऊपर हो(missionary position) उचित है। इसीलिए मैंने अपने पात्रों को इस अवस्था में छोड़ा है। अब बहुत ही अहम समय आ गया है जब लड़का अपना लिंग लड़की की योनि में डालने की कोशिश करेगा। लड़के को उठ कर लड़की की टांगों के बीच अपने घुटनों के बल बैठ जाना चाहिए और लड़की के नीचे रखे तकिये के सहारे उसके नितंबों को पर्याप्त ऊँचाई देनी चाहिए। अगर तकिया पतला है तो दो तकिये ले सकते हैं। अब लड़की की टाँगें पूरी तरह खोल कर चौड़ी कर देनी चाहिए और लड़के को घुटनों के बल आगे-पीछे खिसक कर अपने आप को सही जगह ले आना चाहिए जिससे उसका लिंग योनि में आसानी से प्रवेश कर सके। ज़रूरत हो तो लड़की की टाँगें उठा कर मर्द के कन्धों पर भी रखी जा सकती हैं। इससे लिंग काफी गहराई तक अंदर जा सकता है। अब अपनी उंगली से मर्द को योनि का मुआयना करते हुए उसके छेद का पता लगा लेना चाहिए। फिर आगे झुक कर अपना सुपाड़ा उंगली की जगह रख कर टिका देना चाहिए। यह सुनिश्चित कर लें कि योनि भीगी हुई है वरना अपने थूक से या तेल से लिंग को गीला कर लें। अब सब तैयार है। इस समय लड़की का संकुचित होना स्वाभाविक है। वह आकांक्षा और आशंका से जूझ रही होती है। पुरुष को चाहिए किवह उसे दिलासा दे, उसका साहस बढ़ाये तथाउसे आश्वस्त करे कि वह उससे प्यार करता है और उसे तकलीफ नहीं पहुँचाएगा। इसके लिए कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है …. सिर्फ प्यार से उसके सिर और बदन पर हाथफेरना काफी होगा। अब पुरुष के प्रहार करने की घड़ी आ गई है। उसे आगे झुक कर लड़की के कन्धों को विश्वासपूर्वक पकड़ लेना चाहिए जिससे वह ज्यादा हिल-डुल ना सके। फिर अपने सुपारे पर शरीर द्वारा इस तरह दबाव बनाना शुरू जिससे सुपारा योनि में घुसने लगे। अब लड़की की प्रतिक्रिया पर ध्यान देनाचाहिए। उसके लिए यह एक नया अनुभव है औरउसके मन का डर उसे रुकने के लिए उकसाएगा। थोड़ी बहुत आपत्ति को तो नज़रंदाज़ कर सकते हैं पर अगर लड़की को ज्यादा तकलीफ हो रही हो तो पुरुष को रुक जाना चाहिए। कुछ देर अंदर की ओर दबाव बनाये रखने के बाद ढील देनी चाहिए और फिर से उतना ही दबाव बनाना चाहिए। लड़की को धीरे-धीरे सुपारे को योनि-द्वार में महसूस करने और उसके आकार को भांपने का मौक़ा देना चाहिए जिससे वह शारीरिक और मानसिक रूप से अपने आप को ढाल सके। आखिर वह भी सम्भोगके लिए उतनी ही लालायित है अपितु आशंकित भी है। दो-तीन बार इस तरह दबाव डालने से योनि-द्वार थोड़ा खुल सा जाएगा और सुपाड़ा उसमें फंसने लगेगा। अब और अधिकप्रवेश तब ही हो पाएगा जब लिंग योनि कीकौमार्य-झिल्ली को भेदे। इसके लिए पुरुष को अपना लिंग इतना बाहर निकाल लेना चाहिए जिससे कि सुपाड़ा योनि-द्वार का रास्ता ना खो जाये। फिरस्त्री के शरीर को कसकर पकड़ कर और उसे बिना किसी चेतावनी दिए एक ज़ोरदार धक्का अंदर की ओर लगाना चाहिए। इससे लड़की को दर्द तो ज़रूर होगा पर और उसकी झिल्ली का पतन आसानी से हो जायेगा। लिंग को एक झटके में अंदर डालने से दर्द भी क्षणिक ही होगा। झिल्ली-भेदन से कुछ खून भी निकल सकता है जो कि किन्हीं कारणों से मर्दों को बहुत अच्छा लगता है। पर इस रक्त-प्रवाह से घबराने की बात नहीं है। यह झिल्ली के फटने से हुआ प्रवाह है जो थोड़ी देर में अपने आप रुक जायेगा। अगर यह खून ना निकले तो ज़रूरी नहीं कि लड़की कुंवारी नहीं है। लड़कियों की झिल्ली सिर्फ सम्भोग से हीनहीं कई और कारणों से भी फट सकती है जैसे घुड़-सवारी, साइकिल चलाना, योगाभ्यास, जिमनास्टिक्स या कोई दुर्घटना। इसलिए मर्द को लड़की के चरित्र पर सोच-समझ कर शक करना चाहिए। कौमार्य-झिल्ली योनि-द्वार से करीब एक इंच की गहराई में होती है अतः इसे भेदने के लिए पूरा लिंग अंदर डालने की ज़रूरत नहीं है। वैसे भी एक कुंवारी योनि में एक विकसित लिंग को एक ही झटकेमें पूरा अंदर डालना नामुमकिन सा है। यह तो तभी संभव है जब कोई खूंखार मर्द किसी अबला लड़की का बेरहमी से बलात्कारकरे। इस अचानक किये प्रहार के बाद पुरुष को लड़की को प्यार से आलिंगन-बद्ध कर लेनाचाहिए और उसे देर तक पुचकारना चाहिए। इस पूरे समय उसे अपना लिंग बाहर नहीं निकालना चाहिए जिससे योनि को उसे ग्रहण करने का और अपने आकार को समायोजित करने का समय मिले। जब लगे कि लड़की अब संभल गई है तो लड़के को धीरे-धीरे दो-तीन बार लिंग को अंदर-बाहर करना चाहिए। इस समय लिंग कोउतना ही अंदर ले जाएँ जितना पहले झटके में गया था। जब योनि इस घर्षण को स्वीकार करने लगे तो धीरे-धीरे लिंग को निरंतर बढ़ती हुई गहराई से अंदर डालना शुरू करना चाहिए। यह पुरुष के लिए एक बहुत ही आनन्ददायक अहसास होता है जब उसका सुपारा योनि की अंदर से चिपकी हुई दीवारों को हर प्रहार के साथ थोड़ा-थोड़ा खोलता जाता है, मानो एक नया रास्ता बना रहा हो। मेरा आशय है कि लड़की को भी उसकी इस निरंतर अंदर से खुलती हुई योनि का आभास सुखदायक होता होगा और उसको अब पहली बार चिंता-मुक्त आनन्द की अनुभूति होती होगी। जब ऐसा होगा तो लड़की के माथे से शिकन मिट जायेगी, उसकाकसा हुआ शरीर थोड़ा शिथिल हो जायेगा और वह मैथुन से मानसिक विरोध बंद कर देगी। फिर हौले-हौले उसका साहस बढ़ेगा और हो सकता है वह सम्भोग में सहयोग भी करने लगे। वह कितनी जल्दी सहयोग करने लगती है यह पुरुष के यौन-सामर्थ्य, उसके आचरण और अपने साथी के प्रति उसकी चिंता पर निर्भर है। पुरुष जितना लड़कीका ध्यान रखेगा, लड़की उससे भी ज्यादा उसका सहयोग करेगी और उसे खुश रखने का भरपूर प्रयास करेगी। यह बात यौन में ही नहीं, जीवन के हर पहलू में लागू हैं। अब वह स्थिति आ गई है जब पुरुष चाहे तो अपना पूरा लिंग अंदर-बाहर करना शुरू कर सकता है। और उसे यह करना भी चाहिए क्योंकि तब ही उसे मैथुन का पूरा मज़ा आएगा। अगर लिंग को जड़ तक अंदर बार-बार नहीं पेला तो क्या सम्भोग किया !! जहाँ तक लड़कियों का सवाल है, उनकी योनि कि तंत्रिकाएँ योनि-द्वार से करीब दो इंच अंदर तक ही होती हैं। उसके बाद योनि में कोई अहसास का माध्यम नहीं होता। इसीलिए लड़की को यौन सुख देने के लिए ढाई इंच का लिंग भी काफी है। बड़ा लिंग होना तो मर्दों की सनक है जिसे वेमर्दानगी का द्योतक मान बैठे हैं वरनाऔरतों को तो मर्दानगी उनके आचरण और व्यवहार में दिखती है …. उनकी शिष्टता, शौर्य और खुद्दारी में दिखतीहै, ना कि उनके लिंग की लम्बाई में। अकसर मर्द किसी कुंवारी लड़की को भेदनेके बाद ज्यादा देर तक मैथुन नहीं कर पाता क्योंकि उसकी उत्तेजना एक नई योनि के आभास से शीघ्र ही चरम सीमा तक पहुँच जाती है और वह जल्द ही वीर्य-पतन कर देता है। ऐसी हालत में पुरुष कोचाहिए कि जितनी देर तक हो सके मैथुन काआनन्द उठाता रहे। जब-जब उसे वीर्योत्पात होने का अहसास हो उसे लिंग अंदर ही रख कर रुक जाना चाहिए और अपने दिमाग को यौन से हट कर किसी और विषय पर ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ देर में जब उफान बैठने लगे तो धीरे-धीरे फिर से धक्कम-पेल शुरू करनीचाहिए। पर ज्वार-भाटे को देर तक नहीं टाल सकते। जब पुरुष को यह स्पष्ट हो जाये कि अब और नहीं रुका जा सकता तो उसे वेग से तीन-चार छोटे धक्के लगा कर लिंग को पूरा बाहर निकाल कर एक आखिरी ज़ोरदार प्रहार लगाना चाहिए जिससे लिंग जड़ तक अंदर ठुंस जाये और उसके वीर्य के फ़व्वारे लड़की के गर्भ की गहराई में जाकर छूटें। लड़कियों को मर्दों के वीर्य-पतन का अहसास अच्छा लगता है मानो मर्द की सारी शक्ति उनमें आ गई हो। मर्द के शिथिल लिंग से भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है। चरमावस्था में पुरुष को लड़की के साथ लिपट जाना चाहिए और लड़की को भी अपने मर्द को जकड़ लेना चाहिए। जब लिंग के फ़व्वारे बंद हो जाएँ तो लिंग को अंदर ही रखते हुए लड़की के प्रति, उसका सर्वोत्तम उपहार पाने के लिए, आभार प्रकट करना चाहिए। उसे जगह-जगह प्यार करके और कुछ देर अपनी बांहों में जकड़ कर यह किया जा सकता है। अब लिंग बाहर निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि कुछ देर में वह शिथिल होकर खुद ही बाहरआ जायेगा और योनि भी सिकुड़ते वक्त उसे बाहर निकाल देगी।

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    इस लेख में किसी कुँवारी या अनचुदी लड़की के साथ पहली बार सम्पूर्ण चुदाई की विधि बताई गई है। इसे हिन्दी में कौमार्य-भंग, योनिछेदन, सील तोड़ना व अंग्रेज़ी में Deflowering कहते हैं। यह किसी भीलड़की के लिए उसके जीवन की एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण घटना होती है जिसे वह ज़िंदगी भर नहीं भूल सकती। यह एक ऐसा अवसर होता है जिसकी वह तब से कल्पना कर रही होती है जब से उसके बदन में यौन-कामुकता का जन्म होता है और वह अपने स्त्रीत्व का अनुभव करने लगतीहै। अकसर लड़कियाँ अपनी शादीशुदा या अनुभवी सहेलियों से इस बारे में चर्चाकरती हैं… और यह भी देखा गया है कि ज़्यादातर लड़कियाँ अपने अनुभव बढ़ा-चढ़ाकर ही बयान करती हैं जिससे उनके मर्द पर आंच ना आए। अपनी सहेलियों की मधुर कहानियाँ सुन कर लड़कियों के मन में लुभावने सपनों का जन्म होना स्वाभाविक है। अब यह पुरुषों पर निर्भर है कि वे अपनी प्रेयसी या पत्नी के भोले और बरसों से संजोये हुए सपनों को कितना साकार कर पाते हैं या उन्हें कुचल देते हैं। किसी लड़की का कौमार्य भंग करना पुरुष के लिए एक बहुत ही ज़िम्मेदारी का काम होता है। उसे इस मौक़े को उतनी ही तवज्जोह देनी चाहिए जितनी किसी पूजा को दे जाती है। उसे लड़की के लिए यह मौक़ा हमेशा के लिए यादगार बनाना चाहिए। उसे इस दिशा में हर वह प्रयत्न करना चाहिए जिससे लड़की अपना सबसे मूल्यवान उपहार उस पुरुष को देते हुए खुश हो। पुरुष के लिए यह इतना कठिन कामनहीं है क्योंकि एक कुँवारी लड़की की अपेक्षाएं ज्यादा नहीं होतीं। वह यौन के सुखों से अब तक अनभिज्ञ होती है और उसके मन में आकांक्षा, व्यग्रता, चिंता और डर जैसे कई विचार घूम रहे होते हैं। पुरुष का कर्तव्य बनता है कि वह उसकी भावनाओं की कद्र करते हुए बड़े प्यार से उसको धीरे धीरे इस नई डगरपर ऐसे ले जाए कि वह उसके साथ बार-बार उस डगर पर चलना चाहे। सुहागरात की तैयारी मर्दों और लड़कियों दोनों के लिए सबसे ज़रूरी तैयारी है अपनी शारीरिक स्वच्छता या सफाई। यौन सम्भोग एक ऐसा मिलन है जिसमें हमारा संपर्क एक दूसरे के पूरे अंग से होता है। तो लाज़मी है कि हमारा पूरा शरीर एकदम साफ़ हो। गुप्तांगों की सफाईतो ज़रूरी है ही, साथ ही साथ हमारे बाकी अंग, खास तौर से मुँह, जीभ और बगलें साफ़होना बहुत आवश्यक हैं। बेहतर होगा अगर दोनों जने बिस्तर पर जाने से पहले नहा लें। लड़कियों को चाहिए कि अपनी योनि, गुदा, नाभि और स्तनों को अच्छे से धो लें और लड़कों कोअपने लिंग को अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए। अगर लिंग खता हुआ नहीं है (uncircumcised) तो उसके सुपाड़े की परत को जांच लेना चाहिए। कई बार वहाँ गंदगी (smegma) छिपी होती है जो दिखती नहीं है। शरीर से कोई दुर्गन्ध नहीं आनी चाहिए। मेरी सलाह है कि शरीर पर कोई खुशबू (इत्र, सेंट, डियो इत्यादि) लगाने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ साफ़-सुथरा बदन ही काफी है जिससेहमारे बदन की प्राकृतिक गंध (Pheromones) नष्ट ना हो जाए जो यौनाकर्षण में एक अहम भूमिका निभाती है। हाँ, लड़कों को अपनी उँगलियों के नाखून छोटे कर लेने चाहिए और यकीन करना चाहिए कि वे नुकीले नहीं हैं। नाखून काटने के बाद उन्हें फ़ाइल कर लेना चाहिए वरना अनजाने में लड़की के गुप्तांगों को ज़ख़्मी कर सकते हैं। इसके अलावा यौन संसर्ग के लिए आवश्यक है कि एक शीतल कमरा हो जिसमें एक आरामदेह बड़ा बिस्तर हो। कमरे के साथ बाथरूम लगा हुआ हो जिसमें ठण्डे और गर्म पानी का बंदोबस्त हो। गोपनीयता और एकांत के लिए गहरे परदे और मंद रोशनी बेहतर रहेगी। बिस्तर पर तीन-चार तकिये और एक-दो तौलिए होने चाहिए। कुछ लोगों की राय में वातावरण को रूमानी बनाने के लिए सुगन्धित मोमबत्तियाँ और हल्का संगीत होना चाहिए। मैं इसे ज़रूरी नहीं समझता। अगरहो सके तो ठीक है पर ज़रूरी नहीं है। मेरी राय में जब लड़का-लड़की यौन के आवेश में आ जाते हैं तो उनकी सब इन्द्रियाँ सिर्फ सम्भोग पर केंद्रित हो जाती हैं और वातावरण की सुगंध या संगीत का अहसास उन्हें कतई नहीं होता। किसी भी सम्भोग के पहले पेट हल्का होना चाहिए। तो, दोनों को हल्का भोजन करना चाहिए और कच्चा प्याज-लहसुन से परहेज़ करना चाहिए जिससे मुँह से दुर्गन्ध ना आये। वैसे भी खाना खाने के बाद मुँह अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए। अमूमन लोग सोचते हैं कि संभोग का मज़ा बढ़ाने के लिए मदिरा-पान कर लेना चाहिए। पर यह ना तो ज़रूरी है और ना ही मैं इसकी सलाह देता हूँ। मैं मदिरा-पान के खिलाफ नहीं हूँ और एक-आध पैग में कोई बुराई भी नहीं है परन्तु यौन का मज़ा जो पूरे होशो-हवास में आता है वह नशे की हालत में कहाँ आ सकता है। यौन तो खुद ही सर्वोत्तम नशा है….. फिर शराब का सहारा किस लिए ? वैसे भी डॉक्टरों का मानना है कि शराब लिंग के लिए उत्तेजक नहीं बल्कि एक अवरोधक का काम करता है। शराब के बाद पुरुष सेक्स के बारे में बातें तो बहुत कर सकता है पर उसकी पौरुष शक्ति कमज़ोर हो जाती है और कई बार वह सम्भोग में विफल भी हो सकता है। हाँ, एक और बात…. अपने मोबाइल फोन बंद करना ना भूलें वरना वे ऐसे समय बजेंगे कि सारा मज़ा किरकिरा हो जायेगा।

    शुरुआत पुरुष के लिए ज़रूरी है कि वह किसी बात के लिए जल्दबाज़ी न दिखाए। भले ही लड़का-लड़की पहले से एक दूसरे को जानते हों या फिर पहली बार एकांत में मिल रहेहों….. शुरुआत में दोनों को एक अजीब सी झिझक होगी। लड़की को खास तौर से काफी संकोच और असमंजस हो सकता है …. थोड़ी-थोड़ी घबराहट भी हो सकती है। कुछ मर्द भी ऐसेमौक़ों पर घबराहट महसूस कर सकते हैं खास तौर से वे जिन्हें अपना लिंग छोटा लगता हो या जिन्हें शीघ्र-पतन का डर हो। मेरी राय में दोनों को ही अपनी शंकाओं पर काबू पाने की कोशिश करनी चाहिए और प्रकृति की इस नायाब अनुभूतिका आनन्द उठाने का प्रयास करना चाहिए। बेहतर होगा अगर शुरुआत बातचीत से की जाये। पुरुष को पता होना चाहिए कि सेक्स के प्रांगण में हर तरह की पहल उसे ही करनी होती है। लड़की को ऐसे मौक़े पर लज्जा और झिझक ही शोभा देती है। ठीक तरह से बातचीत करने के लिए भी पहले से तैयारी करना बेहतर होगा। पुरुष को चाहिए कि इस बारे में पहले सेसोच ले क्या क्या बात करनी है वरना उस वक्त दिमाग धोखा दे सकता है। अकसर लड़कियों को अपने घरवालों की और खुद की तारीफ सुनना अच्छा लगता है। अगर सुहाग-रात शादी के बाद मनाई जा रही है तो अकसर लड़की काफी थकी हुई होतीहै …. उसकी थकान दूर करने के लिए पुरुष उसके हाथ, कंधे, बाजू, सिर इत्यादि दबाने के बहाने उसको छू सकता है। इससे शुरू-शुरू की झिझक तोड़ने में सहायता मिलेगी और लड़की को साहस भी मिलेगा। इन दो बातों को ध्यान में रखते हुए कुछ इसतरह से बातचीत शुरू की जा सकती है :- मानो लड़की का नाम प्रिया है, “वाह प्रिया ! मैं बहुत खुशनसीब हूँ ……..” (प्रिया कुछ नहीं कहती) “जो तुम मुझे मिली हो ….” (प्रिया कुछ नहीं कहती) “तुम्हारे मम्मी-पापा कितने अच्छे हैं ….. दोनों अभी भी जवान लगते हैं … !” (प्रिया ज़रूर मुस्कुराएगी) कुछ देर उसके माँ-बाप, भाई-बहन की तारीफ करने के बाद ….. “प्रिया …. तुम्हारा नाम मुझे बहुत अच्छा लगता है ….. छोटा सा … मैं तुम्हें प्यार में या गुस्से में …. दोनों में आसानी से बुला सकता हूँ !!” (फिर नाटकीय ढंग से उसका नाम एक बार प्यार से और एक बार गुस्से से लेकर दिखाओ। वह ज़रूर हँस पड़ेगी) “तुम हँसती हुई ज्यादा अच्छी लगती हो …. तुम्हें पता भी है तुम्हारे गाल और होंठ कैसे खिल जाते हैं !” (इस समय उसकेगाल पर चुम्बन ले सकते हैं) “मुझे लगता है तुम बहुत थक गई हो …… लाओ, मैं तुम्हारी थकान दूर कर दूं।” (यह कहते हुए उसके कंधे, या हाथ या सिर को पकड़ कर सहलाना शुरू किया जा सकता है। अगर वह शरमाये या आनाकानी करे तो भी पुरुष को दृढ़ता से उसे पकड़ कर प्यारसे सहलाना या दबाना चाहिए)

    चीर-हरण सम्भोग से पहले लड़की को निर्वस्त्र करना एक ऐसा अवसर है जो दोनों को उत्तेजित करने में मदद कर सकता है। इस अवसर का सही उपयोग करना चाहिए। अगर पुरुष लड़की का शरीर दबा कर उसकी थकान मिटाने में जुटा है तो वह आसानी से धीरे धीरे उसके कपड़े इस तरह अलग कर सकता है मानो वे उसके रास्ते में आ रहेहों। लड़की का चीर-हरण धीरे धीरे करना चाहिए। अकसर लड़कियाँ ऊपरी कपड़े उतरवाने में ज्यादा संकोच नहीं करतीं पर पहली बार किसी के सामने ब्रा और पैन्टी उतरवाने में शर्म के कारण आपत्ति कर सकती है। अगर ऐसा होता है तोपुरुष को लड़की की इच्छा की कद्र करनी चाहिए और रुक जाना चाहिए। इस समय वह खुद अपने आप को निर्वस्त्र कर सकता है। कुछ लड़कियों को रोशनी में नंगा होने से संकोच होता है तो उजाला कम कर देना चाहिए … पर बिलकुल अँधेरा ठीक नहीं है। हालाँकि मेरा यह मानना है कि सच्चा पुरुष वही है जो स्त्री की इच्छाओं की कद्र करे और उसकी भौतिक कमजोरी का नाजायज़ फ़ायदा ना उठाये। पर यह भी सही है कि पुरुष को दृढ़ता से वे सब काम करने चाहिए जो कि उचित और ज़रूरी हों। अगर लड़की को ज्यादा ही संकोच या आपत्ति हो तो उसे अपना हक़ जता कर या ज़रूरत हो तो थोड़ा बल इस्तेमाल करके लड़की को सही मार्ग पर लाना चाहिए। इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि लड़की का बलात्कार किया जाये

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    Bigg boss 2 ashwariya 👅👅👅

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    Aishwarya without abhi shake :) 

