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    Brooke Benz

    Release Date : 18 August 2018

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    harddick21blog

    Beautiful girl with a beast

    यह कहानी तब की है जब मेरी दिवाली की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं अपने अंकल के वहाँ चला गया जो वड़ोदरा में रहते हैं। उनका तीन लोगों का परिवार है, अंकल-आंटी और उनका 7 साल का बेटा। यह कहानी मेरी आंटी के बारे में है। मेरी आंटी का फ़ीगर क्या बताऊँ दोस्तो, वो कद में मुझसे छोटी है पर दिखने में किसी कयामत से कम नहीं ! मेरी और आंटी की बहुत जमती थी और अंकल एक बिजनेसमैन हैं, अंकल मुझे बड़े बेटे की तरह कम और दोस्त ज्यादा रखते थे। एक दिन अंकल को किसी काम से दूसरे शहर जाना पड़ा। उस रात मैं और आंटी बैठे थे। मेरी और आंटी की अच्छी बनती थी पर मैंने कभी आंटी को उस नजर से नहीं देखा था पर उसके इरादे आज मुझे साफ नहीं लग रहे थे। फ़िर भी हम बैठे थे। वो मुझे बोल रही थी- पराग अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी ! मै- क्या कहा आपने? आंटी- शादी बुद्धू शादी। मै- आंटी, अभी तो मेरी पढ़ाई चल रही है? आंटी- तो क्या शादी के बाद नहीं पढ़ सकते क्या? दोस्तो, मैं बता दूँ कि हमारी बिरादरी में शादी बहुत जल्द हो जाती है। मै- हाँ, पढ़ तो सकते है लेकिन ! आंटी- लेकिन क्या पराग? मेरे जवाब देने से पहले आंटी ने फ़िर पूछा- देख पराग, तेरी पसन्द में कोई और हो तो बता दो वरना ! मै- नहीं, मुझे कोई पसन्द नहीं है। फ़िर मैंने पूछा- वरना क्या? आंटी- मैंने तुम्हारे पापा से बात की है कि मेरी छोटी बहन काजल को अपने घर की बहु बनाएँ। मैं- पर वो तो तुम्हारी बहन है। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |  पर दोस्तो, मैं अंदर से बहुत खुश था क्योंकि काजल दिखने में इतनी खूबसूरत है कि पूछो ही मत ! स्वर्ग की अप्सरा जैसी। आंटी- तो क्या हुआ? अगर मेरी बहन तुम्हारी बीवी बने? मै- पर अभी तो मैंने कमाना भी चालू नहीं किया और बड़ी प्रोब्लम तो यह है कि शादी के बाद क्या करते हैं, मुझे पता नहीं? आंटी- ओेई हरिचन्द्र, तेरे पापा का अच्छा बिजनेस चल रहा है तेरे अंकल का भी अच्छी तरह से चल रहा है तो क्या मेरी बहन भूखी रहेगी तेरे घर में? मैं- यह बात भी ठीक है ! इतने में आंटी बोली- तेरे दूसरे प्रोब्लम में मैं तेरी मदद कर सकती हूँ ! मै- वो कैसे? आंटी- मैं तुम्हें सब सिखा दूंगी। और मैं तैयार हो गया मैं तो सांसारिक जीवन कैसे जीते हैं यह सीखना चाहता था पर आंटी सेक्स सिखाना चाहती थी। बातों ही बातों में रात के 12 बज गये तो मैंने कहा- चलो सो जाते हैं। तो आंटी ने कहा- सीखना नहीं है? “मैं कुछ समझा नहीं?” तो अब आंटी ने अपनी शरम छोड़ते हुए कहा- इसकी क्लास तो रात में ही लगती है ! मै- यह आप क्या कह रही हैं? मुझे तो सब समझ आ गया था कि आज आंटी मुझसे चुदने वाली हैं, और मैं भी खुश था। और उसी ख्याल में मेरा लन्ड कब खड़ा हो गया पता ही नहीं चला। अब मैं भी गर्म हो गया था और आंटी तो जैसे ज्वाला की तरह गर्म थी। तो आंटी ने मुझे अपने बेडरूम की तरफ़ इशारा किया, मैं समझ गया कि लाईन साफ़ है। मैं जब अन्दर गया तो आंटी ने मुझे अपनी ओर जोर से खींच लिया और मुझे पूरे बदन पर चुम्बन करने लगी। मैं तो स्वर्ग की सैर कर रहा था क्योंकि पहले कभी किसी लड़की ने मुझे छुआ तक नहीं था। अब वो मेरा लन्ड पैन्ट के ऊपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी और मेरे मुँह से ओह आह की आवाज निकल रही थी और उसे मुझे तड़पा कर मजा आ रहा था। अब तक मैं ऐसे ही खड़ा था। अगले ही मिनट आंटी बोली- पराग, मैं तुम्हें पसन्द नहीं हूँ क्या? मै- नहीं आंटी, आप तो सुन्दर हैं।

    आंटी- तू झूठ बोल रहा है ! अगर मैं तुम्हें पसन्द होती तो अब तक तूने मुझे चोद दिया होता ! आंटी तीर पर तीर छोड़ रही थी और मेरे सब्र का बान्ध टूट रहा था। पर वो मेरी आंटी थी तो मैं उसे चोदना नहीं चाहता था लेकिन मैं भी जवान था, जल गया आंटी की ज्वाला में ! और मैं उसके ऊपर चढ़ गया लेकिन वो मेरे इस वार के लिए तैयार नहीं थी। फ़िर मैं उस पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मैं उसको पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी। आग दोनों तरफ से लगी हुई थी। अब आंटी ने मेरे शर्ट के बटन खोलने चालू किए और मुझे एक नशा सा छाने लगा। अब मुझे पता नहीं था कि मैं क्या कर रहा था पर आंटी तो पूरे मूड में थी। आंटी ने मेरी पैन्ट को नीचे कर दिया अब मैं सिर्फ अन्डरवीयर मैं आंटी के सामने खड़ा था पर अब मेरी बारी थी आंटी के कपड़े उतारने की | तो मैंने आंटी के ऊपरी वस्त्र उतारने लगा तो मैं थोड़ा डर रहा था, मैंने धीरे से उसके स्तन पर हाथ रख दिया तो उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबा दिया, मैंने उसका ऊपरी वस्त्र निकाल फेंका। अब उसके दोनों सन्तरे मेरे हाथों में थे तो मैं उनसे खेलने लगा। आंटी बोली- इनसे खेलते रहोगे या कुछ और करने का भी इरादा है? तो मैंने आंटी से कहा- वैसे तो मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ मेरी जान ! इस बार आंटी थोड़ा शरमा गई तो मैंने कहा- शरमा क्यूँ रही हो? आंटी मजाक करते हुए- तुम तो मेरे बेटे जैसे हो। मैं- हाँ, तो आज बेटे से ही चुदवा लो ! आंटी- बड़ा आया चोदने वाला ! मैंने देखा है तुम्हारा लौड़ा ! छीः ! मुझे तो तुम्हारे लौड़े को लौड़ा कहने में भी शरम आ रही है।आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं- क्यूँ, आपने कब देखा? आंटी- तो क्या हुआ अगर मैंने तेरा लण्ड नहीं देखा तो आज तो जी भर कर देखूँगी और…!! इतना कह कर वो मेरे लण्ड पर टूट पड़ी। मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया मेरे मुँह से आह ह्ह..अओह की आवाज आ रही थी क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तो दोस्तो, मैं 2 मिनट में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य आंटी के मुँह में छोड़ दिया और दोस्तो, क्या बताऊँ, दिल को कितना सुकून मिला ! पर दोस्तो, मैंने हार नहीं मानी। थोड़ी ही देर बाद आंटी को कस कर पकड़ कर अपना लण्ड आंटी की चूत के मुँह पर रख दिया और एक झटका लगाया तो मेर लण्ड आंटी चूत में पूरा समा गया। दोस्तो, इस अनुभव का मैं विस्तार नहीं कर सकता ! थोड़े शब्दो में कहूँ तो ”स्वर्ग भी कुछ नहीं है इस चूत के आगे !” पर मुझे लगा कि आंटी को कुछ परेशानी थी, उसकी आँखों से पानी निकल रहा था तो मैं रूक गया और आंटी को किस करने लगा और आंटी से पूछा- आंटी आपको बहुत दर्द हो रहा है? आंटी- हाँ, बहुत हो रहा है, इस तरह से कोई चोदता है अपनी आंटी को? मै- आपकी कोई मदद कर सकता हूँ? आंटी- हाँ, मादरचोद चोद दे मुझे मसल दे मेरी जवानी को… अब मैं आंटी को जोर-जोर से चोदने लगा, आंटी दर्द के मारे मुझसे कस कर लिपट गई और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए। आंटी बुरी तरह चिल्ला रही थी पर मैंने उस पर और उसकी चूत पर बिल्कुल रहम नहीं किया और जोर-जोर से अपना लण्ड पेलता रहा आंटी की चूत में। आंटी चिल्ला रही थी और बोल रही थी- पराग ! और जोर से चोदो… बहुत मजा आ रहा है, अओह… पराग चोद दो मुझे ! आज मत छोड़ना ! आह…आ आह ! की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। कितनी सेक्सी आवाज थी दोस्तो ! मैं तो पूरी ताकत से चोद रहा था। इतने में सब खत्म हो गया।  मैंने 20 मिनट चुदाई करके आंटी की चूत में ही झड़ गया क्योंकि मुझे पता था की आंटी की नसबंदी का ओपरेशन हो चुका है। इसलिए कोई प्रोब्लम नहीं थी। हम दोनों पर एक मदहोशी सी छाने लगी। इस दौरान आंटी तीन बार झड़ गई थी तो उसकी हालत तो मुझसे भी खराब थी, उसकी आँखें नशीली हो गई थी, उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था, अब वो मुझे किस कर रही थी और मेरी छाती को भी चूम रही थी। इतना सब होने के बाद रात के 3 बज गए, मैं और आंटी पूरी रात साथ बिना कपड़ों के ही सो गए। सुबह जब मैं उठा तो आंटी ने मुझे चाय के लिए बुलाया तो मैं चला तो गया आंटी के पास पर दोस्तो, रात के कारनामे से मैं आंटी के साथ आँख नहीं मिला पा रहा था। मैं चाय लेकर कम्रे में आ गया पर मैं अपने आप को रोक नहीं सका, मैं चाय पी करके रसोई में चला गया क्योंकि आंटी वहीं थी। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं रसोई में जाते ही आंटी की गर्दन पर किस करने लगा, तो आंटी पीछे मुड़ कर मेरे होंठों पर किस करने लगी और बोली- पराग, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… क्या तुम भी मुझे प्यार करते हो ? मैं- आई लव यू | दोस्तो, मैंने आंटी से यह नहीं कहा कि आप शादीशुदा हैं या ऐसा कुछ ! वैसे तो आप सभी काफी समझदार हैं, आंटी मुझसे क्यूँ चुदना चाहेगी उसका कारण तो आप जानते हो।  

    bataman7

    Black and white!!!! Oreo

    harddick21blog

    Black dick in beautiful girl

    मैंने कहा, “आराम से खूब क्रीम मलो। थोड़ी देर बाद जब गाँड का छेद रीलैक्स हो जायेगा तब बड़े आराम से मेरा लंड अंदर जायेगा…” और मैं स्मोक करने लग गया। दोस्तों क्या सीन था कि एक बेटी अपनी माँ की गाँड पर पूरी लगन से क्रीम मल रही थी और अपनी माँ को गाँड मरवाने के लिये तैयार कर रही थी। सिगरेट खतम होने के बाद मैं पलंग पर चढ़ा और अपना तन्नाया हुआ लंड ममता आंटी के चूत्तड़ों पर फेरने लगा और नेहा को बोला, “अब ज़रा मेरे लंड के ऊपर भी क्रीम लगाओ! अब मैं आपकी मम्मी के भूरे रंग के गाँड के छेद को खोलूँगा।” नेहा ने बड़े ही प्यार से मेरे लंड पर क्रीम लगायी और एकदम चिकना कर दिया। मैंने नेहा को कहा कि वो अपने दोनों हाथों से अपनी मम्मी के चूत्तड़ पकड़ ले और खींच कर चौड़े करे ताकि ममता आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल जाये। नेहा ने मेरे कहे अनुसार अपनी मम्मी के दोनों विशाल चूत्तड़ों को पकड़ लिया और चौड़े कर दिये जिससे ममता आंटी की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल गया। मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और गाँड के भूरे छेद पर टिका दिया और दूसरे हाथ की उँगलियों से गाँड के छेद को और चौड़ा किया और लंड का सुपाड़ा टिका कर हल्के से झटका दे कर ममता आंटी की कोरी गाँड में सरका दिया। क्रीम की चिकनाहट के कारण मेरा एक इंच लंड ममता आंटी की गाँड के छल्ले में जा कर फँस गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | ममता आंटी बोलीं, “अनिल बहुत दर्द कर रहा है बाहर निकाल ले।” मैंने कहा, “ममता घबराओ नहीं। आराम-आराम से दूँगा। बस तुम हिम्मत कर के लंड लेती रहो।” इतना बोल कर मैंने नेहा को इशारा किया कि वो अपनी माँ की गाँड एक दम कस कर पकड़ ले। नेहा ने भी मेरा कहना माना और मैंने अपने दोनों हाथों से ममता आंटी की कमर पकड़ ली और ज़ोरदार झटका मारा जिससे चिकनाहट होने के कारण मेरा लंड सरकते हुए पूरा सात इंच ममता आंटी की गाँड में समा गया। ममता आंटी को तो जैसे बिजली का शॉक लग गया हो। अगर नेहा ने उनके चूत्तड़ और मैंने उनकी कमर कस कर नहीं पकड़ी होती तो शायद ममता आंटी मेरा लंड निकाल देतीं पर बेचारी मजबूर थी… सिवाये कसमसाने के और गालियाँ देने के अलावा वो कुछ भी नहीं कर सकती थीं। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने भी बिना कुछ परवाह किये बिना अपना पूर लंड ममता आंटी की गाँड में उतार कर ही दम लिया और हल्के-हल्के शॉट देने लगा। ममता आंटी तो दर्द के मारे पागल हो गयी थी और बोले जा रही थीं, “अरे मादरचोद, भोसड़ी वाले मार डाला रे। तेरी माँ का भोंसड़ा मादरचोद! अगर मुझे मालूम होता कि गाँड मरवाने में इतना दर्द होता है तो बहन के लंड तुझे छूने भी ना देती। बहनचोद मैं ज़िंदगी भर तुझे जैसे कहेगा वैसे ही चुदवाऊँगी और चूसूँगी। तू जिसको बोलेगा मैं उसको चुदवा दूँगी तेरे से। मुझे छोड़ दे माँ के लौड़े। हाय मेरी माँ! फट गयी मेरी गाँड। मादरचोद सत्यानाश कर दिया तूने आज मेरी गाँड का। आज तक मैंने बड़े प्यार से बचा कर रखी थी।” ममता आंटी बोलती रहीं पर अब मैं ताव में आ चुका था और हुमच-हुमच कर अपना लंड गाँड में पेल रहा था। ममता आंटी को भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि अब वो कह रही थीं, “मार ले मेरे डार्लिंग! मार ले अपनी आंटी की गाँड। हाय हाय! शूरू-शूरू में तो बहुत दर्द हुआ डार्लिंग पर वाकय में अब बहुत मज़ा आ रहा है। नेहा तू भी अनिल से अपनी गाँड जरूर मरवाना।” करीब बीस पच्चीस मिनट तक ममता आंटी की गाँड मारने के बाद मैंने अपना रस ममता आंटी की गाँड में ही निकाल दिया। दोस्तों! उस दिन के बाद महीने भर जब तक अंकल नहीं आये, मैंने उन दोनों माँ-बेटी को एक ही बिस्तर पर एक साथ नंगा करके खूब चोदा। अंकल के आने के बाद, ममता आंटी को दिन में जब भी समय मिलता, एक बार तो चुदवा ही लेती थी। और मैं हर रोज़ नेहा के साथ सोता था और हम दोनों जम कर चुदाई करते थे। ममता आंटी ने और नेहा ने अपनी सहेलियों का भी खूब मज़ा दिलवाया। ममता आंटी और नेहा के कारण मुझे अलग-अलग औरतों को चोदने का मौका मिला। आशा करता हूँ कि आप सब को मेरी आप-बीती सुन कर मज़ा आया होगा।

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    Eiffel tower in princess palace

    ममता आंटी थोड़ी सी संजिदा हो गयी और बोली, “अनिल तू क्या कह रहा है? तू एक माँ से उसकी बेटी चुदवाने के लिये कह रहा है। मुझे मालूम है कि वोह इतनी सुंदर दिखती है कि कॉलोनी के कईं लड़के उसकी तरफ ऐसे देखते है जैसे वहीं सड़क पर लिटा कर चोद डालेंगे!” मैंने कहा, “आंटी तुम ही ने तो कहा था कि अगर तुम्हें मालूम होता कि तुम्हारी शादी ऐसे गाँडू से होगी तो तुम शादी से पहले जम कर चुदवाती। क्या मालूम नेहा दीदी को भी तुम्हारी तरह इस आग में ना जलना पड़े। घर की बात है… घर में ही रहेगी और अगर नेहा दीदी से मेरे शारिरिक संबंध बन जाते है तो हम तीनों दिन भर चुदाई का मज़ा उठा सकते है। घर की बात घर में ही रहेगी और किसी को मालूम भी नहीं पड़ेगा। अंकल तो सुबह आफिस चले जाते हैं और रात को नौ-दस बजे आते हैं और एक बार नेहा दीदी ने मुझ से चुदवा लिया तो वोह भी ठंडी रहेगी क्योंकि उनकी चूत में भी कीड़े रेंगने तो चालू हो ही गये होंगे, तो क्या पता किससे जा कर चुदवा ले!” ममता आंटी मेरे होंठों को प्यार से चूमते हुए बोली, “अनिल तूने बात तो बहुत सही कही है और मैं नहीं चाहती कि नेहा भी मेरी तरह इसी आग में जले। चल तू चिंता मत कर उसे वापस आने दे। मैं मौका देख कर उसे तैयार कर लुँगी!” बातें करते और सिगरेट पीते हुए काफी देर हो चुकी थी और इस दौरान ममता आंटी बारबार अपने हाथ से मेरा लंड रगड़ते हुए अपनी चूचियाँ मेरे ऊपर घिस रही थीं और नेहा की चूत मिलने की खबर से मेरा लंड फिर से तन कर मैदान में आ गया था। ममता आंटी ने तो सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी मेरा लंड फिर से तैयार हो जायेगा। इस बार ममता आंटी ने कहा कि वोह अपने तरीके से मुझे चोदेंगी, और आराम से एक सिगरेट जला कर मुझे नीचे लिटा कर अपनी दोनो टाँगें चौड़ी कर के मेरे लंड के उपर खड़ी हो गयीं और धीरे-धीरे अपने घुटनों के बल बैठने लगीं। जब उनकी चूत मेरे लंड तक पहुँची तब उन्होंने एक हाथ बड़ा कर मेरा लंड पकड़ा और चूत के मुँहाने पर घिसने लगी, और थोड़ी देर घिसने के बाद गपाक से अपनी जाँघें चौड़ी कर के मेरे लंड पर बैठ गयीं और उछल-उछल कर मुझे चोदने लगीं। मुझे तो इस आसन में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने लेटे हुए अपने हाथ आगे बढ़ा कर उनके फूले हुए मस्त गुबारे जो मदमस्त हो कर झूल रहे थे, पकड़ कर मसलने चलू कर दिये। ममता आंटी ने मुझे करीब आधा घँटा तक इस आसन में चोदा और खूब अपनी चूत का पानी निकाला। हमने उस रात दो बार और संभोग करा और पस्त हो कर एक दूसरे की बाहों में सो गये। हफ़्ते भर तक, जब तक नेहा वापस नहीं आयी हम लोग दिन भर नंगे पड़े रहते थे और एक दूसरे को जी भर के भोगते थे। इस दौरान ममता आंटी ने मुझे कई नये आसन और चोदने के तरीके बताय। हमने ब्लू फ़िल्म भी देखी और उसमें देख-देख कर हम भी उनकी नकल करते हुए एक दूसरे को चोदते थे। नेहा के वापस आने के एक दिन पहले ममता आंटी को अपने भाई के घर जाना पड़ा। जाने से पहले मुझे समझा के गयीं कि “देख कल सुबह नेहा आ जायेगी और मैं परसों से पहले नहीं आ पाऊँगी। अपने मस्ताने पर काबू रखना और यह मत सोचना कि मैंने नेहा को चोदने कि इजाज़त दे दी है तो तू उसे अकेले में पा कर चोद लेगा। मैं बड़े तरीके से उसे समझा कर तेरे साथ चुदवाऊँगी। डार्लिंग मज़ा चुदाई में तब आता है जब मर्द और औरत मिल के संभोग करें!” इतना समझा कर ममता आंटी चली गयीं। अगले दिन सुबह ही नेहा को आना था। मैं ड्राइवर के साथ कार में उसे कॉलेज से दस बजे जाकर ले आया। अबकी बार नेहा को देखने का मेरा नज़रिया ही कुछ और था। मैं रास्ते भर उसे अपनी आँखों से नंगा करता रहा, और नेहा मुझे अपनी ट्रिप के बारे में बताती जा रही थी। उसे क्या मालूम था कि उसकी माँ और मेरे बीच में क्या संबंध बन चूके थे जिस के कारण मुझे उसके बदन की कुँवारी नशीली शराब पीने को मिलने वाली थी। घर आ कर नेहा बोली, “अनिल मैं तो नहा धो कर एक कोक पीयूँगी और सोऊँगी। मैं इतने नहा कर आती हूँ, तुम मेरे लिये एक गिलास में कोक और बर्फ निकाल दो!” मैंने कहा, “कोई बात नहीं दीदी आराम से नहा लो!” मेरे दिमाग में तो सिर्फ़ नेहा को चोदने का नज़ारा घूम रहा था। एका एक मुझे एक आइडिया सुझा जो मैंने एक किताब में पढ़ा था। सोचा क्यों ना ट्राई मार के देखूँ। यही सोच के मैं चुप-चाप ममता आंटी के कमरे में गया और नींद की चार-पाँच टेबलेट ला कर नेहा की कोक में मिला दी। मुझे ममता आंटी ने कल ही बताया था कि जब कईं बार वोह रात को चुदाई के लिये बहुत परेशान हो जाती थीं और सो नहीं पाती थीं तो वोह नींद की गोली लेकर सो जाती थीं। इतने में नेहा भी नहा-धो कर बाहर आ गयी थी। मुझे आज तक पता नहीं चल पाया है कि लड़कियाँ और औरतें, बहन की लौड़ियाँ इतने सैक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं कि जिससे मर्द बे-काबू हो जाये। क्या हर औरत मन ही मन यह चाहती है कि कोई उसे चोदे? नेहा ने भी ऐसी नाइटी पहनी हुई थी जो फ़्रंट ओपेन थी और जिस से सिर्फ उसके चूत्तड़ और आधी जाँघें छिप रही थी और स्लीवलेस होने के कारण उसकी साफ चिकनी बगलें दिख रही थीं। नाइटी का कपड़ा इतना मोटा नहीं था, जिसके कारण उसकी छाती पर उठ रही नोकों से मालूम पड़ रहा था कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी, और जब वोह चौंकड़ी मार कर मेरे सामने पलंग पर बैठी तो मेरा तो बुरा हाल हो गया। उसकी चिकनी जाँघें और पैंटी में कसे हुए उसके चूत्तड़ और चूत की मछलियों को देख कर मेरा लंड तन गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने ऊपर चद्दर डाल कर खुद को शरमिन्दा होने से बचाया। कोक पीते समय नेहा ने बताया कि अबकी बार उसे ट्रिप में बहुत मज़ा आया और उसने अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करी। थोड़ी देर में वोह बोली, “अनिल मुझे बहुत जोर से नींद आ रही है, मैं तो अपने कमरे में सोने जा रही हूँ!” मैंने करीब आधा घंटा वेट करा और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपने लंड को ममता आंटी के हाई हील के सैंडल से सहलाता रहा। उसके बाद मैं उठा और नेहा के कमरे कि तरफ गया। नेहा ए.सी. चला के आराम से दरवाज़ा बंद करके सो रही थी। मैंने चुप-चाप दरवाज़ा खोला और कमरे में घुस गया। नेहा बड़े आराम से बिस्तर पे पीठ के बल सो रही थी और उसकी नाइटी जो पहले से ही छोटी थी, और उठ कर उसकी नाभी तक चढ़ गयी थी, जिससे कमर के नीचे का सब कुछ दिख रहा था। उसकी पैंटी में छुपी हुई चूत के उभार साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। मेरा तो मादरचोद लंड साला हरामी ये देख कर ही खड़ा हो गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरु मस्तराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने नेहा के पास जा कर उसके कँधे पकड़ कर थोड़ा जोर से हिलाया और बोला, “दीदी देखो आपकी सहेली का फोन आया है!” नेहा को कुछ फरक नहीं पड़ा। वोह तो बस बे-खबर हो कर सोती रही। मैंने फिर भी अपने को पक्का करने के लिये फिर से उसे जोर से आवाज़ दी और हिलाया पर उसको नींद की गोली के कारण कोई असर नहीं हुआ। मैंने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो कर नेहा की नाइटी के आगे के बटन खोलने लगा और एक-एक करके सारे बटन खोल दिये। दोस्तों, उस समय मेरे हाथ काँप रहे थे क्योंकि आज मैं इतनी हिम्मत करके नेहा का गोरा दूधिया बदन देखने जा रहा था जिसकी पैंटी और ब्रा सूंघ-सूंघ कर खूब मुठ मारा करता था। नेहा एक दम दूध की तरह गोरी थी और आज से पहले मैं बहुत तड़पा था उसका नंगा बदन देखने के लिये। नाइटी के सारे बटन खुलते ही उसके मस्त खिलौने नंगे हो गये और मैंने देखा कि नेहा के निप्पल भूरे नहीं बल्कि पिंक से थे। नेहा अब सिर्फ मेरे समने एक पैंटी में लेट कर बे-खबर सो रही थी। मैंने झुक के अपने होंठ खोल के नेहा के गुलाबी निप्पल अपने होंठों में दबा लिये और उसकी जवान, अभी तक अनछूई मस्त बत्तीस साईज़ की चूँची अपने हाथ में भर ली। ममता आंटी की बड़ी-बड़ी गदरायी हुई चूचियों को दबाने के बाद जब मैंने नेहा की चूचियाँ दबाईं, तब मालूम पड़ा कि साली लौंडिया कि चूँची क्या चीज़ होती है। ऐसा लग रहा था जैसे किसी सख्त अनार को पकड़ लिया हो। दूसरा हाथ मैंने नेहा की पैंटी में डाल दिया और उसकी बूर को अपने हाथों से फील करने लगा। नेहा की चूत पर मेरा हाथ टच होते ही मैं तो ऐसा गनगनाया कि मैंने नेहा के मस्त कच्चे अनार छोड़ कर दोनों हाथों से उसकी पैंटी उतारने लगा। माँ कसम दोस्तों! क्या साली कुँवारी चूत थी मेरी आँखों के सामने। झूठ नहीं बोलूँगा, इच्छा तो यह करी कि उसकी टाँगें खोल के अपना लौड़ा सरका दूँ उसकी कसी चूत में, पर ममता आंटी की इन्सट्रक्शन याद आ गयी। नेहा की चूत कुँवारी होने के कारण उसकी बूर के लिप्स अभी तक खुले नहीं थे, बल्कि बड़े कायदे से एक लाईन में थे और उसके उसने भी ममता आंटी की तरह अपनी चूत से झाँटें साफ कर रखी थीं। मेरा तो लौड़ा बुरी तरह से अकड़ गया था। मैं भी बिना समय गँवाये मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था और मैं पूरा नंगा नेहा के ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड एकदम नेहा की चिकनी मखमली चूत पर लग गया था। मैंने मारे मस्ती के नेहा के पूरे नंगे बदन को अपनी बाहों में कस कर भर लिया और उसके नरम रस भरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उन्हें चूसने लगा। नेहा की चूचियाँ इतनी सख्त थीं कि मेरी छाती में उसके निप्पल चुभ रहे थे और वो कसे हुए अनार जो मेरे सीने से लग कर थोड़े से दब गये थे, बहुत ही प्यारा सुख दे रहे थे। मेरा बदन तो मारे मस्ती के काँप रहा था, और मैंने अपने आप को थोड़ा सम्भालने के लिये एक सिगरेट जलाई और उसके ऊपर अपना लंड घिसने लगा। शुरू में तो मेरी यह हालत थी कि बस अभी रस निकला, पर बड़ा कँट्रोल करने के बाद मैं अब बड़े आराम से उसकी चिकनी मखमली चूत पर अपना लंड घिस रहा था। दोस्तों! इतना मज़ा आ रहा था कि कलपना करना भी मुशकिल है। सिगरेट खतम होने के बाद मैंने अपने मुँह में उसकी चूँची भर ली और जोर-जोर से चूसना चालू कर दिया। चूचियों का टेस्ट इतना नशीला था कि इतनी देर से रोका हुआ मेरे लंड का लावा पूरा नेहा के पेट पर निकल गया और मैं भी परवाह किये बिना नेहा कि तन्नाई हुई चूचियाँ चुसने में लगा रहा। दोस्तों! मैंने किताबों में सिर्फ पढ़ा था कि जवान चूँची चूसने से लंड तन्ना जाता है पर मैंने तो उस समय खुद अनुभव किया कि मादरचोद मुश्किल से तीन या चार मिनट में फिर से गन्ना बन गया। मैंने उठ कर कपड़े से नेहा का पेट साफ करा और एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर नेहा के होंठों पर घिसने लगा। क्या सनसनाहट हो रही थी कि मेरा लंड और कस गया।

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    She’s got game, doesn’t she?! ♠️❤️♣️

