selvaraj-devi

    Goa fun 18.10.18

    harddick21blog

    Desi cuckold fun 

    जो बात मैं आप लोगो को बताने जा रहा हूँ वो सिर्फ़ इतनी है कि उसके होने के बाद मेरी सेक्स लाइफ थोडी बदल गई है। मेरा नाम शिवशंकर है और मैं अहमदाबाद में रहता हूँ। मेरी शादी को 6 साल हो चुके है और मेरा एक 4 साल का बच्चा भी है ! मेरी बीवी का नाम वैसे तो निधी है लेकिन मई उसे अपनी एंजल ही कहता हूँ और वो भी आज 26 साल की एक खूबसूरत युवती बन चुकी है।

    हम दोनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी की है और आज हम दोनों बहुत ही खुश हैं !

    हम दोनों हमेशा से ही कुछ नया करने की सोचते रहते हैं चाहे वो सामाजिक जीवन में हो या फिर यौन जीवन में !

    एक बार हम दोनों हिमाचल घूमने गए हुए थे। वहा पर न जाने क्या हुआ, एंजल ने सोचा कि क्यों न आज खुले आसमान के नीचे ही सेक्स किया जाए। तब हम दोनों ने वही किसी पहाड़ी पर झाड़ी के पीछे डरते डरते सेक्स के खूब मज़े लिए वो भी बिल्कुल नंगे हो कर। फिर वही कहीं नदी के किनारे में एंजल ने बिल्कुल नंगी होकर अपनी नहाते हुए फोटो भी खिंचवाई। वो फोटो आज भी देखता हूँ तो उतेजित हो जाता हूँ। तब हमें ये डर नहीं लगता कि कोई हमें देख लेगा तो क्या होगा !

    कई बार तो हमने अपनी बालकनी में भी सेक्स किया है बिल्कुल खुले में। एक बार हमें पड़ोस वाली भाभी ने देख लिया था ! उसने एंजल से कहा भी था पर एंजल ने कहा के हमें इस में ही मज़ा आता है !

    एक बार रात को मैं एंजल की मस्त चुदाई कर रहा था। उस रात मैंने एक दो पैग लगा लिए थे इस लिए मुझे कुछ सरूर ज्यादा था, एंजल को भी मैंने एक पैग दिया था इस लिए वो भी आज कुछ ज्यादा ही मज़े दे रही थी। वैसे एंजल पीती नहीं है पर मेरे साथ कभी कभी चल जाता है।

    एंजल को चोदते चोदते मैं उस से गन्दी गन्दी बातें भी कर रहा था। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने आज एक ब्लू फ़िल्म लगा रखी थी, उसको देखते देखते ही मैं एंजल को चोद रहा था।

    जैसे जैसे फ़िल्म में हो रहा था वैसे ही एंजल और मैं कर रहे थे। एंजल कभी मेरा लंड चूसती तो कभी मैं उसकी चूत चाटता कभी मैं एंजल को घोड़ी बना कर चोदता तो कभी उसकी गांड को फाड़ता। आज पूरे मज़े ले लेकर हम चुदाई कर रहे थे।

    तभी फ़िल्म में एक सीन आया उसमे एक आदमी एक लड़की को लंड चूसा रहा था और लड़की कुतिया की तरह खड़ी हो कर चूस रही थी। तभी एक दूसरा आदमी आया और उसी कुतिया के पोज़ में उसे चोदने लगा।

    ये देख कर एंजल भी मेरा लंड चूसने लगी और अपनी चूत में उंगली करने लगी। बहुत देर तक करते रहने के बाद उसका हाथ थकने लगा तो उसने उंगली हटा ली !

    ये देख कर मैंने कहा- क्या हुआ ! अगर ज्यादा ही मन है तो किसी दूसरे लंड का इन्तजाम करूँ क्या !

    एंजल भी जोश में थी और चुदाई उस वक्त उस पर हावी हो चुकी थी। उसने कहा- क्यों नहीं कब से मेरी इच्छा है दो दो लंड लेने की, पर तुम सिर्फ़ अकेले ही चोदते हो, कभी तो दूसरा लंड लेकर आओ मेरे लिए !

    हम अक्सर सेक्स करते हुए ऐसी बातें करते है इसलिए मैंने दुबारा उससे पूछा,’ तू ही बता दे ना तुझे किसका लंड चाहिए? जिसका तुझे पसंद होगा उसका ही दिला दूंगा तुझे !’

    एंजल झट से बोल पड़ी,’ हाँ हाँ श्रुकांत का लंड चाहिए मुझे उसका बहुत ही मोटा और तगड़ा है।’ ‘क्यों नहीं कल ही ले, तुझे श्रुकांत के लंड से चुदवाता हूँ, वो ही कल तेरी चूत की चटनी बनाएगा।’ ‘पक्का ना?’

    ‘पक्का ! पर एक शर्त है मेरे सामने चुदना होगा मैं यहाँ चुपचाप देखूंगा।’ ‘पर अगर तुम देखोगे तो मुझे दूसरा लंड कहा से मिलेगा?’ ‘तो क्या हुआ एक और मर्द बता दे जिससे चुदने की इच्छा है। ‘ ‘हाँ हाँ परमवीर का भी लंड बहुत मोटा होगा।’

    हम दोनों ऐसे ही बात करते जा रहे थे, तभी मैं झड़ गया तो मैंने अपना लंड हटा लिया और साफ़ करके सो गया।

    सुबह सब कुछ सामान्य था। मैं नाश्ता करके ऑफिस चला गया। ऑफिस में दिन में अचानक एंजल का फ़ोन आया,’ शिवशंकर कहाँ हो? अभी घर आ सकते हो?

    मैंने पूछा- क्यो? ‘बहुत मन कर रहा है!’ ‘शाम को आ कर चोदता हूँ ना’ ‘नहीं अभी आओ वरना में श्रुकांत परमवीर को बुला रही हूँ ‘ ‘बुला लो’

    ऐसा कह कर मैंने फ़ोन रख दिया।

    मैं सोचने लगा कि क्यों न इस बार ये भी करके देखा जाए, इस में बुरा ही क्या है, श्रुकांत और परमवीर मेरे दोस्त है और दोनों भी शादी शुदा है अगर दोनों उसे चोद भी देंगे तो घर की बात घर में रहेगी और वो दोनों भी अपनी बीवियों के डर से किसी को नहीं बताएँगे और मेरे और एंजल के लिए ये नया यौनानुभव होगा।

    ये सोच कर मैंने एंजल को दोबारा फ़ोन किया और कहा कि आज शाम को परमवीर और श्रुकांत को घर पर दारू पार्टी के लिए बुलाओ।

    ‘क्यों आज सही में इरादा है क्या मुझे दो दो से चुदवाने का ‘ ‘हाँ सोच तो ऐसे ही रहा हूँ ‘

    ‘सोच लो अगर उनके लंड ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी तो उनके लंड का स्वाद ही न लग जाए मुझे’ ‘कोई बात नहीं मेरी जान चूत की प्यास बुझाना कोई ग़लत नहीं है अगर पति न सही तो पति के दोस्त ही सही।’

    तब थोड़ी देर में ही सही पर एंजल मान गई उन दोनों से एक साथ चुदने को।

    पर मैंने उसको एक शर्त भी बता दी कि उन दोनों को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं भी तुम्हें चुदाई करवाते देख रहा हूँ और एंजल का ही काम है उन दोनों तो तैयार करना चोदने के लिए। एंजल इस के लिए तैयार हो गई। दोस्तों आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

    सब कुछ योजना के अनुसार हुआ। एंजल ने उन दोनों को खाने के बहाने घर पर बुलाया और मैं पहले ही आकर अपनी जगह पर छुप गया। ठीक शाम के 7 बजे दोनों घर पर आ चुके थे। दोनों अपने साथ एक व्हिस्की की बोतल भी लाये थे। दोनों वहीं सोफे पर बैठ कर फ़िल्म देखने लगे। मेरा इंतज़ार करते करते आधा घंटा हो गया तो परमवीर से नहीं रहा गया तो उसने मुझे फ़ोन मिला दिया। पर मैं अपना फ़ोन पहले ही बंद कर चुका था। परमवीर ने एंजल से पूछा कि आज शिवशंकर का फ़ोन नहीं मिल रहा है क्या बात है?

    ये सोच कर मैंने एंजल को दोबारा फ़ोन किया और कहा कि आज शाम को परमवीर और श्रुकांत को घर पर दारू पार्टी के लिए बुलाओ।

    ‘क्यों आज सही में इरादा है क्या मुझे दो दो से चुदवाने का ‘ ‘हाँ सोच तो ऐसे ही रहा हूँ ‘

    ‘सोच लो अगर उनके लंड ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी तो उनके लंड का स्वाद ही न लग जाए मुझे’ ‘कोई बात नहीं मेरी जान चूत की प्यास बुझाना कोई ग़लत नहीं है अगर पति न सही तो पति के दोस्त ही सही।’

    तब थोड़ी देर में ही सही पर एंजल मान गई उन दोनों से एक साथ चुदने को।

    पर मैंने उसको एक शर्त भी बता दी कि उन दोनों को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं भी तुम्हें चुदाई करवाते देख रहा हूँ और एंजल का ही काम है उन दोनों तो तैयार करना चोदने के लिए। एंजल इस के लिए तैयार हो गई।

    सब कुछ योजना के अनुसार हुआ। एंजल ने उन दोनों को खाने के बहाने घर पर बुलाया और मैं पहले ही आकर अपनी जगह पर छुप गया। ठीक शाम के 7 बजे दोनों घर पर आ चुके थे। दोनों अपने साथ एक व्हिस्की की बोतल भी लाये थे। दोनों वहीं सोफे पर बैठ कर फ़िल्म देखने लगे। मेरा इंतज़ार करते करते आधा घंटा हो गया तो परमवीर से नहीं रहा गया तो उसने मुझे फ़ोन मिला दिया। पर मैं अपना फ़ोन पहले ही बंद कर चुका था। परमवीर ने एंजल से पूछा कि आज शिवशंकर का फ़ोन नहीं मिल रहा है क्या बात है?

    ‘यार ये शिवशंकर भी न बहुत ही अजीब है हमेशा ऐसे करता है अब बताओ हमारी दारू पार्टी का क्या होगा हम तो पूरी बोतल ले आए हैं.’ श्रुकांत बोला- कोई बात नहीं मैं जीतू और दीपक को भी बुला लेता हूँ हम चारो मिल कर इसे ख़तम कर देंगे’

    एंजल ने ये सुना नहीं कि वो जीतू और दीपक को भी बुला रहे है वो भी मेरे ही दोस्त हैं।

    एंजल ने भी अपनी पूरी तैयारी कर ली थी। वो आज अपने पूरे बदन की वैक्सिंग करा कर आई थी। चूत पर से सारे बाल साफ़ करवा कर बिल्कुल उसे चिकनी कर के बिल्कुल दो दो लण्डों से चुदने को बेताब थी !

    एंजल ने अपनी सबसे सेक्सी ब्रा पैंटी का सेट पहना और उसके ऊपर एक घुटनों तक स्कर्ट और उसके ऊपर एक नीचे गले का टॉप। कसम से इतनी सेक्सी वो तब बन कर नहीं आती जब मैं उसे चोदता हूँ पर कोई बात नहीं आज उसे दो दो लंड चोदने वाले थे !

    तब तक श्रुकांत और परमवीर ने दारू पीनी शुरू कर दी थी। एंजल भी उनके बगल वाले सोफे पर जा कर बैठ गई। टॉप में उसके चुचे बाहर आने को मचल रहे थे। घुटने तक की स्कर्ट में उसकी गोल गोल जांघे दिखने का आभास दे रही थी। मैं देख रहा था कि श्रुकांत उसे चुपचाप देखे जा रहा था वो उसकी जांघो को ही देखे जा रहा था। सच में वो सोच रहा होगा काश इन दो जांघों के बीच की जगह पर वो लेटा होता ! परमवीर भी कम नहीं था वो भी एंजल के बदन को देखे जा रहा था जैसे कह रहा हो काश आज एंजल की गोल गोल मोटी गांड के पीछे से झटके मारता रहूँ।

    दोनों ने दो दो पैग लिए और तीसरा बनाने लगे। तभी एंजल कहने लगी- मैं तुम दोनों के लिए और कुछ खाने को लाती हूँ। एंजल किचन से कुछ लेकर आई तो जब मेज़ पर झुक कर रखने लगी तभी उसके मोटे मोटे चुचे उसके टॉप से बाहर आने को मचलने लगे। श्रुकांत और परमवीर आँखें फाड़ कर उसके चूचों को खा जाने वाली नजरों से देखने लगे।

    एंजल फिर वही बैठ गई और अपनी टांगें सोफे पर ऊपर कर के बैठ गई। ऐसा करते हुए उसकी थोडी सी जांघो के दर्शन उन दोनों को हो गए। अब तो उन दोनों को वहा बैठना बहुत ही भारी लगने लगा ! मैं समझ गया कि एंजल का दांव बिल्कुल ठीक बैठा है। अब वो दोनों भी समझ गए थे कि एंजल क्या चाहती है !

    श्रुकांत उठा और एंजल के पास जा कर बैठ गया और ऐसे ही बोला- और बताओ एंजल आज कल क्या चल रहा है ! और ऐसा कहते कहते एंजल की जांघो पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे उसकी जांघो को मसलने लगा। दोनों ऐसे ही बात करते रहे तो परमवीर से नहीं रहा गया और वो भी उठ कर एंजल के बगल में आ गया और उसकी दूसरी जांघ पर हाथ रख दिया।

    अब तक सब कुछ साफ़ हो चुका था कि सब क्या चाहते हैं इसलिए एंजल ने भी देरी न करते हुए अपना हाथ बढ़ाते हुए श्रुकांत की जिप पर अपना हाथ रखा और उसे खोलने लगी और अपने दूसरे हाथ से परमवीर के लंड को दबाने लगी। तब तक श्रुकांत का लंड बाहर आ चुका था। सच में काफी बड़ा लंड था उसका। पता नहीं उसकी बीवी उसे कैसे झेलती होगी। तब तक एंजल दोनों के लंड अपने हाथ में ले चुकी थी।

    मैं बाहर से उन तीनों का यह जवानी का खेल देख रहा था। मेरी बीवी मेरे सामने ही मेरे दोस्तों से चुद रही थी इससे बड़ी ब्लू फ़िल्म मेरे लिए और क्या होगी।

    एंजल उन दोनों का लंड बारी बारी से चूस रही थी कभी श्रुकांत का लंड मुँह में लेती तो कभी परमवीर का। श्रुकांत एंजल का टॉप उतार चुका था काले रंग की ब्रा में एंजल के मोटे मोटे चूचे क़यामत ढा रहे थे।

    परमवीर भी एंजल की स्कर्ट ऊपर उठा कर नीचे पैंटी के दर्शन कर रहा था। तभी एंजल ने उसे कहा,’ ये क्या कर रहे हो? यहाँ पर मैं तुम्हें फुल टॉस दे रही हूँ और तुम सिर्फ़ उसे क्लिक कर रहे हो ! आजा परमवीर आज अपनी भाभी की जवानी का मज़ा जी भर कर ले ले उतार दे ये’ परमवीर भी गरम हो चुका था पहले परमवीर ने अपने कपड़े उतारे और बिल्कुल नंगा हो कर एंजल के सामने पहुँच गया।

    ‘अरे वाह तेरा तो बहुत ही मोटा और लंबा लग रहा है? आज तू भाभी की चूत को बुरी तरह फाड़ने आया है क्या?’ श्रुकांत भी तब तक नंगा हो चुका था उन दोनों ने फिर मिलकर एंजल की स्कर्ट उतारी और श्रुकांत ने एंजल की ब्रा उतारी परमवीर ने पैंटी नीचे खींच दी !

    अब तीनों बिल्कुल नंगे हो कर एक दूसरे को लगातार किस किए जा रहे थे एंजल एक हाथ से कभी श्रुकांत का लंड पकड़ती और कभी दूसरे हाथ से परमवीर का लंड मुँह में लेती।

    मुझे ये सब देख इतना मज़ा आया कि मैं वहीं मुठ मारने लगा।

    अन्दर तब तक एंजल दोनों को बेड तक लेकर आ चुकी थी। वहाँ पर एंजल कुतिया की तरह पोज़ बना कर श्रुकांत का लंड अपनी चूत में ले चुकी थी परमवीर उसे अपना लंड चुसाये जा रहा था। दोस्तों आप ये कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है ।

    तभी बाहर बेल बजी एंजल घबराहट में उठी और बोली- अब कौन आ गया मज़े ख़राब करने?

    परमवीर ने कहा- शायद शिवशंकर आया होगा ! नहीं वो अभी नहीं आएगा ! तो फिर कौन आया होगा !

    ‘जीतू और दीपक होगे मैंने उन्हें फ़ोन कर बुलाया था’

    ‘ये क्या कर दिया अब ले लो मज़े मेरी जवानी के !’ एंजल बोली- अभी तो फ़िल्म भी शुरू नहीं हुई है और तुमने इंटरवल कर दिया!’

    ‘तो क्या हुआ मेरी रानी जहाँ हम दो दोस्त हैं वहाँ वो दो और सही आज पूरे मज़े ले ही लो तो अच्छा है’ श्रुकांत बोला।

    एंजल ने भी सोचा हाँ क्यों न ये भी सही जहाँ दो पराये मर्दों से चुद रही हूँ वहा दो और आ जाएँगे तो क्या ग़लत है ! चलो फिर बुला लो उस दोनों को भी !

    परमवीर बाहर जा कर उन दोनों को अन्दर ले आया। अंदर आते ही वो सब कुछ समझ गए जब उन्होंने श्रुकांत और एंजल को नंगा देखा। ‘आ जाओ मेरे राजाओ नंगे हो कर तुम भी शामिल हो जाओ मेरी चूत और गांड की सवारी में ‘

    ‘साली कब से चाहता था तेरी नंगी चूत को चोदना ! आज तो जी भर कर चोदूंगा रात भर चोदूंगा ‘ जीतू अंदर आते ही नंगा होकर बोला।

    दीपक भी जोश में नंगा होकर बिस्तर पर आ गया अब मेरी बीवी बिल्कुल नंगी होकर चार नंगे मोटे मोटे लंड वाले मर्दों के बीच में चुदाई की कबड्डी खेलने को बिल्कुल तैयार लेटी थी। सबसे पहले जीतू ने अपना लंड उसकी प्यासी चूत में आधा अंदर घुसा दिया।

    ‘आहा मर गई जीतू कुत्ते ह्ह्ह्ह्ह् क्या मोटा लंड है तेरा कुत्ते ‘ ‘आज दीपक तू भी अपना लंड पकड़वा ! सबका चख लिया तेरा कैसा है तू भी चखा ना ‘

    एंजल दीपक का लंड चूसने लगी।

    ‘नहीं ऐसे मज़ा नहीं आएगा मुझे सब लंड एक साथ चाहिए अलग अलग नहीं !’ एंजल पुरे जोश से बोली।

    कुतिया बन रही हूँ, जिसको जहाँ जो छेद मिले वहीं अपना लंड घुसा दो जल्दी’

    एंजल कुतिया की तरह पोज़ लेकर उन चारों के बीच में आ गई।

    जीतू उसके नीचे आ गया और एंजल को अपने ऊपर ले लिया और उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया।

    श्रुकांत उसकी गांड के पीछे आ गया और अपना लंड उसकी गांड में धीरे से रख कर अन्दर धकेल दिया। दीपक ने भी अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया।

    अब परमवीर बचा था, परमवीर का लंड एंजल ने अपने हाथ में ले लिया और कहा,’ कोई बात नहीं परमवीर आज तेरी मुठ मैं ही मारूंगी, इन तीनों में से जो भी पहले झड़ेगा उसके बाद तू आ जाना !

    चारो अब शुरू हो गए,’ अआः अह्ह्ह्छा मर गई सालो ! कमीनो ! मार डाला आज तुमने एंजल को !’ ‘उईईइ उईईई अहा आ या क्या बात है चार चार लण्डों के बीच में अकेली चूत अह्ह्ह ‘फाड़ दे जीतू आज चूत को जी भर के फाड़ दीपक गांड को आज बिल्कुल मत छोड़ना गांड का कुआं बना दे आज !’

    ‘आ जाओ ! आ जाओ ! श्रुकांत परमवीर ! तुम्हारी लंड की खुजली को ख़तम करूँ बारी बारी से चूस कर !’ ‘अहाआया मज़ा आ गया !’ ‘और जोर से छोड़ मुझे जीतू हरामजादे कभी चूत नहीं मारी क्या !’ ‘श्रुकांत गांड फाड़ दे !’

    बड़ी देर तक चारों बदल बदल कर एंजल की चूत गांड को फाड़े जा रहे थे। चारों जब झड़ गए तब भी थोड़ी देर रुकने के बाद एक एक पैग लगा कर फिर से मैदान में आ जाते।

    और क्यों न आते आज उन्हें एंजल की चुदाई का सुख जो मिल रहा था।

    फिर न जाने कब तक वो चुदाई करते रहे पर एंजल का जी नहीं भरा पर जाना भी था। अगली बार सब वादा कर गए कि वो अगली बार 6 दोस्त एक साथ उसे चोदेंगे। मैं भी सोच रहा था कि 6-6 के लंड एंजल कैसे लेगी पर एंजल तैयार थी अगली चुदाई के लिए !

    nikixulu

    Meri pyari aunty aur main.. Purani yaadein

    harddick21blog

    Mateur Vs Amateur

    हैल्लो दोस्तों. आज जो मैं आप सभी को कहानी बताने जा रहा हूँ उसे पढ़ आप सभी को लगेगा की ये कहानी मनगढन है लेकिन ये कहानी एकदम सच्ची है हा थोडा इस कहानी को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए मैंने इसमे थोडा बाते बढ़ा चढ़ा के लिखा है. मेरा नाम वासिम है और मेरी उम्र 26 साल है.. दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि आज की मेरी यह कहानी आप लोगों को बहुत पसंद आएगी और आज जो में आप लोगो को कहानी सुनाऊंगा वो मेरी एक और सच्ची घटना है और अभी कुछ दिन पहले ही मेरे साथ घटित हुई है. दोस्तों अब में आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ..

    दोस्तों मुझे झारखंड जाना था. तो में बस से सतना पहुंचा और रेलवे स्टेशन पर जाकर एक्सप्रेस ट्रेन का इंतजार करने लगा और उसमे मेरा एसी कोच में रिज़र्वेशन था. कुछ देर बाद ट्रेन आई और वो रात का वक़्त था.. तो ट्रेन आते ही में अपनी बोगी नंबर 13 में गया. वहां पर मेरे केबिन में पहले से एक कपल और एक मस्त सेक्सी औरत बैठी हुई थी. उनकी उम्र 35 साल की थी.. बेबी कट बाल और वो पीले कलर का सूट पहने हुई थी और वो कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी और वो दिखने में किसी अमीर खानदान की लग रही थी.. लेकिन उसको देखकर अजीब सा लग रहा था.. क्योंकि वो एकदम चुपचाप बैठी हुई कुछ सोच रही थी.

    मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और में अपनी बर्थ पर आकर बेग रखकर लेट गया और ऊपर बर्थ से नीची की तरफ बैठी उस औरत को देखने लगा.. उसने दुपट्टा डाल रखा था.. तो मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. हाँ.. लेकिन इतना अनुमान ज़रूर लग रहा था कि उसके बूब्स बड़े बड़े है और फिर धीरे धीरे वक़्त गुजरा और 8 घंटे के बाद जबलपुर आया. तो वो कपल वहां पर उतार गया और अब उस केबिन में और वो आंटी थी.. वो शायद सो गई थी.

    फिर जब मैंने उसके सीने का गोरापन देखा तो लगा कि मेरा तो वीर्य निकल ही जाएगा. तो में कुछ देर देखकर नीचे उतरा और टॉयलेट में जाकर उसके बूब्स को सोचकर मुठ मारकर वापस आया और फिर बाहर उसके पास में जाकर उसका दुपट्टा उठाया और उसके हाथ को हल्के से पकड़कर हिलाकर उसे जगाया और उसका दुपट्टा दिया. तो वो मुझसे धन्यवाद बोली. तो में उसी के पास में बैठ गया.. लेकिन वो शायद वो बहुत गहरी नींद में थी इसलिए उसका हाथ सीने से गिरकर मेरी जाँघ पर आ गया.

    मैंने थोड़ी देर बाद उसका हाथ पकड़ा औ लंड े पास तक ले जाकर रख दिया उसके हाथों की नरमाई ही मेरे जोश बड़ाने लगी थी और कुछ देर बाद वो जागी तो उसने झट से अपना हाथ खींच लिया.. लेकिन में उसके बहुत पास था. तभी उसने अपना मुहं खोलकर हवा को अंदर बाहर किया तो मुझे एकदम से शराब की बदबू आई और फिर में समझ गया कि यह नशे में है और इसको अपनी बातों में फंसाकर इसके साथ चुदाई करनी चाहिए.. में एकदम पास में बैठा उनसे बात करने लगा.. लेकिन वो मेरी हर हर बात का अधूरा सा जवाब दे रही थी.

    फिर मैंने उससे कहा कि आप बड़ी सुंदर हो.. तो वो हाँ बोली और फिर मैंने कहा कि मेरी शादी नहीं हुई. तो वो बोली कि मेरी तो हो गई है.. मैंने कहा कि बहुत अच्छा, आपके तो बहुत मज़े है यहाँ हमारा तो अपना हाथ जगन्नाथ है. यह बात मेरे मुहं से सुनते ही वो एकदम से मुझे देखने लगी. तो मैंने हल्के से उनका हाथ पकड़ा.. लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली तो मेरा साहस और बढ़ा. फिर मैंने उससे कहा कि आपके हाथ बहुत नरम है लगता है आप कोई भी काम नहीं करती. तो वो बोली कि काम तो रात में करते है और में झट से समझ गया कि यह ट्रेन मेरी लाईन पर आ रही है और मैंने उनका हाथ पकड़कर किस कर लिया..

    वो आखे बंद किए हुई थी और में हाथ पर हाथ फेरने लगा.. थोड़ा ऊपर थोड़ा ऊपर और ऊपर और एक वक़्त आया कि जब में धीरे धीरे अपना हाथ कंधे तक हाथ ले जाने लगा तो में कंधो के पास तक जाकर उसके बूब्स क छू रहा था और अचानक से मैंने उसके एक बूब्स को पकड़ लिया. तो उसने मेरे हाथ को पकड़कर कहा कि नहीं ऐसा मत करो और जब मैंने अपनी पकड़ ढीली की तो उसने अपना सूट ठीक किया.. लेकिन मेरा हाथ अब भी वहीं पर था और उसने मेरा हाथ नहीं हटाया और में अपना हाथ उसके सूट में डालने लगा और उसके मस्त जिस्म की गरमाहट पाकर मेरा लंड गरम हो गया और मेरी हिम्मत बहुत बढ़ गई थी.

    मैंने अब बूब्स को दबाना, सहलाना शुरू कर दिया था. वो बड़ी गहरी गहरी साँसे लेने ल गी.. शायद उसको भी अब आनंद आ रहा था.. मेरे शरीर के अंदर एक अजीब सी खलबली मच गई और मैंने उनसे कह दिया कि क्यों आंटी आपको अच्छा लग रहा है? वो हाँ बोली और मैंने कहा कि क्या में दोनों दबाऊ? तो वो ना ना हाँ ना ना हाँ बोली और मैंने दोनों दूध पकड़ लिए धीरे धीरे सहलाने लगा. फिर मैंने हाथ हटाए और पेट के पास से सूट में अंदर हाथ डालकर ऊपर ले गया और ब्रा के ऊपर से दूध दबाने लगा और में इस कोशिश में ना जाने कब उसकी जाँघो पर बैठ गया, मुझे खुद को पता नहीं चला.

    फिर मैंने थोड़ी देर तक बूब्स दबाए तो वो बोली कि ऊपर से तो उतरो मुझे वजन लग रहा और पास में बैठकर दबाओ. तो में उनके पास में आकर उनके बड़े ही मुलायम, गरम, जोश से भरे हुए बूब्स दबाने लगा. फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी क्या आपको दूध पिलाना अच्छा लगता है? वो बोली कि हाँ तो मैंने कहा कि मुझे पिलाओ ना. तो वो बोली कि तुम्हे जो करना हो कर लो.. लेकिन प्लीज मुझे तंग मत करो. फिर मैंने इसका पूरा फायदा उठाया और उनका सूट ऊपर करके ब्रा के ऊपर से ही दूध पीने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने ऊपर की तरफ देखा तो पाया वो मुझे बड़े गौर से देख रही थी और में उनकी तरफ मुस्कुराया.

    वो बोली कि तुम तो बड़ी जल्दी जल्दी करने लगे. तो मैंने कहा कि आप इतनी सेक्सी हो कि मुझसे अब रहा नहीं गया कसम से आंटी आप अगर मेरी होती तो में आपको अपनी रातों की रानी बना लेता.

    तो वो हंसी और फिर से आख बंद करने लगी और फिर मैंने उनसे कहा कि देखो आंटी रात का वक़्त है और यहाँ पर चलती हुई ट्रेन में कोई भी नहीं आएगा क्यों ना हम दोनों मज़ा करे? फिर कौन सा दोबारा हम लोगो को मिलना है.. तुम अपनी जगह और में अपनी जगह. तो वो बोली कि नहीं, सिर्फ इतना ही बहुत है और फिर मैंने उनको छोड़ दिया और उनके पास में बैठ गया. तो वो कुछ सोचने लगी. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और सहलाने लगा और फिर उसकी नज़र एकदम मेरे लंड पर पड़ी तो वो मेरे लंड को एकटक देखने लगी.

    मैंने कहा कि देखो यह आपके पास में है और इतना तना हुआ है और अगर एक बार आप पकड़ लोगी तो क्या होगा? तो वो बोली कि तुम क्या समझ रहे हो.. क्या मैंने पी रखी है और में बहुत नशे में हूँ? तो मैंने बोला कि नहीं मैंने यह सब तो कहा ही नहीं और तभी उसने मेरा लंड पकड़कर कहा कि अच्छा है यार. तो मैंने कहा कि फिर भी तो आप एकदम दूर भाग रही हो.. में कह तो रहा हूँ हमारा थोड़ी दूर का साथ है क्यों ना हम मज़ा लेते है? तो वो बोली कि यार अब क्या बताऊँ?

    फिर मैंने कहा कि कुछ मत बताओ.. बस मेरे और करीब आ जाओ. वो मेरे लंड को पकड़े हुए थी.. में उठा और मेरा लंड उसके गालो पर रगड़ गया और मैंने कहा कि देखो यह अपने आप अपनी राह में जा रहा है प्लीज़ आंटी. तो वो चिल्लाकर बोली कि छुओ मत मुझे.. तो मैंने कहा कि सॉरी. वो नशे में थी और में उसकी जाँघो के ऊपर बैठ गया और दोनों पैर आसपास कर लिए और उनके कंधे पर हाथ रखकर चूमने लगा. मुझे उनके एकदम चिकने गाल चूमने में बहुत मज़ा आ रहा था और में अपना एक हाथ उसकी सलवार में ले गया.

    फिर उनकी गरम चूत पर फेरने लगा और मैंने महससू किया कि उनकी चूत एकदम गीली हो गई थी. शायद वो अब मूड में आ गई. तो मैंने मौका देखकर धीरे से सलवार को नाड़ा खोला और धीरे से उनकी सलवार को नीचे किया. तो वो बोली कि रूको और मुझे अपने ऊपर से हटाकर खुद ही अपनी सलवार पेंटी नीचे सरकाने लगी और उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे.. मैंने उनसे कहा कि प्लीज हिलना मत और वो ऊपर की बर्थ को पकड़कर खड़ी हो गई.

    मैंने उसके सूट को हटाया और अपने ऊप ढक लिया और उसकी चूत चाटने लगा. उनकी चूत का नमकीन पानी था और मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट चाटकर साफ कर दिया और अब में फुल मूड में था और में उसके आगे से हटकर पीछे की तरफ गया और उसके चूतड़ो को फैलाया और बीच में मुहं करके उसकी चिकनी गांड को चाटने लगा और वो चुपचाप मज़ा ले रही थी.

    फिर में ऊपर उठा और पीछे से उसके बूब्स को पकड़कर दबाने लगा. उसके इतने बड़े बूब्स थे कि वो मेरे हाथ में नहीं आ रहे थे और ऊपर से उसकी गांड का साईज़ भी कम नहीं था. तो में उसके कंधे को चूमते हुए बोला कि वाह क्या मस्त फिगर है तुम्हारा.. तुम्हे चोदने में बहुत मज़ा आएगा और तुम्हारे जैसी औरतें ही लड़को के लंड की राते रंगीन करती है.

    वो बोली कि ज़्यादा मत बोलो.. मैंने अपने लंड को सेट किया और दोनों कूल्हो के बीच करके आगे की तरफ हुआ और कहा कि में सच कह रहा हूँ.. देखो मेरा लंड अपने आप अपनी जगह पर चला जा रहा है. फिर वो अपना एक हाथ पीछे की तरफ लाई और एकदम से लंड को पकड़कर अपनी चूत के पास कर लिया और बोली कि इसकी जगह यहाँ पर है. तो मैंने कहा कि हाँ यह अपना रास्ता भटक गया था फिसल गया था. वो क्या है कि आपके जैसी चिकनी चूत साथ में हो तो यही होगा.

    मैंने मुहं से सईईईईईई कहा और लंड को चूत में सटाकर आगे कर दिया. लंड अंदर जाते ही वो सईईईईईईईइ आआहहह उह्ह्ह्ह सिसकियाँ लेने लगी और मैंने एक धक्के में लंड को पूरा ही अंदर कर दिया. वो नशे में सम्भल ना पाई और गिरने लगी तो नीचे बैठने वाली पट्टी को पकड़ लिया और ऐसे में उसका चूतड़ और अच्छे से खुल गया.

    तो मैंने उसकी तारीफ की.. आपका यह पोज़ तो लाजवाब है और में कमर पकड़ कर चोदने लगा वो आअहहा अह्ह्ह्हह आईईईई आह्ह्ह करने लगी. तो थोड़ी देर बाद मैंने कहा कि आपको क्या दर्द हो रहा ऐसे?

    वो हाँ बोली और में पीछे से अलग हुआ और नीचे लेट गया.. मेरा लंड सीधा खड़ा था. वो अपना सूट दोनों हाथों में पकड़कर मेरे लंड पर चूतरखकर बैठ गई. पूरा लंड फिसलकर अंदर घुस गया वो आआआहह उह्ह्ह्ह बोली और मेरी छाती पर दोनों हाथ रखकर आगे पीछे होने लगी और ट्रेन के हिलने के कारण उससे ज़्यादा हिलना नहीं हो रहा था.

    मैंने उसके दोनों बूब्स को पकड़ा और कहा कि थोड़ा ऊपर हो जाओ वो ऊपर की तरफ हुई तो में नीचे से धक्के देकर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.. ठप ठप फक फक की आवाज़ और उसकी सिसकियों की आवाज़ आने लगी. तो में चोदने से मस्ती में आ गया था और वो जोश में आकर चुद रही थी.. लेकिन में थोड़ी देर ही चोद पाया. फिर वो बोली कि मेरे पैर दर्द हो रहे.. तो मैंने उसको पकड़ा, नीचे लेटाया और फिर से लंड को चूत में डालकर चोदने लगा और दोनों बूब्स को तो में ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और वो ओह्ह्हह्ह्ह्ह सीईईईईइ आह्ह्ह्ह कह रही थी.

    फिर मैंने कहा कि आप अपनी गांड में ले लो.. लेकिन उसने एकदम साफ मना कर दिया. तो मैंने सोचा कि चूत मिल रही है तो इसी को चोदो.. में ताक़त वाले धक्के मारने लगा.. तब जाकर उसके मुहं से निकला आह्ह्ह्हह कितना बड़ा लंड है.. चोदो मुझे और में जोश में आकर चोदने लगा और कुछ ही देर में मुझे लगने लगा कि मेरा काम तमाम होने वाला है और मैंने कहा कि तुम बहुत सेक्सी हो और तुम्हारी चूत में जन्नत है और वो आह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह कहने लगी. तभी मैंने अपना लंड निकाला तो तुरंत ही पिचकारी निकली उसके सूट पर गिर गई और मैंने उसके पूरे सूट पर ही वीर्य गिरा दिया.

    वो बोली कि ओह तुमने मेरा सूट खराब कर दिया और फिर मैंने कहा कि जो मज़ा दिया उसके आगे सब चलेगा. तो वो मेरे नीचे से हटी और में अपने कपड़े पहने लगा कि अब उसका नशा उतर गया था.

    तो वो उठी अपना बेग खोला और जल्दी से सूट निकाला और अपना सूट उतारा. मैंने उस वक़्त उसी सन्दरता देखी वो गजब की औरत थी.. में आगे गया और मैंने उसको पकड़ लिया और उसकी पीठ पर किस किया और कहा कि तुम पूरे विश्व की सबसे सेक्सी औरत हो. फिर वो कपड़े पहन कर बैठ गई और मैंने कहा कि धन्यवाद.. वो चुप रही.

    फिर वो बोली कि अब कुछ करने की कोशिश मत करना.. तो में दूर हो गया और अपनी जगह पर आकर लेट गया. मुझे पता नहीं चला कब नींद आ गई और सुबह जब उठा तो ट्रेन रुकी हुई थी और वो उतरने जा रही थी. में झट से उतरा और उसके पास जाकर खड़ा हुआ.. लेकिन वो मुझे अनदेखा करके आगे चली गई और में उसको जाता हुआ खड़ा खड़ा देखता रहा और वो चली गई.. लेकिन अपनी छाप मुझमे छोड़ गई.

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    Elena Koshka

    Release Date : 16 July 2018

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    Making her happy

    मेरा नाम रितेश है। ये कहानी नब्बे के दशक के शुरू की है। घर में मैं और मेरे पापा ही थे क्योंकि जब मैं चार साल का था तब मम्मी का स्वर्गवास हो गया था। पापा बिज़नेसमैन थे और पैसों की कोई कमी नहीं थी। पापा मेरी हर इच्छा पूरी करते थे।

    उस वक्त मैं सातवीं क्लास में पढ़ता था। मेरी टीचर रशीदा मैडम मेरी क्लास में सायंस पढ़ाती थी। मैं सायंस में थोड़ा कमज़ोर था। इसलिये पापा ने मैडम से रिक्वेस्ट की कि वो शाम को मुझे घर पर ट्यूशन दे दें। रशीदा मैडम के हसबैंड दो साल से कुवैत में नौकरी रहे थे और उनके दोनों बच्चे मसूरी में बोर्डिंग स्कूल में थे। इसलिये मैडम अकेली ही रहती थी और फिर पापा ने उन्हें फीस भी काफी अच्छी ऑफर करी थी तो रशीदा मैडम मान गयी और मेरे घर पढ़ाने आने लगी।

    रशीदा मैडम किनेटिक होंडा स्कूटर से शाम को छः बजे मुझे पढ़ाने आती थीं और कईं बार हमारा ड्राइवर रशीदा मैडम को कार से भी लेने और छोड़ने जाता था। जिस वक्त रशीदा मैडम आती थी उस समय घर में बस मैं और हमारा नौकर ही होते थे। पापा तो ज्यादातर उस समय ऑफिस में होते थे। नौकर उनके लिये जूस वगैरह रख जाता था और फिर वो मेरे स्टडी रूम में मुझे पढ़ाती थीं। स्कूल में रशीदा मैडम काफी स्ट्रिक्ट थीं लेकिन घर पे काफी फ्रेंडली तरीके से पढ़ाती थीं और हंसी-मज़ाक भी करती थीं। कभी मेरे गाल खींच देतीं तो कभी गले से लगा लेतीं और मेरे जिस्म पे कहीं ना कहीं प्यार से हाथ फिरा देतीं। ये सब मुझे उनका सामान्य स्नेह ही लगता था जबकि असलियत में उनके मन में कुछ और ही था। उम्र के हिसाब से उन दिनों विपरीत सेक्स, खासकर अपनी हम उम्र लड़कियों के प्रति मन में आकर्षन ज़रूर होता था और जिज्ञासा भी थी लेकिन मुझे चुदाई के बारे में जानकारी नहीं थी। फिल्मों में कोई उत्तेजक दृश्य देखकर मेरा लंड कभी-कभार अपने आप सख्त हो जाता था लेकिन मैंने तब तक मुठ मारना भी शुरू नहीं किया था।

    रशीदा मैडम की उम्र पैंतीस साल के करीब थी और बेहद खूबसूरत और सैक्सी थीं। बड़ी-बड़ी आँखें, तीखे नयन-नक्श, सुडौल बदन, बिल्कुल सुपर मॉडल लगती थीं रशीदा मैडम। वो अपने अपियरन्स का भी काफी ध्यान रखती थीं। हमेशा नये फैशन के सलवार सूट और ऊँची हील के सैंडल पहनती थीं और चेहरे पर सौम्य मेक-अप करके टिपटॉप रहती थीं। लेकिन मेरे मन में कभी भी रशीदा मैडम के बारे में गलत विचार नहीं आया।

    एक बार पापा को टूर पे जाना पड़ा तीन दिनों के लिये। वैसे ये कोई नयी बात नहीं थी और पापा जब भी टूर पर जाते थे तो हमारा नौकर मेरा पूरा ख्याल रखता था। लेकिन इस बार हमारे नौकर को तभी एक रात के लिये अपने भाई की शादी में भी ज़रूरी जाना था। रशीदा मैडम को पता चला तो उन्होंने पापा से कहा कि एक रात के लिये वो हमारे घर रुक जायेंगी। वैसे भी अगले दिन शनिवार था और छुट्टी थी।

    पापा उस दिन दोपहर की फ्लाइट से चले गये। हमारे नौकर को भी रात आठ बजे के करीब निकलना था तो उसने सब डीनर वगैरह और रशीदा मैडम के लिये गेस्ट-बेडरूम वगैरह तैयार कर दिया उस दिन रशीदा मैडम ने मुझे स्कूल में बता दिया था कि वो छः बजे की बजाय सात बजे तक आयेंगी क्योंकि उन्हें किसी पार्टी में जाना था।

    रशीदा मैडम करीब साढ़े-सात बजे एक छोटे बैग में कपड़े वगैरह लेकर आयीं। रशीदा मैडम आज कुछ ज्यादा ही अच्छे से तैयार होयी हुई थीं। उन्होंने आज आँखों पर आइ-शेडो और मस्कारा भी लगाया हुआ था और काफी अच्छा मेक-अप किया हुआ था। पार्टी के हिसाब से ही बेबी-पिंक कलर का सलवार-सूट पहना था जिसकी कमीज़ पर मोतियों और क्रिस्टल के साथ रेशमी धागे की सुंदर कढ़ाई की हुई थी। पैरों में काले रंग के काफी ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल थे। नौकर को अपने भाई की शादी में जाना था इसलिये रशिदा मैडम के आते ही उसने डिनर लगा दिया।

    रशीदा मैडम बोली, “रितेश तुम खाना खा लो… मैं तो पार्टी में खा कर सीधे आ रही हूँ!”