    ज्वाला देवी के प्रति रंजना के मन में बड़ा अजीब सा भाव उत्पन्न हो गया था। उसकी नज़र में वो इतनी गिर गयी थी कि उसके सारे आदर्शो, पतिव्रता के ढोंग को देख देख कर उसका मन गुस्से के मारे भर उठा था। उसके सारे कार्यों में रंजना को अब वासना और बदचलनी के अलावा कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा था। मगर अपनी मम्मी के बारे में इस तरह के विचार आते आते कभी वो सोचने लगती थी कि जिस काम की वजह से मम्मी बुरी है वही काम करवाने के लिये तो वो खुद भी अधीर है। वास्तविकता तो ये थी कि आजकल रंजना अपने अंदर जिस आग में जल रही थी, उसकी झुलस की वो उपेक्षा कर ही नहीं सकती थी। जितना बुरा गलत काम करने वाला होता है उतना ही बुरा गलत काम करने के लिये सोचने वाला भी होता है। बस! अगर ज्वाला देवी की गलती थी तो सिर्फ़ इतनी कि असमय ही चुदाई की आग रंजना के अंदर उसने जलायी थी। अभी उस बेचारी की उम्र ऐसी कहाँ थी कि वो चुदाई करवाने के लिये प्रेरित हो अपनी चूत कच्ची ही फ़ुड़वाले। बिरजु और ज्वाला देवी की चुदाई का जो प्रभाव रंजना पर पड़ा, उसने उसके रास्ते ही मोड़ कर रख दिये थे। उस रोज़ से ही किसी मर्द से चुदने के लिये उसकी चूत फ़ड़क उठी थी। कईं बार तो चूत की सील तूड़वाने के लिये वो ऐसी ऐसी कल्पनायें करती कि उसका रोम-रोम सिहर उठता था। अब पढ़ायी लिखायी में तो उसका मन कम था और एकान्त कमरे में रह कर सिर्फ़ चुदाई के खायाल ही उसे आने लगे थे। कईं बार तो वो गरम हो कर रात में ही अपने कमरे का दरवाजा ठीक तरह बंद करके एकदम नंगी हो जाया करती और घन्टो अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को दबाने और चूत को खुजाने से जब वो और भी गर्माँ जाती थी तो नंगी ही बिस्तर पर गिर कर तड़प उठती थी, कितनी ही देर तक अपनी हर्कतो से तंग आ कर वो बुरी तरह छटपटाती रहती और अन्त में इसी बेचैनी और दर्द को मन में लिये सो जाती थी। उन्ही दिनों रंजना की नज़र में एक लड़का कुछ ज्यादा ही चढ़ गया था। नाम था उसका मृदुल। उसी की क्लास में पढ़ता था। मृदुल देखने में बेहद सुन्दर-स्वस्थ और आकर्षक था, मुश्किल से दो वर्ष बड़ा होगा वो रंजना से, मगर देखने में दोनों हम उम्र ही लगते थे। मृदुल का व्यव्हार मन को ज्यादा ही लुभाने वाला था। न जाने क्या खासियत ले कर वो पैदा हुआ होगा कि लड़कियाँ बड़ी आसानी से उसकी ओर खींची चली आती थीं। रंजना भी मृदुल की ओर आकर्षित हुए बिना न रह सकी। मौके बेमौके उससे बात करने में वो दिलचस्पी लेने लगी। खूबसुरती और आकर्षण में यूँ तो रंजना भी किसी तरह कम न थी, इसलिये मृदुल दिलोजान से उस पर मर मिटा था। वैसे लड़कियों पर मर मिटना उसकी आदत में शामिल हो चुका था, इसी कारण रंजना से दो वर्ष बड़ा होते हुए भी वो अब तक उसी के साथ पढ़ रहा था। फेल होने को वो बच्चों का खेल मानता था। बहुत ही जल्द रंजना और मृदुल में अच्छी दोस्ती हो गयी। अब तो कॉलेज में और कॉलेज के बाहर भी दोनों मिलने लगे। इसी क्रम के साथ दोनों की दोस्ती रंग लाती जा रही थी। उस दिन रंजना का जन्म दिन था, घर पर एक पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें परिचित व रिश्तेदारों के अलावा ज्यादातर संख्या ज्वाला देवी के चूत के दिवानों की थी। आज बिरजु भी बड़ा सज धज के आया था, उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वो एक रद्दी वाला है। रंजना ने भी मृदुल को इस दावत के लिये इनविटेशन कार्ड भेजा था, इसलिये वो भी पार्टी में शामिल हुआ था। जिस तरह ज्वाला देवी अपने चूत के दिवानों को देख-देख कर खुश हो रही थी उसी तरह मृदुल को देख कर रंजना के मन में भी फ़ुलझड़ियाँ सी फूट रहीं थीं। वो आज बे-इन्तहा प्रसन्न दिखायी पड़ रही थी। पार्टी में रंजना ज्यादातर मृदुल के साथ ही रही। ज्वाला देवी अपने यारों के साथ इतनी व्यस्त थी कि रंजना चाहते हुए भी मृदुल का परिचय उससे न करा सकी। मगर पार्टी के समाप्त हो जाने पर जब सब मेहमान विदा हो गये तो रंजना ने जानबूझ कर मृदुल को रोके रखा। बाद में ज्वाला देवी से उसका परिचय कराती हुई बोली, “मम्मी ! ये मेरे खास दोस्त मृदुल हैं।” “ओहह ! हेंडसम बॉय।” ज्वाला देवी ने साँस सी छोड़ी और मृदुल से मिल कर वो जरूरत से ज्यादा ही प्रसन्नता ज़ाहिर करने लगी। उसकी निगाहें बारबार मृदुल की चौड़ी छाती, मजबूत कन्धों, बलशाली बाँहों और मर्दाने सुर्ख चेहरे पर ही टिकी रही। रंजना को अपनी मम्मी का यह व्यव्हार और उसके हाव-भाव बड़े ही नागवार गुज़र रहे थे। मगर वो बड़े धैर्य से अपने मन को काबू में किये सब सहे जा रही थी। जबकि ज्वाला देवी पर उसे बेहद गुस्सा आ रहा था। उसे यूँ लग रहा था जैसे वो मृदुल को उससे छीनने की कोशिश कर रही है। मृदुल से बातें करने के बीच ज्वाला देवी ने रंजना की तरफ़ देख कर बदमाश औरत की तरह नैन चलाते हुए कहा, “वाह रंजना ! कुछ भी हो, मृदुल… अच्छी चीज़ ढूँढी है तुमने, दोस्त हो तो मृदुल जैसा।” अपनी बात कह कर कुछ ऐसी बेशर्मी से मुस्कराते हुए वो रंजना की तरफ़ देखने लगी कि बेचारी रंजना उसकी निगाहों का सामना न कर सकी और शर्मा कर उसने अपनी गर्दन झुका ली। ज्वाला देवी ने मृदुल को छाती से लगा कर प्यार किया और बोली, “बेटा ! इसे अपना ही घर समझ कर आते रहा करो, तुम्हारे बहाने रंजना का दिल भी बहल जाया करेगा, ये बेचारी बड़ी अकेली सी रहती है।” “यस आन्टी ! मैं फिर आऊँगा।” मृदुल ने मुसकुरा कर उसकी बात का जवाब दिया और उसने जाने की इजाज़त माँगी, रंजना एक पल भी उसे अपने से अलग होने देना नहीं चाहती थी, मगर मजबूर थी। मृदुल को छोड़ने के लिये वो बाहर में गेट तक आयी। विदा होने से पहले दोनों ने हाथ मिलाया तो रंजना ने मृदुल का हाथ ज़ोर से दबा दिया, इस पर मृदुल रहस्य से उसकी तरफ़ मुसकुराता हुआ वहाँ से चला गया। अब आलम ये था कि दोनों ही अक्सर कभी रेस्तोराँ में तो कभी पार्क में या सिनेमा हाल में एक साथ होते थे। पापा सुदर्शन की गैरमौजूदगी का रंजना पूरा-पूरा लाभ उठा रही थी। इतना सब कुछ होते हुए भी मृदुल का लंड चूत में घुसवाने का सौभाग्य उसे अभी तक प्राप्त न हो पाया था। हाँ, चूमा चाटी तक नौबत अवश्य जा पहुंची थी। रोज़ाना ही एक चक्कर रंजना के घर का लगाना मृदुल का परम कर्तव्य बन चुका था। सुदर्शन जी की खबर आयी कि वे अभी कुछ दिन और मेरठ में रहेंगे। इस खबर को सुन कर माँ बेटी दोनों का मानो खून बढ़ गया हो। रंजना रोजाना कॉलेज में मृदुल से घर आने का आग्रह बार-बार करती थी। जाने क्या सोच कर ज्वाला देवी के सामने आने से मृदुल कतराया करता था। वैसे रंजना भी नहीं चाहती थी कि मम्मी के सामने वो मृदुल को बुलाये। इसलिये अब ज्यादातर चोरी-चोरी ही मृदुल ने उसके घर जाना शुरु कर दिया था। वो घन्टों रंजना के कमरे में बैठा रहता और ज्वाला देवी को ज़रा भी मालूम नहीं होने पाता था। फिर वो उसी तरह से चोरी-चोरी वापस भी लौट जाया करता था। इस प्रकार रंजना उसे बुला कर मन ही मन बहुत खुश होती थी। उसे लगता मानो कोई बहुत बड़ी सफ़लता उसने प्राप्त कर ली हो। चुदाई संबंधों के प्रति तरह-तरह की बातें जानने की इच्छा रंजना के मन में जन्म ले चुकी थी, इसलिये उन्ही दिनों में कितनी चोदन विषय पर आधारित पुस्तकें ज्वाला देवी के कमरे से चोरी-चोरी निकाल कर वो काफ़ी अध्य्यन कर रही थी। इस तरह जो कुछ उस रोज़ ज्वाला देवी व बिरजु के बीच उसने देखा था इन चोदन समबन्धी पुस्तकों को पढ़ने के बाद सारी बातों का अर्थ एक-एक करके उसकी समझ में आ गया था। और इसी के साथ साथ चुदाई की ज्वाला भी प्रचण्ड रूप से उसके अंदर बढ़ उठी थी। फिर सुदर्शनजी मेरठ से वापिस आ गये और माँ का बिरजु से मिलना और बेटी का मृदुल से मिलना कम हो गया। फिर दो महीने बाद रंजना के छोटे मामा की शादी आ गयी और उसी समय रंजना के फायनल एग्जाम भी आ गये। ज्वाला देवी शादी पर अपने मायके चली गयी और रंजना पढ़ाई में लग गई। उधर शादी सम्पन्न हो गई और इधर रंजना की परीक्षा भी समाप्त हो गई, पर ज्वाला देवी ने खबर भेज दी कि वह १५ दिन बाद आयेगी। सुदर्शनजी ऑफिस से शाम को कुछ जल्द आ जाते। ज्वाला के नहीं होने से वे प्रायः रोज ही शाज़िया की मारके आते इसलिये थके हारे होते और प्रायः जल्द ही अपने कमरे में चले जाते। रंजना और बेचैन रहने लगी और एक दिन जब पापा अपने कमरे में चले गये तो रंजना के वहशीपन और चुदाई नशे की हद हो गयी। हुआ यूँ कि उस रोज़ दिल के बहकावे में आ कर उसने चुरा कर थोड़ी सी शराब भी पी ली थी। शराब का पीना था कि चुदाई की इच्छा का कुछ ऐसा रंग उसके सिर पर चढ़ा कि वो बेहाल हो उठी। दिल की बेचैनी और चूत की खाज से घबड़ा कर वो अपने बिस्तर पर जा गिरी और बर्दाश्त से बाहर चुदाई की इच्छा और नशे की अधिकता के कारण वो बेचैनी से बिस्तर पर अपने हाथ पैर फेंकने लगी और अपने सिर को ज़ोर-ज़ोर से इधर उधर झटकने लगी। कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, दरवाजे पर एकमात्र परदा टंगा हुआ था। रंजना को ज़रा भी पता न चला कि कब उसके पापा उसके कमरे में आ गये। वे चुपचाप उसके बिस्तर तक आये और रंजना को पता चलने से पहले ही वे झुके और रंजना के चेहरे पर हाथ फेरने लगे फिर एकदम से उसे उठा कर अपनी बाँहों में भींच लिया। इस भयानक हमले से रंजना बुरी तरह से चौंक उठी, मगर अभी हाथ हिलाने ही वाली थी कि सुदर्शन ने उसे और ज्यादा ताकत लगा कर जकड़ लिया। अपने पापा की बाँहों में कसी होने का आभास होते ही रंजना एकदम घबड़ा उठी, पर नशे की अधिकता के कारण पापा का यह स्पर्श उसे सुहाना लगा। तभी सुदर्शनजी ने उससे प्यार से पुछा, “क्यों रंजना बेटा तबियत तो ठीक है न। मैं ऐसे ही इधर आया तो तुम्हें बिस्तर पर छटपटाते हुए देखा… और यह क्या तुम्हारे मुँह से कैसी गन्ध आ रही है।” रंजना कुछ नहीं बोल सकी और उसने गर्दन नीचे कर ली। सुदर्शनजी कई देर बेटी के सर पर प्यार से हाथ फेरते रहे और फिर बोले, “मैं समझता हूँ कि तुम्हें मम्मी की याद आ रही है। अब तो हमारी बेटी पूरी जवान हो गई है। तुम अकेली बोर हो रही हो। चलो मेरे कमरे में।” रंजना मन्त्र मुग्ध सी पापा के साथ पापा के कमरे में चल पड़ी। कमरे में टेबल पर शराब की बोतलें पड़ी थीं, आईस बॉक्स था और एक तश्तरी में कुछ काजू पड़े थे। पापा सोफ़े पर बैठे और रंजना भी पापा के साथ सोफ़े पर बैठ गई। सुदर्शनजी ने एक पेग बनाया और शराब की चुसकियाँ लेने लगे। इस दौरान दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई। तभी सुदर्शन ने मौन भंग किया। “लो रंजना थोड़ी पी लो तो तुम्हें ठीक लगेगा तुम तो लेती ही हो।” अब धीरे धीरे रंजना को स्थिती का आभास हुआ तो वह बोली, “पापा आप यह क्या कह रहे हैं?” तभी सुदर्शन ने रंजना के भरे सुर्ख कपोलों (गालों) पर हाथ फेरना शुरु किया और बोले, “लो बेटी थोड़ी लो शर्माओ मत। मुझे तो पता ही नहीं चला कि हमारी बेटी इतनी जवान हो गई है। अब तो तुम्हारी परीक्षा भी खतम हो गई है और मम्मी भी १५ दिन बाद आयेगी। अब जब तक मैं घर में रहूँगा तुम्हें अकेले बोर होने नहीं दूँगा।” यह कहते हुए सुदर्शन ने अपना गिलास रंजना के होंठों के पास किया। रंजना नशे में थी और उसी हालत में उसने एक घूँट शराब का भर लिया। सुदर्शन ने एक के बाद एक तीन पेग बनाये और रंजना ने भी २-३ घूँट लिये। रंजना एक तो पहले ही नशे में थी और शराब की इन २-३ और घूँटों की वजह से वह कल्पना के आकाश में उड़ने लगी। अब सुदर्शनजी उसे बाँहों में ले हल्के-हल्के भींच रहे थे। सुदर्शन को शाज़िया जैसी जवान चूत का चस्का तो पहले ही लगा हुआ था, पर १९ साल की इस मस्त अनछुई कली के सामने शाज़िया भी कुछ नहीं थी। इन दिनों रंजना के बारे में उनके मन में बूरे ख्याल पनपने लगे थे पर इसे कोरी काम कल्पना समझ वे मन से झटक देते थे। पर आज उन्हें अपनी यह कल्पना साकार होती लगी और इस अनायास मिले अवसर को वे हाथ से गँवाना नहीं चाहते थे। रंजना शराब के नशे में और पिछ्ले दिनों मृदुल के साथ चुदाई की कल्पनाओं से पूरी मस्त हो उठी और उसने भी अपनी बाँहें उठा कर पापा की गर्दन में डाल दी और पापा के आगोश में समा अपनी कुँवारी चूचियाँ उनकी चौड़ी छाती पर रगड़नी शुरु कर दीं। रंजना का इतना करना था कि सुदर्शन खुल कर उसके शरीर का जायका लूटने पर उतर आया। अब दोनों ही काम की ज्वाला में फुँके हुए जोश में भर कर अपनी पूरी ताकत से एक दूसरे को दबाने और भींचने लगे। तभी सुदर्शन ने सहारा देकर रंजना को अपनी गोद में बिठा लिया। रंजना एक बार तो कसमसाई और पापा की आँखों की तरफ़ देखी। तब सुदर्शन ने कहा। “आह! इस प्यारी बेटी को बचपन में इतना गोद में खिलाया है। पर इन दिनों में मैने तुम्हारी ओर ध्यान ही नहीं दिया। सॉरी, और तुम देखते-देखते इतनी जवान हो गई हो। आज प्यारी बेटी को गोद में बिठा खूब प्यार करेंगे और सारी कसर निकाल देंगे।” सुदर्शन ने बहुत ही काम लोलुप नज़रों से रंजना की छातियों की तरफ़ देखाते हुए कहा। परन्तु मस्ती और नशे में होते हुए भी रंजना इस ओर से लापरवाह नहीं रह सकी कि कमरे का दरवाजा खुला था। वह एकाएक पापा की गोद से उठी और फ़टाफ़ट उसने कमरे का दरवाजा बंद किया। दरवाजा बंद करके जैसे ही लौटी तो सुदर्शन सम्भल कर खड़ा हो चुका था और वासना की भूख उसकी आँखों में झलकने लगी। वो समझ गया कि बेटी चुदने के लिये खुब ब खुद तैयार है तो अब देर किस बात की। पापा ने खड़े-खड़े ही रंजना को पकड़ लिया और बुरी तरह बाँहों में भींच कर वे पागलो की तरह ज़ोर- ज़ोर से उसके गालों पर कस कर चुम्मी काटने लगे। गालों को उन्होने चूस-चूस कर एक मिनट में ही कशमीरी सेब की तरह सुरंग बना कर रख दिया। मस्ती से रंजना की भी यही हालत थी, मगर फिर भी उसने गाल चुसवात- चुसवाते सिसक कर कहा, “हाय छोड़ो न पापा आप यह कैसा प्यार कर रहे हैं। अब मैं जाती हूँ अपने कमरे में सोने के लिये।” पर काम लोलुप सुदर्शन ने उसकी एक न सुनी और पहले से भी ज्यादा जोश में आ कर उसने गाल मुँह में भर कर उन्हे पीना शुरु कर दिया। “ऊँऊँऊँऊँ हूँ… अब नहीं जाने दूँगा। मेरे से मेरी जवान बेटी की तड़प और नहीं देखी जाती। मैने तुम्हें अपने कमरे में तड़पते मचलते देखा। जानती हो यह तुम्हारी जवानी की तड़प है। तुम्हें प्यार चाहिये और वह प्यार अब मैं तुझे दूँगा।” मजबूरन वो ढीली पड़ गयी। बस उसका ढीला पड़ना था कि हद ही कर दी सुदर्शन ने। वहीं ज़मीन पर उसने रंजना को गिरा कर चित्त लिटा लिया और झपट कर उसके उपर चढ़ बैठा। इसी खीँचातानी में रंजना का स्कर्ट जाँघों तक खिसक गया और उसकी गोरी-गोरी तन्दुरुस्त जाँघें साफ़ दिखायी देने लगी। बेटी की इतनी लंड मार आकर्शक जाँघों को देखते ही सुदर्शन बदवास और खुँख्वार पागल हो उठा। सारे धैर्य की माँ चोद कर उसने रख दी, एक मिनट भी चूत के दर्शन किये बगैर रहना उसे मुश्किल हो गया था। अगले पल ही झटके से उसने रंजना का स्कर्ट खींच कर फ़ौरन ही उपर सरका दिया। उसका विचार था कि स्कर्ट के उपर खींचे जाते ही रंजना की कुँवारी चूत के दर्शन उसे हो जायेंगे और वो जल्दी ही उसमें डुबकी लगा कर जीभर कर उसमें स्नान करने का आनंद लूट सकेगा, मगर उसकी ये मनोकामना पूरी न हो सकी, क्योंकि रंजना स्कर्ट के नीचे कतई नंगी नहीं थी बल्कि उसके नीचे पैन्टी पहने हुये थी। चूत को पैन्टी से ढके देख कर पापा को बड़ी निराशा हुई। रंजना को भी यदि यह पता होता कि पापा उसके साथ आज ऐसा करेंगे तो शायद वह पैन्टी ही नहीं पहनती। रंजना सकपकाती हुई पापा की तरफ़ देख रही थी कि सुदर्शन शीघ्रता से एकदम उसे छोड़ कर सीधा बैठ गया। एक निगाह रंजना की जाँघों पर डाल कर वो खड़ा हो गया और रंजना के देखते देखते उसने जल्दी से अपनी पैन्ट और कमीज़ उतार दी। इसके बाद उसने बनियान और अन्डरवेयर भी उतार डाला और एकदम मादरजात नंगा हो कर खड़ा लंड रंजना को दिखाने लगा। अनुभवी सुदर्शन को इस बात का अच्छी तरह से पता था कि चुदने के लिये तैयार लड़की मस्त खड़े लंड को अपनी नज़रों के सामने देख सारे हथियार डाल देगी। इस हालत में पापा को देख कर बेचारी रंजना उनसे निगाहे मिलाने और सीधी निगाहों से लंड के दर्शन करने का साहस तक न कर पा रही थी बल्कि शर्म के मारे उसकी हालत अजीब किस्म की हो चली थी। मगर न जाने नग्न लंड में कशिश ही ऐसी थी कि अधमुँदी पलकों से वो बारबार लंड की ही ओर देखती जा रही थी। उसके सगे बाप का लंड एक दम सीधा तना हुआ बड़ा ही सख्त होता जा रहा था। रंजना ने वैसे तो बिरजु के लंड से इस लंड को न तो लंबा ही अनुभव किया और न मोटा ही मगर अपनी चूत के छेद की चौड़ाई को देखते हुए उसे लगा कि पापा का लंड भी कुछ कम नहीं है और उसकी चूत को फाड़ के रख देगा। नंगे बदन और जाँघों के बीच तनतनाते सुर्ख लंड को देख कर रंजना की चुदाई की इच्छा और भी भयंकर रूप धारण करती जा रही थी। जिस लंड की कल्पना में उसने पिछले कई महीने गुजारे थे वह साक्षात उसकी आँखों के सामने था चाहे अपने पापा का ही क्यों न हो। तभी सुदर्शन जमीन पर चित लेटी बेटी के बगल में बैठ गया। वह बेटी की चिकनी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। उसने बेटी को खड़ा लंड तो नंगा होके दिखा ही दिया अब वह उससे कामुक बातें यह सोच कर करने लगा कि इससे छोकरी की झिझक दूर होगी। फिर एक शर्माती नई कली से इस तरह के वासना भरे खेल खेलने का वह पूरा मजा लेना चाहता था। “वाह रंजना! इन वर्षों में क्या मस्त माल हो गई हो। रोज मेरी नज़रों के सामने रहती थी पर देखो इस ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया। वाह क्या मस्त चिकनी चिकनी जाँघें हैं। हाय इन पर हाथ फेरने में क्या मजा है। भई तुम तो पूरी जवान हो गई हो और तुम्हें प्यार करके तो बड़ा मजा आयेगा। हम तो आज तुम्हें जी भर के प्यार करेंगें और पूरा देखेंगें कि बेटी कितनी जवान हो गई है!” फिर सुदर्शन ने रंजना को