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    मैं ३५ साल का मस्त जवान हूँ और मेरा लण्ड चोदने के लिए तड़पता रहता है। बीवी को चोद-चोद कर ये अब कुछ नया चाहता है। हमारे घर में पार्ट-टाईम नौकरानियाँ काम करतीं हैं। लेकिन कोई भी सुन्दर नहीं थी। बीवी बड़ी होशियार थी। सब काली-कलूटी और भद्दी-भद्दी चुन-चुनकर रखती थी। जानती थी ना कि मेरे मियाँ को चूत का बड़ा शौक है। आख़िर में जब कोई नहीं मिली तो एक को रखना ही पड़ा – जो कि १९-२० साल की मस्त जवान कुँवारी लड़की थी। साँवला रंग था और क्या यौवन ! सुन्दर ऐसी की देख कर ही लण्ड खड़ा हो जाए। मम्मे ऐसे गोल-गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज़ में समाते ही नहीं। बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि चोदने के लिए एकदम मस्त चीज़ थी। सोच-सोच कर मैंने कई बार मुट्ठ भी मारी। बहुत ज़ोरों की तमन्ना थी कब मौक़ा मिले और कब मैं उसके बुर में अपना लंड घुसा दूँ। वह भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी-चोरी नापता रहता था। मन-ही-मन उसे कई बार नंगा कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच-सोच कर मेरा लंड गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा होता। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल-गोल चूचियों को दबाऊँ। एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानों करंट सा लग गया और वो शरमाती हुई खिलखिला पड़ी और भाग गई। मैंने मन-ही-मन कहा मौका आने दे, रानी ! तुझे खूब चोदूँगा। लण्ड तेरी चिकनी बुर में डाल कर भूल जाऊँगा। चूची को चूस-चूस कर प्यास बुझाऊँगा और दबा-दबा कर मज़े लूँगा, होठों को तो खा ही जाऊँगा। रानी उसका प्यारा सा नाम था। कहते हैं उसके घर में देर है पर अन्धेर नहीं। एक दिन मेरी बीवी ने कहा- मैं मायके जा रही हूँ, रानी आएगी तो घर का काम करवा लेना। रविवार का दिन था। बच्चे भी बीवी के साथ चले गए। और मेरे लंड महाराज तो उछल पड़े। मौका चूकने वाला नहीं था। लेकिन शुरू कैसे करें। कहीं चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गई तो? दोस्तों, तुम यह जान लो कि लड़कियाँ कितनी ही शर्माएँ, लेकिन दिल में उनकी इच्छा रहती है कि कोई उन्हें छेड़े या चोदे।। मैंने रानी को बुलाया और उसे देखते हुए कहा, “रानी, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो?” वो बोली, “बाबूजी, इतनी पैसे कहां कि चोली ख़रीद सकूँ ! आप दिलवाएँगे?” मैंने कहा, “दिलवा तो मैं दूँगा। लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी ने तुझे छेड़ा है।” उसने जवाब दिया, “नहीं साहब।” मैंने कहा, “इसका मतलब तू एकदम कुँवारी है।” “जी साहब।” “अगर मैं कहूँ कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज़ तो नहीं होगी?” “नाराज़ क्यों होऊँगी साहब। आप तो बहुत अच्छे हो।” बस यही उसका सिग्नल था मेरे लिए। मैंने हिम्मत रख कर पूछा, “अगर मैं तुम्हे थोड़ा प्यार करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?” अपने पैर की उँगलियों को ज़मीन पर रगड़ती हुई वह बोली, “आप तो बड़े वो हो साहब।” मैंने आगे बढ़ते हुए कहा, “अच्छा, अपनी आँखें बन्द कर ले, और अभी खोलना नहीं।” उसने आँखें बन्द कीं और हल्के से मुँह ऊपर की तरफ कर लिया। मैंने कहा – बेटा लोहा गरम हैं, मार दे हथौड़ा। आहिस्ता से पहले मैंने उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर रख दिए अपने होंठ उसके होठों पर। हाय, क्या गज़ब की लड़की थी। क्या स्वाद था। दुनिया की कोई भी शराब उसका मुक़ाबला नहीं कर सकती थी। ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बाँध टूट गए। मेरे होठों ने कस कर उसके होठों को चूसा और चूसते ही रहे। मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया। मेरी जीभ उसकी जीभ का स्वाद लेने लगी। इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा। बस मज़ा लेती रही। अचानक उसने आँखों खोलीं और बोली, “साहबजी, बस, कोई देख लेगा।” मैंने कहा, “रानी, अब तो मत रोको मुझे। सिर्फ एक बार।” “एक बार, क्या साहब?” दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने उसके कान के पास जाकर कहा, “चुदवाएगी? एक बार बुर में लंड घुसवाएगी? देख मना मत करना। कितनी सुन्दर है तू।” यह कहकर मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और दाहिने हाथ से उसकी बाईं चूचि को दबाने लगा। मुँह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होठों पर, और हर जगह चूमने लगा… पागलों की तरह। क्या चूची थी, मानों सख्त संतरे। दबाओ तो छिटक-छिटक जाएँ। उफ्फ, मलाई थी पूरी की पूरी। रानी ने जवाब दिया, “साहबजी, मैंने ये सब कभी नहीं किया। मुझे शरम आ रही है।” उखड़ी साँसों से मैंने कहा, “हाय मेरी जान रानी, बस इतना बता, अच्छा लगा या नहीं। मज़ा आ रहा है कि नहीं? मेरा तो लण्ड बेताब है जानेमन। और मत तड़पा।” “साहबजी, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जाएगा तो?” बस मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया। कस कर चूमते हुए मैंने उसके कपड़ों को उतारा। फिर अपने कपड़े भी जल्दी से उतारे। ७” मेरा लण्ड फड़फड़ाते हुए बाहर निकला। देखकर उसकी आँखें बन्द हो गईं। बोली, “हाय, ये क्या है? ये तो बहुत बड़ा है।” “पकड़ ले इसे मेरी जान।” कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया। उसके बदन को पहली बार नंगा देखकर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा। चूची ऐसी मस्त थी कि पूछो मत। चूत पर बाल इतने अच्छे लग रहे थे कि मेरे हाथ उसकी तरफ बढ़ ही गए। क्या गरम चूत थी। उँगली आहिस्ता से अन्दर घुसाई। रस बह रहा था और उसकी बुर गीली हो गई थी। गुलाबी-गुलाबी बुर को उँगलियों से अलग किया, और मैंने अपना लंड आहिस्ता से घुसाया। हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। मुँह से उसके होठों को मैं चूस रहा था। “आह, साहबजी, आहिस्ता, लग रहा है।” “रानी, मज़ा आ रहा है?” “साहबजी, जल्दी करिए ना जो भी करना है।” “हाँ मेरी जान, बोल क्या करूँ?” “डालिए ना। कुछ करिए ना।” “रानी, बोल क्या करूँ।” कहते हुए मैंने लंड को थोड़ा और घुसाया। “अपना ये डाल दीजिए।” “बोल ना, कहाँ डालूँ मेरी जान, क्या डालूँ।” “आप ही बोलिए ना साहबजी, आप अच्छा बोलते हैं।” “अच्छा, ये मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी बुर में घुस गया। और अब ये तुझे चोदेगा।” “चोदिए ना, साहबजी।” उसके मुँह से सुनकर तो लंड और भी मस्त हो गया। “हाय रानी, क्या बुर है तेरी, क्या चूची है तेरी। कहाँ छुपा कर रखा था इतने दिन। पहले क्यों नहीं चुदवाया।” “साहबजी, अपका भी लंड बहुत मज़ेदार है। बस चोद दीजिए जल्दी से।” और उसने अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | अब मैंने उसकी दाहिनी चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। एक हाथ से दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए, मैं उछल उछल कर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। जन्नत का मज़ा आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस चोदता ही रहूँ, चोदती ही रहूँ इस प्यारी-प्यारी चूत को। मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से उसकी गुलाबी गीली गरम-गरम बुर को चोद रहा था। “हाय रानी, चोद रहा है ना। बोल मेरी जान, बोल।” “हाँ साहब, चोद रहा है। बहुत मज़ा आ रहा है। साहब आप बहुत अच्छा चोदते हैं। साहब, ये मेरी बुर आपके लंड के लिए ही बनी है। है ना साहब। साहब, चूची ज़ोर से दबाइए। साहब, ओओओओहह, मज़ा आ गया, ओओओओओहहहहह।” अचानक, हम दोनों साथ-साथ ही झड़े। मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी-प्यारी बुर में घोल दिया। हाय क्या बुर थी। क्या लड़की थी, गरम-गरम हलवा। नहीं उससे भी ज़्यादा स्वादिष्ट। मैंने पूछा, “रानी, तेरा महीना कब हुआ था री?” शर्माते हुए बोली, “परसों ही खतम हुआ। आप बड़े वो हैं, यह भी कोई पूछता है?” बाहों में भर कर होठों को चूमते हुए, चूचियों को दबाते हुए मैंने कहा, “मेरी जान, चुदवाते-चुदवाते सब सीख जाएगी।” एकदम सुरक्षित था। गर्भवती होने का कोई मौक़ा नहीं था अभी। दोस्तों, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज्यादा मज़ा आया। क्योंकि लंड भी देर से झड़ा। चूत उसकी गीली थी। चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी साली। उसकी चूचियों को तो मसल-मसल कर और चूस-चूस कर निचोड़ ही दिया मैंने। जाने फिर कब मौक़ा मिले। आज इसका बुर चूस ही लो। बुर का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि किसी भी शराब में ऐसा नशा नहीं। चोदते समय तो मैंने उसके होठों को खा ही लिया। “ये मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान। तोरी बुर में मेरा लंड – उसकी को चुदाई कहते हैं रानी। कहाँ छुपा रखा था ये चूत जानी।” कहते हुए मैं बस चोद रहा था और मज़ा लूट रहा था। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | “चोद दीजिए साहबजी, चोद दीजिए। मेरी बुर को चोद दीजिए।” कह-कह कर चुदवा रही थी मेरी रानी। दोस्तों, चुदाई तो खत्म हुई लेकिन मन नहीं भरा। दबोचते हुए मैंने कहा, “रानी, मौका निकाल कर चुदवाती रहना। तेरी बुर का दीवानी है यह लंड। मालामाल कर दूँगा जानेमन।” यह कह कर मैंने उसे ५०० रूपये दिए और चूमते हुए, मसलते हुए रूख़सत किया।

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    दोस्तों मैने गाण्ड मारने पर बहुत कहानियाँ पढ़ी हैं, कुछ अच्छी होती हैं लेकिन ज़्यादातर झूठ होती हैं। ऐसा लगता है यह कहानी नहीं बल्कि लेखक की कल्पना है। जिन लोगों को सेक्स नहीं मिलता या जो अपनी ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाते वो कल्पना से कहानियाँ लिखते हैं। अगर इन कहानियों को सच समझा जाए तो गाण्ड मारना बहुत आसान लगता है। बस, लंड के सुपारे को गाण्ड के मुँह पर रखो और ज़ोर से धक्का लगाओ- हो गया… लड़की ज़ोर से चिल्लाएगी ……” ऊऊऊऊुउउइ मर गयी……… मेरी गाण्ड फाड़ दी ………..” और थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगेगा !! असलियत में ऐसा नहीं होता है। आप लोगों ने भी ऐसी बहुत कहानियाँ पढ़ी होंगी। मैने बहुत गाण्ड मारी है और मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ कि गाण्ड मारना इतना आसान नहीं है। मेरे अनुभव में तो चूत लेना भी इतना आसान नहीं होता जितना यह लोग गाण्ड मारना समझते हैं। अगर आप सचमुच में गाण्ड मारना चाहते हो और आप चाहते हो कि लड़की को भी उतना ही मज़ा आए जितना आपको आता है और वो बार बार आपसे गाण्ड मरवाने की चाहत रखे तो आपको मैं सही विधि बताता हूँ। ध्यान से पढ़िए आपकी मनोकामना पूरी होगी…. इस विधि में लड़की की गाण्ड की बात की गई है लेकिन अगर आप लड़के की गाण्ड मारना चाहते हैं तो भी यही विधि लागू होगी क्योंकि गाण्ड दोनों की एक जैसी होती है।

    ज़रूरी बातें : गाण्ड मारने से पहले कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होगा। अगर इन बातों का ध्यान रखा गया तो लड़की को भी उतना ही मज़ा आएगा जितना आपको और वो आपसे बार बार गाण्ड मरवाने की कोशिश करेगी। अगर इन ज़रूरी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया तो हो सकता है आप गाण्ड कभी मार ही नहीं पाएँगे !

    लड़की की मंज़ूरी सबसे पहले यह बहुत ज़रूरी है कि लड़की गाण्ड मरवाने के लिए राज़ी हो। इसके लिए आपको उसे यह भरोसा दिलाना होगा कि आप ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और अगर किसी भी वक़्त वो मना करती है तो आप रुक जएँगे। लड़की को ज़्यादा दर्द नहीं होना चाहिए। दर्द को कम करने का तरीक़ा इस विधि में आगे बताया गया है।

    गाण्ड की बनावट भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिया नहीं बनाया इसलिए इसकी बनावट, पोज़िशन और प्रक्रिया ऐसी है कि आदमी का लिंग आसानी से उस में प्रवेश नहीं कर सकता (जैसा की चूत में कर सकता है)। इसके लिए आप को गाण्ड की बनावट के बारे में जानकारी होनी चाहिए। गाण्ड का काम शरीर से मल बाहर निकलना है। इसके मुँह की तरफ दो छल्लेदार मांसपेशियाँ (रिंग मसल्स) होते हैं जो कि अपनी इच्छा से खोले या बंद किए जा सकते हैं। एक छल्ला बिल्कुल मुँह पर होता है और दूसरा करीब पौन इंच अंदर की तरफ होता है। इन मांसपेशियों को आप अपनी गाण्ड में महसूस कर सकते हैं। अपनी बीच की उंगली पर तेल या क्रीम लगा कर अपनी गाण्ड में डालने की कोशिश करें। जो बाहर की मांसपेशी है वो अपने आप सिमट कर सिकुड़ जाएगी क्योंकि उसका काम है बाहर की चीज़ को अंदर जाने से रोकना ! अपने आप को थोड़ा रिलॅक्स करो और गाण्ड की मांसपेशी को ढीला करो तो आपकी उंगली थोड़ा अंदर चली जाएगी। अब आप दूसरी मांसपेशी को महसूस कर सकेंगे जो कि आपकी उंगली को और अंदर नहीं जाने देगी। इस मांसपेशी को भी आप ढीला कर सकते हैं और थोड़ी कोशिश के बाद आपकी उंगली इसके भी पार हो जाएगी। जब दूसरी मांसपेशी पार कर ली तो फिर कोई और रुकावट नहीं होगी और आपकी उंगली आसानी से अंदर जा सकती है। गाण्ड की ये मान्सपेशियाँ काफ़ी मज़बूत होती हैं और इनको आसानी से पार नहीं किया जा सकता। ख़ास तौर से अगर लड़की की मर्ज़ी ना हो तो। दूसरी बात यह भी है कि उंगली के मुक़ाबले में लंड का घेरा (साइज़) ज़्यादा होता है, इस कारण भी गाण्ड के अंदर डालना मुश्किल होता है। गाण्ड की एक ख़ासियत है कि चूत की तरह इसमें कोई तरल (लिक्विड) चीज़ का प्रवाह नहीं होता। जब लड़की सेक्स की लिए उत्सुक होती है तो उसकी चूत में अपने आप गीलापन होता है जिससे लंड का प्रवेश आसान हो जाता है। यह प्रकृति का तरीक़ा है क्योंकि चूत को बनाया ही इस काम के लिए है। गाण्ड में कोई प्राकृतिक चिकनाहट नहीं होती इसलिए वो हमेशा सूखी सी रहती है। ऐसी हालत में लंड के प्रवेश से ना केवल लड़की को दर्द होगा बल्कि पुरुष को भी मज़ा नहीं आएगा। कुछ देर के बाद लंड में भी दर्द हो सकता है तो चुदाई का मज़ा किरकिरा हो सकता है। गाण्ड की इन मांसपेशियों के इर्द गिर्द बहुत सी चेतना-नसें(नर्व-एंडिंग्स) होती हैं जिनमें रक्त संचार होता है। इस कारण गाण्ड मरवाने के दौरान लड़की को भी बहुत मज़ा आता है, शर्त यह है कि उसे दर्द ना हो। गाण्ड ठीक से ना मारी जाए तो लड़की को बहुत दर्द होता है।

    गाण्ड की बनावट से यह साफ हो गया है कि: 1) गाण्ड में कोई बाहर की चीज़ आसानी से अंदर नहीं जा सकती। 2) गाण्ड के अंदर कुछ भी डालने के लिए गाण्ड की मांसपेशियाँ को ढीला करना ज़रूरी है। 3) गाण्ड की मांसपेशियों को लड़की अपनी मर्ज़ी से ढीली या टाइट कर सकती है। 4) गाण्ड को बाहरी चिकनाहट की ज़रूरत होती है। 5) गाण्ड में नर्व एंडिंग्स होती हैं जिससे लड़की को गाण्ड मरवाने मैं मज़ा आता है। (यही कारण है कि दुनिया में इतने पुरुष समलिंगी होते हैं और खुशी खुशी गाण्ड मरवाते हैं)

    गाण्ड की तैयारी क्योंकि भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिए नहीं बनाया है तो यह आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि आप उसे इस काम के लिए तैयार करें। यह तैयारी तुरन्त नहीं हो सकती। इसमें 2-3 दिन से लेकर 6-7 दिन तक लग सकते हैं। जितनी आराम से तैयारी करेंगे, लड़की को आप पर उतना ही भरोसा बढ़ेगा और आपको भी उतना ही सुख गाण्ड मारने में मिलेगा। इसलिए जल्दबाज़ी मत करें।

    गाण्ड की सफाई अगर लड़की ने मंज़ूरी दे दी है और वो गाण्ड मरवाने का अनुभव करना चाहती है तो अपने आप वो अपनी गाण्ड को अच्छी तरह से साफ करके आएगी। गाण्ड अगर गंदी होगी तो सारा मज़ा खराब हो जाएगा। सबसे मज़ेदार तरीक़ा है जब आप दोनों एक साथ स्नान करो और इस दौरान एक दूसरे के गुप्तांगों को सहलाओ और साफ करो।

    ज़रूरी सामान साफ बिस्तर 1-2 सख़्त तकिये 1-2 छोटे तौलिए 1 मोटी मोमबत्ती (1.5 – 2.0 इंच चौड़ी, 6-8 इंच लंबी) 1 ट्यूब के-वाइ जेली / नारियल तेल (तेल से जेली बेहतर है) ताडालफिल टॅबलेट (गाण्ड मारने के लिए लंड सख़्त होना बहुत ज़रूरी है। अगर आपका लंड शिथिल है या पूरी तरह खड़ा नहीं है तो एक ताडालफिल या सिल्डेनफिल टॅबलेट सियलिस/वियागरा लें सकते हैं जैसे फ़ोर्ज़ेस्ट 10 या फ़ोर्ज़ेस्ट 20. जिनको हृदय रोग या रक्त चाप की बीमारी है उन्हें यह गोली नहीं लेनी चाहिए। इस गोली का असर 24 से 36 घंटे तक रहता है। गाण्ड मारने से 15-20 मिनट पहले ले सकते हैं। कभी भी एक गोली से ज़्यादा ना लें !) के वाइ जेली की ट्यूब रु 90/- और फ़ोर्ज़ेस्ट (रु 200/- की 4) किसी भी केमिस्ट की दुकान पर मिल जाएगी।

    शुरुआत ध्यान रखो कि आपकी उंगली के नाख़ून बढ़े हुए नहीं हैं और ठीक तरह से कटे हुए हैं। नाख़ून के किनारे तेज़ नहीं होने चाहिए, उन्हें ठीक से फ़ाइल कर लो। अगर नाख़ून बढ़े होंगे तो जब उंगली लड़की की गाण्ड में डालोगे तो उसे लग सकता है। लड़की को गाण्ड की बनावट के बारे में और रिंग मसल्स को किस तरह से ढीला या टाइट कर सकते हैं, के बारे में बताओ। अब प्यार से लड़की के कपड़े उतारो और एक साफ बिस्तर पर पीठ के बाल लिटा दो। उसकी टाँगों को मोड़ दो और थोड़ा खोल दो। अब उसके चूतड़ों के नीचे 1-2 सख़्त तकिये रख कर उसके चूतड़ उपर की तरफ उठा दो जिससे उसकी चूत और गाण्ड साफ दिखाई दे। खुद भी पूरी तरह नंगे हो जाओ। अब उससे प्यार भारी बातें करो और पूरे शरीर को सहलाओ, खास तौर से उसके गाल, गर्दन, स्तन, चूचुक, पेट, जांघें और टाँगें ! कुछ देर तक उसकी चूत और गाण्ड को हाथ ना लगाएँ। थोड़ी देर में लड़की की चूची सख़्त हो जाएगी और वो अपनी टाँगें और खोल देगी। अब उसकी चूत को प्यार से सहलाना शुरू करो जिससे वो उत्तेजित हो जाए और चूत में से पानी का रिसाव होने लगे। अब लड़की चुदाई के लिए तैयार है पर हमारा इरादा उसकी गाण्ड मारने का है। अपनी एक उंगली पर अच्छी तरह से के-वाइ जेली (या नारियल तेल) लगा कर लड़की की गाण्ड के मुँह पर सहलाओ। अभी उंगली अंदर डालने की कोशिश ना करो। उसे अपनी मांसपेशियाँ बारी बारी ढीली और टाइट करने को कहो। आप अपनी उंगली पर उसकी रिंग मसल्स को महसूस कर सकोगे। लड़की से प्यारी प्यारी बातें करो और उसको रिलॅक्स होने को कहो। थोड़ी देर में जब लड़की रिलॅक्स होने लगेगी तो उसकी गाण्ड भी थोड़ी ढीली हो जाएगी। अब अपनी उंगली पर थोड़ी और जेली लगा कर धीरे धीरे उसकी गाण्ड के अंदर धकेलो। अगर लड़की गाण्ड को टाइट कर ले तो फिर उसे विश्वास दिलाओ कि उसे दर्द नहीं होने दोगे। ज़रूरत हो तो उंगली बाहर निकल लो और उसकी चूत, जांघें और बूब्स को प्यार से सहलाओ। जब लड़की दोबारा रिलॅक्स हो जाए तो उंगली पर जेली लगा कर एक बार और गाण्ड में डालने की कोशिश करो, जल्दबाज़ी नहीं करना। गाण्ड की बाहरी रिंग मसल को धीरे धीरे ढीला कर के उंगली को करीब आधा इंच अंदर डाल दो। अब धीरे धीरे उंगली को आधा इंच तक अंदर बाहर करो। देखो कि लड़की को दर्द नहीं हो रहा है। अगर लड़की खुश नहीं है तो उंगली अंदर रख कर रुक जाओ और थोड़ी देर बाद फिर शुरू करो। अगर लड़की खुश है तो धीरे धीरे उंगली को और अंदर करो। कुछ दूर तक तो उंगली अंदर चली जाएगी पर फिर ऐसा लगेगा जैसे आगे कोई रुकावट है। यह उसकी गाण्ड की दूसरी रिंग मसल है। इसको पार करने की लिए एक बार फिर लड़की को रिंग मसल ढीला करने के लिए बोलो। (इस वक़्त लड़की को अपनी गाण्ड पर नीचे के तरफ ज़ोर लगाना चाहिए जैसा कि पॉटी करते वक़्त लगाते हैं, ऐसा करने से रिंग मसल खुल जाएगी और आप अपनी उंगली उसके पार ले जा सकते हैं). अगर लड़की रिलॅक्स नहीं करती है तो आपको धीरज रख कर धीरे धीरे उंगली से उसकी रिंग मसल को खोलने की कोशिश करनी होगी। याद रहे, कोई काम जल्दबाज़ी में ना करो। देखा जाए तो इस क्रिया में भी आप काफ़ी मज़ा ले सकते हो। किसी भी वक़्त अगर लड़की को तकलीफ़ होने लगे तो उंगली तुरंत बाहर निकाल लो और उसको प्यार करो। उसे यह पूरा विश्वास होना चाहिए कि गाण्ड मारने के वक़्त आप उसे तकलीफ़ नहीं दोगे। जब उंगली दूसरी रिंग मसल को पार कर जाए तो आपकी उंगली ने फ़तेह पा ली है। अब आप आराम से उंगली को जितना अंदर डालना चाहो डाल सकते हो। ध्यान रहे कि उंगली पर जेली या तेल अच्छी तरह लगा हो। अगर सूख गया है तो उंगली बाहर निकल कर दोबारा लगा लो और फिर से धीरे धीरे अंदर डालो। अगर एक बार उंगली अंदर चली गई है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब हमेशा आसानी से चली जाएगी। गाण्ड की मसल्स तो फिर से बंद हो गई होंगी, इसलिए हर बार गाण्ड में धीरे धीरे और प्यार के साथ ही प्रवेश करना है। जब आपकी एक उंगली गाण्ड के अंदर बाहर जाने लगे और लड़की को तकलीफ़ नहीं हो रही हो तो आप यही प्रक्रिया दो उंगलियों पर जेली लगा कर कोशिश करो। इसमें शुरू में थोड़ी मुश्किल होगी क्योंकि गाण्ड का छेद छोटा होता है। एक उंगली तो चली जाती है पर दो उंगलियाँ मोटी होती हैं. लेकिन यह काम भी प्यार से और धीरज से हो जाएगा। आप महसूस करोगे कि जैसे जैसे लड़की को आप पर भरोसा बढ़ेगा वो इस काम में आपको सहयोग देगी और थोड़ा बहुत दर्द भी सहन करने लगेगी। जब आपकी दो उंगलियाँ पूरी तरह अंदर चली जाएँ तो धीरे धीरे उंगलियों को दोनो तरफ घुमाना शुरू करो, इससे गाण्ड का पूरा छेद ढीला होगा। साथ ही साथ उंगलियों को अंदर बाहर भी करो। हो सकता है इतना सब कुछ करने के बाद आप दोनों थक गये हों। अगर ऐसा है तो उंगलियाँ बाहर निकाल लो और आप दोनों कुछ और कार्यवाही कर सकते हो। अगर लड़की खुश है तो वो आपके लंड को मुँह में ले कर चूस सकती है जिससे आपके तने हुए लंड को आराम मिलेगा। यह मैं इस लिए कह रहा हूं क्योंकि उंगली करने के चक्कर में आप का लंड ज़रूर तैयार हो गया होगा। पर अभी मंज़िल बहुत दूर है और आप को धीरज से काम करना होगा। दूसरी बात यह है कि जो लड़की गाण्ड मरवाने के लिए तैयार होगी वो लंड तो चूस ही लेती होगी। अगर नहीं करती है तो उसे मेरी “लंड चूसने की विधि” पढ़नी चाहिए। चलिए, आप दोनों ने आराम कर लिया। अब आगे बढ़ते हैं ! अब एक मोटी मोमबत्ती लो जिसका घेरा आपके तने हुए लंड के बराबर हो। इसकी लंबाई 6 इंच से कम नहीं होनी चाहिए। मोमबत्ती को अच्छी तरह चिकना कर लो। मोमबत्ती का सिरा पैना (शार्प) नहीं होना चाहिए। उसे चाकू से छील करके लंड-नुमा शेप दे दो। अब आगे के 3-4 इंच पर अच्छी तरह से जेली लगा लो। एक बार फिर लड़की को रिलॅक्स होने के लिए बोलो और उसकी गाण्ड के अंदर और बाहर भी अच्छी तरह से जेली लगा दो। कभी भी जेली लगाने में कंजूसी ना करो। अब मोमबत्ती का सिरा गाण्ड के मुँह पर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने की कोशिश करो। शुरू में मुश्किल होगी। अगर ज़रूरत हो तो गाण्ड में एक उंगली डाल कर उसकी दोनों रिंग मसल्स को ढीला कर लो। लड़की को भी गाण्ड ढीली करने को कहो। जब मोमबत्ती करीब आधा इंच अंदर चली जाए तो एक दो बार उतना ही अंदर बाहर करो। लड़की के इशारों का ध्यान रखो कि उसे कोई तकलीफ़ तो नहीं हो रही। उससे बातें करते रहो। जब लड़की आधा इंच तक अंदर बाहर को सहन करने लगे तो आप मोमबत्ती को घुमाते हुए और अंदर डालने की कोशिश करो। (यकीन करो कि जेली सूख ना गई हो. ज़रूरत हो तो और लगा लो). मोमबत्ती थोड़ा और अंदर जाएगी और फिर रुक जाएगी। अब तो आपको मालूम है यह क्यों रुकी है, दूसरी रिंग मसल सामने है। लड़की के स्तनों को चूमो और उसकी चूत को सहलाओ। साथ ही उसे रिलॅक्स करने और गाण्ड को ढीला करने को कहो। जैसे ही वो गाण्ड को रिलॅक्स करेगी, मोमबत्ती आराम से अंदर चली जाएगी। अब थोड़ा इंतज़ार करो जिससे लड़की मोमबत्ती की मोटाई को अपनी गाण्ड में महसूस कर सके और उसका शरीर इस नई फीलिंग को समझ सके। थोड़ी देर के बाद मोमबत्ती को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू करो। बाहर करते वक़्त लड़की को कोई तकलीफ़ नहीं होगी पर अंदर करते वक़्त आप को ध्यान रखना होगा कि जल्दबाज़ी ना हो। अगर जेली कम हो गई हो या सूख गई हो तो और लगा लो। इस तरह मोमबत्ती से आप उसकी गाण्ड को चोदना शुरू करो। गुरु मस्तराम पर और भी बहुत मस्त मस्त तरीके है जो आप पढ़ कर ट्राई कर सकते है | धीरे धीरे लड़की की तकलीफ़ कम हो कर ख़तम हो जाएगी और वो आनंद महसूस करने लगेगी। अब आप ४-५ इंच तक मोमबत्ती अन्दर बाहर कर सकते हो। जब तक लड़की चाहे उसे मोमबत्ती से चोदते रहो और फिर धीरे धीरे मोमबत्ती को बाहर निकाल लो। यह काम भी धीरे धीरे ही करना चाहिए। मेरी राय में आपको यह उंगली और मोमबत्ती वाली प्रक्रिया दो तीन दिन तक करनी चाहिए। वैसे भी अब तक आप दोनों थक गये होंगे और इंतज़ार का फल हमेशा मीठा होता है। उम्मीद है आपने दो तीन दिन तक बताई हुई प्रक्रिया कर ली है और अब लड़की अपनी गाण्ड की मसल्स को ढीला और टाइट करना सीख गई है।

    गाण्ड मारना मुबारक हो !! अब आपकी साथी लड़की गाण्ड मरवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। जिस दिन का इंतज़ार था वो आ गया है। आशा है आप भी तैयार होंगे। गाण्ड मारने के लिए ज़रूरी है कि आपका लंड मज़बूती से खड़ा हो। वैसे तो पहली बार गाण्ड मारने की कामना में आपका लंड अपने आप ही तना हुआ होगा लेकिन अगर ऐसा नहीं है (और आप हृदय या रक्त चाप के रोगी नहीं हो) तो आप फ़ोर्ज़ेस्ट १० या २० की एक गोली करीब 30 मिनट पहले ले सकते हो। अगर लड़की भरोसे वाली नहीं है तो कॉन्डोम का इस्तेमाल ज़रूर करो क्योंकि एच आई वी का खतरा गाण्ड मारने में सबसे ज़्यादा होता है। लेकिन अगर आप एक दूसरे को जानते हो और एक दूसरे पर भरोसा है तो कॉन्डोम की ज़रूरत नहीं है। एक ज़रूरी बात और है- कभी भी गाण्ड मारने के दौरान या उसके एकदम बाद, अपने लंड को लड़की की चूत में नहीं डालो। ऐसा करने से लड़की को चूत में इंफेक्शन हो सकता है। अगर चूत मारनी है तो पहले लंड को अच्छी तरह से धो लो।

    गाण्ड मारने के आसन गाण्ड मारने के दो आसन हैं। इन दो बेसिक आसनों के कई रूप हो सकते हैं जो आप अपने आप बना सकते हैं। आसन 1 इसमें लड़की पीठ के बाल लेटी होती है जैसा इस विधि के शुरू में बताया गया है और उसके चूतड़ के नीचे तकिये रखे जाते हैं जिससे उसकी गाण्ड उपर उठ जाए। इसको मिशनरी पोज़िशन या मॅन सुपीरियर पोज़िशन भी कहते हैं। आसन 2 इसमें लड़की अपने घुटने और हाथों पर होती है और उसकी गाण्ड की ऊँचाई आप अपने हिसाब से उपर नीचे कर सकते हो। कुछ लड़कियाँ अपना सर नीचे बिस्तर पर टिका देती हैं और गाण्ड उपर की तरफ उठा देती हैं। इसको रियर एंट्री या डॉगी स्टाइल भी कहते हैं।

    दोनों ही आसान ठीक हैं और आपको जो अच्छा लगे उसे इस्तेमाल करो। पहले आसन में लड़की आराम से होती है और आप उसके स्तन और चूत को देख व सहला सकते हो। लड़की भी आप को देख सकती है। आप एक दूसरे को किस कर सकते हो लेकिन लंड पूरा अंदर नही जा पाता। दूसरे आसन में लड़की जल्दी थक जाती है और आपको देख नहीं सकती। आप भी उसकी चूत और बूब्स को नहीं देख सकते हो ना ही ठीक से सहला सकते हो। लेकिन इस आसन में लंड ज़्यादा अंदर जा सकता है। इसमें लड़की भी पीछे की तरफ धक्का देकर लंड को प्रवेश में मदद कर सकती है।