    मैं डिनर करने लगा और रशीदा मैडम भी डॉयनिंग टेबल पर मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयीं। नौकर उनके लिये संतरे का जूस ले कर आया तो उन्होंने नौकर को भी उसी वक्त जाने को बोल दिया कि उसे कहीं देर ना हो जाये। वो अगले दिन दोपहर तक लौटने का आश्वासन देकर चला गया।

    मैंने देखा कि रशीदा मैडम जूस पीते हुए बहुत अजीब नज़रों से ऐसे घूर रही थीं जैसे बिल्ली किसी चूहे को देख रही हो और उनके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी। इसके अलावा मैंने नोटिस किया कि उनकी आँखें भी थोड़ी लाल थीं और भारी सी लग रही थीं। मैंने पूछा , “मैडम आपकी आँखें लाल सी लग रही हैं… आपकी तबियत तो ठीक है ना?”

    वो हंसते हुए बोली, “मैं ठीक हूँ रितेश… वो बस यहाँ आने से पहले पार्टी में थोड़ी ड्रिंक कर ली थी इसलिये… बट ऑय एम ऑल राइट!” मेरे कुछ बोलने के पहले ही वो फिर बोली, “कभी-कभार ड्रिंक कर लेती हूँ… लेकिन स्कूल में किसी से कहना नहीं… प्लीज़!”

    मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि मैं किसी से नहीं कहुँगा तो वो उठकर अपने बैग में से वोडका की बोतल निकाल लायीं और बोली, “स्कूटर चला कर यहाँ आना था इसलिये पार्टी में ठीक से पी नहीं सकी… जब तक तुम डिनर कर रहे हो मैं भी एक-दो ड्रिंक ले लेती हूँ!” फिर अपने जूस में ही वोडका मिला कर मेरे सामने बैठ कर पीने लगी। जब तक मैंने डिनर खतम किया, मैडम ने भी दो पैग पी लिये थे।

    फिर हम स्टडी रूम में आ गये। रशीदा मैडम बोली, “रितेश, आज चलो मैं तुम्हें रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाती हूँ!” उनके बोलने के तरीके से लग रहा था कि वो नशे में थीं।

    “लेकिन मैडम कल जो आपने स्केलेटल सिस्टम पढ़ाना शुरू किया था वो तो अभी काफी बाकी है!” मैंने कहा।

    “रितेश! मैं कईं दिनों से तुम्हें रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाने के बारे में सोच रही थी…! रिप्रोडक्शन सिस्टम की नालिज होना ज़िंदगी में बेहद ज़रूरी है!” रशीदा मैडम मेरा गाल सहलाते हुए बोली।

    मैंने कहा, “ओके मैडम!” और किताब निकालने लगा।

    “रितेश! बुक की कोई ज़रूरत नहीं है… मैं तुम्हें बेहद सिंपल तरीके से प्रैक्टिकली रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाऊँगी… तुम्हें इतना इंट्रस्टिंग लगेगा कि हर रोज़ मुझसे रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाने को कहोगे!” वो मुस्कुराते हुए बोली।

    फिर उन्होंने बतान शुरू किया, “रिप्रोडक्शन सिस्टम में मेल और फिमेल के रिप्रोडक्टिव पार्ट्स के बारे में पढ़ते हैं!”

    “मैडम ये रिप्रोडक्टिव पार्ट्स क्या होते हैं?” “रितेश रिप्रोडक्टिव पार्ट्स मतलब कि सेक्ज़ुअल ऑर्गन.. मैं तुम्हें आम ज़ुबान में बेहद आसान करके समझाती हूँ…! देखो जिस्म के निचले हिस्से में तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट है और मेरे जिस्म के निचले हिस्से में मेरा रिप्रोडक्टिव पार्ट! लड़कों के रिप्रोडक्टिव पार्ट को आम ज़ुबान में लंड कहते हैं और लड़कियों के पार्ट को चूत कहते हैं। एक काम करो तुम खड़े हो जाओ… मैं तुम्हें दिखाती हूँ!”

    मैं खड़ा हो गया। मैं उस दिन जींस पहने हुए था। रशीदा मैडम ने मेरी जींस के बटन को खोल दिया। फिर ज़िप्पर को नीचे किया और आखिर में जींस को नीचे गिरा दिया। मैं अंडरवीयर में था। वो बोली, “रितेश ये अंडरवीयर भी उतार दो!”

    “वो… वो क्यों मैडम?” मैं शर्माते हुए बोला।

    “रितेश तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट इसी अंडरवीयर के अंदर है!”

    “लेकिन मैडम वो तो मेरा पेनिस है जिससे मैं पेशाब करता हूँ!”

    “हाँ वही… पेनिस को ही तो आम ज़ुबान में लंड कहते हैं और ये ही तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट्स है! रितेश दिखाओ तो कैसा है!” रशिदा मैडम ज़ोर देते हुए बोली। उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं।

    मैं हिचकिचाया तो उन्होंने खुद ही मेरा अंडरवीयर नीचे खींच दिया। मैंने झट से अपने हाथों से अपना लंड छुपा लिया। मुझे बहुत शरम आ रही थी।

    “देखो रितेश! ऐसे शर्माओगे तो कैसे सीखोगे… चलो हाथ हटाओ अपने…!” ये कहते हुए उन्होंने खुद ही मेरे हाथ मेरे लंड से दूर हटा दिये। मुझे बहुत अजीब लग रहा था और मैं नज़रें झुका कर खड़ा था।

    “वाओ! रितेश तुम्हारा लंड तो बेहद गोरा और खूबसूरत है! देखो इसी को लंड कहते हैं!” रशीदा मैडम मेरे लंड को अपने नरम हाथ में पकड़ कर सहलाते हुए रोमांचित होकर बोली। उनके सहलाने से मेरे लंड में स्वतः ही सख्ती आने लगी। मेरे लंड को सहलाना ज़ारी रखते हुए रशीदा मैडम फिर बोली, “ये रिप्रोडक्शन सिस्टम का एक अहम हिस्सेदार है… देखो ये सख्त हो रहा है… इसका मतलब तुम्हारा लंड अब इस काबिल हो चुका है कि वो रिप्रोडक्शन सिस्टम का हिस्सा बन सके… पहले ये बताओ कि तुम सैक्स के बारे में क्या जानते हो… बच्चे कैसे होते हैं?”

    “वो मैडम… बस इतना ही कि जब लड़का और लड़की साथ में नंगे सोते हैं और किस करते हैं तो लड़की प्रेगनेन्ट हो जाती है!” मैंने बताया जो भी मैं हिंदी फिल्मों की वजह से जानता था।

    मेरी बात सुनकर रशीदा मैडम हंसने लगी और फिर बोली, “रितेश तुम भी कितने नादान हो… साथ में सिर्फ नंगे सोने से कुछ नहीं होता… ये लंड जब औरत की चूत के अंदर जाकर उसे चोदता है और थोड़ी देर चुदाई करने के बाद औरत की चूत में ये अपना क्रीम जैसा पानी गिरा देता है… उससे बच्चा पैदा होता है!”

    “मैडम इसमें से तो पेशाब निकलता है…!”

    “क्या तुम्हारे लंड से कभी क्रीम जैसा गाढ़ा सफेद पानी नहीं निकला?” रशीदा मैडम ने कातिलाना अंदाज़ में मुस्कुराते हुए पूछा।

    “नहीं मैडम…!” मैंने कहा।

    “रियली! कोई बात नहीं… मैं हूँ ना ये सब सिखाने के लिये… खैर अब मैं तुम्हें चूत के बारे में बताती हूँ… देखो इधर!” वो मुस्कुराते हुए बोली और फिर उन्होंने अपनी कमीज़ को ऊपर उठाकर अपनी सलवार की तरफ़ इशारा करते हुए आगे कहा, “इसके अंदर मेरी चूत है…!”

    रशिदा मैडम ने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया और एक ही झटके में सलवार अपनी कमर से अलग कर दी । मैडम की सलवार के नीचे लाल रंग की छोटी सी सिल्क की पैंटी थी। फिर वो बोली, “रितेश इधर आओ और अपना हाथ इस पैंटी के अंदर डाल कर चूत को ऊपर से फील करो!”

    मैंने हाथ अंदर डाला तो गीला-गीला और बेहद गरम महसूस हुआ। मैंने तुरंत हाथ बाहर निकाल लिया और बोला, “मैडम इसके अंदर इतनी गर्मी है और गीला है… क्या आपने पेशाब कर दिया?”

    रशीदा मैडम मेरी मासूम बातों पर हंसते हुए प्यार से बोली, “ओह नो! ये पेशाब नहीं… मेरी चूत का रस है। जब चूत चुदने के लिये मचलती है तो उसमें से ये खुशबूदार रस निकलता है… इसका ज़ायका भी मस्त होता है… वैसे ही जैसे लंड से निकलने वाली क्रीम का!”

    फिर वो मेरा हाथ पकड़ कर अपनी नाक के पास ले गयीं और अदा से सूँघते हुए अपने मुँह में ले कर मेरी उंगलियाँ चूसने लगी। फिर रशीदा मैडम ने अपनी पैंटी को भी उतार दिया अब वो कमर से नीचे बिल्कुल नंगी थी। रशिदा मैडम बोली, “देखो रितेश! ये मेरी चूत है! इसके ऊपर काले रंग के बाल होते हैं जिन्हें झाँटें कहते हैं… लेकिन मैं उन्हें साफ़ कर देती हूँ क्योंकि मुझे साफ-सुथरी चिकनी चूत पसंद है! ये देखो… यहाँ गहरायी है ना!”

    “येस मैडम!” मैं तो मंत्रमुग्ध था क्योंकि पहले कभी मैंने चूत नहीं देखी थी।

    अपनी चूत को उंगलियों से फैलाते हुए रशीदा मैडम बोली, “देखो बिल्कुल नहर की तरह है… दोनों तरफ बाँध है और बीच में गहरायी… तो इसी को चूत कहते हैं! तुम्हारा लंड इसी चूत में जाकर चोदेगा तो उसे चुदाई कहेंगे!”

    मैंने थोड़ा कन्फ्यूज़्ड होते हुए पूछा, “लेकिन मैडम लंड इस चूत में कैसे घुसेगा?”

    रशीदा मैडम बोली, “चूत के अंदर घुसने और चुदाई करने के लिये लंड का सख्त होना ज़रूरी है… जब बहुत सारा खून लंड की नसों में भर कर दौड़ने लगता है तो लंड फूल कर सख्त हो जाता है!”

    “लेकिन मैडम… लंड की नसों में खून कैसे दौड़ेगा?” मैंने ज्ञासापूर्वक पूछा।

    रशीदा मैडम मेरे लंड को अपनी मुलायम मुठ्ठी में सहलाते हुए बोली, “जब चुदाई की मस्ती चढ़ती है तो खुद-ब-खुद लंड में खून दौड़ने लगता है… अब देखो मैं तुम्हारा लंड सहला रही हूँ तो ये धीरे-धीरे सख्त हो रहा है… और अगर मैं इसे अपने मुँह में ले कर चूसूँ तो तुम्हें और ज्यादा मस्ती चढ़ेगी और ये लंड बिल्कुल पत्थर की तरह सख्त हो जायेगा… चलो अब जल्दी से सारे कपड़े उतारो… मैं सब कुछ प्रैक्टिकल करके दिखाती हूँ!” इस बार मैंने आनाकानी नहीं की और अपने सारे कपड़े उतार दिये। रशीदा मैडम भी अपने सारे कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी हो गयीं। अब उन्होंने सिर्फ ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे। मैं तो उनका नंग रूप देखता ही रह गया। मेरी चिकनी छाती पर हाथ फिराते हुए रशीदा मैडम अदा से मुस्कुरा कर बोलीं, “क्यों रितेश! कैसा लगा मेरा नंगा जिस्म?”

    “मैडम आप बहुत सुंदर हैं… मैंने पहले कभी किसी को नंगा नहीं देखा… मुझे बहुत कुछ-कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है… देखिये मेरा लंड भी और फूलने कगा है… और आपके ब्रेस्ट तो बहुत ही गज़ब के हैं!” मैंने उत्तेजित होकर कहा।

    “देखा मैंने कहा था ना… मुझे नंगा देखकर तुम्हें चुदाई की मस्ती चढ़ रही है और तुम्हारा लंड खुद-ब-खुद इकसाइटिड हो रहा है!” रशीदा मैडम फिर बैठ गयीं और और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने सामने खड़ा कर लिया।

    मैंने पूछा, “मैडम तो क्या अब मेरा लंड आपकी चूत में घुस कर चोद सकता है?”

    “ज़रूर चोद सकता है… लेकिन रितेश! चुदाई महज़ चूत में लंड डाल कर चोदने का मकैनिकल प्रॉसेस नहीं है… बल्कि इसका पूरा-पूरा मज़ा लेना और देना चाहिये… खुदा ने दुनिया में चुदाई से बड़ा कोई मज़ा या खुशी नहीं बनायी… चुदाई के दौरान दिल, जिस्म और रूह एक हो जाते हैं और ज़न्नत के सुकून का एहसास होता है!” रशीदा मैडम गंभीर होते हुए बोली।

    उन्होंने आगे कहा, “चुदाई से पहले एक दूसरे को खूब सहलाना… चूमना… चूसना चाहिये… इससे बहुत मस्ती चढ़ती है और चुदाई का लुत्फ कईं गुना हो जाता है… जैसे कि अगर तुम मेरे ब्रेस्ट… मतलब कि मम्मे दबाओगे और मेरे निप्पल चूसोगे तो मेरी भी मस्ती बढ़ेगी… और ये देखो… मेरी चूत के ऊपर ये छोटी सी लंड जैसी क्लिट है… अगर इसे सहलाया या रगड़ा जाये या मुँह से चूसा जाये तो चूत बेहद मस्त हो जाती है… इन सबको फोरप्ले कहते हैं!”

    फिर रशीदा मैडम ने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा चेहरा अपने चेहरे के ऊपर झुका लिया और मेरे होंठ चूसने लगी। “रितेश! मेरे मम्मे सहलाओ… और मेरे निप्पल सक करो!” ये कहते हुए रशीदा मैडम ने मेरा चेहरा अपने ठोस मम्मों पर दबा दिया। मैं उनके मम्मे दबाते हुए बच्चे की तरह उनके निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा तो रशीदा मैडम की सिसकरियाँ निकलने लगी। “वेरी गुड रितेश! ऐसे ही चूसो…!” मेरे बालों में बेकरारी से हाथ फिराते हुए रशीदा मैडम बोलीं।

    फिर थोड़ी देर में उन्होंने मुझे अपने सामने सीधा खड़ा कर दिया और मेरे लंड के सुपाड़े पर चुम्मा दे दिया। जैसे ही रशीदा मैडम मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी तो मैं पीछे हटते हुए बोला, “नहीं मैडम… गंदा है ये… इसमें से पेशाब निकलता है…!”

    रशीदा मैडम ने मुझे फिर अपने सामने खींचते हुए कहा, “रितेश… लंड गंदा नहीं होता… इसे चूसने में तो मुझे बेहद मज़ा आता है और तुम्हें तो इतनी मस्ती चढ़ेगी कि तुम कंट्रोल नहीं कर पाओगे… मैं तो तुम्हारे लंड से निकलने वाली पहली-पहली क्रीम के ज़ायके के लिये बेकरार हूँ… ऐसा मौका ज़िंदगी में मुझे पहले कभी नसीब नहीं हुआ!”

    इतना कह कर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और उसपे जीभ घुमा-घुमा कर चूसने लगीं। मेरा तो मस्ती में मेरा सिर घूमने लगा। इतना सुखद एहसास जीवन में पहले कभी नहीं हुआ था। थोड़ी देर में मेरा बदन ऐंठ कर काँपने लगा और मैंने रशीदा मैडम का सिर पकड़ कर रिरियाना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि मेरा पेशाब निकलने वाला है। रशिदा मैडम को भी एहसास हो गया कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मेरा लंड अपने मुँह में ज़ोर-ज़ोर चूसते हुए उन्होंने मेरे चूतड़ पकड़ लिये ताकि मैं कहीं पीछे ना हट जाऊँ। कुछ ही क्षणों में मुझ अपने लंड में कुछ उबल कर दौड़ता सा महसूस हुआ था और मेरा लंड रशीदा मैडम के मुँह में स्खलित हो गया। आखिरी कतरा चूस लेने के बाद ही रशीदा मैडम ने मेरा लंड बाहर निकाला। मेरी आँखों के सामने तो अंधेरा ही छा गया था और मैं वहीं रशीदा मैडम के पैरों के पास फर्श पर बैठ गया। जीवन में मेरा लंड पहली बार स्खलित हुआ था और वो भी अपने से तीगुनी उम्र की टीचर के मुँह में।

    रशिदा मैडम अपने होंठ चपचपाते हुए बोली, “थैंक यू रितेश! आज तुमने मुझे ज़िंदगी का सबसे बेशकीमती तोहफा दिया है… आज पहली बार किसी लंड की पहली-पहली क्रीम का ज़ायक़ा नसीब हुआ है… ऑल थैंक्स टू यू!”

    “मैडम! मुझे भी बहुत अच्छा लगा… आऊट ऑफ दिस वर्ल्ड!” मैंने कहा।

    रशीदा मैडम अपनी चूत पर हाथ फिराते हुए बोली, “जब मेरी चूत चोदोगे तो और भी मज़ा आयेगा!”

    “लेकिन मैडम मेरा लंड तो अब नरम हो गया… चुदाई कैसे होगी?” मैंने निराशा भरे स्वर में कहा।

    “अरे मायूस क्यों हो रहा है… अभी अपने प्यार से इसमें फिर जान फूँक दूँगी!” मेरे लंड को अपने सैंडल से टटोलते हुए रशीदा मैडम बोली। असल में उनके सैंडल के स्पर्श मात्र से भी मेरे लंड में मस्ती ट्रिगर होने लगी। उन्होंने फिर मुझे अपने सामने खड़ा किया और मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी और एक बार फिर उसे मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया। मेरे लंड को सख्त होते देर नहीं लगी।

    जब मेरा लंड लोहे के रॉड की तरह सख्त हो गया तो रशीदा मैडम बोली, “मैं पैरों को फैलाकर टेबल के बल खड़ी हो जाती हूँ, तुम अपना लंड मेरी चूत में डालो!”

    “लेकिन मैडम… बच्चा पैदा हो गया तो…?” मैंने आशंकित होकर पूछा।

    रशीदा मैडम बोली, “कोई बात नहीं… मैं टीचर हूँ ना… ऐसा नहीं होने दूँगी क्योंकि मैं बच्चा ना होने की दवाई लेती हूँ!”

    मैंने फिर पूछा, “लेकिन मैडम मेरा तो लंड काफी सख्त और बड़ा है… ये आपकी चूत में कैसे घुसेगा… कहीं आपकी चूत ज़ख्मी ना हो जाये!”

    “कुछ नहीं होगा… तुम्हारा लंड मेरे थूक से चिकना हुआ है और मेरी चूत भी चिकने रस से भिगी हुई है… जब तुम इसमें अपना लंड डालोगे तो अंदर चला जायेगा…!” रशीदा मैडम बेकरारी से मेरे सवालों पर थोड़ा खीझते हुए बोली। वो अपने दोनों पैरों को फ़ैला कर टेबल के बल चूतड़ टिका कर खड़ी हो गयीं। पैरों मे सिर्फ़ ऊँची हील के सैंडल पहने इस तरह चौड़ी टाँगें करके खड़ी वो बहुत मादक लग रही थीं। रशीदा मैडम ने खुद मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा तो मैंने धीरे से धक्का दिया। मेरा लंड सरसराता हुआ रशीदा मैडम की चूत में चला गया। “ओहहहह आआआहह… रितेश बहुत सख्त और गरम लंड है तुम्हारा… वेरी गुड… पूरा लंड घुसा दो!” रशीदा मैडम ने मस्ती में सिसकते हुए कहा। मैंने धीरे से और धक्का दिया तो पूरा का पूरा लंड रशीडा मैडम की चूत में चला गया। उनकी भीगी चूत इतनी गरम और इतनी मुलायम थी जैसे कि गरम मक्खन।

    “ऊँऊँहहह्ह…. रितेश! अब अपने लंड को बाहर खींचकर फिर थोड़ा अंदर डालो!”

    मैंने उनके निर्देश अनुसार अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और फिर अंदर डाल दिया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। रशीदा मैडम ने आँखें बंद कर लीं। वो भी अपने चूतड़ आगे-पीछे चलाने लगी।

    वो मेरी गर्दन में बाँहें डालकर बोली, “रितेश इसे ही चोदना कहते हैं… जब चूत में लंड आगे-पीछे होता है… तो देखो चूत से रस निकलता है और चुदाई आसान हो जाती है… चोदो… और अंदर डालो… थोड़ा और अंदर दबाओ… आहहह बेहद अच्छी तरह चुदाई कर रहे हो तुम… थोड़ा राइट से मारो… थोड़ा राइट… और थोड़ा… हाँऽऽ हाँऽऽ चोदो… चूत के अन्दर और थोड़ा डालो। ऊँऊँमऽऽऽ. रितेश वेरी गूड… मैं जानती थी कि तुम्हारा लंड वाकय चोदने के काबिल हो गया है. पेलो इसे और पेलो… आज तुम्हारे लंड का इनॉग्यरैशन करके मैंने तुम्हें जवान बना दिया!”

    मुझे भी मज़ा आ रहा था। लंड वाकय में बहुत कड़क हो गया था। शरीर में एक अजीब सी कसावट पैदा हो गयी थी और ना जाने क्या हो गया। फिर रशीदा मैडम बोली, “रितेश रुको… थोड़ा बाहर निकालो अपने लंड को… मैं कुत्तिया बन जाती हूँ… तुम पीछे से पेलो….!”

    रशीदा मैडम अपने दोनों हाथों को ज़मीन के बल रखके कुत्तिया बन गयीं। मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में लगाया और पेलना शुरू कर दिया। “हाँ रितेश…! आह बड़ा मज़ा आ रहा है… चोदो और चोदो… !” वो लगातार सिसकते मस्ती में बड़बड़ा रही थीं, “हाँऽऽ फाड़ डालो मेरी चूत… पूरी तरह चोद दो आज…. मेरी चूत बेहद प्यासी है… आहह… ऊऊऊहहहह बहुत दिनों के बाद ऐसा ताज़ा लंड नसीब हुआ है… कोरे लंड से चुदाने का मज़ा ही अलग है… चोद… और ज़ोर से… तुम वाकय में मेरे प्यारे स्टूडेंट हो… कब से मेरी नज़र थी तुम पर… अपनी मैडम की चूत की प्यास बुझा दो!”

    “मैडम… आप जैसे कहेंगी वैसे ही चोदुँगा मैं आपकी चूत को… इसका कचूमर निकाल दूँगा.. मैडम… बहुत अच्छा लग रहा है!” मैंने उनकी चूत में लंड पेलते हुए कहा।

    “भोंसड़ा बना डालो अपनी मैडम की चूत का… चोदो… पेलो… और जोर से… हाँऽऽऽ रितेश… ऐसे ही… पेलते रहो… पेलते रहो… अपने लंड को मेरी चुत में पेलते रहो….!” रशीदा मैडम इसी तरह बोलती रहीं और ये चुदाई करीब पंद्रह मिनट तक ज़ारी रही। इस बीच मैडम का बदन दो बार अकड़ा और चींखते हुए मेरे लंड पर पानी छोड़ते हुए झड़ीं। फिर मेरा लंड भी रशीदा मैडम की चूत में स्खलित हो गया और मैं उनकी कमर के ऊपर ही ढेर हो गया।

    अपनी साँसें संभालने के बाद उन्होंने मेरे लंड को प्यार से अपने मुँह में चूस कर साफ किया और फिर हम नंगे ही गेस्ट-बेडरूम में आकर बेड पर लेट गये। रशीदा मैदम ने अपने सैंडल भी नहीं निकाले। वो मेरा गाल सहलाते हुए बोली, “रितेश… तो समझ में आया रिप्रोडक्शन सिस्टम?”

    “येस मैडम… और मज़ा भी आया!” मैंने कहा।

    रशीदा मैडम बोलीं, “रितेश… ये तो रिप्रोडक्शन सिस्टम का पहला ही चैपटर था। अभी तो बहुत कुछ सीखना बाकी है और मुझे जब भी मौका मिलेगा तुम्हें सब कुछ प्रैक्टिकली सिखाऊँगी और हम खूब प्रैक्टिस करेंगे! बस प्रॉमिस करो कि किसी से भी इस बारे में ज़िक्र नहीं करोगे!”

    “श्योर मैडम… मैं सीक्रेट रखुँगा ये सब…! आप बहुत अच्छी टीचर हैं…! कितनी मस्ती और मज़े से आपने प्रैक्टिकली मुझे रिप्रोडक्शन सिस्टम समझा दिया!” मैं बोला।

    “रितेश मुझे चुदवाने का बेहद शौक है… खासतौर पे तुम्हारे जैसे वर्जिन और यंग लड़कों से… मैं कईं लड़कों को रिप्रोडक्शन सिस्टम प्रैक्टिकली समझा कर उन्हें चुदाई में एक्सपर्ट बना चुकी हूँ!” कहते हुए उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में दबोच लिया और मेरा चेहरा उनके नंगे मम्मों में धंस गया। ऐसे ही लिपट कर लेटे हुए कब हमें नींद आ गयी पता ही नहीं चला।

    अगले दिन सुबह मेरी आँख खुली तो रशीदा मैडम लेटी हुई मेरा लंड प्यार से सहला रही थीं जो इस वक्त काफी सख्त हो चुका था। मैंने देखा कि रशीदा मैडम अभी भी मेरी तरह ही बिल्कुल नंगी थीं और अपने हील वाले सैंडल भी नहीं उतारे थे। मुझे जागते देख कर उन्होंने मेरे होंठ चूम लिये और बोली, “तुम्हारा लंड तो कब से उठा हुआ है… बस तुम्हारे उठने का इंतज़ार था! दोपहर तक तुम्हें चुदाई के और एक-दो कॉन्सेप्ट सिखा दुँगी तुम्हें!”

    उसके बाद नौकर के आने के पहले दोपहर तक मैंने और रशीदा मैडम ने दो बार चुदाई की और उन्होंने मुझे चूत चाटना भी सिखाया। नौकर के आने से पहले हम दोनों तैयार हो गये और बाद में रशीदा मैडम अपने घर चली गयी।

    हमारे घर पर शाम को ट्यूशन के समय चुदाई का प्रैक्टीकल करने में खतरा था इसलिये रशीदा मैडम ने पापा से बात कर ली की मैं ही रशीदा मैडम के घर जाकर उनसे ट्यूशन पढ़ूँ। मैं हफ्ते में तीन दिन शाम को रशीदा मैडम के घर जाने लगा पढ़ने के लिये। कहने की ज़रूरत नहीं कि वास्तविक पढ़ायी कम होती थी और चुदाई की प्रक्टिस ज्यादा। रशीदा मैडम मुझसे अक्सर गाँड भी मरवाती थीं और वी-सी-आर पे ब्लू-फिल्में दिखा कर वैसे ही चुदाई मेरे साथ करतीं।

    फिर करीब तीन महीने पश्चात मुझे उन्होंने अपनी दो और सहेलियों की हवस का शिकार भी बना दिया। रशीदा मैडम की वो दोनों सहेलियाँ, सायरा आंटी और आमना आंटी, भी उन ही की तरह यंग कमसिन लड़कों की रसिया थीं। हफ्ते भर शाम को ट्यूशन में रशीदा मैडम मुझे चुदाई के गुर सिखा कर खूब प्रैक्टिस करवाती और फिर हर शनिवार को रशीदा मैडम के घर पे ही उनकी दोनों सहेलियाँ इक्स्टर्नल इग्ज़ैमिनर बन कर आतीं और शराब पी कर तीनों ठरकी सहेलियाँ मिलकर दो-तीन घंटे तक मेरी प्रैक्टीकल की परीक्षा लेतीं। सायरा आंटी रशीदा मैडम की तरह ही किसी दूसरे स्कूल में टीचर थीं और आमना आंटी हाऊज़-वाइफ थीं और उनके हसबैंड बहुत बड़े उद्योगपति थे। तीनों में से आमना आंटी ही सबसे ज्यादा ठरकी और सबसे ज्यादा पर्वर्ट भी थीं। चुदाई के समय तो बेकाबू होकर बिल्कुल भूखी शेरनी की तरह खौफनाक हो जाती थी और काटने, खरोंचने तक लगती थी। शराब के नशे में इतनी गंदी-गंदी गालियाँ बकती थीं कि किसी रंडी को भी शरम आ जाये।

    ये सब सिलसिला करीब दो साल तक चला और नवीं क्लास में पापा ने मुझे बॉर्डिंग स्कूल में भेज दिया।

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    Release Date : 18 August 2018

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    यह कहानी तब की है जब मेरी दिवाली की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं अपने अंकल के वहाँ चला गया जो वड़ोदरा में रहते हैं। उनका तीन लोगों का परिवार है, अंकल-आंटी और उनका 7 साल का बेटा। यह कहानी मेरी आंटी के बारे में है। मेरी आंटी का फ़ीगर क्या बताऊँ दोस्तो, वो कद में मुझसे छोटी है पर दिखने में किसी कयामत से कम नहीं ! मेरी और आंटी की बहुत जमती थी और अंकल एक बिजनेसमैन हैं, अंकल मुझे बड़े बेटे की तरह कम और दोस्त ज्यादा रखते थे। एक दिन अंकल को किसी काम से दूसरे शहर जाना पड़ा। उस रात मैं और आंटी बैठे थे। मेरी और आंटी की अच्छी बनती थी पर मैंने कभी आंटी को उस नजर से नहीं देखा था पर उसके इरादे आज मुझे साफ नहीं लग रहे थे। फ़िर भी हम बैठे थे। वो मुझे बोल रही थी- पराग अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी ! मै- क्या कहा आपने? आंटी- शादी बुद्धू शादी। मै- आंटी, अभी तो मेरी पढ़ाई चल रही है? आंटी- तो क्या शादी के बाद नहीं पढ़ सकते क्या? दोस्तो, मैं बता दूँ कि हमारी बिरादरी में शादी बहुत जल्द हो जाती है। मै- हाँ, पढ़ तो सकते है लेकिन ! आंटी- लेकिन क्या पराग? मेरे जवाब देने से पहले आंटी ने फ़िर पूछा- देख पराग, तेरी पसन्द में कोई और हो तो बता दो वरना ! मै- नहीं, मुझे कोई पसन्द नहीं है। फ़िर मैंने पूछा- वरना क्या? आंटी- मैंने तुम्हारे पापा से बात की है कि मेरी छोटी बहन काजल को अपने घर की बहु बनाएँ। मैं- पर वो तो तुम्हारी बहन है। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |  पर दोस्तो, मैं अंदर से बहुत खुश था क्योंकि काजल दिखने में इतनी खूबसूरत है कि पूछो ही मत ! स्वर्ग की अप्सरा जैसी। आंटी- तो क्या हुआ? अगर मेरी बहन तुम्हारी बीवी बने? मै- पर अभी तो मैंने कमाना भी चालू नहीं किया और बड़ी प्रोब्लम तो यह है कि शादी के बाद क्या करते हैं, मुझे पता नहीं? आंटी- ओेई हरिचन्द्र, तेरे पापा का अच्छा बिजनेस चल रहा है तेरे अंकल का भी अच्छी तरह से चल रहा है तो क्या मेरी बहन भूखी रहेगी तेरे घर में? मैं- यह बात भी ठीक है ! इतने में आंटी बोली- तेरे दूसरे प्रोब्लम में मैं तेरी मदद कर सकती हूँ ! मै- वो कैसे? आंटी- मैं तुम्हें सब सिखा दूंगी। और मैं तैयार हो गया मैं तो सांसारिक जीवन कैसे जीते हैं यह सीखना चाहता था पर आंटी सेक्स सिखाना चाहती थी। बातों ही बातों में रात के 12 बज गये तो मैंने कहा- चलो सो जाते हैं। तो आंटी ने कहा- सीखना नहीं है? “मैं कुछ समझा नहीं?” तो अब आंटी ने अपनी शरम छोड़ते हुए कहा- इसकी क्लास तो रात में ही लगती है ! मै- यह आप क्या कह रही हैं? मुझे तो सब समझ आ गया था कि आज आंटी मुझसे चुदने वाली हैं, और मैं भी खुश था। और उसी ख्याल में मेरा लन्ड कब खड़ा हो गया पता ही नहीं चला। अब मैं भी गर्म हो गया था और आंटी तो जैसे ज्वाला की तरह गर्म थी। तो आंटी ने मुझे अपने बेडरूम की तरफ़ इशारा किया, मैं समझ गया कि लाईन साफ़ है। मैं जब अन्दर गया तो आंटी ने मुझे अपनी ओर जोर से खींच लिया और मुझे पूरे बदन पर चुम्बन करने लगी। मैं तो स्वर्ग की सैर कर रहा था क्योंकि पहले कभी किसी लड़की ने मुझे छुआ तक नहीं था। अब वो मेरा लन्ड पैन्ट के ऊपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी और मेरे मुँह से ओह आह की आवाज निकल रही थी और उसे मुझे तड़पा कर मजा आ रहा था। अब तक मैं ऐसे ही खड़ा था। अगले ही मिनट आंटी बोली- पराग, मैं तुम्हें पसन्द नहीं हूँ क्या? मै- नहीं आंटी, आप तो सुन्दर हैं।

    आंटी- तू झूठ बोल रहा है ! अगर मैं तुम्हें पसन्द होती तो अब तक तूने मुझे चोद दिया होता ! आंटी तीर पर तीर छोड़ रही थी और मेरे सब्र का बान्ध टूट रहा था। पर वो मेरी आंटी थी तो मैं उसे चोदना नहीं चाहता था लेकिन मैं भी जवान था, जल गया आंटी की ज्वाला में ! और मैं उसके ऊपर चढ़ गया लेकिन वो मेरे इस वार के लिए तैयार नहीं थी। फ़िर मैं उस पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मैं उसको पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी। आग दोनों तरफ से लगी हुई थी। अब आंटी ने मेरे शर्ट के बटन खोलने चालू किए और मुझे एक नशा सा छाने लगा। अब मुझे पता नहीं था कि मैं क्या कर रहा था पर आंटी तो पूरे मूड में थी। आंटी ने मेरी पैन्ट को नीचे कर दिया अब मैं सिर्फ अन्डरवीयर मैं आंटी के सामने खड़ा था पर अब मेरी बारी थी आंटी के कपड़े उतारने की | तो मैंने आंटी के ऊपरी वस्त्र उतारने लगा तो मैं थोड़ा डर रहा था, मैंने धीरे से उसके स्तन पर हाथ रख दिया तो उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबा दिया, मैंने उसका ऊपरी वस्त्र निकाल फेंका। अब उसके दोनों सन्तरे मेरे हाथों में थे तो मैं उनसे खेलने लगा। आंटी बोली- इनसे खेलते रहोगे या कुछ और करने का भी इरादा है? तो मैंने आंटी से कहा- वैसे तो मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ मेरी जान ! इस बार आंटी थोड़ा शरमा गई तो मैंने कहा- शरमा क्यूँ रही हो? आंटी मजाक करते हुए- तुम तो मेरे बेटे जैसे हो। मैं- हाँ, तो आज बेटे से ही चुदवा लो ! आंटी- बड़ा आया चोदने वाला ! मैंने देखा है तुम्हारा लौड़ा ! छीः ! मुझे तो तुम्हारे लौड़े को लौड़ा कहने में भी शरम आ रही है।आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं- क्यूँ, आपने कब देखा? आंटी- तो क्या हुआ अगर मैंने तेरा लण्ड नहीं देखा तो आज तो जी भर कर देखूँगी और…!! इतना कह कर वो मेरे लण्ड पर टूट पड़ी। मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया मेरे मुँह से आह ह्ह..अओह की आवाज आ रही थी क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तो दोस्तो, मैं 2 मिनट में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य आंटी के मुँह में छोड़ दिया और दोस्तो, क्या बताऊँ, दिल को कितना सुकून मिला ! पर दोस्तो, मैंने हार नहीं मानी। थोड़ी ही देर बाद आंटी को कस कर पकड़ कर अपना लण्ड आंटी की चूत के मुँह पर रख दिया और एक झटका लगाया तो मेर लण्ड आंटी चूत में पूरा समा गया। दोस्तो, इस अनुभव का मैं विस्तार नहीं कर सकता ! थोड़े शब्दो में कहूँ तो ”स्वर्ग भी कुछ नहीं है इस चूत के आगे !” पर मुझे लगा कि आंटी को कुछ परेशानी थी, उसकी आँखों से पानी निकल रहा था तो मैं रूक गया और आंटी को किस करने लगा और आंटी से पूछा- आंटी आपको बहुत दर्द हो रहा है? आंटी- हाँ, बहुत हो रहा है, इस तरह से कोई चोदता है अपनी आंटी को? मै- आपकी कोई मदद कर सकता हूँ? आंटी- हाँ, मादरचोद चोद दे मुझे मसल दे मेरी जवानी को… अब मैं आंटी को जोर-जोर से चोदने लगा, आंटी दर्द के मारे मुझसे कस कर लिपट गई और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए। आंटी बुरी तरह चिल्ला रही थी पर मैंने उस पर और उसकी चूत पर बिल्कुल रहम नहीं किया और जोर-जोर से अपना लण्ड पेलता रहा आंटी की चूत में। आंटी चिल्ला रही थी और बोल रही थी- पराग ! और जोर से चोदो… बहुत मजा आ रहा है, अओह… पराग चोद दो मुझे ! आज मत छोड़ना ! आह…आ आह ! की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। कितनी सेक्सी आवाज थी दोस्तो ! मैं तो पूरी ताकत से चोद रहा था। इतने में सब खत्म हो गया।  मैंने 20 मिनट चुदाई करके आंटी की चूत में ही झड़ गया क्योंकि मुझे पता था की आंटी की नसबंदी का ओपरेशन हो चुका है। इसलिए कोई प्रोब्लम नहीं थी। हम दोनों पर एक मदहोशी सी छाने लगी। इस दौरान आंटी तीन बार झड़ गई थी तो उसकी हालत तो मुझसे भी खराब थी, उसकी आँखें नशीली हो गई थी, उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था, अब वो मुझे किस कर रही थी और मेरी छाती को भी चूम रही थी। इतना सब होने के बाद रात के 3 बज गए, मैं और आंटी पूरी रात साथ बिना कपड़ों के ही सो गए। सुबह जब मैं उठा तो आंटी ने मुझे चाय के लिए बुलाया तो मैं चला तो गया आंटी के पास पर दोस्तो, रात के कारनामे से मैं आंटी के साथ आँख नहीं मिला पा रहा था। मैं चाय लेकर कम्रे में आ गया पर मैं अपने आप को रोक नहीं सका, मैं चाय पी करके रसोई में चला गया क्योंकि आंटी वहीं थी। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं रसोई में जाते ही आंटी की गर्दन पर किस करने लगा, तो आंटी पीछे मुड़ कर मेरे होंठों पर किस करने लगी और बोली- पराग, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… क्या तुम भी मुझे प्यार करते हो ? मैं- आई लव यू | दोस्तो, मैंने आंटी से यह नहीं कहा कि आप शादीशुदा हैं या ऐसा कुछ ! वैसे तो आप सभी काफी समझदार हैं, आंटी मुझसे क्यूँ चुदना चाहेगी उसका कारण तो आप जानते हो।  