बैठा दिया और शर्ट खोल दिया। शर्ट के खुलते ही रंजना की ब्रा में कैद सख्त चूचियाँ सिर उठाये वासना में भरे पापा को निमंत्रण देने लगीं। सुदर्शन ने फौरन उन पर हाथ रख दिया और उन्हें ब्रा पर से ही दबाने लगा। “वाह रंजना तुमने तो इतनी बड़ी -बड़ी कर लीं। तुम्हारी चिकनी जाँघों की ही तरह तुम्हारी चूचियाँ भी पूरी मस्त हैं। भई हम तो आज इनसे जी भर के खेलेंगे, इन्हें चूसेंगे!” यह कह कर सुदर्शन ने रंजना की ब्रा उतार दी। ब्रा के उतरते ही रंजना की चूचियाँ फुदक पड़ी। रंजना की चूचियाँ अभी कच्चे अमरूदों जैसी थीं। अनछुयी होने की वजह से चूचियाँ बेहद सख्त और अंगूर के दाने की तरह नुकीली थीं। सुदर्शन उनसे खेलने लगा और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। रंजना मस्ती में भरी जा रही थी और न तो पापा को मना ही कर रही थी और न ही कुछ बोल रही थी। इससे सुदर्शन की हिम्मत और बढ़ी और बोला, “अब हम प्यारी बेटी की जवानी देखेंगे जो उसने जाँघों के बीच छुपा रखी है। जरा लेटो तो।” रंजना ने आँखें बंद कर ली और चित लेट गई। सुदर्शन ने फिर एक बार चिकनी जाँघों पर हाथ फेरा और ठीक चूत के छेद पर अंगुल से दबाया भी जहाँ पैन्टी गिली हो चुकी थी। “हाय रन्जू! तेरी चूत तो पानी छोड़ रही है।” यह कहके सुदर्शन ने रंजना की पैन्टी जाँघों से अलग कर दी। फिर वो उसकी जाँघों, चूत, गाँड़ और कुंवारे मम्मों को सहलाते हुए आहें भरने लगा। चूत बेहद गोरी थी तथा वहाँ पर रेशमी झाँटों के हल्के हल्के रोये उग रहे थे। इसलिये बेटी की इस अनछुई चूत पर हाथ सहलाने से सुदर्शन को बेहद मज़ा आ रहा था। सख्त मम्मों को भी दबाना वो नहीं भूला था। इसी दौरान रंजना का एक हाथ पकड़ कर उसने अपने खड़े लंड पर रख कर दबा दिया और बड़े ही नशीले स्वर में बोला, “रंजना! मेरी प्यारी बेटी! लो अपने पापा के इस खिलौने से खेलो। ये तुम्हारे हाथ में आने को छटपटा रहा है मेरी प्यारी प्यारी जान.. इसे दबाओ आह!” लंड सहलाने की हिम्मत तो रंजना नहीं कर सकी, क्योंकि उसे शर्म और झिझक लग रही थी। मगर जब पापा ने दुबारा कहा तो हलके से उसने उसे मुट्ठी में पकड़ कर भींच लिया। लंड के चारों तरफ़ के भाग में जो बाल उगे हुए थे, वो काले और बहुत सख्त थे। ऐसा लगता था, जैसे पापा शेव के साथ साथ झाँटें भी बनाते हैं। लंड के पास की झाँटे रंजना को हाथ में चुभती हुई लग रही थी, इसलिये उसे लंड पकड़ना कुछ ज्यादा अच्छा नहीं लग रहा था। अगर लंड झाँट रहित होता तो शायद रंजना को बहुत ही अच्छा लगता क्योंकि वो बोझिल पलकों से लंड पकड़े पकड़े बोली, “ओहह पापा आपके यहाँ के बाल भी दाढ़ी की तरह चुभ रहे हैं.. इन्हे साफ़ करके क्यों नहीं रखते।” बालों की चुभन सिर्फ़ इसलिये रंजना को बर्दाश्त करनी पड़ रही थी क्योंकि लंड का स्पर्श उसे बड़ा ही मनभावन लग रहा था। एकाएक सुदर्शन ने लंड उसके हाथ से छुड़ा लिया और उसकी जाँघों को खींच कर चौड़ा किया और फिर उसके पैरों की तरफ़ उकड़ू बैठा। उसने अपना फ़नफ़नाता हुआ लंड कुदरती गिली चूत के अनछुए द्वार पर रखा। वो चूत को चौड़ाते हुए दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर काफ़ी देर तक उसे वहीं पर रगड़ता हुआ मज़ा लेता रहा। मारे मस्ती के बावली हो कर रंजना उठ-उठ कर सिसक रही थी, “उई पापा आपके बाल .. मेरी चूत पर चुभ रहे हैं.. उन्हे हटाओ.. बहुत गड़ रहे हैं। पापा अंदर मत करना मेरी बहुत छोटी है और आपका बहुत बड़ा।” वास्तव में अपनी चूत पर झाँट के बालों की चुभन रंजना को सहन नहीं हो रही थी, मगर इस तरह से चूत पर सुपाड़े के घस्सों से एक जबर्दस्त सुख और आनंद भी उसे प्राप्त हो रहा था। घस्सों के मज़े के आगे चुभन को वो भूलती जा रही थी। रंजना ने सोचा कि जिस प्रकार बिरजु ने मम्मी की चूत पर लंड रख कर लंड अंदर घुसेड़ा था उसी प्रकार अब पापा भी ज़ोर से धक्का मार कर अपने लंड को उसकी चूत में उतार देंगे, मगर उसका ऐसा सोचना गलत साबित हुआ। क्योंकि कुछ देर लंड को चूत के मुँह पर ही रगड़ने के बाद सुदर्शन सहसा उठ खड़ा हुआ और उसकी कमर पकड़ कर खींचते हुए उसने उसे उपर अपनी गोद में उठा लिया। गोद में उठाये ही सुदर्शन ने उसे पलंग पर ला पटका। अपने प्यारे पापा की गोद में भरी हुई जब रंजना पलंग तक आयी तो उसे स्वर्गीय आनंद की प्राप्ति हो रही थी। पापा की गरम साँसों का स्पर्श उसे अपने मुँह पर पड़ता हुआ महसूस हो रहा था, उसकी साँसों को वो अपने नाक के नथुनो में घुसती हुई और गालों पर लहराती हुई अनुभव कर रही थी। इस समय रंजना की चूत में लंड खाने की इच्छा अत्यन्त बलवती हो उठी थी। पलंग के उपर उसे पटक सुदर्शन भी अपनी बेटी के उपर आ गया था। जोश और उफ़ान से वो भरा हुआ तो था ही साथ ही साथ वो काबू से बाहर भी हो चुका था, इसलिये वो चूत की तरफ़ पैरों के पास बैठते हुए टाँगों को चौड़ा करने में लग गया। टाँगों को खूब चौड़ा कर उसने अपना लंड उपर को उठ चूत के फ़ड़फ़ड़ाते सुराख पर लगा दिया। रंजना की चूत से पानी जैसा रिस रहा था शायद इसीलिये सुदर्शन ने चूत पर चिकनायी लगाने की जरूरत नहीं समझी। उसने अच्छी तरह लंड को चूत पर दबा कर ज्यों ही उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश में और दबाव डाला कि रंजना को बड़े ज़ोरों से दर्द होने लगा और असहनीय कष्ट से मरने को हो गयी। दबाव पल प्रति पल बढ़ता जा रहा था और वो बेचारी बुरी तरह तड़फ़ड़ाने लगी। लंड का चूत में घुसना बर्दाश्त न कर पाने के कारण वो बहुत जोरों से कराह उठी और अपने हाथ पांव फ़ेंकती हुई दर्द से बिलबिलाती हुई वो तड़पी, “हाय! पापा अंदर मत डालना। उफ़ मैं मरी जा रही हूँ। हाय पापा मुझे नहीं चाहिये आपका ऐसा प्यार!” रंजना के यूँ चीखने चिल्लाने और दर्द से कराहने से तंग आ कर सुदर्शन ने लंड का सुपाड़ा जो चूत में घुस चुका था उसे फ़ौरन ही बाहर खींच लिया। फिर उसने अंगुलियों पर थूक ले कर अपने लंड के सुपाड़े पर और चूत के बाहर व अंदर अंगुली डाल कर अच्छी तरह से लगाया। पुनः चोदने की तैयारी करते हुए उसने फिर अपना दहकता सुपाड़ा चूत पर टिका दिया और उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। हालाँकि इस समय चूत एकदम पनियायी हुई थी, लंड के छेद से भी चिपचिपी बून्दे चू रहीं थीं और उसके बावजूद थूक भी काफ़ी लगा दिया था मगर फिर भी लंड था कि चूत में घुसाना मुश्किल हो रहा था। कारण था चूत का अत्यन्त टाईट छेद। जैसे ही हल्के धक्के में चूत ने सुपाड़ा निगला कि रंजना को जोरों से कष्ट होने लगा, वो बुरी तरह कराहने लगी, “धीरे धीरे पापा, बहुत दर्द हो रहा है। सोच समझ कर घुसाना.. कहीं फ़ट .. गयी.. तो.. उफ़्फ़.. मर.. गयी। हाय बड़ा दर्द हो रहा है.. टेस मार रही है। हाय क्या करूँ।” चूँकि इस समय रंजना भी लंड को पूरा सटकने की इच्छा में अंदर ही अंदर मचली जा रही थी। इसलिये ऐसा तो वो सोच भी नहीं सकती थी कि वो चुदाई को एकदम बंद कर दे। वो अपनी आँखों से देख चुकी थी कि बिरजु का खूँटे जैसा लंड चूत में घुस जाने के बाद ज्वाला देवी को जबर्दस्त मज़ा प्राप्त हुआ था और वो उठ-उठ कर चुदी थी। इसलिये रंजना स्वयं भी चाहने लगी कि जल्दी से जल्दी पापा का लंड उसकी चूत में घुस जाये और फिर वो भी अपने पापा के साथ चुदाई सुख लूट सके, ठीक बिरजु और ज्वाला देवी की तरह। उसे इस बात से और हिम्मत मिल रही थी कि जैसे उसकी माँ ने उसके पापा के साथ बेवफ़ाई की और एक रद्दी वाले से चुदवाई अब वो भी माँ की अमानत पर हाथ साफ़ करके बदला ले के रहेगी। रंजना यह सोच-सोच कर कि वह अपने बाप से चुदवा रही है जिससे चुदवाने का हक केवल उसकी माँ को है, और मस्त हो गई। क्योंकि जबसे उसने अपनी माँ को बिरजु से चुदवाते देखा तबसे वह माँ से नफ़रत करने लगी थी। इसलिये अपनी गाँड़ को उचका उचका कर वो लंड को चूत में सटकने की कोशिश करने लगी, मगर दोनों में से किसी को भी कामयाबी हासिल नहीं हो पा रही थी। घुसने के नाम पर तो अभी लंड का सुपाड़ा ही चूत में मुश्किल से घुस पाया था और इस एक इंच ही घुसे सुपाड़े ने ही चूत में दर्द की लहर दौड़ा कर रख दी थी। रंजना जरूरत से ज्यादा ही परेशान दिखायी दे रही थी। वो सोच रही थी कि आखिर क्या तरकीब लड़ाई जाये जिससे लंड उसकी चूत में घुस सके। बड़ा ही आश्चर्य उसे हो रहा था। उसने अनुमान लगाया था कि बिरजु का लंड तो पापा के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था फिर भी मम्मी उसे बिना किसी कष्ट और असुविधा के पूरा अपनी चूत के अंदर ले ली थी और यहाँ उसे एक इंच घुसने में ही प्राण गले में फ़ंसे महसूस हो रहे थे। फिर अपनी सामान्य बुद्धि से सोच कर वो अपने को राहत देने लगी, उसने सोचा कि ये छेद अभी नया-नया है और मम्मी इस मामले में बहुत पुरानी पड़ चुकी है। चोदू सुदर्शन भी इतना टाईट व कुँवारा छेद पा कर परेशान हो उठा था मगर फिर भी इस रुकावट से उसने हिम्मत नहीं हारी थी। बस घबड़ाहट के कारण उसकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी इसलिये वो भी उलझन में पड़ गया था और कुछ देर तक तो वो चिकनी जाँघों को पकड़े पकड़े न जाने क्या सोचता रहा। रंजना भी साँस रोके गर्मायी हुई उसे देखे जा रही थी। एकाएक मानो सुदर्शन को कुछ याद सा आ गया हो वो एलर्ट सा हो उठा, उसने रंजना के दोनों हाथ कस कर पकड़ अपनी कमर पर रख कर कहा, “बेटे ! मेरी कमर ज़रा मजबूती से पकड़े रहना, मैं एक तरकीब लड़ाता हूँ, घबड़ाना मत।” रंजना ने उसकी आज्ञा का पालन फ़ौरन ही किया और उसने कमर के इर्द गिर्द अपनी बाँहें डाल कर पापा को जकड़ लिया। वो फिर बोला, “रंजना ! चाहे तुम्हे कितना ही दर्द क्यों न हो, मेरी कमर न छोड़ना, आज तुम्हारा इम्तिहान है। देखो एक बार फाटक खुल गया तो समझना हमेशा के लिये खुल गया।” इस बात पर रंजना ने अपना सिर हिला कर पापा को तसल्ली सी दी। फिर सुदर्शन ने भी उसकी पतली नाज़ुक कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ा और थोड़ा सा बेटी की फूलती गाँड़ को उपर उठा कर उसने लंड को चूत पर दबाया तो, “ओह! पापा रोक लो। उफ़ मरी..” रंजना फिर तड़पाई मगर सुदर्शन ने सुपाड़ा चूत में अंदर घुसाये हुए अपने लंड की हरकत रोक कर कहा, “हो गया बस, मेरी इतनी प्यारी बेटी। वैसे तो हर बात में अपनी माँ से प्रतियोगिता करती हो और अभी हार मान रही हो। जानती हो तुम्हारी माँ बोल-बोल के इसे अपनी वाली में पिलवाती है और जब तक उसके भीतर इसे पेलता नहीं सोने नहीं देती। बस। अब इसे रास्ता मिलता जा रहा है। लो थोड़ा और लो..” यह कह सुदर्शन ने उपर को उठ कर मोर्चा संभाला और फिर एकाएक उछल कर उसने जोरों से धक्के लगाना चालू कर दिया। इस तरह से एक ही झटके में पूरा लंड सटकने को रंजना हर्गिज़ तैयार न थी इसलिये मारे दर्द के वो बुरी तरह चीख पड़ी। कमर छोड़ कर तड़पने और छटपटाने के अलावा उसे कुछ सुझ नहीं रहा था, “मरी… आ। नहीं.. मरी। छोड़ दो मुझे नहीं घुसवाना… उउफ़ मार दिया। नहीं करना मुझे मम्मी से कॉंपीटिशन। जब मम्मी आये तब उसी की में घुसाना। मुझे छोड़ो। छोड़ो निकालो इसे .. आइइई हटो न उउफ़ फ़ट रही है.. मेरी आइई मत मारो।” पर पापा ने जरा भी परवाह न की। दर्द जरूरत से ज्यादा लंड के यूँ चूत में अंदर बाहर होने से रंजना को हो रहा था। बेचारी ने तड़प कर अपने होंठ अपने ही दांतों से चबा लिये थे, आँखे फ़ट कर बाहर निकलने को हुई जा रही थीं। जब लंड से बचाव का कोई रास्ता बेचारी रंजना को दिखायी न दिया तो वो सुबक उठी, “पापा ऐसा प्यार मत करो। हाय मेरे पापा छोड़ दो मुझे.. ये क्या आफ़त है.. उफ़्फ़ नहीं इसे फ़ौरन निकाल लो.. फ़ाड़ डाली मेरी । हाय फ़ट गयी मैं तो मरी जा रही हूँ। बड़ा दुख रहा है । तरस खाओ आहह मैं तो फँस गयी..” इस पर भी सुदर्शन धक्के मारने से बाज़ नहीं आया और उसी रफ़्तार से जोर जोर से धक्के वो लगाता रहा। टाईट व मक्खन की तरह मुलायम चूत चोदने के मज़े में वो बहरा बन गया था। पापा के यूँ जानवरों की तरह पेश आने से रंजना की दर्द से जान तो निकलने को हो ही रही थी मगर एक लाभ उसे जरूर दिखायी दिया, यानि लंड अंदर तक उसकी चूत में घुस गया था। वो तो चुदवाने से पहले यही चाहती थी कि कब लंड पूरा घुसे और वो मम्मी की तरह मज़ा लूटे। मगर मज़ा अभी उसे नाम मात्र भी महसूस नहीं हो रहा था। सहसा ही सुदर्शन कुछ देर के लिये शांत हो कर धक्के मारना रोक उसके उपर लेट गया और उसे जोरों से अपनी बाँहों में भींच कर और तड़ातड़ उसके मुँह पर चुम्मी काट काट कर मुँह से भाप सी छोड़ता हुआ बोला, “आह मज़ा आ गया आज, एक दम कुँवारी चूत है तुम्हारी। अपने पापा को तुमने इतना अच्छा तोहफ़ा दिया है। रंजना मैं आज से तुम्हारा हो गया।” तने हुए मम्मों को भी बड़े प्यार से वो सहलाता जा रहा था। वैसे अभी भी रंजना को चूत में बहुत दर्द होता हुआ जान पड़ रहा था मगर पापा के यूँ हल्के पड़ने से दर्द की मात्रा में कुछ मामूली सा फ़र्क तो पड़ ही रहा था और जैसे ही पापा की चुम्मी काटने, चूचियाँ मसलने और उन्हे सहलाने की क्रिया तेज़ होती गयी वैसे ही रंजना आनंद के सागर में उतरती हुई महसूस करने लगी। अब आहिस्ता आहिस्ता वो दर्द को भूल कर चुम्मी और चूची मसलायी की क्रियाओं में जबर्दस्त आनंद लूटना प्रारम्भ कर चुकी थी। सारा दर्द उसे उड़न छू होता हुआ लगने लगा था। सुदर्शन ने जब उसके चेहरे पर मस्ती के चिन्ह देखे तो वो फिर धीरे-धीरे चूत में लंड घुसेड़ता हुआ हल्के-हल्के घस्से मारने पर उतर आया। अब वो रंजना के दर्द पर ध्यान रखते हुए बड़े ही आराम से उसे चोदने में लग गया। उसके कुँवारे मम्मो के तो जैसे वो पीछे ही पड़ गया था। बड़ी बेदर्दी से उन्हे चाट-चाट कर कभी वो उन पर चुम्मी काटता तो कभी चूची का अंगूर जैसा निपल वो होंठों में ले कर चूसने लगता। चूची चूसते-चूसते जब वो हाँफ़ने लगता तो उन्हे दोनों हाथों में भर कर बड़ी बेदर्दी से मसलने लगता था। निश्चय ही चूचियों के चूसने मसलने की हरकतों से रंजना को ज्यादा ही आनंद प्राप्त हो रहा था। उस बेचारी ने तो कभी सोचा भी न था कि इन दो मम्मों में आनंद का इतना बड़ा सागर छिपा होगा। इस प्रथम चुदाई में जबकि उसे ज्यादा ही कष्ट हो रहा था और वो बड़ी मुश्किल से अपने दर्द को झेल रही थी मगर फिर भी इस कष्ट के बावजूद एक ऐसा आनंद और मस्ती उसके अंदर फ़ूट रही थी कि वो अपने प्यारे पापा को पूरा का पूरा अपने अंदर समेट लेने की कोशिश करने लगी। क्योंकि पहली चुदाई में कष्ट होता ही है इसलिये इतनी मस्त हो कर भी रंजना अपनी गाँड़ और कमर को तो चलाने में अस्मर्थ थी मगर फिर भी इस चुदाई को ज्यादा से ज्यादा सुखदायक और आनन्ददायक बनाने के लिये अपनी ओर से वो पूरी तरह प्रयत्नशील थी। रंजना ने पापा की कमर को ठीक इस तरह कस कर पकड़ा हुआ था जैसे उस दिन ज्वाला देवी ने चुदते समय बिरजु की कमर को पकड़ रखा था। अपनी तरफ़ से चूत पर कड़े धक्के मरवाने में भी वो पापा को पूरी सहायता किये जा रही थी। इसी कारण पल प्रतिपल धक्के और ज्यादा शक्तिशाली हो उठे थे और सुदर्शन जोर जोर से हाँफ़ते हुए पतली कमर को पकड़ कर जानलेवा धक्के मारता हुआ चूत की दुर्गति करने पर तुल उठा था। उसके हर धक्के पर रंजना कराह कर ज़ोर से सिसक पड़ती थी और दर्द से बचने के लिये वो अपनी गाँड़ को कुछ उपर खिसकाये जा रही थी। यहाँ तक कि उसका सिर पलंग के सिरहाने से टकराने लगा, मगर इस पर भी वो दर्द से अपना बचाव न कर सकी और अपनी चूत में धक्कों का धमाका गूँजता हुआ महसूस करती रही। हर धक्के के साथ एक नयी मस्ती में रंजना बेहाल हो जाती थी। कुछ समय बाद ही उसकी हालत ऐसी हो गयी कि अपने दर्द को भुला डाला और प्रत्येक दमदार धक्के के साथ ही उसके मुँह से बड़ी अजीब से दबी हुई अस्पष्ट किलकारियाँ खुद-ब-खुद निकलने लगीं। “ओह पापा अब मजा आ रहा है। मैने आपको कुँवारी चूत का तोहफ़ा दिया तो आप भी तो मुझे ऐसा मजा देकर तोहफ़ा दे रहे हैं। अब देखना मम्मी से इसमें भी कैसा कॉंपीटिशन करती हूँ। ओह पापा बताइये मम्मी की लेने में ज्यादा मजा है या मेरी लेने में?” सुदर्शन रंजना की मस्ती को और ज्यादा बढ़ाने की कोशिश में लग गया। वैसे इस समय की स्तिथी से वो काफ़ी परिचित होता जा रहा था। रंजना की मस्ती की ओट लेने के इरादे से वो चोदते चोदते उससे पूछने लगा, “कहो मेरी जान.. अब क्या हाल है? कैसे लग रहे हैं धक्के.. पहली बार तो दर्द होता ही है। पर मैं तुम्हारे दर्द से पिघल कर तुम्हें इस मजे से वँचित तो नहीं रख सकता था न मेरी जान, मेरी रानी, मेरी प्यारी।” उसके होंठ और गालों को बुरी तरह चूसते हुए, उसे जोरों से भींच कर उपर लेटे लेटे ज़ोरदार धक्के मारता हुआ वो बोल रहा था, बेचारी रंजना भी उसे मस्ती में भींच कर बोझिल स्वर में बोली, “बड़ा मज़ा आ रहा है मेरे प्यारे सा…. पापा, मगर दर्द भी बहुत ज्यादा हो रहा है..” फ़ौरन ही सुदर्शन ने लंड रोक कर कहा, “तो फिर धक्के धीरे धीरे लगाऊँ। तुम्हे तकलीफ़ में मैं नहीं देख सकता। तुम तो बोलते-बोलते रुक जाती हो पर देखो मैं बोलता हूँ मेरी सजनी, मेरी लुगाई।” ये बात वैसे सुदर्शन ने ऊपरी मन से ही कही थी। रंजना भी जानती थी कि वो मज़ाक के मूड में है और तेज़ धक्के मारने से बाज़ नहीं आयेगा, परन्तु फिर भी कहीं वो चूत से लंड न निकाल ले इस डर से वो चीख पड़ी, “नहीं.. नहीं।! ऐसा मत करना ! चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाये, मगर आप धक्कों की रफ़्तार कम नहीं होने देना.. इतना दर्द सह कर तो इसे अपने भीतर लिया है। आहह मारो धक्का आप मेरे दर्द की परवाह मत करो। आप तो अपने मन की करते जाओ। जितनी ज़ोर से भी धक्का लगाना चाहो लगा लो अब तो जब अपनी लुगाई बना ही लिया है तो मत रुको मेरे प्यारे सैंया.. मैं.. इस समय सब कुछ बर्दाश्त कर लूँगी.. अहह आई रिइइ.. पहले तो मेरा इम्तिहान था और अब आपका इम्तिहान है। यह नई लुगाई पुरानी लुगाई को भुला देगी।”