    चलिए, अब गाण्ड मारते हैं! लड़की को पहले की तरह आरामदेह पोज़िशन में बिस्तर पर लिटा दो। उसके पूरे तन को अच्छी तरह से प्यार करो और उसे मीठी मीठी बातें बोलो। उसके पूरे शरीर को सहलाओ तथा चूमो। उसकी चूत जब गीली हो जाए तो उसे उंगली से थोड़ी देर तक चोदो और उसकी भग्नासा के इर्द गिर्द सहलाओ। कुछ देर में लड़की चुदाई के लिए तैयार हो जाएगी। अब पहले की तरह जेली लगा कर शुरू में एक और फिर दो उंगलियों से उसकी गाण्ड को तैयार करो। लड़की अब तैयार है, उम्मीद है आप का लंड भी तैयार होगा। जब पहली बार गाण्ड मारनी हो तो मेरी राय में दूसरा वाला आसान इस्तेमाल करना चाहिए (डॉगी स्टाइल) जिससे लड़की आपकी मदद कर सके और लंड के प्रवेश को कंट्रोल कर सके। तो लड़की को डॉगी स्टाइल में आने को कहो और उसके चूतड़ की ऊँचाई को अपने लंड की उँचाई के हिसाब से ऊपर नीचे करो। उसका सर आराम से बिस्तर पर रह सकता है। अपने पूरे लंड पर खूब अच्छी तरह से जेली लगा लो और लड़की की गाण्ड के अंदर बाहर भी जेली अच्छे से लगा लो। एक बार फिर दो उँगलियों से उसकी गाण्ड को ढीला कर लो। अब अपने लंड के सुपारे को गाण्ड के छेद पर रखो और धीरे से अंदर के तरफ धकेलो। अगर आपका लंड मोमबत्ती से बड़ा है तो धीरज से काम लो। धीरे धीरे, प्यारी-प्यारी बातें करते हुए और एक हाथ से उसकी चूत को सहलाते हुए अपने लंड को गाण्ड में धकेलते रहो। लड़की को अपनी गाण्ड ढीली करने के लिए याद दिलाते रहो। एक बात और है, जब हम गाण्ड की मांसपेशी को ढीला करते हैं तो वो सिर्फ़ एक क्षण (सेकेंड) के लिए होती है और फिर टाइट हो जाती है। उसको अपनी मर्ज़ी से हम ज़्यादा देर तक ढीला नहीं रख सकते। आप इस बात को अपनी गाण्ड में खुद उंगली डाल कर महसूस कर सकते हो। इसलिए आप और लड़की के बीच ताल-मेल की ज़रूरत है। जब आप अंदर को धकेलो, तभी लड़की गाण्ड ढीली करे नहीं तो फ़ायदा नहीं होगा। अगर गाण्ड का छेद ना खुले तो उंगली या मोमबत्ती का इस्तेमाल फिर करो और लड़की को रिलॅक्स करने को कहो। इस बात का ध्यान रखो कि लंड का घेरा काफ़ी ज़्यादा होता है और पहली बार आसानी से गाण्ड में नहीं जाता है। जेली लगी होने के कारण लण्ड फिसलता भी रहता है और गाण्ड में नहीं जा पाता। थोड़ी कोशिश के बाद आपका लंड करीब 1/4 इंच अंदर चला जाएगा। यहाँ पर रुक जाओ और लड़की से पूछो उसे कैसा लग रहा है। अगर उसे दर्द हो रहा हो तो लंड बाहर निकाल लो, हो सकता है आपका लंड काफ़ी बड़ा है। यह तो आपके लिए खुश खबरी है !! या फिर लड़की को डर लग रहा है ! लड़की से दोबारा पूछो कि वो क्या करना चाहती है। ज़्यादातर लड़कियाँ आपको दोबारा कोशिश करने को कहेंगी। अगर ना भी कहे तो भी आप धीरज रखो और कुछ देर और मोमबत्ती वाली प्रक्रिया करो। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मेरी विधि से आप चलोगे तो कोई भी लड़की आपसे गाण्ड मरवाने के लिए मना नहीं करेगी। मेरे तज़ुर्बे में अच्छी तरह से मारी हुई गाण्ड में लड़कियों को चूत मरवाने से भी ज़्यादा मज़ा आता है। गाण्ड की बाहरी और अंदर की रिंग मसल्स के इर्द गिर्द बहुत नर्व-एंडिंग्स होती हैं जिसमें रक्त प्रवाह होता है जिस से गाण्ड मरवाने के दौरान लड़की को बहुत मज़ा आता है. आप धीरज से काम लो…. थोड़ी देर रुकने के बाद एक बार फिर लंड को गाण्ड के छेद पर रख कर अंदर डालने की कोशिश करो। जेली लगाना नहीं भूलना और जल्दबाज़ी नहीं करना। (मुझे मालूम है आपके लंड का सब्र ख़तम हो रहा होगा। अगर आपसे और ना रुका जाए तो चूत में डाल के संभोग कर लो। चिंता मत करो आपका लंड फिर तैयार हो जाएगा। जब लंड पहली रिंग मसल को पार कर ले तो थोड़ी देर रुक जाओ और लड़की को रिलॅक्स करने को कहो। उसको बताओ कि अब आप लंड को और अंदर नहीं करोगे। लड़की खुद पीछे की तरफ धक्का लगा के लंड को जितना चाहे अंदर करेगी। अब कंट्रोल लड़की के पास है और आपको उसे तकलीफ़ पहुँचने की चिंता नहीं करनी। जब कंट्रोल लड़की के पास आ जाता है तो आपको आश्चर्य होगा कि कितनी आसानी से वो आपके लंड को अंदर ले लेती है। आपको भी लड़की की टाइट गाण्ड का पहली बार अनुभव होगा। आपका लंड बिल्कुल टाइट फिट में जकड़ा जाएगा और आपको स्वर्ग महसूस होगा। ज़्यादातर लोग इससे ज़्यादा रोक नहीं पाते और क्लाइमॅक्स कर जाते हैं। अगर आप टारजन हैं तो कुछ देर तक लंड को पूरी तरह अंदर होने का आनंद उठाने दो, फिर धीरे धीरे लंड को बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करो। लड़की की गाण्ड आपके लंड को कस के पकड़ लेगी। आपका लंड आसानी से बाहर नहीं आएगा। करीब आधा इंच बाहर निकाल कर फिर धीरे धीरे अंदर करो। यह प्रक्रिया 3-4 बार करो। हर बार अंदर धीरे धीरे ही करना है। लड़की को पूछो कि उसे कैसा लग रहा है। अगर वो ठीक है तो अब करीब एक इंच तक अंदर बाहर करना शुरू करो। अभी भी धीरे धीरे ही !! फिर लड़की से पूछो उसका हाल कैसा है… अगर वो खुश है तो और ज़्यादा अंदर बाहर करना शुरू करो। कोशिश करो कि लंड अंदर की रिंग मसल के बाहर नहीं निकल जाए। अगर उसके बाहर निकल जाएगा तो आपको फिर से धीरे धीरे अंदर डालना पड़ेगा और लड़की को भी मदद करनी होगी. (पर इस में आपको मज़ा भी बहुत आएगा) इस तरह धीरे धीरे आप ३-४ इंच अन्दर बाहर कर पाओगे। अगर अब तक भी आपका क्लाइमॅक्स नहीं हुआ है और लड़की को भी तकलीफ़ नहीं हो रही है तो धीरे धीरे अपना स्ट्रोक बड़ा करते रहो, ध्यान रखो कि जेली सूख ना गयी हो। ज़रूरत हो तो और लगा लो और फिर से शुरू हो जाओ। एक समय आएगा जब लड़की पूरी तरह से रिलॅक्स हो जाएगी और आपका लंड बिना मुश्किल के पूरा अंदर बाहर होने लगेगा। लड़की को दर्द नहीं होगा और वो आपके साथ मज़ा लेने लगेगी। वो अपने आप अपनी गाण्ड को आगे पीछे करने लगेगी और चाहेगी कि यह चुदाई ख़तम ना हो…… जब आपका क्लाइमॅक्स हो जाए तो आराम से लंड बाहर निकाल लो और लड़की को अच्छी तरह से प्यार करो। उसने दर्द सहकर भी आपको इतनी खुशी दी है। अगर लड़की का क्लाइमॅक्स नहीं हुआ है तो उसकी चूत और भग को सहला कर उसको चरम सीमा तक ले जाओ। फिर एक दूसरे की बाहों में जितनी देर तक लेट सकते हो लेते रहो। जब अगली बार उसी लड़की की गाण्ड मारनी हो तो यह ना समझना कि अब तो उसकी गाण्ड हमेशा के लिए तैयार हो गई है। जब तक 7-8 बार उसकी गाण्ड नहीं मार लोगे, आपको धीरज से ही काम लेना पड़ेगा। यह ज़रूर है कि पहली बार गाण्ड मारने के मुक़ाबले बाद के मारने में थोड़ा फ़र्क़ तो आ जाता है, पर इतना नहीं आता कि लड़की को तकलीफ़ ना हो। अगर आप कुछ अरसे (1-2 महीने) के बाद दोबारा गाण्ड मारने लगते हो तो आपको पूरी सावधानी फिर से बरतनी पड़ेगी जो इस विधि में बताई गई है। और अधिक आनंद देने के लिए लड़की अपनी मांसपेशियों के ज़रिए आप के लंड को जकड़ सकती है और ढील दे सकती है। इससे आपका लंड ज़्यादा देर तक तना रह सकता है और आपको मज़ा भी ज़्यादा आएगा। जब आपका लंड पूरी तरह अंदर हो तो लड़की को गाण्ड की मान्सपेशियाँ कसने और ढीला करने को बोलो और स्वर्ग प्राप्त करो। यह क्रिया चूत से भी हो सकती है पर गाण्ड की बात ही और है !!

    गाण्ड मारने के फायदे गाण्ड मारने के बहुत फायदे हैं: 1) दोनों को ज़्यादा मज़ा आता है क्योंकि गाण्ड चूत के मुक़ाबले ज़्यादा टाइट होती है और इसको ज़्यादातर लोग नहीं कर पाते हैं। 2) बच्चे होने का डर नहीं होता। 3) मासिक-धर्म के दौरान भी इसका मज़ा ले सकते हैं। पता नहीं ज़्यादातर लड़कियाँ गाण्ड क्यों नहीं मरवाती ! ज़्यादातर लड़कियाँ इस सुख को भोग नहीं पाती हैं क्योंकि हम मर्द सही तरीका नहीं जानते और शुरू में ही उन्हें बहुत ज़्यादा दर्द का अहसास करा देते हैं। उन बेचारी लड़कियों को पता ही नहीं कि वो क्या खो रही हैं। आशा है आपको मेरी विधि पसंद आई होगी। आप इस विधि का इस्तेमाल करो और बताओ कि आपको सफलता मिली या नहीं और लड़की को कैसा लगा। अगर कोई लड़की गाण्ड मरवाने को बिल्कुल राज़ी नहीं हो तो उसे यह विधि पढ़ने को बोलो। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर वो तुमसे प्यार करती है तो ज़रूर राज़ी हो जाएगी।

    harddick21blog

    Self inflicted fun

    चन्द लम्हों के अंदर ही उसकी चूत को चोद कर रख दिया था बिरजु ने। जानदार लंड से चूत का बाजा बजवाने में स्वर्गीय आनंद ज्वाला देवी लूट-लूट कर बेहाल हुई जा रही थी। चूत की आग ने ज्वाला देवी की शर्मो हया, पतिव्रत धर्म सभी बातों से दूर करके चुदाई के मैदान में ला कर खड़ा कर डाला था। लंड का पानी चूत में बरसवाने के लिये वो जी जान की बाज़ी लगाने पर उतर आयी थी। इस समय भूल गयी थी ज्वाला देवी की वो एक जवान लड़की की माँ है, भूल गयी थी कि वो एक इज़्ज़तदार पति की पत्नी भी है। उसे याद था तो सिर्फ़ एक चीज़ का नाम और वो चीज़ थी बिरजु का मोटा ताकतवर और चूत की नस-नस तोड़ देने वाला शानदार लंड। इसी लंड ने उसके रोम-रोम को झंकृत करके रख दिया था। लंड था की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। एकाएक बिरजु ने जो अत्यन्त ज़ोरों से चूत में लंड का आवागमन प्रारम्भ किया तो मारे मस्ती के ज्वाला देवी उठ-उठ कर सिसक उठी। तभी उसकी एक चूची की घुन्डी मुँह में भर कर सुपाड़े तक लंड बाहर खींच जो एक झटके से बिरजु ने धक्का मारा की सीधा हमला बच्चेदानी पर जा कर हुआ। “ऐई ओहह फाड़ डाली ओह उफ़ आह री मरी सी आइई फ़ट्टी वाक्क्क्कई मोटा है। उफ़ फसा आह ऊह मज़ा ज़ोर से और ज़ोर से शाबाश रद्दी वाले।” इस बार बिरजु को ज्वाला देवी पर बहुत गुस्सा आया। अपने आपको रद्दी वाला कहलवाना उसे कुछ ज्यादा ही बुरा लगा था। ज़ोर से उसकी गाँड पर अपने हाथों के पंजे गड़ा कर धक्के मारता हुआ वो भी बड़बड़ाने लगा, “तेरी बहन को चोदूँ, चुदक्कड़ लुगायी आहह .. साली चुदवा रही है मुझसे, खसम की कमी पूरी कर रहा हूँ मैं…आहह और.. आहह साली कह रही है रद्दी वाला, तेरी चूत को रद्दी न बना दूँ, तो कबाड़ी की औलाद नहीं, आह हाय शानदार चूत खा जाऊँगा फाड़ दूँगा ले… ले और चुद आज” बिरजु के इन खूंख्वार धक्कों ने तो हद ही कर डाली थी। चूत की नस-नस हिला कर रख दी थी लंड की चोटों ने। ज्वाला देवी पसीने में नहा उठी और बहुत ज़ोरों से अपनी गाँड उछाल-उछाल कर तथा बिरजु की कस कर कोली भर कर वो उसे और ज्यादा ज़ोश में लाने के लिये सिसिया उठी, “आहह री ऐसे ही हाँ… हाँ ऐसे ही मेरी चूत फाड़ डालो राज्ज्ज्जा। माफ़ कर दो अब कभी तुम्हे रद्दी वाला नहीं कहुँगी। चोदो ईईईई उउम चोदो..” इस बात को सुन कर बिरजु खुशी से फूल उठा था उसकी ताकत चार गुनी बढ़ा कर लंड में इकट्ठी हो गयी थी। द्रुत गति से चूत का कबाड़ा बनाने पर वो तुल उठा था। उसके हर धक्के पर ज्वाला देवी ज़ोर-ज़ोर से सिसकती हुई गाँड को हिला-हिला कर लंड के मज़े हासिल कर रही थी। मुकाबला ज़ोरो पर ज़ारी था। बुरी तरह बिरजु से चिपटी हुई ज्वाला देवी बराबर बड़बड़ाये जा रही थी, “आहहह ये मारा… मार डाला। वाह और जमके उफ़ हद कर दी ओफ़्फ़ मार डालो मुझे..” और जबरदस्त खुंखार धक्के माराता हुआ बिरजु भी उसके गालों को पीते-पीते सिस्कियाँ भर रहा था, “वाहह मेरी औरत आहह हाय मक्खन चूत है तेरी तो.. ले.. चोद दूँगा.. ले… आहह।” और इसी ताबड़तोड़ चुदाई के बीच दोनों एक दूसरे को जकड़ कर झड़ने लगे थे, ज्वाला देवी लंड का पानी चूत में गिरवा कर बेहद तृप्ती महसूस कर रही थी। बिरजु भी अन्तिम बूँद लंड की निकाल कर उसके उपर पड़ा हुआ कुत्ते की तरह हाँफ़ रहा था। लंड व चूत पोंछ कर दोनों ने जब एक दूसरे की तरफ़ देखा तो फिर उनकी चुदाई की इच्छा भड़क उठी थी, मगर ज्वाला देवी चूत पर काबू करते हुए पेटिकोट पहनते हुए बोली, “जी तो करता है की तूमसे दिन रात चुदवाती रहूँ, मगर मोहल्ले का मामला है, हम दोनों की इसी में भलाई है की अब कपड़े पहन अपना अपना काम सम्भालें।” “म..मगर। मेम साहब.. मेरा तो फिर खड़ा होता जा रहा है। एक बार और दे दो न हाय।” एक टीस सी उठी थी बिरजु के दिल में, ज्वाला देवी का कपड़े पहनना उसके लंड के अरमानों पर कहार ढा रहा था। एकाएक ज्वाला देवी तैश में आते हुए बोल पड़ी, “अपनी औकात में आ तू अब, चुपचाप कपड़े पहन और खिसक ले यहाँ से वर्ना वो मज़ा चखाऊँगी की मोहल्ले तक को भूल जायेगा, चल उठ जल्दी।” ज्वाला देवी के इस बदलते हुए रूप को देख बिरजु सहम उठा और फ़टाफ़ट फुर्ती से उठ कर वो कपड़े पहनने लगा। एक डर सा उसकी आँखों में साफ़ दिखायी दे रहा था। कपड़े पहन कर वो आहिस्ते से बोला, “कभी-कभी तो दे दिया करोगी मेमसाहब, मैं अब ऐसे ही तड़पता रहुँगा?” बिरजु पर कुछ तरस सा आ गया था इस बार ज्वाला देवी को, उसके लंड के मचलते हुए अरमानों और अपनी चूत की ज्वाला को मद्देनज़र रखते हुए वो मुसकुरा कर बोली, “घबड़ा मत, हफ़्ते दो हफ़्ते में मौका देख कर मैं तुझे बुला लिया करूँगी, जी भर कर चोद लिया करना, अब तो खुश?” वाकई खुशी के मारे बिरजु का दिल बल्लियों उछल पड़ा और चुपचाप बाहर निकल कर अपनी सायकल की तरफ़ बढ़ गया। थोदी देर बाद वो वहाँ से चल पड़ा था। वो यहाँ से जा तो रहा था मगर ज्वाला देवी की मक्खन चूत का ख्याल उसके ज़ेहन से जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। वाह री चुदाई, कोई न समझा तेरी खुदाई। सुदर्शन जी सरकारी काम से १ हफ़्ते के लिये मेरठ जा रहे थे, ये बात जब ज्वाला देवी को पता चली तो उसकी खुशी का ठिकाना ही न रहा। सबसे ज्यादा खुशी तो उसे इसकी थी कि पति की गैरहाज़िरी में बिरजु का लंबा व जानदार लंड उसे मिलने जा रहा था। जैसे ही सुदर्शन जी जाने के लिये निकले, ज्वाला ने बिरजु को बुलवा भेजा और नहा धो कर उसी दिन की तरह तैयार हुई और बिरजु के आने का इंतज़ार करने लगी। बिरजु के आते ही वो उससे लिपट गयी। उसके कान में धीरे से बोली, “राजा आज रात को मेरे यहीं रुको और मेरी चूत का बाजा जी भर कर बजाना।” ज्वाला देवी बिरजु को ले कर अपने बेडरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद करके उसके लौड़े को सहलाने लगी। लेकिन उस रात गज़ब हो गया, वो हो गया जो नहीं होना चाहिये था, यानि उन दोनों के मध्य हुई सारी चुदाई-लीला को रंजना ने जी भर कर देखा और उसी पर निश्चय किया कि वो भी अब जल्द ही किसी जवान लंड से अपनी चूत का उद्घाटन जरूर करा कर ही रहेगी। हुआ यूँ था की उस दिन भी रंजना हमेशा की तरह रात को अपने कमरे में पढ़ रही थी। रात १० बजे तक तो वो पढ़ती रही और फिर थकान और उब से तंग आ कर कुछ देर हवा खाने और दिमाग हल्का करने के इरादे से अपने कमरे से बाहर आ गयी और बरामदे में चहल कदमी करती हुई टहलने लगी। मगर सर्दी ज्यादा थी इसलिये वो बरामदे में ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकी और कुछ देर के बाद अपने कमरे की और लौटने लगी कि मम्मी के कमरे से सोडे की बोतलें खुलने की आवाज़ उसके कानो में पड़ी। बोतलें खुलने की आवाज़ सुन कर वो ठिठकी और सोचने लगी, “इतनी सर्दी में मम्मी सोडे की बोतलों का आखिर कर क्या रही है?” अजीब सी उत्सुकता उसके मन में पैदा हो उठी और उसने बोतलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से ज्वाला देवी के कमरे की तरफ़ कदम बढ़ा दिये। इस समय ज्वाला देवी के कमरे का दरवाज़ा बंद था इसलिये रंजना कुछ सोचती हुई इधर उधर देखने लगी और तभी एक तरकीब उसके दिमाग में आयी। तरकीब थी पिछला दरवाजा, जी हाँ पिछला दरवाजा। रंजना जानती थी की मम्मी के कमरे में झाँकने के लिये पिछले दरवाजे का की-होल है। वहाँ से वो सुदर्शन जी और ज्वाला देवी के बीच चुदाई- लीला भी एक दो बार देख चुकी थी। रंजना पिछले दरवाजे पर आयी और ज्योंही उसने की-होल से अंदर झांका कि वो बुरी तरह चौंक पड़ी। जो कुछ उसने देखा उस पर कतई विश्वास उसे नहीं हो रहा था। उसने सिर को झटका दे कर फिर अंदर के दृश्य देखने शुरु कर दिये। इस बार तो उसके शरीर के कुँवारे रोंगटे झनझना कर खड़े हो गये, जो कुछ उसने अंदर देखा, उसे देख कर उसकी हालत इतनी खराब हो गयी कि काफ़ी देर तक उसके सोचने समझने की शक्ति गायब सी हो गयी। बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू करके वो सही स्थिती में आ सकी। रंजना को लाल बल्ब की हल्की रौशनी में कमरे का सारा नज़ारा साफ़-साफ़ दिखायी दे रहा था। उसने देखा की अंदर उसकी मम्मी ज्वाला देवी और वो रद्दी वाला बिरजु दोनों शराब पी रहे थे। ज़िन्दगी में पहली बार अपनी मम्मी को रंजना ने शराब की चुसकियाँ लेते हुए और गैर मर्द से रंग-रंगेलियाँ मनाते हुए देखा था। बिरजु इस समय ज्वाला देवी को अपनी गोद में बिठाये हुए था, दोनों एक दूसरे से लिपट चिपट रहे थे। दुनिया को नज़र अंदाज़ करके चुदाई का ज़बर्दस्त मज़ा लेने के मूड में दोनों आते जा रहे थे। इस दृश्य को देख कर रंजना का हाल अजीब सा हो चला था, खून का दौरा काफ़ी तेज़ होने के साथ साथ उसका सिर भी ज़ोरों से घुम रहा था और चूत के आस पास सुरसुराहट सी होती हुई उसे लग रही थी। दिल की धड़कनें ज़ोर-ज़ोर से जारी थीं। गला व होंठ खुश्क पड़ते जा रहे थे और एक अजीब सा नशा उस पर भी छाता जा रहा था। ज्वाला देवी शराब पीती हुई बिरजु से बोले जा रही थी, उसकी बाँहें पीछे की ओर घुम कर बिरजु के गले का हार बनी हुई थी। ज्वाला देवी बिरजु को बार-बार “सनम” और “सैंया” के नाम से ही सम्बोधित कर रही थी। बिरजु भी उसे “रानी” ओर “मेरी जान” कह कह कर उसे दिलो जान से अपना बनाने के चक्कर में लगा हुआ था। बिरजु का एक हाथ ज्वाला देवी की गदराई हुई कमर पर कसा हुआ था, और दूसरे हाथ में उसने शराब का गिलास पकड़ रखा था। ज्वाला देवी की कमर में पड़ा उसका हाथ कभी उसकी चूची पकड़ता और कभी नाभी के नीचे अंगुलियाँ गड़ाता तो कभी उसकी जाँघें। फिर शराब का गिलास उसने ज्वाला देवी के हाथ में थमा दिया। तब ज्वाला देवी उसे अपने हाथों से शराब पिलाने लगी। मौके का फ़ायदा उठाते हुए बिरजु दोनों हाथों से उसकी भारी मोटी मोटी चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से भींचता और नोचता हुआ मज़ा लेने में जुट गया। एकाएक ज्वाला देवी कुछ फ़ुसफ़ुसाई और दोनों एक दूसरे की निगाहों में झांक कर मुसकुरा दिये। शराब का खाली गिलास एक तरफ़ रख कर बिरजु बोला, “जान मेरी ! अब खड़ी हो जाओ।” बिरजु की आज्ञा का तुरंत पालन करती हुई ज्वाला देवी मुस्कराते हुए ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी। बिरजु बड़े गौर से और चूत-फ़ाड़ निगाहों से उसे घूरे जा रहा था और ज्वाला देवी उसकी आँखों में आँखे डाल कर चूत की ज्वाला में मचलती हुई मुस्कराते हुए अपने कपड़े उतारने में लग गयी। उसके हाथ तो अपना बदन नंगा करने में जुटे हुए थे मगर निगाहें बराबर बिरजु के चेहरे और लंड के उठान पर ही जमी हुई थी। अपने शरीर के लगभग सारे कपड़े उतारने के बाद एक ज़ोरदार अंगड़ायी ले कर ज्वाला देवी अपना निचला होंठ दांतों में दबाते हुए बोली, “हाय ! मैं मर जाऊँ सैंया! आज मुझे उठने लायक मत छोड़ना। सच बड़ा मज़ा देता है तू, मेरी चूत को घोट कर रख देता है तू।” पैन्टी, ब्रा और हाई हील सैण्डलों में ज्वाला देवी इस उम्र में भी लंड पर कयामत ढा रही थी। उसका नंगा बदन जो गोरा होने के साथ-साथ गुद्देदार भींचने लायक भी था। लाल बल्ब की हल्की रौशनी में बड़ा ही लंड मार साबित हो रहा था। वास्तव में रंजना को ज्वाला देवी इस समय इतनी खराब सी लगने लगी थी कि वो सोच रही थी कि ‘काश! मम्मी की जगह वो नंगी हो कर खड़ी होती तो चूत के अरमान आज अवश्य पूरे हो जाते।’ मगर सोचने से क्या होता है? सब अपने-अपने मुकद्दर का खाते हैं। बिरजु का लंड जब ज्वाला देवी की चूत के मुकद्दर में लिखा है तो फिर भला रंजना की चूत की कुँवारी सील आज कैसे टूट सकती थी। जोश में आ कर बिरजु अपनी जगह छोड़ कर खड़ा हुआ और मुसकुराता हुआ ज्वाला देवी के ठीक सामने आ पहुँचा। कुछ पल तक उसने सिर से पांव तक उसे देखने के बाद अपने कपड़े उतारने चालू कर दिये। एक-एक करके सभी कपड़े उसने उतार कर रख दिये और वो एक दम नंग धड़ंग हो कर अपना खड़ा लंड हाथ में पकड़ कर दबाते हुए सिसका, “हाय रानी आज! इसे जल्दी से अपनी चूत में ले लो।” इस समय जिस दृष्टिकोण से रंजना अंदर की चुदाई के दृश्य को देख रही थी उसमें ज्वाला देवी का सामने का यानि चूत और चूचियाँ तथा बिरजु की गाँड और कमर यानि पिछवाड़ा उसे दिखायी पड़ रहा था। बिरजु की मर्दाना तन्दुरुस्त मजबूत गाँड और चौड़ा बदन देख कर रंजना अपने ही आप में शरमा उठी थी। अजीब सी गुदगुदी उसे अपनी चूचियों में उठती हुई जान पड़ रही थी। बिरजु अभी कपड़े उतार कर सीधा खड़ा हुआ ही था की ज्वाला देवी ने अपनी गुद्दाज व मुलायम बाँहें उसकी गर्दन में डाल दीं और ज़ोर से उसे भींच कर बुरी तरह उससे चिपक गयी। चुदने को उतावली हो कर बिरजु की गर्दन पर चुम्मी करते हुए वो धीरे से फ़ुसफ़ुसा कर बोली, “मेरे सनम ! बड़ी देर कर दी है तूने ! अब जल्दी कर न! देखो, मारे जोश के मेरी तो ब्रा ही फ़टी जा रही है, मुझे बड़ी जलन हो रही है, उफ़्फ़! मैं तो अब बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ, आह जल्दी से मेरी चूत का बाजा बजा दे सैंया… आह।” बिरजु उत्तर में होंठो पर जीभ फ़िराता हुआ हँसा और बस फिर अगले पल अपनी दोनों मर्दानी ताकतवर बाँहें फ़ैला कर उसने ज्वाला देवी को मजबूती से जकड़ लिया। जबरदस्त तरीके से भींचता हुआ लगातार कई चुम्मे उसके मचलते फ़ड़फ़ड़ाते होंठों और दहकते उभरे गोरे-गोरे गालों पर काटने शुरु कर डाले। ज्वाला देवी मदमस्त हो कर बिरजु के मर्दाने बदन से बुरी तरह मतवाली हो कर लिपट रही थी। दोनों भारी उत्तेजना और चुदाई के उफ़ान में भरे हुए ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ते हुए पलंग की तरफ़ बढ़ते जा रहे थे। पलंग के करीब पहुंचते ही बिरजु ने एक झटके के साथ ज्वाला देवी का नंगा बदन पलंग पर पटक दिया। अपने आपको सम्भालने या बिरजु का विरोध करने की बजाये वो गेंद की तरह हँसती हुई पलंग पर धड़ाम से जा गिरी। पलंग पर पटकने के तुरन्त बाद बिरजु ज्वाला देवी की तरफ़ लपका और उसके उपर झुक गया। अगले ही पल उसकी ब्रा खींच कर उसने चूचियों से अलग कर दी और उसके बाद चूत से पैन्टी भी झटके के साथ जोश में आ कर उसने इस तरह खींची कि पैन्टी ज्वाला देवी की कमर व गाँड का साथ छोड़ कर एकदम उसकी टाँगो में आ कर गिरी। जैसे ही बिरजु का लंड हाथ में पकड़ कर ज्वाला देवी ने ज़ोर से दबाया तो वो झुँझला उठा, इसी झुँझलाहट और ताव में आ कर उसने ज्वाला देवी की उठी हुई चूचियों को पकड़ कर बेरहमी से खींचते हुए वो उन पर खतरनाक जानवर की तरह टूट पड़ा। ज्वाला देवी के गुलाबी होंठो को जबर्दस्त तरीके से उसने पीना शुरु कर दिया। उसके गालों को ज़ोर- ज़ोर से भींच कर होंठ चूसते हुए वो अत्यन्त जोशीलापन महसूस कर रहा था। चन्द पलों में उसने होंठों को चूस-चूस कर उनकी माँ चोद कर रख दी। जी भर कर होंठ पीने के बाद उसने एकदम ही ज्वाला देवी को पलंग पर घुमा कर चित्त पटक दिया और तभी उछल कर वो उसके उपर सवार हो गया। अपने शरीर के नीचे उसे दबा कर उसका पूरा शरीर ही उसने ऐसे ढक लिया मानो ज्वाला देवी उसके नीचे पिस कर रहेगी। बिरजु इस समय ज्वाला देवी के बदन से लिपट कर और उसे ज़ोरों से भींच कर अपना बदन उसके मुलायम जनाने बदन पर बड़ी बेरहमी से रगड़े जा रहा था। बदन से बदन पर घस्से मारता हुआ वो दोनों हाथों से चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाता जा रहा था और बारी-बारी से उसने चूचियों को मुँह में ले कर तबियत से चूसना भी स्टार्ट कर दिया था। बिरजु और ज्वाला देवी दोनों ही इस समय चुदाई की इच्छा में पागल हो चुके थे। बिरजु के दोनों हाथों को ज्वाला देवी ने मजबूती से पकड़ कर उसकी चुम्मों का जवाब चुम्मों से देना शुरु कर दिया। ज्वाला देवी मस्ती में आ कर बिरजु के कभी गाल पर काट लेती तो कभी उसके कंधे पर काट कर अपनी चूत की धधकती ज्वाला का प्रदर्शन कर रही थी। अपनी पूरी ताकत से वो ज़ोर से बिरजु को भींचे जा रही थी। एकाएक ज्वाला ने बिरजु की मदद करने के लिये अपनी टाँगे उपर उठा कर अपने हाथों से टाँगों में फ़ंसी हुई पैन्टी निकाल कर बाहर कर दी और हाई हील सैण्डलों के अलावा किसी कपड़े का नामोनिशान तक अपने बदन से उसने हटा कर रख दिया। उसकी तनी हुई चूचियों की उभरी हुई घुन्डी और भारी गाँड सभी रंजना को साफ़ दिखायी पड़ रहा था। बस उसे तमन्ना थी तो सिर्फ़ इतनी कि कब बिरजु का लंड अपनी आँखों से वो देख सके। सहसा ही ज्वाला देवी ने दोनों टाँगे उपर उठा कर बिरजु की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली और जोंक की तरह उससे लिपट गयी। दोनों ने ही अपना-अपना बदन बड़ी ही बेरहमी और ताकत से एक दूसरे से रगड़ना शुरु कर दिया। चुम्मी काटने की क्रिया बड़ी तेज़ और जोशीलेपन से जारी थी। ज़ोर ज़ोर से हाँफ़ते सिसकारियाँ छोड़ते हुए दोनों एक दूसरे के बदन की माँ चोदने में जी जान एक किये दे रहे थे। तभी बड़ी फ़ुर्ती से बिरजु ज़ोर-ज़ोर से कुत्ते की तरह हाँफ़ता हुआ सीधा बैठ गया और तेज़ी से ज्वाला देवी की टाँगों की तरफ़ चला आया। इस पोजिशन में रंजना अपनी मम्मी को अच्छी तरह नंगी देख रही थी। उसने महसूस किया की मम्मी की चूत उसकी चूत से काफ़ी बड़ी है। चूत की दरार उसे काफ़ी चौड़ी दिखायी दे रही थी। उसे ताज्जुब हुआ की मम्मी की चूत इतनी गोरी होने के साथ-साथ एकदम बाल रहित सफ़ाचट थी। कुछ दिन पहले ही बड़ी-बड़ी झांटों का झुरमुट स्वयं अपनी आँखों से उसने ज्वाला देवी की चूत पर उस समय देखा था, जब सुबह सुबह उसे जगाने के लिये गयी थी। इस समय ज्वाला देवी बड़ी बेचैन, चुदने को उतावली हो रही थी। लंड सटकने वाली नज़रों से वो बिरजु को एक टक देख रही थी। चूत की चुदाई करने के लिये बिरजु टाँगों के बल बैठ कर ज्वाला देवी की जाँघों पर, चूत की फाँकों पर और उसकी दरार पर हाथ फ़िराने में लगा हुआ था और फिर एकदम से उसने घुटने के पास उसकी टाँग को पकड़ कर चौड़ा कर दिया। तत्पश्चात उसने पलंग के पास मेज़ पर रखी हुई खुश्बुदार तेल की शीशी उठायी और उसमें से काफ़ी तेल हाथ में ले कर ज्वाला देवी की चूत पर अच्छी तरह से अंदर और बाहर इस तरह मलना शुरु किया की उसकी सुगन्ध रंजना के नथुनों में भी आ कर घुसने लगी। अपनी चूत पर किसी मर्द से तेल मालिश करवाने के लिये रंजना भी मचल उठी। उसने खुद ही एक हाथ से अपनी चूत को ज़ोर से दबा कर एक ठंडी साँस खींची और अंदर की चुदाई देखने में उसने सारा ध्यान केन्द्रित कर दिया। ज्वाला देवी की चूत तेल से तर करने के पश्चात बिरजु का ध्यान अपने खड़े हुए लंड पर गया। और जैसे ही उसने अपने लम्बे और मोटे लंड को पकड़ कर हिलाया कि बाहर खड़ी रंजना की नज़र पहली बार लंड पर पड़ी। इतनी देर बाद इस शानदार डंडे के दर्शन उसे नसीब हुए थे। लंड को देखते ही रंजना का कलेजा मुँह को आ गया। उसे अपनी साँस गले में फ़ंसती हुई जान पड़ी। वाकई बिरजु का लंड बेहद मोटा, सख्त और जरूरत से ज्यादा ही लंबा था। देखने में लकड़ी के खूंटे की तरह वो उस समय दिखायी पड़ रहा था। शायद इतने शानदर लंड की वजह ही थी की ज्वाला देवी जैसी इज़्ज़तदार औरत भी उसके इशारों पर नाच रही थी। रंजना को अपनी सहेली की कही हुई शायरी याद आ गयी, “औरत को नहीं चाहिये ताज़ो तख्त, उसको चाहिये लंड लंबा, मोटा और सख्त।” हाँ तो बिरजु ने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से तेल की शीशी उल्टी करके लंड के उपर तेल की धार उसने डाल दी। फ़ौरन शीशी मेज़ पर रख कर उसने उस हाथ से लंड पर मालिश करनी शुरु कर दी। मालिश के कारण लंड का तनाव, कड़ापन और भी ज्यादा बढ़ गया। चूत में घुसने के लिये वो ज़हरीले सांप की तरह फ़ुफ़कारने लगा। ज्वाला देवी लंड की तरफ़ कुछ इस अंदाज़ में देख रही थी मानो लंड को निगल जाना चाहती हो या फिर आँखों के रास्ते पी जाना चाहती हो। सारे काम निबटा कर बिरजु खिसक कर ज्वाला देवी की टाँगों के बीच में आ गया। उसने टाँगों को जरूरत के मुताबिक मोड़ा और फिर घुटनों के बल उसके उपर झुकते हुए अपने खूंटे जैसे सख्त लंड को ठीक चूत के फ़ड़फ़ड़ाते छेद पर टिका दिया। इसके बाद बिरजु पंजो के बल थोड़ा उपर उठा। एक हाथ से तो वो तनतनाते लंड को पकड़े रहा और दूसरे हाथ से ज्वाला देवी की कमर को उसने धर दबोचा। इतनी तैयारी करते ही ज्वाला देवी की तरफ़ आँख मारते हुए उसने चुदाई का इशारा किया। परिणाम स्वरूप, ज्वाला देवी ने अपने दोनों हाथों की अंगुलियों से चूत का मुँह चौड़ा किया। अब चूत के अंदर का लाल-लाल हिस्सा साफ़ दिखायी दे रहा था। बिरजु ने चूत के लाल हिस्से पर अपने लंड का सुपाड़ा टिका कर पहले खूब ज़ोर-ज़ोर से उसे चूत पर रगड़ा। इस तरह चूत पर गरम सुपाड़े की रगड़ायी से ज्वाला देवी लंड सटकने को बैचैन हो उठी। “देख! देर न कर, डाल .. उपर-उपर मत रहने दे.. आहह। पूरा अंदर कर दे उउफ़ सीईई सी।” ज्वाला देवी के मचलते अरमानों को महसूस कर बिरजु के सब्र का बांध भी टूट गया और उसने जान लगा कर इतने जोश से चूत पर लंड को दबाया कि आराम के साथ पूरा लंड सरकता चूत में उतर गया। ऐसा लग रहा था जैसे लंड के चूत में घुसते ही ज्वाला देवी की भड़कती हुई चूत की आग में किसी ने घी टपका दिया हो, यानि वो और भी ज्यादा बेचैन सी हो उठी। और जबर्दस्त धक्कों द्वारा चुदने की इच्छा में वो मचली जा रही थी। बिरजु की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ वो उसे अपनी ओर खींच-खींच कर पागलों की तरह पेश आ रही थी। बड़ी बेचैनी से वो अपनी गर्दन इधर-उधर पटकते हुए अपनी दोनों टाँगों को भी उछाल-उछाल कर पलंग पर मारे जा रही थी। लंड के स्पर्श ने उसके अंदर एक जबर्दस्त तूफ़ान सा भर कर रख दिया था। अजीब-अजीब तरह की अस्पष्ट आवाज़ें उसके मुँह से निकल रही थी। “ओहह मेरे राजा मार, जान लगा दे। इसे फ़ाड़ कर रख दे .. रद्दी वाले आज रुक मत अरे मार न मुझे चीर कर रख दे। दो कर दे मेरी चूत फ़ाड़ कर आह.. सीईई।” बिरजु के चूत में लंड रोकने से ज्वाला देवी को इतना गुस्सा आ रहा था कि वो इस स्तिथी को सहन न करके ज़ोरों से बिरजु के मुँह पर चांटा मारने को तैयार हो उठी थी। मगर तभी बिरजु ने लंड को अंदर किया ओर थोड़ा दबा कर चूत से सटा दिया और दोनों हाथों से कमर को पकड़ कर वो कुछ उपर उठा और अपनी कमर तथा गाँड को उपर उठा कर ऐसा उछला कि ज़ोरों का धक्का ज्वाला देवी की चूत पर जा कर पड़ा। इस धक्के में मोटा, लंबा और सख्त लंड चूत में तेज़ी से घुसता चला गया और इस बार सुपाड़े की चोट चूत की तलहटी पर जा कर पड़ी। इतनी ज़ोर से मम्मी की चूत पर हमला होता देख कर रंजना बुरी तरह कांप उठी मगर अगले ही पल उसके आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि ज्वाला देवी ने कोई दिक्कत इस भारी धक्के के चूत पर पड़ने से नहीं ज़ाहिर की थी, बल्कि उसने बिरजु को बड़े ही ज़ोरों से मस्ती में आ कर बाँहों में भींच लिया। इस अजीब वारदात को देख कर रंजना को अपनी चूत के अंदर एक न दिखायी देने वाली आग जलती हुई महसूस हुई। उसके अंदर सोयी हुई चुदाई इच्छा भी प्रज्वलित हो उठी थी। उसे लगा कि चूत की आग पल-पल शोलो में बदलती जा रही है। चूत की आग में झुलस कर वो घबड़ा सी गयी और उसे चक्कर आने शुरु हो गये। इतना सब कुछ होते हुए भी चुदाई का दृश्य देखने में बड़ा अजीब सा मज़ा उसे प्राप्त हो रहा था, वहाँ से हटने के बारे में वो सोच भी नहीं सकती थी। उसकी निगाहे अंदर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। जबकि शरीर धीरे-धीरे जवाब देता जा रहा था। अब उसने देखा कि बिरजु का लंड चूत के अंदर घुसते ही मम्मी बड़े अजीब से मज़े से मतवाली हो कर बुरी तरह उससे लिपट गयी थी और अपने बदन तथा चूचियों और गालों को उससे रगड़ते हुए धीरे-धीरे मज़े की सिसकारियाँ छोड़ रही थी, “पेल.. वाह..रे.. मार.. ऐसे ही श.. म.. हद.. हो गयी वाहह और मज़ा दे और दे सी आह उफ़ ।” लंड को चूत में अच्छी तरह घुसा कर बिरजु ने मोर्चा सम्भाला। उसने एक हाथ से तो ज्वाला देवी की मुलायम कमर को मजबूती से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी भारी उभरी हुई गाँड के नीचे लगा कर बड़े ज़ोर से हाथ का पन्जा, गाँड के गोश्त मे गड़ाया। ज़ोर-ज़ोर से गाँड का गुद्दा वो मसले जा रहा था। ज्वाला देवी ने भी जवाब में बिरजु की मर्दानी गाँड को पकड़ा और ज़ोर से उसे खींचते हुए चूत पर दबाव देती हुई वो बोली, “अब इसकी धज्जियाँ उड़ा दे सैंया। आह ऐसे काम चलने वाला नहीं है.. पेल आह।” उसके इतना कहते ही बिरजु ने सम्भाल कर ज़ोरदार धक्का मारा और कहा, “ले। अब नहीं छोड़ूँगा। फ़ाड़ डालूँगा तेरी…” इस धक्के के बाद जो धक्के चालू हुए तो गजब ही हो गया। चूत पर लंड आफ़त बन कर टूट पड़ा था। ज्वाला देवी उसकी गाँड को पकड़ कर धक्के लगवाने और चूत का सत्यानाश करवाने में उसकी सहायता किये जा रही थी। बिरजु बड़े ही ज़ोरदार और तरकीब वाले धक्के मार-मार कर उसे चोदे जा रहा था। बीच-बीच में दोनों हाथों से उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए वो बुरी तरह उसके होंठो और गालों को काटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। चूत में लंड से ज़ोरदार घस्से छोड़ता हुआ वो चुदाई में चार चांद लगाने में जुटा हुआ था। चूत पर घस्से मारते हुए वो बराबर चूचियों को मुँह में दबाते हुए घुन्डियों को खूब चूसे जा रहा था। ज्वाला देवी इस समय मज़े में इस तरह मतवाली दिखायी दे रही थी कि अगर इस सुख के बदले उन पलो में उसे अपनी जान भी देनी पड़े तो वो बड़ी खुशी से अपनी जान भी दे देगी, मगर इस सुख को नहीं छोड़ेगी। अचानक बिरजु ने लंड चूत में रोक कर अपनी झांटे व अन्डे चूत पर रगड़ने शुरु कर दिये। झांटो व अन्डों के गुदगुदे घस्सो को खा-खा कर ज्वाला देवी बेचैनी से अपनी गाँड को हिलाते हुए चूत पर धक्कों का हमला करवाने के लिये बड़बड़ा उठी, “हाय उउई झांटे मत रगड़.. आहह तेरे अन्डे गुदगुदी कर रहे हैं सनम, उउई मान भी जो आईईईई चोद पेल… आहह रुक क्यों गया ज़ालिम… आहह मत तरसा आहह.. अब तो असली वक्त आया है धक्के मारने क। मार खूब मार जल्दी कर.. आज चूत के टूकड़े टूकड़े… फ़ड़ डाल इसे… हाय बड़ा मोटा है.. आइइई।” बिरजु का जोश ज्वाला देवी के यूँ मचलने सिसकने से कुछ इतना ज्यादा बढ़ उठा, अपने उपर वो काबू न कर सका और सीधा बैठ कर जबर्दस्त धक्के चूत पर लगाने उसने शुरु कर दिये। अब दोनों बराबर अपनी कमर व गाँड को चलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाये जा रहे थे। पलंग बुरी तरह से चरमरा रहा था और धक्के लगने से फ़चक-फ़चक की आवाज़ के साथ कमरे का वातावरण गूंज उठा था। ज्वाला देवी मारे मज़े के ज़ोर ज़ोर से किल्कारियाँ मार रही थी, और बिरजु को ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने के लिये उत्साहित कर रही थी, “राजा । और तेज़.. और तेज़.. बहुत तेज़.. रुकना मत। जितना चाहे ज़ोर से मार धक्का.. आह। हाँ। ऐसे ही। और तेज़। ज़ोर से मार आहह।” बिरजु ने आव देखा न ताव और अपनी सारी ताकत के साथ बड़े ही खुँख्वार चूत फ़ाड़ धक्के उसने लगाने प्रारम्भ कर दिये। इस समय वो अपने पूरे जोश और उफ़ान पर था। उसके हर धक्के में बिजली जैसी चमक और तेज़ कड़कड़ाहट महसूस हो रही थी। दोनों की गाँड बड़ी ज़ोरो से उछले जा रही थी। ओलों की टप-टप की तरह से वो पलंग को तोड़े डाल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनों एक दूसरे के अंदर घुस कर ही दम लेंगे, या फिर एक दूसरे के अंग और नस-नस को तोड़ मरोड़ कर रख देंगे। उन दोनों पर ही इस समय कातिलाना भूत पूरी तरह सवार था। सहसा ही बिरजु के धक्कों की रफ़्तार असाधारण रूप से बढ़ उठी और वो ज्वाला देवी के शरीर को तोड़ने मरोड़ने लगा। ज्वाला देवी मज़े में मस्तानी हो कर दुगुने जोश के साथ चीखने चिल्लाने लगी, “वाह मेरे प्यारे.. मार.. और मार हाँ बड़ा मज़ा आ रहा है। वाह तोड़ दे फ़ाड़ डाल, खा जा छोड़ना मत उफ़्फ़.. सी.. मार जम के धक्का और पूरा चोद दे इसे हाय।” और इसी के साथ ज्वाला देवी के धक्कों और उछलने की रफ़्तार कम होती चली गयी। बिरजु भी ज़ोर-ज़ोर से उछलने के बाद लंड से वीर्य फैंकने लगा था। दोनों ही शांत और निढाल हो कर गिर पड़े थे। ज्वाला देवी झड़ कर अपने शरीर और हाथ पांव ढीला छोड़ चुकी थी तथा बिरजु उसे ताकत से चिपटाये बेहोश सा हो कर आँखें मूंदे उसके उपर गिर पड़ा था और ज़ोर-ज़ोर से हाँफ़ने लगा था। इतना सब देख कर रंजना का मन इतना खराब हुआ कि आगे एक दृश्य भी देखना उसे मुश्किल जान पड़ने लगा था। उसने गर्दन इधर-उधर घुमा कर अपने सुन्न पड़े शरीर को हरकत दी, इसके बाद आहिस्ता से वो भारी मन, कांपते शरीर और लड़खड़ाते हुए कदमों से अपने कमरे में वापस लौट आयी। अपने कमरे में पहुँच कर वो पलंग पर गिर पड़ी, चुदाई की ज्वाला में उसका तन मन दोनों ही बुरी तरह छटपटा रहे थे, उसका अंग-अंग मीठे दर्द और बेचैनी से भर उठा था, उसे लग रहा था कि कोई ज्वालामुखी शरीर में फ़ट कर चूत के रास्ते से निकल जाना चाहता था। अपनी इस हालत से छुटकारा पाने के लिये रंजना इस समय कुछ भी करने को तैयार हो उठी थी, मगर कुछ कर पाना शायद उसके बस में ही नहीं था। सिवाय पागलो जैसी स्तिथी में आने के। इच्छा तो उसकी ये थी कि कोई जवान मर्द अपनी ताकतवर बाँहों में ज़ोरों से उसे भींच ले और इतनी ज़ोर से दबाये कि सारे शरीर का कचुमर ही निकल जाये। मगर ये सोचना एकदम बेकार सा उसे लगा। अपनी बेबसी पर उसका मन अंदर ही अंदर फ़ुनका जा रहा था। एक मर्द से चुदाई करवाना उसके लिये इस समय जान से ज्यादा अनमोल था, मगर न तो चुदाई करने वाला कोई मर्द इस समय उसको मिलने जा रहा था और न ही मिल सकने की कोई उम्मीद या आसार आस पास उसे नज़र आ रहे थे। उसने अपने सिरहाने से सिर के नीचे दबाये हुए तकिये को निकाल कर अपने सीने से भींच कर लगा लिया और उसे अपनी कुँवारी अनछुई चूचियों से लिपट कर ज़ोरो से दबाते हुए वो बिस्तर पर औंधी लेट गयी। सारी रात उसने मम्मी और बिरजु के बीच हुई चुदाई के बारे में सोच-सोच कर ही गुज़ार दी। मुश्किल से कोई घन्टा दो घन्टा वो सो पायी थी। सुबह जब वो जागी तो हमेशा से एक दम अलग उसे अपना हर अंग दर्द और थकान से टूटता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था बेचारी को, जैसे किसी मज़दूर की तरह रात में ओवरटाइम ड्यूटी करके लौटी है। जबकि चूत पर लाख चोटें खाने और जबर्दस्त हमले बुलवाने के बाद भी ज्वाला देवी हमेशा से भी ज्यादा खुश और कमाल की तरह महकती हुई नज़र आ रही थी। खुशियाँ और आत्म-सन्तोश उसके चेहरे से टपक रहा था। दिन भर रंजना की निगाहें उसके चेहरे पर ही जमी रही। वो उसकी तरफ़ आज जलन और गुस्से से भरी निगाहों से ही देखे जा रही थी।