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    मैंने कहा, “आराम से खूब क्रीम मलो। थोड़ी देर बाद जब गाँड का छेद रीलैक्स हो जायेगा तब बड़े आराम से मेरा लंड अंदर जायेगा…” और मैं स्मोक करने लग गया। दोस्तों क्या सीन था कि एक बेटी अपनी माँ की गाँड पर पूरी लगन से क्रीम मल रही थी और अपनी माँ को गाँड मरवाने के लिये तैयार कर रही थी। सिगरेट खतम होने के बाद मैं पलंग पर चढ़ा और अपना तन्नाया हुआ लंड ममता आंटी के चूत्तड़ों पर फेरने लगा और नेहा को बोला, “अब ज़रा मेरे लंड के ऊपर भी क्रीम लगाओ! अब मैं आपकी मम्मी के भूरे रंग के गाँड के छेद को खोलूँगा।” नेहा ने बड़े ही प्यार से मेरे लंड पर क्रीम लगायी और एकदम चिकना कर दिया। मैंने नेहा को कहा कि वो अपने दोनों हाथों से अपनी मम्मी के चूत्तड़ पकड़ ले और खींच कर चौड़े करे ताकि ममता आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल जाये। नेहा ने मेरे कहे अनुसार अपनी मम्मी के दोनों विशाल चूत्तड़ों को पकड़ लिया और चौड़े कर दिये जिससे ममता आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल गया। मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और गाँड के भूरे छेद पर टिका दिया और दूसरे हाथ की उँगलियों से गाँड के छेद को और चौड़ा किया और लंड का सुपाड़ा टिका कर हल्के से झटका दे कर ममता आंटी की कोरी गाँड में सरका दिया। क्रीम की चिकनाहट के कारण मेरा एक इंच लंड ममता आंटी की गाँड के छल्ले में जा कर फँस गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी बोलीं, “अनिल बहुत दर्द कर रहा है बाहर निकाल ले।” मैंने कहा, “ममता घबराओ नहीं। आराम-आराम से दूँगा। बस तुम हिम्मत कर के लंड लेती रहो।” इतना बोल कर मैंने नेहा को इशारा किया कि वो अपनी माँ की गाँड एक दम कस कर पकड़ ले। नेहा ने भी मेरा कहना माना और मैंने अपने दोनों हाथों से ममता आंटी की कमर पकड़ ली और ज़ोरदार झटका मारा जिससे चिकनाहट होने के कारण मेरा लंड सरकते हुए पूरा सात इंच ममता आंटी की गाँड में समा गया। ममता आंटी को तो जैसे बिजली का शॉक लग गया हो। अगर नेहा ने उनके चूत्तड़ और मैंने उनकी कमर कस कर नहीं पकड़ी होती तो शायद ममता आंटी मेरा लंड निकाल देतीं पर बेचारी मजबूर थी… सिवाये कसमसाने के और गालियाँ देने के अलावा वो कुछ भी नहीं कर सकती थीं। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने भी बिना कुछ परवाह किये बिना अपना पूर लंड ममता आंटी की गाँड में उतार कर ही दम लिया और हल्के-हल्के शॉट देने लगा। ममता आंटी तो दर्द के मारे पागल हो गयी थी और बोले जा रही थीं, “अरे मादरचोद, भोसड़ी वाले मार डाला रे। तेरी माँ का भोंसड़ा मादरचोद! अगर मुझे मालूम होता कि गाँड मरवाने में इतना दर्द होता है तो बहन के लंड तुझे छूने भी ना देती। बहनचोद मैं ज़िंदगी भर तुझे जैसे कहेगा वैसे ही चुदवाऊँगी और चूसूँगी। तू जिसको बोलेगा मैं उसको चुदवा दूँगी तेरे से। मुझे छोड़ दे माँ के लौड़े। हाय मेरी माँ! फट गयी मेरी गाँड। मादरचोद सत्यानाश कर दिया तूने आज मेरी गाँड का। आज तक मैंने बड़े प्यार से बचा कर रखी थी।” ममता आंटी बोलती रहीं पर अब मैं ताव में आ चुका था और हुमच-हुमच कर अपना लंड गाँड में पेल रहा था। ममता आंटी को भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि अब वो कह रही थीं, “मार ले मेरे डार्लिंग! मार ले अपनी आंटी की गाँड। हाय हाय! शूरू-शूरू में तो बहुत दर्द हुआ डार्लिंग पर वाकय में अब बहुत मज़ा आ रहा है। नेहा तू भी अनिल से अपनी गाँड जरूर मरवाना।” करीब बीस पच्चीस मिनट तक ममता आंटी की गाँड मारने के बाद मैंने अपना रस ममता आंटी की गाँड में ही निकाल दिया। दोस्तों! उस दिन के बाद महीने भर जब तक अंकल नहीं आये, मैंने उन दोनों माँ-बेटी को एक ही बिस्तर पर एक साथ नंगा करके खूब चोदा। अंकल के आने के बाद, ममता आंटी को दिन में जब भी समय मिलता, एक बार तो चुदवा ही लेती थी। और मैं हर रोज़ नेहा के साथ सोता था और हम दोनों जम कर चुदाई करते थे। ममता आंटी ने और नेहा ने अपनी सहेलियों का भी खूब मज़ा दिलवाया। ममता आंटी और नेहा के कारण मुझे अलग-अलग औरतों को चोदने का मौका मिला। आशा करता हूँ कि आप सब को मेरी आप-बीती सुन कर मज़ा आया होगा।

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    मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और बलबला कर उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया। मैं नेहा की कोरी चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, “बहन की लौड़ी दीदी! जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!” और आराम से सिगरेट सुलगाकर अपनी पीठ टिका कर पीने लगा। नेहा ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया, पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर नेहा के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसाता रहा। दस मिनट बाद मैंने नेहा को बोला, “चलो आज आपको घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ। मेरी प्यारी दीदी! करोगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?” नेहा ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “अनिल कैसे घोड़े की सवारी? तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में चोदूँ?” मैंने कहा, “हाँ दीदी! आपको तो सब पता है… पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए।” नेहा मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले। जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया। नेहा बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी। दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, “नेहा दीदी! अब आप अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे करो और लंड सवारी का मज़ा लो।” इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा। नेहा की हिम्मत मुझे माननी पड़ी कि दर्द होने के बावजूद भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार करीब आधे घंटे तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का फाऊँटेन उसकी चूत में गिरा दिया और नेहा को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे। करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा नेहा सिगरेट पीते हुए मेरे लंड से खेल और चूस रही थी। जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी। मैंने भी कहा, “दीदी! चूसो इसे… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने नेहा से कहा, “नेहा दीदी! आपको ये तो मानना पड़ेगा कि आज भी और आगे भी मैं जब आपको चोद कर ये सुख दूँगा, ये सब आपकी मम्मी की वजह से ही मुमकीन हुआ है।” नेहा तपाक से बोली, “यू आर राइट अनिल! ऑल थैंक्स टू मम्मी! अगर मम्मी नहीं मानतीं तो पता नहीं मेरी चूत कब चुदती।” मैंने कहा, “फिर तो दीदी ये गलत बात है कि हम दोनों अंदर इतना मज़ा ले रहे हैं और आपकी मम्मी बाहर अपनी चूत अपनी उँगली से ठंडी कर रही है। मेरी बड़ी इच्छा है कि आप दोनों को मैं एक ही पलंग पर एक साथ नंगा करके चोदूँ।” नेहा फ़ोरन ही तैयार हो गयी और बोली, “मैं अभी जा कर मम्मी को बुला कर लाती हूँ।” मैंने कहा, “नहीं! आप बैठ कर एक ड्रिंक और सिगरेट पियो। मैं आपकी मम्मी को लाता हूँ।” मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि ममता आंटी अपना ब्लाऊज़ उतार कर ब्रा और पेटीकोट में लेटी हुई थी और अपना पेटीकोट कमर तक उठा कर स्मोक करते हुए अपने वाइब्रेटर से मुठ मार रही थीं। मुझे देख कर बोली, “क्या बात है अनिल! नेहा ठीक तो है ना?” ममता आंटी की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं। मैंने कहा, “डार्लिंग घबराओ नहीं! मेरा लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की। अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है। चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है। इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी। तुम्हारी तरह वाइब्रेटर से ठंडी नहीं होगी।” ममता आंटी बोली, “क्या बात है (हुच्च) तू बाहर कैसे आ गया?” मैंने कहा, “ममता मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ और तुम्हारी चूत बजाऊँ।” ममता आंटी बोली, “व्हॉट? ऑर यू क्रेज़ी? (हुच्च) मुझे अपनी बेटी (हुच्च) के सामने चुदाने में शरम आती है।” नेहा जो शायद दरवाजे पर खड़ी हो कर हमारी बातें सुन रही थी, सिर्फ़ सैंडल पहने नंगी ही एक दम बाहर आ गयी और बोली, “मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना। मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है।” ममता आंटी उठ कर खड़ी हुईं तो गिरते-गिरते बचीं। उन्होंने काफ़ी ड्रिंक कर रखी थी और नशे और हाई पेन्सिल हील की सैण्डलों की वजह से उनका बैलेंस बिगड़ गया पर नेहा ने उनको अपनी बाहों में भर लिया। मैने भी पीछे से जा कर ममता आंटी की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबा लिया और ममता आंटी को बीच में दबाये हुए बेडरूम में ले कर आ गये क्योंकि वो नशे में अपने आप चलने की सूरत में नहीं थीं। मैंने नेहा को कहा, “चलो दीदी! अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ।” मैंने ममता आंटी की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं। नेहा ने भी ममता आंटी के सारे कपड़े उतार दिये और बोली, “लो अनिल अबकी बार मेरी मम्मी की चूत की सिकाई करो।” क्या नज़ारा था दोस्तों! अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ हाई हील सैण्डलों में, मेरे सामने थीं। मैंने भी नंगी ममता आंटी को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, “ममता डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा और जैसे तुमने उस दिन कहा था कि कोरी चूत तो नहीं दे सकी पर अपनी कोरी गाँड मरवाऊँगी, तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड का उद्घाटन करूँगा। अपनी गाँड मरवाओगी ना ममता डार्लिंग।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, “मेरे गाँडू राजा! मैं तुझे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ। साले (हुच्च) तू… तूने… मेरी चूत मारी… मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और…. और… यहाँ तक की साले चूतिये तूने मेरे सैण्डलों और पैरों को भी नहीं छोड़ा…. बोल साले भोसड़ी के… (हुच्च) तुझे कभी मैंने ना कहा क्या… हैं? तो इसके बाद क्या पूछता है… जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, अब गाँड मारनी है… तो साले गाँड मार ले, पर मेरी गाँड जरा प्यार से मारना, मैंने आज तक (हुच्च) तेरे अंकल को उँगली तक नहीं लगाने दी।” मैंने कहा, “डार्लिंग तुम बस आराम से एक और ड्रिंक लगा कर कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ… मैं अपना लंड नेहा से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ।” ममता आंटी ने ड्रिंक बनाने की बजाये व्हिस्की की बोत्तल ही मुँह से लगा कर पीने लगी। मुझे पहले तो चिंता हुई कि कहीं इतना पीने से बिल्कुल ही पस्त हो कर सो ना हो जायें और मेरा सब प्लैन चोपट हो जाये पर फिर ख्याल आया कि आंटी पीने की आदी हैं। वैसे तो आम-तौर से वो लिमिट में ही पीती हैं पर पहले भी मैंने उन्हें ज्यादा पी कर नशे में धुत्त देखा है और जब भी ममता आंटी नशे में कंट्रोल के बहार हुई हैं तब वो पस्त या शाँत होने की बजाय हमेशा काफ़ी बेकाबू और ज्यादा उत्तेजित ही हुई हैं। यही सोच कर मैंने नेहा को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, “लो नेहा दीदी! चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये। देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी। ममता! देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये। ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी। देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है।” मैं नेहा का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा। इतनी देर में ममता आंटी भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी। मैने नेहा के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, “दीदी चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये… अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आपकी मम्मी को ज्यादा तकलीफ न हो।” नेहा ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और ममता आंटी की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, “अनिल! मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है। मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है।”

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    शाम को ममता आंटी बिस्तर पर सिर्फ हाई हील वाले काले और चमचमाते सैण्डल पहने, नंगी पसरे हुए ड्रिंक पी रही थीं और मैं अपने होंठ और जीभ उनके सैण्डलों और पैरों पर फिरा रहा था। मुझे उनके सैण्डलों और पैरों की महक और टेस्ट बहुत अच्छा और उत्तेजक लग रहा था, जिसकी वजह से मेरा लौड़ा तन कर सीधा खड़ा था। ममता आंटी बोली, “डार्लिंग अब और चूदाई नहीं करेंगे ताकि तेरा लंड कल नेहा की चूत के लिये एकदम तैयार और बे-करार रहे। मैं चाहती हूँ कि जब उसे तेरा लंड मिले तो एक दम ताज़ा और मस्त मिले। कल दिन में नेहा के साथ अपना हनीमून मना लेना।” मैंने उनकी सैण्डल चाटते हुए कहा, “ममता आंटी! दिदी मेरे लिये एकदम तैयार कर देना और हनीमून मैं उनके साथ मॉडर्न ड्रैस में मनाऊँगा।” ममता आंटी बोली, “तू चिंता मत कर! मैं उसे कल सुबह बाज़ार से सैक्सी काली ब्रा-पैंटी, मॉडर्न ड्रैस और सैक्सी हाई हील सैंडल दिला कर लाऊँगी जिसे देख कर तेरा लंड और तन जाये। मैं उसे बिलकुल मॉडर्न तरह से तैयार करूँगी और ध्यान रहे कल बारह-एक बजे तक तू घर पर मत रहना। मैं अपनी बेटी को बड़े प्यार से तैयार करना चाहती हूँ ताकि उसे अपनी पहली चूदाई हमेशा याद रहे!” मैंने कहा, “पर अभी अपने इस तने हुए लंड का क्या करूँ?” ममता आंटी बोलीं, “तुझे मेरे सैंडल पहने हुए पैर बहुत सैक्सी लगते हैं ना! तो तू अभी अपना लंड इन्हीं पर घिस कर क्यों नहीं ठंडा कर लेता। सच, तुझे मेरे हाई हील सैंडल पहने पैरों को चोदने में जरूर मज़ा आयेगा।” ममता आंटी का यह आईडिया सुन कर मेरा लंड और भी अकड़ गया। मैंने झट से उनके सैंडल पहने पैरों को अपने दोनों हाथों में लिया और अपना लंड दोनों सैंडलों के बीच में आगे-पीछे करने लगा। सैंडल के तलुवों और लैदर का फील बहुत मस्त लग रहा था और चार-पाँच मिनट में ही मेरी पिचकारी ममता आंटी के सैंडल, पैरों और टखनों पर छूट गयी। उसके बाद ममता आंटी को नंगा बिस्तर पर छोड़ के बाहर आ गया और सीधा नेहा के कमरे में गया। नेहा सिगरेट पीते हुए पूरी नंगी हो कर अपनी चूत के दाने को घिस रही थी और मस्ती में अपने चूत्तड़ ऊपर नीचे उछाल रही थी। मुझे आया देख कर शरमा गयी और बोली, “अनिल ये क्या… तुम बिना नॉक करे ही आ गये।” मैंने प्यार से उसका किस लिया और बोला, “मेरी प्यारी दीदी! बस आज-आज मुठ मार लो, कल के बाद तो आपकी जब भी इच्छा होगी, मैं आपको खूब चोदूँगा। बताओ आपको कैसा लगा अपनी मम्मी की चूदाई देख कर?” नेहा बोली, “अनिल! मम्मी बहुत ही सैक्सी दिखती है नंगी हो कर। मैंने तो मम्मी के साथ तुम्हें नंगा देख कर ही अपनी जाँघें कस ली थीं और जब तुम मम्मी के चूत्तड़ फैला कर उनकी चूत चाट रहे थे, मैंने अपना एक हाथ अपनी पैंटी में डाल कर अपने दाने को खुब घिसा था। अनिल बताओ ना! मम्मी मेरी तुम्हारे साथ चुदाई कब करवायेंगी।” मैं बोला, “बस मेरी डार्लिंग दीदी! कल के लिये आप तैयार हो जाओ। कल आपको कच्ची कली से पूरा फूल बना दूँगा। फ़िलहाल अभी थोड़ा मेरे लंड को चूसते हुए अपनी मुठ मारो। देखो कितना मज़ा आयेगा।” नेहा ने लपक के मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया और अपनी चूत घिसते हुए सका-सक मेरा लौड़ा चूसने लगी और पँद्रह-बीस मिनट बाद तबियत से चूसते हुए अपनी चूत का और मेरे लंड का पानी निकाला। मैंने भी झुक के उसकी चूत का पानी अपनी जीभ से चाट-चाट कर पीया। ममता आंटी नहा-धो कर सिर्फ़ पैंटी-ब्रा और सैण्डलों में ही अपने रूम से निकली और अपने मोटे-मोटे चूत्तड़ मेरी गोदी में रख कर बैठ गयी और हम तीनों ने एक साथ ड्रिंक की और स्मोक किया। ममता आंटी उसके बाद उठीं और सोफ़े पर बैठ कर नेहा को अपनी गोद में बिठाया और बोली, “मॉय डीयर! तू तैयार है ना औरत बनने के लिये?” नेहा ने शरमा कर अपना मुँह ममता आंटी की ब्रा में कैद उन्नत चूचियों में छुपा लिया। ममता आंटी ने उसका सिर उठा कर कहा, “नेहा तू बड़ी किस्मत वाली है जो तुझे घर बैठे इतना तगड़ा मर्द और मस्त लंड मिलेगा। मैं नहीं चाहती कि तू भी मेरी तरह चुदाई के लिये तड़पे। तेरे पापा मुझे एक दम ठंडा नहीं कर पाते हैं, जिससे मेरा दिमाग खराब रहता था। पर अब मुझे अनिल का लंड मिल गया है जो मुझे पोर-पोर तक चुदाई का सुख देता है। मेरी इच्छा यही है नेहा बेटी कि तू भी भरपूर चुदाई का मज़ा ले ले शादी से पहले। पता नहीं शादी के बाद ये सुख तुझे मिले ना मिले।” उसके बाद हमने खाना खाया और अपने-अपने कमरे में चले गये। अगले दिन मैं सुबह नहा-धो कर बाहर चला गया ऐसे ही घूमने के लिये और करीब साढ़े बारह बजे वापस आया। ममता आंटी ने मुझे पहले तो बाहों में लेकर किस करा और बोली, “तेरी रानी अंदर बैठी है सज-सँवर के। जा पहले तू नहा-धो ले और फ़्रैश हो जा। अब कल सुबह तक तुझे उसकी जम कर चुदाई करनी है। मैं सब कुछ रूम में ही पहूँचा दूँगी।” मैं भी बेसब्री के साथ नहा-धो कर तैयार हुआ और सिर्फ़ अपनी सबसे सैक्सी दिखने वाली अंडरवियर पहनी और ममता आंटी का चुम्बन लेकर कमरे में घुस गया। मज़ा आ गया था। अंदर ममता आंटी ने पूरा डिस्को बनाया हुआ था और नेहा को बहुत ही सैक्सी टॉप-स्कर्ट में तैयार करा हुआ था। नेहा की टॉप के उपर के चार बटन खोल कर नीचे से गाँठ बन्धी हुई थी और गज़ब का मेक-अप करा हुआ था। नेहा भी हाई हील्स पहन कर एक डाँस पर अपने चूत्तड़ थिरकाते हुए नाच रही थी। मैंने चुपचाप पीछे से जा कर उसकी मचलती हुई चूचियों को पकड़ लिया और नेहा को हवा में घूमा दिया। फिर सीधा कर के हमने एक दूसरे को बाहों में कस लिया और तड़ातड़ एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे। ममता आंटी ने सही कहा था। वाकय में नेहा बहुत ही सैक्सी लग रही थी और अगर वोह ऐसे रूप में कहीं सड़क पर चली जाती तो जरूर उसकी चूत का आज भोंसड़ा बन जाता। नेहा ने झूक कर ड्रिंक बनाना चालू किया तो मैंने भी पीछे से उसकी स्कर्ट नीचे खिस्का दी और झुक कर कुत्ते कि तरह उसके चूत्तड़ों में अपना मुँह लगा दिया और चाटने लगा। ममता आंटी ने नेहा को काले रंग की नेट की बहुत ही टाईट रेशमी पैंटी पहनायी थी जिससे वो उसकी गाँड की दरार में घुस गयी थी और उसके गोरे फूले हुए छोटे-छोटे मस्त चूत्तड़ों को और मादक बना रही थी। क्या महक आ रही थी उसके पिछवाड़े से। मैं तो मस्ती के आलम में आ गया था। नेहा ने मुझे एक ड्रिंक दी और अपने लिये एक सिगरेट जलाई और मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर बोली, “अनिल… अनिल… आज जी भर के अपनी चचेरी बहन को चोद लो!” और मुझे बिस्तर पर बिठाकर मेरी अंडरवियर में तन्नाए हुए लंड पर अपने चूत्तड़ घिसते हुए बैठ कर ड्रिंक और स्मोक करने लगी। मैंने उसकी टॉप के बटन और बंधी हुई गाँठ को खोला और उसकी स्टॉप उतार दी। ममता आंटी ने नेहा को क्या मस्त काले रंग की रेशमी ब्रा पहनायी थी। एकदम पतले स्ट्रैप थे और ब्रा के कप सिर्फ़ उसके आधे निप्पल और नीचे की गोलाइयाँ छुपाये हुए थे। रेशमी नेट के अंदर से उसकी दूधिया चूचियों की बड़ी साफ झलक मिल रही थी। मैंने उसे खड़ा होने को कहा और कुर्सी पर टाँगें फैला कर बैठ गया और नेहा को बोला कि वो अपनी टाँगें मेरी टाँगों के दोनों तरफ करके अपनी पैंटी में कसी हुई बूर मेरे लंड पर रखे और आराम से बैठ कर ड्रिंक करे। तब तक मैं उसकी कसी हुई मस्त जवानी जम कर चूसना और दबाना चाहता था। नेहा बड़े ही कायदे से मेरे लंड के उठान पर बैठ गयी और बहुत हल्के-हल्के ढँग से अपनी पैंटी मेरे लंड से उठी हुई मेरी अंडरवियर पर घिसते हुए मेरी गर्दन में बाहें डाल कर ड्रिंक और स्मोक करते हुए बोली, “अनिल डार्लिंग मसल डालो मेरी इन जवानियों को। देखो तो सही कैसे तन कर खड़ी है तुमसे चुसाने के लिये। मेरे मस्ताने सेबों का मज़ा ले लो मेरी जान।” मैं भी अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हूक खोल दिये और बड़े प्यार से उसकी चूचियाँ नंगी करी। उसकी बत्तीस साइज़ की कसी हुई मस्तियाँ मेरे सामने तन कर खड़ी हुई थीं और मैंने भी बिना वक्त गँवाये दोनों चूचियों पर अपना मुँह मारना शूरू कर दिया। मैं बहुत ही बेसब्रा हो कर उसकी चूचियाँ मसल और चूस रहा था जिससे उसको थोड़ा सा दर्द हो रहा था। पर फिर भी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए कह रही थी, “डार्लिंग आराम से मज़ा लो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो। आज तो हमारा हनीमून है। कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ। जम के चूसवाऊँगी और मसलवाऊँगी। इनको इतना मसलो कि कॉलेज में मेरी चूचियाँ सबसे बड़ी हो जायें।” करीब आधा घँटा इस चूसाई के बाद मैंने कहा, “नेहा दीदी! अब तो आप तैयार हो जाओ औरत बनने के लिये।” मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और फूलों से सजे पलंग पर लिटा दिया। लाल गुलाब से सजे पलंग पर काले रंग की पैंटी से ढका नेहा का गोरा बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपसरा अपने कपड़े उतार के सो रही हो और काला भँवरा उसकी ताज़ी चूत का रस चूस रहा हो। मैं करीब पाँच मिनट तक नेहा के नंगे बदन की शराब अपनी आँखों से पीता रहा, और फिर बिस्तर पर चढ़ कर मैंने नेहा की कमर चूसनी चालू करी और चूसते हुए अपना मुँह उसकी पैंटी पर लाया और पैंटी का इलास्टिक अपने दाँतों में दबा कर अपने मुँह से उसकी पैंटी उतारने लगा। नेहा ने भी अपने चूत्तड़ हवा में उठा दिये थे ताकि पैंटी उतारने में परेशानी ना हो। पर ममता आंटी ने इतनी टाइट पैंटी पहनाई थी कि मुझे अपने हाथ भी लगाने हे पड़े उतारने में। दोस्तों! पैंटी उतार के जो नज़ारा मेरे सामने था, मैं आपको बता नहीं सकता। ममता आंटी ने बड़े ही प्यार से नेहा की चूत के बाल साफ़ करे थे। नेहा चूत चुदने के लिये इतनी बेकरार थी कि चूत के लिप्स गीले थे। नेहा बोली, “डार्लिंग! मम्मी ने मेरी पूसी क्रीम से साफ करी है और मुझे बोला है कि मैं कभी भी अपनी पूसी शेव नहीं करूँ नहीं तो खराब हो जायेगी।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मेरा लंड तो नेहा की चिकनी नंगी मस्ताई हुई, चुदने के लिये तैयार चूत को देख कर ही मेरी अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने के लिये बेकरार था और उछल-कूद मचा रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना मुँह मेरे सामने लेटी हुई नशे की बोतल के खज़ाने के मुँह पर लगा दिया। नेहा तो मस्त हो गयी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी चाहता था कि नेहा थोड़ा पानी छोद दे ताकि उसकी ताज़ी कुँवारी चूत थोड़ी चिकनी हो जाये और तकलीफ कम हो। मैंने उसकी चूत का दाना चूसते हुए अपनी जीभ से उसकी चुदाई चालू कर दी और करीब पाँच मिनट बाद ही नेहा ने मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और कस कर अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और जोश में काँपते हुए चूत्तड़ों के धक्के देती हुई मेरे मुँह में अपना रस देने लगी। मैंने भी मन से उसकी जवान चूत चूसी और चूत के लाल होंठों को अपने होंठों से चूसा। फिर मैं घूटने के बल नेहा के सामने बैठ गया और बूरी तरह अकड़ा हुआ अपना लंड उसके सामने कर दिया और नेहा की गर्दन में हाथ डाल कर उसका मुँह अपने लंड के पास लाया और बोला, “मेरी प्यारी नेहा दीदी, मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी चूत बजाने के लिये तो इनवाइट करो।” नेहा ने तपाक से अपना मुँह खोला और मेरा सुपाड़ा अपने होंठों के बीच ले लिया और जीभ फेरने लगी। मेरे लंड पर नेहा के जीभ फेरने ने वो काम किया जो आग में घी करता है। मुझसे रहा नहीं गया और दोनों हाथों से नेहा का सर पकड़ कर उसके मुँह में ही मैंने आठ-दस शॉट लगा दिये। लौड़े का तो मारे गुस्से के बूरा हाल था। एक तो उसे कल से चूत नहीं मिली थी और दूसरा उसके सामने ऐसी मलाईदार चूत थी और मैं चूतिया की तरह उसकी भूख मिटाने की बजाये चुम्मा चाटी कर रहा था। अपना लंड नेहा के मुँह से बाहर निकाल कर के मैं बिस्तर पर से उतरा और ममता आंटी ने पहले से ही इम्पोर्टेड बड़ी ही खुशबू वाली चिकनाहट की क्रीम मेज पर रखी हुई थी। मैंने उसे उठा कर थोड़ी ज्यादा ले कर नेहा की चूत पर और चूत के अंदर की दीवारों पर लगा दी और फिर अपने लंड पर लगाने लगा। नेहा बोली, “ये तुम क्या कर रहे हो?” मैंने उसे समझाया और बोला, “आज मैं आपकी चूत को भोंसड़ा बनाने जा रहा हूँ तो मुझे अपना लंड आपकी चूत में घूसेड़ना पड़ेगा और आपको तकलीफ ना हो इस लिये मैं आपकी चूत को और अपने लंड को चिकना कर रहा हूँ।” मैंने बिस्तर पर चढ़ कर नेहा की जाँघों को अपने हाथों से पूरा फैला दिया और एक हाथ से लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से नेहा की चूत के लिप्स खोल कर अपना गुस्साया हुआ लाल सुपड़ा उसकी गुलाबी चूत से सटा दिया और बहुत हल्के-हल्के घिसते हुए बोला, “देख लो नेहा दीदी! अपने लंड की आपकी चूत से मुलाकात करा रहा हूँ।” नेहा को भी अपनी चूत पर लंड घिसाई बहुत अच्छी लग रही थी। वोह सिर्फ़ मस्ती में “ऊँमम ऊँमम” कर सकी। एक दो मिनट बाद मैंने देखा कि नेहा पर मस्ती पूरी तरह से सवार हो चूकी है तो मैंने अपने लंड का एक हल्का सा शॉट दिया जिससे मेरा लंड नेहा की चूत बहुत ज्यादा कसी होने के कारण से फिसल कर बाहर आ गया। इससे पहले कि नेहा कुछ समझ पाती, मैंने एक हाथ से अपना लंड नेहा के चूत के लिप्स खोल के उसके छेद पर रखा और अपने चूत्तड़ों से कस के धक्का दिया जिससे मेरा मोटा तगड़ा लंड दो इंच नेहा की चूत में घुस गया। नेहा की गाँड में तो जैसे भूचाल आ गया। वोह जोर से चीखी, “अनिल मार डाला! ये क्या डाला है मेरे अंदर। बहुत दर्द हो रहा है। अनिल प्लीज़ बाहर निकाल ले।” मैंने कुछ परवाह ना करते हुए दूसरा शॉट और कस के लगाया और अब मेरा पाँच इंच लंड नेहा की चूत में समा चुका था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल के छोटे छेद में अपना लंड घुसा दिया हो और बोत्तल के मुँह ने कस कर मेरे लंड को पकड़ लिया हो। अगर मैंने नेहा की कमर कस के पकड़ नहीं रखी होती तो नेहा मेरा लंड निकाल के बाहर भाग जाती और ज़िंदगी भर कभी भी किसी से चुदवाती नहीं। नेहा अब मेरे सीने पर मुक्के मारने लगी तो मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर फैला दिये और अपने पूरे शरीर का भार देते हुए उसके ऊपर लेट कर अपना पाँच इंच लंड अंदर-बाहर करने लगा। करीब पाँच-दस मिनट तक सिर्फ पाँच इंच से ही संतोष करने के बाद मैंने नेहा से पूछा, “दीदी अब कैसा लग रहा है?” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | तो बड़ी रुआँसी बोली, “जब तुमने घुसेड़ा था उस समय तो मेरी जान ही निकल गयी थी पर अब तुम्हारी लंड घिसाई से थोड़ी राहत मिली है और अच्छा भी लग रहा है।” मैंने मौका अच्छा देख और अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और उसे पूरा दबोच कर एक ज़ोरदार कड़कड़ाता हुआ शॉट दिया जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लौड़ा नेहा की चूत में समा गया। मेरे होंठ उसके होंठों पर रखे हुए थे इस कारण वो ज्यादा जोर से नहीं चीख पायी। मेरा पूरा लंड जो उसकी चूत में समा गया था उससे नेहा को दर्द इतना हो रहा था कि अगले पाँच मिनट तक मैं तो शाँत अपना लंड उसकी चूत में डाल कर उसके रसीले होंठ चूसता रहा और नेहा नीचे से दर्द के मारे लगातार अपने चूत्तड़ उछालती रही। जब पाँच मिनट बाद उसने अपने चूत्तड़ उछालना बँद किया तब मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी चूत में सरकाना चालू किया। नेहा अभी भी अपना बदन दर्द के मारे कसमसा रही थी पर पूरी मेरे नीचे दबी होने के कारण कुछ कर नहीं पा रही थी और पँद्रह-बीस धक्के अपनी चूत में ले लेने के बाद उसका दर्द भी कम हो गया था और उसका कसमसाना भी। मैंने नेहा के होंठों के ऊपर से अपने होंठ हटा लिये और बोला, “क्यों मेरी प्यारी दीदी! अब बताओ कैसा महसूस हुआ जब मैंने अपना मस्त लौड़ा आपकी चूत में डाल कर कली से फूल बना दिया और अब कैसा लग रहा है दर्द खतम होने पर।” नेहा बोली, “क्या डार्लिंग तुमने तो मेरी जान ही निकल दी। जब तुमने अपना लंड मेरी चूत में पेला था उस समय तो मुझे ऐसा लगा था कि शायद आज तुम मुझे मेरी चूत से लेकर दो हिस्सों में फ़ाड़ के रख दोगे। बहुत दर्द हुआ था अनिल पर तुमने इतने प्यार से मुझे सम्भाला और बाद में जो प्यार से मेरी चूत बजा रहे हो तो ऐसा लग रहा है कि मैं ज़न्नत में हूँ। मेरे बदन से ऐसी मस्ती छूट रही है कि क्या बताऊँ। अनिल अब बहुत मज़ा आ रहा है। अब तुम जी भर के मुझे चोदो।” मैंने नेहा की दोनों जाँघें चौड़ी कर दीं और अपने हाथों से उसकी दोनों सैंडल की हील पकड़ लीं और खुद घूटने के बल बैठ कर अपनी गाँड के दनादन धक्के मारने लगा। नेहा को अब भी तकलीफ हो रही थी पर वो भी अब चुदाई में पूरा साथ दे रही थी। पहली चुदाई के कारण वो और ज्यादा मस्ती सहन नहीं कर पायी और सितकारी भरती हुए अपनी चूत का पानी मेरे लंड पर गिराने लगी और बड़बड़ा रही थी, “आह आँह अनिल मज़ा आ गया। मुझे क्या मालूम था इतनी तकलीफ के बाद इतना सुख मिलेगा। इस सुख के लिये तो मैं अपनी चूत बार-बार तुमसे फड़वाऊँगी।”

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    ममता आंटी थोड़ी सी संजिदा हो गयी और बोली, “अनिल तू क्या कह रहा है? तू एक माँ से उसकी बेटी चुदवाने के लिये कह रहा है। मुझे मालूम है कि वोह इतनी सुंदर दिखती है कि कॉलोनी के कईं लड़के उसकी तरफ ऐसे देखते है जैसे वहीं सड़क पर लिटा कर चोद डालेंगे!” मैंने कहा, “आंटी तुम ही ने तो कहा था कि अगर तुम्हें मालूम होता कि तुम्हारी शादी ऐसे गाँडू से होगी तो तुम शादी से पहले जम कर चुदवाती। क्या मालूम नेहा दीदी को भी तुम्हारी तरह इस आग में ना जलना पड़े। घर की बात है… घर में ही रहेगी और अगर नेहा दीदी से मेरे शारिरिक संबंध बन जाते है तो हम तीनों दिन भर चुदाई का मज़ा उठा सकते है। घर की बात घर में ही रहेगी और किसी को मालूम भी नहीं पड़ेगा। अंकल तो सुबह आफिस चले जाते हैं और रात को नौ-दस बजे आते हैं और एक बार नेहा दीदी ने मुझ से चुदवा लिया तो वोह भी ठंडी रहेगी क्योंकि उनकी चूत में भी कीड़े रेंगने तो चालू हो ही गये होंगे, तो क्या पता किससे जा कर चुदवा ले!” ममता आंटी मेरे होंठों को प्यार से चूमते हुए बोली, “अनिल तूने बात तो बहुत सही कही है और मैं नहीं चाहती कि नेहा भी मेरी तरह इसी आग में जले। चल तू चिंता मत कर उसे वापस आने दे। मैं मौका देख कर उसे तैयार कर लुँगी!” बातें करते और सिगरेट पीते हुए काफी देर हो चुकी थी और इस दौरान ममता आंटी बारबार अपने हाथ से मेरा लंड रगड़ते हुए अपनी चूचियाँ मेरे ऊपर घिस रही थीं और नेहा की चूत मिलने की खबर से मेरा लंड फिर से तन कर मैदान में आ गया था। ममता आंटी ने तो सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी मेरा लंड फिर से तैयार हो जायेगा। इस बार ममता आंटी ने कहा कि वोह अपने तरीके से मुझे चोदेंगी, और आराम से एक सिगरेट जला कर मुझे नीचे लिटा कर अपनी दोनो टाँगें चौड़ी कर के मेरे लंड के उपर खड़ी हो गयीं और धीरे-धीरे अपने घुटनों के बल बैठने लगीं। जब उनकी चूत मेरे लंड तक पहुँची तब उन्होंने एक हाथ बड़ा कर मेरा लंड पकड़ा और चूत के मुँहाने पर घिसने लगी, और थोड़ी देर घिसने के बाद गपाक से अपनी जाँघें चौड़ी कर के मेरे लंड पर बैठ गयीं और उछल-उछल कर मुझे चोदने लगीं। मुझे तो इस आसन में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने लेटे हुए अपने हाथ आगे बढ़ा कर उनके फूले हुए मस्त गुबारे जो मदमस्त हो कर झूल रहे थे, पकड़ कर मसलने चलू कर दिये। ममता आंटी ने मुझे करीब आधा घँटा तक इस आसन में चोदा और खूब अपनी चूत का पानी निकाला। हमने उस रात दो बार और संभोग करा और पस्त हो कर एक दूसरे की बाहों में सो गये। हफ़्ते भर तक, जब तक नेहा वापस नहीं आयी हम लोग दिन भर नंगे पड़े रहते थे और एक दूसरे को जी भर के भोगते थे। इस दौरान ममता आंटी ने मुझे कई नये आसन और चोदने के तरीके बताय। हमने ब्लू फ़िल्म भी देखी और उसमें देख-देख कर हम भी उनकी नकल करते हुए एक दूसरे को चोदते थे। नेहा के वापस आने के एक दिन पहले ममता आंटी को अपने भाई के घर जाना पड़ा। जाने से पहले मुझे समझा के गयीं कि “देख कल सुबह नेहा आ जायेगी और मैं परसों से पहले नहीं आ पाऊँगी। अपने मस्ताने पर काबू रखना और यह मत सोचना कि मैंने नेहा को चोदने कि इजाज़त दे दी है तो तू उसे अकेले में पा कर चोद लेगा। मैं बड़े तरीके से उसे समझा कर तेरे साथ चुदवाऊँगी। डार्लिंग मज़ा चुदाई में तब आता है जब मर्द और औरत मिल के संभोग करें!” इतना समझा कर ममता आंटी चली गयीं। अगले दिन सुबह ही नेहा को आना था। मैं ड्राइवर के साथ कार में उसे कॉलेज से दस बजे जाकर ले आया। अबकी बार नेहा को देखने का मेरा नज़रिया ही कुछ और था। मैं रास्ते भर उसे अपनी आँखों से नंगा करता रहा, और नेहा मुझे अपनी ट्रिप के बारे में बताती जा रही थी। उसे क्या मालूम था कि उसकी माँ और मेरे बीच में क्या संबंध बन चूके थे जिस के कारण मुझे उसके बदन की कुँवारी नशीली शराब पीने को मिलने वाली थी। घर आ कर नेहा बोली, “अनिल मैं तो नहा धो कर एक कोक पीयूँगी और सोऊँगी। मैं इतने नहा कर आती हूँ, तुम मेरे लिये एक गिलास में कोक और बर्फ निकाल दो!” मैंने कहा, “कोई बात नहीं दीदी आराम से नहा लो!” मेरे दिमाग में तो सिर्फ़ नेहा को चोदने का नज़ारा घूम रहा था। एका एक मुझे एक आइडिया सुझा जो मैंने एक किताब में पढ़ा था। सोचा क्यों ना ट्राई मार के देखूँ। यही सोच के मैं चुप-चाप ममता आंटी के कमरे में गया और नींद की चार-पाँच टेबलेट ला कर नेहा की कोक में मिला दी। मुझे ममता आंटी ने कल ही बताया था कि जब कईं बार वोह रात को चुदाई के लिये बहुत परेशान हो जाती थीं और सो नहीं पाती थीं तो वोह नींद की गोली लेकर सो जाती थीं। इतने में नेहा भी नहा-धो कर बाहर आ गयी थी। मुझे आज तक पता नहीं चल पाया है कि लड़कियाँ और औरतें, बहन की लौड़ियाँ इतने सैक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं कि जिससे मर्द बे-काबू हो जाये। क्या हर औरत मन ही मन यह चाहती है कि कोई उसे चोदे? नेहा ने भी ऐसी नाइटी पहनी हुई थी जो फ़्रंट ओपेन थी और जिस से सिर्फ उसके चूत्तड़ और आधी जाँघें छिप रही थी और स्लीवलेस होने के कारण उसकी साफ चिकनी बगलें दिख रही थीं। नाइटी का कपड़ा इतना मोटा नहीं था, जिसके कारण उसकी छाती पर उठ रही नोकों से मालूम पड़ रहा था कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी, और जब वोह चौंकड़ी मार कर मेरे सामने पलंग पर बैठी तो मेरा तो बुरा हाल हो गया। उसकी चिकनी जाँघें और पैंटी में कसे हुए उसके चूत्तड़ और चूत की मछलियों को देख कर मेरा लंड तन गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने ऊपर चद्दर डाल कर खुद को शरमिन्दा होने से बचाया। कोक पीते समय नेहा ने बताया कि अबकी बार उसे ट्रिप में बहुत मज़ा आया और उसने अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करी। थोड़ी देर में वोह बोली, “अनिल मुझे बहुत जोर से नींद आ रही है, मैं तो अपने कमरे में सोने जा रही हूँ!” मैंने करीब आधा घंटा वेट करा और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपने लंड को ममता आंटी के हाई हील के सैंडल से सहलाता रहा। उसके बाद मैं उठा और नेहा के कमरे कि तरफ गया। नेहा ए.सी. चला के आराम से दरवाज़ा बंद करके सो रही थी। मैंने चुप-चाप दरवाज़ा खोला और कमरे में घुस गया। नेहा बड़े आराम से बिस्तर पे पीठ के बल सो रही थी और उसकी नाइटी जो पहले से ही छोटी थी, और उठ कर उसकी नाभी तक चढ़ गयी थी, जिससे कमर के नीचे का सब कुछ दिख रहा था। उसकी पैंटी में छुपी हुई चूत के उभार साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। मेरा तो मादरचोद लंड साला हरामी ये देख कर ही खड़ा हो गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने नेहा के पास जा कर उसके कँधे पकड़ कर थोड़ा जोर से हिलाया और बोला, “दीदी देखो आपकी सहेली का फोन आया है!” नेहा को कुछ फरक नहीं पड़ा। वोह तो बस बे-खबर हो कर सोती रही। मैंने फिर भी अपने को पक्का करने के लिये फिर से उसे जोर से आवाज़ दी और हिलाया पर उसको नींद की गोली के कारण कोई असर नहीं हुआ। मैंने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो कर नेहा की नाइटी के आगे के बटन खोलने लगा और एक-एक करके सारे बटन खोल दिये। दोस्तों, उस समय मेरे हाथ काँप रहे थे क्योंकि आज मैं इतनी हिम्मत करके नेहा का गोरा दूधिया बदन देखने जा रहा था जिसकी पैंटी और ब्रा सूंघ-सूंघ कर खूब मुठ मारा करता था। नेहा एक दम दूध की तरह गोरी थी और आज से पहले मैं बहुत तड़पा था उसका नंगा बदन देखने के लिये। नाइटी के सारे बटन खुलते ही उसके मस्त खिलौने नंगे हो गये और मैंने देखा कि नेहा के निप्पल भूरे नहीं बल्कि पिंक से थे। नेहा अब सिर्फ मेरे समने एक पैंटी में लेट कर बे-खबर सो रही थी। मैंने झुक के अपने होंठ खोल के नेहा के गुलाबी निप्पल अपने होंठों में दबा लिये और उसकी जवान, अभी तक अनछूई मस्त बत्तीस साईज़ की चूँची अपने हाथ में भर ली। ममता आंटी की बड़ी-बड़ी गदरायी हुई चूचियों को दबाने के बाद जब मैंने नेहा की चूचियाँ दबाईं, तब मालूम पड़ा कि साली लौंडिया कि चूँची क्या चीज़ होती है। ऐसा लग रहा था जैसे किसी सख्त अनार को पकड़ लिया हो। दूसरा हाथ मैंने नेहा की पैंटी में डाल दिया और उसकी बूर को अपने हाथों से फील करने लगा। नेहा की चूत पर मेरा हाथ टच होते ही मैं तो ऐसा गनगनाया कि मैंने नेहा के मस्त कच्चे अनार छोड़ कर दोनों हाथों से उसकी पैंटी उतारने लगा। माँ कसम दोस्तों! क्या साली कुँवारी चूत थी मेरी आँखों के सामने। झूठ नहीं बोलूँगा, इच्छा तो यह करी कि उसकी टाँगें खोल के अपना लौड़ा सरका दूँ उसकी कसी चूत में, पर ममता आंटी की इन्सट्रक्शन याद आ गयी। नेहा की चूत कुँवारी होने के कारण उसकी बूर के लिप्स अभी तक खुले नहीं थे, बल्कि बड़े कायदे से एक लाईन में थे और उसके उसने भी ममता आंटी की तरह अपनी चूत से झाँटें साफ कर रखी थीं। मेरा तो लौड़ा बुरी तरह से अकड़ गया था। मैं भी बिना समय गँवाये मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था और मैं पूरा नंगा नेहा के ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड एकदम नेहा की चिकनी मखमली चूत पर लग गया था। मैंने मारे मस्ती के नेहा के पूरे नंगे बदन को अपनी बाहों में कस कर भर लिया और उसके नरम रस भरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उन्हें चूसने लगा। नेहा की चूचियाँ इतनी सख्त थीं कि मेरी छाती में उसके निप्पल चुभ रहे थे और वो कसे हुए अनार जो मेरे सीने से लग कर थोड़े से दब गये थे, बहुत ही प्यारा सुख दे रहे थे। मेरा बदन तो मारे मस्ती के काँप रहा था, और मैंने अपने आप को थोड़ा सम्भालने के लिये एक सिगरेट जलाई और उसके ऊपर अपना लंड घिसने लगा। शुरू में तो मेरी यह हालत थी कि बस अभी रस निकला, पर बड़ा कँट्रोल करने के बाद मैं अब बड़े आराम से उसकी चिकनी मखमली चूत पर अपना लंड घिस रहा था। दोस्तों! इतना मज़ा आ रहा था कि कलपना करना भी मुशकिल है। सिगरेट खतम होने के बाद मैंने अपने मुँह में उसकी चूँची भर ली और जोर-जोर से चूसना चालू कर दिया। चूचियों का टेस्ट इतना नशीला था कि इतनी देर से रोका हुआ मेरे लंड का लावा पूरा नेहा के पेट पर निकल गया और मैं भी परवाह किये बिना नेहा कि तन्नाई हुई चूचियाँ चुसने में लगा रहा। दोस्तों! मैंने किताबों में सिर्फ पढ़ा था कि जवान चूँची चूसने से लंड तन्ना जाता है पर मैंने तो उस समय खुद अनुभव किया कि मादरचोद मुश्किल से तीन या चार मिनट में फिर से गन्ना बन गया। मैंने उठ कर कपड़े से नेहा का पेट साफ करा और एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर नेहा के होंठों पर घिसने लगा। क्या सनसनाहट हो रही थी कि मेरा लंड और कस गया।