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    चन्द लम्हों के अंदर ही उसकी चूत को चोद कर रख दिया था बिरजु ने। जानदार लंड से चूत का बाजा बजवाने में स्वर्गीय आनंद ज्वाला देवी लूट-लूट कर बेहाल हुई जा रही थी। चूत की आग ने ज्वाला देवी की शर्मो हया, पतिव्रत धर्म सभी बातों से दूर करके चुदाई के मैदान में ला कर खड़ा कर डाला था। लंड का पानी चूत में बरसवाने के लिये वो जी जान की बाज़ी लगाने पर उतर आयी थी। इस समय भूल गयी थी ज्वाला देवी की वो एक जवान लड़की की माँ है, भूल गयी थी कि वो एक इज़्ज़तदार पति की पत्नी भी है। उसे याद था तो सिर्फ़ एक चीज़ का नाम और वो चीज़ थी बिरजु का मोटा ताकतवर और चूत की नस-नस तोड़ देने वाला शानदार लंड। इसी लंड ने उसके रोम-रोम को झंकृत करके रख दिया था। लंड था की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। एकाएक बिरजु ने जो अत्यन्त ज़ोरों से चूत में लंड का आवागमन प्रारम्भ किया तो मारे मस्ती के ज्वाला देवी उठ-उठ कर सिसक उठी। तभी उसकी एक चूची की घुन्डी मुँह में भर कर सुपाड़े तक लंड बाहर खींच जो एक झटके से बिरजु ने धक्का मारा की सीधा हमला बच्चेदानी पर जा कर हुआ। “ऐई ओहह फाड़ डाली ओह उफ़ आह री मरी सी आइई फ़ट्टी वाक्क्क्कई मोटा है। उफ़ फसा आह ऊह मज़ा ज़ोर से और ज़ोर से शाबाश रद्दी वाले।” इस बार बिरजु को ज्वाला देवी पर बहुत गुस्सा आया। अपने आपको रद्दी वाला कहलवाना उसे कुछ ज्यादा ही बुरा लगा था। ज़ोर से उसकी गाँड पर अपने हाथों के पंजे गड़ा कर धक्के मारता हुआ वो भी बड़बड़ाने लगा, “तेरी बहन को चोदूँ, चुदक्कड़ लुगायी आहह .. साली चुदवा रही है मुझसे, खसम की कमी पूरी कर रहा हूँ मैं…आहह और.. आहह साली कह रही है रद्दी वाला, तेरी चूत को रद्दी न बना दूँ, तो कबाड़ी की औलाद नहीं, आह हाय शानदार चूत खा जाऊँगा फाड़ दूँगा ले… ले और चुद आज” बिरजु के इन खूंख्वार धक्कों ने तो हद ही कर डाली थी। चूत की नस-नस हिला कर रख दी थी लंड की चोटों ने। ज्वाला देवी पसीने में नहा उठी और बहुत ज़ोरों से अपनी गाँड उछाल-उछाल कर तथा बिरजु की कस कर कोली भर कर वो उसे और ज्यादा ज़ोश में लाने के लिये सिसिया उठी, “आहह री ऐसे ही हाँ… हाँ ऐसे ही मेरी चूत फाड़ डालो राज्ज्ज्जा। माफ़ कर दो अब कभी तुम्हे रद्दी वाला नहीं कहुँगी। चोदो ईईईई उउम चोदो..” इस बात को सुन कर बिरजु खुशी से फूल उठा था उसकी ताकत चार गुनी बढ़ा कर लंड में इकट्ठी हो गयी थी। द्रुत गति से चूत का कबाड़ा बनाने पर वो तुल उठा था। उसके हर धक्के पर ज्वाला देवी ज़ोर-ज़ोर से सिसकती हुई गाँड को हिला-हिला कर लंड के मज़े हासिल कर रही थी। मुकाबला ज़ोरो पर ज़ारी था। बुरी तरह बिरजु से चिपटी हुई ज्वाला देवी बराबर बड़बड़ाये जा रही थी, “आहहह ये मारा… मार डाला। वाह और जमके उफ़ हद कर दी ओफ़्फ़ मार डालो मुझे..” और जबरदस्त खुंखार धक्के माराता हुआ बिरजु भी उसके गालों को पीते-पीते सिस्कियाँ भर रहा था, “वाहह मेरी औरत आहह हाय मक्खन चूत है तेरी तो.. ले.. चोद दूँगा.. ले… आहह।” और इसी ताबड़तोड़ चुदाई के बीच दोनों एक दूसरे को जकड़ कर झड़ने लगे थे, ज्वाला देवी लंड का पानी चूत में गिरवा कर बेहद तृप्ती महसूस कर रही थी। बिरजु भी अन्तिम बूँद लंड की निकाल कर उसके उपर पड़ा हुआ कुत्ते की तरह हाँफ़ रहा था। लंड व चूत पोंछ कर दोनों ने जब एक दूसरे की तरफ़ देखा तो फिर उनकी चुदाई की इच्छा भड़क उठी थी, मगर ज्वाला देवी चूत पर काबू करते हुए पेटिकोट पहनते हुए बोली, “जी तो करता है की तूमसे दिन रात चुदवाती रहूँ, मगर मोहल्ले का मामला है, हम दोनों की इसी में भलाई है की अब कपड़े पहन अपना अपना काम सम्भालें।” “म..मगर। मेम साहब.. मेरा तो फिर खड़ा होता जा रहा है। एक बार और दे दो न हाय।” एक टीस सी उठी थी बिरजु के दिल में, ज्वाला देवी का कपड़े पहनना उसके लंड के अरमानों पर कहार ढा रहा था। एकाएक ज्वाला देवी तैश में आते हुए बोल पड़ी, “अपनी औकात में आ तू अब, चुपचाप कपड़े पहन और खिसक ले यहाँ से वर्ना वो मज़ा चखाऊँगी की मोहल्ले तक को भूल जायेगा, चल उठ जल्दी।” ज्वाला देवी के इस बदलते हुए रूप को देख बिरजु सहम उठा और फ़टाफ़ट फुर्ती से उठ कर वो कपड़े पहनने लगा। एक डर सा उसकी आँखों में साफ़ दिखायी दे रहा था। कपड़े पहन कर वो आहिस्ते से बोला, “कभी-कभी तो दे दिया करोगी मेमसाहब, मैं अब ऐसे ही तड़पता रहुँगा?” बिरजु पर कुछ तरस सा आ गया था इस बार ज्वाला देवी को, उसके लंड के मचलते हुए अरमानों और अपनी चूत की ज्वाला को मद्देनज़र रखते हुए वो मुसकुरा कर बोली, “घबड़ा मत, हफ़्ते दो हफ़्ते में मौका देख कर मैं तुझे बुला लिया करूँगी, जी भर कर चोद लिया करना, अब तो खुश?” वाकई खुशी के मारे बिरजु का दिल बल्लियों उछल पड़ा और चुपचाप बाहर निकल कर अपनी सायकल की तरफ़ बढ़ गया। थोदी देर बाद वो वहाँ से चल पड़ा था। वो यहाँ से जा तो रहा था मगर ज्वाला देवी की मक्खन चूत का ख्याल उसके ज़ेहन से जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। वाह री चुदाई, कोई न समझा तेरी खुदाई। सुदर्शन जी सरकारी काम से १ हफ़्ते के लिये मेरठ जा रहे थे, ये बात जब ज्वाला देवी को पता चली तो उसकी खुशी का ठिकाना ही न रहा। सबसे ज्यादा खुशी तो उसे इसकी थी कि पति की गैरहाज़िरी में बिरजु का लंबा व जानदार लंड उसे मिलने जा रहा था। जैसे ही सुदर्शन जी जाने के लिये निकले, ज्वाला ने बिरजु को बुलवा भेजा और नहा धो कर उसी दिन की तरह तैयार हुई और बिरजु के आने का इंतज़ार करने लगी। बिरजु के आते ही वो उससे लिपट गयी। उसके कान में धीरे से बोली, “राजा आज रात को मेरे यहीं रुको और मेरी चूत का बाजा जी भर कर बजाना।” ज्वाला देवी बिरजु को ले कर अपने बेडरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद करके उसके लौड़े को सहलाने लगी। लेकिन उस रात गज़ब हो गया, वो हो गया जो नहीं होना चाहिये था, यानि उन दोनों के मध्य हुई सारी चुदाई-लीला को रंजना ने जी भर कर देखा और उसी पर निश्चय किया कि वो भी अब जल्द ही किसी जवान लंड से अपनी चूत का उद्घाटन जरूर करा कर ही रहेगी। हुआ यूँ था की उस दिन भी रंजना हमेशा की तरह रात को अपने कमरे में पढ़ रही थी। रात १० बजे तक तो वो पढ़ती रही और फिर थकान और उब से तंग आ कर कुछ देर हवा खाने और दिमाग हल्का करने के इरादे से अपने कमरे से बाहर आ गयी और बरामदे में चहल कदमी करती हुई टहलने लगी। मगर सर्दी ज्यादा थी इसलिये वो बरामदे में ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकी और कुछ देर के बाद अपने कमरे की और लौटने लगी कि मम्मी के कमरे से सोडे की बोतलें खुलने की आवाज़ उसके कानो में पड़ी। बोतलें खुलने की आवाज़ सुन कर वो ठिठकी और सोचने लगी, “इतनी सर्दी में मम्मी सोडे की बोतलों का आखिर कर क्या रही है?” अजीब सी उत्सुकता उसके मन में पैदा हो उठी और उसने बोतलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से ज्वाला देवी के कमरे की तरफ़ कदम बढ़ा दिये। इस समय ज्वाला देवी के कमरे का दरवाज़ा बंद था इसलिये रंजना कुछ सोचती हुई इधर उधर देखने लगी और तभी एक तरकीब उसके दिमाग में आयी। तरकीब थी पिछला दरवाजा, जी हाँ पिछला दरवाजा। रंजना जानती थी की मम्मी के कमरे में झाँकने के लिये पिछले दरवाजे का की-होल है। वहाँ से वो सुदर्शन जी और ज्वाला देवी के बीच चुदाई- लीला भी एक दो बार देख चुकी थी। रंजना पिछले दरवाजे पर आयी और ज्योंही उसने की-होल से अंदर झांका कि वो बुरी तरह चौंक पड़ी। जो कुछ उसने देखा उस पर कतई विश्वास उसे नहीं हो रहा था। उसने सिर को झटका दे कर फिर अंदर के दृश्य देखने शुरु कर दिये। इस बार तो उसके शरीर के कुँवारे रोंगटे झनझना कर खड़े हो गये, जो कुछ उसने अंदर देखा, उसे देख कर उसकी हालत इतनी खराब हो गयी कि काफ़ी देर तक उसके सोचने समझने की शक्ति गायब सी हो गयी। बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू करके वो सही स्थिती में आ सकी। रंजना को लाल बल्ब की हल्की रौशनी में कमरे का सारा नज़ारा साफ़-साफ़ दिखायी दे रहा था। उसने देखा की अंदर उसकी मम्मी ज्वाला देवी और वो रद्दी वाला बिरजु दोनों शराब पी रहे थे। ज़िन्दगी में पहली बार अपनी मम्मी को रंजना ने शराब की चुसकियाँ लेते हुए और गैर मर्द से रंग-रंगेलियाँ मनाते हुए देखा था। बिरजु इस समय ज्वाला देवी को अपनी गोद में बिठाये हुए था, दोनों एक दूसरे से लिपट चिपट रहे थे। दुनिया को नज़र अंदाज़ करके चुदाई का ज़बर्दस्त मज़ा लेने के मूड में दोनों आते जा रहे थे। इस दृश्य को देख कर रंजना का हाल अजीब सा हो चला था, खून का दौरा काफ़ी तेज़ होने के साथ साथ उसका सिर भी ज़ोरों से घुम रहा था और चूत के आस पास सुरसुराहट सी होती हुई उसे लग रही थी। दिल की धड़कनें ज़ोर-ज़ोर से जारी थीं। गला व होंठ खुश्क पड़ते जा रहे थे और एक अजीब सा नशा उस पर भी छाता जा रहा था। ज्वाला देवी शराब पीती हुई बिरजु से बोले जा रही थी, उसकी बाँहें पीछे की ओर घुम कर बिरजु के गले का हार बनी हुई थी। ज्वाला देवी बिरजु को बार-बार “सनम” और “सैंया” के नाम से ही सम्बोधित कर रही थी। बिरजु भी उसे “रानी” ओर “मेरी जान” कह कह कर उसे दिलो जान से अपना बनाने के चक्कर में लगा हुआ था। बिरजु का एक हाथ ज्वाला देवी की गदराई हुई कमर पर कसा हुआ था, और दूसरे हाथ में उसने शराब का गिलास पकड़ रखा था। ज्वाला देवी की कमर में पड़ा उसका हाथ कभी उसकी चूची पकड़ता और कभी नाभी के नीचे अंगुलियाँ गड़ाता तो कभी उसकी जाँघें। फिर शराब का गिलास उसने ज्वाला देवी के हाथ में थमा दिया। तब ज्वाला देवी उसे अपने हाथों से शराब पिलाने लगी। मौके का फ़ायदा उठाते हुए बिरजु दोनों हाथों से उसकी भारी मोटी मोटी चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से भींचता और नोचता हुआ मज़ा लेने में जुट गया। एकाएक ज्वाला देवी कुछ फ़ुसफ़ुसाई और दोनों एक दूसरे की निगाहों में झांक कर मुसकुरा दिये। शराब का खाली गिलास एक तरफ़ रख कर बिरजु बोला, “जान मेरी ! अब खड़ी हो जाओ।” बिरजु की आज्ञा का तुरंत पालन करती हुई ज्वाला देवी मुस्कराते हुए ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी। बिरजु बड़े गौर से और चूत-फ़ाड़ निगाहों से उसे घूरे जा रहा था और ज्वाला देवी उसकी आँखों में आँखे डाल कर चूत की ज्वाला में मचलती हुई मुस्कराते हुए अपने कपड़े उतारने में लग गयी। उसके हाथ तो अपना बदन नंगा करने में जुटे हुए थे मगर निगाहें बराबर बिरजु के चेहरे और लंड के उठान पर ही जमी हुई थी। अपने शरीर के लगभग सारे कपड़े उतारने के बाद एक ज़ोरदार अंगड़ायी ले कर ज्वाला देवी अपना निचला होंठ दांतों में दबाते हुए बोली, “हाय ! मैं मर जाऊँ सैंया! आज मुझे उठने लायक मत छोड़ना। सच बड़ा मज़ा देता है तू, मेरी चूत को घोट कर रख देता है तू।” पैन्टी, ब्रा और हाई हील सैण्डलों में ज्वाला देवी इस उम्र में भी लंड पर कयामत ढा रही थी। उसका नंगा बदन जो गोरा होने के साथ-साथ गुद्देदार भींचने लायक भी था। लाल बल्ब की हल्की रौशनी में बड़ा ही लंड मार साबित हो रहा था। वास्तव में रंजना को ज्वाला देवी इस समय इतनी खराब सी लगने लगी थी कि वो सोच रही थी कि ‘काश! मम्मी की जगह वो नंगी हो कर खड़ी होती तो चूत के अरमान आज अवश्य पूरे हो जाते।’ मगर सोचने से क्या होता है? सब अपने-अपने मुकद्दर का खाते हैं। बिरजु का लंड जब ज्वाला देवी की चूत के मुकद्दर में लिखा है तो फिर भला रंजना की चूत की कुँवारी सील आज कैसे टूट सकती थी। जोश में आ कर बिरजु अपनी जगह छोड़ कर खड़ा हुआ और मुसकुराता हुआ ज्वाला देवी के ठीक सामने आ पहुँचा। कुछ पल तक उसने सिर से पांव तक उसे देखने के बाद अपने कपड़े उतारने चालू कर दिये। एक-एक करके सभी कपड़े उसने उतार कर रख दिये और वो एक दम नंग धड़ंग हो कर अपना खड़ा लंड हाथ में पकड़ कर दबाते हुए सिसका, “हाय रानी आज! इसे जल्दी से अपनी चूत में ले लो।” इस समय जिस दृष्टिकोण से रंजना अंदर की चुदाई के दृश्य को देख रही थी उसमें ज्वाला देवी का सामने का यानि चूत और चूचियाँ तथा बिरजु की गाँड और कमर यानि पिछवाड़ा उसे दिखायी पड़ रहा था। बिरजु की मर्दाना तन्दुरुस्त मजबूत गाँड और चौड़ा बदन देख कर रंजना अपने ही आप में शरमा उठी थी। अजीब सी गुदगुदी उसे अपनी चूचियों में उठती हुई जान पड़ रही थी। बिरजु अभी कपड़े उतार कर सीधा खड़ा हुआ ही था की ज्वाला देवी ने अपनी गुद्दाज व मुलायम बाँहें उसकी गर्दन में डाल दीं और ज़ोर से उसे भींच कर बुरी तरह उससे चिपक गयी। चुदने को उतावली हो कर बिरजु की गर्दन पर चुम्मी करते हुए वो धीरे से फ़ुसफ़ुसा कर बोली, “मेरे सनम ! बड़ी देर कर दी है तूने ! अब जल्दी कर न! देखो, मारे जोश के मेरी तो ब्रा ही फ़टी जा रही है, मुझे बड़ी जलन हो रही है, उफ़्फ़! मैं तो अब बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ, आह जल्दी से मेरी चूत का बाजा बजा दे सैंया… आह।” बिरजु उत्तर में होंठो पर जीभ फ़िराता हुआ हँसा और बस फिर अगले पल अपनी दोनों मर्दानी ताकतवर बाँहें फ़ैला कर उसने ज्वाला देवी को मजबूती से जकड़ लिया। जबरदस्त तरीके से भींचता हुआ लगातार कई चुम्मे उसके मचलते फ़ड़फ़ड़ाते होंठों और दहकते उभरे गोरे-गोरे गालों पर काटने शुरु कर डाले। ज्वाला देवी मदमस्त हो कर बिरजु के मर्दाने बदन से बुरी तरह मतवाली हो कर लिपट रही थी। दोनों भारी उत्तेजना और चुदाई के उफ़ान में भरे हुए ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ते हुए पलंग की तरफ़ बढ़ते जा रहे थे। पलंग के करीब पहुंचते ही बिरजु ने एक झटके के साथ ज्वाला देवी का नंगा बदन पलंग पर पटक दिया। अपने आपको सम्भालने या बिरजु का विरोध करने की बजाये वो गेंद की तरह हँसती हुई पलंग पर धड़ाम से जा गिरी। पलंग पर पटकने के तुरन्त बाद बिरजु ज्वाला देवी की तरफ़ लपका और उसके उपर झुक गया। अगले ही पल उसकी ब्रा खींच कर उसने चूचियों से अलग कर दी और उसके बाद चूत से पैन्टी भी झटके के साथ जोश में आ कर उसने इस तरह खींची कि पैन्टी ज्वाला देवी की कमर व गाँड का साथ छोड़ कर एकदम उसकी टाँगो में आ कर गिरी। जैसे ही बिरजु का लंड हाथ में पकड़ कर ज्वाला देवी ने ज़ोर से दबाया तो वो झुँझला उठा, इसी झुँझलाहट और ताव में आ कर उसने ज्वाला देवी की उठी हुई चूचियों को पकड़ कर बेरहमी से खींचते हुए वो उन पर खतरनाक जानवर की तरह टूट पड़ा। ज्वाला देवी के गुलाबी होंठो को जबर्दस्त तरीके से उसने पीना शुरु कर दिया। उसके गालों को ज़ोर- ज़ोर से भींच कर होंठ चूसते हुए वो अत्यन्त जोशीलापन महसूस कर रहा था। चन्द पलों में उसने होंठों को चूस-चूस कर उनकी माँ चोद कर रख दी। जी भर कर होंठ पीने के बाद उसने एकदम ही ज्वाला देवी को पलंग पर घुमा कर चित्त पटक दिया और तभी उछल कर वो उसके उपर सवार हो गया। अपने शरीर के नीचे उसे दबा कर उसका पूरा शरीर ही उसने ऐसे ढक लिया मानो ज्वाला देवी उसके नीचे पिस कर रहेगी। बिरजु इस समय ज्वाला देवी के बदन से लिपट कर और उसे ज़ोरों से भींच कर अपना बदन उसके मुलायम जनाने बदन पर बड़ी बेरहमी से रगड़े जा रहा था। बदन से बदन पर घस्से मारता हुआ वो दोनों हाथों से चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाता जा रहा था और बारी-बारी से उसने चूचियों को मुँह में ले कर तबियत से चूसना भी स्टार्ट कर दिया था। बिरजु और ज्वाला देवी दोनों ही इस समय चुदाई की इच्छा में पागल हो चुके थे। बिरजु के दोनों हाथों को ज्वाला देवी ने मजबूती से पकड़ कर उसकी चुम्मों का जवाब चुम्मों से देना शुरु कर दिया। ज्वाला देवी मस्ती में आ कर बिरजु के कभी गाल पर काट लेती तो कभी उसके कंधे पर काट कर अपनी चूत की धधकती ज्वाला का प्रदर्शन कर रही थी। अपनी पूरी ताकत से वो ज़ोर से बिरजु को भींचे जा रही थी। एकाएक ज्वाला ने बिरजु की मदद करने के लिये अपनी टाँगे उपर उठा कर अपने हाथों से टाँगों में फ़ंसी हुई पैन्टी निकाल कर बाहर कर दी और हाई हील सैण्डलों के अलावा किसी कपड़े का नामोनिशान तक अपने बदन से उसने हटा कर रख दिया। उसकी तनी हुई चूचियों की उभरी हुई घुन्डी और भारी गाँड सभी रंजना को साफ़ दिखायी पड़ रहा था। बस उसे तमन्ना थी तो सिर्फ़ इतनी कि कब बिरजु का लंड अपनी आँखों से वो देख सके। सहसा ही ज्वाला देवी ने दोनों टाँगे उपर उठा कर बिरजु की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली और जोंक की तरह उससे लिपट गयी। दोनों ने ही अपना-अपना बदन बड़ी ही बेरहमी और ताकत से एक दूसरे से रगड़ना शुरु कर दिया। चुम्मी काटने की क्रिया बड़ी तेज़ और जोशीलेपन से जारी थी। ज़ोर ज़ोर से हाँफ़ते सिसकारियाँ छोड़ते हुए दोनों एक दूसरे के बदन की माँ चोदने में जी जान एक किये दे रहे थे। तभी बड़ी फ़ुर्ती से बिरजु ज़ोर-ज़ोर से कुत्ते की तरह हाँफ़ता हुआ सीधा बैठ गया और तेज़ी से ज्वाला देवी की टाँगों की तरफ़ चला आया। इस पोजिशन में रंजना अपनी मम्मी को अच्छी तरह नंगी देख रही थी। उसने महसूस किया की मम्मी की चूत उसकी चूत से काफ़ी बड़ी है। चूत की दरार उसे काफ़ी चौड़ी दिखायी दे रही थी। उसे ताज्जुब हुआ की मम्मी की चूत इतनी गोरी होने के साथ-साथ एकदम बाल रहित सफ़ाचट थी। कुछ दिन पहले ही बड़ी-बड़ी झांटों का झुरमुट स्वयं अपनी आँखों से उसने ज्वाला देवी की चूत पर उस समय देखा था, जब सुबह सुबह उसे जगाने के लिये गयी थी। इस समय ज्वाला देवी बड़ी बेचैन, चुदने को उतावली हो रही थी। लंड सटकने वाली नज़रों से वो बिरजु को एक टक देख रही थी। चूत की चुदाई करने के लिये बिरजु टाँगों के बल बैठ कर ज्वाला देवी की जाँघों पर, चूत की फाँकों पर और उसकी दरार पर हाथ फ़िराने में लगा हुआ था और फिर एकदम से उसने घुटने के पास उसकी टाँग को पकड़ कर चौड़ा कर दिया। तत्पश्चात उसने पलंग के पास मेज़ पर रखी हुई खुश्बुदार तेल की शीशी उठायी और उसमें से काफ़ी तेल हाथ में ले कर ज्वाला देवी की चूत पर अच्छी तरह से अंदर और बाहर इस तरह मलना शुरु किया की उसकी सुगन्ध रंजना के नथुनों में भी आ कर घुसने लगी। अपनी चूत पर किसी मर्द से तेल मालिश करवाने के लिये रंजना भी मचल उठी। उसने खुद ही एक हाथ से अपनी चूत को ज़ोर से दबा कर एक ठंडी साँस खींची और अंदर की चुदाई देखने में उसने सारा ध्यान केन्द्रित कर दिया। ज्वाला देवी की चूत तेल से तर करने के पश्चात बिरजु का ध्यान अपने खड़े हुए लंड पर गया। और जैसे ही उसने अपने लम्बे और मोटे लंड को पकड़ कर हिलाया कि बाहर खड़ी रंजना की नज़र पहली बार लंड पर पड़ी। इतनी देर बाद इस शानदार डंडे के दर्शन उसे नसीब हुए थे। लंड को देखते ही रंजना का कलेजा मुँह को आ गया। उसे अपनी साँस गले में फ़ंसती हुई जान पड़ी। वाकई बिरजु का लंड बेहद मोटा, सख्त और जरूरत से ज्यादा ही लंबा था। देखने में लकड़ी के खूंटे की तरह वो उस समय दिखायी पड़ रहा था। शायद इतने शानदर लंड की वजह ही थी की ज्वाला देवी जैसी इज़्ज़तदार औरत भी उसके इशारों पर नाच रही थी। रंजना को अपनी सहेली की कही हुई शायरी याद आ गयी, “औरत को नहीं चाहिये ताज़ो तख्त, उसको चाहिये लंड लंबा, मोटा और सख्त।” हाँ तो बिरजु ने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से तेल की शीशी उल्टी करके लंड के उपर तेल की धार उसने डाल दी। फ़ौरन शीशी मेज़ पर रख कर उसने उस हाथ से लंड पर मालिश करनी शुरु कर दी। मालिश के कारण लंड का तनाव, कड़ापन और भी ज्यादा बढ़ गया। चूत में घुसने के लिये वो ज़हरीले सांप की तरह फ़ुफ़कारने लगा। ज्वाला देवी लंड की तरफ़ कुछ इस अंदाज़ में देख रही थी मानो लंड को निगल जाना चाहती हो या फिर आँखों के रास्ते पी जाना चाहती हो। सारे काम निबटा कर बिरजु खिसक कर ज्वाला देवी की टाँगों के बीच में आ गया। उसने टाँगों को जरूरत के मुताबिक मोड़ा और फिर घुटनों के बल उसके उपर झुकते हुए अपने खूंटे जैसे सख्त लंड को ठीक चूत के फ़ड़फ़ड़ाते छेद पर टिका दिया। इसके बाद बिरजु पंजो के बल थोड़ा उपर उठा। एक हाथ से तो वो तनतनाते लंड को पकड़े रहा और दूसरे हाथ से ज्वाला देवी की कमर को उसने धर दबोचा। इतनी तैयारी करते ही ज्वाला देवी की तरफ़ आँख मारते हुए उसने चुदाई का इशारा किया। परिणाम स्वरूप, ज्वाला देवी ने अपने दोनों हाथों की अंगुलियों से चूत का मुँह चौड़ा किया। अब चूत के अंदर का लाल-लाल हिस्सा साफ़ दिखायी दे रहा था। बिरजु ने चूत के लाल हिस्से पर अपने लंड का सुपाड़ा टिका कर पहले खूब ज़ोर-ज़ोर से उसे चूत पर रगड़ा। इस तरह चूत पर गरम सुपाड़े की रगड़ायी से ज्वाला देवी लंड सटकने को बैचैन हो उठी। “देख! देर न कर, डाल .. उपर-उपर मत रहने दे.. आहह। पूरा अंदर कर दे उउफ़ सीईई सी।” ज्वाला देवी के मचलते अरमानों को महसूस कर बिरजु के सब्र का बांध भी टूट गया और उसने जान लगा कर इतने जोश से चूत पर लंड को दबाया कि आराम के साथ पूरा लंड सरकता चूत में उतर गया। ऐसा लग रहा था जैसे लंड के चूत में घुसते ही ज्वाला देवी की भड़कती हुई चूत की आग में किसी ने घी टपका दिया हो, यानि वो और भी ज्यादा बेचैन सी हो उठी। और जबर्दस्त धक्कों द्वारा चुदने की इच्छा में वो मचली जा रही थी। बिरजु की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ वो उसे अपनी ओर खींच-खींच कर पागलों की तरह पेश आ रही थी। बड़ी बेचैनी से वो अपनी गर्दन इधर-उधर पटकते हुए अपनी दोनों टाँगों को भी उछाल-उछाल कर पलंग पर मारे जा रही थी। लंड के स्पर्श ने उसके अंदर एक जबर्दस्त तूफ़ान सा भर कर रख दिया था। अजीब-अजीब तरह की अस्पष्ट आवाज़ें उसके मुँह से निकल रही थी। “ओहह मेरे राजा मार, जान लगा दे। इसे फ़ाड़ कर रख दे .. रद्दी वाले आज रुक मत अरे मार न मुझे चीर कर रख दे। दो कर दे मेरी चूत फ़ाड़ कर आह.. सीईई।” बिरजु के चूत में लंड रोकने से ज्वाला देवी को इतना गुस्सा आ रहा था कि वो इस स्तिथी को सहन न करके ज़ोरों से बिरजु के मुँह पर चांटा मारने को तैयार हो उठी थी। मगर तभी बिरजु ने लंड को अंदर किया ओर थोड़ा दबा कर चूत से सटा दिया और दोनों हाथों से कमर को पकड़ कर वो कुछ उपर उठा और अपनी कमर तथा गाँड को उपर उठा कर ऐसा उछला कि ज़ोरों का धक्का ज्वाला देवी की चूत पर जा कर पड़ा। इस धक्के में मोटा, लंबा और सख्त लंड चूत में तेज़ी से घुसता चला गया और इस बार सुपाड़े की चोट चूत की तलहटी पर जा कर पड़ी। इतनी ज़ोर से मम्मी की चूत पर हमला होता देख कर रंजना बुरी तरह कांप उठी मगर अगले ही पल उसके आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि ज्वाला देवी ने कोई दिक्कत इस भारी धक्के के चूत पर पड़ने से नहीं ज़ाहिर की थी, बल्कि उसने बिरजु को बड़े ही ज़ोरों से मस्ती में आ कर बाँहों में भींच लिया। इस अजीब वारदात को देख कर रंजना को अपनी चूत के अंदर एक न दिखायी देने वाली आग जलती हुई महसूस हुई। उसके अंदर सोयी हुई चुदाई इच्छा भी प्रज्वलित हो उठी थी। उसे लगा कि चूत की आग पल-पल शोलो में बदलती जा रही है। चूत की आग में झुलस कर वो घबड़ा सी गयी और उसे चक्कर आने शुरु हो गये। इतना सब कुछ होते हुए भी चुदाई का दृश्य देखने में बड़ा अजीब सा मज़ा उसे प्राप्त हो रहा था, वहाँ से हटने के बारे में वो सोच भी नहीं सकती थी। उसकी निगाहे अंदर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। जबकि शरीर धीरे-धीरे जवाब देता जा रहा था। अब उसने देखा कि बिरजु का लंड चूत के अंदर घुसते ही मम्मी बड़े अजीब से मज़े से मतवाली हो कर बुरी तरह उससे लिपट गयी थी और अपने बदन तथा चूचियों और गालों को उससे रगड़ते हुए धीरे-धीरे मज़े की सिसकारियाँ छोड़ रही थी, “पेल.. वाह..रे.. मार.. ऐसे ही श.. म.. हद.. हो गयी वाहह और मज़ा दे और दे सी आह उफ़ ।” लंड को चूत में अच्छी तरह घुसा कर बिरजु ने मोर्चा सम्भाला। उसने एक हाथ से तो ज्वाला देवी की मुलायम कमर को मजबूती से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी भारी उभरी हुई गाँड के नीचे लगा कर बड़े ज़ोर से हाथ का पन्जा, गाँड के गोश्त मे गड़ाया। ज़ोर-ज़ोर से गाँड का गुद्दा वो मसले जा रहा था। ज्वाला देवी ने भी जवाब में बिरजु की मर्दानी गाँड को पकड़ा और ज़ोर से उसे खींचते हुए चूत पर दबाव देती हुई वो बोली, “अब इसकी धज्जियाँ उड़ा दे सैंया। आह ऐसे काम चलने वाला नहीं है.. पेल आह।” उसके इतना कहते ही बिरजु ने सम्भाल कर ज़ोरदार धक्का मारा और कहा, “ले। अब नहीं छोड़ूँगा। फ़ाड़ डालूँगा तेरी…” इस धक्के के बाद जो धक्के चालू हुए तो गजब ही हो गया। चूत पर लंड आफ़त बन कर टूट पड़ा था। ज्वाला देवी उसकी गाँड को पकड़ कर धक्के लगवाने और चूत का सत्यानाश करवाने में उसकी सहायता किये जा रही थी। बिरजु बड़े ही ज़ोरदार और तरकीब वाले धक्के मार-मार कर उसे चोदे जा रहा था। बीच-बीच में दोनों हाथों से उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए वो बुरी तरह उसके होंठो और गालों को काटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। चूत में लंड से ज़ोरदार घस्से छोड़ता हुआ वो चुदाई में चार चांद लगाने में जुटा हुआ था। चूत पर घस्से मारते हुए वो बराबर चूचियों को मुँह में दबाते हुए घुन्डियों को खूब चूसे जा रहा था। ज्वाला देवी इस समय मज़े में इस तरह मतवाली दिखायी दे रही थी कि अगर इस सुख के बदले उन पलो में उसे अपनी जान भी देनी पड़े तो वो बड़ी खुशी से अपनी जान भी दे देगी, मगर इस सुख को नहीं छोड़ेगी। अचानक बिरजु ने लंड चूत में रोक कर अपनी झांटे व अन्डे चूत पर रगड़ने शुरु कर दिये। झांटो व अन्डों के गुदगुदे घस्सो को खा-खा कर ज्वाला देवी बेचैनी से अपनी गाँड को हिलाते हुए चूत पर धक्कों का हमला करवाने के लिये बड़बड़ा उठी, “हाय उउई झांटे मत रगड़.. आहह तेरे अन्डे गुदगुदी कर रहे हैं सनम, उउई मान भी जो आईईईई चोद पेल… आहह रुक क्यों गया ज़ालिम… आहह मत तरसा आहह.. अब तो असली वक्त आया है धक्के मारने क। मार खूब मार जल्दी कर.. आज चूत के टूकड़े टूकड़े… फ़ड़ डाल इसे… हाय बड़ा मोटा है.. आइइई।” बिरजु का जोश ज्वाला देवी के यूँ मचलने सिसकने से कुछ इतना ज्यादा बढ़ उठा, अपने उपर वो काबू न कर सका और सीधा बैठ कर जबर्दस्त धक्के चूत पर लगाने उसने शुरु कर दिये। अब दोनों बराबर अपनी कमर व गाँड को चलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाये जा रहे थे। पलंग बुरी तरह से चरमरा रहा था और धक्के लगने से फ़चक-फ़चक की आवाज़ के साथ कमरे का वातावरण गूंज उठा था। ज्वाला देवी मारे मज़े के ज़ोर ज़ोर से किल्कारियाँ मार रही थी, और बिरजु को ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने के लिये उत्साहित कर रही थी, “राजा । और तेज़.. और तेज़.. बहुत तेज़.. रुकना मत। जितना चाहे ज़ोर से मार धक्का.. आह। हाँ। ऐसे ही। और तेज़। ज़ोर से मार आहह।” बिरजु ने आव देखा न ताव और अपनी सारी ताकत के साथ बड़े ही खुँख्वार चूत फ़ाड़ धक्के उसने लगाने प्रारम्भ कर दिये। इस समय वो अपने पूरे जोश और उफ़ान पर था। उसके हर धक्के में बिजली जैसी चमक और तेज़ कड़कड़ाहट महसूस हो रही थी। दोनों की गाँड बड़ी ज़ोरो से उछले जा रही थी। ओलों की टप-टप की तरह से वो पलंग को तोड़े डाल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनों एक दूसरे के अंदर घुस कर ही दम लेंगे, या फिर एक दूसरे के अंग और नस-नस को तोड़ मरोड़ कर रख देंगे। उन दोनों पर ही इस समय कातिलाना भूत पूरी तरह सवार था। सहसा ही बिरजु के धक्कों की रफ़्तार असाधारण रूप से बढ़ उठी और वो ज्वाला देवी के शरीर को तोड़ने मरोड़ने लगा। ज्वाला देवी मज़े में मस्तानी हो कर दुगुने जोश के साथ चीखने चिल्लाने लगी, “वाह मेरे प्यारे.. मार.. और मार हाँ बड़ा मज़ा आ रहा है। वाह तोड़ दे फ़ाड़ डाल, खा जा छोड़ना मत उफ़्फ़.. सी.. मार जम के धक्का और पूरा चोद दे इसे हाय।” और इसी के साथ ज्वाला देवी के धक्कों और उछलने की रफ़्तार कम होती चली गयी। बिरजु भी ज़ोर-ज़ोर से उछलने के बाद लंड से वीर्य फैंकने लगा था। दोनों ही शांत और निढाल हो कर गिर पड़े थे। ज्वाला देवी झड़ कर अपने शरीर और हाथ पांव ढीला छोड़ चुकी थी तथा बिरजु उसे ताकत से चिपटाये बेहोश सा हो कर आँखें मूंदे उसके उपर गिर पड़ा था और ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ने लगा था। इतना सब देख कर रंजना का मन इतना खराब हुआ कि आगे एक दृश्य भी देखना उसे मुश्किल जान पड़ने लगा था। उसने गर्दन इधर-उधर घुमा कर अपने सुन्न पड़े शरीर को हरकत दी, इसके बाद आहिस्ता से वो भारी मन, कांपते शरीर और लड़खड़ाते हुए कदमों से अपने कमरे में वापस लौट आयी। अपने कमरे में पहुँच कर वो पलंग पर गिर पड़ी, चुदाई की ज्वाला में उसका तन मन दोनों ही बुरी तरह छटपटा रहे थे, उसका अंग-अंग मीठे दर्द और बेचैनी से भर उठा था, उसे लग रहा था कि कोई ज्वालामुखी शरीर में फ़ट कर चूत के रास्ते से निकल जाना चाहता था। अपनी इस हालत से छुटकारा पाने के लिये रंजना इस समय कुछ भी करने को तैयार हो उठी थी, मगर कुछ कर पाना शायद उसके बस में ही नहीं था। सिवाय पागलो जैसी स्तिथी में आने के। इच्छा तो उसकी ये थी कि कोई जवान मर्द अपनी ताकतवर बाँहों में ज़ोरों से उसे भींच ले और इतनी ज़ोर से दबाये कि सारे शरीर का कचुमर ही निकल जाये। मगर ये सोचना एकदम बेकार सा उसे लगा। अपनी बेबसी पर उसका मन अंदर ही अंदर फ़ुनका जा रहा था। एक मर्द से चुदाई करवाना उसके लिये इस समय जान से ज्यादा अनमोल था, मगर न तो चुदाई करने वाला कोई मर्द इस समय उसको मिलने जा रहा था और न ही मिल सकने की कोई उम्मीद या आसार आस पास उसे नज़र आ रहे थे। उसने अपने सिरहाने से सिर के नीचे दबाये हुए तकिये को निकाल कर अपने सीने से भींच कर लगा लिया और उसे अपनी कुँवारी अनछुई चूचियों से लिपट कर ज़ोरो से दबाते हुए वो बिस्तर पर औंधी लेट गयी। सारी रात उसने मम्मी और बिरजु के बीच हुई चुदाई के बारे में सोच-सोच कर ही गुज़ार दी। मुश्किल से कोई घन्टा दो घन्टा वो सो पायी थी। सुबह जब वो जागी तो हमेशा से एक दम अलग उसे अपना हर अंग दर्द और थकान से टूटता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था बेचारी को, जैसे किसी मज़दूर की तरह रात में ओवरटाइम ड्यूटी करके लौटी है। जबकि चूत पर लाख चोटें खाने और जबर्दस्त हमले बुलवाने के बाद भी ज्वाला देवी हमेशा से भी ज्यादा खुश और कमाल की तरह महकती हुई नज़र आ रही थी। खुशियाँ और आत्म-सन्तोश उसके चेहरे से टपक रहा था। दिन भर रंजना की निगाहें उसके चेहरे पर ही जमी रही। वो उसकी तरफ़ आज जलन और गुस्से से भरी निगाहों से ही देखे जा रही थी।