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    Guys, please don’t write anything. If you are not sure than please ignore that portion. If you will not say where she is from still people would check her out..so no worries. If you don;t know, please don’t write any thing about her race. They are whites and any one could figure it out, where they are from if they would check the things minutely...:) 

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    These white wives are like a spark. All you have to do is just ignite her once and see her effect after that. They need to be take a proper care by the one who is their master or owner. Proper attention and care to them will give so pleasure to the keeper of such spark. They can do wonders, if you let them free. These sparks can make your life wonderful and enjoyable.

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    外国情侣打炮自拍,女主被颜射

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    Black strong, path maker 

    मैं एक शादीशुदा और चार बच्चों का पिता हूँ। मेरी शादी कम उम्र में ही हो गई थी जब मेरी उम्र 19 साल की होगी। अब कहानी पर आता हूँ। यह कहानी उन दिनों की हैं जब मैं ग्वालियर में एक दवा कंपनी में काम कर रहा था, मेरी उम्र यही कोई 25 वर्ष होगी, मुझे मेडिकल कॉलेज का काम मिला था। मैं थोड़ा गंभीर, संकोची किस्म का लड़का हूँ। अपने काम की वजह से मुझे काफी डॉक्टरों और रेजिडेंस डॉक्टरों से जान-पहचान हो गई थी।

    ग्वालियर में मेरा अपना कोई नहीं था और काम बोलने तथा रिज़र्व रहने के कारण मेरे अपने कार्यक्षेत्र के मित्र कम ही थे इसलिए मैं काम से फुरसत के क्षणों में मेडिकल कॉलेज की तरफ ही चला जाता और कॉलेज कैम्पस क्षेत्र में एक रेस्तराँ था, वहीं शाम को कुछ हल्का और कॉफी या चाय पीता था।

    एक दिन की बात है 5’4″ लम्बी लड़की जो एक रेजिडेन्ट डॉक्टर थी, रेस्तराँ में मिली और बोली- यहाँ कैसे? तो मैं बोला- मैम, मैं अक्सर सप्ताहांत में मैं यहाँ आता हूँ, क्योंकि ग्वालियर में मेरे कोई नहीं है और मैं कोई दोस्त भी नहीं बना पाया हूँ। इसलिए फुरसत के क्षणों में यहीं आ जाता हूँ। मेरा समय भी पास हो जाता है और आप सबों से मेरी मुलाकात हो जाती है।

    उसके बाद वे मेरे पास ही टेबल पर बैठ गई तथा एक दूसरे के बारे में बात होने लगी। यह सिलसिला लगभग काफी दिनों तक चला। लड़की का नाम प्रियंका शेखावत था जो कोटा राजस्थान की रहने वाली थी, आकर्षक व्यक्तित्व की धनी थी।

    हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए और काफी खुलकर बातें होने लगी थी और हमारे कंपनी के कुछ प्रोडक्ट पुरुष और स्त्री इंफेर्टिलिटी से संबंधित भी थी तो उस पर थोड़ा बातचीत होने लगी। मेरा सब्जेक्ट साइंस नहीं था तो वो मुझे ह्यूमन एनाटॉमी एंड फीजियोलॉजी के बारे में बताती।

    एक दिन शनिवार था, मैं 4:30 के आस-पास मेडिकल कॉलेज के रेस्तराँ में पहुँचा, वो डॉक्टरनी प्रियंका भी पहुँची। थोड़ा समय पास होने बाद मैं वापिस अपने रूम को लौटने के लिए विदा ले रहा था कि बीच में ही टोकते हुए बोली- राज, आज थोड़ा पहाड़ियों के तरफ चलते हैं। तो मैं बोला- मैम शाम ढलने को है, अभी हम दोनों पहाड़ी पर क्या करेंगे. तो वो बोली- आज एकांत में बैठने की इच्छा हो रही है, चलो पास के कैंसर अस्पताल के पहाड़ी पर ज्यादा नहीं, थोड़ी देर ही बैठेंगे।

    उनके आगे मेरी एक भी न चली और स्कूटर पर बैठ कर चल दिया। आज वो मुझसे चिपक कर बैठी थी, उनके स्तन का अहसास मुझे मेरी पीठ पर हो रहा था।

    हम दोनों पहाड़ी पर पहुँचे, देखा कि सूर्य अपनी लालिमा को समेटे अस्त होने को था। चारों तरफ धीरे धीरे अंधेरा बढ़ रहा था। कैंसर अस्पताल के पार्किंग क्षेत्र में स्कूटर पार्क कर अस्पताल के पास पार्क के एक शिला पर हम दोनों बैठ गये।

    प्रियंका मेरे काफी करीब बैठी हुई थी, वो मेरे कंधे पर अपना सिर और मेरे एक हाथ को अपने हाथ में लेकर बात करने लगी, बोली- काफी थक गई हूँ, इसलिए सोचा कि तुम्हारे कंधे पर अपना सर रखकर थोड़ा आराम कर लूं, इस लिए तुझे लेकर यहाँ आ गई।

    मैं उनके बालों को एक हाथ से सहलाने लगा। मेरे जीवन में पत्नी के बाद प्रियंका पहली लड़की थी जो मेरे इतने समीप बैठी थी। मेरी तो हालात भी खराब हो रही थी। लिंग में धीरे धीरे तनाव और दिल बेईमान हो रहा था। लगभग 45 मिनट बीत जाने के बाद मैं बोला- अब हमें चलना चाहिए क्योंकि काफी अंधेरा हो रहा है। प्रियंका बोली- यार, अभी दिल भरा नहीं!

    लेकिन मैं तो अपने आप को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था।

    इन सारी बातों के बीच मैं एक बात आपको बताना भूल ही गया कि प्रियंका की बनावट 32-30-32 थी, साथ दूधिया गोरी, काली आँखें और भूरे बाल… बड़ी ही कयामत दिखती थी। कोई भी उसे देख कर आहें भरने लगता था।

    मैं बोला- प्रियंका, आखिर तुम चाहती क्या हो? कब तक हम यों यहाँ पड़े रहेंगे। मैंने घड़ी देखी तो सात बजने को थी।

    मैं जैसे ही उठने को हुआ, उनका एक हाथ मेरी जीन्स के ऊपर से ही मेरे कड़क लिंग पर आया और उन्होंने तुरंत मेरे लिंग को ऊपर से ही पकड़ लिया, बोली- ये क्या? तुम तो बड़े ही छुपे रूस्तम निकले यार! मुझे चोदने की मन ही मन इच्छा रखते हो और मुझे भनक तक भी नहीं है। वो उठी और मेरे तरफ चेहरा करके सामने की बैठ गई और मेरे जीन्स की बटन खोलकर लिंग को बाहर निकाल लिया और लिंग की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगीं.

    मुझे अब खुद पर नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा था, मैं बोला- तुम्हें पता होगा कि मैं शादीशुदा हूँ. फिर यह काम गलत है. मैंने अपने लिंग को छुड़ाने के असफल प्रयास किया, तब तक प्रियंका मेरे लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

    मैं बाहर रहने के कारण विगत एक साल से पत्नी से नहीं मिला था, इसलिए मेरी सोयी हुई प्यास, कामुकता जाग उठी और काबू से बाहर हो गयी। मैं प्रियंका के बाल पीछे से पकड़कर अपने लिंग को उनके मुँह की गहराइयों में उतारने लगा। करीब दस मिनट बाद मैंने उनके मुख में ही अपना बीज छोड़ दिया। बीज छूटते ही उनका मुख मेरे बीज से भर गया तो लिंग को अपने मुँह से निकलने की कोशिश की लेकिन मैंने निकलने नहीं दिया और अपनी बीज को पीने को मजबूर कर दिया। करीब पाँच मिनट बाद उसे छोड़ दिया।

    उनकी सांसें फूलने लगी थी, गहरी श्वास लेते हुए अपने को नियंत्रित की, बोली- बड़े जालिम हो! ऐसे मुँह में अपना लिंग डाल रहे थे जैसे योनि में डाल रहे हो, लेकिन मुझे मजा आ गया। अपने घाघरे के अंदरूनी भाग को उठाकर अपना मुख और मेरे लिंग को पौंछने लगी तो मैं उसके पतले ओष्ठ को चूसने लगा। उसके मुँह से मेरे बीज की बास आ रही थी. प्रियंका मुझे चुम्बन में सहयोग कर रही थी, एक हाथ से मेरे लिंग को सहला रही थीं. मेरा लिंग एक बार फिर अपने पूर्ण अवस्था में आ गया।

    प्रियंका उठी मेरी जीन्स को कच्छे सहित झट से नीचे कर दी, मुझे पास के संकीर्ण कुर्सीनुमा पेड़ पर बैठा दिया और अपने घाघरे को उठाकर मेरे लिंग पर मेरी तरफ चेहरा कर कर बैठ गई। मेरा लिंग उनकी योनि को पैंटी के ऊपर से ही स्पर्श किया तो मुखे एक सुखद एहसास मिला और अपने एक हाथ से उनकी पैन्टी के योनि वाले भाग को एक तरफ किया और अपने लिंग को उनकी योनि के दोनों ओष्ठ के बीच व्यवस्थित किया.

    उनकी योनि बिल्कुल ही गीली हो गई थी, फिर उनकी कमर पर अपने दिनों हाथों से अपनी पकड़ को मजबूत किया और धीरे -धीरे उनकी कमर पर अपना दबाव बढ़ाते चला गया और लिंग उनकी योनि की गहराइयों में डूबता चला गया लेकिन उसकी योनि टाइट थी तो मेरे लिंग पर भी हल्का दर्द का अहसास होने लगा, लेकिन प्रियंका मेरे लिंग को पूरी तरह अपनी योनि में डालने को बेताब थी, उन्होंने अपने को थोड़ा पीछे किया, फिर बोली- अपने दोनों हाथों से दबाव बढ़ाओ!

    और मैंने एक तेज धक्का दिया और मेरा लिंग उनकी योनि के अंदर उनकी बच्चेदानी को छू गया। उन्होंने आउच… की उनका दर्द उनके चेहरे से दिख रहा था। कुछ देर यों ही शान्त रहने के बाद मैं उनके चेहरे, गाल, गर्दन और जितना जा सकता था उनके स्तन को चूमने लगा और प्रियंका धीरे धीरे धक्का लगाने लगी, फिर उन्होंने और तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए.

    उनके धक्के लगाने के अंदाज से पता चल रहा था कि वो जल्द ही चरमोत्कर्ष को प्राप्त करना चाहती हों, करीब पंद्रह मिनट चुदाई के बाद वो थोड़ी अकड़ती हुई बड़बड़ाने लगी- राज चोदो और जोर से, फाड़ दो मेरी चूत को… बहुत परेशान कर रही थी, मेरी बरसों की प्यास बुझा दो और वो अपनी चूत मेरे लिंग पर तेजी से रगड़ने लगी, उम्म्ह… अहह… हय… याह… तेजी से उछल उछल कर चुदने लगी. उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे गर्दन को मजबूती से पकड़ी हुई थी और मैंने उनकी कमर को।

    प्रियंका मेरे गाल को अपनी दांतों से पकड़ती हुई तेजी से स्खलित हो गई, उनकी गरमा गर्म चूत के रस का अहसास मेरे लिंग पर हो रहा था. लेकिन मेरा अभी बाकी था, वो इसी अवस्था में मेरे शरीर पर निढाल पड़ी रही करीब दस मिनट तक; मेरा लिंग अभी भी उसकी चूत में ही था।

    सामान्य होने के बाद मैं बोला- अभी मेरे नहीं हुआ है. तो वो बोली- मैं अभी कौन सी भागी जा रही हूँ। मेरी चूत में अभी भी तेरा लिंग पड़ा हुआ है। आगे गहरी खाई वो भी अंधेरी लेकिन चंद्रमा की रोशनी फैली हुई थी, हम दोनों एक दूसरे को सही ढंग से देख पा रहे थे। मैं बोला- एक बार अपनी दूध तो पिलाओ न यार! आज तक अपने स्तन को छूने नहीं दिया, और आज एकदम मुझे ही चोद दिया। वो मुस्कुराती हुई बोली- जब तुझे मैं पहली बार रेस्तरा में मिली थी, तब से ही बेताब थी लेकिन तूने ही ध्यान नहीं दिया, आखिर में मुझे ही पहल करनी पड़ी।

    मैं बोला- यह जानते हुए कि मैं शादीशुदा हूँ फिर भी तुम मेरे साथ संबंध बनाना चाहती थी? वो बोली- क्या करूँ… तुझे चाहने लगी थी. “तो कभी इजहार क्यों नहीं किया?” डॉक्टरनी साहिबा बोली- डर था कि कहीं तुम दूर ना चले जाओ। अब तुम छोड़ दोगे तो भी गम नहीं क्योंकि मैं इस पल को याद कर जी लूँगी। ये बड़े ही यादगार पल हैं मेरे लिए! इसके लिए मैं विगत एक माह से तैयारी कर रही थी। मुझ पर कितनों की नजर है, घर पर मेरी शादी की बात हो रही है लेकिन मैं अपना पहला चुदाई तुमसे ही करवाना चाहती थी क्योंकि तुझे जीवन साथी नहीं बना सकती तो कम से कम इस दर्द के एहसास के साथ तो जीवन काट सकती हूँ। शादी के बाद अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती हूँ। मैं तुम से बहुत प्यार करती हूँ और करते रहूँगी, चाहूँगी कि अगले जन्म में तुम ही मेरे पति हो। मैंने तो तुझे अपना पति मानकर स्वेच्छा से अपने आप को तुझे समर्पित किया है।

    उनकी आँखों से आँसू की धारा बह रही थी। मैंने उनके आँसू को हाथ से पौंछते हुए एक चुम्बन उनके गाल पर लिया और गले से लगा कर बोला- तुम्हें पाकर और तुम्हारे समर्पण से मैं धन्य हुआ… तुमने तो अपनी अमूल्य संपत्ति मुझे समर्पित कर दी पर मेरे पास देने को कुछ नहीं है। वो बोली- है… वो भी समय आने पर ले लूंगी।

    मेरा लिंग अभी भी उनकी चूत में ही था पर अब थोड़ा शिथिल हो रहा था। मैं बोला- प्रियंका, अब हमें चलना चाहिए, काफी रात हो गई है. घड़ी पर नजर डाली तो नौ बजने को थे, मैं बोला- प्रियंका, तुम्हारा होस्टल का गेट बंद होने का समय हो गया है, चलो चलते हैं! तो वो बोली- आज की रात मैं तुम्हारे साथ ही रहूँगी, कल शाम को ही होस्टल जाना है.

    “पर कहाँ और कैसे? इस पहाड़ी पर?” “ये तुझे सोचना है कि अपनी पत्नी को कैसे और कहाँ रखना है। अब तो मैं तुम्हारी ही हूँ जब तक मेरी दूसरी शादी नहीं हो जाती।” मैं बोला- दूसरी? तो वो डॉक्टरनी बोली- हां… एक आज और अभी जो हुई और हो भी रही है।

    मैंने उनके गाल को एक बार फिर चूमा और एक हाथ से उसके स्तन को कस के दबा दिया, प्रियंका ने आउच की आवाज की और मेरे गाल को कस के काट लिया। मेरे लिंग में जो शिथिलता आ रही थी, वो दूर होने लगी, वो फिर कड़क होने लगा.

    मैं लगातार एक हाथ से ही उनकी चोली के ऊपर से ही स्तन का एक एक करके मर्दन कर रहा था। अब वो फिर से अपने कमर को आगे पीछे करते हुए चुदाई करने लगी. करीब बीस मिनट के चुदाई के बाद हम दोनों स्खलित हुए।

    फिर वहाँ से मैं डॉक्टर प्रियंका को अपने कमरे पर ले आया। मैं दो रूम का फ्लैट में रहता था जिसका दरवाजा बाहर की तरफ खुलता था। अंदर आने के बाद देखा कि मेरी पैन्ट के चैन वाले भाग पर हल्का खून का धब्बा दिखाई दिया और प्रियंका उसे देखकर मुस्कुराए जा रही थी।

    जब मैंने उनके घाघरे को उठा कर देखा तो उसकी पैन्टी, घाघरा और जांघ पर खून के धब्बे दिखाई दिए, मैंने कहा- तुम बहुत बहादुर हो जो पहली चुदाई का दर्द चुपचाप बर्दाश्त कर लिया? मेरी पत्नी तो तीन दिनों तक कराहती रही थी और पास फटकने तक नहीं दिया था। वो बोली- एक ही बार में तूने उसकी चूत का भुरता बना दिया होगा। जब मैं तुम्हारे ऊपर थी तो दो बार मेरा स्खलित हुआ, उसके बाद तुम्हारा! वहां तो मैं अपनी इच्छा से तुमसे चुद रही थी, तुम अपनी पत्नी को अपनी इच्छा से चोद रहे होंगे तो निश्चित तौर पर लंबे समय तक चोदे होंगे।

    “हां, वो तीन बार स्खलित होने के बाद हाथ जोड़कर विनती करने लगी तो मैंने उसके मुँह में चोद कर अपना पानी उसके मुंह में डाल दिया था। उसके बाद तो मेरे पास आने से घबराने लगी थी। एक माह बाद ही उसे चोद पाया था, वह भी उसके हिसाब से… जिससे उसे कोई समस्या न हो और वह भी मजा ले।”

    प्रियंका बोली- तो लग रहा है कि आज मेरी बुर की खैर नहीं। अभी तक तो मैंने तुम्हारे लिंग पर राज किया, अब तुम मेरे बुर पर राज करोगे। देखती हूँ अभी भी तुम में वो दम है या नहीं! मुस्कुराती हुई प्रियंका बाथरूम में चली गई।

    थोड़ी देर में फ्रेश होकर प्रियंका नंगी ही बाहर निकली तो मैं उसके संगमरमरी बदन को देखता ही रह गया, बोला- ये क्या, नंगी ही आ गई? तो वो बोली- अंदर नहीं तौलिया है… और यहाँ ना मेरा कोई कपड़ा… इसलिए नंगी ही बाहर आ गई। मैंने अपने कपड़े धोकर अंदर ही सूखने डाल दिये हैं, कल तक सूख जाएंगे। मैं बोला- ठीक है.

    और मैंने अपने कमरे के रेक से एक लेडीज नाइट सूट उसे पहनने के लिए दिया और मैं तौलिया लेकर वाशरूम में चला गया।

    फ्रेश होकर निकला तो प्रियंका दो कॉफी बनाकर किचन से निकल रही थी। मैं बोला- ये क्या, मैं बना देता ना! वो बोली- मैं तुम्हारी अब मैम नहीं, बीवी हूँ, सुनो फ्रिज में मशरूम रखे थे, सब्जी बना रही हूँ, सब्जी रोटी खायेंगे और फिर पूरी रात तो… एक कातिल मुस्कान के साथ मेरे गोद में आकर बैठ गई।

    मैं बोला- कॉफी तो पीने दोगी? तो बोली- क्यों नहीं… लो पियो! और अपनी कॉफी मुझे पिलाने लगी और मेरे हाथ की कॉफी खुद पीने लगी.

    मैं बोला- सारा प्यार आज ही निछावर कर दोगी? प्रियंका बोली- कल शाम तक ही तो हूँ, उसके बाद एक सप्ताह बाद ही तुम्हारे दर्शन होंगे।

    उस रात मैराथन चुदाई प्रियंका की हुई जिसमें वो चार बार स्खलित हुई। उसके बाद हम दोनों नंगे ही सो गए। यह सिलसिला लगभग दो सालों तक चला उसके बाद मेरी पोस्टिंग चंडीगढ़ हो गई और हमारा मिलन बंद हो गया लेकिन संपर्क लगातार बना रहा.