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    इतने में ममता आंटी बोलीं, “चल मादरचोद! मेरी टाँगें और जाँघें चूमते हुए मेरी पैंटी उतार और मेरी चूत में अपना मुँह लगा कर ऐसे चूस जैसे आइसक्रीम चूसता है और फिर अपनी जीभ को मेरी दरार के अंदर डाल और खूब घुमा-घुमा कर मेरी चूत को अंदर तक चाट, याद रहे चूसाई और चटाई तब तक चलती रहे जब तक मैं तुझे मना नहीं करूँ और इस दौरान अगर मेरी चूत से मेरी मस्ती निकले तो उसे अपनी ड्रिंक समझ कर चाट कर पी जाना!” बड़ा ही सैक्सी सीन था। ममता आंटी बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ पैंटी और सैक्सी सैंडल पहने, एक हाथ में ड्रिंक और एक हाथ में सिगरेट लेकर स्मोक कर रही थीं। उनके मस्त मम्मों पर उनके भूरे-भूरे निप्पल ऐसे दिख रहे थे कि जैसे कह रहे हों कि आजा… आज जी भर के मज़ा ले ले… बहुत मुठ मार ली तू ने… और फिर आंटी ने अपनी चिकनी मस्त टाँगों को फैला दिया। मैंने भी झुकते हुए ममता आंटी की मस्त जाँघों को बारी-बारी चूमते हुए खूब चाटा, और फिर मस्ती में पहली बार ममता आंटी की पैंटी के उपर से ही उनकी चूत की दरार को चाटने लगा। मेरे होंठ ममता आंटी की चूत पर लगते ही ममता आंटी मस्ती में आ गयी और बोली, “अनिल अब जल्दी से मेरी पैंटी उतार के मेरी मस्त जवानी चूस ले, मदरचोद इतना मज़ा दूँगी कि किसी औरत ने आज तक किसी मर्द को नहीं दिया होगा!” मैं बड़े प्यार से ममता आंटी की पैंटी धीरे-धीरे उनकी चूत से सरकाते हुए उतारने लगा। ममता आंटी ने अपने चूतड़ हवा में उठा दिये थे ताकि मैं जल्दी से उनकी पैंटी उतार कर चूसना चालू करूँ। ममता आंटी शायद यह नहीं जानती थी कि यह मेरे लिए किसी सुहाग रात से कम नहीं थी, और अपनी प्यारी दुल्हन का मुखड़ा, जिसके कारण ना जाने मैंने कितनी बार अपने हाथ से अपने लंड का पानी गिराया था, आराम से पैंटी उतार कर इत्ममतान से देखना चहता था। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी बोली, “देख ले अनिल! जी भर के देख मेरी चिकनी चूत को… पता है मैं अपनी चूत शेव नहीं करती क्योंकि उस से चूत थोड़ी सी खुरदरी हो जाती है… बल्कि हेयर रिमुवर से बाल साफ़ करती हूँ ताकि मेरी चूत हमेशा मुलायम और चिकनी रहे।” मैं देर तक ममता आंटी की चूत को देखता रहा और अपनी हथेली फेरता रहा। कुछ देर बाद ममता आंटी बोलीं, “देख अनिल इतना नहीं तरसाते… मेरे भोसड़े में आग लग रही है… जल्दी से चूसके ठंडी कर दे।” मैंने भी अब ज्यादा रुकना मुनासिब नहीं समझा और अपने होंठ ममता आंटी की चूत के गुलाबी होंठों पर रख दिये। ममता आंटी ने एक गहरी सितकारी लेते हुए मेरे सर को अपनी चूत पे दबा लिया। मेरा मुँह दबने से मेरी नाक में ममता आंटी की चूत की खुशबू उतरती चली गयी और मुझ पर ना जाने क्या नशा चढ़ा मैंने अपने होंठों से उनकी चूत दबाकर चूसनी चालू कर दी और अपनी जीभ अंदर-बाहर करते हुए ममता आंटी की चूत के अंदर करने लगा। इस समय ममता आंटी ने मेरा सर अपनी पूरी ताकत से अपनी चूत पर दबाया हुआ था और अपनी मस्त चिकनी जाँघों से मेरा सर जकड़ा हुआ था, जिसके कारण ममता आंटी की सितकारियाँ और गालियाँ मेरे कानों तक नहीं पहूँच पा रही थीं। ममता आंटी के मस्त चूतड़ अब उछलने चालू हो गये थे, और उन्होंने मेरे हाथ अपनी चूचियों पर से हटा कर अपने दोनों चूतड़ों के नीचे कर दिये थे। मैं भी इशारा पा कर उन मस्त चूतड़ों को दबा-दबा कर मसलते हुए ममता आंटी की चूत चूसता रहा। अचानक ममता आंटी ने अपने चूतड़ों का एक जोरदार झटका मारा और मेरा सर दबा कर मेरे मुँह में अपनी चूत का पानी निकालने लगी। पहले मुझे अजीब सा टेस्ट लगा पर बाद में इतना टेस्टी लगा कि मैं दोबारा उनकी चूत में जीभ घुसेड़ कर उनकी चूत की दीवारों पर लगा हुआ उनकी चूत का पानी चाटने लगा। ममता आंटी शायद इस दोबारा चुसाई के लिये तैयार नहीं थीं और अचानक चालू हुई दोबारा चुसाई ने ममता आंटी को पागल बना दिया और उन्होंने अपनी जाँघें जोर से कस कर झड़ना चालू किया। उन्होंने अपनी जाँघें इतनी जोर से दबा ली थी कि अगर मैं अपने दोनों हाथों से उन्हें अलग नहीं करता तो शायद मेरा सर चकनाचूर हो जाता। मैंने जब मुँह उठा कर देखा तो ममता आंटी के चेहरे पर भरपूर ठंडक दिखायी पड़ रही थी। उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए कहा, “पता है अनिल! आज मेरे जीवन में पहली बार मेरी चूत के लिप्स किसी मर्द के होंठों से चूसे गये हैं। मैंने आज तक सिर्फ़ किताबों में पढ़ा था या ब्लू-फिल्मों में देखा था कि औरतों को अपनी चूत मर्दों से चुसवाने से चूत को वो सुख मिलता है जो उसको लंड से चुदवाकर भी नहीं मिलता। वाकय में अनिल आज तूने मेरी चूत चूसकर वो सुख दिया है जो मुझे आज तक नसीब नहीं हुआ था, थैंक यू!” मैंने भी कहा, “आंटी… सारी… ममता… मुझे नहीं मालूम तुम्हें कितना मज़ा आया… पर मुझे तो तुम्हारी चूत का पानी पी कर और चूत चूस कर मज़ा आ गया, आज के बाद जब भी तुम मिलोगी, मैं सबसे पहले तुम्हारी चूत चूसुँगा और चाटुँगा।” मेरा लंड इतनी सारी मस्ती एक साथ मिल जाने पर लोहे की रॉड की तरह हो रहा था। आंटी ने बड़े प्यार से अपने होंठों को चौड़ा करके मेरे लंड का सुपाड़ा अपने होंठों में भर लिया और फिर एक मिनट तक उसके ऊपर अपनी जीभ फिराती रही जिससे मैं अपना कँट्रोल खो बैठा और ममता आंटी की गर्दन पकड़ कर उनका मुँह अपने लंड पर दबाने लगा। ममता आंटी ने झट से अपना मुँह ऊपर खींच लिया और प्यार से बोली, “अनिल मैं तो तेरे लंड को बता रही थी की अपनी दुल्हन से मिलने के लिये तैयार हो जा, आज तेरी दुल्हन जी भर के तेरे धक्के लेगी और बाद में तेरी आखिरी बूँद तक चूसेगी। अब बस आजा अनिल तुझे आगे का लेसन पढ़ा दूँ। अब मुझसे सहन नहीं हो पा रहा है।” ममता आंटी ने एक तकिया अपने चूतड़ों के नीचे लगाया और एक अपने सर के नीचे और पीठ के बल लेट गयीं। बड़े प्यार से बोली, “चल आज तू अपनी ममता आंटी की सवारी कर ले, चढ़ जा अपनी ममता पर, और तू भी सीख ले औरत पर चढ़ना किस को कहते हैं। बहुत तरसा है ना तू मेरी चूत के लिए, चल आज के बाद नहीं तरसेगा, चल आजा बना ले अपनी आंटी से संबंध, बना दे अपनी आंटी को रंडी।” मुझे ममता आंटी ने अपनी टाँगें फैला कर टाँगों के बीच में कर लिया और तकिया लगा होने के कारण ममता आंटी की चूत एकदम फूल कर उठी हुई थी। ममता आंटी बोली, “देख अनिल मैं अपने हाथ से अपनी चूत के लिप्स खोलुँगी, तू बस अपने हाथ से अपना लंड पकड़ कर मेरा जो गुलाबी छेद दिखेगा, उस पर अपने लंड का सुपाड़ा रगड़, और जब तक मैं ना कहूँ लंड मेरे अंदर मत उतारना।” ममता आंटी ने एक सिगरेट जलाई और दूसरे हाथ से अपनी उंगली से अपनी चूत के लिप्स खोल कर दिखाने लगी, और बोली, “आजा बेटा! चल रगड़ अपना लंड।” मैंने भी अपनी मस्ती में डूबे हुए लंड को ममता आंटी की फैली हुई चूत पर रगड़ना चालू कर दिया। पहली बार मुझे ममता आंटी की चूत की गरमी महसूस हुई। ममता आंटी सितकारी लेते हुए बोली, “देख ले बहनचोद! जैसे तूने मुझे बाहों में लेकर किस करा था उसी तरह मैं तेरे लंड को अपने चूत के लिप्स के बीच में लेकर किस कर रही हूँ… मज़ा आ रहा है कि नहीं?” मेरी ज़िंदगी में तो पहली बार मेरा लंड किसी चूत से टच हुआ था। मेरे दोनों कान लाल हो गये थे, मैंने कहा, “ममता मेरे बदन में यह कैसी आग लग रही है?” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी बोली, “बस मेरी जान थोड़ा सा और… फिर तू मेरी आग बुझा और मैं तेरी आग बुझाऊँगी।” एक मिनट और लंड घिसने से मेरा बदन मारे मस्ती के कांपने लगा। ममता आंटी समझ गयी कि मैं अब कंट्रोल के बाहर हूँ। उन्होंने बड़े प्यार से अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और बोलीं, “देख अनिल! तेरा लंड बहुत मोटा लम्बा और तगड़ा है, मेरी चूत में इसकी जगह धीरे-धीरे ही बनेगी… इसलिये तू धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में उतार और अपने चूतड़ के धक्के दे और लंड आगे पीछे कर… चल अब चालू हो जा… तू भी सीख ले चुदाई क्या होती है… चोद ले अपनी आंटी को जी भर के… पर मादरचोद अगर तू अपने अंकल की तरह जल्दी झड़ा तो इसी वाइब्रेटर से तेरी गाँड मारूँगी वो भी बिना क्रीम के!” मैंने पहले तो एक हल्का सा शॉट लगाया जिस से मेरा दो इंच लंड ममता आंटी की चूत में सरक गया और उनकी चूत के गुलाबी लिप्स ने मेरा लंड जकड़ लिया। ममता आंटी की चूत अंदर से सुलग रही थी जिसकी असली गरमी मैंने अब महसूस करी। ममता आंटी बोली, “आआहहहहहहहहहहहा मेरे राजा… शाबाश मेरे शेर… अब धीरे-धीरे अपना लंड पेल मेरे अंदर!” मैंने भी एक-दो धक्के तो दिये पर इतना ताव आ गया की मैंने एक जोर का झटका मारा और मेरा छः इंच लंड ममता आंटी की चूत में समा गया। ममता आंटी ने अपने चूतड़ ऐसे उछाले जैसे उन्हें बिजली का करँट लग गया हो और बोली, “बहन के लौड़े! चोदना सीखा नहीं और मेरी चूत फाड़ने पर उतर आया… ज़रा आहिस्ता-आहिस्ता चोद अपनी चूत रानी को!” ममता आंटी बोलती रहीं और मैंने ममता आंटी को उनकी कमर के नीचे से उभरे हुए मोटे चूतड़ों से पकड़ा और अपने चूतड़ों का पूरा दम लगा कर जबरदस्त शॉट मारा जिस से मेरा पूर लंड ममता आंटी की चूत में समा गया और ममता आंटी के बदन पर लेट गया और अपनी बाहों में कस के पकड़ लिया जिस से उनकी निप्पल मेरे निप्पल से लग गयी और उनके माँसल जोबन मेरी छाती के नीचे दब गये। ममता आंटी ने दर्द के मारे करीब एक फुट अपनी गांड हवा में उछाली और गालियाँ देती हुई बोली, “माँ के लौड़े! क्या कर दिया तूने… माँ चोद कर रख दी मेरी चूत की… अरे भोसड़ी वाले ऐसे थोड़ी मैंने चूत की माँ चोदने को कहा था… तेरा साला लंड है कि मूसल… मेरी तो मदरचोद चूत फट गयी आज… चोद दे मादरचोद… हाय हाय बड़ा दर्द हो रहा है!” पर मैंने ममता आंटी को पूरी तरह से दबोच रखा था और उनकी टाँगें अपनी टाँगों में फसायी हुई थीं। अब धीरे-धीरे अपना लंड आगे पीछे करना चालू किया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर बड़े प्यार से उनके मुँह को और उनकी जीभ को चूसते हुए शॉट लगाने लगा। जब मैंने देखा की ममता आंटी का तड़पना कुछ कम हो गया तो मैंने उन से पूछा कि “डार्लिंग दर्द हो रहा है तो थोड़ा सा बाहर निकाल लूँ?” ममता आंटी एकदम शेरनी की तरह बोली, “मादरचोद इतने साल मैं इसके लिये तो तड़पी हूँ की कोई तो मेरी चूत फाडे और चोद-चोद कर उसका भोंसड़ा बना दे और तू कह रहा है की बाहर निकालूँ…! आज पहली बार तो औरत होने का सुख मिल रहा है… चोद मेरे राजा मेरी टाँगें उठ-उठा के जितना चोदना है चोद ले… मेरे सनम मेरी तो चूत अब तेरी हो गयी!” ममता आंटी इस समय पूरी मस्ती में थीं। झूठ नहीं बोलूँगा, मैं भी पूरी तरह से मसताया हुआ था और मैंने एक किताब में देखे हुए पोज़ को आज़माते हुए ममता आंटी की दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखीं और उनके मस्त मम्मे अपने हाथों में कस कर पकड़ लिये और उछल-उछल कर ममता आंटी की चूत में पेलने लगा जिस से मेरा लंड पूरा जड़ तक ममता आंटी की चूत में उतर रहा था। इतना प्यारा सीन था दोस्तों की जब मैं कस कर शॉट लगाता था उस समय ममता आंटी के चूतड़ पूरे फैल जाते और चौड़े हो कर दब जाते और मेरा पूरा लंड ममता आंटी की चूत में समा जाता और फिर जब ममता आंटी नीचे से अपने चूतड़ों का धक्का देती तो मेरा लंड थोड़ा सा बाहर आता और ममता आंटी की वो मस्त गाँड फिर गोल और मस्त हो जाती। अब हम दोनों की चुदाई की लय सैट हो चुकी थी और ममता आंटी तो मानो जन्नत की सैर कर रही थी, और बारबार यही बोल रही थी कि “आज जैसी चुदाई का सुख मुझे कभी नहीं मिला… मुझे मालूम था की चुदाई में मज़ा आता है पर इतना मज़ा आता है मुझे नहीं मालूम था! ले मेरे बलम… चोद अपनी आंटी को, जी भर के अपनी आंटी की जवानी का मज़ा लूट ले! कहाँ था बहन चोद… अभी तक क्यों नहीं सेकी मेरी चूत अपने लौड़े से… अब तो खूब चुदवाऊँगी मेरे राजा… मेरे दिलबर, आज से तो तू मेरा असली हसबैंड है!”

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    दोस्तों अपने पेरैंटस के गुज़र जाने के बाद मैं अपने अंकल, आंटी और उनकी बेटी (मेरी चचेरी बहन) के साथ उनके बंगले में रहता था। मेरे अंकल बहुत ही कामयाब बिज़नेस मैन थे। घर में हर तरह के सुख-साधन और लग्ज़री मौजूद थी। मेरी उम्र उस समय आठरह साल की थी और मेरी आंटी बयालीस साल की थी और उनकी बेटी मुझसे एक साल बड़ी थी और अभी-अभी बीस साल पूरे करे थे और कॉलेज में पढ़ रही थी।। आपको बता दूँ की मेरी ममता आंटी का गदराया बदन बहुत ही मादक और मस्त था। उसकी चूची छत्तीस साइज़ की थी और छत्तीस-सी साईज़ की ब्रा पहनती थी। पतली कमर और बहुत ही प्यारे-प्यारे मोटे-मोटे चूतड़ अढ़तीस साइज़ के थे। जिसको देख के किसी का भी लंड तन जाये। आंटी की शक्ल-सूरत और जिस्म भी बिल्कुल नीता अंबानी जैसा था। मेरी कज़िन बहन, नेहा जो बस जवान ही हुई थी, एकदम अपनी माँ की तरह मस्त दिखने लगी थी। जब वो स्कर्ट पहनती थी तो मैं हमेशा कोशिश कर के उसके सामने ही बैठा करता ताकि मुझे उसकी चिकनी जाँघें और पैंटी में कसी चूत का उभार और चूतड़ दिखें। मैं हमेशा इस फिराक में रहता था की मुझे एक बार अपनी ममता आंटी और नेहा पूरी नंगी देखने को मिल जायें। ममता आंटी शिक्षित और काफी आधुनिक थी और और किट्टी पार्टियों और कुछ चैरिटबल संस्थाओं से भी जुड़ी हुई थी। शराब-सिगरेट का सेवन भी करती थी। ममता आंटी ज्यादातर साड़ी या सलवार-सूट पहनती थी लेकिन कभी-कभार जींस, स्कर्ट वगैरह जैसे वेस्टर्न कपड़े भी पहनती थी। जब शाम को आंटी साड़ी में बैठ कर व्हिस्की पीती थी और स्मोक करती थी तो मेरा लंड कस कर अकड़ जाता था। दोस्तों आपने कभी साड़ी वाली औरत को व्हिस्की और सिगरेट पीते हुए देखा है की नहीं? इतना मस्त सीन होता है की इच्छा करती है की वहीं साली की साड़ी उठा के लंड पेल दें। मैं उन दोनों माँ-बेटी को सिर्फ देख कर ही मस्त हो जाता था और बाथरूम में जा कर उनकी उतरी हुई ब्रा और पैंटी, जिस में से उनकी मस्त चूत और चूची की खुशबू आती थी और कभी उनकी की ऊँची ऐड़ी वाली सैंडल जिन में से उनके पैरों के पसीने की महक आती थी, खूब सूँघता हुआ मुठ मारता था। ममता आंटी की पैंटी में हमेशा मादक सूगंध आती थी और नेहा की पैंटी में उसकी ताजी चूत की खुशबू मैं सूँघता था और उनकी ब्रा, पैंटी और सैंडलों को चाट-चाट कर अपने लंड को ठंडा करता था। एक दिन की बात है, मेरा लंड रात को अचानक खड़ा हो गया और मेरी इच्छा हुई की मैं ममता आंटी के बाथरूम में जा कर उनकी पैंटी और ब्रा सूँघ कर मुठ मारूँ। मैं चुप-चाप बाथरूम की ओर जाने लगा तो मुझे ममता आंटी के कमरे से हल्की सी लाइट और कुछ आवाज़ सुनाई दी। मैं भी धड़कते दिल से आंटी के दरवाजे से कान लगा कर सुनने लगा। अंदर ममता आंटी चुदाई में मस्त हो कर अंकल को बहनचोद और मादरचोद की गालियाँ दे रही थी। इतनी सफिस्टिकेटिड और पढ़ी-लिखी आंटी के मुँह से ऐसी गंदी गालियाँ सुनकर मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने सोचा यह मौका है जब मैं ममता आंटी को पूरा नंगा और चुदते हुए देख सकुँगा और मैं सीधा बालकोनी की ओर गया क्योंकि मुझे मालूम था वहाँ की खिड़की पर पर्दा नहीं है और वहाँ से मुझे सब दिखाई देगा। मैं चुपचाप दबे पैरों से बालकोनी में गया और अंदर का सीन देख कर तो मुझे जैसे मन की इच्छा मिल गयी। ममता आंटी अपनी दोनों टांगों को फैला कर लेटी हुई थीं और एक हाथ से सिगरेट पी रही थीं और अंकल उनकी चूत में भीड़ा हुआ था। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी नशे में थी और कह रही थी, “मादरचोद कभी तो मेरी चूत को ठंडा करा कर, बस भोंसड़ी वाले अपना लंड डाल कर अपने आप को ठंडा कर लेता है। आज मादरचोद अगर तूने मेरी चूत को ठंडा नहीं किया तो मैं बज़ार में रंडी बन कर चुदवाऊँगी।” अंकल भी अपनी और से पूरी ताकत लगा रहा था और कह रहा था कि “साली रंडी कितना चोदता हूँ तुझे… पर तेरी चूत की प्यास ही खत्म नहीं होती और तेरा बदन इतना मस्त है की चार पाँच शॉट में ही मेरा लंड झड़ जाता है” और इतना बोलते-बोलते ही अंकल अपना लंड ममता आंटी की चूत में झाड़ कर लुड़क गये। ममता आंटी बोलती रहीं कि “पता नहीं कब मेरी चूत की प्यास ठंडी होगी, ये गाँडू तो मुझे ठंडा ही नहीं कर पाता है।” अंकल और आंटी को इस तरह गंदी भाषा में गालियाँ देते हुए बातें करते सुनकर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था। मेरी बड़ी इच्छा करी कि मैं अंदर जाऊँ और ममता आंटी को पकड़ कर खूब चोदूँ। मैं अपना लंड हाथ में पकड़ कर वापस अपने कमरे की और चल दिया। रास्ते में नेहा का कमरा पड़ता था। आंटी की चुदाई देखने के बाद मेरा लंड फड़फड़ा रहा था। पता नहीं मैं किस ख्याल में नेहा के कमरे में घुस गया। मुझे जब ध्यान आया तो मैंने अपने आप को नेहा के बिस्तर के पास खड़ा पाया। नेहा इस समय अपनी नाईटी में आराम से सो रही थी जो उसके चुतड़ों को सिर्फ़ आधा ढके हुई थी। मेरे सामने अभी भी ममता आंटी की चुदाई का सीन चल रहा था और इसी गर्मी में मैंने देखा कि नेहा की मस्त चिकनी-चिकनी टाँगें और फुले हुए चूतड़ जो उसने पैंटी में छुपाये हुए थे। मुझ से रहा नहीं गया और मैं बिस्तर के साइड में हो कर उसकी चिकनी टाँगों को अपने होठों से चूमने लगा, और धीरे-धीरे उसकी गाँड की दरार में अपने होंठ और नाक रख दी। जिस चूतड़ की खुशबू मैं पैंटी में सूँघता और चाटता था वही चूतड़ आज मैं असली में सूँघ रहा था और अपने होंठों से किस कर रहा था। इतने में नेहा कुछ कुनमुनाई और मैं डर के मारे चुप चाप कमरे से निकल गया। उसके बाद मैं बाथरूम गया और ममता आंटी की पैंटी और ब्रा अपने रूम में ला कर सूँघते और चाटते हुए खूब मुठ मारी, और मैंने इरादा किया की एक बार मैं ममता आंटी के साथ ट्राई तो मार के देखूँ, क्या पता, प्यासी चूत है, अपने आप ही मुझे चोदने को दे दे। मुठ मारते-मारते मैं ममता आंटी की ब्रा अपने होंठों से लगा कर सो गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | अगली सुबह में ममता आंटी ने मुझे झकझोड़ के जगाया और बोली, “अनिल आज स्कूल क्यों नहीं गया? देख सुबह के दस बज रहे हैं, तेरे अंकल को तो आज सुबह महीने भर के लिये युरोप और अमेरिका जाना था, वो तो कभी के चले भी गये और नेहा भी अपनी कालेज ट्रिप के साथ जयपुर चली गई है, मैं भी थक रही हूँ, तू नहा धो के नाश्ता कर ले तो मैं भी थोड़ा लेटूँगी।” मैंने जल्दी से उठ कर सबसे पहले ममता आंटी की पैंटी और ब्रा ढूँढी पर मुझे कहीं नहीं मिली। मेरी तो डर के मारे सिट्टी पिट्टी गुम हो गई, और मैं सोचने लगा की अगर आंटी को पता पड़ गया तो आंटी मेरी खूब पिटाई करेंगी। मैं चुपचाप अपने सारे काम पूरे करके टीवी देखने बैठ गया और उधर आंटी मुझे नाश्ता देकर अंदर जा कर लेट गयीं। थोड़ी देर बाद आवाज दे कर मुझे अपने कमरे में बुलाया, और बोली “अनिल मेरा जरा बदन दबा दे।” उस समय ममता आंटी सिर्फ़ ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थीं और कहने के बाद पेट के बल हो कर उल्टी लेट गई। ममता आंटी ने अपने ब्लाऊज़ का सिर्फ़ एक हुक छोड़ कर सारे हुक खोले हुए थे और अपना पेटीकोट भी कुछ ज्यादा ही नीचे कर के बाँधा हुआ था जिस से उनकी गाँड की दरार साफ नज़र आ रही थी। मेरे सामने वो चूतड़ थे जिसे सिर्फ़ देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था और ममता आंटी तो अपना पूरा बदन मेरे को दिखाते हुए मसलने को कह रही थी। मैं बिना देर करे चुपचाप आंटी के साईड में बैठ कर धीरे-धीरे उनका बदन दबाने लगा, उनके चिकने बदन को छूते ही मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया और मैं डरने लगा की कहीं ममता आंटी को पता नहीं चल जाये। जब पेटीकोट के ऊपर से ममता आंटी के चूतड़ दबाये तो लंड एक दम मस्त हो गया। पेटीकोट के ऊपर से ही ममता आंटी के चूतड़ दबा कर मालूम पड़ गया था कि गाँड वाकय में बहुत गदरायी हुई और ठोस थी।