    bubba-k4sh

    Save this so nasty lol

    harddick21blog

    Characters enjoying a whore

    I would say these cartoon characters are luckier than us. At least they are getting a pussy to fuck, here we are dying to have a pussy and playing with our dicks everyday. God knows, when he will arrange a pussy for all singles. If in reality such things would take place, both party gonna be happy after such a hard and nasty sex.

    abirpooja

    Cute bhabi

    harddick21blog

    Bhabhi on tower

    Bhabhi was not getting signal properly from old tower, so she decided to connect her device with fresh and young tower and i hope she might have got proper signal in her device. Such bhabhi’s if their respective husbands let her to explore all the towers they would not mind to go for that as they could check the stamina and power of all the fresh towers. :) 

    singhnishakanpur

    Desi bhabhi fucked in pink Saree…

    harddick21blog

    Desi Kaand

    When is see such videos on social media, i feel like i should kill those bastards who are doing such stuff to prove their masculinity. Guys, if you are a real man then please make your own video with your face and put it on social media then only you can be able to understand what one has to go after such posting on social media. ?? This is weird and am totally against this. 

    harddick21blog

    Back door entry

    दोस्तो, मेरा नाम देव है. मै राजस्थान का रहने वाला हूँ. मेरी बॉडी और चेहरा काफी आकर्षक है. मैं रोज जिम भी करता हूँ.. इसलिए बिल्कुल टाइगर श्रॉफ जैसा लगता हूँ. मेरा लिंग 7.5 इंच का है. मैं कैसी भी लड़की, भाभी, आँटी को सन्तुष्ट करने में सक्षम हूं. मैंने अब तक कई लड़कियों, भाभियों से सम्बंध बनाए हैं.. जो भी मुझसे मिली है.. वो मुझे कभी भूली नहीं है.. और भूल भी नहीं सकती है.

    यह बात एक साल पुरानी है. उस वक्त मैं कोटा में मेडिकल की तैयारी करने पहली बार आया था. अब भी मैं कोटा में ही हूं.

    जब मुझे कोटा में आये ज्यादा दिन नहीं हुये थे. एक दिन मैं बुक्स लेने मार्केट में गया. वहां पर शॉप पर मैंने दुकानदार से बुक्स मांगी. तभी एक भाभी अपने छोटे से बच्चे के साथ आईं. जब मैंने उनको देखा, तो देखता ही रह गया. वो ब्लैक साड़ी में इतनी कामुक लग रही थीं कि बता नहीं सकता. उनकी आँखें जैसे गहरी झील, उनके होंठ, जैसे खिलते हुए गुलाब की पंखुड़ियां. उनके स्तनों का आकार 36 का था, जो मुझे बाद में चूसते समय पता चला. उनके मम्मे ब्लाउज में इस कदर कसे हुए थे, मानो एकदम से बाहर आने को मचल रहे हों.

    जैसे ही उसको पता चला कि मैं उनको घूर रहा हूं.. तो उन्होंने मेरी ओर देखा. मैंने एक मुस्कराहट छोड़ दी. वो अपने बच्चे के लिए स्कूल की किताबें लेने आयी थीं. मैंने दुकानदार अंकल से बोला- अंकल जल्दी करो.

    तो फिर उन्होंने मेरी ओर देखा और मुस्कराहट छोड़ दी, जो सीधे मेरे लिंग पे जा लगी और लिंग कड़क होने लगा. अंकल किताबें दिखाने लगे और वो किताबों को चैक करने लगीं. मैं हिम्मत करके थोड़ा करीब आ गया. अब हम बिल्कुल पास पास थे. मेरे हाथ में मेरा मोबाइल था तो जब उनके बच्चे को दिख गया और वो जिद करने लगा. तो मैंने भी टेम्पल रन वाला गेम चला कर उसे दे दिया.

    फिर भाभी ने मुझसे पूछा- स्टूडेंट हो? मैंने कहा- हां, मेडिकल की तैयारी कर रहा हूँ. भाभी ने कहा- कहां रहते हो? मैंने कहा- महावीर नगर में पीजी पर. भाभी- अच्छा कहां से हो? मैंने कहा- पास से ही हूं.. बून्दी (राजस्थान) से.. भाभी- अच्छा.. मन तो लग रहा है ना? मैंने कहा- जी नहीं, घर की बहुत याद आती है.

    मैंने देखा कि भाभी मेरे करीब को होती जा रही थीं. भाभी के कूल्हे जो काफी भारी और उठे हुए थे.. बिल्कुल मुझसे टच हो रहे थे. जिससे मेरे लिंग ने हुँकार भरी और बहुत ही ज्यादा बड़ा हो गया. मैं धीरे धीरे से भाभी के कूल्हे को अपने बदन से सटाकर सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद दुकानदार अंकल ने बुक्स निकाल दीं और हिसाब बनाने लगे. अब तक भाभी बहुत ही ज्यादा गर्म हो गई थीं, जो उन्होंने बाद में बताया.

    तभी भाभी ने अपने एक हाथ को काउंटर के साइड से मेरे खड़े लिंग पर रख दिया. खड़े लंड पर भाभी के हाथ टच होते ही मेरी तो हालत खराब हो गई थी. मैंने भी हौले से उनके कूल्हे पर चपत लगा दी. इसके तुरंत बाद मैंने साइड से उनको थोड़ा सा हग जैसा कर लिया.

    तभी दुकानदार अंकल ने बिल दिया. मैंने पैसे दिए और उनके बच्चे से मोबाइल ले लिया.

    थोड़ी देर बाद भाभी भी पैसे देकर अपने बच्चे को लेकर अपनी स्कूटी पर बैठ गईं. मैं उनसे नम्बर लेना चाहता था, पर हिम्मत ही नहीं हुई. वो मुस्करा कर चली गईं. मैं बस उन्हें देखता रहा.

    फिर मैंने कमरे में आकर तीन बार मुठ मारी.. तब जाकर मुझे थोड़ी शांति मिली. मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आया कि एक बार तो नम्बर माँग लेना चाहिए था. फिर सोचा वो भी तो दे सकती थीं.

    कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो गया. लेकिन एक कसक सी दिल में रह गई.

    लेक़िन कहते हैं ना, जो नसीब में होता है, वो जरूर मिलता है. दो महीने बाद हम मॉल में मिल गए. भाभी ने जीन्स और टी-शर्ट डाल रखी थी, आँखों पर काला चश्मा लगाया हुआ था. क्या मस्त माल लग रही थीं.

    उनके मम्मे थोड़े से आम के आकार के.. उठी हुई चौंच वाले थे.. जो टी-शर्ट से बाहर निकलने को बेताब थे.

    मैंने उन्हें नमस्ते किया. वो काफी सरप्राइज़ थीं. वो भी मुझे देख कर बहुत ही खुश लग रही थीं.

    उन्होंने मुझे बेहिचक बाँहों में ले लिया और बोलीं- बहुत मिस किया तुमको.. कहां गायब हो गए थे? तुमको ढूँढने मैं रोज उस दुकान पर जाती थी कि शायद तुम दिख जाओ. पता नहीं मैंने कितनी बार महावीर नगर का चक्कर लगाया है.

    मैंने कहा- मिस तो मैंने भी बहुत किया आपको. रोज खुद को कोसता था कि अपना नम्बर ही आपको दे देता. तो भाभी बोलीं- मुझे लगा था कि तुम दे दोगे. मुझे क्या पता था कि तुम इतने डरपोक हो, नहीं तो मैं ही दे देती. मैंने कहा- रात गई, बात गई. फिर भाभी ने मुझे कॉफ़ी के लिए कहा कि चलो कॉफ़ी पीते पीते बात करते हैं.

    मैं उनके साथ चला गया. इधर उधर की बातें हुईं, नम्बर एक्सचेंज किए. मैंने बोला- मूवी चलते हैं. तो बोलीं- कभी फिर, अभी मैं जल्दी में हूँ.. घर पर लड़का अकेला है. थोड़ी देर बाद भाभी जाने लगी, मैंने उनको बाय बोला. उन्होंने छोटा सा हग किया.. चूचियों का हल्का सा स्पर्श हुआ, फिर वो गांड मटकाते हुए चली गईं. मैं बस उन्हें देखता रहा.

    उनकी गांड काफी बड़ी और भरी हुई थी.. जो काफी मटक रही थी. मुझे खुद पर कंट्रोल नहीं हुआ और मॉल के बाथरूम में जाकर दो बार मुठ मारी.

    उस दिन मैं बहुत खुश था. शाम को मैंने भाभी को कॉल किया. उधर से आवाज आई- कौन? मैंने कहा- आपके दीवाने. भाभी- बड़ी देर लगा दी, हमारे दीवाने ने. मैं- क्या करें दीवाने में थोड़ी हिम्मत कम थी. भाभी- अच्छा, क्या कर रहे हो? मैं- आपकी याद आ रही है.. मिस कर रहा हूँ. भाभी- आ जाओ अभी मेरे पास, पता व्हॉट्सैप करती हूं. मैंने कहा- जी, ओके.

    एक घंटे बाद मैं उनके घर पे था, उनका घर तलवंडी में था, काफी पॉश कॉलोनी है.

    उन्होंने वही ब्लैक कलर की साड़ी पहन रखी थी. मुझे सोफे पर बिठाया और फ्रिज से पानी की बोतल निकाल कर दे दी. हम दोनों बातें करने लगे.

    मैंने पूछा- आपका नाम क्या है? तो भाभी ने हँसते हुए कहा- मंजू दीक्षित. मैंने पूछा- आपके हस्बैंड क्या करते हैं? तो बताया कि वो डॉक्टर हैं. अभी वो गुजरात किसी सेमिनार में गए हैं.

    मैं थोड़ा खिसक कर पास को हो गया. मैंने पूछा- आपके सास ससुर? तो भाभी ने कहा- वे जयपुर रहते हैं, मेरे देवरों के पास. मैंने कहा- अच्छा जी.. आपका बेटा? भाभी- सो रहा है.. कोई नहीं है, अब देर न करो यार.

    उनके इतना कहते ही मैंने भाभी को बाँहों में भर लिया और स्मूच करने लगा. मैंने और भाभी ने हर एंगल से स्मूच किया. हमने लगातार बहुत देर तक स्मूच किया. ऐसा लग रहा था, जैसे कोई युद्ध चल रहा हो और कोई भी हारना नहीं चाहता रहा था.

    मैंने भाभी की ब्लैक साड़ी को निकाल कर फेंक दिया. उनके ब्लाउज के बटन तोड़ कर उसको निकाल दिया. ब्लाउज़ के निकलते ही उनके मम्मे बाहर निकल गए.

    क्या मम्मे थे यार दूध से गोरे, ब्लैक ब्रा में कैद. क्या सीन था दोस्तो, शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूँ. मैं उनके मम्मों से चिपक गया. वो पीछे से मेरी पीठ पर हाथ घुमाने लगीं.

    मैं भाभी के मम्मों को मसलने लगा, भाभी ‘आह, ऊह…’ की आवाजें करने लगीं.. जिससे मेरा जोश और बढ़ गया. मैंने उनकी ब्रा को निकाल कर फेंक दिया और उनके एक निप्पल को चूसने लगा.

    भाभी जोर जोर से आहें भरते हुए बोलने लगीं- आह.. जोर से काटो, मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.. तुम बहुत अच्छा कर रहे हो.. आह बेबी, मेरे निप्पल को और मुँह के अन्दर लो, आह बहुत अच्छा, आह तुम कितने हॉट हो, कहां थे इतने दिन राजा.

    तभी अचानक कमरे में से आवाज आई; हम दोनों डर गए. तभी अचानक फिर से आवाज आई. पता ही नहीं चला कि उनका बेटा भी घर में है. उन्होंने जल्दी से अपने मम्मों पर अपनी साड़ी लपेट ली और ब्रा और ब्लाउज़ उठाते हुए अन्दर बेडरूम में जाते हुए अपने बेटे से बोलीं- आ रही हूं बेटा.

    सिर्फ आवाज ही आई थी, उनका बेटा बाहर नहीं आया था. अब तक मैंने भी खुद को ठीक किया.

    फिर थोड़ी देर बाद भाभी भी आ गईं. वे अपने लड़के के साथ बाहर आ गईं.

    उनके लड़के ने मुझे नमस्ते बोला. मैंने कहा- क्या नाम है बेटा? तो बोला- हर्षित.

    मैंने उसको मेरा मोबाइल दे दिया और वो फिर से गेम खेलने में लग गया.

    जब मैंने भाभी की ओर देखा तो भाभी मुस्कारते हुए मेरी गोदी में खड़े लिंग के ऊपर बैठ गईं.

    वो अपने कपड़े बदल चुकी थीं. उन्होंने झीना सा टॉप और जीन्स पहन रखा था. मैं फिर से शुरू हो गया. मैं औऱ भाभी एक दूसरे में खो गए.

    मैं उनको स्मूच करने लगा. कभी मैं अपनी जीभ उनके अन्दर डाल रहा था कभी वो. दोस्तों जीभ को चूसने का मजा ही कुछ और ही है.

    हमने कुछ देर स्मूच किया, फिर भाभी बोलीं- चलो क्या खाओगे.. मैं आर्डर कर देती हूं. भाभी ने अमर पंजाबी ढाबे पर कॉल करके आर्डर कर दिया. फिर मुझसे इतराते हुये बोलीं- कुछ पियोगे जनाब? मैंने कहा- मुझे तो आज बस तुमको पीना है. वो बोली- अरे आशिक़.. मैं ड्रिंक की बात कर रही हूं. मैंने पूछा- क्या क्या है? वो बोलीं- बियर है, व्हिस्की है. मैंने कहा- बियर ले आओ. उन्होंने और मैंने अलग अलग बॉटल ले लिए. फिर मैंने कहा- ऐसे नहीं पिया जाता है. तो भाभी बोलीं- फिर कैसे?

    मैंने अपने मुँह में बियर भर कर उनके होंठों से होंठ लगा दिए.. भाभी समझ गईं और उन्होंने मुँह खोल दिया. मैंने किस करते करते उनको बियर पिलाई और उन्होंने मुझे.

    कभी आप भी कोशिश करना दोस्तो, मज़ा आ जाएगा.

    इस तरह हमने चार बोतलें ख़त्म कर दी थीं. मुझे थोड़ा सा नशा आ गया था. मैं उनको पकड़कर उनके मम्मों को चूसने लगा.

    वो बोलीं- रुको.. मैं बच्चे को सुला कर आती हूँ. मैंने पूछा- कैसे सुलाओगी? तो बोलीं- नींद की गोली से.

    मैं सोफ़े में बैठा रहा. कुछ देर बाद वो आईं तो मैंने बोला- सु सु आ रही है.

    भाभी काफी नशे में लग रही थीं. मैंने कहा- बेबी तुम ठीक हो? तो बोलीं- हां जानू.. तुमको सु सु आ रहा है ना.. तो मेरे मुँह में कर दो. मैं चौंक गया, मैंने पोर्न मूवी में ये सब जरूर देखा है, लेकिन भाभी इतनी सेक्सी होंगी.. नहीं सोचा था. वो बोलीं- शर्मा मत.. मेरे देव बाबू, मैंने बहुत वीडियो में देखा है.. मैं भी चाहती थी कि कोई मेरे साथ ऐसा करे. शायद मैं शर्म के मारे तो नहीं बोल सकती थी लेकिन थैंक यू.. तुमने बियर पिलाने के अंदाज से मेरी वो कामना जागृत कर दी. अब मुझे तुम्हारे लंड को चूसना है.

    ऐसा सुनते ही मुझे बहुत जोश आ गया. मैंने अपना लिंग बाहर निकाल लिया. उन्होंने देखा तो देखती रह गईं. “हे भगवान.. इतना बड़ा.. कहाँ छुपा रखा था.. वाह मेरे शेर..” भाभी ने अगले पल ही मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया.

    मैंने कहा- मुँह से मत चूसो, मुझे पेशाब करनी है, वीर्य नहीं निकालना है. मैंने अपना लिंग भाभी के मुँह से बाहर निकाल लिया और उनको बोला- मुँह खुला रखना.

    उन्होंने आ करके मुँह खोल दिया. फिर मैंने उनके मुँह में सू सु कर दिया. वो आराम से मेरा पेशाब पीती चली गईं. फिर मैंने लास्ट का थोड़ा सा पेशाब उनके मुँह पर करके उनको भिगो दिया. फिर भाभी नशीली आवाज में बोलीं- मुझे भी सुसु लगी है. मैंने कहा- रुको.. बीयर है क्या? तो बोलीं- नहीं है. मैंने कहा- व्हिस्की ले आओ.. थोड़ी प्याज़ और नमकीन भी ले आना.

    थोड़ी देर बाद भाभी, व्हिस्की, प्याज़, बीकानेरी नमकीन, मेवे, आइस, लेकर आ गईं. अब उन्होंने एक पेटीकोट पहना हुआ था, जींस उतार दी थी.

    मैंने दोनों के लिए पैग बनाए. मैंने तीन पैग पिए और भाभी ने दो लगाए. हम दोनों खूब नशे में हो गए थे.

    फिर मैंने कहा- ला मेरी जान पिला मुझे तेरा गरम पानी…

    ये कहते हुए मैंने भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, पेटीकोट ‘सररर..’ करते हुए गिर गया.

    वाह क्या टांगें थीं.. एकदम दूध सी, उनकी टांगों के बीच में काली पेंटी फंसी थी. मैंने पेंटी को खींच कर फाड़ दिया और उनकी चूत पर मुँह लगा कर बोला- ला पिला.. मुझे तेरा गर्म पानी.

    भाभी ने चुत की धार खोल दी.

    उस वक़्त मैं बहुत ही नशे में था. मैंने उनका पूरा पेशाब पी लिया.. और चूत चाटने लगा. वो भी मेरा सर पकड़ कर गाली देने लगीं- और चूस मेरे कुत्ते.. और अन्दर तक चाट आह.. आह.. मज़ा आ रहा है.. ऐसे ही करते रहो बेबी.. आई लव यू देव.. यार तुम तो बहुत ही हॉट हो.. अन्दर तक जीभ घुमाओ.. और अन्दर बेबी.. आह.. थोड़ी देर ऐसे ही करते रहो.. आह.. आने वाली हूं मैं.. आह बेबी…

    वो बहुत ही कामुक आवाजें निकाल रही थीं. कुछ देर बाद उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया, मैंने उनकी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दी.

    थोड़ी देर बाद घंटी बजी. भाभी कपड़े पहनते हुए बोलीं- खाना आ गया है.. चलो.. जाओ तुम ले आओ. भाभी ने अपना पर्स मुझे दे दिया, मैंने खाना लिया और अन्दर आ गया.

    अब हम दोनों खाना खाने लगे. डाइनिंग टेबल पर हम दोनों पास पास की कुर्सी पे बैठे थे. मैं उनको स्मूच करने लगा. फिर मैंने उनको पकड़कर अपनी गोद में ही बैठा लिया. मुझपर काफी नशा था, मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी कर दिया.

    फिर उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ने की कोशिश की, लेकिन मैंने कहा- मैं क्या पहन कर जाऊँगा. तो वो रुक गईं, मैंने अपने कपड़े उतार कर रख दिए, मैं भी नंगा हो गया और कुर्सी पर बैठ गया. मेरे बैठते ही भाभी अपनी चौड़ी टांगें करते हुए मेरे लंड पर बैठ गईं. मेरा लंड गप्प की आवाज करते हुए अन्दर चला गया.

    मैंने पीछे से पकड़कर उनको हग करते हुए चूमा और हम दोनों इसी अवस्था में खाना खाने लगे.

    दोस्तो, मुझे लगता है, ये आप लोगों को भी करना चाहिए. ये मुझे आज तक का सबसे ज्यादा कामुक वाला काम लगा. इस आनन्द को मैं बयान नहीं कर सकता हूँ.

    खाना खाने के तुरन्त बाद ही मैं इतना कामुक हो गया कि मैंने भाभी को फर्श पर लिटा कर इतने जोर से चोदा कि उन्होंने मुझे अपने नाखूनों से पूरी पीठ को नोंच डाला. जब ये तूफान ख़त्म हुआ तो पता चला ब्लड निकल रहा है, भाभी के शरीर से भी और मेरी पीठ पर भी. मैंने झटके इतने तेजी से मारे थे कि कोई गिन भी नहीं सकता.

    उन्होंने मेरे घावों पर डिटॉल लगाया और बोलीं- थोड़ा आराम कर लो.

    फिर वो कमरे में जाकर अपने बच्चे को पानी पिलाकर अच्छे से सुलाकर आ गई. और मुझे हग कर लिया. मैंने उन्हें उठाकर कमर तक ले लिया और किस करने लगा.

    लगातार 15 मिनट तक किस करने के बाद वो बोलीं- चलो बेडरूम में चलते हैं.

    मैंने कहा- शहद है क्या? तो बोलीं- हां क्यों? मैंने कहा- लेकर आओ तो. वो बोलीं- अभी लाई.

    कुछ देर बाद भाभी शहद लेकर आ गईं. मैंने कहा- लेट जाओ. वो चित लेट गईं, मैंने उनके होंठों पर स्तनों पर, लगभग सारे शरीर पर शहद लगा दिया और चाटने लगा. भाभी कामुक आवाजें निकालने लगीं. मैंने उनके स्तनों को चाट चाट कर लाल कर दिया. उनके होंठों से ब्लड निकलने लगा.