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    So fucking hot. I’m so ready for my Princess to get her first! 👸🏻🍆😍

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    Pussy banger

    मैं जयपुर से हूँ, मेरी लंबाई 5 फुट 5 इंच की है और लंड का साइज भी लंबा और मोटा है।

    मेरे भैया की शादी हुए कुछ ही दिन हुए थे। मैं अपने ऑफिस के काम से भैया की ससुराल वाले शहर गया था। मुझे शाम को वापस आना था.. पर काम समय पर पूरा नहीं हुआ.. तो मुझे वहाँ रुकना पड़ा। मैं जैसे ही वहाँ से निकला.. तो देखा कि ऑफिस के बाहर सड़क पर भैया के ससुर खड़े थे।

    मैंने उनको प्रणाम किया और पूछा- आप यहाँ कैसे? तो उन्होंने कहा- मेरे पास कुंवर जी का फोन आया था कि आप यहाँ आए हो। इसलिए मैं यहाँ आपको लेने आया था और आप हमसे बिना मिले ही जा रहे हो।

    ‘परन्तु मुझे जल्दी ही वापस जाना है।’ ‘ऐसा कभी हो सकता है क्या..? अब तो आपको घर पर ही रुकना होगा।’

    भाई की साली ने खातिरदारी की

    मैं भी उनकी आज्ञा का पालन करते हुए उनके साथ चल पड़ा। जब हम घर पहुँचे तो सभी ने राजस्थानी परंपरा के अनुसार मेरी बहुत खातिरदारी की.. लेकिन भैया की साली पूजा मेरी कुछ ज़्यादा ही सेवा कर रही थी और मुझे देख कर बार-बार मुस्कुरा रही थी।

    मैंने भी मज़ाक करते हुए कह दिया- क्या बात है पूजा जी.. बहुत सेवा कर रही हो.. अगर ऐसे सेवा करोगे तो हम रोज-रोज आने लग जाएंगे। तो उसने कहा- अभी तो आपने हमारी सेवा देखी ही कहाँ है। इतना कह कर वो हँसने लगी।

    बस ऐसे ही हँसी-मज़ाक चल रहा था। सभी ने खाना खाया और मैं खाना खाने के बाद छत पर टहलने चला गया। कुछ देर बाद छत पर पूजा भी आ गई और उसके साथ भैया के साले और पड़ोस की सहेलियां आई थीं। हम सब मिलकर बातें करने लगे।

    रात को 9 बजने वाले थे.. सभी ने मुझसे नमस्ते की और जाने लगे। मैं उनको सीढ़ियों तक छोड़ने गया।

    सभी उतर रहे थे.. तभी किसी ने मेरा पीछे से कुर्ता खींचा। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो यह पूजा की सहेली थी.. जिसने अपना नाम कल्पना बताया था। उसने धीरे से मेरे कान में कहा- पूजा आपसे प्यार करती है। वो इतना कह कर वहाँ से चली गई।

    उसके बाद मेरे दिल में अजीब-अजीब से ख्याल आने लगे। तभी कुछ देर बाद छत पर पूजा मेरे लिए दूध लेकर आई। सभी लोग नीचे चले गए थे।

    मैंने दूध का गिलास पकड़ते हुए पूजा का हाथ पकड़ लिया और बोला- आपकी सहेली हमसे कुछ बोल कर गई है। पूजा एकदम से डरने लगी, बोली- वो क्या बोली?

    मैंने बोला- पूजा यह सच है क्या.. यह आप खुद भी तो बोल सकती थीं। पूजा बोली- मुझे डर लग रहा था। अगर आप गुस्सा हुए तो बोल दूँगी.. कि वो मज़ाक कर रही थी।

    मैंने पूजा का हाथ पकड़ लिया.. तो उसकी साँसें तेज चलने लगीं।

    इतने पास से उसके बोबे ऊपर-नीचे होते देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मेरी वासना जागने लगी। मुझे डर भी लग रहा था.. क्योंकि कोई भी ऊपर आ सकता था।

    फिर भी मैंने पूजा के होंठों पर होंठ रख कर किस कर लिया। पूजा ने मुझे कस कर पकड़ लिया और लंबी सिसकारी लेकर मुझे धकेल कर भाग गई। मेरा लंड पैन्ट फाड़ने जैसा हो गया।

    इससे पहले मेरा कोई चुदाई का अनुभव नहीं था.. लेकिन ब्लू-फिल्म्स बहुत देखी थीं।

    मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ कि मुझे इतनी जल्दी चूत मिल जाएगी। खैर.. मुझे नीचे से बुलावा आया कि बिस्तर लग गए हैं। मैं बेमन से नीचे चला गया।

    मेरा मन पूजा के पास सोने का था। पर मुझे जिधर बिस्तर दिया गया मैं उधर ही सोने लगा। तभी मुझे तकिए के नीचे कुछ महसूस हुआ.. मैंने हाथ डाल कर देखा तो उसके नीचे एक नोट बुक रखी थी।

    मैं उसे पलटने लगा.. तभी उसमें से एक पन्ना नीचे गिरा। मैंने उसे उठा कर पढ़ा.. वह पूजा का ही लिखा हुआ था। उसमें लिखा था कि रात को सबके सोने के बाद छत पर मिलेंगे। राजस्थान में अधिकतर लोग जल्दी सो जाते हैं।

    मैं लेटा-लेटा पूजा के बारे में ही सोच रहा था। रात के ग्यारह बजे मैं उठकर छत पर गया। कुछ देर बाद पूजा आई, उसने कहा- मम्मी-पापा और भाई अभी अभी सोए हैं।

    भाई की साली छत पर चूत चुदवाने आई

    पूजा को मैंने अपनी बांहों में भर लिया और पूजा ने खुद ही मेरे होंठों से होंठ लगा दिए। हम एक-दूसरे के होंठों को बुरी तरह चूसने लगे। मैंने अपना एक हाथ पूजा के बोबे पर रख दिया। उसका बड़ा बोबा मेरे हाथ में पूरा नहीं आ रहा था, मैंने उसके बोबे को नीचे से पकड़ कर दबाया.. तो पूजा ने एक सिसकारी भरी ‘इसस्स्स्स्स्..’

    उसने मुझे कस कर पकड़ लिया, मैंने पूजा को नीचे लिटा दिया और उसके दोनों बोबों को दबाने लगा।

    पूजा का हाथ मेरे कूल्हों को सहला रहा था और वो कसके मेरे होंठों को चूस रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया। पूजा के मुँह से निकला- ओह्ह.. राज आई लव यू.. मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।

    उसने मेरा हाथ अपनी चूत पर ज़ोर से दबा लिया। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया और पैंटी सहित उसे उसके घुटनों तक खींच दिया। हल्की रोशनी में पूजा की चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई एकदम मस्त लग रही थी। मैंने ब्लू-फिल्मों की तरह उसकी दोनों फांकों को दोनों अंगूठों से थोड़ा फैला कर उसके दाने को मुँह में भर कर किस किया।

    तभी पूजा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को चूसने लगी। मैंने अपना लोवर चड्डी सहित नीचे खींच दिया। मेरा लंड झटके से बाहर उछल पड़ा। मैंने पूजा का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया, पूजा मेरे लंड को मुट्ठी में पकड़ कर दबाने लगी।

    मेरे लंड का आगे का हिस्सा भीग गया था। मैंने फिर अपने होंठों को पूजा की चूत के हवाले कर दिया। पूजा एक हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी और एक हाथ अपने मुँह पर रख कर अपनी सिसकारियों को निकलने से रोक रही थी।

    मैंने उसके कुर्ते को ब्रा समेत ऊपर कर दिया और अपने एक हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा। उसके एक बोबे को मुँह में भर कर चूसने लगा और दूसरा दबाने लगा।

    पूजा ने मुझे इतनी ज़ोर से अपने बांहों में भरा और दबाया जैसे वो मुझे पूरा अपने अन्दर उतारना चाहती हो। मैंने एक हाथ से पूजा की सलवार को एक पैर से पूरा निकाल दिया। हम पूरे नंगे नहीं हो सकते थे.. क्योंकि इस वक्त हम दोनों खुले में थे।

    हम दोनों एक-दूसरे की जरूरत के हिसाब से खुल गए। मैं अपने लंड को पूजा की चूत पर रगड़ने लगा। पूजा ने वासना में भरते हुए कहा- प्लीज़ इसे अन्दर डाल दो और मुझे अपना बना लो।

    हम दोनों फुसफुसा कर बोल रहे थे, मैंने कहा- क्या अन्दर डाल दूं जानू.. अगर ऐसे शरमाओगी तो ये प्यार कैसा हुआ?

    उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर रख कर बोली- मेरी जान मेरे इस लंड को अपनी रानी के भोसड़े में (चूत) डाल दो। मैंने कहा- रानी.. उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और बोली- कुछ नहीं बोलो.. आज मुझे पूरी तुम्हारी होना हैं.. कुछ मत कहो।

    मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी चूत पर रख कर एक झटका मारा। लंड का अगला हिस्सा उसकी चूत में फंस गया। उसके मुँह से एक तेज कराह निकल पड़ी ‘उन्ह्ह.. मर गई.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह..’

    मैंने सांस रोक कर एक ज़ोर से झटका मारा, मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुसता चला गया। पूजा ने अपने कुर्ते को दोनों हाथों से मुँह में दबा लिया, मुझे उसकी दर्द भरी ‘गूं..गूं..’ सुनाई दे रही थी।

    मैं थोड़ा रुक गया और उसके बोबे चूसने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसके हाथों से कुर्ते को हटाया। उसकी आँखों पर आँसुओं की बूंदें थीं। मैं उनको पी गया और उसके होंठों पर होंठ फंसा कर एक ज़ोर से झटका मारा मेरा पूरा लंड पूजा की चूत में था।

    मुझे अब अपने लंड पर जलन महसूस हुई.. पर यह पूजा की चूत की गर्मी के सामने कुछ नहीं थी। मैं उसके बोबे चूसने और दबाने लगा।

    कुछ देर बाद पूजा फुसफुसाई- राज चोद दे.. अपनी पूजा रानी को.. मैंने झटके लगाने शुरू कर दिए, मेरा लंड उसकी चूत में फँस कर अन्दर जा रहा था। पूजा भी जोश में आती जा रही थी। अगर वहाँ आस-पास कोई ना होता तो वो ज़ोर से चिल्ला रही होती।

    वो मस्ती में फुसफुसा रही थी- चोद मेरी जान.. चोद.. आह्ह.. मजा आ रहा है.. आह्ह..

    कुछ देर बाद मुझे अपना लंड और ज़्यादा फूला हुआ लगा। मैं ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में झटके लगाने लगा। पूजा नीचे से गांड उठा-उठा कर चुदवा रही थी और अपने हाथों को मेरी गांड पर रख कर अपनी चूत की ओर खींच रही थी।

    थोड़ी देर बाद पूजा ने अपने हाथ और पैर मेरी कमर पर लपेट लिए.. मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया। मैं ज़ोर-ज़ोर से चूत में झटके मारने लगा। तभी मुझे अपने लंड पर नीचे से कोई चिपचपा पानी ऊपर की तरफ आता महसूस हुआ। मतलब पूजा झड़ रही थी। मैं भी पूरे जोश में पूजा को चोदने लगा।

    कुछ देर बाद मेरा सुपारा भयंकर फूल गया और मेरे लंड ने पूजा की चूत में बरसात कर दी। पूजा मुझे बेतहाशा चूमने लगी कुछ देर बाद हम उठे। मेरे लंड पर पूजा की सील का खून लगा था।

    पूजा ने अपने कपड़े ठीक किए और लंगड़ाते हुए नीचे जाकर पानी का जग भर लाई। मैंने अपने लंड को धोया और ढेर सारा पानी नीचे गिरा दिया.. जिससे फर्श पर लगा खून नाले की तरफ बह गया। फिर हमने एक-दूसरे को एक लंबा चुंबन दिया। मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा.. तभी हमने किसी के कदमों की आहट सुनी। हम दोनों चुपचाप नीचे चले गए। मैंने समय देखा दो बज चुके थे। मैं चादर तान के सो गया। जब सुबह उठा तो देखा तो पूजा लंगड़ा रही थी।

    उसकी मम्मी ने पूछा- क्या हुआ? तो उसने कहा- गेट से ठोकर लग गई। हम दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए फिर मैं फ्रेश होकर चला आया। आते समय पूजा की आँखें नम थीं।

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    आज मैं अपने जीवन की ससुर बहु सेक्स की सच्ची कहानी लिख रही हूँ, चाचा ससुर ने बहु की चुदाई कैसे की. आशा है कि आप सभी को पसंद आएगी। मैं शिवानी हूँ.. इंदौर में रहती हूँ। मेरी उम्र 38 साल की है। मेरे पति एक कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं। मेरा एक 12 साल का बेटा है, जोकि नैनीताल में हॉस्टिल में रहकर पढ़ाई करता है। इंदौर में मैं और मेरे पति ही रहते हैं। आज मैं अपने जीवन की सच्ची कहानी लिख रही हूँ, आशा है कि आप सभी को पसंद आएगी।

    मेरे पति को कंपनी के काम से एक महीने के लिए लेटिन अमेरिका जाना था, वो मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे इसलिए उन्होंने उनके चाचा को मेरे पास रहने को बुला लिया। फिर मेरे पति टूर पर चले गए।

    अब घर में मैं और चाचा ससुर ही रह गए। उनकी आयु 58 की है.. उनकी बीवी 5 साल पहले गुजर गई हैं। वे गाँव में रहकर खेती संभालते हैं। मेरे सास-ससुर मेरे देवर के साथ दुबई में रहते हैं.. इसलिए वो मेरे साथ नहीं आ सकते थे।

    मेरे चाचा ससुर का एक बेटा है। वो दिल्ली में रहता है, पर उसकी बीवी मेरे चाचा ससुर से बात भी नहीं करती। वो अकेले थे, इसी लिए मेरे पास रहने आने को जल्दी ही मान गए। चाचा का कद 6 फुट 2 इंच है.. वे दिखने में बहुत ही अच्छे लगते हैं।

    मेरे पति जब मेरे पास होते हैं मुझे जमकर चोदते हैं, पर अब वो नहीं थे। मैं हमेशा घर में नाइटी ही पहनती हूँ, पर चाचाजी के सामने कैसे पहनूं, ये मेरे लिए दिक्कत की बात थी।

    एक दिन की बात है.. मैं चाचा जी के कमरे में किसी के काम से गई, तब वो आँख बंद करके अपने लंड की मालिश कर रहे थे। उनको पता नहीं था कि मैं देख रही हूँ। वो बस आँखें बंद करके लंड की मालिश किए जा रहे थे और कुछ बड़बड़ा भी रहे थे।

    मैं वहाँ से भाग आई.. पर उससे क्या होता है, चाचा जी का मोटा लंड देख कर मेरी चूत तो बहने लगी थी। उनका इतना मस्त काला और लम्बा लंड मैंने पहली बार देखा था। मुझे पसीना आने लगा था। अब तो बस मुझे सिर्फ़ उनका लंड दिखाई दे रहा था.. पर रिश्ता कुछ नाजुक था इसीलिए ऐसा-वैसा कुछ सोच भी नहीं सकती थी।

    इस बात को 3 दिन हो गए। अब मैं थोड़ी नॉर्मल हो गई थी। एक रात में सो रही थी, तब मुझे कुछ महसूस हुआ। किसी का हाथ मेरे चूचे दबा रहे थे। मैं समझ गई कि ये चाचाजी ही हैं। मैंने भी उनके लंड को याद किया और सोने का नाटक करती रही।

    कुछ देर बाद वो मेरे पैरों को चूमने लगे, मेरी नाइटी भी उन्होंने ऊपर तक उठा दी और मेरी चूत को सहलाने लगे। अब मेरे से कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। मैंने अपनी दोनों टांगें खोल दीं। चाचा जी समझ गए कि मेरी चूत चुदना चाह रही है।

    चाचा जी बेख़ौफ़ होकर मेरे ऊपर चढ़ गए और उन्होंने मेरे कान में कहा- बहू जाग जाओ.. खुल कर मजा लो। मैंने कुछ जबाव नहीं दिया तो और वो बोले- शिवानी, मुझे पता है.. तुम जाग रही हो और मजा ले रही हो। तब मैंने बिना आँखें खोले ही रिप्लाइ दिया- चाचाजी.. चाचाजी- बोलो बहू! मैं- क्या कर रहे हो..! चाचाजी- बस तुझे प्यार कर रहा हूँ। मैं- ये कैसा प्यार है? चाचाजी- तुम 3 दिन पहले मुझे देखकर क्यों भागी थीं? मैं- क्या..! चाचाजी- अब बस भी करो यार.. आँखें खोलो और चुदाई का खुल कर मजा लो।

    वो खड़े हो गए और बत्ती जला दी। वो सिर्फ़ लुंगी में ही थे और मैं नाइटी में थी। फिर उन्होंने लुंगी निकाल दी और अपना तन्नाया हुआ लंड हाथ में लेकर हिलाने लगे। मैं उनके लंड को बड़ी प्यासी नजरों से देख रही थी। उन्होंने मेरे पास आकर लंड मेरे मुँह के सामने किया।

    चाचाजी- शिवानी इसको तुम्हारे मुँह का टेस्ट कराओ, तुम इतनी खूबसूरत हो.. इसलिए मेरे से संभलना मुश्किल हो जाता है।

    चाचाजी गाँव के थे.. उनका शरीर एकदम फिट था। मैंने उनका लंड मुँह में ले लिया। मेरे मुँह में लंड नहीं आ रहा था.. पर मैं इतने मस्त लंड को छोड़ना नहीं चाहती थी.. इसलिए मैं उनके लंड को जीभ से चाटने लगी। चाचा जी का लंड बड़ा स्वादिष्ट लगा, तो मैं उनकी बड़ी-बड़ी गोटियों को भी चाटते हुए चूस और चूम लेती थी।

    दो-तीन बार मैंने चाचा जी के लंड पर अपने दाँत भी गड़ा दिए.. तो चाचाजी चिल्ला पड़े- ओह.. आह्ह.. बहू क्या कर रही हो.. तू तो मस्त चूसती हो.. आज तक मैंने गाँव में बहुत सारी चूतें चोदी है, पर तेरे जैसा किसी ने नहीं चूसा.. आह.. मजा आ रहा है.. मेरा सब कुछ तेरा ही है.. ले चाट ले इसको..!

    मैं- क्या चाचाजी.. क्या कहा आपने? चाचाज- ओह.. हाँ गाँव की औरतों में मेरा लंड बहुत फेमस है.. खुद सामने से आकर चूत चुदवाकर चली जाती हैं। आज तक मैंने किसी को चोदने को नहीं कहा, वे सब खुद आकर अपना घाघरा ऊँचा करके मेरे लंड से अपनी चूत की ठुकाई करवाती हैं। पर आज तक कभी शहर वाली चूत को नहीं चोदा.. आज तुम मिल गई.. अह.. तू तो शहर वाली है ना.. ये ख्वाहिश भी पूरी हो गई। मैं- हाँ चाचाजी..

    मैं मस्ती से उनका लंड चूस रही थी। फिर मैं इतने जोरों से लंड चूसने लगी कि उनका पानी निकल गया और उनका पानी मैं गटगट पी गई। आज तक मैंने कभी वीर्य पिया नहीं था, पर आज पिया तो बहुत ही टेस्टी लगा।

    अब मेरे पर चुदाई सवार हो गई थी। मैंने उनका लंड जीभ से साफ किया, तो लंड में फिर से जान आ गई। मैं- चाचाजी कैसा लगा? चाचाजी- बहू तू बड़ा मजा देती है बहू.. बहु की चुदाई का मजा ही अलग है… अब तू जो बोलेगी.. मैं वो करूँगा.. आज से मैं तेरा गुलाम हो गया। मैं- चाचाजी।

    वो जोरों से मेरे मम्मों को दबाने लगे, मैं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करने लगी। वो बड़े बेरहमी से मेरे थन मसल रहे थे। यह हिंदी चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

    फिर उन्होंने मेरा लिपलॉक किया और मेरी जीभ को चूसने लगे। एक हाथ से मम्मों को मसल रहे थे और जीभ से चूत का दाना सहला रहे थे। मैंने उनको जोर से पकड़ रखा था।

    मैं- चाचाजी मुझे आपका लंड फिर से चूसना है। चाचाजी- मैं तो तेरा गुलाम हूँ.. मुझे तू बोल आप नहीं..! मैं- जी ठीक है।

    चाचाजी ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मुझे उनका हब्शी लंड चूसने में बड़ा मजा आ रहा था। हम दोनों 69 में आ गए.. वो मेरी चूत को चाट रहे थे और मैं अपनी गांड उठा-उठा कर चूत चटा रही थी।

    अब चाचाजी मेरे टांगों बीच में आ गए और कहने लगे- बहू तेरी चूत नहीं है ये गरम भट्टी है.. तेरी जैसी लुगाई आज तक नहीं देखी.. आह.. साली मस्त है रे तू.. मेरी कुतिया आज तो मैं तेरी चूत को खा जाऊँगा।

    मैं- चल खा जा.. साले मेरा पानी निकाल दे हरामी.. अह.. चाचाजी- हाय मेरी रंडी..

    उन्होंने मेरी चूत में अपनी लंबी जीभ डाल दी और जीभ से चूत को चोदने लगी।

    मैं- आहह.. मर जाऊँगी मेरे चाचा.. तूने क्या कर दिया.. आज मुझे अपनी बना ले और मेरी चूत का सलाद बना दे। ‘ले रंडी ले साली..’ मैं- चाचा मेरे से अब रहा नहीं जा रहा, अब चोद दे। चाचाजी- अभी नहीं चोदूंगा.. पहले चूत को खाने दे..! मैं- तेरे मूसल से मेरी चूत खा मेरे भड़वे.. अह.. चाचाजी- नहीं कुतिया.. अभी और मजा ले ले।

    वो मुझे तड़पा रहे थे और मुझसे सहन नहीं हो रहा था, अब जैसे भी हो मुझे बस लंड चाहिए था। मैंने उनको उकसाने के लिए कहा- लगता है तुम्हारे लंड में जान नहीं है.. साले तेरा लंड कुछ काम का नहीं है.. चल हट साले भड़वे..!

    अब वो थोड़े गुस्सा हुए और उन्होंने मेरी टांगें खोलते हुए अपने हब्शी लंड को मेरी छोटी सी चूत के आगे टिका दिया, फिर बोले- ले अब भोसड़ी की.. मेरे मूसल को झेल..!

    यह कहते हुए उन्होंने एक ठोकर मारी, पर उनका लंड अन्दर नहीं जा पा रहा था.. इतना मोटा जो था। मैंने कहा- चाचा लवड़े साले.. डाल इसको अन्दर..! उन्होंने थोड़ा आगे पीछे होते हुए 3-4 धक्के लगाए.. तब उनके मोटे लंड का आंवला सरीखा सुपारा चूत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर को चला गया।

    अब वो मुझे चोदते हुए और मेरे दूध मसकते हुए कहने लगे- बहू बहुत मजा आ रहा है.. तू साली चीज बड़ी मस्त है।

    मुझे हालांकि उनके मोटे लंड से तकलीफ हो रही थी, पर मैं दांतों को भींचे हुए उनके लंड की मोटाई को अपनी चूत में जज्ब करने की कोशिश कर रही थी। कुछ ही देर में रस के कारण चूत ने दर्द को भुला दिया और मैं अपनी गांड उठाकर चुदवाने लगी।

    कुछ देर बाद उनका पूरा लंड चूत की जड़ तक अन्दर-बाहर होने लगा और धमाकेदार धक्कों से मेरी चूत का बाजा बज उठा। इसके बाद उन्होंने फिर मुझे उल्टा किया और मेरी गांड में जीभ डाल दी। मैं मस्ती में ‘आह..’ करने लगी।

    उन्होंने अपने लंड को पीछे से चूत में पेल दिया और जोरों से चोदने लगे। मैं चिल्लाए जा रही थी।

    कुछ देर चोदने के बाद उन्होंने कहा- मैं आने वाला हूँ। अब मैं सीधी हो गई और वो मुझे ऊपर से चोदने लगे। मेरा शरीर भी अकड़ने लगा था। चाचाजी- शिवानी बोल बीज कहाँ डालूँ? मैं- चाचाजी सब माल अन्दर ही डाल दो, जो होगा सो देखा जाएगा।

    उन्होंने अपने लंड का पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया और मेरे ऊपर निढाल हो गए, मेरी चूत से उनका रस बहता रहा। बाद में उन्होंने मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए। चाचा ने मेरी चूत को साफ किया।

    अब मुझे कुछ शर्म आ रही थी। मैंने उनको ‘सॉरी’ बोला कि मुझसे ग़लती हो गई। तब उन्होंने कहा- बहू ऐसा मत सोच.. मुझे एक औरत की जरूरत थी और तुझे एक मर्द की.. वही किया है हम दोनों ने। इसमें कुछ ग़लत नहीं है।

    मैं मुस्कुरा कर चाचा जी से लिपट गई। उस रात उन्होंने मेरी गांड भी मारी और जब तक चाचा जी हमारे घर रहे, तब तक ससुर में मुझे यानी अपनी बहु की चुदाई रोज 3-4 बार की। मैं उनका पानी पी जाती थी। इस ससुर बहु सेक्स से अब मैं बहुत खुश थी। उन्होंने मुझे बहुत सारे जेवर भी लाकर दिए। वो मुझसे हमेशा मिलने आते हैं और मौका मिलते ही मुझे खूब चोदते भी हैं। शायद वो मुझे मेरे पति से ज़्यादा अच्छे से तरीके से चोदते हैं, चाचा जी का लंड बड़ा है न.. इसलिए मुझे ही उनके लंड से चुदने में मजा आता है।

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    Black Anaconda

    मेरे बारे मैं तो आप सभी जानते ही हैं कि मेरे पति आर्मी में हैं. मेरी फिगर के बारे में भी आपको पता है कि मेरा गोरा बदन, पतली कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे चूचों को देख देख लड़के तो क्या बूढ़े भी मुठ मारने के लिए मजबूर हो जाते हैं. मुझे पटाने के लिए लड़के तो क्या बूढ़े भी तरसते हैं.

    तो अब मैं अपनी कहानी पर आती हूँ. कुछ दिन पहले की बात है, हमारे घर मेरे पति के फूफा जी आए हुए थे, जो करीब 50 साल के होंगे मगर पूरी तरह से तन्दरुस्त और फिट हैं. वो जब भी हमारे घर आते तो अक्सर मुझे घूर घूर के देखते, कभी मेरी बड़ी सी मटक मटक कर चलती गांड को और कभी मेरे डीप गले से बाहर आते चुचों को. मैं भी उनकी नज़रें पहचानती थी मगर सास ससुर के रहते वो कुछ नहीं कर सकते थे.

    रात का खाना खाते वक़्त ससुर जी ने शराब की बोतल खोल ली क्योंकि फूफा जी शराब के बहुत शौकीन थे और फुल टाइट होने तक पीते थे, ससुर जी इतनी ज़्यादा नहीं पीते थे मगर आज उनको भी कुछ ज़्यादा ही हो गई. मैं और सासू माँ अपने अपने कमरे में सोने चली गई मगर फूफा जी इतने टाइट हो गये कि उनसे चल पाना भी मुश्किल था.

    रात के 11 बज चुके थे कि मुझे ससुर जी ने आवाज़ लगाई. मैं बाहर गई तो ससुर जी बोले- बहू, यह देखो तुम्हारे फूफा तो यहीं पर सो गये… मैंने इनको उठाने की और अंदर ले जाने की बहुत कोशिश की मगर यह तो बेहोश होकर पड़े हैं. ज़रा तुम मेरी मदद करो और हम इनको अंदर ले जाकर सुला देते हैं.

    मैंने कहा- ठीक है पिताजी, एक तरफ से मैं पकड़ती हूँ और दूसरी तरफ से आप पकड़िए! और फिर मैंने फूफा जी का एक बाजू अपने गले में डाला, ससुर जी ने भी सहारा दिया और फिर धीरे धीरे उनको अंदर ले जाने लगे.

    फूफा जी ने मेरे कंधे को ज़ोर से पकड़ रखा था और मेरे दोनों बूब्स उनके साथ चिपके हुए थे. शायद फूफा जी को पता नहीं था कि उनकी बगल में मैं हूँ, नहीं तो वो मेरे कंधे को नहीं सीधा मेरे चूचे पकड़ते. फिर मैंने ससुर जी से कहा- पिता जी, आप दरवाजा खोलिए, मैं फूफा जी को संभाल लूँगी.

    तो ससुर जी ने फूफा जी को छोड़ दिया. मैं बड़ी मुश्किल से उनको अंदर लेकर गई और ससुर जी को कहा- पिता जी, आप जाओ, मैं फूफा जी का लिटा कर आ जाती हूँ. पिताजी तो पहले ही नशे की हालत में मुश्किल से खड़े थे, इसलिए वो भी बोले- हाँ बहू, तुम भाई साहिब को लिटा कर आ जाना और रात को भी एक दो बार देख लेना और पानी वग़ैरा पिला देना. मैंने कहा- ठीक है पिता जी, मैं अच्छे से फूफा जी का ख्याल रखूँगी.

    ससुर जी चले गये और मैंने फूफा जी को बेड पर लिटा दिया, मगर उनको लिटाते वक़्त मुझे उनको सामने से पकड़ना पड़ा और उस वक़्त फूफा जी की छाती मेरे दोनों चूचों से एकदम से सटी हुई थी और उनका लंड भी मेरी चूत के बिल्कुल सामने था. फूफा जी का एक हाथ मेरे गले में था और दूसरा हवा में लटक रहा था, जब में उनको बेड के ऊपर लिटाने लगी तो उनका वजन ज़्यादा होने के कारण संभाल नहीं पाई और खुद भी उनके ऊपर ही गिर गई.

    मैंने जल्दी से बाहर की तरफ देखा कि कहीं ससुर जी देख तो नहीं रहे… मगर वो जा चुके थे. एक पल के लिए तो मेरा मन हुआ कि ऐसे ही लेटी रहूं और फूफा जी के लंड पर अपनी चूत रगड़ दूं. मैं ना चाहते हुए भी फूफा जी के ऊपर से उठी और बाहर देखा तो ससुर जी अपने कमरे में जा चुके थे.

    अब मेरे मन में और शैतानी आने लगी और मैंने सोच लिया कि आज फूफा जी का लंड देख कर ही दम लूँगी. फिर मैंने फूफा जी के जूते निकाले और उनको टाँगों से पकड़ कर सीधा करके बेड पर लिटा दिया. फूफा जी को कुछ भी पता नहीं था. फिर मैं अपने कमरे में गई और ज़ोर से दरवाजा बंद किया ताकि सासू जी और ससुर जी को पता चल जाए कि मैं अपने कमरे में आ गई हूँ. और थोड़ी देर बाद ही फिर से फूफा जी के कमरे में आ गई और दरवाजा लॉक कर दिया.

    मैंने देखा कि फूफा जी अब भी वैसे ही पड़े हैं जैसे मैं लिटा कर गई थी. मैं फूफा जी के पास गई और धीरे से फूफा जी को आवाज़ लगाई ताकि मुझे पता चल जाए कि वो पक्का सो रहे हैं. जब फूफा जी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने फूफा जी के लंड पर हाथ रखा.. उफ्फ़ क्या लंड था फूफा जी का… सोते वक़्त भी कितना बड़ा था! अब तो फूफा जी का लंड देखने को मैं और भी उतावली हो गई… मैंने फूफा जी की पैंट की ज़िप खोली और अंदर हाथ डाल कर देखा, फूफा जी ने कच्छा पहना हुआ था.

    मैंने फूफा जी की पैंट की हुक भी खोल दी और पैंट को नीचे सरका दिया, फिर फूफा जी का कच्छा भी नीचे सरका दिया, अब फूफा जी का सोता हुया 7 इंच का लंड मेरी नज़रों के सामने था. एकदम काला मोटा साँप जैसा… मैंने उनके लंड को हाथ मैं पकड़ा और सीधा खड़ा किया और फिर हिलाने लगी. बहुत ही मजेदार लंड था फूफा जी का!

    मैं बेड के पास नीचे ही घुटनों के बल बैठी थी और लंड मेरे मुँह के सामने था… वैसे भी इतना बड़ा लंड मेरे हाथ में हो और मैं मुँह में लिए बिना रह जाऊँ… हो ही नहीं सकता! मैंने अपने होंठ खोले और लंड को अपने मुँह में भर लिया. उधर शायद फूफा जी के लंड पर भी मेरे होंठों का नशा चढ़ने लगा… फूफा जी का लंड धीरे धीरे अकड़ना शुरू हो गया था और 7 इंच से 8 इंच और फिर 9 इंच का हो गया.. मेरे मुँह में लंड मोटा होता जा रहा था. उफ़फ्फ़ लंड देखकर तो मेरी चूत में खुजली होने लगी थी.

    लंड को खड़ा होता देख मैंने सोचा कि आज फूफा जी के लंड को चूत में भी डाल लेती हूँ और फूफा जी को भी पता नहीं चलेगा और इतना बड़ा लंड मेरी चूत की प्यास भी अच्छे से बुझा देगा. फूफा जी का लंड अब भी मेरे हाथ में था और मैं लंड को पागलों की तरह अपने चेहरे और बूब्स पर रब कर रही थी.

    फिर मैं फूफा जी के पैरों की तरफ गई और उनकी पैंट को खींच कर उतार दिया और कच्छे को भी उतार फेंका. फिर मैंने उनकी शर्ट के सारे बटन खोल दिए. अब फूफा जी मुझे करीब करीब नंगे दिखाई पड़ रहे थे… उनका लंड अब भी टाइट हुए खड़ा था… मैं लंड को देखकर पागल हुए जा रही थी.

    मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और उतार फेंकी फिर मैंने अपनी कमीज़, ब्रा और पैंटी भी उतार दी और पूरी तरह से नंगी हो गई… मैंने फिर से फूफा जी का लंड पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी. उनका लंड पहले से भी ज़्यादा बड़ा हो चुका था करीब 10-11 इंच का… मेरी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी… फूफा जी सीधे लेटे थे और उनका लंड भी ऊपर की तरफ तना हुआ था.

    मैं फूफा जी के ऊपर आ गई और दोनों तरफ़ टांगें करके लंड को अपनी चूत के बीच में रख लिया. मेरी चूत तो पहले से ही गीली थी इस लिए लंड का 4 इंच का मोटा सुपारा मेरी चूत के दोनों होंठ खोलता हुआ अंदर घुस गया. मैंने थोड़ा सा और वजन डाला तो फूफा जी का आधा लंड मेरी चूत में समा गया. उफ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आअहह…आहहा अहह… लंड अंदर जाते ही मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी थी.

    मैंने अपने एक हाथ से लंड को नीचे से पकड़ा हुआ था और धीरे धीरे उस पर वजन डाले जा रही थी और वो मोटा भयंकर लंड भी मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुसता जा रहा था. फूफा जी अब भी बेहोश थे मगर वो नशे की हालत में ही अपनी टाँगों को ऐसे अक़ड़ा रहे थे जैसे उनको भी महसूस हो रहा हो कि उनका लंड किसी चूत में घुस रहा है. अब भी उनका लंड मेरी चूत में से 4 इंच बाहर था… इतना बड़ा लंड पहली बार में ही लेना आसान नहीं था, इसलिए मैं लंड के ऊपर ही उठने बैठने ल्गी और लंड को अंदर बाहर करने लगी.