    थोड़ी देर बाद आंटी बोली, “अरे अनिल, जरा तेल लगा कर जोर से जरा अच्छी तरह से मालिश कर।” मैंने कहा, “आंटी तेल से आपका ब्लाऊज़ खराब हो जायेगा, आप अपना ब्लाऊज़ खोल दो।” ममता आंटी बोली, “अनिल मैं तो लेटी हूँ, तू मेरे पीछे से ब्लाऊज के हुक खोल के साईड में कर दे।” मैं जिस ममता आंटी को नंगा देखने को तरसता था और जिसकी ब्रा सूँघता था, मैंने बड़े धीरे-धीरे से उनके ब्लाऊज के हुक खोले और अब आंटी की नंगी पीठ पर सिर्फ़ काली ब्रा के स्ट्रैप दिख रहे थे। मैंने थोड़ा सा तेल अपने हाथों पर लेकर आंटी की पीठ पर मलना चालू किया पर बार-बार आंटी की काली ब्रा के स्ट्रैप दिक्कत दे रहे थे। मैंने ममता आंटी को बोला कि “आंटी आपकी पूरी ब्रा खराब हो रही है और मालिश करने में भी दिक्कत हो रही है।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | तब ममता आंटी बोली कि “तू मेरे ब्रा के स्ट्रैप खोल दे।” ममता आंटी के मुँह से यह सुन कर मेरा लंड तो झटके लेने लगा। मैंने भी बड़े ही प्यार से ब्रा के हुक खोल दिये। पहली बार इतने पास से मैं ममता आंटी की चिकनी सुंदर पीठ देख रहा था। मैं उस नंगी पीठ पर धीरे-धीरे तेल से मालिश करने लगा। थोड़ी देर बाद ममता आंटी बोली, “अनिल जरा मेरे नीचे भी मालिश कर दे।” मैंने कहा, “आंटी कहाँ करूँ?” तो ममता आंटी बिना किसी शरम के बोलीं की “मेरे चुतड़ों की और किसकी।” मैंने भी सोचा मौका अच्छा है और मैंने कहा, “पर उसके लिए तो आपका पेटीकोट उतारना पड़ेगा।” तब आंटी बोली, “जा कर अच्छे से पहले दरवाजा बंद कर आ।” मैं जल्दी से जाके दरवाजा बंद कर के आया तो देखा ममता आंटी पहले से ही अपना पेटीकोट उतार कर पिंक पैंटी और काली ब्रा को अपने हाथों से दबाय, पेट के बल उल्टी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। मैंने तेल लेकर धीरे-धीरे आंटी की मस्त टाँगों की और उन मस्ताने गदराये चूतड़ों की मालिश चालू कर दी। मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की वो ममता आंटी जिसका नाम लेकर मैं रात भर मुठ मारता था, एक दिन ब्रा और पैंटी में मेरे समने लेट कर मेरे हाथ से अपनी मालिश करवायेंगी। मालिश करते-करते जब मैं ममता आंटी की जाँघों पर पहुँचा तो मेरे हाथ बार-बार पैंटी के ऊपर से ममता आंटी की कसी हुई चूत की मछलियों से टच हो रहे थे जो मुझे एक अजीब तरह का आनन्द दे रहे थे। मुझे पता नहीं क्या सूझा, मैंने ममता आंटी की पैंटी के साइड से अपनी एक उंगली धीरे-धीरे अंदर डाली और ममता आंटी की चूत पर उंगली फेरने लगा। ममता आंटी की चूत एक दम बिना बाल की थी और उसकी साफ़्टनैस से मालूम हो रहा था की आंटी शेव नहीं बल्कि हेयर रिमूवर से अपनी चूत के बाल साफ़ करती थीं। तभी अचानक आंटी सीधी हुई और अपनी काली ब्रा को छोड़ के एक चाँटा मेरे गाल पर मार दिया और बोली, “मादरचोद, तुझे शरम नहीं आती मेरी चूत में उंगली डालते हुए।” जब ममता आंटी उठी उस समय उन्हें अपनी काली ब्रा का ध्यान नहीं रहा और ब्रा के हुक पहले से ही खुले होने के कारण आंटी की वो मस्त गोरी-गोरी चूचीयाँ जिसपे भूरे रंग के बड़े से निप्पल थे, मेरे सामने पूरी नंगी हो गई और मैं चाँटे की परवाह किये बिना ममता आंटी की मस्त चूचीयाँ देखता रहा। ममता आंटी ने भी उन्हें छुपाने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि एक और चाँटा मारते हुए बोलीं, “मादरचोद, बहन के लौड़े, तू मुझे क्या चूतिया समझता है, कल रात को मेरी पैंटी और ब्रा तेरे तकिये पर कैसे पहुँच गई, बता सच-सच मदरचोद… मेरी पैंटी और ब्रा के साथ क्या कर रहा था?” ममता आंटी ने इस तरह की भाषा में मेरे साथ पहले कभी बात नहीं की थी और इस वक्त उनका गुस्सा देख कर मैंने डरते-डरते बताया कि, “कल रात को जब अंकल आपको प्यार कर रहे थे, उस समय मैंने आपको देखा था और पता नहीं… आप उस समय इतनी सुंदर लग रही थीं कि बाथरूम में जा कर आपकी पैंटी और ब्रा लेकर अपने बिस्तर पर आ गया और आपकी पैंटी और ब्रा को सूँघते हुए और चाटते हुए अपने हाथ से मैंने खूब मुठ मारी।” इस पर आंटी ने एक चाँटा और मारा और बोलीं, “बहनचोद मुझे तो तूने नंगा देख लिया चुदवाते हुए… अब तू अपने कपड़े उतार के मेरे समने पूर नंगा हो के दिखा… मैं देखूँ तो सही आखिर तेरी लुल्ली है या लंड!” उस समय आंटी की चूचियाँ देख कर मेरा लंड पूरा तना हुआ था। ममता आंटी ने आगे बढ़ कर अपने लिये एक सिगरेट जलाई और मेरा पायजामा खोल दिया और मेरा सढ़े आठ इंच लम्बा और ढाई इंच मोट लौड़ा ममता आंटी की आँखों के सामने झूलने लगा। ममता आंटी की आँखें फैल गयीं और वोह बस इतना ही बोली, “मादरचोद! इंसान का लंड है की घोड़े का… अभी तक कहाँ पर छुपा के रखा था… पहले क्यों नहीं दिखाया… इस लंड को देख कर तो कोई भी औरत नंगी हो कर अपनी चूत उछाल- उछाल कर चुदवायेगी!” ये बालते-बालते मेरे लंड को आंटी ने अपने हाथ में ले लिया और बड़े प्यार से अपना हाथ आगे-पीछे करते हुए उसे देखने लगी। दोस्तों पहली बार जब कोई औरत आपका लंड पकड़ती है और जो मस्ती बदन में चढ़ती है वोह मैं आपको बता नहीं सकता। मेरी ज़िंदगी में वोह पहली औरत का स्पर्श था जो मेरे लंड को मिल रहा था, और वो भी उस औरत का जिसको याद कर-कर के मैं कितनी बार मुठ मार चुका था। इस से पहले कि मैं कुछ बोल पाता, मेरे लंड से पिचकारी निकली और ममता आंटी के होंठों और नंगी चूचियों पर जा कर पसर गयी। ममता आंटी अब बड़े प्यार से बोलीं, “माँ के लौड़े! बहनचोद! तू तो एकदम चूतिया निकला… मैं तो समझ रही थी की मेरी ब्रा खोल कर और मुझे पैंटी में देख कर शायद तू मेरे साथ जबर्दस्ती करके मेरी चुदाई करेगा… पर मुझे तू माफ कर दे, जब तूने मुझे अपनी बाहों में लेकर चोदा नहीं तो मैंने गुस्से में तेरी पिटाई कर दी… पर क्या करूँ इतने साल हो गये हैं मेरी चूत को ठंडा हुए… रोज़ अपने आप ही वाइब्रेटर डाल कर ठंडी करती हूँ पर असली मर्द से चुदने की ख्वाहिश मन में ही रह जाती है! आज जब मैं सुबह तेरे कमरे में गयी और अपनी पैंटी और ब्रा से तेरा मुँह ढका पाया तो मैं समझ गयी की तू मेरे सपने देख कर मुठ मारता है… इसी बहाने से मैंने आज तुझे मसाज के लिये बुलाया था, पर तेरा घोड़े जैसा लंड देख कर तो मैं पागल हो गयी हूँ… ऐसे लंड के तो मैं सिर्फ़ सपने ही देखती थी… और तू भी अब चूत लेने के लिये तैयार है… चल आज से सपने देखना बंद कर… और बता अपनी आंटी की चूत चोदेगा?” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मेरे तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी। मैं पहले तो हक्का बक्का खड़ा रहा और बाद में मैंने कुछ झिझकते हुए उन ही के अंदाज़ में कहा, “आंटी! जब से मेरा लंड खड़ा होना चालू हुआ है तब से मैंने सिर्फ़ आपको याद कर के मुठ मारी है… मैं हमेशा ही आपको सपने में बिना कपड़ों के नंगी, सिर्फ़ ऊँची हील्स वाली सैंडल पहने हुए इमैजिन करता था और आपके मोटे चूतड़ और चूचीयों को इमैजिन करता था, मैंने मुठ तो बहुत मारी है पर मुझे चोदना नहीं आता, तुम बताओगी तो मैं बहुत प्यार से मन लगा कर तुमको चोदूँगा!” आंटी बोलीं, “अनिल अब तेरा लंड देखने के बाद ही मैं तो तेरी हो गयी और चुदाई तो मैं खूब सीखा दूँगी… पर तुझे मेरी हर बात माननी होगी और अगर तूने मुझे मस्त कर दिया तो मैं तुझे जो तू इनाम माँगेगा तुझे दूँगी… और ध्यान रहे ये बात किसी को मालूम नहीं होनी चाहिए!” अब हम दोनों के बीच कोई शरम या पर्दा नहीं रह गया था। आंटी ने कहा, “आज से तू और मैं जब भी अकेले होंगे… तू मुझे सिर्फ़ ममता बुलाना और अब मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरे होंठ चूसते हुए मेरे चूतड़ मसल!” मैंने भी इतने दिनों की मुठ मारने के बाद मिला आंटी का नंगा बदन अपनी बाहों में पकड़ कर उठा लिया और नंगी ममता आंटी को अपनी बाहों में भर कर उनके नरम-नरम होंठों को अपने मुँह से चूसने लगा। बता नहीं सकता कि मैं उस समय किस जन्नत में था, और अपने हाथ पीछे ले जा कर उनकी पैंटी में डाल कर उन मतवाले चूतड़ों को दबाने लगा। जब मैं पेटीकोट के उपर से दबा रहा था, मुझे उस समय ही मालूम हो गया था कि ममता आंटी के चूतड़ बहुत ही तगड़े और मस्त हैं, और अब जब उनके नंगे चूतड़ पकड़े तो हाथों में कुछ ज्यादा ही जान आ गयी और मैं कस-कस कर मसलने लगा। ममता आंटी ने भी मुझे अपनी बाहों में कस कर पकड़ रखा था जिस से उनकी माँसल चूचियाँ मेरे सीने से लग कर मुझे गुदगुदा रही थी। थोड़ी देर एक दूसरे को चूसने के बाद ममता आंटी मुझ से अलग हुई और अपनी अलमारी खोल कर व्हिस्की की बोतल निकाल कर बोली, “जब तक नेहा वापस नहीं आती तेरी चुदाई की क्लासिज़ चालू और अब तू हफते भर मेरी क्लास अटेंड करेगा!” इतना कह कर ममता आंटी ने दो ग्लास में शराब डाली और दो सिगरेट जला लीं और एक मुझे देते हुए कहा, “जो मैं बताऊँ वैसे ही करना!” “लेकिन आंटी मैंने कभी स्मोक या ड्रिंक नहीं की है!” मैं थोड़ा हैरान होते हुए बोला। “मादरचोद… नहीं की है तो आज कर ले… चुदाई भी तो तूने पहले कभी नहीं की है… मज़ा आयेगा.. बिलीव मी!” आंटी बोली। उसके बाद ममता आंटी एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास और एक में सिगरेट पकड़ कर मेरे सामने आई और बोली, “बहन के लौड़े! तू मुझे हाई हील के सैंडलों में इमैजिन करता है ना, चल अब अपने हाथों से मेरे पैरों में सैंडल पहना और फिर मेरा पेट चूमते हुए मेरी पैंटी उतार और पीछे से मेरी गाँड के छेद में उंगली डाल और धीरे-धीरे से अपने मुँह से मेरे पेट को चूमते हुए मेरी बूर के ऊपर ला कर मेरी चूत को अभी सिर्फ़ ऊपर से ही चूस। मैं तुझ से नाचते हुए अपनी चूत चुसवाँऊगी, बाद में जब तू अपनी ड्रिंक और सिगरेट खतम कर लेगा तब तुझे बताऊँगी की औरतें अपनी चूत का पानी मर्दों को कैसे पिलाती हैं।” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं तो उस समय कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था। मैं तो बार-बार यही सोच रहा था की मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ। जिस औरत को नंगा देखना और चोदना मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मकसद था वो ही औरत मेरी बाहों में नंगी मुझ से चुदवाने के लिये मचल रही है। खैर, मैंने ममता आंटी के आदेश अनुसार उनके गोरे-गोरे नरम पैरों को चूम कर उनको चार इंच ऊँची पेन्सिल हील्स वाले सैण्डल पहनाये। आज तक मैं आंटी के सैक्सी सैण्डलों को चूम-चूम कर और अपने लंड पे रगड़-रगड़ कर मुठ मारता था पर आज वही नंगी आंटी के सैण्डलों में बँधे पैरों को मैं चूम रहा था और इस का सीधा असर मेरे लंड पे हो रहा था। फिर मैं ममता आंटी के बताय तरीके से उनको अपनी बाहों में भर कर चूमने और पैंटी उतारने लगा। ममता आंटी अपने चूतड़ हिला-हिला कर अपनी ड्रिंक और सिगरेट पी रही थी और जब मेरे होंठ ममता आंटी की चूत के उभार पर टच हुए तो ममता आंटी ने कस कर मेरा सर पकड़ा और चूत के उभार पर दबा दीया। वो मीठी-मीठी सितकारियाँ भरने लगी और बोली, “अनिल तुझे मैं ज़िंदगी का इतना प्यार दूँगी की जब तू अपनी बीवी को चोदेगा तो हमेशा मेरी ही चूत याद करेगा!” मैं भी मन लगा कर ममता आंटी की चूत की दरार पर और उभार पर जीभ फेरने लगा। थोड़ी देर बाद ममता आंटी के चूतड़ों में एक कंपन आया और मेरा सर जोर से दबाते हुए अपनी चूत का पानी बहार छोड़ दिया। उसके बाद मेरी बगल में बैठ गयी और बोली, “अनिल! आज पहली बार ऐसा हुआ है की मैं अपनी चूत चुसवाते हुए झड़ी हूँ!” ममता आंटी की आँखें शराब और ओरगैज़्म के कारण नशीली हो रही थी। उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और चोंकते हुए बोली, “हाय-हाय अनिल! यह क्या हाल कर रखा है तूने अपने लंड का… तन कर एक दम फटने को हो रहा है… मेरे प्यारे अनिल! लंड को इतना नहीं अकड़ाते की लंड फट ही जाये और वैसे भी आज से यह लंड अब सिर्फ़ मेरा है… चल थोड़ा तेरे लंड को ढीला कर दूँ… फिर तुझे आराम से अपनी चूत का पानी पिलाऊँगी!” इसके बाद ममता आंटी ने मुझे एक छोटा सा पैग और दिया और एक-एक सिगरेट जला कर मेरे बदन से चिपट गयी, और मुझे खींच कर बिस्तर पर टाँगें सीधी कर के पीठ के सहारे बिठा दिया और बोली, “चल अब तू आराम से अपनी ड्रिंक और सिगरेट पी…!” और फिर मेरा लंड पकड़ कर कहा, “मैं लंड की ड्रिंक और सिगरेट बना कर पीयुँगी… और तेरी मस्ती निकले तो निकाल दियो मेरे मुँह में… लंड चूसना किसे कहते हैं अब मैं तुझे वो बताऊँगी!” इतना कह कर ममता आंटी ने अपने रसीले होंठ मेरे लंड के सुपाड़े पर रख दिए जो कि तन कर एक दम लाल टमाटर की तरह हो रहा था और फिर धीरे-धीरे मेरे लंड को अपने मुँह के अंदर जीभ फिराते हुए सरकाने लगी। मुझे नहीं मालूम औरतों को लंड चूसते हुए कैसा लगता है पर मैं इतना बता सकता हूँ की कोई भी मर्द मादरचोद अपना लंड चुसवाने के बाद बिना चूत लिये रह नहीं सकता, चाहे उसे उसके लिये कुछ भी क्यों ना करना पड़े। मेरे उपर तो उस समय ममता आंटी के नंगे बदन का नशा, व्हिस्की का नशा, सिगरेट का नशा और ममता आंटी से लंड चुसवाने का नशा ऐसा छाया हुआ था की जैसे मैं किसी और दूसरी दुनिया में हूँ। ये चारों ही नशे ज़िंदगी में पहली बार मैं अनुभव कर रहा था। पहले तो ममता आंटी बड़े प्यार से अपना मुँह उपर नीचे सरका-सरका कर मुझे लंड चुसाई का मज़ा देने लगी। मेरा पूरा लंड ममता आंटी के मुँह में समा नहीं पा रहा था पर वो बहुत तबियत से मेरी आँखों में आँखें डाल कर चूस रही थी। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल था। मैने ममता आंटी का सिर कस कर अपने हाथों में पकड़ लिया और हाथ से उनका सिर उपर नीचे करने लगा और नीचे से अपने चूतड़ उछाल- उछाल कर ममता आंटी के मुँह में ही शाट देने लगा और जब मैं झड़ा तो मैंने कस कर ममता आंटी का सिर पकड़ कर नीचे से एक शाट लगाया जिस से मेरा लंड सीधा ममता आंटी के गले में जा कर फँस गया और उस समय मेरा पूरा साढ़े आठ इंच और ढाई इंच मोटा लौड़ा जड़ तक ममता आंटी के मुँह में घुसा हुआ था और मेरी झाँट के बाल ममता आंटी की नाक में घुस रहे थे। जब मैं शाट लगा कर ममता आंटी के गले में अपना लंड फँसाकर झड़ रहा था उस समय ममता आंटी बूरी तरह छटपटा रही थी और मुझ से दूर जाने की कोशीश कर रही थी पर मैंने भी कस कर उन का सिर पकड़ा हुआ था और जब तक मेरे पानी की आखिरी बूँद नहीं निकली, मैंने ममता आंटी का सिर नहीं छोड़ा। ममता आंटी वाकय में बहुत चूदास औरत थी। इतनी तक्लीफ होने के बाद भी मेरे लंड का सारा पानी चाट-चाट कर पी गयी और एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी। ममता आंटी ने मेरा झड़ा हुआ लंड अपने मुँह से बाहर करा तो मैं बोला, “आंटी आई एम सारी! पर यह मेरा पहली बार था इसलिये मैं अपने आप को कंट्रोल बाहर कर पाया!” दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी ने मेरे होंठ चूमते हुए कहा, “डार्लिंग तू सिर्फ़ मुझे ममता बोल… और मादरचोद मैं इसी तरह तो अपन बदन रगड़वाना चाहती हूँ… कसम से आज पहली बार लंड चूसने का असली मज़ा मिला है। ऐसा प्यारा और तगड़ा लंड हो तो मैं ज़िंदगी भर चूसती रहूँ!” लंड चुसवाने के बाद मैं भी थोड़ा सा मस्त हो चूका था। मैंने कहा, “क्यों ममता चा… मेरा मतलब सिर्फ़ ममता… तुम्हारा इतना चुदास बदन है… तुमने शादी से पहले किसी से चुदवाया या नहीं?” ममता आंटी बड़े दुख से बोली “अरे नहीं रे, मेरे पास अपनी चूत फड़वाने के और नए-नए लंड लेने के मोके तो बहुत थे पर मैंने सोचा हुआ था के मैं अपनी चूत सुहाग रात वाले दिन ही अपने हसबैंड को दूँगी। पर मुझे क्या पता था की मेरी किस्मत में ऐसा गांडू लिखा हुआ है। अगर मुझे पता होता तो मैं शादी से पहले जम कर अपनी चूत का मज़ा उठाती। तेरे अंकल का सिर्फ़ पाँच इंच लम्बा और एक इंच मोटा है और बस पाँच-छ: धक्के में ही झड़ जाता है और गांडू की तरह मेरी चूचियों पर उल्टा लेट कर सो जाता है!” इतना कह कर ममता आंटी बिस्तर से उठीं और अलमारी से नौ इंच लम्बा वाइब्रेटर लेकर आयी और बोली, “अभी तक तो मेरा असली हसबैंड ये ही है जिस से मैं अपनी चूत की आग बुझाती हूँ। तेरे अंकल के अलावा तू पहला लड़का है जिस से मैं अपना नंगा बदन चुदवाऊँगी… बस तू मेरा साथ मत अलग करना!” ममता आंटी कहते-कहते बहुत भावुक हो गयी थीं। मैंने ममता आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और एक दम फ़िल्मी डाय़लोग मारते हुए बोला, “ममता डार्लिंग आज से मैं तुम्हारे जिस्म की भूख को शाँत करूँगा और जब तुम कहोगी उसी समय अपना लंड तुम्हारी सेवा में हाज़िर कर दूँगा! आज से तुम्हारे दुख के ओर वाइब्रेटर के दिन बीत गये। आज से तुम सिर्फ़ इस असली लंड का मज़ा लो…!” और इतना कह कर ममता आंटी को दबा दबा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा। ममता आंटी की चूचियों का दबाव पाकर और उनकी मस्त मोटी-मोटी जवानी सीने से लगा कर मेरा लंड फिर से पूरा तन गया था। ममता आंटी बोली, “भोसड़ी के! तेरा लंड है की मस्त गन्ना… देख तो सही कैसे खड़ा हो कर लहरा रहा है!” मैंने कहा, “ममता यह तो फिर से तुम्हारे होंठों को ढूँढ रहा है चुसाने के लिये।” ममता आंटी बोली, “अनिल! गन्ना तो मैं अबकी बार अपनी चूत में ही चूसूँगी, पहले तो मुझे अपनी सिगरेट और ड्रिंक आराम से पीने दे और तू अपनी ड्रिंक मेरी चूत से निकाल कर पी… आ जा अनिल आज तुझे औरतों की चूत पीना सिखा दूँ!” इतना कह कर ममता आंटी अपने चूतड़ आराम से बिस्तर पर टिका कर बैठ गयी और अपनी दोनों टाँगें खोल कर पैंटी में कसी हुई चूत की मछलियों को दिखाने लगी। जब भी मैं ममता आंटी और नेहा की पैंटी सूँघता था तो बहुत ही मादक खुशबू आती थी। मैं भी देखना चाहता था की आखिर वो आती कहाँ से है।

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    जब मैंने एम ए करने के लिये दाखिला लिया तो मुझे होस्टल में जाना पड़ा। डर के मारे मेरी जान निकली जा रही थी। जाने वहाँ लड़कियाँ कैसा व्यवहार करेंगी। वहां से कहीं जाने को मिलेगा या नहीं। यहां जब तब चुदने वाली लड़की को अब लण्ड नसीब होगा या नहीं ? मैं यही सब सोच कर उलझन में थी। मुझे आराम से सिन्गल रूम मिल गया था। आज मुझे होस्टल जोईन करना था। मैं सीधे स्टेशन से टेक्सी ले कर होस्टल पहुंच गई। डरते डरते मैंने होस्टल में कदम रखा। पर मुझे वहाँ दूसरी लड़कियों ने मदद करके मेरा सामान वगैरह कमरे में सजा दिया। मुझे वहाँ अच्छा लगने लगा। यहाँ ना तो अब्बू था, ना ही अम्मी जान, ना ही खाला और ना ही मेरी छोटी बहन, यानी टोकने और परेशान करने वाला कोई नहीं था। सभी कुछ मनमोहक सा लगने लगा था। मेरी सोच से बिल्कुल उल्टा। मैंने पहले क्यो नहीं होस्टल में प्रवेश नहीं लिया, अब ये सोच कर मैं अफ़सोस करने लगी। मैं होस्टल में अपना डिल्डो लाना नहीं भूली थी। मुझे पता था कि लड़कियों के होस्टल में मुझे कोई लड़का नहीं मिलने वाला है। शाम का खाना मेस में खा कर मैं जैसे ही कमरे में गई और अपना हल्का सा पजामा पहना कि दरवाजे में किसी ने खटखटाया। मैंने कहा,”दरवाजा खुला है, अन्दर आ जाईये !” तुरन्त दो लड़कियाँ अन्दर आ गई और भीतर से दरवाजा बन्द कर दिया। “मेरा नाम शिल्पा है और यह सोनल है… और तुम हमें दीदी कहोगी !” मैं डर सी गई। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | “आप कौन हैं… और मुझसे क्या काम है?” “डरो मत… बस आपने हमें अपना परिचय देना है !” “ओह कहिये शिल्पा दीदी… मेरा नाम शमीम बानो है और मैं बनारस की हूँ !” “अच्छा, बड़ी स्मार्ट हो… इसे परिचय नहीं कहते हैं… हम पूरा नीचे से ऊपर तक परिचय लेते हैं !” “जी…कहिये…” “ये टॉप उतारो… जरा हमें भी तो जलवे दिखाओ !” सोनल बोली। “अरे जाओ, बड़ी आई हो टॉप उतरवाने वाली…” सोनल बड़ी और ताकतवर लड़की थी… उसने मेरे बाल पकड़ लिये,”भेन चोद… क्या कहा… ये देख…” उसने मेरा टॉप ऊंचा कर दिया और कहा,”पिटना हो तो बोल देना !” “मुझे उसमे मर्दों वाली ताकत दिखाई दी। आवाज भी अलग सी थी। पर कितनी ही लड़कियाँ ऐसी होती हैं। उसकी बातों से मैं सहम गई। मैं समझ गई थी कि मेरी रेगिंग हो रही है। कुछ खटपट सुन कर सोनल ने दरवाजा खोला। एक दम से कई लड़कियाँ अन्दर आ गई। “अरे वाह सोनू, तुम यहां… क्या किया… साली अभी तक कपड़े में है?” “तुम जाओ… यह तो मेरी शिकार है… मेरे ही सबजेक्ट की है” सोनल ने कहा। सभी लड़कियाँ दूसरे की रेगिन्ग लेने चली गई। मेरे में अब तो उसका सामना करने की हिम्मत भी नहीं रही। “चल उतार कपड़े… दिखा अपनी मस्त चूंचियां…!” मैंने धीरे से टॉप और शमीज उतार दिया मेरे दोनों बोबे बाहर छलक पड़े। यूं तो अभी छोटे ही थे पर दूसरो को आकर्षित करने का दम रखते थे। “तेरे काम की चीज़ है सोनू… जरा सहला कर तो देख…” शिल्पा बोली। सोनू आगे बढ़ी और मेरी चूंचियों पर हाथ रख दिया। मैं चौंक पड़ी… मर्द का हाथ मैं अच्छी तरह से पहचानती थी। कई बार मैं चुदवा चुकी थी… और मर्दो का स्पर्श मैं जानती थी। पर चुप रही… उसके हाथो में जैसे जादू था। उसने बड़े प्यार से मेरे बोबे सहलाये… मुझे झुरझुरी आने लगी। उसने मुझे चूम लिया। अब कोई शक नहीं था कि वो लड़की नहीं लड़का है। मुझे असली मजा मिल रहा था… मैंने उसे रोका नहीं। उसके होंठ मेरे होंठ से लग गये। उसका एक हाथ मेरे पजामे के ऊपर मेरे चूतड़ो पर आ गया और दबाने लगा। “बस करो सोनल दीदी…मुझे कुछ हो रहा है !” मेरे तन में ये जान कर और आग लग गई थी कि ये तो लड़का है और मुझे नई लड़की जानकर चोदने आया है। “क्यों मजा आ रहा है ना… अभी और आयेगा…!” शिल्पा ने मुस्करा कर कहा। ” हाय दीदी… और दबा दो ना !” मैंने उससे आग्रह किया। शिल्पा ने सोनू की ओर देखा और मतलब से मुस्करा उठी। “मैं जा रही हूँ… जब रेगिंग समाप्त हो जाये तो मेरे रूम में आ जाना… बाय !” कह्कर शिल्पा चली गई। मुझे अब पूरी आज़ादी मिल गई। मैं अपनी असलियत पर आ गई। “बानो, तेरे मम्मे तो बड़े कठोर हैं… और तेरे चूतड़ तो मस्त हैं..” सोनू ने कसकते अन्दाज में कहा। “मां की लौड़ी, बोल तो ऐसे रही है कि जैसे मुझे चोद डालेगी !” मैंने अपने तेवर बदले। मेरी भाषा सुन कर पहले तो हक्का बक्का रह गया। पर उसने मुझे भांप लिया कि शायद मेरी भाषा ही ऐसी है। “क्यू चुदना है क्या भोसड़ी की… बोल तो दे…!” उसने भी मेरी ही भाषा का प्रयोग किया। “सच भड़्वी, तूने मुझे मस्त कर दिया है… और मस्त कर दे… ला मैं भी तेरी भोसड़ी सहला दूँ !” मैंने उसे और उकसाया। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मेरी बानो… ले सहला दे मेरी भोसड़ी और कर मुझे भी मस्त…!” सोनू ने अपनी कमर यूँ आगे कर दी जैसे कोई लण्ड लेने को तैयार हो। मेरी आशा के मुताबिक लड़का ही निकला वो… हरामी का लण्ड तनतना रहा था… “चूतिये… पहले ही बता देता ना कि लड़का है… इस लण्ड की हालत तो देख… गांडू मरा जा रहा है !” मैंने हंसते हुये कहा। “बानो ऐसे क्या बोलती है… तेरे बातों में गालियां ही गालियां हैं… ऐसी लड़की तो मैंने आज तक कहीं नहीं देखी !” “आये हाये… साला बड़ा सीधा बन रहा है… तेरे कड़क लौड़े का मजा तो लेने दे !” मैं उसका लण्ड अपने हाथ में लेकर सहलाने और मसलने लगी और पूछा,”तेरा नाम क्या है रे…मादरचोद!” “सोनू… ये लड़कियाँ प्यार से मुझे सोनू कहती हैं… वैसे मेरा नाम सलमान है !” “अब ये तो उतार दे… चल बिस्तर पकड़ और उठा अपना लौड़ा और मार दे मेरी चूत !” “अरे तू तो साली बड़ी मस्तानी निकली…!” मैं उसकी हालत देख कर हंस पड़ी… उसका मस्त लौड़ा उफ़न रहा था। सुपाड़ा रह रह कर फ़ुफ़कार रहा था। सुपाड़े की ऊपर की चमड़ी कटी हुई थी। उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिये थे… “तू यहां आया कैसे… मतलब होस्टल में…” “इन लड़कियों के साथ उनके ही कपड़े पहन कर आ जाता हूँ… यहा बहुत सी लड़कियाँ मुझसे चुदाती हैं !” “वाह रे सोनू… साले तेरी तो लाईफ़ बन गई… फ़्री की चूतें मिल जाती हैं…!” “नहीं… ये सब मुझे पैसा देती हैं… जो मुझे नहीं जानता है इनके साथ देख कर लड़की जान कर मुझ पर शक नहीं करता है और ये मस्ती से कमरा बन्द करके खूब चुदवाती हैं…” अब तक मैं उसके साथ बिस्तर पर आ चुकी थी… और वो मेरे ऊपर चढ़ गया था। मैंने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठा ली थी। मेरे हाथ मेरी चूत का द्वार खोल रहे थे… कुछ ही पलों में उसका लण्ड मेरी चूत में घुस चुका था। “हाय मेरे मौला… आह्ह… स्स्स्स्सी सीऽऽऽऽऽ… मजा आ गया सलमान…” “लगता है तू तो बहुत बार चुदा चुकी है…!” “अरे चुप… चल लगा लौड़ा… मादरचोद… चूतिये की तरह क्या पूछता है !” “बानो रे बानो… तुझसे बोलना ही पाप है !” मैंने उसे कस लिया… और मुझे होस्टल के पहले दिन ही चुदने का आनंद मिल गया। उसका लण्ड भीतर चूत की गहराई नापने लगा और मैं भी उसे पूरी चुदने में सहायता करने लगी। मेरे बोबे वो खींच खींच कर घुमाने और दबाने लगा। मैंने अपनी दोनो टांगे उसकी कमर से लपेट कर चूत उठा कर चलाने लगी। बीच बीच में आदत के अनुसार उसके चूतड़ो पर भी पीछे से लात मार रही थी। उसका लण्ड थोड़ा सा मोटा था, इसलिये वो अन्दर बाहर कसता हुआ जा रहा था। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | “भेन चोद तेरा लौड़ा मोटा है रे…हाय… मेरा रस जल्दी निकाल देगा…” “इसीलिये तो यहाँ की लड़कियाँ मुझ पर मरती है… फिर बानो तेरी चूत नई है ना इसलिये टाईट है…” “भोसड़ी के चूतिये… मेरी चूत तो मेरे दोस्त रोज मारते हैं… तुझे नई लग रही है?” “क्या… अच्छा… तो ये ले तेरी भेन की चूत…” वो अब नरमाई छोड़ कर कड़ाई पर आ गया। अब मुझे भी मजा आने लगा। उसने पूरा दम लगा कर जो लण्ड चूत में मारा, मेरी तो चीख निकल गई। “हरामी… मजा आ गया… लगा … मां चोद दे मेरी !” “तेरी तो गण्डमरी… फ़ाड़ के रख दूंगा … देखना…” “दे …दे… मदरचोद… दे लण्ड… चोद दे हरामजादे…” मैं खुशी से चीखती बोल रही थी। वास्तव में मैं चरमसीमा पर पहुंच चुकी थी। मुझे जन्नत की खुशी नसीब हो रही थी। अन्दर जड़ तक चुद गई थी… “ही… ईईऽऽऽऽ… तेरी तो मां की चूत… फ़ाड़ दे आज… सोनू मैं तो गई… हरामी… निकला मेरा तो…” और आह रे… मेरा रस जोर से निकल पड़ा… तभी सलमान ने भी हुंकारा भरा… और लण्ड बाहर निकाल कर फ़व्वारा छोड़ दिया। उसका वीर्य हवा में लहरा उठा… झटके खा खा कर उसका रस बरसता रहा… मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। अब वो मेरे पर लेटा हुआ हांफ़ रहा था। मेरी धड़कन भी अब सामान्य होने लगी थी। मुझे चूमता हुआ वो मेरे पास ही लेट गया। मैं अपनी दोनों टांगें चौड़ी किये पड़ी हुई थी। मैं नंगी बिस्तर से उठी और उसके शरीर को निहारने लगी। उसका शरीर वास्तव में गठीला था। बस कमर जरूर लड़कियों जैसी थी। मैंने उसका लण्ड पकड़ा औए मुँह में डाल लिया और सुपाड़े के रिंग को अपने होंठो से रगड़ने लगी। साला लण्ड तो लण्ड, सोनू खुद भी तड़प कर खड़ा हो गया। “बस अब आखिर में मेरी सुन्दर सी गोल गोल गाण्ड चोद दे राजा…” मैंने अपनी सुन्दर सी गाण्ड उसके चेहरे के सामने घुमा दी। किसकी क्या मजाल कि बनारसी रसीली गाण्ड सामने हो और कोई उसे ना चोदे…। उसने मुझे फिर से बिस्तर पर खींच लिया और मुझे उल्टा लेटा कर चूत के नीचे मोटा सा तकिया लगा दिया। मेरी गाण्ड खिल उठी… उसने चूतड़ों के पार्टीशन को खींच कर अलग किया और पास में पड़ी मेरी फ़ेस क्रीम को गाण्ड में भर दी। मेरी प्यारी सी, दुलारी सी चिकनी सी खाई जैसे खड्डे में अपना मोटा सा लौड़ा टिका दिया। उसके लण्ड ने ओखली में सर घुसा ही डाला। मेरी गाण्ड का छेद पहले तो सिकुड़ कर छोटा हो गया फिर मैंने उसे ढीला करके उसे स्वागत किया। गाण्ड मराने की अभ्यत होने से मुझे उससे गाण्ड चुदाने में कोई तकलीफ़ नहीं हुई। उसका मस्त लौड़ा फ़िसलता हुआ चिकने छेद में अन्दर जाने लगा और मुझे मजा आने लगा, मेरी गाण्ड और खुलने लगी। चूतड़ो के पट और ढीले करके लण्ड को पूरा अन्दर लेने की कोशिश करने लगी। सलमान भी एक नम्बर का चोदने वाला निकला… बड़ी नरमाई से उसने मेरी गाण्ड में लण्ड पूरा उतार दिया। उसका गहराई तक फ़न्सा हुआ लण्ड मेरी गान्ड में कसा हुआ बहुत भा रहा था। डण्डे का अह्सास मुझे मस्त किये दे रहा था। अब वो पहले तो धीरे धीरे लण्ड गाण्ड में मारने लगा फिर उसकी स्पीड बढ़ती गई। वो अपने घुटनों के बल बैठा हुआ था और मेरी चूत उसके सामने खुली हुई थी। वो मेरी चूत के दाने को सहलाते हुये लण्ड चला रहा था। उसकी अंगुली भी मेरी चूत में अन्दर जा कर मुझे मस्त कर रही थी थी। मैंने अपनी आंखें बन्द कर ली और चुदाई का भरपूर आनन्द लेने लगी। मेरे अंगों का संचालन अपने आप हो रहा था, मस्ती बढ़ती जा रही थी। उसके हाथ मेरी चूत को रगड़ रगड़ कर मुझे मदहोश कर रहे थे… उसकी दो दो अंगुलियाँ मेरी चूत को लण्ड की तरह चोद रही थी और लण्ड मेरी गाण्ड में मस्ती से चोद रहा था। आंखें बन्द किये हुये मैं होश खोने लगी और चूत में से पानी छूट पड़ा। मैं उत्तेजना से झड़ने लगी, मेरा रस निकलता जा रहा था। सलमान अनुभवी था उसे पता चल गया था मैं झड़ चुकी हूँ… अब वो भी गाण्ड में लण्ड तेजी से चलाने लगा और और उसने गाण्ड के अन्दर ही अपनी पिचकारी छोड़ दी। मुझे गरम गरम सा और लण्ड की लहरें अपनी गाण्ड में महसूस होने लगी। कुछ ही देर में वो पूरा झड़ चुका था… और उसका लण्ड सिकुड़ने लगा था। लण्ड अपने आप बाहर आ गया था। सलमान अब बिस्तर से उतर चुका था और मोबाईल से उसने शिल्पा को मिस काल किया। कुछ ही देर में शिल्पा मेरे कमरे में आ गई थी। हमारी हालत देख कर वो बड़ी खुश हुई,”बानो, चुद गई ना … अब तू हमारी क्लब में शामिल हो गई है… हमारे एक दो दोस्त और हैं… उसका भी मजा लेना…” सलमान और मैंने तब तक कपड़े पहन लिये थे। शिल्पा ने अपने पर्स में से कुछ काजू बादाम निकाले और कहा,”अपनी सेहत का ख्याल रखना … मैं दूध भिजवाती हूँ…” सलमान वापिस लड़की के भेष में आ गया था। उसने मुझे प्यारी सी स्माईल दी और दोनों बाहर चले आये।

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    Condom slips off. She asks for another one several times. He didn’t listen….

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    Condom slips off, still no stop

    सम्भोग का उद्देश्य तो सब जानते हैं ….पुरुष के लिंग का स्त्री की योनि में प्रवेश और फिर जितनी ज्यादा देर हो सके मैथुन करना। इस उद्देश्य को पाने के लिए पुरुष के लिंग और स्त्री की योनि को सम्भोग के लिए तैयार होना चाहिए, अर्थात पुरुष का लिंग सख्ती से खड़ा होना चाहिए और लड़की की योनि भीगी हुई होनी चाहिए। प्रकृति ने इसका प्रावधान किया हुआ है और जब भी स्त्री-पुरुष यौनाग्नि से उत्तेजित होते हैं तो स्वतः ही उनके यौनांग सम्भोग के लिए तत्पर हो जाते हैं। लेकिन वर्षों के सामाजिक प्रतिबंधों और सांस्कारिक बंदिशों के कारण हमारी लड़कियों में यौन के प्रति भांति भांतिकी गलत धारणाएं हैं जो उन्हें यौन-संसर्ग के आनन्दों को लूटने से रोकती हैं। अतः जहाँ पुरुष यौन-आवेश में आसानी से उत्तेजित हो जाता है वहीँ हमारी स्त्री संकुचित रह जाती हैजिससे उसकी इन्द्रियाँ अपना प्राकृतिक काम नहीं कर पातीं। इससे उसकी योनि में रस-संचार में देरी लगतीहै और वह सम्भोग के लिए जल्दी तैयार नहीं हो पाती। यह दोष प्राकृतिक नहीं बल्कि सामाजिक है। पुरुष को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और स्त्री को धीरज के साथ यौन के लिए तैयार करना चाहिए।

    लड़की को उत्तेजित करना लड़की को उत्तेजित करना आसान है पर इनकी उत्तेजना का स्रोत मर्दों से परेहोता है। हमारी पाँच मूल इन्द्रियाँ हैं ….. दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, स्वाद और गंध। वैसे तो मैथुन में सभी इन्द्रियों का प्रयोग होता है लेकिन स्त्री-पुरुष में उत्तेजना पैदा करनेमें इन्द्रियों का योगदान अलग-अलग होता है। मर्दों में दृष्टि बहुत महत्वपूर्ण होती है और उसके बाद स्पर्श। मर्दों को उकसाने में गंध, श्रवण और स्वाद बहुत कम असर करते हैं। स्त्रियों में स्पर्श सबसे अधिक कारगर होता है और इसके बाद क्रमशः श्रवण, गंध, दृष्टि और स्वाद आते हैं। इसीलिये नंगी लड़की की तस्वीर या ब्लू-फिल्म देखकर लड़के आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं जबकि लड़कियाँ नहीं होतीं। उन्हें उत्तेजित होने के लिए प्यारे प्यारे स्पर्श के साथ अच्छी अच्छी बातें सुनना और सुगन्धित वातावरण ज़रूरी हैं। एक सफल आशिक़ इस बारीकी को अच्छी तरह समझता है। मतलब यह कि लड़की को नंगा करके, उसे आरामदेह बिस्तर पर लिटा कर, उससे प्यार भरी बातें करते हुए उसके शरीर पर हल्के-हल्के हाथ फेरना चाहिए। अगर बिस्तर के पास ताज़ा फूलों का गुलदस्ताऔर कुछ भीनी अगरबत्तियाँ हों तो अच्छारहेगा। इस तरह लड़की की सही इन्द्रियोंका उपयोग होगा और मर्द की उपयुक्त इन्द्रियों का भी क्योंकि वह नंगी लड़की को देख और छू रहा होगा। उससे प्यार भरी बातें करना बहुत ज़रूरी है। लड़की की कामुकता जगाने के लिए उसके कान और मर्द के हाथ और उँगलियाँ बहुत काम आते हैं। पहले लड़की को उलटा लिटा दो। उसकी बाजुओं को बदन से थोड़ा अलग कर दो और टांगों को भी थोड़ा खोल दो। फिर उसके पास बैठ कर उसकी पीठ पर अपने हाथ फिराओ। पीठ के बीच से शुरू करते हुए अपनी उँगलियों और नाखूनों से पीठ पर गोलाकार रेखाएँ खींचो। साथ ही झुक-झुक कर उसकी गर्दन और पीठ पर अपने होंठों से चुम्बन करो। अब अपनी उँगलियाँ पीठ से हटा कर उसकी दोनों बगलों पर चलाओ। इससे उसको गुदगुदी होगी और वह इधर-उधर हिलेगी। धीरे-धीरेअपने हाथों को उसके नितंब (चूतड़) और जाँघों से बचाते हुए टांगों पर ले आओ। कुछ देर उसकी पिण्डलियों और टांगों परहाथ फिराओ और फिर उसके पैर के तलवों कोसहलाते हुए उसके पाँव की उँगलियों के बीच अपनी उँगलियाँ घुसा कर उनकी मालिशकरो। बीच-बीच में नीचे झुक कर उसके बदन पर इधर-उधर चुम्मियाँ लेते रहो, साथ ही उससे कुछ ना कुछ प्यारी बातें कहते रहना अच्छा रहेगा। अब, अपने हाथ उसके पाँवों से सरका कर उसकी जाँघों और नितंब पर ले आओ। यह बहुत ही संवेदनशील हिस्सा है और लड़की ज़रूर कसमसाएगी। उसकी कसमसाहट का आनन्द लेते हुए उसके इस हिस्से से खिलवाड़ करो। अपने हाथों और उँगलियों से इस पूरे इलाक़े का निरीक्षण करो। वह अपनी टाँगें भींचने का प्रयत्न करेगी पर उन्हें थोड़ा खुला ही रखो और उसकी जाँघों के मर्मशील हिस्से को ऊँगली के सिरे और नाखूनों से सहलाओ। अब, एक-एक बड़ी पुच्ची उसके दोनों चूतड़ों पर जमाओ और एक ऊँगली उसके बीच की दरार में डाल कर ऊपर से नीचे तक एक-दो बार चलाओ। ध्यान रहे कि अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल निरंतर होना चाहिए। अगर एक हाथ नितंब के लिए काफी है तो दूसरा हाथ पीठ पर चला सकते हो। लड़की के बदन के पूरे पिछवाड़े को सहलाने के बाद उसको पलट कर सीधा कर दो।हो सकता है लज्जा-वश वह अपनी टाँगें सिकोड़ ले और अपने हाथों से अपने स्तन ढक ले। ऐसे में दृढ़ता से उसकी टाँगें सीधी करो और उसके हाथों को हटा कर बगल के साथ कर दो। उसके हाथ उठा कर उसके सिर के पास कर दो तो और भी अच्छा रहेगा। अब जैसे पीठ पर किया था वैसे ही उसके पेट पर एक हाथ फेरना शुरू करो और दूसरेसे उसके सिर के बाल सहलाओ। साथ ही उसकेमाथे, आँखों, नाक, कान और ठोड़ी पर पुच्चियाँ करो। लड़कियों के कान और उनके पीछे का इलाका उन्हें बहुत गुदगुदाता है, वहाँ पुच्ची करो। अभी उसके होंठों पर चुम्बन ना करो …. अब अपना ध्यान उसकी टांगों और पाँव पर ले जाओ और प्यार से उन पर हाथ फिराओ। उसके तलवे गुद्गुदाओ और उसके घुटनों पर अपनी हथेलियाँ जमा कर गोल-गोल घुमाओ। अपने पोले-पोले हाथों और नाखूनों से उसकी जाँघों को कुरेदो। अधिकांश लड़कियाँ इस समय तक कामुकता में लोप हो गई होती हैं…. उनके दिल की धड़कन और साँसें तेज हो जाती हैं, बदन अकड़ने सा लगता है, स्तन उभरते हैं और स्तनाग्र पैने होने लगते हैं। जब ये संकेत मिलने लगें तो समझ लो लड़की लगभग तैयार है। अधिकांश मर्द इस पूरी क़वायद के दौरान उत्तेजित ही रहते हैं। अब एक तकिया लड़की के नितंबों के नीचे रख कर उसे थोड़ा उठा दो और खुद उसके घुटनों और जाँघों के बीच बैठ जाओ। अपना वज़न उसकी टांगों पर न डालो। अब आगे झुक कर उसके स्तनों को दोनों हाथों में लेकर प्यार से मसलना और सहलाना शुरू करो, साथ ही उसके होंठों पर अपना मुँह रखकर प्यार करो। अपनी जीभ से उसके मुँह को खोल कर जीभ अंदर डालने की कोशिश करो और फिर उसकी जीभ सेखिलवाड़ करो। इस अवस्था में तुम्हारे हाथ रास्ते में आ सकते हैं तो उन्हें हटा कर लड़की को लेटे-लेटे ही आलिंगन में ले लो और अपने सीने से उसके स्तनोंको मलो। अब तुम्हारा पेट उसके पेट को छू रहा होगा। ज़्यादातर लड़कियाँ इस समयअपनी टाँगें स्वतः खोल कर मोड़ लेती हैं। अगर वह ना करे तो अपने पाँव और घुटनों से उसकी टाँगें खोल दो। उसके मुँह, गर्दन और स्तनों पर पुच्चियाँ करते हुए अपना एक हाथ उसकी योनि पर ले जाओ। उसकी योनि के इर्द-गिर्द उंगली फिराते हुए उसके कटाव में हलके से दबाव डालो। लगभग सभी लड़कियों की योनि इस समय भीगी हुई मिलेगी। अगर भीगी है और मर्द का लिंग भी तैयार है तो सम्भोगहो सकता है। अगर पुरुष के लिए यह सम्भोग का पहला मौक़ा है तो सकता है उसे स्त्री के यौनांगों का ठीक से ज्ञान ना हो और वह अपने निशाने से चूक सकता है या फिर गलतनिशाना लगा सकता है। कुछ मर्द इतने नादान होते हैं कि वे गुदा को ही अपना लक्ष्य समझते हैं। शायद वे सोचते हैं कि योनि सिर्फ पेशाब के लिए होती है औरउनका मोटा लिंग उसमें नहीं घुस पाएगा।जबकि कुछ मर्दों को यह गलत धारणा नहीं होती और उन्हें मालूम भी होता है कि उन्हें योनि को ही भेदना है पर उन्हें उस छेद को अपने लिंग के सुपारे से ढूँढना नहीं आता।अच्छा होता अगर भगवान ने एक आँख मर्दों के सुपारे पर भी लगाई होती !! जो पुरुष पहली बार यह कर रहे हों उनके लिए लाज़मी है या तो लड़की उनके लिंग को पकड़ कर सही छेद पर टिका दे पर अगर वह शर्मीली है तो पुरुष अपनी उंगली से छेद को टटोल ले और फिर वहीं अपने सुपारे को टिका दे। अगले भाग में पढ़े sex करने के अच्छे आसन क्या है |