    वो गालियां देने लगीं, मुझसे गुहार लगाने लगीं- आह.. साले अब तो मुझे चोद दो.

    फिर मैंने उनको चोद दिया, लगातार ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना लावा उनकी चूत में छोड़ दिया. फिर दोनों हग करके बाते करने लगे.

    बीस मिनट बाद मैंने अपने लंड पर शहद लगा कर भाभी की ओर कर दिया. भाभी मेरे लंड को चूसने लगीं. कुछ देर बाद मैंने कहा- रुको.

    अब मैंने उनकी चूत पर बहुत सारा शहद लगाया और हम दोनों 69 की अवस्था में हो गए. जितनी जल्दी वो मेरे लंड को चूसतीं, उतने ही अन्दर में अपनी जीभ घुसेड़ देता. हम एक दूसरे को तब तक चूमते और चाटते रहे, जब तक हमने एक दूसरे को स्खलित नहीं कर दिया. मैंने भाभी को उस रात कई बार चोदा. हर अवस्था में चोदा. भाभी थक गईं और खुद बोलीं- बस करो यार..

    फिर भी मैं नहीं माना, वो रात मेरी जिंदगी की सबसे हसीन रात थी. मैंने लगभग एक साल तक भाभी को चोदा. फिर उनके पति का ट्रान्सफर जयपुर हो गया.

    अब भी कभी कभी बात हो जाती है तो बोलती हैं कि बहुत मिस करती हूं तुम्हें. मैं भी बस इतना ही कह पाता हूँ- याद तो हमें भी बहुत आती है आपकी. ये मेरी पहली कहानी है तो कुछ भूल हुई हो तो मुझे माफ़ करना और मुझे बताएं कि आपको भाभी की चुदाई की कहानी कैसी लगी.

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    Three FFF and single M

    मेरा नाम विकाश है और मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 24 साल है और मेरी हाइट 5 फिट 7 इंच है. मैं दिखने में ठीक ठाक हूँ.

    दोस्तों मैं एक कम्पनी में काम करता हूँ. मेरी कम्पनी के पास ही वाली जगह एक ब्यूटी पार्लर है. उसमें एक लड़की काम करती है, उसका नाम नेहा है.

    नेहा दिखने में बेहद ही खूबसूरत है दोस्तों उसके अंगों की बनावट इतनी अधिक मादक है कि देखने वाला उसको देखता ही रह जाए. मैं रोज ऑफिस जाते वक्त उसे देखता रहता था. मैंने महसूस किया था कि मेरे देखने से वो भी कुछ इस तरह से देखने लगती थी, जिससे ऐसा लगता था कि शायद उसके मन में मेरे लिए भी कुछ है. पर हिम्मत न होने के कारण ऐसे कैसे उससे कुछ कह सकता था. हालांकि उसको देखते समय मैं इतना जरूर करने लगा था कि जब भी मेरी उससे आँख मिल जाती थी, तो मैं स्माइल कर देता था. जिस पर उसने कभी मुँह भी नहीं फेरा था और स्माइल भी नहीं की थी.

    मैं कुल मिला कर असमंजस की स्थिति में था कि पता नहीं मैं इसको लेकर गलत सोच रहा हूँ या वास्तव में कुछ होने की उम्मीद है.

    एक दिन मैं मार्केटिंग के सिलसिले में वहां से गुजर रहा था तो मैंने देखा कि वो बिलकुल फ्री बैठी थी. मैंने सोचा आज इससे थोड़ी बात कर ही लूँ. मैं उसके करीब गया और उसको देख कर मुस्कुराया. वो भी मुस्कुरा कर बोली- आइये. मैं- शुक्रिया. मैंने आगे बात बढ़ाई- जी मैं पास के ही ऑफिस में काम करता हूँ. वो- जी पता है, आपको आते जाते देखती हूँ. बैठिये, आप कुछ लेंगे ठंडा या गर्म? मैं- नहीं, मैं तो बस आपसे ऐसे ही बात करने आया था.

    कुछ देर हम दोनों ने बात की उसे मेरा व्यवहार अच्छा लगा और मुझे भी उसका स्वभाव पसंद आया. इसी तरह हमारी दोस्ती हो गई. फिर हमारी रोज बात होने लगी.

    फिर एक दिन ऐसे ही मैंने बातों बातों में उसका नंबर मांग लिया. पहले तो वो बोली कि नहीं यार कहीं तुमने नंबर किसी और को दे दिया. तो सही नहीं रहेगा. वो नम्बर देने में बहाने बनाने लगी तो मैंने भी बोल दिया- क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है?

    तो अंत में उसने भी नंबर दे ही दिया. फिर मेरी उससे रोज़ बात होने लगी. धीरे धीरे मैं उसे पटाता गया. फिर हम रोज़ रात को फोन पर लम्बी बात करने लगे.

    वो मुझसे काफी खुल गई थी. अब मैंने भी डबल मीनिंग की बातें शुरू कर दी थीं. धीरे धीरे मैंने उसे फोन सेक्स के लिए पटा ही लिया. अब हम रोज़ रात को फोन सेक्स चैट करने लगे थे.

    एक दिन मैंने उसे मैसेज किया- क्या कर रही हो? तो वो बोली- फ्री बैठी हूँ. मैंने कहा- क्यों आज कोई काम नहीं है क्या? वो बोली- आज मेरे पार्लर का हाफ डे है.. तो बस अकेली बैठी हूँ, बाकी सब लोगों की छुट्टी हो गई, पर मेरा कुछ काम था.. तो मैं अभी यही हूँ. अब काम ख़त्म कर दिया तो बस ऐसे ही कंप्यूटर पर फ़ोटो देख रही थी.

    इतना सुनते ही मेरे मन में सेक्स का भूत जाग गया. मैंने सोचा यही अच्छा मौका है, मैंने उससे बोला- क्या मैं आ जाऊं? उसने भी हां बोल दिया- हां आ जाओ.

    मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर सीधा उसके पार्लर में आ पहुंचा. वो बैठी थी, मैंने जाते ही पहले दरवाजा बंद कर दिया और उसके पास वाली कुर्सी पर बैठ गया.

    बातों ही बातों में मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया. उसने कुछ नहीं कहा मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. फिर धीरे धीरे उसकी पीठ की बगल से उसकी चूचियों को टच करना शुरू कर दिया. उसको मजा आने लगा था, इसलिए उसने मुझे नहीं रोका.

    मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और अपने होंठ उसकी तरफ बढ़ा दिए. उसने भी अपने होंठ आगे कर दिए तो हमारी किसिंग भी चालू हो गई. चूमाचाटी अपने चरम पर आ गई थी हम दोनों एक दूसरे के मुँह में जीभ डाल कर गरम होना शुरू हो गए थे. पार्लर का दरवाजा बंद था तो चिंता नहीं थी. मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया तो उसने भी मेरा सर अपनी चूचियों पर लगा दिया. मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखवा लिया तो वो मेरे लंड को मसलने लगी.

    फिर मैंने वहीं पड़ी टेबल पर उसे चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. कुछ ही देर में चुदाई का मूड बन गया और मैंने जल्दी जल्दी उसकी कमीज़ उतार दी. उसने अन्दर ब्लू ब्रा पहनी हुई थी.. जो कि उनको बहुत सूट कर रही थी. चूचियों को नंगा कर दिया तो उसने खुद ही अपनी सलवार खोल दी. मैंने भी उसकी चड्डी को निकाल दिया. अब वो पूरी नंगी मेरे सामने थी. मैंने नजर भर के उसको देखा, उसकी फिगर 36-30-37 की थी.

    फिर मैं उसके के पूरे शरीर को चूमने चाटने लगा. मैंने उसको उल्टा लेटाया और पास रखी तेल की शीशी से तेल निकाल कर उसकी पीठ पर डाल कर मसाज करने लगा. वो गरम आहें भर रही थी.

    मैंने उसे सीधा किया तो उनकी चुत पूरी तरह क्लीन थी. मैं सफाचट चुत को देखते ही पागल हो गया और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख के सीधा चुत चूमने लगा. मैंने एकदम से उसकी चुत के होंठ खोल दिए और अपनी जीभ को अन्दर-बाहर करने लगा. वो गर्म होने लगी और मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चुत पर दबाने लगी.

    इस वक्त वो जोर जोर से कह रही थी- आह खा जाओ मेरी फुद्दी.. अह.. चाटो चूस.. चूस लो.. और जोर से.. आह.. और जोर से. इस तरह काफी देर चूत चुसवाने के बाद आखिर में वो झड़ ही गई.

    फिर वो मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी. मैंने पूछा- क्या तुम लंड चूसना चाहोगी? पहले तो वो नानुकुर करने लगी. फिर अचानक उसने मेरे लंड को मुँह में डाल लिया और किसी एक्सपर्ट की तरह लंड चूसने लगी.

    मैं पूरी तरह से पागल हो रहा था. निशा अपनी जीभ को लंड से आंडों तक रोल करने लगी और अंडकोषों को चूसने लगी. वो जोर जोर से लंड सक कर रही थी. मैंने कहा- सच में यार तुम बड़ा मस्त तरीके से लंड चूसती हो. तो वो शर्मा गई. मैंने उसकी चूची दबा कर कहा- बताओ न किधर से सीखा. तो बोली- अभी मजा लो बस.

    मैंने भी सोचा कि मुझे जानकर भी क्या करना है. अभी तो बस इसकी चूत चुदाई का मजा लो और बाकी सब बाद में देखेंगे. फिर मैं उसके ऊपर आ गया और अपने लंड को उसकी चुत पर रगड़ने लगा. वो तड़पने लगी और अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे लंड को अपनी चुत के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी. मैं समझ गया कि उसकी कामुकता पूरे उफान पर पहुँच चुकी है. अब मैंने सोचा कि अब इसकी गीली चूत में लंड घुसाने का सही वक्त आ गया है.

    मैंने उसको टेबल से उठाया और दीवार के साथ खड़ा करके उसकी एक टांग उठाई और चुत में अपना लंड सीधा डाल दिया, जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से चीखने लगी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो काफी दिनों से किसी से नहीं चुदी है तो चूत टाइट हो गयी है.

    जैसे तैसे उसकी चूत को ढीला करके लंड ने खुद के आने जाने के लिए रास्ता बनाया और हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई. अब वो दीवार के सहारे घोड़ी बन गई थी और मैं पीछे से लंड पेल कर उसकी चुदाई कर रहा था. उसकी चूचियों को मस्ती से मसकता हुआ, मैं उसको दबा कर चोदे जा रहा था.

    इस आसन में मैं उसे काफ़ी जोर-जोर से चोद रहा था. वो तो पागल हुई जा रही थी. उसकी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ जैसी गर्म आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं.

    मैंने उसे लगातार 15 मिनट तक चोदा और आख़िर में मैंने नीचे फर्श पर लेट कर उसको अपने ऊपर बिठा लिया. चुत में लंड डाल कर मैं उसको फिर से पेलने लगा.

    कुछ देर तक उसने मेरे लौड़े की सवारी की और इस फौरान मैं उसकी चूचियों को मरोड़कर गूँथता रहा, चूसता रहा. अब वो थक गई थी, तो उसको कमर से पकड़ कर मैं उसे ऊपर नीचे करने लगा.

    आख़िर में मैंने उसे अपने नीचे लिया और मिशनरी पोज में चोदने लगा. वो एकदम शिथिल हो चुकी थी और जल्दी खत्म करने का कह रही थी. अंत में मैंने अपना सारा लंड रस उसकी चुत में भर दिया.

    तब तक काफी देर हो चुकी थी और उसको भी घर जाने में भी देर हो रही थी. हम दोनों ने कपड़े पहने, चुम्मा लिया और निकल गए.

    उसके बाद हमने बहुत बार चुद्म चुदाई का खेल खेल कर मजे किए..

    vrajseema

    Seema enjoing on top

    rashmi sucking her hubbys cock and stay lubricated

    #Seema#Vraj#Swap#

    #Lonavla#Love#fun#

    harddick21blog

    Threesome with two female

    सबसे पहले मैं अपना परिचय देती हूं, मेरा नाम सविता अग्निहोत्री है। मेरी उम्र 48 साल है और मैं जयपुर से हूं। मेरा अपना बिज़नस है जो पिछले दो सालों से बहुत अच्छा चल रहा है। महीने के 2 लाख रुपये तक बच जाते हैं। पिछले 4 साल से मेरे हस्बैंड मेरे साथ नहीं रहते।

    आप आपको अपने बेटे का परिचय देती हूँ, उसका नाम वरुण अग्निहोत्री है, उसकी उम्र 24 साल है और वो नॉएडा में एक सॉफ्टवेयर क बात करीब एक महीने पहले की है जब वो जयपुर आया था। उसके जाने के बाद में उसके कमरे में सफाई करने गयी तो मुझे वहाँ पे एक डायरी मिली जो वरुण की व्यक्तिगत डायरी थी, उसमें वो सारी बातें लिखता था। मैंने उस डायरी को पढ़ना शुरू किया तो हैरान रह गयी। उसने उसमें अपने सेक्स के किस्से लिखे हुए थे। सबसे ज्यादा हैरानी तो मुझे तब हुई जब उसने एक पेज पे मेरे बारे में लिखा हुआ था।

    पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया और फिर सोचा इस उम्र में हो सकता है कि ऐसा ही होता हो और मैंने माँ बेटे के बीच में सेक्स संबंध के बारे में पढ़ना शुरू किया और मुझे पता लगा कि यह आज कल सामान्य बात है। इस बात ने मुझे बहुत उत्तेजित किया तो मैंने सोचा क्यूँ न वरुण के बारे में और पता किया जाये।

    मैंने बाजार से एक नया सिम लिया और उसको कॉल किया जिसे उसने गलत नंबर बोल कर रख दिया। फिर मैंने उसे व्ट्सऐप मैसेज किया और सॉरी बोला गलती से फोन करने के लिए! रात को 12 बजे के आस पास उसका मैसेज आया और थोड़ी बहुत बात हुई। मैंने उसे अपना नाम स्मिता बताया।

    फिर हमारी रोज़ बातें होने लग गयी और रोज़ 2-3 घंटे बातें करते। फ़ोन पे भी बात हो जाती थी।

    एक रात हम बात कर रहे थे तो वरुण बोला- आपको हॉट चैट पसंद है? स्मिता- तुम्हारे साथ? तुम बहुत छोटे हो! वरुण- करके तो देखो! स्मिता- अच्छा ठीक है!

    वरुण- एक गेम खेलें? स्मिता- कैसा गेम? वरुण- सच और सिर्फ सच… स्मिता- ठीक है वरुण- बिना किसी रोक टोक के? स्मिता- जैसा तुम्हें पसंद हो! वरुण- टीक है, हम कुछ भी पूछ सकते हैं। स्मिता- चलो ठीक है, देखते हैं तुम कितना बता पाते हो, पहले तुम पूछो।

    वरुण- आपके साइज क्या है? स्मिता- 36डी 32 38

    स्मिता- तुम्हारा साइज क्या है? वरुण- मेरा खड़ा हुआ 8″ का है. वरुण- तुम्हें सेक्स चैट करना पसंद है? स्मिता- हाँ पसंद है अच्छा लगता है परन्तु किसी किसी के साथ, हर किसी के साथ नहीं!

    स्मिता- तुम्हें क्या ज्यादा पसंद है सेक्स चैट, सेक्स कहानी या फिर पोर्न? वरुण- मुझे सेक्स कहानियाँ बहुत पसंद है और अगर आप जैसा कोई खुले दिमाग का हो तो सेक्स चैट का मज़ा भी अलग ही है.

    वरुण- क्या तुम पोर्न देखती हो? या सेक्स स्टोरीज पढ़ती हो? और क्या ज्यादा पसंद है सेक्स स्टोरीज या पोर्न? स्मिता- मुझे सेक्स स्टोरीज ज्यादा पसंद हैं, उनमें ज्यादा एक्साईटमेंट रहता है. स्मिता- तुम्हें किस तरह की सेक्स स्टोरीज पसंद हैं? वरुण- मुझे वैसे तो सभी पसंद हैं लेकिन मुझे फॅमिली वाली स्टोरीज ज्यादा अच्छी लगती हैं जैसे कि देवर भाभी, मामी भांजा, चाची भतीजा…

    वरुण- तुम्हें किस तरह की सेक्स स्टोरीज पसंद हैं? स्मिता- मैंने अभी तक तो ज्यादा नहीं पढ़ी है मैंने नौकरानी-मालिक, दोस्त की बहन, माँ और कुछ रिश्तों में सेक्स स्टोरीज भी पढ़ी हैं माँ-बेटे, देवर-भाभी, मामी-भांजा, चाची-भतीजा!

    स्मिता- वैसे तुम्हें देख कर लगता तो नहीं, हो तो तुम हरामी लेकिन क्या तुमने कभी सेक्स किया है? वरुण- हाँ, बहुत बार किया है!

    वरुण- तुम भी हो तो मस्तीखोर… तुम्हारे में सेक्स की कितनी आग है! स्मिता- आग तो बहुत है मेरे पति आज तक मुझे संतुष्ट नहीं कर पाए!

    स्मिता- तूने किस किस के साथ किया है? वरुण- मैंने गर्लफ्रेंड, पड़ोस वाली आंटी, और एक मम्मी की सहेली है, उसके साथ!

    वरुण- आपने किस किस के साथ किया है? स्मिता- शादी से पहले तो किसी के साथ नहीं किया लेकिन शादी के बाद पति और बॉयफ्रेंड के साथ किया है.

    स्मिता- तुमने टोटल कितनी लड़कियों के साथ किया है आज तक? वरुण- टोटल 5 लड़कियों से किया है आज तक, 3 गर्लफ्रेंड, 1 पड़ोस वाली आंटी और 1 मम्मी की सहेली!

    वरुण- तुम कितने लण्ड से चुद चुकी हो? स्मिता- पति का मिला कर या उसके अलावा? वरुण- पति का मिला कर! स्मिता- पति का मिला कर टोटल 17… एक पति और 16 मेरे यार! वरुण- यार बुरा नहीं मानना लेकिन तुम तो एकदम चुदक्कड़ हो!

    स्मिता- तुम्हें कैसी लड़किया पसंद हैं कमसिन या आंटी, मम्मी टाइप? वरुण- मुझे मेच्योर औरतें पसंद हैं, एकदम मोटी गांड, मोटे चूचे, चुदने में एक्सपर्ट, वो जानती हैं उनको एक आदमी से क्या चाहिए! मेरी गर्लफ्रेंड बहुत नाटक करती थी, टच भी नहीं करने देती थी लेकिन मम्मी की सहेली एकदम चुदक्कड़, हमेशा तैयार रहती थी!

    वरुण- तुम्हें कैसे लड़के पसंद हैं? स्मिता- मुझे ज्यादा उम्र के लड़के पसंद नहीं हैं, लड़के 24-27 साल तक के हो, लण्ड मोटा और लम्बा ताकि चूसने में भी मज़ा आये और चुदने में भी!

    स्मिता- तुम्हें औरतों में क्या ज्यादा पसंद है चूचे या गांड? वरुण- मुझे औरटों की मोटी गांड बहुत पसंद है, हमेशा मसलने का मन करता है.

    वरुण- तुमने कितना बड़ा लण्ड ट्राई किया हुआ है? स्मिता- 9″… एक मेरा बॉयफ्रेंड था उसका बहुत लम्बा एंड मोटा था. उसके साथ करीब 3 महीने तक चला था मेरा!

    स्मिता- तुम्हारा बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस क्या था आज तक का? वरुण- मेरा बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस मम्मी की सहेली के साथ था. मुझे पता था कि वो चुदक्कड़ है, मेरा उनके घर आना जाना भी था, एक दिन उनकी सीडी कंप्यूटर में अटक गयी थी तो उसने मुझे बुलाया और बोली- सीडी अटक गयी है निकाल दो. थोड़ी मेहनत करने के बाद सीडी चल गयी. जब चली तो पता लगा कि वो पोर्न मूवी थी. मैं पोर्न देखने लगा तभी मुझे अहसास हुआ कि आंटी का हाथ मेरे लण्ड पे है और वो पकड़ के बोली ‘एकदम मर्द है… चल मुझे स्वर्ग की सैर करवा दे!’ फिर हम एक दूसरे के साथ सेक्स में मस्त हो गए. हमें पता ही नहीं लगा कि उनकी बेटी जो मेरे से थोड़ी छोटी थी, आकर गेट पे खड़ी हो गयी और चिल्लायी ‘मम्मी, ये क्या कर रहे हो?’ हमने फटाफट कपड़े पहने और उससे बात करने लगे. आंटी ने उसे समझाया कि उसके पापा आंटी को सन्तुष्ट नहीं कर पाते. उसका रिप्लाई बहुत शॉकिंग था, वो बोली ‘ठीक है, आपकी लाइफ है जैसे मर्ज़ी एन्जॉय करो… लेकिन मुझे अपने बॉयफ्रेंड के साथ मस्ती करनी होगी तो मैं घर पर लेकर आऊँगी. और जाते जाते मुझे आँख मारती हुई बोली ‘नाईस कॉक!’

    वरुण- स्मिता, तुम्हारा बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस क्या था आज तक का? स्मिता- मेरे बॉयफ्रेंड ने पार्टी दी थी. वो एक पूल पार्टी थी. मुझे पता नहीं था कि वहां ड्रेस कोड है, मैं मिनी पहन कर चली गयी, लेकिन ड्रेस कोड स्विमिंग कोस्टयूम था जो मेरे पास था नहीं. सभी तो वहां पे स्विमिंग कोस्टयूम पहने हुए थे! एक कपल बोले ‘बिना स्विमिंग कोस्टयूम के पूल में नहीं जा सकते!’ एक लड़की बोली ‘स्मिता तुम नंगी हो जाओ, फिर तुम जा सकती हो.’ तभी मेरा बॉयफ्रेंड पीछे से आया और मेरे चुच्चे दबाने लगा. मेरे कान में बोला ‘क्या मैं तुम्हें नंगी कर सकता हूँ, सबको जलाना चाहता हूँ कि मेरी गर्लफ्रेंड कितनी हॉट है.’ मैंने भी बोला ‘तुम मुझे नंगी करो, मैं तुम्हें करती हूँ.’ फिर वो बोला ‘यो बेबी…सेक्स इन द पूल! मेरा फिगर देख कर सबके होश उड़ गए फिर हम सबने कपड़े उतार दिए और हम लोगों ने पूल में ही सेक्स किया. सब लोग मुझे चोदने की फिराक में थे, उस रात हमने 3 बार सेक्स किया.

    स्मिता- तुम्हें सेक्स में कौन सी पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद है? वरुण- डोगी स्टाइल! वरुण- तुम्हें सेक्स में कौनसी पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद है स्मिता- यही डोगी स्टाइल!

    स्मिता- आखिरी बार कब और किसके साथ सेक्स किया था तुमने? वरुण- आज मॉर्निंग में पड़ोस वाली आंटी के साथ जब उसका पति वॉक पे गया हुआ था!

    वरुण- तुम्हारी कोई ऐसी सेक्स की इच्छा जो अभी तक पूरी ना हुई हो और तुम पूरा करना चाहते हो? स्मिता- मैं रात को समुद्रतट पर सेक्स करना चाहती हूँ पूरी रात!

    स्मिता- तुम बताओ कोई ऐसी औरत जिसको तुम चोदना चाहते हो लेकिन अभी तक चोद नहीं पाए हो, तुम्हारी सपनों की रानी? वरुण- मैं अपनी माँ को चोदना चाहता हूँ. स्मिता- क्या वो तुम्हारी सौतेली माँ है? वरुण- नहीं, वो मेरी सगी माँ है.

    वरुण- स्मिता, तुम बताओ क्या तुम्हें लगता है कि ये गलत है ऐसा सोचना? स्मिता- मैं जवाब देने से पहले तुम्हारे और तुम्हारे माँ के बारे में जानना चाहूँगी. स्मिता- तुम्हारी माँ का नाम क्या है? वरुण- उसका नाम सविता अग्निहोत्री है. स्मिता- उम्र क्या है तुम्हारी माँ की? वरुण- लगभग 48 साल! स्मिता- क्या करती है तुम्हारी माँ? वरुण- उसकी अपनी शॉप है, खुद का बिजनेस है! स्मिता- किस चीज का बिजनेस है? वरुण- मॉडर्न लौन्ज़री शॉप!

    स्मिता- तुम्हारे पापा क्या करते हैं और वो कहाँ रहते हैं? वरुण- पापा हमारे साथ नहीं रहते, वो 3 साल पहले मम्मी को छोड़ कर चले गए थे, उसके बाद वो कभी लौट कर नहीं आये. स्मिता- आई एम् सॉरी! अच्छा ये बताओ, तुम्हें तुम्हारी माँ में क्या अच्छा लगता है जो तुम्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है? वरुण- वैसे तो वो पूरी ही माल है, लेकिन मुझे उसके मोटे मोटे चूचे और मस्त गोल गोल मोटी गांड बहुत पसंद है!

    स्मिता- सबको औरत में चूचे और गांड ही पसंद होती है, तुम्हारी माँ में क्या ज्यादा मस्त है उसकी गांड या चूचे? वरुण- मुझे और बाकी सबको भी उसकी गांड ही पसंद है, जब वो चलती है तो उसके भरे हुए चूतड़ क्या मस्त हिलते हैं, पागल कर देते हैं। स्मिता- बाकी सब कौन? वरुण- मेरे दोस्त लोग। स्मिता- तुम्हें कैसे पता कि तुम्हारे दोस्तों को तुम्हारी माँ की गांड पसंद है? वरुण- मैंने सुना है उन लोगों को बात करते हुए… और एक बार की बात है, मैं अपने एक दोस्त के साथ दारू पी रहा था, हम दोनों ने काफी पी ली थी। फिर हम लड़की की बातें करने लगे तब वो बोला कि तेरी माँ जैसी मस्त औरत कोई नहीं है। क्या तूने साली की गांड देखी है जब वो चलती है, लंड में आग लगा देती है। मैं सोच भी नहीं सकता कितनी चुदक्कड़ होगी तेरी माँ।

    स्मिता- बहुत हॉट लगती है तेरी माँ! अच्छा यह बता कि तूने अपनी मॉम को नंगी देखा है? वरुण- हाँ, दो बार देखा है. स्मिता- कैसे? वरुण- पहली बार ऐसा हुआ कि मैं मम्मी के रूम में अचानक चला गया, मैंने ऐसा सोचा नहीं था कि ऐसा हो जायेगा। जैसे ही मैं अंदर गया तो देखा कि माँ शीशे के सामने नंगी खड़ी है और खुद को शीशे में निहार रही है, मेरी नज़र सीधे उसकी गांड पे गयी, क्या मस्त मोटी गांड थी. दूसरी बार तब देखा जब एक रात मैं रात को पानी पीने उठा तो देखा माँ के रूम की लाइट जल रही थी रात के 2 बजे होंगे। मेरा रूम ऊपर है और माँ का नीचे और मेरे रूम की जाली से माँ का बेड दिखता है। उस रात मैंने देखा कि मेरी माँ बेड पे नंगी लेटी हुई है और अपनी चूत को रगड़ रही है और फ़ोन पे किसी से बात कर रही है। जब मैंने यह सीन देखा तो मुझसे रहा नहीं गया और अलमारी में रखी हुई दूरबीन से मम्मी के रूम में देखा, क्या मस्त नज़ारा था माँ एकदम गर्म हो रही थी और तेज़ी से अपनी चूत रगड़ रही थी, शायद अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही होगी।

    स्मिता- तुझे कैसे पता कि वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी, क्या उसका बॉयफ्रेंड है? वरुण- मुझे पता है वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही होगी! स्मिता- कैसे? तुम्हें कैसे पता कि वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी? वरुण- मेरा एक दोस्त है, वो माँ का बॉयफ्रेंड था.