    लंड मेरी चूत की दीवारों से चिपका हुआ था इसलिए अंदर बाहर करने में भी मुझे दर्द हो रहा था.. मगर मज़ा बहुत ज़्यादा आ रहा था… मेरी गीली चूत कुछ ही देर में लंड को आसानी से अंदर बाहर करने लगी और पूरा लंड मेरी चूत में चला गया. मैं फूफा जी के ऊपर ही लेट गई और लेटे लेटे ही लंड को अंदर बाहर करने लगी.

    जैसे जैसे फूफा जी का लंड टाइट होता जा रहा था, फूफा जी का नशा भी कम हो रहा था. मेरे दोनों चूचे उनकी बालों से भरी छाती से रगड़ रहे थे. मैं अपने दोनों हाथ फूफा जी की कमर के नीचे ले गई और उनको कस के अपनी बाहों में ले लिया और ज़ोर ज़ोर से गांड हिलाने लगी. फूफा जी का लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था और अब तो फूफा जी भी नशे में ही अपनी कमर हिला हिला कर मेरी चूत में अपने लंड पेल रहे थे और उनके दोनों हाथ भी मेरी नंगी पीठ पर चल रहे थे.

    हम दोनों एक साथ झटका लगाते और फूफा जी का लंड मेरी चूत में जड़ तक घुस जाता.

    अचानक से फूफा जी नशे की हालत में ही बड़बड़ाने लगे- ओह माइ स्वीट हार्ट… मेरी पम्मी डार्लिंग…क्या मज़ा देती है तू मेरी पम्मी… क्या मस्त चूत है तेरी…आहह उफफफा आहह!

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    फूफा जी के मुँह से पम्मी नाम सुन कर मैं हैरान रह गई… क्योंकि बुआ जी का नाम तो मिन्नी था… फिर मैंने सोचा शायद पम्मी फूफा जी की गर्लफ्रेंड होगी और नशे में यह पम्मी को चोद रहे हैं… मैंने सोचा अच्छा है कि फूफा जी को मेरे बारे में पता नहीं चला. फूफा जी मुझे अपनी बाहों में कसते जा रहे थे और नीचे से ही अपनी गांड हिला हिला कर मुझे चोद रहे थे.

    मैं अब झड़ने वाली थी इस लिए मैं और भी ज़ोर ज़ोर से अपनी गांड हिलाने लगी और अपना सारा गर्म पानी फूफा जी लंड पर उड़ेल दिया.

    मैं थक तो चुकी थी मगर फूफा जी की बाहों में पड़ी अब भी उनसे चुद रही थी. फूफा जी पम्मी को याद करते हुए कभी मेरे होंठ चूसते तो कभी मेरे मम्मों को चूसते.. उनके दोनों हाथ मेरी कमर और मेरे काले घने रेशमी बालों में घूम रहे थे.

    फिर अचानक से फूफा जी ने मुझे अपने ऊपर से उठा कर साइड पर लिटाने की कोशिश की मगर नशे के कारण वो ऐसा कर नहीं पाए. मगर मैं समझ गई थी कि फूफा जी अब मेरे ऊपर आना चाहते हैं इसलिए मैं खुद ही फूफा जी के साथ चिपके चिपके एक साइड को हो गई और फूफा जी को भी खींच कर अपने ऊपर लाने की कोशिश करने लगी. फूफा जी भी पलटी मार के मेरे ऊपर आ गये… मैंने अपना चेहरा अपने बालों से ढक लिया था कि अगर फूफा जी की आँख खुल भी जाए तो वो मुझे पहचान नहीं पाएँ!

    फूफा जी के ऊपर आते ही मैंने अपनी दोनों टांगें ऊपर को उठा कर उनका लंड अपनी चूत में डाल लिया. फूफा जी ने फिर से मेरी चुदाई शुरू कर दी थी… वो अपना पूरा लंड मेरी चूत में से बाहर निकालते और फिर एक ही झटके में वापिस अंदर डाल देते… सच में बड़ी जबरदस्त चुदाई कर रहे थे फूफा जी मेरी… मेरी दोनों टांगे ऊपर उठी हुई हवा में झूल रही थी और इतनी ताबड़तोड़ चुदाई से मेरा मन चिल्लाने को कर रहा था… मैं अपने ऊपर कंट्रोल रखने की कोशिश कर रही थी मगर फिर भी कभी कभी मेरे मुँह से आअहह औउच की आवाज़ें निकल जाती.

    फूफा जी ने मुझे अपनी टाँगों और दोनों बांहों में ऐसे जकड़ रखा था कि मेरा हिल पाना भी मुश्किल था. मगर जिस तरह से फूफा जी मुझे चोद रहे थे, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. अब दूसरी बार भी मैं झड़ने के बहुत करीब थी इसलिए मैं भी अपनी गांड फूफा जी के झटकों के साथ मिलाकर हिलाने लगी. फूफा जी ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी थी, शायद वो भी झड़ने वाले थे. मैंने फूफा जी को कस के अपनी बाहों में ले रखा था और फूफा जी ने मुझे… हम दोनों एक दूसरे को तेज़ी से चोद रहे थे.

    मेरा पानी बहने लगा था मगर फूफा जी अब भी वैसे ही मेरी टाँगों को ऊपर उठाए हुए ज़ोर ज़ोर के झटके लगा रहे थे. अब तो हर झटके के साथ मेरे मुँह से आहह आहह की आवाज़ निकल रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि अब फूफा जी मेरी चूत फाड़ कर ही दम लेंगे.

    फिर एक दो और झटकों के साथ फूफा जी ने अपना सारा माल मेरी चूत में भर दिया और आखिरी झटका तो उनका ऐसा था कि उनका लंड गोटियों समेत मुझे अपनी चूत में घुसा महसूस हो रहा था. उस वक़्त तो मेरी ज़ोर से चीख भी निकल गई थी.

    फूफा जी ने झटके लगाने तो बंद कर दिए थे मगर उनका लंड अब भी मेरी चूत में जड़ तक घुसा हुआ था… मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मेरी चीख सास या ससुर जी ने सुन ना ली हो. इस लिए मैं अब जल्दी से जल्दी फूफा जी के नीचे से निकलना चाहती थी… मगर फूफा जी तो मुझ पर बेहोश पड़े हुए थे और उनको हटा पाना मेरे लिए मुश्किल था. अगर फूफा जी को ज़ोर से धकेलने की कोशिश करती भी तो मेरी चूत में गड़ा हुया उनका लंड उनको हिलने नहीं देता.

    फूफा जी के लंड से गर्म माल अब भी मेरी चूत में टपक रहा था इसलिए फूफा जी भी अपना लंड बाहर निकालना नहीं चाहते थे और मैं उनके नीचे दबी पड़ी थी.

    करीब एक घंटे की चुदाई के बाद फूफा जी 15 मिनट तक ऐसे ही मेरी चूत में लंड गाड़े मुझ पर लेटे रहे. अब उनका लंड भी ढीला होने लगा था और खुद ही चूत से बाहर आ रहा था… अब मेरी भी जान में जान आ चुकी थी इसलिए मैंने फूफा जी को ज़ोर से धकेला और नीचे से निकल गई.

    फूफा जी का लंड मेरे और उनके माल से सना पड़ा था और मेरी चूत का तो और भी बुरा हाल था… चूत में से फूफा जी का माल ऐसे निकल रहा था जैसे चूत में बाढ़ आ गई हो. फिर मैंने फूफा जी के कच्छे से अपनी चूत को साफ किया और फूफा जी का सोया हुया लंड अपने मुँह में लेकर चाट चाट कर साफ करने लगी.

    मगर यह क्या उनका लंड तो फिर से खड़ा होना शुरू हो गया था… और फूफा जी ने नशे की हालत में ही मुझे फिर से पकड़ लिया और मेरे ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगे… मगर अब मुझे पता था कि अगर फूफा जी ने फिर से मुझे पकड़ लिया तो मैं चीख चीख कर पूरा गाँव बुला लूँगी… इसलिए मैंने किसी तरह खुद को फूफा जी से छुड़वाया और उनको ऐसे ही नंगा छोड़ कर अपने कपड़े उठा कर अपने कमरे में भाग गई.

    ऐसी भयंकर चुदाई के बाद मेरी टांगें और पूरा बदन दुख रहा था… बस एक चूत ही थी जो बिल्कुल शांत थी क्योंकि उसने आज जी भर के अपनी प्यास एक मोटे लंड से बुझाई थी.

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    जैसा कि मैंने बताया कि मैंने अपनी बीवी संजना को कैसे अपनी फंतासी पूरी करने के लिए गैर मर्द से चुदवाया था. उसी तरह मेरी एक और भी फंतासी थी. यहां मैं यह बता देना चाहता हूँ कि कुंवारे जीवन से ही काफ़ी सारे सेक्स आर्टिकल्स, बॉलीवुड फ ढ़ते पढ़ते मेरे मन में कई तरह की फंतासियां घर कर गई हैं, जिसे मैं पूरा करना चाहता हूँ. इसमें एक फंतासी किसी गैर शादी-शुदा औरत को चोदने की भी है.

    मैं आपको एक बार फिर बता दूं कि मैं एक 30 साल का 177 सेंटीमीटर लंबा एथलीट टाइप की बॉडी वाला बांका जवान मर्द हूँ. मेरे लंड का ओरिजिनल साइज़ 6.2 इंच है, जैसा कि मैंने इरेक्ट पोजीशन में नापा हुआ है. मेरा जो पॉज़िटिव पॉइंट है, वो है मेरी ताकत. जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूँ कि अपनी इसी गुणवत्ता की वजह से मेरी बीवी मुझसे पूरी तरह से संतुष्ट थी और उसके झड़ने के बाद भी मैं काफ़ी देर तक उसको चोदता रहता था

    मैं जहां किराए पर रहता हूँ, वो दो मंज़िला बिल्डिंग है, जिसके ऊपरी मंज़िल पर मैं और निचली मंजिल में मकान मालिक का परिवार और एक पड़ोसी रहता है.

    ये बात दुर्गा पूजा के समय की है, मेरी वाइफ संजना 20 दिनों के लिए अपने पीहर चली गई थी. मैं अपनी वाइफ को छोड़ कर जब अपनी जॉब वाली जगह पर आया और मैंने गेट खोला तो पाया कि रूम ऑनर के गेट पर ताला लगा हुआ है.

    मैंने बगल के पड़ोसी, जो कि उसी मकान में रहता है, के यहाँ गया और उसे आवाज़ दी.

    मेरे पड़ोसी का नाम विजय है. वो अपनी बीवी पायल और अपने एक 6 साल के बेटे के साथ रहता है. उसकी बीवी पायल की उम्र तकरीबन 33-34 साल की होगी. वो देखने में मेरी बीवी संजना से काफ़ी कम सुन्दर है. पायल एकदम दुबली पतली थी. मुझे लगता है कि उसका वजन 44-45 किलो के आस पास होगा. उसका साइज़ 30-26-30 के लगभग का रहा होगा. वो देखने में सांवली थी.

    जहाँ तक मेरे वजन का सवाल है तो मेरा वजन 80 किलोग्राम है. मुझे ऐसा लगता था कि जब से मैं इस फ्लैट में रहने आया हूँ, तब से वो मुझे पसंद करती थी, पर मैं उसे उस नजरिये से नहीं देखता था, जिस तरह की उसकी नजर थी. क्योंकि मेरी बीवी ज़्यादा सुन्दर थी.. और ये तो आप भी जानते हैं कि बढ़िया माल को छोड़ कर कौन कम बढ़िया आइटम पर ध्यान देता है.

    तो मैंने जैसे ही आवाज़ लगाई, पायल बाहर निकली. मैंने उससे पूछा- अंकल लोग (रूम ऑनर) दिखाई नहीं दे रहे हैं. वो मुस्कुरा कर बोली- ये लोग 20-25 दिन के लिए अपने बेटे के यहाँ गए हैं. मैं ‘अच्छा..’ बोल कर अपने रूम जाने लगा, तो वो फिर बोली- वाइफ को पीहर छोड़ आए क्या? मैं बोला कि हां, उसको छोड़ कर मैं अकेला ही वापस आ गया हूँ. वो फिर बोली कि वो और राहुल भी (उसका पति और उसका बेटा) अपनी दादी के यहां गए हैं. मैंने बोला कि तो मतलब आप अकेली हैं? वो मुस्कुरा कर बोली- हाँ. मैंने पूछा- कब तक आएंगे? वो बोली- पांच दिन बाद.

    इसके बाद मैं अपने रूम में चला गया, फिर कुछ देर बाद वहां से अपने ऑफिस चला गया.

    मैं जब रात को रूम पर आया तो मैंने टीवी पर एक ब्लूफिल्म चला दी, जिसे देख कर मुझे चुत चोदने का मन करने लगा. बीवी नहीं रहने की वजह से मुझे मन मसोस कर रहना पड़ा. दो दिन में ही मुझे पूरी व्याकुलता और बीवी की कमी खलने लगी. मैं किसी को भी चोदने के लिए व्याकुल हो गया.

    उस दिन मैं शाम को ऑफिस से घर आया और अपना गेट खोल रहा था कि मैंने देखा पायल अपने गेट के दरवाजे पर चेयर लगा कर बैठी थी. एकाएक मेरे दिमाग़ में अपनी हवस को पूरी करने का डर्टी आइडिया आ गया.

    मैं फिर वहीं रुक गया और उसकी ओर ध्यान देते हुए उससे कहा- क्या भाभी.. मन लग रहा है? वो बोली- मन लगाना पड़ता है. मैंने फिर पूछा- रात को आपको अकेले रहने में डर नहीं लगता है? वो बोली- नहीं.. अब तो आदत हो गई है. मैं बोला- मुझसे तो अकेले नहीं रहा जाता.. देखिए ना मुझे संजना की कमी खल रही है. इस पर वो मुस्कुरा दी.

    मैं फिर बोला- अगर आपको किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बोलिएगा. यहाँ तक कि अगर रात को डर भी लगे, तो मुझे ज़रूर जगा लेना. वो कुछ नहीं बोली, सिर्फ़ मुस्कुरा दी. मेरा हिम्मत बढ़ी और मैंने कहा- मेरा नम्बर ले लीजिए, अगर रात को किसी तरह की परेशानी हो तो आख़िर पड़ोसी ही काम आएगा ना.

    मैंने जबरदस्ती उसे अपना नम्बर नोट करवा दिया और उसकी आँखों में वासना भरी नज़रों से देखते हुए अपने रूम में चला गया. अब मैं उसे चोदने का आइडिया सोचने लगा.

    रात के करीब 11 बजा होगा कि मेरे मोबाइल की घंटी बजी. मैंने मोबाइल उठाया तो अज्ञात नम्बर देखा.

    मैंने हैलो बोला, तो उधर से पायल की आवाज़ आई और उसने कहा- रिया है क्या? मैं तो पहले चौंका और फिर बोला- कौन रिया.. और आप तो पायल भाभी हो ना? वो जल्दबाजी में बोली- ओह लगता है ग़लती से आपके पास लग गया, मैं कहीं और लगा रही थी. उसने फ़ोन काट दिया.

    मैंने दिमाग़ लगाया तो पाया कि वो झूठ बोल रही थी. वो जानबूझ कर मुझसे घुमा-फिरा कर कुछ और ही चाह रही थी. मैं भी खिलाड़ी आदमी था. मैंने आधे घंटे बाद उसी नम्बर पर कॉल बैक किया उसने तुरंत मेरा फोन उठाया और हैलो किया. मैंने कहा- कुछ बात है क्या, डर लग रहा है क्या? वो धीरे से बोली- हा.. न.. मैं बोला- मैं आऊं?

    वो कुछ नहीं बोली.

    मैं तुरंत नीचे गया देखा वो पूरा क्रीम पाउडर लगा कर रूम में बैठी हुई थी.

    मैंने कहा- ज़्यादा डर लग रहा है तो ऊपर चलिएगा.. मेरे दो बेडरूम हैं. एक में आप सो जाइएगा.

    वो पहले ना नुकुर करती रही, फिर नखरा दिखाते हुए मेरे कमरे में आ गई. रूम में आने के बाद मैंने टीवी चालू कर दिया. संयोग से उस वक़्त टीवी पर हेट स्टोरी- 3 मूवी चल रही थी. उसमें ज़रीन ख़ान और हीरो का सेक्स वाला सीन दे रहा था. दोनों चुपचाप उसे देख रहे थे.

    एकाएक मैंने बोला- साला आजकल की हिरोइन कितना गंदा गंदा रोल करती हैं. वो बोली- हाँ, पहले कितनी अच्छी हिरोइन थीं. मैंने कहा- आपकी फेवरेट हिरोइन कौन है? तो वो बोली- रेखा. मैंने बोला- वो भी तो बहुत गंदा रोल करती थी. वो बोली- नहीं ऐसा नहीं हो सकता है. मैंने बोला- आपको विश्वास नहीं है, तो देखिए.

    मैंने टीवी में पेन ड्राइव डाल कर रेखा की एक फिल्म, जो ओमपुरी के साथ है, उसे देखने लगा. इस फिल्म में रेखा का बहुत ही ज़्यादा सेक्सी और कामुक रोल था.

    उसे देख कर उसके चेहरे के भाव से लग रहा था कि वो कुछ शॉक्ड भी थी और कुछ कुछ गर्म भी होने लगी थी. मैं उस समय बाथरूम चला गया.

    बाथरूम से निकला तो देखा कि वो रिमोट से पेन ड्राइव में सेव दूसरी मूवी ओपन करना चाह रही थी. एकाएक मुझे याद आया कि उसमें तो बहुत सारी ब्लूफिल्म भरी हुई है. मैं ये सोच कर दरवाजे के किनारे से छुपकर देखने लगा. मैंने देखा कि पायल एक दूसरी मूवी को जैसे ही ओपन करती है तो ब्लूफिल्म खुल जाती है. वो पीछे मुड़ कर बाथरूम की तरफ देखने लगी. मैं छुप गया, वो समझी कि मैं बाथरूम में ही हूँ और फिल्म म्यूट करके देखने लगी.

    करीब 5 मिनट तक चुदाई के सीन देखने के बाद उसका हाथ उसकी बुर के ऊपर चला गया. एकाएक मैं धम्म से कमरे में आ गया और बोला- क्या देख रही हैं? वो हड़बड़ा कर टीवी बंद करने लगी तो मैं बोला- अरे बंद मत कीजिए.

    उसके करीब आकर मैंने एकाएक उसको गले लगा लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ सटा कर चूसने लगा. वो दो मिनट तक शांत रही, फिर वो भी साथ देने लगी. मैंने उसे अपने पलंग पर लिटा दिया और उसके होंठों को बेतहाशा खाने लगा. वो पूरी बदहवासी में मेरा साथ देने लगी.

    एकाएक मैंने अपने दोनों हाथ उसके मम्मों पर रख दिए और ज़ोर से दबाने लगा. वो चिहुंक गई और ‘आ आह..’ की आवाज निकालने लगी. उसकी चुचियां संजना से काफ़ी छोटी थीं, पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

    मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों को ज़ोर ज़ोर से दबोचने लगा. वो कामुक भाव में बोली- आ… धीरे से करो.. दर्द हो र..हा.. है.

    मैं एकाएक उठा और उसकी साड़ी को उसके बदन से अलग कर दिया और उसका ब्लाउज खोलने लगा. पहले उसने मुझे रोकने का प्रयास किया, फिर शांत हो गई. उसका ब्लाउज खुलते ही उसकी मदमस्त चुचियां बाहर आ गईं, क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी.

    मैंने आव देखा ना ताव, अपने मुँह से उसके एक चूचे को भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. वो आँख बंद करके इधर उधर सर पटकने लगी और आहें भरते हुए ‘इसस्स.. स.. स.. आ.. ओ..हो..’ करने लगी

    मैंने लगभग दस मिनट तक उसके दोनों चूचियों को खूब चूसा, काटा और निचोड़ा. उसके मम्मों की घुंडी पूरी तन कर कड़क और लाल हो गई थीं.

    मैंने अब उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे पूरा नंगा कर दिया. उसकी बुर पूरा काली था और उसकी बुर की झांटेंभी बहुत बड़ी बड़ी थीं. उसकी बुर से काफ़ी पानी निकल रहा था, जिससे उसकी पूरी झांटें भीग गई थीं. चुत के चारों तरफ साइड में पानी लगा हुआ था. मैं आज पहली बार किसी गैर औरत की बुर देख रहा था. मेरा जोश बेकाबू हो गया और मैं पूरा पागल हो गया. मैंने एक भूखे भेड़िए की तरह उसकी बुर पर अपना मुँह सटा दिया.

    उसकी आँखें बंद थीं, जैसे ही उसको उसकी बुर में मेरे होंठ के स्पर्श का अनुभव हुआ, वो तो जैसे उछल पड़ी और शरीर को खींचने लगी.

    मैंने उसको अपने हाथों से जकड़ कर उसकी बुर पर अपना मुँह रख दिया.

    वो बोली- क्या इसको चूसियेगा? मैंने कहा- हाँ आज मैं इसको खा जाऊंगा. वो बोली- छी:.. मेरे पति तो आज तक इसको अपने मुँह के पास भी नहीं ले गया है. मैं बोला- वो साला भडुआ है.

    मैंने अपने होंठों को पूरी तरह से उसकी काली, गीली और बाल से भरी हुई बुर में चिपका दिया.

    उसकी बुर से एक अजीब सी दुर्गंध आई, जैसे लगा कि वो बुर को साफ नहीं करती थी. पर मुझ पर तो जैसे भूत सवार था. मैंने उसकी गंदी बुर में अपनी जीभ को ठूंस दिया और उसकी बुर को चाटते हुए बुर का पानी पीने लगा.

    वो पूरी तिलमिला गई और उसका शरीर कांपने लगा. वो पूरी मस्त होकर ‘आ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… एयेए.. हहा.. उई ईईईई.. सस्स..’ करते हुए बहुत लंबी लंबी साँसें भरने लगी.

    मुझे और जोश चढ़ा और मैं उसकी पूरी बुर को एक तरह से खाने लगा और पागलों की तरह उसकी बुर की सारी गंदगी को भी चाट गया. अब मैं उसकी क्लिट को चूसने लगा. वो मेरे इस वार को सह नहीं पाई. उसने ज़ोर से चीखते हुए अपने पूरे शरीर एकदम से टाइट कर लिया और बेतहाशा झड़ने लगी.

    मैं भी बेतहाशा उसकी बुर को चूसे जा रहा था. वो अब निढाल हो गई थी और हाँफ रही थी. अब मुझे वो छोड़ने को कह रही थी. पर मैं कहाँ छोड़ने वाला था. मेरा तो अभी सेक्स का पागलपन शुरू हुआ था.

    कुछ देर बाद मैं उठा और अपना लंड, जो कि अब लोहे की तरह तन कर खड़ा हो गया था, बाहर निकाला. जैसे ही उसने लंड को देखा, वो बोली- बाप रे बाप इतना बड़ा और मोटा लंड, मेरे पति का तो इससे काफ़ी छोटा है. मैं बता दूं कि उसका पति भी काफ़ी दुबला पतला और बौना टाइप का है. मैंने कहा- अभी बुर में पेलूँगा तो जन्नत का मज़ा आएगा.

    मैं अपना लंड उसके मुँह में घुसेड़ने लगा तो वो बोली कि नहीं.. मैंने आज तक इसे मुँह में नहीं लिया है.

    तब मैंने सोचा कि अभी ये लोग सेक्स के हरेक पहलू से काफ़ी अंजान हैं.

    मैंने फिर रिक्वेस्ट करके उसके मुँह में लंड डाल दिया. उसके छोटे से मुँह में मेरा लंड नहीं समा रहा था, फिर भी वो बढ़े चाव से मेरे लंड को चूसे जा रही थी. वो बोली- ये तो बहुत टेस्टी केला है.

    पांच मिनट लंड चूसने के बाद मेरा लंड की सारी नसें एकदम फूल गईं.. लंड भी मोटा हो गया, ऐसा कड़क हो गया जैसे टीएमटी की रॉड हो. मैंने उसके मुँह से अपना लंड निकाल कर, उसे पीठ के बल पलंग पर लिटा दिया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगा कर मैं पलंग से नीचे उतर आया. मैं उसकी काली कलूटी बुर में अपना लंड डालने लगा, पर उसकी बुर का पानी सूख जाने की वजह से मेरा लंड का सुपारा भी बुर में नहीं घुस पाया था. वो दर्द से कराहने लगी और बोली- प्लीज़ धीरे धीरे करो..

    मैं किचन से सरसों का तेल ले आया और उसकी बुर में तेल गिरा कर पूरा इलाका चिपचिपा कर दिया. फिर मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया और उसकी बुर में लंड को डालने लगा. अब धीरे धीरे मेरा लंड उसकी बुर में जाने लगा. अभी आधा लंड ही गया था कि वो दर्द से तड़फ कर बोली- आह.. बहुत मोटा है, दर्द कर रहा है.

    मैं उसकी गर्दन पर चूमने चूसने लगा और चुचियों की घुंडी को चूसने लगा. तभी पता नहीं क्या हुआ कि वो फिर से झड़ने लगी और उसकी बुर से पानी निकलने लगा. मैं धीरे धीरे उसकी बुर में अपना लंड और ज़्यादा अन्दर करने लगा.

    मेरा लंड अब उसकी बुर में पूरी तरह से घुस गया था, लेकिन वो कराह रही थी. मैं धीरे धीरे लंड को उसकी चुत में अन्दर बाहर करने लगा. उसकी बुर से पूरा पानी निकल रहा था.

    पूरे रूम में उसकी आवाज़ गूँज रही थी- अया.. हह.. इसस्स्सस्स… बाप रे, बहुत मज़ा आ रहा है.. आ..हो.. इसस्स्सस्स.. स.. और जोर से करो.. आह हां..

    उसकी मादक आवाजें सुनकर मैं अपनी स्पीड बढ़ाने लगा और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. उसका दुबला शरीर, मेरा 80 किलो का वजन और मेरे लंड का ज़बरदस्त प्रहार वो बर्दाश्त ही नहीं कर पा रही थी. पूरी तरह से कराह रही थी. मेरा पलंग भी बुरी तरह से आवाज़ कर रहा था.

    पायल आँख बंद करके सिसिया रही थी- बाप रे.. मैं गई रे.. अया…. इससस्स.. उम्म्म.. ओयूऊऊ.. हुन्न्ञन्..

    मैं लगभग इस तरह 20 मिनट तक लगातार उसको चोदता रहा. फिर मैंने एकदम से स्पीड को बढ़ा दिया. मेरा पूरा रूम ‘फ़च्छ.. फ़च.. फ़चक.. फचक..’ की आवाज़ से गूँज रहा था.

    वो पूरे ज़ोर से ‘मर गई बाप रे..’ कहे जा रही थी. मैंने कहा- दर्द कर रहा है क्या? वो बोली- दर्द तो कर रहा है लेकिन उसके हज़ार गुना ज़्यादा मज़ा आ रहा है. इतना मज़ा आज तक मुझे नहीं मिला है.

    मैं और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा, वो बोली- हां और ज़ोर से.. मैं अपने पूरे शरीर की ताक़त लगा के पागलों की तरह उसे चोदने लगा और सोचने लगा कि ये साली 40-45 किलो की औरत मेरे वजन को सह कैसे पा रही है.

    एकाएक उसका शरीर फिर अकड़ा. वो फिर जबरदस्त तरीके से झड़ने लगी और वो निढाल हो कर पस्त हो गई. पर मेरा लंड अभी तक नहीं झड़ा था.

    वो बोली- अब मेरा पूरा शरीर जवाब दे रहा है. अब छोड़ दीजिए ना. मैंने कहा- मेरा अभी तक नहीं हुआ है.. कुछ देर और बर्दाश्त कर लो.

    अब मैं उसकी बुर से अपना लंड निकालने लगा तो देखा कि उसकी बुर और मेरे लंड में सफेद सफेद उसका ढेर सारा पानी ने जम कर किसी सफेद सर्फ के झाग की तरह पूरे बालों को ढक लिया था. उस सफेदी में थोड़ा ब्लड भी था, जिससे पता चला कि शायद चोदते चोदते उसकी बुर ज़ख्मी हो गई थी. मैंने उसकी बुर और अपने लंड को साफ किया और अब उसे डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया.

    वो बोली- प्लीज़ अब सहा नहीं जा रहा है, लगता है जैसे बेहोश हो जाऊंगी. मैं बोला- जरा सा सहन करो डार्लिंग.. मेरा पानी भी झड़ने दो ना.

    मैंने उसी पोज़ में बुर और लंड में तेल लगा के उसकी बुर में फिर से लंड घुसा दिया. लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से टकराया और वो दर्द से कराह उठी. पर मैं जानता था कि इस पोज़ में डायरेक्ट जी-स्पॉट पर लंड टकराता है, जिस वजह से महिला को असीम आनन्द की प्राप्ति होती है.

    इस पोज़ में 5 मिनट चोदने के बाद फिर से उसकी बुर गीली हो गई. वो ‘आह.. उहह.. बहुत मज़ा आ रहा है.. आअहह.. इससस्स.. हन्णन्न्..’ करने लगी. पर उसका शरीर मेरे लंड के हमलों को सह नहीं पा रहा था और वो उसी पोज़ में पलंग पर गिर गई. पर मैं पूरे जोश में था और उसको गिरे हुए पोज़ में ही बेतहाशा चोदे जा रहा था.

    वो एकाएक फिर अकड़कर उछली और फिर निढाल हो गई. उसने आँख मूंद कर करुणा भरे स्वर में कहा- अब निकाल दीजिए ना.. अगली बार फिर चोद लीजिएगा.

    मुझे लगा कि अब ये सह नहीं पाएगी. मैं पूरे ज़ोर से 10-20 धक्का लगाने के बाद उसके बुर में ही झड़ने लगा. मेरा स्पर्म पता नहीं उस दिन इतना ज़्यादा कैसे निकला. मेरे स्पर्म से उसकी पूरी बुर भर गई और वो वहीं उसी पोज़ में सो गई.

    मैंने देखा उसकी बुर पूरी तरह से फूल गई थी. पायल ज़ोर ज़ोर से हाँफ रही थी.

    मैं बाथरूम जा कर फ्रेश हुआ और आया तो पायल उसी पोज़िशन में सो गई थी. करीब रात को 3 बजे उसकी नींद खुली तो वो पेशाब करने जाने लगी. जैसे ही पलंग से नीचे उतरी, वो लड़खड़ा के गिर गई. मैं सोया था, उसकी आवाज़ सुन कर जागा तो देखा वो गिरी हुई थी. मैंने बोला- क्या हुआ? वो कराह के बोली- पूरा शरीर का पोर पोर दर्द कर रहा है, मुझे टॉयलेट जाना है, पर चल नहीं पा रही हूँ.

    मैंने उसे गोद में उठाया और बाथरूम ले गया. उसने बड़ी मुश्किल से पेशाब की और फिर मैंने उसे गोद में ही उठा कर बेड पर ले आया. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया था.

    उसने खड़े लंड को देखा और कराहते हुए मुस्कुरा कर बोली- अब मुझमें इतनी ताक़त नहीं है कि मैं आपके इस हथियार का सामना कर पाऊं. मैंने लंड हिलाते हुए बोला- डार्लिंग सिर्फ़ एक बार. वो बोली- चुदवा तो नहीं पाऊंगी लेकिन मैं इसे मुँह से चूस ज़रूर सकती हूँ, ऐसे भी मुझे आपके लंड का टेस्ट काफ़ी अच्छा लगा.

    मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया. वो बेड पे लेटी लेटी लंड चूसने लगी.

    दस मिनट लंड चूसने के बाद बोली- मेरा मुँह दर्द करने लगा है. मैं बोला- तुम बेड पे लेटी रहो मैं लंड से तुम्हारा मुँह को चोदता हूँ.

    मैंने 15 मिनट तक उसके मुँह में लंड पेल कर मुँह चुदाई की. उसके मुँह से काफ़ी लार निकलने लगी थी और वो उबकी ले रही थी. फिर वो मुँह को हटा कर बोली- अब छोड़ दीजिए ना.

    मैंने फिर अपने आपको प्रेशर डाल कर उसके मुँह में ही अपना माल झड़ाने लगा. वो ऐसा नहीं चाहती थी. उसने मुँह को हटाने का प्रयास किया, पर मैंने उसका मुँह पकड़ कर सारा का सारा माल उसके मुँह में डाल दिया.

    मैंने बोला- प्लीज़ इसे खा जाओ ना.. बहुत टेस्टी लगेगा.

    पहले तो उसने उल्टी जैसी की, पर बाद में बड़े स्वाद से चाव से खाने लगी. लंड का रस खाने के बाद बोली- बहुत टेस्टी लगा.. जैसे नमकीन नमकीन रबड़ी खा रही हूँ.

    वो मुस्कुरा कर मेरे गले से लग गई. मैंने उसे ज़ोर से जकड़ा तो वो कराह दी और अलग होकर बड़े कातिलाना अंदाज़ में बोली- आप मर्द हो कि घोड़ा, इतनी दरिंदगी से कोई चोदता है.

    उस रात मुझे और भी एक बार चोदने का मन किया, पर पायल का शरीर पूरी तरह से टूट चुका था. जिस वजह से मैं ना चाहते हुए भी सो गया.

    जब तक उसका पति और बच्चा नहीं आया, तब तक कभी वो मेरे फ्लैट में तो, कभी में, उसके फ्लैट में खूब चुदाई का मजा किया.

    harddick21blog

    Dazzling show girl

    हाय फ्रेड्स, मेरा नाम निशा है और मैं की रहने वाली हूँ. ये कहानी मेरी अपनी है, मतलब मेरी आपबीती है. मेरी उम्र आज 28 साल की है… लेकिन ये कहानी 6 महीने पुरानी है. मैं शादीशुदा हूँ. मेरी शादी को दो साल हो चुके है. लेकिन हमारी कोई संतान नहीं है, क्योंकि मेरे पति अभी कोई इश्यू नहीं चाहते इसलिए उन्होंने बच्चा पैदा नहीं किया है. मेरे पति मर्चेंट नेवी में काम करते हैं और वो साल में 6 महीने शिप पर रहते हैं… और 6 महीने घर पर रहते हैं.