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    Threesome fun

    इस लेख में किसी कुँवारी या अनचुदी लड़की के साथ पहली बार सम्पूर्ण चुदाई की विधि बताई गई है। इसे हिन्दी में कौमार्य-भंग, योनिछेदन, सील तोड़ना व अंग्रेज़ी में Deflowering कहते हैं। यह किसी भीलड़की के लिए उसके जीवन की एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण घटना होती है जिसे वह ज़िंदगी भर नहीं भूल सकती। यह एक ऐसा अवसर होता है जिसकी वह तब से कल्पना कर रही होती है जब से उसके बदन में यौन-कामुकता का जन्म होता है और वह अपने स्त्रीत्व का अनुभव करने लगतीहै। अकसर लड़कियाँ अपनी शादीशुदा या अनुभवी सहेलियों से इस बारे में चर्चाकरती हैं… और यह भी देखा गया है कि ज़्यादातर लड़कियाँ अपने अनुभव बढ़ा-चढ़ाकर ही बयान करती हैं जिससे उनके मर्द पर आंच ना आए। अपनी सहेलियों की मधुर कहानियाँ सुन कर लड़कियों के मन में लुभावने सपनों का जन्म होना स्वाभाविक है। अब यह पुरुषों पर निर्भर है कि वे अपनी प्रेयसी या पत्नी के भोले और बरसों से संजोये हुए सपनों को कितना साकार कर पाते हैं या उन्हें कुचल देते हैं। किसी लड़की का कौमार्य भंग करना पुरुष के लिए एक बहुत ही ज़िम्मेदारी का काम होता है। उसे इस मौक़े को उतनी ही तवज्जोह देनी चाहिए जितनी किसी पूजा को दे जाती है। उसे लड़की के लिए यह मौक़ा हमेशा के लिए यादगार बनाना चाहिए। उसे इस दिशा में हर वह प्रयत्न करना चाहिए जिससे लड़की अपना सबसे मूल्यवान उपहार उस पुरुष को देते हुए खुश हो। पुरुष के लिए यह इतना कठिन कामनहीं है क्योंकि एक कुँवारी लड़की की अपेक्षाएं ज्यादा नहीं होतीं। वह यौन के सुखों से अब तक अनभिज्ञ होती है और उसके मन में आकांक्षा, व्यग्रता, चिंता और डर जैसे कई विचार घूम रहे होते हैं। पुरुष का कर्तव्य बनता है कि वह उसकी भावनाओं की कद्र करते हुए बड़े प्यार से उसको धीरे धीरे इस नई डगरपर ऐसे ले जाए कि वह उसके साथ बार-बार उस डगर पर चलना चाहे। सुहागरात की तैयारी मर्दों और लड़कियों दोनों के लिए सबसे ज़रूरी तैयारी है अपनी शारीरिक स्वच्छता या सफाई। यौन सम्भोग एक ऐसा मिलन है जिसमें हमारा संपर्क एक दूसरे के पूरे अंग से होता है। तो लाज़मी है कि हमारा पूरा शरीर एकदम साफ़ हो। गुप्तांगों की सफाईतो ज़रूरी है ही, साथ ही साथ हमारे बाकी अंग, खास तौर से मुँह, जीभ और बगलें साफ़होना बहुत आवश्यक हैं। बेहतर होगा अगर दोनों जने बिस्तर पर जाने से पहले नहा लें। लड़कियों को चाहिए कि अपनी योनि, गुदा, नाभि और स्तनों को अच्छे से धो लें और लड़कों कोअपने लिंग को अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए। अगर लिंग खता हुआ नहीं है (uncircumcised) तो उसके सुपाड़े की परत को जांच लेना चाहिए। कई बार वहाँ गंदगी (smegma) छिपी होती है जो दिखती नहीं है। शरीर से कोई दुर्गन्ध नहीं आनी चाहिए। मेरी सलाह है कि शरीर पर कोई खुशबू (इत्र, सेंट, डियो इत्यादि) लगाने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ साफ़-सुथरा बदन ही काफी है जिससेहमारे बदन की प्राकृतिक गंध (Pheromones) नष्ट ना हो जाए जो यौनाकर्षण में एक अहम भूमिका निभाती है। हाँ, लड़कों को अपनी उँगलियों के नाखून छोटे कर लेने चाहिए और यकीन करना चाहिए कि वे नुकीले नहीं हैं। नाखून काटने के बाद उन्हें फ़ाइल कर लेना चाहिए वरना अनजाने में लड़की के गुप्तांगों को ज़ख़्मी कर सकते हैं। इसके अलावा यौन संसर्ग के लिए आवश्यक है कि एक शीतल कमरा हो जिसमें एक आरामदेह बड़ा बिस्तर हो। कमरे के साथ बाथरूम लगा हुआ हो जिसमें ठण्डे और गर्म पानी का बंदोबस्त हो। गोपनीयता और एकांत के लिए गहरे परदे और मंद रोशनी बेहतर रहेगी। बिस्तर पर तीन-चार तकिये और एक-दो तौलिए होने चाहिए। कुछ लोगों की राय में वातावरण को रूमानी बनाने के लिए सुगन्धित मोमबत्तियाँ और हल्का संगीत होना चाहिए। मैं इसे ज़रूरी नहीं समझता। अगरहो सके तो ठीक है पर ज़रूरी नहीं है। मेरी राय में जब लड़का-लड़की यौन के आवेश में आ जाते हैं तो उनकी सब इन्द्रियाँ सिर्फ सम्भोग पर केंद्रित हो जाती हैं और वातावरण की सुगंध या संगीत का अहसास उन्हें कतई नहीं होता। किसी भी सम्भोग के पहले पेट हल्का होना चाहिए। तो, दोनों को हल्का भोजन करना चाहिए और कच्चा प्याज-लहसुन से परहेज़ करना चाहिए जिससे मुँह से दुर्गन्ध ना आये। वैसे भी खाना खाने के बाद मुँह अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए। अमूमन लोग सोचते हैं कि संभोग का मज़ा बढ़ाने के लिए मदिरा-पान कर लेना चाहिए। पर यह ना तो ज़रूरी है और ना ही मैं इसकी सलाह देता हूँ। मैं मदिरा-पान के खिलाफ नहीं हूँ और एक-आध पैग में कोई बुराई भी नहीं है परन्तु यौन का मज़ा जो पूरे होशो-हवास में आता है वह नशे की हालत में कहाँ आ सकता है। यौन तो खुद ही सर्वोत्तम नशा है….. फिर शराब का सहारा किस लिए ? वैसे भी डॉक्टरों का मानना है कि शराब लिंग के लिए उत्तेजक नहीं बल्कि एक अवरोधक का काम करता है। शराब के बाद पुरुष सेक्स के बारे में बातें तो बहुत कर सकता है पर उसकी पौरुष शक्ति कमज़ोर हो जाती है और कई बार वह सम्भोग में विफल भी हो सकता है। हाँ, एक और बात…. अपने मोबाइल फोन बंद करना ना भूलें वरना वे ऐसे समय बजेंगे कि सारा मज़ा किरकिरा हो जायेगा।

    शुरुआत पुरुष के लिए ज़रूरी है कि वह किसी बात के लिए जल्दबाज़ी न दिखाए। भले ही लड़का-लड़की पहले से एक दूसरे को जानते हों या फिर पहली बार एकांत में मिल रहेहों….. शुरुआत में दोनों को एक अजीब सी झिझक होगी। लड़की को खास तौर से काफी संकोच और असमंजस हो सकता है …. थोड़ी-थोड़ी घबराहट भी हो सकती है। कुछ मर्द भी ऐसेमौक़ों पर घबराहट महसूस कर सकते हैं खास तौर से वे जिन्हें अपना लिंग छोटा लगता हो या जिन्हें शीघ्र-पतन का डर हो। मेरी राय में दोनों को ही अपनी शंकाओं पर काबू पाने की कोशिश करनी चाहिए और प्रकृति की इस नायाब अनुभूतिका आनन्द उठाने का प्रयास करना चाहिए। बेहतर होगा अगर शुरुआत बातचीत से की जाये। पुरुष को पता होना चाहिए कि सेक्स के प्रांगण में हर तरह की पहल उसे ही करनी होती है। लड़की को ऐसे मौक़े पर लज्जा और झिझक ही शोभा देती है। ठीक तरह से बातचीत करने के लिए भी पहले से तैयारी करना बेहतर होगा। पुरुष को चाहिए कि इस बारे में पहले सेसोच ले क्या क्या बात करनी है वरना उस वक्त दिमाग धोखा दे सकता है। अकसर लड़कियों को अपने घरवालों की और खुद की तारीफ सुनना अच्छा लगता है। अगर सुहाग-रात शादी के बाद मनाई जा रही है तो अकसर लड़की काफी थकी हुई होतीहै …. उसकी थकान दूर करने के लिए पुरुष उसके हाथ, कंधे, बाजू, सिर इत्यादि दबाने के बहाने उसको छू सकता है। इससे शुरू-शुरू की झिझक तोड़ने में सहायता मिलेगी और लड़की को साहस भी मिलेगा। इन दो बातों को ध्यान में रखते हुए कुछ इसतरह से बातचीत शुरू की जा सकती है :- मानो लड़की का नाम प्रिया है, “वाह प्रिया ! मैं बहुत खुशनसीब हूँ ……..” (प्रिया कुछ नहीं कहती) “जो तुम मुझे मिली हो ….” (प्रिया कुछ नहीं कहती) “तुम्हारे मम्मी-पापा कितने अच्छे हैं ….. दोनों अभी भी जवान लगते हैं … !” (प्रिया ज़रूर मुस्कुराएगी) कुछ देर उसके माँ-बाप, भाई-बहन की तारीफ करने के बाद ….. “प्रिया …. तुम्हारा नाम मुझे बहुत अच्छा लगता है ….. छोटा सा … मैं तुम्हें प्यार में या गुस्से में …. दोनों में आसानी से बुला सकता हूँ !!” (फिर नाटकीय ढंग से उसका नाम एक बार प्यार से और एक बार गुस्से से लेकर दिखाओ। वह ज़रूर हँस पड़ेगी) “तुम हँसती हुई ज्यादा अच्छी लगती हो …. तुम्हें पता भी है तुम्हारे गाल और होंठ कैसे खिल जाते हैं !” (इस समय उसकेगाल पर चुम्बन ले सकते हैं) “मुझे लगता है तुम बहुत थक गई हो …… लाओ, मैं तुम्हारी थकान दूर कर दूं।” (यह कहते हुए उसके कंधे, या हाथ या सिर को पकड़ कर सहलाना शुरू किया जा सकता है। अगर वह शरमाये या आनाकानी करे तो भी पुरुष को दृढ़ता से उसे पकड़ कर प्यारसे सहलाना या दबाना चाहिए)

    चीर-हरण सम्भोग से पहले लड़की को निर्वस्त्र करना एक ऐसा अवसर है जो दोनों को उत्तेजित करने में मदद कर सकता है। इस अवसर का सही उपयोग करना चाहिए। अगर पुरुष लड़की का शरीर दबा कर उसकी थकान मिटाने में जुटा है तो वह आसानी से धीरे धीरे उसके कपड़े इस तरह अलग कर सकता है मानो वे उसके रास्ते में आ रहेहों। लड़की का चीर-हरण धीरे धीरे करना चाहिए। अकसर लड़कियाँ ऊपरी कपड़े उतरवाने में ज्यादा संकोच नहीं करतीं पर पहली बार किसी के सामने ब्रा और पैन्टी उतरवाने में शर्म के कारण आपत्ति कर सकती है। अगर ऐसा होता है तोपुरुष को लड़की की इच्छा की कद्र करनी चाहिए और रुक जाना चाहिए। इस समय वह खुद अपने आप को निर्वस्त्र कर सकता है। कुछ लड़कियों को रोशनी में नंगा होने से संकोच होता है तो उजाला कम कर देना चाहिए … पर बिलकुल अँधेरा ठीक नहीं है। हालाँकि मेरा यह मानना है कि सच्चा पुरुष वही है जो स्त्री की इच्छाओं की कद्र करे और उसकी भौतिक कमजोरी का नाजायज़ फ़ायदा ना उठाये। पर यह भी सही है कि पुरुष को दृढ़ता से वे सब काम करने चाहिए जो कि उचित और ज़रूरी हों। अगर लड़की को ज्यादा ही संकोच या आपत्ति हो तो उसे अपना हक़ जता कर या ज़रूरत हो तो थोड़ा बल इस्तेमाल करके लड़की को सही मार्ग पर लाना चाहिए। इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि लड़की का बलात्कार किया जाये

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    Bigg boss 2 ashwariya 👅👅👅

    harddick21blog

    Aishwarya without abhi shake :) 

    ज्वाला देवी के प्रति रंजना के मन में बड़ा अजीब सा भाव उत्पन्न हो गया था। उसकी नज़र में वो इतनी गिर गयी थी कि उसके सारे आदर्शो, पतिव्रता के ढोंग को देख देख कर उसका मन गुस्से के मारे भर उठा था। उसके सारे कार्यों में रंजना को अब वासना और बदचलनी के अलावा कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा था। मगर अपनी मम्मी के बारे में इस तरह के विचार आते आते कभी वो सोचने लगती थी कि जिस काम की वजह से मम्मी बुरी है वही काम करवाने के लिये तो वो खुद भी अधीर है। वास्तविकता तो ये थी कि आजकल रंजना अपने अंदर जिस आग में जल रही थी, उसकी झुलस की वो उपेक्षा कर ही नहीं सकती थी। जितना बुरा गलत काम करने वाला होता है उतना ही बुरा गलत काम करने के लिये सोचने वाला भी होता है। बस! अगर ज्वाला देवी की गलती थी तो सिर्फ़ इतनी कि असमय ही चुदाई की आग रंजना के अंदर उसने जलायी थी। अभी उस बेचारी की उम्र ऐसी कहाँ थी कि वो चुदाई करवाने के लिये प्रेरित हो अपनी चूत कच्ची ही फ़ुड़वाले। बिरजु और ज्वाला देवी की चुदाई का जो प्रभाव रंजना पर पड़ा, उसने उसके रास्ते ही मोड़ कर रख दिये थे। उस रोज़ से ही किसी मर्द से चुदने के लिये उसकी चूत फ़ड़क उठी थी। कईं बार तो चूत की सील तूड़वाने के लिये वो ऐसी ऐसी कल्पनायें करती कि उसका रोम-रोम सिहर उठता था। अब पढ़ायी लिखायी में तो उसका मन कम था और एकान्त कमरे में रह कर सिर्फ़ चुदाई के खायाल ही उसे आने लगे थे। कईं बार तो वो गरम हो कर रात में ही अपने कमरे का दरवाजा ठीक तरह बंद करके एकदम नंगी हो जाया करती और घन्टो अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को दबाने और चूत को खुजाने से जब वो और भी गर्माँ जाती थी तो नंगी ही बिस्तर पर गिर कर तड़प उठती थी, कितनी ही देर तक अपनी हर्कतो से तंग आ कर वो बुरी तरह छटपटाती रहती और अन्त में इसी बेचैनी और दर्द को मन में लिये सो जाती थी। उन्ही दिनों रंजना की नज़र में एक लड़का कुछ ज्यादा ही चढ़ गया था। नाम था उसका मृदुल। उसी की क्लास में पढ़ता था। मृदुल देखने में बेहद सुन्दर-स्वस्थ और आकर्षक था, मुश्किल से दो वर्ष बड़ा होगा वो रंजना से, मगर देखने में दोनों हम उम्र ही लगते थे। मृदुल का व्यव्हार मन को ज्यादा ही लुभाने वाला था। न जाने क्या खासियत ले कर वो पैदा हुआ होगा कि लड़कियाँ बड़ी आसानी से उसकी ओर खींची चली आती थीं। रंजना भी मृदुल की ओर आकर्षित हुए बिना न रह सकी। मौके बेमौके उससे बात करने में वो दिलचस्पी लेने लगी। खूबसुरती और आकर्षण में यूँ तो रंजना भी किसी तरह कम न थी, इसलिये मृदुल दिलोजान से उस पर मर मिटा था। वैसे लड़कियों पर मर मिटना उसकी आदत में शामिल हो चुका था, इसी कारण रंजना से दो वर्ष बड़ा होते हुए भी वो अब तक उसी के साथ पढ़ रहा था। फेल होने को वो बच्चों का खेल मानता था। बहुत ही जल्द रंजना और मृदुल में अच्छी दोस्ती हो गयी। अब तो कॉलेज में और कॉलेज के बाहर भी दोनों मिलने लगे। इसी क्रम के साथ दोनों की दोस्ती रंग लाती जा रही थी। उस दिन रंजना का जन्म दिन था, घर पर एक पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें परिचित व रिश्तेदारों के अलावा ज्यादातर संख्या ज्वाला देवी के चूत के दिवानों की थी। आज बिरजु भी बड़ा सज धज के आया था, उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वो एक रद्दी वाला है। रंजना ने भी मृदुल को इस दावत के लिये इनविटेशन कार्ड भेजा था, इसलिये वो भी पार्टी में शामिल हुआ था। जिस तरह ज्वाला देवी अपने चूत के दिवानों को देख-देख कर खुश हो रही थी उसी तरह मृदुल को देख कर रंजना के मन में भी फ़ुलझड़ियाँ सी फूट रहीं थीं। वो आज बे-इन्तहा प्रसन्न दिखायी पड़ रही थी। पार्टी में रंजना ज्यादातर मृदुल के साथ ही रही। ज्वाला देवी अपने यारों के साथ इतनी व्यस्त थी कि रंजना चाहते हुए भी मृदुल का परिचय उससे न करा सकी। मगर पार्टी के समाप्त हो जाने पर जब सब मेहमान विदा हो गये तो रंजना ने जानबूझ कर मृदुल को रोके रखा। बाद में ज्वाला देवी से उसका परिचय कराती हुई बोली, “मम्मी ! ये मेरे खास दोस्त मृदुल हैं।” “ओहह ! हेंडसम बॉय।” ज्वाला देवी ने साँस सी छोड़ी और मृदुल से मिल कर वो जरूरत से ज्यादा ही प्रसन्नता ज़ाहिर करने लगी। उसकी निगाहें बारबार मृदुल की चौड़ी छाती, मजबूत कन्धों, बलशाली बाँहों और मर्दाने सुर्ख चेहरे पर ही टिकी रही। रंजना को अपनी मम्मी का यह व्यव्हार और उसके हाव-भाव बड़े ही नागवार गुज़र रहे थे। मगर वो बड़े धैर्य से अपने मन को काबू में किये सब सहे जा रही थी। जबकि ज्वाला देवी पर उसे बेहद गुस्सा आ रहा था। उसे यूँ लग रहा था जैसे वो मृदुल को उससे छीनने की कोशिश कर रही है। मृदुल से बातें करने के बीच ज्वाला देवी ने रंजना की तरफ़ देख कर बदमाश औरत की तरह नैन चलाते हुए कहा, “वाह रंजना ! कुछ भी हो, मृदुल… अच्छी चीज़ ढूँढी है तुमने, दोस्त हो तो मृदुल जैसा।” अपनी बात कह कर कुछ ऐसी बेशर्मी से मुस्कराते हुए वो रंजना की तरफ़ देखने लगी कि बेचारी रंजना उसकी निगाहों का सामना न कर सकी और शर्मा कर उसने अपनी गर्दन झुका ली। ज्वाला देवी ने मृदुल को छाती से लगा कर प्यार किया और बोली, “बेटा ! इसे अपना ही घर समझ कर आते रहा करो, तुम्हारे बहाने रंजना का दिल भी बहल जाया करेगा, ये बेचारी बड़ी अकेली सी रहती है।” “यस आन्टी ! मैं फिर आऊँगा।” मृदुल ने मुसकुरा कर उसकी बात का जवाब दिया और उसने जाने की इजाज़त माँगी, रंजना एक पल भी उसे अपने से अलग होने देना नहीं चाहती थी, मगर मजबूर थी। मृदुल को छोड़ने के लिये वो बाहर में गेट तक आयी। विदा होने से पहले दोनों ने हाथ मिलाया तो रंजना ने मृदुल का हाथ ज़ोर से दबा दिया, इस पर मृदुल रहस्य से उसकी तरफ़ मुसकुराता हुआ वहाँ से चला गया। अब आलम ये था कि दोनों ही अक्सर कभी रेस्तोराँ में तो कभी पार्क में या सिनेमा हाल में एक साथ होते थे। पापा सुदर्शन की गैरमौजूदगी का रंजना पूरा-पूरा लाभ उठा रही थी। इतना सब कुछ होते हुए भी मृदुल का लंड चूत में घुसवाने का सौभाग्य उसे अभी तक प्राप्त न हो पाया था। हाँ, चूमा चाटी तक नौबत अवश्य जा पहुंची थी। रोज़ाना ही एक चक्कर रंजना के घर का लगाना मृदुल का परम कर्तव्य बन चुका था। सुदर्शन जी की खबर आयी कि वे अभी कुछ दिन और मेरठ में रहेंगे। इस खबर को सुन कर माँ बेटी दोनों का मानो खून बढ़ गया हो। रंजना रोजाना कॉलेज में मृदुल से घर आने का आग्रह बार-बार करती थी। जाने क्या सोच कर ज्वाला देवी के सामने आने से मृदुल कतराया करता था। वैसे रंजना भी नहीं चाहती थी कि मम्मी के सामने वो मृदुल को बुलाये। इसलिये अब ज्यादातर चोरी-चोरी ही मृदुल ने उसके घर जाना शुरु कर दिया था। वो घन्टों रंजना के कमरे में बैठा रहता और ज्वाला देवी को ज़रा भी मालूम नहीं होने पाता था। फिर वो उसी तरह से चोरी-चोरी वापस भी लौट जाया करता था। इस प्रकार रंजना उसे बुला कर मन ही मन बहुत खुश होती थी। उसे लगता मानो कोई बहुत बड़ी सफ़लता उसने प्राप्त कर ली हो। चुदाई संबंधों के प्रति तरह-तरह की बातें जानने की इच्छा रंजना के मन में जन्म ले चुकी थी, इसलिये उन्ही दिनों में कितनी चोदन विषय पर आधारित पुस्तकें ज्वाला देवी के कमरे से चोरी-चोरी निकाल कर वो काफ़ी अध्य्यन कर रही थी। इस तरह जो कुछ उस रोज़ ज्वाला देवी व बिरजु के बीच उसने देखा था इन चोदन समबन्धी पुस्तकों को पढ़ने के बाद सारी बातों का अर्थ एक-एक करके उसकी समझ में आ गया था। और इसी के साथ साथ चुदाई की ज्वाला भी प्रचण्ड रूप से उसके अंदर बढ़ उठी थी। फिर सुदर्शनजी मेरठ से वापिस आ गये और माँ का बिरजु से मिलना और बेटी का मृदुल से मिलना कम हो गया। फिर दो महीने बाद रंजना के छोटे मामा की शादी आ गयी और उसी समय रंजना के फायनल एग्जाम भी आ गये। ज्वाला देवी शादी पर अपने मायके चली गयी और रंजना पढ़ाई में लग गई। उधर शादी सम्पन्न हो गई और इधर रंजना की परीक्षा भी समाप्त हो गई, पर ज्वाला देवी ने खबर भेज दी कि वह १५ दिन बाद आयेगी। सुदर्शनजी ऑफिस से शाम को कुछ जल्द आ जाते। ज्वाला के नहीं होने से वे प्रायः रोज ही शाज़िया की मारके आते इसलिये थके हारे होते और प्रायः जल्द ही अपने कमरे में चले जाते। रंजना और बेचैन रहने लगी और एक दिन जब पापा अपने कमरे में चले गये तो रंजना के वहशीपन और चुदाई नशे की हद हो गयी। हुआ यूँ कि उस रोज़ दिल के बहकावे में आ कर उसने चुरा कर थोड़ी सी शराब भी पी ली थी। शराब का पीना था कि चुदाई की इच्छा का कुछ ऐसा रंग उसके सिर पर चढ़ा कि वो बेहाल हो उठी। दिल की बेचैनी और चूत की खाज से घबड़ा कर वो अपने बिस्तर पर जा गिरी और बर्दाश्त से बाहर चुदाई की इच्छा और नशे की अधिकता के कारण वो बेचैनी से बिस्तर पर अपने हाथ पैर फेंकने लगी और अपने सिर को ज़ोर-ज़ोर से इधर उधर झटकने लगी। कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, दरवाजे पर एकमात्र परदा टंगा हुआ था। रंजना को ज़रा भी पता न चला कि कब उसके पापा उसके कमरे में आ गये। वे चुपचाप उसके बिस्तर तक आये और रंजना को पता चलने से पहले ही वे झुके और रंजना के चेहरे पर हाथ फेरने लगे फिर एकदम से उसे उठा कर अपनी बाँहों में भींच लिया। इस भयानक हमले से रंजना बुरी तरह से चौंक उठी, मगर अभी हाथ हिलाने ही वाली थी कि सुदर्शन ने उसे और ज्यादा ताकत लगा कर जकड़ लिया। अपने पापा की बाँहों में कसी होने का आभास होते ही रंजना एकदम घबड़ा उठी, पर नशे की अधिकता के कारण पापा का यह स्पर्श उसे सुहाना लगा। तभी सुदर्शनजी ने उससे प्यार से पुछा, “क्यों रंजना बेटा तबियत तो ठीक है न। मैं ऐसे ही इधर आया तो तुम्हें बिस्तर पर छटपटाते हुए देखा… और यह क्या तुम्हारे मुँह से कैसी गन्ध आ रही है।” रंजना कुछ नहीं बोल सकी और उसने गर्दन नीचे कर ली। सुदर्शनजी कई देर बेटी के सर पर प्यार से हाथ फेरते रहे और फिर बोले, “मैं समझता हूँ कि तुम्हें मम्मी की याद आ रही है। अब तो हमारी बेटी पूरी जवान हो गई है। तुम अकेली बोर हो रही हो। चलो मेरे कमरे में।” रंजना मन्त्र मुग्ध सी पापा के साथ पापा के कमरे में चल पड़ी। कमरे में टेबल पर शराब की बोतलें पड़ी थीं, आईस बॉक्स था और एक तश्तरी में कुछ काजू पड़े थे। पापा सोफ़े पर बैठे और रंजना भी पापा के साथ सोफ़े पर बैठ गई। सुदर्शनजी ने एक पेग बनाया और शराब की चुसकियाँ लेने लगे। इस दौरान दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई। तभी सुदर्शन ने मौन भंग किया। “लो रंजना थोड़ी पी लो तो तुम्हें ठीक लगेगा तुम तो लेती ही हो।” अब धीरे धीरे रंजना को स्थिती का आभास हुआ तो वह बोली, “पापा आप यह क्या कह रहे हैं?” तभी सुदर्शन ने रंजना के भरे सुर्ख कपोलों (गालों) पर हाथ फेरना शुरु किया और बोले, “लो बेटी थोड़ी लो शर्माओ मत। मुझे तो पता ही नहीं चला कि हमारी बेटी इतनी जवान हो गई है। अब तो तुम्हारी परीक्षा भी खतम हो गई है और मम्मी भी १५ दिन बाद आयेगी। अब जब तक मैं घर में रहूँगा तुम्हें अकेले बोर होने नहीं दूँगा।” यह कहते हुए सुदर्शन ने अपना गिलास रंजना के होंठों के पास किया। रंजना नशे में थी और उसी हालत में उसने एक घूँट शराब का भर लिया। सुदर्शन ने एक के बाद एक तीन पेग बनाये और रंजना ने भी २-३ घूँट लिये। रंजना एक तो पहले ही नशे में थी और शराब की इन २-३ और घूँटों की वजह से वह कल्पना के आकाश में उड़ने लगी। अब सुदर्शनजी उसे बाँहों में ले हल्के-हल्के भींच रहे थे। सुदर्शन को शाज़िया जैसी जवान चूत का चस्का तो पहले ही लगा हुआ था, पर १९ साल की इस मस्त अनछुई कली के सामने शाज़िया भी कुछ नहीं थी। इन दिनों रंजना के बारे में उनके मन में बूरे ख्याल पनपने लगे थे पर इसे कोरी काम कल्पना समझ वे मन से झटक देते थे। पर आज उन्हें अपनी यह कल्पना साकार होती लगी और इस अनायास मिले अवसर को वे हाथ से गँवाना नहीं चाहते थे। रंजना शराब के नशे में और पिछ्ले दिनों मृदुल के साथ चुदाई की कल्पनाओं से पूरी मस्त हो उठी और उसने भी अपनी बाँहें उठा कर पापा की गर्दन में डाल दी और पापा के आगोश में समा अपनी कुँवारी चूचियाँ उनकी चौड़ी छाती पर रगड़नी शुरु कर दीं। रंजना का इतना करना था कि सुदर्शन खुल कर उसके शरीर का जायका लूटने पर उतर आया। अब दोनों ही काम की ज्वाला में फुँके हुए जोश में भर कर अपनी पूरी ताकत से एक दूसरे को दबाने और भींचने लगे। तभी सुदर्शन ने सहारा देकर रंजना को अपनी गोद में बिठा लिया। रंजना एक बार तो कसमसाई और पापा की आँखों की तरफ़ देखी। तब सुदर्शन ने कहा। “आह! इस प्यारी बेटी को बचपन में इतना गोद में खिलाया है। पर इन दिनों में मैने तुम्हारी ओर ध्यान ही नहीं दिया। सॉरी, और तुम देखते-देखते इतनी जवान हो गई हो। आज प्यारी बेटी को गोद में बिठा खूब प्यार करेंगे और सारी कसर निकाल देंगे।” सुदर्शन ने बहुत ही काम लोलुप नज़रों से रंजना की छातियों की तरफ़ देखाते हुए कहा। परन्तु मस्ती और नशे में होते हुए भी रंजना इस ओर से लापरवाह नहीं रह सकी कि कमरे का दरवाजा खुला था। वह एकाएक पापा की गोद से उठी और फ़टाफ़ट उसने कमरे का दरवाजा बंद किया। दरवाजा बंद करके जैसे ही लौटी तो सुदर्शन सम्भल कर खड़ा हो चुका था और वासना की भूख उसकी आँखों में झलकने लगी। वो समझ गया कि बेटी चुदने के लिये खुब ब खुद तैयार है तो अब देर किस बात की। पापा ने खड़े-खड़े ही रंजना को पकड़ लिया और बुरी तरह बाँहों में भींच कर वे पागलो की तरह ज़ोर- ज़ोर से उसके गालों पर कस कर चुम्मी काटने लगे। गालों को उन्होने चूस-चूस कर एक मिनट में ही कशमीरी सेब की तरह सुरंग बना कर रख दिया। मस्ती से रंजना की भी यही हालत थी, मगर फिर भी उसने गाल चुसवात- चुसवाते सिसक कर कहा, “हाय छोड़ो न पापा आप यह कैसा प्यार कर रहे हैं। अब मैं जाती हूँ अपने कमरे में सोने के लिये।” पर काम लोलुप सुदर्शन ने उसकी एक न सुनी और पहले से भी ज्यादा जोश में आ कर उसने गाल मुँह में भर कर उन्हे पीना शुरु कर दिया। “ऊँऊँऊँऊँ हूँ… अब नहीं जाने दूँगा। मेरे से मेरी जवान बेटी की तड़प और नहीं देखी जाती। मैने तुम्हें अपने कमरे में तड़पते मचलते देखा। जानती हो यह तुम्हारी जवानी की तड़प है। तुम्हें प्यार चाहिये और वह प्यार अब मैं तुझे दूँगा।” मजबूरन वो ढीली पड़ गयी। बस उसका ढीला पड़ना था कि हद ही कर दी सुदर्शन ने। वहीं ज़मीन पर उसने रंजना को गिरा कर चित्त लिटा लिया और झपट कर उसके उपर चढ़ बैठा। इसी खीँचातानी में रंजना का स्कर्ट जाँघों तक खिसक गया और उसकी गोरी-गोरी तन्दुरुस्त जाँघें साफ़ दिखायी देने लगी। बेटी की इतनी लंड मार आकर्शक जाँघों को देखते ही सुदर्शन बदवास और खुँख्वार पागल हो उठा। सारे धैर्य की माँ चोद कर उसने रख दी, एक मिनट भी चूत के दर्शन किये बगैर रहना उसे मुश्किल हो गया था। अगले पल ही झटके से उसने रंजना का स्कर्ट खींच कर फ़ौरन ही उपर सरका दिया। उसका विचार था कि स्कर्ट के उपर खींचे जाते ही रंजना की कुँवारी चूत के दर्शन उसे हो जायेंगे और वो जल्दी ही उसमें डुबकी लगा कर जीभर कर उसमें स्नान करने का आनंद लूट सकेगा, मगर उसकी ये मनोकामना पूरी न हो सकी, क्योंकि रंजना स्कर्ट के नीचे कतई नंगी नहीं थी बल्कि उसके नीचे पैन्टी पहने हुये थी। चूत को पैन्टी से ढके देख कर पापा को बड़ी निराशा हुई। रंजना को भी यदि यह पता होता कि पापा उसके साथ आज ऐसा करेंगे तो शायद वह पैन्टी ही नहीं पहनती। रंजना सकपकाती हुई पापा की तरफ़ देख रही थी कि सुदर्शन शीघ्रता से एकदम उसे छोड़ कर सीधा बैठ गया। एक निगाह रंजना की जाँघों पर डाल कर वो खड़ा हो गया और रंजना के देखते देखते उसने जल्दी से अपनी पैन्ट और कमीज़ उतार दी। इसके बाद उसने बनियान और अन्डरवेयर भी उतार डाला और एकदम मादरजात नंगा हो कर खड़ा लंड रंजना को दिखाने लगा। अनुभवी सुदर्शन को इस बात का अच्छी तरह से पता था कि चुदने के लिये तैयार लड़की मस्त खड़े लंड को अपनी नज़रों के सामने देख सारे हथियार डाल देगी। इस हालत में पापा को देख कर बेचारी रंजना उनसे निगाहे मिलाने और सीधी निगाहों से लंड के दर्शन करने का साहस तक न कर पा रही थी बल्कि शर्म के मारे उसकी हालत अजीब किस्म की हो चली थी। मगर न जाने नग्न लंड में कशिश ही ऐसी थी कि अधमुँदी पलकों से वो बारबार लंड की ही ओर देखती जा रही थी। उसके सगे बाप का लंड एक दम सीधा तना हुआ बड़ा ही सख्त होता जा रहा था। रंजना ने वैसे तो बिरजु के लंड से इस लंड को न तो लंबा ही अनुभव किया और न मोटा ही मगर अपनी चूत के छेद की चौड़ाई को देखते हुए उसे लगा कि पापा का लंड भी कुछ कम नहीं है और उसकी चूत को फाड़ के रख देगा। नंगे बदन और जाँघों के बीच तनतनाते सुर्ख लंड को देख कर रंजना की चुदाई की इच्छा और भी भयंकर रूप धारण करती जा रही थी। जिस लंड की कल्पना में उसने पिछले कई महीने गुजारे थे वह साक्षात उसकी आँखों के सामने था चाहे अपने पापा का ही क्यों न हो। तभी सुदर्शन जमीन पर चित लेटी बेटी के बगल में बैठ गया। वह बेटी की चिकनी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। उसने बेटी को खड़ा लंड तो नंगा होके दिखा ही दिया अब वह उससे कामुक बातें यह सोच कर करने लगा कि इससे छोकरी की झिझक दूर होगी। फिर एक शर्माती नई कली से इस तरह के वासना भरे खेल खेलने का वह पूरा मजा लेना चाहता था। “वाह रंजना! इन वर्षों में क्या मस्त माल हो गई हो। रोज मेरी नज़रों के सामने रहती थी पर देखो इस ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया। वाह क्या मस्त चिकनी चिकनी जाँघें हैं। हाय इन पर हाथ फेरने में क्या मजा है। भई तुम तो पूरी जवान हो गई हो और तुम्हें प्यार करके तो बड़ा मजा आयेगा। हम तो आज तुम्हें जी भर के प्यार करेंगें और पूरा देखेंगें कि बेटी कितनी जवान हो गई है!” फिर सुदर्शन ने रंजना को बैठा दिया और शर्ट खोल दिया। शर्ट के खुलते ही रंजना की ब्रा में कैद सख्त चूचियाँ सिर उठाये वासना में भरे पापा को निमंत्रण देने लगीं। सुदर्शन ने फौरन उन पर हाथ रख दिया और उन्हें ब्रा पर से ही दबाने लगा। “वाह रंजना तुमने तो इतनी बड़ी -बड़ी कर लीं। तुम्हारी चिकनी जाँघों की ही तरह तुम्हारी चूचियाँ भी पूरी मस्त हैं। भई हम तो आज इनसे जी भर के खेलेंगे, इन्हें चूसेंगे!” यह कह कर सुदर्शन ने रंजना की ब्रा उतार दी। ब्रा के उतरते ही रंजना की चूचियाँ फुदक पड़ी। रंजना की चूचियाँ अभी कच्चे अमरूदों जैसी थीं। अनछुयी होने की वजह से चूचियाँ बेहद सख्त और अंगूर के दाने की तरह नुकीली थीं। सुदर्शन उनसे खेलने लगा और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। रंजना मस्ती में भरी जा रही थी और न तो पापा को मना ही कर रही थी और न ही कुछ बोल रही थी। इससे सुदर्शन की हिम्मत और बढ़ी और बोला, “अब हम प्यारी बेटी की जवानी देखेंगे जो उसने जाँघों के बीच छुपा रखी है। जरा लेटो तो।” रंजना ने आँखें बंद कर ली और चित लेट गई। सुदर्शन ने फिर एक बार चिकनी जाँघों पर हाथ फेरा और ठीक चूत के छेद पर अंगुल से दबाया भी जहाँ पैन्टी गिली हो चुकी थी। “हाय रन्जू! तेरी चूत तो पानी छोड़ रही है।” यह कहके सुदर्शन ने रंजना की पैन्टी जाँघों से अलग कर दी। फिर वो उसकी जाँघों, चूत, गाँड़ और कुंवारे मम्मों को सहलाते हुए आहें भरने लगा। चूत बेहद गोरी थी तथा वहाँ पर रेशमी झाँटों के हल्के हल्के रोये उग रहे थे। इसलिये बेटी की इस अनछुई चूत पर हाथ सहलाने से सुदर्शन को बेहद मज़ा आ रहा था। सख्त मम्मों को भी दबाना वो नहीं भूला था। इसी दौरान रंजना का एक हाथ पकड़ कर उसने अपने खड़े लंड पर रख कर दबा दिया और बड़े ही नशीले स्वर में बोला, “रंजना! मेरी प्यारी बेटी! लो अपने पापा के इस खिलौने से खेलो। ये तुम्हारे हाथ में आने को छटपटा रहा है मेरी प्यारी प्यारी जान.. इसे दबाओ आह!” लंड सहलाने की हिम्मत तो रंजना नहीं कर सकी, क्योंकि उसे शर्म और झिझक लग रही थी। मगर जब पापा ने दुबारा कहा तो हलके से उसने उसे मुट्ठी में पकड़ कर भींच लिया। लंड के चारों तरफ़ के भाग में जो बाल उगे हुए थे, वो काले और बहुत सख्त थे। ऐसा लगता था, जैसे पापा शेव के साथ साथ झाँटें भी बनाते हैं। लंड के पास की झाँटे रंजना को हाथ में चुभती हुई लग रही थी, इसलिये उसे लंड पकड़ना कुछ ज्यादा अच्छा नहीं लग रहा था। अगर लंड झाँट रहित होता तो शायद रंजना को बहुत ही अच्छा लगता क्योंकि वो बोझिल पलकों से लंड पकड़े पकड़े बोली, “ओहह पापा आपके यहाँ के बाल भी दाढ़ी की तरह चुभ रहे हैं.. इन्हे साफ़ करके क्यों नहीं रखते।” बालों की चुभन सिर्फ़ इसलिये रंजना को बर्दाश्त करनी पड़ रही थी क्योंकि लंड का स्पर्श उसे बड़ा ही मनभावन लग रहा था। एकाएक सुदर्शन ने लंड उसके हाथ से छुड़ा लिया और उसकी जाँघों को खींच कर चौड़ा किया और फिर उसके पैरों की तरफ़ उकड़ू बैठा। उसने अपना फ़नफ़नाता हुआ लंड कुदरती गिली चूत के अनछुए द्वार पर रखा। वो चूत को चौड़ाते हुए दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर काफ़ी देर तक उसे वहीं पर रगड़ता हुआ मज़ा लेता रहा। मारे मस्ती के बावली हो कर रंजना उठ-उठ कर सिसक रही थी, “उई पापा आपके बाल .. मेरी चूत पर चुभ रहे हैं.. उन्हे हटाओ.. बहुत गड़ रहे हैं। पापा अंदर मत करना मेरी बहुत छोटी है और आपका बहुत बड़ा।” वास्तव में अपनी चूत पर झाँट के बालों की चुभन रंजना को सहन नहीं हो रही थी, मगर इस तरह से चूत पर सुपाड़े के घस्सों से एक जबर्दस्त सुख और आनंद भी उसे प्राप्त हो रहा था। घस्सों के मज़े के आगे चुभन को वो भूलती जा रही थी। रंजना ने सोचा कि जिस प्रकार बिरजु ने मम्मी की चूत पर लंड रख कर लंड अंदर घुसेड़ा था उसी प्रकार अब पापा भी ज़ोर से धक्का मार कर अपने लंड को उसकी चूत में उतार देंगे, मगर उसका ऐसा सोचना गलत साबित हुआ। क्योंकि कुछ देर लंड को चूत के मुँह पर ही रगड़ने के बाद सुदर्शन सहसा उठ खड़ा हुआ और उसकी कमर पकड़ कर खींचते हुए उसने उसे उपर अपनी गोद में उठा लिया। गोद में उठाये ही सुदर्शन ने उसे पलंग पर ला पटका। अपने प्यारे पापा की गोद में भरी हुई जब रंजना पलंग तक आयी तो उसे स्वर्गीय आनंद की प्राप्ति हो रही थी। पापा की गरम साँसों का स्पर्श उसे अपने मुँह पर पड़ता हुआ महसूस हो रहा था, उसकी साँसों को वो अपने नाक के नथुनो में घुसती हुई और गालों पर लहराती हुई अनुभव कर रही थी। इस समय रंजना की चूत में लंड खाने की इच्छा अत्यन्त बलवती हो उठी थी। पलंग के उपर उसे पटक सुदर्शन भी अपनी बेटी के उपर आ गया था। जोश और उफ़ान से वो भरा हुआ तो था ही साथ ही साथ वो काबू से बाहर भी हो चुका था, इसलिये वो चूत की तरफ़ पैरों के पास बैठते हुए टाँगों को चौड़ा करने में लग गया। टाँगों को खूब चौड़ा कर उसने अपना लंड उपर को उठ चूत के फ़ड़फ़ड़ाते सुराख पर लगा दिया। रंजना की चूत से पानी जैसा रिस रहा था शायद इसीलिये सुदर्शन ने चूत पर चिकनायी लगाने की जरूरत नहीं समझी। उसने अच्छी तरह लंड को चूत पर दबा कर ज्यों ही उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश में और दबाव डाला कि रंजना को बड़े ज़ोरों से दर्द होने लगा और असहनीय कष्ट से मरने को हो गयी। दबाव पल प्रति पल बढ़ता जा रहा था और वो बेचारी बुरी तरह तड़फ़ड़ाने लगी। लंड का चूत में घुसना बर्दाश्त न कर पाने के कारण वो बहुत जोरों से कराह उठी और अपने हाथ पांव फ़ेंकती हुई दर्द से बिलबिलाती हुई वो तड़पी, “हाय! पापा अंदर मत डालना। उफ़ मैं मरी जा रही हूँ। हाय पापा मुझे नहीं चाहिये आपका ऐसा प्यार!” रंजना के यूँ चीखने चिल्लाने और दर्द से कराहने से तंग आ कर सुदर्शन ने लंड का सुपाड़ा जो चूत में घुस चुका था उसे फ़ौरन ही बाहर खींच लिया। फिर उसने अंगुलियों पर थूक ले कर अपने लंड के सुपाड़े पर और चूत के बाहर व अंदर अंगुली डाल कर अच्छी तरह से लगाया। पुनः चोदने की तैयारी करते हुए उसने फिर अपना दहकता सुपाड़ा चूत पर टिका दिया और उसे अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। हालाँकि इस समय चूत एकदम पनियायी हुई थी, लंड के छेद से भी चिपचिपी बून्दे चू रहीं थीं और उसके बावजूद थूक भी काफ़ी लगा दिया था मगर फिर भी लंड था कि चूत में घुसाना मुश्किल हो रहा था। कारण था चूत का अत्यन्त टाईट छेद। जैसे ही हल्के धक्के में चूत ने सुपाड़ा निगला कि रंजना को जोरों से कष्ट होने लगा, वो बुरी तरह कराहने लगी, “धीरे धीरे पापा, बहुत दर्द हो रहा है। सोच समझ कर घुसाना.. कहीं फ़ट .. गयी.. तो.. उफ़्फ़.. मर.. गयी। हाय बड़ा दर्द हो रहा है.. टेस मार रही है। हाय क्या करूँ।” चूँकि इस समय रंजना भी लंड को पूरा सटकने की इच्छा में अंदर ही अंदर मचली जा रही थी। इसलिये ऐसा तो वो सोच भी नहीं सकती थी कि वो चुदाई को एकदम बंद कर दे। वो अपनी आँखों से देख चुकी थी कि बिरजु का खूँटे जैसा लंड चूत में घुस जाने के बाद ज्वाला देवी को जबर्दस्त मज़ा प्राप्त हुआ था और वो उठ-उठ कर चुदी थी। इसलिये रंजना स्वयं भी चाहने लगी कि जल्दी से जल्दी पापा का लंड उसकी चूत में घुस जाये और फिर वो भी अपने पापा के साथ चुदाई सुख लूट सके, ठीक बिरजु और ज्वाला देवी की तरह। उसे इस बात से और हिम्मत मिल रही थी कि जैसे उसकी माँ ने उसके पापा के साथ बेवफ़ाई की और एक रद्दी वाले से चुदवाई अब वो भी माँ की अमानत पर हाथ साफ़ करके बदला ले के रहेगी। रंजना यह सोच-सोच कर कि वह अपने बाप से चुदवा रही है जिससे चुदवाने का हक केवल उसकी माँ को है, और मस्त हो गई। क्योंकि जबसे उसने अपनी माँ को बिरजु से चुदवाते देखा तबसे वह माँ से नफ़रत करने लगी थी। इसलिये अपनी गाँड़ को उचका उचका कर वो लंड को चूत में सटकने की कोशिश करने लगी, मगर दोनों में से किसी को भी कामयाबी हासिल नहीं हो पा रही थी। घुसने के नाम पर तो अभी लंड का सुपाड़ा ही चूत में मुश्किल से घुस पाया था और इस एक इंच ही घुसे सुपाड़े ने ही चूत में दर्द की लहर दौड़ा कर रख दी थी। रंजना जरूरत से ज्यादा ही परेशान दिखायी दे रही थी। वो सोच रही थी कि आखिर क्या तरकीब लड़ाई जाये जिससे लंड उसकी चूत में घुस सके। बड़ा ही आश्चर्य उसे हो रहा था। उसने अनुमान लगाया था कि बिरजु का लंड तो पापा के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था फिर भी मम्मी उसे बिना किसी कष्ट और असुविधा के पूरा अपनी चूत के अंदर ले ली थी और यहाँ उसे एक इंच घुसने में ही प्राण गले में फ़ंसे महसूस हो रहे थे। फिर अपनी सामान्य बुद्धि से सोच कर वो अपने को राहत देने लगी, उसने सोचा कि ये छेद अभी नया-नया है और मम्मी इस मामले में बहुत पुरानी पड़ चुकी है। चोदू सुदर्शन भी इतना टाईट व कुँवारा छेद पा कर परेशान हो उठा था मगर फिर भी इस रुकावट से उसने हिम्मत नहीं हारी थी। बस घबड़ाहट के कारण उसकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी इसलिये वो भी उलझन में पड़ गया था और कुछ देर तक तो वो चिकनी जाँघों को पकड़े पकड़े न जाने क्या सोचता रहा। रंजना भी साँस रोके गर्मायी हुई उसे देखे जा रही थी। एकाएक मानो सुदर्शन को कुछ याद सा आ गया हो वो एलर्ट सा हो उठा, उसने रंजना के दोनों हाथ कस कर पकड़ अपनी कमर पर रख कर कहा, “बेटे ! मेरी कमर ज़रा मजबूती से पकड़े रहना, मैं एक तरकीब लड़ाता हूँ, घबड़ाना मत।” रंजना ने उसकी आज्ञा का पालन फ़ौरन ही किया और उसने कमर के इर्द गिर्द अपनी बाँहें डाल कर पापा को जकड़ लिया। वो फिर बोला, “रंजना ! चाहे तुम्हे कितना ही दर्द क्यों न हो, मेरी कमर न छोड़ना, आज तुम्हारा इम्तिहान है। देखो एक बार फाटक खुल गया तो समझना हमेशा के लिये खुल गया।” इस बात पर रंजना ने अपना सिर हिला कर पापा को तसल्ली सी दी। फिर सुदर्शन ने भी उसकी पतली नाज़ुक कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ा और थोड़ा सा बेटी की फूलती गाँड़ को उपर उठा कर उसने लंड को चूत पर दबाया तो, “ओह! पापा रोक लो। उफ़ मरी..” रंजना फिर तड़पाई मगर सुदर्शन ने सुपाड़ा चूत में अंदर घुसाये हुए अपने लंड की हरकत रोक कर कहा, “हो गया बस, मेरी इतनी प्यारी बेटी। वैसे तो हर बात में अपनी माँ से प्रतियोगिता करती हो और अभी हार मान रही हो। जानती हो तुम्हारी माँ बोल-बोल के इसे अपनी वाली में पिलवाती है और जब तक उसके भीतर इसे पेलता नहीं सोने नहीं देती। बस। अब इसे रास्ता मिलता जा रहा है। लो थोड़ा और लो..” यह कह सुदर्शन ने उपर को उठ कर मोर्चा संभाला और फिर एकाएक उछल कर उसने जोरों से धक्के लगाना चालू कर दिया। इस तरह से एक ही झटके में पूरा लंड सटकने को रंजना हर्गिज़ तैयार न थी इसलिये मारे दर्द के वो बुरी तरह चीख पड़ी। कमर छोड़ कर तड़पने और छटपटाने के अलावा उसे कुछ सुझ नहीं रहा था, “मरी… आ। नहीं.. मरी। छोड़ दो मुझे नहीं घुसवाना… उउफ़ मार दिया। नहीं करना मुझे मम्मी से कॉंपीटिशन। जब मम्मी आये तब उसी की में घुसाना। मुझे छोड़ो। छोड़ो निकालो इसे .. आइइई हटो न उउफ़ फ़ट रही है.. मेरी आइई मत मारो।” पर पापा ने जरा भी परवाह न की। दर्द जरूरत से ज्यादा लंड के यूँ चूत में अंदर बाहर होने से रंजना को हो रहा था। बेचारी ने तड़प कर अपने होंठ अपने ही दांतों से चबा लिये थे, आँखे फ़ट कर बाहर निकलने को हुई जा रही थीं। जब लंड से बचाव का कोई रास्ता बेचारी रंजना को दिखायी न दिया तो वो सुबक उठी, “पापा ऐसा प्यार मत करो। हाय मेरे पापा छोड़ दो मुझे.. ये क्या आफ़त है.. उफ़्फ़ नहीं इसे फ़ौरन निकाल लो.. फ़ाड़ डाली मेरी । हाय फ़ट गयी मैं तो मरी जा रही हूँ। बड़ा दुख रहा है । तरस खाओ आहह मैं तो फँस गयी..” इस पर भी सुदर्शन धक्के मारने से बाज़ नहीं आया और उसी रफ़्तार से जोर जोर से धक्के वो लगाता रहा। टाईट व मक्खन की तरह मुलायम चूत चोदने के मज़े में वो बहरा बन गया था। पापा के यूँ जानवरों की तरह पेश आने से रंजना की दर्द से जान तो निकलने को हो ही रही थी मगर एक लाभ उसे जरूर दिखायी दिया, यानि लंड अंदर तक उसकी चूत में घुस गया था। वो तो चुदवाने से पहले यही चाहती थी कि कब लंड पूरा घुसे और वो मम्मी की तरह मज़ा लूटे। मगर मज़ा अभी उसे नाम मात्र भी महसूस नहीं हो रहा था। सहसा ही सुदर्शन कुछ देर के लिये शांत हो कर धक्के मारना रोक उसके उपर लेट गया और उसे जोरों से अपनी बाँहों में भींच कर और तड़ातड़ उसके मुँह पर चुम्मी काट काट कर मुँह से भाप सी छोड़ता हुआ बोला, “आह मज़ा आ गया आज, एक दम कुँवारी चूत है तुम्हारी। अपने पापा को तुमने इतना अच्छा तोहफ़ा दिया है। रंजना मैं आज से तुम्हारा हो गया।” तने हुए मम्मों को भी बड़े प्यार से वो सहलाता जा रहा था। वैसे अभी भी रंजना को चूत में बहुत दर्द होता हुआ जान पड़ रहा था मगर पापा के यूँ हल्के पड़ने से दर्द की मात्रा में कुछ मामूली सा फ़र्क तो पड़ ही रहा था और जैसे ही पापा की चुम्मी काटने, चूचियाँ मसलने और उन्हे सहलाने की क्रिया तेज़ होती गयी वैसे ही रंजना आनंद के सागर में उतरती हुई महसूस करने लगी। अब आहिस्ता आहिस्ता वो दर्द को भूल कर चुम्मी और चूची मसलायी की क्रियाओं में जबर्दस्त आनंद लूटना प्रारम्भ कर चुकी थी। सारा दर्द उसे उड़न छू होता हुआ लगने लगा था। सुदर्शन ने जब उसके चेहरे पर मस्ती के चिन्ह देखे तो वो फिर धीरे-धीरे चूत में लंड घुसेड़ता हुआ हल्के-हल्के घस्से मारने पर उतर आया। अब वो रंजना के दर्द पर ध्यान रखते हुए बड़े ही आराम से उसे चोदने में लग गया। उसके कुँवारे मम्मो के तो जैसे वो पीछे ही पड़ गया था। बड़ी बेदर्दी से उन्हे चाट-चाट कर कभी वो उन पर चुम्मी काटता तो कभी चूची का अंगूर जैसा निपल वो होंठों में ले कर चूसने लगता। चूची चूसते-चूसते जब वो हाँफ़ने लगता तो उन्हे दोनों हाथों में भर कर बड़ी बेदर्दी से मसलने लगता था। निश्चय ही चूचियों के चूसने मसलने की हरकतों से रंजना को ज्यादा ही आनंद प्राप्त हो रहा था। उस बेचारी ने तो कभी सोचा भी न था कि इन दो मम्मों में आनंद का इतना बड़ा सागर छिपा होगा। इस प्रथम चुदाई में जबकि उसे ज्यादा ही कष्ट हो रहा था और वो बड़ी मुश्किल से अपने दर्द को झेल रही थी मगर फिर भी इस कष्ट के बावजूद एक ऐसा आनंद और मस्ती उसके अंदर फ़ूट रही थी कि वो अपने प्यारे पापा को पूरा का पूरा अपने अंदर समेट लेने की कोशिश करने लगी। क्योंकि पहली चुदाई में कष्ट होता ही है इसलिये इतनी मस्त हो कर भी रंजना अपनी गाँड़ और कमर को तो चलाने में अस्मर्थ थी मगर फिर भी इस चुदाई को ज्यादा से ज्यादा सुखदायक और आनन्ददायक बनाने के लिये अपनी ओर से वो पूरी तरह प्रयत्नशील थी। रंजना ने पापा की कमर को ठीक इस तरह कस कर पकड़ा हुआ था जैसे उस दिन ज्वाला देवी ने चुदते समय बिरजु की कमर को पकड़ रखा था। अपनी तरफ़ से चूत पर कड़े धक्के मरवाने में भी वो पापा को पूरी सहायता किये जा रही थी। इसी कारण पल प्रतिपल धक्के और ज्यादा शक्तिशाली हो उठे थे और सुदर्शन जोर जोर से हाँफ़ते हुए पतली कमर को पकड़ कर जानलेवा धक्के मारता हुआ चूत की दुर्गति करने पर तुल उठा था। उसके हर धक्के पर रंजना कराह कर ज़ोर से सिसक पड़ती थी और दर्द से बचने के लिये वो अपनी गाँड़ को कुछ उपर खिसकाये जा रही थी। यहाँ तक कि उसका सिर पलंग के सिरहाने से टकराने लगा, मगर इस पर भी वो दर्द से अपना बचाव न कर सकी और अपनी चूत में धक्कों का धमाका गूँजता हुआ महसूस करती रही। हर धक्के के साथ एक नयी मस्ती में रंजना बेहाल हो जाती थी। कुछ समय बाद ही उसकी हालत ऐसी हो गयी कि अपने दर्द को भुला डाला और प्रत्येक दमदार धक्के के साथ ही उसके मुँह से बड़ी अजीब से दबी हुई अस्पष्ट किलकारियाँ खुद-ब-खुद निकलने लगीं। “ओह पापा अब मजा आ रहा है। मैने आपको कुँवारी चूत का तोहफ़ा दिया तो आप भी तो मुझे ऐसा मजा देकर तोहफ़ा दे रहे हैं। अब देखना मम्मी से इसमें भी कैसा कॉंपीटिशन करती हूँ। ओह पापा बताइये मम्मी की लेने में ज्यादा मजा है या मेरी लेने में?” सुदर्शन रंजना की मस्ती को और ज्यादा बढ़ाने की कोशिश में लग गया। वैसे इस समय की स्तिथी से वो काफ़ी परिचित होता जा रहा था। रंजना की मस्ती की ओट लेने के इरादे से वो चोदते चोदते उससे पूछने लगा, “कहो मेरी जान.. अब क्या हाल है? कैसे लग रहे हैं धक्के.. पहली बार तो दर्द होता ही है। पर मैं तुम्हारे दर्द से पिघल कर तुम्हें इस मजे से वँचित तो नहीं रख सकता था न मेरी जान, मेरी रानी, मेरी प्यारी।” उसके होंठ और गालों को बुरी तरह चूसते हुए, उसे जोरों से भींच कर उपर लेटे लेटे ज़ोरदार धक्के मारता हुआ वो बोल रहा था, बेचारी रंजना भी उसे मस्ती में भींच कर बोझिल स्वर में बोली, “बड़ा मज़ा आ रहा है मेरे प्यारे सा…. पापा, मगर दर्द भी बहुत ज्यादा हो रहा है..” फ़ौरन ही सुदर्शन ने लंड रोक कर कहा, “तो फिर धक्के धीरे धीरे लगाऊँ। तुम्हे तकलीफ़ में मैं नहीं देख सकता। तुम तो बोलते-बोलते रुक जाती हो पर देखो मैं बोलता हूँ मेरी सजनी, मेरी लुगाई।” ये बात वैसे सुदर्शन ने ऊपरी मन से ही कही थी। रंजना भी जानती थी कि वो मज़ाक के मूड में है और तेज़ धक्के मारने से बाज़ नहीं आयेगा, परन्तु फिर भी कहीं वो चूत से लंड न निकाल ले इस डर से वो चीख पड़ी, “नहीं.. नहीं।! ऐसा मत करना ! चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाये, मगर आप धक्कों की रफ़्तार कम नहीं होने देना.. इतना दर्द सह कर तो इसे अपने भीतर लिया है। आहह मारो धक्का आप मेरे दर्द की परवाह मत करो। आप तो अपने मन की करते जाओ। जितनी ज़ोर से भी धक्का लगाना चाहो लगा लो अब तो जब अपनी लुगाई बना ही लिया है तो मत रुको मेरे प्यारे सैंया.. मैं.. इस समय सब कुछ बर्दाश्त कर लूँगी.. अहह आई रिइइ.. पहले तो मेरा इम्तिहान था और अब आपका इम्तिहान है। यह नई लुगाई पुरानी लुगाई को भुला देगी।”