    स्मिता- तुम्हें इस बात का कैसे पता कि तुम्हारा दोस्त तुम्हारी माँ का बॉयफ्रेंड था? वरुण- यह बात भी दारू पे हुई, हम दोनों एक रात उसके घर पे दारू पी रहे थे और हम दोनों ने बहुत ज्यादा पी ली थी। मैं बोला कि यार चुदाई किये हुए बहुत दिन हो गए, बहुत मन हो रहा है, तब वो बोला ‘बुरा मत मानना तो एक बात बताऊँ?’ मैं बोला ‘बता…’ वो बोला ‘भाई, चोदने के लिए तुझे कहीं बाहर ढूंढने की क्या जरूरत है तेरी माँ है ना, बहुत बड़ी चुदक्कड़ है उसी को चोद… मज़ा आ जायेगा।’ यह बात सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने उससे पूछा ‘तुझे क्या पता कि मेरी माँ चुदक्कड़ है?’ वो बोला ‘मैं तेरी माँ का बॉयफ्रेंड था, दो महीने तक खूब चोदा है तेरी माँ को। फिर उसने मेरी माँ के मैसेज दिखाये मुझे।

    स्मिता- उससे पूछा नहीं कि कितने बॉयफ्रेंड रह चुके हैं तुम्हारी माँ के? वरुण- फिर मैंने सोचा कि क्यों ना माँ के बारे में और मालूम किया जाये और मैंने उसे और दारू पिलाई और फिर बहुत कुछ पूछा। स्मिता- तो क्या बताया कितने यार रह चुके है तेरी माँ के? वरुण- वो माँ का नौवां बॉयफ्रेंड था.

    स्मिता- और क्या पूछा, तेरी माँ को मुख सेक्स में क्या पसंद है? वरुण- उसको चूत चटवाना पसंद है और डोगी स्टाइल उसकी पसंदीदा सेक्स पोजीशन है.

    स्मिता- सही में तेरी माँ चुदक्कड़ लगती है, ये बता कि अगर तेरी माँ सच में मिल जाये तो उसको चोदेगा? फट तो नहीं जायेगी तेरी? वरुण- अगर मौका मिला तो ऐसी चूत चुदाई करुगा माँ फैन हो जायेगी मेरी, खुश कर दूँगा उसको! स्मिता- अगर एक लाइन अपनी माँ के लिए बोलगे तो क्या बोलोगे? वरुण- शी इस अ हॉट फकिंग बिच! ( वो एक गर्म चोदने लायक कुतिया है.)

    स्मिता- चल तेरी माँ को चोदने का प्लान बनाते हैं। ये बता तेरी माँ के साइज क्या हैं? वरुण- वो तो नहीं पता, बस यह पता है कि बहुत बड़े हैं। स्मिता- सबसे पहले वही पता करते हैं। वरुण- कैसे? स्मिता- तेरी माँ कैसे कपड़े पहनती है पारंपरिक जैसे साड़ी सलवार कुर्ता या आधुनिक जैसे जींस टॉप, स्कर्ट आदि? वरुण- दोनों तरह के ही पहनती है लेकिन आधुनिक ज्यादा पहनती है.

    स्मिता- अच्छा अब ध्यान से सुन, अपनी माँ को शॉपिंग पे लेकर जाना और कुछ मॉडर्न ड्रेस दिलवाना! और जब वो उन ड्रेस को ट्राई करने जाये तो उसको छोटे साइज की ब्रा पेंटी लेकर देना और उनको भी ट्राई करने को बोलना, शायद वो मना कर दे तो जिद करना… अगर उसने ट्राई की तो वो जरूर बोलेगी क़ि ये छोटी हैं. और फिर तू बहुत बड़ी वाली लेकर जाना. वो फिर बोलेगी कि बड़ी है तब तू मैसेज करके बोलना कि माँ आपका साइज़ बता दो, मैं आपके साइज की ले आऊँगा और ट्रांसपेरेंट टाइप की ब्रा पेंटी लेना।

    वरुण- अच्छा ठीक है, वैसे मैं आज रात ही जयपुर जा रहा हूँ. अगर सब कुछ सही रहा तो कल तुम्हें मैसेज करके बताता हूँ कि माँ का क्या साइज है।

    कहानी जारी रहेगी. दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है? अपने कमेंट्स जरूर भेजें! मेरा ईमेल है: sexgurumd@gmail.com PART2 मेरी सेक्स कहानी के प्रथम भाग मेरे बेटे की डायरी: बेटे ने अपनी माँ को चोदा-1 में आपने पढ़ा कि मुझे अपने बेटे की डायरी से पता चला कि वो अपनी मॉम को यानि मुझको चोदना चाहता है. मैंने उसके मन की बात जानने के लिए उसकी फोन फ्रेंड बन कर उससे चैट की, फिर सेक्स चैट पर आकर उससे सब कुछ पूछा! अब आगे:

    वरुण सुबह जयपुर पहुँच गया और अपनी माँ से मिला, दोपहर के टाइम उसने अपनी माँ से कहा- माँ मैं आपके लिए मॉडर्न ड्रेसेस लेना चाहता हूँ, क्या आप मेरे साथ चलोगी? सविता- बेटा शॉपिंग तो करनी थी मुझे, लेकिन मैं अकेले चली जाऊँगी, तू कहाँ परेशान होगा लेडीज की शॉपिंग में। वरुण- माँ, परेशानी की क्या बात है, मुझे अच्छा लगेगा आपको शॉपिंग करवा कर!

    सविता- बेटा मुझे अंडर गारमेंट्स भी लेने हैं, तुझे अजीब लगेगा. वरुण यह सुन कर सोचने लगा कि यह तो लॉटरी लग गयी, फिर बोला- माँ, हम पहले कपड़े ले लेंगे फिर आप अपने अंडर गारमेंट्स ले लेना! सविता- ठीक है, ऐसा कर लेंगे।

    फिर हम शॉपिंग करने एक मॉल में गए और वहाँ पर हमें एक सेल्समैन ने अटेंड किया और उसने बहुत अच्छे मॉडर्न ड्रेसेस दिखाई जो हमे पसंद आयी, करीब 12 ड्रेसेस के साथ माँ को पहन कर देखने के लिए भेज दिया और फिर:

    वरुण- मुझे मैडम के लिए ब्रा पेंटी देखनी है, कुछ अच्छी ब्रा पेंटी दिखा दीजिये! सेल्समैन- सर, हमारे पास एकदम अलग कुछ हट कर ब्रा पेंटी हैं, जो मैडम पर बहुत अच्छे लगेंगी. वरुण- दिखाओ?

    सेल्समैन- मैडम का साइज क्या होगा? वरुण- साइज का तो आईडिया नहीं है, तुम्हें क्या लगता है क्या साइज होगा? सेल्समैन- सर, मेरे हिसाब से 36 आयेगा मैडम को! वरुण- एक काम करो 34 निकाल दो, मैं ट्राई करवा लेता हूँ.

    एक सेट लाकर ट्राई रूम के पास जाकर वरूण बोला- माँ, आपको कैसी लग रही है ड्रेसेस? सविता- बहुत अच्छी हैं. वरुण- माँ, कुछ और ड्रेसेस हैं, ट्राई कर लो, आज सारी शॉपिंग मेरी पसंद से करेंगे! सविता- ओके! मैंने ट्राई रूम से हाथ बहार निकाल कर वरुण से ब्रा पेंटी पकड़ ली!

    ब्रा पेंटी ट्रायल रूम में लेने के बाद माँ ने यानि मैंने मैसेज किया- ये मैं अपने आप ले लूंगी. वरुण- आपने अभी बोला है कि आज शॉपिंग मेरी पसंद से होगी, वैसे आपको पसंद नहीं है क्या? सविता- अच्छी है लेकिन छोटी है, फिट नहीं आ रही है. वरुण- ओके माँ, मैं बड़ा साइज लेकर आता हूँ।

    फिर मैं सेल्समेन के पास गया और बोला- छोटी है, बड़े साइज की दो. सेल्समैन- सर, मैंने तो कहा ही था 36 आएगी। वरुण- हाँ, तुम सही कह रहे हो। तुम 38 साइज का दे दो!

    वरुण बड़ी ब्रा पेंटी लेकर ट्राई रूम के दरवाजे पर आया और बोला- माँ, ये बड़े साइज का ट्राई करो! सविता- ये बहुत बड़ा है इससे छोटा चाहिए, तुम सेल्समेन को बोल दो, वो दे देगा! वरुण- माँ, आप अपना साइज़ मुझे मैसेज कर दो, मैं उसी साइज का ले आऊँगा! सविता- मैं खुद ले लूंगी.

    वरुण- माँ आपने कहा था शॉपिंग मेरी पसंद से होगी, आप अपना साइज दो, मैं लेकर आता हूँ! सविता- ठीक है, 36डी 32 38

    फिर हमने इस साइज की 3 ब्रा पेंटी का सेट लिया और फिर हम घर के लिए निकल गए। जब हम कार में थे तो मेरे बेटे ने मुझसे पूछा- माँ शॉपिंग करके कैसा लगा? सविता- अच्छा लग रहा है!

    फिर हमने थोड़ी जनरल बातें की और घर पे आ गए.

    और घर आकर सबसे पहले वरूण स्मिता को मैसेज किया- धन्यवाद स्मिता, माँ को शॉपिंग पे लेकर गया था और माँ के साइज पता लग गए। आगे क्या करना है? स्मिता- अब रात को… थोड़ी लेट में अपनी माँ को मैसेज करना और पहले उनकी तारीफ करना फिर थोड़ा ओपन चैट करने की कोशिश करना। अगर कर सको तो उनके फिगर की तारीफ कर देना! फिर कोशिश करना कि ओपन चैट हो और अपने माँ के बॉयफ्रेंड बनने की बात करना। उसके बाद जितनी ज्यादा चैट कर सको उतना अच्छा!

    खाना खाने के बाद करीब 11 बजे मेरे बेटे ने मुझको मैसेज किया और बोला- आप सोयी नहीं क्या? सविता- नहीं, अभी नींद नहीं आ रही है. वरुण- मुझे भी नींद नहीं आ रही है, क्या हम बातें कर सकते हैं? सविता- हाँ, क्यों नहीं! वरुण- क्या आप मेरी दोस्त बनोगी? सविता- हाँ ठीक है! वरुण- और अगर मैं दोस्ती में कुछ आपको बोल दूँ तो प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना, मैं अपने दोस्तों के साथ थोड़ा फ्रैंक हो जाता हूं. सविता- कोई प्रॉब्लम नहीं है।

    वरुण- आपको शॉपिंग में क्या अच्छा लगा? सविता- सब कुछ अच्छा था, मज़ा आया शॉपिंग में। ऐसे कपड़े तो शायद मैं भी नहीं लेती, तुझे क्या अच्छा लगा? वरुण- मुझे तो आपकी ब्रा पेंटी की शॉपिंग में बहुत मज़ा आया! सविता- क्यों? वरुण- मैंने पहले कभी ऐसी शॉपिंग नहीं की वो भी एक औरत के लिए जिसके इतने मोटे चूचे और इतनी मोटी गांड हो, सॉरी माँ, लेकिन आज में अपने विचार कण्ट्रोल नहीं करना चाहता! सविता- कोई बात नहीं, आज तूने मुझे इतनी अच्छी शॉपिंग करवाई और आज तू दोस्त भी बना है। लेकिन कोशिश करो थोड़ा लिमिट में रहो!

    वरुण- माँ, आपका इतना मस्त फिगर है लड़के आपको ताड़ते नहीं हैं? सविता- बहुत ताड़ते हैं, कौन रोक सकता है उनको! वरुण- आपको किसी ने प्रपोज़ नहीं किया अभी तक? सविता- किया है… लेकिन इन सब कामों के लिए मैं बूढ़ी हो चुकी हूं. वरुण- आपको देख कर कहीं से भी नहीं लगता कि आप बूढ़ी हो। आपके चेहरे की रौनक, आपका फिगर, आपके मोटे मोटे बूब्स और गांड किसी को भी पागल कर दे! सविता- थैंक्स बेटा!

    वरुण- आपको मेरी कसम है, एक बात सच सच बताना, पापा तो चले गए अब क्या आपका सेक्स करने का मन नहीं करता? सविता- करता है… लेकिन कोई ऑप्शन नहीं है मेरे पास! वरुण- माँ, मेरी नज़र में तो आपको अपनी इच्छा पूरी करने का हक़ है, अगर आपको सेक्स करने का मन होता है तो आपको पूरा हक़ है कि आपकी बहुत अच्छे से चुदाई हो! सविता- ऐसा नहीं हो सकता, कौन मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनायेगा?

    वरुण- सच तो यह है कि अगर मेरा बस चलता तो मैं ही आपको अपनी गर्लफ्रेंड बना लेता। बाकी तो आपके ऊपर है आपको कैसा रिलेशनशिप चाहिए- लम्बे अरसे तक के लिए या सिर्फ सेक्स के लिए। मेरी तरफ से पूरी छूट है आपको! सविता- मुझे बॉयफ्रेंड बनाना नहीं आता।

    वरुण- चलो आपका पहला बॉयफ्रेंड में बनवा दूँगा लेकिन ये बताओ आपको कैसा रिलेशनशिप चाहिए? सविता- मुझे अभी कुछ ज्यादा पता नहीं, तो अभी के लिए तो बस 1-2 महीने के लिए बॉयफ्रेंड बन जाये! वरुण- आपको किस उम्र के लड़के पसंद हैं? सविता- 24-27 साल का हो! वरुण- अपना जीवन जीने के लिए तैयार हो जाओ, ऐसा बॉयफ्रेंड बनवाऊँगा कि रोज़ चुदोगी अब आप! सविता- शर्म नहीं आती ऐसी बातें बोलते हुए? वरुण- मैं तो सिर्फ बोल रहा हूँ, और आप तैयार हो जाओ चुदने के लिए!

    वरुण ने स्मिता को मैसेज किया और बताया क़ि वरुण की सविता से क्या बात हुई. स्मिता- क्या बात है… तुम्हारी माँ तो चुदने के लिए तैयार बैठी है, जाओ और चोदो अपनी माँ को! वरुण- कैसे, क्या वो मुझसे चुदने के लिए मानेगी?

    स्मिता- बिल्कुल मानेगी, बस एक कदम और लेना है तुझे! एक बिल्कुल ट्रांसपेरेंट बिकिनी लेकर आ और एक लेटर लिख अपनी माँ को, कि अगर अपनी चूत की आग मिटानी है तो आज रात मेरे कमरे में आ जाना और सिर्फ ये ब्रा पेंटी पहन कर आना। एक बेटे का लंड अपनी माँ की चूत की प्रतीक्षा कर रहा है… और हो सके तो गिफ्ट देने से पहले अपनी मॉम से थोड़ी हॉट चैट कर लेना वरुण- थैंक यू स्मिता!

    शाम को करीब 6 बजे: वरुण- कैसा लग रहा है माँ? सविता- अच्छा लग रहा है, तूने सोये हुए अरमान जगा दिए, क्या प्लान है तेरा कब बनवा रहा है मेरा बॉयफ्रेंड? वरुण- अच्छा बॉयफ्रेंड बनवाने में थोड़ा टाइम लगेगा लेकिन अगर सिर्फ एन्जॉय करना है तो एक प्लान है मेरे पास! सविता- क्या प्लान है बेटा? वरुण- मिल कर बताऊँगा!

    9 बजे वरुण मेरे रूम में आया और बोला- माँ, आज रात का प्लान तो सेट नहीं हो पाया लेकिन आपके लिए एक गिफ्ट है, मेरे जाने के बाद आप इसे खोल कर देखना।

    जब मैंने गिफ्ट खोल कर देखा तो एक ट्रांसपेरेंट बिकिनी और एक लेटर था जिस में लिखा था: माँ, जब से जवान हुआ हूँ, तुम्हें ही चाहता हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि तुम भी बहुत चुदक्कड़ हो और चुदने के लिए तैयार हो. तो क्यूँ न मिल कर एक दूसरे की इच्छा पूरी करें! भूल जाओ कि हम माँ-बेटे हैं, बस यह याद रखो कि तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द। अगर आज की रात यादगार बनाना चाहते हो तो सिर्फ मेरी दी हुई बिकनी पहनकर मेरे आलिंगन में आ जाओ! और मैं वादा करता हूँ कि तुम्हें खुश रखूंगा। एक बेटे का लंड अपनी माँ को चोदने के लिए उत्तेजित है! आपका बेटा

    मैं तो इंतजार ही कर रही थी इस घड़ी का! रात करीब 11.30 को मैंने वरुण के कमरे का दरवाजा खटखटाया. जैसे ही वरुण ने दरवाजा खोला, मैं हैरान रह गयी, रूम फूलों और मोमबत्तियों से सजा हुआ था और बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी, यह खुशबू मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी.

    हम माँ बेटे एक दूसरे को देख रहे थे. फिर वरुण बोला- मुझे विश्वास था मॉम, कि आप आज रात आओगी मेरे कमरे में! इतना बोलते हुए उसने मुझे अपने कमरे में खींच लिया और मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और पागलों की तरह चूसने लगा।

    तभी मुझे अहसास हुआ कि उसके हाथ मेरे चूतड़ सहला रहे हैं. और धीरे-2 उसने अपने हाथों का दबाव बढ़ाना शुरू किया, मेरा बेटा वरुण अपनी मॉम यानि मेरे मोटे चूतड़ों को अपने सख्त हाथों से बहुत जोर-2 से दबा रहा था और मैं तो जैसे सातवें आसमान में थी.

    फिर वरुण ने मुझे अपने हाथों में उठाया और अपने बेड पे लिटा दिया। पूरे बेड पे फूल बिखरे हुए थे और मेरी कामुकता, मेरे अन्दर की हवस जाग चुकी थी। फिर वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे होंठों को चूसने लगा और मेरे चूचों को जोर-2 से दबाने लगा।

    मैंने भी तब तक उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया, मेरे बेटे का एकदम टाइट लंड मजबूत औज़ार की तरह लग रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे एक जानवर पैन्ट में समाया हुआ था। फिर मैंने उसको बिस्तर पे लिटाया और उसको नंगा कर दिया। अब मेरे बेटे की जांघों के बीच का वो जानवर मेरी नज़र के सामने था, मैंने उसके लंड को कस कर हाथ में पकड़ा और अपने हाथों से सहलाया.

    वरुण की सिसकारियां चालू हो चुकी थी- आआआआ… मज़ा आ रहा है। मैंने बेटे का लंड अपने मुंह में लिया, मानो वरुण तो पागल ही हो गया हो, मेरी जीभ के गर्म स्पर्श से उसका लंड और टाइट हो रहा था मानो फट ही जायेगा.

    मेरा बेटा बहुत तेज आहें भर रहा था, वो बोला- आह मॉम, आज से पहले किसी ने मेरा लंड ऐसे नहीं चूसा।

    अब वरुण ने मुझे अपने नीचे पटका और झटके से मेरे सारे कपड़े फाड़ दिए, मैं समझ चुकी थी कि आज मेरी जोरदार चुदाई होने वाली है।

    वरुण ने मुझे उल्टा किया और मेरे चूतड़ों को जोर-2 से दबाने लगा और अपने होंठों को मेरे चूतड़ पे लगा कर चूसने लगा। मैं मस्त होती जा रही थी. फिर उसने मुझे सीधी किया और मेरे मोटे-2 बूब्स को जोर-2 से चूसने लगा और अपने एक हाथ से मेरी चूत को सहला रहा था।

    अचानक उसने अपनी एक उंगली मेरी चूत में डाली, मेरी चूत पहले से ही गीली हो रही थी। फिर वरुण धीरे-2 नीचे जाने लगा मेरी चूत की तरफ। उसने अपने होंठ जैसे ही मेरी चूत पर लगाकर चूसना शुरू किया, पूरा कमरा मेरी सिस्कारियों से गूँज रहा था- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ आह… 10 मिनट उसने मेरी चूत को चूसा।

    फिर मैंने उसे चोदने का इशारा किया, मेरा इशारा पाते ही उसने अपने जानवर को मेरी कोमल सी चूत मुंह पे लगाया और एक ही झटके में पूरा अंदर डाल दिया और मेरे मुँह से बहुत तेज सिसकारी निकली- अआह… हहा… जिससे पूरा कमरे का माहौल गर्म हो गया और मेरी सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूंज रही थी और इन्ही सिसकारियों के बीच वरुण ने अपने चोदने की स्पीड बढ़ा दी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत में तूफान आ गया है। चुदाई के जोश में हमें याद ही नहीं रहा की वरुण ने कंडोम नहीं पहना है।

    आज मेरा बेटा पूरे मर्द की तरह अपने माँ की चुदाई कर रहा था। पूरा कमरा मेरी सिसकारियों से गर्म हो रहा था.

    इसी बीच मेरी जोरदार चीख निकली और मैं झड़ गयी और मैं वरुण से बोली- अपनी मॉम की चूत में अपना माल मत छोड़ना। उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मेरे मुंह में दे दिया। मैं लंड की भूखी बेटे के गीले लंड को चूसने लगी क़ि तभी उसने एक पिचकारी मेरे मुंह में ही छोड़ दी।

    फिर हम माँ बेटा एक दूसरे के बगल में लेट गए और बातें करने लगे, वो बोला- माँ, तुम जैसी मस्त औरत नहीं देखी, शक्ल से जितनी भोली हो, उतनी ही ज्यादा चुदक्कड़ हो। फिर उसने मुझे अपनी फ्रेंड स्मिता के बारे में बताया।

    तब मैंने उसे सारी सच्चाई बतायी कि इतने दिन से तू मुझसे ही बातें कर रहा था और जब तू अपनी दोस्त को बोल रहा था कि अपनी माँ को चोदने चाहता है तब तू मुझे ही बता रहा था कि तू मुझे चोदने चाहता है।

    उस रात मुझे एक स्थायी टिकाऊ बॉयफ्रेंड मिल गया, उसके बाद उस रात हमने 3 बार चुदाई की।

    harddick21blog

    Threesome fun, brutal execution

    मेरा नाम अजित है मैं कोलकाता से हू मेरी उम्र 30 हू मुझे लड़की भाभी की चूत चाटना पसंद है और डर्टी सेक्स करना और कपल के साथ सेक्स करना पसंद है और लड़की की चूत चाट के उसका पानी पीना पसंद है.

    दोस्तो मुझे कुछ दिन पहले निशांत नाम के आदमी पनी कहानी भेजी दोस्तो निशांत ने अपनी कहानी कुछ इस तरह बताई कि अपनी सुहागरात के दिन वो बहुत डरा हुआ था और वही हुआ. उसने बताया कि सुबह तक वो अपनी दुल्हन से बातें करता रहा, प्यार करता रहा, उसकी चुचिया दबाई उसकी चूत सहलाई पर उसका लंड खड़ा ही नही हुआ.

    उसकी वाइफ बहुत गरम हो गई थी, उसने पायजामे का नाडा खोलना चाहा तो इसने उसका हाथ धकेल दिया लेकिन उसने ज़बरदस्ती इसका नाडा खोला तो कभी वो इसका चेहरा देखती तो कभी इसके लंड (सिर्फ़ नाम का) को और वो रोने लगी, इसकी छाती पर घुसे मारने लगी, दोनो हाथों से इसके दोनो गालों पर थप्पड़ मारने लगी.

    वो बोली तुम ऐसे थे तो शादी क्यों की, मेरी ज़िंदगी क्यों खराब की. निशांत ने बताया कि उसने अपनी वाइफ के पैर पकड़े, माफी माँगी और बदनामी नही करने को कहा. काफ़ी जद्दो जहद के बाद वो इस बात पर राज़ी हो गई कि वो किसी से भी चुदवायेगि निशांत कुछ नही बोलेगा, बेचारा क्या करता हां कर दी. निशांत की शादी लुधियाना मे हुई थी और मध्य प्रदेश मे जॉब करता था सो कुछ दिन बाद वो अपनी वाइफ को लेकर ऍम.पी जबलपुर मे उपर के दो कमरे वाले मकान मे किराए पर रहने लगा.

    पड़ोस मे चार लड़के ( दो सरदार, एक बंगाली और एक बिहारी ) रेंट पर रहते थे. एक शाम को ऑफीस से आने के बाद वो छत पर अपनी वाइफ के साथ चाय पी रहा था तो उसने देखा उसकी वाइफ बगल वाली छत पर दो लड़कों को बार बार देख रही थी. थोड़ी देर मे उसकी वाइफ ने उन लड़को से कहा भैया आप लोग क्या करते हो, उनके अनुसार एक जॉब करता था और कॉलेज मे पढ़ता था. बातों ही बातों मे पता चला कि दोनो सरदार भी कॉलेज मे पढ़ते है और चारो मे पक्की दोस्ती है.

    एक शाम निशांत ऑफीस से रात 9 बजे घर आया, अंदर जाकर देखा तो एक सरदार (पड़ोस वाला लड़का) सोफे पर बैठा था और उसकी वाइफ उसके सामने बेड पर बैठ कर बातें कर रहे थे. फ्रेश होकर निशांत भी सरदार के बगल मे सोफे पर बैठ गया. दो चार बातें करने के बाद उसकी वाइफ तीनो के लिए प्लेट्स मे खाना लेकर आई, खाना खाने के बाद तीनो ने कॉफी पी. निशांत सोच रहा था इन दोनो ने ज़रूर चुदाई की होगी.