    ये मेरी आपबीती तब घटी, जब मेरे पति 6 महीने के लिए शिप पर गए हुए थे. माफ़ करना मैं अपने बारे में बताना भूल ही गई. मैं एक फेयर कलर की लेडी हूँ और मेरी साइज़ 34-29-35 की है. मुझे साड़ी पहनना पसंद है.

    मैं उन दिनों घर में अकेली होती हूँ, जब मेरे पति कुछ दिनों के लिए शिप के साथ निकल जाते हैं. मेरे सास और ससुर नागपुर में रहते हैं. उनको यहाँ आने के लिए कुछ दिन लग जाते हैं. मैं प्राइमरी स्कूल टीचर हूँ. मेरे स्कूल की टाइमिंग 7 बजे सुबह से 12.30 बजे नून तक की होती है.

    एक दिन मैं दोपहर एक बजे के आसपास घर पर आई और मैं डोर लॉक करके चेंज करने के लिए अपने बेडरूम में आ गई. मेरे घर में कुल 4 कमरे हैं. मैंने कमरे में आकर साड़ी बदलना शुरू किया ही था कि तभी मुझे मेरे पीछे कुछ हरकत सी होती लगी. मुझे ऐसा लगा कि कोई है. मैंने झट से मुड़ कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था. मेरा भ्रम होगा, ये सोच के मैंने वो बात भुला दी और चेंज करके मैं हॉल में आ गई.

    मैं हॉल में बैठ कर पेपर पढ़ रही थी तभी डोर बेल बजी. मैंने दरवाजा खोला तो काम वाली बाई आई थी, इसलिए मैंने उसे अन्दर ले लिया और डोर खुला छोड़कर किचन में आ गई.

    करीब एक घंटे बाद जब मैं खाना ख़ाकर हॉल में बैठी पेपर पढ़ रही थी तो मुझे व्हाट्ससैप पर एक मैसेज आया. मैंने देखा तो वो एक वीडियो फाइल थी. मैंने वीडियो डाउनलोड किया और देखा तो वो मेरी ही वीडियो थी, जिसमें मैं साड़ी बदलते हुई साफ दिख रही थी.

    मैं ये वीडियो देख कर बहुत डर गई और रोने लगी. फिर 5 मिनट बाद व्हाट्ससैप पर उसी नम्बर एक और मैसेज आया, जिसने मुझे वीडियो भेजा था.

    वो मैसेज ऐसा था- अगर ये वीडियो अच्छी लगी हो तो मुझे थंब भेजो… और अगर गुस्सा आ रहा हो और मुझे मारना चाहती हो तो… स्माइली बनी थी.

    मैं बहुत डरी हुई थी… लेकिन फिर भी मैं अपने आप पर काबू पाते हुए ये सोचने लगी कि ये कौन हो सकता है? मैंने बहुत सोचा लेकिन मुझे कोई ऐसा नज़र नहीं आ रहा था जो ऐसी हरकत कर सकता है. तब मैंने उस मैसेज को थंब का रिप्लाई दिया क्योंकि मैं देखना चाहती थी कि इसके पीछे कौन है.

    फिर उसका मैसेज आया कि वो मुझसे मिलना चाहता है और मुझे उसने आज रात 8 बजे अपने घर बुलाया था.

    मैंने फिर से थंब भेज कर उसे हां कर दी. फिर मैं सोचने लगी कि इसने ये वीडियो कब बनाई होगी, मेरे घर तो कोई आया नहीं… और जब में स्कूल जाती हूँ तो मेरा घर लॉक रहता है.

    खैर रात को 8 बजे के करीब मैं तैयार हो गई. मैंने स्काइ ब्लू कलर की साड़ी और लाल काले रंग का ब्लाउज पहना था. इस वक्त भी मैंने अपने बाल खुले ही छोड़े थे, जैसे मैं हर रोज़ करती थी.

    मैं उसके मैसेज का इन्तजार कर रही थी कि तभी उसका मैसेज आया. उसमें लिखा था कि मेरे ऊपर के फ्लोर पर जो फ्लैट है, वहाँ आना है. मैं दंग रह गई कि ये लड़का मनीष कब मेरे घर पर आया और उसने मेरी वीडियो भी बना ली. वो अकेला रहता था लेकिन मुझे कभी ये महसूस नहीं हुआ कि वो ऐसा कुछ करेगा. वो तो मेरी तरफ आते जाते देखता भी नहीं था, ना किसी और लड़की को लेकर उसकी कोई बात कभी सुनी थी.

    फिर मैं संभल गई और अपना घर लॉक करके मैं उसके घर चली गई. मैंने डोरबेल बजाई तो उसने झट से डोर खोला, लेकिन वो सामने नहीं था. मैं अन्दर गई तो उसने पीछे से डोर बंद कर दिया. इसके तुरंत बाद उसने मुझे पीछे से हग किया और अपने हाथ मेरे ब्लाउज पर रख कर मेरी छाती को हल्के से दबा दिया और चूचे सहलाए.

    मैंने उसके हाथ को झटक दिया और उससे दूर हो गई. मैंने अपनी साड़ी संभाली और उससे पूछा कि ये क्या बदतमीज़ी कर रहे हो… तुम्हें ऐसा करते हुए शरम नहीं आती?

    मेरी इस बात पर वो हंसने लगा और सोफे पे बैठ गया. फिर मैंने शांत होते हुए उससे फिर से पूछा कि ये वीडियो तुमने कब बनाया और क्यों बनाया? उसने कहा कि वो मुझे पिछले 1 साल से फॉलो कर रहा है और उसने मेरी तस्वीरें भी मुझे दिखाईं, जो उसने चुपके से खींची थीं.

    मैं अपनी इन तस्वीरों को देखकर दंग रह गई कि इतनी सारी फोटो उसने कब खींची. लेकिन बहुत प्यारी फोटोज थीं वो. मेरी साड़ी में, ड्रेस में, घाघरा चोली में… कई तरह की मुद्राओं में फोटो निकाली गई थीं. उसका हाथ फोटो निकालने में बहुत साफ़ था, एक भी फोटो वल्गर नहीं थी, लेकिन फिर भी मेरी ऐसी वीडियो उसने क्यों बनाई?

    मुझे अब उस पर प्यार सा आने लगा था. मेरे ऐसा पूछने के बाद वो मेरे पास आया और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने बेडरूम में ले गया, वहाँ उसने मेरी बड़ी बड़ी फोटोज फ्रेम करके दीवार पर लगाई थीं. उन फोटोज को देख कर मैं हतप्रभ थी… वो तो जैसे मेरा दीवाना था. हर जगह बस मेरी ही फोटो लगी थी.

    अब मेरा भी गुस्सा कुछ कम हो गया था और मेरी फोटोज देख कर मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

    फिर भी मैंने उसे वीडियो के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वो मुझे पाना चाहता है. जबकि उसकी उम्मीद थी कि मैं शादीशुदा होने की वजह से उसकी नहीं हो सकती थी. तो उसने चुपके से मेरे घर के लॉक की ड्यूप्लिकेट की बनवा ली और वो मेरे स्कूल से आने से पहले घर में जाकर छुप गया था.

    जब मैं अपने कमरे में चेंज कर रही थी तब उसने वो वीडियो बना ली थी. लेकिन मेरे घर में उस वक्त मेरी कामवाली बाई आती है, ये उसे पता था, इसलिए वो जब वो बाई आई, तब वो चुपके से निकल गया.

    अब वो अपने बेडरूम का दरवाजा बंद करने लगा तो मैंने उसे रोका और कहा- ये क्या कर रहे हो? उसने एक स्माइल दी और बोला कि पति पत्नी जब बेडरूम में होते हैं, तो दरवाजा बंद करना चाहिए.

    मैंने उसे अपने से दूर धकेला और दौड़ कर हॉल में आ गई और मैं दरवाजा खोल कर बाहर जाने लगी, तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा कि चली जाओ मुझे छोड़कर मैं भी तुम्हारे इस वीडियो को यूट्यूब पर अपलोड कर दूँगा. साथ ही मेरे पति को भी व्हाटसैप पर भेज दूँगा. उसकी इस बात को सुनकर मैं अचानक से रुक गई और उससे पूछा कि उसके पास मेरे पति का नंबर कैसे आया? तो उसने कहा कि वो और मेरे पति अच्छे दोस्त हैं. मैंने उसको कहा- तुम क्या चाहते हो?

    तो उसने मुझे फिर से बेडरूम में आने को कहा और वो अन्दर चला गया. मैंने बहुत सोचा कि अब मैं क्या करूँ? उसका इरादा क्या है, ये मैं समझ चुकी थी.

    फिर आखिरकार मैं अन्दर बेड रूम में चली गई. मेरे अन्दर आते ही उसने बेड रूम का डोर बंद किया और मुझसे बोला कि मैं उसे होंठ से होंठ मिला कर चुम्बन करूँ.

    मैंने मना कर दिया तो वो बोला कि ठीक है… कोई बात नहीं, तुम आराम से बेड पर बैठो.

    यह कह कर वो बाहर चला गया. अब तक मेरे मन में भी वो वासना की चिंगारियाँ उठने लगी थीं. मेरा जिस्म भी अब बेकाबू होने लगा था. मैंने सोचा कि मेरे पति तो 6 महीने नहीं आने वाले और मैं घर पर अकेली क्या करूँ?

    तभी मनीष अन्दर आया और दरवाजा बंद करके मेरे पास आके बैठ गया.

    मैंने ही उससे कहा कि मैं जानती हूँ कि तुम मुझसे क्या चाहते हो. वो स्माइल देते हुए बोला- जानेमन, तुम तो बहुत होशियार भी हो.

    ऐसा कह के उसने मेरे मोबाइल से साड़ी चेंजिंग का वीडियो डेलीट कर दिया. तब मैंने उससे कहा कि जब पति पत्नी पहली बार बिस्तर पर मिलते हैं तो वो जो करते हैं, वैसा तुम करो. वो बोला- ओके मैं तैयार हूँ.

    फिर मैं अपना घूँघट ओढ़ कर बेड पर बैठ गई. फिर वो मेरे पास आया और मेरा घूँघट उठा कर उसने मुझे मेरे होंठों पर एक जोरदार चुम्मी की और इसी तरह वो मुझे चूमते चूमते वो मेरे मम्मों को सहलाने लगा और हल्के से दबाने लगा. अब मुझे भी अच्छा लगने लगा. उसने मेरी छाती को जब पहली बार छुआ, तो मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई थी.

    अब मैं भी वासना के वशीभूत होकर उसका साथ देने लगी और मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया. उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और वो मेरे बाजू में लेट कर मेरे गाल पर गाल रगड़ते हुए मेरे होंठों को चूमने लगा. इसी दौरान उसका हाथ मेरे पेट पर फिरने लगा.

    ऐसा 5 मिनट चलने के बाद वो मेरे ऊपर आ गया और मेरा ब्लाउज खोलने लगा, तो मैं शर्मा गई. मेरी मुस्कान देख कर वो बहुत खुश हो गया और जल्दी जल्दी उसने मेरा ब्लाउज खोल दिया, ब्रा भी निकाल दी. वो मेरी नंगी छाती को देख कर वो मदहोश सा होकर देखता रह गया. एकदम पर्फेक्ट शेप में मेरे मम्मों को देखकर वो मदमस्त हो गया, मेरे मम्मे एकदम टाईट और तने हुए थे.

    ये नज़ारा देखने बाद वो पागल हो गया और भूखे भेड़िए की तरह वो मेरी चूचियों पर टूट पड़ा. मेरे मम्मों को वो ज़ोर से दबाने लगा, मेरे निपल्स को मसलने लगा. फिर एक निप्पल को वो मुँह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और काटने लगा.

    मैं मीठे दर्द से चिल्ला उठी, लेकिन मेरी चीख उसे बिल्कुल सुनाई नहीं दी. वो तो और ज़ोर से चूचियों को मसलने लगा. मैंने उसे किसी तरह रोका और उससे कहा- पति पत्नी की तरह प्यार करो. मेरी बात सुनकर वो एकदम शांत हो गया और मेरे निप्पल को धीरे धीरे चूसने लगा.

    करीब दस मिनट बाद उसने मेरी पूरी साड़ी उतार दी और खुद के भी सारे कपड़े उतार दिए सिवाये अपने अंडरवियर के. मैं भी सिर्फ़ पेंटी में थी.

    फिर वो बाजू हो गया और अपना अंडरवियर उतार कर उसने अपना लंड बाहर निकाला.

    अब वो वापस वो मेरे सीने से चिपक गया. इस वक्त उसने अपना लंड मेरे मुँह के पास रख दिया था. उसने अपने खड़े लंड पर कंडोम चढ़ाया और फिर मुझे लंड चूसने को कहा.

    लेकिन मैंने मना कर दिया. मैंने उससे कहा- मैं ये नहीं करूँगी लेकिन इसके बदले में यदि तुम कुछ और करने को कहोगे तो वो मैं कर दूँगी. उसने झट से कहा- तो ठीक है आप वादा करो कि जब भी मेरा दिल होगा, मैं आपके साथ लेट सकता हूँ. मैंने हंस कर हां कर दी और उससे कहा कि जब मेरे पति यहाँ रहेंगे, तब भी वो मेरे साथ बिस्तर शेयर कर सकता है. मैं उस वक्त भी मैनेज कर लूँगी.

    अब उसने मेरी पेंटी उतार दी और मेरे ऊपर लेट कर उसने अपना खड़ा लंड मेरी चुत के छेद में ज़ोर से घुसा दिया. चूंकि मैं इस वक्त गरम हुई पड़ी थी और मेरी चुत भी अपनी छोड़ने के कारण चिकनी हुई पड़ी थी. इसलिए उसका लिंग भी जल्दी अन्दर चला गया.

    अब तक मैं लंड घुसने से पहले ही उसके निप्पल चूसने की वजह से दो बार पानी छोड़ चुकी थी.

    जब उसने लंड पेला तो मुझे दर्द तो हुआ लेकिन बहुत अच्छा भी लगा क्योंकि मेरे पति कभी ऐसा नहीं करते थे. फिर उसने धक्के देना शुरू कर दिया. उसका लंड ज़ोर ज़ोर से मेरी प्यासी चुत में अन्दर बाहर होने लगा. काफी देर तक वो मुझे चोदता रहा, मैं थक गई थी. लेकिन वो उसी स्पीड से चोद रहा था.

    उसके धक्के से मेरी सारी बॉडी हिल रही थी और मेरी चूचियां तो उछल उछल कर उसे और तेज़ चोदने के लिए कह रही थीं. कुछ देर के बाद वो थोड़ा तेज स्वर में चीखते हुए चुदाई करने लगा, मैं जान गई कि उसका पानी निकलने को हो गया. तभी वो झड़ गया और मेरे ऊपर लेट कर मुझे अपने बांहों पकड़ कर शांत हो गया.

    मुझे अपने बांहों में पकड़ कर अभी भी वो मुझे किस कर रहा था. मुझे लगा कि ये इतना थकने बाद वो सो जाएगा, लेकिन वो तो मेरे ऊपर इतना फिदा था कि एक मिनट के लिए भी मुझे अपने दूर नहीं करना चाहता था. मैं भी वैसे ही उसकी बांहों में पड़ी रही और मैं भी उसके गाल पर और उसके बदन पर किस करने लगी.

    उस रात उसने मुझे 4 बार चोदा… या यूं कहो कि हम दोनों ने 4 बार सेक्स किया और पति पत्नी की तरह चुदाई का मजा उठाया.

    उस रात के बाद हम आल्टरनेट दिन कभी उसके घर में, तो कभी मेरे घर में मिलने लगे. फिर एक महीने बाद मैं उसके घर अपना डेली रुटीन का सामान और कपड़े लेकर चली गई और उसके ही घर में उसकी वाइफ की तरह लिव-इन रिलेशनशिप जैसे रहने लगी.

    आपके मन में ये सवाल आया होगा न कि मेरे पति आने के बाद क्या हुआ?

    तो मैंने मेरे पति आने के बाद कभी मुझे स्कूल ट्रिप के बाहर जाना है, तो कभी मुझे मायके जाना है, तो कभी हम सहेलियां 2-3 दिन के लिए बाहर घूमने जा रहे हैं… कह कर और ऐसे ही बहुत से बहाने बना कर मनीष से मिलती रही और उसके साथ सेक्स करती रही.

    आज मैं मेरी लाइफ बहुत एंजाय कर रही हूँ. मैं मेरे पति के साथ भी सेक्स का मज़ा लेती हूँ. मेरे पति को आज तक ये पता नहीं चला कि मैं किसी और के साथ भी बेड शेयर करती हूँ.

    उधर मनीष भी बहुत खुश है कि मैं आज भी उसकी वाइफ के जैसे उसकी हर माँग पूरी करती हूँ.

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    मैं सोच भी नहीं सकती थी कि सीधे से दिखने वाले मेरे ससुरजी इतने ठर्की और इतने शानदार मर्द निकलेंगे, और जो सुख मुझे मेरे पतिदेव न दे पाये वो सब सुख मुझे मेरे ससुरजी उर्फ पिताजी देंगे।

    दोस्तो, मेरा नाम माया है, मैं अपने माँ बाप की एकलौती संतान हूँ, इसलिए बचपन से बहुत लाड़ली रही हूँ। ज़्यादा प्यार भी बच्चों को बिगाड़ देता है और मैं भी कोई अपवाद नहीं हूँ।

    माँ बाप का बेपनाह प्यार और हर बात की आज़ादी का असर यह हुआ कि मैं 10वीं क्लास में ही किसी को अपना दिल दे बैठी। नासमझ, नादान उम्र का वो भी फायदा उठा गया। जिस उम्र में बहुत सी लड़कियों को माहवारी शुरू नहीं होती, उस उम्र में मैंने अपना कौमार्य लुटवा दिया, वो भी उस बेवफा के लिए जो सिर्फ 2 बार सेक्स करके मुझे छोड़ गया, यह कह कर कि तुम्हारे बदन में वो मज़ा नहीं है। मज़ा क्यों नहीं, क्योंकि उसे बड़े बड़े मम्मे और मोटी गांड चाहिए थे, मोटी मोटी जांघें चाहिए थी, मगर मैं तो छोटी सी थी, और पतली भी थी, मेरे पास सब मेरी उम्र और बदन के हिसाब से था, सो मैं जैसी थी, वैसी थी। उसने तो मुझे साफ तौर पे छोड़ दिया, उसके चले जाने के बाद मैं बहुत रोई।

    मगर एक बार जब लंड खा लिया तो फिर चैन कहाँ पड़ता है, 10+1 में दाखिल होते ही मेरे तीन बॉय फ्रेंड थे और तीनों के तीनों एक नंबर के चोदू… 11वीं 12वीं बड़ी मज़े की कटी, हर हफ्ते में 2-3 बार चुदाई होनी पक्की थी, 2 बार अबोर्शन भी करवाना पड़ा। चलो किसी को पता नहीं चला।

    मगर कच्ची उम्र में चूत फड़वाना मुझे पूरी तरह से बिगाड़ गया, मैं सिर्फ डेट के वो 4-5 दिन ही बड़ी मुश्किल से गुजारती थी। फिर बी ए की। मगर मेरी चूत कभी लंड से खाली न रही, सारे कॉलेज में मैं मशहूर थी। मुझे पता था, कॉलेज के प्रोफेसर तक मुझपे लाइन मारते थे, कैंटीन बॉय, चौकीदार सब मेरे हुस्न के दीवाने थे। मुझे भी पता था, के ये ज़ालिम मर्द सिर्फ मेरे चूचे, चूतड़, चूत और चेहरे के ही दीवाने हैं, सब के सब सिर्फ मुझे चोदने तक ही मतलब रखते हैं, मेरे दिल से किसी को कोई प्यार नहीं है इसलिए मैं भी हंस बोल कर अपने काम सब से निकलवा लेती थी।

    मगर चुदाई सिर्फ अपने बॉय फ़्रेंड्स से ही करवाती थी। मगर फिर भी मेरी शौहरत बहुत दूर दूर तक फैल गई थी। इसीलिए जब घर वालों ने मेरे रिश्ते की खोज शुरू की तो लोकल रिश्ते 3-4 टूट गए। तो घर वालों ने बाहर का लड़का ढूंढा। रिटाइर्ड आर्मी अफसर का लड़का, कनाडा में जॉब करता था, बड़े धूम धाम से शादी हुई, शादी में मेरे तीनों बॉय फ़्रेंड्स भी आए हुये थे।

    दुल्हन का लिबास पहने मैं भी सोच रही थी कि ये कमीने भी सोच रहे होंगे कि साली कैसे सती सावित्री बनी बैठी है और जब हमारी माशूक थी तो कैसे उछल उछल कर चुदवाती थी।

    खैर शादी हुई, सुहागरात भी हुई, जानबूझ कर मैंने बहुत दर्द होने का नाटक किया, बहुत रोई, जैसे मेरा तो रेप ही हो गया हो। घर वाला पूरा खुश कि बड़ी सीलबंद चीज़ मिली।

    शादी के बाद हनीमून पर गए, वहाँ पर भी बस चुदाई ही चुदाई चली, दिन रात जब भी मौका मिलता, राहुल ने मुझे खूब पेला मगर कुछ बातें मुझे ठीक नहीं लगी पहली यह कि राहुल का लंड छोटा था, सिर्फ 4 या साढ़े 4 इंच का, जबकि शादी से पहले तो मैं 6-7 इंच के लंड ले चुकी थी।

    दूसरी वो बहुत जल्दी झड़ जाता था, मुश्किल 5-7 मिनट ही लगाता था, जबकि मुझे तो यह आदत थी कि जितनी मर्ज़ी देर पेलो। और मेरे बॉय फ़्रेंड्स भी आधा आधा घंटा अपने पत्थर जैसे सख्त लंड मेरी चूत में डाले रहते थे।

    मगर फिर भी मैंने राहुल को हौंसला दिया और उसे धीरे धीरे अपना समय बढ़ाने के लिए कहा। वो भी धीरे धीरे टाइम बढ़ाता जा रहा था, अब तो वो भी 10-12 मिनट तक चुदाई करता था। मैं इसमें भी खुश थी कि चलो अब तो इसके साथ ही रहना है, अब कोई और पंगा नहीं लेना किसी के साथ, सिर्फ और सिर्फ अपने पति के साथ ही अपनी ज़िंदगी गुज़ारूंगी।

    मगर मेरी खुशी ज़्यादा दिनों की नहीं थी, राहुल को वापिस कनाडा जाना था, 2 महीने की छुट्टी पे आए थे। फिर मेरे कनाडा जाने के कागज पत्र तैयार करने में कई दिन बीत गए और फिर एक दिन राहुल जहाज़ चढ़ कर कनाडा चले गए, मैं अकेली रह गई।

    पहले तो बहुत रोई, कितने दिन रोती ही रही। घर में मैं और मेरे ससुर सिर्फ दो ही जन थे, राहुल की बड़ी बहन भी कुछ दिन बाद वापिस लौट गई थी। इतना बड़ा घर बिल्कुल खाली! मगर मैंने खुद को धीरे धीरे संभाला, अपना ध्यान घर के काम पे लगाया, काम वाली आकर सब काम कर जाती थी, मेरे लिए खाली समय काटना बहुत मुश्किल हो जाता।

    मायका भी नजदीक नहीं था, हालांकि फोन पे बात होती रहती थी। पिताजी भी ज़्यादातर अपने रूम में या, अपने दोस्तों के साथ घूमने फिरने में रहते थे। मुझे भी कहा था कि आस पास पड़ोस में सहेलियाँ बना लो, मगर मुझे सहेलियों से जायदा दोस्त पसंद थे, इसलिए किसी के साथ मैं ज़्यादा घुल मिल नहीं सकी।

    सारा दिन घर में बोर होते रहो, टीवी भी कितना देख लोगे।

    ऐसे ही एक दिन दोपहर को मैं खिड़की के पास खड़ी थी, बाहर देख रही थी, तभी मेरी निगाह पड़ोस वाले घर में गई, मुझे लगा वहाँ कुछ हो रहा है। थोड़ा ध्यान से देखा तो थोड़ी देर बाद एक मर्द बिलकुल नंगा खड़ा, ये लंबा मोटा लंड, और तभी एक औरत आई, पड़ोसी की बहू थी, उसने वो लंड पकड़ा और अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।

    2 मिनट बाद वो शायद बेड पे लेट गए, मुझे नहीं दिख रहे थे, मैं कितनी देर वहीं खड़ी उनका इंतज़ार करती रही कि शायद फिर मुझे दिखे मगर आधा घंटा बीत जाने के बाद भी वो नहीं दिखे।

    मैं वापिस आ कर बेड पे लेट गई, मेरे दिमाग में रह रह कर उस मर्द का वो शानदार लंड घूम रहा था, मेरा दिल कर रहा था कि उठ कर उसके घर जाऊँ, घंटी बजाऊँ, जब वो बाहर आए तो उससे पूछूँ- क्या मैं आपका लंड ले सकती हूँ? मगर यह तो संभव ही नहीं था।

    मेरे मन की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, मैं उठ कर ड्रेसिंग टेबल के सामने जा बैठी, पहले अपने चेहरे पे पूरा मेकअप किया, उसके बाद साड़ी उतारी।

    शीशे में खुद को ब्लाउज़ और पेटीकोट में देखा… कितना शानदार फिगर है मेरा, गोल उठे हुये मम्मे, सपाट पेट, मोटे गोल चूतड़, भरी हुई चिकनी जांघें, गोरा रंग, सुंदर चेहरा… हर चीज़ मेरी बहुत सुंदर, फिर भी मैं प्यासी क्यों?

    मैंने एक एक करके अपने ब्लाउज़ के हुक खोले और ब्लाउज़ उतार दिया, फिर पेटीकोट की हुक खोल कर उसे भी गिरा दिया। गोरे बदन पर पिंक ब्रा पेंटी कितनी जंच रही थी। कितनी सेक्सी हूँ मैं… मैंने सोचा।

    फिर मैंने अपना ब्रा और पेंटी भी उतार दिया, गोरा चिकना सुडौल बदन… किसी मर्द का लंड अकड़ जाए इसे देख कर, फिर मेरे पास लंड क्यों नहीं, मैं लंड के लिए भूखी क्यों हूँ। क्या इस खूबसूरत बदन के साथ मुझे किसी चीज़ की कमी है, नहीं।

    मगर दूसरे ही पल मन में ख्याल आया कि नहीं, सिर्फ अपना पति और कोई नहीं! यही सोच कर मैं बेड पर लेट गई और अपने हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी। कितनी देर तड़पती रही और मसलती रही और आखिर मेरा पानी छूट गया। स्खलित होकर भी मैं कितनी देर बेड पे नंगी ही लेटी रही।

    उस रात को भी मैंने हाथ से किया मगर हाथ से करने से भी मुझे मज़ा नहीं आ रहा था, स्खलित हो जाती थी, मगर संतुष्ट नहीं हो पाती थी।

    फिर मैंने ऐसे चीज़ें ढूंढनी शुरू की जो लंड तरह अपनी चूत में ले सकती थी जैसे खीरा, मूली, गाजर, बेलन, बैंगन, पेन, डंडा और न जाने क्या क्या। लंड की कमी तो पूरी हो गई, मगर जो चूमने चाटने की तमन्ना थी, वो कहाँ से पूरी करती?

    दिन ब दिन मेरी प्यास बढ़ती ही जा रही थी।

    ऐसे में ही एक दिन एक अजीब वाकया हुआ, मैं शाम को पिताजी को चाय देने गई, घर का माहौल शुरू से ही खुला था, तो घर में जीन्स टी शर्ट, पेंट, कैप्री आदि पहनने की कोई दिक्कत नहीं थी। मेरे जो जीन्स के साथ टी शर्ट पहनी थी, उसका गला थोड़ा गहरा था। मगर मैं तो अपने ही कमरे में रहती थी, पिताजी मेरे कमरे में आते नहीं थे, सो अगर नंगी भी रहती तो कोई डर नहीं था।

    मगर जब मैं पिताजी के रूम में गई तो उस वक़्त पिताजी सो रहे थे। मैंने देखा, पाजामे में से उनका तना हुआ लंड ऊपर उठा हुआ था। मैंने अंदाज़ा लगाया, कम से कम 7 या 8 इंच का तो होगा ही और मोटा भी लग रहा था।

    यह विचार मन में आते ही चूत में एक बार खुजली सी हुई, फिर सोचा- हट पागल, ये तो ससुरजी हैं, इनके साथ कैसे? मैंने चाय रखी तो पिताजी की आँख खुल गई और जब मैं झुकी हुई थी तो उनकी नज़र सीधे मेरी टी शर्ट के गले के अंदर, मेरे मम्मों पर पड़ी। सिर्फ 2 सेकंड के लिए गौर से देख कर उन्होंने अपनी निगाह हटा ली, मैं भी वापिस आ गई।

    जब सेक्स की इच्छा हो तो सपने भी सेक्स की ही आते हैं, उसी रात मुझे सपना आया कि मैं पिताजी का लंड चूस रही हूँ। मेरी नींद खुल गई। मैंने हाथ लगा कर देखा, मेरी चूत पानी से लबालब हो रही थी।

    मैं उठी, अपने सारे कपड़े उतारे, बिल्कुल नंगी होकर मैं पिताजी के कमरे के बाहर जा खड़ी हुई। उनके कमरे का दरवाजा खुला था, मैंने देखा वो अंदर सो रहे थे। मैंने दरवाजे के पास से अपना थोड़ा सा सर आगे किया और उनको देख कर अपनी चूत में उंगली करने लगी। मगर जब मेरा जोश बढ़ा तो मैं धीरे धीरे पूरी तरह से उनके दरवाजे के सामने ही जाकर खड़ी हो गई और अपनी चूत में उंगली करने लगी।

    बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी आवाज़ को दबा कर रखा और वहीं खड़े खड़े हाथ से करते करते स्खलित हो गई। मेरा बहुत मन था कि पिताजी उठ कर आते और मुझे पकड़ लें, और मैं उनका लंड चूस लूँ, और वो मुझे दबा कर पेलें। मगर ऐसे कुछ नहीं हुआ।

    अगली रात मैं फिर उनके कमरे के सामने थी, आज मेरे पास एक बैंगन था, जिसे मैं पिताजी का लंड समझ कर अपनी चूत में ले रही थी, आज मैं थोड़ी और दिलेर हो गई, आज तो मैं उनके कमरे के अंदर चली गई, नीचे कार्पेट पर लेटी, मैं अपनी चूत में बैंगन फेर रही थी कि तभी अचानक बत्ती जल गई।

    मैंने चौंक कर सामने देखा, पिताजी बेड पर अधलेटे से लाइट जला कर मेरी तरफ देख रहे थे। मैं तो उठ कर भागी, वो बैंगन भी वहीं छोड़ आई। सच में बहुत शर्म आई मुझे, यह मैंने क्या कर दिया? पिताजी क्या सोचेंगे मेरे बारे में?

    अगले दिन शर्म के मारे मैं पिताजी के सामने ही नहीं जा पा रही थी। उनकी चाय, नाश्ता मैंने काम वाली के हाथ ही भिजवा दिया। मगर दोपहर खाना तो मुझे ही खिलाना था।

    जब मैंने उन्हें खाना परोसा तो वो बोले- बेटा, मैंने राहुल से बात की है, वो जल्द ही तुम्हें ले जाएगा, तब तक थोड़ा सब्र रखो। उनकी इस छोटी सी बात में ही बहुत कुछ था।

    मगर चूत में लगी आग कहाँ बुझती है, रात को मैं फिर बिलकुल नंगी हो कर ड्राइंग रूम में चली गई और सोफ़े पर बैठी, अपनी चूत में मूली ले रही थी।

    अब ड्राइंग रूम पिताजी के रूम से थोड़ा दूर था, तो मेरे मुंह से हल्की हल्की आवाज़ें, सिसकारियाँ भी निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मगर तभी ड्राइंग रूम की लाइट जल उठी, देखा सामने पिताजी खड़े थे- बेटा, ये क्या कर रही हो तुम, क्या इतनी बेबस हो चुकी हो? मैं तो टूट ही पड़ी, नीचे फर्श पर ही गिर पड़ी, रो दी मैं… फूट फूट कर रोई- मुझसे नहीं होता पापा, मैंने बहुत कोशिश की, मुझसे नहीं होता, मैं मर जाऊँगी। कह कर मैं रो पड़ी।

    पिताजी मेरे पास आए, उन्होंने बड़े प्यार से मेरे बदन पे एक शाल दी, मैं उनके कंधे से लग कर रो रही थी, और वो मुझे सांत्वना दे रहे थे- कोई बात नहीं मेरा बच्चा, कभी कभी हो जाता है जब इंसान अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाता, तुम घबराओ मत, मैं हूँ न, सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने तो मुझे ढांडस बंधवाया, मगर मुझे लगा शायद वो कुछ और समझाना चाहते हैं मुझे! यह हिंदी चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

    पता नहीं क्या आया मेरे मन में, मैंने पाजामे के ऊपर से उनका लंड पकड़ लिया और बोली- पापा मुझे ये चाहिए। वो तो एकदम से चौंक गए- माया बेटा, ये क्या किया तुमने? मैंने भी उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया और काम में अंधी होकर मैंने पापा के पाजामे का नाड़ा खींच दिया, इससे पहले वो संभलते, उनका काला, मोटा और लंबा लंड मेरे सामने था। पाजामे के नीचे उन्होने चड्डी पहनी ही नहीं थी।

    वो बुत बन कर खड़े रहे और मैं फर्श पर ही बैठ गई, उनके लंड को हाथ में पकड़ा और सीधा अपने मुंह में ले लिया- आह, क्या जाना पहचाना स्वाद आया मुंह में!