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    मस्तानी चूत की जायकेदार चुदाई

    दोस्तों यह कहानी है सक्सेना परिवार की। इस परिवार के मुखिया, सुदर्शन सक्सेना, ४५ वर्ष के आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक हैं। आज से २० साल पहले उनका विवाह ज्वाला से हुआ था। ज्वाला जैसा नाम वैसी ही थी। वह काम (सैक्स) की साक्षात दहकती ज्वाला थी। विवाह के समय ज्वाला २० वर्ष की थी। विवाह के १ साल बाद उसने एक लड़की को जन्म दिया। आज वह लड़की, रंजना १९ साल की है और अपनी मां की तरह ही आग का एक शोला बन चुकी है। ज्वाला देवी नहा रही हैं और रंजना सोफ़े पर बैठी पढ़ रही है और सुदर्शन जी अपने ऑफिस जा चुके हैं। तभी वातावरण की शांति भंग हुई। “कॉपी, किताब, अखबार वाली रद्दी..!!!!!!” ये आवाज़ जैसे ही ज्वाला देवी के कानों में पड़ी तो उसने बाथरूम से ही चिल्ला कर अपनी १९ वर्षीय जवान लड़की, रंजना से कहा, “बेटी रंजना! ज़रा रद्दी वाले को रोक, मैं नहा कर आती हूँ।” “अच्छा मम्मी!” रंजना जवाब दे कर भागती हुई बाहर के दरवाजे पर आ कर चिल्लाई। “अरे भाई रद्दी वाले! अखबार की रद्दी क्या भाव लोगे?” “जी बीबी जी! ढाई रुपये किलो।” कबाड़ी लड़के बिरजु ने अपनी साईकल कोठी के कम्पाउन्ड मे ला कर खड़ी कर दी।  “ढाई तो कम हैं, सही लगाओ।” रंजना उससे भाव करते हुए बोली। “आप जो कहेंगी, लगा दूँगा।” बिरजु होठों पर जीभ फ़िरा कर और मुसकुरा कर बोला। इस दो-अर्थी डायलॉग को सुन कर तथा बिरजु के बात करने के लहजे को देख कर रंजना शरम से पानी पानी हो उठी, और नज़रें झुका कर बोली, “तुम ज़रा रुको, मम्मी आती है अभी।” बिरजु को बाहर ही खड़ा कर रंजना अंदर आ गयी और अपने कमरे में जा कर ज़ोर से बोली, “मम्मी मुझे कॉलेज के लिये देर हो रही है, मैं तैयार होती हूँ, रद्दी वाला बाहर खड़ा है।” “बेटा! अभी ठहर तू, मैं नहा कर आती ही हूँ।” ज्वाला देवी ने फिर चिल्ला कर कहा। अपने कमरे में बैठी रंजना सोच रही थी की कितना बदमाश है ये रद्दी वाला, “लगाने” की बात कितनी बेशर्मी से कर रहा था पाजी! वैसे “लगाने” का अर्थ रंजना अच्छी तरह जानती थी, क्योंकि एक दिन उसने अपने डैड्डी को मम्मी से बेडरूम में ये कहते सुना था, “ज्वाला टाँग उठाओ, मैं अब लगाऊँगा।” और रंजना ने यह अजीब डायलॉग सुन कर उत्सुकता से मम्मी के बेडरूम में झांक कर जो कुछ उस दिन अंदर देखा था, उसी दिन से “लगाने” का अर्थ बहुत ही अच्छी तरह उसकी समझ में आ गया था। कई बार उसके मन में भी “लगवाने” की इच्छा पैदा हुई थी मगर बेचारी मुकद्दर की मारी खूबसुरत चूत की मालकिन रंजना को “लगाने वाला” अभी तक कोई नहीं मिल पाया था। जल्दी से नहा धो कर ज्वाला देवी सिर्फ़ गाउन और ऊँची ऐड़ी की चप्पल पहन कर बाहर आयी, उसके बाल इस समय खुले हुए थे, नहाने के कारण गोरा रंग और भी ज्यादा दमक उठा था। यूँ लग रहा था मानो काली घटाओं में से चांद निकल आया है। एक ही बच्चा पैदा करने की वजह से ४० वर्ष की उम्र में भी ज्वाला देवी २५ साल की जवान लौन्डिया को भी मात कर सकती थी। बाहर आते ही वो बिरजु से बोली, “हाँ भाई! ठीक-ठीक बता, क्या भाव लेगा?” “मेम साहब! ३ रुपये लगा दूँगा, इससे ऊपर मैं तो क्या कोई भी नहीं लेगा।” बिरजु गम्भीरता से बोला। “अच्छा ! तू बरामदे में बैठ मैं लाती हूँ” ज्वाला देवी अंदर आ गयी, और रंजना से बोली, “रंजना बेटा! ज़रा थोड़े थोड़े अखबार ला कर बरमदे में रख।” “अच्छा मम्मी लाती हूँ” रंजना ने कहा। रंजना ने अखबार ला कर बरामदे में रखने शुरु कर दिये थे, और ज्वाला देवी बाहर बिरजु के सामने ऊँची ऐड़ी की चप्पलों पे उकड़ू बैठ कर बोली, “चल भाई तौल” बिरजु ने अपना तराज़ु निकाल और एक एक किलो के बट्टे से उसने रद्दी तौलनी शुरु कर दी। एकाएक तौलते तौलते उसकी निगाह उकड़ु बैठी ज्वाला देवी की धुली धुलाई चूत पर पड़ी तो उसके हाथ कांप उठे। ज्वाला देवी के यूँ उकड़ु बैठने से टांगे तो सारी ढकी रहीं मगर अपने खुले फ़ाटक से वो बिल्कुल ही अनभिज्ञ थीं। उसे क्या पता था कि उसकी शानदार चूत के दर्शन ये रद्दी वाला तबियत से कर रहा था। उसका दिमाग तो बस तराज़ु की डन्डी व पलड़ों पर ही लगा हुआ था। अचानक वो बोली, “भाई सही तौल” “लो मेम साहब” बिरजु हड़बड़ा कर बोला। और अब आलम ये था की एक-एक किलो में तीन तीन पाव तौल रहा था बिरजु। उसके चेहरे पर पसीना छलक आया था, हाथ और भी ज्यादा कंपकंपाते जा रहे थे, तथा आंखें फ़ैलती जा रही थीं उसकी। उसकी १८ वर्षीय जवानी चूत देख कर धधक उठी थी। मगर ज्वाला देवी अभी तक नहीं समझ पा रही थी कि बिरजु रद्दी कम और चूत ज्यादा तौल रहा है। और जैसे ही बिरजु के बराबर रंजना आ कर खड़ी हुई और उसे यूँ कांपते तराज़ु पर कम और सामने ज्यादा नज़रें गड़ाये हुए देखा तो उसकी नज़रें भी अपनी मम्मी की खुली चूत पर जा ठहरीं। ये दृष्य देख कर रंजना का बुरा हाल हो गया, वो खांसते हुए बोली, “मम्मी.. आप उठिये, मैं तुलवाती हूँ।” “तू चुप कर! मैं ठीक तुलवा रही हूँ।” “मम्मी! समझो न, ओफ़्फ़! आप उठिये तो सही।” और इस बार रंजना ने ज़िद्द करके ज्वाला देवी के कंधे पर चिकोटी काट कर कहा तो वो कुछ-कुछ चौंकी। रंजना की इस हरकत पर ज्वाला देवी ने सरसरी नज़र से बिरजु को देखा और फिर झुक कर जो उसने अपने नीचे को देखा तो वो हड़बड़ा कर रह गयी। फ़ौरन खड़ी हो कर गुस्से और शरम मे हकलाते हुए वो बोली, “देखो भाई! ज़रा जल्दी तौलो।” इस समय ज्वाला देवी की हालत देखने लायक थी, उसके होंठ थरथरा रहे थे, कनपट्टियां गुलाबी हो उठी थीं तथा टांगों में एक कंपकपी सी उठती उसे लग रही थी। बिरजु से नज़र मिलाना उसे अब दुभर जान पड़ रहा था। शरम से पानी-पानी हो गयी थी वो। बेचारे बिरजु की हालत भी खराब हुई जा रही थी। उसका लंड हाफ़ पैंट में खड़ा हो कर उछालें मार रहा था, जिसे कनखियों से बार-बार ज्वाला देवी देखे जा रही थी। सारी रद्दी फ़टाफ़ट तुलवा कर वो रंजना की तरफ़ देख कर बोली, “तू अंदर जा, यहाँ खड़ी खड़ी क्या कर रही है?” मुँह में अंगुली दबा कर रंजना तो अंदर चली गयी और बिरजु हिसाब लगा कर ज्वाला देवी को पैसे देने लगा। हिसाब में १० रुपये फ़ालतू वह घबड़ाहट में दे गया था। और जैसे ही वो लंड जाँघों से दबाता हुआ रद्दी की पोटली बांधने लगा कि ज्वाला देवी उससे बोली, “क्यों भाई कुछ खाली बोतलें पड़ी हैं, ले लोगे क्या?” “अभी तो मेरी साईकल पर जगह नहीं है मेम साहब, कल ले जाऊँगा।” बिरजु हकलाता हुआ बोला। “तो सुन, कल ११ बजे के बाद ही आना।” “जी आ जाऊँगा।” वो मुसकुरा कर बोला था इस बार। रद्दी की पोटली को साईकल के कैरीयर पर रख कर बिरजु वहां से चलता बना मगर उसकी आंखों के सामने अभी तक ज्वाला देवी का खुला फ़ाटक यानि की शानदार चूत घूम रही थी। बिरजु के जाते ही ज्वाला देवी रुपये ले कर अंदर आ गयी। ज्वाला देवी जैसे ही रंजना के कमरे में पहुंची तो बेटी की बात सुन कर वो और ज्यादा झेंप उठी थी। रंजना ने आंखे फ़ाड़ कर उससे कहा, “मम्मी! आपकी वो वाली जगह वो रद्दी वाला बड़ी बेशर्मी से देखे जा रहा था।” “चल छोड़! हमारा क्या ले गया वो, तू अपना काम कर, गन्दी गन्दी बातें नहीं सोचा करते, जा कॉलेज जा तू।” थोड़ी देर बाद रंजना कॉलेज चली गयी और ज्वाला देवी अपनी चूची को मसलती हुई फ़ोन की तरफ़ बढ़ी। अपने पति सुदर्शन सक्सेना का नम्बर डायल कर वो दूसरी तरफ़ से आने वाली आवाज़ का इंतज़ार करने लगी। अगले पल फ़ोन पर एक आवाज़ उभरी “येस सुदर्शन हेयर” “देखिये ! आप फ़ौरन चले आइये, बहुत जरूरी काम है मुझे” “अरे ज्वाला ! तुम्हे ये अचानक मुझसे क्या काम आन पड़ा… अभी तो आ कर बैठा हूँ, ऑफिस में बहुत काम पड़े हैं, आखिर माजरा क्या है?” “जी। बस आपसे बातें करने को बहुत मन कर आया है, रहा नहीं जा रहा, प्लीज़ आ जाओ ना।” “सॉरी ज्वाला ! मैं शाम को ही आ पाऊँगा, जितनी बातें करनी हो शाम को कर लेना, ओके।” अपने पति के व्यवहार से वो तिलमिला कर रह गयी। एक कमसिन नौजवान लौंडे के सामने अनभिज्ञता में ही सही; अपनी चूत प्रदर्शन से वो बेहद कामातूर हो उठी थी। चूत की ज्वाला में वो झुलसी जा रही थी इस समय। वो रसोई घर में जा कर एक बड़ा सा बैंगन उठा कर उसे निहारने लगी। उसके बाद सीधे बेडरूम में आ कर वो बिस्तर पर लेट गयी, गाउन ऊपर उठा कर उसने टांगों को चौड़ाया और चूत के मुँह पर बैंगन रख कर ज़ोर से उसे दबाया। “हाइ.. उफ़्फ़.. मर गयी… अहह.. आह। ऊहह…” आधा बैंगन वो चूत में घुसा चुकी थी। मस्ती में अपने निचले होंठ को चबाते हुए उसने ज़ोर ज़ोर से बैंगन द्वारा अपनी चूत चोदनी शुरु कर ही डाली। ५ मिनट तक लगातार तेज़ी से वो उसे अपनी चूत में पेलती रही, झड़ते वक्त वो अनाप शनाप बकने लगी थी। “आहह। मज़ा। आ.. गया..हाय। रद्दी वाले.. तू ही चोद .. जाता .. तो .. तेरा .. क्या .. बिगड़ .. जाता .. उफ़। आह..ले.. आह.. क्या लंड था तेरा … तुझे कल दूँगी .. अहह.. साले पति देव … मत चोद मुझे … आह.. मैं .. खुद काम चला लूँगी .. अहह!” ज्वाला देवी इस समय चूत से पानी छोड़ती जा रही थी, अच्छी तरह झड़ कर उसने बैंगन फेंक दिया और चूत पोंछ कर गाउन नीचे कर लिया। मन ही मन वो बुदबुदा उठी थी, “साले पतिदेव, गैरों को चोदने का वक्त है तेरे पास, मगर मेरे को चोदने के लिये तेरे पास वक्त नहीं है, शादी के बाद एक लड़की पैदा करने के अलावा तूने किया ही क्या है, तेरी जगह अगर कोई और होता तो अब तक मुझे ६ बच्चों की मां बना चुका होता, मगर तू तो हफ़्ते में दो बार मुझे मुश्किल से चोदता है, खैर कोई बात नहीं, अब अपनी चूत की खुराक का इन्तज़ाम मुझे ही करना पड़ेगा।” ज्वाला देवी ने फ़ैसला कर लिया कि वो इस गठीले शरीर वाले रद्दी वाले के लंड से जी भर कर अपनी चूत मरवायेगी। उसने सोचा जब साला चूत के दर्शन कर ही गया है तो फिर चूत मराने में ऐतराज़ ही क्या? उधर ऑफिस में सुदर्शन जी बैठे हुए अपनी खूबसुरत जवान स्टेनो मिस शाज़िया के खयालो में डूबे हुए थे। ज्वाला के फ़ोन से वे समझ गये थे की साली अधेढ़ बीवी की चूत में खुजली चल पड़ी होगी। यह सोच ही उनका लंड खड़ा कर देने के लिये काफ़ी थी। उन्होने घन्टी बजा कर चपरासी को बुलाया और बोले, “देखो भजन! जल्दी से शाज़िया को फ़ाईल ले कर भेजो।” “जी बहुत अच्छा साहब!” भजन तेज़ी से पलटा और मिस शाज़िया के पास आ कर बोला, “बड़े साहब ने फ़ाईल ले कर आपको बुलाया है।” मिस शाज़िया फ़ुर्ती से एक फ़ाईल उठा कर खड़ी हो गयी और अपनी स्कर्ट ठीक ठाक कर तेज़ चाल से अपनी सैंडल खटखटाती उस कमरे में जा घुसी जिस के बाहर लिखा था “बिना आज्ञा अंदर आना मना है!” कमरे में सुदर्शन जी बैठे हुए थे। शाज़िया २२ साल की मस्त लड़की उनके पूराने स्टाफ़ खान साहब की लड़की थी। खान साहब की उमर हो गयी और वे रिटायर हो गये। रिटायर्मेंट के वक्त खान साहब ने सुदर्शनजी से विनती की कि वे उनकी लड़की को अपने यहाँ सर्विस पे रख लें। शाज़िया को देखते ही सुदर्शनजी ने फ़ौरन हाँ कर दी। शाज़िया बड़ी मनचली लड़की थी। वो सुदर्शनजी की प्रारम्भिक छेड़छाड़ का हँस कर साथ देने लगी। और फिर नतीजा यह हुआ की वह उनकी एक रखैल बन कर रह गयी। “आओ मिस शाज़िया! ठहरो दरवाजा लॉक कर आओ, हरी अप।” शाज़िया को देखते ही उचक कर वो बोले। दरवाजा लॉक कर शाज़िया जैसे ही सामने वाली कुर्सी पर बैठने लगी तो सुदर्शन जी अपनी पैंट की ज़िप खोल कर उसमें हाथ डाल अपना फ़नफ़नाता हुआ खूंटे की तरह तना हुआ लंड निकाल कर बोले, “ओह नो शाज़िया! जल्दी से अपनी पैंटी उतार कर हमारी गोद में बैठ कर इसे अपनी चूत में ले लो।” “सर! आज सुबह-सुबह! चक्कर क्या है डीयर?” खड़ी हो कर अपनी स्कर्ट को उपर उठा पैंटी टांगों से बाहर निकालते हुए शाज़िया बोली। “बस डार्लिंग मूड कर आया!, हरी अप! ओह।” सुदर्शन जी भारी गाँड वाली बेहद खूबसूरत शाज़िया की चूत में लंड डालने को बेताब हुए जा रहे थे। “लो आती हूँ मॉय लव” शाज़िया उनके पास आयी और उसने अपनी स्कर्ट ऊपर उठा कर कुर्सी पर बैठे सुदर्शन जी की गोद में कुछ आधी हो कर इस अंदाज़ में बैठना शुरु किया कि खड़ा लंड उसकी चूत के मुँह पर आ लगा था। “अब ज़ोर से बैठो, लंड ठीक जगह लगा है” सुदर्शन जी ने शाज़िया को आज्ञा दी। वो उनकी आज्ञा मान कर इतनी ज़ोर से चूत को दबाते हुए लंड पर बैठने लगी कि सारा लंड उसकी चूत में उतरता हुआ फ़िट हो चुका था। पूरा लंड चूत में घुसवा कर बड़े इतमिनान से गोद में बैठ अपनी गाँड को हिलाती हुई दोनों बाँहें सुदर्शन जी के गले में डाल कर वो बोली, “आह.. बड़ा.. अच्छा.. लग। रहा .. है सर… ओफ़्फ़। ओह.. मुझे.. भींच लो.. ज़ोरर.. से।” फिर क्या था, दोनों तने हुए मम्मों को उसके खुले गले के अंदर हाथ डाल कर उन्होने पकड़ लिया और सफ़ाचट खुशबुदार बगलों को चूमते हुए उसके होंठों से अपने होंठ रगड़ते हुए वो बोले, “डार्लिंग!! तुम्हारी चूत मुझे इतनी अच्छी लगती है की मैं अपनी बीवी की चूत को भी भूल चुका हूँ, आह! अब ज़ोर ज़ोर..उछलो डार्लिंग।” “सर चूत तो हर औरत के पास एक जैसी ही होती है, बस चुदवाने के अंदाज़ अलग अलग होते हैं, मेरे अंदाज़ आपको पसन्द आ गये हैं, क्यों?” “हाँ । हाँ अब उछलो जल्दी से ..” और फिर गोद में बैठी शाज़िया ने जो सिसक सिसक कर लंड अपनी चूत में पिलवाना शुरु किया तो सुदर्शन जी मज़े में दोहरे हो उठे, उन्होने कुर्सी पर अपनी गाँड उछाल उछाल कर चोदना शुरु कर दिया था। शाज़िया ज़ोर से उनकी गर्दन में बाँहें डाले हिला-हिला कर झूले पर बैठी झोंटे ले रही थी। हर झोंटे में उसकी चूत पूरा-पूरा लंड निगल रही थी। सुदर्शन जी ने उसका सारा मुँह चूस-चूस कर गीला कर डाला था। अचानक वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर लेते हुई बोल उठी थी, “उफ़्फ़.. आहा.. बड़ा मज़ा आ .. रह.. है .. आह.. मैं गयी..” सुदर्शन जी मौके की नज़ाकत को ताड़ गये और शाज़िया की पीछे से कोली भर कर कुर्सी से उठ खड़े हुए और तेज़ तेज़ शॉट मारते हुए बोले, “लो.. मेरी । जान.. और .. आह लो.. मैं .. भी .. झड़ने वाला हूँ.. ओफ़। आहह लो.. जान.. मज़ा.. आ.. गया..” और शाज़िया की चूत से निकलते हुए रज से उनका वीर्य जा टकराया। शाज़िया पीछे को गाँड पटकती हुई दोनो हाथों से अपने कूल्हे भींचती हुई झड़ रही थी। अच्छी तरह झड़ कर सुदर्शन जी ने उसकी चूत से लंड निकाल कर कहा, “जल्दी से पेशाब कर पैंटी पहन लो, स्टाफ़ के लोग इंतज़ार कर रहे होंगे, ज्यादा देर यहाँ तुम्हारा रहना ठीक नहीं है।” सुदर्शन जी के केबिन में बने पेशाब घर में शाज़िया ने मूत कर अपनी चूत रुमाल से खूब पोंछी और पैंटी पहन कर बोली, “आपकी दराज में मेरी लिप्स्टिक और पाउडर पड़ा है, ज़रा दे दिजीये प्लीज़,” सुदर्शन जी ने निकाल कर शाज़िया को दिया। इसके बाद शाज़िया तो सामने लगे शीशे में अपना मेकअप ठीक करने लगी, और सुदर्शन जी पेशाब घर में मूतने के लिये उठ खड़े हुए। कुछ देर में ही शाज़िया पहले की तरह ताज़ी हो उठी थी, तथा सुदर्शनजी भी मूत कर लंड पैंट के अंदर कर ज़िप बंद कर चुके थे। चुदाई इतनी सावधानी से की गयी थी की न शाज़िया की स्कर्ट पर कोई धब्बा पड़ा था और न सुदर्शनजी की पैंट कहीं से खराब हुई। एलर्ट हो कर सुदर्शन जी अपनी कुर्सी पर आ बैठे और शाज़िया फ़ाईल उठा, दरवाजा खोल उनके केबिन से बाहर निकल आयी। उसके चेहरे को देख कर स्टाफ़ का कोई भी आदमी नहीं ताड़ सका कि साली अभी-अभी चुदवा कर आ रही है। वो इस समय बड़ी भोली भाली और स्मार्ट दिखायी पड़ रही थी। उधर बिरजु ने आज अपना दिन खराब कर डाला था। घर आ कर वो सीधा बाथरूम में घुस गया और दो बार ज्वाला देवी की चूत का नाम ले कर मुट्ठी मारी। मुट्ठी मारने के बाद भी वो उस चूत की छवि अपने जेहन से उतारने में अस्मर्थ रहा था। उसे तो असली खाल वाली जवान चूत मारने की इच्छा ने आ घेरा था। मगर उसके चारों तरफ़ कोई चूत वाली ऐसी नहीं थी जिसे चोद कर वो अपने लंड की आग बुझा सकता। शाम को जब सुदर्शन जी ऑफिस से लौट आये। तो ज्वाला देवी चेहरा फ़ुलाये हुए थी। उसे यूँ गुस्से में भरे देख कर वो बोले, “लगता है रानी जी आज कुछ नाराज़ हैं हमसे!” “जाइये! मैं आपसे आज हर्गिज़ नहीं बोलूँगी।” ज्वाला देवी ने मुँह फ़ुला कर कहा, और काम में जुट गयी। रात को सुदर्शन जी डबल बिस्तर पर लेटे हुए थे। इस समय भी उन्हे अपनी पत्नी नहीं बल्कि शाज़िया की चूत की याद सता रही थी। सारे काम निपटा कर ज्वाला देवी ने रंजना के कमरे में झांक कर देखा और उसे गहरी नींद में सोये देख कर वो कुछ आश्वस्त हो कर सीधी पति के बराबर में जा लेटी। एक दो बार आंखे मूंदे पड़े पति को उसने कनखियों से झांक कर देखा और अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ़ रख कर वो चुदने को मचल उठी। दिन भर की भड़ास वो रात भर में निकालने को उतावली हुई जा रही थी। कमरे में हल्की रौशनी नाईट लैम्प की थी। सुदर्शन जी की लुंगी की तरफ़ ज्वाला देवी ने आहिस्ता से हाथ बढ़ा ही दिया और कच्छे रहित लंड को हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी। चौंक कर सुदर्शन जी उठ बैठे। यूँ पत्नी की हरकत पर झल्ला कर उन्होंने कहा, “ज्वाला अभी मूड नहीं है, छोड़ो इसे..” “आज आपका मूड मैं ठीक करके ही रहुँगी, मेरी इच्छा का आपको ज़रा भी खयाल नहीं है लापरवाह कहीं के।” ज्वाला देवी सुदर्शन को ज़ोर से दबा कर अपने बदन को और भी आगे कर बोली। उसको यूँ चुदाई के लिये मचलते देख कर सुदर्शन जी का लंड भी सनसना उठा था। टाईट ब्लाऊज़ में से झांकते हुए आधे चूचे देख कर अपने लंड में खून का दौरा तेज़ होता हुआ जान पड़ रहा था। भावावेश में वो उससे लिपट पड़े और दोनों चूचियों को अपनी छाती पर दबा कर वो बोले, “लगता है आज कुछ ज्यादा ही मूड में हो डार्लिंग।” “तीन दिन से आपने कौन से तीर मारे हैं, मैं अगर आज भी चुपचाप पड़ जाती तो तुम अपनी मर्ज़ी से तो कुछ करने वाले थे नहीं, मज़बूरन मुझे ही बेशर्म बनना पड़ रहा है।” अपनी दोनों चूचियों को पति के सीने से और भी ज्यादा दबाते हुए वो बोली। “तुम तो बेकार में नाराज़ हो जाती हो, मैं तो तुम्हे रोज़ाना ही चोदना चाहता हूँ, मगर सोचता हूँ लड़की जवान हो रही है, अब ये सब हमे शोभा नहीं देता।” सुदर्शन जी उसके पेटिकोट के अंदर हाथ डालते हुए बोले। पेटिकोट का थोड़ा सा ऊपर उठना था कि उसकी गदरायी हुई गोरी जाँघ नाईट लैम्प की धुंधली रौशनी में चमक उठी। चिकनी जाँघ पर मज़े ले-ले कर हाथ फ़िराते हुए वो फिर बोले, “हाय! सच ज्वाला! तुम्हे देखते ही मेरा खड़ा हो जाता है, आहह! क्या गज़ब की जांघें हैं तुम्हारी पुच्च..!” इस बार उन्होंने जाँघ पर चुम्बी काटी थी। मर्दाने होंठ की अपनी चिकनी जाँघ पर यूँ चुम्बी पड़ती महसूस कर ज्वाला देवी की चूत में सनसनी और ज्यादा बुलंदी पर पहुँच उठी। चूत की पत्तियां अपने आप फ़ड़फ़ड़ा कर खुलती जा रही थीं। ये क्या? एकाएक सुदर्शन जी का हाथ खिसकता हुआ चूत पर आ गया। चूत पर यूँ हाथ के पड़ते ही ज्वाला देवी के मुँह से तेज़ सिसकारी निकल पड़ी। “हाय। मेरे … सनम.. ऊहह.. आज्ज्ज.. मुझे .. एक .. बच्चे .. कि.. माँ.. और.. बना .. दो..” और वो मचलती हुई ज्वाला को छोड़ अलग हट कर बोले, “ज्वाला! क्या बहकी-बहकी बातें कर रही हो, अब तुम्हारे बच्चे पैदा करने की उम्र नहीं रही, रंजना के ऊपर क्या असर पड़ेगा इन बातों का, कभी सोचा है तुमने?” “सोचते-सोचते तो मेरी उम्र बीत गयी और तुमने ही कभी नहीं सोचा की रंजना का कोई भाई भी पैदा करना है।” “छोड़ो ये सब बेकार की बातें, रंजना हमारी लड़की ही नहीं लड़का भी है। हम उसे ही दोनो का प्यार देंगे।” दोबार ज्वाला देवी की कोली भर कर उसे पुचकारते हुए वो बोले, उन्हे खतरा था कि कहीं इस चुदाई के समय ज्वाला उदास न हो जाये। अबकी बार वो तुनक कर बोली, “चलो बच्चे पैदा मत करो, मगर मेरी इच्छाओं का तो खयाल रखा करो, बच्चे के डर से तुम मेरे पास सोने तक से घबड़ाने लगे हो।” “आइन्दा ऐसा नहीं होगा, मगर वादा करो की चुदाई के बाद तुम गर्भ निरोधक गोली जरूर खा लिया करोगी।” “हाँ.. मेरे .. मालिक..! मैं ऐसा ही करूँगी पर मेरी प्यास जी भर कर बुझाते रहिएगा आप भी।” ज्वाला देवी उनसे लिपट पड़ी, उसे ज़ोर से पकड़ अपने लंड को उसकी गाँड से दबा कर वो बोले, “प्यास तो तुम्हारी मैं आज भी जी भर कर बुझाऊँगा मेरी जान .. पुच्च… पुच… पुच…” लगातार उसके गाल पर कई चुम्मी काट कर रख दी उन्होंने। इन चुम्बनों से ज्वाला इतनी गरम हो उठी की गाँड पर टकराते लंड को उसने हाथ में पकड़ कर कहा, “इसे जल्दी से मेरी गुफ़ा में डालो जी।” “हाँ। हाँ। डालता .. हूँ.. पहले तुम्हे नंगी करके चुदाई के काबिल तो बना लूँ जान मेरी।” एक चूची ज़ोर से मसल डाली थी सुदर्शन जी ने, सिसक ही पड़ी थी बेचारी ज्वाला। सुदर्शन जी ने ज्वाला की कमर कस कर पकड़ी और आहिस्ता से अंगुलियां पेटिकोट के नाड़े पर ला कर जो उसे खींचा कि कूल्हों से फ़िसल कर गाँड नंगी करता हुआ पेटिकोट नीचे को फ़िसलता चला गया। “वाह। भाई.. वाह.. आज तो बड़ी ही लपलपा रही है तुम्हारी! पुच्च!” मुँह नीचे करके चूत पर हौले से चुम्बी काट कर बोले। “अयी.. नहीं.. उफ़्फ़्फ़.. ये.. क्या .. कर दिया.. आ… एक.. बार.. और .. चूमो.. राजा.. अहह म्म्म स्स” चूत पर चुम्मी कटवाना ज्वाला देवी को इतना मज़ेदार लगा कि दोबारा चूत पर चुम्मी कटवाने के लिये वो मचल उठी थी। “जल्दी नहीं रानी! खूब चूसुँगा आज मैं तुम्हारी चूत, खूब चाट-चाट कर पीयुँगा इसे मगर पहले अपना ब्लाऊज़ और पेटिकोट एकदम अपने बदन से अलग कर दो।” “हाय रे ..मैं तो आधी से ज्यादा नंगी हो गयी सैंया.. तुम इस साली लुंगी को क्यों लपेटे पड़े हुए हो?” एक ज़ोरदार झटके से ज्वाला देवी पति की लुंगी उतारते हुए बोली। लुंगी के उतरते ही सुदर्शन जी का डंडे जैसा लंबा व मोटा लंड फ़नफ़ना उठा था। उसके यूँ फ़ुंकार सी छोड़ना देख कर ज्वाला देवी के तन-बदन में चुदाई और ज्यादा प्रज्वलित हो उठी। वो सीधी बैठ गयी और सिसक-सिसक कर पहले उसने अपना ब्लाऊज़ उतारा और फिर पेटिकोट को उतारते हुए वो लंड की तरफ़ देखते हुए मचल कर बोली, “हाय। अगर.. मुझे.. पता.. होता.. तो मैं .. पहले .. ही .. नंगी.. आ कर लेट जाती आप के पास.. आहह.. लो.. आ.. जाओ.. अब.. देर क्या है.. मेरी.. हर.. चीज़… नंगी हो चुकी है सैयां…!”