    उसकी वाइफ बोली आप टाइयर्ड दिख रहे है दूसरे कमरे मे जाकर लेट जाओ. बेचारा निशांत अपनी कमज़ोरी के कारण चुप चाप दूसरे कमरे मे जाकर लेट गया पर वो परेशान हो रहा था की वो इधकेला लेटा है और दूसरे कमरे मे उसकी वाइफ एक जवान लड़के के साथ अकेली ???? इस वक़्त क्या कर रहे होंगे. निशांत दबे पावं कमरे से बाहर आया तो देखा कमरे के दरवाजे पर परदा बंद था, उसने चुपके से उंगली से परदा साइड मे किया सामने सरदार उसकी वाइफ की मॅक्सी उपर उठाकर दूध पी रहा था.

    उसने बताया कि उसके पूरे बदन मे आग लग गई, उसका मन किया कि दोनो की जान लेलू पर अपनी नमार्दानगी के कारण चुप चाप खड़े खड़े पर्दे की ओट से देखता रहा सरदार जी उसकी वाइफ के दोनो दूध पीता, गर्दन और गालों को चूमता, इसके बाद सरदार ने उसकी वाइफ को बेड पर लिटाया और पेट के उपर चाटने लगा, सयद गुदगुदी के कारण उसकी वाइफ बीच बीच मे ज़ोर से हंस रही थी.

    सरदार ने उसकी वाइफ की मॅक्सी उतार कर अलग फेंक दी और उसके दोनो पैरो के घुटनो को मोड़ कर उसकी चूत को चाटने लगा. थोड़ी देर मे सरदार ने अपने कपड़े उतारकर पूरा नंगा हो गया. निशांत उसका लंड देख कर हैरान रह गया. उसका दिल धक धक करने लगा और सोचने लगा क्या सरदार का लंड उसकी वाइफ की चूत को फाड़ तो नही देगा? निशांत को शायद पता नही था कि औरत की चूत भी कमाल की होती है जो छोटा, मोटा, टेढ़ा और कितना भी लंबा लंड हो गपक जाती है और चूं भी नही करती.

    जितना मोटा और जितना लंबा लंड चूत मे घुसेगा, चूत मौसमी चटर्जी की तरह हँसती है, केवल एक बार अंदर जाना चाहिए. सरदार जी ने उसकी वाइफ की चूत पर अपना थूक लगाया और लंड अंदर डालने की कोसिस करने लगा, सरदार के ज़ोर लगाने पर उसकी वाइफ नीचे से अपने चुतड साइड मे कर देती शायद लंड मोटा होने के कारण अंदर नही घुस रहा था और उसकी वाइफ को दर्द हो रहा था.

    उसकी वाइफ ने सरदार से इशारा कर ड्रेसिंग टेबल से आयिल की बोतल मंगाई और अपनी चूत पर खूब सारा आयिल लगाया और सरदार के लंड को भी आयिल से गीला कर दिया. अब सरदार ने एक धक्का मारा तो निशांत की वाइफ आआआआआआ की आवाज़ कर ज़ोर से चिल्लाई, निशांत भी अपनी जगह पर खड़े खड़े हिल गया जैसे सरदार का लंड इसकी गान्ड मे घुसा हो, होता है आख़िर निशांत की अपनी सग़ी वाइफ थी.

    बेचारा अपनी नई नई दुल्हन को पराए लड़के से चुद्ते हुए देख रहा था, खुद एक बार भी नही चोद पाया. ज़्यादा देर नही देख सका और दूसरे कमरे मे आकर लेट गया. करीब एक घंटे के बाद उसकी वाइफ उसके पास आई और बोली नाराज़ क्यों होते हो तुमने प्रॉमिस किया था आख़िर मेरे भी अरमान हैं, तुम्ही बताओ मैं क्या करूँ और वो निशांत से लिपटकर प्यार करने लगी.

    सनडे का दिन था, निशांत की वाइफ ने उस से कहा आज डिन्नर पर चारों लड़को ो इ्वाइट करते है और 8 बजे रात चारों लड़के उनके घर मे आए. निशांत ने दिन भर महसूस किया उसकी वाइफ आज बहुत एग्ज़ाइटेड थी, शाम को गजब का मेकप किया था. निशांत के दिमाग़ मे सारे दिन घंटियाँ बजती रही कि आज क्या गुल खिलने वाला है. चारों लड़के सोफे पर बैठ गये और वो अपनी वाइफ के साथ बेड पर बैठ गया.

    घर की और चारों लड़कों की दिन चर्या के बारे मे बाते हुई. बिहारी लड़का उठकर गया और एक विस्की की बोतल 4 बीअर लेकर टेबल पर रख कर उसकी वाइफ से बोला भाभी जी 6 ग्लास लेकर आओ प्लीज़. वो बोली मैं ड्रिंक नही करूँगी, कभी नही की. उन्होने केवल बीअर पीने के लिए ज़ोर देकर 6 ग्लास टेबल पर आ गये. लड़कों ने विस्की पी, निशांत और उसकी वाइफ ने बीअर. एक ग्लास पीने के बाद ही निशांत की वाइफ को नशा हो गया.

    निशांत ने सबके लिए प्लेट्स मे मटन, रोटी और चावल परोसे और फिर पीने और खाने का दौर चल पड़ा. इस बीच लड़कों ने उसकी वाइफ के ग्लास मे बीअर के साथ विस्की मिक्स कर उसे पिलाई. उसकी ज़बान लड़खड़ाने लगी. सबके सामने निशांत को किस करने लगी, शायद निशांत को भी ज़्यादा नशा हो गया था और वो भी किस करते हुवे उसके दूध को दबाने लगा. थोड़ी देर मे निशांत उसका ब्लाउस और ब्रा उतारकर दूध पीने लगा.

    इसके बाद निशांत को तब होश आया जब उसको अपनी गान्ड मे दर्द हुवा, उसको लगा उसकी गान्ड मे कुच्छ घुस रहा है, जब तक वो कुछ समझता तब तक कई ध्के ग चुके थे. निशांत ने बताया कि ऐसे मे अगर वो कुछ हरकत करता है तो लड़कों से कभी नज़र नही मिला पाएगा इस लिए उनको इस ग़लत फ़हमी मे रहने दिया कि मुझे बहुत नशा है और मुझे पता नही चल रहा है कि कोई मेरी गान्ड मार रहा है.

    कुतिया का पोज़ बनाकर उसकी गान्ड मारी जा रही थी. उसने चुप चाप आँखे खोली, देखा सेंटर टेबल की जगह पर उसकी वाइफ को बिहारी लड़का कुतिया बना कर चोद रहा था, बिंगाली लड़के ने उसके मूह मे अपना लंड दे रखा था और बगल मे एक सरदार पॅंट की जिप से लंड बाहर निकाल हिला रहा था. इसका मतलब जिस सरदार ने उसकी वाइफ को चोदा था आज वो इसकी गान्ड मार रहा था.

    गान्ड मे पेन तो बहुत हो रहा था पर नीचे अब इसका छोटा सा लंड झटके मारने लगा था जिस से निशांत को मज़ा आने लगा. उसने बताया जब सरदार अपना लंड उसकी गान्ड से बाहर निकालता तब पेन होता था पर जब अंदर डालता था, पेन के साथ निशांत के लंड पर भी झटके लगते थे.

    बीच बीच मे उसकी वाइफ की आआआआआः आआआआआआआआः की आवाज़ भी आ रही थी. बिहारी का शायद पानी झाड़ गया था वो हटा तो बिंगाली ने उसकी जगह लेली और अब सरदार जी का लंड उसकी वाइफ के मूह मे था. बिहारी सोफे पर निढाल होकर पसर गया. बिंगाली और सरदार बारी बारी से अपनी जगह बदलते रहे.

    दो तीन ऊऊऊऊऊं ऊऊऊऊऊं की आवाज़ उसकी वाइफ के मूह से आई और एक हाथ से सरदार की थाई अपनी तरफ खींच कर गान्ड सरदार से चिपका दी शायद उसकी वाइफ का भी पानी झड गया था. इधर दूसरे सरदार ने अपना पानी निशांत की गान्ड मे ही निकाल कर निशांत को बेड पर लिटा दिया और बेड से नीचे उतर गया. 

    निशांत ने देखा उसकी वाइफ बिल्कुल नंगी थी जबकि चारों लड़को ने सिर्फ़ जिप खोल कर अपने अपने लंड बाहर निकाल रखे थे. बिंगाली बोला अबे सालो तुम तो झाड़ गये, भाभी जी प्लीज़. उसकी वाइफ बोली भैया थोड़ा साँस तो लेने दो दो-दो के पानी से मेरी चूत भर गयी है अभी पिसाब कर के आती हूँ फिर तू भी झाड़ देना और वो कमरे से बाहर चली गई.

    चारों आपस मे बातें कर रहे थे- क्या चूत है यार लगता नही ये लोग शादी शुदा है, सरदार बोला इसकी गान्ड मारते मारते मेरा लंड छिल गया है पेन हो रहा है. ऐसा करते है इसको (निशांत) सोफे पर लिटा देते है और चारों मिलकर बेड पर चुदाई करेंगे. निशांत नशे का ढोंग करके लेटा रहा. चारों ने मिलकर निशांत को उठाया और सोफे पर लिटा दिया. बिहारी बोला साला बहुत भारी है. उसकी वाइफ के अंदर आने से पहले चारों ने अपनी अपनी पॅंट और अंडररवेर उतार दिए थे. बिंगाली बोला भाभी जी भाई साहब किस्मत वाले है, इतनी सुंदर चूत को रोज चोद्ते होंगे,

    बेड पर बैठते हुवे वो ब मेरी ऐसी किस्मत कहाँ ये मुआ तो नमार्द है, इसका तो लंड ही नही है. बिहारी ने आकर निशांत का पायजामा खोला तो अरीई की दो तीन आवाज़े सुनाई दी. सरदार बोला मेरी जान तुसी चिंता ना करो जब दिल करे आवाज़ दे देना. एक बोला आप के साथ तो धोखा हुआ है, शॉडी से पहले पता नही था क्या?. बिंगाली बोला अरे छोड़ो यार मुर्दे क्यों उखाड़ रहे हो और उसकी वाइफ का दूध पीना सुरू कर दिया.

    इसके बाद उन्होने उसकी वाइफ को बेड पर लिटा दिया. एक सरदार उसकी चूत चाटने लगा, बिंगाली दूध पी रहा था दूसरा सरदार गालों पर किस कर रहा था और बिहारी लड़का उसके पेट और नाभि चूम रहा था. उसकी वाइफ बीच बीच मे अया अयाया कर रही थी. बिंगाली बहुत जोश मे था बोला मॉंटी (सरदार) प्लीज़ यार मुझे चुदाई करने दे और सरदार के हटने के बाद वो पागलों की तरह ज़ोर-ज़ोर से उसकी वाइफ को चोदने लगा.

    2 मिनट मे ही उसने अपना लंड बाहर निकाल कर बेड पर ही वीर्य टपका दिया. बिहारी बोला भेन्चोद बहुत उतावला हो रहा था क्या हुआ. बिहारी ने पीठ के बल लेटकर उसकी वाइफ को अपने उपर छाती के बल लिटा कर उसकी चूत मे लंड डाल कर चोदने लगा और बिंगाली उसके मुहमे लंड देकर दुबारा तैयार होने की कोसिस करने लगा. दोनो सरदार बेड से नीचे उतर कर अपना अपना लंड हिला रहे थे.

    बिहारी दोनो हाथो से उसकी वाइफ के दोनो हिप्स को दबाकर नीचे से स्पीड मे 10-12 धक्के मरता और रुक जाता. उसने कसकर उसकी वाइफ की कमर कसकर अपना पानी झाड़ दिया.

    अब बिहारी की जगह एक सरदार ने ले ली और उसी स्टाइल मे चोदने लगा, दूसरा सरदार उसकी गान्ड मारने की कोसिस कर रहा था पर नही हो पा रहा था. पहले सरदार के उपर से दूसरे सरदार ने उसको कुतिया के पोज़ मे लिटाया, उसकी गान्ड मे आयिल लगाकर लंड अंदर डाल कर करवट लेकर अपने आप पीठ के लेट गया और उसकी अपनी छाती पर उसको पीठ के बल लिटा कर उसकी गान्ड मे लंड को अंदर बाहर करने लगा.

    अब दोनो सरदार ठीक उसके उपर आकर उसको चोदने लगे. उसकी वाइफ एक साथ चूत और गान्ड मरवाने का मज़ा ले ही थी. िंगाली और बिहारी बात करने लगे चलो हम दोनो उसकी (निशांत की) गान्ड मारते है और दोनो ने ज़मीन पर सोफे की गद्दियाँ बिछाई और निशांत को उनके उपर कुतिया के पोज़ मे लाकर भारी उसकी गान्ड मारने लगा. भारी का पानी झाड़ जाने के बाद बिंगाली स्टार्ट हो गया.

    उधर निशांत अब अपनी वाइफ को नही देख पा रहा था पर उसके कानो मे आआआअ ऊऊऊओ की आवाज़े लगातार आ रही थी. अब उसकी वाइफ ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी मॉंटी मार जूऊर से माआआआर आआआआ जूऊओर से और जूऊर से आआआआअ साराआआ डााअल फ़ाआद दे आआआअ तेरा तो हो गय्ाआ नरेन्दर (दूसरा सरदार) तू आ जल्दी से ज़ोर से स्पीड मे करना. आआआआ. 

    हां गुड और ज़ोर से अबे मर गयी जोर्र्र्रर से उई माआ साआाअले ज़ोर से आआआआआआअ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआआआआ मज़ा आआआअ एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स और आवाज़ आनी बंद हो गई. इधर बिंगाली ने निशांत की गान्ड से लंड बाहर निकाल कर उसकी वाइफ के उपर चढ़ गया. थोड़ी देर मे बिंगाली की एक आवाज़ आई ऊऊऊऊऊऊऊः. उसकी वाइफ बोली भाई दूसरी बार झड़ने मे तो मज़ा ही आ गया, असली चुदाई का मज़ा दो दूसरी बार झड़ने मे ही है दिल कर रहा था चारों लंड एक साथ चूत मे घुसते तो और भी मज़ा आ जाता.

    जाते जाते चारो बोले भाभी जी जब मन करे बुला देना. निशांत अंजान बना ऐसे ही लेटा रहा मानो इस कमरे मे जो कुच्छ हुआ उसको कुच्छ भी पता नही है. बाथ रूम से आने के बाद उसकी वाइफ ने उसके उपर चादर डाली और लाइट ऑफ कर बेड पर सो गई. कुछ महीनो के बाद निशांत ने दूसरी जगह मे अपना फ्लॅट लिया और वही शिफ्ट कर लिया.

    उसकी वाइफ ने वहाँ भी अपनी चुदाई का इंतज़ाम किया मगर पड़ोस मे नही बाहर से ही किसी ना किसी को लाकर दिन मे ही चुदवाती थी. उनका एक बेटा हुआ उन्दोनो को भी नही पता कि आक्चुयल मे किसका है. 55-56 की एज मे भी वो महीने मे 2-3 बार मेच्यूर आदमियों से चुदवाती है और निशांत पैसे देकर गान्ड मरवाता है. अपना अपना नसीब है.

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    Even we did this many times 😉

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    Desi couple in a corner for fun 

    मैं रमित हाज़िर हूँ अपनी कहानी लेकर,

    में ही पता चल गया है कि मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ और चण्डीगढ में रह रहा हूँ। और एक मेल एस्कॉर्ट्स का काम करता हूं। पिछली कहानी मेरे ही शहर की रहने वाली एक लड़की की थी। इस बार की कहानी भी मेरे और मेरी एक क्लाइंट की ही है।

    कहानी पिछले रविवार की है, छुट्टी का दिन था, मैं अपने कमरे में बैठा आराम से मूवी देख रहा था। तभी फोन बजा, मैंने कॉल रिसीव की तो उधर से एक प्यारी सुरीली आवाज सुनाई दी। थोड़ी सी बात हुई तो पता चला कि मैडम को आज रात सर्विस चाहिए, रात की कोई बुकिंग थी नहीं तो मैंने भी हाँ कर दी।

    मैडम ने अपना नाम नीतू बताया। थोड़ी देर में घर का पता भी मैसेज पर आ गया, एड्रेस गोमती नगर के एक घर का था। मैंने भी जाने की तैयारी शुरू कर दी। बैग पैक किया, फिर खुद को जैसे की नीचे और बगल के बाल वगैरह साफ किए, और थोड़ी बहुत तैयारी और भी की।

    शाम को मैं दिए हुए पते पर तय समय पर पहुंच गया। वहां पहुंच कर मैंने उसी नंबर पर वापस कॉल की, उसने फोन पर दो मिनट में आने को बोला। थोड़ी देर बाद उस मकान का दरवाजा खुला, मैं सड़क के दूसरी तरफ खड़ा था। उसने मुझे दोबारा कॉल की, मैंने दूसरी ओर से ही हाथ उठाकर इशारा किया तो उसने मुझे उस तरफ आ कर अंदर आने का इशारा किया। मैंने रोड क्रॉस की और गेट पर पहुंच गया।

    हाथों में भरी हुई लाल चूड़ियाँ, टाइट जीन्स, टॉप, गोरा रंग, एकदम भरा हुआ शरीर, 32-30-34 का फिगर… देख कर लग रहा था कि अभी कुछ दिन पहले ही शादी हुई हो, देखने में एकदम मस्त लड़की लग रही थी। उसको देखकर कुछ देर के लिए तो मैं खो सा गया था।

    अचानक से उसने चुटकी बजाकर इशारा किया, मैं तो मानो नींद से जगा। उसने अपने पीछे आने को कहा। मेरे गेट के अंदर आते ही उसने गेट लॉक किया और गार्डन एरिया से आगे बढ़ कर मकान में अंदर चलती चली गई। मैं भी एक रोबोट की तरह उसके पीछे पीछे चल रहा था।

    अंदर पहुचते ही उसने मुझे बैठने को कहा और मेरे बारे में पूछने लगी। मुझसे बातचीत करते हुए वो सभी खिड़की दरवाजे लॉक कर रही थी।

    नीतू का घर बहुत ही शानदार था। हर चीज ठीक ढंग से अपनी जगह पर थी। महँगे सजावट के सामान, महंगा सोफा, हर एक चीज अपनी अपनी कीमत बता रही थी। काफी अमीर लोग थे। उसने मुझसे चाय या ड्रिंक्स का भी पूछा लेकिन मैंने मना कर दिया।

    अब वो अपना काम खत्म कर के मेरे बगल में आ कर बैठ गई। मैंने उससे उसके और उसके परिवार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसकी शादी अभी दो हफ्तों पहले ही हुई है। उसके पति बैंक मैनेजर हैं, ससुर आर्मी से रिटायर हैं और बिज़नस करते हैं। फिलहाल बेटे की शादी की खुशी में चारों धाम की यात्रा पर गए हैं।

    उसने आगे बताया कि उसकी शादी अरेंज मैरिज है। घर वालों ने अच्छा कमाता खाता परिवार देख कर शादी कर दी। मॉडर्न फैमिली से होने के कारण उसकी एजुकेशन काफी अच्छी है और शादी से पहले उसके बॉयफ्रेंड भी थे। जिनसे उसके फिजिकल रिलेशन भी रहे थे पर परिवार की वजह से उसने सब कुछ छोड़ कर अरेंज मैरिज कर ली। पर उसे अपने पति से वो शारीरिक सुख नहीं मिला जैसा वो चाहती थी। परिवार की इज़्ज़त के लिए उसने एडजस्ट करने की सोची है। वो अपने किसी भी पुराने बॉयफ्रेंड को बुलाना नहीं चाहती क्यूँकि इससे बदनामी का भी डर रहेगा और उसकी खुद की इज़्ज़त जाने का भी। sexgurumd@gmail.com

    नीतू- आओ, अब बेडरूम में चलते हैं, आगे का प्रोग्राम वहीं करते हैं. वो मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बेडरूम में ले आई।

    क्या मस्त बड़ा बेडरूम था, राउंड बेड लार्ज साइज़, साइड में सोफा। ऐसा लग रहा था कि किसी फाइव स्टार होटल का रूम हो। नीतू- अमित यार… आज मुझे वो खुशियां दे दो जिनके लिये मैं तरस रही हूँ। आरती ने काफ़ी तारीफ की है तुम्हारी, देखते है कि आप सचमुच तारीफ के काबिल हैं या नहीं। मैं- नीतू जी, अब इसके लिए आप पहले मुझे बता दें कि आप को किस तरह का सेक्स पसंद है। आपकी फंतासी क्या है, आप सेक्स को किस नज़रिए से लेती हैं। और सबसे पहले आप अपने आप को मेरे हवाले कर दीजिए।

    नीतू- रमित, मुझे वाइल्ड सेक्स पसंद है। आरती ने मुझे बताया था कि आप मसाज करते हैं लेकिन वो फिर कभी। आज आप अपने सबसे बेस्ट तरीके से मुझे सेक्स के सारे मजे दे दो, और मैं ये दिन कभी ना भूल पाऊँ। अब आप पर है आप क्या करते हो कैसे करते हो मेरे साथ।

    अब तो बात अपनी इज़्ज़त पर आ गई थी। अब तो कुछ सबसे अलग और सबसे बेहतर करना ही था। मैंने उसे अपनी बांहों में लिया और उसके लबों पर अपने लब रख दिए. वो खुद से ही मेरे लबों को चूसने लगी. मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर चल रहे थे, मैं उन्हें सहला कर मसल कर मजा ले रहा था.

    कुछ देर बाद मैंने उसे कपड़े उतारने को बोला, मेरा इशारा पाते ही उसने अपनी जीन्स और टॉप उतार दिये, अंदर उसने ब्रांडेड ब्लैक ब्रा पैंटी पहन रखी थी। क्या ग़ज़ब का आइटम लग रही थी, दिल खुश हो गया। ऊपर से हाथों में लाल चूड़ियाँ, थोड़ी-थोड़ी सुहागरात वाली फीलिंग आ रही थी।

    अब मैंने भी देर न करते हुए अपने कपड़े उतारे और केवल अंडरवियर में रह गया। अब वो बिल्कुल मेरे नजदीक आ गई। मैंने एक हाथ उसकी कमर पर रख कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसे स्मूच करना शुरू कर दिया। स्मूच करते करते मैं उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही मसलना चालू कर दिया। उसके अंदर से हल्की हल्की उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकलनी चालू हो गई।

    थोड़ी देर में उसके शरीर से उसकी ब्रा और पैंटी अलग हो गयी और अब वो एकदम नंगी रह गई, मैंने भी अपनी अंडरवियर उतार दी। अब दो नंगे जिस्म एक दूसरे से लिपटे हुए थे। सच बताऊँ तो जन्नत वाली फीलिंग आ रही थी। हम दोनों एक दूसरे को चूमते चाटते जन्नत की सैर कर रहे थे।

    थोड़ी ही देर बाद ओरल सेक्स करने के लिए हम दोनों 69 की अवस्था में थे, उसने अपनी चूत की झांटे एकदम ताजा ताजा साफ़ की हुई थी तो उसकी चूत एकदम चिकनी, गोरी, सफेद चमकदार थी। चूत की दोनों फलक आपस में सटी हुई थी, बस एक लकीर सी नजर आ रही थी। हल्की हल्की भीनी भीनी खुशबू बिखेरती उसकी चूत माहौल को और उत्तेजक बना रही थी।

    जैसे जैसे मेरी चूत चाटने की रफ्तार बढ़ रही थी, नीतू के मुंह से निकलने वाली कामुक सीत्कार बढ़ती जा रही थी उम्म…हाँ.. अह… हहा… करो.. मजा आ रहा है… हाँ.. उम्हह…

    अचानक से नीतू मैडम का शरीर अकड़ने लगा और वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर ओरल सेक्स का मजा ले रही थी. कुछ ही देर बाद वो कटे पेड़ की तरह बिस्तर पर गिर कर निढाल हो गई। उसकी चूत ने मेरे मुँह पर गरम-गरम कामरस की बौछार कर दी जिसे मैं पूरा का पूरा चट कर गया।

    उसने अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दिया और आराम करने लगी।

    फिर मैंने उससे फ्रिज के बारे में पूछा। उसके बताते ही मैं जा कर फ्रिज से आइस ट्रे लेकर आया। अब तक नीतू भी रिलैक्स हो गई थी, मैंने उसे दुबारा से सहलाना शुरू किया। उसे सहलाते सहलाते मैं उसे दुबारा गर्म करने की कोशिश कर रहा था।

    जब उसकी हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी तो मैंने आइस ट्रे से एक आइस क्यूब लेकर उसकी चूत में डाल दिया। वो अचानक हुई इस घटना से बिल्कुल पागल सी हो गई। उसकी चूत की गर्मी से बर्फ पिघल कर बाहर आ रही थी और बर्फ की ठण्ड उसे एक अलग ही अहसास दे रही थी। बर्फ के पूरी तरह पिघलने तक वो बिल्कुल पागल सी हो गई थी।

    अब मैं उसकी चूत को चाटने लगा, वो बिस्तर पर अपने पाँव पटकने लगी थी. थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा, जो चाटने की वजह से एकदम गीली हो गई थी, और एक ज़ोर का झटका लगा दिया। लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में पूरा घुस गया।

    वो चूत पर लंड के इस अचानक हमले से एकदम से चीख पड़ी। थोड़ी देर में वो नॉर्मल हो गई और इस ताबड़तोड़ चुदाई में अपने चूतड़ उठा उठा कर पूरा साथ देने लगी। करीब 15 मिनट की धकापेल चुदाई के बीच वो 3 बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने भी अपना माल उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया। अब हम दोनों बिस्तर पर पड़े सुस्ता रहे थे। वो बहुत खुश थी और सबसे बड़ी बात वो पूरी तरह संतुष्ट थी।

    उस पूरी रात में हम लोगों ने 2 राउंड चुदाई और की और कई नई चीजें हमने ट्राई की, जिसमें उसे बहुत मज़ा आया और उसे पूरी संतुष्टि मिली।

    सुबह उसने मुझे थैंक्स बोला और मेरी पेमेंट मुझे दे दी और मैं वहां से चला आया।

    तब से लेकर अभी तक उसने मुझे कई बार बुलाया है और कई बार अपने साथ बाहर ट्रिप पर भी लेकर गई है। साथ ही साथ 2 नई क्लाइंट भी दिलाई हैं।