    पापा ने पीछे हट कर अपना लंड मेरे मुंह से निकालने की कोशिश की मगर मैंने तो मजबूती से अपने हाथ में पकड़ रखा था। ज़ोर से पकड़ कर ज़ोर से चूसा और देखो कैप्टन साहब का लंड उठ खड़ा हुआ।

    मैंने अपनी शाल उतार फेंकी और ससुरजी को धकेलते हुये सोफ़े पे ले गई, उन्हें सोफ़े पे गिरा के अपना मुंह उनकी गोद में घुसा दिया और उनका लंड चूसने लगी।

    उन्होंने भी मेरे सर को पकड़ लिया, मैंने अब हाथ से उनका लंड छोड़ दिया, सिर्फ मुंह से ही चूस रही थी, अपने दोनों हाथों से मैंने उनकी कमीज़ के सारे बटन खोल दिये, बालों से भरे सीने पर अपने हाथ फिराये, उनके चूचुक अपनी उंगलियों से मसले, उनके मुंह से भी ‘आह… उफ़्फ़… इस्स…’ जैसी बहुत से भावनात्मक आवाज़ें निकली।

    मतलब वो भी पूरे गर्म हो चुके थे, लंड तो वैसे ही तन कर अपना पूरा आकार ले चुका था, कोई 7 इंच का होगा, मोटा मूसल… मैं उठ कर उनकी गोद में बैठ गई, उनका लंड अपनी चूत पे सेट किया और थोड़ा सा अंदर लिया।

    उन्होंने अपनी कमीज़ उतार फेंकी और मुझे उसी हालत में अपनी गोद में उठा लिया- रुक साली मादरचोद, बहुत आग लगी है तेरी चूत में अभी बुझाता हूँ। कह कर उन्होंने मुझे नीचे कालीन पर ही लेटा दिया और एक ही धक्के में अपना पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया।

    ‘आह…’ एक लंबी आह निकली मेरे मुंह से, वो थोड़ा पीछे को हटे और फिर एक और जोरदार धक्के से उन्होंने अपना पूरा लंड फिर से मेरी चूत की आखरी दीवार से टकराया। ‘कम ऑन पापा, फक मी… फक यूअर डोटर! मैंने भी कहा।

    पापा ने मेरे दोनों बूब्स पकड़े और नींबू की तरह निचोड़ दिये, मेरे मुंह से दर्द से हल्की चीख निकल गई- आह पापा… धीरे, दर्द होता है। वो बोले- अब धीरे नहीं, तूने सोये हुये शेर को जगा दिया है, आज तो तेरी माँ न चोद दी, तो कहना! और उसके बाद पापा ने अपनी जवानी का पूरा जोश दिखाया, मैं तो सोच सोच कि हैरान थी कि 60 साल में पापा में इतना जोश, इतनी जान?

    कितनी देर वो मुझे नीचे लेटाए चोदते रहे, फिर बोले- चल घोड़ी बन! मैं झट से उठ कर घोड़ी बन गई, फिर उन्होंने मेरे पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया और लगे पेलने! मैंने कहा- पापा, मज़ा आ गया, इतना मज़ा तो मुझे राहुल ने नहीं दिया, आप सच में उसके भी बाप हो। वो बोले- अरे तेरी आँख तो मैं पहले ही पहचान गया था, मगर मैंने यह नहीं सोचा था कि तू पके आम की तरह मेरी झोली में गिरेगी। मैं वैसे तेरी माँ पर फिदा हूँ, वो भी बहुत सुंदर औरत है, मगर तू तो बहुत ही बेसबरी निकली। एक महीना भी मुश्किल से काट पाई। मैंने भी अपनी कमर आगे पीछे हिलाते हुये कहा- पापा, एक महीना नहीं, एक दिन नहीं काट पाई, मैं तो जिस दिन राहुल गए थे, उस दिन भी हाथ से किया था, और रोज़ रात को हाथ करती थी। पापा बोले- अब तुझे हाथ से करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, अब जब भी ज़रूरत हो मेरे पास आ जाया कर!

    और वो लगे पेलने… पेलते पेलते मुझे वैसे ही लेटा दिया और मेरे ऊपर लेट कर पीछे से मेरी चूत मार रहे थे और मेरे दोनों बूब्स अपने हाथों में पकड़ के दबा रहे थे।

    थोड़ी देर बाद मैंने कहा- पापा मेरा होने वाला है, मुझे सीधा होने दो। पापा पीछे हटे, मैं सीधी हो कर लेटी और पापा फिर से मेरे ऊपर आ गए, मैंने अपने ससुर को अपने पति की तरह बाहों में भर लिया और अपनी टाँगें उनकी कमर पर लपेट ली, और चिपक गई उनके साथ!

    वो धाड़ धाड़ मेरे घस्से मार रहे थे, मैं नीचे से उचक रही थी, जब मैं स्खलित हुई तो मैंने पापा के होंठो से अपने होंठ लगा दिये- पापा मेरे बूब्स दबाओ! और ज़ोर से दबाओ… और मेरे होंठ चूस लो, मेरी जीभ खा लो, और ज़ोर से चोदो, आह मारो, और मारो! कहते कहते मैं झड़ गई और पापा से ऐसे चिपक गई जैसे गोंद लगा कर चिपका दिया हो किसी ने!

    जब मैं शांत हुई तो आराम से लेट गई, अब पापा की बारी थी, मगर वो तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे। मैंने पापा के सीने पर हाथ फेर कर कहा- पापा आप तो बहुत जवान मर्द हो, आपका तो हो ही नहीं रहा? वो बोले- अरे बेटा, देसी जड़ी बूटी खाता हूँ, इतनी जल्दी पानी नहीं गिरने दूँगा।

    मैंने कहा- तो कोई बात नहीं जितनी देर आप कर सकते हो कर लो, मैं सारी रात ये कर सकती हूँ। वो बोले- और मैं सारी रात ये कर सकता हूँ।

    उसके बाद अगले 15 मिनट मेरी और जोरदार चुदाई हुई, और तब जा कर मेरे ससुरजी का माल झड़ा। कोई आधे घंटे से भी ज़्यादा उन्होंने मुझे चोदा… चूत की वो तसल्ली हुई, जिसे मैं कब से ढूंढ रही थी, उनके वीर्य से मेरी चूत भर गई। मैं निश्चिंत, संतुष्ट लेटी ऊपर छत को देख रही थी और वैसे लेटी ही सो गई।

    करीब सुबह चार बजे मुझे लगा फिर से जैसे ससुर जी ने मुझे सीधा किया, और फिर से चोदा मैंने तो आँखें खोल कर भी नहीं देखा। इस बार तो शायद 40-50 मिनट लगा दिये उन्होंने! फिर मुझे गोद में उठा कर मेरे बेड पर लेटा गए।

    सुबह जब 9 बजे के भी बाद मैं उठी, मेरे नाइट ड्रेस पहनी हुई थी। मैं उठ कर बाथरूम में गई, नहाते हुये शीशे में देखा, मेरे दोनों बूब्स पर यहाँ वहाँ उँगलियों के दांत काटने के निशान थे। कमर और पेट पर भी!

    ससुर जी अपने रूम में थे, काम वाली ने चाय बना दी थी, मैं तैयार हो कर चाय लेकर खुद ससुर जी के कमरे में गई मगर उन्होंने ऐसे दिखाया जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

    अगले महीने राहुल वापिस आ रहे हैं, मुझे हमेशा के लिए अपने साथ कनाडा ले जाने! अब मैं सोच रही हूँ कि जाऊँ या न जाऊँ? अरे सच एक बात और… आई एम प्रेग्नेंट। इसमें कोई शक नहीं कि यह बच्चा पापा की ही है, मगर क्या राहुल इसे कबूल करेंगे।

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    नमस्ते दोस्तो, मैं आप सबका दोस्त अभिषेक गुप्ता, आपकी सेवा में हाजिर हूँ. आज मैं एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ. मैं बलिया यूपी से हूँ लेकिन मैं पटना में रहता हूं. मेरा लंड 7 इंच का है और मैं अंटियों भाभियों और प्यारी चुदक्कड़ लड़कियों की प्यास बुझाता हूँ यानि कॉलब्वॉय हूँ.

    मैं अपने दोस्त की गर्लफ्रेंड को चोदने की दास्तान सुनाने जा रहा हूं. उसका नाम रानी है.. उसका फिगर बहुत सेक्सी है. उसको देखने के बाद किसी का भी मन उसको चोदने का करेगा. बड़े बड़े उभरे हुए चूतड़, पतली कमर, बड़ी बड़ी चूचियां, मस्त 34-28-36 का फिगर. उसके चलने पर कमाल की गांड दिखती है. मन करता है कि साली को यहीं पटक कर चोद दूँ.

    मेरे दोस्त ने उसको पटाया था, ये उसने मुझे बाद में बताया कि ये है तो उसकी जुगाड़, लेकिन मैं इसकी चूत का मजा तेरे को भी दिला दूंगा. मैंने मालूम किया कि वह लड़की मेरे गाँव की है. एक बार वो उसको मिलाने हमारे गांव की मेन रोड पर आया. उसने मुझको फोन किया और बताया कि वह मुझे अपनी गर्लफ्रेंड से मिलवाना चाहता है.

    उसने मुझे बुलाया और अपनी गर्लफ्रेंड से मिलवा कर मुझसे आँख मारते हुए कहा कि तुम इधर खड़े हो जाओ, कोई आए तो बता देना.

    मैं उसकी मंशा समझ गया कि ये अपनी गर्लफ्रेंड से मजा लेना चाहता है. मैंने भी उन दोनों से कहा कि मुझे भी कुछ परसाद खिला देना. रानी खिलखिला कर बोली- चिंता मत करो, मुझे तुम्हारा भी ख्याल रहेगा.

    मुझे आज पूरी उम्मीद हो गई थी कि रानी की चुत में मेरा लंड भी घुस जाएगा.

    वे दोनों एक तरफ को होकर मजा लेने लगे. मैं मेन रोड पर उसकी निगरानी करते हुए देखरेख करने लगा. मुझे उन दोनों की हरकतें साफ़ दिख रही थीं, जिससे मेरा लंड तुनकी मार रहा था.

    वह अपनी गर्लफ्रेंड को किस करने लगा. वो उसके होंठों को ऐसे चूसे जा रहा था, जैसे कि उसे खा जाएगा. उसका हाथ उसकी चूचियों पर था और वो उनको जोर से मींजने लगा.

    तभी मैंने देखा कि कोई आ रहा था, मेरे कहने पर वह अलग हो गया. वे दोनों एक दूसरे के विपरीत दिशा में जाने लगे. कुछ देर बाद वह आदमी चला गया तो उसने अपनी गर्लफ्रेंड को फिर से पकड़ लिया और उसे किस करने लगा, उसकी चूचियां दबाने लगा.

    फिर उसने अपनी गर्लफ्रेंड को एक घर के पीछे ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. वह पेंटी नहीं पहने हुई थी. दोस्त ने अपनी गर्लफ्रेंड की चुत पर हाथ लगाया, उसकी चुत का पानी उसके हाथ में लग गया. उसके बाद वह अपने लंड को निकाल कर उसके हाथ में दे दिया. वह लंड को ऊपर नीचे करने लगी.

    मेरा दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड के मम्मे दबा रहा था, साथ ही साथ उसके होंठों को भी जोर से चूस रहा था. फिर उसकी चुत पर लंड को रख कर जोर से धक्का दे दिया. उस लड़की की चुत में लंड पूरा घुस गया. वह तिलमिला उठी. कुछ पल दर्द का आलम रहा, फिर दोनों मजा लेने लगे.

    बस फिर क्या था मेरा दोस्त उस लड़की की चूत में जोर जोर से लंड अन्दर बाहर करने लगा. उस लड़की के मुँह से तेज स्वर में कामुक आवाजें निकलने लगीं. दोस्त ने उसे चुप कराया क्योंकि रास्ते पर लोग आ जा रहे थे. मेरे दोस्त ने अपनी गर्लफ्रेंड के होंठों पर होंठ रखे और झटके देने लगा. उन दोनों की चुदाई जोरों पर चल रही थी. करीब 15 मिनट चुदाई के बाद वह झड़ गया.

    मैं खड़ा लंड सहला रहा था. अब मेरी बारी आ गई थी. लेकिन उस लड़की ने मुझसे कहा कि तुम बाद में कभी चुदाई कर लेना. मैं जोर दे रहा था, लेकिन उसका कहना था कि उसको घर जाने में देरी हो गई थी, इस बार नहीं.. कल चुदाई कर लेना. मैंने उसकी चूचियों को दबाया और किस करने लगा.

    वह बोल रही थी- छोड़ दे यार प्लीज़, बाद में कर लेना. मैंने कहा- तुमने कहा था कि तुम मेरे लंड का भी ख्याल रखोगी. उसने मेरा लंड पकड़ कर दबाते हुए कहा- हां मुझे याद है मैं मना किधर कर रही हूँ. लेकिन अभी मुझे घर जाने में देर हो रही है.. प्लीज़ तुम कल मेरी मार लेना. मैं उसकी बात मान गया और कहा कि कल पक्का चुत मारूँगा.

    वह झट से मान गई. मैंने बस उसकी चुत को हाथ से रगड़ा और किस किया चूचिया चूसीं, फिर छोड़ दिया.

    वह घर चली गई, मैंने मुठ मार कर संतोष कर लिया. कुछ देर बाद मैं भी घर आ गया.

    अभी मेरा किसी की चुदाई करने का बहुत मन कर रहा था, लेकिन कोई ऐसा माल ही नहीं था, जिसकी चुदाई कर सकूँ. तभी मुझे अपनी चाची की याद आई. मैं उनको एक बार चोद चुका था.. लेकिन अब वह मुझे चोदने नहीं देती हैं. जब उनको चोदा था, उस समय चाचा व्यापार में लगे रहने के कारण चाची को चोद नहीं पाते थे. इसी लिए मैंने उस समय उनकी चुदाई की थी.

    आज मैं उनके रूम में गया, वह आँखें मूंदें हुए लेटी थीं. मैंने जाकर उनके होंठों पर किस करते हुए उनकी एक चूची को दबा दिया. उन्होंने झटके से आँख खोल कर मुझे देखा और धक्का दे दिया. वह गुस्सा हो गई थीं. मैं फिर भी उनके होंठों को चूसने लगा और चूचियां भी जोर जोर से मींजने लगा. उनके विरोध के बावजूद मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनके शरीर को अपने शरीर से दबाए रखा.

    चाची मुझे गालियां दिए जा रही थीं- हट हरामी.. साले छोड़ दे कमीने.

    मैंने उनको नहीं छोड़ा और चूमता ही रहा. मैं चाची की चूचियां भी मींजने लगा. कुछ ही देर में चाची भी मजा लेने लगीं. मैंने उनकी साड़ी को ऊपर किया, चुत पर हाथ लगाया. चाची की चुत गीली हो गई थी. उसमें से रस निकल रहा था.

    क्या खुशबू थी यार.. मैं तो मदहोश हो गया. मैंने चाची के पैर फैलाए और उनकी चुत पर होंठ रख दिए.

    अब मैं चाची की चुत को ऐसे चाट रहा था, जैसे गाय की चूत को सांड अपनी बड़ी बड़ी जीभ निकाल कर चाटता है.

    उनके मुँह से कामुक आवाजें निकल रही थीं- आह्ह आह्ह आह्ह आह्ह चोद दे.. मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है.. आह.. डाल दो अपना मोटा लंड अपनी चाची की चूत में..

    मैंने भी देरी नहीं करते हुए अपना लंड उनकी चुत पे लगा कर जोर से धक्का दे दिया. उनके मुँह से आवाज निकलने लगीं. उनकी चुत गीली होने के कारण पहले शॉट में ही आधे से अधिक लंड उनकी चुत में चला गया. फिर एक बमपिलाट धक्के से पूरा लंड उनकी बच्चेदानी तक चोट करता हुआ घुस गया. चाची की कराह निकल गई. इधर मुझे क्या मस्त मजा आ रहा था. ऐसा लग रहा था कि मैं जन्नत में सैर कर रहा होऊं. मैं सटासट धक्के लगाने लगा.

    चाची के मुँह से मादक कराहें निकल रही थीं- आह्ह आह्ह आह्ह आह्ह चोदो मुझे और जोर से चोदो.. फाड़ डालो मेरी चुत को.. ये साली चुत एक दिन मुझे बर्बाद कर देगी.. आह्ह आह्ह और जोर से चोद साले.. फाड़ डाल अपनी चाची की चुत को.. जोर से मेरे लाल चोदो मुझे चोदो आह्ह आह्ह वाह.. मेरे लाल.. मजा आ गया.. आह और जोर से बेटा और जोर आह्ह आह्ह..

    इसी तरह की घमासान चुदाई से 15 मिनट बीत गए. अब वह चरम सीमा पर आ गई थीं. तभी एकदम से अकड़कर चाची झड़ गईं. लेकिन मेरा अभी तक नहीं हुआ था. मैं चाची की चूत को हचक हचक कर चोदता रहा. चाची के झड़ने के दस मिनट बाद मैं भी उनकी चुत में ही झड़ गया.

    फिर मैं लंड निकाल कर चाची की चुत चाटने लगा. मुझे चुत चाटने में बहुत मजा आता है.

    चाची मुझसे नाराज हो गईं और बोलीं- अभिषेक ये अच्छा नहीं है.. मेरी चूत गंदी पड़ी है. मैंने उनसे कहा- मैं किसी को नहीं बताने वाला कि मैंने चाची की चुत चाटी है.

    कुछ देर बाद मैं चुदाई का मजा लेकर अपने रूम में चला गया. अपने दोस्त की गर्लफ्रेंड की चुदाई की कहानी अभी बाकी है. वो मैं अगली कहानी में बताऊंगा. इसके साथ ही एक कहानी और भी है. जिसमें मैं एक ऐसे लड़के से मिला, जहां मैं क्रिकेट खेलने जाता था. वह दूसरे गाँव का लड़का था, वह बहुत बड़ा चुदक्कड़ है.. उसको गांड मारना अच्छा लगता है. मैंने उसकी गांड की सील कैसे तोड़ी, ये भी मैं अगली कहानी में बताऊंगा.

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    दोस्तो, सब लंड और चुतों को मेरा प्रणाम. मेरा नाम शुभ प्रताप सिंह है, मै रोहतक (हरियाणा) से हूँ. मेरी उम्र 25 साल है, मैं दिखने में गोरा और शरीर से जिम जाने के कारण हट्टा कट्टा हूँ. मैं अभी बी.कॉम के सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा हूँ. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच है.. और मोटा होने के साथ ये बहुत मजबूत भी है, क्योंकि मैं रोज तेल से अपने लंड की मालिश करता हूँ.

    यह एक सच्ची घटना है, मेरा एक दोस्त है उसका नाम नवल है, वह मेरा सबसे पक्का दोस्त है. नवल मेरे साथ पढ़ता है. हम साथ मैं कॉलेज जाते और साथ में लंच करते थे. नवल के घर के लोगों से मेरा बहुत अच्छा व्यवहार है. उसके घर के सब लोग मुझे पसन्द करते थे. उसके घर मैं उसके पापा, मम्मी और उसकी बड़ी बहन नेहा रहते हैं.

    उसके पापा, मम्मी को मैं अंकल आंटी कहता था और उसकी बहन को दीदी कहता था क्योंकि नेहा मुझसे उम्र में बड़ी थी. उसकी बहन नेहा बड़ी गजब की माल थी. उसकी उम्र 24 साल थी. एकदम गोरा बदन, बड़े-बड़े मम्मे, ऊंची उठी हुई गांड बड़ी कातिल जवानी थी. उसका फिगर साइज़ 32-28-36 का रहा होगा. कोई भी उसे एक बार देख ले तो उसका लंड खड़ा न हो जाए.. तो मेरा नाम बदल देना.

    मेरा मन हमेशा उसे चोदने का करता था. मैं जब भी नवल के घर जाता तो नेहा दीदी को देखता रहता था. कभी-कभी वह भी मुझे खुद को देखते हुए देख लेती थी. वह भी जान गई थी कि मैं उसे देखता हूँ, पर उसने कभी कुछ नहीं कहा.

    मैं नवल के घर में एकदम पारिवारिक सदस्य की तरह आता जाता था तो मेरी नेहा दीदी से बातचीत होती ही रहती लेकिन इन दिनों मेरी उसके साथ बातें कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगीं और मैं उसके साथ कुछ खुलने लगा.

    अब मैं जब भी नवल के घर जाता, तो उसके साथ खुल कर बात करता, उससे हँसी मजाक करता और उसे छेड़ता रहता.

    एक दिन अचानक नवल के घर गाँव से उसके चाचा का फ़ोन आया. उन्होंने बताया कि उसके दादाजी को दिल का दौरा पड़ा है. बहुत सीरियस हालत है. जल्दी सब लोग गाँव आ जाओ.

    दादाजी शायद अपने अंतिम समय में थे. सब लोग गाँव जाने के लिए तैयार हो गए. पर नेहा दीदी नहीं गई क्योंकि उस समय उसके पेपर चल रहे थे. नेहा दीदी को घर पर अकेला भी नहीं छोड़ सकते थे. तो नवल के पापा ने मुझे फोन किया और मुझे सारी बात बताई. अंकल ने मुझे नेहा दीदी के साथ उनके घर पर रुकने को बोला.. तो मैंने हां कर दी.

    फिर सब लोग गाँव चल गए. कॉलेज से आकर दिन में मैं मेरे 2-3 जोड़ी कपड़े लेकर नवल के घर चला गया. घर पहुंच कर मैंने घंटी बजाई तो नेहा दीदी ने दरवाजा खोला. मैंने नेहा दीदी को देखा, सच में आज वो किसी हिरोइन से कम नहीं लग रही थी. उस समय उन्होंने रेड कलर का टॉप वह ब्लैक कलर की स्कर्ट पहन रखी थी. मन तो कर रहा था कि इसको यहीं पटक के चोद दूँ, पर ऐसा नहीं कर सकता था.

    दीदी ने मुझे अन्दर आने को बोला, मैं अन्दर आ गया. वह मुझे सोफे पर बिठा कर पानी लेने चली गई. मैं पीछे से नेहा दीदी की उछलती गांड को देख रहा था. दो मिनट बाद वह पानी लेके आई और साथ में कुछ नाश्ता भी लाई.

    पानी पीने के बाद हम दोनों नाश्ता करने लगे और फिर इधर उधर की बातचीत करते हुए हँसी मजाक करने लगे. यूं ही हँसी मजाक करते करते कब शाम हो गई, पता ही नहीं चला.

    फिर शाम होते ही दीदी ने मुझे कहा कि फ्रेश हो आओ, मैं भी फ्रेश होकर आती हूँ. फिर खाने की भी तैयारी करनी है. मैंने कहा- ठीक है दीदी.

    मैं तैयार होकर आ गया, नेहा दीदी खाना बनाने लगी थीं. मैं भी उनकी हेल्प कर रहा था. फिर खाना बनने के बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया. खाना के बाद नेहा दीदी ने बोला- चलो अब सो जाते हैं.

    मैं अलग रूम में सोने जाने लगा तो नेहा दीदी ने बोला- शुभ तुम भी यहीं सो जाओ. मैंने बोला- ठीक है. उसके साथ सोने की जानकार मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था. अब मैंने सोच लिया था कि आज तो कुछ भी हो जाए, नेहा दीदी को चोद कर ही रहूँगा.

    हम दोनों एक ही बेड पर लेट गए और लेटे लेटे बात करने लगे.

    मैंने नेहा दीदी को बोल दिया कि दीदी आज आप बहुत सेक्सी लग रही हो. यह सुनकर नेहा दीदी ने बहुत ही कामुक स्माइल दी और कहा- तुम भी स्मार्ट लग रहे हो. मैं कुछ खुश हो गया कि दीदी को भी कुछ कुछ हो रहा है.

    फिर नेहा ने मुझसे बोला- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है? मैंने बोला- दीदी नहीं है. नेहा दीदी ने मेरी बांह पर हाथ फेरते हुए कहा- क्यों नहीं है? तुम तो इतने हॉट लड़के हो.. इतनी मस्त बॉडी है.

    मैंने उनकी इस हाथ सहलाने वाली हरकत से गरम होते हुए बेझिझक कह दिया- आपकी जैसी सेक्सी लड़की मिली ही नहीं. दीदी आँख मारते हुए बोली- चल झूठे.. तू बहुत झूठ बोलता है. मैंने उनकी बॉडी को टच करते हुए कहा- नही यार दीदी.. सच में मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, जब आपकी जैसी इतनी सेक्सी लड़की मिलेगी तो जरूर बना लूँगा.

    कुछ तो शुरू हो ही गया था, शायद दीदी को मेरा हाथ फेरना भी गरम सा लगा और नेहा दीदी ने बहुत ही कामुक स्माइल देते हुए कहा कि तो अब बना लो.. अब तो सेक्सी लड़की तेरे सामने ही है.. तुझे किसने रोका है.

    अब मेरी समझ में सब आ गया. आज नेहा दीदी भी मुझसे चुदवाना चाहती है. मैंने नेहा दीदी को जल्दी से ‘आई लव यू..’ बोल दिया. नेहा दीदी ने भी मुझे ‘आई लव यू टू शुभ..’ बोल दिया. वो कहने लगी कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. पर इतने दिनों से बोलने का मौका ही नहीं मिला.

    बस फिर क्या था. मैंने तुरंत अपने होंठ नेहा दीदी के होंठों पर रख दिए और नेहा दीदी को किस करने लग गया. वह भी बड़ी गर्मजोशी से मेरा साथ दे रही थी. उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ ठेल दी. मैं उसकी जीभ पीने लगा और मैंने उसके गले को चाटना से काटना शुरू कर दिया.

    मैं जल्दी से उसके मम्मों को टॉप के ऊपर से ही दबाने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने उसका टॉप भी उतार दिया. दीदी ने ब्लैक कलर की ब्रा पहन रखी थी. उसकी गोरी चमड़ी पर गाली ब्रा बड़ी सेक्सी लग रही थी.

    मैंने उसकी ब्रा को जल्दी से उतारा और उसके दोनों मम्मों को ब्रा से आजाद कर दिया. मैंने देखा कि इतने गोल गोल, गोरे गोरे मम्मे हवा में उछलते हुए मुझसे शायद कह रहे थे कि थैंक्यू शुभ.. अब जल्दी से हमें चूस भी लो.

    मैंने झट से मुँह में दीदी के एक दूध को भर लिया और पीने लगा. कभी एक दूध चूसता तो कभी दूसरा दूध पीता. दीदी भी बड़ी मस्ती से अपने मम्मों को मुझसे चुसवाने का मजा लिए जा रही थी. दस मिनट तक दीदी के मम्मों को पीने के बाद मैंने नीचे से उनकी स्कर्ट को ऊपर कर दिया. मैं दीदी की मक्खन मलाई सी चिकनी जांघों को सहलाने लगा और चाटने लगा.

    उसके मुँह से मादक आवाजें निकल रही थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहा..

    कुछ ही मिनट बाद मैंने दीदी की स्कर्ट को उतार फेंका और वह अब मेरे सामने सिर्फ पेंटी में ही रह गयी थी. नेहा दीदी ने सफ़ेद कलर की पेंटी पहन रखी थी. उस समय वह गजब की माल लग रही थी. मैं उसकी चुत को पेंटी के ऊपर से ही चाटने लगा. नेहा दीदी जोर जोर से मदभरी आवाजें निकालने लगीं.

    उनकी पेंटी चूतरस और मेरे चाटने से एकदम भीग गई थी. इसलिए मैंने पेंटी को भी उनके शरीर से अलग कर दिया. दीदी मेरे सामने एकदम मादरजात नंगी पड़ी थी. उनकी चुत इतनी प्यारी लग रही थी. एकदम गुलाबी कलर की.. अनछुई चुत, जिस पर झांट का एक बाल भी नहीं था. शायद आज ही चूत को चमेली सा चिकना किया था.

    मैंने जल्दी से दीदी की चुत को मुँह में भरा और बेताबी से चुत चाटने लगा. दीदी ने भी अपनी चुत पसार दी थी, तो मैं अब बहुत जोर जोर से दीदी की चुत को चाट रहा था. नेहा दीदी भी बेड पर उछल उछल कर चुत चुसवा रही थी. जल्दी से उसकी चूत का पानी निकल गया.

    नेहा दीदी झड़ने के बाद कुछ पल के लिए एकदम निढाल हो गई. फिर थोड़ी देर बाद वह मेरे सारे कपड़े खोल कर मेरे लंड को मुँह में लेने लगी और लॉलीपॉप की तरह लंड चूसने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

    करीब 15 मिनट तक दीदी ने मेरे लंड को चूसने के बाद मेरा पानी भी निकलवा दिया. दीदी मेरे लंड के रस को पूरा का पूरा गटक गई.

    लंड झड़ जाने के बाद मैं सीधा होकर उसके बगल में लेट गया और उसे किस करने लगा.. उसके मम्मों को दबाने लगा. थोड़ी ही देर में, मैं फिर से गरम हो गया. अब मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में आ गया और अपना लंड को उसकी चुत पे रगड़ने लगा.

    वह भी चुदास से भड़क उठी थी तो सिसियाते हुए बोलने लगी- आह.. अब मत तड़पाओ.. जल्दी से अन्दर डाल दो. मैं लंड को दीदी की चुत में अन्दर डालने लगा. पर मोटे लंड होने के कारण चूत के अन्दर घुस नहीं पा रहा था.

    दीदी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया और बोली- रुको.. कुछ चिकना लगा देती हूँ. वो उठ कर क्रीम लेकर आई और मुझसे बोली- इसे लगाओ.

    मैंने थोड़ी क्रीम उसकी चुत पर और थोड़ी अपने मूसल लंड पर लगाई. अब मैंने लंड को उनकी चुत पर अच्छे से सैट किया और जोर से झटका दे मारा. इस बमपिलाट झटके से करीब मेरा आधा लंड चुत में घुस गया.

    लंड चूत में क्या घुसा, दीदी के मुँह से बहुत जोर की चीख निकल गयी. दीदी की आंखों से आंसू निकल गए. दीदी ने दर्द से तड़फते हुए मुझसे तुरंत लंड को बाहर निकालने को बोला- आह.. मर गई.. शुभ बहुत दर्द हो रहा है.. जल्दी इसे बाहर निकालो.

    पर मैंने उसकी बात नहीं मानी. लंड को उसी हालत में छोड़ कर, मैं उसे किस करने लगा. थोड़ी देर बाद जब दीदी नार्मल हुई. तो उसकी चीखें कम हो गईं. मैं समझ गया कि अब चूत और लंड में मुहब्बत हो गई है. ये जानकार मैंने एक और झटका जोर से लगा दिया. दीदी की फिर से जोर से चीख निकल गयी और वो फिर से दर्द से तड़पते हुए रोने लगी- आह.. साले मार दिया.. तूने मेरी चुत फाड़ दी.. भोसड़ी के जल्दी से लंड को बाहर निकाल.

    दीदी मुझे गाली बकने लगी थी. उसकी चुत से खून टपकने लगा था. बेड पर खून ही खून हो गया.

    पर इस बार मैंने झटके देना बंद नहीं किया और लगातार लंड से झटके देता रहा. थोड़ी देर बाद दीदी को मजा आने लगा और दीदी भी चूतड़ उठा उठा कर लंड लेने लग गई.

    मैंने लंड पलते हुए ही कहा- साली कुतिया, अब लंड का मजा लेने लगी उस वक्त तो मुझे भोसड़ी के बोल रही थी. दीदी मुझे मुक्का मारते हुए बोली- साले, मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा था. मैंने उसकी चूची को चूसते हुए कहा- साली रंडी, अब तेरी चूत का भोसड़ा न बनाया तो कहना.. ले मादरचोदी लंड का मजा ले. अब दीदी भी मुझे गाली बकते हुए चुदाई का मजा लेने लगी- भैन के लंड साले चोदने में दिमाग लगा.. आह बड़ा मजा आ रहा है.. और जोर से चोद कुत्ते.

    बस फिर क्या था.. धकापेल चुदाई चलने लगी और अंत में दीदी के दो बार झड़ने के बाद मैं भी उसकी चुत में ही झड़ गया.

    फिर दीदी बेड से उठ कर बुर पर लगे खून को साफ करने बाथरूम जाने लगी.. तो उससे चला नहीं जा रहा था. मैं उसको गोद में उठा कर बाथरूम ले गया. फिर मैंने बाथरूम में उसकी चुत को साफ किया.. और उसने मेरे लंड को साफ किया.

    उस रात मैंने दीदी को हर पोजीशन में तीन बार चोदा. दीदी 4 बार और मैं 3 बार झड़ चुका था. हम दोनों बहुत थक भी गए थे. अब दीदी की चुत फट कर सूज सी गई थी. हम दोनों ऐसे ही नंगे बेड पर सो गए.

    दीदी के घर वाले चार दिन बाद कोटा आए. तब तक हमने घर के हर कोने में चुदाई की. बाथरूम में, रसोई में, बेड पर.. खाते पीते.. हर समय खूब चुदाई की.

    आज भी हमें जैसे ही मौका मिलता है, तो हम चुदाई का मजा ले लेते हैं.

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    Still one of the best.

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    Usually physical or emotional discomfort during sex is something that we take as a signal to end the intercourse, or - even worse - something that we silently bear and wait until sex ends.

    What if this view could be different?

    What if we didn’t even need sex to be pleasurable and instead approached sex like a practice?

    Sex can be a practice of allowing.

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    Classic

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    Fun with friend 

    If you close off and feel abused you are letting yourself be pulled to their standpoint. If you see the humanness in this situation, see humanness in your reaction, recognise that that’s the reality in which this person is living AND see that you have a choice: to engage with this scenario or not …

    Then even a greater thing can happen. You can bring this person to shift that standpoint. The way to do it is not by giving them a lesson. The only way to do it is by staying in such honesty with yourself that those around you have only two choices: rise to your reality or be removed out of it completely.