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    Save this so nasty lol

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    Characters enjoying a whore

    I would say these cartoon characters are luckier than us. At least they are getting a pussy to fuck, here we are dying to have a pussy and playing with our dicks everyday. God knows, when he will arrange a pussy for all singles. If in reality such things would take place, both party gonna be happy after such a hard and nasty sex.

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    My all time favourite porn video💘 what a big pussy she has💘 love the way she takes dick into her pussy🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤🖤

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    harddick21blog

    Desi, no..she can’t be a desi women

    Guys, please don’t write anything. If you are not sure than please ignore that portion. If you will not say where she is from still people would check her out..so no worries. If you don;t know, please don’t write any thing about her race. They are whites and any one could figure it out, where they are from if they would check the things minutely...:) 

    abirpooja

    Cute bhabi

    harddick21blog

    Bhabhi on tower

    Bhabhi was not getting signal properly from old tower, so she decided to connect her device with fresh and young tower and i hope she might have got proper signal in her device. Such bhabhi’s if their respective husbands let her to explore all the towers they would not mind to go for that as they could check the stamina and power of all the fresh towers. :) 

    harddick21blog

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    दोस्तो, मेरा नाम देव है. मै राजस्थान का रहने वाला हूँ. मेरी बॉडी और चेहरा काफी आकर्षक है. मैं रोज जिम भी करता हूँ.. इसलिए बिल्कुल टाइगर श्रॉफ जैसा लगता हूँ. मेरा लिंग 7.5 इंच का है. मैं कैसी भी लड़की, भाभी, आँटी को सन्तुष्ट करने में सक्षम हूं. मैंने अब तक कई लड़कियों, भाभियों से सम्बंध बनाए हैं.. जो भी मुझसे मिली है.. वो मुझे कभी भूली नहीं है.. और भूल भी नहीं सकती है.

    यह बात एक साल पुरानी है. उस वक्त मैं कोटा में मेडिकल की तैयारी करने पहली बार आया था. अब भी मैं कोटा में ही हूं.

    जब मुझे कोटा में आये ज्यादा दिन नहीं हुये थे. एक दिन मैं बुक्स लेने मार्केट में गया. वहां पर शॉप पर मैंने दुकानदार से बुक्स मांगी. तभी एक भाभी अपने छोटे से बच्चे के साथ आईं. जब मैंने उनको देखा, तो देखता ही रह गया. वो ब्लैक साड़ी में इतनी कामुक लग रही थीं कि बता नहीं सकता. उनकी आँखें जैसे गहरी झील, उनके होंठ, जैसे खिलते हुए गुलाब की पंखुड़ियां. उनके स्तनों का आकार 36 का था, जो मुझे बाद में चूसते समय पता चला. उनके मम्मे ब्लाउज में इस कदर कसे हुए थे, मानो एकदम से बाहर आने को मचल रहे हों.

    जैसे ही उसको पता चला कि मैं उनको घूर रहा हूं.. तो उन्होंने मेरी ओर देखा. मैंने एक मुस्कराहट छोड़ दी. वो अपने बच्चे के लिए स्कूल की किताबें लेने आयी थीं. मैंने दुकानदार अंकल से बोला- अंकल जल्दी करो.

    तो फिर उन्होंने मेरी ओर देखा और मुस्कराहट छोड़ दी, जो सीधे मेरे लिंग पे जा लगी और लिंग कड़क होने लगा. अंकल किताबें दिखाने लगे और वो किताबों को चैक करने लगीं. मैं हिम्मत करके थोड़ा करीब आ गया. अब हम बिल्कुल पास पास थे. मेरे हाथ में मेरा मोबाइल था तो जब उनके बच्चे को दिख गया और वो जिद करने लगा. तो मैंने भी टेम्पल रन वाला गेम चला कर उसे दे दिया.

    फिर भाभी ने मुझसे पूछा- स्टूडेंट हो? मैंने कहा- हां, मेडिकल की तैयारी कर रहा हूँ. भाभी ने कहा- कहां रहते हो? मैंने कहा- महावीर नगर में पीजी पर. भाभी- अच्छा कहां से हो? मैंने कहा- पास से ही हूं.. बून्दी (राजस्थान) से.. भाभी- अच्छा.. मन तो लग रहा है ना? मैंने कहा- जी नहीं, घर की बहुत याद आती है.

    मैंने देखा कि भाभी मेरे करीब को होती जा रही थीं. भाभी के कूल्हे जो काफी भारी और उठे हुए थे.. बिल्कुल मुझसे टच हो रहे थे. जिससे मेरे लिंग ने हुँकार भरी और बहुत ही ज्यादा बड़ा हो गया. मैं धीरे धीरे से भाभी के कूल्हे को अपने बदन से सटाकर सहलाने लगा.

    थोड़ी देर बाद दुकानदार अंकल ने बुक्स निकाल दीं और हिसाब बनाने लगे. अब तक भाभी बहुत ही ज्यादा गर्म हो गई थीं, जो उन्होंने बाद में बताया.

    तभी भाभी ने अपने एक हाथ को काउंटर के साइड से मेरे खड़े लिंग पर रख दिया. खड़े लंड पर भाभी के हाथ टच होते ही मेरी तो हालत खराब हो गई थी. मैंने भी हौले से उनके कूल्हे पर चपत लगा दी. इसके तुरंत बाद मैंने साइड से उनको थोड़ा सा हग जैसा कर लिया.

    तभी दुकानदार अंकल ने बिल दिया. मैंने पैसे दिए और उनके बच्चे से मोबाइल ले लिया.

    थोड़ी देर बाद भाभी भी पैसे देकर अपने बच्चे को लेकर अपनी स्कूटी पर बैठ गईं. मैं उनसे नम्बर लेना चाहता था, पर हिम्मत ही नहीं हुई. वो मुस्करा कर चली गईं. मैं बस उन्हें देखता रहा.

    फिर मैंने कमरे में आकर तीन बार मुठ मारी.. तब जाकर मुझे थोड़ी शांति मिली. मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आया कि एक बार तो नम्बर माँग लेना चाहिए था. फिर सोचा वो भी तो दे सकती थीं.

    कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो गया. लेकिन एक कसक सी दिल में रह गई.

    लेक़िन कहते हैं ना, जो नसीब में होता है, वो जरूर मिलता है. दो महीने बाद हम मॉल में मिल गए. भाभी ने जीन्स और टी-शर्ट डाल रखी थी, आँखों पर काला चश्मा लगाया हुआ था. क्या मस्त माल लग रही थीं.

    उनके मम्मे थोड़े से आम के आकार के.. उठी हुई चौंच वाले थे.. जो टी-शर्ट से बाहर निकलने को बेताब थे.

    मैंने उन्हें नमस्ते किया. वो काफी सरप्राइज़ थीं. वो भी मुझे देख कर बहुत ही खुश लग रही थीं.

    उन्होंने मुझे बेहिचक बाँहों में ले लिया और बोलीं- बहुत मिस किया तुमको.. कहां गायब हो गए थे? तुमको ढूँढने मैं रोज उस दुकान पर जाती थी कि शायद तुम दिख जाओ. पता नहीं मैंने कितनी बार महावीर नगर का चक्कर लगाया है.

    मैंने कहा- मिस तो मैंने भी बहुत किया आपको. रोज खुद को कोसता था कि अपना नम्बर ही आपको दे देता. तो भाभी बोलीं- मुझे लगा था कि तुम दे दोगे. मुझे क्या पता था कि तुम इतने डरपोक हो, नहीं तो मैं ही दे देती. मैंने कहा- रात गई, बात गई. फिर भाभी ने मुझे कॉफ़ी के लिए कहा कि चलो कॉफ़ी पीते पीते बात करते हैं.

    मैं उनके साथ चला गया. इधर उधर की बातें हुईं, नम्बर एक्सचेंज किए. मैंने बोला- मूवी चलते हैं. तो बोलीं- कभी फिर, अभी मैं जल्दी में हूँ.. घर पर लड़का अकेला है. थोड़ी देर बाद भाभी जाने लगी, मैंने उनको बाय बोला. उन्होंने छोटा सा हग किया.. चूचियों का हल्का सा स्पर्श हुआ, फिर वो गांड मटकाते हुए चली गईं. मैं बस उन्हें देखता रहा.

    उनकी गांड काफी बड़ी और भरी हुई थी.. जो काफी मटक रही थी. मुझे खुद पर कंट्रोल नहीं हुआ और मॉल के बाथरूम में जाकर दो बार मुठ मारी.

    उस दिन मैं बहुत खुश था. शाम को मैंने भाभी को कॉल किया. उधर से आवाज आई- कौन? मैंने कहा- आपके दीवाने. भाभी- बड़ी देर लगा दी, हमारे दीवाने ने. मैं- क्या करें दीवाने में थोड़ी हिम्मत कम थी. भाभी- अच्छा, क्या कर रहे हो? मैं- आपकी याद आ रही है.. मिस कर रहा हूँ. भाभी- आ जाओ अभी मेरे पास, पता व्हॉट्सैप करती हूं. मैंने कहा- जी, ओके.

    एक घंटे बाद मैं उनके घर पे था, उनका घर तलवंडी में था, काफी पॉश कॉलोनी है.

    उन्होंने वही ब्लैक कलर की साड़ी पहन रखी थी. मुझे सोफे पर बिठाया और फ्रिज से पानी की बोतल निकाल कर दे दी. हम दोनों बातें करने लगे.

    मैंने पूछा- आपका नाम क्या है? तो भाभी ने हँसते हुए कहा- मंजू दीक्षित. मैंने पूछा- आपके हस्बैंड क्या करते हैं? तो बताया कि वो डॉक्टर हैं. अभी वो गुजरात किसी सेमिनार में गए हैं.

    मैं थोड़ा खिसक कर पास को हो गया. मैंने पूछा- आपके सास ससुर? तो भाभी ने कहा- वे जयपुर रहते हैं, मेरे देवरों के पास. मैंने कहा- अच्छा जी.. आपका बेटा? भाभी- सो रहा है.. कोई नहीं है, अब देर न करो यार.

    उनके इतना कहते ही मैंने भाभी को बाँहों में भर लिया और स्मूच करने लगा. मैंने और भाभी ने हर एंगल से स्मूच किया. हमने लगातार बहुत देर तक स्मूच किया. ऐसा लग रहा था, जैसे कोई युद्ध चल रहा हो और कोई भी हारना नहीं चाहता रहा था.

    मैंने भाभी की ब्लैक साड़ी को निकाल कर फेंक दिया. उनके ब्लाउज के बटन तोड़ कर उसको निकाल दिया. ब्लाउज़ के निकलते ही उनके मम्मे बाहर निकल गए.

    क्या मम्मे थे यार दूध से गोरे, ब्लैक ब्रा में कैद. क्या सीन था दोस्तो, शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूँ. मैं उनके मम्मों से चिपक गया. वो पीछे से मेरी पीठ पर हाथ घुमाने लगीं.

    मैं भाभी के मम्मों को मसलने लगा, भाभी ‘आह, ऊह…’ की आवाजें करने लगीं.. जिससे मेरा जोश और बढ़ गया. मैंने उनकी ब्रा को निकाल कर फेंक दिया और उनके एक निप्पल को चूसने लगा.

    भाभी जोर जोर से आहें भरते हुए बोलने लगीं- आह.. जोर से काटो, मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.. तुम बहुत अच्छा कर रहे हो.. आह बेबी, मेरे निप्पल को और मुँह के अन्दर लो, आह बहुत अच्छा, आह तुम कितने हॉट हो, कहां थे इतने दिन राजा.

    तभी अचानक कमरे में से आवाज आई; हम दोनों डर गए. तभी अचानक फिर से आवाज आई. पता ही नहीं चला कि उनका बेटा भी घर में है. उन्होंने जल्दी से अपने मम्मों पर अपनी साड़ी लपेट ली और ब्रा और ब्लाउज़ उठाते हुए अन्दर बेडरूम में जाते हुए अपने बेटे से बोलीं- आ रही हूं बेटा.

    सिर्फ आवाज ही आई थी, उनका बेटा बाहर नहीं आया था. अब तक मैंने भी खुद को ठीक किया.

    फिर थोड़ी देर बाद भाभी भी आ गईं. वे अपने लड़के के साथ बाहर आ गईं.

    उनके लड़के ने मुझे नमस्ते बोला. मैंने कहा- क्या नाम है बेटा? तो बोला- हर्षित.

    मैंने उसको मेरा मोबाइल दे दिया और वो फिर से गेम खेलने में लग गया.

    जब मैंने भाभी की ओर देखा तो भाभी मुस्कारते हुए मेरी गोदी में खड़े लिंग के ऊपर बैठ गईं.

    वो अपने कपड़े बदल चुकी थीं. उन्होंने झीना सा टॉप और जीन्स पहन रखा था. मैं फिर से शुरू हो गया. मैं औऱ भाभी एक दूसरे में खो गए.

    मैं उनको स्मूच करने लगा. कभी मैं अपनी जीभ उनके अन्दर डाल रहा था कभी वो. दोस्तों जीभ को चूसने का मजा ही कुछ और ही है.

    हमने कुछ देर स्मूच किया, फिर भाभी बोलीं- चलो क्या खाओगे.. मैं आर्डर कर देती हूं. भाभी ने अमर पंजाबी ढाबे पर कॉल करके आर्डर कर दिया. फिर मुझसे इतराते हुये बोलीं- कुछ पियोगे जनाब? मैंने कहा- मुझे तो आज बस तुमको पीना है. वो बोली- अरे आशिक़.. मैं ड्रिंक की बात कर रही हूं. मैंने पूछा- क्या क्या है? वो बोलीं- बियर है, व्हिस्की है. मैंने कहा- बियर ले आओ. उन्होंने और मैंने अलग अलग बॉटल ले लिए. फिर मैंने कहा- ऐसे नहीं पिया जाता है. तो भाभी बोलीं- फिर कैसे?

    मैंने अपने मुँह में बियर भर कर उनके होंठों से होंठ लगा दिए.. भाभी समझ गईं और उन्होंने मुँह खोल दिया. मैंने किस करते करते उनको बियर पिलाई और उन्होंने मुझे.

    कभी आप भी कोशिश करना दोस्तो, मज़ा आ जाएगा.

    इस तरह हमने चार बोतलें ख़त्म कर दी थीं. मुझे थोड़ा सा नशा आ गया था. मैं उनको पकड़कर उनके मम्मों को चूसने लगा.

    वो बोलीं- रुको.. मैं बच्चे को सुला कर आती हूँ. मैंने पूछा- कैसे सुलाओगी? तो बोलीं- नींद की गोली से.

    मैं सोफ़े में बैठा रहा. कुछ देर बाद वो आईं तो मैंने बोला- सु सु आ रही है.

    भाभी काफी नशे में लग रही थीं. मैंने कहा- बेबी तुम ठीक हो? तो बोलीं- हां जानू.. तुमको सु सु आ रहा है ना.. तो मेरे मुँह में कर दो. मैं चौंक गया, मैंने पोर्न मूवी में ये सब जरूर देखा है, लेकिन भाभी इतनी सेक्सी होंगी.. नहीं सोचा था. वो बोलीं- शर्मा मत.. मेरे देव बाबू, मैंने बहुत वीडियो में देखा है.. मैं भी चाहती थी कि कोई मेरे साथ ऐसा करे. शायद मैं शर्म के मारे तो नहीं बोल सकती थी लेकिन थैंक यू.. तुमने बियर पिलाने के अंदाज से मेरी वो कामना जागृत कर दी. अब मुझे तुम्हारे लंड को चूसना है.

    ऐसा सुनते ही मुझे बहुत जोश आ गया. मैंने अपना लिंग बाहर निकाल लिया. उन्होंने देखा तो देखती रह गईं. “हे भगवान.. इतना बड़ा.. कहाँ छुपा रखा था.. वाह मेरे शेर..” भाभी ने अगले पल ही मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया.

    मैंने कहा- मुँह से मत चूसो, मुझे पेशाब करनी है, वीर्य नहीं निकालना है. मैंने अपना लिंग भाभी के मुँह से बाहर निकाल लिया और उनको बोला- मुँह खुला रखना.

    उन्होंने आ करके मुँह खोल दिया. फिर मैंने उनके मुँह में सू सु कर दिया. वो आराम से मेरा पेशाब पीती चली गईं. फिर मैंने लास्ट का थोड़ा सा पेशाब उनके मुँह पर करके उनको भिगो दिया. फिर भाभी नशीली आवाज में बोलीं- मुझे भी सुसु लगी है. मैंने कहा- रुको.. बीयर है क्या? तो बोलीं- नहीं है. मैंने कहा- व्हिस्की ले आओ.. थोड़ी प्याज़ और नमकीन भी ले आना.

    थोड़ी देर बाद भाभी, व्हिस्की, प्याज़, बीकानेरी नमकीन, मेवे, आइस, लेकर आ गईं. अब उन्होंने एक पेटीकोट पहना हुआ था, जींस उतार दी थी.

    मैंने दोनों के लिए पैग बनाए. मैंने तीन पैग पिए और भाभी ने दो लगाए. हम दोनों खूब नशे में हो गए थे.

    फिर मैंने कहा- ला मेरी जान पिला मुझे तेरा गरम पानी…

    ये कहते हुए मैंने भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, पेटीकोट ‘सररर..’ करते हुए गिर गया.

    वाह क्या टांगें थीं.. एकदम दूध सी, उनकी टांगों के बीच में काली पेंटी फंसी थी. मैंने पेंटी को खींच कर फाड़ दिया और उनकी चूत पर मुँह लगा कर बोला- ला पिला.. मुझे तेरा गर्म पानी.

    भाभी ने चुत की धार खोल दी.

    उस वक़्त मैं बहुत ही नशे में था. मैंने उनका पूरा पेशाब पी लिया.. और चूत चाटने लगा. वो भी मेरा सर पकड़ कर गाली देने लगीं- और चूस मेरे कुत्ते.. और अन्दर तक चाट आह.. आह.. मज़ा आ रहा है.. ऐसे ही करते रहो बेबी.. आई लव यू देव.. यार तुम तो बहुत ही हॉट हो.. अन्दर तक जीभ घुमाओ.. और अन्दर बेबी.. आह.. थोड़ी देर ऐसे ही करते रहो.. आह.. आने वाली हूं मैं.. आह बेबी…

    वो बहुत ही कामुक आवाजें निकाल रही थीं. कुछ देर बाद उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया, मैंने उनकी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दी.

    थोड़ी देर बाद घंटी बजी. भाभी कपड़े पहनते हुए बोलीं- खाना आ गया है.. चलो.. जाओ तुम ले आओ. भाभी ने अपना पर्स मुझे दे दिया, मैंने खाना लिया और अन्दर आ गया.

    अब हम दोनों खाना खाने लगे. डाइनिंग टेबल पर हम दोनों पास पास की कुर्सी पे बैठे थे. मैं उनको स्मूच करने लगा. फिर मैंने उनको पकड़कर अपनी गोद में ही बैठा लिया. मुझपर काफी नशा था, मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी कर दिया.

    फिर उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ने की कोशिश की, लेकिन मैंने कहा- मैं क्या पहन कर जाऊँगा. तो वो रुक गईं, मैंने अपने कपड़े उतार कर रख दिए, मैं भी नंगा हो गया और कुर्सी पर बैठ गया. मेरे बैठते ही भाभी अपनी चौड़ी टांगें करते हुए मेरे लंड पर बैठ गईं. मेरा लंड गप्प की आवाज करते हुए अन्दर चला गया.

    मैंने पीछे से पकड़कर उनको हग करते हुए चूमा और हम दोनों इसी अवस्था में खाना खाने लगे.

    दोस्तो, मुझे लगता है, ये आप लोगों को भी करना चाहिए. ये मुझे आज तक का सबसे ज्यादा कामुक वाला काम लगा. इस आनन्द को मैं बयान नहीं कर सकता हूँ.

    खाना खाने के तुरन्त बाद ही मैं इतना कामुक हो गया कि मैंने भाभी को फर्श पर लिटा कर इतने जोर से चोदा कि उन्होंने मुझे अपने नाखूनों से पूरी पीठ को नोंच डाला. जब ये तूफान ख़त्म हुआ तो पता चला ब्लड निकल रहा है, भाभी के शरीर से भी और मेरी पीठ पर भी. मैंने झटके इतने तेजी से मारे थे कि कोई गिन भी नहीं सकता.

    उन्होंने मेरे घावों पर डिटॉल लगाया और बोलीं- थोड़ा आराम कर लो.

    फिर वो कमरे में जाकर अपने बच्चे को पानी पिलाकर अच्छे से सुलाकर आ गई. और मुझे हग कर लिया. मैंने उन्हें उठाकर कमर तक ले लिया और किस करने लगा.

    लगातार 15 मिनट तक किस करने के बाद वो बोलीं- चलो बेडरूम में चलते हैं.

    मैंने कहा- शहद है क्या? तो बोलीं- हां क्यों? मैंने कहा- लेकर आओ तो. वो बोलीं- अभी लाई.

    कुछ देर बाद भाभी शहद लेकर आ गईं. मैंने कहा- लेट जाओ. वो चित लेट गईं, मैंने उनके होंठों पर स्तनों पर, लगभग सारे शरीर पर शहद लगा दिया और चाटने लगा. भाभी कामुक आवाजें निकालने लगीं. मैंने उनके स्तनों को चाट चाट कर लाल कर दिया. उनके होंठों से ब्लड निकलने लगा.

    वो गालियां देने लगीं, मुझसे गुहार लगाने लगीं- आह.. साले अब तो मुझे चोद दो.

    फिर मैंने उनको चोद दिया, लगातार ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना लावा उनकी चूत में छोड़ दिया. फिर दोनों हग करके बाते करने लगे.

    बीस मिनट बाद मैंने अपने लंड पर शहद लगा कर भाभी की ओर कर दिया. भाभी मेरे लंड को चूसने लगीं. कुछ देर बाद मैंने कहा- रुको.

    अब मैंने उनकी चूत पर बहुत सारा शहद लगाया और हम दोनों 69 की अवस्था में हो गए. जितनी जल्दी वो मेरे लंड को चूसतीं, उतने ही अन्दर में अपनी जीभ घुसेड़ देता. हम एक दूसरे को तब तक चूमते और चाटते रहे, जब तक हमने एक दूसरे को स्खलित नहीं कर दिया. मैंने भाभी को उस रात कई बार चोदा. हर अवस्था में चोदा. भाभी थक गईं और खुद बोलीं- बस करो यार..

    फिर भी मैं नहीं माना, वो रात मेरी जिंदगी की सबसे हसीन रात थी. मैंने लगभग एक साल तक भाभी को चोदा. फिर उनके पति का ट्रान्सफर जयपुर हो गया.

    अब भी कभी कभी बात हो जाती है तो बोलती हैं कि बहुत मिस करती हूं तुम्हें. मैं भी बस इतना ही कह पाता हूँ- याद तो हमें भी बहुत आती है आपकी. ये मेरी पहली कहानी है तो कुछ भूल हुई हो तो मुझे माफ़ करना और मुझे बताएं कि आपको भाभी की चुदाई की कहानी कैसी लगी.

    harddick21blog

    Three FFF and single M

    मेरा नाम विकाश है और मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 24 साल है और मेरी हाइट 5 फिट 7 इंच है. मैं दिखने में ठीक ठाक हूँ.

    दोस्तों मैं एक कम्पनी में काम करता हूँ. मेरी कम्पनी के पास ही वाली जगह एक ब्यूटी पार्लर है. उसमें एक लड़की काम करती है, उसका नाम नेहा है.

    नेहा दिखने में बेहद ही खूबसूरत है दोस्तों उसके अंगों की बनावट इतनी अधिक मादक है कि देखने वाला उसको देखता ही रह जाए. मैं रोज ऑफिस जाते वक्त उसे देखता रहता था. मैंने महसूस किया था कि मेरे देखने से वो भी कुछ इस तरह से देखने लगती थी, जिससे ऐसा लगता था कि शायद उसके मन में मेरे लिए भी कुछ है. पर हिम्मत न होने के कारण ऐसे कैसे उससे कुछ कह सकता था. हालांकि उसको देखते समय मैं इतना जरूर करने लगा था कि जब भी मेरी उससे आँख मिल जाती थी, तो मैं स्माइल कर देता था. जिस पर उसने कभी मुँह भी नहीं फेरा था और स्माइल भी नहीं की थी.

    मैं कुल मिला कर असमंजस की स्थिति में था कि पता नहीं मैं इसको लेकर गलत सोच रहा हूँ या वास्तव में कुछ होने की उम्मीद है.

    एक दिन मैं मार्केटिंग के सिलसिले में वहां से गुजर रहा था तो मैंने देखा कि वो बिलकुल फ्री बैठी थी. मैंने सोचा आज इससे थोड़ी बात कर ही लूँ. मैं उसके करीब गया और उसको देख कर मुस्कुराया. वो भी मुस्कुरा कर बोली- आइये. मैं- शुक्रिया. मैंने आगे बात बढ़ाई- जी मैं पास के ही ऑफिस में काम करता हूँ. वो- जी पता है, आपको आते जाते देखती हूँ. बैठिये, आप कुछ लेंगे ठंडा या गर्म? मैं- नहीं, मैं तो बस आपसे ऐसे ही बात करने आया था.

    कुछ देर हम दोनों ने बात की उसे मेरा व्यवहार अच्छा लगा और मुझे भी उसका स्वभाव पसंद आया. इसी तरह हमारी दोस्ती हो गई. फिर हमारी रोज बात होने लगी.

    फिर एक दिन ऐसे ही मैंने बातों बातों में उसका नंबर मांग लिया. पहले तो वो बोली कि नहीं यार कहीं तुमने नंबर किसी और को दे दिया. तो सही नहीं रहेगा. वो नम्बर देने में बहाने बनाने लगी तो मैंने भी बोल दिया- क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है?

    तो अंत में उसने भी नंबर दे ही दिया. फिर मेरी उससे रोज़ बात होने लगी. धीरे धीरे मैं उसे पटाता गया. फिर हम रोज़ रात को फोन पर लम्बी बात करने लगे.

    वो मुझसे काफी खुल गई थी. अब मैंने भी डबल मीनिंग की बातें शुरू कर दी थीं. धीरे धीरे मैंने उसे फोन सेक्स के लिए पटा ही लिया. अब हम रोज़ रात को फोन सेक्स चैट करने लगे थे.

    एक दिन मैंने उसे मैसेज किया- क्या कर रही हो? तो वो बोली- फ्री बैठी हूँ. मैंने कहा- क्यों आज कोई काम नहीं है क्या? वो बोली- आज मेरे पार्लर का हाफ डे है.. तो बस अकेली बैठी हूँ, बाकी सब लोगों की छुट्टी हो गई, पर मेरा कुछ काम था.. तो मैं अभी यही हूँ. अब काम ख़त्म कर दिया तो बस ऐसे ही कंप्यूटर पर फ़ोटो देख रही थी.

    इतना सुनते ही मेरे मन में सेक्स का भूत जाग गया. मैंने सोचा यही अच्छा मौका है, मैंने उससे बोला- क्या मैं आ जाऊं? उसने भी हां बोल दिया- हां आ जाओ.

    मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर सीधा उसके पार्लर में आ पहुंचा. वो बैठी थी, मैंने जाते ही पहले दरवाजा बंद कर दिया और उसके पास वाली कुर्सी पर बैठ गया.

    बातों ही बातों में मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया. उसने कुछ नहीं कहा मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. फिर धीरे धीरे उसकी पीठ की बगल से उसकी चूचियों को टच करना शुरू कर दिया. उसको मजा आने लगा था, इसलिए उसने मुझे नहीं रोका.

    मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और अपने होंठ उसकी तरफ बढ़ा दिए. उसने भी अपने होंठ आगे कर दिए तो हमारी किसिंग भी चालू हो गई. चूमाचाटी अपने चरम पर आ गई थी हम दोनों एक दूसरे के मुँह में जीभ डाल कर गरम होना शुरू हो गए थे. पार्लर का दरवाजा बंद था तो चिंता नहीं थी. मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया तो उसने भी मेरा सर अपनी चूचियों पर लगा दिया. मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखवा लिया तो वो मेरे लंड को मसलने लगी.

    फिर मैंने वहीं पड़ी टेबल पर उसे चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. कुछ ही देर में चुदाई का मूड बन गया और मैंने जल्दी जल्दी उसकी कमीज़ उतार दी. उसने अन्दर ब्लू ब्रा पहनी हुई थी.. जो कि उनको बहुत सूट कर रही थी. चूचियों को नंगा कर दिया तो उसने खुद ही अपनी सलवार खोल दी. मैंने भी उसकी चड्डी को निकाल दिया. अब वो पूरी नंगी मेरे सामने थी. मैंने नजर भर के उसको देखा, उसकी फिगर 36-30-37 की थी.

    फिर मैं उसके के पूरे शरीर को चूमने चाटने लगा. मैंने उसको उल्टा लेटाया और पास रखी तेल की शीशी से तेल निकाल कर उसकी पीठ पर डाल कर मसाज करने लगा. वो गरम आहें भर रही थी.

    मैंने उसे सीधा किया तो उनकी चुत पूरी तरह क्लीन थी. मैं सफाचट चुत को देखते ही पागल हो गया और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख के सीधा चुत चूमने लगा. मैंने एकदम से उसकी चुत के होंठ खोल दिए और अपनी जीभ को अन्दर-बाहर करने लगा. वो गर्म होने लगी और मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चुत पर दबाने लगी.

    इस वक्त वो जोर जोर से कह रही थी- आह खा जाओ मेरी फुद्दी.. अह.. चाटो चूस.. चूस लो.. और जोर से.. आह.. और जोर से. इस तरह काफी देर चूत चुसवाने के बाद आखिर में वो झड़ ही गई.

    फिर वो मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी. मैंने पूछा- क्या तुम लंड चूसना चाहोगी? पहले तो वो नानुकुर करने लगी. फिर अचानक उसने मेरे लंड को मुँह में डाल लिया और किसी एक्सपर्ट की तरह लंड चूसने लगी.

    मैं पूरी तरह से पागल हो रहा था. निशा अपनी जीभ को लंड से आंडों तक रोल करने लगी और अंडकोषों को चूसने लगी. वो जोर जोर से लंड सक कर रही थी. मैंने कहा- सच में यार तुम बड़ा मस्त तरीके से लंड चूसती हो. तो वो शर्मा गई. मैंने उसकी चूची दबा कर कहा- बताओ न किधर से सीखा. तो बोली- अभी मजा लो बस.

    मैंने भी सोचा कि मुझे जानकर भी क्या करना है. अभी तो बस इसकी चूत चुदाई का मजा लो और बाकी सब बाद में देखेंगे. फिर मैं उसके ऊपर आ गया और अपने लंड को उसकी चुत पर रगड़ने लगा. वो तड़पने लगी और अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे लंड को अपनी चुत के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी. मैं समझ गया कि उसकी कामुकता पूरे उफान पर पहुँच चुकी है. अब मैंने सोचा कि अब इसकी गीली चूत में लंड घुसाने का सही वक्त आ गया है.

    मैंने उसको टेबल से उठाया और दीवार के साथ खड़ा करके उसकी एक टांग उठाई और चुत में अपना लंड सीधा डाल दिया, जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से चीखने लगी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो काफी दिनों से किसी से नहीं चुदी है तो चूत टाइट हो गयी है.

    जैसे तैसे उसकी चूत को ढीला करके लंड ने खुद के आने जाने के लिए रास्ता बनाया और हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई. अब वो दीवार के सहारे घोड़ी बन गई थी और मैं पीछे से लंड पेल कर उसकी चुदाई कर रहा था. उसकी चूचियों को मस्ती से मसकता हुआ, मैं उसको दबा कर चोदे जा रहा था.

    इस आसन में मैं उसे काफ़ी जोर-जोर से चोद रहा था. वो तो पागल हुई जा रही थी. उसकी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ जैसी गर्म आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं.

    मैंने उसे लगातार 15 मिनट तक चोदा और आख़िर में मैंने नीचे फर्श पर लेट कर उसको अपने ऊपर बिठा लिया. चुत में लंड डाल कर मैं उसको फिर से पेलने लगा.

    कुछ देर तक उसने मेरे लौड़े की सवारी की और इस फौरान मैं उसकी चूचियों को मरोड़कर गूँथता रहा, चूसता रहा. अब वो थक गई थी, तो उसको कमर से पकड़ कर मैं उसे ऊपर नीचे करने लगा.

    आख़िर में मैंने उसे अपने नीचे लिया और मिशनरी पोज में चोदने लगा. वो एकदम शिथिल हो चुकी थी और जल्दी खत्म करने का कह रही थी. अंत में मैंने अपना सारा लंड रस उसकी चुत में भर दिया.

    तब तक काफी देर हो चुकी थी और उसको भी घर जाने में भी देर हो रही थी. हम दोनों ने कपड़े पहने, चुम्मा लिया और निकल गए.

    उसके बाद हमने बहुत बार चुद्म चुदाई का खेल खेल कर मजे किए..